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राम-रावण वाली बात पर सैफ अली खान ने माँगी माफी, माँ सीता पर घटिया टिप्पणी पर अभी भी खामोश

सैफ अली खान अपनी आने वाली फिल्म आदिपुरुष को लेकर चर्चा का विषय बने हुए हैं। हाल ही में उन्होंने फिल्म में अपने किरदार के बारे में बात करते हुए एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसके कारण लोगों की भावनाएँ आहत हो गईं और सैफ लोगों के निशाने पर आए गए। वहीं अब सैफ अली खान ने अपने बयान के लिए माफी माँगी है। हालाँकि माँ सीता पर दिए गए आपत्तिजनक बयान को लेकर उन्होंने कोई सफाई नहीं पेश की है।

बता दें कि सैफ ने एक इंटरव्यू के दौरान फिल्म में रावण द्वारा सीता के अपहरण को सही ठहराने, रावण की बहन सूर्पणखा के साथ लक्ष्मण का व्यवहार, सीताहरण और लंकापति रावण के अच्छे पहलू यानी मानवीय रूप के बारे में बात की थी। इसके चलते उन्हें सोशल मीडिया पर काफी तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उनकी टिप्पणी कई नेटिज़न्स को अच्छी नहीं लगी और सोशल मीडिया पर आलोचना के साथ ‘बॉयकाट आदिपुरुष’ का ट्रेंड शुरू हो गया।

अब सैफ अली खान ने सोशल मीडिया पर लोगों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए अपने बयान पर लीपापोती करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा:

“मुझे पता चला है कि एक साक्षात्कार के दौरान मेरे एक बयान ने विवाद पैदा कर दिया है और लोगों की भावनाओं को आहत किया है। यह मेरा इरादा कभी नहीं था या इस तरह का मतलब नहीं था। मैं ईमानदारी से हर किसी से माफी माँगना और अपना बयान वापस लेना चाहूँगा। भगवान राम, मेरे लिए हमेशा धार्मिकता और वीरता के प्रतीक रहे हैं। आदिपुरुष बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाने के बारे में है और पूरी टीम मिलकर काम कर रही है ताकि महाकाव्य को बिना किसी विकृतियों के प्रस्तुत किया जा सके।”

उनका माफीनामा भी नेटीज़न्स को कुछ रास नहीं आया है।

सैफ की माफ़ी के बाद भाजपा नेता राम कदम ने उन पर तंज कसा है। कदम ने ट्वीट कर कहा, “हर कलाकार, फिल्म निर्माता-निर्देशक के प्रति हमें आदर तथा सम्मान है अपितु किसी भी धर्म की भावनाएँ आहत करने का अधिकार किसी को भी नहीं है। देर पर दुरुस्त। प्यार से बोलो जय श्रीराम…”

बता दें कि अन्य लोगों की ही तरह भाजपा नेता राम कदम ने भी सैफ अली खान के बयान पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था, “अभिनेता सैफ अली खान आदिपुरुष नाम की फ़िल्म में रावण की भूमिका निभाने वाले हैं। सैफ अली खान, रावण के रोल को हीरो की तरह पेश करने की बात करते हैं, रावण के दुष्कृत्य को फ़िल्म के जरिए न्याय देंगे? यह कैसे संभव है?”

उन्होंने यह भी कहा, “प्रभु श्रीराम धर्म को स्थापित करते हैं। श्रीराम और रावण के बीच युद्ध धर्म और अधर्म की लड़ाई है। फ़िल्म निर्माता तथा निर्देशक हिन्दू आस्थाओं का सम्मान करते हुए फ़िल्म बनाएँ। जिस प्रकार से Omraut जी नें Tanaji फिल्म में समस्त हिन्दुओं का तथा मराठों का सम्मान किया था, उसी तरह इस फिल्म में भी हिन्दुओं की आस्था और श्रद्धा का सम्मान हो। हमारी आस्था को आँच और ठेस पहुँचे, ऐसा कृत हिन्दू समाज कताई सहन नहीं करेगा।”

गौरतलब है कि मुंबई मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक सैफ अली खान ने अपने किरदार के बारे में बोलते हुए कहा था, “एक राक्षस राजा का किरदार निभाना काफी दिलचस्प है, लेकिन ये इतना भी क्रूर नहीं है। हम इसे काफी मनोरंजक बनाने वाले हैं। सीता का अपहरण और राम के साथ हुए युद्ध को हम उसकी बहन के लिए बदले की भावना से जोड़कर दिखाने वाले हैं, जिसकी नाक लक्ष्मण ने काट दी थी।”

‘आदिपुरुष’ में भगवान राम के किरदार में प्रभास और सीता के किरदार में कृति सेनन नज़र आने वाली हैं। सैफ अली खान ने ये भी बताया था कि प्रभास और उनके बीच जो एक्शन सीक्वेंस होंगे, उन्हें काफी बड़े स्तर पर फिल्माया जाएगा। इस फिल्म का बजट 400 करोड़ रुपए से अधिक होगा और इसके लिए शीर्ष तकनीकी विशेषज्ञों को लगाया जा रहा है। जनवरी 2021 से इसकी शूटिंग प्रारंभ होने वाली है।

इससे पहले सैफ ने कहा था कि फिल्म की स्क्रिप्ट पर बिलकुल भरोसा नहीं था, क्योंकि उसका भारतीय इतिहास से कोई संबंध नहीं था। भारत के बहुसंख्यक रामायण में विश्वास करते हैं, वह रामायण को भारत के इतिहास की तरह ही देखते हैं। इसलिए लोगों के लिए यह बात हजम करना मुश्किल है जो इंसान अंग्रेज़ों के आने से पहले भारत की अवधारणा में भरोसा नहीं रखता था, वह लंकेश का किरदार निभा रहा है।

‘मंदिर वहीं बनाएँगे’: अयोध्या में मंदिर निर्माण का संकल्प लेकर सोमनाथ से चले आडवाणी का वह ऐतिहासिक भाषण

राम मंदिर आंदोलन में दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी की भूमिका को कोई नहीं भूल सकता। सोशल मीडिया पर बाबरी मस्जिद विध्वंस की 28वीं वर्षगाँठ पर प्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान दिया गया उनका आइकॉनिक भाषण काफी वायरल हो रहा है।

1990 में सोमनाथ से शुरू हुए प्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान, आडवाणी ने बिहार के तत्कालीन सीएम लालू प्रसाद यादव सहित उन सभी लोगों पर तीखा हमला किया, जिन्होंने प्रसिद्ध रथ यात्रा को रोकने की पूरी कोशिश की थी।

आडवाणी ने रथ यात्रा के दौरान अपने एक भाषण में कहा था, लोग कहते है कि आप अदालत का फैसला क्यों नहीं मानते? अदालत क्या इस बात का फैसला करेगी कि यहाँ श्री राम का जन्म हुआ था कि नहीं हुआ था?” नेताओं से रथयात्रा को नहीं रोकने का आग्रह करते हुए आडवाणी ने कहा था, “आप से तो इतनी ही आशा है कि बीच में मत पड़ो। रास्ते मे मत आओ। क्योंकि यह जो रथ है, लोकरथ है। जनता का रथ है।” आडवाणी ने उस वक़्त कहा था, “मंदिर वहीं बनाएँगे। उसको कौन रोकेगा। कौन सी सरकार रोकने वाली है?”

बता दें राम मंदिर निर्माण को लेकर समर्थन जुटाने के लिए आडवाणी ने 25 सितंबर, 1990 को गुजरात के सोमनाथ से रथयात्रा शुरू की, जिसे विभिन्न राज्यों से होते हुए 30 अक्तूबर को अयोध्या पहुँचना था। हालाँकि इस दौरान यात्रा में कई उतार-चढ़ाव आए यात्रा को बीच में ही रोक दिया गया। देश के कई हिस्सों में काफी हिंसा हुई। बिहार पहुँचने के बाद आडवाणी को तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के आदेश पर 23 अक्टूबर को समस्तीपुर में गिरफ्तार कर लिया गया था।

2 साल के भीतर भव्य राम मंदिर होगा जाएगा तैयार

6 दिसंबर, 1992 को अचानक से हुई एक घटना में कारसेवकों ने अयोध्या में विवादित ढाँचे को ध्वस्त कर दिया था। वहीं सालों से चल रहा भूमि विवाद आखिरकार 9 नवंबर, 2019 को समाप्त हुआ, जब भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने रामलला के पक्ष में निर्णय दिया और राम मंदिर के निर्माण की अनुमति दे दी। 5 अगस्त, 2020 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंदिर का शिलान्यास किया गया। उम्मीद है कि 2 साल के भीतर भव्य रामलला का मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा।

लाखों लोगों का संघर्ष कि ‘मंदिर वहीं बनाएँगे’ से ‘मंदिर वहीं बन रहा है’ पूरा हो रहा है।

प्यारे हिन्दुओ! बच्चों को सिखाना कि 400 साल पहले कुछ आतंकियों ने हमारे मंदिर पर पूरी मस्जिद ही रख दी थी

AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में उन्होंने मुस्लिमों को कुछ सलाह दी है। जाहिर है कि उनकी पार्टी के नाम में ही ‘मुसलमीन’ है, अतएव वो कैसी राजनीति करते हैं- ये सभी को पता है। असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि बाबरी मस्जिद अयोध्या में 400 वर्षों तक खड़ा रहा और ‘हमारे (मुस्लिमों के) पूर्वजों’ ने न सिर्फ वहाँ पर नमाज पढ़ी और साथ इफ्तार तोड़ा, बल्कि मौत के बाद भी वो वहीं दफ़न हुए। बाबरी मस्जिद का राग अलापने वाले ओवैसी बताएँगे कि राम मंदिर को जिन आतंकियों ने तोड़ा, वो किनके पूर्वज थे?

उन्होंने मुस्लिमों से कहा कि इस ‘अन्याय’ को कभी मत भूलो। साथ ही दावा किया कि दिसंबर 22-23, 1949 को बाबरी मस्जिद को ‘अपवित्र’ कर उस पर अवैध रूप से कब्ज़ा कर लिया गया और अगले 42 वर्षों तक ये जारी रहा। उन्होंने दावा किया कि दिसंबर 6, 1992 को पूरी दुनिया के सामने इसे ध्वस्त कर दिया गया और ऐसा करने वालों को 1 दिन की भी सज़ा नहीं मिली। ओवैसी ने 1949 और 1992 तो याद दिलाया, लेकिन 1528 से पहले के इतिहास को खुद भूल गए।

इस ट्वीट के रिप्लाई में लोगों ने उनसे पूछा कि जब कुछ साल मुस्लिमों के वहाँ नमाज पढ़ने से वो मुस्लिमों का स्थल हो गया तो जिस मंदिर को तोड़ कर ये मस्जिद बनाई गई थी, क्या वहाँ हिन्दू प्रार्थना नहीं करते होंगे? हिन्दुओं की आस्था उस राम मंदिर में नहीं रही होगी, जिनके अयोध्या से लेकर लंका तक का सफर पूरे भारतवर्ष की एकता का परिचायक है? राम का इतिहास किसी 1528, 1949 या 1992 का मोहताज तो नहीं? ये तो आपके क्रंदन का हिस्सा है।

इसी तरह कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) ने विवादित ढाँचे की स्मृति में एक पोस्टर साझा किया। इस पोस्टर में लिखा है, “एक दिन बाबरी का उदय ज़रूर होगा” और “हम इसे भूल नहीं सकते हैं।” इस पोस्टर को पीएफ़आई के तमाम समर्थक साझा कर रहे हैं और इसके साथ ही #BabriYaadRahegi हैशटैग का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। इसके अलावा तमाम कट्टरपंथी इस्लामी भी इस तरह के नफ़रत भरे ट्वीट कर रहे हैं।

6 दिसम्बर को कुछ लोग सप्रेम ऐसे वाकये लिखते हैं जैसे कि देश और समाज उसी समय से शुरू हुआ जब से बाबरी में मूर्तियाँ रखवा दी गईं। बड़े ही भोलेपन के साथ इस घटना को ‘आतंकी’ तक लिख दिया जाता है। उतनी ही मासूमियत के साथ ये कह दिया जाता है कि ये सबसे बड़ी घटना थी और सबके केन्द्र में ‘दक्षिणपंथी विचारधारा’ को रख दिया जाता है। हाँ, है दक्षिणपंथी विचारधारा, और तुम्हारे कामपंथी, आतंकी, दोगले वामपंथ से ज़्यादा समय तक रहेगा।

बाबरी मस्जिद में किसी ने मूर्तियाँ रखी तो इतिहास और भूगोल गिन रहे हो, अयोध्या में राम जन्मभूमि पर कोई पूरी मस्जिद रख गया, उसका क्या? तुम्हें आतंक की याद हिन्दुओं द्वारा मूर्ति रखते हुए ही आती है? 6 दिसम्बर अगर भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन है, तो फिर जिस-जिस दिन मंदिर तोड़े गए, बस्तियों में आग लगी, बलात्कार हुए, नरसंहार हुए, और उनके आकाओं ने उन जगहों पर न सिर्फ मस्जिद उठा दिए, बल्कि उनके नाम बदल डाले, उनकी पहचान छीनकर एक विदेशी बुर्क़े से ढक दिया, उन दिनों को कौन सा रंग दोगे?

शर्म करो बे चिरकुटों के सरगना! थोड़ी तो शर्म कर लोग अगर बची हो तो। तुम चाहे जितना पिनपिना लो, जितनी खुजली मचा लो, अगर बाबरी विध्वंस आतंकी घटना थी, तो ऐसी तमाम आतंकी घटनाओं के समक्ष मैं इस्लामी आतंक की हर तारीख़ को रखकर तोलूँगा। क्योंकि तुम्हारी समझ में अगर भारतीय समाज की शुरुआत पचास के दशक से होती है, तो तुम्हें ये बताना ज़रूरी है कि देश इस्लामी बलात्कारियों, लुटेरे अंग्रेज़ों और दोगले वामपंथियों से पहले भी था, और आगे भी रहेगा।

तुम बस छटपटाओ, बिलबिलाओ, कुथते रहो। तुम्हारी हर फ़र्ज़ी डिजिटल आउटरीच और नक़ाब के पीछे का सच प्रेस क्लब की शामों और निजी ज़िंदगी में आइने के सामने निकलकर आ ही जाता है। तुम्हारे जैसे नमकहरामों और आतंकियों के हिमायतियों की रेंगती, रीढ़हीन ज़िंदगियों पर राह चलते थूकना चाहिए लोगों को। जिनके लिए इतिहास ही बाबरी मस्जिद के निर्माण के साथ शुरू होता है, वो क्या जानते नहीं कि सनातन और हिन्दुओं का गौरवशाली इतिहास कई हजार वर्ष पुराना है?

लोगों का कहना है कि असलियत तो ये है कि असदुद्दीन ओवैसी या अन्य कट्टरपंथी मुस्लिम ‘ गजवा-ए-हिन्द’ के ख्वाब से बाहर नहीं निकल पाए हैं और शायद इसीलिए जब वो कई सालों से न्यायालय के फैसले को मानने की बातें कर रहे थे, अब उनका सुप्रीम कोर्ट पर भी भरोसा नहीं रहा। अब जब सुप्रीम कोर्ट में चीजें स्पष्ट हो गई हैं और वहाँ राम मंदिर का निर्माण प्रारंभ हो चुका है, संविधान को मानने वाले कुछ लोगों की शरीयत वाली मानसिकता जा ही नहीं रही।

याद दिलाने को तो लोग असदुद्दीन ओवैसी को ये भी याद दिला रहे हैं कि जब उनके मजहब का कोई अस्तित्व ही नहीं था, तब अयोध्या में राम मंदिर हुआ करता था। जिस मंदिर को अवैध तरीके से तोड़ा गया, वहाँ आज संवैधानिक तरीके से मंदिर बन रही है तो दिक्कत क्यों? असदुद्दीन ओवैसी अपने बच्चों को ये नहीं याद दिलाएँगे कि अयोध्या, मथुरा और काशी अखंड भारत की आध्यात्मिक राजधानियों की तरह थे, हजारों वर्षों तक।

क्या वो अपने बच्चों को याद नहीं दिलाएँगे कि सूर्यवंशी राजा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने जहाँ राज किया था, आज भी उनमें आस्था रखने वाले राष्ट्र के लिए वो जगह उनकी भक्ति का सबसे बड़ा केंद्र है। क्या वो अपने बच्चों को ये नहीं याद दिलाएँगे कि एक स्वाभिमानी राष्ट्र की अपनी संरचनाओं को तोड़ कर गुलामी की याद दिलाने वाले ढाँचे बना दिए थे? और इन सब में कितनों का खून बहा, इसका तो अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है।

अपने बच्चों को तथाकथित अन्याय की याद दिलाने का दावा करने वाले लोग अपने पूर्वजों की करतूतों के बारे में अपनी अगली जनरेशन को बताएँगे भी या नहीं? या फिर वही वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से पढ़ाया जाता रहेगा कि अकबर महान था और अयोध्या बाबरी की वजह से ही पूरी दुनिया में विख्यात था? मुग़ल कहाँ से आए थे? बाबर का जन्म कहाँ हुआ था? तैमूर और चंगेज खान के वंशजों के बारे में अपने बच्चों को नहीं बताएँगे?

हिन्दुओं को अपने बच्चों को बताना चाहिए कि किस तरह ‘चोरी, ऊपर से सीनाजोरी’ के कहावत को चरितार्थ करते हुए इस देश में कुछ लोगों ने जहाँ हजारों मंदिरों का ध्वंस करने वालों का गुणगान भी किया और जब हिन्दुओं ने अपने खिलाफ हुए अन्याय को याद करते हुए बार-बार बलिदान देकर एक मामले में न्याय प्राप्त किया, तो उलटा उन्हें ही असहिष्णु कहा गया। अभी तो हजारों मंदिर हैं, जिनके ऊपर विदेशी ढाँचे बना दिए गए हैं। अभी तो न्याय की उम्मीद जगी है, पूरा न्याय तो बाकी है।

‘एक दिन बाबरी का उदय होगा’: DM-SP ऑफिस से लेकर आस्था मंदिर तक, बिहार के कई शहरों में PFI के भड़काऊ पोस्टर

कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) ने बिहार के कई शहरों में भड़काऊ पोस्टर लगाए हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पोस्टर कटिहार, पूर्णिया और दरभंगा में लगाए गए हैं। पोस्टर पर बाबरी मस्जिद के तीन गुंबद बने हुए हैं और इस पर लिखा है, “एक दिन बाबरी का उदय होगा। हम 6 दिसंबर 1992 को कभी नहीं भूल पाएँगे।”

रिपोर्टों के अनुसार कटिहार जिला में कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार, एसपी और जिलाधिकारी दफ्तर के सामने ये पोस्टर लगाए गए हैं। पूर्णिया में जेल चौक और आस्था मंदिर के नज़दीक भी इसी तरह के पोस्टर लगे हैं। साथ ही दरभंगा के भी कई क्षेत्रों में इस तरह के पोस्टर देखने को मिले हैं। इन सभी पोस्टर में पीएफ़आई के दिल्ली दफ्तर का पता दिया गया है।

कटिहार के एसपी विकास कुमार ने कहा, “हमें सूचना मिली थी कि कई प्रशासनिक जगहों पर विवादित पोस्टर लगाए गए हैं। हमने इसकी जाँच शुरू कर दी है। फ़िलहाल पुलिस इस घटना के बाद अलर्ट पर है।”

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी दरभंगा में PFI ने पोस्टर लगाकर फैसले का विरोध किया। उन पोस्टरों पर भी उकसाने वाली बातें लिखी थी।

सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और विदेशी फंडिंग को लेकर हाल ही में पीएफआई के कई ठिकानों पर देशभर में छापेमारी की गई है। इस दौरान बिहार में भी छापे पड़े थे। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दरभंगा के सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत शंकरपुर में पीएफ़आई के जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद सनाउल्लाह के घर छापा मारा था। यह छापा सीएए और एनआरसी विरोधी प्रदर्शन के दौरान फंडिंग को लेकर मारा गया था। फ़िलहाल ईडी इस संबंध में पीएफ़आई के अन्य सदस्यों से पूछताछ कर रही है। ईडी की कार्रवाई के दौरान सनाउल्लाह अपने आवास पर नहीं था।    

इसके अलावा पूर्णिया के केहाट सहायक थाना क्षेत्र स्थित लाइन बाज़ार राजाबरी चौक के पीएफ़आई कार्यालय में भी गुरुवार को लगभग 8 घंटे तक छापामारी की कार्रवाई चली थी। ईडी की 4 सदस्यों की टीम के छापे की जानकारी मिलते ही वहाँ सैकड़ों लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई थी और हंगामा करने लगे थे। हंगामे के बावजूद ईडी ने कार्रवाई की और कई अहम दस्तावेज़ बरामद किए थे।   

बता दें कि पीएफ़आई और एसडीपीआई अपनी अराजक गतिविधियों, आपराधिक कृत्यों, जबरन धर्मांतरण और देश विरोधी गतिविधियों की वजह से संदेह और जाँच के दायरे में रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ईडी ने 9 राज्यों के कुल 26 ठिकानों पर छापेमारी का अभियान चलाया था।   

B.Com वाला मो. शारिक और B.Tech कर रहा मुनीर अहमद गिरफ्तार: संघियों का सर काटना चाहते थे दोनों

मंगलुरु पुलिस ने ग्राफिटी बनाने के संबंध में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। इन्होंने पिछले सप्ताह शहर के विभिन्न हिस्सों में लश्कर-ए-तैयबा और तालिबान जैसे इस्लामी आतंकवादी संगठनों के समर्थन में ग्राफिटी बनाया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलुरु पुलिस ने मोहम्मद शारिक और मज्ज मुनीर अहमद नाम के दो अपराधियों को गिरफ्तार किया है। दोनों को तीर्थहल्ली से गिरफ्तार किया गया है।

22 वर्षीय मोहम्मद शारिक ने बीकॉम पूरा किया है और तीर्थहल्ली में कपड़े की दुकान चला रहा है। वहीं एक अन्य आरोपित मज्ज मुनीर अहमद वर्तमान में मंगलुरु के एक निजी कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। पुलिस ने बताया कि आरोपित मुनीर अहमद मंगलुरु में ऑनलाइन फूड डिलीवरी एजेंट के रूप में काम करता था।

इससे पहले कर्नाटक के मेंगलुरु में एक अपार्टमेंट की दीवारों पर संघियों और मनुवादियों को धमकी भरी भयावह बातें लिखने के मामले में पुलिस ने गुरुवार (दिसंबर 3, 2020) को एक मोहम्मद नजीर नामक युवक को गिरफ्तार किया था। सोशल मीडिया पर आरोपित को जॉमेटो का डिलीवरी ब्वॉय बताया गया।

मेंगलुरु में 28 नवंबर को पुलिस चौकी की दीवार पर एक ग्राफिटी देखी गई थी। इसमें लिखा था, “गुस्ताख़-ए-रसूल की एक ही सज़ा, सर तन से जुदा।” 

इसके अलावा इससे पहले एक अपार्टमेंट की दीवार पर लिखा गया था, “हमें इस बात के लिए मजबूर नहीं किया जाए कि हमें संघियों और मनुवादियों का सामना करने के लिए लश्कर-ए-तैय्यबा और तालिबान की मदद लेनी पड़े।” आगे लश्कर के समर्थन में लिखा था, “‘लश्कर जिंदाबाद।”

मामले के उजागर होने के कुछ समय बाद ऑपइंडिया ने इस संबंध में पुलिस से बात की थी। पुलिस ने हमें तब विस्तार से जानकारी देते हुए कहा था कि पहली ग्राफिटी मेंगलुरु के सर्किट रोड स्थित अपार्टमेंट पर बनाई गई। जिसके बाद कदरी पुलिस थाने ने इस प्रकरण के संबंध में मामला दर्ज कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जाँच शुरू किया गया।

मंगलुरु पुलिस कमिश्नर विकाश कुमार ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि आरोपी ने पब्लिसिटी हासिल करने के लिए इस तरह का अपराध किया। गौरतलब है कि पिछले दिनों मेंगलुरू की दीवारों पर लिखी गई ये बातें बिलकुल ऐसी थीं, जैसे पाकिस्तान के लोग फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के विरोध में उतरे थे।

तहरीक-ए-लब्बैक (TLP) के हज़ारों समर्थक फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के विरोध में रावलपिंडी की सड़कों पर उतरे थे। उनका विरोध इस मुद्दे पर था कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने पैगंबर मोहम्मद का कार्टून बनाने के अधिकार का बचाव किया था। 

आतंकियों से संबंध का जिस पर है आरोप, जो हो चुका है इसी कारण गिरफ्तार… उसके घर गईं महबूबा मुफ्ती

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती खुल कर उन लोगों का समर्थन कर रही हैं, जिन पर आतंकियों के साथ सम्बन्ध के आरोप हैं। अब वो शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को अपनी बेटी इल्तिजा मुफ़्ती के साथ वहीद उर रहमान पारा के घर पहुँचीं। वहीद उर रहमान पारा उनकी पार्टी PDP की युवा शाखा के अध्यक्ष हैं। उन्हें हाल ही में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने आतंकियों के साथ सम्बन्ध के आरोपों में गिरफ्तार किया।

जम्मू कश्मीर में हो रहे DDC चुनाव में भी ‘गुपकार गैंग’ ने वहीद को अपना उम्मीदवार बनाया है। महबूबा मुफ़्ती उनके घर पर लगभग आधे घंटे तक रहीं और परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान PDP के कई नेता और स्थानीय कार्यकर्ता भी उनके साथ रहे। महबूबा मुफ़्ती ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वो वहीद की जीत सुनिश्चित करें। हालाँकि, उन्होंने वहाँ मौजूद मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया।

महबूबा मुफ़्ती ने इससे पहले शुक्रवार (नवंबर 27, 2020) को पुलवामा जाने का प्रयास किया था, लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई। वाहिद उर रहमान पारा को NIA पूछताछ के लिए दिल्ली लेकर गई थी, जहाँ उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। आरोप है कि वहीद ने 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान आतंकियों की मदद ली थी। गिरफ्तार निलंबीर DSP देवेंद्र सिंह से भी उनके सम्बन्ध सामने आए थे।

NIA द्वारा गिरफ्तार हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकियों नवीद बाबू और इरफान शफी मीर से पूछताछ के दौरान पता चला था कि इनके वहीद के साथ सम्बन्ध हैं। जब संसद में अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने वाला विधेयक पेश किया गया था, तब सुरक्षा कारणों से हिरासत में लिए गए नेताओं में वहीद भी शामिल थे। उन्हें फ़रवरी 2020 में रिलीज किया गया था। इसके बाद 2 महीनों तक उन्हें हाउस अरेस्ट में रखा गया था।

हालाँकि, वाहिद को जिस मामले में गिरफ्तार किया गया है, वो 2018 का है। इसीलिए, स्पष्ट हो जाना चाहिए कि ये उनके हिरासत में रहने की अवधि के दौरान का कोई मामला नहीं है। महबूबा मुफ़्ती का कहना है कि ये आरोप गलत हैं और PDP सहित जम्मू कश्मीर की मुख्यधारा की अन्य राजनीतिक पार्टियों को धमकाने और उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए ये कार्रवाई की गई है। उन्होंने न्यायपालिका से वहीद की रिहाई की माँग की।

PDP ने आरोप लगाया है कि वहीद का क्षेत्र पुलवामा रहा है और वो वहीं से DDC के चुनाव में उतरे थे। पार्टी ने भाजपा पर राज्य की राजनीतिक प्रक्रिया को क्षति पहुँचाने का आरोप लगाया। पार्टी ने इसके लिए RSS तक को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि नई दिल्ली उनकी ‘आवाज़ दबाने की कोशिश’ कर रहा है। वाहिद लम्बे समय से अनुच्छेद-370 के समर्थक रहे हैं और सरकार के खिलाफ बयानबाजी करते रहे हैं।

हाल ही में रोशनी लैंड स्कैम में भी जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और PDP की मुखिया महबूबा मुफ्ती का नाम सामने आया। ये लैंड स्कैम अपने-आप में प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला है। गरीबों को शासित जमीन मुहैया कराने और प्रदेश में बिजली लाने के लिए जिस कानून को बनाया गया था, जम्मू कश्मीर के नेताओं ने उसका जम कर फायदा उठाया और अकूत धन-संपत्ति अर्जित की। जबकि जनता गरीब ही बनी रही।

‘बाबरी मस्जिद दोबारा बनाएँगे’ से लेकर SC पर शक-आरोप… कट्टरपंथी इस्लामी ट्रेंड करा रहे #BabriYaadRahega

बाबरी मस्जिद विध्वंस को आज 28 साल पूरे हो चुके हैं। 6 दिसंबर 1992 को लाखों कारसेवकों की भीड़ ने श्रीराम जन्मभूमि, अयोध्या स्थित विवादित ढाँचा गिरा दिया था। ऐसा विध्वंस जो सुनियोजित नहीं था, उसकी सालगिरह के मौके पर कट्टरपंथी इस्लामी ट्विटर पर #BabriYaadRahegi (बाबरी याद रहेगी) हैशटैग ट्रेंड करा रहे हैं और हिन्दुओं पर नफ़रत भरी टिप्पणियाँ कर रहे हैं।

कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) ने विवादित ढाँचे की स्मृति में एक पोस्टर साझा किया। इस पोस्टर में लिखा है, “एक दिन बाबरी का उदय ज़रूर होगा” और “हम इसे भूल नहीं सकते हैं।” इस पोस्टर को पीएफ़आई के तमाम समर्थक साझा कर रहे हैं और इसके साथ ही #BabriYaadRahegi हैशटैग का इस्तेमाल भी कर रहे हैं।

इसके अलावा तमाम कट्टरपंथी इस्लामी भी इस तरह के नफ़रत भरे ट्वीट कर रहे हैं। सिराज अहमद नाम के ट्विटर यूज़र ने कारसेवकों को आतंकवादी कहा और आरोप लगाया कि भारतीय न्यायपालिका न्याय दिलाने में असफल रही है। 

वहीं कुछ ने इसे लोकतांत्रिक देश के लिए शर्म का विषय बताया और कहा कि वह अपने बच्चों को बताएँगे कि कैसे बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ। इसके अलावा कुछ का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम मंदिर निर्माण का आदेश अन्यायपूर्ण था। 

एक सोशल मीडिया यूज़र ने आरोप लगाया कि उद्देश्य राम जन्मभूमि पर ढाँचा गिराने का नहीं था बल्कि मस्जिद का विध्वंस करना था। जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय की एक छात्रा आफरीन फातिमा ने कहा, “बाबरी थी, बाबरी है, बाबरी रहेगी।”

जनवरी 2020 में आफरीन ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को गलत ठहराया था और सीएए-एनआरसी के विरोध प्रदर्शन में भाषण देते हुए अफज़ल गुरु को निर्दोष बताया था। आफरीन इन विरोध प्रदर्शन की वजह से फरवरी 2020 के दौरान हुए हिन्दू विरोधी दंगों का मुख्य चेहरा भी थी। 

9 नवंबर को सुनाया गया था ऐतिहासिक फैसला

9 नवंबर 2019 को विवादित ज़मीन हिन्दुओं को देते हुए रामलला विराजमान के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि केंद्र सरकार भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट बनाए, जिसके बाद फरवरी 2020 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बनाया गया था। 5 अगस्त 2020 को श्रीराम जन्मभूमि पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, तमाम नेताओं और संतों की मौजूदगी में भूमिपूजन कराया गया था। आगामी दो वर्षों में श्रीराम मंदिर का निर्माण पूरा हो जाएगा।     

अशोक गहलोत की सरकार फिर से संकट में? कहा – ‘BJP कर रही राजस्थान सरकार गिराने का प्रयास’

कुछ महीने पहले ही राजस्थान कॉन्ग्रेस में शीर्ष नेतृत्व के बीच लंबा संघर्ष चला था। सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच राजनीतिक खींचतान का लंबा दौर चला था। इसी कड़ी में अब फिर से राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा पर उनकी सरकार गिराने के प्रयास का आरोप लगाया है। भाजपा ने इस मुद्दे पर जवाब देते हुए कहा है कि अशोक गहलोत सरकार चलाने में पूरी तरह असफल रहे हैं। वह अपनी हताशा के चलते इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। 

सिरोही जिला के शिवगंज नगर स्थित पार्टी के नए कार्यालय का उद्घाटन करते हुए अशोक गहलोत ने भाजपा पर तमाम आरोप लगाए। राजस्थान के मुख्यमंत्री के मुताबिक़, “यह लोग (भाजपा) निर्वाचित सरकारों को गिराने का प्रयास करते हैं। राजस्थान में फिर से वही खेल शुरू कर चुके हैं और यही इनकी मानसिकता है। लोग तो यह भी कह रहे हैं कि ये लोग महाराष्ट्र सरकार को निशाना बना रहे हैं।” 

इस आभासी आयोजन (वर्चुअल इवेंट) के दौरान ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी के जनरल सेक्रेट्री अजय माकन और प्रदेश कॉन्ग्रेस के मुखिया गोविंद सिंह दोतासरा भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा पर आरोप लगाया, “भाजपा ने पहले भी रुपयों की मदद से सरकार गिराने का प्रयास किया है। सभी ने देखा था कैसे धर्मेंद्र प्रधान और सैय्यद ज़फर की मौजूदगी में तमाम विधायक गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे। बैठक घंटों चली थी। बैठक के बाद विधायकों का कहना था कि वह इस बात से शर्मिंदा थे कि गृह मंत्री मिठाई और नमकीन दे रहे हैं।” 

अशोक गहलोत का कहना था कि रणदीप सुरजेवाला, अजय माकन, केसी वेणुगोपाल और अविनाश पांडे ने पूरे राज्य में अभियान चलाया। साथ ही लगातार प्रयास किया कि सरकार पूरी तरह सुरक्षित रहे।

अशोक गहलोत का जवाब देते हुए भाजपा विधायक और पार्टी प्रवक्ता राम लाल शर्मा ने कहा, “भाजपा ने सरकार गिराने का प्रयास कभी नहीं किया। जो कुछ भी हुआ था, उसकी वजह सिर्फ और सिर्फ कॉन्ग्रेस की आंतरिक कलह थी। अगर मुख्यमंत्री को अपने विधायकों पर संदेह है, तो वह उन पर जाँच का आदेश क्यों नहीं देते हैं। राजस्थान सरकार को किसी भी तरह का नुकसान होता है, तो उसका कारण भीतरी कलह होगी।” 

राजस्थान में आए राजनीतिक संकट के दौरान सचिन पायलट को डिप्टी सीएम के पद से हटा दिया गया था और उनके गुट के दो मंत्रियों को भी मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। इस बीच अशोक गहलोत सचिन पायलट पर खुल कर हमला किया था। सीएम अशोक गहलोत ने कहा था कि उनके यहाँ उपमुख्यमंत्री खुद ही डील कर रहे हैं। सरकार के खिलाफ षड्यंत्र में उपमुख्यमंत्री खुले रूप से शामिल हैं। 

सचिन पायलट पर हमला बोलते हुए अशोक गहलोत ने कहा था, “अच्छी अंग्रेजी बोलना, अच्छी बाइट देना और खूबसूरत (हैण्डसम) होना सब कुछ नहीं है। देश के लिए आपके दिल में क्या है, आपकी विचारधारा, नीतियाँ और प्रतिबद्धता, यह अहम है।” इसके पहले अशोक गहलोत ने सचिन पायलट का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए कहा था कि उनके सिवा कोई और प्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं बनाया जा सकता था। उन्होंने कहा था कि विधानसभा चुनाव में ग्रामीण लोगों की यह भावना थी कि वे (अशोक गहलोत) ही मुख्यमंत्री बनें।    

   

8 लेन का मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे: तब शिवसेना ने फडणवीस के ड्रीम प्रोजेक्ट का किया था विरोध, अब उद्धव करेंगे उद्घाटन!

जहाँ पूरे देश की मीडिया कई मुद्दों पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर बहस में जुटी है, वहीं महाराष्ट्र में मुंबई और नागपुर के बीच का सफर अब सड़क से 8 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इस एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यकाल में शुरू किया गया था और पूरे प्रोजेक्ट का खाका भी खींचा गया था। हालाँकि, इसके उद्घाटन के समय उद्धव ठाकरे सीएम हैं और फडणवीस राज्य में नेता प्रतिपक्ष हैं।

शनिवार (नवंबर 5, 2020) को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने जानकारी दी कि मुंबई-नागपुर समृद्धि एक्सप्रेस वे का नागपुर से लेकर शिरडी वाला हिस्सा मई 1, 2021 को जनता के लिए खोल दिया जाएगा और उस दिन से आवागमन शुरू हो जाएगा। इस 8 लेन के एक्सप्रेसवे को 55,000 करोड़ रुपए की कीमत से बनाया जा रहा है। ये कुल 701 किलोमीटर का है। फ़िलहाल मुंबई से नागपुर की दूरी तय करने में 18 घंटे लगते हैं।

मई 2018 में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने इस एक्सप्रेसवे के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके कंस्ट्रक्शन अग्रीमेंट को तब मंजूर किया गया था। इस प्रोजेक्ट के द्वारा 392 गाँवों और 26 तालुका को तो जोड़ा ही जा रहा है, साथ ही 14 पर्यटन स्थलों को भी आपस में जोड़ा जा रहा है। इन सबके बीच 17 इंडस्ट्रियल इलाके भी विकसित किए जा रहे हैं। इसके लिए महाराष्ट्र ट्रांसपोर्ट विभाग को 8603 हेक्टेयर जमीन की जरूरत पड़ी।

इस एक्स्प्रेसवे में आधुनिक कम्युनिकेशन फैसिलिटी होंगी और ये अमरावती और औरंगाबाद से होकर गुजरेगी। इसके बीच में आईटी पार्क्स, स्मार्ट सिटीज और कई शिक्षा संस्थान भी स्थापित किए जा रहे हैं। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नागपुर से ही आते हैं और उनके परिवार का यहाँ के म्युनिसिपल चुनावों में लम्बे समय तक दबदबा रहा है। RSS का मुख्यालय और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का क्षेत्र भी यही है।

मुंबई-नागपुर समृद्धि कॉरिडोर को देवेंद्र फडणवीस का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जाता है। तब जिस शिवसेना ने इसका विरोध किया था, अब उसके ही मुखिया इसका उद्घाटन करने की बाट जोह रहे हैं। तब शिवसेना ने कहा था कि इससे जमीन का अधिग्रहण होगा और आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या बढ़ेगी। अब उद्धव ठाकरे कह रहे हैं कि वो इस प्रोजेक्ट पर गर्व महसूस कर रहे हैं। तब शिवसेना ने इस प्रोजेक्ट के लिए NDA सरकार के इरादों पर सवाल खड़ा किया था, जबकि वो खुद सरकार में शामिल थी।

दिलजीत दोसाँझ का UK मैनेजर और भंग कर दी गईं 9 कम्पनियाँ… किसान आंदोलन के पीछे लंदन का खालिस्तानी?

एक व्यक्ति हैं, काका सिंह मोहनवालिया। वो अपने ट्विटर बायो में अपने काम के बारे में दो चीजें लिखते हैं – पहली ये कि वो यूनाइटेड किंगडम (UK) में पंजाबी गायक दिलजीत दोसाँझ के मैनेजर हैं। दूसरी बात ये लिखते हैं कि वो ‘धर्म सेवा रिकार्ड्स’ नामक ट्रस्ट के स्वयंसेवक हैं। दिलजीत दोसाँझ फ़िलहाल चर्चा में भी हैं। ‘किसान आंदोलन’ को लेकर उनका रुख और कंगना रनौत से बहस को लेकर उन्हें खूब मीडिया फुटेज मिल रही है। अब उनके यूके मैनेजर काका का नाम सामने आया है। साथ ही 9 ऐसी कम्पनियाँ सामने आई हैं, जिनके डिटेल्स चौंकाने वाले हैं।

काका सिंह मोहनवालिया का ट्विटर हैंडल

हमने जब ‘धर्म सेवा रिकार्ड्स’ ट्रस्ट की वेबसाइट खोली तो इस पर बताया गया है कि ये एक चैरिटी म्यूजिक लेबल है, जिसमें ‘धार्मिक म्यूजिक’ के लिए बिना कोई रकम लिए दुनिया भर में 60 स्वयंसेवक सेवाएँ दे रहे हैं। इस पर बताया गया है कि ये यूके रेजिस्टर्ड चैरिटी है, जो लाभ नहीं कमाता है। धार्मिक म्यूजिक के प्रमोशन, पहचान और प्रचार का दावा करता है। इस पर लिखा है कि कई पंजाबी गायकों के अलावा दिलजीत दोसाँझ भी इससे जुड़े हुए हैं।

‘धर्म सेवा रिकार्ड्स’ की वेबसाइट पर दिलजीत दोसाँझ का नाम

ट्विटर पर विजय पटेल नामक यूजर ने कुछ ऐसी कंपनियों की तरफ ध्यान दिलाया है, जिनका नाम ‘डरहम सेवा रिकार्ड्स’ ट्रस्ट से मिलता-जुलता है और साथ ही उन सभी कम्पनी के प्रमुख लोगों के नाम भी अधिकतर में समान ही हैं। कुछेक में कम्पनी का आधिकारिक पता समान ही है। उनका आरोप है कि संदीप सिंह खाख पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री का मास्टरमाइंड है और लगभग सभी पंजाबी गायक उससे संपर्क में रहते हैं।

सबसे पहले उन 7 कंपनियों की बात करते हैं, जो इसी ट्रस्ट से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। सबसे पहले बात ‘धर्म सेवा लिमिटेड’ की, जिसका पता ‘1 St. Davids Close, Leamington Spa, Warwickshire, CV31 1NN’ है और जनवरी 23, 2013 में बनी इस कम्पनी को जुलाई 5, 2016 में भंग कर दिया गया। इसके अधिकारियों में संदीप सिंह खाख और गुरमीत सिंह का नाम है। संदीप सिंह पेशे से इंजीनियर बताए गए हैं।

‘धर्म सेवा लिमिटेड’ – भंग कर दी कई कम्पनी

अब बात करते हैं ‘डरहम सेवा रिकॉर्ड्स लिमिटेड’ नामक कम्पनी की, जिसे सितम्बर 2, 2013 में बनाया गया और मई 3, 2016 में भंग कर दिया गया। पता वही है, जो पहली वाली कम्पनी का था। वही संदीप सिंह खाखा का नाम इसमें भी है, जो ‘धर्म सेवा लिमिटेड’ का अधिकारी था। इस बार वो ‘इंजीनियर’ से ‘डायरेक्टर’ बन गया है। साथ ही उसकी राष्ट्रीयता पहले की तरह ही ब्रिटिश बताई गई है और निवास यूके।

इसी नाम से बनी दूसरी कम्पनी में भी उसी व्यक्ति का नाम

अब ‘Famous STD LTD’ नामक तीसरी कम्पनी की तरफ आते हैं, जिसे अगस्त 9, 2016 को बनाया गया और इसे जनवरी 16, 2018 को ख़त्म कर दिया गया। इस कम्पनी के नाम में न ‘धर्म’ है और न ही ‘सेवा’, फिर भी ये उनसे मिलती-जुलती कैसे है, आइए बताते हैं। क्योंकि इसके अधिकारियों में उसी संदीप सिंह खाख और किसी ‘दिलजीत सिंह’ का नाम है। दिलजीत का जन्मदिन जनवरी 1984 बताया गया है।

ज्ञात हो कि गायक दिलजीत दोसाँझ का जन्म भी जनवरी 1984 में ही हुआ था। बताया गया है कि इस ‘दिलजीत सिंह’ ने सितम्बर 2016 में कम्पनी के डायरेक्टर के पद से इस्तीफा दे दिया। इस कम्पनी के बारे में बताया गया है कि ये मोशन पिक्चर और साउंड रिकॉर्डिंग का काम करती है। यानी, म्यूजिक से जुड़ी कम्पनी ही थी ये भी। विजय पटेल ने जो दावा किया, वो कंपनियों की इन्फो देने वाली वेबसाइट पर सही निकला।

खाख संदीप सिंह और दिलजीत सिंह का नाम

अब विजय पटेल द्वारा बताई गई चौथी कम्पनी की तरफ आते हैं। ‘BUILDAGE LIMITED’, इसे भी मात्र एक साल के लिए चलाया गया और फिर भंग कर दिया गया। इस कम्पनी के अधिकारियों में खाख संदीप सिंह के साथ-साथ बलजीत सिंह और अमृत सिंह का नाम है। कम्पनी का पता वही है, जो तीसरी कम्पनी का था। कम्पनी का नेचर बताया नहीं गया है। इस बार खाख संदीप सिंह इंजीनियर या डायरेक्टर नहीं, ‘Self Employed’ है।

चौथी कम्पनी, जिसका पता समान है, अधिकारी वही है

अब पाँचवीं कम्पनी पर आते हैं। इसका नाम है ‘ATMA TEAS LTD’ और इसका भी पता वही है। इसे मई 28, 2015 में रजिस्टर किया गया और सितम्बर 5, 2017 के बाद से ये कम्पनी अस्तित्व में नहीं है। इस बार संदीप सिंह खाख के साथ-साथ रमणीक पाल सिंह रंधावा का भी अधिकारी के रूप में नाम है। इसका पता वही है, जो पिछली दो कंपनियों का था- ‘112 Office 112 Oxford Street, Leamington Spa, Warwickshire, England, CV32 4RB’।

उसी पते पर, उसकी व्यक्ति की – एक और कम्पनी

अब छठी कम्पनी की बात करते हैं, जिसका नाम है ‘FLAMESKY LIMITED’ और इसे भी सितम्बर 23, 2013 को बनाया गया और मई 12, 2015 को भंग कर दिया गया। इसका पता ‘1 St. Davids Close, Leamington Spa, Warwickshire, United Kingdom, CV31 1NN’ वही है, जो पहली वाली कम्पनी का था और जो संदीप सिंह खाख का भी पता बताया गया था। कम्पनी के अधिकारी के रूप में भी उसका नाम है।

खाख संदीप सिंह की छठी कम्पनी

अब बात विजय पटेल द्वारा बताई गई सातवीं कम्पनी के बारे में। इसे लेकर भी हमने पुष्टि के लिए कम्पनी इन्फो देने वाली वेबसाइट पर सर्च किया। ‘SPEED RECORDS LIMITED’ नामक ये कम्पनी सितम्बर 19, 2011 में बनी और सितम्बर 9, 2014 में भंग कर दी गई। इसमें संदीप सिंह खाख के अलावा दिनेश और बारबरा नामक व्यक्तियों के नाम हैं। हाँ, इसका पता ज़रूर बाकी की कंपनियों से अलग है।

सातवीं कम्पनी, जो बनी और भंग कर दी गई

इसके अलावा दो और कम्पनियाँ ‘SPEED UK RECS LTD’ और ‘SPEED UK RECORDS LTD’ के बारे में भी विजय पटेल ने बताया है, जिनके स्क्रीनशॉट्स भी दिए हैं। हमारे सर्च करने के बाद इन कंपनियों के बारे में दिए गए इन्फो भी सही निकले। इनके साथ भी उसी संदीप सिंह खाख का नाम जुड़ा हुआ है और इन दोनों को 2013 में बना कर 2015 में भंग कर दिया गया। अब बात करते हैं पटेल के आरोपों की।

उन्होंने आरोप लगाया है कि खाख संदीप सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट का मास्क लगा कर खालिस्तानी एजेंडे को बढ़ावा दे रहा है। साथ ही वो अपना और अपने ट्रस्ट के सोशल मीडिया हैंडल्स का इस्तेमाल भी ‘किसान आंदोलन’ को लेकर लोगों को भड़काने के लिए कर रहा है। साथ ही सभी पंजाबी गायकों के उसके साथ काम करने की बात भी कही। पटेल ने आरोप लगाया कि उनकी ट्वीट्स के बाद उसने अपना ट्विटर बायो भी बदला और बन्दूक के साथ पोस्ट की गई तस्वीर हटा दी।

विजय सिंह दावा करते हैं कि ये ‘काका सिंह मोहनवालिया’ ही ‘संदीप सिंह खाख’ है। उन्होंने कई पंजाबी गायकों के साथ एक व्यक्ति की तस्वीर शेयर कर के ये दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये 9 तो बस उदाहरण हैं, लेकिन संदीप सिंह खाख के न जाने कितनी ही फर्जी कम्पनियाँ हैं। उसे यूके के सिख नेटवर्क और सिख फेडरेशन ने अवॉर्ड भी दिया था। एक डिलीट की हुई ट्वीट में वो बन्दूक के साथ दिख रहा है।

अगर इस पूरे मामला का सार समझें तो ‘धर्म सेवा रिकार्ड्स’ एक ट्रस्ट है, जिसके नाम से मिलती-जुलती और जिसके स्वयंसेवक से जुड़ी 9 ऐसी कम्पनियाँ सामने आई हैं, जिन्हें कुछ महीनों के लिए अस्तित्व में लाया गया और फिर भंग कर दिया गया। इन सबमें मोहनवालिया का नाम जुड़ा, जो विजय पटेल के अनुसार खाख ही है। मोहनवालिया खुद को दिलजीत दोसाँझ का यूके मैनेजर बताता है और कई पंजाबी गायकों के साथ उसकी तस्वीरें हैं। हमने मेल लिख कर ट्रस्ट से सम्पर्क किया है, लेकिन अभी तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया है। प्रतिक्रिया आते ही आपको अवगत कराएँगे।

हाल ही में कंगना ने एक ट्वीट में दिलजीत दोसाँझ को ‘करण जौहर का पालतू’ कह डाला। वहीं दिलजीत ने भी जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कंगना ने दिलजीत के एक ट्वीट पर मुँहतोड़ जवाब देते हुए लिखा था, “ओ करण जौहर के पालतू, जो दादी शाहीन बाग में अपनी नागरिकता के लिए आंदोलन कर रही थी वो ही बिलकिस बानो दादीजी किसान आंदोलन के एमएसपी के लिए भी आंदोलन करती हुई दिखीं। महिंदर कौर जी को तो मैं जानती भी नहीं। क्या ड्रामा चलाया है तुम लोगों ने। इसे तुरंत खत्म करो।”