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2 दिसंबर को शादी, 9 को दुर्गा मंदिर जाते वक़्त सद्दाम ने अगवा किया: अब तक सुराग नहीं, धर्म परिवर्तन का जताया जा रहा डर

बिहार के मधुबनी नगर थाना क्षेत्र से एक नवविवाहिता को अगवा किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस संबंध में मोहम्मद सद्दाम और उसके परिजनों के खिलाफ केस दर्ज किया है। एक को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपित अब भी फरार है। नवविवाहिता का भी सुराग अब तक नहीं लगा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सद्दाम लड़की का धर्म परिवर्तन करवाने के लिए ले गया है। वहीं कुछ लोग इसे प्रेम प्रसंग का मामला बता रहे हैं। ऐसे में हमने लड़की के पिता से इस घटना पर बात की। उन्होंने बताया कि प्रेम जैसा कुछ होता तो वह अपनी बेटी की शादी किसी और से क्यों करवाते।

2 दिसंबर को धूमधाम से की थी बेटी की शादी: पीड़ित पिता

ऑपइंडिया से बात करते हुए लड़की के पिता ने बताया कि उनकी बेटी की शादी 2 दिसंबर 2020 को ही हुई थी। शादी में उनका बहुत पैसा भी खर्च हुआ। शादी के कुछ दिन बाद बेटी रस्में निभाने घर लौटी तो उसका अपहरण कर लिया गया।

उन्होंने बताया कि 9 दिसंबर को उनकी बेटी दुर्गा मंदिर में दीप जलाने जा रही थी, तभी घर के पास रहने वाले मोहम्मद सद्दाम नामक पिक-अप चालक ने उसका अपहरण कर लिया। जब घरवालों को इसकी सूचना हुई तो पहले प्रयास किए गए कि बिना शिकायत किए सद्दाम उन्हें उनकी लड़की लौटा दे। ऐसा नहीं होने पर उन्होंने पुलिस को इसकी जानकारी दी और अगले दिन (10 दिसंबर) मामले में एफआईआर हुई। 

लड़की के पिता पुलिस कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए कहते हैं कि अभी पुलिस-प्रशासन कुछ नहीं कर रहा। बस आरोपित के पिता की गिरफ्तारी हुई है। आरोपित की 2 बहनों को थाने में बैठाकर पूछताछ हो रही है।

नवविवाहिता के पड़ोसी ने बताया- जब सद्दाम के घर गए तब क्या हुआ?

अगवा की गई नवविवाहिता के पड़ोसी ने बताया कि इस घटना की सूचना जैसे ही उन लोगों को हुई, वह फौरन आरोपित के घर पहुँचे और पूरे घर की तलाशी ली। उन्होंने देखा कि सद्दाम का पिक अप घर के बाहर खड़ा था, मगर वह खुद वहाँ नहीं था।

वह संदेह जताते हुए कहते हैं कि शायद उस समय सद्दाम लड़की को लेकर जंगलों में छिप गया था और जैसे ही वह लोग उसके पिता को लेकर पुलिस थाने गए, वह लड़की को लेकर फरार हो गया। इसके बाद आरोपित के बहनोई और उसकी दो बहनों को भी थाने ले जाया गया। जहाँ पता चला कि सद्दाम ने अपहरण करने के बाद उन्हें कॉल किया था।

पड़ोसी बताते हैं कि जब वह सद्दाम के घर लड़की को ढूँढने गए थे तो उनके घर में 2 बजे तक लोग जगे थे। माहौल ऐसा था जैसे उन्हें मालूम हो कि उनके बेटे ने दूसरे समुदाय की लड़की को उठाया है। इतना ही नहीं, उन लोगों ने सभी लोगों को घर पर देख कर एक दूसरे से कहा, “अब क्या करोगे…अब तो समाज आ गया।” पुलिस प्रशासन पर नाराजगी जाहिर करते हुए वह कहते हैं कि उन लोगों ने संदेह के आधार पर कुछ नंबरों को ट्रेस करने के लिए कहा था, लेकिन उस पर सुनवाई नहीं हुई। 

VHP जिलाध्यक्ष ने खारिज की प्रेम-प्रसंग की बात

वीएचपी के जिलाध्यक्ष महेश कुमार पूरी घटना की जानकारी देते हुए कहते हैं कि यदि ये मामला प्रेम-प्रसंग का होता तो लड़की शादी से पहले घर से निकलती। लड़की के माता-पिता ने इतना पैसा खर्च किया। किसी को कुछ नहीं मालूम था। ये मामला अपहरण का ही है। वह बताते हैं कि वो इस मामले पर बैठक कर रहे हैं। आज एसपी से भी मुलाकात करेंगे।

ये लव जिहाद का केस: MLC सुमन महासेठ

एनडीए के विधान पार्षद (MLC) सुमन कुमार महासेठ ने भी इस अपहरण केस में हस्तक्षेप किया है। ऑपइंडिया से इस बात की पुष्टि करते हुए वह कहते हैं कि ये मामला उनके संज्ञान में 12 दिसंबर को आया था। इसके बाद उन्होंने थाने जाकर कार्रवाई करने के लिए पुलिस-प्रशासन से बात की। उन्हें पहले कहा गया कि मामला प्रेम-प्रसंग का है, इस पर उन्होंने पूछा कि अगर केस प्यार आदि का है तो लड़की पहले भागती, शादी के बाद जाने का क्या मतलब है? लड़की का अपहरण हुआ है, उसका धर्म परिवर्तन करवाया जा सकता है। ये पूरा लव जिहाद का केस है। पुलिस ने कहा है कि वो पूरी कोशिश कर रही है। अब वे इस मामले की लेकर एसपी से मिलने वाले हैं।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित संबंधित खबर

पुलिस कर रही है छापेमारी

पुलिस का कहना है कि वह लगातार इस मामले में लड़की की बरामदगी की कोशिश कर रहे हैं। इस बाबत छापेमारी भी चल रही है। जब ऑपइंडिया ने उन्हें संपर्क किया तब भी वह इसी केस में पड़ताल करने गए थे। थानाध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने आरोपित लड़के के पिता को जेल भेजा है और उसकी बहनों से पूछताछ की है।

हरलाखी अपहरण मामला

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व मधुबनी के हरलाखी थाना क्षेत्र नहरनियाँ गाँव से हिंदू लड़की के अपहरण का मामला आया था। शब्बीर नाम के युवक ने बच्ची का अपहरण करके उसे कई दिन तक अपनी कैद में रखा था। बाद में ऑपइंडिया द्वारा मामला उठाने पर एनसीपीसीआर ने इस केस को अपने संज्ञान में लिया और कुछ दिन बाद लड़की अहमदाबाद से बरामद हुई। लड़की ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि कैसे उसे नशीला पदार्थ सुंघाकर उसे बेहोश कर रेप किया गया था।

अजीमाबाद की सड़क पर खून से लथपथ मिली अंशु की लाश, अंग-अंग काट डाले गए थे: अरमान मलिक और उसकी बहन गिरफ्तार

बिहार के पटना सिटी स्थित अजीमाबाद कॉलोनी की सड़क पर खून से लथपथ एक लाश मिली। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार लाश के कई अंगों को काटकर सड़क किनारे फेंक दिया गया था। मृतक की पहचान अंशु कुमार उर्फ़ लकी सिंह के तौर पर हुई है। पुलिस ने मामले में अंशु की गर्लफ्रेंड कही जाने वाली एक लड़की और उसके भाई अरमान मलिक को गिरफ्तार किया है।

हत्या की इस घटना को बहादुरपुर थाना क्षेत्र स्थित न्यू अजीमाबाद कॉलोनी में रविवार (दिसंबर 13, 2020) को अंजाम दिया गया। हत्या की वजह प्रेम प्रसंग बताई जा रही। लाश मिलने के बाद पीड़ित परिजनों ने न्याय की माँग लेकर प्रदर्शन किया।

अंशु के गले को किसी धारदार हथियार से काटा गया था। एक ऑनलाइन प्राइवेट कम्पनी में बतौर डिलीवरी बॉय काम करने वाला अंशु संदलपुर का रहने वाला था। साथ ही वो एक म्यूजिकल ग्रुप के साथ भी जुड़ा हुआ था। पीड़ित परिजनों ने बताया कि उसकी गर्लफ्रेंड भी उसी क्षेत्र में रहती है, जिसका फोन कॉल आने के बाद वो शनिवार की देर रात 1 बजे घर से निकला था।

वो दवा लेने की बात कह कर बाइक से घर से निकला था। परिजनों ने बताया कि वो अक्सर अपने मित्र जीतू के यहाँ रुक जाया करता था, इसीलिए मोबाइल स्विच ऑफ होने के बाद उन्हें लगा कि वो सुबह आ जाएगा। होम डिलीवरी के दौरान ही उसकी लड़की से पहचान हुई थी। लेकिन, लड़की का भाई अरमान मलिक उसे मैसेज या कॉल न करने और ‘देख लेने’ की धमकी दिया करता था

जब अगले दिन सुबह तक भी वो नहीं लौटा तो परिजनों को किसी साजिश की आशंका हुई और वो उसकी खोज में निकल पड़े। सुबह के 7 बजे कुछ स्थानीय मछली विक्रेताओं ने सूचना दी कि अंशु की लाश उसी इलाके में सड़क के किनारे पड़ी हुई है। अंशु के भाई रितेश कुमार और चाचा कृष्णेदव साहनी जब मौके पर पहुँचे तो उन्होंने पाया कि अंशु की लाश पूरी तरह खून से लथपथ हुई पड़ी हुई थी। स्थानीय लोग इस घटना से आक्रोशित हो गए।

आक्रोशित लोगों ने मुख्य अभियुक्त के घर पर पत्थरबाजी भी की। सड़क को जाम कर दिया गया। लोगों ने स्थानीय पुलिस थाना जाकर न्याय की माँग की और घेराव किया। मृतक के भाई रितेश का आरोप है कि लड़की के भाई अरमान मलिक ने ही इस घटना को अंजाम दिया है। अरमान मलिक ने अंशु को हाल ही में गंभीर परिणाम भुगतने को लेकर धमकाया था, ऐसा परिजनों का आरोप है। उन्होंने कहा कि लड़की भी इस घटना में शामिल हो सकती है।

आक्रोशित लोग अभियुक्त की गिरफ़्तारी को लेकर अड़े थे। इसके बाद पुलिस हरकत में आई और अभियुक्त के घर छापेमारी कर के लड़की और उसके भाई को हिरासत में लिया गया। उन्हें थाने लाकर पूछताछ की गई। चूँकि प्रदर्शनकारियों की संख्या पुलिसकर्मियों से ज्यादा थी, इसीलिए प्रशासन को उन्हें काबू करने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। सिटी डीएसपी (ईस्ट) जितेन्द्र कुमार और डीएसपी (पटना सिटी) अमित शरण ने घटनास्थल पर जाकर लोगों को समझाया

सिटी एसपी ने बताया कि प्रारंभिक जाँच में प्रेम प्रसंग को ही हत्या की वजह बताया गया है। अंशु के फोन के कॉल रिकार्ड्स खँगाले जा रहे हैं, ताकि इस मामले में और खुलासा हो सके। शव को कब्जे में लेकर पुलिस पोस्टर्माटम के लिए एनएमसी भेज दिया है। परिजनों का कहना है कि लड़की का भाई बार-बार हत्या की धमकी देता था और उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। प्रेमिका और उसके भाई को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया।

मृतक की माँ आरती देवी के बयान पर मामला दर्ज किया गया है। इस हत्याकांड में दो अज्ञात भी शामिल हैं और साथ ही अरमान के पिता की भी तलाश है, जो फरार चल रहा है। आरोपित को ले जाते समय मोहल्ले के लोगों ने पुलिस पर पथराव किया। फ़िलहाल कई थानों की पुलिस को वहाँ शांति-व्यवस्था हेतु लगाया गया है। इसी तरह दिल्ली में राहुल राजपूत नामक युवक की हत्या कर दी गई थी।

‘जिहाद के लिए मरो तो 72 हूरें मिलेंगी’ – ये कहने वाला ‘सबसे बड़ा आतंकी’ खुद मौत के डर से करवा रखा था इंश्योरेंस

दूसरों की जान लेने पर आमादा आतंकी क्या अपने मरने से पहले जीवन बीमा कराता होगा? इसका जवाब आतंकी पैदा करने वाले देश पाकिस्तान से ही आया है। जानकारी के मुताबिक एक तालिबानी आतंकवादी ने ‘जीवन बीमा पॉलिसी’ ले रखी थी।

इस आतंकी का नाम मुल्ला अख्तर मंसूर था और वह 2016 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा जा चुका है। उसने पाकिस्तान में एक निजी कंपनी से ‘जीवन बीमा’ पॉलिसी खरीदी हुई थी। अफगान तालिबान प्रमुख मुल्ला अख्तर मंसूर ने यह बीमा फर्जी आईडी पर लिया था।

जीवन बीमा कराने का मामला उस समय प्रकाश में आया, जब उसके खिलाफ आतंकी फंडिंग केस में कराची में सुनवाई हो रही थी। मामले में बीमा कंपनी ने कराची की आतंक निरोधक अदालत को पूरी जानकारी दी। मंसूर के खिलाफ फेडरल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एफआईडी) एक साल से जाँच कर रही है।

जाँच में यह जानकारी सामने आई है कि मंसूर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए फर्जी कागजातों से प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त कराता था। उसने फर्जी आईडी पर कराची में दो लाख डालर की जमीन और घर खरीदे थे।

इसी खोजबीन में जानकारी मिली कि मुल्ला अख्तर मंसूर ने एक जीवन बीमा पॉलिसी खरीदी थी। उसने 21 अप्रैल 2016 में ड्रोन हमले में मारे जाने से पहले तीन लाख पाकिस्तानी रुपयों का भुगतान जीवन बीमा के लिए किया था।

जाँच एजेंसी ने इंश्योरेंस कंपनी से मंसूर के मूल भुगतान को अदालत में जमा कराए जाने के लिए कहा था। बीमा कंपनी ने तीन लाख पचास हजार रुपए का चेक अब अदालत में जमा किया है। अदालत ने इस रकम को सरकारी कोषागार में जमा कराने का निर्देश दिया है।

आतंकवाद निरोधक अदालत के जज ने 2 निजी बैंकों, एलाइड बैंक लिमिटेड और बैंक अल-फलाह से उन खातों के बारे में भी रिपोर्ट माँगी है, जिनमें अफगान तालिबान नेता और उसके सहयोगियों ने पैसे जमा किए थे। कोर्ट ने पैसे के लेन-देन का भी पूरा ब्‍यौरा माँगा है।

हैरानी की बात है कि नौजवानों को आतंकी बनाने के लिए जन्नत और 72 हूरों के सपने दिखाए जाते हैं। उन्हें मजहब के नाम पर गुमराह कर हाथ में बंदूक थमा दिए जाते हैं, फिदायीन बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और यह आतंकवादी खुद के लिए पैसे का इंतजाम करते हैं। मुल्ला अख्तर मंसूर खुद के लिए जीवन बीमा पॉलिसी खरीद कर आतंकी हमलों को अंजाम दे रहा था। 

कश्मीर में सक्रिय आतंकी बेशक सबके सामने इस्लाम और कश्मीर की आजादी की बात करते हैं, लेकिन नए आतंकियों को पढ़ाया व सिखाया जाता है कि मरने के बाद उन्हें जन्नत में 72 हूरें मिलेंगी। यह इस्लामिक कट्टरपंथियों का ब्रेनवॉश करने का बहुत पॉपुलर तरीका है।

चाहे अलकायदा हो, जैश-ए-मोहम्मद, बोको हरम या हमास, सारे ही अपने लड़ाकों को बताते हैं कि अगर वे मज़हब की राह में अपनी जान देंगे तो उन्हें जन्नत नसीब होगी। जन्नत में भी उन्हें हमेशा युवा रहने वाली और गहरी काली आँखों वाली 72 हूरों के साथ कभी न खत्म होने वाले कथित आनंद के बारे में बताया जाता है।

चर्च के नए साल के कैलेंडर में रेप आरोपित फ्रैंको मुलक्कल, भड़के लोगों ने लगाई आग

बलात्कार आरोपित होने के बाद भी केरल में रोमन कैथोलिक चर्च के पूर्व पादरी फ्रैंको मुलक्कल (Bishop Franco Mulakkal) को कैलेंडर में लगातार जगह दी जा रही है। त्रिशूर में साल 2021 के मौके पर सायरो मालाबार चर्च द्वारा जारी किए गए कैलेंडर के सामने आने के बाद कोल्लम में काफी हंगामा हो रहा है। चर्च के कई अनुयायी इस कैलेंडर की कॉपियाँ जला रहे हैं। इस कैलेंडर में बिशप फ्रैंको मुलक्कल की तस्वीर अन्य पादरियों की के साथ लगी दिखाई दे रही है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हर साल चर्च नॉमिनल चार्ज पर अनुयायियों को एक कैलेंडर देता है। लेकिन पिछले दो सालों से बलात्कार आरोपित बिशप फ्रैंको मुलक्कल की तस्वीर मार्च माह के पेज पर छपी दिखाई देती है। द न्यूज मिनट के अनुसार रिजू कंजूकरण ( Riju Kanjookaran) बताते हैं कि पिछले साल भी लोगों ने इसके ख़िलाफ़ आवाज उठाई थी और कैलेंडर जलाए थे, लेकिन इस साल फिर से यही सब हुआ।

एएनआई द्वारा साझा की गई जानकारी में भी बताया गया है कि तिरुवनंतपुरम में केरल कैथॉलिक रिफॉर्म मूवमेंट की ओर से फ्रैंको मुलक्कल की तस्वीर वाले कैलेंडर को सड़कों पर जलाया गया।

उल्लेखनीय है कि चर्च द्वारा बिशप मुलक्कल की तस्वीर कैलेंडर में छापने को लेकर हर जगह गुस्सा देखने को मिल रहा है, मगर चर्च का कहना है कि वह कैलेंडर में फ्रैंको की तस्वीर इसलिए लगाते हैं क्योंकि अभी तक उनके ख़िलाफ़ आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं।

बता दें कि बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर केरल की एक नन का कई बार रेप करने का आरोप है। बिशप को पिछले साल 2018 में गिरफ्तार किया गया था और पिछले दिनों उसके ख़िलाफ़ आरोप भी तय हुए थे। लेकिन सुनवाई के दौरान उसने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया था और खुद को निर्दोष कहा था।

चर्च प्रशासन द्वारा ऐसे व्यक्ति की तस्वीर कैलेंडर में छापे जाने से सोशल मीडिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्वराज की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा लिखती हैं, “जहाँ हिंदुओं को लगातार रेप समर्थक कह कर बदनाम किया जा रहा है, क्योंकि वह कठुआ में सीबीआई जाँच चाहते हैं, वहीं एक चर्च लगातार रेप आरोपित की तस्वीर कैलेंडर पर छाप रहा है।”

हाथरस में अशांति फैलाने और हिंसा भड़काने में PFI का हाथ: 2.5+ करोड़ रुपए की विदेशी फंडिंग

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के स्टूडेंट विंग कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) के नेता रऊफ शरीफ को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार (दिसंबर 12, 2020) को तिरुवनंतपुरम से गिरफ्तार किया। रऊफ शरीफ देश छोड़कर भागने की फिराक में था, मगर ED ने समय रहते कार्रवाई की और उसे धर दबोचा।

ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के हाथरस कांड को लेकर हुए विवाद के बाद रऊफ शरीफ ने पीएफआई के सदस्यों और स्व-घोषित पत्रकार सिद्दीक कप्पन को वहाँ जाने के लिए  फंड दिया था। बता दें कि हाथरस में कई राजनीतिक दल और संगठन इकट्ठा हुए थे और अशांति फैलाने एवं जातिगत हिंसा को भड़काने की कोशिश कर रहे थे। जाँच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि पीएफआई के सदस्य और कप्पन का इरादा सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ना और क्षेत्र में जातिगत हिंसा को उकसाना था।

4 अक्टूबर को यूपी पुलिस ने सिद्दीक कप्पन को अतीकुर्र रहमान और मसूद अहमद समेत चार पीएफआई कार्यकर्ताओ को मथुरा से गिरफ्तार किया था। इनके खिलाफ संगीन अपराध करने की मंशा रखने के शक में सीआरपीसी की धारा 151 के तहत मामला दर्ज हुआ था। बाद में यह केस राजद्रोह और आतंकवाद रोधी कानून के तहत दर्ज कर लिया गया।

ईडी ने प्रधान सत्र न्यायालय, कोच्चि के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया कि शरीफ ने ही डायरेक्शन और फंड दिए थे। उसने रहमान के अकाउंट में पैसे ट्रांसफर किया था। रिपोर्ट के अनुसार, कोविड- 19 लॉकडाउन के दौरान शरीफ के अकाउंट में कथित तौर पर 2.5 करोड़ की फंडिंग हुई। ओमान में काम करने वाला शरीफ उस समय भारत में था। इस लेन-देन ने संदेह पैदा किया। ईडी ने उसे पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन वह जानबूझकर सामने नहीं आया।

शरीफ द्वारा प्राप्त फंड

रिपोर्टों के अनुसार, शरीफ के पास आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और फेडरल बैंक में सेविंग अकाउंट हैं। उसने अपने आईसीआईसीआई बैंक अकाउंट में 2018-2020 के दौरान 1.35 करोड़ रुपए प्राप्त किए थे। उसने अप्रैल-जून 2020 के दौरान रमीज अली प्रभात और नौशीफ शरीफ से 29.18 लाख रुपए विदेशी फंड प्राप्त किए थे। फंड को ट्रांसफर करने के उद्देश्य के रूप में लिखा था- ‘एफएटीएफ- देशों के नागरिकों या उनके प्रवास के लिए एनआरआई द्वारा होटलों को भुगतान’। बता दें कि उस अवधि के दौरान, कोविड -19 लॉकडाउन के कारण होटल बंद थे।

रिपोर्ट में कहा गया है, “यह उद्देश्य संदिग्ध लग रहा है क्योंकि यह माना जाता है कि रऊफ शरीफ या तो भारत में या फिर ओमान में होटल का मालिक है, जिसके लिए नौशीफ और रमीज द्वारा भुगतान किया गया था। हालाँकि कोविड -19 के कारण इस साल अप्रैल-जून की अवधि में होटल चालू नहीं थे।”

उन्होंने कहा कि 2019-2020 के दौरान उनके फेडरल बैंक खाते में 67 लाख रुपए का लेन-देन हुआ। उसे इस साल मई और अक्टूबर में दोहा से 19.7 लाख की विदेशी धनराशि मिली। उसके खाते में 16 लाख रुपए का नकद जमा भी किया गया था। ईडी की रिपोर्ट में उसके एक्सिस बैंक खाते में 20 लाख रुपए का लेन-देन भी दर्ज किया गया।

पीएफआई के खिलाफ पीएमएलए मामले की जाँच 

2018 में, ईडी ने कन्नूर के नारथ में पीएफआई और एसडीपीआई सदस्यों द्वारा आतंकवादी शिविर से संबंधित एक मामले के आधार पर धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत जाँच शुरू की। जाँच के दौरान शरीफ का नाम सामने आया था। हाथरस मामले में यूपी पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में भी उसका नाम था। शरीफ पिछले एक साल से कप्पन को जानता था क्योंकि कप्पन ने कई पीएफआई और सीएफआई इवेंट कवर किए हैं।

यूपी पुलिस ने अक्टूबर में कप्पन और तीन पीएफआई सदस्यों से लैपटॉप, मोबाइल फोन और संदिग्ध पैम्पलेट बरामद किया था। ईडी की रिपोर्ट में कहा गया है कि शरीफ को मिले विदेशी चंदे को लेकर उसने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया और साथ ही जाँच में सहयोग करने से भी इनकार कर दिया

रऊफ शरीफ की गिरफ्तारी

कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के नेता रऊफ शरीफ को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने शनिवार को तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वह देश से भागने का प्रयास कर रहा था।

तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर इमीग्रेंट अधिकारियों ने उसकी पहचान की और उसे हवाई अड्डे पर पकड़ा। उन्होंने तुरंत यूपी पुलिस और ईडी को सूचित किया, जिसके बाद ईडी के अधिकारियों ने हवाई अड्डे पर पहुँचकर शरीफ को हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी के बाद शरीफ को 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

झारखंड: वन विभाग की जमीन में महिला को दफनाने की कोशिश, सांप्रदायिक तनाव

झारखंड के डुमरी थाना क्षेत्र अंतर्गत खेचगड्डी गाँव में वन विभाग की ज़मीन पर एक महिला का शव दफ़नाने को लेकर सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक़ घटना रविवार (13 दिसंबर 2020) की है। समुदाय विशेष से आने वाली मृतक महिला के परिजन शव को वन विभाग की ज़मीन में दफ़नाना चाहते थे।

स्थानीय लोगों ने इस पर आपत्ति जताई। इनका कहना था कि जमीन वन विभाग की है। ऐसे में उस पर किसी मज़हबी प्रक्रिया की इजाज़त नहीं दी जा सकती है। इसके ठीक बाद घटनास्थल पर टकराव की स्थिति पैदा हो गई। मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची। वन विभाग के अधिकारी अमर विश्वकर्मा, एएसआई जैना बालमुचु, डुमरी थाना प्रभारी राजू मुंडा और एरिया सुपरि​टेंडेंट रवि भूषण प्रसाद मौके पर पहुँचे। अधिकारियों ने मृतका के परिजनों से बातचीत कर मामला का हल करने का प्रयास किया। अधिकारियों से बातचीत होने के बाद मृतका के परिजन शव कब्रिस्तान में दफ़नाने के लिए तैयार हो गए।   

झारखंड में सरकारी जमीन पर समुदाय विशेष के लोगों द्वारा शव दफनाने की कोशिश करने के कई मामले हाल में सामने आए हैं। इसी साल जून में गोड्डा के ठाकुरगंगटी थाना क्षेत्र के रुंजी पंचायत भवन के बगल में शव दफनाने को लेकर विवाद हो गया था। दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए थे। उस समय भी प्रशासन ने मौके पर पहुॅंचकर हालात पर काबू पाया था और शव को दफनाने से रोक दिया था।

अब एक-दूसरे की फसल काट रहे किसान नेता: उगराहा उपवास से अलग, भानु दो फाड़; UP वाले ‘सरदार’ पंजाब के दबदबे से नाखुश

विपक्षी दलों, खालिस्तानी कट्टरपंथियों और वामपंथियों के हाथों ‘किसान आंदोलन’ के हाइजैक होने के बाद अब किसान संगठनों में भी आपस में लड़ाई शुरू हो गई है। कोई वार्ता के पक्ष में है तो कोई तीनों कृषि कानूनों की वापसी के बगैर बातचीत नहीं करना चाहता।

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के ‘एकता उगराहा’ गुट ने सोमवार (दिसंबर 14, 2020) को आयोजित उपवास से खुद को अलग कर लिया है। बीकेयू (भानु) के तीन नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं कॉन्ग्रेस नेता और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के प्रमुख सरदार वीएम सिंह आंदोलन में पंजाब के किसानों के दबदबे से नाराज बताए जा रहे हैं।

BKU (एकता उगराहा) के महासचिव सुखदेव सिंह ने कहा है कि संगठन का कोई भी नेता उपवास में भाग नहीं लेगा। ये वही संगठन है, जिसकी टिकरी सीमा पर हुई सभा में उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे दिल्ली दंगा आरोपितों की रिहाई की माँग करते हुए पोस्टर्स लहराए गए थे। सुखदेव सिंह ने कहा कि उन्हें या उनके संगठन को ऐसा करने का कोई पछतावा नहीं है, क्योंकि ‘मानवाधिकार दिवस’ के मौके पर ऐसी माँग करना लाजिमी था।

उधर चिल्ला सीमा पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों में दो फाड़ हो गया है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हस्तक्षेप के बाद BKU (भानु) ने नोएडा-दिल्ली मार्ग खोलने का निर्णय लिया। संगठन के कुछ पदाधिकारियों का कहना है कि वे इस निर्णय से आहत हैं और तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए बिना किसी भी प्रकार की रियायत दिए जाने के खिलाफ हैं। उन्होंने वार्ता में भी पीछे हटने से इनकार किया।

संगठन के फैसले का विरोध करते हुए राष्ट्रीय महासचिव महेंद्र सिंह चौरोली, राष्ट्रीय प्रवक्ता सतीश चौधरी समेत एक महिला किसान नेता ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इन सभी ने कहा है कि वो संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह के निर्णय से दुःखी हैं।

जिन किसान नेताओं ने इस्तीफा दिया है, वो धरना स्थल पर भी नहीं पहुँच रहे हैं। तीनों ने कुछ किसान नेताओं को अपने इस्तीफे की जानकारी दी है और सीधे भानु प्रताप को इस्तीफा सौंपा है। भानु प्रताप का कहना है कि लोगों की परेशानियों को देखते हुए उन्होंने रास्ता खोलने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि आंदोलन से आम जनता को दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

किसान आंदोलन के बीच ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग के घुसने के कारण भी इन संगठनों में दरार पड़ रही है। उत्तर प्रदेश के BKU (भानु) ने वीएम सिंह से नाता तोड़ लिया है। पंजाब छोड़ कर बाकी राज्यों के किसान संगठन थोड़ी नरमी दिखाते हुए सरकार से बातचीत के पक्षधर हैं। इससे पहले अकाली दल के समर्थक अजमेर सिंह लखोवाल को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के कारण आंदोलन से निकाल बाहर किया गया था। याचिका वापस लेने के बाद उनकी वापसी तय की गई।

यूपी के वीएम सिंह इस बात से नाराज हैं कि बातचीत में पंजाब के ही किसानों का ज्यादा दबदबा है। हरियाणा में पहले 20 और फिर 29 किसानों के प्रतिनिधिमंडल के सरकार से मिल कर समर्थन देने को सीएम खट्टर और डिप्टी सीएम चौटाला की रणनीति बता कर कई संगठन इससे नाराज हैं। उत्तराखंड के भी कई किसान सरकार के समर्थन में पहुँच रहे हैं।

इससे 1 दिन पहले बीकेयू (भानु) के प्रदेश अध्यक्ष योगेश प्रताप ने किसान नेता व संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह की बात मानने से साफ़ इनकार कर दिया था।इसके बाद वो चिल्ला सीमा पर धरने पर बैठ गए थे। बाद में वो धरने से लौट गए थे, लेकिन कार्यकर्ताओं के मान-मनव्वल के बाद फिर लौट कर आए। प्रदर्शनकारियों ने नोएडा के सेक्टर-14ए का वो रास्ता शनिवार (दिसंबर 12, 2020) को खोल दिया था, जो पिछले 12 दिनों से बंद कर रखा गया था।

‘गद्दार’ सुब्रह्मण्यम स्वामी ने संसद भवन निर्माण ठेके को ले कर जताई घोटाले की आशंका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नए संसद भवन निर्माण के भूमिपूजन ने सिर्फ सत्ता विरोधियों और वामपंथियों को ही नहीं बल्कि भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी भी जख्म दिए हैं। यही वजह है कि भाजपा के ही राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने संसद भवन निर्माण की जिम्मेदारी टाटा समूह (टाटा प्रोजेक्ट्स) को दिए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। यही नहीं, स्वामी ने इसमें यूपीए काल के कुख्यात 2G स्पैक्ट्रम घोटाले का जिक्र करते हुए ट्वीट किया है।

राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि कहीं नए संसद भवन के निर्माण के ठेके में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले जैसा तो कुछ नहीं हुआ है? भाजपा नेता ने अपने ट्वीट में लिखा, “क्या किसी को पता है कि टाटा को नए संसद परिसर के निर्माण के लिए कैसे चुना गया था? क्या इसके लिए निविदा आमंत्रित की गई थीं या फिर इसे 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की तरह पहले आओ पहले पाओ के आधार पर दे दिया गया?”

स्वामी ने एक ट्वीट करते हुए लिखा, “उत्तर प्रदेश सरकार के राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड ने भी नए संसद भवन के लिए बोली लगाई थी, लेकिन वह जीत नहीं पाई। उनसे पता करेंगे कि ऐसा क्यों हुआ?”

भाजपा के राज्यसभा सांसद के इस ट्वीट का जवाब भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने दिया है। तजिंदर पाल ने स्वामी को अपने ट्वीट में टैग करते हुए लिखा, “हैलो गद्दार!”

इसके साथ ही तजिंदर पाल ने कुछ खबरों के स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं। इन्हीं में से एक स्क्रीनशॉट में समाचार पत्र इकोनॉमिक टाइम्स की भी एक खबर दी गई है जिसमें बताया गया है कि आखिर किस तरह टाटा प्रोजेक्ट्स ने ‘लार्सन एंड टर्बो’ (L&T) को हराकर 861.90 करोड़ रुपए की बोली लगाने के साथ ही भारत के नए संसद भवन के निर्माण का ठेका जीत लिया।

इस खबर के अनुसार, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) ने सितंबर 16, 2020 को नए संसद भवन के निर्माण के लिए वित्तीय बोलियाँ खोली थीं। टाटा प्रोजेक्ट्स ने सबसे कम बोली 861.90 करोड़ रुपए लगाई थी, जबकि लार्सन एंड टर्बो की बोली 865 करोड़ रुपए थी, जो कि लार्सन एंड टर्बो की 865 करोड़ रुपए की बोली से केवल 3.1 करोड़ रुपए कम है।

उल्लेखनीय है कि इस प्रोजेक्ट के लिए शुरुआत में सात कंपनियों ने ठेका हासिल करने के लिए बोली लगाई थी। आखिरी चरण में तीन कंपनियों को चुना गया, जिसमें लार्सन एंड टर्बो, टाटा प्रोजेक्ट्स और एक अन्य कंपनी शामिल थी।

टाटा प्रोजेक्ट को सबसे कम बोली (861 करोड़) लगाने के कारण यह प्रोजेक्ट दिया गया। यह नए संसद भवन का निर्माण कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की महत्वाकांक्षी ‘सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना’ का ही एक हिस्सा है।

‘आसनसोल को केंद्र से मिलने थे ₹3500 करोड़, ममता सरकार की राजनीति के कारण अटके’: एक और TMC विधायक ने खोला मोर्चा

पश्चिम बंगाल में लगातार बगावतों से जूझती तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) को फिर से झटका लगा है। अबकी आसनसोल नगर निगम (AMC) के अध्यक्ष और पांडवेश्वर के TMC विधायक जितेंद्र तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ कर ‘दीदी’ के खिलाफ मोर्चा खोला है। पश्चिम बंगाल सरकार में शहरी विकास और नगर निगम मामलों के मंत्री फिरहाद हकीम को एक पत्र लिख कर उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास को लेकर आवाज उठाई है।

पत्र में TMC विधायक जितेंद्र तिवारी ने लिखा है कि स्मार्ट सिटी मिशन प्रोजेक्ट के तहत उनके शहर आसनसोल को भी चुना गया था, लेकिन राजनीतिक कारणों से राज्य सरकार ने शहर को केंद्र से आने वाली सुविधाओं को प्राप्त करने से रोक दिया। उन्होंने लिखा कि वे आसनसोल में ही जन्मे व पले-बढ़े हैं और शहरी निकाय के अध्यक्ष के रूप में भी पिछले कई वर्षों से अपनी जिम्मेदारियों का वहन कर रहे हैं, लेकिन इस मामले में उन्हें गहरा धक्का लगा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अगर राज्य सरकार ने शहर को केंद्र की स्मार्ट सिटी मिशन प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने की अनुमति दी होती तो उसे 2000 करोड़ रुपए के फंड्स मिलते, जो शहर के विकास के लिए काफी महत्वपूर्ण होते। उन्होंने कहा कि पार्षदों की मेहनत AMC के अच्छे कामों की वजह से आसनसोल को इस सुविधा के लिए चुना गया था, लेकिन राजनीतिक कारणों से राज्य सरकार ने शहर को स्मार्ट सिटी नहीं बनने दिया।

उन्होंने ममता बनर्जी सरकार को याद दिलाया कि उसने वादा किया था कि इन फंड्स को शहर के विकास के लिए जल्द ही जारी किया जाएगा, लेकिन ऐसा अब तक नहीं हो पाया है। उन्होंने लिखा कि सॉलिड वास्ते मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के अंतर्गत भी केंद्र से 1500 करोड़ रुपए मिले थे, जैसा कि देश के कई शहरों को प्राप्त हुआ है। जितेंद्र तिवारी ने आरोप लगाया कि इस फण्ड को भी राजनीतिक कारणों से नहीं प्राप्त होने दिया गया, जो आसनसोल के साथ अन्याय है। उन्होंने लिखा:

“केंद्र सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं को हमारे शहर आसनसोल तक नहीं पहुँचने दिया गया। AMC (आसनसोल म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन) ने राज्य सरकार को कई कई प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स भेजे हैं, लेकिन एक पर भी अनुमति प्रदान नहीं की गई है। राजीगंज में राजकुमार द्वारकानाथ ठाकुर टाउन हॉल का निर्माण उनमें से एक है। जमुरिया में स्थित टाउन हॉल का पुनर्निर्माण होना है। आसनसोल, बर्नपुर, कुल्टी, जमुरिया और राजीगंज में कई सड़कों का निर्माण होना है। एक को भी हरी झंडी नहीं दिखाई गई।”

विधायक ने कहा कि वो काफी दर्द के साथ इस पत्र को लिख रहे हैं और TMC सरकार से निवेदन कर रहे हैं कि आसनसोल को लेकर जो उन्होंने बुरा रवैया पाल रखा है, उसे त्याग कर इन प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने की अनुमति दी जाए। तिवारी पश्चिम बर्धमान जिले में पार्टी के जिलाध्यक्ष के पद पर भी हैं। वो कई बार विवादों में भी रहे हैं। चुनाव के दौरान रुपए का लालच देने के कारण चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस भेजा था।

इधर शुभेंदु अधिकारी ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया था, जिन्हें मनाने की सारी कोशिशें नाकाम रही हैं। मंत्री राजीव बनर्जी को मनाने के लिए पार्टी ने मशीनरी लगा दी है। विधायक मिहिर गोस्वामी तो पहले ही भाजपा में जा चुके हैं। राज्य में ‘मटुआ समुदाय’ के प्रति सरकार के सौतेले रवैये का आरोप लगा कर भाजपा पहले ही TMC को घेर रही है। ऐसे में सीएम ममता और पार्टी के रणनीतिकार प्रशांत किशोर के लिए नई चुनौती खड़ी हो गई है।

70000 रुपए प्रधानमंत्री पेंशन योजना 2020 में मिल रहा है… बस करना होगा एक काम: जानें इस मैसेज के पीछे की पूरी सच्चाई

केंद्र सरकार के नाम पर फर्जी न्यूज फैला कर धोखाधड़ी करने का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। इसी क्रम में हाल में कई लोगों को एक मैसेज भेजा गया। इस संदेश में कहा गया कि वह प्रधानमंत्री पेंशन योजना 2020 के तहत 70000 रुपए लेने के लिए योग्य हैं। बस उन्हें एक लिंक पर क्लिक करके अपनी डिटेल्स वेरीफाई करनी है।

हम सब जानते हैं कि इस तरह ऑनलाइन स्कैम आज कल कितने चल रहे है जहाँ एक क्लिक और डिटेल्स के आधार पर साइबर क्राइम को अंजाम दिया जाता है। ऐसे में जब पीआईबी को इस संदेश की सूचना हुई तो उन्होंने इसका फैक्ट चेक करके पुष्टि की। स्पष्ट किया गया कि ये संदेश पूरी तरह फर्जी है और ऐसी कोई स्कीम सरकार नहीं चला रही।

पीआईबी फैक्ट चेक के अनुसार, “एक टेक्स्ट मैसेज में जो दावा किया जा रहा है कि पीएम पेंशन योजना 2020 के तहत योग्यता कन्फर्म हो गई है। वो पूरी तरह फेक है। केंद्र सरकार द्वारा ऐसी कोई स्कीम नहीं चलाई जा रही।”

दूरदर्शन ने भी इस बात को कहा कि सरकार ने ऐसे संदेश को खारिज किया है, जिसमें 70000 रुपए प्रधानमंत्री पेशन योजना 2020 के तहत देने का वादा हो रहा है।

गौरतलब है कि इससे पहले सरकार को लेकर झूठ फैलाया जा रहा था कि उन्होंने किसान आंदोलन को दबाने के लिए जैमर लगा दिए हैं जबकि हकीकत में केंद्र सरकार की ओर से ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया था। वो दावा पूर्ण रूप से फर्जी था। इसकी पुष्टि भी पीआईबी ने फैक्ट चेक में की थी।

ऐसे ही सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार को नकारात्मक दिखाने के लिए वीडियो में कहा गया था कि दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए, सेना को बुलाया गया है। हालाँकि एजेंसी ने इस झूठ की भी पोल खोली और बताया कि दावा गलत है। यह सैनिकों की नियमित आवाजाही का एक वीडियो था और किसान प्रदर्शन के साथ इसका कोई भी सम्बन्ध दुर्भावनापूर्ण और गलत है।