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हैदराबाद में केवल ओवैसी को घेरने गई है BJP या कोई और है निशाना: नड्डा, योगी और शाह के उतरने का कुछ अलग ही है गणित…

मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु ऐसे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशंस हैं, जिन पर सभी राजनीतिक दल कब्ज़ा जमाना चाहते हैं, क्योंकि वित्तीय रूप से ये तीनों कई राज्यों से भी ज्यादा समृद्ध हैं। दक्षिण भारत में चेन्नई और हैदराबाद बड़े महानगर हैं। अब सभी की नजरें हैदराबाद में होने वाले GHMC (ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन) चुनाव पर है, जहाँ पिछली बार मात्र 4 सीटें जीतने वाली पार्टी भाजपा ने इस बार अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

आखिर इसके मायने क्या हैं? जब असदुद्दीन ओवैसी कहते हैं कि एक ‘गली के चुनाव’ लड़ने के लिए इतने बड़े-बड़े नेता आ रहे हैं, तो ये उनकी कौन सी असुरक्षा की भावना दिखाती है? कभी 15 मिनट के लिए पुलिस हटाने की बात करने वाले छोटे ओवैसी कभी माता मंदिर के नाम पर वोट माँगते हैं तो कभी ‘हम किसी के बाप से भी नहीं डरते’ वाला बयान देते हैं, तो क्या ये नहीं लगना चाहिए कि AIMIM का नेतृत्व अपने गढ़ में ही घिर गया है?

GHMC चुनाव: भाजपा के पास खोने को कुछ भी नहीं

हम इसके मायने आगे तलाशेंगे, लेकिन सबसे पहले GHMC के पिछले चुनावों और इस बार जिस तरह से भाजपा बड़ा अभियान चल रही है, उसकी समीक्षा ज़रूरी है। 2009 में हुए GHMC के चुनाव में कॉन्ग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी। सोचिए, मात्र एक दशक में ये अंकगणित कितना बदल गया है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में कॉन्ग्रेस की हालत महाराष्ट्र से भी बदतर हो गई है। महाराष्ट्र में 6 साल पहले सत्ता में रही पार्टी आज चौथे नंबर पर है।

2009 में कॉन्ग्रेस को 105 में से 52 सीटें मिली थीं। उस समय अखंड आंध्र प्रदेश में कॉन्ग्रेस सत्ता में तो थी, लेकिन राजशेखर रेड्डी का असामयिक देहांत हो चुका था। वो राज्य में कॉन्ग्रेस के सबसे बड़े नेता और मुख्यमंत्री थे। आज उनके बेटे जगन मोहन रेड्डी कॉन्ग्रेस से बगावत कर अपने दम पर जीत कर आंध्र प्रदेश में सरकार चला रहे हैं। कॉन्ग्रेस के बाद चंद्रबाबू नायडू की TDP को तब 45 सीटें मिली थीं। भाजपा मात्र 4 सीटों के साथ चौथे स्थान पर थी।

तीसरे स्थान पर वो पार्टी थी, जिसका हैदराबाद गढ़ रहा है। जो लगातार हैदराबाद की अधिकतर विधानसभा सीटें जीतती रही हैं। इस बार भी महानगर में पार्टी के पास 7 सीटें हैं। हैदराबाद की लोकसभा सीट पर तो 1984 से ही ओवैसी परिवार का कब्ज़ा रहा है। इस बार AIMIM हैदराबाद से बाहर निकलने की कोशिश में है और महाराष्ट्र में 2 और हालिया बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान सीमांचल में 5 सीटें मिलने के बाद उसका आत्मविश्वास बढ़ा भी है।

हम बंगाल को आ रहे हैं” – ऐसा कह के असदुद्दीन ओवैसी ने ममता बनर्जी के दिल की धड़कनें भी बढ़ा दी हैं और उन्हें वहाँ कई मौलानाओं का समर्थन भी मिल रहा है। 2016 में हुए GHMC के चुनाव में भाजपा ने अपनी संख्या बरकरार रखी, लेकिन कॉन्ग्रेस पूरे परिदृश्य से गायब सी होने लगी। जिस पार्टी के पास पिछले चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें थीं, राज्य (अखंड आंध्र) में सत्ता थी, केंद्र में सत्ता थी- उसने 2016 तक तीनों ही गँवा दिया था।

के चंद्रशेखर राव की TRS राज्य के साथ-साथ GHMC में भी बड़ी पार्टी बन कर उभरी और उसने 150 में से 99 सीटें जीत कर अपना दबदबा कायम किया। AIMIM का प्रदर्शन वैसा ही रहा, उसकी 1 सीट बढ़ गई। अब जब 2020 के चुनाव में भाजपा ने जिस तरह से ताकत झोंकी है, स्पष्ट है कि TRS और AIMIM की जो भी सीटें घटेंगी, वो कॉन्ग्रेस के पाले में नहीं, बल्कि भाजपा के खाते में ही आएँगी।

यहाँ एक बात का जिक्र करना आवश्यक है कि आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद तेलंगाना से TDP गायब हो गई। ये होना ही था, क्योंकि विभाजन के लिए हुए आंदोलन में जिस कदर हिंसा हुई थी और जो पागलपन देखने को मिला था, उसके बाद दोनों राज्यों के राजनीतिक दलों का एक-दूसरे के राज्य से सफाया सा हो गया। भाजपा के पास पाने के लिए यहाँ सब कुछ है, खोने के लिए कुछ नहीं। भाजपा का कुछ भी इन दोनों राज्यों में दाँव पर नहीं लगा है।

हैदराबाद चुनाव प्रचार: भाजपा नेताओं ने फेवरिट मुद्दे

अब जरा भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, यूपी सीएम और फायरब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ और पार्टी के कर्ताधर्ता व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जिस तरह से वहाँ रैलियाँ की है, उससे अंदाज़ा लग सकता है कि भाजपा के लिए यहाँ मुद्दा क्या है। नड्डा ने बिहार विधानसभा में भाजपा के स्ट्राइक रेट की बात उठाई, जहाँ पार्टी ने 74 सीटें जीत रखी हैं। वहीं योगी आदित्यनाथ ने याद दिलाया कि बिहार में नीतीश कुमार की फिर से सरकार बनी है।

उन्होंने उस हैदराबाद को ओवैसी द्वारा ‘गली का चुनाव’ कहने पर आपत्ति जताई, जहाँ लोकसभा की 5 और विधानसभा की 24 सीटें हैं। भाजपा की यहाँ जोर-आजमाइश का एक बड़ा कारण ये भी है। भाजपा को 2014 में हिंदी बेल्ट में गजब का समर्थन मिला था। पार्टी को पता था कि दूसरी-तीसरी बार में भी हर जगह ऐसा प्रदर्शन दोहराना कठिन है, इसीलिए नई जमीनें ढूँढ़नी पड़ेंगी। पश्चिम बंगाल में 18 और ओडिशा में 8 सीटें जीत कर भाजपा ने ये साबित भी किया।

इस बार पार्टी को पता है कि यही काम दक्षिण भारत कर सकता है। तमिलनाडु में दो द्रविड़ पार्टियों के बीच सारी सियासत दशकों से अटकी पड़ी है। कर्नाटक में भाजपा सत्ता में है ही और उसे येदियुरप्पा के बाद अगली पीढ़ी का नेता तैयार करना है। बेंगलुरु के ही तेजस्वी सूर्या जोर-शोर से हैदराबाद में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। केरल में सबरीमाला मामले में श्रद्धालुओं के साथ खड़े होने के बावजूद पार्टी को 2019 लोकसभा चुनावों में खास समर्थन मिला नहीं।

इसीलिए, अब तेलंगाना के सहारे भाजपा दक्षिण की राजनीति में पैठने के इंतजार में है, क्योंकि यहाँ TRS ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है, जिससे एंटी-इंकम्बेंसी भी आने वाले दिनों में गहरी हो सकती है। साथ ही हैदराबाद में पूरे देश की इस्लामी कट्टरता अपने घर में लेकर बैठे ओवैसी परिवार को उसके गढ़ में घेरा जा सकता है। साथ ही 5 लोकसभा सीटों का गणित भाजपा लगा रही है, पूरे तेलंगाना में तो 17 हैं।

एक और बात गौर कीजिए कि अमित शाह के मंत्रालय में डिप्टी मंत्री (राज्यमंत्री) के रूप में वही दो लोग हैं, जिन्हें अपने-अपने राज्यों में पार्टी का अगली पीढ़ी का चेहरा बनाने की तैयारी है। 60 साल के जी किशन रेड्डी और 54 साल के नित्यानंद राय केंद्रीय गृह मंत्रालय में पूर्व भाजपा अध्यक्ष के अंतर्गत काम कर के अच्छा प्रशासनिक अनुभव लेकर आ रहे हैं, ऐसे में इन दोनों पर सभी की नजरें हैं ही।

जी किशन रेड्डी हैदराबाद के ही जुड़वाँ शहर सिकंदराबाद लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं और वो GHMC चुनाव में भी जम कर प्रचार कर रहे हैं। इसके अलावा तेलंगाना में उस वंशवादी राजनीति का दबदबा है, जिसका विरोध भारतीय जनता पार्टी करती आई है। जेपी नड्डा ने ‘Me, My Family और My Friends’ वाला तंज कस कर इस वंशवाद पर निशाना भी साधा और तेलंगाना में भ्रष्टाचार को लेकर जनता के बीच एक ईमानदार पार्टी को मौका देने का निवेदन किया।

ओवैसी परिवार को राजनीति विरासत में मिली है। केसीआर के बेटे केटीआर को सरकार और संगठन में आगे बढ़ाया जा रहा है। 44 वर्षीय नेता को न सिर्फ मंत्री बनाया गया, बल्कि वो TRS के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। साथ ही उनको दिए गए मंत्रालय पर गौर कीजिए- म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन एंड अर्बन डेवलपमेंट। यानी, उन्हें एकदम मलाईदार मंत्रालय थमाया गया है और म्युनिसिपल प्रशासन का जिम्मा भी सौंपा गया है।

भाजपा ने उन्हें भी अपने हमले का निशाना बना रखा है। केटीआर भले ही बार-बार ये कह कर ‘ऑल इज वेल’ की फीलिंग लेने की कोशिश कर रहे हों कि उनकी लड़ाई AIMIM से है, भाजपा से तो है ही नहीं। लेकिन, जिस तरह वो बार-बार भाजपा पर हमला कर रहे हैं और उसे ‘बेचो इंडिया’ बताते हुए अपनी पार्टी को ‘सोचो इंडिया’ कह रहे हैं, उससे साफ़ है कि उन्हें भी पता है कि असली खतरा किससे होने वाला है।

एक फैक्टर, जिसकी बात सभी कर रहे हैं और जिसने 2019 लोकसभा चुनाव से लेकर बिहार विधानसभा चुनाव तक रैलियाँ कर के भाजपा के पक्ष में हवा का रुख मजबूत किया है, वो हैं योगी आदित्यनाथ। वे एक ऐसा चेहरा हैं, जिसने तेलंगाना में रोड शो कर के शहर को भगवामय कर दिया। ‘जय श्री राम’ के नारे गूँजने लगे और उन्होंने हैदराबाद का नाम बदल कर भाग्यनगर करने का वादा किया। साथ ही उदाहरण दिया कि किस तरह फैजाबाद को यूपी में अयोध्या किया गया।

योगी आदित्यनाथ ने अपना मुख्य फोकस इस बात पर रखा कि जिस तरह से हैदराबाद में निजामशाही के खिलाफ आंदोलन हुआ था, उसके बाद यहाँ की जनता के सामने नए ‘निजाम’ पैदा हो गए और वो राजसत्ता की तरह चीजों को चला रहे हैं। हिंदुत्व और उससे जुड़े मुद्दे उनके भाषण का मुद्दा बने ही, साथ ही भाजपा के विकास कार्यों को भी गिनाया। ओवैसी के ध्रुवीकरण का भाजपा ने विकास और हिंदुत्व के माध्यम से जवाब दिया है।

लगभग यही बातें रविवार (नवंबर 29, 2020) को अमित शाह ने भी की, जिन्होंने हैदराबाद को ‘निजाम संस्कृति’ से मुक्ति दिलाने का वादा किया। केंद्रीय गृह मंत्री ने पुराने शहर में स्थित भाग्यलक्ष्मी मंदिर में दर्शन किया और जनता से कहा कि भाजपा को GHMC में सीटों की संख्या तो बढ़ानी है ही, साथ ही ये भी सुनिश्चित करना है कि मेयर भी इसी पार्टी का हो। उन्होंने हैदराबाद को आईटी हब बनाने की भी बात की।

आप इस बात पर भी गौर कीजिए कि इन चुनावों के लिए प्रभारी किसे बनाया गया है। ये जिम्मा उसी नेता को दिया गया है, जिसने 2019 लोकसभा चुनाव और 2020 विधानसभा चुनाव में बतौर प्रभारी बिहार में पार्टी के लिए सफल प्रबंधन कर के दिखाया। सांसद भूपेंद्र यादव ही हैदराबाद GHMC चुनाव में भाजपा के प्रभारी हैं। हर मोर्चे पर पार्टी ने एकदम सोच समझ कर चेहरों को आगे किया है, पूरी तैयारी के साथ।

नहीं, केवल ओवैसी के लिए तेलंगाना में नहीं गई है BJP

हैदराबाद में भाजपा केवल असदुद्दीन ओवैसी को घेरने के लिए नहीं गई है। ये लोकसभा 2024 के लिए तैयारी चल रही है। क्योंकि, AIMIM तो मात्र 33% सीटों पर ही चुनाव लड़ रही है। उसने 150 में से मात्र 51 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं और इनमें से भी अधिकतर पुराने हैदराबाद में हैं। इसलिए, दूर तक देखने वाले राजनीतिक पंडित ये तो समझते हैं कि यहाँ ताकत लगाने से ये सन्देश जाएगा कि ओवैसी पर भाजपा की बी-टीम होने के लग रहे झूठे आरोपों को निराधार करने के लिए पार्टी ऐसा कर रही है।

लेकिन, उससे भी ज्यादा दूर देखने वालों को पता है कि तैयारी तेलंगाना में सत्ता और 2024 लोकसभा चुनाव में हिंदी बेल्ट में होने वाले थोड़े-बहुत नुकसान की भरपाई के लिए अभी से तैयारी चालू है। ये लड़ाई TRS से है, वास्तविक लड़ाई राज्य की सत्ताधारी पार्टी से है। सभी सीटों पर भाजपा भी लड़ रही है और TRS भी। ओवैसी तो विधानसभा चुनावों में भी पूरी सीटों पर नहीं लड़ते। 2018 में वो 11 पर लड़े थे तो 2014 में मात्र 8 पर।

हाँ, ओवैसी भाजपा का निशाना जरूर हैं, लेकिन वो एक जरिया भी हैं, जिन्हें नेस्तनाबूत कर भाजपा दक्षिण में अपना रथ आगे बढ़ाएगी। उन्हें ‘हैदराबाद का जिन्ना’ से लेकर हैदराबाद में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ तक की बातें ज़रूर कही गईं। लेकिन, रजाकारों के अत्याचार की याद दिला कर और निजाम के पाकिस्तानी झुकाव को फिर से मुद्दा बना कर भाजपा ने आक्रामक तरीके से इस्लामी पार्टी को आड़े हाथों लिया है।

सबसे पहली बात तो ये है कि जिन पार्टियों ने एक सामाजिक आंदोलन के बाद सत्ता प्राप्त किया- आंध्र प्रदेश के विभाजन का। दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल ने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने सिंगूर और नंदीग्राम हड़ताल के बाद सत्ता प्राप्त की। ऐसे नेताओं को हटाना जरा मुश्किल सा होता है। इसीलिए, भाजपा की लड़ाई देखने में तो ओवैसी से है, लेकिन असली निशाना सत्ताधारी हैं।

2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने हैदराबाद और सिकंदराबाद की 14 में से 7 विधानसभा सीटों पर बढ़त प्राप्त की थी, ऐसे में पार्टी को उम्मीदें तभी से दिखने लगी थी। सिकंदराबाद पहले से भी भाजपा का क्षेत्र रहा है और कॉन्ग्रेस व TDP के गायब होने के बाद पैदा हुई जगह को भाजपा भरना चाहती है। अब भाजपा KCR के दरवाजे पर दस्तक दे रही है। इस चुनाव का परिणाम जो भी हो, फायदा एक ही पार्टी को दिख रहा है, क्योंकि उसके पास खोने को कुछ नहीं।

पूर्वी मिदनापुर में शुभेंदु अधिकारी ने दिखाई झलक, असली शो अभी भी बाकी: मान-मनौव्वल में जुटी TMC

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार से इस्तीफा देने वाले शुभेंदु अधिकारी (29 जून, 2020) ने रविवार को पूर्वी मिदनापुर में सभा की। हालॉंकि उन्होंने अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं। इस सभा के जरिए उन्होंने अपनी ताकत की झलक दिखाने की कोशिश की। सत्ताधारी टीएमसी उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिशों में लगी है।

मंत्री पद से इस्तीफे के बाद शुभेंदु अधिकारी की यह पहली जनसभा थी। कयास लगाया जा रहा था कि इस सभा में वे अपने अगले राजनीतिक कदम की घोषणा कर सकते हैं। लेकिन उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर संस्पेंस बनाए रखा है।

पूर्वी मिदनापुर जिले के महिषादल में स्थानीय स्वतंत्रता सेनानी रणजीत बयाल के स्मरण में ताम्रलिप्त जनकल्याण समिति की ओर से हुए इस आयोजन पर सभी की निगाहें टिकी हुई थी। सभा को संबोधित करते हुए टीएमसी नेता ने सबसे पहले दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को याद किया। इसके बाद उन्होंने देश को समर्पित स्वतंत्रता सेनानी रणजीत बयाल का जिक्र करते हुए उनके योगदान का उल्लेख किया।

अपनी राजनीतिक सेवा के बारे बताते हुए शुभेंदु ने यह भी कहा कि वे अपनी क्षमता के मुताबिक ताउम्र आम लोगों की सेवा करते रहेंगे। बता दें शुभेंदु अधिकारी ने परिवहन मंत्री पद से इस्तीफा दिया है, लेकिन उन्होंने अभी तक टीएमसी के एमएलए व प्राथमिकता सदस्यता पद से इस्तीफा नहीं दिया है। आज बागी टीएमसी नेता के रवैये को देखते हुए तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी की तरफ से हल्दिया में जुलूस निकाला गया था।

इस बीच पूर्वी मिदनापुर में शिवसेना के झंडे भी देखे गए थे। इसे भी शुभेंदु अधिकारी के राजनीतिक भविष्य के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। अभी तक यह पूरी तरह से सस्पेंस बना हुआ है कि क्या शुभेंदु टीएमसी से पूरी तरह से नाता तोड़ लेंगे? क्या वह बीजेपी में शामिल होंगे? या किसी अन्य पार्टी में शामिल होंगे? या अपना अपनी नई पार्टी का गठन करेंगे?

उल्लेखनीय है कि मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद भाजपा और कॉन्ग्रेस की स्थानीय यूनिट उन्हें अपने पाले में लेना चाहती है। भाजपा उनके गढ़ में पहले ही पैठ बना चुकी है। लेकिन, इन सबके बीच सबसे ज्यादा नुकसान TMC और ममता बनर्जी को होने वाला है। 35 विधानसभा सीटों पर प्रभाव रखने वाले अधिकारी ने अपने समर्थकों से एकजुट होने की अपील की है।

शुभेंदु अधिकारी ने अपने समर्थकों से कहा है कि वो सड़क पर उतरने के लिए गोलबंद हो जाएँ। उन्होंने अपने समर्थक विधायकों को भी जनता के बीच उतरने को कहा था। उन्होंने शनिवार (नवंबर 28, 2020) को अपने समर्थक TMC नेताओं को अपनी रणनीति समझाई। एक TMC नेता ने कहा कि पूरा अधिकारी समर्थक कैडर सड़क पर उतरने को तैयार है और अभी से चुनावी मोड में आ गया है। उन्हें इंतजार है तो सिर्फ अपने नेता की हरी झंडी का।

समर्थकों ने बताया कि इसके लिए पिछले 6 महीने से तैयारियाँ चल रही थीं। समर्थकों का कहना है कि वो 6 जिलों में पूरी तरह गोलबंद हैं और एक अलग संगठन के जरिए प्रचार मोड में हैं। ये सब तब हो रहा है, जब TMC सारे विकल्प खुले होने की बात करते हुए अभी भी अधिकारी को मनाने की कोशिश कर रहा है। पार्टी ने इसके लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री सौगत रॉय को लगाया है, क्योंकि प्रशांत किशोर भी यहाँ फेल हो गए हैं।

हिंदू धर्म को हिंसक बताने वाली उर्मिला मातोंडकर शिवसैनिक बनेंगी, विधान परिषद में मिल सकती है एंट्री

अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए हिन्दू धर्म को हिंसक बता चुकी उर्मिला मातोंडकर को नया राजनीतिक ठिकाना मिल गया है। लोकसभा चुनाव के बाद कॉन्ग्रेस छोड़ने वाली ‘रंगीला’ फेम बॉलीवुड की यह अभिनेत्री अब शिवसेना का दामन थामने की तैयारी में हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, उर्मिला मातोंडकर सोमवार को शिवसेना में शामिल होंगी। कथित तौर पर, शिवसेना ने उन्हें राज्य विधान परिषद के लिए नामित करने का फैसला किया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले महाविकास अघाड़ी 46 वर्षीय अभिनेत्री का नाम 11 अन्य लोगों के साथ नामित कर सकती है।

2019 में आम चुनावों के वक्त उर्मिला कॉन्ग्रेस में शामिल हुई थीं और उन्होंने लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। लेकिन वह जीत नहीं पाईं थी। चुनाव के 5 महीने बाद उन्होंने कॉन्ग्रेस की अंदरूनी राजनीति से तंग आकर दिया इस्तीफ़ा दे दिया था।

इस्तीफा देते वक़्त उन्होंने एक बयान में कहा था, “मेरी राजनीतिक और सामाजिक संवेदनशीलता का एक बड़े लक्ष्य पर काम करने के बजाय मुंबई कॉन्ग्रेस में कुछ लोग आपसी लड़ाई के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।” उन्होंने कहा था, ” मेरी सामाजिक और राजनीतिक संवेदनाएँ इस बात की इजाजत नहीं देती कि पार्टी के कुछ लोग मुंबई कॉन्ग्रेस के भले के लिए काम करने की जगह अपनी तुच्छ राजनीति के तहत निहित स्वार्थ की पूर्ति के लिए मेरा इस्तेमाल करें।”

उर्मिला मातोंडकर ने कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के रूप में मुंबई उत्तर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें भाजपा नेता गोपाल शेट्टी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।

आपको बता दें कि उर्मिला ने कॉन्ग्रेस ज्वाइन करते वक़्त कहा था कि राजनीति में वो ग्लैमर की वजह से नहीं आई हैं बल्कि विचारधारा के कारण कॉन्ग्रेस में शामिल हुई हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी के नेतृत्व पर कहा था, “देश को सबको साथ में लेकर चलने वाला नेता चाहिए, ऐसा नेता जो भेदभाव नहीं करता हो। राहुल एकमात्र ऐसे नेता हैं जो सबको साथ लेकर चल सकते हैं।”

‘4 महीने का राशन लेकर आए हैं, दिल्ली को 5 जगह से घेरेंगे’: वार्ता प्रस्ताव ठुकराया, बुराड़ी को बताया ओपन जेल

नए कृषि कानूनों को वापस लेने तथा अपनी फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी की माँग को लेकर आंदोलन कर रहे किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। सिंघु बॉर्डर से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर किसान यूनियन ने कहा कि वो बुराड़ी में प्रदर्शन करने को तैयार नहीं हैं, उन्हें प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर ही जाना है। इसी के साथ किसानों ने बुराड़ी में प्रदर्शन की जगह को ‘ओपन जेल’ करार दिया। ये भी कहा कि वो चार महीने तक रोड पर ही प्रदर्शन कर सकते हैं, उन्होंने इसके लिए पूरी व्यवस्था कर रखी है। उनके पास पर्याप्त राशन हैं। वे दिल्‍ली के 5 मेन एंट्री प्‍वाइंट को अवरुद्ध कर राजधानी का घेराव करेंगे।

इससे पहले 30 किसान संघों ने रविवार (नवंबर 29, 2020) दोपहर की मीटिंग में गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्‍ताव को खारिज कर दिया। किसान संगठन बिना शर्त सरकार से बातचीत चाहता है। किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन (क्रांतिकारी) पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष सुरजीत सिंह फूल ने कहा कि बातचीत के लिए रखी गई शर्त किसानों का अपमान है। हम बुराड़ी कभी नहीं जाएँगे। बुराड़ी ओपन पार्क नहीं है एक ओपन जेल है।

उन्होंने कहा कि हमें इस बात के साक्ष्य मिले हैं कि बुराड़ी ओपन जेल है। उत्तराखंड किसान संघ के अध्यक्ष से दिल्ली पुलिस ने कहा था कि उन्हें जंतर-मंतर ले जाया जाएगा, लेकिन उन्हें बुराड़ी मैदान में ले जाकर बंद कर दिया गया।

सुरजीत सिंह फूल ने कहा, “बुराड़ी जाने की बजाए हम दिल्ली में एंट्री के पाँच रास्तों का घेराव करेंगे। हमारे पास चार महीने का राशन है तो हमारे लिए चिंता की बात नहीं है। हमारी ऑपरेशन कमेटी आगे का फैसला लेगी।” उन्होंने कहा, “हमने तय किया है कि हम किसी भी राजनीतिक दल के नेता को अपने मंच पर बोलने की अनुमति नहीं देंगे, हम लोग दो महीने से आंदोलन कर रहे हैं, चाहे वह कॉन्ग्रेस, भाजपा, आप या अन्य दल से हों। हमारी समिति उन संगठनों को बोलने की अनुमति देगी जो हमारा समर्थन करते हैं। उन्‍हें हमारे नियम का पालन करना होगा।” 

उन्‍होंने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा अनजाने में दुर्व्यवहार के लिए मीडिया से माफी माँगते हैं। भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए, हमने तय किया है कि हर बैठक के बाद हमारे द्वारा मीडिया के लिए एक आधिकारिक प्रेस नोट जारी किया जाएगा।

30 किसान संगठनों के ज्वाइंट फोरम ने अमित शाह के प्रस्ताव को रद्द किया है। यह किसान संगठन अब उन किसानों को भी वापस बुलाएँगे, जो निरंकारी मैदान पहुँच चुके हैं। पंजाब-हरियाणा से आए हजारों किसान नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली प्रदर्शन करने पहुँचे हैं।

किसानों के कॉन्फ्रेंस करने के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी प्रतिक्रिया दी है। तोमर ने कहा है कि भारत सरकार किसानों से तीन दौर की वार्ता कर चुकी है, चौथी बार तीन दिसंबर को मिलने का प्रस्ताव दिया था। सरकार हर स्तर पर खुले मन से बातचीत करने को तैयार है पर किसान यूनियन को बातचीत का माहौल बनाना चाहिए। उन्हें आंदोलन का रास्ता छोड़ चर्चा का रास्ता अपनाना चाहिए।

गौरतलब है कि गृह मंत्री अमित शाह ने किसान संगठनों से 3 दिसबंर से पहले बातचीत का प्रस्ताव रखा था, जिसे किसानों ने खारिज कर दिया। इसके अलावा कृषि मंत्री ने किसानों को बातचीत करने के लिए कहा है लेकिन किसानों ने बिना शर्त बातचीत की बात कही है। कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को दिल्ली के बुराड़ी में मौजूद निरंकारी ग्राउंड में प्रदर्शन करने की इजाजत दी गई है, लेकिन किसानों ने सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर ही डेरा डाल रखा है।

हाथ में कलावा, माथे पर तिलक: राज बन गोलू खान ने नाबालिग को फँसाया, इस्लाम कबूलने का डाला दबाव

कानपुर के काकादेव से लव जिहाद का नया मामला सामने आया है। गोलू खान ने नाम बदल कर हिन्दू नाबालिग लड़की को प्रेम जाल में फँसाया। उसके बाद धर्म परिवर्तन कर उस पर निकाह का दबाव बनाने लगा। लड़की के मना करने पर उसने उसकी अश्लील वीडियो अपने दोस्तों के बीच वायरल कर दी। पुलिस ने पॉक्सो, दुष्कर्म समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कर युवक की तलाश शुरू कर दी है।

रिपोर्ट के अनुसार, लड़की का आरोप है गोलू खान ने राज बनकर उससे दोस्ती की और प्यार के जाल में फँसाया। फिर ब्रेनवाश कर धर्म बदलकर निकाह करने का दबाव बनाने लगा। गोलू खान लड़की के साथ हाथ में कलेवा बांधकर मंदिर जाता था ताकि उस पर शक नहीं हो।

एक दिन गोलू ने लड़की के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की, तो लड़की ने मना कर दिया। इसके बाद गोलू ने उसके सामने शादी का प्रस्ताव रखा। लेकिन उसने लड़की से जब शादी के साथ अपने मुस्लिम होने का खुलासा करके निकाह का दबाव बनाया तो लड़की ने धर्म बदलने से साफ़ इनकार कर दिया।

इसके बाद गोलू खान ने लड़की की कुछ अश्लील फ़ोटो अपने दोस्त सनी को दे दी। फिर उसने दोस्त के साथ मिलकर रेप की कोशिश भी की। लड़की को शराब से नहलाया। अपने ऊपर हो रहे अत्याचार से परेशान नाबालिग ने इसकी तहरीर थाने में दी।

पीड़ित ने अपने एफआईआर में बताया, “मैं कोचिंग पढ़ने जाती थी। राज नाम बताकर गोलू खान ने दोस्ती की। उसने मेरे साथ जबरदस्ती करने का प्रयास किया था। मैंने विरोध किया तो उसने कहा कि ठीक है निकाह कर लो। मैंने कहा निकाह क्यों तब उसने बताया कि वह मुस्लिम है। उससे शादी करने के लिए मुझे धर्म परिवर्तन करना पड़ेगा। यदि ऐसा नहीं किया तो वह घर से उठाकर ले जाएगा। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर देगा। मैंने गोलू से दूरी बना ली तो उसने सभी वीडियो अपने साथी सनी को दे दिए।”

पीड़िता ने बताया, “मैं समझ ही नहीं पाई कि यह लड़का मुस्लिम है। राज उर्फ गोलू हाथ में कलावा बाँधता था और माथे पर तिलक लगाता था। मेरे साथ मंदिर जाता था, जागरण में आता था। पूरे परिवार के साथ विश्वासघात किया है।”

वहीं पीड़िता ने उत्तरप्रदेश में हाल ही में लव जिहाद के खिलाफ बने कानून पर विश्वास जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो कानून बनाया है, उससे लव जिहाद करने वालों को सजा जरूर मिलेगी।

आरोप है कि शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। जिसके बाद पीड़िता ने इसकी शिकायत आईजी को दी। सवा महीने बाद यानी सितंबर में मामले की जाँच के आदेश जब एसएसपी ने दिए तब पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने गोलू खान और उसके साथी सनी पर रेप के प्रयास, पॉक्सो और शराब से नहलाने की एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने मुख्य आरोपी गोलू खान की तलाश में जुटी है।

‘बिल सही है, लेकिन मोदी अच्छे नहीं’: बिल का पता नहीं, किसान के नाम पर धमाचौकड़ी खूब; देखें कुछ दिलचस्प Video

केंद्र द्वारा लागू तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन करने आ रहे हजारों किसान एक और रात सड़क पर बिताने के साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के सिंघू और टिकरी बॉर्डर पर अब भी जमे हुए हैं। वहीं, किसान नेता सरकार द्वारा प्रस्तावित रणनीति पर मंथन कर रहे हैं।

किसानों के आंदोलन की वजह से कई सड़क और दिल्ली आने वाले रास्ते बंद हैं, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किसानों से बुराड़ी मैदान में आकर प्रदर्शन करने की अपील की है और कहा कि वे जैसे ही निर्धारित स्थान पर जाएँगे उसी समय केंद्र वार्ता को तैयार है। शाह ने कहा किसानों के प्रतिनिधिमंडल को चर्चा के लिए तीन दिसंबर को आमंत्रित किया गया है।

इस बीच KNOW THE NATION के कई वीडियो सामने आए हैं। एक वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि भीड़ को किस तरह से एकत्रित किया गया है। तथाकथित किसान विरोध-प्रदर्शन में भाग लेने वाले लोगों को कानून का कोई ज्ञान नहीं है। रिपोर्टर ने जब एक ‘प्रदर्शनकारी’ से पूछा कि वो यहाँ पर किस कानून का विरोध करने के लिए आए हैं तो उनका कहना था कि उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है, वो तो बस अपने रोजगार के लिए आए हैं। 

इसी तरह के वीडियो में एक शख्स का कहना है कि पीएम मोदी काला कानून लाकर उनकी जमीनें छीनकर अंबानी-अडाणी को देना चाहते हैं। पीएम उनकी फसल को प्राइवेट कर देंगे, इसलिए वह प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वो अपने गाँव से 2-3 महीने का राशन लेकर आए हैं।

प्रदर्शन में शामिल एक शख्स से जब पूछा गया कि वो यहाँ पर क्यों आए हैं तो उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि वो किसान भाइयों का साथ देने के लिए आए हैं, लेकिन जब उनसे पूछा गया कि किसान लोग प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि इतना तो उनको भी नहीं पता, वो तो बस समर्थन देने के लिए आ गए हैं।

इस दौरान जब किसान एकता संघ के छात्र विंग के नेता से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वो इसका समर्थन इसलिए कर रहे हैं ताकि सरकार को सत्ता से उतार सके। जब उनसे पास हुए बिल का नाम पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ हवाबाजी ही की।

एक तथाकथित प्रदर्शनकारी का कहना था कि पीएम मोदी ने जो किया वह सही नहीं किया, जमींदारों का नुकसान किया। किसान बिल के बारे में पूछने पर उनका कहना था कि बिल तो सही है, लेकिन मोदी जी अच्छे नहीं हैं। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि यहाँ पर काफी लोग पंजाब से आए अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए यहाँ आए हैं।

इस प्रदर्शन में साक्षी गुप्ता नाम की एक AAP नेता भी शामिल थी। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वो यहाँ पर अरविंद केजरीवाल का सपोर्ट करने के लिए आई है। इस काले कानून को हटाने के लिए 1 महीना लगे या 6 महीना, वो जुटे रहेंगे। फार्म बिल पर उनका कहना था एसएसपी जो लाया गया है, एएसपी जो हटा रहे हैं, लगा रहे हैं, वो सब गलत है।

इसी तरह एक आम आदमी पार्टी की एक अन्य नेता भी इस प्रदर्शन में शामिल थी, लेकिन उन्हें भी इस कानून के बारे में कोई ज्ञान नहीं था। उन्होंने भी इस कानून को लेकर सिर्फ हवाबाजी ही की।

बता दें कि किसान सरकार से कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग कर रहे हैं। वे सड़क पर उतरे हैं। पंजाब की सीमा से लेकर दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर उनका आंदोलन जारी है। किसानों की माँग है कि उन्हें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की इजाजत दी जाए। लेकिन सरकार ने उन्हें दिल्ली के बुराड़ी स्थित निरंकारी ग्राउंड पर प्रदर्शन करने की इजाजत दी है। इस प्रदर्शन में खालिस्तान समर्थक, पीएफआई और कॉन्ग्रेस के लिंक सामने आए हैं।

‘रोहिंग्या पर कार्रवाई करता हूँ तो यही लोग हायतौबा मचाते हैं’: हैदराबाद में बोले अमित शाह- समाप्त करेंगे निजाम संस्कृति

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रोहिंग्या समुदाय को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने यहाँ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा कि रोहिंग्या समुदाय पर जब वह कार्रवाई करते हैं तो ये लोग (विपक्षी दल) हायतौबा करते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल एक बार लिखकर दें कि बांग्लादेशी और रोहिंग्या को निकाल दें, फिर मैं कुछ करता हूँ। उन्होंने कहा कि सिर्फ चुनाव में बात करके कुछ नहीं होता। जब पार्लियामेंट में बहस होती है तब ये क्या करते हैं सारे देश ने देखा है।

परिवारवाद पर निशाना

शाह ने राजनीतिक पार्टियों में परिवारवाद पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वह हैदराबाद को नवाब-निजाम कल्चर से मुक्त कराते हुए इसे आधुनिक शहर बनाना चाहते हैं। हैदराबाद को डायनेस्टी से डेमोक्रेसी की ओर ले जाना चाहते हैं। भ्रष्टाचार से पारदर्शिता की ओर ले जाना चाहते हैं। तुष्टिकरण से विकास की ओर ले जाना चाहते हैं। हैदराबाद का एक बड़ा हिस्सा है, जो खुद को अपमानित महसूस करता है। हम ऐसी व्यवस्था बनाना चाहते हैं कि किसी की भी हिम्मत नहीं होगी, उन्हें दोयम दर्जे का बनाए।

अमित शाह ने कहा कि हम हैदराबाद को नवाब और निजाम संस्कृति से मुक्त करेंगे और यहाँ मिनी इंडिया बनाएँगे। शाह ने कहा कि हम हैदराबाद को मॉर्डन शहर बनाना चाहते हैं, जो कि निजाम संस्कृति के बंधनों से मुक्त होगा।

गृह मंत्री ने कहा कि आईटी सेक्टर में निवेश से हैदराबाद को बहुत फायदा हो रहा है। पीएम मोदी ने युवाओं के लिए बहुत सारे अवसर पैदा किए हैं और यह विदेशी निवेशकों द्वारा भारत में दिखाए गए विश्वास को दर्शाता है। शाह ने कहा कि पीएम मोदी ने ‘वर्क फ्रॉम एनिवेयर’ का रास्ता खोला। इस कदम से हैदराबाद में काम कर रहे आईटी प्रोफेशनल्स को सबसे ज्यादा फायदा पहुँचेगा।

मौजूदा कॉरपोरेशन विकास में रोड़ाः शाह

शाह ने कहा कि हैदराबाद में आईटी हब बनने की बहुत संभावना है, लेकिन यह तब बनता है जब इसके अनुरूप इन्फ्रास्ट्रक्चर हो। यह बनाने का जिम्मा नगर निकाय होता है। केंद्र सरकार और राज्य सरकार से इसके लिए अनुदान मिलता है, लेकिन इसका क्रियान्वयन नगर निकाय द्वारा होता है। जिस प्रकार हैदराबाद में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चल रहा है वह आईटी हब बनने का रोड़ा है। उन्होंने केसीआर पर हैदराबाद की जनता के साथ किया वादा नहीं निभाने का आरोप लगाया। साथ ही मोदी सरकार की उपलब्धियाँ गिनाईं।

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद को मेडिकल कॉलेज की सौगात दी। शाह ने कहा कि हैदराबाद के लोग बदलाव चाहते हैं। भाजपा के सत्ता में आने के बाद हम हैदराबाद को बाढ़ मुक्त शहर बनाएँगे। उन्होंने कहा कि भाजपा हैदराबाद में आईटी हब बनाएगी जिससे कि शहर में रोजगार के अवसर खुलें। उन्होंने कहा कि बीजेपी जो कहती है वह करती है। शाह ने कहा कि केंद्र ने हैदराबाद को बचा लिया।

अमित शाह ने कहा कि बारिश में शहर में पानी भरने से करीब 60 लाख लोग परेशान हुए। मजलिस के इशारों पर अवैध निर्माण होता है, इससे पानी की निकासी रुकती है। उन्होंने हैदराबाद की जनता को विश्वास दिलाया कि सारे अवैध निर्माण को हटाकर पानी की निकासी सुचारू करेंगे।

MP: उर्दू और अरबी नहीं सीखने पर शौहर इरशाद खान ने ज्योति से की मारपीट, 2 साल पहले किया था निक़ाह

इन दिनों लव जिहाद को लेकर कई राज्यों में हंगामा मचा हुआ है। एक तरफ यूपी सरकार ने अध्यादेश लगाकर कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं, मध्यप्रदेश में अभी लाने की बात हो रही है। इस बीच एमपी में ज्योति का बेहद ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने जबरन उर्दू और अरबी सीखने के लिए पिटाई करने वाले उसके पति मोहम्मद इरशाद खान को गिरफ्तार किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, मामला एमपी के शहडोल जिले का है। धनपुरी निवासी हिन्दू युवती ज्योति दहिया ने 2 साल पहले मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार मोहम्मद इरशाद खान से निक़ाह किया था। शादी के कुछ दिनों तक ज्योति को इरशाद और उसका परिवार काफी अच्छा लगा। लेकिन समय बीतने के साथ-साथ उसके ऊपर कई प्रकार का दबाव उसके ससुराल वाले बनाने लगे।

हिन्दू से मुस्लिम परिवार में गई ज्योति से मुस्लिम तौर-तरीके से रहने और उसे सीखने का दबाव बनाया गया। कुछ दिनों तक जब ज्योति ने उनकी बातें माननी शुरू की तो उसके बाद परिवार वाले उससे उर्दू और अरबी सीखने को कहने लगे। जिसका विरोध करने पर उसका शौहर मोहम्मद इरशाद उसे मारने-पीटने लगा। रोज-रोज की मारपीट और प्रताड़ना से परेशान हो कर ज्योति दहिया मौका पाते ही 27 नवंबर को अपने मायके भाग गई। उसके बाद उसने माँ-बाप के साथ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है।

ज्योति ने अपनी शिकायत में बताया, “दो साल पहले मैंने मुस्लिम लड़के से मुस्लिम रीति-रिवाज से विवाह कर लिया था। फिर उसके बाद उनके घर के लोग प्रेशर बनाने लगे कि पढ़ती नहीं है, कुछ करती नहीं है। हमारे मुस्लिम रीति-रिवाजों को तुम भी सीखो। ये सारी बातें पति के घर वाले उसे बोलते थे फिर वो मुझे बोलता था। हमको वही ये बात बोलता था। वह उर्दू सीखने का दबाव बना रहा था, कभी थप्पड़ भी मार देता था। ये ही सब अच्छा नहीं लगा तो हम अपने घर आ गए। मैं हिंदू धर्म में ही रहना चाहती हूँ।”

वहीं ज्योति द्वारा दर्ज एफआईआर पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उसके शौहर इरशाद खान को मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 1968 एवं प्रताड़ना के मामले में गिरफ्तार कर लिया।

अतिरिक्त, पुलिस अधीक्षक मुकेश वैश्व ने बताया, “धनपुरी में एक महिला ने पहले लगभग 2 साल पहले एक-दूसरे संप्रदाय के शख्स से शादी की थी। कल उसने थाना धनपुरी में शिकायत दर्ज कराई। हमारे यहाँ विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। महिला ने अपनी शिकायत में बताया है कि शादी के बाद उसका पति उसके साथ मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना करता है। इस मामले में जाँच जारी है। विवेचना जारी है।”

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में आज ही लव जिहाद का पहला मामला दर्ज किया गया है। यह मामला उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा लाए गए उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 (U.P. Unlawful Religious Conversion Prohibition Ordinance, 2020) के तहत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से स्वीकृति मिलने के बाद दर्ज किया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ उवैस अहमद गाँव की ही एक हिन्दू छात्रा पर धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने इस प्रकरण के संबंध में मामला दर्ज कर लिया है, फ़िलहाल मामले का आरोपित फ़रार है।

UAE से 3000 पाकिस्तानियों की नौकरी खत्म: इजरायल का विरोध करने की कीमत चुका रहा यह इस्लामी मुल्क?

हाल ही में इज़रायल से वीज़ा समझौते के महीने भर बाद संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने कुल 13 देशों के नागरिकों को वीज़ा जारी करने पर पाबंदी लगा दी है जिसमें ईरान, सीरिया, अफगानिस्तान और पाकिस्तान भी शामिल हैं। इन 13 देशों में ज़्यादातर मुस्लिम बाहुल्य देश हैं। यह एकदम उस समय की स्थितियों को देखते हुए ‘सुरक्षा कारणों’ के आधार पर उठाया गया।

18 नवंबर को यह आदेश जारी होने के बाद पाकिस्तान इकलौता ऐसा देश है, जिस पर इसका सबसे बुरा प्रभाव पड़ा है। यूएई द्वारा वीज़ा जारी करने पर रोक लगाए जाने के बाद पाकिस्तान में 3000 नौकरियाँ ख़त्म हो गई हैं। 

यानी इस आदेश के बाद यूएई में 3000 पाकिस्तानी नागरिक अपनी नौकरी खो चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वीज़ा पर पाबंदी के आदेश के बाद सिर्फ रावलपिंडी की एक एजेंसी में 3000 नौकरियों का नुकसान हुआ है। इतना सब कुछ ऐसे समय में हो रहा है, जब पाकिस्तान पहले ही आर्थिक मोर्चे पर तमाम चुनौतियों का सामना कर रहा है। 

शुरुआत में यह पाबंदी पर्यटन संबंधी वीज़ा तक सीमित थी लेकिन अब इसका दायरा बढ़ा आकर रोजगार और कार्य क्षेत्र को भी इसमें ही शामिल कर लिया गया है। दुबई एयरपोर्ट फ्री ज़ोन द्वारा जारी किए गए पत्र के मुताबिक़, “नवीनतम आदेश के अनुसार अप्रवासियों के लिए प्रवेश अनुमति आवेदन विभाग (Immigration Department Entry Permit Applications) नए वीज़ा, जिसमें रोजगार वीज़ा और न्यूज़ विजिट वीज़ा शामिल हैं, इन पर अगले आदेश तक पाबंदी जारी रहेगी।” 

साल 2019 तक यूएई में लगभग 2.11 लाख पाकिस्तानी नौकरी करते थे और 4 बिलियन डॉलर सालाना घर भेजते थे। पाकिस्तान के अलावा 12 अन्य ‘इज़रायल विरोधी’ देशों के नागरिकों के लिए नए वीज़ा जारी करने पर पाबंदी लगाई गई है।

ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले समय में पाकिस्तान को खाड़ी के देशों की तरह ही पाबंदी का सामना करना पड़ सकता है। EurasiaTimes की रिपोर्ट के मुताबिक़ पाकिस्तान ने साल 2016 में 3,26,000, साल 2017 में 2,75,000, साला 2018 में 2,08,000, साल 2019 में 2,11,000 और यहाँ तक कि महामारी के दौरान अक्टूबर महीने तक 51,000 पाकिस्तानी (कामगार) यूएई भेजे थे। 

सुरक्षा कारण या कोरोना का ख़तरा?

Eurasia Times के मुताबिक़ यूएई द्वारा पाकिस्तान पर लगाए गए वीज़ा प्रतिबंध के रोचक पहलू हैं। रिपोर्ट की मानें तो इज़रायल और यूएई के बीच रिश्ते सामान्य होने के भी पहले इज़रायल ने माँग उठाई थी कि पाकिस्तान इज़रायल को स्वीकार करे और उनके प्रति अपना रोष ख़त्म करे। बल्कि इज़रायल के समाचार पत्र हर्तीजा (harteeza) में 11 अगस्त 2020 को प्रकाशित एक ख़बर का शीर्षक था, ‘इज़रायल के लिए पाकिस्तान की अस्वीकृति पाकिस्तान के लोगों के लिए ख़तरा बन सकती है।’ यानी मतलब साफ़ था कि इज़रायल को देश के रूप में नहीं स्वीकार करने पर पाकिस्तान को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती थी। 

जब इज़रायल और यूएई के बीच रिश्ते सामान्य हुए, तब पाकिस्तान ने अपने ‘इज़रायल विरोधी’ विचार से पीछे हटने से मना कर दिया। इस पर कड़ा संदेश देने के लिए यूएई ने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इज़रायल दूतावास को ‘उपहार’ भेजा था। इसके बावजूद जब पाकिस्तान का विरोध जारी रहा, तब यूएई ने पाकिस्तान पर अस्थायी वीज़ा प्रतिबंध लगा दिया।

रिपोर्ट्स की मानें तो पाकिस्तान यूएई सरकार के निर्णय पर राज़ी नहीं हो पाया था। वह इस आदेश में ढील देने की आशा कर रहा है क्योंकि शुरुआत में यह प्रतिबंध पर्यटन वीज़ा तक ही सीमित था, जिसे कोरोना महामारी के एहतियात के रूप में भी देखा जा रहा था। फिर पाकिस्तानी सेनेटर अनवर बेग ने कहा था कि यह प्रतिबंध पाकिस्तान के लिए असामान्य था क्योंकि यहाँ के लाखों लोग वहाँ काम करते हैं।

पाकिस्तान ने वीज़ा प्रतिबंध की गेंद कोरोना महामारी के पाले में डालने का पूरा प्रयास किया था। जबकि Eurasia Times ने बताया कि यह (पाकिस्तान) अव्यवस्था के चलते अपने लोगों बेचने का प्रयास कर रहे हैं क्योंकि भारत समेत कई देशों से वीज़ा की अनुमति मिली हुई है। इसलिए मुट्ठी भर देशों पर वीज़ा की पाबंदी लगाने का कोई अर्थ नहीं निकलेगा। 

यह भी उल्लेखनीय है कि जितने देशों पर वीज़ा प्रतिबंध लगाया गया है, उसमें लगभग सभी मुस्लिम देश हैं, पाकिस्तान, तुर्की, सीरिया, यमन, ईरान आदि। और तो और, इनमें से किसी भी देश ने इज़रायल को स्वीकार नहीं किया है। इसमें एक अपवाद भी है, ‘तुर्की’ जहाँ इज़रायली दूतावास है लेकिन इस देश का इस्लामी एजेंडा किसी से छुपा नहीं है। 

UAE और इज़रायल का वीज़ा समझौता 

पाकिस्तान पर लगाए गए वीज़ा प्रतिबंध के मामले में एक और ख़ास बात है। यह निर्णय उसके बाद आया है, जब दोनों देशों (इज़रायल और यूएई) ने वीज़ा समझौते पर सहमति जताई थी, जिससे दोनों देशों के नागरिकों को वीज़ा की आवश्यकता के बिना एक दूसरे का दौरा करने की आज़ादी मिलती।  

अमेरिका द्वारा कराए गए शांति समझौते के बाद दोनों देशों ने सितंबर में कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। वीज़ा माफ़ी समझौते के अलावा, जिसमें हवाई सेवा संबंधी मामलों में सहयोग, निवेश, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे अहम मुद्दे शामिल थे। 19 अक्टूबर को वीज़ा माफ़ी समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद यूएई ने 1 नवंबर को इसकी पुष्टि की थी और इज़रायल ने 23 नवंबर को इसकी पुष्टि की थी। एक यहूदी और अरब देश के बीच इस तरह का पहला समझौता है।   

जमीन, सड़क, मॉल, फ्लैट, अम्बानी, अडानी, हवाई जहाज… पब्लिक पूछे- राहुल बाबा कहना क्या चाहते

जब राहुल गाँधी कुछ बोलते हैं, तो हर वो व्यक्ति सुनता है जिसे राजनीति के साथ कुछ मनोरंजन का तड़का चाहिए। हालाँकि, राहुल को खुद नहीं पता होता कि वे क्या बोल रहे हैं। अब उनका एक वीडियो वायरल हुआ है, जो मोदी सरकार द्वारा पास किए गए कृषि कानूनों के विरोध में है। कई लोग अभी तक ये समझने में लगे हुए हैं कि आखिर पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष अपने इस भाषण में कहना क्या चाह रहे हैं?

अपने इस भाषण में राहुल गाँधी ने दावा किया कि ‘नरेंद्र मोदी के कृषि कानूनों’ ने मंडी को ख़त्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी कह रहे हैं कि किसान कहीं भी अपने उत्पाद बेच सकता है, लेकिन जब किसान खेत के बाहर ही नहीं निकल पाएगा, सड़क नहीं होगी- फिर कैसे जाकर बेचेगा? साथ ही राहुल गाँधी यहाँ तक दावा कर बैठे कि नरेंद्र मोदी ने हाल ही में 8000 करोड़ रुपए के दो हवाई जहाज ख़रीदे हैं।

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी सोचते हैं कि किसान अपना धान बेचने के लिए हवाई जहाज में उड़ कर जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होता है, किसान को अपने खेत के सामने अपना धान अनाज बेचना है, मगर मंडी में नहीं, छोटे व्यापारियों को नहीं, अम्बानी और अडानी को। उन्होंने कहा, “जब किसान अम्बानी और अडानी को अपना माल बेचेगा, तो वो उन दोनों के सामने नहीं खड़ा होगा।” इसका अर्थ क्या है, ये लोग नहीं समझ पाए।

राहुल गाँधी इतने पर ही नहीं रुके, उन्होंने ये भी कहा कि आज मंडी में आप माल बेचते हो, अलग-अलग व्यापारी होते हैं और आप किधर भी जा सकते हो, लेकिन कोई झगड़ा हुआ तो पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के पास जा सकते हो, कानून के पास जा सकते हो। उन्होंने कहा कि अम्बानी-अडानी को आप माल बेचोगे तो वो जो रेट चाहेंगे वो देंगे और अगर आपको अच्छा नहीं लगा तो आप माल बेचोगे, आस्ते-आस्ते आपकी जमीन भी बिकेगी।”

हालाँकि, अनाज बेचते-बेचते जमीन कैसे बिकने लगेगी, वो राहुल गाँधी ने नहीं बताया। हाँ, उन्होंने इतना ज़रूर कहा कि किसानों की जमीन पर मॉल बनेंगे, फ्लैट्स बनेंगे और आपको या आपके बच्चों को भीतर नहीं जाने दिया जाएगा, और न ही आपको कभी वहाँ फ्लैट खरीदने दिया जाएगा। इस भाषण में राहुल गाँधी ने कृषि कानूनों की तथाकथित कमियों को छोड़ कर अम्बानी-अडानी, मॉल-फ्लैट और जमीन-सड़क, सबकी बात कर दी।

ये वीडियो उन विरोध-प्रदर्शनों में से किसी एक का है, जब राहुल गाँधी ट्रैक्टर पर बैठ कर कृषि कानूनों की राजनीति कर रहे थे। हाँकि, बिहार चुनाव हारने के बाद उनके तेवर ढीले पड़ गए। पूरे देश में हुए उपचुनावों में भी कॉन्ग्रेस को मात मिली। जहाँ तक ‘किसान आंदोलन’ की बात है, उस पर खालिस्तानियों और इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों का कब्जा हो रहा है। भारत सरकार बार-बार किसानों को बातचीत के टेबल पर बैठने को बोल रही है।