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केरल में जीत के जश्न में मंदिर में तोड़फोड़, देवी-देवताओं का अपमान: CPM के 11 कार्यकर्ता गिरफ्तार

केरल के पलक्कड़ में मंदिर में हमला व तोड़फोड़ किए जाने के मामले में राज्य की सत्ताधारी वामपंथी पार्टी CPM के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। ये पार्टी की एरिया कमिटी के सदस्य हैं। सभी आरोपितों पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने और विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करने का आरोप लगाया गया है और पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है। हाल ही में केरल में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में CPM के नेतृत्व वाले LDF को बड़ी जीत मिली है।

इसके बाद से ही भाजपा और RSS के कार्यालयों में तोड़फोड़ शुरू कर दी गई। आरोप है कि CPM के गुंडों ने भाजपा कार्यकर्ताओं को भी निशाना बनाया। चूँकि भाजपा ने केरल में बेहतर प्रदर्शन किया है, इसीलिए ये नाराज हैं। चुनाव प्रचार के दौरान भी ऐसी कई घटनाएँ हुईं। भाजपा प्रवक्ता टॉम वडक्कन ने कहा है कि वामपंथियों से इसी प्रकार के ध्रुवीकरण वाले चुनावी अभियान की अपेक्षा भी थी, वो इसी तरह के काम कर सत्ता पाते हैं।

पलक्कड़ म्युनिसिपेलिटी में भाजपा की ही सत्ता थी और इस बार के चुनावों में भी पार्टी ने इसे बरक़रार रखा है, जिससे सीपीएम बौखलाई हुई है। पंडलम में भी भाजपा ने 33 में से 18 सीटें जीत कर काउंसिल बनाई है, जिससे LDF को धक्का लगा है। भाजपा ने 23 ग्राम पंचायतों में जीत दर्ज की है। गुरुवार (दिसंबर 17, 2020) को वामपंथी गुंडों ने कुरीपूजा में भाजपा नेता रतीश के घर पर हमला कर दिया। पलक्कड़ स्थित भगवान सुब्रह्मण्यम के मंदिर पर भी हमला कर तोड़फोड़ मचाई गई

इन सबके अलावा अल्लापुझा में RSS के दफ्तर पर भी CPM के गुंडों ने जबरदस्त हमला बोला। ‘रिपब्लिक टीवी’ ने CCTV फुटेज के हवाले से बताया है कि कथित रूप से CPM के गुंडों ने भाजपा नेता के घर से चलता हुआ ऑटो रिक्शा टकरा दिया। साथ ही संघ कार्यालय पर पेट्रोल बम फेंके गए, जिससे न सिर्फ कार्यालय बल्कि पूरी इमारत को नुकसान पहुँचा। स्थानीय जनता को पीने का स्वच्छ जल मुहैया कराने के लिए ‘सेवा भारती’ ने इस इमारत का निर्माण कराया था।

इस दौरान मंदिर को भी नहीं बख्शा गया। CPM के गुंडे सुब्रमण्यम मंदिर में जीत का जश्न मनाने पहुँच गए और इस दौरान वहाँ जम कर तोड़फोड़ की। हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित किया गया। साथ ही मंदिर में रखे रुपयों को भी चुरा लिया गया। प्रतिमाओं का आभूषण चुरा कर भागे गुंडों ने मंदिर की लाइट्स भी तोड़ डाली। अब इस मामले में विवाद होने के बाद पुलिस ने 11 CPM कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। जबकि, इस घटना में काफी सारे गुंडे शामिल थे।

त्रिवेंद्रम कॉरपोरेशन और पलक्कड़ म्युनिसिपलिटी में 13.28 फ़ीसदी वोट हासिल करने और केरल में बीजेपी को राजनीतिक ज़मीन बनाते देख सीपीआईएम के गुंडों ने ये हमले किए हैं। भाजपा ने कई ऐसी सीटों पर भी जीत हासिल की है जो कम्युनिस्ट पार्टी का गढ़ मानी जाती रही हैं, इसमें कन्नूर और कसरगोद शामिल हैं। इस तरह की तमाम बातों की वजह से कम्युनिस्ट पार्टी के खेमे में काफी हलचल है।   

बजरंग दल को बदनाम करने की कोशिशों पर VHP ने राहुल गाँधी को लताड़ा, WSJ के प्रोपेगेंडा को दे रहे थे हवा

वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट का हवाला देकर बजरंग दल को बदनाम करने का प्रयास करने के लिए विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने शुक्रवार (18 दिसंबर 2020) को कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की तीखी आलोचना की है। WSJ की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि आंतरिक मूल्यांकन में प्रतिबंध लगाने की वकालत के बावजूद फेसबुक ने हिंदू राष्ट्रवादी समूह पर कोई कार्रवाई नहीं की।

राहुल गाँधी ने WSJ की रिपोर्ट साझा करते हुए ट्वीट किया, “फेसबुक अमेरिका कहता है कि बजरंग दल की विषयवस्तु आपत्तिजनक है और उस पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए। फेसबुक इंडिया ने हमारे संसदीय पैनल से कहा कि बजरंग दल की विषयवस्तु आपत्तिजनक नहीं है। क्या फेसबुक भारत और भारतीय संसद से झूठ बोल रहा है?”   

राहुल गाँधी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

परिषद का राहुल गाँधी पर हमला, पूछे भारत विरोधी मत पर सवाल 

शुक्रवार को दिए गए बयान में विश्व हिन्दू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि राहुल गाँधी ने WSJ की रिपोर्ट में लगाए झूठे आरोपों का हवाला देकर अपनी सोच जगजाहिर कर दी है। विहिप के सचिव मिलिंद परंदे ने कहा कि राहुल गाँधी हमेशा से ही देश विरोधी तत्वों जैसे टुकड़े-टुकड़े गैंग, सीएए विरोधी उपद्रवी, पाकिस्तान और चीन समर्थक तत्वों के समर्थन में मुखर रहे हैं। 

विहिप ने दोहराया कि बजरंग दल जैसे राष्ट्रवादी संगठन राहुल गाँधी की आँखों का नासूर बन गए हैं। संगठन ने अपने बयान में कहा, “चीन से उनकी (राहुल गाँधी) घनिष्ठता और संबंध छिपे नहीं हैं। वे एक अमेरिकी समाचार पत्र पर भरोसा कर सकते हैं, लेकिन देशव्यापी युवा राष्ट्रवादी संगठन पर भरोसा नहीं कर सकते हैं।” 

विहिप सचिव मिलिंद परंदे ने कहा कि WSJ को अपनी झूठी रिपोर्टिंग और बजरंग दल को अपमानित करने की आड़ में भारत को निशाना बनाने के लिए माफ़ी माँगनी चाहिए। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स और विकीलीक्स की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पहले बजरंग दल पर पाबंदी लगाने का प्रयास किया था, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हुई थीं।  

विहिप का यह भी कहना था, “फेसबुक ने पहले ही स्पष्ट किया है कि फेसबुक के मंच पर बजरंग दल पर किसी भी तरह का प्रतिबंध लगाने का कोई कारण नहीं है। यह उनकी द्वेषपूर्ण हिन्दू विरोधी मानसिकता दर्शाता है। अब राहुल गाँधी और WSJ को बजरंग दल और हिन्दू समाज से क्षमा माँगनी चाहिए जो वैश्विक आबादी का ⅙ हिस्सा हैं।” 

फेसबुक ने किया था WSJ के दावों को खारिज 

फेसबुक इंडिया हेड अजीत मोहन ने बुधवार को संसदीय पैनल से कहा था कि उन्हें हिन्दू राष्ट्रवादी संगठन बजरंग दल पर कार्रवाई करने की कोई ठोस वजह नहीं नज़र आती है। इसके पहले रिपोर्ट्स सामने आई थी, जिसमें दावा किया गया था कि फेसबुक ने बजरंग दल के कई अकाउंट की समीक्षा नहीं की थी। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ बुधवार को यूज़र डाटा पर चर्चा के लिए गठित शशि थरूर की अगुवाई वाली सूचना प्रौद्यागिकी, संसदीय स्टैंडिंग कमेटी ने अजीत मोहन को समन भेजा था। WSJ द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए फेसबुक के अधिकारियों ने पैनल के सामने कहा था, “फेसबुक की फैक्ट चेकिंग टीम को बजरंग दल द्वारा साझा किया गया ऐसा कोई कंटेंट नहीं मिला, जिसमें सोशल मीडिया के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया गया हो।” फेसबुक इंडिया हेड अजीत मोहन ने WSJ की रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि यह ‘तथ्यात्मक रूप से गलत और असत्य है’।

बंगाल में अमित शाह: मिदनापुर रैली पर नजरें, 10000 कार्यकर्ताओं के साथ शुभेंदु अधिकारी के BJP में शामिल होने की अटकलें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल पहुँच गए हैं। आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने और कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए वे मिदनापुर में रैली करेंगे। उससे पहले उन्होंने NIA के अधिकारियों के साथ बैठक की। मिदनापुर में शुभेंदु सहित कुछ TMC नेता भाजपा का दामन थाम सकते हैं। वे रामकृष्ण मिशन जाकर स्वामी विवेकानंद और उनके गुरु को श्रद्धांजलि भी देंगे। दोपहर में सिद्धेश्वरी मंदिर और देवी महामाया मंदिर में उनका पूजा-पाठ का कार्यक्रम है। इस बीच टीएमसी के बागी विधायक जितेंद्र तिवारी अपने पुराने स्टैंड से पलट गए हैं।

TMC छोड़ने का ऐलान कर चुके दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे को स्वीकार करने से पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर बिमान बनर्जी ने इनकार कर दिया है। उन्होंने शुक्रवार (दिसंबर 18, 2020) को कहा कि शुभेंदु का इस्तीफा न तो सदन के नियमों के अनुरूप है और न ही संविधान के प्रावधानों का पालन करता है। उन्होंने कहा कि शुभेंदु ने व्यक्तिगत रूप से उन्हें अपना इस्तीफा नहीं सौंपा और वे इसे लेकर निश्चित नहीं हैं कि उनका ये कदम स्वेच्छा से लिया गया और वास्तविक है।

साथ ही विधानसभाध्यक्ष ने शुभेंदु अधिकारी को दिसंबर 21 को व्यक्तिगत रूप से उनके चैंबर में हाजिर होकर इस्तीफा सौंपने को कहा है। उन्होंने नियम-कायदों का हवाला देते हुए कहा कि जब तक ये पुष्ट नहीं होगा कि ये इस्तीफा स्वैच्छिक और वास्तविक है, वे इसे स्वीकार नहीं कर सकते। ये भी ध्यान देने वाली बात है कि आज जिस मेदिनीपुर में पूर्व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली है, वो शुभेंदु अधिकारी का ही गढ़ है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि वे अपने 10,000 कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा का दामन थामेंगे।

इनमें कई बड़े नेता, TMC कार्यकर्ता और पंचायतों में बड़े पदों पर काबिज नेता होंगे। उधर विधायक जितेंद्र तिवारी के इस्तीफा मामले में भी नया ड्रामा शुरू हो गया है। इस्तीफा सौंपने के 24 घंटे के भीतर तिवारी ने यूटर्न ले लिया और पार्टी आलाकमान से अपील की कि वो उनका इस्तीफा न स्वीकार करे, क्योंकि उनसे गलती हो गई है। शुक्रवार को उन्होंने TMC नेता अरूप विश्वास और प्रशांत किशोर के साथ बैठक के बाद ऐसा कहा। कोलकाता के सुरुचि संघ क्लब में हुई इस बैठक के बाद उन्होंने कहा कि कुछ गलतफहमियों की वजह से उनसे गलती हुई।

पांडवेश्वर के विधायक जितेंद्र तिवारी ने कहा, “ये पूरी तरह से मेरी गलती थी। मुझे बताया गया है कि ‘दीदी’ को मेरे इस कदम से गहरा धक्का लगा है। मैं ऐसा कुछ ही नहीं कर सकता, जिससे ‘दीदी’ को दुःख पहुँचे। मैं ममता बनर्जी से व्यक्तिगत रूप से मिल कर उनसे माफ़ी माँगूँगा। मैं TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) के लिए काम करता रहूँगा।” अरूप विश्वास ने भी कहा कि TMC सदस्य के रूप में ममता बनर्जी के वफादार सिपाही की तरह तिवारी भाजपा से लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि परिवार में अनबन होती रहती है।

सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि कल पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने शुभेंदु अधिकारी से उनके जन्मदिन के अवसर पर बात की और कहा कि उनके भाजपा में आने से दक्षिण बंगाल में पार्टी का कद बढ़ेगा। भाजपा सांसद नितीश प्रामाणिक ने कहा कि जहाँ नॉर्थ बंगाल में भाजपा ने 2019 लोकसभा चुनावों में TMC का किला ढाह दिया, साउथ बंगाल में उसका थोड़ा-बहुत असर बचा हुआ है। अमित शाह अपने इस बंगाल दौरे में बीरभूम में भी रोड शो करेंगे।

इससे पहले 48 घंटे के भीतर टीएमसी में 9 इस्तीफे हो चुके थे। बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह का मानना है कि अगले साल जनवरी तक टीएमसी के 60 से 65 विधायक उनके साथ आ सकते हैं। इस बीच यह खबर भी आई है कि माकपा विधायक तापसी मंडल भी ‘कमल’ थामने जा रही हैं। 24 परगना के बैरकपुर विधानसभा क्षेत्र के टीएमसी विधायक शीलभद्र दत्ता और उत्तरी काठी से विधायक बनाश्री मैती ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।

कभी जिन कृषि कानूनों का वादा किया था, आज उसी का विरोध कर रही AAP: केजरीवाल के दोहरे रवैये का कच्चा चिट्ठा

केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) का पहले कुछ और रुख था, वहीं अब यूटर्न के बाद उसका रुख कुछ और ही है। गुरुवार (दिसंबर 17, 2020) को दिल्ली विधानसभा में ड्रामेबाजी हुई, जहाँ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तीनों कृषि कानूनों की प्रतियाँ सदन में ही फाड़ डाली। साथ ही तीनों कृषि कानूनों को ख़त्म करने की माँग करते हुए प्रस्ताव भी पारित किया।

अरविंद केजरीवाल ने ऐसा करते हुए कहा कि वे दुःखी और उदास हैं। उन्होंने दावा किया कि वे ऐसा नहीं करना चाहते थे, लेकिन सड़क पर ठण्ड में ठिठुरते प्रदर्शनकारी किसानों को वे धोखा नहीं दे सकते। उन्होंने खुद को पहले एक भारतीय और फिर एक सीएम बताते हुए कहा कि दिल्ली विधानसभा तीनों कृषि कानूनों को नकारती है। लेकिन, दिल्ली सरकार के इस रुख से लगता है कि AAP लगातार यूटर्न पर यूटर्न लेने में माहिर है।

सच्चाई ये है कि दिल्ली सरकार ने इन कृषि कानूनों को नवंबर 2020 में ही प्रदेश में नोटिफाई कर दिया था और ‘दिल्ली राजपत्र’ के जरिए अधिसूचना जारी कर दी थी। दिल्ली की AAP सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखा था कि कि ‘यह किसी भी राज्य की APMC अधिनियम या अन्य कानून के लागू होने के समय प्रवृत्त या प्रलेख के प्रभाव में आने वाले समय में लागू होगा।’ जब कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस मुद्दे को बताया तो केजरीवाल ने उन पर निशाना साधते हुए उन्हें केंद्र का साथी बता दिया।

अब केजरीवाल सरकार का एक और यूटर्न देखिए। 2017 में पंजाब में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान AAP ने अपने घोषणा-पत्र में इसी तरह के कृषि कानूनों को लागू करने की बात कही थी। पार्टी ने न सिर्फ APMC में संशोधन करने की बात कही थी, बल्कि कृषि बाजार में प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी की वकालत की थी। AAP का दावा था कि इससे आईटी स्टार्टअप्स और इंडस्ट्रीज से किसानों को फायदा होगा। 2016 में AAP के एक एडवर्टाइजमेंट में हर जिले में भारी प्राइवेट निवेश के जरिए कृषि उत्पाद बेचने की व्यवस्था का वादा किया गया था।

2017 पंजाब चुनाव में AAP का घोषणापत्र

अब पार्टी अपने ही वादों से पलट रही है, क्योंकि उसकी विरोधी पार्टी की सरकार ने किसानों के हित में इसे लागू कर दिया है। इससे पहले एंकर रुबिका लियाकत ने कृषि कानूनों को काला कानून बता रहे AAP नेता संजय सिंह से पूछा कि जब कृषि कानून किसान विरोधी है तो फिर दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में नवंबर 23, 2020 को नोटिफाई कर लागू क्यों किया? ये सवाल सुनते ही AAP नेता संजय सिंह बौखला गए और टीवी एंकर को जवाब देने के बजाय आक्रामक हो गए और उल्टा सवाल पूछने लगे कि क्या आप मोदी की पैरवी में बैठी हैं?

रुबिका लियाकत ने फिर से सवाल किया कि अगर यह काला कानून था तो फिर आखिर आम आदमी पार्टी ने इसे नोटिफाई क्यों किया? इस पर संजय सिंह ने टीवी एंकर को धमकाते हुए मोदी और अडानी तक का नाम बहस के बीच लेने लगे और ABP न्यूज़ चैनल को बिकाऊ कहने लगे। संजय सिंह ने रुबिका लियाकत पर आरोप लगा दिया कि वो मोदी के लिए काम कर रही हैं, मोदी का चैनल चला रही हैं और अडानी के साथ मिली हुई हैं। रुबिका ने भी जवाब दिया कि आप जिनकी गुलामी कर रहे हैं उनकी बात करिए, मैं देश की गुलामी कर रही हूँ, हिंदुस्तान की गुलामी कर रही हूँ।

बंगबंधु के बाद अब कॉलेज कैंपस में क्रांतिकारी बाघा जतिन की प्रतिमा तोड़ी, प्रिंसिपल हारून रशीद और गार्ड ख़लीलुर हिरासत में

बांग्लादेश में प्रतिमाओं के साथ तोड़फोड़ का सिलसिला जारी है। हाल ही में वहाँ बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की प्रतिमा को नुकसान पहुँचाया गया था। अब क्रांतिकारी बाघा जतिन की प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ हुई है। साथ ही प्रतिमा को विकृत कर के उसे अपमानित भी किया गया। जतिन्द्रनाथ मुखर्जी उर्फ़ बाघा जतिन ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। ये घटना गुरुवार (दिसंबर 17, 2020) की रात कुश्तिया जिले में स्थित काया कॉलेज में हुई।

इस मामले में कॉलेज प्रशासन का भी हाथ सामने आ रहा है। बांग्लादेश पुलिस ने इस घटना की जाँच के क्रम में कॉलेज की गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष निजामुल हक़ उर्फ़ चुन्नू, सदस्य अनिसुर रहमान, कॉलेज के प्रिंसिपल हारून उर रशीद और नाइट वॉचमैन ख़लीलुर रहमान को हिरासत में लिया है। इन सभी संदिग्धों से पूछताछ जारी है। बताया जा रहा है कि इन्होने मिलीभगत कर के प्रतिमा तोड़ी और आरोपितों की मदद की। लेखिका तस्लीमा नसरीन ने इसे जिहादी कट्टरपंथियों की करतूत करार दिया।

इससे पहले अबू बकर और सबुज नामक के दो मदरसा छात्रों ने कोर्ट में कबूल किया था कि वो कट्टरपंथी एंटी-लिबरेशन नेताओं मामुनुल और बबुनागरी से प्रेरित थे। इसीलिए, उन्होंने दिसंबर 5 को बंगबंधु की प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ किया। मदरसा के शिक्षक मौलानाओं अल अमीन और युसूफ अली को इसके अगले दिन गिरफ्तार किया गया। इन दोनों ने ही आरोपितों को भागने में मदद की थी बाद में जुडिशल मजिस्ट्रेट दिलावर हुसैन के समक्ष उन्होंने अपना गुनाह कबूल कर लिया।

वहीं बाघा जतिन की प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ किए जाने के मामले में कुश्तिया के एसपी तनवीर अराफत ने कहा है कि प्रतिमा को बचाने में कॉलेज प्रशासन ने पूरी तरह लापरवाही दिखाई है। साथ ही उन्होंने इस सम्बन्ध में दिए गए सरकारी दिशानिर्देशों का भी उल्लंघन किया है। पूछताछ समाप्त होने के बाद निर्णय लिया जाएगा कि उन्हें छोड़ना है या नहीं। दिसंबर 7, 1879 को नदिया जिले के कुश्तिया में ही क्रांतिकारी बाघा जतिन का जन्म हुआ था, जो अब बांग्लादेश में पड़ता है।

बाघा जतिन बंगाल के क्रांतिकारी दल ‘जुगांतर’ के मुख्य नेता थे। जहाँ उनके पिता वेद-वेदाङ्ग में पारंगत थे, वहीं माता कवि थीं। 5 वर्ष की उम्र में ही उनके पिता चल बसे थे। उन्होंने रॉयल बंगाल टाइगर से लड़ाई कर के उसे मार डाला था, जिसके बाद उनका नाम बाघा जतिन पड़ा। उन्होंने देवघर में क्रांतिकारियों के लिए बम फैक्ट्री स्थापित की थी। अंग्रेजों के साथ क्रांतिकारियों की हुई 75 मिनट की गोलीबारी में घायल होने से उनकी मृत्यु हो गई थी। अंग्रेजों ने उन पर इनाम भी रखा हुआ था।

न सिर्फ क्रांतिकारियों, बल्कि बांग्लादेश में मंदिरों और हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं पर भी हमले लगातार बढ़ रहे हैं। सितम्बर 2020 में गाजीपुर, ढाका के दक्खिन सलाना इलाके में स्थित काली मंदिर में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को खंडित कर दिया गया था। उन्हें तोड़ दिया गया था। मंदिर प्रशासन ने बताया था कि कई ‘प्रभावशाली स्थानीय लोग’ मंदिर की जमीन को हड़पने के लिए घाट लगाए बैठे हैं।

क्या तृणमूल-क्या वाम: बंगाल में ‘कमल’ खिलाने की होड़, जनवरी तक BJP के साथ 60-65 MLA के आने का अनुमान

पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। हाल के समय में हमने वहाँ राजनीतिक हिंसा में तेजी देखी है। खासकर, सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के गुंडों द्वारा बीजेपी से जुड़े लोगों को निशाना बनाने के कई मामले सामने आए हैं। इस बीच, राज्य में भाजपा का दामन थामने की होड़ शुरू हो गई है तो दूसरी ओर टीएमसी में इस्तीफों की लाइन लग गई है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 48 घंटे के भीतर टीएमसी में 9 इस्तीफे हो चुके हैं। बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह का मानना है कि अगले साल जनवरी तक टीएमसी के 60 से 65 विधायक उनके साथ आ सकते हैं। इस बीच यह खबर भी आई है कि माकपा विधायक तापसी मंडल भी ‘कमल’ थामने जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी के लिए मुश्किलों का सिलसिला दिग्गज नेता शुभेन्दु अधिकारी के कैबिनेट से इस्तीफे के बाद शुरू हुआ है। उनके अलावा 5 और वरिष्ठ नेताओं ने 72 घंटों पार्टी से नाता तोड़ा है। खबरों के मुताबिक, उत्तर 24 परगना के बैरकपुर विधानसभा क्षेत्र के टीएमसी विधायक शीलभद्र दत्ता और उत्तरी काठी से विधायक बनाश्री मैती ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।

उत्तरी काठी से विधायक बनाश्री मैती ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। अटकलें लगाई जा रही है कि शुभेंदु अधिकारी के साथ वह भी बीजेपी में शामिल हो सकती हैं। वहीं दत्ता ने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को लिखे एक पत्र में कहा है, “ मैं अखिल भारतीय तृणमूल कॉन्ग्रेस की सदस्यता के साथ पार्टी की ओर से मिले अन्य पदों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रहा हूँ।”

समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, आज ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी को छोड़ने वाले केवल दत्ता ही नहीं थे। पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के महासचिव टीएमसी नेता कबीरुल इस्लाम ने भी पार्टी पद से अपना इस्तीफा दे दिया है।

केवल टीएमसी ही नहीं अब माकपा में भी इस्तीफे का सिलसिला शुरू हो चुका है। पूर्व मेदिनीपुर के हल्दिया की माकपा की विधायक तापसी मंडल ने माकपा से नाता तोड़ने की घोषणा की है। रिपोर्ट के अनुसार, वह शनिवार को मेदिनीपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सभा में भाजपा में शामिल होंगी।

उल्लेखनीय है कि ये इस्तीफे टीएमसी के नेता और दक्षिण बंगाल राज्य परिवहन निगम (SBSTC) के अध्यक्ष (Rtd) कर्नल दिप्तांगशु चौधरी द्वारा अपने पद से इस्तीफा देने के एक दिन बाद आए है। सेवानिवृत्त कर्नल चौधरी ने सीएमओ की शिकायत और मॉनीटरिंग सेल के सलाहकार के पद से में भी अपना इस्तीफा दे दिया है। टीएमसी के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद इस्तीफा सौंपने वाले चौधरी पार्टी के तीसरे दिग्गज नेता हैं।

वहीं इस्तीफा देने वाले अन्य दो नेता आसनसोल के विधायक जितेंद्र तिवारी और अभिजीत आचार्य हैं। जितेंद्र तिवारी ने आसनसोल नगर निगम के अध्यक्ष, प्रशासक बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में अपना पद छोड़ा, तो वहीं अभिजीत आचार्य ने पश्चिम बर्धमान के उपाध्यक्ष के रूप में पद छोड़ दिया। इस बीच, टीएमसी के निचले स्तरों पर कई अन्य कार्यकर्ता पार्टी को अपने इस्तीफे की पेशकश कर रहे हैं।

गौरतलब है कि तिवारी और अधिकारी के इस्तीफे के बीच यह खबरें भी सामने आई कि अगले कुछ दिनों में उनके भाजपा में शामिल होने की संभावना है। गृहमंत्री अमित शाह शनिवार को पश्चिम बंगाल दौरे पर जा रहे हैं। उम्मीद है कि इसी मौके पर टीएमसी के बागी नेता बीजेपी में शामिल हो सकते हैं।

इसके अलावा टीएमसी ने हालही में ईस्ट मिदनापुर में पार्टी की महासचिव कनिष्क पांडा को निष्कासित कर दिया था, जिन्हें अधिकारी का करीबी सहयोगी माना जाता है। कथित तौर पांडा ने अधिकारी की सुरक्षा वापस लेने पर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाया था।

‘हमें इजरायल से सीखना चाहिए’: संस्कृत को राष्ट्रभाषा के रूप में अधिसूचित करने के लिए SC में याचिका

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर संस्कृत को देश की राष्ट्रीय भाषा के रूप में अधिसूचित करने की माँग की गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जनहित याचिका गुजरात सरकार के पूर्व अतिरिक्त सचिव केजी वंजारा द्वारा दायर की गई है, जो वर्तमान में गुजरात उच्च न्यायालय में वकील हैं।

याचिका में सर्वोच्च न्यायालय से केंद्र सरकार को संस्कृत को भारत की राष्ट्रीय भाषा के रूप में अधिसूचित करने और हिंदी को इसकी आधिकारिक भाषा के रूप में रखने का निर्देश देने की माँग की गई है।

वंजारा ने अपनी याचिका में दावा किया कि राष्ट्रभाषा का दर्जा हिंदी के लिए राजभाषा दर्जा से अधिक होगा। याचिका में कहा गया है कि यह अधिसूचना संवैधानिक ढाँचे को भंग किए बिना ही अधिनियम या कार्यकारी आदेश के द्वारा किया जा सकता है। याचिका में कहा गया है कि जरूरी नहीं कि राजभाषा को राष्ट्रीय भाषा के बराबर दर्जा दिया जाए, दोनों निश्चित रूप से अलग हो सकते हैं।

याचिका में है इजरायल का उदाहरण

याचिका में कहा गया है कि भारत को इज़रायल (Israel) से सीखना चाहिए, जिसने वर्ष 1948 में हिब्रू (इब्रानी) को भी आधिकारिक/राष्ट्रीय भाषा के रूप में अंग्रेजी के साथ रखा, जो कि पिछले 2000 वर्षों से मृत भाषा है। वंजारा ने यह भी कहा कि इस कदम से किसी भी धर्म या जाति के विरोध का सामना नहीं करना पड़ेगा। दलील में कहा गया है कि संस्कृत बच्चों में मस्तिष्क, लयबद्ध उच्चारण और याद रखने की क्षमता का विकास करती है।

याचिका के अनुसार, “यहाँ तक ​​कि पूर्व पीएम ने भी कहा था कि ‘सबसे बड़ा खजाना जो भारत के पास है और उसकी सबसे अच्छी विरासत है, मैं बिना किसी संकोच के कहूँगा कि यह संस्कृत भाषा का साहित्य है।”

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में, भारतीय संविधान किसी भी भाषा को ’देश की राष्ट्रीय भाषा’ के रूप में मान्यता नहीं देता है। हालाँकि, भारत में 22 आधिकारिक भाषाएँ हैं और वे भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची के तहत आते हैं।

ओवैसी की AIMIM के जिला अध्यक्ष फारूक अहमद की ओपन फायरिंग में दो घायल, हालत गंभीर

AIMIM के जिला अध्यक्ष फारूक अहमद ने तेलंगाना राष्ट्र समिति पार्टी के दो स्थानीय नेताओं पर दो राउंड से ज्यादा फायरिंग की। AIMIM नेता फारूक अहमद को हिरासत में ले लिया गया है और मामला दर्ज किया जा रहा है, जबकि पीड़ितों को अस्पताल ले जाया जा रहा है। क्रिकेट खेलते समय यह घटना हाथापाई में बदल गई। तभी फारूक ने अपने विरोधियों पर बहुत करीब से गोलीबारी शुरू कर दी और भागते समय एक युवक गिर गया।

तेलंगाना के आदिलाबाद जिले में ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के जिला अध्यक्ष फारूक अहमद ने दो लोगों पर गोलियाँ चला दीं जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। समाचार चैनल टाइम्स नाउ के ब्यूरो चीफ ने इसका वीडियो भी ट्वीट किया है।

बताया जा रहा है कि एमआईएम पार्टी के जिला अध्यक्ष और पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष फारूक अहमद ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से गोलाबारी की। इस घटना में दो लोगों गोली लगी, जिनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है। साथ ही, एक गोली किसी और के पेट में जा लगी। फारूक अहमद ने दो लोगों पर गोलियाँ चलाईं और दूसरे पर चाकू से हमला किया।

घायलों का इलाज आदिलाबाद के रिम्स अस्पताल में चल रहा है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुँची। हादसे के बाद रिम्स अस्पताल में भारी भीड़ उमड़ पड़ी है और एमआईएम के कार्यकर्ता भी वहाँ मौजूद हैं।

‘गटर वाली बात’ पर सना खान ने की मुफ्ती अनस से निकाह, शौहर बोले- मैंने अल्लाह से माँगी थी दुआ…

इस्लाम की खातिर फिल्मी दुनिया से दूर हो चुकी सना खान ने पहली बार अपने निक़ाह और शौहर मुफ्ती अनस सैयद को लेकर खुलकर बात की है। सना खान का कहना है कि उन्होंने अनस से निकाह फैसला रातों-रात नहीं किया। उन जैसा इंसान पाने के लिए उन्होंने कई सालों इबादत की है।

टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में सना खान ने अनस से एक मुलाकात के दौरान हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा, “उन्होंने मुझसे कहा था कि अगर कोई चीज गटर में गिर गई हो तो उसके ऊपर आप 10 बाल्टी पानी भी डाल दो, वो साफ नहीं होती। लेकिन आप उसे गटर से बाहर निकालकर एक गिलास पानी डाल दो तो वह साफ हो जाती है। उनकी इस बात ने मुझे काफी प्रभावित किया था।”

अपनी निकाह को लेकर सना ने कहा, “अनस के अंदर जो चीज मुझे सबसे अच्छी लगती है वो ये है कि अनस शरीफ हैं। उनके अंदर हया है। वो जजमेंटल नहीं हैं।” उन्होंने कहा, “ये कोई जल्दबाजी का निर्णय नहीं था। ऐसे इंसान को पाने के लिए मैंने सालों इबादत की है।”

वहीं सना को लेकर उनके शौहर मुफ्ती अनस ने TOI के इंटरव्यू में बताया, “उन्होंने (सना) लगभग 6 महीने पहले इंस्टाग्राम पर ऐलान किया था कि उन्होंने हिजाब ले लिया है। लोगों को लगा कि यह पैनडेमिक और काम ना मिलने की वजह से है, लेकिन वो हमेशा खुद को इन सबसे दूर करना चाहती थी। मैं चाहता था कि वो इसे थोड़ा वक्त दें और इस बारे में सोचे लेकिन वो निर्णय कर चुकी थी। असल में मुझे भी झटका लगा था जब उन्होंने कहा कि वह इंडस्ट्री छोड़ रही हैं।”

उन्होंने आगे कहा, ”मैंने अल्लाह से दुआ माँगी थी कि मुझे सना से शादी करनी है और उसने मेरी सुन ली। मुझे लगता है कि मैं इतना खुश ना होता अगर मैंने किसी और से शादी की होती। सना घमंडी नहीं है। वो अच्छी हैं, माफ करने वाली हैं और उनका दिल साफ है।”

मौलाना ने सना की तारीफ में आगे कहा, ”मैं हमेशा से एक ऐसे लड़की की साथ रहना चाहता था जो मुझे पूरा करे। लोग मुझसे पूछते हैं कि मेरी शादी आखिर एक एक्ट्रेस से कैसे हो गई, लेकिन ये छोटी सोच के लोग हैं। यह मेरी जिंदगी है और किसी को उस पर कुछ बोलने का हक नहीं है। लोग यह सोचने के लिए आजाद हैं कि हम मिसमैचड जोड़ी हैं, लेकिन सिर्फ हम जानते हैं कि हम एक-दूसरे के लिए ठीक हैं।”

रुबिका लियाकत ने AAP के संजय सिंह को बताया कि वो किसकी गोद में बैठा है

नए कृषि कानून को लेकर एक ओर जहाँ किसान धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर, समाचार चैनलों पर भी इस विषय को लेकर बहस का माहौल बना हुआ है। विपक्षी राजनीतिक दल भी इसे केंद्र सरकार पर हमलावर होने का एक और बहाना बनाकर भुनाने का प्रयास कर रहे हैं।

इसी क्रम में समाचार चैनल एबीपी न्यूज़ पर शुक्रवार (दिसंबर 18, 2020) शाम पाँच बजे कृषि कानूनों को लेकर चल रही बहस में आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह और न्यूज़ चैनल की पत्रकार रुबिका लियाकत के बीच बहस तनातनी में बदल गई। बहस के बीच संजय सिंह का चेहरा तब देखने लायक हो गया जब टीवी एंकर ने साक्ष्य पेश कर बता दिया कि AAP नेता किसकी गोद में बैठे हैं।

आज शाम के इस शो का शीर्षक था- “मोदी के किसान सम्मेलन से दूर होगा ‘कन्फ्यूजन’?” बहस के दौरान रुबिका लियाकत ने AAP नेता संजय सिंह को जमकर लताड़ लगा दी और ऐसा सवाल पूछ लिया जिसका संजय सिंह के पास कोई जवाब नहीं था।

ट्विटर पर मिहिर झा ने इस शो की एक क्लिप ट्वीट करते हुए लिखा है, “ये आपिया @SanjayAzadSln उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी से लड़ने की बात करता है; इसे तो महिला पत्रकार @RubikaLiyaquat ने ही पटक पटक के धो दिया।”

दरअसल न्यूज़ चैनल की एंकर रुबिका लियाकत ने कृषि कानूनों को काला कानून बता रहे AAP नेता संजय सिंह से पूछा कि जब कृषि कानून किसान विरोधी है तो फिर दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में नवंबर 23, 2020 को नोटिफाई कर लागू क्यों किया? ये सवाल सुनते ही AAP नेता संजय सिंह बौखला गए और टीवी एंकर को जवाब देने के बजाय आक्रामक हो गए और उल्टा सवाल पूछने लगे कि क्या आप मोदी की पैरवी में बैठी हैं?

रुबिका लियाकत ने फिरसे सवाल किया कि अगर यह काला कानून था तो फिर आखिर आम आदमी पार्टी ने इसे नोटिफाई क्यों किया? इस पर संजय सिंह टीवी एंकर को धमकाते हुए मोदी और अडानी तक का नाम बहस के बीच लेने लगे और ABP न्यूज़ चैनल को बिकाऊ कहने लगे।

संजय सिंह ने रुबिका लियाकत पर आरोप लगाया कि वो मोदी के लिए काम कर रही हैं, मोदी का चैनल चला रही हैं और अडानी के साथ मिली हुई हैं। यही नहीं, AAP नेता ने यहाँ तक कह दिया कि वो अडानी के गुलामों के पक्ष में बोल रही हैं। इस पर रुबिका ने कहा कि इससे उन्हें क्यों परेशानी हो रही है?

इतना सुनने के बाद रुबिका लियाकत ने भी संजय सिंह के ही अंदाज में उन्हें जवाब देते हुए कहा कि खबरदार अगर मेरे चैनल को बिका हुआ कहा। रुबिका लियाकत ने कहा, “आप मेरे चैनल पर आए हैं और इज्जत के साथ अपनी बात को रखिए। यहाँ पर बैठकर मुझे ज्ञान मत दीजिए। आप जिनकी गुलामी कर रहे हैं उनकी बात करिए, मैं देश की गुलामी कर रही हूँ, हिंदुस्तान की गुलामी कर रही हूँ।”

इसके बाद रुबिका लियाकत ने अपने मोबाइल स्क्रीन पर आम आदमी पार्टी का पोस्टर दिखते हुए कहा कि इसे देखिए। आम आदमी पार्टी के ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट की गई इस पोस्टर में अरविन्द केजरीवाल की तस्वीर लगी नजर आ रही है और इस पर लिखा था, “पंजाब AAP दे नाल। कृषि क्षेत्र को प्रभावी बनाने के लिए प्राइवेट इन्वेस्टमेंट।” दरअसल, यह पोस्टर वर्ष 2016 में आम आदमी पार्टी द्वारा शेयर किया गया था।

रुबिका लियाकत ने हमलावर होते हुए कहा, “अडानी की वकालत कौन कर रहा था? क्या आम आदमी पार्टी रुबिका लियाकत है? किसकी गोद में बैठ गए आप? किसकी गुलामी करने लगे आप?”

ABP न्यूज़ की एंकर ने कटाक्ष करते हुए संजय सिंह से ही सवाल किया कि ये क्या लिखा हुआ है? उन्होंने AAP नेता से कहा कि अगर गलत किया है तो बताना चाहिए कि झूठ बोलना तो आपकी आदत है।