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लव जिहाद के खिलाफ कर्नाटक में भी कानून जल्द, गोहत्या पर भी पूरी तरह पाबंदी लगेगी: डिप्टी CM का ऐलान

ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) के खिलाफ कई राज्य कानून बनाने की तैयारी कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इस संबंध में अध्यादेश लागू भी कर चुकी है। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डॉ. सीएन अश्वथनारायण ने भी राज्य में जल्द कानून बनाने की बात कही है। साथ ही प्रदेश में गोहत्या पर भी पूरी तरह पाबंदी लगेगी।

डॉ. अश्वथनारायण ने कहा, “देश की कई राज्य सरकारें इस मुद्दे पर क़ानून लेकर आ चुकी हैं। हम भी लव जिहाद के मुद्दे पर क़ानून बना रहे हैं और बहुत जल्द यह प्रभावी होगा। इसके अलावा हम गोहत्या पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के लिए के लिए भी क़ानून लेकर आ रहे हैं।”       

इसके पहले कर्नाटक के गृहमंत्री बासवराज बोम्मई ने भी ग्रूमिंग जिहाद के मुद्दे पर अहम बयान दिया था। बृहस्पतिवार (3 दिसंबर 2020) को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा था, “प्रदेश में लव जिहाद के विरुद्ध क़ानून लागू किया जाएगा। इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिया जा चुका है कि वह उत्तर प्रदेश में जारी अध्यादेश के बारे में मूलभूत जानकारी इकट्ठा करें। उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्य प्रदेश की सरकार ने इस क़ानून पर विचार करना शुरू कर दिया है तो हमने भी इस पर चर्चा शुरू कर दी है कि इसे कैसे प्रभावी बनाया जाए। हमारे मुख्यमंत्री ने भी इस पर सहमति प्रदान कर दी है।”

हाल ही में कर्नाटक में ग्रूमिंग जिहाद का मामला सामने आया था। यहाँ पर शांति जूबी नाम की हिंदू महिला को इस्लाम में धर्मांतरित किया गया था। जिसके बाद उसका नाम असिया इब्राहिम खलील कट्टेकर कर दिया गया था। इसके अलावा कर्नाटक की सरकार गोहत्या के मुद्दे पर भी अपना मत स्पष्ट कर चुकी है। कर्नाटक के पशुपालन मंत्री प्रभु चौहान ने इस साल के जुलाई में ऐलान किया था कि कर्नाटक की प्रदेश सरकार अन्य राज्यों की तर्ज पर गोहत्या, बिक्री और गोमांस की खपत पर प्रतिबंध लगाएगी। इसके लिए गौहत्या और संरक्षण विधेयक 2012 को वापस लेकर आने की तैयारी में है। पशुपालन मंत्री ने कहा था, “गायों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। हमने पहले ही गोशालाओं को मजबूत करना शुरू कर दिया है।” 

अवॉर्ड वापसी का सीजन लौटा, किसानों की धमकी के बीच कंगना का सवाल- अभी का सिस्टम ठीक तो आत्महत्या को मजबूर क्यों?

दिल्ली में चल रहा ‘किसान आंदोलन’ दिन पर दिन जोर पकड़ता जा रहा है। शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को केंद्र सरकार और किसानों के बीच 5वें राउंड की वार्ता होनी है। किसान सिंघु सीमा पर अभी भी राशन-पानी लेकर जमे हुए हैं। आज 10वें दिन किसानों ने ऐलान किया है कि अगर अब वार्ता से कोई नतीजा नहीं निकला तो फिर आगे बातचीत नहीं होगी। साथ ही दिसंबर 8 को भारत बंद का ऐलान भी किया गया है। ‘किसान आंदोलन’ के बीच कंगना रनौत ने भी बड़ा सवाल पूछा है।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की अध्यक्ष बीबी जागीर कौर ने किसान आंदोलन के दौरान अलग-अलग कारणों से अपनी जान गँवाने वाले किसानों के परिजनों को एक-एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं भारतीय किसान यूनियन ने अनुमति माँगी है कि उन्हें अपने ट्रैक्टरों से लाल किला और संसद भवन जैसे लोकप्रिय स्थलों का दौरा करने दिया जाए। अध्यक्ष राकेश टिकैत ने ये माँग की है।

उनका कहना है कि इनमें से अधिकतर किसान पहली बार दिल्ली आए हैं और वो इन ऐतिहासिक स्थलों को देखने के बाद वापस गाजीपुर सीमा पर लौट जाएँगे। किसानों ने राष्ट्रीय राजधानी की तरफ आने वाली सड़कों को जाम करने की धमकी देते हुए कहा है कि ‘भारत बंद’ के दौरान मोदी सरकार और बड़े कॉर्पोरेट घरानों के पुतले जलाए जाएँगे। उधर आम आदमी पार्टी (AAP) और कॉन्ग्रेस में ठन गई है।

जहाँ आप नेताओं ने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर भाजपा का प्रतिनिधि होने का आरोप लगाते हुए पूछा है कि वो दिल्ली आकर कॉन्ग्रेस आलाकमान की जगह अमित शाह से क्यों मिले, वहीं हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने राज्य में विशेष सत्र बुलाए जाने की वकालत की है। दिल्ली सरकार ने आंदोलनकारियों के लिए 300 टॉयलेट, 100 टैंकर और एम्बुलेंस की व्यवस्था की है। दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कॉन्ग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया है।

इस बीच किसानों के अड़े रहने और कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिनेत्री कंगना रनौत ने पूछा है कि जब अभी वाला सिस्टम इतना मजबूत है तो किसान हर साल आत्महत्या करने को क्यों मजबूर होते हैं? उन्होंने कहा कि हर साल कई किसान आत्महत्या करते हैं, हम दुनिया को खिलाते हैं, लेकिन हमारे ही किसान सबसे गरीब है, फिर कृषि सुधारों का विरोध क्यों हो रहा है?

कंगना ने ‘किसान आंदोलन’ के प्रदर्शनकारियों से कहा कि क्या ‘शाहीन बाग़ बिरयानी गैंग और खालिस्तानी आतंकी’ ये बता सकते हैं कि कृषि कानूनों के साथ उनकी समस्या क्या है? उन्होंने याद दिलाया कि कैसे CAA कानून आने के बाद भी प्रदर्शन किए गए थे और उसमें कई लोगों की जान चली गई, जबकि ये स्पष्ट था कि इससे किसी की भी नागरिकता छीनी नहीं जानी है। उन्होंने पूछा कि कौन हैं ये ख़ून के प्यासे दरिंदे, जिन्होंने मासूमों को काट के गटर में फेंका?

वहीं पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल द्वारा अपना ‘पद्म विभूषण’ सम्मान लौटाने के ऐलान के साथ ही अवॉर्ड वापसी का दौर फिर से लौटता हुआ दिख रहा है। अकाली दल के राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने भी अपना पद्म पुरस्कार लौटाने का ऐलान कर दिया है। राष्ट्रीय बॉक्सिंग टीम के पूर्व कोच गुरबक्श सिंह संधू ने अपना द्रोणाचार्य अवॉर्ड लौटाने की बात कही है। अर्जुन अवॉर्डी करतार सिंह ने भी अपना अवॉर्ड लौटाने की पेशकश की।

‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में लगभग 30 पूर्व खिलाड़ियों ने अपने मेडल्स वापस करने की बात कही है। पूर्व भारतीय बास्केटबॉल खिलाड़ी और अर्जुन पुरस्कार विजेता सज्जन सिंह चीमा अपने साथी अर्जुन व अन्य खिलाड़ियों से संपर्क में हैं, जिनसे मेडल्स और पुरस्कार लौटाने को कहा जा रहा है। भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे गुरमेल सिंह और सुरिंदर सिंह सोढ़ी ने भी उन्हें अपना समर्थन किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में ये फेरहिस्त लम्बी होने वाली है।

प्रदर्शन पर बैठे किसान समूह ने शुक्रवार को ऐलान भी किया था कि वे 5 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूँकेंगे, 7 दिसंबर को अवॉर्ड वापसी करेंगे और 8 दिसंबर को भारत बंद करेंगे। 

किसान अभी तक इस बात पर अड़े थे कि जो सरकार लगातार किसानों को उनकी फसल पर एमएसपी देने की बात कर रही हैं, वह शनिवार को बैठक तभी करेंगे जब किसानों को एमएसपी की गारंटी मिलेगी। लेकिन जब केंद्र सरकार ने उन्हें हर तरह से आश्वस्त करने का प्रयास किया और उनके हर मुद्दे को सुनने को कहा तो वह प्रोटेस्ट को दूसरे स्तर पर ले जा रहे हैं। अब उनके इस प्रदर्शन में कई किसान नेताओं के अलावा, बुद्धिजीवी, कवि, वकील, लेखक, मानवाधिकार कार्यकर्ता आदि भी अपना सहयोग दे रहे हैं।

किसान संगठनों का 8 दिसंबर को भारत बंद का ऐलान, दिल्ली के सड़कों को ब्लॉक करने की धमकी भी दी

केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारियों ने अपने आंदोलन को नया रूप देने का फैसला किया है। प्रदर्शन पर बैठे किसान समूह ने ऐलान किया है कि वह 5 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूँकेंगे, 7 दिसंबर को अवॉर्ड वापसी करेंगे और 8 दिसंबर को भारत बंद करेंगे। 

किसानों ने मीडिया से बात करते हुए चेतावनी दी है कि वह दिल्ली की अन्य सड़कों को ब्लॉक करने पर विचार कर रहे हैं और यदि सरकार ने उनकी सुनवाई नहीं की तो वह प्रदर्शन को और अधिक व्यापक करेंगे।

भारतीय किसान यूनियन के सचिव हरविंदर सिंह लखोवाल ने कहा, “हम 5 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला जलाएँगे। फिर 8 तारीख को भारत बंद बुलाएँगे।” आगे उन्होंने कहा, “ अगर नए कानून को वापस नहीं लिया गया तो हम दिल्ली की आने वाली हर सड़क बंद कर देंगे।”

बता दें कि आंदोलन के ये चरण किसान यूनियन के 51 प्रतिनिधिमंडल द्वारा सिंघू बॉर्डर पर बैठक के बाद तय किया गया है। यहाँ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों ने ऐलान किया कि वह कृषि कानून को वापस करवाकर ही दम लेंगे। 

इससे पहले गुरुवार को किसानों की केंद्र सरकार के साथ 8 घंटे की बैठक हुई थी। इस बैठक में किसान नेता नए कृषि कानूनों को रद्द करने की अपनी माँग पर अड़े रहे। हालाँकि सरकार की ओर से कहा गया कि बैठक सकारात्मक रही।

गौरतलब है कि पूरे मामले में अगली बैठक सरकार के साथ 5 दिसंबर यानी कल होनी हैं, लेकिन किसान अभी तक इस बात पर अड़े थे कि जो सरकार लगातार किसानों को उनकी फसल पर एमएसपी देने की बात कर रही हैं, वह शनिवार को बैठक तभी करेंगे जब किसानों को एमएसपी की गारंटी मिलेगी। लेकिन जब केंद्र सरकार ने उन्हें हर तरह से आश्वस्त करने का प्रयास किया और उनके हर मुद्दे को सुनने को कहा तो वह प्रोटेस्ट को दूसरे स्तर पर ले जा रहे हैं। अब उनके इस प्रदर्शन में कई किसान नेताओं के अलावा, बुद्धिजीवी, कवि, वकील, लेखक, मानवाधिकार कार्यकर्ता आदि भी अपना सहयोग दे रहे हैं। कुल मिलाकर इस प्रदर्शन को अब वामपंथियों द्वारा हाइजैक किया जा रहा है।

हैदराबाद में ओवैसी पस्त, TRS को तगड़ा नुकसान: 4 साल में 12 गुना बढ़ी बीजेपी की सीटें, ट्रेंड में ‘भाग्यनगर’; कॉन्ग्रेस 2 पर सिमटी

ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) की 150 सीटों पर नतीजों का ऐलान हो चुका है। सामने आए परिणामों में टीआरएस ने 56 सीटें हासिल की है, लेकिन पिछली बार के मुकाबले उसे तगड़ा नुकसान हुआ है। सबसे चौंकाने वाला प्रदर्शन भाजपा का रहा। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को बीजेपी ने तीसरे नंबर पर धकेल दिया है।

भाजपा ने इन चुनावों में 49 सीटें हासिल की है। AIMIM को 43 सीटें मिली है। कॉन्ग्रेस की बात करें तो बिहार चुनाव की तरह हैदराबाद में भी उनका प्रदर्शन निराशजनक है। पार्टी को केवल 2 सीटों पर जीत हासिल हुई है। इसके चलते प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष उत्तम कुमार रेड्डी ने इस्तीफा दे दिया है।

गौरतलब है कि साल 2016 में हुए चुनावों की तुलना में भाजपा का प्रदर्शन इस बार जबरदस्त रहा है। पिछले चुनावों में भाजपा को मात्र 4 सीटें मिली थी। वहीं टीआरएस जिसे 4 साल पहले 99 सीट मिली थीं, अब 56 सीट पर आ गई है। 2016 में AIMIM को 44 सीट मिली थी।

हैदराबाद के नगर निगम चुनावों में भाजपा की ऐसी बढ़त से ट्विटर पर अचानक ‘भाग्यनगर में भगवाधारी’ ट्रेंड करने लगा है। भगवाधारी भाजपा की जीत के लिए इस्तेमाल हो रहा है, जबकि ‘भाग्यनगर’ शब्द का इस्तेमाल हैदराबाद की जगह किया जा रहा है। 

ग्रेटर हैदराबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के लिए चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने ये दावा किया था कि भाग्यनगर शहर का नाम इस मंदिर के कारण पड़ा। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हैदराबाद में एक चुनावी रैली में कहा था, “अगर हम इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर सकते हैं तो हम हैदराबाद का नाम बदलकर भाग्यनगर क्यों नहीं कर सकते हैं।”

इस ऐतिहासिक जीत के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने भी तेलंगाना के लोगों का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट करके कहा, “तेलंगाना के लोगों को पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास की राजनीति करने वाली भाजपा पर विश्वास दिखाने के लिए आभार।” आगे उन्होंने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष संजय बंदी को शुभकामनाएँ दी और सभी कार्यकर्ताओं को उनके कठोर परिश्रम के लिए सराहा।

वहीं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा हैदराबाद चुनाव का रुझान जो भी हो, लेकिन राष्ट्रवाद का झंडा बुलंद हुआ है। हैदराबाद चुनाव का रुझान प्रयागराज की तरह भाग्यनगर का आ रहा है। हैदराबाद में भ्रष्टाचार और वंशवाद के खिलाफ और राष्ट्रवाद के समर्थन में लोगों ने वोट किया है। फाइनल रिजल्ट जो भी आए, राष्ट्रवाद का झंडा बुलंद रहेगा। उन्होंने कहा कि हैदराबाद में भाजपा के पक्ष में रुझान देश की जीत और राष्ट्रवाद की जीत है, यह लोगों की जीत है।

उधर ट्विटर पर सोशल मीडिया यूजर्स की खुशी थमने का नाम नहीं ले रही। लोग कह रहे हैं कि चूँकि इस बार चुनाव की कमान योगी और शाह के हाथ में थी इसलिए ये परिणाम देखने को मिले हैं। उन्होंने खुलेआम कहा था कि हैदराबाद का नाम भाग्यनगर किया जाएगा। यूजर्स का कहना है कि अब हैदराबाद में भाजपा की बढ़त बताती है कि वह भारत को एक अच्छी सरकार देने के लिए तैयार हैं।

नक्सलियों का रोस्ट: पलामू में पकड़ाया डिल्डो! अजीत भारती का वीडियो | Naxals caught with dildo in Palamu

कल सुरक्षा बलों ने पलामू के सलामदिरी में माओवादी आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में ‘हथियार’ पकड़े। पीआईबी त्रिपुरा ने इसकी जानकारी देते हुए दो तस्वीरें शेयर की जिसमें पिस्तौल-बंदूक, गोली और मोबाइल फोन आदि के साथ दो और भी ‘क्रांतिकारी’ वस्तुएँ नजर आईं जो हल्के गुलाबी और गहरे गुलाबी रंग की थीं। “डिल्डो मिलने का मतलब वामपंथी न तो क्रांति कर पा रहे न वामपंथनों को संतुष्ट। कामपंथियों के बजाय रबर-यंत्र चुनने पर वामपंथनों को सलाम!”

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TV पर कंडोम और ‘लव ड्रग्स’ के विज्ञापन पॉर्न फिल्मों जैसे: मद्रास HC ने अश्लील एड को प्रसारित करने से किया मना

टेलीविजन चैनलों पर अश्लील और आपत्तिजनक विज्ञापन दिखाने के मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश पास किया है। लाइव लॉ के अनुसार न्यायमूर्ति बी पुगलेंधी और एन किरुबारकान की पीठ ने पीआईएल पर सुनवाई करते हुए ऐसे विज्ञापनों के प्रसारण पर आश्चर्य जताया, जिन्हें हर उम्र का व्यक्ति देखता है।

कोर्ट ने कहा, “लगभग सभी टीवी चैनल रात 10 बजे के बाद कुछ विज्ञापनों का प्रसारण करते हैं जिनमें कंडोम की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए नग्नता होती है, जिसे हर उम्र के लोग देखते हैं और वह हर टेलीविजन पर नजर आता है। ऐसी सामग्री केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 और केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 के प्रावधानों का उल्लंघन करती है।”

कोर्ट ने कहा कि कुछ विज्ञापन ऐसे होते हैं जो लव ड्रग्स को बढ़ावा देने जैसे हैं और पोर्नोग्राफी फिल्म जैसे दिखते हैं। देर रात दिखाए जाने वाले विज्ञापनों के बारे में बात करते हुए, आदेश में कहा गया, “जो कोई भी इन कार्यक्रमों को देखता है, वह अश्लील सामग्री देखकर चौंक जाएगा।”

याचिकाकर्ता ने मामले में अंतरिम आदेश पारित करने की अपील की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 11 नवंबर को अपने आदेश में कहा कि विज्ञापनों में दर्शायी जाने वाली नग्नता केबल टेलीविजन नेटवर्क एक्ट 1995 की धारा 16 का उल्लंघन करती है। अदालत ने कहा कि अधिनियम के प्रावधानों के तहत टेलीकास्ट होने वाले कार्यक्रमों में दर्शकों की नैतिकता, शालीनता और धार्मिक संवेदनशीलता को ठेस नहीं पहुँचनी चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि नियम 7(2) (iv) के तहत केबल ऑपरेटर्स यह सुनिश्चित करेंगे कि कार्यक्रमों में महिला रूप का चित्रण मनोहर और सौंदर्यपूर्ण हो और वो भी अच्छे व शालीनता मानदंडों के भीतर। कोर्ट ने लव ड्रग्स, कंडोम और अंतर्वस्त्र आदि का उल्लेख करते हुए टीवी पर दिखाई जाने वाली सामग्री पर चिंता जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि टीवी पर नग्नता, डॉक्टर की सलाह के नाम पर और विज्ञापनों में मौजूद है। इससे युवा और बच्चों के दिमाग पर असर पड़ेगा।

अपने अंतरिम आदेश में कोर्ट ने ‘न्याय के हित’ में उत्तरदाताओं से ऐसे प्रोग्राम की सेंसरशिप पर जवाब माँगा, जैसे कि सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 5 ए के तहत विचार किया गया था।

गौरतलब है कि इस मामले में कोर्ट के समक्ष दायर याचिका में यही प्रार्थना की गई थी कि कोर्ट उत्तरदाताओं को अपनी ओर से इस संबंध में निर्देश दें। इसमें प्रसारण मंत्रालय के सचिव, न्यूज एंड फिल्म तकनीक के सचिव, तमिलनाडु का फिल्म लॉ विभाग, विरुधुनगर के जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से मामले की मॉनीटरिंग करने और उपयुक्त कदम उठाने की बात आदि कही गई थी।

‘हर शुक्रवार पोर्क खाने को करते हैं मजबूर’: उइगरों के इलाकों को ‘सूअर का हब’ बना रहा है चीन

चीन में उइगर समुदाय के लोगों पर अत्याचार की एक के बाद एक हैरान करने वाले मामले सामने आ रहे हैं। सेरागुल सौतबे (Sayragul Sautbay) के अनुसार चीन उन्हें पोर्क खाने को मजबूर करता है। ज़ूमरेत दौत का अनुभव भी कुछ ऐसा ही है। दोनों उइगर समुदाय के लोगों के लिए बनाए गए प्रताड़ना शिविर में रह चुकी हैं। चीन इसे री-एजुकेशन कैंप कहता है।

सेरागुल सौतबे चीन के शिनजियांग प्रांत के एक ऐसे ही री-एजुकेशन शिविर से 2 साल पहले आज़ाद हुई थीं। लेकिन वह आज भी शिविर में हुए अत्याचार और प्रताड़ना को भूल नहीं पाई हैं। सेरागुल फ़िलहाल स्वीडन में रहती हैं और पेशे से चिकित्सक और शिक्षाविद हैं। हाल ही में उनकी एक किताब प्रकाशित हुई है, जिसमें उन्होंने शिविर के भीतर होने वाले अत्याचारों, शारीरिक शोषण और जबरन नसबंदी का विस्तार से उल्लेख किया है।    

अलजज़ीरा को दिए साक्षात्कार में उन्होंने सिलसिलेवार तरीके से बताया है कि उइगरों को चीन में कितना कुछ झेलना पड़ रहा है। इसमें सबसे ज्यादा उल्लेखनीय है कि उन्हें जबरन पोर्क खिलाया जाता था, जो कि इस्लाम में प्रतिबंधित है। सेरागुल ने बताया, “हर शुक्रवार को हम पर पोर्क खाने का दबाव बनाया जाता था। उन्होंने जान-बूझकर इस दिन का चुनाव किया था, क्योंकि यह दिन मुसलमानों के लिए पवित्र माना जाता है। अगर किसी ने इसे अस्वीकार किया तो उसे यातनाओं का सामना करना पड़ता था।” 

सेरागुल के मुताबिक़ मुस्लिम कैदियों को शर्मसार करने और उनमें आत्मग्लानि की भावना भरने के लिए इस तरह की नीतियाँ तैयार की गई थीं। उन्होंने कहा, “मुझे महसूस ही नहीं होता था कि मैं वही इंसान हूँ जो पहले थी। मेरे आस-पास सिर्फ अंधकार ही नज़र आ रहा था। मेरे लिए खुद का अस्तित्व स्वीकार करना तक मुश्किल हो चुका था। हम जिस तरह का जीवन जी रहे थे उन हालातों को शब्दों में जाहिर कर पाना असंभव है।” 

साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि चीनी हुकूमत उइगरों की मजहबी और सांस्कृतिक आस्था को चोट पहुँचाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपना रहा है। साल 2017 से ही चीन की सरकार उन पर लगातार निगरानी रख रही है और तथाकथित ‘कट्टरपंथ’ को ख़त्म करने के नाम पर इस तरह के शिविर को सही ठहराती है। वहीं दूसरी तरफ जर्मन मानव विज्ञानी (anthropologist) और उइगर मामलों की जानकार एड्रिना ज़ेन्ज़ का कहना है कि यह नीति ‘धर्म निरपेक्षीकरण’ का हिस्सा है। 

एड्रिना के अनुसार दस्तावेज़ और सरकार स्वीकृत नए लेख उइगर समुदाय के बीच बातचीत का समर्थन करते हैं। साथ ही इस तरह के सक्रिय प्रयास जारी हैं कि उस क्षेत्र में ‘पिग फार्मिंग’ को बढ़ावा दिया जाए। नवंबर 2019 के दौरान शिनजियांग के एडमिनिस्ट्रेटर शोहरत ज़ाकिर ने कहा था कि इस इलाके को ‘पिग रेज़िंग हब’ (सूअर पालने का गढ़) में तब्दील किया जाएगा। इस साल मई के दौरान एक लेख प्रकाशित हुआ था, जिसमें ऐसा कहा गया था दक्षिणी काशगर (Kashgar) क्षेत्र में ऐसी परियोजना शुरू की जा रही है, जिसकी मदद से 40 हज़ार सूअरों का उत्पादन प्रतिवर्ष किया जाएगा। 

यह परियोजना काशगर के औद्योगिक क्षेत्र कोनाक्सर (Konaxahar) जिसे अब शुफु (shufu) नाम से जाना जाता है में लगभग 25 हज़ार स्क्वायर मीटर की दूरी में विकसित किया जाएगा। यह समझौता इस साल अप्रैल महीने की 23 तारीख को तय किया गया था। यानी रमजान का पहला दिन। इस क्षेत्र में पैदा किया जाने वाले पोर्क का निर्यात भी नहीं किया जाएगा, बल्कि काशगर क्षेत्र में ही इसकी खपत की जाएगी। 

इस पूरे इलाके की 90 फ़ीसदी आबादी उइगर समुदाय से आती है। एड्रिना ने कहा, “यह शिनजियांग प्रांत के लोगों की मजहबी और सांस्कृतिक आस्था को पूरी तरह ख़त्म करने का प्रयास है। इसका उद्देश्य उइगरों को धर्म निरपेक्ष बनाना और चीन के वामपंथी दल का अनुसरण करवाना है। जिससे वह पूरी तरह नास्तिक बन जाएँ।”     

लगभग सेरागुल जैसा अनुभव उइगर मुस्लिम व्यवसायी (महिला) ज़ूमरेत दौत (Zumret Dawut) का भी था। उन्हें 2018 के मार्च में उरुमकी (Urumqi) शहर से गिरफ्तार किया गया था, जहाँ वह पैदा हुई थीं। गिरफ्तारी के दो महीने बाद तक अधिकारी उनसे सिर्फ यही पूछते थे कि उनका पाकिस्तान से क्या संबंध है। इसके अलावा यह भी पूछते थे कि उनके कितने बच्चे हैं और क्या उन बच्चों ने इस्लाम की शिक्षा ली है या कुरान पढ़ी है। 

ज़ूमरेत ने यह भी बताया कि उन्हें अक्सर नीचा दिखाने का प्रयास किया जाता था। अधिकारियों से मिन्नतें करनी पड़ती थीं कि उन्हें आराम करने दिया जाए और सिर्फ बाथरूम जाते वक्त उनकी हथकड़ियाँ खोली जाती थी। उन्होंने बताया कि उन्हें भी पोर्क दिया जाता था। उन्होंने कहा, “कंसंट्रेशन कैम्प में रहने के दौरान हम तय नहीं करते थे कि हमें क्या खाना है और क्या नहीं। ज़िंदा रहने के लिए हमें परोसा जाने वाला पोर्क भी खाना पड़ता था।”  

चीन की शिनजियांग सरकार ने प्रांत के लोगों के लिए एक अभियान चलाया था, जिसका नाम था ‘फ्री फ़ूड’। इस अभियान के तहत छोटी उम्र के मुस्लिम बच्चों को उनकी जानकारी के बगैर पोर्क परोसा जाता था। इसका उद्देश्य यह था कि बच्चों को छोटी उम्र से गैर हलाल मीट खाने की लत लग जाए।

तुर्की मूल की उइगर मानवाधिकार कार्यकर्ता अर्सलान हिदायत का कहना था कि पोर्क खाने से लेकर शराब पीने तक, चीन की सरकार इस्लाम में हराम मानी जाने वाली हर चीज़ को उइगरों के लिए सामान्य बनाने की कोशिश कर रही है। चीन की सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि रमजान के दौरान मुस्लिम पोर्क का सेवन करें और रोज़ा नहीं रखें।    

फ्रांस में ED ने विजय माल्या की 1.6 मिलियन यूरो की संपत्ति जब्त की, किंगफिशर के अकाउंट से भेजा था पैसा

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भगोड़े विजय माल्या के ख़िलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए फ्रांस में उसकी 1.6 मिलियन यूरो ( भारतीय रुपए के मुताबिक लगभग 14 करोड़) की प्रॉपर्टी जब्त की है। अपने ट्विटर अकाउंट पर इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए ईडी ने बताया कि विजय माल्या की 14 करोड़ रुपए की संपत्ति फ्रांस में एंटी मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जब्त की गई है।

ईडी ने कहा उनके आग्रह पर विजय माल्‍या की 32 अवेन्‍यू फोच (FOCH), फ्रांस की संपत्ति को फ्रेंच अथॉरिटी ने जब्‍त किया है। केन्द्रीय एजेंसी ने एक बयान में कहा है कि जाँच में खुलासा हुआ था कि संपत्ति के लिए किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड के बैंक खाते से बड़ी राशि विदेश भेजी गई थी।

बता दें कि किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड का मालिक और शराब कारोबारी विजय माल्या भारत से लंबे समय से फरार है। वह साल 2016 से ब्रिटेन में रह रहा है। उसे पिछले साल की शुरुआत में भारत सरकार ने भगोड़ा घोषित किया था। उसके बाद से सरकार विजय माल्या को प्रत्यर्पित करने की कोशिश में लगी है। उसके ऊपर 9 हजार करोड़ रुपए से अधिक के बैंक कर्ज धोखाधड़ी का मामला चल रहा है।

इस हालिया कार्रवाई से कुछ हफ्ते पहले विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में स्पष्ट किया था कि गोपनीय कानूनी मुद्दे के तहत भगोड़े विजय माल्या के प्रत्यर्पण में बाधा आ रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था,

“हमें बताया गया है कि एक गोपनीय कानूनी मुद्दा है जिस पर कार्यवाही चल रही है, जिसके बाद विजय माल्या को भारत को सौंपा जा सकता है। हमें किसी विशेष समयरेखा का संकेत नहीं दिया गया है और हम इस मामले पर बातचीत जारी रखना चाहते हैं।”

इसके अलावा इस साल की शुरुआत में ही विजय माल्या को पीएमएलए कोर्ट ने बड़ा झटका देते हुए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और कई अन्य बैंकों को भगोड़े विजय माल्या की जब्त संपत्ति को बेचकर कर्ज वसूली करने की इजाजत दी थी।

‘तारक मेहता…’ के राइटर ने की आत्‍महत्‍या: परिवार ने कहा- उन्हें ब्लैकमेल कर रहे थे, हमें दे रहे हैं धमकी

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की असामयिक मृत्यु की खबर सुर्खियों में आने के बाद से ही कई टेलीविजन और बॉलीवुड सेलेब्रिटीज़ की कथित रूप से आत्महत्या करने की खबर सामने आ रही है। इस तरह का एक और मामला सामने आया है। लोकप्रिय टेलीविजन कॉमेडी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के लेखक अभिषेक मकवाना ने आत्महत्या कर ली है। 37 साल के अभ‍िषेक का शव कांदि‍वली स्‍थ‍ित उनके फ्लैट से 27 नवंबर को मिला। पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया है।

कथित तौर पर पुलिस ने उनके फ्लैट से एक सुसाइड नोट बरामद किया था, जो कि गुजराती में था। इसमें मकवाना ने अपने आत्महत्या का कारण पिछले कुछ महीनों से चल रहे वित्तीय संकट को बताया है।

हालाँकि, लेखक के परिवार ने दावा किया है कि अभिषेक मकवाना साइबर धोखाधड़ी और ब्लैकमेल का शिकार हुआ था। परिवार ने कहा कि लेखक की मृत्यु के बाद भी उन्हें धमकी भरे फोन आ रहे हैं। परिवार के मुताबिक, अभिषेक द्वारा लिए गए कर्ज का भुगतान करने के लिए उन पर लगातार दबाव डाला जा रहा है। कथित तौर पर उनके भाई जेनिस ने कहा कि उन्हें अभिषेक की मृत्यु के बाद इन मुद्दों के बारे में पता चला जब उन्हें फ़ोन आने शुरू हुए।

जेनिस कहते हैं, “मैंने भाई के ईमेल्‍स चेक किए, क्‍योंकि जब से उनकी मौत हुई है मुझे पैसों के लिए बहुत सारे फोन कॉल्‍स आ रहे हैं। इनमें से एक फोन कॉल बांग्‍लादेश के नंबर से, एक म्‍यांमार के नंबर और बाकी भारत के दूसरे राज्‍यों से आए हैं। मुझे भाई के ईमेल्‍स से पता चला कि उन्‍होंने शुरुआत में ‘इजी लोन’ ऐप के जरिए छोटे कर्ज लिए, जिनका ब्‍याज दर बहुत ज्‍यादा था।”

जेनिस ने आगे कहा, “मैंने उनके और भाई के बीच हुए पैसों के लेन-देन का जायजा लिया। मैंने पाया कि मेरे भाई ने आवेदन नहीं किया था, बावजूद इसके उन्‍हें कुछ पैसे भेजे गए। इनका ब्‍याज दर 30 परसेंट से भी ज्‍यादा है। भाई के फोन में भी टेक्‍स्‍ट मैसेज हैं, जिनसे पता चलता है कि उन्‍हें ब्‍लैकमेल किया जा रहा था।”

जेनिस ने बताया कि भाई की मृत्यु के बाद जब लोन देने वालों को उनकी आत्महत्या के बारे में सूचित किया गया और कहा कि वह और उनका परिवार अभी इस मुद्दे पर चर्चा करने की स्थिति में नहीं हैं, तो वो और अधिक अपमानजनक हो गए।

गौरतलब है कि पुलिस ने परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों को मद्देनजर रखते हुए जाँच शुरू कर दी है और धोखाधड़ी के आरोपों पर अधिक जानने के लिए लेनदेन के विवरण के लिए बैंक से संपर्क किया है।

वहीं मामले की जाँच कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि, “फिलहाल हमारे पास कोई पक्‍के सबूत नहीं हैं कि कर्ज देने वाली कंपनी उन्‍हें परेशान कर रही थी। जब हमें कुछ पुख्‍ता मिलेगा, हम जरूरी कार्रवाई करेंगे।”

बता दें कॉमेडी सीरीज तारक मेहता का उल्टा चश्मा का 28 जुलाई 2008 को सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया के चैनल, सब टीवी पर प्रसारण शुरू हुआ था। हाल ही में इस शो के 3000 एपिसोड पूरे हुए हैं।

‘हमने MP और शाजापुर को शाहीन बाग बना दिया’: जमानत देते हुए अनवर से हाईकोर्ट ने कहा- जाकर काउंसलिंग करवाओ

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने गत 26 नवंबर को अनवर नाम के एक युवक को जमानत देते हुए उसे काउंसलिंग लेने का आदेश दिया। जस्टिस वीरेंद्र सिंह की बेंच ने सोशल मीडिया पर सीएए और एनआरसी को लेकर भड़काऊ मैसेज भेजने वाले अनवर को बेल देते हुए कहा कि उसे फरवरी, मार्च और अप्रैल 2021 के पहले हफ्ते वकील एवं समाजिक कार्यकर्ता रश्मि पांडे से काउंसलिंग लेनी ही होगी।

कोर्ट ने कहा कि पांडे से मिलकर अनवर को न केवल काउंसलिंग लेनी होगी, बल्कि उनके निर्देशों को सख्ती से फॉलो भी करना होगा। अगर काउंसलिंग सत्र के बाद सामाजिक कार्यकर्ता रश्मि पांडे की ओर से कोई विपरीत रिपोर्ट जमा हुई तो बेल बढ़ाने की जगह कोर्ट उसे निरस्त कर देगा।

बता दें कि अनवर के ख़िलाफ वॉट्सएप पर एक विवादित संदेश शेयर करने के मामले में मुकदमा दर्ज हुआ था। इस संदेश में लिखा था, “तुमने दिल्ली में गोली चलाई, हमने मध्यप्रदेश और शाजापुर (Shajapur) को शाहीन बाग बना दिया।” इस मुकदमे के बाद अनवर को 2 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह हिरासत में ही था।

प्रशासन ने उसके इस स्टेटस से धार्मिक सौहार्दता और लोक शांति के विपरीत रूप से प्रभावित होने की आशंका पाते हुए उसके विरुद्ध आईपीसी की धारा 505(2) और 188 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद पूरे मामले में जाँच पूरी करके चार्जशीट दायर हुई थी।

हाईकोर्ट ने नवंबर में अनवर को बेल भी इसी आधार पर दी है कि उसने कोर्ट से वादा किया कि वो दुबारा ऐसे अपराध नहीं करेगा, जिससे राष्ट्रीय पहचान और एकता पर असर पड़े। उसने कोर्ट के समक्ष अंडरटेकिंग भी जमा की है।

गौरतलब है कि दिल्ली में गत 24 और 25 फरवरी को इस्लामी और वामी कट्टरपंथियों के कारण भारी दंगे हुए थे। इन दंगों में फाइल हुई चार्जशीट में AAP के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन को मास्टरमाइंड बनाया गया था। उस पर हत्या और दंगे करवाने का आरोप है। इसके अलावा ताहिर पर आईबी अधिकारी अंकित शर्मा को मारने का भी आरोप है।

दंगों की शुरुआत शाहीन बाग का ही व्यापक असर था, जहाँ दिसंबर से ही प्रदर्शन चल रहे थे और साजिशकर्ता अपनी साजिश रच रहे थे। जब फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे हुए और पुलिस ने अपनी जाँच शुरू की। जाँच के दौरान शाहीन बाग से जुड़ा लगभग हर सक्रिय नाम शक के घेरे में आया। ऐसे में कई अन्य प्रदेशों में जब शाहीन बाग बनाने की बात हुई तो लोगों ने उसके विरुद्ध शिकायतें करवाईं और कई लोग ऐसे मामलों में गिरफ्तार भी हुए।