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‘एक ने मेरे पीछे अपना हाथ रख दिया…’: केरल के मॉल में क्या-क्या हुआ, हीरोइन ने सब कुछ बताया

केरल के एक मॉल में मलयालम एक्ट्रेस के साथ छेड़छाड़ का मामला उजागर हुआ है। घटना कोच्चि के लुलु मॉल की है। एक्ट्रेस के मुताबिक वह अपनी माँ और बहन के साथ शॉपिंग के लिए गई थी, जहाँ दो युवकों ने उसके साथ बदसलूकी की। सीसीटीवी से घटना की पुष्टि के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और अब युवकों की पहचान की जा रही है। राज्य की महिला आयोग ने इस मामले पर संज्ञान लिया है।

एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर आपबीती साझा करते हुए एक पोस्ट भी शेयर किया है। इस पोस्ट में उन्होंनें महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों का जिक्र किया और साथ ही पुरुषों पर आरोप लगाया कि उन्होंने स्त्री से उसकी से सेफ्टी, कंफर्ट और आनंद सब कुछ छीन लिया है।

अपने पोस्ट में एक्ट्रेस ने लिखा,

“मैं आमतौर पर सोशल मीडिया पर शेखी मारने वालों में से नहीं हूँ। लेकिन मेरे साथ आज जो हुआ इसे ऐसे ही जाने नहीं दिया जा सकता। दो लोग लुलु हाइपर मार्केट में मेरे पास से गुजरे जहाँ कभी-कभी ही भीड़ होती है। इनमें से एक ने मेरे पास से गुजरते हुए मेरे पीछे अपना हाथ रख दिया। मुझे पता तो चला लेकिन मैं तुरंत रिएक्ट नहीं कर पाई। मैं उन्हें संदेह दर्शाना चाहती थी लेकिन आपको पता है कि जब कुछ गलत होता है तो पता चल ही जाता है। आपको महसूस हो जाता है। मेरी बहन ने ये सब साफ देखा क्योंकि वो दूर नहीं खड़ी थी। उसने मुझे आकर पूछा कि क्या मैं ठीक हूँ। मैं बिलकुल ठीक नहीं थी।”

आगे उन्होंने लिखा,

“मैंं एक मिनट के लिए सन्न रह गई। मैं उनके पास गई लेकिन उन्होंने मुझे इग्नोर किया। मैं समझ गई कि इन्हें मालूम है कि मुझे पता चल चुका है। दोनों फौरन मेरे सामने से चले गए। मैं गुस्से में थी क्योंकि मैं कुछ कह नहीं पाई थी। मुझे कुछ सूझा ही नहीं। मैं और मेरी बहन, माँ व भाई के पास आए और सब्जी के काउंटर पर खड़े हो गए। वह लोग हमें तब भी फॉलो करते रहे। ”

एक्ट्रेस के मुताबिक,

“जब माँ और भाई चीजें समेट रहे थे और मैं बिल के लिए कार्ट ले जा रही थी, ये लोग मेरे पास आए और मुझसे व मेरी बहन से बात करने का प्रयास करने लगे। इन्होंने मेरे से बात करते हुए पास आने की कोशिश की। वह मेरी फिल्मों के नाम जानना चाहते थे। हम बिलकुल सकपका गए और उन लड़कों से उनके काम से काम रखने को कहा। जैसे ही मेरी माँ हमारे पास आईं वो दोनों चले गए। ”

घटना को साझा करते हुए एक्ट्रेस लिखती हैं कि वो उन्हें सैंकड़ों बातें कह सकती थीं जो उन्होंने नहीं कही। वह कहती हैं कि सोशल मीडिया पर इस घटना को लिख कर वह केवल राहत चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वो जानती हैं कि ऐसे लोग ये सब दोबारा कर सकते हैं, इसलिए उन्हें गुस्सा आ रहा है। वह बताती है कि ये सब पहली दफा नहीं है जब उन्होंने ये सब अनुभव किया। हर बार यह सब अलग और मुश्किल होता है।

वह महिलाओं के समक्ष आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहती हैं,

“जब भी झुको या घूमों अपने कपड़े देखने पड़ते हैं। हाथों से अपने वक्ष को सुरक्षित रखना पड़ता है। सूची बहुत लंबी है। जब मैं घर में होती हूँ तो मुझे मेरी माँ, बहन, दोस्तों की चिंता रहती है जो यही सब करती हैं। ये सब सिर्फ बीमार पुरुषों के कारण होता है। इन लोगों ने हमसे हमारी सुरक्षा ले ली है। हमारी सहजता छीन ली है। तुमने हमसे हमारे स्त्रीत्व का आनंद छीन लिया है। मुझे तुमसे नफरत है। जो पुरुष इसे पढ़ रहे हैं, अगर तुमने कभी किसी महिला के साथ गलत किया तो तुम जीवन के सबसे निम्न स्तर पर होगे और तुम कुछ और नहीं बल्कि जहन्नुम ही डिजर्व करते हो। मैं आशा और प्रार्थना करती हूँ कि तुम्हें उन लोगों की तरह कभी किसी का सामना न करना पड़े। जो महिलाएँ इसे पढ़ रही हैं मैं उम्मीद करती हूँ कि जो हिम्मत मुझमें आज नहीं है उनमें वो हिम्मत हो, कि वो ऐसे पुरुषों के मुँह पर थप्पड़ मार सकें  ”

‘मोदी तेरी खैर नहीं… इंशा अल्लाह ताला हिंदुओं का नामोनिशान मिट जाएगा दुनिया से’: सिखों को साथ ले जंग का ऐलान करते ‘मौलाना’ का पुराना वीडियो वायरल

कृषि कानूनों के विरोध के नाम पर जारी किसान आंदोलन में खालिस्तानियों, इस्लामी कट्टरपंथियों और अतिवादी वामपंथियों की घुसपैठ तथा हिंसा की साजिश रचे जाने की खबरों के बीच एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें मौलाना की तरह दिखने वाला एक बुजुर्ग समझा रहा है कि कैसे मुसलमान, सिखों और कश्मीरियों को साथ लेकर हिंदुओं के खिलाफ जंग कर सकता है।

इस तरह के वीडियो का वायरल होना इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि ऐसा ही ट्रेंड सीएए के विरोध के नाम पर भी देखने को मिला था। जिसकी अंतिम परिणति उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के तौर पर हुई थी।

किसान आंदोलनों के बीच मैसेंजर ऐप व्हाट्सऐप पर वायरल हो रहे इस पुराने वीडियो में मुस्लिमों और सिखों की संख्या जोड़कर भारत और मोदी को सबक सिखाने का ऐलान किया जा रहा है। हिन्दुओं का नामोनिशान मिटाने तक की भी बात कही जा रही है।

यह वीडियो व्हाट्सऐप पर फॉरवर्ड किया जा रहा है

व्हाट्सऐप पर वायरल यह वीडियो ‘नया पाकिस्तान’ नाम के किसी वीडियो चैनल द्वारा बनाया गया है। वीडियो में हाथ में माइक लिए एक रिपोर्टर के अलावा कुछ लोग नजर आ रहे हैं। इनमें से एक सफ़ेद कुर्ता और सफ़ेद दाढ़ी वाले बुजुर्ग कह रहा है, “देखो जी चौदह करोड़ सिख हैं जी। एक करोड़ कश्मीरी हैं जी और तीस करोड़ वहाँ पे इंडिया में मुसलमान हैं। अब पन्द्रह वे हो गए और तीस ये हो गए हैं। पैंतालीस हजार मुसलमान हो गए हैं।”

यहाँ पर रिपोर्टर उन्हें टोकते हुए कहता है, “पैंतालीस करोड़!”

इसके आगे बुजुर्ग कहता है, “हाँ पैंतालीस करोड़ मुसलमान हो गए हैं, अगर सिख भी हमारे साथ होंगे इंशा अल्लाह, उन्हें हमने इज्जत दी है, हमने उन्हें सर पे बिठाया है, पाकिस्तान, इमरान खान ने उन्हें इज्जत दी है, जनरल कमर बाजवा ने उन्हें इज्जत दी है। पाक फ़ौज ने उनका एहतराम किया है जी। इंशा अल्लाह ताला वो अब जंग में हमारे साथ होंगे।”

इसके आगे बुजुर्ग व्यक्ति भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जिक्र करते हुए कहता है, “मोदी को अब सबक सिखाने का टाइम आ गया, इंशा अल्लाह ताला, पैंतालीस करोड़ वहाँ होंगे, बीस करोड़ आवाम यहाँ है…”

इसके बाद बुजुर्ग भावनाओं में बहते हुए और ऊँची आवाज में नारे लगाते हुए बोलता है, “मोदी अब तेरी खैर नहीं। इंशा अल्लाह ताला, हिन्दुओं का नामोनिशान मिट जाएगा दुनिया से।”

इसके साथ ही वहाँ पर मौजूद सारी भीड़ बुजुर्ग व्यक्ति के समर्थन में नारेबाजी करती और तालियाँ बजाते हुए देखी जा सकती है। वही सफ़ेद लिबास वाला बुजुर्ग इसके आगे कहता है, “यह बहुत बड़ा कारनामा है जी। जनरल बाजवा, पाकिस्तान और इमरान खान का, ये तो हम सोच भी नहीं सकते।”

गौरतलब है कि यह वीडियो नवम्बर, 2019 में पीओके के मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार आरिफ अजाकिया द्वारा ट्वीट किया गया था। आरिफ अजाकिया ने इसे शेयर करते हुए लिखा, “एक तो पाकजबी, फिर मुल्ला और वो भी बूट पोलिशिया। 45 करोड़ मुसलमान और 15 करोड़ सिख।” आरिफ अजाकिया ने इसके साथ ही हँसने वाली मजाकिया ‘इमोजी’ इस्तेमाल की थी।

वैसे इस वीडियो का हालिया किसान आंदोलन से कोई संबंध नहीं है। लेकिन, इस वक्त इसे वायरल किए जाने से किसान आंदोलन की आड़ में हिंसा की साजिशों को लेकर जताई जा रही आशंकाओं को और पुख्ता करता है।

SC ने भाजपा नेताओं को दी अंतरिम सुरक्षा, बंगाल सरकार से कहा- अगले आदेश तक न हो कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में आपराधिक मामलों का सामना कर रहे भाजपा नेताओं को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। दरअसल, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के उकसावे पर बंगाल पुलिस द्वारा भाजपा नेताओं को निशाना बनाए जाने (विच-हंटिंग) के खिलाफ कुछ भाजपा नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

बीते दिनों ममता सरकार द्वारा भाजपा नेताओं पर आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए थे जिनके खिलाफ अब भाजपा नेता सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए हैं। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज यानि, 18 दिसंबर को सुनवाई करेगा।

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, पश्चिम बंगाल से भाजपा सांसद अर्जुन सिंह, सौरव सिंह, पवन कुमार सिंह, कबीर शंकर बोस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इन सभी भाजपा नेताओं ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज सभी मामलों को किसी अन्य ‘स्वतंत्र जाँच एजेंसी’ को हस्तांतरित करने की माँग की है।

याचिका में भाजपा नेताओं ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया है कि राजनीतिक विद्वेष के चलते ममता बनर्जी सरकार ने उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट इन मुकदमों को रद्द करे या फिर बंगाल से बाहर हस्तांतरित कर दिए जाएँ।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भाजपा नेताओं को इस याचिका के सम्बन्ध में अंतरिम संरक्षण दिया है। इसके साथ ही, उनके खिलाफ पश्चिम बंगाल में दर्ज किए गए आपराधिक मामलों में राज्य पुलिस को कोई भी कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने भाजपा नेताओं द्वारा दायर पाँच अलग-अलग दलीलों पर पश्चिम बंगाल सरकार से प्रतिक्रिया माँगी और उन्हें राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखते हुए आपराधिक मामलों को रोकने के लिए कहा और कहा कि सुनवाई की अगली तारीख तक सामूहिक कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण जारी रहेगा।

एडवोकेट अवंतिका मनोहर के जरिए अदालत का रुख करने वाले मुख्य याचिकाकर्ता अर्जुन सिंह ने कहा है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देने के ठीक बाद उन्हें बंगाल पुलिस ने उन पर 64 मामले, बिना किसी प्रारंभिक जाँच के दर्ज किए।

भाजपा सांसद अर्जुन सिंह के घर पर फेंके गए बम, जिसमें उनका बेटा भी घायल हो गया था, में TMC सदस्यों का हाथ होने का हवाला देते हुए , बंगाल के भाजपा नेता ने दावा किया है कि स्थानीय पुलिस ने उनकी शिकायत पर एक प्राथमिकी दर्ज करने से भी इनकार कर दिया और उन्हें मदद के लिए मुख्य ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के पास जाने के लिए मजबूर किया गया।

अर्जुन सिंह ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल पुलिस सत्ताधारी राजनीतिक दल के इशारे पर काम कर रही है और उनके ‘व्यक्तिगत और राजनीतिक हितों’ की ही सेवा कर रही है।

एक अन्य भाजपा नेता कबीर शंकर बोस ने शिकायत में कहा है कि उन्हें जानबूझकर कोविड आइसोलेशन वार्ड में अन्य कोरोना संक्रमित मरीजों के साथ रखा गया था। बोस ने खुद को पश्चिम बंगाल राज्य सरकार द्वारा अत्यधिक यातना, दमन और राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बताया है।

ज्ञात हो कि भाजपा नेता बोस ने टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी की बेटी से शादी की थी, जिनके बीच बाद में तलाक हो गया था। बोस ने कहा कि तलाक के लिए पत्र दायर किए जाने के बाद, उनके खिलाफ ममता बनर्जी के इशारे पर पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाकर कई मामले दर्ज किए गए।

पीठ ने इन भाजपा नेताओं को सुरक्षा प्रदान करते हुए, गृह मंत्रालय को टीएमसी कार्यकर्ताओं और पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता कबीर शंकर बोस के सुरक्षा कर्मचारियों के बीच कथित हाथापाई के बारे में एक रिपोर्ट एक सीलबंद कवर में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

जोजिला के पास बनेगी स्विट्जरलैंड के दावोस से सुन्दर ‘हिल सिटी’, दो वर्षों में ‘टोल प्लाजा मुक्त’ होगा भारत: नितिन गडकरी


केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ऐलान किया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर मौजूद टोल प्लाजाओं को हटा दिया जाएगा। यानी बहुत जल्द देश के राजमार्गों पर वाहन बिना किसी रोकटोक के यात्रा कर सकेंगे। केंद्रीय मंत्री ने एसोचैम फाउंडेशन वीक 2020 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह ऐलान किया। सरकार पूरे देश में वाहनों का बिना रोकटोक आवागमन सुनिश्चित करना चाहती है, इसके लिए जीपीएस तकनीक पर आधारित टोल संग्रह पर काम किया जा रहा है। इसकी मदद से आगामी दो वर्षों में भारत के राजमार्ग ‘टोल प्लाजा मुक्त’ हो जाएँगे।  

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक़, “वाहनों के आवागमन के आधार पर टोल की राशि सीधे बैंक खाते से काट ली जाएगी। हालाँकि, अब लगभग सारे ही कॉमर्शियल वाहन टैकिंग सिस्टम के साथ आ रहे हैं। सरकार पुराने वाहनों को भी जीपीएस तकनीक में शामिल करने के लिए तकनीक लेकर आने वाली है।” 

इसके अलावा नितिन गडकरी ने बताया कि केंद्र सरकार जोजिला के पास नया शहर बसाने पर विचार कर रही है। उन्होंने संबोधन के दौरान बताया, “जोजिला और जे मोड़ के पास 19 किलोमीटर का क्षेत्र है जो स्विट्जरलैंड के दावोस से भी अधिक सुंदर है। इस बात को मद्देनज़र रखते हुए एक बैठक आयोजित की जाएगी जिसमें पूरे क्षेत्र को हिल स्टेशन की तरह विकसित करने पर चर्चा होगी।”

केंद्रीय मंत्री का कहना था कि इस क्षेत्र में लगभग 3 मीटर की बर्फ़बारी होती है, जिससे पूरा नज़ारा बेहद शानदार हो जाता है। ऐसे में यहाँ रिजॉर्ट, होटल और कांफ्रेंस रूम बनाने पर विचार किया जा सकता है। इसके लिए फ़िलहाल एक कांट्रेक्टर से संपर्क किया गया है जो स्विट्ज़रलैंड की कंपनी के साथ काम करते हैं। दरअसल, हाल ही में जम्मू कश्मीर में ‘अटल टनल की शुरुआत की गई थी और इसके बाद जोजिला परियोजना पर काम जारी है। इसके तहत जोजिला-दर्रे के पहाड़ काट कर सुरंग बनाई जा रही है, केंद्रीय मंत्री ने जिस हिस्से का उल्लेख किया है वह इसी के पास मौजूद है।

इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने इस पहलू पर भी जानकारी दी कि सरकार किस तरह जीपीएस स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि रूस के पास इस योजना को लेकर विशेषज्ञता है, जिसमें दूरी के आधार पर टोल की राशि काट ली जाती है। यह योजना संभावित तौर पर आगामी दो वर्षों में लागू कर दी जाएगी।  

साथ ही केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर भरोसा जताया है कि अगले पाँच वर्षों में टोल कलेक्शन 1.34 लाख करोड़ रुपए पहुँच सकता है। अभी तक वायबिलिटी गैप फंडिंग को सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में लागू किया जाता था लेकिन अब इसे अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा। इसमें मुख्य रूप से सामाजिक क्षेत्र, स्वास्थ्य क्षेत्र और शिक्षा का क्षेत्र शामिल है जिनमें वायबिलिटी गैप फंडिंग की सुविधा मिलेगी। 

नितिन गडकरी के अनुसार केंद्र सरकार पूरे देश में वाहनों के स्वतंत्र आवागमन को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठा रही है। बीते 1 साल के दौरान मंत्रालय ने देश के सभी टोल प्लाजाओं पर FASTags अनिवार्य कर दिए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित टोल प्लाजा पर FASTags की अनिवार्यता के बाद ईंधन की खपत कम हुई है। साथ ही प्रदूषण पर भी पर काफ़ी हद तक लगाम लगी है। 

अंत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत का औद्योगिक विकास रोजगार सृजन और गरीबी उन्मूलन के लिए बेहद अहम है। फ़िलहाल, अधिकांश उद्योग भारत के शहरी क्षेत्रों में केंद्रीकृत हैं क्योंकि इस तरह के उद्योग विकेंद्रीकरण विकास दर को बढ़ावा देने के लिए ज़रूरी हैं। हालाँकि, बढ़ते शहरीकरण से तमाम समस्याएँ भी पैदा हो रही हैं जिसमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता चेन्नई जैसे अन्य शहर शामिल हैं। इन शहरों में बुनियादी ढाँचे के विकास में सार्वजनिक निजी निवेश को बढ़ावा देने की आवश्यकता का भी उल्लेख किया।     

कुशवाहा के मीम पर हँसना मना है: कंगना के खिलाफ गया के कोर्ट में कंप्लेन

बॉलीवुड के विवादों से लेकर किसान आंदोलन तक, हर मुद्दे कंगना रनौत खुलकर बोलती हैं। इसको लेकर अक्सर उनको मुश्किलों का सामना भी करना पड़ता है। अपने बयानों को लेकर वह महाराष्ट्र की सरकार और अन्य नेताओं के निशाने पर पहले से ही हैं। अब एक ट्विटर कमेंट की वजह से उनके खिलाफ एक नेता ने बिहार की एक कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई है।

जानकारी के मुताबिक, यह शिकायत राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को लेकर एक्ट्रेस के ट्विटर कमेंट पर की गई है। इसके लिए कंगना के खिलाफ गया के सिविल कोर्ट में परिवाद दायर की गई है।

वकील शंभू प्रसाद ने मीडिया को बताया, “किसी भी नेता के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करना अपराध है। इसलिए, हमने अदालत से हमारी शिकायत पर संज्ञान लेने की अपील की है।”

बता दें कंगना के जिस ट्वीट को आरएलएसपी नेता उपेंद्र कुशवाहा और उनके फॉलोवर्स ने अपराध मान कर शिकायत दर्ज करवाई है, वह एक मामूली सा वायरल मीम है। इसमें आरएलएसपी नेता उपेंद्र कुशवाहा की तस्वीर शामिल थी और कंगना ने उसे शेयर करते हुए हँसने वाला इमोजी पोस्ट किया था।

कंगना ने यह पोस्‍ट 3 दिसंबर को किया था। कंगना ने राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा सहित कई नेताओं की पुरानी फोटो वाली मीम शेयर की थी जिसमें उन्हें लुटियंस, लिबरल, जिहादी, आजाद कश्मीर, अर्बन नक्सल, वामपंथी और खालिस्तानी बताया गया था। मीम्स के माध्‍यम से इन सभी नेताओं को टुकड़े-टुकड़े गैंग का नया स्टार कहा गया था। यह भी बताया गया कि कैसे प्रत्येक भारत-विरोधी तत्व अपने स्वयं के राजनीतिक लाभों के लिए कश्मीर की आज़ादी के बारे में बात करने की कोशिश कर रहा है।

कंगना रनौत ने मीम शेयर करते हुए हँसने वाली इमोजी पोस्ट की थी। इसे देख आरएलएसपी नेता उपेंद्र कुशवाहा और उनके समर्थक नाराज हो गए। उल्लेखनीय है कि यह मीम महज एक मजाक था, जिसमें आरएलएसपी नेता उपेंद्र कुशवाहा की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर मीम्स को शेयर करना और राजनेताओं पर तंज कसना आम बात है। यहाँ पर यह बात समझ से परे है कि केवल एक मीम पर हँसने के लिए कंगना रनौत के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है।

हाल ही में, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य ने भी कंगना रनौत को उनके ट्वीट पर कानूनी नोटिस भेजा था, जिसमें कथित रूप से नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों को निशाना बनाया गया था। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में कहा गया था कि अभिनेत्री ने मोदी सरकार के खिलाफ ‘किसान विरोध’ में शामिल किसानों, प्रदर्शनकारियों और कार्यकर्ताओं को बदनाम किया है।

इसी तरह, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के एक अन्य सदस्य ने भी कंगना रनौत को दिल्ली में किसानों के विरोध-प्रदर्शन में एक बुजुर्ग औरत को ‘शाहीन बाग की दादी’ बताने पर कानूनी नोटिस भेजा है। यह नोटिस समिति के सदस्य जसमैन सिंह नोनी की ओर से अधिवक्ता हरप्रीत सिंह होरा द्वारा भेजा गया था।

इससे पहले, उच्च न्यायालय में कंगना के खिलाफ एक रिट याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में उनके ट्विटर एकाउंट को बंद करने की माँग की गई थी। असल में अभिनेत्री ने उद्धव ठाकरे को ‘पप्पू सेना’ कहा था, जिसका उल्लेख याचिका में किया गया था।

बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले टीएमसी में घमासान, अब विधायक शीलभद्र दत्ता ने छोड़ी पार्टी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) का भीतरी घमासान चरम पर है। इसी कड़ी में आज (18 दिसंबर 2020) पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा। टीएमसी के एक और विधायक शीलभद्र दत्ता ने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया। शीलभद्र दत्ता 24 परगना जिले के बैरकपुर क्षेत्र से विधायक हैं। शीलभद्र दत्ता ने अपना इस्तीफ़ा पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को सौंपा है।  

टीएमसी के लिए पिछले कुछ ही दिनों में यह लगातार तीसरा बड़ा झटका है। इसके पहले पश्चिम बंगाल की सरकार में परिवहन मंत्री रहे टीएमसी के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी विधायक पद से इस्तीफ़ा दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वह जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। यह आगामी पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव को मद्देनज़र रखते हुए ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। 

गौरतलब है कि 24 परगना जिले के बैरकपुर से विधायक शीलभद्र दत्ता पहले कई बार प्रशांत किशोर को लेकर असहमति दर्ज करा चुके हैं। उनका कहना था कि पीके की कार्यप्रणाली मार्केटिंग कंपनी जैसी है और इस तरह के वातावरण में काम करना बेहद मुश्किल है। उनके मुताबिक़ यह न तो संगठन के लिए बेहतर है और न ही जनता पर पड़ने वाले पार्टी के प्रभाव के लिए। 

शीलभद्र दत्ता ने यह भी कहा, “मैं वर्तमान परिदृश्य के हिसाब से खुद को पार्टी में अनफिट पाता हूँ। लेकिन मैं विधायक पद से इस्तीफ़ा नहीं दूँगा, विधायक पद से इस्तीफ़ा क्यों दूँ? मैंने लोगों का वोट जीता है अगर मैं चला जाता हूँ (इस्तीफ़ा दे देता हूँ) तो वह कहाँ जाएँगे।” दत्ता पार्टी के आंतरिक नेतृत्व में मौजूद अव्यवस्थाओं को लेकर भी शुरू से मुखर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल की ममता सरकार में इस्तीफ़ों की सूची महज़ यहीं ख़त्म नहीं होती है। पश्चिम बंगाल के पांडवेश्वर से तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक जितेंद्र तिवारी ने गुरुवार (दिसंबर 17, 2020) को आसनसोल नगर निगम के बोर्ड ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। ऐसे कयास लग रहे हैं कि वे 19 दिसंबर को बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। इससे पहले तिवारी ने राज्य की ममता सरकार को चेताते हुए आरोप लगाया था कि विकास के लिए आसनसोल को मिले पैसे राजनीति की वजह से रोके जा रहे हैं। 

टीएमसी के अहम नेताओं के इस्तीफ़े से स्पष्ट है कि आगामी विधानसभा चुनावों में ममता सरकार की परेशानियाँ बढ़ सकती हैं। इसी कड़ी में ममता बनर्जी ने पार्टी के भीतर मचे सियासी घमासान को लेकर आज (18 दिसंबर 2020) पार्टी नेताओं की आपात बैठक बुलाई है। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार (19 दिसंबर 2020) को पश्चिम बंगाल दौरे पर पहुँच रहे हैं। यह दौरा प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को मद्देनज़र रखते हुए बेहद अहम माना जा रहा है।     

‘इस्लाम कबूल कर नहीं तो मार कर फेंक दूँगा’: हाई कोर्ट पहुँचा केस तब अब्दुल के चंगुल से छुड़ाई गई हिंदू लड़की

ओडिशा के जयपुर जिले के धर्मशाला से किडनैप हुई 21 साल की हिंदू युवती को पुलिस ने आखिरकार 13 दिन बाद खोज निकाला। अपहरणकर्ता की मंशा युवती का धर्मांतरण करवाकर उससे जबरन निकाह करने की थी।

पुलिस के रवैए से आजिज होकर 15 दिसंबर को लड़की के पिता ने ओडिशा हाई कोर्ट में दरख्वास्त लगाई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि लगातार शिकायतें करने के बाद भी पुलिस उनकी बेटी को खोजने में असफल रही है।

कथित तौर पर युवती का अपहरण 5 दिसंबर 2020 को जयपुर जिले के वीएन कॉलेज से हुआ था। वह उस समय अपना माइग्रेशन सर्टिफिकेट लेने गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, लड़की के घरवालों ने उसकी तलाश के लिए पुलिस से कई बार संपर्क किया। लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया जाता रहा।

परिवार वालों ने बताया कि अब्दुल सहमत खान उर्फ बॉबी नाम का एक लड़का उनकी बेटी का पीछा करता था और उस पर निकाह का दबाव बनाता था। मगर तब भी पुलिस ने सुनवाई नहीं की। ऐसे में उन्होंने जयपुर के एसपी को भी संपर्क किया और उनसे हस्तक्षेप की माँग की।

इसके बाद, एक दिन अचानक लड़की ने अपनी माँ को कॉल किया और फोन पर बताया कि सहमत खान ने उसका अपहरण किया हुआ है और उससे इस्लाम कबूल करवाना चाहता है। लड़की ने यह भी बताया कि सहमत खान उसे धमकियाँ देकर उसका शोषण भी करता है। 

उसने कहा कि अब्दुल ने उससे कहा है कि अगर उसने धर्म परिवर्तन करने से मना किया तो वह उसे मार कर उसका शव फेंक देगा। लड़की ने फोन पर अपनी माँ को यह भी जानकारी दी कि उसे पुरी के किसी होटल में रखा गया है और यहाँ से उसे निकाह के लिए कटक के किसी मस्जिद में ले जाया जाएगा। 

यह ऑडियो रिकॉर्डिंग इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसमें सुन सकते हैं कि लड़की अपनी माँ से मदद माँग रही है।

पुलिस की निष्क्रियता देखने के बाद लड़की के पिता ने 15 दिसंबर को ओडिशा हाईकोर्ट को संपर्क किया और अपील की कि वह पुलिस को इस संबंध में निर्देश दें। अपनी याचिका में पिता ने बताया कि लगातार शिकायत, निवेदन पत्र, एफआईआर और कई बार थाने जाने के बाद भी उनके मामले पर सुनवाई नहीं हुई और न उनकी बेटी को बचाने का प्रयास हुआ।

याचिका में पिता ने आरोप लगाया कि सहमत खान लड़की का धर्म परिवर्तन करवाकर उससे निकाह करना चाहता था। जब लड़की ने मना किया तो उसका अपहऱण कर लिया।

हाई कोर्ट में याचिका डाले जाने के बाद लड़की को बचाया गया

पिता के हाईकोर्ट पहुँचने के बाद पुलिस ने मामले पर गंभीरता से संज्ञान लिया। उन्होंने सहमत खान के पिता शेख अब्दुल हामिद खान को पकड़ा और उसे कोर्ट में पेश करके 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। 17 दिसंबर को आखिरकार लड़की ढूँढ ली गई। पुलिस छापेमारी में युवती कटक शहर के जगतपुर इलाके से बरामद हुई। बाद में पुलिस ने सहमत खान को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

कर्ज़ लेकर भागा व्यवसायी सिख हुलिए में करता रहा ‘किसान’ आंदोलन: यूपी पुलिस ने गाजीपुर बॉर्डर से किया गिरफ्तार

केंद्र सरकार के कृषि सुधार क़ानूनों का विरोध लगातार 23वें दिन भी जारी है, इस बीच किसान आंदोलन प्रदर्शन स्थल से एक विचित्र घटना सामने आई है। एक ऐसा व्यवसायी जो कर्ज़ से लदा हुआ था, वह रुपए माँगने वालों से खुद का बचाव करने के लिए दिल्ली बॉर्डर पर हो रहे किसान आंदोलन में हुलिया बदल कर छुप गया। योगी सरकार की यूपी पुलिस ने गुरुवार (17 दिसंबर 2020) को उस व्यवसायी को वहाँ से खोजकर गिरफ्तार कर लिया। 

व्यवसायी का नाम प्रवीण है और वह मूल रूप से मुराद नगर का रहने वाला है। वह 1 दिसंबर 2020 से ही गायब था। यूपी पुलिस ने प्रवीण को गाजीपुर-गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश गेट) बॉर्डर से गिरफ्तार किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इससे पहले भी वह एक बार गायब हुआ था लेकिन तब वह खुद ही घर वापस आ गया था। इसलिए उसके परिजनों ने इस बार हुई घटना की शिकायत 12 दिसंबर 2020 तक दर्ज नहीं कराई थी।  

इस घटना पर जानकारी देते हुए एसपी इराज राजा ने बताया कि प्रवीण की लोकेशन उसके फोन की मदद से ट्रैक की गई थी। उसके फोन को सर्विलांस में रखा गया था। उसकी कार भी किसान आंदोलन प्रदर्शन स्थल के नज़दीक खड़ी मिली थी। एसपी के मुताबिक़, “प्रवीण ने सिखों जैसे नज़र आने के लिए दाढ़ी बढ़ा ली थी लेकिन जैसे ही वह अपनी कार के भीतर गया हमने उसे पहचान लिया।”  

पूछताछ के दौरान उसने यूपी पुलिस को यह भी बताया कि उस पर कर्ज़ बहुत ज़्यादा बढ़ गया था और लोग उस पर रुपए वापस करने के लिए दबाव बना रहे थे। उसे इन सारी चीज़ों से बचने के लिए कोई विकल्प नहीं सूझ रहा था। तब इस दबाव और अपमान से बचने के लिए वह दाढ़ी बढ़ाकर सिख के हुलिए में प्रदर्शन स्थल पर पहुँच गया जहाँ उसे मुफ़्त का खाना भी मिल रहा था। अभी व्यवसायी पुलिस की गिरफ्त में है और उससे पूछताछ जारी है।     

  

 

कॉमेडियन कुणाल कामरा और कार्टूनिस्ट रचिता तनेजा को अवमानना मामले में SC का नोटिस: 6 हफ्ते में देना होगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट की अवमानना मामले में सुनवाई के दौरान अदालत ने स्टैंड अप कॉमेडियन कुणाल कामरा और कार्टूनिस्ट रचिता तनेजा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने नोटिस जारी करने के बाद दोनों को 6 हफ्ते में अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करवाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा है कि कुणाल कामरा और रचिता को अदालत में पेश होने की जरूरत नहीं है।

बता दें कि इससे पहले न्यायाधीश अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने गुरुवार (दिसंबर 17, 2020) को संक्षिप्त सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने कामरा के ट्वीट पर कहा था, “ये सभी ट्वीट अपमानजनक हैं और हमने इस मामले में अटॉर्नी जनरल से सहमति माँगी थी।”

इसके बाद अधिवक्ता ने अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल का पत्र कोर्ट की सुनवाई के बीच पढ़ा, जिसमें कामरा के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने को लेकर सहमति दी गई थी और कहा गया था

“लोग समझते हैं कि कोर्ट और न्यायाधीशों के बारे में कुछ भी कह सकते हैं। वह इसे अभिव्यक्ति की आजादी समझते हैं। लेकिन संविधान में यह अभिव्यक्ति की आजादी भी अवमानना कानून के अंतर्गत आती है। मुझे लगता है कि ये समय है कि लोग इस बात को समझें कि अनावश्यक और बेशर्मी से सुप्रीम कोर्ट पर हमला करना उन्हें न्यायालय की अवमानना कानून, 1972 के तहत दंड दिला सकता है।”

अटॉर्नी जनरल ने अपने पत्र में कामरा के ट्वीट को बेहद आपत्तिजनक बताया था। साथ ही कहा था कि ये ट्वीट न केवल खराब हैं बल्कि व्यंग्य की सीमा को लाँघ रहे हैं और कोर्ट की अवमानना कर रहे हैं।

कुणाल कामरा के बाद आपत्तिजनक ट्वीट के मामले में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कॉमिक आर्टिस्ट रचिता तनेजा के खिलाफ भी अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति दी थी। दरअसल, तनेजा ने कुछ ऐसे कार्टून बनाए थे जिसमें सुप्रीम कोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे थे। वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस नरसिम्हा ने इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पेश होते हुए कहा था, “तनेजा द्वारा किए गए ट्वीट का उद्देश्य केवल भारत के सर्वोच्च न्यायालय को बदनाम करना और उसकी निंदा करना करना था।”

केंद्र सरकार ने फिर भेजा 2 अधिकारियों को समन: जिद पर अड़ी ममता आई बचाव में, केजरीवाल भी ‘दीदी’ के साथ

पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में पिछले हफ्ते भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हुए हमले के संबंध में केंद्र ने दोबारा बंगाल के दो अधिकारियों को समन भेजा, लेकिन ममता सरकार ने फिर उन्हें भेजने से मना कर दिया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कल बंगाल सरकार से राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस प्रमुख को आज 5:30 बजे एक मीटिंग के लिए कहा था। मगर जवाब में राज्य सरकार ने महामारी का हवाला देकर बैठक की बजाय वीडियो कॉन्फ्रैंसिंग करने को कहा। अब केंद्र सरकार का दोबारा जवाब आना बाकी है।

बता दें कि इससे पूर्व भी इस मामले में पिछले हफ्ते 3 अधिकारियों (भोलानाथ पांडे, राजीव मिश्रा और प्रवीण कुमार त्रिपाठी) को समन भेजा गया था। लेकिन राज्य सरकार ने उन्हें भेजने से मना कर दिया। इसके बाद मंत्रालय ने उन्हें सेंट्रल डेप्युटेशन पर बुलाया।

गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने इस संबंध में बताया था, ”बीजेपी प्रमुख जे पी नड्डा की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार पश्चिम बंगाल के तीन आईपीएस अधिकारियों को गृह मंत्रालय (एमएचए) ने सेंट्रल डेप्युटेशन पर सर्विस के लिए बुला लिया है।” MHA ने IPS कैडर रूल 6(1)  के तहत यह कारवाई की थी।

केंद्र पर बौखलाई ममता बनर्जी

सीएम ममता बनर्जी ने गृह मंत्रालय के आदेश के बाद अपने ट्विटर पर लगातार ट्वीट करके अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने कहा, “राज्य की आपत्ति के बावजूद पश्चिम बंगाल में सेवारत आईपीएस अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए केंद्र सरकार का आदेश आईपीएस कैडर नियम 1954 के आपातकालीन प्रावधान का जबरदस्त दुरुपयोग है।”

सीएम बनर्जी ने आगे लिखा, “यह कुछ और नहीं बल्कि राज्य के अधिकार क्षेत्र में घुसपैठ और पश्चिम बंगाल में कार्यरत अधिकारियों के मनोबल को ठेस पहुँचाने के लिए जानबूझकर किया गया प्रयास है। विशेषकर चुनाव से पहले उठाया गया यह कदम संघीय ढाँचे के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है। यह असंवैधानिक और पूरी तरह से अस्वीकार्य है।”

उन्होंने चुनौती देते हुए कहा,  “हम राज्य की मशीनरी को नियंत्रित करने के लिए केंद्र के प्रयास को बिल्कुल कामयाब नहीं होने देंगे। पश्चिम बंगाल विस्तारवादी और अलोकतांत्रिक ताकतों से डरने वाला नहीं है।”

इस मुद्दे पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी सीएम ममता का साथ दिया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं बंगाल की प्रशासनिक व्यवस्था में जबरन हस्तक्षेप करने की निंदा करता हूँ। राज्य के अधिकारों में दखल देते हुए चुनाव के पहले पुलिस अधिकारियों का तबादला करने का केंद्र का कदम संघीय ढाँचे पर आघात है और अस्थिरता पैदा करने का प्रयास है।”

जेपी नड्डा के काफिले पर 10 दिसंबर को हुआ था हमला

गुरुवार (दिसंबर 10, 2020) को दक्षिण 24 परगना में एक कार्यक्रम के लिए डायमंड हार्बर की ओर जाते वक़्त बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हमला हुआ था। इस हमले में बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय की गाड़ी पर ईंट फेंकी गई थी। उन्होंने वीडियो साझा करते हुए पूरी घटना की सूचना दी थी।

इस घटना पर कैलाश विजयवर्गीय ने लिखा था, “बंगाल पुलिस को पहले ही राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यक्रम की जानकारी दी गई थी। लेकिन एक बार फिर बंगाल पुलिस नाकाम रही। सिराकोल बस स्टैंड के पास पुलिस के सामने ही TMC के गुंडों ने हमारे कार्यकर्ताओं को मारा और मेरी गाड़ी पर पथराव किया।”

इसके बाद प्रदेश के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा था कि उन्होंने घटना के ठीक बाद मुख्य सचिव और राज्य के डीजीपी को पूरी जानकारी के लिए तलब किया था। काफिले पर हुए हमले को लेकर बंगाल पुलिस ने कहा था कि किसी को कुछ नहीं हुआ है और सभी लोग सुरक्षित हैं। इस मामले पर कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अधिकारी और पुलिस पूरी तरह निष्क्रिय है।