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केरल कस्टम विभाग ने CRPF सुरक्षा के लिए गृह मंत्रालय को लिखा, गोल्ड तस्करी मामले में आ सकते हैं बड़े नेताओं के नाम

केरल के सोना तस्करी घोटाला में बड़ा खुलासा हुआ है। कस्टम कमिश्नर ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिखा है न सिर्फ उनके दफ्तर, बल्कि इस मामले की जाँच कर रहे प्रत्येक अधिकारी को CRPF की सुरक्षा मुहैया कराई जाए। केरल सोना तस्करी घोटाला मामले में कई बड़े नाम सामने आने वाले हैं और इसलिए अधिकारियों को लगता है कि उनकी सुरक्षा को खतरा है। इस मामले में कई बड़े नेताओं और अधिकारियों के शामिल होने की आशंका है

इससे पहले केंद्र सरकार ने कस्टम अधिकारियों को सुरक्षा प्रदान की थी। लेकिन बाद में उन्हें केरल पुलिस से सुरक्षा लेने को कहा गया था। सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया, जब इस मामले में मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश की तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने वकालत छोड़ने का ऐलान कर दिया। उन्होंने इसके लिए ‘प्रोफेशनल कारणों’ को जिम्मेदार बताया। कहा जा रहा है कि स्वप्ना और सरित कुमार के अप्रूवर बनने के कारण ऐसा हुआ है।

शुक्रवार (दिसंबर 4, 2020) को दोनों मजिस्ट्रेट के सामने अपना कबूलनामा दे चुके हैं। उसी दिन इन दोनों के अलावा IAS अधिकारी एम शिवशंकर और यूनिटेक बिल्डर्स के एमडी संतोष से पूछताछ हुई। जयघोष और सिद्दीकी नामक दो आरोपितों से भी पूछताछ हुई है। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि हवाला नेटवर्क के जरिए 100 करोड़ रुपए भेजे जा रहे थे और इस मामले में राजनयिकों के भी शामिल होने की आशंका है।

जुलाई 5, 2020 को कस्टम अधिकारियों ने तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट से 30 किलो सोना जब्त किया था। इसके बाद UAE काउंसलेट में काम करने वाले सरित कुमार की गिरफ़्तारी हुई थी। स्वप्ना सुरेश का भी नाम आया, जिसकी नियुक्ति शिवशंकर के ही इशारे पर हुई थी। केरल के मुख्यमंत्री ने शिवशंकर को सस्पेंड करने का निर्णय लिया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। अब सीएम के एडिशनल सेक्रेटरी रवीन्द्रन का नाम सामने आया है।

इससे पहले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के संयोजक बेनी बेहानन ने सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को पद से हटाने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि जब से मुख्यमंत्री कार्यालय पर सवाल उठने शुरू हुए हैं, पिनराई का पद पर बने रहना अनुचित है। उन्होंने लिखा था कि उच्च शिक्षा मंत्री केटी जलील के अलावा, कुछ और मंत्रियों के बच्चे भी सवालों के घेरे में आ गए हैं।

कोरोना वैक्सीन के थर्ड फेज में हरियाणा के मंत्री अनिल विज की रिपोर्ट पॉजिटिव: चिंता जैसी कोई बात नहीं, जानिए क्यों?

हरियाणा के गृह- स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज शनिवार (5 दिसंबर, 2020) को कोरोना संक्रमित हो गए हैं। उन्होंने खुद ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी है। फिलहाल सिविल अस्पताल अंबाला कैंट में उनका इलाज चल रहा है।

अनिल विज ने ट्वीट करते हुए कहा, “मैं कोरोना संक्रमित पाया गया हूँ। मैं सिविल अस्पताल अंबाला कैंट में भर्ती हूँ। जो लोग भी मेरे संपर्क में आए हैं उन्हें यह सलाह दी जाती है कि वे कोरोना की जाँच कराएँ।”

बड़ी बात यह है कि 15 दिन पहले यानी 20 नवंबर को अनिल विज ने कोवैक्सीन परीक्षण के तीसरे चरण के परीक्षण के लिए वालंटियर के तौर पर खुद को टीका लगवाया था। बावजूद इसके वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।

बता दें कि कोरोना वायरस महामारी के बचाव के लिए भारत बायोटेक और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की दवा कोवैक्सीन के तीसरे चरण का परीक्षण चल रहा है। पहले और दूसरे चरण के ह्यूमन ट्रायल में करीब एक हजार वॉलंटियर्स को यह वैक्सीन दी गई थी। 16 नवंबर को इस वैक्सीन के तीसरे चरण का परीक्षण भारत में 25 केंद्रों में 26,000 लोगों के साथ किए जाने की घोषणा की गई थी। ये भारत में कोविड-19 वैक्सीन के लिए आयोजित होने वाला सबसे बड़ा ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल है।

हरियाणा के मंत्री अनिल विज के कोरोनाक्सिन वैक्सीन ट्रेल्स के तीसरे चरण के परीक्षणों के लिए स्वेच्छा से परीक्षण करने के बाद भी कोरोनोवायरस के लिए सकारात्मक परीक्षण की रिपोर्ट ने देश के नागरिकों में दहशत पैदा कर दी है।

वहीं विज की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद लोग इस वैक्‍सीन के असर को लेकर शक जाहिर कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग इसके पीछे वैक्सीन को भी जिम्मेदार ठहरा रहे है।

हालाँकि, कोवैक्सीन ट्रायल के संबंध में जनता में सीमित जानकारी है। साथ ही यह दावा करना पूरी तरह से भ्रामक है कि हरियाणा के मंत्री वैक्सीन के इंजेक्शन लगाने के बाद कोरोनावायरस से संक्रमित हुए।

गौरतलब है कि भारत बायोटेक ने कोविड-19 वैक्सीन कोवाक्सिन के लिए भारत के पहले चरण में 3 प्रभावकारिता अध्ययन किया। अनिल विज सहित अन्य वालंटियर्स को ट्रायल के दौरान, 28 दिनों के अंतराल पर दो इंट्रामस्क्युलर इंजेक्शन दिया जाना था। इन प्रतिभागियों को कोवैक्सीन या ‘प्लेसबो’ (डमी ड्रग) दिया जाना था जिसका कोई प्रभाव नहीं होता है।

बता दें हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री को Covaxin की पहली डोज 20 नवंबर को दी गई थी। वहीं पहली डोज के 28 दिन बाद उन्हें Covaxin के फेज 3 ट्रायल प्रोटोकॉल के अनुसार, 0.5mg की दो डोज वालंटियर के तौर पर दी जानी थी। लेकिन इस डोज से पहले ही वे कोरोना संक्रमित हो गए। डॉक्टर्स के अनुसार जब तक वैक्‍सीन की दोनों डोज नहीं लगतीं, तब तक यह शरीर में कोविड से लड़ने की इम्युनिटी को नहीं बढ़ाता है।

Covaxin का ट्रायल रैंडमाइज्‍ड, डबल ब्‍लाइंड था। ऐसा भी हो सकता है कि विज को वैक्‍सीन के बजाय प्‍लेसीबो मिला हो। विज के संक्रमित होने की यही वजह नजर आती है, हालाँकि, एक्सपर्ट अभी इसकी जाँच कर रहे है।

बता दें प्लेसबो एक साधारण सेलाइन सॉल्यूशन है जिसका आमतौर पर टीका परीक्षणों के दौरान उपयोग किया जाता है। नई दवा या वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावकारिता के मूल्यांकन के लिए यादृच्छिक, प्लेसबो-नियंत्रित परीक्षणों को सुरक्षित और-गोल्ड स्टैंडर्ड माना जाता है। इन परीक्षणों में वालंटियर्स को जाँच के तहत या तो सेलाइन इंजेक्शन जैसे प्लेसबो देने के लिए यादृच्छिक (रैंडमाइज़ेशन) किया जाता है।

कुछ मामलों में परीक्षण के तहत कुछ व्यक्ति में, जिसे प्लेसबो के साथ इंजेक्शन लगाया गया है, प्रतिक्रियाएँ दिखा सकता है। उदाहरण के लिए, उसमें सुधार भी हो सकता है या व्यक्ति में उपचार से कुछ दुष्प्रभाव भी देखा जा सकता है। इन प्रतिक्रियाओं को “प्लेसबो प्रभाव” के रूप में जाना जाता है।

टीकों के संबंध में एक और महत्वपूर्ण बात यह भी है कि वे लगाए जाने के तुरंत बाद काम करना शुरू नहीं करते हैं। कोरोनावायरस के टीके के मामले में टीकाकरण के बाद शरीर को टी-लिम्फोसाइट्स और बी-लिम्फोसाइट्स का उत्पादन करने में कुछ सप्ताह लगते हैं। इसलिए, दोनों खुराक प्राप्त करने के बाद भी, अगर कोई व्यक्ति वायरस के संपर्क में आता है तो भी शरीर के इम्युनिटी के अनुसार कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकता है।

वहीं जल्दबाजी में टीके को लेकर कोई भी राय बनाना सही नहीं होगा। किसी भी दावा का असर तभी दिखाई पड़ता है जब उसकी पूरी डोज व्यक्ति को दी गई हो। इस वक्त करीब 28 हजार वॉलंटियर्स देशभर में Covaxin के फेज 3 ट्रायल से गुजर रहे है। ट्रायल पूरा होने के बाद, जब डेटा आएगा तभी वैक्‍सीन के असर पर स्‍पष्‍ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा।

इसीलिए वर्तमान में कोवाक्सिन वैक्सीन की प्रभावकारिता से घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि अनिल विज को वास्तविक परीक्षण वैक्सीन या प्लेसबो के अधीन किया गया था या नहीं। वहीं यह बात भी नजरअंदाज नहीं की जानी चाहिए कि उन्हें आवश्यक दो खुराकों में से केवल एक ही दिया गया था। उम्मीद है कि भारत बायोटेक को हाल के घटनाक्रमों के मद्देनजर जल्द ही अपना बयान जारी करेगा।

इंडिया टुडे की डाटा इंटेलीजेंस यूनिट का मैथ फिर गड़बड़ाया, हैदराबाद निकाय चुनाव के नतीजों में जोड़-घटाव भी गलत

इंडिया टुडे की डाटा इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) एक बार फिर से सोशल मीडिया में आलोचनाओं का केंद्र बनी हुई है। इसका कारण इनकी आँकड़ों और चार्टों को लेकर नासमझी है। बता दें कि हैदराबाद निकाय चुनावों के मतगणना वाले दिन इंडिया टुडे को 2016 और 2019 में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के चुनाव परिणामों के बीच तुलना करते हुए देखा गया था।

डीआईयू के लिए फर्जी आँकड़ों को उछालना नया नहीं है। इंडिया टुडे ने दावा किया कि 2016 में टीआरएस ने 99 सीटें हासिल की थीं, जबकि 2020 में केवल 56 सीटें थीं। यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम में कुल 150 सीटें हैं। रिपोर्टों के अनुसार, टीआरएस ने 2016 में 88 सीटें हासिल की थीं, न कि 99 सीटें, जैसा कि इंडिया टुडे ने शुक्रवार (दिसंबर 4, 2020) को दावा किया। इंडिया टुडे ने आँकड़ों में गलती करने के अलावा बेसिक मैथेमेटिकल कैलकुलेशन में भी गलतियाँ की।

इंडिया टुडे की डाटा इंटेलिजेंस यूनिट के अनुसार 2020 के चुनावों में टीआरएस की 56 सीटों का मतलब था कि पार्टी की इस बार 46 सीटें कम आई। हालाँकि 99 में से 56 का घटाव करने पर परिणाम 43 आते हैं। डीआईयू में अपना विश्वास दिखाने वाले राहुल कँवल ने खुद से कैलकुलेट करके बताया कि टीआरएस को 43 सीटें कम आई। मगर स्क्रीन पर दिख रहे नंबर और राहुल कँवल द्वारा बताए जा रहे नंबरों में विरोधाभास था।

यह अपने आप में झूठे आँकड़ों पर आधारित था कि टीआरएस ने 2016 में 99 सीटें हासिल की, जबकि वास्तव में उसे 88 सीटें आई थी। यह पहली बार नहीं है जब इंडिया टुडे ने अपने ‘डाटा इंटेलिजेंस यूनिट’ के मिसकैलकुलेशन और फैब्रिकेटेड डाटा को पास करने की कोशिश की।

आर्थिक राहत पर इंडिया टुडे का भ्रामक चार्ट

मार्च में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1.70 लाख करोड़ रुपए का पैकेज रिलीज करने का ऐलान किया ताकि कोरोना से पैदा हुए हालात से लड़ा जा सके। जैसे ही सरकार ने इस फंड की घोषणा की, इंडिया टुडे की पत्रकार गीता मोहन ने एक चार्ट शेयर किया। चार्ट में यह दर्शाया गया कि अन्य देशों के मुकाबले ये फंड कितना कम है।

डाटा इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा बनाए गए इस चार्ट में कई त्रुटियाँ थी। इसमें दर्शाया गया कि 1.70 लाख करोड़ रुपए का फंड या फिर $22.5 बिलियन का मतलब हर व्यक्ति के हिस्से केवल $19 आता है, जो अन्य देशों द्वारा जारी किए गए फंड से बेहद कम है। जैसे जर्मनी में $7281, यूके में $ 6,246 और यूएसए में $6,042 आदि।

इस चार्ट में कई तरह से दूसरे देशों की भारत से तुलना की गई ताकि ये साबित किया जा सके कि सरकार अन्य देशों के मुकाबले कोरोना से लड़ने के लिए कम प्रयास कर रही है। लेकिन बता दें विभिन्न देशों द्वारा घोषित पैकेजों में और भारत द्वारा जारी पैकेज किसी भी रूप में तुलनीय नहीं था। अन्य देशों द्वारा घोषित अधिकांश पैकेज COVID-19 के प्रकोप के कारण होने वाले नुकसान से निपटने के लिए और अर्थव्यवस्था की मदद करने के लिए व्यापक उपाय के रूप में था। मगर भारत का पैकेज एक आर्थिक पैकेज नहीं था, ये एक कल्याणकारी पैकेज था जो केवल समाज के एक वर्ग को लक्षित करता था।

GDP पर झूठ फैला रहा था इंडिया टुडे ग्रुप का बिजनेस टुडे

गौरतलब है कि पिछले दिनों बिजनेस टुडे ने एक ग्राफ शेयर किया। इस ग्राफ में संस्थान ने G7 देशों की जीडीपी ग्रोथ दिखाई थी। ग्राफ में दावा किया गया कि यह जीडीपी ग्रोथ का आँकड़ा अप्रैल-जून 2020 के बीच का था। हालाँकि आलोक वाजपेयी नाम के ट्विटर यूजर ने इसकी पोल खोल कर रख दी। जिसके कारण संस्थान को अपना ग्राफ भी डिलीट करना पड़ा

फेक TRP केस में 25 दिनों तक जेल में रहने के बाद रिपब्लिक टीवी के AVP घनश्याम सिंह को मिली जमानत

फेक टीआरपी मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के असिसटेंट वाइस प्रेसिडेंट (AVP) धनश्याम सिंह को शनिवार (5 दिसंबर 2020) को मुंबई की अदालत ने जमानत दे दी। फ़र्ज़ी टीआरपी मामले को रिपब्लिक टीवी और इसके एडिटर इन चीफ़ अर्णब गोस्वामी के विरुद्ध षड्यंत्र और दुष्प्रचार के ज़रिए में तब्दील कर दिया गया था।

10 नवंबर को पुलिस ने घनश्याम सिंह को उनके आवास से गिरफ्तार किया था और इसके बाद उन्हें 25 दिन के लिए तलोजा जेल में रखा गया था। इस दौरान अदालत में पेश किए जाने के पहले उनके साथ आतंकवादियों जैसा बर्ताव किया गया, चेहरा काले कपड़े से ढका गया था और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया था। 

19 नवंबर को रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के असिसटेंट वाइस प्रेसिडेंट घनश्याम सिंह की जमानत याचिका की सुनवाई 24 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई थी। रिपब्लिक टीवी के अनुसार यह आदेश तब आया जब महाराष्ट्र सरकार ने घनश्याम सिंह की जमानत याचिका पर प्रतिक्रिया देने के लिए 5 दिन का समय माँगा था।   

8 अक्टूबर को मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने एक प्रेस वार्ता की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि मुंबई पुलिस ने फ़र्ज़ी टीआरपी रैकेट के संबंध में चेतावनी दी थी। परमबीर सिंह विशेष रूप से इस बात का ज़िक्र किया था कि हंसा रिसर्च ने मामले में शिकायत दर्ज कराई है। जबकि हंसा रिसर्च द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में रिपब्लिक टीवी का कोई ज़िक्र नहीं था। इसके विपरीत शिकायत में इंडिया टुडे का ज़िक्र कई बार किया गया था। 

जमानत याचिका सुनवाई स्थगित होने के बाद नहीं मिली थी घनश्याम सिंह की लोकेशन 

मुंबई पुलिस द्वारा घनश्याम सिंह की जमानत याचिका की सुनवाई 5 दिन के लिए टाले जाने के बाद रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने कहा था कि उनकी लोकेशन का कुछ पता नहीं चल रहा था। रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया था कि पुलिस और जेल अधिकारी इस संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहे थे कि हिरासत के दौरान घनश्याम सिंह को किस जेल में रखा गया है। चैनल का कहना था कि वह लगातार लोकेशन खोजने में जुटे हुए थे और उनकी लोकेशन छुपा कर महाराष्ट्र सरकार और पुलिस उनके बुनियादी अधिकारों का हनन कर रही है।    

‘जब इनकी माँ-बेटियाँ अहमद शाह दुर्रानी ले जाता तो उधर टके-टके की बिकती थी’: किसान आंदोलन में घृणा की खेती

भारत के पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह फिर विवादों में हैं। ‘किसान आंदोलन’ में उनके दिए एक भाषण का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वह महिलाओं के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते और प्रदर्शनकारियों को भड़काते दिख रहे हैं। इसके बाद से सोशल मीडिया में उनकी गिरफ्तारी की माँग की जा रही है।

योगराज सिंह ने कहा, “मैं आपको ये बातें बताना चाहता हूँ और शेयर करना चाहता हूँ, क्योंकि मैं नेताओं के बीच बहुत रहा हूँ। इन लोगों ने जो हमारे किसानों का हाल अभी 75 वर्षों से किया है, इसकी जिम्मेदारी इन्हीं नेताओं की है जिन्होंने अपनी ज़िंदगी में कुछ नहीं किया। मैं CWC की बैठक में रहा हूँ, उनकी बाते भी सुनी हैं। लेकिन, अफ़सोस ये कि हम अपने बच्चों को गुरुओं का पाठ नहीं पढ़ा सके।”

योगराज सिंह ने आगे कहा, “अगर हमारा ये हाल हुआ है तो हमें मान लेना चाहिए कि हम अपने गुरुओं से दूर हैं। जो पंजाब, कंधार और कश्मीर से लेकर दिल्ली तक था, आज छोटा सा है। तारा सिंह और बलदेव सिंह ने क्या किया, ये आपको पता है। लेकिन, कुछ इतिहास मैं बताता हूँ। जिस सरकार की आप बात कर रहे हैं केंद्र की, आपको पता है कि ये कौन हैं? ये वही हैं, जो अपनी बेटियों की डोली हाथ जोड़ कर मुगलों के हवाले कर देते थे।”

पंजाबी में दिए भाषण में योगराज सिंह ने कहा, “मैं इन्हें आपलोगों से ज्यादा जानता हूँ। ये माँ-बेटियों की कसमें खा कर भी पलट जाते हैं। मैं आपको बधाई देता हूँ कि जब अमित शाह ने कहा कि निरंकारी ग्राउंड आ जाओ तो आपलोग नहीं गए। इनकी किसी बात का विश्वास नहीं करना। एक बात और कहना चाहता हूँ जब इनकी औरतों को अहमद शाह दुर्रानी ले जाता और वहाँ टके-टके की बिकती थी, तो पंजाबियों ने बचाया।”

किसानों के बीच योगराज सिंह ने कहा, “मैंने अपने नेताओं को दिल्ली दरबार में बिकते हुए देखा है। बोली लगती है। 5 करोड़ से लेकर 10-20 करोड़ तक। ये वो कौम है, जिन्होंने हजारों साल गुलामी की है, वो गुलाम जब सत्ता में आते हैं तो ऐसा ही करते हैं। मैं हाथ जोड़ कर कहता हूँ कि अपने में लीडर ढूँढो, बहुत मिलेंगे। पंजाब बचाना है तो अपने हाथ में सत्ता रखो। हम एक जरनैल नहीं पैदा कर सकते? ये जो खड़े हैं, सब जरनैल हैं।”

योगराज सिंह का भड़काऊ बयान

इससे पहले जब योगराज सिंह से पूछा गया था कि इस ‘किसान आंदोलन’ में इंदिरा गाँधी की हत्या को याद करते हुए पीएम मोदी को भी धमकी दी गई है, तो उन्होंने कहा था कि जिसने जो बोया है, वो वही काटेगा। उन्होंने इसे भावनाओं की लड़ाई बताते हुए कहा था कि सरकार को ऐसा कोई भी बयान नहीं देना चाहिए, जो भारत को विभाजित करे। उन्होंने भारत सरकार पर मुग़ल बादशाहों बाबर, औरंगजेब और अंग्रेजों से भी ज्यादा क्रूरता और अत्याचार करने के आरोप लगाए।

उन्होंने यहाँ तक आरोप लगाया था कि अमित शाह ने अपनी सुरक्षा घेरे में से सिख सुरक्षाकर्मियों को हटा दिया है। उन्होंने चुनौती दी कि मोदी-शाह ‘अपने दोस्त’ अम्बानी-अडानी को पंजाब लाकर दिखाएँ, फिर हम देखेंगे कि वो कैसे वापस जाते हैं? उन्होंने प्रदर्शनकारियों से उनके बीच से ‘एक और जरनैल सिंह भिंडरवाला’ को पैदा करने के लिए कहा

CM अमरिंदर ने प्रकाश सिंह बादल के पद्म विभूषण सम्मान लौटाने के बादल के कदम को बताया ‘नाटक’

कृषि कानूनों के खिलाफ देश में किसानों का आंदोलन बढ़ता जा रहा है। इसी के साथ अवॉर्ड वापसी का सिलसिला भी शुरू हो गया है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता प्रकाश सिंह बादल ने कृषि कानूनों के विरोध में और किसानों के समर्थन में अपना पद्म विभूषण सम्मान वापस कर दिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने प्रकाश सिंह बादल के इस कदम को ‘नाटक’ बताया

सिंह ने एक बयान में सवाल किया कि उन्हें नहीं मालूम है कि प्रकाश सिंह बादल को यह पद्म विभूषण क्यों मिला था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “प्रकाश सिंह बादल ने कौन सा युद्ध लड़ा या उन्होंने समुदाय के लिए क्या बलिदान दिया? इस पर राजनीति बंद होनी चाहिए। यह ड्रामेबाजी 40 साल पहले चलती थी लेकिन यह अब काम नहीं करता है।”

अपने सम्मान को लौटाते हुए प्रकाश सिंह बादल ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चिट्ठी लिखी। करीब तीन पन्नों की इस चिट्ठी में प्रकाश सिंह बादल ने केंद्र सरकार के कृषि कानूनों का विरोध किया। इसके साथ ही सरकार की ओर से किसानों पर की गई कार्रवाई की भी निंदा की। 

प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि जिस तरह से किसानों के साथ धोखा किया गया है उससे मुझे काफी दुख पहुँचा है। किसानों के आंदोलन को गलत तरह से पेश किया जा रहा है और यह बहुत ही दर्दनाक है। बादल ने पत्र में लिखा, “मैं इतना गरीब हूँ कि किसानों के लिए कुर्बान करने के लिए अब मेरे पास कुछ नहीं बचा है, आज मैं जो भी हूँ वह किसानों की वजह से हूँ, ऐसे में जब किसानों का अपमान किया जा रहा है तो इस सम्मान को अपने पास रखने का कोई मतलब नहीं है।”

प्रकाश सिंह बादल को 30 मार्च 2015 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति स्वर्गीय प्रणब मुखर्जी द्वारा पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।

पंजाब के सीएम ने हरसिमरत कौर पर साधा निशाना, पूर्व केंद्रीय मंत्री ने किया पलटवार

अमरिंदर सिंह ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और प्रकाश सिंह बादल की बहू हरसिमरत कौर बादल की भी आलोचना की। तीन नए कृषि कानून के पास होने के बाद नरेंद्र मोदी कैबिनेट से इस्तीफा देने पर पंजाब सीएम अमरिंदर सिंह ने कहा, “क्या वो (हरसिमरत कौर बादल) अनपढ़ हैं, जो वह नहीं पढ़ सकती है?” उन्होंने ने कहा, “हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा तब दिया, जब किसानों ने इस कानून का विरोध किया। लेकिन जब नया कृषि कानून पारित हो रहा था तो हरसिमरत कौर उस कैबिनेट का हिस्सा थीं।”

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के अनपढ़ वाले बयान पर हरसिमरत कौर बादल ने ट्वीट कर जवाब दिया। हरसिमरत कौर बादल ने लिखा, “मुझे अनपढ़ कह लीजिए, अगर आपको सही लगता है तो। लेकिन मुझे खुशी है कि आप इतने ‘साक्षर’ होने के बावजूद पद्म भूषण और पद्म विभूषण के बीच अंतर नहीं जानते हैं। कोई बात नहीं! लेकिन हमारे शांतिपूर्वक विरोध करने वाले अन्नदाता को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हैं। ये बेहद शर्मनाक है।”

प्रकाश सिंह बादल के अवार्ड वापसी के बाद कई अवार्डी ने किसानों के प्रति समर्थन जाहिर करने के लिए साहित्य अकादमी अवार्ड लौटाए। शुक्रवार (दिसंबर 4, 2020) को सिरमौर शिरे डॉ. मोहनजीत, डॉ. जसविंदर सिंह और पंजाबी नाटककार स्वराजबीर ने अपने पुरस्कार लौटाए।

केंद्रीय पंजाबी लेखक संघ ने एक आधिकारिक पत्र में कहा, “पहले भी पंजाबी लेखकों के एक समूह ने अकादमी पुरस्कार वापस करके सरकार के इस तरह के रवैये के खिलाफ कड़ा विरोध किया था। आज, जब भारत सरकार किसानों की जायज माँगों को मानने के बजाय, उन्हें कठोर सर्दियों में सड़कों पर आंदोलन करने के लिए मजबूर कर रही है, पंजाबी लेखक सम्मान लौटाकर राष्ट्रीय स्तर पर विरोध कर रहे हैं।”

अब ‘नए जिन्ना’ के साथ खुल कर ‘इलू-इलू’ करेंगे ‘कार वाले साहब’? GHMC चुनाव के बाद BJP के लिए खुला दक्षिण का रास्ता

ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (GHMC) के चुनावों में भाजपा ने जिस तरह से शानदार प्रदर्शन किया है, उससे तेलंगाना में TRS की मुश्किलें बढ़ गई हैं। भाजपा ने इस चुनाव को KCR बनाम मोदी भी नहीं होने दिया और ओवैसी भाइयों की कट्टरवादी राजनीति पर निशाना साधते हुए वोट माँगे। इस चुनाव में अगर सबसे ज्यादा नुकसान किसी पार्टी को हुआ है तो वो TRS है, जिसकी सीटों की संख्या 99 से सीधे 55 पर आकर रुक गई

5 लोकसभा क्षेत्रों और 24 विधानसभा क्षेत्रों में फैले इस चुनाव के बाद भाजपा की नजर सीधा 2023 में होने वाले तेलंगाना विधानसभा चुनाव पर है। 120 सदस्यीय विधानसभा में फ़िलहाल TRS के पास 102 और AIMIM के पास 7 सीटें हैं। ये सातों ही सीटें हैदराबाद की ही हैं। ऐसे में भाजपा के पास राज्य में पाने के लिए बहुत कुछ है और हिंदी पट्टी से बाहर निकल कर उत्तर-पूर्व में दबदबा बनाने वाली पार्टी अब बंगाल और दक्षिण में एंट्री ले रही है।

इन चुनाव परिणामों में भाजपा की सबसे बड़ी सफलता ये है कि कोई भी एक दल अपने बलबूते मेयर नहीं बना सकता। भाजपा को अपना मेयर बनाना नहीं है, पार्टी नेता साफ़ कर चुके हैं। ऐसे में अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान जो आरोप लगाया था कि ओवैसी और KCR बंद कमरे में ‘इलू-इलू’ करते हैं और गुप्त समझौता करते हैं, वो अब खुलेआम किया जा सकता है। इससे भाजपा को इन दोनों की मिलीभगत को बेनकाब करने में आसानी होगी।

सबसे ज्यादा संभावना है कि मेयर TRS का होगा और AIMIM के समर्थन से बनेगा। दोनों दलों के इस गठबंधन को भाजपा 2023 विधानसभा चुनाव में मुद्दे बनाएगी और जनता को बताने की कोशिश करेगी कि ये दोनों दल आपस में मिले हुए हैं। 48 सीटों के साथ भाजपा के पास अब राजधानी हैदराबाद में संगठन का दबदबा बढ़ाने में मदद मिलेगी। बूथ स्तर पर चुनावी मैनेजमेंट में विश्वास रखने वाली पार्टी के लिए ये अच्छा मौका है।

भाजपा ने इशारा दिया है कि अब आगे उसका निशाना मुख्यमंत्री KCR ही होंगे, जिनकी आरामतलबी को पार्टी जनता के समक्ष रखेगी। उनके बारे में एक कहावत है कि साहब कार से आएँगे और वोट माँगेंगे। उनकी पार्टी का चुनाव चिह्न कार है। उनके बारे में कहा जाता है कि वो कई-कई दिनों तक सचिवालय नहीं जाते और जनता के बीच में नहीं आते। ऐसे में ‘निजाम-नवाब कल्चर’ को खत्म करने की बात करने वाली भाजपा ये मुद्दा उठाने से चूकेगी नहीं।

TRS ने मुफ्त स्वच्छ जल देने का वादा किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हैदराबाद का नाम भाग्यनगर रखने का वादा किया। वहीं अकबरुद्दीन ओवैसी ने वही कट्टरवादी रवैया अपनाते हुए ‘किसी के बाप से न डरने’ वाला बयान दिया था। उनके बड़े भाई असदुद्दीन ओवैसी ने अपने संसाधनों को जिताऊ सीटों पर केंद्रित करने के लिए आधी से भी कम सीटों पर चुनाव लड़ी, जिससे TRS को फायदा मिला।

हालाँकि, इससे एक नुकसान ये भी हो सकता है कि अब तक कई मुद्दों पर TRS ने संसद में भाजपा का साथ दिया था और राष्ट्रवादी मसलों पर भी KCR अक्सर दूसरी विपक्षी पार्टियों से अलग रुख दिखाती थी। अब इसमें कुछ बदलाव आ सकता है, क्योंकि विपक्ष विहीन राज्य में बिना किसी सिरदर्द के सरकार चला रहे KCR के खिलाफ अब एक मजबूत विपक्ष खड़ा हो रहा है। अब वंशवाद बनाम लोकतांत्रिक पार्टी वाला मुद्दा भी उठेगा।

लेकिन, आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी की YSRCP के रूप में एक बड़ी पार्टी है, जो संसद में भाजपा का साथ दे सकती है। CAA पर भी आंध्र प्रदेश की दोनों बड़ी पार्टियों ने संसद में भाजपा का साथ दिया था। ऐसे में राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनाव या अहम मसलों और संसद में वोटिंग के मामले में KCR के अन्य विपक्षी दलों का साथ देने के खतरे को भाजपा अब मोल लेने की स्थिति में आ गई है। ओडिशा में नवीन पटनायक भी कुछेक मसलों पर उसका साथ देते हैं।

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने हैदराबाद में तो रैलियाँ की ही, लेकिन साथ ही जिस तरह से सिकंदराबाद के सांसद जी किशन रेड्डी ने चुनाव प्रचार किया, उससे पार्टी को फायदा मिला। भाजपा जनता को ये समझाने में कामयाब रही कि ओवैसी और KCR साथ हैं। इससे ये भी पता चलता है कि सीएम के खिलाफ एंटी-इंकम्बेंसी बढ़ रही है, जो 2023 में उनके 10 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के साथ चरम पर होगी।

हालाँकि, इसे सिर्फ भाजपा आलाकमान की अंतिम सप्ताह में की गई रैलियों के मद्देनजर ही नहीं देखा जाना चाहिए। इसकी रणनीति राज्य की यूनिट ने तैयार की थी और प्रदेश भाजपा ने कार्यकर्ताओं को सड़क पर काफी पहले से उतार रखा था। जब अकबरुद्दीन ओवैसी ने PV नरसिम्हा राव और NTR के नाम पर बने स्थलों को ध्वस्त करने की बात की तो प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष बंदी संजय ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो सबसे पहले AIMIM का दफ्तर मिट्टी में मिला दिया जाएगा।

हाल ही में जब हैदराबाद में बाढ़ आई थी, तब पुराने शहर में कुछ AIMIM कार्यकर्ताओं को वित्तीय सहायता देकर इतिश्री कर ली गई। भाजपा ने इस मुद्दे को भी उठाया कि संकट के काल में राज्य की दोनों बड़ी पार्टियाँ नदारद रहीं। TRS का अति-आत्मविश्वास उसे ले डूबा, क्योंकि एग्जिट पोल्स में 75 सीटें देख कर ही KCR-KTR पिता-पुत्र के पोस्टरों का दूध से अभिषेक शुरू हो गया था। ओवैसी को तेजस्वी सूर्या ने ‘नया जिन्ना’ बता दिया, जो मीडिया में बहस का मुद्दा बना।

हालाँकि, वोट शेयर के मामले में चौथे स्थान पर रही भाजपा के लिए ये चिंता का विषय ज़रूर है, लेकिन अब उसके पास एक रणनीति है कि किन क्षेत्रों पर ध्यान देना है और कहाँ उन्हें दिक्कत है। एक और बात जो भाजपा के पक्ष में गई, वो ये है कि KCR के मंत्री बेटे KTR को संगठन और सरकार में बड़ी भूमिका देने के खिलाफ पार्टी ने आवाज़ उठाई और बताया कि भाजपा कैसे इन वंशवादी पार्टियों से अलग है।

योगी फैक्टर और मजबूत हो रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव में हमने उनका दमदार स्ट्राइक रेट देखा। वहाँ उन्होंने 18 सीटों पर चुनाव प्रचार किया और उनमें से 13 भाजपा जीतने में कामयाब रही। हैदराबाद में भी जहाँ उन्होंने रैली की, उस सीट को भाजपा ने हथिया लिया। उनके बयान पूरे चुनाव में मीडिया की चर्चा का हिस्सा बने रहे। हिंदुत्व के नए फायरब्रांड नेता के रूप में उनकी स्थिति बहुत ही मजबूत हुई है।

कुल मिला कर भाजपा ने जिस दक्षिण में एंट्री का स्वप्न अटल-आडवाणी के काल से देखा था, वो अब साकार हो रहा है। कर्नाटक में पार्टी सत्ता में रही है और अभी भी है। लेकिन केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में उसके लिए हमेशा चीजें मुश्किल रही हैं। हैदराबाद के सहारे अगर पार्टी तेलंगाना में मजबूत स्थिति में आती है तो फिर पड़ोसी आंध्र और उसके बाद केरल में जा सकती है। तमिलनाडु में AIMIM के साथ गठबंधन जारी रहेगा, अतः निकट भविष्य में वहाँ पार्टी के लिए संभावनाएँ कम हैं।

अंत में बात कॉन्ग्रेस की, जो बात करने लायक ही नहीं है। राहुल-सोनिया प्रचार करने नहीं गए। परिणाम आने के बाद आलाकमान को बचाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया। भाजपा ने कॉन्ग्रेस और TDP के पुराने वोटरों को अपने पाले में किया। हैदराबाद में रहने वाले आंध्र प्रदेश के लोगों की पहली पसंद भाजपा बनी और इस मामले में उसने कॉन्ग्रेस को पछाड़ा। भाजपा को असली आत्मविश्वास नवंबर के दुबक्क उपचुनाव में जीत से मिली थी।

यहाँ एक बात का जिक्र करना आवश्यक है कि आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद तेलंगाना से TDP गायब हो गई। ये होना ही था, क्योंकि विभाजन के लिए हुए आंदोलन में जिस कदर हिंसा हुई थी और जो पागलपन देखने को मिला था, उसके बाद दोनों राज्यों के राजनीतिक दलों का एक-दूसरे के राज्य से सफाया सा हो गया। भाजपा के पास पाने के लिए यहाँ सब कुछ है, खोने के लिए कुछ नहीं। भाजपा का कुछ भी इन दोनों राज्यों में दाँव पर नहीं लगा है।

कनाडा और यूके द्वारा भारत के आंतरिक मामलों में दखलंदाज़ी: किसानों के नाम पर बयानबाजी का विदेश मंत्रालय ने किया विरोध

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि सुधार क़ानूनों के लिए जारी विरोध प्रदर्शन के बीच कनाडा और यूके (यूनाइटेड किंगडम) भारत के आंतरिक मामले में अनुचित हस्तक्षेप कर रहे हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने यह कह कर विवाद शुरू किया था कि वह भारतीय किसानों को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने एक बार फिर इस ‘संगठित’ किसान विरोधी क़ानून आंदोलन का समर्थन किया है।    

एक प्रेस वार्ता के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री से पूछा गया था, “भारत का कहना है कि किसान आंदोलन के मुद्दे पर उनकी टिप्पणी से भारत और कनाडा के रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं।” इस पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है, जवाब में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा, “कनाडा दुनिया के किसी भी कोने में शांतिपूर्ण तरीके से होने वाले विरोध प्रदर्शन के अधिकारों का समर्थन करता है। हम यह भी देखना चाहेंगे कि यह मुद्दा समाधान और बातचीत की और बढ़े।”

इसके बाद कनाडा के प्रधानमंत्री से विशिष्ट रूप से पूछा गया कि उनकी टिप्पणी से भारत और कनाडा के संबंधों पर प्रभाव पड़ने पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है। इस बात को टालते हुए जस्टिन ट्रूडो ने कहा, “कनाडा दुनिया के किसी भी कोने में शांतिपूर्ण तरीके से होने वाले विरोध प्रदर्शन के मानवाधिकारों का समर्थन करता है।” उल्लेखनीय है कि भारत सरकार इसके पहले शुक्रवार को कनाडा उच्चायुक्त को कड़ी चेतावनी जारी करने के लिए समन भेज चुकी है।

विदेश मंत्रालय ने अपने समन में कहा था, “इस तरह के बयानों से चरमपंथी समूहों को प्रोत्‍साहन मिला है और वे कनाडा स्‍थित हमारे उच्‍चायोग व काउंसलेट तक पहुँच सकते हैं, जो हमारी सुरक्षा के लिए चुनौती है। भारत यह भी उम्मीद करता है कि कनाडा उन घोषणाओं से परहेज करेगा जो चरमपंथी सक्रियता को वैध बनाती हैं।”

वर्चुअल गुरूपर्व 2020 समारोह के दौरान पीएम ट्रूडो ने अपने संबोधन की शुरुआत में भारत में किसानों के विरोध प्रदर्शनों के बारे में बात की थी। ट्रूडो ने विरोध-प्रदर्शनों के बारे में बात करते हुए कहा, “भारत से किसानों के आंदोलन के बारे में खबर आ रही है। स्थिति चिंताजनक है और सच्चाई यह है कि आप भी अपने दोस्तों और परिवारों को लेकर फिक्रमंद हैं। मैं याद दिलाना चाहता हूँ कि कनाडा ने हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से विरोध-प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन किया। हम बातचीत में विश्वास करते हैं। हमने भारतीय अधिकारियों के सामने अपनी चिंताएँ रखी हैं।”

कनाडा ही नहीं ब्रिटिश के 36 सांसदों ने भी भारत के किसान आंदोलन पर बुलाई बैठक

कनाडा के अलावा 36 ब्रिटिश सांसदों ने भी भारत की केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि सुधार क़ानूनों का विरोध किया है। विदेश सचिव को लिखे गए पत्र में लेबर पार्टी के सांसद तनमनजीत सिंह धेसी ने कहा था, “भारत (केंद्र) सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए क़ानूनों की वजह से देश भर में किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। विरोध प्रदर्शन इसलिए बढ़ा क्योंकि सरकार इन क़ानूनों के बावजूद किसानों का उत्पीड़न नहीं रोक पा रही थी और न ही उत्पादन का उचित मूल्य दिला पा रही थी। यहाँ का सिख समुदाय जो पंजाब से जुड़ा हुआ है उन लोगों के लिए यह चिंता का विषय है, भारत के अन्य राज्यों पर भी इसका काफी ज़्यादा प्रभाव पड़ रहा है।”  

तनमनजीत सिंह धेसी ने यह दावा भी किया कि अनेक ब्रिटिश सिखों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वह अपने सांसदों को तलब करें क्योंकि इस क़ानून का प्रभाव कथित तौर पर पंजाब में मौजूद उनकी पैतृक ज़मीन पर भी पड़ेगा। उनका यह भी कहना था, “भारत का ‘ब्रेड बास्केट’ होने के नाते पंजाब के ज़्यादातर किसानों के जीवनयापन का माध्यम खेती ही है। पंजाब की लगभग 3 करोड़ आबादी का तीन चौथाई हिस्सा कृषि क्षेत्र पर ही निर्भर करता है। इसलिए नए क़ानून पंजाब के लिए किसी बड़ी समस्या से कम नहीं हैं, कुछ तो इसे डेथ वारंट तक कह रहे हैं।”               

पत्र में ऐसा दावा किया गया था, “पंजाब के कृषि समुदाय को प्रदेश की अर्थव्यवस्था के रूप में पहचाना जाता है और किसानों से संबंधित मुद्दों की देश और प्रदेश की राजनीति में अहम भूमिका है। इसलिए यह बहुत हैरान करने वाले बात नहीं है कि केंद्र और पंजाब के तमाम राजनीतिक दलों के चुने हुए नेताओं के बीच भी इस बात को लेकर काफी रोष है।” इसके बाद ब्रिटिश सांसद ने यूके की सिख काउंसिल के आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा एक सर्वेक्षण में 93 फ़ीसदी लोगों ने इस विरोध प्रदर्शन के दौरान मानवाधिकारों के पहलू पर चिंता जताई है।

‘हमें बहुत मारा’: वकीलों की सतर्कता से लव जिहाद का शिकार होने से बची हिंदू युवती, देखें Video

अलीगढ़ कोर्ट में असामान्य नजारा देखने को मिला। वकीलों की सतर्कता से एक हिंदू युवती ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) का शिकार होने से बच गई। उसे चंडीगढ़ से एक मुस्लिम युवक भगाकर लाया था।

जब यह युवक कोर्ट में शादी का रजिस्ट्रेशन कराने पहुॅंचा तो लोगों को संदेह हुआ। इसी बीच कुछ अज्ञात लोगों ने उसकी पिटाई भी कर दी। इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ खुद के सोनू मलिक बताने वाले युवक को अलीगढ़ सिविल लाइन्स पुलिस ने गुरुवार (3 दिसंबर 2020) को जिला अदालत परिसर से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी से पहले अज्ञात लोगों ने उसकी पिटाई भी की। इस घटना के कई वीडियो सामने आए हैं। एक वीडियो में युवती कहती है कि वह नाबालिग नहीं है और वह सोनू से बहुत प्यार करती है। इसके बाद उसने कहा, ‘सोनू मेरी जान है’, इतना नाटक देखने के बाद पुलिसकर्मियों ने युवती को किसी तरह ई-रिक्शा में बैठाया।

पुलिस ने युवती के परिजनों को इस घटनाक्रम की पूरी जानकारी दे दी है। गिरफ्तारी का यह मामला तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो चर्चित हुआ, जिसमें कई पुलिसकर्मी आरोपित को जिला अदालत परिसर में भीड़ के बीच से घसीट कर ले जा रहे हैं। इस वीडियो में यह देखा जा सकता है कि आरोपित भी कम नाटकीय किरदार नहीं है, वह कहता है, “मेरे प्यार को रोक लिया। हमें बहुत मारा कोर्ट में।”

बाद में युवती ने इस बात का खुलासा किया कि सोनू मलिक ने कहा था कि वह हिन्दू है, जबकि असल में वह मुस्लिम था। दोनों के बीच फेसबुक के माध्यम से बातचीत शुरू हुई थी और 3 दिन पहले वह चंडीगढ़ से सोनू मलिक के साथ आई थी। पिछले वीडियो की तुलना में इस वीडियो में युवती बेहद शांत और स्थिर नज़र आती है और इत्मीनान से पूरी बात बताती है।

महिला ने मीडिया वालों से बात करते हुए यह भी कहा कि सोनू उस पर मानसिक रूप से दबाव बनाता था और यह कह कर ब्लैकमेल करता था कि अगर वह नहीं मानी तो ज़हर खाकर अपनी जान दे देगा। इस घटना का वीडियो साझा करते हुए योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी लिखते हैं, “लव जिहादी मौक़े पर ही धरा गया,वकीलों की सूचना पर पहुँचे लड़की के घरवालों ने थोड़ी सेवा भी की।” इसके बाद उन्होंने अपने ट्वीट में यह भी लिखा कि युवक का असली नाम मोहम्मद सोनू है। योगीजी का ‘नया क़ानून’ बखूबी काम कर रहा है, वकीलों को ‘विशेष’ साधुवाद।

इस घटनाक्रम पर सिविल लाइन्स, अलीगढ़ मंडल अधिकारी (सीओ) अनिल समानिया ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा, “युवती को जबरन बंधक बना कर रखने के आरोप में मामले के आरोपित सोनू मलिक पर नयागाँव, मौहाली चंडीगढ़ में संबंधित धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया जा चुका है। साथ ही आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित थाना और युवती के परिजनों को भी सूचित किया जा चुका है।” 

उन्होंने सोनू मलिक के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि वह चंडीगढ़ में बतौर दर्जी (टेलर) काम करता है। उसने चंडीगढ़ की युवती से शुरुआत में दोस्ती की इसके बाद वह शादी करने की योजना बना रहा था। वह युवती से शादी करने के लिए उसे चंडीगढ़ से भगा कर यहाँ लाया था। फ़िलहाल चंडीगढ़ पुलिस आरोपित सोनू मलिक को गिरफ्तार कर चुकी है और मामले के अन्य पहलुओं पर जाँच शुरू कर दी है।     

NIA ने खालिस्तानी आतंकी धरमिंदर सिंह के खिलाफ दायर की पूरक चार्जशीट, आतंकी संगठनों को जाता था ड्रग्स तस्करी का पैसा

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने खालिस्तानी आतंकी धरमिंदर सिंह के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट (पूरक आरोप-पत्र) दायर की है। उसने प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘खालिस्तानी लिबरेशन फ्रंट (KLF)’ की गतिविधियों को आगे बढ़ाया था और सीमा पार से आतंकी नेटवर्क को बढ़ावा देने में भी उसकी सहभागिता थी। शुक्रवार (दिसंबर 4, 2020) को NIA ने बयान जारी कर के इस सम्बन्ध में अहम जानकारी दी।

KLF नार्को-टेरर मामले में पंजाब स्थित मोगा के रहने वाले 32 वर्षीय खालिस्तानी आतंकी धरमिंदर सिंह के खिलाफ केस चल रहा है। वह पाकिस्तान में रहने वाले जज्बीर सिंह सामरा से हेरोइन लेकर स्थानीय तस्करों को मुहैया कराता था। इससे जो भी धन प्राप्त होता था, उसे पाकिस्तान भेजा जाता था। इसका इस्तेमाल भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों में किया जाता था

मोहाली स्थित स्पेशल कोर्ट में NIA ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की। IPC की धाराओं 120B और Narcotic Drugs And Psychotropic Substances Act, 1985 की धाराओं 25, 27, 27A और 29 के तहत मामला दर्ज किया है। KLF भारत को तोड़ कर खालिस्तान बनाने की इच्छा रखता है और इसके लिए आतंकी हरकतों को बढ़ावा देता है।

आज जब ‘किसान आंदोलन’ को हाइजैक कर खालिस्तानी अपने एजेंडे को बढ़ावा देने की कोशिश में लगे हुए हैं, इस बीच NIA की इस कार्रवाई से इस खतरे के फिर से सर उठाने को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है। इसी तरह से इस प्रदर्शन में प्रतिबंधित संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस (SFS)’ के उपद्रवी भी शामिल हैं। मई में NIA ने KLF से जुड़े 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। अधिकतर आरोपित दुबई और पाकिस्तान में रह रहे थे।

इसमें इस संगठन के सबसे बड़े सरगना हरमीत और ड्रग तस्कर जसमीत सिंह भी शामिल था। ये सभी ड्रग्स की तस्करी के माध्यम से आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ा रहे थे। इसमें आतंकियों के अलावा कई हवाला ऑपरेटर्स भी शामिल थे। 2018 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने UAPA एक्ट के तहत KLF को प्रतिबंधित किया था। मई 2019 में आधा किलो हेरोइन और 1.20 लाख रुपए जब्त होने के बाद NIA ने कार्रवाई शुरू की थी।

ज्ञात हो कि खालिस्तानी समूह सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने किसानों के विरोध-प्रदर्शनों के लिए समर्थन की घोषणा की है। YouTube और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर ऐसे विज्ञापन दिखाई देने लगे हैं, जिसमें लोगों से खालिस्तानी आंदोलन में शामिल होने का आग्रह किया जा रहा है। SFJ के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू ने उन किसानों के लिए 10 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता की घोषणा की है, जिन्हें दिल्ली की यात्रा के दौरान किसी भी तरह का नुकसान हुआ हो।