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कर्नाटक के हसन जिले में गोहत्या करने वाले बूचड़खानों का खुलासा करने वाली महिला पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ ने किया हमला

कर्नाटक में हसन जिले के पेंशन मोहल्ले में अवैध रूप से गोहत्या करने वालें गिरोह का पर्दाफाश करने वाली एक महिला पत्रकार पर एक हिसंक भीड़ से हमला कर दिया। भीड़ में मौजूद बुर्का पहनी महिलाओं ने पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार किया, साथ ही उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई।

विजया टाइम्स की प्रधान संपादक और वरिष्ठ पत्रकार विजयलक्ष्मी शिबरूर को शहर में अवैध रूप से गौ हत्या करने वाले माफियाओं के बारे में जानकारी मिली थी। जिसकी पड़ताल के लिए वे और उनकी टीम हसन जिले के उस इलाके में रिपोर्टिंग करने पहुँचे। इन्वेस्टिगेशन के दौरान महिला पत्रकार ने बताया कि जिले में गोहत्या पर प्रतिबंध के बावजूद शहर के ये अवैध बूचड़खाने किस तरह से संचालित होते हैं।

महिला पत्रकार ने एनजीओ और पुलिस अधिकारियों के साथ शहर में चार अवैध बूचड़खानों और पाँच मवेशी होर्डिंग स्थानों का दौरा किया। वहीं जैसे ही उन्होंने मवेशियों को बचाने के लिए इन अवैध बूचड़खानों में से एक में प्रवेश करने की कोशिश की उसी दौरान एक गुस्साई भीड़ (जिसमें बुर्क़ा पहने महिलाएँ शामिल थीं) ने पत्रकार को चारों ओर से घेरते हुए उन्हें रिपोर्टिंग करने से रोक दिया।

भीड़ ने न केवल पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार किया बल्कि उसके साथ छेड़छाड़ की, साथ ही वहाँ से नहीं निकलने पर उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी।

यहाँ मौजूद फुटेज में आप देख सकते है कि किस तरह गुस्साई भीड़ द्वारा महिला पत्रकार पर हमला करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद बुर्का पहनी महिलाओं ने पत्रकार पर हमला किया। वहीं पूरी घटना के दौरान असहाय पुलिस अधिकारी मूकदर्शक बने रहे।

वहीं उस स्थान से नहीं जाने पर भीड़ ने पत्रकार को जान से मारने की धमकी भी दी। घटनाक्रम के दौरान अवैध मवेशी तस्कर ने अन्य मवेशियों को छिपा दिया, जिस वजह से एनजीओ केवल कुछ जानवरों को बचाने में कामयाब रहे।

कथित तौर पर हसन बाबू और रहमान द्वारा इलाके में चार अवैध बूचड़खाने संचालित किया जा रहा था। जिन्होंने लगभग 100 मवेशियों को बंधक बनाया हुआ था।

वहीं घटना के बाद एक स्थानीय पुलिस स्टेशन में इस मामले को लेकर एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।

नए कृषि कानून से खुश एमपी और राजस्थान के किसान, कहा- प्रदर्शनकारियों को बरगला और उकसा रहे विपक्षी नेता

एक तरफ जहाँ पंजाब और हरियाणा के किसान नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं, वहीं TV9 भारतवर्ष पर प्रसारित एक रिपोर्ट मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसानों को सितंबर 2020 में केंद्र द्वारा पारित किए गए नए कृषि कानूनों से लाभ हुआ है।

मध्य प्रदेश के कृषि कानूनों के लाभार्थियों में से एक ने कहा कि उन्होंने अपनी कृषि उपज 2500 / – प्रति क्विंटल बेची है, जबकि फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1800 रुपए प्रति क्विंटल के करीब था। किसान ने प्रीमियम प्राप्त करने के अलावा यह भी कहा कि नए कानून ने उनके समय की बचत की है और अनाज को इकट्ठा करने के लिए व्यापार उनके खेतों में ही आ गया है जिसने परिवहन लागत को शून्य तक पहुँचा दिया है।

मध्यप्रदेश के एक अन्य किसानों की भी ऐसी ही कहानी है। जिन्होंने कहा कि पहले मंडियों में व्यापार कुछ प्रभावशाली व्यापारियों तक सीमित था, जो कृषि उपज की कीमत तय करते थे। तीन कानूनों के पारित होने के साथ किसान सीधे अपने पसंदीदा मूल्य पर व्यापारियों को अपनी उपज बेच सकते हैं।

एक किसान ने कहा, “पहले मंडियों में 10 किलोग्राम अनाज केवल नमूना लेने के उद्देश्य से भेजा जाता था। अपनी उपज बेचने के लिए मंडियों में समय भी बहुत लगता है। हमें परिवहन और लोडिंग / अनलोडिंग शुल्क अलग से वहन करना पड़ता था। हमें अक्सर अपनी कृषि उपज के कभी-कभी महीनों तक राशि प्राप्त करने के लिए इंतजार करना पड़ता था। कानूनों के पारित होने के बाद व्यवसाय हमारे खेत में ही आने लगा है और हमें अपनी उपज के लिए डायरेक्ट भुगतान कर दिया जाता हैं। न केवल हमें एमएसपी पर प्रीमियम मिलता है बल्कि हमारी परिवहन लागत और समय भी बचता है।”

एमपी ही नहीं राजस्थान के किसान भी पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के प्रदर्शनकारियों द्वारा दिल्ली के आसपास हो रहे विरोध प्रदर्शनों में शामिल नहीं हुए हैं। TV9 Bharatvarsh की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के एक किसान ने नए कृषि कानूनों को लाने के लिए पीएम मोदी को बहुत धन्यवाद दिया, जिन्होंने किसानों पर प्रतिबंध हटा दिया और उन्हें अपने उत्पाद को अपने ग्राहकों की पसंद और उनकी पसंदीदा दरों पर बेचने में सक्षम बनाया।

गौरतलब है कि पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों में किसानों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों पर बोलते हुए मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसानों ने कहा कि कॉन्ग्रेस के नेताओं द्वारा नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शनकारियों को मूर्ख बनाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके द्वारा परेशान की गई आशंकाओं के विपरीत, नए कृषि कानून किसानों के हित में हैं।

चैनल को इंटरव्यू दे रहे एक किसान ने कहा, “हम कृषि बिल का विरोध नहीं कर रहे हैं क्योंकि वे हमारे कल्याण के लिए हैं। कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को उसके लाभ और किसानों के लिए नए अवसरों के बारे में पता नहीं है। विपक्षी नेताओं द्वारा केंद्र के खिलाफ आंदोलन शुरू करने के लिए उन्हें बरगलाया और उकसाया गया है।”

योगी सरकार ने शुरू किया मिशन रोजगार: 50 लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य, दिशा-निर्देश जारी

युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए योगी सरकार ने कमर कस ली है। राज्य सरकार ने आज से प्रदेश में मिशन रोजगार शुरू किया है। अभियान के तहत सरकार ने 50 लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य तय किया है। रोजगार के लिए प्रदेश के इतिहास में यह इकलौता और सबसे बड़ा अभियान है।

प्रदेश के युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार पूरे प्रदेश में 5 दिसंबर से मिशन रोजगार अभियान की शुरूआत किया। अभियान के तहत प्रदेश में स्वरोजगार, कौशल प्रशिक्षण और अप्रेन्टिसशिप के जरिए युवाओं को रोजगार मुहैया कराया जाएगा। मिशन रोजगार के तहत राज्य सरकार की योजना इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 50 लाख युवाओं को रोजगार देने की है।

मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने इसके लिए राजस्व परिषद, कृषि उत्पादन आयुक्त, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, समस्त अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, समस्त विभागाध्यक्ष, मण्डलायुक्त और जिलाधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

अभियान की जानकारी देते हुए मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने बताया कि इस मिशन रोजगार के अन्तर्गत प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों, संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, निगमों, परिषदों, बोर्डों और प्रदेश सरकार के विभिन्न स्थानीय निकायों, विकास प्राधिकरण और औद्योगिक विकास प्राधिकरण शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार, स्वरोजगार के सृजन के साथ ही कौशल प्रशिक्षण और अप्रेन्टिसशिप, भूमि आवंटन, विभिन्न प्रकार के लाइसेन्स और अनुमतियों के माध्यम से अधिक से अधिक रोजगार, स्वरोजगार के अवसरों का सृजन किए जाने का अभियान चलाया जाएगा।

हर कार्यालय में होगी हेल्प डेस्क

इस अभियान को सफल बनाने के लिए हर विभाग, संगठन, प्राधिकरण के कार्यालयों में हेल्प डेस्क बनाई जाएगी। इस हेल्प डेस्क पर उस विभाग से संबंधित रोजगार, स्वरोजगार और कौशल विकास प्रशिक्षण से जुड़े कार्यक्रम की जानकारी दी जाएगी। अभियान के अंतर्गत मिलने वाले रोजगार का डाटा बेस तैयार किया जाएगा। इसके लिए एक ऐप और पोर्टल भी विकसित किया जाएगा। प्रशासकीय विभागों के अन्तर्गत सभी निदेशालय, निगम, बोर्ड, आयोग आदि अपने विभाग के लिए एक नोडल अधिकारी नामित करेंगे।

मिशन रोजगार के सम्पूर्ण कार्यक्रम अभियान का संचालन औद्योगिक विकास आयुक्त द्वारा किया जाएगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति हर महीने अभियान की मॉनिटरिंग करेगी। वहीं, हर जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति होगी जो रोजगार, स्व रोजगार के लिए जनपद स्तर पर कार्ययोजना बनाएगी। प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय द्वारा निजी उद्योगों के साथ मिलकर रोजगार मेलों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही पहले से रूकी भर्ती के प्रकरणों का निस्तारण भी कराया जाएगा।

कौशल विकास के इन प्रयासों से मिल रहा स्वरोजगार को बढ़ावा

योगी सरकार युवाओं को वैश्विक स्तर से लेकर जिला स्तर तक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षण दिला रही है। इसके लिए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफार्म कोर्सेरा, यूएसए के जरिए प्रदेश के 50 हजार युवाओं को अन्तरराष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम नि:शुल्क कराया जा रहा है।

अताबुद्दीन अंसारी ने नाम बदलकर हिन्दू युवती को प्रेमजाल में फँसाकर किया गर्भवती, निकला पहले से शादीशुदा और 1 बच्चे का बाप

देश में ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला झारखंड का बेहद ही चौकाने वाला सामने आया है। अताबुद्दीन अंसारी नाम के शख्श ने आकाश महतो बनकर 20 वर्षीय पीड़िता को अपने प्रेमजाल में फँसाया और उसका शारीरिक शोषण भी किया। जिससे वह गर्भवती हो गई। आरोपित की पहचान सामने आते ही गाँव वालों ने उसे पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। बता दें अंसारी पहले से शादीशुदा था और एक बच्चे का बाप भी है।

प्रभात खबर के अनुसार, मामला बोकारो जिले के चंदनकियारी थाना क्षेत्र का है। पीड़िता का आरोप है कि पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिला अंतर्गत पाड़ा थाना क्षेत्र के रिगुडीह गाँव का रहने वाले अताबुद्दीन अंसारी ने आकाश महतो बनकर 6 महीने से हिंदु युवती को प्रेमजाल में फँसा कर उसका यौन शोषण करता रहा। वहीं आरोपित की पहचान तब सामने आई जब वह युवती के गाँव उससे शादी करने के लिए पहुँचा था।

पुलिस ने शुक्रवार (4 दिसंबर, 2020) को मामले को संज्ञान में लिया और आरोपित अताबुद्दीन अंसारी को गिरफ्तार करते हुए उसके खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया है। साथ ही पीड़िता को मेडिकल जाँच के लिए अस्पताल में भर्ती करवा मामले में आगे की कार्रवाई में जुट गई है।

दर्ज एफआईआर के अनुसार, आमडीहा गाँव की रहनेवाली पीड़िता का 2017 में विवाह हुआ था, लेकिन आपसी मतभेद होने के चलते उसके पति ने उसे छोड़ दिया, जिस कारण वह वापस अपने मायके रहने लगी। इसी दौरान छह महीने पहले वह पश्चिम बंगाल अपने रिश्तेदार के गाँव में मेला देखने गई थी। मेले में उसकी मुलाकात अताबुद्दीन अंसारी से हुई। अंसारी ने उस वक्त अपनी पहचान छुपाते हुए अपना नाम आकाश महतो बताया था। जिसके बाद से ही दोनों फ़ोन पर बात करने लगे। आरोपित मुस्लिम युवक ने युवती को शादी का लालच देकर कई बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जिसके चलते वह गर्भवती हो गई।

गर्भवती होने के बाद पीड़िता ने उस पर शादी का दवाब बनाया। इसी सिलसिले में जब वह पीड़िता के गाँव उसके परिजनों से उसका हाथ माँगने पहुँचा तो परिवार वालों ने उससे पहचान पत्र और अपने से जुड़ी सारी जानकारी देने को कहा तो आकाश बना अताबुद्दीन आनाकानी करने लगा। अंसारी के रवैए को देखते ही परिजनों को उस पर संदेह हुआ।

गाँव वालों के साथ मिलकर जब पीड़िता के परिजनों ने जबरन उसकी छानबीन की तो तलाशी में युवक की जेब से आधार कार्ड बरामद हुआ। जिस पर युवक का नाम 27 वर्षीय अताबुद्दीन अंसारी, पिता हामित अंसारी होने का खुलासा हुआ। पोल खुलते ही युवक को ग्रामीणों ने बंधक बना लिया और पुलिस को इसकी जानकारी दे दी। लेकिन मौका पाते ही आरोपित फरार हो गया। जिसकी जानकारी उन्होंने पुलिस को दे दी।

पुलिस ने मौके पर पहुँच कर इलाके की छानबीन शुरू कर दी। वहीं गाँववालों ने भी इस काम में पुलिस को पूरा सहयोग दिया। जिसके बाद पुलिस ने आरोपित को पास के मंढरा गाँव से धर दबोचा और उसे थाने ले आई। शुक्रवार को पुलिस ने आरोपित का मेडिकल जाँच कराया और उसे जेल भेज दिया। इन्वेस्टीगेशन के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि अताबुद्दीन अंसारी की पहले ही एक शादी हो चुकी है और वह एक बच्चे का बाप भी है। ग्रूमिंग जिहाद की इस घटना के खुलासे के बाद ग्रामीणों में काफी आक्रोश है।

‘महाराष्ट्र में स्थिर सरकार चाहते हैं तो टिप्पणी करना बंद करें’: राहुल गाँधी पर शरद पवार के बयान से भड़की कॉन्ग्रेस

शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के गठबंधन की महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार में अंदरूनी कलह के संकेत सामने आए हैं। कॉन्ग्रेस ने शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को सत्तारूढ़ शिवसेना की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार में अपने सहयोगियों से अपील की कि वे राज्य में ‘स्थिर’ सरकार चाहते हैं तो पार्टी के नेतृत्व पर टिप्पणी करने से बचें। 

बता दें कि राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार ने राहुल गाँधी पर टिप्पणी की जिस पर कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपनी नाराजगी दर्ज की है। पवार ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा कि राहुल गाँधी में राजनीतिक स्थिरता की कमी है। कॉन्ग्रेस की प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष यशोमति ठाकुर ने शनिवार को शरद पवार की टिप्पणी पर पलटवार किया है।

यशोमति ठाकुर ने कहा, “महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस कमेटी का कार्यकारी अध्यक्ष होने के नाते, मैं महाविकास अघाड़ी में सहयोगियों से अपील करना चाहती हूँ कि यदि आप महाराष्ट्र में स्थिर सरकार चाहते हैं तो कॉन्ग्रेस के नेतृत्व पर टिप्पणी करना छोड़ दें। हर किसी को गठबंधन के बुनियादी नियमों का पालन करना चाहिए। हमारा नेतृत्व बहुत मजबूत और स्थिर है। गठबंधन का गठन लोकतांत्रिक मूल्यों में हमारी मजबूत धारणा का परिणाम है।”

गौरतलब है कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार कई बार कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के नेतृत्व और राजनीति में उनकी सक्रियता पर निशाना साध चुके हैं। कुछ सप्ताह पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की किताब में राहुल गाँधी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद से विपक्ष कॉन्ग्रेस पर निशाना साध रही है। 

हालाँकि, शरद पवार ने बराक ओबामा के विचारों पर आपत्ति जताई, लेकिन हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी के नेतृत्व में ‘स्थिरता’ का अभाव है। शरद पवार के इस बयान पर अब महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और कॉन्ग्रेस की प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष यशोमति ठाकुर ने नाराजगी जाहिर की है।

यशोमति ठाकुर के ट्वीट के बीच एनसीपी और शिवसेना के नेताओं ने पवार की टिप्पणी को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनका तीन पार्टियों के गठबंधन वाली राज्य सरकार की स्थिरता से कोई संबंध नहीं है।

इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने राहुल गाँधी को लेकर एक बड़ा बयान देकर भारत में हलचल मचा दी थी। बराक ओबामा ने अपने संस्मरण ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ (A promised Land) में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सोनिया गाँधी के बेटे राहुल गाँधी को लेकर एक खुलासा किया। ओबामा ने अपनी किताब में लिखा कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गाँधी में एक ऐसे घबराए हुए और अनगढ़ छात्र के गुण हैं, जो अपने टीचर को इंप्रेस करने की पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन उसमें विषय (राजनीति) में महारत हासिल करने की योग्यता और जूनून की कमी है।

फिल्म ‘राम सेतु’ के लिए अक्षय कुमार को अयोध्या में शूटिंग करने की मिली परमिशन, CM योगी ने दी मंजूरी

बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने हाल ही में अपने अगले प्रोजेक्ट की अनाउंसमेंट करते हुए फिल्म का नाम और पोस्टर साझा किया था। फिल्म राम सेतु (Ram Setu) के पोस्टर में अक्षय श्रीराम की तस्वीर के आगे खड़े हुए एक अलग ही लुक में नजर आ रहे हैं। इस फिल्म की शूटिंग अयोध्या में होगी जिसकी इजाजत एक्टर को मिल गई है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुंबई के ट्राइडेंट होटल में अभिनेता अक्षय कुमार ने मुलाकात की थी। ताकि वो फिल्म ‘राम सेतु’ के लिए अयोध्या में शूटिंग की परमिशन ले सकें। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो योगी आदित्यनाथ को अक्षय कुमार का प्रपोजल बेहद पसंद आया और उन्होंने मदद का पूरा आश्वासन दिया है। यानी कि अक्षय जल्द ही अयोध्या की लोकेशन्स पर राम सेतु की शूटिंग करते हुए दिखाई देंगे।

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में फिल्म निर्माण की असीम संभावनाएँ हैं। इसके दृष्टिगत राज्य सरकार फिल्म नीति-2018 के माध्यम से फिल्म निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है। राज्य में फिल्मों की शूटिंग होने से स्थानीय लोगों को रोजगार व प्रदेश के कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त होता है। प्रदेश में फिल्म की शूटिंग करने वाले निर्माताओं को हर संभव सहयोग व सुविधा प्रदान की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्षय कुमार ने अपनी कला का सदुपयोग करते हुए ‘टाॅयलेट एक प्रेम कथा’ फिल्म के माध्यम से समाज को प्रेरक संदेश दिया। ऐसी फिल्में समाज में जागरूकता उत्पन्न करने में मददगार सिद्ध होती हैं। सीएम योगी से मुलाकात के दौरान अक्षय कुमार ने फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की और राज्य में फिल्म सिटी की स्थापना के निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में उनके द्वारा अभिनीत फिल्मों की शूटिंग उत्तर प्रदेश में की जा चुकी है।

भगवान राम के ऊपर आधारित रामसेतु फिल्म की शूटिंग को लेकर अयोध्या के संत समाज भी उत्साहित है। वहीं संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पहल का स्वागत किया है। संतों का कहना है कि अयोध्या के विकास के लिए यह एक नया अवसर है तो भगवान के जीवन पर आधारित फिल्मों के निर्माण से आने वाली पीढ़ियों को एक अच्छा संदेश और अपने पूर्वजों की जानकारी युवा पीढ़ी को मिलेगी। उन्होंने कहा कि भगवान राम से जुड़ी हुई संस्कृति के बारे में जानेगी।

सरयू नित्य आरती कराने वाले महंत शशिकांत दास ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना की है। उन्होंने कहा कि अक्षय कुमार के द्वारा और रामसेतु फिल्म के निर्माण से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा ही साथ ही अयोध्या को भी एक नई दिशा मिलेगी। इससे अयोध्या के व्यवसायियों को भी लाभ होगा।

वहीं तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने इसे स्वागत योग्य कदम के साथ ही नए युग की शुरुआत बताया। उनका कहना है कि फिल्म ऐसे बननी चाहिए जिससे कि लोग अपने संस्कृति और परंपरा के बारे में जाने निष्ठावान बने। 

फिल्म की शूटिंग अक्षय अगले साल 2021 में मई के आसपास करेंगे। अभिषेक वर्मा राम सेतु को डायरेक्ट कर रहे हैं। फिल्म की कहानी की बात करें तो अक्षय राम सेतु का सच पता लगाते हुए दिखाई देंगे। अक्षय कुमार की अभी कई फिल्म रिलीज होनी हैं। साल 2021 अक्षय के लिए बड़ा साबित होने वाला है। एक के बाद एक कई सारी फिल्में रिलीज होनी हैं। पृथ्वीराज, रक्षाबंधन और सूर्यवंशी जैसी फिल्में रिलीज होने वाली हैं।

तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में हर सीट पर लड़ेगी सुपरस्टार रजनीकांत की पार्टी, आध्यात्मिक राजनीति का दावा

हाल ही में सुपरस्टार रजनीकांत ने राजनीति में कदम रखने की तमाम अटकलों को ख़त्म करते हुए अहम ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि वह 31 दिसंबर को अपने राजनीतिक दल की घोषणा करेंगे और नए साल के अवसर अपने दल को लॉन्च करेंगे। इसी बीच उनके राजनीतिक दल और आगामी वर्ष में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर एक और अहम बात सामने आई है। सुपरस्टार रजनीकांत का राजनीतिक दल तमिलनाडु की हर विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ेगा। 

सुपरस्टार रजनीकांत के राजनीतिक सलाहकार तमिलरूवी मनियन ने शनिवार (5 दिसंबर 2020) को इस बात की पुष्टि की। पुष्टि करते हुए उन्होंने बताया कि पार्टी सिर्फ आध्यात्मिक राजनीतिक करेगी और किसी अन्य की आलोचना नहीं करेगी। 2021 में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के मुद्दे पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए तमिलरूवी मनियन ने कहा, “हम विधानसभा चुनावों में प्रदेश की पूरी 234 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। हमारी राजनीति, पवित्र और आध्यात्मिक राजनीति पर आधारित होगी न कि नफरत की राजनीति की तरह जैसा आज कल हो रहा है।” 

इसके अलावा सुपरस्टार रजनीकांत के राजनीतिक सलाहकार तमिलरूवी मनियन ने यह भी कहा कि हम राजनीतिक करते हुए किसी और की आलोचना नहीं करेंगे और न ही किसी भी तरह का आरोप-प्रत्यारोप करेंगे। हाल ही में रजनीकांत ने कहा था कि वह 31 दिसंबर को अपनी बहुप्रतीक्षित राजनीतिक पार्टी की घोषणा करेंगे और वर्षों से चल रही अटकलों को समाप्त करते हुए इसे जनवरी में लॉन्च करेंगे

रजनीकांत ने यह घोषणा अपने मंच रजनी मक्कल मंद्रम के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात के एक दिन बात की थी। बाद में बुधवार को, उन्होंने कहा था कि वह चुनावी राजनीति के लिए अपनी योजनाओं पर जल्द ही खुद के फैसले की सार्वजनिक घोषणा करेंगे। अपने एक ट्वीट में उन्होंने कहा था, “चलें अब सब कुछ का बदलाव करें, अभी नहीं तो कभी नहीं।”

इसके अलावा सुपरस्टार ने आगे यह भी कहा था, “आगामी विधानसभा चुनावों में हमारी निश्चित रूप से जीत होगी। हम लोगों को एक पारदर्शी, भ्रष्टाचार मुक्त और बिना किसी धार्मिक-जातिगत भेदभाव वाली सरकार देंगे।” रजनीकांत बहुत पहले ही तमिलनाडु में लोगों को एक वैकल्पिक राजनीति देने का बात कई बार कह चुके हैं। अब उन्होंने इस दिशा में अपना सधा हुआ कदम बढ़ा दिया है।

पश्चिम बंगाल के आसनसोल में बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमला, 7 घायल: पार्टी ने लगाया TMC के गुंडों पर आरोप

पश्चिम बंगाल में शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को एक बार फिर से हिंसक वारदात की खबर सामने आई है। इसमें बीजेपी के 5 से 7 कार्यकर्ता घायल बताए जा रहे हैं। राज्य के आसनसोल में बीजेपी की बाइक रैली पर हमला हुआ है। बीजेपी कार्यकर्ताओं पर फायरिंग की गई और पत्थरबाजी भी की गई। बताया जा रहा है कि इस दौरान बम भी फेंके गए।

हमले का आरोप टीएमसी कार्यकर्ताओं पर लगा है। स्थानीय बीजेपी नेता लखन घोरुई ने जानकारी देते हुए बताया, “टीएमसी के गुंडों ने गोलीबारी की और बम विस्फोट कर 5-7 लोगों को घायल कर दिया। हम अभी अस्पताल जा रहे हैं। पुलिस से मदद माँगने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया गया है।”

ये वाकया उस वक्त हुआ जब बीजेपी के कार्यकर्ता बर्धमान जिले में संपर्क अभियान पर थे। टीएमसी कार्यकर्ताओं पर इस हिंसा का आरोप लगाया गया है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा का चुनाव होना है लेकिन उससे पहले लगातार बीजेपी और राज्य की सत्ताधारी टीएमसी के बीच झड़प की खबरें आ रही हैं।

गौरतलब है कि पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में बीजेपी के कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या का मामला सामने आया था। मृतक कार्यकर्ता का नाम कलाचंद कर्मकार (kalachand Karmakar) था और उनकी उम्र 55 साल थी। वह बीजेपी के बूथ कमेटी के सचिव भी थे।

आरोप था कि पाँचों टीएमसी कार्यकर्ताओं ने बेरहमी से बीजेपी नेता की पिटाई की, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आई। जब इलाज के लिए उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मृतक बीजेपी नेता के परिवार वालों ने टीएमसी के गुंडों पर हत्या का आरोप लगाया था। परिवार ने पुलिस को दी शिकायत में पाँच टीएमसी कार्यकर्ता का नाम लिया था। 

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के मथुरापुर में गुरुवार (30 जुलाई, 2020) को भाजपा बूथ सचिव गौतम पात्र का शव पेड़ से लटका मिला था। बीते 24 घंटे के भीतर बंगाल में दो भाजपा कार्यकर्ताओं के शव पेड़ से लटके मिले थे। इससे पहले पूर्वी मिदनापुर जिले के कछुरी गाँव में बीजेपी कार्यकर्ता पूर्णचंद्र दास का शव पेड़ से लटका मिला था।

जबरन धर्म-परिवर्तन के खिलाफ योगी सरकार के कानून बनाते ही बदले मौलानाओं के सुर, जारी किया फतवा

उत्तर प्रदेश में जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून क्या बना, मौलानाओं के भी सुर बदल गए हैं। उत्तर प्रदेश में नया कानून बनने के बाद दरगाह-ए-आला हजरत परिसर स्थित रजवी दारुल इफ्ता द्वारा योगी आदित्यनाथ की सरकार के रुख के पक्ष में फतवा जारी करने को लेकर लोग हैरत में हैं। दरअसल, मौलानाओं ने कहा है कि लालच देकर या फिर जोर-जबरदस्ती से धर्म-परिवर्तन कराना नाजायज है, ये ठीक नहीं है।

ये फतवा मंगलवार (दिसंबर 1, 2020) को ही जारी कर दिया गया था, लेकिन कुछ दिनों बाद जब ये सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तब लोगों को इसके बारे में पता चला। दरअसल, सुन्नी उलमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना इंतेजार अहमद कादरी ने दारुल इफ्ता में सवाल दाखिल किया था। इस पर फतवा जारी किया जाना था। इस सवाल में पूछा गया था कि ‘लव जिहाद (ग्रूमिंग जिहाद)’ की शरीयत में क्या हैसियत है?

दारुल इफ्ता के अध्यक्ष मुफ्ती मुतीउर्रहमान रिज़वी ने इस सवाल का जवाब दिया और जबरन धर्म-परिवर्तन कराने को नाजायज ठहराया। उन्होंने यहाँ तक कहा कि शादी-विवाह के लिए भी धर्म परिवर्तन कराना जायज नहीं माना जाता है। ‘अमर उजाला’ की खबर के अनुसार, मुफ्ती के इस जवाब की तस्दीक दारुल इफ्ता के प्रमुख मौलाना अरसलान रजा खाँ ने की है। इसे सोशल मीडिया पर भी वायरल किया गया।

इस फतवे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक जिले में दलित परिवार द्वारा अपनी मर्जी से इस्लाम स्वीकार करने का उदाहरण दिया गया। साथ ही दावा किया गया कि अपनी इच्छा से धर्म-परिवर्तन करने को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। ‘लव जिहाद’ की शब्दावली का जिक्र करते हुए बताया गया कि ‘लव’ एक अंग्रेजी शब्द है और ‘जिहाद’ अरबी। साथ ही कहा कि इन्हें जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि शरीयत में इसकी कोई हैसियत नहीं।

उधर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार उस 44 वर्ष पुराने कानून को ख़त्म करने पर विचार कर रही है, जिसके तहत अलग-अलग धर्म से आने वाली वैवाहिक जोड़ों को प्रोत्साहित किया जाता है। अंतरधार्मिक शादी को बढ़ावा देने वाली इस योजना को अब ख़त्म किया जा सकता है। जबरन धर्मांतरण को लेकर योगी सरकार पहले ही अध्यादेश ला चुकी है, अब अंतरधार्मिक विवाह को बढ़ावा देने वाली योजना भी बंद हो सकती है।

आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम से होगी 65 लाख की वसूली: विधायक के रुप में लिए वेतन-भत्ते जमा कराने के आदेश

समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम से विधायक के रूप में लिए गए वेतन व भत्ते वसूलने के आदेश जारी हुए हैं। मुख्य लेखा अधिकारी अनुज कुमार पांडेय ने अब्दुल्ला आजम को नोटिस जारी कर 65 लाख रुपए जमा करने के आदेश दिए हैं।

अब्दुल्ला आजम 2017 के विधानसभा चुनाव में स्वार सीट से निर्वाचित घोषित हुए थे।  नामांकन पत्र दाखिल करते वक्त अब्दुल्ला की आयु संबंधी गलत जानकारी दी थी जिस पर मुकदमा दर्ज कराया गया था। हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को अब्दुल्ला आजम की विधायकी रद्द कर दी थी। विधानसभा सचिवालय ने भी हाईकोर्ट के फैसले के बाद स्वार सीट को रिक्त घोषित कर दिया था।

इस पूरे प्रकरण को लेकर भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने प्रमुख सचिव विधानसभा से माँग की थी कि अब्दुल्ला आजम को विधायक के रूप में दिए गए वेतन व भत्ते को उनसे सूद समेत वापस लिया जाए। उनके द्वारा की गई इस शिकायत के बाद बीते 2 दिसंबर 2020 को उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य लेखा अधिकारी अनुज कुमार ने अब्दुल्ला आजम को नोटिस जारी किया है।

नोटिस में लिखा है अब्दुल्ला आजम ने 14 मार्च 2017 से 16 दिसंबर 2019 तक जो भी वेतन व भत्ते प्राप्त किए हैं उसकी रकम सरकारी कोष में जमा कराएँगे।

भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने पूर्व में सपा सांसद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के खिलाफ गंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि अब्दुल्ला के दो जन्म प्रमाण पत्रों के आधार पर दो पैनकार्ड और दो पासपोर्ट बनवाए गए और उनका समय-समय पर अनुचित लाभ भी लिया गया। 

विवेचना के बाद पुलिस ने आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी व पासपोर्ट अधिनियम के अंतर्गत आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया था। इस मामले में पिछले दिनों लोअर कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद सपा नेताओं ने हाईकोर्ट में अर्जी लगाई थी, वहाँ से भी जमानत खारिज हो गई थी। गौरतलब है कि सांसद आजम खान, उनकी पत्नी विधायक डॉक्टर तजीन फातमा और बेटे अब्दुल्ला आजम पिछले नौ माह से सीतापुर की जेल में बंद हैं।

उल्लेखनीय है कि लंबे अरसे से विवाद और मुकदमों में चल रही उत्तर प्रदेश के भू-माफिया आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी की दीवार पर बृहस्पतिवार (फरवरी 20, 2020) दोपहर आखिरकार प्रशासन ने बुलडोजर चला दिया गया। आजम उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित इस यूनिवर्सिटी के कुलपति हैं।

यह कार्रवाई प्रशासन की तरफ से चकरोड प्रकरण में की गई। प्रशासन द्वारा जौहर यूनिवर्सिटी की दीवार को कई जगह से जेसीबी मशीन से तोड़कर उसके अंदर कब्जा किए गए सरकारी चकरोड से कब्जे को हटाया गया। इस यूनिवर्सिटी में चकरोडों पर अवैध कब्जे का मामला चल रहा था। अधिकारियों ने इस घटना के संबंध में जौहर यूनिवर्सिटी प्रशासन को पहले ही नोटिस जारी कर दिया था। इस मामले में तीन थानों की फोर्स ने मिलकर 17 बीघा जमीन पर बनी तीन मीटर दीवार को तोड़कर रास्ता बनाया।