Home Blog Page 4214

भदोही में MLA विजय मिश्रा का अवैध निर्माण ध्वस्त, जानिए बाहुबलियों के साम्राज्य पर कब-कब चला योगी का बुलडोजर

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार माफियाओं के अवैध निर्माण पर लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार (18 दिसंबर, 2020) को प्रशासन ने बाहुबली विधायक विजय मिश्रा की भदोही के ऊँज थाना क्षेत्र के नवधन में ग्राम समाज की जमीन पर बनी बाउंड्री को ध्वस्त कर दिया। करीब ढाई बीघे अतिरिक्त जमीन पर विधायक ने बाउंड्री बनाई थी, जिसकी कीमत करोड़ों में बताई जा रही है।

विधायक विजय मिश्रा ने नवधान में कुछ समय पहले जमीन खरीदी थी। बाद में बगल की जमीन पर भी कब्जा कर लिया। भदोही विधायक रवींद्र नाथ त्रिपाठी की शिकायत पर राजस्व विभाग ने जाँच कराई तो 0.600 हेक्टेयर रकबे पर विधायक का कब्जा पाया गया। जिसे खाली कराने के लिए मामला तहसील तक पहुँचा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तहसीलदार न्यायालय से इस मामले में बेदखली का आदेश जारी किया। इसके बाद जिलाधिकारी न्यायालय में भी विधायक की अपील को खारिज कर दिया गया। प्रशासन के आदेश के बाद अब अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिया गया है। ज्ञानपुर के एसडीएम, तहसीलदार और भारी फोर्स की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण का कार्य किया गया। यही नहीं विधायक पर पाँच लाख रुपए की क्षतिपूर्ति भी लगाई गई है।

फिलहाल विधायक विजय मिश्रा रिश्तेदार से संपत्ति विवाद में आगरा जेल में बंद हैं। इससे पहले योगी सरकार की कार्रवाईयों से सहमे मिश्रा ने प्रयागराज स्थित अपने अवैध शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पर खुद ही हथौड़ा चलवा दिया था। मिश्रा की प्रयागराज शहर के अल्लाहपुर इलाके में पुलिस चौकी के ठीक सामने चार मंजिला इमारत बनी थी।

बिल्डिंग का विकास प्राधिकरण से सिर्फ दो मंजिल का ही नक्शा पास था, जबकि विधायक ने ऊपर की दो मंजिल अवैध तरीके से बनवाई थी। राज्य सरकार की कुर्की से सहमे विधायक ने बिल्डिंग को पूरी तरह से ध्वस्त होने से बचाने के लिए खुद ही ऊपरी दो मंजिल को तोड़ने का ठेका दे दिया था।

गौरतलब है बाहुबलियों, भूमाफियाओं, गैंगस्टरों के खिलाफ योगी सरकार का ताबड़तोड़ एक्शन लगातार जारी है। कुछ हालिया कार्रवाइयों का ब्यौरा नीचे है;

  • 17 दिसंबर 2020 को रायबरेली के लखनऊ-प्रयागराज NH-30 स्थित सिविल लाइन चौराहा के बहुचर्चित करोड़ों की फर्जी कमला नेहरू ट्रस्ट पर बुलडोजर चला था।
  • 9 दिसंबर 2020 को प्रयागराज प्रशासन ने पूर्व सांसद अतीक अहमद गैंग के शॉर्प शूटर मुबारक खान के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए उसके 2 अवैध इमारतों को जमींदोज कर दिया था।
  • 19 नवंबर 2020 को मुजफ्फरनगर में प्रशासन ने वन विभाग की जमीन पर कब्जा किए हुए पीर खुशहाल के अवैध चिल्लागाह पर बुलडोजर चला कर उसे ध्वस्त कर दिया था।
  • 17 नवंबर 2020 को पूर्व सांसद अतीक अहमद के साढ़ू इमरान जई की अवैध संपत्ति पर बुलडोजर चलाया गया था।
  • 1 नवंबर 2020 को गाजीपुर में ‘मुख़्तार अंसारी का ताजमहल’ कहे जाने वाले गजल होटल को ध्वस्त कर दिया गया था।
  • 5 नवंबर 2020 माफिया मुख्तार अंसारी गैंग के मेराज़ और ईसा खान की गैर कानूनी इमारतों पर बुलडोज़र चलाया गया था।
  • 18 अक्टूबर 2020 को पूर्व सांसद अतीक अहमद के करीबी जुल्फिकार उर्फ तोता के तीन मंजिला अवैध मकान को धूमनगंज में पीडीए ने ध्वस्त कर दिया था। इस मकान की कीमत करोड़ो में थी।

मोहम्मद शारिक और मुनीर अहमद के सऊदी अरब के आतंकियों से लिंक: मंगलुरु की दीवारों पर लिखा था- लश्कर जिंदाबाद

मंगलुरु ग्राफिटी मामले में पुलिस ने गुरुवार (17 दिसंबर, 2020) को एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस ने बताया कि मामले के आरोपितों के सऊदी अरब के आतंकवादियों से संपर्क थे। पब्लिक टीवी रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने कहा कि आरोपित लगातार आतंकियों के साथ संपर्क में थे और उन्होंने शहर में लश्कर-ए-तैयबा और तालिबान जैसे इस्लामी आतंकवादी संगठनों के समर्थन में दीवारों पर ग्राफिटी बनाई थी।

मंगलुरु के पुलिस आयुक्त विकास कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आरोपित एक बड़े रैकेट का हिस्सा थे, जिसे सऊदी अरब में बैठे आतंकवादियों द्वारा नियंत्रित किया जाता था। उन्होंने कहा कि अब तक की जाँच में पता चला है कि मजहबी कट्टरता में लिप्त आरोपितों को इस काम के लिए प्रेरित किया गया था। पुलिस अब सऊदी अरब में उन लोगों के आतंकवादी कनेक्शन की पड़ताल कर रही है और इसी संबंध में लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य आरोपित मोहम्मद शारिक और मुनीर अहमद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से कई कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों के संपर्क में थे। इसके अलावा दोनों एक ऐसे व्हाट्सएप ग्रुप का हिस्सा थे, जिसमें इस तरह के अपराधों की योजना पर चर्चा की गई थी। पुलिस ने ग्रुप से जुड़े बाकी सदस्यों का भी पता लगाया है, जिनमें से अधिकांश भारत के हैं। पुलिस इनकी डिटेल खँगालने में जुटी है।

जाँच में पता चला है कि आरोपित इन व्हाट्सएप ग्रुपों में जानकारी इकठ्ठा करने के लिए जुड़े थे। वहीं इंवेस्टिगेटिंग टीम से मोहम्मद शारिक के रिश्तेदारों में से एक सआदत ने मामले के संबंध में एक अहम जानकारी का खुलासा किया है।

कथित तौर पर, आरोपित इस्लामी साहित्य पढ़ते थे। जिसके चलते उन्हें इस तरह के काम को करने के लिए प्रेरित किया गया। पुलिस ने उनके घरों से कई किताबें बरामद की, जिससे उनको उकसाया जाता था। जाँच में यह भी पता चला कि शहर में इस तरह के घृणा से भरे ग्राफिटी को बनाने में कट्टरपंथी इस्लामी संगठन के स्लीपर सेल का हाथ था।

इस बीच मंगलवार (15 दिसंबर, 2020) को मामले के तीसरे आरोपित सआदत को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। साथ ही यह बात भी सामने आई है कि शारिक कथित रूप से इन कट्टरपंथी इस्लामी गतिविधियों फंडिंग करता था और उसके साथी उसे आतंकवादी’ के रूप में संदर्भित करते थे।

वहीं अन्य दो आरोपित मोहम्मद शारिक और मुनीर अहमद को शुक्रवार को अदालत में पेश किया जाएगा क्योंकि उनकी पुलिस हिरासत की अवधि उसी दिन समाप्त हो जाएगी। गौरतलब है कि मंगलुरु में 28 नवंबर को पुलिस चौकी की दीवार पर एक ग्राफिटी देखी गई थी। इसमें लिखा था, “गुस्ताख़-ए-रसूल की एक ही सज़ा, सर तन से जुदा।”

इसके अलावा इससे पहले एक अपार्टमेंट की दीवार पर लिखा गया था, “हमें इस बात के लिए मजबूर नहीं किया जाए कि हमें संघियों और मनुवादियों का सामना करने के लिए लश्कर-ए-तैय्यबा और तालिबान की मदद लेनी पड़े।” आगे लश्कर के समर्थन में लिखा था, “‘लश्कर जिंदाबाद।”

ऑपइंडिया ने इस संबंध में पुलिस से बात की थी। पुलिस ने जानकारी देते हुए कहा था कि पहली ग्राफिटी मंगलुरु के सर्किट रोड स्थित अपार्टमेंट पर बनाई गई। इसके बाद कदरी पुलिस थाने ने इस प्रकरण के संबंध में मामला दर्ज किया गया था। मंगलुरु पुलिस ने मोहम्मद शारिक और मुनीर अहमद नाम के दो अपराधियों को गिरफ्तार किया था। जिन्होंने पिछले सप्ताह शहर के विभिन्न हिस्सों में लश्कर-ए-तैयबा और तालिबान जैसे इस्लामी आतंकवादी संगठनों के समर्थन में ग्राफिटी बनाया था।

नशे में मर्सिडीज चला रहे 19 साल के तैफ़ूर शेख ने Zomato के डिलीवरी बॉय को रौंदा, मौत

मुंबई में एक मर्सिडीज कार की चपेट में आने से एक 21 साल के युवक की मौत हो गई। हादसे में जान गँवाने वाला युवक की पहचान सतीश परसलाल गुप्ता के रूप में हुई, जो कि एक फ़ूड डिलीवरी बॉय था और ऑनलाइन फ़ूड डिलीवरी ऐप ज़ोमैटो (Zomato) के लिए काम करता था।

शुक्रवार (दिसंबर 18, 2020) को फूड (Zomato) डिलीवरी बॉय सतीश पारसनाथ गुप्ता को अंधेरी स्थित लोखंडवाला इलाके में एक तेज रफ्तार से आ रही मर्सिडीज़ कार ने टक्कर मार दी। हादसे के बाद युवक को कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना अंधेरी (डब्ल्यू) के लोखंडवाला के पास शुक्रवार की रात 2.30am पर हुई। सतीश गुप्ता ओशिवारा में एक ग्राहक को एक फ़ूड पैकेज देने के लिए जा रहे थे, तभी एक तेज रफ्तार से आ रही मर्सिडीज कार ने सतीश की स्कूटी को टक्कर मारी और उन्हें गिरा दिया।

इस मामले में अब ओशिवारा पुलिस ने कार चालक तैफुर तनवीर शेख (19) को हिरासत में ले लिया है। पुलिस का कहना है कि शेख एक विद्यार्थी है और एक कार को ओवरटेक करते समय उसकी कार की गति नियंत्रण से बाहर हो गई और सतीश के दोपहिया वाहन से जा टकराई।

ऐसे में अंधेरी (डब्ल्यू) निवासी सतीश गुप्ता कार के पहियों में फंस गए और कार के साथसड़क पर घसीटते चले गए। जब मर्सिडीज चालक तैफ़ूर शेख की कार रुकी, तो कार में बैठे लोगों ने सतीश को निकला और उन्हें एक ऑटो रिक्शा में अस्पताल ले गए, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

ओशीपुर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक दयानंद बाँगर के अनुसार, “कार 19 वर्षीय तैफूर शेख चला रहा था, जिसे जब्त कर लिया गया और आरोपित तैफ़ूर शेख को गिरफ्तार कर लिया गया। प्रारंभिक जाँच में पता चला है कि जब शेख कार चला रहा था तब उसका दोस्त उसके साथ था। अचानक कार पर शेख का नियंत्रण नहीं रहा और वह गुप्ता की स्कूटी से जा टकराई।”

पुलिस ने मौके पर पहुँचकर तैफ़ूर शेख को हिरासत में ले लिया, जिसके बाद उसे मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाया गया। इसके बाद शेख को गिरफ्तार किया गया और भारतीय दंड संहिता और मोटर वाहन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया, जिसमें लापरवाही और नशे में वाहन चलाने के कारण मौत का मामला दर्ज किया गया है।

‘हिंदू अपनी संपत्ति छोड़ शहर से बाहर जाएँ’: हिंदू लड़के को पीटती इस्लामी भीड़ और कारोबारियों पर फायरिंग, सिंध की घटना

पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन (Rahat Austin) ने शुक्रवार (18 दिसंबर 2020) को सिंध के उमरकोट का एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में मुस्लिम भीड़ एक हिन्दू लड़के को बुरी तरह पीटती हुई नज़र आ रही है। वीडियो में देखा जा सकता है कि गुस्साई भीड़ में शामिल लोग हिन्दू लड़के का बाल पकड़ कर उसे लगातार थप्पड़ मार रहे हैं। एक हमलावर ने लड़के का हाथ उसकी जैकेट से बाँध रखा है और अन्य उसका सिर झुका कर उसे बुरी तरह पीटते हैं। 

राहत ऑस्टिन ने अपने ट्वीट में लिखा है, “पाकिस्तान, सिंध के उमरकोट में कई मुस्लिम एक हिन्दू लड़के को पीट रहे हैं। बीते दिन ठीक इसी क्षेत्र में हिन्दुओं की दुकानों पर हमला किया गया था, इस घटना में 3 हिन्दू व्यापारियों को गोली भी लगी थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। यहाँ पर हालात बदतर होते जा रहे हैं, मुस्लिम चाहते हैं कि यहाँ रहने वाले हिंदू अपनी सम्पत्ति छोड़ इस शहर से बाहर चले जाएँ।” 

राहत ऑस्टिन ने एक और वीडियो साझा किया था जो कि सिंध के मुस्लिम आबादी वाले आयशा मार्केट क्षेत्र का था। इसमें इस्लामी भीड़ 3 हिन्दू व्यापारियों पर हमला करती है। इन तीनों व्यापारियों का नाम राजा मल्ही, आनंद और अशोक माली है, यह तीनों गोली लगने की वजह से घायल हुए थे। 

गैर मुस्लिमों की सम्पत्ति पर किए गए इस्लामी अतिक्रमण का उल्लेख करते हुए राहत ऑस्टिन ने लिखा, “पाकिस्तान के अधिकांश लोग गैर मुस्लिम समुदाय के लोगों की सम्पत्ति को खैरात का माल समझते हैं, इसलिए वह अक्सर इसे हड़पने का प्रयास करते हैं।” 

सिंध में रहने वाले हिन्दुओं के घरों पर इस्लामी हमले 

राहत ऑस्टिन ने इस बात की जानकारी सोमवार को दी थी कि पाकिस्तान के सिंध में इस्लामवादी भील समुदाय के हिन्दुओं के घरों पर हमला करते हैं। पाकिस्तान में भील समुदाय सामाजिक और आर्थिक रूप से काफी पिछड़ा हुआ माना जाता है। क्षेत्र में रहने वाले मोहम्मद असलम ने कई अन्य लोगों के साथ वहाँ के हिन्दुओं पर अत्याचार किया और उन्हें शहर छोड़ने के लिए मजबूर भी किया। प्रताड़ित हिन्दू अब अपने घर वापस लौटने से भी डरते हैं। उन्होंने बदिन, पाकिस्तान के सेशन जज और एसएसपी पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई है।

हाथरस केस: CBI ने आखिरी बयान को बनाया आधार, चार्जशीट में 4 मर्डर और रेप के आरोपित

हाथरस मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने 22 सितंबर को पीड़िता द्वारा दिए गए अंतिम बयान के आधार पर चार आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। बता दे, 14 सितंबर को कथित तौर पर 19 वर्षीय युवती के साथ आरोपितों ने सामूहिक बलात्कार किया था।

आरोपितों के वकील मुन्ना सिंह पुंढीर ने बताया कि सीबीआई मृतका के भाई को फोरेंसिक साइकोलॉजिकल टेस्ट के लिए गुजरात लेकर जाएगी।

विपक्षी नेताओं और मीडिया द्वारा मामले में राज्य सरकार को बदनाम करने वाली मंशा को देखते हुए यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मामले की सीबीआई जाँच की सिफारिश की थी। घटना के तूल पकड़ते ही कॉन्ग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता, भीम आर्मी और इस्लामवादी पीएफआई जैसे संगठनों ने निजी फायदे के लिए इस मामले का राजनीतिकरण करने का प्रयास किया था।

सीबीआई ने अपनी जाँच के दौरान जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टरों से मुलाकात की थी। जहाँ पीड़िता को कथित सामूहिक बलात्कार के बाद भर्ती किया गया था। वहीं स्कूल की मार्कशीट के आधार पर एक आरोपित नाबालिग भी पाया गया था।

गौरतलब है कि 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में पीड़िता की मौत हो गई। हालाँकि प्रारंभिक मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार के कोई संकेत नहीं मिले थे। पीड़िता के भाई द्वारा 14 सितंबर को थाने में दर्ज कराई गई शिकायत में भी बलात्कार का कोई उल्लेख नहीं था। बलात्कार का पहला आरोप पीड़िता द्वारा 22 सितंबर को लगाया गया था।

मामले में सीबीआई की रिपोर्ट एक विशेष एससी/एसटी कोर्ट में दायर की गई है। CBI ने आरोपित बनाए गए चार लोगों के खिलाफ IPC की धारा 302, 354, 376 A और 376 D के तहत चार्जशीट फाइल की है।

OLX पर ₹7.5 करोड़ में PM मोदी का बनारस ऑफिस बेच रहे थे धंधेबाज, 4 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश पुलिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी स्थित कार्यालय की बिक्री का विज्ञापन लगाने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपित ने पीएम मोदी के कार्यालय के लिए 7.5 करोड़ रुपए की कीमत लगाई थी।

पुलिस ने कहा कि आरोपित, जिन्हें जवाहर नगर कॉलोनी से गिरफ्तार किया गया, ने ऑनलाइन सामान खरीद-बिक्री वाली वेबसाइट ओएलएक्स पर प्रधानमंत्री के वाराणसी कार्यालय की एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसमें कहा गया था कि परिसर बिक्री के लिए उपलब्ध है।

इस मामले में पुलिस की ओर से बयान भी जारी किया गया है। वाराणसी पुलिस द्वारा अपने ट्विटर हैंडल पर इस से सम्बंधित बयान जारी किया गया। पुलिस का कहना है कि जिस व्यक्ति ने कार्यालय की तस्वीर क्लिक कर OLX पर डाला, उसके अलावा तीन अन्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। इनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और आगे की जाँच जारी है। 

यह मामला पुलिस के संज्ञान में आने के बाद OLX से विज्ञापन हटा दिया गया जिसके बाद एक प्राथमिकी दर्ज की गई। ओएलएक्स पर डाले गए इस विज्ञापन में कहा गया था कि वाराणसी के रवींद्रपुरी इलाके में पीएम का संसदीय कार्यालय बिक्री के लिए उपलब्ध है। पीएम मोदी का ये कार्यालय वाराणसी के भेलूपुर थाना क्षेत्र के जवाहर नगर एक्सटेंशन में है।

विज्ञापन में इस परिसर को चार कमरे और चार बाथरूम के साथ एक विला के रूप में दिखाया गया था। वेबसाइट पर विक्रेता का नाम लक्ष्मीकांत ओझा लिखा था। लेकिन यह पूरा मामला फर्जी नाम से कुछ शरारती तत्वों द्वारा ही किया गया। OLX पर इस पोस्ट में कार्यालय का पता कृष्ण देव नगर बताया गया था, जबकि पीएम मोदी का संसदीय कार्यालय वाराणसी के गुरुधाम कॉलोनी में है।

गौरतलब है कि वाराणसी पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र है, जहाँ से वर्ष 2014 और साथ ही वर्ष 2019 के आम चुनाव में पीएम मोदी लोकसभा के लिए चुने गए।

BJP-आरएसएस ऑफिस पर हमला, कैंडिडेट और नेताओं के बच्चों के घर भी बने निशाना: केरल में CPIM की गुंडई

केरल के स्थानीय निकाय चुनावों में जीत हासिल करने के बाद कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया-मार्क्सिस्ट (सीपीआईएम) के कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर हथियारबंद होकर हमला कर दियामीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सीपीआईएम के अराजक तत्वों ने केरल, कसरगोद जिले स्थित कंजनगाडू क्षेत्र के भाजपा कार्यालय में हमले की यह घटना अंजाम दी थी। इसी तरह के हमलों की घटना अपट्टी और पुथियाकोट्टा में अंजाम दी गई थी।

सीपीआईएम कार्यकर्ताओं ने अराई कार्तिका और अराई पलक्कल में भाजपा कार्यालय पर हमला किया। तोड़फोड़ की इस घटना के दौरान खिड़कियों के शीशे और दरवाज़े तोड़े गए और कार्यालय में रखी चीज़ों को भी नुकसान पहुँचाया गया। घटना के वक्त दो भाजपा कार्यकर्ता कार्यालय के भीतर मौजूद थे, सीपीआईएम के गुंडों ने उनके साथ मारपीट की। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ भाजपा नेता उमानाथ राव की बेटी के घर पर पथराव भी किया गया था। सीपीआईएम के गुंडे यहीं नहीं रुके, उन्होंने नेलिक्कट से भाजपा उम्मीदवार माधवन के घर पर पटाखे फेंके। जिसकी वजह से इस घटना में उनकी पत्नी को गंभीर चोटें आई। 

अलप्पी में आरएसएस कार्यालय पर हमला 

इसके पहले ख़बर आई थी कि बुधवार (16 दिसंबर 2020) को अलाप्पुज़ा के कार्तिकापल्ली स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय पर सीपीआईएम के कार्यकर्ताओं ने हमला किया था। पुलिस ने हमले की इस घटना के संबंध में 5 लोगों पर मामला दर्ज किया था। इस घटना की सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई थी जिसमें साफ़ देखा जा सकता था कि किस तरह अराजक तत्व बेख़ौफ़ होकर कार्यालय में तोड़फोड़ कर रहे हैं।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक़ एक आरोपित दो पहिया वाहन से आया और उसने कार्यालय पर बम फेंका। घटना के बाद बरामद की गई फुटेज देख कर यह पता चलता है कि कार्यालय के बाहर आग लगाईं गई थी। केरल में इस तरह की घटनाएँ बेहद आम होती जा रही है, विशेष तौर पर मलप्पुरम के उत्तरी क्षेत्र में। इसके अलावा प्रदेश के अलाप्पुज़ा में इस तरह के हिंसक हमले की घटनाएँ अंजाम दी गई हैं। 

त्रिवेंद्रम कॉरपोरेशन और पलक्कड़ म्युनिसिपलिटी में 13.28 फ़ीसदी वोट हासिल करने और केरल में बीजेपी को राजनीतिक ज़मीन बनाते देख सीपीआईएम के गुंडों ने ये हमले किए हैं। भाजपा ने कई ऐसी सीटों पर भी जीत हासिल की है जो कम्युनिस्ट पार्टी का गढ़ मानी जाती रही हैं, इसमें कन्नूर और कसरगोद शामिल हैं। इस तरह की तमाम बातों की वजह से कम्युनिस्ट पार्टी के खेमे में काफी हलचल है।   

जानवरों की चर्बी, सींग, खुर और हड्डियों से बनाते थे घी: आगरा की फैक्ट्री सील, चाँद बाबू सहित 4 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश पुलिस ने आगरा के खंदौली क्षेत्र में नकली घी बनाने वाली फैक्ट्री का खुलासा किया। इस फैक्ट्री में जानवरों की चर्बी, सींग, हड्डियों और खुर को उबालकर घी बनाया जाता था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से लगभग 100 किलोग्राम से अधिक नकली घी बरामद किया। इसके अलावा पुलिस ने घटना के संबंध में कुल 4 लोगों को गिरफ्तार भी किया है जबकि दो अन्य मौके से भागने में सफल रहे। फ़िलहाल पुलिस ने इन सभी आरोपितों पर मामला दर्ज कर फैक्ट्री को सील कर दिया है। 

खाद्य सुरक्षा विभाग ने सूचना मिलने के बाद मंगलवार (15 दिसंबर 2020) को फैक्ट्री पर छापा मारा। छापेमारी की कार्रवाई के बाद विभाग ने बरामद किए गए 100 किलोग्राम घी का नमूना जाँच के लिए भेज दिया था। इस फैक्ट्री के नज़दीक स्थित बाड़े में अवैध बूचड़खाना भी चलाया जा रहा था। खाद्य सुरक्षा अधिकारी त्रिभुवन सिंह की तहरीर के आधार पर कुल 6 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। 

मामले के आरोपितों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 272-273 (विक्रय के लिए खाद्य या पेय वस्तु का अपमिश्रण) और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 26 (असुरक्षित-संदूषित-अवमानक खाद्य) के तहत मामला दर्ज किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों में फैक्ट्री संचालक चाँद बाबू, शेफी, इकबाल और ताहिर शामिल हैं। फ़िलहाल पुलिस घटना के दो अन्य फ़रार आरोपितों शल्लो और शोहिल की तलाश में जुटी हुई है।  

इस घटना पर थाना प्रभारी अरविन्द कुमार निर्वाल ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया, “मोहल्ला व्यापारियान में भैंस के सींग और जानवरों की चर्बी को आग में पिघला कर नकली घी बनाने का कारोबार चल रहा था। इसके अलावा मौके पर कई अन्य तरह के रासायनिक पदार्थ (chemicals) बरामद किए गए हैं, जिनका उपयोग चर्बी को घी में बदलने के लिए किया जाता था। पूछताछ के दौरान यह भी पता चला कि जानवरों की चर्बी से नकली घी बनाने का कारोबार पिछले काफी समय से चल रहा था।” 

यह लोग जानवरों की चर्बी को चूल्हे पर उबालकर इसमें तय मात्रा में वनस्पति और रिफाइंड मिलाते थे। इसकी खुशबू की वजह से यह एकदम असली घी लगता था और इसका उत्पादन इतने बड़े पैमाने पर होता था कि आस-पास के कई शहरों में भेजा जाता था। पूछताछ के दौरान आरोपितों ने बताया कि एक किलो घी तैयार करने में लगभग 23 रुपए का खर्च आता था। यह व्यापारियों को 60 रुपए/किलोग्राम में बेचा जाता था और व्यापारी यही घी 200 रुपए/किलोग्राम तक बेचते थे।        

‘उनको कृषि कानूनों से पीड़ा नहीं, वे इस बात से परेशान हैं कि मोदी ने कैसे कर दिया’

किसान आंदोलन के बीच मोदी सरकार पर किसान विरोधी होने के इल्जाम लग रहे हैं। ऐसे में आज (दिसंबर 17, 2020) पीएम मोदी ने किसान महासम्मेलन को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के 35 लाख किसानों के बैंक खातों में 16 करोड़ रुपए भेजे ताकि वह प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान से बच पाएँ। कार्यक्रम में कई किसानों को क्रेडिट कार्ड दिया गया और सुविधाओं की बाबत कई नियमों में बदलाव किए गए।

पीएम मोदी ने कहा, “तेजी से बदलते हुए वैश्विक परिदृष्य में भारत का किसान, सुविधाओं के अभाव में, आधुनिक तौर तरीकों के अभाव में असहाय होता जाए, ये स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती। पहले ही बहुत देर हो चुकी है। जो काम 25-30 साल पहले हो जाने चाहिए थे, वो अब हो रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत का किसान और कृषि अब और पिछड़ी नहीं रह सकती। दुनिया को जो सुविधा प्राप्त है, वह सारी सुविधा भारतीय किसानों को मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने नए कानूनों को लेकर और उस पर उठे विवाद पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा, “बीते दिनों से देश में किसानों के लिए जो नए कानून बने, उनकी बहुत चर्चा है। ये कृषि सुधार कानून रातों-रात नहीं आए। पिछले 20-22 साल से हर सरकार ने इस पर व्यापक चर्चा की है। कम-अधिक सभी संगठनों ने इन पर विमर्श किया है।”

वह बोले, “सचमुच में तो देश के किसानों को उन लोगों से जवाब माँगना चाहिए जो पहले अपने घोषणा पत्रों में इन सुधारों की बात लिखते रहे, किसानों के वोट बटोरते रहे, लेकिन किया कुछ नहीं। सिर्फ इन माँगों को टालते रहे और देश का किसान, इंतजार ही करता रहा।”

पीएम मोदी ने विरोधियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “मुझे लगता है कि उनको पीड़ा इस बात से नहीं है कि कृषि कानूनों में सुधार क्यों हुआ। उनको तकलीफ इस बात से है कि जो काम हम कहते थे लेकिन कर नहीं पाते थे, वो मोदी ने कैसे किया, मोदी ने क्यों किया।”

उन्होंने राजनीतिक दलों से कहा, “मैं सभी राजनीतिक दलों को कहना चाहता हूंँ कि आप अपना क्रेडिट अपने पास रखिए। मुझे क्रेडिट नहीं चाहिए। मुझे किसान के जीवन में आसानी चाहिए, समृद्धि चाहिए, किसानी में आधुनिकता चाहिए। कृपा करके किसानों को बरगलाना, उन्हें भ्रमित करना छोड़ दीजिए।” पीएम ने कहा कि आज भ्रम और झूठ का जाल बिछाकर अपनी राजनीतिक जमीन जोतने के खेल खेले जा रहे हैं।

किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर वार किए जा रहे हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि किसानों की बातें करने वाले लोग कितने निर्दयी हैं इसका बहुत बड़ा सबूत है स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट। ये लोग स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को 8 साल तक दबाकर बैठे रहे। किसान आंदोलन करते थे, प्रदर्शन करते थे लेकिन इन लोगों के पेट का पानी नहीं हिला। जबकि किसानों के लिए समर्पित मोदी सरकार किसानों को अन्नदाता मानती है। इसलिए सरकार ने फाइलों के ढेर में फेंक दी गई स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट बाहर निकाला और उसकी सिफारिशें लागू कीं, किसानों को लागत का डेढ़ गुना MSP दिया।

उन्होंने बताया कि सरकार लगातार पूछ रही है, पब्लिक में, मीटिंग में पूछ रही है कि आपको कानून के किस क्लॉज में दिक्कत है, तो उन राजनीतिक दलों के पास कोई ठोस जवाब नहीं होता, यही इन दलों की सच्चाई है।

पीएम ने किसानों के साथ हुई धोखाधड़ी पर ध्यान आकर्षित करवाया और मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस सरकार के हालात व किसानों की अपेक्षाएँ बताईं। उन्होंने पीएम किसान योजना का जिक्र करते हुए कहा, “हमारी सरकार ने जो पीएम-किसान योजना शुरू की है, उसमें हर साल किसानों को लगभग 75 हजार करोड़ रुपए मिलेंगे। यानि 10 साल में लगभग साढ़े 7 लाख करोड़ रुपए। किसानों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर। कोई लीकेज नहीं, किसी को कोई कमीशन नहीं।”

7-8 साल पहले देश में यूरिया के हालातों पर पीएम ने गौर करवाया है और आज के साथ उसकी तुलना की। पुरानी सरकार की नाकामयाबियाँ भी पीएम ने अपने संबोधन में गिनवाईं और उन प्रोजेक्ट्स को बताया जो लंबे समय से लटके हुए हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “किसानों की लागत कम हो, इसके लिए भी सरकार ने निरंतर प्रयास किए हैं। किसानों को सोलर पंप बहुत ही कम कीमत पर देने के लिए देशभर में बहुत बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। हम अपने अन्नदाताओं को ऊर्जादाता बनाने पर भी काम कर रहे हैं।”

उन्होंने बोला, “मैं विश्वास से कहता हँ कि हमने हाल में जो कृषि सुधार किए हैं, उसमें अविश्वास का कारण ही नहीं है, झूठ के लिए कोई जगह ही नहीं है। स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू करने का काम हमारी ही सरकार ने किया। अगर हमें MSP हटानी ही होती तो स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू ही क्यों करते?”

उन्होंनेे पूछा, “हमारी सरकार MSP को लेकर इतनी गंभीर है कि हर बार, बुवाई से पहले MSP की घोषणा करती है। इससे किसान को भी आसानी होती है, उन्हें भी पहले पता चल जाता है कि इस फसल पर इतनी MSP मिलने वाली है।”

अपने भाषण में पीएम ने MSP और APMC को लेकर कुछ तथ्यात्मक आँकड़े पेश किए और कहा कि सरकार ने न सिर्फ MSP में वृद्धि की, बल्कि ज्यादा मात्रा में किसानों से उनकी अपज को MSP पर खरीदा है।

उन्होंने पुराने समय में आए दलहन संकट जैसे विषयों पर गौर करवाया और कहा कि नए कानून के बाद 6 महीने हो गए हैं, देश में एक भी मंडी बंद नहीं हुई है। फिर क्यों ये झूठ फैलाया जा रहा है?हमारी सरकार APMC को आधुनिक बनाने पर, उनके कंप्यूटरीकरण पर 500 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर रही है। फिर ये APMC बंद किए जाने की बात कहाँ से आ गई।

पीएम ने कई पुरानी रिपोर्ट्स पर भी गौर करवाया और आखिर में खुशी व्यक्त की कि किसानों ने नए कृषि सुधारों को न सिर्फ गले लगाया है बल्कि भ्रम फैलाने वालों को भी सिरे से नकार रहे हैं। जिन किसानों में अभी थोड़ी सी आशंका बची है उन्हें फिर से सोचने की सलाह पीएम ने दी।

वह कहते हैं, “मेरी इस बातों के बाद भी, सरकार के इन प्रयासों के बाद भी, अगर किसी को कोई आशंका है तो हम सिर झुकाकर, हाथ जोड़कर, बहुत ही विनम्रता के साथ, देश के किसान के हित में, उनकी चिंता का निराकरण करने के लिए, हर मुददे पर बात करने के लिए तैयार हैं।”

आखिर में उन्होंने बताया, “अभी 25 दिसंबर को, श्रद्धेय अटल जी की जन्मजयंती पर एक बार फिर मैं इस विषय पर और विस्तार से बात करूँगा।उस दिन पीएम किसान सम्मान निधि की एक और किस्त करोड़ों किसानों के बैंक खातों में एक साथ ट्रांसफर की जाएगी।”

TMC कार्यकर्ताओं ने फाड़े MLA जितेंद्र तिवारी के पोस्टर, कहा- ममता बनर्जी को धोखा दिया

पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने आज (दिसंबर 18, 2020) आसनसोल में विधायक जितेंद्र तिवारी के पोस्टर फाड़ दिए। ममता सरकार के रवैए से नाराज तिवारी ने एक दिन पहले ही आसनसोल नगर निगम के चेयरमैन और पार्टी जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, जितेंद्र तिवारी के ख़िलाफ़ नारेबाजी करते हुए टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उनके के पोस्टर फाड़े। उनका कहना था कि तिवारी ने ममता बनर्जी और टीएमसी को धोखा दिया और साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ हिटलर जैसा बर्ताव किया। इन लोगों ने आरोप लगाया कि पूर्व जिलाध्यक्ष ने आसानसोल की जनता को विकास के नाम पर ठगा है।

बता दें कि इससे पूर्व पश्चिम बंगाल के पांडवेश्वर से तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के विधायक जितेंद्र तिवारी ने दावा किया था कि आसनसोल नगर निगम के बोर्ड ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद उनके कार्यालय में तोड़फोड़ की गई थी।

द पायनियर के अनुसार, तिवारी ने कहा था, “कोलकाता से आए निर्देशों पर मेरे पद छोड़ने के एक घंटे बाद ही मेरे कार्यालय पर हमला कर दिया गया। अब मेरे लिए ये मुमकिन नहीं है कि मैं इनके साथ रहूँ। मैंने जिलाध्यक्ष (TMC) के पद से इस्तीफा दे दिया है।”

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में ममता सरकार की परेशानी दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। जितेंद्र तिवारी से पहले शुभेंदु अधिकारी को अपने पद से इस्तीफा दे चुके थे और अब आज खबर आई है कि कबिरुल इस्लाम ने भी पार्टी की माइनॉरिटी सेल के मुख्य सचिव के पद से रिजाइन कर दिया है। इसके अलावा शुक्रवार सुबह बैरकपुर से विधायक शीलभद्र दत्ता ने भी पार्टी छोड़ने का ऐलान किया था।