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अशोक गहलोत की सरकार फिर से संकट में? कहा – ‘BJP कर रही राजस्थान सरकार गिराने का प्रयास’

कुछ महीने पहले ही राजस्थान कॉन्ग्रेस में शीर्ष नेतृत्व के बीच लंबा संघर्ष चला था। सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच राजनीतिक खींचतान का लंबा दौर चला था। इसी कड़ी में अब फिर से राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा पर उनकी सरकार गिराने के प्रयास का आरोप लगाया है। भाजपा ने इस मुद्दे पर जवाब देते हुए कहा है कि अशोक गहलोत सरकार चलाने में पूरी तरह असफल रहे हैं। वह अपनी हताशा के चलते इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। 

सिरोही जिला के शिवगंज नगर स्थित पार्टी के नए कार्यालय का उद्घाटन करते हुए अशोक गहलोत ने भाजपा पर तमाम आरोप लगाए। राजस्थान के मुख्यमंत्री के मुताबिक़, “यह लोग (भाजपा) निर्वाचित सरकारों को गिराने का प्रयास करते हैं। राजस्थान में फिर से वही खेल शुरू कर चुके हैं और यही इनकी मानसिकता है। लोग तो यह भी कह रहे हैं कि ये लोग महाराष्ट्र सरकार को निशाना बना रहे हैं।” 

इस आभासी आयोजन (वर्चुअल इवेंट) के दौरान ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी के जनरल सेक्रेट्री अजय माकन और प्रदेश कॉन्ग्रेस के मुखिया गोविंद सिंह दोतासरा भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा पर आरोप लगाया, “भाजपा ने पहले भी रुपयों की मदद से सरकार गिराने का प्रयास किया है। सभी ने देखा था कैसे धर्मेंद्र प्रधान और सैय्यद ज़फर की मौजूदगी में तमाम विधायक गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे। बैठक घंटों चली थी। बैठक के बाद विधायकों का कहना था कि वह इस बात से शर्मिंदा थे कि गृह मंत्री मिठाई और नमकीन दे रहे हैं।” 

अशोक गहलोत का कहना था कि रणदीप सुरजेवाला, अजय माकन, केसी वेणुगोपाल और अविनाश पांडे ने पूरे राज्य में अभियान चलाया। साथ ही लगातार प्रयास किया कि सरकार पूरी तरह सुरक्षित रहे।

अशोक गहलोत का जवाब देते हुए भाजपा विधायक और पार्टी प्रवक्ता राम लाल शर्मा ने कहा, “भाजपा ने सरकार गिराने का प्रयास कभी नहीं किया। जो कुछ भी हुआ था, उसकी वजह सिर्फ और सिर्फ कॉन्ग्रेस की आंतरिक कलह थी। अगर मुख्यमंत्री को अपने विधायकों पर संदेह है, तो वह उन पर जाँच का आदेश क्यों नहीं देते हैं। राजस्थान सरकार को किसी भी तरह का नुकसान होता है, तो उसका कारण भीतरी कलह होगी।” 

राजस्थान में आए राजनीतिक संकट के दौरान सचिन पायलट को डिप्टी सीएम के पद से हटा दिया गया था और उनके गुट के दो मंत्रियों को भी मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। इस बीच अशोक गहलोत सचिन पायलट पर खुल कर हमला किया था। सीएम अशोक गहलोत ने कहा था कि उनके यहाँ उपमुख्यमंत्री खुद ही डील कर रहे हैं। सरकार के खिलाफ षड्यंत्र में उपमुख्यमंत्री खुले रूप से शामिल हैं। 

सचिन पायलट पर हमला बोलते हुए अशोक गहलोत ने कहा था, “अच्छी अंग्रेजी बोलना, अच्छी बाइट देना और खूबसूरत (हैण्डसम) होना सब कुछ नहीं है। देश के लिए आपके दिल में क्या है, आपकी विचारधारा, नीतियाँ और प्रतिबद्धता, यह अहम है।” इसके पहले अशोक गहलोत ने सचिन पायलट का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए कहा था कि उनके सिवा कोई और प्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं बनाया जा सकता था। उन्होंने कहा था कि विधानसभा चुनाव में ग्रामीण लोगों की यह भावना थी कि वे (अशोक गहलोत) ही मुख्यमंत्री बनें।    

   

8 लेन का मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे: तब शिवसेना ने फडणवीस के ड्रीम प्रोजेक्ट का किया था विरोध, अब उद्धव करेंगे उद्घाटन!

जहाँ पूरे देश की मीडिया कई मुद्दों पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर बहस में जुटी है, वहीं महाराष्ट्र में मुंबई और नागपुर के बीच का सफर अब सड़क से 8 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इस एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यकाल में शुरू किया गया था और पूरे प्रोजेक्ट का खाका भी खींचा गया था। हालाँकि, इसके उद्घाटन के समय उद्धव ठाकरे सीएम हैं और फडणवीस राज्य में नेता प्रतिपक्ष हैं।

शनिवार (नवंबर 5, 2020) को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने जानकारी दी कि मुंबई-नागपुर समृद्धि एक्सप्रेस वे का नागपुर से लेकर शिरडी वाला हिस्सा मई 1, 2021 को जनता के लिए खोल दिया जाएगा और उस दिन से आवागमन शुरू हो जाएगा। इस 8 लेन के एक्सप्रेसवे को 55,000 करोड़ रुपए की कीमत से बनाया जा रहा है। ये कुल 701 किलोमीटर का है। फ़िलहाल मुंबई से नागपुर की दूरी तय करने में 18 घंटे लगते हैं।

मई 2018 में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने इस एक्सप्रेसवे के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके कंस्ट्रक्शन अग्रीमेंट को तब मंजूर किया गया था। इस प्रोजेक्ट के द्वारा 392 गाँवों और 26 तालुका को तो जोड़ा ही जा रहा है, साथ ही 14 पर्यटन स्थलों को भी आपस में जोड़ा जा रहा है। इन सबके बीच 17 इंडस्ट्रियल इलाके भी विकसित किए जा रहे हैं। इसके लिए महाराष्ट्र ट्रांसपोर्ट विभाग को 8603 हेक्टेयर जमीन की जरूरत पड़ी।

इस एक्स्प्रेसवे में आधुनिक कम्युनिकेशन फैसिलिटी होंगी और ये अमरावती और औरंगाबाद से होकर गुजरेगी। इसके बीच में आईटी पार्क्स, स्मार्ट सिटीज और कई शिक्षा संस्थान भी स्थापित किए जा रहे हैं। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नागपुर से ही आते हैं और उनके परिवार का यहाँ के म्युनिसिपल चुनावों में लम्बे समय तक दबदबा रहा है। RSS का मुख्यालय और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का क्षेत्र भी यही है।

मुंबई-नागपुर समृद्धि कॉरिडोर को देवेंद्र फडणवीस का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जाता है। तब जिस शिवसेना ने इसका विरोध किया था, अब उसके ही मुखिया इसका उद्घाटन करने की बाट जोह रहे हैं। तब शिवसेना ने कहा था कि इससे जमीन का अधिग्रहण होगा और आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या बढ़ेगी। अब उद्धव ठाकरे कह रहे हैं कि वो इस प्रोजेक्ट पर गर्व महसूस कर रहे हैं। तब शिवसेना ने इस प्रोजेक्ट के लिए NDA सरकार के इरादों पर सवाल खड़ा किया था, जबकि वो खुद सरकार में शामिल थी।

दिलजीत दोसाँझ का UK मैनेजर और भंग कर दी गईं 9 कम्पनियाँ… किसान आंदोलन के पीछे लंदन का खालिस्तानी?

एक व्यक्ति हैं, काका सिंह मोहनवालिया। वो अपने ट्विटर बायो में अपने काम के बारे में दो चीजें लिखते हैं – पहली ये कि वो यूनाइटेड किंगडम (UK) में पंजाबी गायक दिलजीत दोसाँझ के मैनेजर हैं। दूसरी बात ये लिखते हैं कि वो ‘धर्म सेवा रिकार्ड्स’ नामक ट्रस्ट के स्वयंसेवक हैं। दिलजीत दोसाँझ फ़िलहाल चर्चा में भी हैं। ‘किसान आंदोलन’ को लेकर उनका रुख और कंगना रनौत से बहस को लेकर उन्हें खूब मीडिया फुटेज मिल रही है। अब उनके यूके मैनेजर काका का नाम सामने आया है। साथ ही 9 ऐसी कम्पनियाँ सामने आई हैं, जिनके डिटेल्स चौंकाने वाले हैं।

काका सिंह मोहनवालिया का ट्विटर हैंडल

हमने जब ‘धर्म सेवा रिकार्ड्स’ ट्रस्ट की वेबसाइट खोली तो इस पर बताया गया है कि ये एक चैरिटी म्यूजिक लेबल है, जिसमें ‘धार्मिक म्यूजिक’ के लिए बिना कोई रकम लिए दुनिया भर में 60 स्वयंसेवक सेवाएँ दे रहे हैं। इस पर बताया गया है कि ये यूके रेजिस्टर्ड चैरिटी है, जो लाभ नहीं कमाता है। धार्मिक म्यूजिक के प्रमोशन, पहचान और प्रचार का दावा करता है। इस पर लिखा है कि कई पंजाबी गायकों के अलावा दिलजीत दोसाँझ भी इससे जुड़े हुए हैं

‘धर्म सेवा रिकार्ड्स’ की वेबसाइट पर दिलजीत दोसाँझ का नाम

ट्विटर पर विजय पटेल नामक यूजर ने कुछ ऐसी कंपनियों की तरफ ध्यान दिलाया है, जिनका नाम ‘डरहम सेवा रिकार्ड्स’ ट्रस्ट से मिलता-जुलता है और साथ ही उन सभी कम्पनी के प्रमुख लोगों के नाम भी अधिकतर में समान ही हैं। कुछेक में कम्पनी का आधिकारिक पता समान ही है। उनका आरोप है कि संदीप सिंह खाख पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री का मास्टरमाइंड है और लगभग सभी पंजाबी गायक उससे संपर्क में रहते हैं।

सबसे पहले उन 7 कंपनियों की बात करते हैं, जो इसी ट्रस्ट से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। सबसे पहले बात ‘धर्म सेवा लिमिटेड’ की, जिसका पता ‘1 St. Davids Close, Leamington Spa, Warwickshire, CV31 1NN’ है और जनवरी 23, 2013 में बनी इस कम्पनी को जुलाई 5, 2016 में भंग कर दिया गया। इसके अधिकारियों में संदीप सिंह खाख और गुरमीत सिंह का नाम है। संदीप सिंह पेशे से इंजीनियर बताए गए हैं।

‘धर्म सेवा लिमिटेड’ – भंग कर दी कई कम्पनी

अब बात करते हैं ‘डरहम सेवा रिकॉर्ड्स लिमिटेड’ नामक कम्पनी की, जिसे सितम्बर 2, 2013 में बनाया गया और मई 3, 2016 में भंग कर दिया गया। पता वही है, जो पहली वाली कम्पनी का था। वही संदीप सिंह खाखा का नाम इसमें भी है, जो ‘धर्म सेवा लिमिटेड’ का अधिकारी था। इस बार वो ‘इंजीनियर’ से ‘डायरेक्टर’ बन गया है। साथ ही उसकी राष्ट्रीयता पहले की तरह ही ब्रिटिश बताई गई है और निवास यूके।

इसी नाम से बनी दूसरी कम्पनी में भी उसी व्यक्ति का नाम

अब ‘Famous STD LTD’ नामक तीसरी कम्पनी की तरफ आते हैं, जिसे अगस्त 9, 2016 को बनाया गया और इसे जनवरी 16, 2018 को ख़त्म कर दिया गया। इस कम्पनी के नाम में न ‘धर्म’ है और न ही ‘सेवा’, फिर भी ये उनसे मिलती-जुलती कैसे है, आइए बताते हैं। क्योंकि इसके अधिकारियों में उसी संदीप सिंह खाख और किसी ‘दिलजीत सिंह’ का नाम है। दिलजीत का जन्मदिन जनवरी 1984 बताया गया है।

ज्ञात हो कि गायक दिलजीत दोसाँझ का जन्म भी जनवरी 1984 में ही हुआ था। बताया गया है कि इस ‘दिलजीत सिंह’ ने सितम्बर 2016 में कम्पनी के डायरेक्टर के पद से इस्तीफा दे दिया। इस कम्पनी के बारे में बताया गया है कि ये मोशन पिक्चर और साउंड रिकॉर्डिंग का काम करती है। यानी, म्यूजिक से जुड़ी कम्पनी ही थी ये भी। विजय पटेल ने जो दावा किया, वो कंपनियों की इन्फो देने वाली वेबसाइट पर सही निकला।

खाख संदीप सिंह और दिलजीत सिंह का नाम

अब विजय पटेल द्वारा बताई गई चौथी कम्पनी की तरफ आते हैं। ‘BUILDAGE LIMITED’, इसे भी मात्र एक साल के लिए चलाया गया और फिर भंग कर दिया गया। इस कम्पनी के अधिकारियों में खाख संदीप सिंह के साथ-साथ बलजीत सिंह और अमृत सिंह का नाम है। कम्पनी का पता वही है, जो तीसरी कम्पनी का था। कम्पनी का नेचर बताया नहीं गया है। इस बार खाख संदीप सिंह इंजीनियर या डायरेक्टर नहीं, ‘Self Employed’ है।

चौथी कम्पनी, जिसका पता समान है, अधिकारी वही है

अब पाँचवीं कम्पनी पर आते हैं। इसका नाम है ‘ATMA TEAS LTD’ और इसका भी पता वही है। इसे मई 28, 2015 में रजिस्टर किया गया और सितम्बर 5, 2017 के बाद से ये कम्पनी अस्तित्व में नहीं है। इस बार संदीप सिंह खाख के साथ-साथ रमणीक पाल सिंह रंधावा का भी अधिकारी के रूप में नाम है। इसका पता वही है, जो पिछली दो कंपनियों का था- ‘112 Office 112 Oxford Street, Leamington Spa, Warwickshire, England, CV32 4RB’।

उसी पते पर, उसकी व्यक्ति की – एक और कम्पनी

अब छठी कम्पनी की बात करते हैं, जिसका नाम है ‘FLAMESKY LIMITED’ और इसे भी सितम्बर 23, 2013 को बनाया गया और मई 12, 2015 को भंग कर दिया गया। इसका पता ‘1 St. Davids Close, Leamington Spa, Warwickshire, United Kingdom, CV31 1NN’ वही है, जो पहली वाली कम्पनी का था और जो संदीप सिंह खाख का भी पता बताया गया था। कम्पनी के अधिकारी के रूप में भी उसका नाम है।

खाख संदीप सिंह की छठी कम्पनी

अब बात विजय पटेल द्वारा बताई गई सातवीं कम्पनी के बारे में। इसे लेकर भी हमने पुष्टि के लिए कम्पनी इन्फो देने वाली वेबसाइट पर सर्च किया। ‘SPEED RECORDS LIMITED’ नामक ये कम्पनी सितम्बर 19, 2011 में बनी और सितम्बर 9, 2014 में भंग कर दी गई। इसमें संदीप सिंह खाख के अलावा दिनेश और बारबरा नामक व्यक्तियों के नाम हैं। हाँ, इसका पता ज़रूर बाकी की कंपनियों से अलग है।

सातवीं कम्पनी, जो बनी और भंग कर दी गई

इसके अलावा दो और कम्पनियाँ ‘SPEED UK RECS LTD’ और ‘SPEED UK RECORDS LTD’ के बारे में भी विजय पटेल ने बताया है, जिनके स्क्रीनशॉट्स भी दिए हैं। हमारे सर्च करने के बाद इन कंपनियों के बारे में दिए गए इन्फो भी सही निकले। इनके साथ भी उसी संदीप सिंह खाख का नाम जुड़ा हुआ है और इन दोनों को 2013 में बना कर 2015 में भंग कर दिया गया। अब बात करते हैं पटेल के आरोपों की।

उन्होंने आरोप लगाया है कि खाख संदीप सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट का मास्क लगा कर खालिस्तानी एजेंडे को बढ़ावा दे रहा है। साथ ही वो अपना और अपने ट्रस्ट के सोशल मीडिया हैंडल्स का इस्तेमाल भी ‘किसान आंदोलन’ को लेकर लोगों को भड़काने के लिए कर रहा है। साथ ही सभी पंजाबी गायकों के उसके साथ काम करने की बात भी कही। पटेल ने आरोप लगाया कि उनकी ट्वीट्स के बाद उसने अपना ट्विटर बायो भी बदला और बन्दूक के साथ पोस्ट की गई तस्वीर हटा दी।

विजय सिंह दावा करते हैं कि ये ‘काका सिंह मोहनवालिया’ ही ‘संदीप सिंह खाख’ है। उन्होंने कई पंजाबी गायकों के साथ एक व्यक्ति की तस्वीर शेयर कर के ये दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये 9 तो बस उदाहरण हैं, लेकिन संदीप सिंह खाख के न जाने कितनी ही फर्जी कम्पनियाँ हैं। उसे यूके के सिख नेटवर्क और सिख फेडरेशन ने अवॉर्ड भी दिया था। एक डिलीट की हुई ट्वीट में वो बन्दूक के साथ दिख रहा है।

अगर इस पूरे मामला का सार समझें तो ‘धर्म सेवा रिकार्ड्स’ एक ट्रस्ट है, जिसके नाम से मिलती-जुलती और जिसके स्वयंसेवक से जुड़ी 9 ऐसी कम्पनियाँ सामने आई हैं, जिन्हें कुछ महीनों के लिए अस्तित्व में लाया गया और फिर भंग कर दिया गया। इन सबमें मोहनवालिया का नाम जुड़ा, जो विजय पटेल के अनुसार खाख ही है। मोहनवालिया खुद को दिलजीत दोसाँझ का यूके मैनेजर बताता है और कई पंजाबी गायकों के साथ उसकी तस्वीरें हैं। हमने मेल लिख कर ट्रस्ट से सम्पर्क किया है, लेकिन अभी तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया है। प्रतिक्रिया आते ही आपको अवगत कराएँगे।

हाल ही में कंगना ने एक ट्वीट में दिलजीत दोसाँझ को ‘करण जौहर का पालतू’ कह डाला। वहीं दिलजीत ने भी जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कंगना ने दिलजीत के एक ट्वीट पर मुँहतोड़ जवाब देते हुए लिखा था, “ओ करण जौहर के पालतू, जो दादी शाहीन बाग में अपनी नागरिकता के लिए आंदोलन कर रही थी वो ही बिलकिस बानो दादीजी किसान आंदोलन के एमएसपी के लिए भी आंदोलन करती हुई दिखीं। महिंदर कौर जी को तो मैं जानती भी नहीं। क्या ड्रामा चलाया है तुम लोगों ने। इसे तुरंत खत्म करो।”

6 दिसंबर 1992 इस बात का प्रमाण है कि ‘अयोध्या’ वही है, जिसे युद्ध में पराजित नहीं किया जा सकता

पूरा देश जान चुका है कि 6 दिसंबर 1992 को क्या हुआ था। कुछ घंटों के भीतर लाखों कारसेवकों की भीड़ ने विवादित ढाँचा ढहा दिया। देश के बहुसंख्यक हिन्दू समाज की सदियों पुरानी भावनाओं का ज्वार फूटा और बाबरी मस्जिद का ढाँचा गिरा दिया गया। देश का हिन्दू अमूमन इतना प्रतिक्रियावादी नहीं होता है लेकिन यहाँ विषय ही अलग था। पूरा विमर्श यह था कि जो अपना था, उसे हासिल करना है। 

ऐसा भी नहीं था कि यह पहला ऐसा मौक़ा था, जब हिन्दुओं की भावनाएँ सामाजिक और राजनीतिक मंच पर सामने आई थीं। अंतर बस इतना था कि इसके पहले सामने आई भावनाओं पर दबाव डाला जा सका था और लेकिन 1992 में धैर्य बनाए रखने की कोई दलीलें काम न आईं और न ही समरसता को बढ़ावा देने की। 

ऐसा भी नहीं कहा जा सकता कि 6 दिसंबर 1992 को जो कुछ हुआ, वह किसी धार्मिक प्रक्रिया या मान्यता का हिस्सा है। लेकिन ऐसा हुआ क्यों, इस पहलू पर विमर्श लगभग शून्य हैं। 1855 के दौरान अयोध्या (तत्कालीन फैजाबाद) में हिन्दुओं का भीषण प्रतिकार देखने को मिला था, नतीजा अयोध्या की ज़मीन पर संघर्ष हुआ। लगभग 12000 लोगों ने ढाँचे को घेर लिया था, तब भी ढाँचे का एक हिस्सा गिराया गया था। 

हिन्दुओं की एक विशाल भीड़ ने साल 1934 में बाबरी मस्जिद के तीनों गुंबद तोड़ दिए थे लेकिन अयोध्या के कलेक्टर ने इसका पुनर्निर्माण कराया था। इन दो कालखंडों में न तो कोई चुनाव था और न ही राजनीतिक दल… यानी ढाँचे को लेकर जनमानस में आक्रोश शुरुआत से ही था। जो थी वह सिर्फ और सिर्फ आस्था थी, हिन्दुओं की अटूट आस्था। जिसे हमेशा से नज़रअंदाज़ किया गया, नतीजतन 6 दिसंबर 1992 हुआ।     

इसलिए बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में 28 साल बाद दिए गए न्यायालय के आदेश का उल्लेख भी अहम हो जाता है। इसमें सीबीआई की विशेष अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह विध्वंस पूर्व नियोजित नहीं था बल्कि आकस्मिक घटना थी। न्यायाधीश सुरेन्द्र कुमार यादव ने लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा समेत कुल 32 अभियुक्तों को बरी कर दिया था। लगभग तीन दशक तक चली इस सुनवाई के दौरान 17 अभियुक्तों की मृत्यु हो गई थी।        

पूरे विषय के संबंध में देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का एक भाषण बेहद प्रासंगिक और चर्चित है। इस अभियान के इर्द-गिर्द उस दौर में दिए गए तमाम भाषणों के बीच लोग इस भाषण को जनभावना जागृत करने में अहम मानते हैं। उस भाषण का अंश कुछ इस प्रकार है, “वहाँ नुकीले पत्थर निकले हैं, उन पर तो कोई नहीं बैठ सकता है। तो ज़मीन को समतल करना पड़ेगा, बैठने लायक बनाना पड़ेगा। राम मंदिर के निर्माण का आन्दोलन सिर्फ एक मंदिर के निर्माण का आन्दोलन नहीं है। क्या राम को छोड़ कर इस देश की कल्पना की जा सकती है।” 

लेकिन अवरोध का सबसे बड़ा आधार ऐसी जमात थी, जो राजनीतिक दल से लड़ते-लड़ते श्रीराम के अस्तित्व से लड़ने लगी थी। इन्हें भी सर्वोच्च न्यायालय ने करारा जवाब दिया था। न्यायालय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था, “श्रीराम को अयोध्या से अलग करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है। अयोध्या की पहचान ही राम से है, हिन्दुओं की आस्था के गलत होने का कोई प्रमाण नहीं है।” यह तर्क स्वयं में पर्याप्त था कि इस देश का हिन्दू समाज जिस पर अक्सर असहिष्णु होने का आरोप लगाया जाता है, वह असल मायनों में कितना सहिष्णु है। 

इस संबंध में प्रख्यात समाजवादी और तथाकथित धर्म निरपेक्ष राजनीतिक दलों के पितामह राममनोहर लोहिया के विचार भी लगभग ऐसे ही थे। कभी लोहिया ने कहा था, “मैं जानता हूँ कि इस देश का मानस गढ़ने में राम, कृष्ण और शिव की भूमिका रही है। देश के धार्मिक इतिहास में भारतीय पुराण के इन महान लोगों के अस्तित्व पर प्रश्न करना खुद में निरर्थक है। राम हिन्दुस्तान की उत्तर-दक्षिण की एकता के देवता थे।” 

दुर्भाग्य कि लोहियावादियों ने यह समझने की कोशिश कभी नहीं की और उनका प्रतिरोध राजनीतिक दल से बढ़ कर श्रीराम के अस्तित्व तक पहुँच गया। अयोध्या का अर्थ ही है, ‘जिसे युद्ध में हराया नहीं जा सके’ – सर्वोच्च न्यायालय के आदेश ने यह सिद्ध किया कि अयोध्या को पराजित नहीं किया जा सकता है। जो हिन्दुओं का है, वह हिन्दुओं के पास आना ही था और वह वापस आया।    

10 साल तक की सजा, ₹1 लाख तक का जुर्माना: शादी के लिए धर्मांतरण MP में वैध नहीं, नया कानून तैयार

मध्य प्रदेश में जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने की तैयारी चल रही थी, जिसकी रूपरेखा लगभग पूरी कर ली गई है। मध्य प्रदेश के नए ‘धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2020’ पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को चर्चा की। विवाह या किसी भी अन्य माध्यम से जबरन धर्मांतरण कराने पर राज्य में आरोपित को 10 वर्ष तक की जेल की सजा और 1 लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ेगा।

साथ ही अगर सिर्फ धर्मांतरण के उद्देश्य से ही विवाह किया जा रहा है, तो इसे वैध नहीं माना जाएगा। नए अधिनियम के मुताबिक, अगर किसी को भी धर्मांतरण करना है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष 1 माह पूर्व ही सूचना देनी पड़ेगी। लोक संपर्क विभाग के अधिकारियों ने सीएम चौहान की बैठक में हिस्सा लिया। शादी या किसी भी अन्य माध्यम से, जबरन या प्रलोभन देकर – किसी को भी किसी दूसरे को इन तरीकों से धर्मांतरण कराने की अनुमति नहीं होगी

भ्रमित कर के, प्रलोभन देकर, धमकी दे कर और शादी कर के – इन चारों माध्यमों से धर्मांतरण अवैध होगा और उस पर सज़ा मिलेगी। अगर किसी नाबालिग, महिला या SC/ST (दलित) समुदाय के लोगों का इन तरीकों से धर्मांतरण कराया जाता है तो आरोपित को अधिकतम सज़ा मिलेगी। साथ ही इन तरीकों से सामूहिक धर्मांतरण के बाद भी 10 साल कारावास की सज़ा दी जाएगी। आरोपित के माता-पिता या अन्य ‘ब्लड रिलेटिव्स’ मामला दर्ज करा सकते हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा:

“प्रस्तावित अधिनियम के अनुसार, स्वतंत्र इच्छा से धर्म परिवर्तन की दशा में धर्म परिवर्तन की इच्छा रखने वाले/वाली तथा धार्मिक पुजारी को, उस‍ जिले के जिला मजिस्ट्रेट को जहाँ धर्म परिवर्तन संपादित किया जाना हो, एक माह पूर्व घोषणा पत्र/सूचना पत्र देना बंधनकारी होगा। किसी भी व्यक्ति द्वारा अधिनियम की धारा 03 का उल्लंघन करने पर 01 वर्ष से 05 वर्ष का कारावास व कम से कम 25 हजार रुपए का अर्थदण्ड होगा। नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति/जनजाति के प्रकरण में 02 से 10 वर्ष के कारावास तथा कम से कम 50 हजार रूपए अर्थदण्ड प्रस्तावित किया गया है।”

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के नए अधिनियम को लेकर दी जानकारी

साथ ही इन मामलों की जाँच सब-इंस्पेक्टर (उप पुलिस-निरीक्षक) या फिर उससे ऊपर के रैंक के पुलिस अधिकारी ही करेंगे। यह अपराध संज्ञेय, गैर जमानती और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय होगा। अभियुक्त पर ये साबित करने का भार होगा कि धर्मांतरण नहीं किया गया है। अपना धर्म छुपाकर ऐसा प्रयास करने पर 03 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 50 हजार रुपए जुर्माना लगाया जाएगा। 

इससे पहले  सीएम शिवराज ने ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ पर बड़ा बयान देते हुए कहा था कि सरकार सभी धर्मों और जातियों की है। सीएम ने कहा था, “हमारे राज्य में कोई भेदभाव नहीं है, लेकिन अगर कोई हमारी बेटियों के साथ कुछ भी घृणित करने की कोशिश करेगा तो उन्हें मैं छोड़ूँगा नहीं। अगर कोई धार्मिक परिवर्तन करता है या ‘लव जिहाद’ जैसा कुछ करता है उन्हें भी सजा मिलेगी।”

‘कॉन्ग्रेस ने 2018 में जो किया… सब बर्बाद कर दिया, BJP के साथ रहता तो CM बना रहता’

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल सेक्युलर (JDS) के नेता एचडी कुमारस्वामी को कॉन्ग्रेस से हाथ मिलाने और उनके साथ गठबंधन सरकार बनाने का मलाल है। एचडी कुमारस्वामी ने शनिवार (6 दिसंबर 2020) को कहा कि कॉन्ग्रेसी गठबंधन के कारण उनकी साख खत्म हो गई।

एचडी कुमारस्वामी ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए भाजपा पर फूल बरसाए। उन्होंने कहा कि अगर वह BJP के साथ होते तो अभी तक मुख्यमंत्री बने रहते। लेकिन कॉन्ग्रेस से गठबंधन करके उन्होंने जो कुछ कमाया था, वो सब गँवा दिया।

मैसूर में पत्रकारों से बात करते हुए एचडी कुमारस्वामी ने कॉन्ग्रेसी नेता सिद्धारमैया पर साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह जाल में फँस गए थे। हालाँकि उन्होंने इस निर्णय का दोष पार्टी सुप्रीमो एचडी देवेगौड़ा (पूर्व प्रधानमंत्री और अपने पिता) पर डाल दिया। कुमारस्वामी ने कहा कि एचडी देवेगौड़ा के कहने पर ही वह कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन सरकार बनाने के लिए तैयार हुए थे।

CM बन कर भी क्यों रोया?

2018 में CM बनने के एक महीने के अंदर ही एचडी कुमारस्वामी ने जनता के बीच आकर आँसू बहाए थे। इस वाकये को याद करते हुए बताया कि उन्हें एक महीने के अंदर ही पता चल गया था कि वो कहाँ फँस गए हैं।

एचडी कुमारस्वामी ने कहा, “मैंने 2006-07 में मुख्यमंत्री रहते हुए जनता का जो भरोसा हासिल किया, उसे आगे 12 साल तक भी बनाए रखा। लेकिन कॉन्ग्रेस गठबंधन के कारण सब खो दिया। सिद्धारमैया ने मेरी प्रतिष्ठा को नष्ट कर दिया। मैं जाल में फँसता चला गया।”

‘गलती से बन गया था मुख्यमंत्री’

अगस्त 2019 में एचडी कुमारस्वामी ने कहा था कि वो राजनीति से संन्यास लेना चाहते हैं। कुमारस्वामी ने कहा था, “मैं राजनीति से संन्यास लेने की सोच रहा हूँ। मैं गलती से राजनीति में आ गया था। मैं गलती से मुख्यमंत्री बन गया था। भगवान ने मुझे दो बार मुख्यमंत्री बनने का मौका दिया।”

‘कॉन्ग्रेस के लिए गुलाम बना’

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस-जेडीएस के गठबंधन वाली सरकार गिरने के बाद एचडी कुमारस्वामी ने कई बातों का खुलासा करते हुए बताया था कि उन्होंने 14 महीने कॉन्ग्रेस के लिए गुलाम की तरह काम किया था। उनकी मानें तो उन्होंने सभी विधायकों और निगम अध्यक्षों को पूरी स्वतंत्रता दी थी, लेकिन फिर भी कॉन्ग्रेस सरकार गिरने का दोष उन्हें दे रही थी।

असम: टेरर फंडिंग के आरोपित AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल द्वारा संचालित ‘अजमल फाउंडेशन’ के खिलाफ FIR

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल द्वारा संचालित ‘अजमल फाउंडेशन’ के खिलाफ असम के दिसपुर पुलिस स्टेशन में शुक्रवार (4 दिसंबर, 2020) को मामला दर्ज किया गया है। गुवाहाटी के सीपी एम एस गुप्ता ने बताया कि यह मामला सत्य रंजन बोराह द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद दायर किया गया था, जिसने एनजीओ पर विदेशी फंड प्राप्त करने और संदिग्ध गतिविधियों में इसका इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था।

बता दें सत्य रंजन बोराह द्वारा दर्ज की गई यह शिकायत लीगल एक्टिविस्ट समूह, लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी (LRO) की रिपोर्ट पर आधारित है।

बोराह ने एफआईआर में आरोप लगाया, “लीगल राइट ऑब्जर्वेटरी एनजीओ की रिपोर्ट के मुताबिक एआईयूडीएफ के प्रमुख मौलाना बदरुद्दीन अजमल द्वारा संचालित अजमल फाउंडेशन संगठन कुछ विदेशी एजेंसियों द्वारा वित्त पोषित किया जा रहा है जो विभिन्न आतंकवादी समूहों और उनकी आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण से संबंधित हैं। रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए हम गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत इस संबंध में उचित जाँच चाहते हैं। अजमल फाउंडेशन ने विदेशी फंड का कई राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में दुरुपयोग किया है।”

बोराह ने एआईयूडीएफ प्रमुख को गिरफ्तारी और राष्ट्रीय अखंडता, संप्रभुता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए उसे उचित सजा देने की माँग की है। बोराह ने सुझाव दिया कि एफआईआर में दी गई कुछ जानकारी आगे की जाँच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को दी जा सकती है।

असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने भी संगठन के खिलाफ लगाया आरोप

असम के मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस मुद्दे पर पत्रकारों से कहा कि लोगों को हमेशा गलतफहमी थी कि अजमल ने अपनी मानवीय कार्य का खर्चा अपनी जेब से दिया है, जो वास्तविकता से बहुत दूर है।

सरमा ने केंद्र सरकार से इस मामले में गहन जाँच कराने की उम्मीद करते हुए कहा, “एक समय था जब उसे (अजमल) विदेशी एजेंसियों से 70-75 करोड़ रुपए मिले थे। इसके साथ इस संगठन ने एक अस्पताल चलाया और कुछ अन्य काम किए। एक स्थापित संस्थान, जिसने विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के उल्लंघन के कई मामलों का खुलासा किया है, ने दावा किया है कि अजमल को जो धनराशि प्राप्त हुई है, वह आतंकवाद से संबंधित है।”

गौरतलब है कि हमनें इस संगठन को लेकर पहले रिपोर्ट किया था कि AIUDF से जुड़े अजमल फाउंडेशन (Ajmal Foundation) पर विभिन्न संदिग्ध स्रोतों से 69.55 करोड़ रुपए की विदेशी फंडिंग लेने का आरोप लगा है।

LRO ने मामले को लेकर कहा था कि एनजीओ को मिली फंडिंग में से वह 2.05 करोड़ रुपए खर्च ‘शिक्षा’ पर कर चुके हैं और बाकी का पैसा AIUDF को पहुँचाया जा चुका है, ताकि वह असम की राष्ट्रवादी पार्टियों को टक्कर दे सकें। LRO ने अपनी रिपोर्ट में तुर्की, फिलिस्तान और ब्रिटेन के इस्लामी आतंकी समूहों के नाम खुलासा किया, जो अजमल फाउंडेशन को फंडिंग दे रहे हैं।

इसके अलावा LRO ने इस पूरे मामले पर अपने पास इकट्ठा हुई सारी जानकारी गृह मंत्रालय को भेजी और आरोप लगाया है कि इन्हें मिलने वाली फंडिग FCRA के रूल्स का उल्लंघन करती है, इसलिए इनके लाइसेंस को रद्द किया जाना चाहिए।

इस बीच, बदरुद्दीन अजमल अजमल ने आरोपों का खंडन किया है। अजमल ने कहा, “भाजपा-आरएसएस एनजीओ द्वारा संगठन के खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और मुझे बदनाम करने की साजिश है। केंद्र सरकार फंड के लेन-देन पर नजर रखती है।”

AIUDF के प्रमुख मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने यह भी कहा, “100% झूठा आरोप है। मुझे मेरे अजमल फाउंडेशन और मेरी पार्टी को बदनाम करने की ये साजिश है। हेमंत बिस्व सरमा ने इसे असम में गढ़ा है। जैसे ही उन्हें BTAD चुनाव के लिए कॉन्ग्रेस के साथ हमारे गठबंधन का पता चला उन्होंने इसे इंटरनेशनल टेरर बना दिया।”

‘गुपकार गैंग के पास जब सत्ता थी तो रिफ्यूज़ियों को वोट का अधिकार नहीं दिया, आज कहते हैं कोई तिरंगा नहीं उठाएगा’

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को गुपकार गैंग को आड़े हाथों लिया। उन्होंने गुपकार गैंग पर जमकर निशाना साधा। स्मृति ईरानी ने कहा कि गुपकार गैंग के पास जब सत्ता थी तो उन्होंने कभी रिफ्यूज़ियों को वोट का अधिकार नहीं दिया लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने ये समझा कि जिन परिवारों ने हिंदुस्तान को चुना, पाकिस्तान का तिरस्कार किया उनको ये अधिकार मिलना चाहिए कि वो जाकर वोट करें।

स्मृति ईरानी ने कहा, “वो राजनीतिक दल तब इकट्ठा नहीं होते हैं जब जनता को जरूरत होती है। वो राजनीतिक दल इस चुनाव में आपके काम नहीं आई। हिमाकत तो इतनी उनकी कि उन्होंने ये ऐलान करने की गुस्ताखी कर दी कि तिरंगा कोई नहीं उठाएगा। अरे उनसे पूछो, जिन्होंने हिन्दुस्तान को तब गले लगाया जब भारत का विभाजन हुआ और हिन्दुस्तान की धरती को चुना और रिफ्यूजी बनकर यहाँ आए। उनसे पूछो कि तिरंगे की शान क्या है। उनसे पूछो कि तिरंगे की आन क्या है।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों भाजपा ने जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रीय दलों के ‘गुपकार गठबंधन’ पर जबरदस्त हमला बोलते हुए पूछा था कि ये ‘गुपकार गठबंधन’ है या ‘गुप्तचर गठबंधन’? भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोमवार (नवंबर 16, 2020) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जम्मू-कश्मीर के पर्व मुख्यमंत्रियों फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के साथ-साथ कॉन्ग्रेस पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ये ‘गुप्तचर गठबंधन’ वही चाहता है, जो पाकिस्तान की इच्छा होती है।

उन्होंने गुपकार गठबंधन के साथ हाथ मिलाने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ऐसी ताकतों के साथ हाथ मिला कर कॉन्ग्रेस ने अपना असली रंग दिखा दिया है।

वहीं अमित शाह ने इसे गैंग बताते हुए कहा था कि जनता इस ‘अपवित्र गठबंधन’ को बर्दाश्त नहीं करेगी, जो देश के हितों के खिलाफ काम करने में लगा हुआ है। अमित शाह ने ट्विटर पर 3 ट्वीट्स कर के इस गठबंधन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा कि या तो ‘गुपकार गैंग’ देश के मूड के हिसाब से चले, या फिर जनता इसकी नैया डुबो देगी। 

उन्होंने कॉन्ग्रेस और गुपकार गठबंधन पर आरोप लगाया कि वो जम्मू कश्मीर को उस काल में वापस लेकर जाना चाहते हैं, जब वहाँ सिर्फ आतंक और उथल-पुथल का साम्राज्य हुआ करता था। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त कर दलितों, महिलाओं और आदिवासियों को अधिकार दिए हैं, उन्हें ये वापस छीनना चाहते हैं।

मुख्तार के करीबी जफर अब्बास व सादिक हुसैन जमीन के धाँधली के आरोप में यूपी पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के साथ-साथ अब उनके करीबियों पर भी सरकार शिकंजा कस रही है। गाजीपुर में पुलिस ने गजल होटल की जमीन को मुख्तार अंसारी की पत्नी व दोनों पुत्रों के नाम से दर्ज कराने के मामले में शनिवार (5 दिसंबर, 2020) को आईएस-191 गैंग के दो सहयोगियों जफर अब्बास व सैय्यद सादिक हुसैन को धर-दबोचा है।

पुलिस ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि मुख्तार के दोनों करीबी गजल होटल की जमीन की रजिस्ट्री में तथ्यों को छुपा कर मुख्तार अंसारी की पत्नी आफशा अंसारी और उसके बेटों अब्बास व उमर अंसारी के नाम दर्ज कराने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस मामले में पुलिस टीम ने दो महीने पहले दस लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।

जमीन की रजिस्ट्री में धांधली का मामला उजागर होने के बाद गजल होटल के बड़े हिस्से को डीएम की अध्यक्षता वाली बोर्ड के फैसले के बाद गिरा दिया गया था। पुलिस काफी से समय से दोनों आरोपितों की धर पकड़ में जुटी थी।

पुलिस टीम ने आरोपितों के घर पर दबिश देते हुए खुदाईपुरा नखास निवासी जफर अब्बास व सैय्यद सादिक हुसैन को गिरफ्तार किया। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि दोनों आरोपितों की लंबे समय से तलाश थी। इन्हें गिरफ्तार कर चालान कर दिया गया है। बाकी आरोपितों की तलाश जारी है।

संजय राउत को डॉक्टरों ने दी कम बोलने की सलाह, कंगना रनौत को कहा था- ‘हरामखोर’

फायरब्रांड राजनेता और शिवसेना से राज्यसभा सदस्य संजय राउत को उनके डॉक्टरों ने अगले कुछ दिनों तक कम बोलने की सख्त सलाह दी है। लीलावती अस्पताल में एंजियोप्लास्टी सर्जरी के बाद राउत को डॉक्टरों ने सलाह दिया है।

राउत को अस्पताल से शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को छुट्टी मिली। जिसके बाद पत्रकारों ने उनसे उनकी सर्जरी के बारे में पूछताछ की। राउत ने उनके सवालों के जवाब देते हुए कहा, “डॉक्टरों ने मुझे कम बात करने और तनाव मुक्त जीवन जीने के लिए कहा है। मैं डॉक्टरों की बातों का पालन करूँगा और आशा करता हूँ कि मुझे फिर से अस्पताल नहीं जाना पड़ेगा।”

राउत ने यह भी कहा कि उनकी आखिरी सर्जरी के दौरान कुछ चीजें रह गई थी, जिसकी वजह से उन्हें फिर से सर्जरी करवानी पड़ी। हालाँकि, कोरोना वायरस की वजह से उन्होंने काफी समय से अपना इलाज नहीं करवाया था।

बता दें कि डॉक्टरों ने राउत को खाने-पीने में संयम बरतने की सलाह के अलावा फूड डाइट प्लान भी दिया है, जिसका उन्हें कठोरता से पालन करना है। उन्होंने कहा कि वह सोमवार से दोबारा सामना में संपादन शुरू करेंगे।

राउत की गुरुवार (दिसंबर 4, 2020) को एंजियोप्लास्टी सर्जरी हुई थी। बता दें यह सर्जरी आर्टरी के माध्यम से रक्त के प्रवाह को बहाल करने के लिए की जाती है। पिछले साल भी इसी तरह की उनकी एंजियोप्लास्टी सर्जरी हुई थी। हालाँकि, सर्जरी के बाद भी उनकी समस्या बनी रही। जिसके चलते राउत कुछ दिनों पहले अस्पताल में भर्ती हुए थे।

गौरतलब है कि हाल ही में जब कंगना रनौत ने मुंबई की तुलना पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) से कर दी गई थी तब राउत ने इसके खिलाफ काफी बड़ा मोर्चा खोल दिया था। इतना ही नहीं इस मामले पर उन्होंने शब्दों की मर्यादा को तार-तार करते हुए एक महिला को हरामखोर तक कह दिया था।