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भीम-मीम पहुँच गए किसान आंदोलन में… चंद्रशेखर ‘रावण’ और शाहीन बाग की बिलकिस दादी का भी समर्थन

दिल्ली में चल रहे किसान ‘आंदोलन’ में अपना समर्थन देने के लिए आज भीम-मीम एक बार दोबारा एक साथ खड़े हैं। टाइम्स नाउ की खबर के मुताबिक एक ओर जहाँ भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर रावण गाजीपुर बॉर्डर पर पहुँच चुके हैं तो वहीं शाहीन बाग की दादी बिलकिस ने कहा है कि ये किसान उनके प्रदर्शन (शाहीन) में उनके साथ जुटे थे। अब समय है कि इनका साथ दिया जाए

कॉन्ग्रेस नेता उदित राज का भी इस बीच बयान आया है। उदित राज ने कहा है कि वो किसानों की माँगों का समर्थन करते हैं। लेकिन किसानों के ख़िलाफ़ फैलाए जा रहे प्रोपगेंडा का विरोध करते हैं।

शाहीन बाग और किसान आंदोलन में एक जैसे चेहरे

यहाँ गौरतलब हो कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए कृषि सुधार कानूनों को लेकर जारी किसानों के ‘विरोध प्रदर्शन’ में धीरे-धीरे वह सभी लोग एक साथ आ रहे हैं, जिन्होंने पिछले दिनों शाहीन बाग जैसे आंदोलन का समर्थन किया था।

अभी हाल में पता चला था कि जिन लोगों ने JNU में हिंसा को बढ़ावा दिया था, दिल्ली दंगों के दौरान मुस्लिमों को भड़काया था, वही हरियाणा-पंजाब सीमा पर चल रहे इस ‘किसान आंदोलन’ को भी उपद्रव में बदल रहे हैं।

हजारों लोगों के दिल्ली कूच करने के बाद हरियाणा की सिंधु सीमा पर पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है। ‘रावण’ के पहुँचने की जानकारी मिलने के बाद कई लोग सोशल मीडिया पर प्रदर्शन स्थल पर हिंसा भड़कने की आशंका जता रहे हैं। उनकी चिंता है कि कहीं मासूम किसान अपराधियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ में मारे न जाएँ।

शाहीन बाग के बाद किसान आंदोलन में बिरयानी

शाहीन बाग और किसानों के इस ‘आंदोलन’ में एक जैसे चेहरों के अलावा एक अन्य कॉमन चीज बिरयानी भी निकल कर आई है। पिछले दिनों राजधानी दिल्ली के गाजीपुर क्षेत्र से वीडियो सामने आई, जिसमें दिखाया गया कि आंदोलन कर रहे ‘किसानों’ के बीच बिरयानी बाँटी जा रही है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के इस वीडियो के साथ कैप्शन भी लिखा हुआ था, “गाजीपुर में किसानों के विरोध-प्रदर्शन की जगह पर बिरयानी का समय हो चुका है।” वीडियो में देखा जा सकता है कि सैकड़ों लोग बिरयानी के लिए पंक्ति बना कर खड़े हैं। 

इस वीडियो को देखने के बाद कुछ ही समय में काफी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं, क्योंकि इस नज़ारे ने यूजर्स की शाहीन बाग़ की यादें ताज़ा कर दी, जब पिछले साल दिसंबर महीने में तमाम इस्लामी सीएए और एनआरसी के तथाकथित ‘विरोध’ में धरने पर बैठे थे।

किसानों के प्रदर्शन पर क्यों उठ रहे सवाल

यहाँ बता दें कि इस आंदोलन को लेकर लगातार कई तरह के सवाल सोशल मीडिया पर उठाए जा रहे हैं। खासकर जब से इस प्रदर्शन को खालिस्तानियों और इस्लामी कट्टरपंथी समूह पीएफआई का समर्थन मिला है।

पिछले दिनों  SFJ के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू ने उन किसानों के लिए 10 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता की घोषणा की थी, जिन्हें दिल्ली की यात्रा के दौरान किसी भी तरह का नुकसान हुआ हो। हाल ही में अपलोड किए गए एक वीडियो में पन्नू ने किसानों से उनको हुए नुकसान का डिटेल भेजने के लिए कहा था ताकि उनका संगठन राशि की क्षतिपूर्ति कर पाए।

‘गलत सूचनाओं के आधार पर की गई टिप्पणी’: ‘किसान आंदोलन’ पर कनाडा के PM ने जताई चिंता तो भारत ने दी नसीहत

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत के आंतरिक मामला में हस्तक्षेप करते हुए यहाँ दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में बयान जारी किया है, जिसके बाद भारत ने भी उन्हें कड़ी नसीहत दी है। जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि स्थिति चिंताजनक है और कनाडा हमेशा शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि अगर वो भारत से आ रही इस खबर को नज़रअंदाज़ करते हैं तो ये लापरवाही होगी।

उन्होंने कहा कि हम सभी अपने परिवार और दोस्तों के लिए काफी चिंतित हैं, ये आप सबके लिए एक वास्तविकता है। कनाडा के पीएम सिख बहुल क्षेत्रों के लोगों को सम्बोधित कर रहे थे। बता दें कि उनकी सरकार में भी सिखों का दबदबा है और सिख वोटरों की संख्या के कारण अक्सर वहाँ के नेता खालिस्तानी एजेंडा को आगे बढ़ाते दिखते हैं। उन्होंने दावा किया कि कनाडा बातचीत की प्रक्रिया में विश्वास रखता है।

जस्टिन ट्रूडो ने जानकारी दी कि उन्होंने कई माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए भारतीय प्रशासन तक अपनी बात पहुँचाई है और ये हम सबके लिए साथ में आगे बढ़ने का क्षण है। बता दें कि ये पहली बार है, जब किसी अन्य देश के नेता ने भारत में चल रहे कथित ‘किसान आंदोलन’ पर टिप्पणी की हो। भारतीय विदेश मंत्रालय ने उनकी इस टिप्पणी पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि भारत में किसानों के मुद्दे को लेकर कनाडा के कुछ नेता गलत सूचनाओं के आधार पर बयान दे रहे हैं।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि ऐसी टिप्पणियाँ अनुचित हैं, खासकर जब मुद्दा किसी लोकतांत्रिक राष्ट्र के आंतरिक मामलों से जुड़ा हो। भारत ने ये भी नसीहत दी है कि कूटनीतिक माध्यमों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए न किया जाए। कनाडा के रक्षा मंत्री हरजीत सिंह सज्जन ने भी आरोप लगाया था कि भारत में किसानों के साथ क्रूरता हो रही है और ये काफी परेशान करने वाला है।

गौरतलब है कि दिल्ली के ‘किसान आंदोलन’ पर भी खालिस्तानियों ने कब्ज़ा कर लिया है। ऐसी तमाम तस्वीरें और वीडियो सामने आए जिसमें प्रदर्शन के दौरान खालिस्तान के समर्थन की बात सामने आ रही है। इसी तरह का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक तथाकथित किसान द्वारा स्पष्ट तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है कि जैसे इंदिरा गाँधी को ठोका वैसे ही नरेंद्र मोदी को भी ठोक देंगे। एक प्रदर्शनकारी ने ‘जय हिंद’ पर भी आपत्ति जताई।

कावर झील पक्षी विहार या किसानों के लिए दुर्भाग्य? Kavar lake, Manjhaul, Begusarai

बिहार में मीठे पानी की सबसे बड़ी झील बेगूसराय के मंझौल में है। इस झील का नाम कावर झील पक्षी विहार है। तकरीबन 15000 एकड़ में फैली इस झील की विशेष महत्ता है कि यहाँ कई प्रकार की वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। इसके अलावा कई तरह के लैंड बर्ड्स, वाटर बर्ड्स ने भी इस जगह को अपना घर बनाया हुआ है।

इस खास झील की जानकारी और इसके कारण प्रभावित होते किसानों की बात आप तक पहुँचाने के लिए ऑपइंडिया संपादक अजीत भारती ने स्वतंत्र पत्रकार व कावर झील को लेकर खासी जानकारी रखने वाले महेश भारती से बात की। उन्होंने बताया कि 15000 एकड़ में फैली यह झील गोखुर झील है, जिसकी आकृति बरसात के दिनों में बढ़ जाती है जबकि गर्मियों में यह 3000-5000 एकड़ में सिमट कर रह जाती है।

महेश भारती के अनुसार, इस झील के पास 60 प्रकार की प्रवासी चिड़ियाँ आती हैं और 100 प्रकार की देशी प्रजाति के पक्षी इस झील के आस-पास निवास करते हैं। इस साइट को देखते हुए व इसकी महत्ता को समझते हुए कुछ समय पहले UNEP इस जगह को रॉमसेट साइट घोषित कर चुका है।

पूरी बातचीत का वीडियो इस लिंक पर क्लिक करके देखें।

शादी से 1 महीने पहले बताना होगा धर्म और आय का स्रोत: असम में महिला सशक्तिकरण के लिए नया कानून

उत्तर प्रदेश में जहाँ ‘लव जिहाद (ग्रूमिंग जिहाद)’ पर लगाम लगाने के लिए कानून बन गया है, वहीं अब असम में भी छद्म हिन्दू बन कर धोखे से शादी करने और धर्मांतरण कराने के खिलाफ कानून बनाने पर विचार चल रहा है। नए कानून में ये प्रावधान लाया जाएगा कि शादी से 1 महीने पहले होने वाले पति-पत्नी को आधिकारिक दस्तावेजों के माध्यम से अपने धर्म और आय के बारे में जानकारी देनी पड़ेगी।

असम के वित्त मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य की महिलाओं का सशक्तिकरण करने के उद्देश्य से ये कानून लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये पूरी तरह उत्तर प्रदेश या मध्य प्रदेश के ‘लव जिहाद (ग्रूमिंग जिहाद)’ की रोकथाम के लिए बने कानूनों की तरह तो नहीं होगा, लेकिन उनसे कुछ समानताएँ ज़रूर होंगी। उन्होंने कहा कि ये ‘लव जिहाद (ग्रूमिंग जिहाद)’ के खिलाफ कानून नहीं होगा, ये सभी धर्मों के लिए एक समावेशी कानून होगा।

उन्होंने बताया कि पारदर्शिता से असम की बहनों के सशक्तिकरण के लिए ये कानून लाया जा रहा है। इसमें न सिर्फ अपना धर्म, बल्कि आय के स्रोत को लेकर भी लेकर जानकारी देनी होगी। साथ ही परिवार का पूरा विवरण और शिक्षा सम्बन्धी योग्यता बतानी होगी। सरकार की चिंता इस बात को लेकर है कि बहुत बार समान धर्म में शादी होने के बावजूद महिला को काफी बाद में पता चलता है कि उसका पति अवैध कारोबार में है।

इस कानून के तहत महिलाओं और पुरुषों को शादी से एक पहले पहले एक सरकारी फॉर्म में अनिवार्य रूप से आय का स्रोत, प्रोफेशन, स्थायी पता और धर्म के बारे में जानकारी देनी होगी। ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यूपी और एमपी के नए कानून से इसमें कुछ भाग लिया गया है। बता दें कि ‘लव जिहाद (ग्रूमिंग जिहाद)’ के खिलाफ पूरे देश में विरोध का माहौल है और हाल ही में हुई कई वारदातों के बाद कानून बनाने की जरूरत महसूस की गई।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और असम सरकार में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं वित्त मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने अक्टूबर 2020 में भी कहा था कि अगर उनकी पार्टी 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आती है तो राज्य सरकार ‘लव जिहाद’ के खिलाफ ‘कठोर लड़ाई’ शुरू करेगी। उन्होंने माना कि कई लड़कियों की तो तलाक की नौबत आ गई क्योंकि उन्हें गलत नाम बताकर लड़कों ने धोखा दिया।

‘अजान महाआरती जितनी महत्वपूर्ण, प्रतियोगता करवा कर बच्चों को पुरस्कार’ – वीडियो वायरल होने पर पलट गई शिवसेना

अपनी हालिया ‘सेक्युलर’ और ‘लिबरल’ छवि वाले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ‘अज़ान पाठ प्रतियोगिता’ के आयोजन की योजना से मुकर गई है। शिवसेना दक्षिण मुंबई डिवीजन के प्रमुख पांडुरंग सकपाल ने पिछले इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें अज़ान शांतिपूर्ण और सुखदायक लगी, हालाँकि बाद में उन्होंने कहा कि अज़ान पाठ प्रतियोगिता आयोजित करना केवल एक मुस्लिम पार्टी के अधिकारी द्वारा दिया गया सुझाव था और इस तरह के आयोजन की उनकी कोई योजना नहीं है।

अज़ान पाठ प्रतियोगिता की कोई योजना नहीं

पांडुरंग सकपाल पीछे हटते हुए दावा करते हैं कि उनके पास अज़ान पाठ प्रतियोगिता आयोजित करने की कोई योजना नहीं है। बता दें कि सकपाल की अजान की प्रशंसा करते और अजान पाठ प्रतियोगिता करने की घोषणा सोशल मीडिया वेबसाइटों पर वायरल हो गई थी। इस वीडियो के सामने आने के बाद बीजेपी ने शिवसेना को लताड़ लगाई थी।

भाजपा ने घोषणा की आलोचना करते हुए कहा था कि शिवसेना ने हिंदुत्व के लिए अपना समर्थन पहले ही छोड़ दिया था और अजान पाठ की प्रतियोगिता की घोषणा करके वह अपने नवगठित ‘सेक्युलर’ साख को जलाने की कोशिश कर रही है। ऐसा वह अल्पसंख्यकों का वोट हासिल करने के लिए कर रही है। 

अज़ान पाठ प्रतियोगिता आयोजित करने की अपनी घोषणा के बाद पांडुरंग सकपाल ने ये कहते हुए यू-टर्न लिया कि उन्होंने पार्टी के मुस्लिम पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल के सुझाव के बारे में बताया था।

सकपाल ने बताया, “उन्होंने कहा कि उनके बच्चे सड़कों पर घूम रहे थे और हमें उनके लिए एक प्रतियोगिता आयोजित करनी चाहिए। फिर भगवद गीता पाठ प्रतियोगिता की तर्ज पर जो हम अपने क्षेत्र में आयोजित करते हैं, मैंने उन्हें एक ऑनलाइन अज़ान पाठ प्रतियोगिता आयोजित करने का सुझाव दिया।”

इससे पहले कल (30 नवंबर, 2020), शिव सेना के प्रमुख पांडुरंग सकपाल द्वारा अज़ान पाठ प्रतियोगिता आयोजित करने की घोषणा का एक वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया था। अज़ान पाठ प्रतियोगिता आयोजित करने का विचार उनके दिमाग में कैसे आया, इस बारे में बात करते हुए, सकपाल ने कहा था, “मैं मरीन लाइन्स में बड़ा कब्रिस्तान के बगल में रहता हूँ। यही कारण है कि मुझे हर दिन अजान सुनने को मिलती है। मैंने अजान को अद्भुत और मनभावन पाया है। जो भी इसे एक बार सुनता है, वह अजान के अगले शेड्यूल का बेसब्री से इंतजार करता है। यही कारण है कि मेरे मन में मुस्लिम समुदाय के बच्चों के लिए अज़ान प्रतियोगिता आयोजित करने का विचार आया।”

सकपाल ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय के बच्चे अजान का शानदार पाठ करते हैं। इस प्रतियोगिता को रखने का उद्देश्य प्रतिभाशाली कलाकारों के लिए एक मंच प्रदान करना है। सकपाल ने यह भी कहा कि बच्चों को उनके उच्चारण, ध्वनि मॉड्यूलेशन और गायन के आधार पर पुरस्कार दिया जाएगा। पुरस्कारों पर होने वाले खर्च का वहन शिवसेना करेगी।

सकपाल ने अज़ान की तुलना महाआरती से की

उन्होंने अजान की तुलना ‘महाआरती’ से करते हुए कहा था कि अजान केवल 5 मिनट का होता है। इसलिए, अगर किसी को इन कुछ मिनटों से परेशानी होती है तो उन्हें अनदेखा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अजान की परंपरा कई सदियों पुरानी है। यह कोई हाल की चीज नहीं है। इस तरह के विरोध को नजरअंदाज किया जाना चाहिए। महाआरती जितनी महत्वपूर्ण ही अज़ान है। यह प्यार और शांति का प्रतीक है।

हिंदुओं और PM मोदी से नफरत ने प्रतीक सिन्हा को बनाया प्रोपगेंडाबाज: 2004 की तस्वीर शेयर करके 2016 में उठाए सवाल

ऑल्ट न्यूज के संस्थापक प्रतीक सिन्हा की हिंदू घृणा एक बार फिर जगजाहिर हुई है। फैक्ट चेक के नाम पर वह दुनिया को क्या परोस रहे हैं, इसका खुलासा @befittigfacts नाम के सक्रिय ट्विटर यूजर ने अपने ट्वीट में किया है। इनमें दर्शाया गया है कि कैसे फेक प्रोपगेंडा चलाने के लिए के लिए फर्जी तस्वीरों का इस्तेमाल सिन्हा ने साल-दर-साल किया।

इन ट्विटों के मुताबिक प्रतीक सिन्हा ने साल 2014 की एक तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए पाठकों को ये बताया कि कैसे नोटबंदी के दौरान साल 2016 में बूढ़ी महिलाओं को परेशानी झेलनी पड़ी। ट्वीट में लगी दोनों तस्वीरों और उनकी तारीखों को देख कर साफ पता चल रहा है कि सिन्हा प्रोपगेंडा फैलाने के लिए कोई भी हथकंडा आजमाने से नहीं चूकता। 

दूसरे ट्वीट में फैक्ट चेक वेबसाइट के संस्थापक ने गुजरात की स्थिति दर्शाते हुए गौ रक्षा पर सवाल उठाए। उसने कहा कि गौ माता गुजरात में सड़ रही हैं। आखिर कहाँ हैं उनके बच्चे जो अपनी माता के प्रेम दिखाते हैं। अब इस तस्वीर की सच्चाई यह है कि ये 2004 की तस्वीर है। सोचिए, प्रतीक सिन्हा गौ रक्षकों का मजाक उड़ाने के लिए कितने साल पीछे जाकर तस्वीरें खंगालता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक झूठ जो अक्सर फैलाया जाता है, वो ये कि उन्होंने साल 2014 में अपने चुनावी प्रचार में सबके अकॉउंट में 15 लाख भेजने का वादा किया था। इस झूठ को प्रतीक सिन्हा जैसे वामपंथी अक्सर हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं और कभी भी तंज के रूप में परोस देते हैं। लेकिन, इसका वास्तविक फैक्टचेक ये बताता है कि ये दावा झूठा है।

वास्तविकता में 7 नवंबर 2013 जिस समय नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के कांकेर में रैली करते हुए बयान दिया था। उस समय उन्होंने कहा था, “जो चोर लुटेरे हैं उनका काला धन जो कि भारत के बाहर जमा है अगर वह रुपया वापस आ जाए तो इतना धन आएगा कि हर एक भारतीय नागरिक को मुफ्त में 15-20 लाख रुपए यूँ ही मिल जाएगा।“ ध्यान दीजिएगा कहीं पर भी नरेंद्र मोदी ने 15 लाख रुपए बैंक में जमा कराने की बात नहीं की है। उन्होंने कहा था कि यदि आ जाए तो हर नागरिक को इतना पैसा मिलेगा।

गंगा नदी की सफाई पर प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता को लेकर सवाल उठाने के लिए खबरों को गलत तरह से पेश करने का काम भी प्रतीक सिन्हा ने बखूबी किया है। उन्होंने केवल हेडलाइन को शेयर करके अपने फॉलोवर्स को झूठ फैलाया, जिसमें एनजीटी का हवाला देकर हेडलाइन थी कि जनता का पैसा बर्बाद हुआ है और गंगा एक बूंद भी साफ नहीं हुई। जबकि वास्तविकता में एनजीटी ने अपने बयान में पीएम मोदी को ऐसे प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए सराहा था और सवाल अखिलेश सरकार पर उठे थे।

अपने अगले झूठ में प्रतीक सिन्हा ने कहा कि एक बुजुर्ग व्यक्ति इसलिए रो रहा था क्योंकि उसे पैसे नहीं मिले, जबकि वास्तविकता में वो खबर ये थी कि एक महिला ने उस व्यक्ति के पाँव पर अपना पैर रख दिया था और बुजुर्ग ने खुद कहा था कि इस परेशानी के अलावा उसे कहीं ज्यादा दिक्कत नहीं हुई।

ज्ञात रहे कि ये केवल चंद ट्वीट हैं जिनपर ऑल्ट न्यूज के संस्थापक झूठ फैलाते पाए गए हैं। ऐसे अनेक मामले हैं जब ये वामपंथियों के समर्थन के कारण ये बच निकलते हैं और किसी का इन पर ध्यान नहीं जाता। पिछले दिनों इनकी ही वेबसाइट ऑल्ट न्यूज पर कई तरह के फैक्ट चेक के नाम पर एक समुदाय विशेष को बचाने का प्रयास हुआ था।

सलमान और नदीम विवाहित हिन्दू महिला का करवाना चाहते थे जबरन धर्म परिवर्तन: मुजफ्फरनगर में लव जिहाद में पहली FIR

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में ‘ग्रूमिंग जिहाद’ (लव जिहाद) का मामला सामने आया है। यहाँ मंसूरपुर थाने में उत्तराखंड राज्य के दो युवकों के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध कानून-2020 के तहत FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि दोनों युवकों ने साजिश के तहत विवाहित महिला का जबरन धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया। नए कानून के तहत मुजफ्फरनगर जिले में यह पहली FIR है।

हरिद्वार में ठेकेदारी करता था महिला का पति

दरअसल, मंसूरपुर थाना क्षेत्र निवासी युवक अक्षय त्यागी हरिद्वार जिले के भगवानपुर में एक फैक्ट्री में ठेकेदार है। यहाँ वह पत्नी के साथ रहता है। भगवानपुर के रहने वाले सलमान और करौंदी गाँव निवासी नदीम उसकी फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं। आरोप है कि दोनों का मजदूरी के सिलसिले में घर आना-जाना लगा रहता था। नदीम ने अपने साथी सलमान के साथ मिलकर महिला को प्रेमजाल में फँसा लिया और शादी का झाँसा दिया। इस बीच उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया गया और बार-बार निकाह करने की बात कही गई।

गाँव लौटकर सोमवार देर शाम दी तहरीर

जब इस बात की जानकारी महिला के पति को हुई तो वह अपने गाँव लौट आया। वो लोग कहीं उसकी पत्नी को लेकर फरार ना हो जाए। सोमवार (नवंबर 30, 2020) की देर शाम पति-पत्नी मंसूरपुर थाने पहुँचे और आरोपित सलमान व नदीम के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने दोनों के खिलाफ उत्तर प्रदेश धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/5 के तहत केस दर्ज किया है। मंसूरपुर पुलिस ने मामले की जानकारी हरिद्वार पुलिस को भी दी है। एसएसपी अभिषेक यादव ने बताया कि आरोपितों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। जल्द ही एक टीम भगवानपुर जाएगी।

बरेली में दर्ज हुई थी पहली FIR

बता दें कि रविवार को ही बरेली के देवरनिया थाने में एक छात्रा ने धर्म परिवर्तन का दबाव बनाए जाने के संबंध में मामला दर्ज कराया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 3/5 की धारा में FIR दर्ज कर आरोपित उवैस को गिरफ्तार किया था। कानून लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश का यह पहला मामला था।

इसके बाद बरेली के इज्जतनगर थाने में लव जिहाद का मामला सामने आया। ताहिर हुसैन ने अपनी पहचान छिपाकर हिन्दू युवती को अपने प्रेम जाल में फँसाकर उसकी मंदिर में माँग भरी और शादी की। उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। यही नहीं, प्रेग्नेंट होने पर लात घूसों से मारकर उसका गर्भपात किया।

ताहिर ने कहा था, “मुझे तुमसे शादी नहीं करनी थी। मेरा मजहब मुझे कहता है कि हम लव जिहाद में विश्वास रखते हैं, शादी में नहीं। एक हिंदू को गर्भवती करने से हमें दस बार मदीना शरीफ जाने का सवाब मिलता है।” पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

किसान आंदोलन या दूसरा शाहीन बाग? अजीत भारती का विश्लेषण | Ajeet Bharti Analysing Farmer Protests

दिल्ली में चल रहे कृषि आंदोलन में बीते दिनों शाहीन बाग एंगल निकलने के बाद इस मसले पर चर्चा करना अति आवश्यक हो गया है। इस आंदोलन में एक ऐसा समूह है जो हर किसी को बरगलाना चाहता है। सीएए के दौरान ऐसा ही शाहीन बाग में देखने को मिला था। उस समय समुदाय विशेष को भ्रमित करने का कार्य हुआ था या ये कहें कि कुछ लोग भ्रमित होने के लिए बैठे ही थे।

अब वही काम कृषि बिल के नाम पर हो रहा है। जैसे सीएए में लोगों से कहा गया कि इसमें उनकी नागरिकता छीन ली जाएगी। वैसे ही कृषि बिल को लेकर कहा जा रहा है कि इसके जरिए किसानों से उनकी जमीन सरकार छीन लेगी। सीएए से भी भारतीय मुस्लिम समुदाय का कोई लेना-देना नहीं था और कृषि बिल में भी किसानों की जमीन छीने जाने का कोई जिक्र नहीं है।

आज इन किसान आंदोलनों के लिए जिन्हें बुलाया गया है वह खालिस्तानी समर्थक हैं। उधम सिंह से अपनी तुलना करके ऐसे लोग कैमरे के सामने आकर बोल रहे हैं कि इंदिरा को ठोंक दिया, मोदी क्या चीज है।

पूरा वीडियो इस लिंक पर क्लिक करके देखें।

‘दिल्ली और जालंधर किसके साथ गई थी?’ – सवाल सुनते ही लाइव शो से भागी शेहला रशीद, कहा – ‘मेरा अब्बा लालची है’

JNU की छात्र नेता रहीं शेहला रशीद पर उनके अब्बा अब्दुल रशीद शोरा ने आतंकियों जहूर वटाली और रशीद इंजीनियर से 3 करोड़ रुपए लेने के आरोप लगाए हैं। इसी क्रम में ‘ABP न्यूज़’ पर शेहला रशीद सफाई देने फोन लाइन पर आईं, लेकिन कठिन सवालों का जवाब देने के बजाए फोन रख कर भाग खड़ी हुईं। उन्होंने अपने अब्बू शोरा को लालची भी करार दिया। पत्रकार विकास भदोरिया के इंटरव्यू में ये सब हुआ।

शेहला रशीद के अब्बा ने कहा कि उनके लिखे पत्र में 2017 के बाद शहेला रशीद ने जो किया, उसका कच्चा चिट्ठा है। उन्होंने कहा कि शेहला रशीद के जम्मू कश्मीर की राजनीति में आने के निर्णय के बाद दिक्कतें शुरू हुईं, क्योंकि उन्होंने अचानक से अपनी राजनीति में यू-टर्न ले लिया। उन्होंने बताया कि इसकी पूरी साजिश अमेरिका में रची गई थी और उन्हें चुप कराने के लिए उनके ऊपर घरेलू हिंसा का केस कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि सबसे पहले ये पता लगाना ज़रूरी है कि शेहला रशीद अवैध गतिविधियों में कहाँ तक लिप्त हैं। इसके बाद शो में शेहला रशीद भी जुड़ीं और उनसे आरोपों को लेकर जवाब माँगा गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उनके ऊपर कोई आरोप नहीं है बल्कि उनके अब्बा के ऊपर घरेलू हिंसा का आरोप है और उनके खिलाफ वारंट भी जारी हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार के साथ हिंसा और गाली-गलौज के कारण अब्दुल रशीद शोरा को मोहल्ले वालों ने घर से निकाल दिया था।

शेहला रशीद ने पत्रकार से कहा कि वो उनके अब्बा से पूछें कि वो अपनी बीवी को क्यों पीटते थे और घर से क्यों निकाल देते थे? शेहला रशीद ने अपने अब्बा को ‘लालची किस्म का इंसान’ करार देते हुए कहा कि आरोप कोई भी लगा सकता है, लेकिन सबूत ही नहीं हैं। उन्होंने उल्टा एंकर विकास भदौरिया से कहा कि अगर मैं आपके बारे में कह दूँ कि आपने अपने संपादक की हत्या कर दी, तो क्या आरोप लग गया? उन्होंने कहा:

“जब हम बहुत छोटे थे तो हम माँ-बेटियों को ये घर से निकाल देते थे, वो भी रात के 9 बजे। ये किस हक़ से बोल रहे हैं? हम किस स्कूल में पढ़ते थे, हमारी स्कूल यूनिफॉर्म क्या थी, हम फी कहाँ से भरते थे और किताबें कहाँ से खरीदते थे – इन्हें कुछ नहीं पता। इनकी उपस्थिति हमारी ज़िंदगी में सिर्फ इसीलिए है, ताकि ये हमें परेशान कर सकें। हमारी माँ ने नया घर बनाया तो ये वहाँ भी धमक गए और पूछने लगे कि रुपए कहाँ से आए और उन्हें क्यों नहीं दिए गए?”

9:50 के बाद शेहला रशीद ने कटा फोन कॉल (वीडियो साभार: ABP न्यूज़)

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अब्दुल रशीद शोरा ने शेहला से पूछा कि जब वो दिल्ली में पढ़ाई पूरी करने के लिए पहली बार जम्मू कश्मीर से बाहर गईं और जालंधर गईं, तो किसके साथ गई थी? शेहला रशीद ने इसका जवाब देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने कहा कि उन्हें कोई डिबेट नहीं करनी है और कोर्ट में मामला सुलझाया जाएगा। उन्होंने मुद्दों से ध्यान भटका कर कोर्ट की बातें करनी शुरू कर दी।

विकास भदौरिया ने शेहला को टोका कि अगर वो आरोपों और सवालों का जवाब नहीं देती हैं तो ये माना जाएगा कि वो सवालों से भाग रही हैं। शेहला बार-बार कहती रहीं कि वो कोर्ट में जवाब देंगी और उसके बाद फोन कॉल कट कर दिया। फोन काटने से पहले उन्होंने पूछा कि उनके अब्बा आखिर आतंकी जहूर वाटाली से मिले ही क्यों थे? अब्दुल रशीद शोरा ने कहा कि उनकी बेटी पूरे प्रेस को बहका रही है और वो सारे सबूत पेश करेंगे। अपने अब्बू अब्दुल रशीद शोरा के आरोपों का जवाब देने की बजाए शेहला ने फोन काट दिया।

इससे पहले शोरा ने बताया था, “शेहला ने पार्टी तब बनाई थी, जब वह यूएस गई थीं। इन्हें सारा फंड राष्ट्र विरोधी ताकतों से प्राप्त होता है। कोई राष्ट्रीय पार्टी इन्हें फंड नहीं देगी। अपने लिए सुरक्षा माँगने के साथ मैंने डीजी सर से इन फंड पर जाँच करने को भी कहा है।” उन्होंने ये भी खुलासा किया कि उनकी बेटी लेफ्ट पार्टी की एक्टिव सदस्य थी और वह मेरठ से चुनाव लड़ने वाली थी। शोरा के मुताबिक, शेहला ‘कुख्यात गतिविधियों’ में शामिल है।

बिहार के किसान क्यों नहीं करते प्रदर्शन? | Why are Bihar farmers absent in Delhi protests?

कृषक आंदोलन के दौरान ऑपइंडिया इस हफ्ते आपके बीच लेकर आ रहा बिहार के किसानों की स्थिति। हमारा उद्देश्य अलग-अलग कृषि जानकारों व किसानों से बात करके यह जानना है कि आखिर यहाँ किसानों की समस्या क्या है। क्यों इतनी परेशानियों के बावजूद भी यहाँ का किसान आंदोलन नहीं करता? और क्यों बाढ़ जैसी समस्याओं से प्रभावित होने के बाद भी इस जगह को छोड़ कर नहीं जाता?

इसी क्रम में ऑपइंडिया संपादक अजीत भारती आज शंभू शरण शर्मा से बात कर रहे हैं। शंभू एक किसान हैं और लंबे समय से कृषि से जुड़े हैं। वह बेगूसराय इलाके की भौगोलिक स्थिति की जानकारी विस्तार से देते हुए बताते हैं कि छोटे जोत में भिन्न-भिन्न तरह की फसल पैदा करना उन लोगों की मजबूरी है। छोटे जोतदार होने के कारण उन्हें छोटे व्यापारियों के हाथ में अपना गल्ला मनमाने रेट पर बेच देना पड़ता है।

वह अन्य परेशानियों की चर्चा करने के बावजूद दिल्ली में हो रहे ‘आंदोलन’ को राजनीति से प्रेरित कहते हैं। वह बताते हैं कि बिहार में लोग सरकार के भरोसे एक उम्मीद में हैं कि वो व्यवस्था को सुधार देंगे।

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