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युवक के साथ मारपीट कर खिलाया मल-मूत्र: छेड़छाड़ के लिए घुसा था लड़की के घर, जाँच में जुटी राजस्थान पुलिस

राजस्थान के धौलपुर में एक शख्स की पिटाई करने और उसके साथ जबरदस्ती करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे वीडियो में 7-8 लोगों के एक समूह को एक आदमी के साथ मारपीट करते हुए देखा गया। इसके बाद उसे मानव मल-मूत्र खिलाने के लिए भी मजबूर किया गया। बताया जा रहा है कि उस शख्स पर लड़की से छेड़छाड़ करने का आरोप है। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

पुलिस के अनुसार, यह घटना 25 नवंबर को हुई थी। 18 वर्षीय व्यक्ति का पिता अपनी पत्नी के साथ शादी में शामिल होने गए थे। इस दौरान वह शख्स घर पर अकेला था। तभी उसे एक लड़की ने कॉल करके अपने घर बुलाया। कथित तौर पर लड़की ने उसे धमकी दी कि अगर वह उसके घर नहीं गया तो वो उसे जान से मार देगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वह शख्स लगभग 1 बजे उसके घर गया। जैसे ही वह वहाँ पर पहुँचा, लड़की के परिवार के सदस्यों ने उस पर बेल्ट और डंडों से हमला कर दिया। मारपीट के दौरान उसे मूत्र पीने और मानव मल खाने के लिए मजबूर किया गया था। पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

युवक के खिलाफ छेड़छाड़ का आरोप

घटना के संबंध में लड़की के परिवार ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। लड़की के पिता ने अपनी शिकायत में कहा कि वह एक सामाजिक समारोह में भाग लेने गए थे। उस दौरान, उनकी बेटी घर पर अकेली थी। आरोपित कथित रूप से उसके घर में घुस गया और लड़की से छेड़छाड़ की। जब उसने भागने की कोशिश की, तो उसने उसकी पिटाई की। लड़की ने चीखना शुरू कर दिया, जिसके बाद परिवार के दो सदस्यों ने भागकर उसे बचाया। लड़की ने अपने परिवार को इस घटना के बारे में बताया, जिसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

सभी एंगल से जाँच कर रही पुलिस

बसारी के थाना प्रभारी बने सिंह ने कहा कि पुलिस को दोनों पक्षों से शिकायत मिली थी। एक पक्ष ने आरोप लगाया है कि युवक को बसेरी के गोटे का पुरा में बुलाया गया था। उसके साथ मारपीट की गई और जबरन मल खिलाया गया। दूसरे पक्ष ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि युवक उनके घर में घुस गया और उनके परिवार की एक लड़की से छेड़छाड़ की। जाँच जारी है।

बरखा ने किए भरपूर जतन, पर दीप सिद्धू ने भिंडरावाले को नहीं माना आतंकी; खालिस्तानी होने के सबूत दिए

बरखा दत्ता कभी भारत सरकार के कैबिनेट में बर्थ मैनेज कर लेती थीं। लेकिन, अबकी बार वह अपने शो के गेस्ट को ही ‘मैनेज’ नहीं कर पाईं। यूँ तो प्रोपेगेंडा पत्रकारिता का उनका पूरा करियर ही फिक्स खबरों पर खड़ा रहा है, लेकिन इस बार वे अपने जाल में ऐसी उलझीं कि इंटरव्यू के दौरान ही बार-बार उनके चेहरे पर एक्टर दीप सिद्धू को चमकाने का ठेका लेने का अफसोस बार-बार झलक रहा था।

किसान आंदोलन के बीच विवादास्पद पत्रकार और यूट्यूबर बरखा दत्त ने खालिस्तान से सहानुभूति रखने वाले अभिनेता और कथितरूप से अपने आप को पीड़ित किसान बताने वाले दीप सिद्धू को मंच प्रदान किया। बता दें दीप सिद्धू का एक वीडियो पिछले दिनों वायरल हुआ था, जिसमें उन्हें अधिकारियों को धमकी देते हुए देखा गया था। वीडियो में उन्होंने कहा था कि किसान प्रदर्शन केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के भू-राजनीति का निर्णायक क्षण होगा।

बरखा दत्त के यूट्यूब चैनल ‘मोजो स्टोरी’ पर प्रसारित इंटरव्यू में सिद्धू ने कुछ ऐसी चौंकाने वाली प्रतिक्रियाएँ दीं, जिसके बारे में बरखा ने सोचा भी नहीं था। बीजेपी के सनी देओल के चुनाव प्रचार से लेकर जरनैल सिंह भिंडरावाले को एक मजबूत फेडरल स्ट्रक्चर के लिए लड़ने वाले सेनानी के रूप में प्रचारित करने तक सिद्धू ने कई ऐसे कई दावे किए जो किसानों के विरोध की वैधता को कम करके आंकते हैं। साथ ही उन्होंने लेफ्ट लिबरल मीडिया द्वारा प्रदर्शन को लेकर प्रचारित किए जा रहे प्रोपेगेंडा को भी धाराशाही कर दिया।

सिद्धू ने साक्षात्कार की शुरुआत में स्पष्ट रूप से बताया कि सितंबर 2020 में किसानों के विरोध-प्रदर्शन की शुरुआत के बाद हिंसा की एक भी घटना नहीं घटित हुई। हालाँकि ऐसा कई बार हुआ है जब किसान का विरोध हिंसक हो गया और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए अधिकारियों को कई बार बल प्रयोग करने के लिए मजबूर किया गया।

वहीं जब बरखा दत्त ने इंटरव्यू के दौरान प्रदर्शन के बारे सिद्धू से पूछा तो पंजाबी अभिनेता ने बेबाकी से इसे देश में कथित रूप से बढ़ती व्यापकता को दर्शाने वाला प्रदर्शन बताया।

इंटरव्यू में जब उनसे किसी राजनीतिक दल से जुड़े होने की बात पूछी गई तो सिद्धू ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उनका किसी राजनीतिक दल के साथ कोई संबंध है, लेकिन फिर भाजपा के सनी देओल से जुड़े होने की बात स्वीकार करते हुए उन्होंने तुरंत अपनी बात वापस ले ली।

सिद्धू ने कहा, “मैं किसी भी राजनीतिक पार्टी से जुड़ा हुआ नहीं हूँ। केवल एक चीज में मैं शामिल था, वह थी गुरदासपुर सीट से भाजपा के मिस्टर देओल (सनी देओल) का राजनीतिक प्रचार, क्योंकि मैं उनके बहुत करीब हूँ और उस दौरान मैं भाजपा के कैंपेन का एक हिस्सा था।”

वहीं सरकार पर ऊँगली उठाते हुए सिद्धू ने आरोप लगाया कि वे जान-बूझकर कर इस प्रदर्शन में हिंसा फैलाने का काम कर रहे है। अभिनेता ने यह भी कहा कि सुरक्षा अधिकारियों ने सार्वजनिक संपत्ति के साथ बर्बरता की थी।

वहीं बरखा दत्त ने ऑपइंडिया का जिक्र करते हुए सिद्धू को उन खबरों के बारे में बताया, जिसमें अभिनेता के खालिस्तान समर्थक होने का दावा किया गया था। हालाँकि विवादास्पद पत्रकार जिस प्रकार का जवाब चाहती थी, वैसा जवाब नहीं मिलने पर उन्हें काफी निराशा हुई। बरखा दत्त के प्रोपेगेंडा के तहत जवाब देने की बजाय पंजाबी अभिनेता ने निजीकरण की बुराइयों पर जोर दिया।

इसके बाद सिद्धू ने जरनैल सिंह भिंडरावाले को एक क्रांतिकारी बताया। इंटरव्यू के दौरान वे भिंडरवाले को आतंकी मानने से इनकार करते रहे। उन्होंने कहा जरनैल सिंह भिंडरावाले ने एक मजबूत फेडरल स्ट्रक्चर के लिए संघर्ष किया था, लेकिन उसके खिलाफ यह नैरेटिव गढ़ा गया कि वह आतंकी है।

वहीं जब इस बात पर बरखा ने सिद्धू को रोका और यह याद दिलाया कि जरनैल सिंह भिंडरावाले आतंकवादी थे, तब सिद्धू ने भिंडरावाले का बचाव करते हुए कहा कि राज्य में उसके खिलाफ नैरेटिव गढ़ा गया कि वह टेररिस्ट है।

सिद्धू ने कहा, “आपको समझने की जरूरत है। आप किताबें पढ़ सकते हैं। 1970 के दशक में राज्य ने नैरेटिव को आकार देने के लिए पावर का इस्तेमाल किया। भिंडरावाले को एक आतंकवादी के रूप में गलत तरीके से पेश किया गया था और उसके खिलाफ पूरी कहानी बनाई गई थी।”

गौरतलब है कि सिद्धू के इस बयान ने बरखा दत्त को हैरानी में डाल दिया। जिस पर बाद में दत्त किसान के प्रदर्शन का सहारा लेते हुए पर्दा डालती नजर आई।

सिद्धू के बयान पर एक गहरी निराशा व्यक्त करते हुए बरखा ने कहा, “मैं यह सोचकर साक्षात्कार करने आई थी कि आप अपने जुनून और दिल से बोल रहे हैं। मैं आपको एक उचित मौका देना चाहती थी, क्योंकि मैं असत्यापित स्रोतों पर विश्वास नहीं करना चाहती थी। मुझे उम्मीद थी कि आप उन रिपोर्ट्स के खिलाफ होंगे जिन्होंने दावा किया था कि आप खालिस्तानी समर्थक हैं। लेकिन यहाँ आप जरनैल सिंह भिंडरावाले का बचाव कर रहे हैं और यह भी कह रहे कि वह आतंकवादी नहीं था।”

उल्लेखनीय है कि बरखा दत्त के कड़े विरोध के बावजूद सिद्धू अपने बयान से पीछे नहीं हेट। बरखा ने यह भी याद दिलाया कि इन्ही लोगों ने अमृतसर में स्वर्ण मंदिर पर कब्जा कर लिया था। लेकिन तब भी सिद्धू अपने रुख पर कायम रहे और बरखा की इस बात को खारिज कर दिया कि आतंकवादियों ने स्वर्ण मंदिर पर कब्जा कर लिया था।

अपनी बात रखते हुए सिद्धू ने यह भी कहा कि पंजाब में रहने वाले 80-90 प्रतिशत लोग भिंडरावाले और स्वर्ण मंदिर पर कब्जा करने वालों को आतंकवादी नहीं मानते हैं। दीप की बातों से नाराज बरखा ने कहा, “मैंने सोचा था कि आप यह कहकर 30 सेकंड खर्च करेंगे कि यह सच नहीं है। मैं जरनैल सिंह भिंडरावाले की निंदा करती हूँ। वह एक आतंकवादी है। उसने पूजा के पवित्र स्थान पर कब्जा किया।”

बरखा ने व्यथित होकर कहा, “मुझे विश्वास नहीं हो रहा है, हम 2 मिनट भिंडरावाले आतंकवादी थे या नहीं, इस पर चर्चा कर रहे हैं।” हालाँकि इतना बोलने के बावजूद पंजाबी अभिनेता ने अपनी जमीन को नहीं छेड़ा और धैर्य से बरखा को बताया कि वह पंजाब की संस्कृति से अनभिज्ञ हैं और उन्होंने दिल्ली के एक स्टूडियो में बैठे-बैठे अपनी राय बनाई है।

बता दें अपने आप को वीडियो में पीड़ित किसान बताने वाला दीप सिद्धू एक खालिस्तानी समर्थक है। सिद्धू ने समय-समय पर खालिस्तान समर्थक समूहों की आतंकवादी गतिविधियों का बचाव किया है।

कुछ हफ़्ते पहले ही दीप सिद्धू ने खालिस्तान समर्थक नारे लगाने वाले का विरोध करने वाले वकील को निष्कासित कर दिया था। दरअसल एक पंजाबी युवक द्वारा मोर्चा में खालिस्तानी नारे लगाने के बाद वकील ने कड़ा विरोध किया था। वकील तुरंत पास में तैनात पुलिसकर्मियों के पास जाकर उसे गिरफ्तार करने को कहा। साथ ही उसके खिलाफ शिकायतकर्ता बनने की पेशकश की थी।

मंदिर में जबरन घुस गया मंजूर अली, देवी-देवताओं और पुजारियों को गाली देते हुए किया Facebook Live

हिन्दू मान्यताओं और देवी-देवताओं के प्रति घृणा का एक मामला तमिलनाडु के पुड्डूचेरी से सामने आया है। यहाँ मंज़ूर अली नाम के व्यक्ति ने जबरन मंदिर में दाखिल होकर हिन्दू देवी-देवताओं के लिए अपशब्द कहे। हिन्दू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक़ आरोपित मंज़ूर ने इस घटना का फेसबुक प्रसारण (facebook live) भी किया। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ हबीब अहमद का बेटा मंज़ूर अली करैकल (Karaikal) के अम्बकरथुर (Ambakarathur) का रहने वाला है। शुक्रवार (27 नवंबर 2020) को उसने पुड्डूचेरी के करैकल में पेरूमल कोविल मार्ग स्थित पर्वथीस्वरार (Parvatheeswarar) मंदिर में घटना को अंजाम दिया। आरोपों के मुताबिक़ उसने मंदिर में दाखिल होते ही मूर्तियों की तस्वीर लेना और वीडियो बनाना शुरू कर दिया। 

इसके कुछ ही देर बार उसने मूर्तियों के लिए अपमानजनक भाषा का उपयोग करते हुए अपशब्द कहना शुरू कर दिए। इतना ही नहीं, उसने ऐसा करते हुए फेसबुक लाइव भी कर दिया। जब मंदिर के पुजारियों और वहाँ मौजूद लोगों ने मंज़ूर अली को रोकने का प्रयास किया, तब उसने उन लोगों से भी गाली गलौच शुरू कर दिया। 

इसके बाद मंदिर के पुजारियों ने इस घटना के संबंध में स्थानीय पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई और साथ माँग भी उठाई कि मंज़ूर अली को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। पुलिस ने मंज़ूर अली पर कार्रवाई करने में सक्रियता दिखाते हुए उसे गिरफ्तार किया और साथ ही उसका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया, जिसमें उसने इस निंदनीय घटना को रिकॉर्ड किया था। इसके साथ ही पुलिस ने घटना के अन्य पहलुओं पर भी जाँच शुरू कर दी है।

‘जो सिर कलम नहीं करते, दंगे और धर्मांतरण नहीं करते, हम उनकी रक्षा कैसे कर रहे हैं:’ वाजिद खान की पत्नी के सपोर्ट में कंगना रनौत

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत हमेशा अपने मुखर बयानों के कारण चर्चा में रहती हैं। अब उन्होंने दिवंगत म्यूजिक कंपोजर वाजिद खान की पत्नी कमलरुख (Kamalrukh) पर परिवार द्वारा धर्म परिवर्तन को लेकर बनाए गए दबाव पर सवाल उठाया है और ट्वीट कर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से पूछा है कि जो लोग दंगे और धर्म-परिवर्तन नहीं करते, उन्हें हम कैसे सुरक्षित रखें?

कंगना रनौत ने धर्म परिवर्तन पर सवाल उठाते हुए तीन ट्वीट किए। उन्होंने पहले ट्वीट में लिखा, “पारसी इस राष्ट्र में वास्तविक रूप से अल्पसंख्यक हैं। वह देश पर कब्जा करने नहीं आए थे, वे साधक के रूप में आए थे और उन्होंने भारत माता का प्यार माँगा था। हमारे देश की सुंदरता, वृद्धि और आर्थिक मामलों में उनकी छोटी सी जनसंख्या ने बहुत बड़ा योगदान दिया है।”

दूसरे ट्वीट में कंगना ने पीएमओ से सवाल करते हुए कहा, “वह मेरे दोस्त की विधवा और एक पारसी महिला है, जिसे उसके परिवार द्वारा धर्म परिवर्तन के लिए परेशान किया जा रहा है। मैं प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से पूछना चाहती हूँ कि अल्पसंख्यक जो नाटक नहीं करते, किसी का सिर कलम नहीं करते, दंगे और धर्मांतरण नहीं करते, हम उनकी रक्षा कैसे कर रहे हैं? पारसियों की संख्या लगातार कम हुई है।”

उन्होंने तीसरे ट्वीट में कहा, “माँ का वो बच्चा जो सबसे ज्यादा ड्रामा करता है उसे अटेंशन और फायदे मिलते हैं। जो ये सब पाने के लायक हैं, जो इसके ज्यादा लायक होते हैं, संवेदनशील होते हैं, उसके लिए एक नैनी (बच्चों का ध्यान रखने वाली) रखी जाती है। हमें आत्मचिंतन की जरूरत है।”

गौरतलब है कि हाल ही में वाजिद खान की पत्नी कमलरुख ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिख कर अपनी भावनाएँ व्यक्त की थी। उन्होंने लिखा था, “मैं पारसी थी और वे मुस्लिम थे। यूँ समझ लीजिए कि हम ‘कॉलेज स्वीटहार्ट्स’ थे। यहाँ तक क‍ि जब हमने शादी की तो स्पेशल मैरिज एक्ट के अंतर्गत की।”

उन्होंने बताया कि उन पर इस्लाम में धर्मांतरण के लिए दबाव डाला जा रहा है और कैसे इस विषाक्त मजहब के खिलाफ उनकी लड़ाई संगीतकार के साथ तलाक के साथ खत्म हुई। कमलरुख ने लिखा कि हालाँकि वह सभी धर्मों को बहुत महत्व देती हैं, लेकिन धर्मांतरण में उन्हें विश्वास नहीं था। उनकी गरिमा और आत्म-सम्मान ने उन्हें उनके और उनके परिवार के लिए इस्लाम में परिवर्तित होने के लिए झुकने की अनुमति नहीं दी।

‘गुस्ताख-ए-रसूल की एक ही सजा, सर तन से जुदा’: मेंगलुरु में अब रंग दी पुलिस चौकी की दीवार

हाल ही में 26/11 आतंकवादी हमले की बरसी के मौके पर कर्नाटक के मेंगलुरु की दीवारों पर भयावह बातें लिखी (ग्राफिटी) हुई थीं। एक बार फिर मेंगलुरु में ठीक इसी तरह की घटना हुई है। जिसमें खुले तौर पर चेतावनी देकर हिंसा और कट्टरपंथ को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस बार तैयार की गई ग्राफिटी में चेतावनी दी गई है कि जो व्यक्ति पैगंबर मोहम्मद के बारे में कुछ भी नकारात्मक कहेगा, उसका सिर शरीर से अलग कर दिया जाएगा। 

इस ग्राफिटी में लिखा है, “गुस्ताख़-ए- रसूल की एक ही सज़ा, सर तन से जुदा।” ग्राफिटी मेंगलुरु स्थित अदालत परिसर की पुरानी पुलिस चौकी की दीवार पर लिखी गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ यह ग्राफिटी संभावित तौर पर शनिवार (28 नवंबर 2020) को लिखी गई थी। 

हाल ही में 2008 में हुए 26/11 के आतंकवादी हमलों की बरसी के मौके पर मेंगलुरु की दीवारों पर चेतावनी दी गई थी कि ‘संघी और मनुवादियों’ को ख़त्म करने के लिए लश्कर-ए-तैय्यबा और तालिबान की मदद ली जा सकती है। 

ग्राफिटी में लिखा हुआ था, “हमें इस बात के लिए मजबूर नहीं किया जाए कि हमें संघियों और मनुवादियों का सामना करने के लिए लश्कर-ए-तैय्यबा और तालिबान की मदद लेनी पड़े।” दीवार के एक हिस्से में हैशटैग बना हुआ था, जिसमें लश्कर का समर्थन करते हुए ‘लश्कर जिंदाबाद’ लिखा था। पुलिस के मुताबिक़ यह ग्राफिटी 27 नवंबर की देर रात या सुबह के आस पास देखी गई थी। 

संयोग की बात है कि ठीक इसी तरह के नारे तब भी लगा जा रहे थे जब पाकिस्तान के लोग फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के विरोध में उतरे थे। तहरीक-ए-लब्बैक (TLP) के हज़ारों समर्थक फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के विरोध में रावलपिंडी की सड़कों पर उतरे थे। उनका विरोध इस मुद्दे पर था कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने पैगंबर मोहम्मद का कार्टून बनाने के अधिकार का बचाव किया था। 

लखपत गुरुद्वारा का जीर्णोद्धार, गुरु नानक को याद और किसान जितेन्द्र-असलम की ‘असली ताकत’: PM मोदी के मन की बात

जहाँ एक तरफ केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए कृषि कानूनों को लेकर हो रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन को खालिस्तानियों ने हाईजैक कर लिया है, तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 71वें संस्करण में सिखों के प्रथम गुरु नानक देव जी को याद किया। बता दें कि सोमवार (नवंबर 30, 2020) को गुरु नानक देव जी का 551वाँ प्रकाश पर्व मनाया जाएगा। पीएम मोदी ने पूरी दुनिया में उनके प्रभाव को याद करते हुए कहा कि ये स्पष्ट रूप से दिखता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैंकुवर (Vancouver) से वेलिंग्टन और सिंगापुर से दक्षिण अफ्रीका तक, उनके संदेश हर तरफ सुनाई देते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि गुरुग्रन्थ साहिब में कहा गया है – “सेवक को सेवा बन आई”, यानी, सेवक का काम, सेवा करना है। उन्होंने बताया कि बीते कुछ वर्षों में कई अहम पड़ाव आए और एक सेवक के तौर पर हमें बहुत कुछ करने का अवसर मिला और गुरु साहिब ने हमसे सेवा ली।

उन्होंने याद दिलाया कि गुरु नानक देव जी का ही 550वाँ प्रकाश पर्व, श्री गुरु गोविंद सिंह जी का 350वाँ प्रकाश पर्व, अगले वर्ष श्री गुरु तेग बहादुर जी का 400वाँ प्रकाश पर्व भी है। उन्होंने अपने विश्वास की बात करते हुए कहा कि गुरु साहब की उन पर विशेष कृपा रही, जो उन्होंने मुझे हमेशा अपने कार्यों में बहुत करीब से जोड़ा है। इस दौरान उन्होंने कच्छ लखपत गुरुद्वारा साहिब का जिक्र किया, जहाँ गुरु नानक देव जी भी अपनी ‘उदासी’ के दौरान रुके थे।

पीएम ने आज से दो दशक पहले की घटना को याद करते हुए कहा कि 2001 के भूकंप से इस गुरुद्वारा को भी नुकसान पहुँचा था। उन्होंने कहा कि यह गुरु साहिब की कृपा ही थी कि मैं इसका जीर्णोद्धार सुनिश्चित कर पाया। उन्होंने बताया कि ना केवल गुरुद्वारा की मरम्मत की गई बल्कि उसके गौरव और भव्यता को भी फिर से स्थापित किया गया। पीएम ने कहा कि हम सब को गुरु साहिब का भरपूर आशीर्वाद भी मिला।

उन्होंने आगे जानकारी दी कि लखपत गुरुद्वारा के संरक्षण के प्रयासों को 2004 में ‘UNESCO Asia Pacific Heritage Award’ में Award of Distinction दिया गया। अवॉर्ड देने वाली जूरी ने ये पाया कि मरम्मत के दौरान शिल्प से जुड़ी बारीकियों का विशेष ध्यान रखा गया। जूरी ने यह भी नोट किया कि गुरुद्वारा के पुनर्निर्माण कार्य में सिख समुदाय की ना केवल सक्रिय भागीदारी रही, बल्कि, उनके ही मार्गदर्शन में ये काम हुआ।

उन्होंने याद किया कि लखपत गुरुद्वारा जाने का सौभाग्य उन्हें तब भी मिला था, जब वो मुख्यमंत्री भी नहीं थे। पीएम ने कहा कि उन्हें वहाँ जाकर असीम ऊर्जा मिलती थी। उन्होंने कहा कि इस गुरुद्वारा में जाकर हर कोई खुद को धन्य महसूस करता है। बकौल पीएम मोदी, वो इस बात के लिए बहुत कृतज्ञ हैं कि गुरु साहिब ने उनसे निरंतर सेवा ली है। उन्होंने उदाहरण दिया कि पिछले वर्ष नवम्बर में ही करतारपुर साहिब कॉरिडोर का खुलना बहुत ही ऐतिहासिक रहा। पीएम मोदी ने कहा:

“इस बात को मैं जीवन भर अपने हृदय में सँजो कर रखूँगा। यह, हम सभी का सौभाग्य है कि हमें श्री दरबार साहिब की सेवा करने का एक और अवसर मिला। विदेश में रहने वाले हमारे सिख भाई-बहनों के लिए अब दरबार साहिब की सेवा के लिए राशि भेजना और आसान हो गया है। इस कदम से विश्व-भर की संगत, दरबार साहिब के और करीब आ गई है। ये गुरु नानक देव जी ही थे, जिन्होंने लंगर की परंपरा शुरू की थी और आज हमने देखा कि दुनिया-भर में सिख समुदाय ने किस प्रकार कोरोना के इस समय में लोगों को खाना खिलाने की अपनी परंपरा को जारी रखा है, मानवता की सेवा की – ये परंपरा, हम सभी के लिए निरंतर प्रेरणा का काम करती है। मेरी कामना है, हम सभी, सेवक की तरह काम करते रहे। गुरु साहिब मुझसे और देशवासियों से इसी प्रकार सेवा लेते रहें। एक बार फिर, गुरु नानक जयंती पर, मेरी, बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।” 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ में पूरा फोकस किसानों और कृषि को लेकर चल रहे मोदी सरकार की योजनाओं के बारे में समझाने को लेकर रखा और विरोध प्रदर्शन में फ़ैल रहे अफवाहों को भी काटा। उन्होंने बताया कि कैसे भारत में खेती और उससे जुड़ी चीजों के साथ नए आयाम जुड़ रहे हैं और बीते दिनों हुए कृषि सुधारों ने किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार भी खोले हैं।

उन्होंने कहा कि वर्षों से किसानों की जो माँग थी, जिन माँगों को पूरा करने के लिए किसी न किसी समय में हर राजनीतिक दल ने उनसे वायदा किया था, वो माँगें पूरी हुई हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि काफ़ी विचार-विमर्श के बाद भारत की संसद ने कृषि सुधारों को कानूनी स्वरूप दिया। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से न सिर्फ किसानों के अनेक बंधन समाप्त हुए हैं, बल्कि उन्हें नए अधिकार भी मिले हैं, नए अवसर भी मिले हैं।

बकौल पीएम मोदी, इन अधिकारों ने बहुत ही कम समय में, किसानों की परेशानियों को कम करना शुरू कर दिया है। इस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र के धुले ज़िले के किसान जितेन्द्र भोइजी का जिक्र किया, जिन्होंने कृषि कानूनों का सटीक इस्तेमाल किया। पीएम ने बताया कि जितेन्द्र भोइजी ने मक्के की खेती की थी और सही दामों के लिए उसे व्यापारियों को बेचना तय किया। फसल की कुल कीमत तय हुई करीब 3.32 लाख रुपए।

पीएम ने आगे बताया कि जितेन्द्र भोइजी को 25,000 रुपए एडवांस भी मिल गए थे। तय ये हुआ था कि बाकी का पैसा उन्हें 15 दिन में चुका दिया जाएगा। लेकिन, बाद में परिस्थितियाँ ऐसी बनी कि उन्हें बाकी का पेमेन्ट नहीं मिला। किसान से फसल खरीद लो, महीनों–महीनों पेमेन्ट न करो, संभवतः मक्का खरीदने वाले बरसों से चली आ रही उसी परंपरा को निभा रहे थे। इसी तरह 4 महीने तक जितेन्द्र जी का पेमेन्ट नहीं हुआ। इस स्थिति में उनकी मदद की सितम्बर मे जो पास हुए हैं, जो नए कृषि क़ानून बने हैं – वो उनके काम आए।

इस क़ानून में ये तय किया गया है कि फसल खरीदने के तीन दिन में ही, किसान को पूरा पेमेन्ट करना पड़ता है और अगर पेमेन्ट नहीं होता है तो किसान शिकायत दर्ज कर सकता है। कानून में एक और बहुत बड़ी बात है, इस क़ानून में ये प्रावधान किया गया है कि क्षेत्र के SDM को एक महीने के भीतर ही किसान की शिकायत का निपटारा करना होगा। पीएम ने कहा, “अब, जब, ऐसे कानून की ताकत हमारे किसान भाई के पास थी, तो, उनकी समस्या का समाधान तो होना ही था, उन्होंने शिकायत की और चंद ही दिन में उनका बकाया चुका दिया गया।

पीएम ने समझाया कि कानून की सही और पूरी जानकारी ही जितेन्द्र जी की ताकत बनी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र कोई भी हो, हर तरह के भ्रम और अफवाहों से दूर, सही जानकारी हर व्यक्ति के लिए बहुत बड़ा संबल होता है। उन्होंने एक अन्य किसान का जिक्र करते हुए कहा कि किसानों में जागरूकता बढ़ाने का ऐसा ही एक काम कर रहे हैं, राजस्थान के बाराँ जिले में रहने वाले मोहम्मद असलम। ये एक किसान उत्पादक संघ के CEO भी हैं |

प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में कहा कि बड़ी बड़ी कम्पनियों के CEOs को ये सुनकर अच्छा लगेगा कि अब देश के दूर-दराज वाले इलाको में काम कर रहे किसान संगठनों में भी CEOs होने लगे हैं। पीएम ने आगे बताया कि मोहम्मद असलम ने अपने क्षेत्र के अनेकों किसानों को मिलाकर एक बना लिया है और वो इस ग्रुप पर हर रोज़, आस-पास की मंडियो में क्या भाव चल रहा है, इसकी जानकारी किसानों को देते हैं।

6 जिले, 6 महीने से तैयारी: मंत्री पद से इस्तीफा देकर शुभेंदु अधिकारी ने TMC को लगभग तोड़ डाला, ममता की रैली पर संकट

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) के मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद भाजपा और कॉन्ग्रेस की स्थानीय यूनिट उन्हें अपने पाले में लेना चाहती है। भाजपा उनके गढ़ में पहले ही पैठ बना चुकी है। लेकिन, इन सबके बीच सबसे ज्यादा नुकसान TMC और ममता बनर्जी को होने वाला है। 35 विधानसभा सीटों पर प्रभाव रखने वाले अधिकारी परिवार ने अपने समर्थकों से एकजुट होने की अपील की है।

शुभेंदु अधिकारी ने अपने समर्थकों से कहा है कि वो सड़क पर उतरने के लिए गोलबंद हो जाएँ। उन्होंने अपने समर्थक विधायकों को भी जनता के बीच उतरने को कहा है। उन्होंने शनिवार (नवंबर 28, 2020) को अपने समर्थक TMC नेताओं को अपनी रणनीति समझाई। एक TMC नेता ने कहा कि पूरा अधिकारी समर्थक कैडर सड़क पर उतरने को तैयार है और अभी से चुनावी मोड में आ गया है। उन्हें इंतजार है तो सिर्फ अपने नेता की हरी झंडी का।

समर्थकों ने बताया कि इसके लिए पिछले 6 महीने से तैयारियाँ चल रही थीं। समर्थकों का कहना है कि वो 6 जिलों में पूरी तरह गोलबंद हैं और एक अलग संगठन के जरिए प्रचार मोड में हैं। ये सब तब हो रहा है, जब TMC सारे विकल्प खुले होने की बात करते हुए अभी भी अधिकारी को मनाने की कोशिश कर रहा है। पार्टी ने इसके लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री सौगत रॉय को लगाया है, क्योंकि प्रशांत किशोर भी यहाँ फेल हो गए हैं।

रॉय ने बताया कि शुभेंदु अधिकारी की माँ की तबीयत ख़राब होने के कारण बातचीत में समय लग रहा है। इसी बीच दिसंबर 7 को मेदिनीपुर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की रैली भी है। ये वही क्षेत्र है, जो अधिकारी परिवार का गढ़ है। शुभेंदु ने कैबिनेट से इस्तीफा देने के साथ-साथ ‘हुगली रिवर ब्रिज कमीशन’ और ‘हल्दिया डेवलपमेंट अथॉरिटी’ के अध्यक्ष पद को भी छोड़ दिया है। पूर्व मेदिनीपुर में रविवार को स्वतंत्रता सेनानी रंजीत कुमार बॉयल की याद में एक समारोह है, जहाँ वो अपने पत्ते खोल सकते हैं।

वो इन 5 जिलों में अपने करीबी TMC विधायकों और नेताओं से लेकर अपने जमीनी समर्थकों से लगातार संपर्क में हैं। एक नेता ने बताया कि वो किसी पर निर्भर नहीं रहने वाले हैं और उनका अपना एक ‘मास बेस’ है, ऐसे में इन 5 जिलों में पूरी तैयारी है। हावड़ा, हुगली, कोलकाता, बीरभूम से लेकर झारग्राम और सिलीगुड़ी तक उनके पोस्टर्स लहराते हुए पाए गए।

यहाँ ये सवाल उठ सकता है कि आखिर वो ममता बनर्जी के लिए महत्वपूर्ण क्यों हैं? 6 जिलों या 35 विधानसभा सीटों पर प्रभाव को हटा भी दें, फिर भी वो क्यों TMC के एक स्तंभ थे? इसके लिए हमें 13 साल पीछे 2007 में जाना होगा, जब ममता बनर्जी साढ़े 3 दशक से बंगाल में सत्ता भोग रहे वामपंथियों को बाहर करने के लिए नंदीग्राम हड़ताल पर थीं। इसी कार्यक्रम ने राज्य में सत्ता हस्तानांतरण की स्क्रिप्ट लिख दी थी।

नंदीग्राम पूर्व मेदिनीपुर में ही स्थित है और उस हड़ताल के आयोजन में सबसे बड़ी भूमिका अधिकारी परिवार की ही थी। राज्य में सिंचाई, यातायात एवं जल मंत्रालय संभाल रहे शुभेंदु अधिकारी भी नंदीग्राम से ही विधायक हैं। अब स्थिति ये है कि इस हड़ताल की याद में जो समारोह हुआ, उसमें ममता बनर्जी की तस्वीर ही नहीं थी। जिस तरह से पिछले कुछ महीनों से उनके कार्यक्रम बिना TMC बैनर के हो रहे थे, स्पष्ट है कि इसकी तैयारी काफी पहले से चल रही थी।

सबसे बड़ी परेशानी ये लग रही है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस में अब ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक का हस्तक्षेप बढ़ गया है और वो पार्टी से जुड़े कई फैसले ले रहे हैं। उन्हें ममता की अगली पीढ़ी के नेतृत्व के रूप में तैयार किया जा रहा है। साथ ही प्रशांत किशोर को भाजपा को रोकने के लिए लगाया गया है, जिससे कई नेता नाराज हैं। मुर्शिदाबाद, झारग्राम, बीरभूम, मालदा, पुरुलिया और बाँकुरा- ये वो 6 जिले हैं, जहाँ शुभेंदु ने तृणमूल को कड़ी मेहनत कर के स्थापित किया।

शुभेंदु अधिकारी के पिता और उनके दोनों भाई उनके हर निर्णय को मानते आ रहे हैं और वो अब भी उनके ही साथ हैं। पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है कि TMC नेतृत्व अंततः शुभेंदु को भाजपा में ही भेजेगा। उन्होंने कहा कि उनके लिए भाजपा के रास्ते खुले हुए हैं। राज्य में लगभग मर चुकी कॉन्ग्रेस भी बेचैन है, लेकिन उसे कोई गंभीरता से लेता नहीं। ऐसे में उनके अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं।

हाल ही में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के कूच विहार क्षेत्र से असंतुष्ट विधायक मिहिर गोस्वामी भाजपा में शामिल हो गए। दिल्ली में बीजेपी महासचिव और बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय की मौजूदगी में गोस्वामी पार्टी में शामिल हुए। सिंगूर के विधायक रबीन्द्रनाथ भट्टाचार्जी भी टीएमसी से नाराज चल रहे हैं। उन्होंने भी पार्टी छोड़ने की धमकी दे रखी है। वे पार्टी के ब्लॉक अध्यक्ष पद से अपने करीबी को हटाए जाने से नाराज बताए जाते हैं।

‘जय हिन्द नहीं… भारत माता भी नहीं, इंदिरा जैसा सबक मोदी को भी सिखाएँगे’ – अमानतुल्लाह के साथ प्रदर्शनकारियों की धमकी

दिल्ली में हो रहे ‘किसान आंदोलन’ पर खालिस्तानी ताकतों के कब्जा करने और इस्लामी संगठनों द्वारा उसे बढ़ावा देने के कई मामले सामने आए हैं। इसी बीच एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक प्रदर्शनकारी ‘जय हिन्द’ बोलने से भी इनकार कर रहा है। जब ये सब चल रहा था, तब ओखला से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान वहीं पर मौजूद थे। इस विवादित वीडियो के सामने आने के बाद इस प्रदर्शन के पीछे के ताकतों के बारे में पता चल रहा है।

नीचे जो 1 मिनट 2 सेकंड का वीडियो लगाया गया है, उसके 59वें सेकंड से 1 मिनट 2 सेकंड तक के हिस्से में देश-विरोधी बातें बोलते कथित ‘प्रदर्शनकारी’ (पीली पगड़ी, पीला शॉल) के दाहिनी तरफ AAP विधायक अमानतुल्लाह खान को देखा जा सकता है। एक जन-प्रतिनिधि देश-विरोधी बातें सुनता रहता है, इससे आप किसी प्रदर्शन की दशा और दिशा समझ सकते हैं।

जो राजनीति अमानतुल्ला जैसे जन-प्रतिनिधि को देश-विरोधी बातें सुनने के बाद भी उसी भीड़ में खड़ा रख सकता है, वही राजनीति इस वीडियो को डिलीट भी कर सकता है। इससे बचने के लिए वीडियो के समय के साथ कथित प्रदर्शनकारी के साथ खड़े AAP विधायक अमानतुल्ला का स्क्रीनशॉट आप ऊपर देख सकते हैं।

इस वीडियो में एक प्रदर्शनकारी कह रहा है कि वो ‘जय हिन्द’ नहीं बोलेगा और न ही ‘भारत माता की जय’ बोलेगा, सिर्फ ‘जो बोले सो निहाल’ ही बोलेगा। साथ ही उसने कहा कि वो ‘अस्सलाम वालेकुम’ भी बोलेगा। AAP विधायक अमानतुल्लाह खान की मौजूदगी में प्रदर्शनकारी ने धमकाया कि जैसे इंदिरा गाँधी को ‘सबक सिखाया गया’ था, वैसे ही पीएम मोदी को भी ‘सबक सिखाया जाएगा।’ उक्त प्रदर्शनकारी ने ‘मानवता’ की भी बातें की।

बता दें कि बुराड़ी के निरंकारी समागम ग्राउंड में जाकर अमानतुल्लाह खान ने वो अपने समर्थकों के साथ यहाँ पर इसीलिए आए हैं, ताकि प्रदर्शनकारियों को कोई परेशानी न हो। भोजन और रहने की व्यवस्था भी उनके द्वारा वहीं की जा रही है। इस ग्राउंड पर विरोध प्रदर्शन के लिए सरकार ने अनुमति दे रखी है। विधायक ने कहा कि इन प्रदर्शनकारियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसका ख्याल रखा जा रहा है।

इससे पहले भी इसी तरह का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक तथाकथित किसान द्वारा स्पष्ट तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है कि जैसे इंदिरा गाँधी को ठोका वैसे ही नरेंद्र मोदी को भी ठोक देंगे। एक प्रदर्शनकारी ने कहा था, “अगर 3 दिसंबर की उस मीटिंग में कुछ हल नहीं निकला तो बैरिकेड तो क्या हम तो इनको (शासन प्रशासन) ऐसे ही मिटा देंगे। हमारे शहीद उधम सिंह कनाडा की धरती पर जाकर उन्हें (अंग्रेज़ों को) ठोक सकते हैं तो दिल्ली कुछ भी नहीं है हमारे लिए। जब इंदिरा ठोक दी तो मोदी की छाती भी ठोक देंगे।” 

100 साल पहले बनारस से चोरी, कनाडा से लाई गई माँ अन्नपूर्णा की मूर्ति: मन की बात में PM मोदी ने बताया- गर्व का पल

नवंबर 2020 के आखिरी रविवार (नवंबर 29, 2020) को पीएम नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ की। पीएम ने बताया कि वाराणसी से 100 साल पूर्व चोरी गई माँ अन्‍नपूर्णा की मूर्ति काे कनाडा से वापस लाना गर्व का पल है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा, “हर भारतीय यह जानकर गर्व महसूस करेगा कि देवी अन्नपूर्णा की एक प्राचीन मूर्ति को कनाडा से भारत वापस लाया जा रहा है। लगभग 100 साल पहले 1913 में इस मूर्ति को वाराणसी के एक मंदिर से चुराकर देश से बाहर ले जाया गया था। मैं कनाडा की सरकार और इस पुण्य कार्य को सम्भव बनाने वाले सभी लोगों का इस सहृदयता के लिए आभार प्रकट करता हूँ।”

पीएम मोदी ने कहा कि माता अन्नपूर्णा का काशी से बहुत ही विशेष संबंध है। अब उनकी प्रतिमा का वापस आना हम सभी के लिए सुखद है। माता अन्नपूर्णा की प्रतिमा की तरह ही हमारी विरासत की अनेक अनमोल धरोहरें, अंतर्राष्ट्रीय गिरोंहों का शिकार होती रही हैं। ये गिरोह अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इन्हें बहुत ऊँची कीमत पर बेचते हैं। अब इन पर सख्ती की जा रही है। साथ ही इनकी वापसी के लिए भारत ने अपने प्रयास भी बढ़ाए हैं। ऐसी कोशिशों की वजह से बीते कुछ वर्षों में भारत कई प्रतिमाओं और कलाकृतियों को वापस लाने में सफल रहा है।

पीएम ने कहा कि माता अन्नपूर्णा की प्रतिमा की वापसी के साथ, एक संयोग ये भी जुड़ा है कि कुछ दिन पूर्व ही World Heritage Week मनाया गया है। World Heritage Week, संस्कृति प्रेमियों के लिए, पुराने समय में वापस जाने, उनके इतिहास के अहम पड़ावों का पता लगाने का एक शानदार अवसर प्रदान करता है। कोरोना कालखंड के बावजूद भी इस बार हमने innovative तरीके से लोगों को ये Heritage Week मनाते देखा। Crisis में culture बड़े काम आता है, इससे निपटने में अहम भूमिका निभाता है। Technology के माध्यम से भी culture एक emotional recharge की तरह काम करता है।

दरअसल, इसी माह 5 -25 नवंबर तक वर्ल्ड हेरिटेज वीक की कनाडा में शुरुआत के दौरान भारतीय मूल की एक आर्टिस्ट दिव्‍या मेहरा की नजर मूर्ति पर पड़ी और उन्होंने इस प्रकरण को उठाया तो कनाडा यह पौराणिक महत्व की मूर्ति भारत को सौंपने को सहर्ष तैयार हो गया। इसे देश में लाने की अब तैयारी की जा रही है। इसी माह मैकेंजी आर्ट गैलरी में रेजिना विश्वविद्यालय के संग्रह से काशी से चोरी गई माता अन्नपूर्णा की प्रतिमा को अंतरिम राष्ट्रपति और विश्वविद्यालय के उपकुलपति थॉमस चेस ने कनाडा में भारत के उच्चायुक्त अजय बिसारिया को 19 नवंबर को एक सादे समारोह में सौंप दिया था।

अजय बिसारिया ने कहा था, “हम खुश हैं कि अन्नपूर्णा की यह अद्वितीय मूर्ति अब अपने घर जाने को है। भारत की इस सांस्कृतिक प्रतिमा को वापस करने की और यूनिवर्सिटी ऑफ़ रिजायना के इस सक्रिय जुड़ाव के लिए मैं इनका आभारी हूँ। स्वेच्छा से इस सांस्कृतिक निधि को लौटाने का कदम परिपक्वता तथा भारत-कनाडा के गहरे सम्बन्ध को दर्शाता है।”

कैप्टन अमरिंदर के ‘झूठ’ की खुली पोल, CM खट्टर के 2 दिन में 13 बार फोन कॉल के बावजूद भी नहीं की थी बात

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने कभी उनसे फोन कॉल कर के संपर्क करने की कोशिश नहीं की। इस आरोप के बाद हरियाणा सीएम के पर्सनल सेक्रेटरी (PA) अभिमन्यु सिंह ने उनकी पोल खोली। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी है और वहाँ जाने का हर किसी को अधिकार है, इसीलिए किसान भी वहाँ जाना चाहते थे।

बता दें कि पंजाब से किसानों ने हरियाणा होकर ही दिल्ली का रुख किया है। सरकार के लाख आश्वासनों के बावजूद हजारों की संख्या में ‘किसान प्रदर्शनकारियों’ ने दिल्ली कूच किया और सीमा पर पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई। इस आंदोलन में खालिस्तानी और इस्लामी कट्टरपंथी संगठन भी शामिल हो गए हैं। साथ ही योगेंद्र यादव जैसे चेहरे भी हैं, जो JNU हिंसा और दिल्ली के हिन्दू-विरोधी दंगों के दौरान खासे सक्रिय रहे थे।

पंजाब के मुख्यमंत्री ने ‘रिपब्लिक भारत’ पर अर्णब गोस्वामी से बात करते हुए कहा कि जहाँ भारत सरकार ने किसानों को मिलने का आश्वासन दे दिया और उन्हें बताया कि उनके प्रदर्शन के लिए जगह की भी व्यवस्था कर दी गई है। कैप्टन ने कहा कि उन्होंने भी किसानों से कहा कि वो दिल्ली जाकर भारत सरकार से अपनी बात कहें। लेकिन, उन्होंने साथ में आरोप लगाया कि बीच में हरियाणा सरकार रुकावट डाल दी।

उन्होंने दावा किया कि हरियाणा ने ये पहली बार नहीं किया है, लेकिन मनोहर लाल खट्टर हमेशा से उन पर ही आरोप लगाते रहते हैं। उन्होंने हरियाणा के सीएम से कहा, “तुझे क्या मालूम है कि पंजाब में क्या हो रहा है और क्या नहीं? तू अपने राज्य को संभाल। तू ये बातें जो कर रहा है कि कैप्टन ने ये सब किया है, तो मैं पूछता हूँ कि तेरी कोई खास ख़ुफ़िया एजेंसी है, जिसके पास वो सूचनाएँ हैं, जो हमारे राष्ट्रीय एजेंसियों के पास नहीं है?

उन्होंने कहा कि जिस तरीके से मनोहर लाल खट्टर ने पंजाबियों के साथ बर्ताव किया है, वो उनसे कभी नहीं मिलेंगे। उन्होंने ये भी दावा किया कि खट्टर ने उनसे कभी संपर्क ही नहीं किया। इसके बाद अभिमन्यु सिंह ने एक दस्तावेज शेयर किया, जिसमें बताया गया है कि हरियाणा के CMO से कब-कब पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क किया गया और सीएम अमरिंदर से बात नहीं हो सकी। उन्होंने पूछा कि क्या कैप्टन के दफ्तर के कर्मचारियों ने उन्हें इस बारे में नहीं बताया?

उस दस्तावेज की मानें तो सबसे पहले मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के आवास पर कॉल किया गया, लेकिन सोमवार (नवंबर 23, 2020) को शाम 6:23 बजे किए गए इस फोन कॉल में बताया गया कि मुख्यमंत्री ‘आउट ऑफ स्टेशन’ हैं और सिसवा फार्म पर संपर्क करें। इसके एक मिनट बाद ही हरियाणा सीएम की तरफ से सिसवा फार्म पर भी कॉल किया गया, लेकिन बताया गया कि कैप्टन फ़िलहाल उपलब्ध नहीं हैं।

इसके अगले दिन दोपहर 2:32 में पंजाब सीएम आवास पर फोन कॉल करने पर फिर से सिसवा फार्म पर संपर्क करने को कहा गया। इसके 7 मिनट बाद फार्म पर कॉल करने पर बताया गया कि मुख्यमंत्री बैठक में हैं। 4:16 में बताया गया कि सीएम फिर से बैठक में हैं। इसके सवा एक घंटे बाद फिर से सन्देश पहुँचाया गया। इसके बाद रात को 8:56, 8:57 और 8:58 में 3 बार लगातार कॉल किया गया, लेकिन किसी ने उठाया ही नहीं।

रात के 9:01 बजे फोन उठाया तो गया लेकिन उधर गैर-ज़रूरी बातें होती रहीं, इधर से क्या कहा जा रहा है इस पर तनिक भी ध्यान नहीं दिया गया। अगले कॉल पर अधिकारी ने कहा कि वो पंजाब के सीएम को सूचित कर देंगे। कुल मिला कर 2 दिन में हरियाणा के मुख्यमंत्री ने पंजाब के सीएम से 13 बार संपर्क किया, लेकिन कैप्टन से बात नहीं हो सकी। पंजाब में जहाँ कॉन्ग्रेस की सरकार है, हरियाणा में भाजपा सत्ता में है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री के PA द्वारा शेयर किए गए दस्तावेज से कैप्टन अमरिंदर सिंह के ‘झूठ’ की पोल खुल गई है कि खट्टर ने उन्हें फोन कॉल नहीं किया। उनका ये कहना कि खट्टर ने उनसे संपर्क ही नहीं किया, सही नहीं लगता। साथ ही वो जिस तरह से धमकी दे रहे हैं कि वो हरियाणा के अपने समकक्ष से बात ही नहीं करेंगे, एक लोकतंत्रीय और संघीय ढाँचे के अपमान के साथ-साथ उनकी बातों में झलक रहे अहंकार की ओर इशारा करता है। फ़िलहाल दिल्ली के लोग इस अराजकता को भुगत रहे हैं।

ज्ञात हो कि केंद्र सरकार द्वारा 3 कृषि सुधार विधेयक कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन-कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 पारित किए जाने के बाद से किसानों का प्रदर्शन जारी है। भारतीय किसान यूनियन (BKU), ऑल इंडिया फार्मर यूनियन (AIFU), ऑल इंडिया किसान संघर्ष कोआर्डिनेशन कमेटी (AIKSCC) और ऑल इंडिया किसान महासंघ इसके विरोध में हैं।