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हम लिख रहे हैं ‘ॐ नमः शिवाय’, क्योंकि सेकुलर मीडिया नहीं लिखेगी: रजनीकांत के जमाई धनुष के ट्वीट से किया खेल

दक्षिण भारत के लोकप्रिय अभिनेता और रजनीकांत के जमाई धनुष ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के जरिए अपने प्रशंसकों के साथ एक जानकारी साझा की। उन्होंने हॉलीवुड फिल्म ‘द ग्रे मैन (The Gray Man)’ का हिस्से बनने की बात बताई। इस फिल्म में काम करने के लिए अपने उत्साह का जिक्र करते हुए उन्होंने स्नेह और समर्थन के लिए प्रशंसकों का आभार जताया।

इस फिल्म का निर्देशन रूसो ब्रदर्स (Russo Brothers) कर रहे हैं। क्रिस इवांस (Chris Evans), रेयान गोस्लिंग (Ryan Gosling) और वैगनर मूरा (Wagner Moura) की भी इसमें अहम भूमिकाएँ हैं।

अभिनेता ने ट्वीट करते हुए लिखा, “इस बात की जानकारी देते हुए काफी ख़ुशी हो रही है कि मैं नेटफ्लिक्स की ‘द ग्रे मैन’ का हिस्सा हूँ, जिसमें रेयान गोस्लिंग और क्रिस इवांस अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसके निर्देशक द रूसो ब्रदर्स (एवेंजर्स, कैप्टन अमेरिका: विंटर सोल्जर) हैं। मैं इस अद्भुत एक्शन पैक फिल्म का हिस्सा बनने के लिए तैयार हूँ। इतने सालों में मेरे फैन्स ने मेरे लिए जितना स्नेह और समर्थन दिखाया है उसके लिए मैं सभी का आभारी हूँ। आप सभी को बहुत सारा प्यार। ॐ नमः शिवाय।” 

अभिनेता ने अपने ट्वीट का अंत भगवान शिव को संबोधित करते हुए लिखा, ‘ॐ नमः शिवाय’

लेकिन देश के ‘लिबरल सेकुलर’ मीडिया गिरोह को यह बात पसंद नहीं आई कि धनुष ने ट्विटर पर अपने प्रोजेक्ट का ऐलान करते हुए अपनी धार्मिक भावनाएँ जाहिर की। इसलिए लिबरल सेकुलर मीडिया ने हिन्दूफ़ोबिक मानसिकता दिखाते हुए धनुष की ट्वीट से ‘ॐ नमः शिवाय’ वाला हिस्सा हटा दिया। 

धनुष की टिप्पणी को ‘धर्म निरपेक्ष’ बनाने की कोशिश में ‘लिबरल सेकुलर’ मीडिया ने धार्मिक अभिव्यक्ति के संबंध में कहे गए उनके शब्दों को सीमित करके अपनी हिन्दूफ़ोबिक मानसिकता का प्रदर्शन किया।

यह कुछ मीडिया रिपोर्ट्स हैं जिसमें धनुष की हिन्दू अभिव्यक्ति को ‘धर्म निरपेक्ष’ बनाने का प्रयास किया गया है। 

‘लिबरल सेकुलर’ मीडिया के प्रतीक इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में धनुष के ट्वीट का उल्लेख किया लेकिन जानबूझ कर ‘ॐ नमः शिवाय’ हटा दिया। 

सिर्फ इंडियन एक्सप्रेस ही नहीं बल्कि एबीपी न्यूज़, डेक्कन हेराल्ड और न्यूज़ 18 ने भी ट्वीट से ‘ॐ नमः शिवाय’ हटा कर धनुष के ट्वीट को ‘धर्म निरपेक्ष’ बनाने का भरपूर प्रयास किया।   

एबीपी न्यूज़ की रिपोर्ट

डेक्कन हेराल्ड ने भी कुछ ऐसी ही हरकत की। डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट पीटीआई रिपोर्ट पर आधारित थी और इसमें भी ‘ॐ नमः शिवाय’ गायब कर दिया गया था, जो कि धनुष के मूल ट्वीट में मौजूद था।              

डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट

न्यूज़ 18 भी इस तरह के हिन्दूफ़ोबिक कंटेंट को बढ़ावा देने की दौड़ में बहुत पीछे नहीं रहा। 

साभार: स्वाति गोयल शर्मा

इस मामले की रिपोर्टिंग में ‘लिबरल सेकुलर’ मीडिया की बेईमानी खुल कर सामने आई है। मीडिया गिरोह की यह भी आदत रही है कि वह अल्पसंख्यकों को दोष मुक्त घोषित करने के लिए उनके द्वारा अंजाम दी गई आपराधिक घटनाओं को भी ‘हिन्दू एंगल’ दे देती है। अब इन्होंने नया तरीका निकाला है जिसमें एक व्यक्ति की हिन्दू पहचान छुपा दी जाती है।  

खुदीराम बोस के गाँव पहुँचे अमित शाह, परिजनों ने कहा- इतना सम्मान कभी नहीं मिला

पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दो दिन के दौरे पर कोलकाता पहुँचे है। उन्‍होंने सबसे पहले कोलकाता में स्वामी विवेकानंद के पैतृक घर जाकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद वह पश्चिम मिदनापुर में खुदीराम बोस के पैतृक गाँव गए और पुष्पांजलि अर्पित की।

अमित शाह ने यहाँ पर खुदीराम बोस के परिवार के सदस्यों के साथ मुलाकात की और उन्हें माला पहनाकर सम्मानित किया। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, “यह मेरा सौभाग्य है कि मैं महान स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस के घर की मिट्टी को अपने माथे से स्पर्श कर पाया। वह खुशी-खुशी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के लिए बलिदान देने के लिए फाँसी पर चढ़ गए।”

खुदीराम बोस के परिजन इससे बेहद खुश नजर आए। उनके परिवार के सदस्य गोपाल बसु ने कहा, “बीजेपी ने हमें थोड़ी श्रद्धा दी है। किसी भी पिछली सरकार ने हमें इस तरह का सम्मान नहीं दिया। तृणमूल कॉन्ग्रेस ने भी नहीं।”

इससे पहले गोपाल बसु ने कहा था, “मैं अमित शाह से कहूँगा कि खुदीराम बोस की जन्मस्थली में कोई विकास नहीं हुआ है। हम केवल युवाओं को रोजगार चाहते हैं।”

रामकृष्ण मिशन आश्रम में स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद अमित शाह ने कहा, “आज मेरे लिए सौभाग्य और आनंद का विषय है कि मैं उस जगह पर आया हूँ जो न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतना जागृत करने की जगह है। स्वामी जी वो शख्सियत थे जिन्होंने आधुनिकता और अध्यात्म को जोड़ने का काम किया। मैं यहाँ से नई चेतना प्राप्त करके जा रहा हूँ।” उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने जो मार्ग दिखाया है उससे न केवल भारत बल्कि पूरा विश्व समृद्धि के रास्ते पर अग्रसर होगा।

इस दौरे में अमित शाह जहाँ जनता से संवाद करेंगे वहीं टीएमसी के असंतुष्ट कई नेताओं के बीजेपी में शामिल होने की भी अटकलें हैं। इनमें पूर्व मंत्री व विधायक शुभेंदु अधिकारी का नाम भी शामिल है। अमित शाह का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस बगावत के दौर से गुजर रही है। 

शाह के दौरे से पहले टीएमसी में इस्तीफे का दौर चल रहा है। ममता के खास और पूर्व परिवहन मंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। विधायकी छोड़ने के एक दिन बाद शुभेंदु ने तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया। मगर पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर बिमान बनर्जी ने उनके इस्तीफे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। इसी के साथ ही टीएमसी विधायक जितेंद्र तिवारी ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। हालाँकि, उन्होंने जल्द ही माफी माँगकर पार्टी में वापसी कर ली।

इसके अलावा बैरकपुर के विधायक शीलभद्र दत्ता और कंथी उत्तर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक बनाश्री मैती ने भी अपना इस्तीफा दे दिया। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि तृणमूल कॉन्ग्रेस और राज्य मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री का पद छोड़ने वाले प्रभावशाली नेता सुवेंदु अधिकारी, शीलभद्र दत्ता समेत तृणमूल कॉन्ग्रेस के ये असंतुष्ट नेता शाह के बंगाल दौरे के दौरान बीजेपी में शामिल होंगे। अटकलें लगाई जा रही हैं कि वे अपने 10,000 कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा का दामन थामेंगे।

टाटा को ‘एंटरप्राइज ऑफ सेंचुरी’ अवॉर्ड: PM मोदी बोले- अब दुनिया को आत्मनिर्भर भारत की क्षमता दिखाने का समय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (दिसंबर 19, 2020) को ‘Associated Chambers of Commerce and Industry of India’s (ASSOCHAM) के फाउंडेशन सप्ताह कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने टाटा ग्रुप को ‘ASSOCHAM एंटरप्राइज ऑफ सेंचुरी’ का अवॉर्ड दिया। टाटा समूह के अध्यक्ष रतन टाटा ने इस अवॉर्ड को प्राप्त किया। पीएम मोदी ने उनकी सराहना भी की।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बीते 100 सालों से आप सभी देश की अर्थव्यवस्था को, करोड़ों भारतीयों के जीवन को बेहतर बनाने में जुटे हैं और अब आने वाले वर्षों में आत्मनिर्भर भारत के लिए आपको पूरी ताकत लगा देनी है। उन्होंने याद दिलाया कि इस समय दुनिया चौथी औद्योगिक क्रांति की तरफ तेज़ी से आगे बढ़ रही है और नई टेक्नॉलॉजी के रूप में चुनौतियाँ भी आएँगी और उनके समाधान भी।

उन्होंने कहा कि आज वो समय है, जब हमें प्लान भी करना है और एक्ट भी करना है। उन्होंने कहा कि हमें हर साल के, हर लक्ष्य को राष्ट्र निर्माण के एक बड़े लक्ष्य के साथ जोड़ना है। आने वाले 27 साल भारत के वैश्विक किरदार को ही तय नहीं करेंगे, बल्कि ये हम भारतीयों के सपनों और समर्पण, दोनों को टेस्ट करेंगे। उन्होंने कहा कि ये समय भारतीय इंडस्ट्री के रूप में आपकी क्षमता, प्रतिबद्धता और साहस को दुनिया भर को दिखा देने का है।

बकौल पीएम मोदी, हमारा चैलेंज सिर्फ आत्मनिर्भरता ही नहीं है, बल्कि हम इस लक्ष्य को कितनी जल्दी हासिल करते हैं, ये भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने याद दिलाया कि एक जमाने में हमारे यहाँ जो परिस्थितियाँ थीं, उसके बाद कहा जाने लगा था- ‘Why India’। अब जो सुधार देश में हुए हैं, उनका जो प्रभाव दिखा है, उसके बाद कहा जा रहा है- ‘Why not India’। प्रधानमंत्री मोदी ने ASSOCHAM के कार्यक्रम में कहा:

“नया भारत, अपने सामर्थ्य पर भरोसा करते हुए, अपने संसाधनों पर भरोसा करते हुए आत्मनिर्भर भारत को आगे बढ़ा रहा है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मैन्युफेक्चरिंग पर हमारा विशेष फोकस है। मैन्युफेक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए हम निरंतर रिफॉर्म्स कर रहे हैं। देश आज करोड़ों युवाओं को अवसर देने वाले Enterprise और Wealth Creators के साथ है। निवेश का एक और पक्ष है जिसकी चर्चा आवश्यक है। ये है रिसर्च एंड डेवलपमेंट- R&D, पर होने वाला निवेश। भारत में R&D पर निवेश बढ़ाए जाने की जरूरत है।”

पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी की शुरुआत में अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत को राजमार्गों से कनेक्ट करने का लक्ष्य रखा था, वहीं अब देश में फिजिकल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इजरायल के साथ फिलिस्तीन के विवाद वाले क्षेत्रों में शांति व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए रतन टाटा को ‘इंडो-इजरायल चैंबर्स ऑफ कॉमर्स’ के द्वारा भी जल्द ही सम्मानित किया जाना है। नए भारतीय संसद का निर्माण भी टाटा समूह ही कर रही है।

दूरदर्शन पर अब ‘शेख चिल्ली’ का हिन्दू विरोधी प्रोपेगेंडा बंद, योग का उड़ाया था मजाक

सोशल मीडिया पर एक कार्टून शो का वीडियो काफी वायरल हो रहा है, जिसमें निर्माताओं ने योग और हिन्दू संतों का अपमानजनक चित्रण करके हिन्दुओं के प्रति अपनी घृणा का सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन किया है। दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्टून शो – ‘शेख चिल्ली एंड फ्रेंड्स’ ने योग की परम्परा का मजाक बनाकर और हिन्दू संतों का अपमान करके नया विवाद खड़ा कर दिया। 

शो के एक एपिसोड में देखा जा सकता है कि शेख चिल्ली जो एक मुस्लिम चरित्र के रूप में दर्शाया गया है, वह योग गुरुओं का मज़ाक बनाता है। एपिसोड में शेख चिल्ली, उसके दोस्त और जिन योग गुरु को योग करने की चुनौती देते हैं। निर्माता बेहद बारीकी से इस कार्टून के ज़रिए योग प्रक्रिया का दुष्प्रचार करते हैं। 

निर्माता इस एपिसोड के अंत में योग गुरुओं को प्रेत/चुड़ैल (witch) के रूप में भी दर्शाते हैं। कार्यक्रम के निर्माताओं ने योग की परम्परा का अपमान करने और हिन्दू संतों का अनादर करने के लिए सरकार के संसाधनों का पर्याप्त उपयोग किया। 

क्यों शेख चिल्ली का प्रसारण दूरदर्शन पर हो रहा था

अगस्त 2020 में डिस्कवरी इंडिया के एक और चैनल डिस्कवरी किड्स ने बच्चों के लिए बनाए गए कई कार्टून शो के चुनिंदा एपिसोड्स का प्रसारण करने के लिए दूरदर्शन से समझौता किया था। समझौते के तहत एनिमेटेड शृंखला (animated series) लिटिल सिंघम, कृष्णा (kisna), शेख चिल्ली एंड फ्रेंड्स के एपिसोड सुबह 8 बजे से दूरदर्शन पर प्रसारित किए जाने लगे।

इसी दौरान प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर वेम्पती ने कहा था, “पिछले तीन महीनों में हमने महामारी के बीच दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए कुछ सबसे शानदार कार्यक्रमों का प्रसारण किया है। दूरदर्शन पर प्रसारित किए जाने वाले डिस्कवरी किड्स के कार्यक्रम उसी यात्रा का अहम पड़ाव हैं। मैं डिस्कवरी का आभारी हूँ कि वह इसके लिए आगे आए और उसने समाज की भलाई के लिए इस तरह का कंटेंट दिखाया।” 

शेख चिल्ली एंड फ्रेंड्स के को-प्रोडूसर एपसंस एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड (Apsons Entertainment Pvt Ltd) हैं, इसकी कहानी मासूम लड़के शेख चिल्ली और उसके झुनझुन नगर के दोस्तों द्वारा किए गए ‘एडवेंचर’ के इर्द-गिर्द घूमती है। वह दिल का साफ़ है लेकिन वह अक्सर अपनी हरकतों/योजनाओं से हँसी और अपने दोस्तों के लिए दिक्कतें पैदा करता है। कृष्णा के को-प्रोडूसर कॉसमॉस माया (Cosmos Maya) हैं और इसकी कहानी आनंद नगरी के लड़के और उसके प्रतिद्वंद्वी अंधेरनगरी राजा दुर्जन पर आधारित है। कृष्णा और उसके दोस्त अपनी बुद्धि और बहादुरी के ज़रिए हर समस्या हल करने का प्रयास करते हैं। 

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ नेटिज़न्स ने दूरदर्शन की मंशा पर सवाल खड़े किए और इस तरह के हिन्दू विरोधी प्रोपेगेंडा का प्रसारण करने के लिए जम कर निंदा की। 

एक यूज़र ने ज़िक्र किया कि किस तरह हिन्दू संतों का मज़ाक बनाया जा रहा है, जो कि अस्वीकार्य है और दूरदर्शन को इस मामले पर संज्ञान लेना चाहिए। 

एक और यूज़र ने लिखा कि लोग एक झूठे जिन के दावों पर भरोसा करना चाहते हैं या कालांतर में जाँची परखी गई पवित्र योग प्रक्रिया का। 

हिन्दू विरोधी प्रोपेगेंडा से दुखी होकर लेखक और स्तंभकार रेनी लिन (renee lynn) ने इशारा किया कि डीडी नेशनल पर बच्चों को दिखाया जा रहा है, ‘मुस्लिम लड़का सन्यासी को पीट रहा है।’ उन्होंने यह भी कहा कि वीडियो हिन्दुओं के प्रति घृणा फैला रहा है। 

इसके बाद उन्होंने यह भी पूछा कि हमेशा हिन्दुओं को ही क्यों निशाना बनाया जाता है। 

एक और चिंतित हिन्दू ने बच्चों के सामने पेश किए जाने वाले इस नफ़रत भरे कार्टून पर रोष जताया। व्यक्ति ने माँग उठाई कि प्रसार भारती के जिन अधिकारियों ने इस कार्टून के प्रसारण को हरी झंडी दिखाई उस पर कार्रवाई होनी चाहिए और इस कार्टून के निर्माताओं को भी गिरफ्तार किया जाना चाहिए। 

हिन्दूफ़ोबिक एपिसोड के वायरल होने पर प्रसार भारती ने लगाई रोक

शेख चिल्ली के हिन्दूफ़ोबिक एपिसोड के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर काफी विरोध हुआ, जिसके बाद ऑपइंडिया ने प्रसार भारती में मौजूद सूत्रों से संपर्क करने का प्रयास किया। ऑपइंडिया ने पूछा कि बच्चों के शो पर इस तरह के सवाल खड़े होने के बाद प्रसार भारती क्या कार्रवाई करेगा। 

इसके बाद सूत्रों ने ऑपइंडिया को बताया कि लॉकडाउन में बच्चों के लिए शुरू किए गए शो शेख चिल्ली का दूरदर्शन पर प्रसारण नहीं किया जाएगा। यह भी बताया गया कि तमाम निजी प्रसारकों ने दूरदर्शन पर निशुल्क (gratis) आधार पर शेख चिल्ली के अलावा छोटा भीम जैसे कई कार्टून प्रसारित किए थे। क्योंकि शेख चिल्ली में दिखाई गई बात बेशक ऐसी नहीं थी जो बच्चों के सामने रखी जाती इसलिए इसके प्रसारण पर पाबंदी लगा दी गई।  

‘हिन्दू तो सिखों से अलग हैं, तुम उनका नेतृत्व मत करो’: औरंगजेब के कपट का जवाब वेदों से दिया, गुरु ने शीश कटा दिया पर झुके नहीं

भारत में एक से बढ़ कर एक महान संत हुए हैं और उन्होंने धर्म के लिए अपना सर्वस्व बलिदान किया है। ऐसी ही हस्तियों में से एक थे गुरु तेग बहादुर, जो सिखों के नौवें गुरु कहलाए। उनके बेटे गुरु गोविंद सिंह सिखों के अंतिम व दसवें गुरु हुए। यहाँ हम आपको बताएँगे कि कैसे गुरु तेग बहादुर ने कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हो रहे अत्याचार और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ औरंगजेब से लोहा लिया, लेकिन झुके नहीं।

ये वो समय था, जब औरंगजेब का अत्याचार लगातार ही बढ़ता जा रहा था और देश भर के हिन्दू सहित कश्मीरी पंडित भी हलकान थे। वाराणसी, उदयपुर और मथुरा सहित हिन्दुओं की श्रद्धा वाले कई क्षेत्रों में औरंगजेब की फ़ौज मंदिरों को ध्वस्त किए जा रही थी। सन 1669 में तो हद ही हो गई जब हिन्दुओं को नदी किनारे मृतकों का अंतिम-संस्कार तक करने से रोक दिया गया। शाही आदेश और जोर-जबरदस्ती, दोनों के जरिए हिन्दुओं पर प्रहार हो रहे थे।

जम्मू-कश्मीर में शेर अफगान नामक आक्रांता कश्मीरी पंडितों का नामोनिशान मिटा देना चाहता था और बादशाह औरंगजेब को उसका वरदहस्त प्राप्त था। ऐसे कठिन समय में कश्मीरी पंडितों का एक प्रतिनिधिमंडल गुरु तेग बहादुर के पास पहुँचा और उन्हें अपनी समस्या बताई। कृपाराम की अध्यक्षता में आए इस प्रतिनिधिमंडल ने जब गुरु को बादशाही अत्याचार और क्रूरता की दास्तान सुनाई तो वो काफी दुःखी हो उठे।

कहते हैं, जब पूरे दरबार में निराशा का माहौल था, तब बालक गोविंद राय को भी ये ठीक नहीं लगा और उन्होंने कई सवाल दाग दिए। वो पूछने लगे कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि जहाँ दिन-रात भजन-कीर्तन और शास्त्रों की बातें होती थीं, वहाँ आज इस तरह नीरसता का माहौल छाया हुआ है। बच्चे की जिद के आगे गुरु तेग बहादुर झुक गए और सारी व्यथा कह डाली। दरबार में कौन लोग आए थे और उनकी व्यथा थी- सब।

उन्होंने ये तक कह दिया कि इनके दुःखों के निवारण के लिए किसी महापुरुष का बलिदान चाहिए। इस पर बालक गोविंद राय ने पूछा इस समय भारतवर्ष में आपसे बढ़ कर विद्वान, सद्गुणों वाला और महान महापुरुष कौन है, इसीलिए क्या आपको ही इस बलिदान के लिए स्वयं को प्रस्तुत नहीं करना चाहिए? एक बालक के मुँह से गुरु नानक की शिक्षाओं और शरणागत की रक्षा के लिए प्राण त्यागने की बातें सुन कर गुरु तेग बहादुर समझ गए कि ये ईश्वर का ही संदेशा है।

गुरु तेग बहादुर ने इसे ईश्वर का आदेश मान कर कश्मीरी पंडितों की रक्षा का निर्णय लिया और बादशाह औरंगजेब के पास उनके ही हाथों संदेशा भेजा। औरंगजेब को लगा कि अगर धर्मांतरण वाले अभियान को गुरु तेग बहादुर का समर्थन मिल गया तो एक-एक कश्मीरी पंडित मुस्लिम मजहब अपना लेगा। औरंगजेब ये सोच कर खुश हुआ कि गुरु तेग बहादुर इस्लाम अपना लेंगे और पीछे से पूरे कश्मीर पर भी इस्लाम का राज होगा।

गुरु तेग बहादुर की दिल्ली आने की सूचना को उसने भ्रामक खबर बना कर दुष्प्रचारित करवाया कि गुरु इस्लाम अपनाने ही आ रहे हैं। लेकिन, कपटी औरंगजेब ने गुरु को आगरा के नजदीक ही गिरफ्तार करवा लिया। इसके ठीक अगले दिन उसने गुरु को अपने दरबार में बुलाया। हमेशा की तरह गुरु तेग बहादुर शांतचित्त मुद्रा में बैठे हुए थे और उनके मुख पर डर या घृणा, किसी भी चीज का जरा भी भाव नहीं था।

दरबार में उनके बीच हुई बातचीत का वर्णन हिंदी समाचार पत्र ‘उगता भारत’ के संस्थापक-संपादक राकेश कुमार आर्य ने अपनी पुस्तक ‘हिन्दू राष्ट्र स्वप्नदृष्टा: बंदा वीर बैरागी‘ में किया है। इसकी चर्चा कई अन्य जगह भी मिलती है। वहाँ औरंगजेब का पूरा जोर इस बात पर था कि वो हिन्दुओं और सिखों को अलग-अलग साबित कर गुरु तेग बहादुर को भ्रमित कर सके और दोनों समुदायों के बीच कटुता पैदा कर सके।

उसने गुरु तेग बहादुर से कहा कि वो हिन्दुओं का नेतृत्व न करें, क्योंकि वे तो सिखों से अलग होते हैं। औरंगजेब के जवाब में गुरु तेग बहादुर ने उसे वेदों और उपनिषदों के माध्यम से समझाना शुरू किया। गुरु तेग बहादुर इन समस्त शास्त्र-पुराणों में पारंगत थे और साथ ही मानवता को परम धर्म मानते थे। इसीलिए उन्होंने इन सबके माध्यम से औरंगजेब के क्रियाकलापों को धर्मविरुद्ध साबित कर दिया, जिससे वो भड़क गया।

औरंगजेब ने अरब मुल्कों का उदाहरण देते हुए दावा किया कि जैसे वहाँ पर सारे मुस्लिम ही होते हैं, ठीक उसी तरह सम्पूर्ण भारतवर्ष में भी एक ‘दीन’ मजहब होगा तो सारी समस्याएँ अपनेआप ही ख़त्म हो जाएँगी- न कोई मतभेद होगा, न कोई कटुता। गुरु तेग बहादुर ने उसे याद दिलाया कि जहाँ केवल मुस्लिम रहते हैं, वहाँ भी तो शिया-सुन्नी के झगड़े चलते ही रहते हैं। उन्होंने मुस्लिमों में भी कई पंथ-समुदाय होने की बात याद दिलाई।

गुरु तेग बहादुर का जोर इस बात पर था कि ये पूरी दुनिया ईश्वर की बनाई वो वाटिका है, जहाँ भाँति-भाँति के पुष्प खिल सकते हैं। उन्होंने औरंगजेब से सवाल किया कि अगर प्रकृति की इच्छा होती कि भारत में सिर्फ मुस्लिम ही पैदा हों, तब तो उन्हें संतान ही नहीं होती और केवल मुस्लिमों को ही संतान पैदा होती। उन्होंने समझाया कि प्रकृति सबके साथ बराबर व्यवहार करती है, इसीलिए उसे भी जबरन धर्मांतरण अभियान रोक देना चाहिए।

इसके बाद का प्रसंग लगभग सभी को पता ही है। क्रूर और आततायी बादशाह ने गुरु को मृत्यु अथवा इस्लाम में से कोई एक चुनने के लिए दिया। गुरु तेग बहादुर ने धर्म की रक्षा के लिए मृत्यु का वरन करने की इच्छा प्रकट की, लेकिन इस्लाम अपनाने से साफ़ इनकार कर दिया। उन्हें जेल में डाल दिया गया। उन पर अमानवीय अत्याचार किए जाने लगे। गुरु ने सबका सामना किया। उन्हें विभिन्न माध्यमों से प्रताड़ित किया जाता था।

इस पूरे प्रकरण के दौरान अगर भाई मतिदास के बलिदान का जिक्र न किया गया तो ये अधूरा ही रहेगा। उन्हें भी गुरु तेग बहादुर के साथ ही पकड़ा गया था। दिल्ली के चाँदनी चौक पर उन्हें मृत्युदंड देने के लिए लाया गया। आक्रांताओं ने उनकी अंतिम इच्छा पूछी तो उन्होंने कहा कि मृत्यु के वक्त उनका सिर गुरु के समक्ष रहे, ताकि वो उन्हें देखते हुए मौत को गले लगा सकें। गुरु तेग बहादुर के पिंजरे के ठीक सामने उन्हें रखा गया।

लकड़ी के दो शहतीरों की पाट में उनकी शरीर को टिका दिया गया और दो जल्लाद आड़े लेकर खड़े हो गए। उनसे अंतिम बार पूछा गया कि क्या वो इस्लाम कबूल करेंगे, लेकिन उनका जवाब ना में था। तुरंत ही आड़े से उनके शरीर को चीर डाला गया। खून के फव्वारे छूट पड़े, देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए और फिर भी अत्याचारी आक्रांता मजे लेते रहे। औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर की मृत्यु की भी तारीख निश्चित कर दी।

पूरे दिल्ली में ढिंढोरा पिटवा दिया गया कि गुरुवार, 12 मार्गशीष, सुदी 5, सम्मत 1732, विक्रमी (नवंबर 11, 1675) को चाँदनी चौक स्थित दिल्ली चबूतरे पर उनका क़त्ल कर दिया जाएगा। उससे पहले भाई दयाल जी और सतीदास जी के जीवन का अंत कर दिया गया था। उपर्युक्त तारीख़ पर सैकड़ों लोग वहाँ जुटे पर किसी की कुछ भी बोलने की हिम्मत नहीं हुई। अत्याचारियों ने सबके सामने गुरु का शीश काट दिया। ‘हिंद की चादर’ का बलिदान हो गया।

अंत में जिक्र उन दो बहादुरों का, जिहोने गुरु के शीश और धड़ को शत्रु के द्वारा अपमानित होने से बचाया और विधि-विधान से अंतिम संस्कार हेतु लेकर गए। गुरु की मृत्यु के बाद वहाँ बड़ी भगदड़ मच गई थी। भाई वीर जैता और भाई लखीशाह ने क्रमशः गुरु के शीश और धड़ को उठाया और वहाँ से निकल गए। बाद में ससम्मान उनका अंतिम संस्कार हुआ। इन दोनों की बहादुरी आज भी याद की जाती है।

इन सबके बावजूद आज नारा लगाया जाता है- जय भीम-जय मीम। इस नारे का अब तक का सफर विश्वासघातों से ही भरा है। ऐसे मौकों की फेहरिस्त काफी लंबी है, जब फायदे के लिए दलितों का पहले इस्तेमाल करने वालों ने ही बाद में मजहब के नाम पर उनका नरसंहार किया। हिन्दुओं और सिखों के साथ ये हर दौर में होता आया है। ऐसी एक नहीं, बल्कि कई घटनाएँ हैं जो इस्लामी क्रूरता को बयान करती है। निशाना हिन्दू होते हैं, या सिख।

चुनावों के समय अजीत डोभाल के बेटे को ले कर झूठ फैलाने पर जयराम रमेश ने माफी माँगी, कहा- कारवाँ पढ़ कर बहक गया

कारवाँ मैगजीन के साथ मिल कर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल के खिलाफ दुष्प्रचार करने वाले जयराम रमेश ने अब कोर्ट में इस मामले में माफ़ी माँग ली है। विवेक डोभाल द्वारा दायर किए गए आपराधिक मानहानि के मुक़दमे की सुनवाई के दौरान कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने अपना माफीनामा सौंपा। आपत्तिजनक लेख और बयान के खिलाफ विवेक ने मुकदमा दायर किया था।

वहीं विवेक डोभाल ने भी पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश के माफीनामे को स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मानहानि का केस वापस लेने का निर्णय लिया है। जयराम रमेश ने कहा कि उन्होंने क्षणिक आवेश में विवेक डोभाल के खिलाफ बयान दिए और कई आरोप लगाए, क्योंकि उस समय चुनाव का भी माहौल था। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें ये सब कहने से पहले अपने दावों की पुष्टि कर लेनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि वो कारवाँ के लेख को पढ़ कर भ्रम में पड़ गए थे।

हालाँकि, कारवाँ मैगजीन के खिलाफ केस चलता रहेगा। मैगजीन में एक लेख के माध्यम से आरोप लगाया गया था कि विवेक डोभाल कई कंपनियों के एक बड़े नेटवर्क का संचालन करते हैं और उन्होंने नोटबंदी के दौरान बड़ी मात्रा में ब्लैक मनी को ह्वाइट किया। दावा किया गया था कि जहाँ अजीत डोभाल टैक्स हेवेन्स के खिलाफ क्रैकडाउन की बातें करते हैं, वहीं विवेक टैक्स की चोरी कर संपत्ति बना रहे हैं।

जयराम रमेश ने भी इसी लेख के आधार पर बयान दिए थे और दावा किया था कि उनका बयान आपत्तिजनक नहीं है, क्योंकि सभी चीजें सार्वजनिक डोमेन में बाहर आ चुकी है। उन्होंने खुद को सार्वजनिक व्यक्ति बताते हुए कहा था कि ये उनकी जिम्मेदारी है कि जनहित के मुद्दों पर सवाल उठाएँ। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विवेक पर निशाना साधा था और बताया था कि ये एक ‘प्रोफेशनल’ प्रेस कॉन्फ्रेंस था, इसमें कुछ भी व्यक्तिगत नहीं था।

सुनवाई की शुरुआत में ही विवेक डोभाल ने कहा था कि यह मामला आने वाले वर्षों में उनके करियर पर एक धब्बे की तरह है। अपने पिता को लेकर उन्होंने कहा था कि उनका पूरा जीवन इस देश के दुश्मनों से लड़ते बीता है। ऐसा कैसे हो सकता है कि वो अपने बेटे को अवैध गतिविधियों को अंजाम देने की अनुमति दे दें। कारवाँ के इस लेख में ‘डोभाल परिवार’ को ‘डी कंपनी’ का नाम दिया गया था, जिसका इस्तेमाल 1993 मुंबई बम धमाकों के आरोपी और कुख्यात आतंकवादी दाऊद इब्राहिम के गैंग के लिए किया जाता है।

लेख में यह आरोप लगाया गया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल के बेटे विवेक डोभाल केमैन आइलैंड, जो कि टैक्स-हेवन के रूप में जाना जाता है, में हेज फंड (निवेश निधि) चलाते हैं। रवीश कुमार ने यहाँ तक लिखा था कि “डी-कंपनी अभी तक दाऊद का गैंग ही होता था, अब भारत में एक और डी कंपनी आ गई है”। दावा किया गया था कि यह हेज फंड 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नोटबंदी की घोषणा के 13 दिन बाद रजिस्टर्ड किया गया था।

अदनान सामी ने पाकिस्तानी ट्रोल को किया सरेंडर, कहा- मेरे गाने नहीं सुने… आतंक मत फैलाओ

बीते 16 दिसंबर 2020 को पूरे देश ने 50वाँ विजय दिवस मनाया। इस मौके पर देश और दुनिया के तमाम लोगों ने भारतीय सेना की प्रशंसा करते हुए बधाई दी। यह दिन जितना भारतीय सेना की जीत के लिए मशहूर है, उतना ही पाकिस्तानी सेना की हार के लिए भी। इस बात का उल्लेख करते हुए मशहूर गायक अदनान सामी ने अपने ट्वीट में भारतीय सेना का वीडियो साझा किया। इस वीडियो पर एक पाकिस्तानी ट्रोल ने उन्हें घेरने की कोशिश की, लेकिन गायक ने ट्रोल को ऐसा जवाब दिया कि उसकी बोलती बंद हो गई।

दरअसल ‘विजय दिवस’ के मौके पर भारतीय भारतीय सेना ने सशस्त्र बलों का शौर्य दर्शाने वाला एक वीडियो साझा किया था। इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए अदनान सामी ने उर्दू शायर की पंक्तियाँ लिखी, “मुझे सब याद है ज़रा-ज़रा, तुम्हें याद हो कि न याद हो।” इन पंक्तियों के अलावा उन्होंने अपने ट्वीट में विजय दिवस की जगह ‘पाक सरेंडर डे’ (पाकिस्तान के आत्मसमर्पण का दिन) लिखा था। 

इस दिन युद्ध में दिखाए गए भारतीय सेना के पराक्रम की वजह से लगभग 93 हज़ार पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था। इतना ही नहीं अदनान सामी ने अपने ट्वीट में पाकिस्तानी सेना को भारतीय सेना के हाथों मिली इस शिकस्त के लिए ‘रियलिटी चेक’ (हैशटैग) भी लिखा था। उल्लेखनीय है कि मशहूर भारतीय गायक अदनान सामी के पिता पाकिस्तानी वायु सेना का हिस्सा थे।     

इस बात पर एक पाकिस्तानी ट्रोल ने अदनान सामी को नसीहत देते हुए लिखा- प्यार फैलाने की कोशिश करो (Try to spread love)। 

पाकिस्तानी ट्रोल के ट्वीट का जवाब देते हुए भारतीय गायक ने लिखा, “मैं हमेशा प्रेम को ही बढ़ावा देता हूँ। क्या आपने मेरे गाने नहीं सुने? बल्कि आप लोगों को शांति फैलाने पर ध्यान देने की ज़रूरत है ना कि आतंकवाद!”

16 दिसंबर 2020 को विजय दिवस की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद समेत देश के तमाम मंत्रियों ने भारतीय सेना की वीरता और पराक्रम की सराहना की थी। विजय दिवस के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘स्वर्णिम विजय वर्ष’ के प्रतीक चिह्न का अनावरण किया था।  

केरल में जीत के जश्न में मंदिर में तोड़फोड़, देवी-देवताओं का अपमान: CPM के 11 कार्यकर्ता गिरफ्तार

केरल के पलक्कड़ में मंदिर में हमला व तोड़फोड़ किए जाने के मामले में राज्य की सत्ताधारी वामपंथी पार्टी CPM के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। ये पार्टी की एरिया कमिटी के सदस्य हैं। सभी आरोपितों पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने और विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करने का आरोप लगाया गया है और पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है। हाल ही में केरल में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में CPM के नेतृत्व वाले LDF को बड़ी जीत मिली है।

इसके बाद से ही भाजपा और RSS के कार्यालयों में तोड़फोड़ शुरू कर दी गई। आरोप है कि CPM के गुंडों ने भाजपा कार्यकर्ताओं को भी निशाना बनाया। चूँकि भाजपा ने केरल में बेहतर प्रदर्शन किया है, इसीलिए ये नाराज हैं। चुनाव प्रचार के दौरान भी ऐसी कई घटनाएँ हुईं। भाजपा प्रवक्ता टॉम वडक्कन ने कहा है कि वामपंथियों से इसी प्रकार के ध्रुवीकरण वाले चुनावी अभियान की अपेक्षा भी थी, वो इसी तरह के काम कर सत्ता पाते हैं।

पलक्कड़ म्युनिसिपेलिटी में भाजपा की ही सत्ता थी और इस बार के चुनावों में भी पार्टी ने इसे बरक़रार रखा है, जिससे सीपीएम बौखलाई हुई है। पंडलम में भी भाजपा ने 33 में से 18 सीटें जीत कर काउंसिल बनाई है, जिससे LDF को धक्का लगा है। भाजपा ने 23 ग्राम पंचायतों में जीत दर्ज की है। गुरुवार (दिसंबर 17, 2020) को वामपंथी गुंडों ने कुरीपूजा में भाजपा नेता रतीश के घर पर हमला कर दिया। पलक्कड़ स्थित भगवान सुब्रह्मण्यम के मंदिर पर भी हमला कर तोड़फोड़ मचाई गई।

इन सबके अलावा अल्लापुझा में RSS के दफ्तर पर भी CPM के गुंडों ने जबरदस्त हमला बोला। ‘रिपब्लिक टीवी’ ने CCTV फुटेज के हवाले से बताया है कि कथित रूप से CPM के गुंडों ने भाजपा नेता के घर से चलता हुआ ऑटो रिक्शा टकरा दिया। साथ ही संघ कार्यालय पर पेट्रोल बम फेंके गए, जिससे न सिर्फ कार्यालय बल्कि पूरी इमारत को नुकसान पहुँचा। स्थानीय जनता को पीने का स्वच्छ जल मुहैया कराने के लिए ‘सेवा भारती’ ने इस इमारत का निर्माण कराया था।

इस दौरान मंदिर को भी नहीं बख्शा गया। CPM के गुंडे सुब्रमण्यम मंदिर में जीत का जश्न मनाने पहुँच गए और इस दौरान वहाँ जम कर तोड़फोड़ की। हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित किया गया। साथ ही मंदिर में रखे रुपयों को भी चुरा लिया गया। प्रतिमाओं का आभूषण चुरा कर भागे गुंडों ने मंदिर की लाइट्स भी तोड़ डाली। अब इस मामले में विवाद होने के बाद पुलिस ने 11 CPM कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। जबकि, इस घटना में काफी सारे गुंडे शामिल थे।

त्रिवेंद्रम कॉरपोरेशन और पलक्कड़ म्युनिसिपलिटी में 13.28 फ़ीसदी वोट हासिल करने और केरल में बीजेपी को राजनीतिक ज़मीन बनाते देख सीपीआईएम के गुंडों ने ये हमले किए हैं। भाजपा ने कई ऐसी सीटों पर भी जीत हासिल की है जो कम्युनिस्ट पार्टी का गढ़ मानी जाती रही हैं, इसमें कन्नूर और कसरगोद शामिल हैं। इस तरह की तमाम बातों की वजह से कम्युनिस्ट पार्टी के खेमे में काफी हलचल है।   

बजरंग दल को बदनाम करने की कोशिशों पर VHP ने राहुल गाँधी को लताड़ा, WSJ के प्रोपेगेंडा को दे रहे थे हवा

वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट का हवाला देकर बजरंग दल को बदनाम करने का प्रयास करने के लिए विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने शुक्रवार (18 दिसंबर 2020) को कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की तीखी आलोचना की है। WSJ की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि आंतरिक मूल्यांकन में प्रतिबंध लगाने की वकालत के बावजूद फेसबुक ने हिंदू राष्ट्रवादी समूह पर कोई कार्रवाई नहीं की।

राहुल गाँधी ने WSJ की रिपोर्ट साझा करते हुए ट्वीट किया, “फेसबुक अमेरिका कहता है कि बजरंग दल की विषयवस्तु आपत्तिजनक है और उस पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए। फेसबुक इंडिया ने हमारे संसदीय पैनल से कहा कि बजरंग दल की विषयवस्तु आपत्तिजनक नहीं है। क्या फेसबुक भारत और भारतीय संसद से झूठ बोल रहा है?”   

राहुल गाँधी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

परिषद का राहुल गाँधी पर हमला, पूछे भारत विरोधी मत पर सवाल 

शुक्रवार को दिए गए बयान में विश्व हिन्दू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि राहुल गाँधी ने WSJ की रिपोर्ट में लगाए झूठे आरोपों का हवाला देकर अपनी सोच जगजाहिर कर दी है। विहिप के सचिव मिलिंद परंदे ने कहा कि राहुल गाँधी हमेशा से ही देश विरोधी तत्वों जैसे टुकड़े-टुकड़े गैंग, सीएए विरोधी उपद्रवी, पाकिस्तान और चीन समर्थक तत्वों के समर्थन में मुखर रहे हैं। 

विहिप ने दोहराया कि बजरंग दल जैसे राष्ट्रवादी संगठन राहुल गाँधी की आँखों का नासूर बन गए हैं। संगठन ने अपने बयान में कहा, “चीन से उनकी (राहुल गाँधी) घनिष्ठता और संबंध छिपे नहीं हैं। वे एक अमेरिकी समाचार पत्र पर भरोसा कर सकते हैं, लेकिन देशव्यापी युवा राष्ट्रवादी संगठन पर भरोसा नहीं कर सकते हैं।” 

विहिप सचिव मिलिंद परंदे ने कहा कि WSJ को अपनी झूठी रिपोर्टिंग और बजरंग दल को अपमानित करने की आड़ में भारत को निशाना बनाने के लिए माफ़ी माँगनी चाहिए। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स और विकीलीक्स की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पहले बजरंग दल पर पाबंदी लगाने का प्रयास किया था, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हुई थीं।  

विहिप का यह भी कहना था, “फेसबुक ने पहले ही स्पष्ट किया है कि फेसबुक के मंच पर बजरंग दल पर किसी भी तरह का प्रतिबंध लगाने का कोई कारण नहीं है। यह उनकी द्वेषपूर्ण हिन्दू विरोधी मानसिकता दर्शाता है। अब राहुल गाँधी और WSJ को बजरंग दल और हिन्दू समाज से क्षमा माँगनी चाहिए जो वैश्विक आबादी का ⅙ हिस्सा हैं।” 

फेसबुक ने किया था WSJ के दावों को खारिज 

फेसबुक इंडिया हेड अजीत मोहन ने बुधवार को संसदीय पैनल से कहा था कि उन्हें हिन्दू राष्ट्रवादी संगठन बजरंग दल पर कार्रवाई करने की कोई ठोस वजह नहीं नज़र आती है। इसके पहले रिपोर्ट्स सामने आई थी, जिसमें दावा किया गया था कि फेसबुक ने बजरंग दल के कई अकाउंट की समीक्षा नहीं की थी। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ बुधवार को यूज़र डाटा पर चर्चा के लिए गठित शशि थरूर की अगुवाई वाली सूचना प्रौद्यागिकी, संसदीय स्टैंडिंग कमेटी ने अजीत मोहन को समन भेजा था। WSJ द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए फेसबुक के अधिकारियों ने पैनल के सामने कहा था, “फेसबुक की फैक्ट चेकिंग टीम को बजरंग दल द्वारा साझा किया गया ऐसा कोई कंटेंट नहीं मिला, जिसमें सोशल मीडिया के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया गया हो।” फेसबुक इंडिया हेड अजीत मोहन ने WSJ की रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि यह ‘तथ्यात्मक रूप से गलत और असत्य है’।

बंगाल में अमित शाह: मिदनापुर रैली पर नजरें, 10000 कार्यकर्ताओं के साथ शुभेंदु अधिकारी के BJP में शामिल होने की अटकलें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल पहुँच गए हैं। आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने और कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए वे मिदनापुर में रैली करेंगे। उससे पहले उन्होंने NIA के अधिकारियों के साथ बैठक की। मिदनापुर में शुभेंदु सहित कुछ TMC नेता भाजपा का दामन थाम सकते हैं। वे रामकृष्ण मिशन जाकर स्वामी विवेकानंद और उनके गुरु को श्रद्धांजलि भी देंगे। दोपहर में सिद्धेश्वरी मंदिर और देवी महामाया मंदिर में उनका पूजा-पाठ का कार्यक्रम है। इस बीच टीएमसी के बागी विधायक जितेंद्र तिवारी अपने पुराने स्टैंड से पलट गए हैं।

TMC छोड़ने का ऐलान कर चुके दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे को स्वीकार करने से पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर बिमान बनर्जी ने इनकार कर दिया है। उन्होंने शुक्रवार (दिसंबर 18, 2020) को कहा कि शुभेंदु का इस्तीफा न तो सदन के नियमों के अनुरूप है और न ही संविधान के प्रावधानों का पालन करता है। उन्होंने कहा कि शुभेंदु ने व्यक्तिगत रूप से उन्हें अपना इस्तीफा नहीं सौंपा और वे इसे लेकर निश्चित नहीं हैं कि उनका ये कदम स्वेच्छा से लिया गया और वास्तविक है।

साथ ही विधानसभाध्यक्ष ने शुभेंदु अधिकारी को दिसंबर 21 को व्यक्तिगत रूप से उनके चैंबर में हाजिर होकर इस्तीफा सौंपने को कहा है। उन्होंने नियम-कायदों का हवाला देते हुए कहा कि जब तक ये पुष्ट नहीं होगा कि ये इस्तीफा स्वैच्छिक और वास्तविक है, वे इसे स्वीकार नहीं कर सकते। ये भी ध्यान देने वाली बात है कि आज जिस मेदिनीपुर में पूर्व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली है, वो शुभेंदु अधिकारी का ही गढ़ है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि वे अपने 10,000 कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा का दामन थामेंगे।

इनमें कई बड़े नेता, TMC कार्यकर्ता और पंचायतों में बड़े पदों पर काबिज नेता होंगे। उधर विधायक जितेंद्र तिवारी के इस्तीफा मामले में भी नया ड्रामा शुरू हो गया है। इस्तीफा सौंपने के 24 घंटे के भीतर तिवारी ने यूटर्न ले लिया और पार्टी आलाकमान से अपील की कि वो उनका इस्तीफा न स्वीकार करे, क्योंकि उनसे गलती हो गई है। शुक्रवार को उन्होंने TMC नेता अरूप विश्वास और प्रशांत किशोर के साथ बैठक के बाद ऐसा कहा। कोलकाता के सुरुचि संघ क्लब में हुई इस बैठक के बाद उन्होंने कहा कि कुछ गलतफहमियों की वजह से उनसे गलती हुई।

पांडवेश्वर के विधायक जितेंद्र तिवारी ने कहा, “ये पूरी तरह से मेरी गलती थी। मुझे बताया गया है कि ‘दीदी’ को मेरे इस कदम से गहरा धक्का लगा है। मैं ऐसा कुछ ही नहीं कर सकता, जिससे ‘दीदी’ को दुःख पहुँचे। मैं ममता बनर्जी से व्यक्तिगत रूप से मिल कर उनसे माफ़ी माँगूँगा। मैं TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) के लिए काम करता रहूँगा।” अरूप विश्वास ने भी कहा कि TMC सदस्य के रूप में ममता बनर्जी के वफादार सिपाही की तरह तिवारी भाजपा से लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि परिवार में अनबन होती रहती है।

सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि कल पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने शुभेंदु अधिकारी से उनके जन्मदिन के अवसर पर बात की और कहा कि उनके भाजपा में आने से दक्षिण बंगाल में पार्टी का कद बढ़ेगा। भाजपा सांसद नितीश प्रामाणिक ने कहा कि जहाँ नॉर्थ बंगाल में भाजपा ने 2019 लोकसभा चुनावों में TMC का किला ढाह दिया, साउथ बंगाल में उसका थोड़ा-बहुत असर बचा हुआ है। अमित शाह अपने इस बंगाल दौरे में बीरभूम में भी रोड शो करेंगे।

इससे पहले 48 घंटे के भीतर टीएमसी में 9 इस्तीफे हो चुके थे। बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह का मानना है कि अगले साल जनवरी तक टीएमसी के 60 से 65 विधायक उनके साथ आ सकते हैं। इस बीच यह खबर भी आई है कि माकपा विधायक तापसी मंडल भी ‘कमल’ थामने जा रही हैं। 24 परगना के बैरकपुर विधानसभा क्षेत्र के टीएमसी विधायक शीलभद्र दत्ता और उत्तरी काठी से विधायक बनाश्री मैती ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।