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फ्लॉप रहा ‘भारत बंद’, शाम 7 बजे अमित शाह करेंगे किसानों से मुलाकात: खुली रहीं दुकानें, यातायात सामान्य

पूरे देश में कॉन्ग्रेस सहित सभी विपक्षी दल मिल कर अराजकता का माहौल बनाने की चाहत में ‘किसान आंदोलन’ के जरिए मोदी सरकार को अस्थिर करने के प्रयास में लगे हुए हैं और इसीलिए ‘भारत बंद’ बुलाया गया। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किसानों को बातचीत के लिए बुलाया है, जिसके बाद सरकार कोई बड़ा फैसला ले सकती है। मंगलवार (दिसंबर 8, 2020) की शाम 7 बजे राकेश टिकैत समेत अन्य किसान नेताओं से अमित शाह मुलाकात करेंगे

राकेश टिकट इसके लिए दिल्ली रवाना भी हो चुके हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय किसान यूनियन (Bharatiya Kisan Union) के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि 13-14 प्रतिनिधि आज शाम 7 बजे केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) से मुलाकात करेंगे। बताया जा रहा है कि टिकैत ने गाजीपुर बॉर्डर खुलवा दिया है। साथ ही, वह अन्य किसान संघों से बात करने के लिए सिंघू सीमा रवाना हो गए हैं।

कई राज्यों में भारत बंद का कोई असर नहीं है और लोगों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें खुली रखी हैं। त्रिपुरा में भी सभी दुकानें व बाजार खुले रहे। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की। दक्षिण भारत में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने उपद्रव किया। पुडुचेरी में DMK और कॉन्ग्रेस ने मिल कर विरोध प्रदर्शन किया।

जहाँ तक दिल्ली की बात है, स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस (लॉ एंड ऑर्डर) सतीश गोलचा ने बताया है कि राजधानी में सबकुछ सामान्य है और शांति-व्यवस्था बनी हुई है। उन्होंने जानकारी दी कि यातयात सामान्य है और बाजार खुले हैं। हालाँकि, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली सदर बाजार में भी चहल-पहल रही। वहीं मुंबई में यातायात पूर्ववत रहा। यहाँ दुकानें खुली रहीं और लोग काम पर भी गए।

जयपुर में जब लोगों ने कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की बात नहीं मानी तो वो भाजपा कार्यालय को ही घेरने पहुँच गए, जहाँ दोनों पार्टियों के लोगों के बीच हाथापाई भी हुई। पुलिस के समझाने के बाद NSUI के लोग शांत हुए। उन्होंने पीएम मोदी का पुतला भी फूँका। गाजीपुर में यूपी-दिल्ली सीमा पर जाम लगा रहा। चंडीगढ़ में किसान संगठनों ने हाइवे ब्लॉक कर दिया। सभी विपक्षी दल अपनी राजनीतिक फसल काटने के लिए बेताब दिखे।

पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस और वामपंथी कार्यकर्ताओं ने उपद्रव कर के अराजकता का माहौल पैदा कर दिया। राजस्थान में कॉन्ग्रेस नेता सचिन पायलट का दावा है कि 24 राजनीतिक दलों ने इस भारत बंद का समर्थन किया है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इसे बौखलाए हुए विपक्ष की साजिश बताया। पंजाब में बंद का थोड़ा-बहुत असर देखने को मिला, लेकिन पूरे भारत में लोगों ने इसे समर्थन नहीं दिया और ये फ्लॉप दिख रहा है।

उधर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मंगलवार (दिसंबर 8, 2020) को आयोजित भारत बंद के दौरान भीम आर्मी के नेता-कार्यकर्ता किसानों के आंदोलन में उन्हें समर्थन देने पहुँचे और उनके साथ विरोध प्रदर्शन के इरादे से बाहर निकले। लेकिन, वहाँ उन्हें किसानों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। यूपी गेट पर किसानों के धरने में पहुँचे भीम आर्मी के नेताओं को किसानों ने भगा दिया। पुलिस ने भी लाठियाँ चटकाईं और भीम आर्मी के लोगों को किसानों ने खदेड़ दिया।

‘आदिपुरूष’ को लेकर सैफ पर भड़के मुकेश खन्ना, कहा- ‘अपने धर्म के किसी किरदार को, ऐसे बदलने की हिम्मत दिखा दीजिए, माफी मंजूर नहीं’

बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान अपनी अपकमिंग फिल्म ‘आदिपुरुष’ की रिलीज से पहले ही सुर्खियों में आ गए हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान माता सीता और रावण को लेकर ऐसी टिप्पणी की है, जिससे वो लोगों के निशाने पर आ गए हैं। इसे लेकर अब दिग्गज अभिनेता मुकेश खन्ना की भी प्रतिक्रिया आ गई है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो शेयर कर सैफ अली खान को लताड़ लगाई है। उनके वीडियो पर लोग जमकर प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं।

‘धार्मिक किरदारों से छेड़छाड़ की कोशिश कर रहे फिल्मकार’

अपने वीडियो में मुकेश खन्ना कहते है, “मैं देख रहा हूँ कि अभी भी हमारे फिल्मकार हमारे धार्मिक किरदारों के साथ छेड़छाड़ करने की अवांछनीय कोशिश में लगे हुए हैं। मुझे बताया गया है कि हमारे सैफ अली खान ने अपने एक इंटरव्यू में कहा है, अपनी एक आने वाली फिल्म ‘आदिपुरुष’ के किरदार के बारे में, उन्होंने कहा कि उन्हें लंकेश रावण का रोल करने में बहुत मजा आया, दिलचस्प लगा। उनके हिसाब से वो उन्हें मानवीय और मनोरंजक बना रहे हैं। दयालु दिखा रहे हैं।”

‘अच्छों को अच्छा और बुरों को बुरा रहने दें’

मुकेश खन्ना ने आगे कहा, “मेरा सिर्फ इतना ही कहना है उनसे कि हमारे एपिक (महाकाव्य) के किरदारों के साथ छेड़छाड़ करना बंद कीजिए। जो अच्छे हैं, उन्हें अच्छे रहने दीजिए। जो बुरे हैं, उन्हें बुरे रहने दीजिए, आप अपनी तरफ से कोई ताकत मत लगाइए। आप अपने ही धर्म के किसी किरदार को, इस तरह से बदलकर दिखाने की हिम्मत दिखा दीजिए, कोशिश दिखा दीजिए, मैं आपकी ताकत को मान जाऊँगा। मैं उन सभी बुद्धिजीवियों को, जो सो-कॉल्ड बुद्धिजीवी हैं, मैं उन्हें बुद्धिजीवी भी नहीं कहूँगा क्योंकि वो अपनी बुद्धि का गलत इस्तेमाल करते हैं।”

वहीं वीडियो के साथ मुकेश खन्ना ने एक लंबा चौड़ा कैप्शन भी लिखा है। कैप्शन में उन्होंने कहा है कि हिंदू धर्म खतरे में है और लोगों को सावधान हो जाना चाहिए। मुकेश खन्ना ने कहा कि क्या इस तरह की चीजों के पीछे भी कोई साजिश छिपी है, या फिर ये फिल्म के प्रमोशन से जुड़ा है।

‘हिंदू धर्म खतरे में, हमें माफी मंजूर नहीं’

मुकेश खन्ना कहते हैं, “मुझे ना चाहते हुए भी कहना पड़ेगा हिंदू धर्म खतरे में है। ये दूसरे धर्म वाले हमेशा कहते रहते हैं। अब लगता है हमें भी कहना पड़ेगा। सावधान हो जाइए। अब ब्रेकिंग न्यूज़ ये है कि सैफ ने लिखित माफी माँग ली है अपने वक्तव्य के लिए। वाह! क्या बात है! कहते हैं अंग्रेज़ों ने एक ख़ूबसूरत शब्द बनाया है ‘सॉरी’। तीर मारो, बम चला लो, घूँसा मार दो और फिर कह दो ‘सॉरी’। लेकिन हमें मंजूर नहीं। बोलने के पहले सोचा क्यों नहीं!”

सैफ अली खान ने क्या कहा था? 

बता दें कि सैफ अली खान फिल्म आदिपुरुष में रावण का किरदार निभा रहे हैं। इस फिल्म पर बात करते हुए उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि उनके लिए राक्षस देवता की भूमिका निभाना मजेदार अनुभव रहा है। उन्होंने कहा था कि फिल्म में रावण के मानवीय रूप को दिखाया जाएगा और साथ ही इसमें सीता हरण को भी जस्टिफाई करने की कोशिश की गई है। वहीं राम के साथ युद्ध को बदले की लड़ाई के तौर पर दिखाया जाएगा। ये एक बड़े बजट वाली फिल्म है, जिसे टी सीरीज के निर्देशन में बनाया जा रहा है। इस फिल्म में बाहुबली स्टार प्रभास भगवान राम की भूमिका में दिखाई देंगे।

गाजियाबाद: ‘भारत बंद’ में हिस्सा लेने पहुँचे भीम आर्मी के नेताओं को किसानों ने खदेड़ा, लाठियाँ भी चटकाई गईं

जहाँ सभी राजनीतिक संगठन ‘किसान आंदोलन’ के बहाने अपना उल्लू सीधा करना चाह रहे हैं, वहीं जातिवाद, मजहबी कट्टरता और खालिस्तानी एजेंडे को बढ़ावा देने वाले लोग भी इससे जुड़ते देखे जा रहे हैं। ऐसा ही एक दल है ‘भीम आर्मी’, जो उत्तर प्रदेश में दलितों की राजनीति करने का दावा करता है। बताया जा रहा है कि चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ ‘रावण’ की अगुआई वाले इस संगठन के लोगों को गाजियाबाद में किसानों ने मार-मार कर भगा दिया।

‘आज तक’ की खबर के अनुसार, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मंगलवार (दिसंबर 8, 2020) को आयोजित भारत बंद के दौरान भीम आर्मी के नेता-कार्यकर्ता किसानों के आंदोलन में उन्हें समर्थन देने पहुँचे और उनके साथ विरोध प्रदर्शन के इरादे से बाहर निकले। लेकिन, वहाँ उन्हें किसानों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। यूपी गेट पर किसानों के धरने में पहुँचे भीम आर्मी के नेताओं को किसानों ने भगा दिया।

किसानों ने आरोप लगाया कि भीम आर्मी के लोग इस आंदोलन को भड़काने की कोशिश में लगे हुए थे, इसीलिए उन्हें इसमें शामिल नहीं होने दिया गया। खबर के अनुसार, किसानों की शिकायत के बाद पुलिस ने भी लाठियाँ चटकाईं और भीम आर्मी के लोगों को किसानों ने खदेड़ दिया। उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही कह चुकी है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान जोर-जबरदस्ती नहीं चलेगी। दुकानों को जबरन बंद नहीं कराया जा सकता है।

वहीं भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया है कि विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जाते समय उन्हें हिरासत में लेकर नजरबंद कर लिया गया है। उधर दिल्ली में भी सब्जी मंडी के व्यापारियों ने अपनी-अपनी दुकानें खोल रखी थीं, लेकिन यहाँ सुबह तक मंडियों को बंद रखने के लिए AAP नेता द्वारा दबाव बनाया जा रहा था। दिल्ली में  APMC के अध्यक्ष आदिल अहमद खान हैं। ऐसे में AAP पर कई सवाल उठ रहे हैं।

सिलीगुड़ी में BJP कार्यकर्ता की मौत से बंगाल पुलिस ने किया किनारा, कहा-किसी ने पास ने दागी शॉटगन, अब CID करेगी जाँच

पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में भाजपा कार्यकर्ता की मौत के बाद पार्टी ने आज (दिसंबर 8, 2020) वहाँ 12 घंटे का बंद बुलाया है। इस बीच राज्य पुलिस ने भी कार्यकर्ता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर अपना बयान दिया है। 

पुलिस ने कहा है कि कार्यकर्ता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक उसकी मृत्यु शॉटगन से लगी चोट के कारण हुई है। अब पुलिस इस रिपोर्ट के आधार पर खुद पर लगे इल्जामों को खारिज कर रही है।

पुलिस का कहना है, “पुलिस शॉटगन इस्तेमाल नहीं करती। तो जाहिर है कि कल सिलीगुड़ी में हुए प्रदर्शन के दौरान हथियार बद्ध लोग लाए गए थे और उन्होंने हथियार से गोली दागी।”

पुलिस ने कहा है कि मृतक को किसी पास खड़े शख्स द्वारा पास चोट पहुँचाई गई। वहाँ पहले से हथियारों का उपयोग करके हिंसा पैदा करने की मंशा थी। अब पश्चिम बंगाल की सीआईडी इसकी जाँच करेगी। सच्चाई बाहर आएगी और जिसने भी इस अपराध की साजिश रची और अंजाम दिया उसे बख्शा नहीं जाएगा।

उल्लेखनीय हैं कि कल भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) ने बंगाल सरकार के खिलाफ ‘उत्तरकन्या अभिजन’ के तहत दो स्थानों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे।  इसी प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया और आँसू गैस के गोले छोड़े। 

मार्च के दौरान दोपहर करीब दो बजे सिलीगुड़ी के तीनबत्ती पर भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने मोर्चाबंदी करने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं में झड़प हो गई। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए भारी पुलिस बल को बुलाया गया। इस झड़प में कई पत्रकार, भाजपा कार्यकर्ता और पुलिस के जवान घायल हो गए हैं। वहीं एक बीजेपी कार्यकर्ता की मौत भी हो गई है। इसके बाद पुलिस ने क्षेत्र में धारा 144 लागू करने की घोषणा कर दी।

घटना पर प्रक्रिया देते हुए सांसद और भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने कहा, “पुलिस ने भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं पर आँसू गैस के गोले और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। उन्हें यूनिफॉर्म उतार कर टीएमसी गुंडों को ज्वाइन कर लेना चाहिए। भाजपा के कई कार्यकर्ता उनके शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हो गए। पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की हत्या हो रही है।” 

अम्बानी के जियोमार्ट और पूँजीपतियों को फायदा पहुँचाना है किसानों का मकसद, बाजार बंद तो बहाना है – गुप्त सूत्र से खुलासा

किसानों ने आज अपनी माँगों को लेकर भारत बंद की घोषणा की है जिसके व्यापक रुझान विदेशों में रह रहे एक-आध भारतीय किसानों के फेसबुक पोस्ट में देखने को मिल रहे हैं। लेकिन इस भारत बंद के पीछे छुपी एक गहरी साजिश का पर्दाफाश हमारे एक ख़ुफ़िया रिपोर्टर कॉमरेड पैट्रिक जिन्ना ने कर डाला है।

आज किसानों द्वारा किए गए भारत बंद की वास्तविकता को सामने रखते हुए हमारे ख़ुफ़िया रिपोर्टर कॉमरेड पैट्रिक जिन्ना ने बताया कि ये भारत बंद और कुछ नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से अम्बानी सहित तमाम पूँजीपतियों को फायदा पहुँचाने की साजिश का ही पहला चरण है।

इस दावे पर हैरानी जताते हुए जब हमने उनसे पूछा कि आखिर किन तथ्यों के आधार पर वो इतना बड़ा खुलासा कर रहे हैं, तो इस पर हमारे ख़ुफ़िया रिपोर्टर ने हमें बताया कि वह भी सोशल मीडिया पर किसानों के हितों को लेकर कई बार हैशटेग चला चुके हैं इस कारण वह भी अब एक किसान ही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे ये सभी किसान पूँजीपतियों से मिले हुए हैं और भारत बंद कर के वो और कुछ नहीं बल्कि लोगों के बीच अम्बानी के जियोमार्ट, फ्लिपकार्ट, अमेजन आदि की लोकप्रियता को ही बढ़ा रहे हैं। और इनकी लोकप्रियता बढ़ने का मतलब है पूँजीपतियों की आमदनी में वृद्धि। गौरतलब है कि ये वही पूँजीपति हैं जिनके खिलाफ ढपली बजा बजाकर आज भी वामपंथी सड़कों पर माँगकर बीड़ी पीने को मजबूर हैं।

उन्होंने इस बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि जब सारे ‘अन्नदाता किसान’ सालभर सड़कों पर रहेंगे और सिर्फ बिवाइयों की HD फोटोग्राफी ही करते रहेंगे तो मार्केट से सब्जियाँ और चावल अपने आप ही गायब होने लगेंगे। ऐसे में निजी क्षेत्र के पूँजीपति सब्जी उगाकर अपने ही ऑनलाइन ऐप्स पर बेचना शुरू कर देंगे और लोगों के घरों तक पहुँचा देंगे। बाजार भी अगर बंद हो गए तो ऑनलाइन सामान बेचने वाले कॉर्पोरेट घराने भी चोखी कमाई करेंगे। भले ही, टायरों में हवा भरने और पंचर बनाने के व्यवसाय वालों का दावा है कि ‘साहेब’ सामान तो ऑनलाइन बेच लेंगे लेकिन पंचर साटने और ट्यूब बदलने का काम भी डिजिटल कैसे करते हैं… हम भी देखेंगे।

रिपोर्टर जिन्ना ने कहा कि यह एक बड़ा ‘मास्टर गेम’ खेला जा रहा है, जिसका नतीजा डिजिटल इंडिया की सफलता के रूप में सामने आना है। उन्होंने कहा कि आज कुछ किसान ऐसे भी थे, जो भारत बंद के बावजूद उनके साथ खड़े नहीं थे, वो यूट्यूब पर जो वीडियो देखते पकड़े गए उनका शीर्षक था- ‘इंस्टाग्राम में फ़ॉलोअर्स कैसे बढ़ाएँ।’

इन किसानों का कहना है कि वो दिलजीत दोसाँझ जैसे किसानों से प्रेरित हैं और अब उन्हें भी असली मार्किट की पहचान हो गई है। साथ ही, उन्होंने कहा कि ‘हम किसान-विसान नहीं हैं, हम तो यहाँ बस गीता भाटी की सैंडिल ढूँढने आए हैं।’

74 साल की सोनिया गाँधी ने किया बड्डे कैंसल… देश के हर बच्चे ने दुख में तोड़ डाली पेंसिल

किसानों की माँगों को देखते हुए अब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भी अपना जन्मदिन ना मनाने का ऐलान किया है। सोनिया गाँधी का कहना है कि जब उनका 50 साल का बेटा देश के लिए अभी तक युवा है तो फिर वो अपने 74वें ‘स्प्रिंग’ में पहुँचने पर आखिर कैसे युवा नहीं हो सकतीं? वो भी तब जबकि वो इंदिरा गाँधी की बहु हैं और लोगों को इस दिन उनका जन्मदिन मनाकर पुण्य मिलना था। इन सभी कारणों को ध्यान में रखते हुए उनका जन्मदिन ना मानने का फैसला ऐतिहासिक ही माना जाना चाहिए।

हालाँकि, सोनिया गाँधी पर यह भी आरोप लगे हैं कि उनके इस फैसले से उनके जन्मदिन पर कितने ही लोगों के केक बनाने से लेकर उसे बाँटने वालों तक के रोजगार पर कैंची चली है। इस नुकसान पर सोनिया गाँधी ने कहा- ‘इसमें तेरा घटा मेरा कुछ नहीं जाता।’ इसके अलावा, जो पुण्य इस अवसर पर जनता सोनिया गाँधी को जन्मदिन की बधाई देकर कमा सकती थी, वह अब इससे भी वंचित रहेगी और यही किसान विरोधियों की सजा भी तय की गई है।

ब्रिटेन में टीकाकरण की प्रक्रिया शुरू, 90 साल की महिला मरीज को दी गई Covid वैक्सीन की पहली खुराक

दुनिया में कोरोना वायरस ने कहर मचाया हुआ है। हालाँकि, अब वैक्सीन के कारण कोरोना वायरस (कोविड-19) के खत्म होने की उम्मीद की जा रही है। इस क्रम में दुनिया में कोरोना वैक्सीन को दिए जाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। ब्रिटेन (यूके) में लोगों को कोरोना वैक्सीन दिए जाने की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरूआत हो चुकी है। इस दौरान उत्तरी आयरलैंड की एक 90 वर्षीय महिला यूके के सामूहिक टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत में फाइजर/बायोएनटेक कोविड वैक्सीन (Pfizer-BioNTech COVID-19 vaccine) लगाने वाली दुनिया की पहली शख्स बन गई हैं।

उत्तरी आयरलैंड की 90 साल की महिला मार्गरेट कीनन को ट्रायल से इतर दुनिया में पहला कोरोना वायरस का टीका दिया गया है। कीनन ने मंगलवार (दिसंबर 8, 2020) की सुबह 06:31 GMT पर कोवेंट्री, मध्य इंग्लैंड में स्थानीय अस्पताल में (Pfizer-BioNTech COVID-19 vaccine) टीका लिया।

एनिस्किलीन की मार्गरेट कीनन ने कहा है कि उन्हें कॉवेंट्री के यूनिवर्सिटी अस्पताल में कोरोना वायरस की वैक्सीन हासिल करते हुए विशेषाधिकार महसूस हुआ दरअसल, यूके में 80 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के अलावा कुछ स्वास्थ्य और देखभाल कर्मचारियों का टीकाकरण किया जाएगा। इसका उद्देश्य सबके जीवन को फिर से सामान्य करना है।

वहीं दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन लेने के बाद कीनन ने कहा, “दुनिया में कोरोना वायरस की पहली वैक्सीन लेते हुए मुझे विशेषाधिकार महसूस हुआ है। यह मेरे लिए सबसे अच्छा जन्मदिन है। यह मेरे जन्मदिन से पहले का सबसे अच्छा तोहफा है। अब मैं नए साल में अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए तैयार हूँ।” बता दें कि मार्गरेट कीनन अगले हफ्ते 91 साल की हो जाएँगी।

कीनन अपने दोस्तों के बीच ‘मैगी’ के नाम से जानी जाती है। वह पूर्व में ज्वैलरी शॉप में असिस्टेंट थी। चार साल पहले वह वहाँ से रिटायर हुईं। उनकी एक बेटी, एक बेटा और चार पोते हैं।

वहीं उत्तर-पूर्वी इंग्लैंड के भारतीय मूल के 87 वर्षीय हरि शुक्ला दुनिया के उन कुछ पहले लोगों में शामिल होंगे, जिन्हें कोविड-19 का टीका लगेगा। शुक्ला को न्यूकैसल में एक अस्पताल में ‘फाइजर/बायोनटेक’ (Pfizer-BioNTech) की ओर से विकसित टीका लगाया जाएगा। टाइन एंड वेयर के निवासी शुक्ला ने कहा कि उन्हें लगता है कि अपने टीके की पहली दो खुराक लगवाना उनका कर्तव्य है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इस पल को ‘एक बड़ी प्रगति’ बताया और ब्रिटेन में मंगलवार को ‘वी-डे’ या ‘वैक्सीन डे’ होने की बात कही। शुक्ला ने कहा, “मैं बहुत खुश हूँ कि अंतत: हम इस वैश्विक महामारी के अंत की ओर बढ़ रहे हैं और मैं खुश हूँ कि टीका लगवा कर मैं अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहा हूँ। मुझे लगता है कि यह मेरा कर्तव्य है और मदद के लिए जो हो सकेगा वह मैं करुँगा।”

बता दें कि पिछले हफ्ते नियामकों की ओर से कोरोना वैक्सीन के उपयोग को मंजूरी देने के बाद फाइजर वैक्सीन का उपयोग शुरू करने वाला ब्रिटेन दुनिया का पहला देश बन गया है। वहीं ब्रिटेन में केयर होम्स में रहने वाले लोगों और कर्मचारियों को वैक्सीन लगेगी। इसके बाद 80 साल से ऊपर के बुजुर्ग और स्वास्थ्यकर्मियों को लगाई जाएगी। फिर 75 साल से ऊपर के बुजुर्गों को वैक्सीन दी जाएगी। इसके बाद 70 साल और फिर 65 साल से ऊपर के लोगों को वैक्सीन मिलेगी। इसके बाद 18 से 65 साल वाले वो लोग, जिनमें जोखिम ज्यादा है, उन्हें वैक्सीन के दायरे में रखा जाएगा। फिर 18 से 65 साल के वो लोग जिनमें रिस्क थोड़ा कम है, उन लोगों को वैक्सीन लगेगी।

जिसे दिल्ली पुलिस कह रही फेक न्यूज, उसे NDTV की पूर्वकर्मी निधि राजदान बता रही- ‘कश्मीर मॉडल’, जानिए क्या है मामला

किसानों के भारत बंद के आह्वान को दिल्ली की केजरीवाल सरकार कल तक अपना पूरा समर्थन दिखा रही थी। मगर, आज इसे विफल होता देख, AAP ने आरोप लगाया है कि सीएम अरविंद केजरीवाल को गृह मंत्रालय ने हाउस अरेस्ट करवा दिया है। हालाँकि, पुलिस ने इस खबर को फर्जी और निराधार कहकर खारिज कर दिया है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार उत्तर दिल्ली के डीसीपी एंटो एल्फॉन्स ने स्पष्ट शब्दों में सीएम आवास के बाहर पुलिस तैनाती को बिलकुल सामान्य बताया है। उन्होंने कहा है कि ये तैनाती सुरक्षा के लिहाज से की गई है ताकि आम आदमी पार्टी और अन्य पार्टियों में झड़प न हो। ये हाउस अरेस्ट नहीं है।

इसके बावजूद एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार निधि राजदान इस पर झूठ फैलाने के लिए आगे आई हैं। उन्होंने एक ऐसे हाउस अरेस्ट को कश्मीर मॉडल से जोड़ा है जिसे दिल्ली पुलिस पहले ही झूठा और निराधार बता चुकी है। निधि ने सीएम केजरीवाल के प्रति अपना गुस्सा व्यक्त करते हुए लिखा, “कश्मीर मॉडल, जिसे दिल्ली सीएम ने भी तब समर्थन दिया था, आज दिल्ली आ गया है।”

निधि का यह ट्वीट देखकर कई लोगों ने इसे पूरी तरह से फेक न्यूज कहा है और आम आदमी के साथ उन्हें भी एजेंडा चलाने वाला बताया है।

वहीं कुछ आप समर्थकों ने पूछा है कि आखिर अरविंद केजरीवाल ने नेताओं को नजर बंद की जाने वाली बात को कब समर्थन दिया? इन समर्थकों का कहना कि आज लुटियन दिल्ली वाले खुलकर केजरीवाल के प्रति नफरत दिखा रहे हैं। क्या वह ऐसी चीज तब कहेंगे जब इसी तरह का काम पत्रकारों के साथ होगा।

वहीं किरण जीत सिंह नाम के यूजर ने निधि को समझाया है, “अनुच्छेद 370 को हटाने का समर्थन करना हाउस अरेस्ट को समर्थन देने से बहुत अलग है। अपना झूठ बोलना बंद करो। अपना एजेंडा चलाना बंद करो। कितनी पाखंडी हो?”

तब भारत बंद बहुत बुरा रहा, गलत राजनीति था: अभी बंद पर नाच रहे लिबरल्स की असलियत समझने के लिए चलिए 8 साल पीछे

‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में देश भर में कई संगठनों और राजनीतिक दलों ने ‘भारत बंद’ का आयोजन कर रखा है और केंद्र सरकार के विरोध में पूरे देश में प्रदर्शन जारी है, जिसके तहत दुकानों वगैरह को जबरदस्ती बंद कराया जा रहा है। इसी बीच पत्रकारों का लिबरल गिरोह जिसे ये बंद आज बड़ा ही खूबसूरत लग रहा है, कभी बंद विरोधी हुआ करता था। यानी, आज जब ये अराजकता मोदी सरकार के खिलाफ फैलाई जा रही है, तो सभी इसे चाशनी में डाल कर चूसने को बेताब हैं।

सबसे पहले बरखा दत्त की बात। मई 2012 में जब पेट्रोल के दाम लगातार बढ़ रहे थे तो यूपीए सरकार के खिलाफ भारत बंद आयोजित किया गया था। तब बरखा दत्त ने कहा था कि ये भारत बंद लोकतंत्र में विरोध का सबसे बुरा तरीका है और इससे किसी को मदद नहीं मिलती, इससे कोई वजह पूरी नहीं होती। वही बरखा दत्त अब इस आंदोलन का महिमामंडन करने में लगी हैं और ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए प्रदर्शनकारियों को महान साबित कर रही हैं।

अब इस विरोध प्रदर्शन के महिमामंडन में लगीं बरखा दत्त

अब आते हैं राजदीप सरदेसाई। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों, गैस सब्सिडी घटाने और बढ़ते भ्रष्टाचार के विरोध में सितम्बर 2012 में यूपीए सरकार के खिलाफ हुए भारत बंद में जब सरकार को समर्थन दे रही पार्टियाँ भी शामिल थीं, तब राजदीप ने लिखा था कि जब सुप्रीम कोर्ट ने बंद को असंवैधानिक घोषित कर रखा है, फिर बंद क्यों? वहीं अब वो इस बात से नाराज दिख रहे हैं कि भाजपा शासित राज्यों में पुलिस दुकानदारों को दुकानें खुली रखने के लिए ‘चेता’ रही है।

राजदीप सरदेसाई अब ‘भारत बंद’ का प्रचार करने में लगे हैं

इसी तरह मई 2012 में संगीतकार विशाल डडलानी ने गर्व के साथ घोषित किया था कि वो ‘अव्यवहारिक’ बंद की अवहेलना करने में सफल रहे। उन्होंने लिखा था कि वो न सिर्फ काम पर गए, बल्कि घूमे भी और सामान्य दिनों की तरह अपनी ज़िंदगी जी। उन्होंने बंद का आयोजन करने वाले नेताओं के लिए ‘Suck On That’ भी लिखा। अब? अब वो कह रहे हैं कि वो ख़ुशी से इस बंद के साथ हैं। ये भारत बंद भी राजनीतिक दलों का ही है, फिर भी विशाल डडलानी इसे ‘किसानों का नेताओं के खिलाफ’ बंद मान रहे।

वहीं NDTV के तो कहने ही क्या। मई 2012 में वो कह रहा था कि आम आदमी के नाम पर राजनीति की जा रही है और ‘भारत बंद’ भी इसी का नतीजा है। अब एनडीटीवी हर राज्य में ‘भारत बंद’ का समर्थन कर रहे राजनीतिक दलों को लेकर लगातार खबरें चला रहा है और विशेषज्ञों के हवाले से डर फैला रहा है कि कैसे अर्थव्यवस्था लगातार नीचे गिर रही है। वो बता रहा है कि कैसे सभी विपक्षी पार्टियाँ बंद के समर्थन में हैं।

अब देखिए रवीश कुमार को। उन्होंने मई 2012 में ‘ट्रेन रोको, रास्ता रोको, रोको सारा इंडिया, तेल बढ़ेगा देश जलेगा, कैसे चलेगा इंडिया, पार्टटाइम पॉलिटिक्स का हो रहा है डांडिया’ जैसी पंक्तियाँ लिख कर बंद का विरोध किया था। अब वो ट्विटर पर तो सक्रिय नहीं हैं, लेकिन अब वो सरकार के खिलाफ रोज कुछ न कुछ लिख कर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में लगे हैं। फ़िलहाल ‘भारत बंद’ पर वो मौन साधे हुए हैं।

ममता बनर्जी ने तो अपने वफादार नेताओं को भेज कर सिंघु सीमा पर जमे किसान नेताओं और इच्छाधारी प्रदर्शनकारी योगेंद्र यादव से बात भी की। वो इस ‘भारत बंद’ का भी समर्थन कर रही हैं। वहीं सितम्बर 2012 में उन्होंने इसे ‘बंद राजनीति’ का नाम देते हुए कहा था कि वो इन चीजों का समर्थन नहीं करतीं। ये अलग बात है कि खुद अपने राज्य में कृषि सुधार कानूनों को वो 2014 में ही लागू कर चुकी हैं।

हालाँकि, लिबरल गिरोह की तमाम कोशिशों के बावजूद महाराष्ट्र के पुणे में तो भारत बंद के बावजूद सब्जी मंडियाँ खुली हैं। एक स्थानीय व्यापारी ने इस पर कहा, “हम किसानों के प्रदर्शन को समर्थन देते हैं, लेकिन हमने बाजार खोले हुए हैं ताकि दूसरे प्रदेशों से आने वाली फसल स्टोर की जा सके और वह खराब न हो। इन्हें हम कल ही बेचेंगे।” दिल्ली में भी सब्जी मंडी के व्यापारियों की यही स्थिति है लेकिन यहाँ सुबह तक मंडियों को बंद रखने के लिए AAP नेता द्वारा दबाव बनाया जा रहा था। 

केजरीवाल के ‘झूठ’ को कपिल मिश्रा की चुनौती: हाउस अरेस्ट और भारत बंद पर दिल्ली CM की बोलती बंद

किसानों की ओर से बुलाए गए भारत बंद के बीच आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गृह मंत्रालय के इशारे पर उनके घर में हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। वहीं भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने इस दावे को झूठा बताया है और पुलिस ने भी इस इल्जाम को खारिज किया है

AAP पार्टी ने कहा है कि दिल्ली पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी की मदद से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को घर में ही हाउस अरेस्ट कर दिया है। पार्टी का कहना है कि कल सिंघू बॉर्डर से लौटने के बाद उनके घर के आस-पास घेराबंदी की गई। मुख्यमंत्री की सभी बैठकें भी रद्द हो गई हैं।

मीडिया खबरों में AAP सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि गृह मंत्रालय के आदेश पर पुलिस ने दिल्ली नगर निगम के तीनों मेयर को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर के मुख्य गेट के बाहर धरने पर बैठा दिया है और इसका बहाना बना कर पुलिस ने मुख्यमंत्री के घर के बाहर बैरिकेडिंग कर दी। 

आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने मीडिया से कहा, “हमारे विधायकों को भी मुख्यमंत्री से मिलने नहीं दिया जा रहा है। हम मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करेंगे और उनसे मिलकर उन्हें घर से निकालेंगे ताकि वह किसानों के साथ खड़े हो सकें।”

एक ट्वीट में AAP ने कहा, “भाजपा की दिल्ली पुलिस ने सीएम अरविंद केजरीवाल को कल सिंघू बॉर्डर पर किसानों से मिलने के बाद घर में नजरबंद कर दिया है। किसी को भी अपने निवास छोड़ने या प्रवेश करने की अनुमति नहीं है।”

आम आदमी पार्टी के आरोपों के बीच दिल्ली पुलिस ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। नॉर्थ डीसीपी ने साफ कहा, “ये आरोप झूठे और निराधार हैं। हमारी फोर्स तैनात हैं। अरविंद केजरीवाल कल 8 बजे भी निकले थे और 10 बजे के बाद भी बाहर आए थे।” वहीं, भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने सभी आरोपों को झूठा बताते हुए इसे भारत बंद की विफलता से जोड़ा है।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “मैं चुनौती देता हूँ अरविंद केजरीवाल को, हाउस अरेस्ट का झूठ बोलना बंद करें। बाहर निकल कर दिल्ली का एक भी मार्केट या बाजार या इंडस्ट्रियल एरिया दिखाएँ, जो बंद हो। पूरी दिल्ली में कहीं भी एक भी जगह बंद का असर दिखाएँ? दिल्ली वालों ने बंद को फ्लॉप कर दिया है।”

बता दें कि आम आदमी पार्टी लगातार सीएम के हाउस अरेस्ट को लेकर मीडिया में बयानबाजी कर रही है लेकिन, अरविंद केजरीवाल या उनकी पार्टी की ओर से कपिल मिश्रा की चुनौती का जवाब अभी तक नहीं दिया गया है और न ही किसी नेता ने मंडी में जाकर बंद का फोटो भेजा है। उधर, सोशल मीडिया पर लगातार दावे हो रहे हैं कि भारत बंद का प्लॉन फ्लॉप हो चुका है और हर बाजार खुले हैं।

इसके अलावा आम आदमी पार्टी जिन मेयरों के धरने को गृह मंत्रालय की साजिश बता रही है, उसे लेकर भी धरने पर बैठे लोगों की माँग है कि आम आदमी पार्टी सरकार उनका 13000 करोड़ का बकाया चुकाए, तो वो चले जाएँगे। ये प्रदर्शनकारी बाकायदा हिसाब देकर अपना पैसा माँग रहे हैं। ये सब कल से सीएम आवास के बाहर बैठे हैं, अगर स्थिति इनकी वजह से बिगड़नी होती तो कल सीएम न घर आ पाते और न 8 या 10 बजे घर से निकल पाते।

सीएम आवास के बाहर प्रदर्शन पर बैठे लोगों की वीडियो में कल उन्हें कहते सुना गया था कि केजरीवाल सरकार ने उनसे वादा किया था कि सारा बकाया चुकाया जाएगा और उनसे यह भी कहा गया था कि वह लोग उनसे आकर कभी भी मिल सकते हैं। प्रदर्शनकारी शिकायत करते हैं कि कल सुबह जब वे मुख्यमंत्री से मिलने पहुँचे तो उनसे कहा गया कि सीएम उनसे मिलेंगे, लेकिन थोड़ी देर बाद सीएम कुछ कहे और बिना उनसे मिले चले गए।

इस के बाद तीनों मेयरों और अन्य अधिकारियों ने मिल कर वहाँ धरना नहीं दिया। साथ ही ऐलान किया, “उन्होंने अगर हमारा पैसा क्लियर किया तो ही हम यहाँ से जाएँगे, वरना सभी सफाई कर्मचारी हड़ताल पर जाने को तैयार हैं। यदि दिल्ली में कोरोना की चौथी लहर आई तो उसके जिम्मेदार भी मुख्यमंत्री ही होंगे।”

बम ब्लास्ट में BJP कार्यकर्ता की मौत हो जाती है… और लिबरल गिरोह इस पर जोक-Meme-इमोजी बना उड़ाते हैं मजाक

पश्चिम बंगाल में भाजपा नेताओं पर हमले का दौर जारी है। लेकिन, सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि जो लिबरल गिरोह लोकतंत्र की दुहाई देते नहीं थकता है, वही गिरोह अब इन घटनाओं पर खुशियाँ मना रहा है। पश्चिम बंगाल में गुंडों द्वारा किए गए हमले के बाद भाजपा जनता युवा मोर्चा (BJYM) के अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने ‘नहीं डरेंगे’ का नारा लगाया, इस दौरान बमबारी होती रही। इसके बावजूद तथाकथित कॉमेडियन कुणाल कामरा ने इस घटना का मजाक उड़ाया।

कुणाल कामरा ने इसकी तुलना माउंटेन ड्यू के एडवर्टाइजमेंट से की, जिसमें ‘डर के आगे जीत है’ वाला स्लोगन दिया गया था। उन्होंने तेजस्वी सूर्या का मजाक बनाते हुए लिखा – ‘डर के आगे डर है’। इस ट्वीट का रिप्लाई करते हुए पंजाबी गायक एमी विर्क ने हँसने वाले इमोजी डाले। एमी के ट्विटर हैंडल को देखने पर पता चलता है कि वो कई दिनों से दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में प्रोपेगंडा फैलाने में लगे हुए हैं।

दरअसल, ट्वीट किए गए वीडियो में जब तेजस्वी सूर्या ‘नहीं डरेंगे, नहीं डरेंगे’ के नारे लगा रहे थे, तभी उनके आसपास ही फायरिंग/बम ब्लास्ट की आवाज़ आती है। इस आवाज़ को सुनने के बाद वो अपना सिर नीचे कर के रूमाल से छिपाते हैं, जिस पर लिबरल गिरोह तंज कस रहा है। चेतना नामक ट्विटर यूजर ने वीडियो में गोली चलने की आवाज़ का समय ट्वीट करते हुए लिखा कि 0:02 में तेजस्वी सूर्या डर गए।

वहीं सौरभ जैन नामक ट्विटर यूजर ने तो तेजस्वी सूर्या को ‘मीम मैटेरियल’ तक करार दिया। यानी, वामपंथियों ने हिंसा का महिमामंडन किया, जबकि वो बाकी समय लोकतंत्र की दुहाई देते हुए व्यतीत करते हैं। खुद को लेखिका बताने वाली प्रियंका सचेती ने इस वीडियो पर ‘Lol’ लिख कर कूल बनने की कोशिश की। ‘रैंडम मैन’ नामक ट्विटर यूजर ने लिखा कि जब आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चीन को लेकर उनकी सरकार की नीतियों के बारे में सवाल करते हैं, तो ऐसा ही होता है।

लोगों ने कुणाल कामरा से और तेजस्वी सूर्या के वीडियो का मजाक बना रहे लोगों से पूछा कि क्या वो लोकतंत्र में हिंसा का समर्थन करते हैं? भाजपा शासित राज्यों में एक पत्ता भी हिलने पर मोदी को जिम्मेदार ठहराने वाले लोग पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस प्रायोजित हिंसा का महिमामंडन कर रहे हैं। वहीं इस हिंसा के पीड़ितों का मजाक बनाते हुए उन्हें ‘मीम मैटेरियल’ बताया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में 100 से अधिक भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है।

बता दें कि इस बमबारी में एक भाजपा कार्यकर्ता की मौत भी हो गई। घटना सिलीगुड़ी के तीनबत्ती की है। सोमवार (दिसंबर 7, 2020) को बीजेपी कार्यकर्ता राज्य सचिवालय की शाखा ‘उत्तरकन्या’ की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे। इस दौरान दो जगहों पर उनकी पुलिस से झड़प हुई। बीजेपी का आरोप है कि हमले में उनके कार्यकर्ता उलेन रॉय की मौत हो गई। पुलिस ने भी कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया और आँसू गैस के गोले छोड़े।