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‘हैदराबाद का नाम बदल कर भाग्यनगर क्यों नहीं किया जा सकता है’ – ओवैसी के गढ़ में CM योगी की हुंकार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के निकाय चुनाव (ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपिल कॉर्पोरेशन) का मोर्चा संभाला है। इसी कड़ी में उन्होंने शनिवार (28 नवंबर 2020) को हैदराबाद के मलकजगिरी क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में जनसभा और रोड शो किया।

इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने भाषण देते हुए कहा कि कुछ लोग उनसे हैदराबाद का नाम बदलने की बात पूछ रहे थे। जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा क्यों नहीं! इस पर पलटवार करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि हैदराबाद का नाम किसी भी कीमत पर नहीं बदलने वाला है। हैदराबाद के मलकजगिरी क्षेत्र में भाषण देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा,

“कुछ लोग मुझसे पूछ रहे थे कि क्या हैदराबाद का नाम बदल कर भाग्यनगर किया जा सकता है? मैंने कहा क्यों नहीं? मैंने उनसे कहा कि उत्तर प्रदेश में सत्ता हासिल करने के बाद जब हमने फैजाबाद का नाम अयोध्या किया और इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किया तो भाग्यनगर के रूप में हैदराबाद का नाम क्यों नहीं बदला जा सकता है?”

इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि भाग्यनगर का अर्थ होता है विकास का प्रतीक। उन्होंने आरोप लगाया कि तेलंगाना राष्ट्र समिति और एआईएमआईएम के बीच भ्रष्ट और अपवित्र गठबंधन है।

इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने बिहार विधानसभा सत्र के पहले दिन शपथ के दौरान एआईएमआईएम के विधायक अख्तरुल ईमान के ‘हिंदुस्तान’ शब्द पर आपत्ति जताने को लेकर भी जम कर आलोचना की

CM योगी ने कहा, “बिहार में, AIMIM के एक नव-निर्वाचित विधायक ने शपथ ग्रहण के दौरान ‘हिंदुस्तान’ शब्द का उच्चारण करने से इनकार कर दिया। वे हिंदुस्तान में रहेंगे, लेकिन जब हिंदुस्तान के नाम पर शपथ लेने की बात आती है, तो वे संकोच करते हैं। यह AIMIM का असली चेहरा दिखाता है।”

योगी आदित्यनाथ ने भाजपा प्रत्याशियों के लिए वोट देने की अपील करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में गृह मंत्री अमित शाह ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया। इसकी वजह से हैदराबाद और तेलंगाना के लोगों के पास पूरा अधिकार होगा कि वह जम्मू कश्मीर में जमीन खरीद सकें। मोदी सरकार के 6 साल के कार्यकाल में अनेक विकास कार्य हुए हैं। गरीबों को शौचालय की सुविधा प्रदान की गई, 3 करोड़ वंचितों को घर मिला और 8 करोड़ लोगों को मुफ्त एलपीजी सिलेंडर मिला। लॉकडाउन के दौरान मोदी सरकार ने गरीबों में राशन भी वितरित कराया। हम यहाँ का विकास करने के लिए आपका वोट चाहते हैं।”         

हैदराबाद के निकाय चुनावों में जनसभा के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “हैदराबाद का नाम बदल देंगे, हर जगह का नाम बदल देंगे। तुम्हारा नाम बदल जाएगा लेकिन हैदराबाद का नाम नहीं बदलेगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आए और बोले मैं नाम बदल देता हूँ। अरे भाई साहब आप क्या ठेका लेकर बैठे हैं? आप इनसे पूछिए कि ताजमहल किसने बनवाया, वह कहेंगे मुग़ल बादशाह ने नहीं बनवाया, वह किसी और ने बनवाया था। क़ुतुब मीनार और चारमीनार को बोलेंगे कोई और बनाया था।” 

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “भाजपा के जितने नेता हैं, मुख्यमंत्री हैं… वह कह रहे हैं कि हैदराबाद का नाम बदल दिया जाएगा। मैं यहाँ की आवाम से सवाल करता हूँ क्या आप चाहते हैं हैदराबाद का नाम तब्दील कर दिया जाए? अगर आप हैदराबाद के नाम को हैदराबाद रखना चाहते हैं तो मेरी आपसे गुजारिश है कि भाजपा को शिकस्त दीजिए और मजलिस को कामयाब कीजिए। 

भाजपा के बयानों पर हमला बोलते हुए ओवैसी ने कहा, “भाजपा कह रही है कि पुराने शहर के इलाके में पाकिस्तानी, अफगानिस्तानी और रोहिंग्या रहते हैं और वह यहाँ सर्जिकल स्ट्राइक करेंगे। मैं भाजपा को बताना चाहता हूँ यह धमकी किसी और को देना, यह हैदराबाद की सरज़मीं है, यहाँ हम हर चाल समझते हैं। तुमने जो पुराने शहर की तौहीन की है, यहाँ की आवाम 1 दिसंबर को मजलिस को एक-एक वोट डाल कर तुम्हारे मुँह पर तमाचा रसीद करेगी।”

इसके बाद ओवैसी ने कहा, “कोई बोलता है किले पर अपना झंडा लगाऊँगा लेकिन मैं कहना चाहूँगा किला हमारा है। सियासी किला हमारा है, हमें वहाँ तिरंगा लगाना है और इससे बड़ा झंडा और क्या हो सकता है। उन्होंने कहा न तुम्हारा झंडा चलेगा और न तुम्हारा डंडा चलेगा, यहाँ पर मस्जिद थी और वही रहेगी।”

साग खोंट रही दलित ‘प्रीति साहनी’ को अपने पास बुलाया, फिर गला रेत मार डाला: सैयद को UP पुलिस ने किया अरेस्ट

उत्तर प्रदेश के बलिया में शुक्रवार (नवंबर 27, 2020) की शाम अपने ननिहाल गई दलित समुदाय की एक युवती की मुस्लिम समुदाय के एक युवक सैयद ने हत्या कर दी। ग्रामीणों ने हत्या आरोपित को घटनास्थल से 500 मीटर की दूरी पर खदेड़ कर धर-दबोचा। उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया है। लोगों ने कहा कि वो युवती की लाश के पास बैठ कर रोते हुए देखा गया था। हत्या में प्रयोग किया गया चाकू को भी बरामद कर लिया गया है।

घटना दो समुदायों के बीच का होने के कारण गाँव में तनाव व्याप्त है, जिस कारण पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है। वरिष्ठ अधिकारी पल-पल की खबर ले रहे हैं। हत्या के कारण का खुलासा नहीं हो सका है। पीड़िता थाना क्षेत्र के बघौता गाँव की रहने वाली है, जो सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत लिलकर अंतर्गत लक्ष्मीपुर में अपने ननिहाल में आई थी। वहाँ पीड़िता प्रीति साहनी (बदला हुआ नाम) को गाँव के ही एक मुस्लिम युवक ने अपने पास बुलाया।

उस समय वो खेत में अपने सहेलियों के साथ चने का साग खोंट रही थी। जैसे ही वो युवक के पास पहुँची, उसने चाकू से उस पर हमला बोल दिया। युवती ने अपना हाथ आगे किया, जिससे उसकी उँगली कट गई। जैसे ही वो बेहोश होकर जमीन पर गिरी, सैयद ने उसका गला रेत दिया। सहेलियों के चीखने-चिल्लाने के बाद ग्रामीणों ने आरोपित को पकड़ लिया। हत्या आरोपित के मुस्लिम समुदाय के होने के कारण गाँव के लोगों में तनाव व्याप्त है।

पीड़िता निषाद समुदाय से आती है, जो उत्तर प्रदेश और बिहार में दलित की श्रेणी में आते हैं। बलिया के पुलिस अधीक्षक देवेंद्र नाथ दुबे ने बताया कि आरोपित से पूछताछ जारी है। उसके पिता का नाम मोईनुद्दीन है। बताया जा रहा है कि वो पीड़िता को बुरी नजर से देखता था और उसे फाँसने में नाकाम रहा था, इसीलिए उसने इस हत्याकांड को अंजाम दिया। हत्या आरोपित के साथ एक महिला और एक पुरुष भी थे, जो फरार हो गए।

इसी तरह उत्तर प्रदेश के कानपुर में इसी महीने हुए एक हत्याकांड के बाद तनाव की स्थिति थी। कानपुर के जाजमऊ में मामूली विवाद हुआ। इसके बाद दो संप्रदायों के लोग बहस के बाद मारपीट और पथराव पर उतर आए। पूरी घटना के बाद 25 साल के पिंटू निषाद गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पानी का मामूली छींटा पड़ने के कारण अमान और उसके साथी स्थानीय लोगों ने पिंटू और उसके साथियों की लाठी-डंडों से पिटाई कर दी थी।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम के जनक की हत्या: ’62 लोग बुलेटप्रूफ कार को घेर कर मारे’ – इजरायल पर आरोप, कई जगह अलर्ट

जो लोग इजरायल और उसकी कूटनीति पर नजर रखते हैं, उन्हें पता है कि फिलिस्तीन से तो उसका युद्ध चल ही रहा है, लेकिन वो ईरान को अपना दुश्मन नंबर एक मानता है। अमेरिका से भी ईरान के रिश्ते ठीक नहीं हैं। अब एक नई घटना ने फिर से बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। शुक्रवार (नवंबर 27, 2020) को ईरान के सबसे बड़े परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह की हत्या कर दी गई। ईरान ने इसका आरोप इजरायल पर लगाते हुए बदला लेने की धमकी दी है।

ईरान का परमाणु कार्यक्रम शुरू से विवादित रहा है और इसी कारण उस पर अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने कई प्रतिबंध लगाए। मोहसिन फखरीजादेह को इस परमाणु कार्यक्रम का मास्टरमाइंड माना जाता है। तेहरान के पूर्वी क्षेत्र में उनकी कार को घेर कर उनकी हत्या कर दी गई। उसके बाद वायरल हुई तस्वीरों में सड़क पर खून और उनकी टूटी-फूटी कार देखी जा सकती है। ईरान के ब्रिगेडियर जनरल आमिर हातमी ने बताया कि फायरिंग और बमबारी के जरिए उन्हें निशाना बनाया गया।

वहीं ईरान के विदेश मंत्री जरीफ ने इस हत्याकांड को कायरता भरी घटना करार दिया और इसके पीछे इजरायल का हाथ बताया। इलीट रेवोलुशनरी गार्ड के न्यू टेक्नोलॉजी के रिसर्च सेंटर के मुखिया मोहसिन फखरीजादेह ही थे। ईरान ने कहा है कि यूरोपियन यूनियन अपना ‘दोहरा रवैया’ त्यागे और इजरायल द्वारा अंजाम दी गई इस ‘युद्ध भड़काने वाली घटना’ को देखे। एक पत्रकार ने कहा कि ईरान के लिए ये पेशेवर और मानसिक तौर पर एक बड़ी घटना है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी इस ट्वीट को रीट्वीट किया। खुद अमेरिका का कहना है कि ये हत्याकांड एक बड़ी घटना है और इस पर नजर रखी जा रही है। ईरान ने तो इसे आतंकी घटना करार दिया है। ईरान ने कहा कि इससे उसके विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में तरक्की के लिए इरादे और मजबूत होंगे ही, साथ में वो बदला भी लेगा। लेबनान ने भी ईरान का समर्थन किया है और इसके पीछे अमेरिका-इजरायल का हाथ बताया।

अमेरिका और ‘इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी’ की कई रिपोर्ट्स में मोहसिन फखरीजादेह का नाम है। हालाँकि, वो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को विकसित करने में अपने रोल से इनकार करते रहे थे। लेकिन, उन्हें ईरान की पुरानी महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक माना जाता था और उनकी सुरक्षा व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। अमेरिका में सत्ता हस्तांतरण के लिए 50 दिन बचे हैं, इस बीच इस घटना के होने के कई अर्थ लगाए जा रहे हैं।

मध्य-पूर्व में तनाव उपजने के साथ ही यूएन ने शांति की अपील की है। यूएन ने कहा है कि ऐसी किसी भी कार्रवाई से बचा जाना चाहिए, जिससे तनाव और बढ़े। साथ ही यूएन ने किसी भी ‘हत्या या एक्स्ट्राजुडिशल मर्डर’ की भी निंदा करने की बात कही है। वहीं इजरायल की मीडिया में ख़बरें चल रही हैं कि ईरान के परमाणु अभियान का जनक कई दशकों से इजरायल के निशाने पर था और उसका मारा जाना इजरायल के लिए एक सफलता है।

इजरायल की मीडिया का कहना है कि पिछले कुछ सालों में इजरायल में जितनी सरकारें आईं, या उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद के जितने भी डायरेक्टर बदले, उनका निशाना मोहसिन फखरीजादेह तो था ही था। इजरायल को ईरान द्वारा बदले की कार्रवाई की आशंका है और इसके लिए वो इसके लिए तैयारी कर रहा है। आशंका है कि अब ईरान यहूदियों को निशाना बनाएगा, गाजा में हमले तेज करेगा और इजरायल के जहाजों को निशाना बना कर उसके व्यापारिक हितों पर चोट पहुँचाएगा।

इजरायल के दूतावासों पर हमले हो सकते हैं, इसीलिए वहाँ अलर्ट जारी कर दिया गया है। अमेरिकी मीडिया में चल रहा है कि जो बायडेन ने 2015 के उस परमाणु करार में फिर से घुसने की इच्छा जताई थी, जिससे डोनाल्ड ट्रम्प पीछे हट गए थे। वहाँ की मीडिया ये अंदाज़ा लगा रहा है कि ईरान के साथ नया अमेरिकी प्रशासन के रिश्ते सुधारने की कोई कोशिश परवान न चढ़े, इसीलिए इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया है।

कई विशेषज्ञों का कहना है कि ये हत्याकांड ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नेस्तनाबूत करने के इरादे से अंजाम नहीं दिया गया, इसके द्वारा कूटनीति को निशाना बनाया जा रहा है। कुछ विशेषज्ञ कह रहे हैं कि अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो नवंबर के शुरुआती हफ्ते में इजरायल पानी पीने तो आए नहीं थे, कोई न कोई बात रही होगी। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खमेनेई ने बदले की धमकी देते हुए कहा कि दोषियों को दंडित किया जाएगा।

एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि मोहसिन फखरीजादेह को मारने वाले सभी हत्यारों और ख़ुफ़िया प्रोफेशनल्स को विदेश में प्रशिक्षित किया गया था। इस घटना में 62 लोगों के शामिल होने की संभावना है। ख़ुफ़िया तैयारी ऐसी थी कि हत्यारों को परमाणु वैज्ञानिक की गतिविधियों के बारे में सब पता था। 4 बाइक सहित कई गाड़ियों से इंतजार कर रहे हत्यारों ने पहले ही वहाँ की बिजली काट दी थी।

तीन बुलेटप्रूफ कारों के काफिले में से दूसरे को निशाना बनाया गया, जिसमें वो बैठे थे। कहा जा रहा है कि उन्हें गाड़ी से बाहर निकाल कर गोली मारी गई। उनके घायल लोगों को जब अस्पताल ले जाया गया, तो वहाँ बिजली ही नहीं थी। इसीलिए, सबको तेहरान रेफर करना पड़ा। ‘ELINT News’ ने ईरान के सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि 12 हत्यारे पकड़े भी गए हैं। इजरायल की तरफ से अभी तक कोई बयान नहीं आया है।

कुछ ही महीनों पहले ईरान के टॉप सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी को अमेरिका ने बग़दाद में मार गिराया था। दुनिया भर के कई इलाकों में हज़ारों मुस्लिमों ने अमेरिका और इजरायल के ख़िलाफ़ भड़काऊ नारेबाजी करते हुए सुलेमानी के मारे जाने पर रोष जताया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने खुलासा किया था कि सुलेमानी पर निर्दोष लोगों की मौत की सनक सवार थी और उसने दिल्ली में भी आतंकी साज़िश को अंजाम दिया था।

मुस्लिम बनो, निकाह करो… वरना मार डालूँगा: UP में ‘लव-जिहाद’ कानून के तहत उवैस अहमद पर पहली FIR

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में लव जिहाद मतलब ग्रूमिंग जिहाद का पहला मामला दर्ज कर लिया गया है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा लाए गए उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 (U.P. Unlawful Religious Conversion Prohibition Ordinance, 2020) को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से स्वीकृति मिलने के बाद राज्य में पहला मामला दर्ज किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ उवैस अहमद गाँव की ही एक छात्रा पर धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने इस प्रकरण के संबंध में मामला दर्ज कर लिया है, फ़िलहाल मामले का आरोपित फ़रार है। 

घटना बरेली जिले के देवरनियां क्षेत्र की है, जिसकी शिकायत टीकाराम ने की और उसके आधार पर पुलिस ने आरोपित के विरुद्ध मामला दर्ज किया। शिकायतकर्ता ने बताया कि शरीफ़नगर गाँव के निवासी रफ़ीक अहमद के बेटे उवैस अहमद ने पढ़ाई के दौरान उनकी बेटी के साथ जान-पहचान बढ़ाई। दोनों के बीच काफी समय तक मित्रता रही, इसके बाद उवैस उनकी बेटी पर धर्म परिवर्तन कर शादी करने का दबाव बना रहा है।

उन्होंने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि उनका परिवार इस बात को सिरे खारिज कर चुका है फिर भी उवैस अहमद का परिवार मानने को तैयार नहीं है। टीकाराम का यहाँ तक कहना है कि आरोपित ने कई बार उनकी बेटी पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया था। जब उनकी बेटी ने इस बात से मना किया तो वह जान से मारने की धमकी देने लगा।

इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने अध्यादेशित उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनयम 3/5, 2020 और भारतीय दंड संहिता की धारा 504/506 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का यह भी कहना है कि घटना के संबंध में जाँच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। फ़िलहाल घटना का आरोपित फ़रार है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इस घटना के संबंध में एसपी देहात डॉक्टर संसार सिंह ने भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फिलहाल पुलिस सिस्टम में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनयम की धारा अपलोड नहीं की गई है। इस वजह से फ़िलहाल अधिनियम 3/5 की धारा को मुक़दमे के भीतर पेन द्वारा लिखा गया है।       

हाल ही में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ के विरुद्ध बने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 पर हस्ताक्षर कर इसे मंजूरी दी थी। इसके बाद ये राज्य में औपचारिक रूप से लागू हो गया है।

राज्यपाल ने शनिवार (नवंबर 28, 2020) को इसकी मंजूरी दी। राज्यपाल की अनुमति मिलते ही ये अपराध गैर-जमानती हो गया है और इसे 6 महीनों के भीतर विधानमंडल के दोनों सदनों में पास कराना होगा। यूपी में लव जिहाद के नए कानून को लेकर जो बातें अब तक सामने आई है, उसके अनुसार 10 साल तक की सजा का प्रावधान होगा। यदि दो अलग-अलग धर्म के लोग शादी करते हैं तो इस बात की जाँच की जाएगी कि यह धोखे से तो नहीं हुआ है।  

इस्लामी अरब मुल्कों के बीच कैसे अपना अस्तित्व बचाए हुए है दुनिया का एकमात्र यहूदी राष्ट्र: वो संघर्ष, जहाँ UN भी फेल

यहूदी राष्ट्र इजरायल और फिलिस्तीन के बीच का संघर्ष काफी पुराना है और जिस तरह से फिलिस्तीनी आतंकी संगठनों को इजरायल नेस्तनाबूत कर के रखता है, सभी की नजरें इस संघर्ष पर रहती हैं। आए दिन इस संघर्ष को लेकर ख़बरें आती रहती हैं और हाल ही में सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुलाकात के बाद फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। आज से 53 साल पहले ही संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन के बँटवारे के प्रस्ताव की मंजूरी दी थी।

इजरायल का संघर्ष और फिलिस्तीन के हमले

हालाँकि, इस प्रस्ताव को जमीन पर उतारा नहीं जा सका, क्योंकि अरब मुल्कों ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। वहीं इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद से ही क्षेत्रीय युद्ध शुरू हो गया और इसी कारण इसे कभी भी लागू नहीं कराया जा सका। जहाँ इस क्षेत्र को फिलिस्तीन और यहूदियों के बीच बाँटने को कहा गया, वहीं उससे पहले अंग्रेजों की सेना को वापस जाना था। अंग्रेजों ने हमेशा से यहूदी राष्ट्रवाद का समर्थन किया था।

इतिहास को समझने के लिए पहले भूगोल को जान लेना चाहिए। इजरायल दुनिया का एकमात्र यहूदी राष्ट्र है। ये मेडिटेरेनियन समुद्र के पूर्व में स्थित है। इजरायल और फिलस्तीन का आज का पूरा झगड़ा इसी बार पर टिका है कि कौन कितनी ज्यादा भूमि पर कब्ज़ा करेगा। दोनों हजारों वर्षों पहले के इतिहास का जिक्र करते हुए अपने-अपने कब्जे का दावा करते हैं। लेकिन, ये सब 20वीं शताब्दी में यूरोप में यहूदियों के नरसंहार से शुरू हुआ।

यहूदियों पर अत्याचार इस कदर बढ़ गया कि वो भाग कर इस क्षेत्र में आने लगे, जो ऑटोमन साम्राज्य और ब्रिटिश राज का हिस्सा था। एक तरह से यहाँ अरबी मुस्लिमों का बोलबाला था। आज इजरायल और उसके आसपास के अरब देशों के बीच जिस सीमा को हम देखते हैं, वो कई युद्धों का नतीजा हैं, जिनमें 1948 और 1967 का युद्ध प्रमुख है। 1967 में ही वेस्ट बैंक और गाजा स्ट्रिप पर इजरायल का कब्ज़ा हुआ, जहाँ बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी थे।

वेस्ट बैंक का आज अधिकतर हिस्सा इजरायल के पास है और वहाँ की सेना ने पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी तैनाती कर रखी है। साथ ही साथ इजरायली समाज ने वहाँ कई कम्युनिटी बना रखी है। अब ‘टू स्टेट थ्योरी’ कागज पर तो है, लेकिन इसे लागू करने को लेकर दोनों पक्षों में अलग-अलग राय है। हालाँकि, पूरे क्षेत्र को लेकर एक फिलिस्तीन या एक इजरायल बना देने का भी समाधान है, जिसे ‘वन स्टेट थ्योरी’ भी कहते हैं, लेकिन इससे समस्याएँ और बढ़ेंगी।

सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों ने इजरायल नामक राष्ट्र को जन्म दिया। अरब मुल्कों ने यहूदियों की बड़ी संख्या में आने को यूरोप के अतिक्रमण के रूप में देखा। इजरायली ताकतों ने फिलिस्तीनी अभियान को हरा दिया और 7 लाख फिलिस्तीनी शरणार्थियों ने अपने लिए जगह बना ली। इससे पहले जेरुसलम पर जॉर्डन का कब्ज़ा था। इस तरह से फिलस्तीनियों ने अपना गाजा क्षेत्र बनाया और इजरायल ने एक अलग राष्ट्र बनाया।

इजरायल और फिलिस्तीन के संघर्ष में आतंकियों की भूमिका

गाजा में इजरायल की सैन्य उपस्थिति हुआ करती थी, लेकिन 2005 में उसने एकतरफा रूप से वापस ले लिया। इजरायल को लगता है कि फिलिस्तीन का इस्तेमाल इजरायल पर हमले के लिए लॉन्चपैड के रूप में किया जा सकता है, इसीलिए वो सीमा पर तकनीकी रूप से तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था रखता है। इससे पहले 1967 तक गाजा पर इजिप्ट का कब्ज़ा था। गाजा में हमास की सरकार चलती है, जो इजरायल के खिलाफ संघर्ष का दावा करता रहा है।

हमास और गाजा में स्थित अन्य आतंकी संगठनों ने अब तक इजरायल पर न जाने कितने ही रॉकेट्स दागे होंगे, लेकिन इजरायल ने हर बार तगड़ा जवाब दिया है। अब स्थिति ये है कि हमास में बिजली और भोजन से लेकर मेडिकल सप्लाइज तक की दिक्कतें हैं और वो सब इजरायल के साथ उनके युद्ध की वजह से। जहाँ तक भारत की बात है, उसके इन दोनों ही देशों से अच्छे सम्बन्ध हैं। इजरायल से ‘पीपल टू पीपल कॉन्टैक्ट’ अच्छा है।

भारत और इजरायल के सम्बन्ध मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से और प्रगाढ़ हुए हैं। एक बार जब विपक्षी दलों ने इस पर आपत्ति जताई थी, तो तत्कालीन केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में जवाब दिया था कि फिलिस्तीन को भारत-इजरायल के प्रगाढ़ होते संबंधों से ख़ुशी है, इससे उसे कोई परेशानी नहीं है और वो इसे अच्छे रूप में देखता है। सुषमा का मानना था कि इससे फिलिस्तीन को लगता है कि उसके और इजरायल के बीच भारत एक सेतु बन सकता है।

2008-09 में इजरायल और हमास के बीच बड़ा संघर्ष हुआ था और उसके बाद 2012 में स्थिति बिगड़ी थी। यहाँ इंतिफाद की बात करनी ज़रूरी है, जो 1990 और फिर 2000 के दशक में सतह पर आए थे और इसके तहत इजरायल के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को तेज़ किया गया था। दूसरे इंतिफाद के बाद से ही दोनों क्षेत्रों में रिश्ते बिगड़ते चले गए। पहले इंतिफाद में अहिंसा का सहारा लेने का दावा किया गया था।

जैसे, फिलिस्तीनियों ने इजरायल में काम करना बंद कर दिया। लेकिन, उन्होंने पत्थरबाजी जम कर की, जो आज भी कई इस्लामी इलाकों में इस्तेमाल किया जाता है। जम्मू कश्मीर में कट्टरपंथियों ने सुरक्षा बलों पर अक्सर जम कर पत्थरबाजी की थी। इसी तरह इस्लामी दंगों में ऐसा ही किया जाता है। हालाँकि, इजरायली सैनिकों ने मुँहतोड़ जवाब दिया, जिससे कई फिलिस्तीनी आतंकी मारे गए। दूसरा इंतिफाद बड़ा ही हिंसक साबित हुआ।

2000 तक दोनों पक्षों के बीच स्थिति खासी ख़राब हो गई थी और इस तरह से फिर से हिंसक संघर्ष का दौर शुरू हुआ। फिलिस्तीनियों ने प्रदर्शन शुरू कर दिए और इजरायली सैनिकों ने उन्हें नेस्तानाबूत करना जारी रखा। हुआ ये कि इजरायल में जो शांतिपूर्ण ढंग से इस समस्या का समाधान चाहते थे, वो भी अब सशंकित हो गए और इससे इजरायल को हथियारों से जवाब देने में और ज्यादा आसानी हुई।

क्यों यहूदियों का पक्का दोस्त बन गया है अमेरिका?

इसमें एक बड़ा फैक्टर है अमेरिका, जो इजरायल का दोस्त है और दोनों कदम-कदम पर साथ रहे हैं। अमेरिका ने इजरायल को करोड़ों डॉलर की सहायता दी है और कूटनीतिक रूप से भी हमेशा साथ दिया है। 1956 के ‘Suez युद्ध’ में इजरायल ने यूके और फ़्रांस के साथ मिल कर इजिप्ट के खिलाफ लड़ाई की थी, जिससे तत्कालीन अमेरिकी सरकार खासा नाराज था। इस तरह इजरायल के पहले दशक में अमेरिका से उसके रिश्ते उतने अच्छे नहीं थे।

अब देखिए, अमेरिका और संयुक्त रूस (USSR) के बीच के छद्म युद्ध के बारे में आपको पता ही होगा। मध्य-पूर्व में उस वक्त रूस का खासा प्रभाव था और इसी प्रभाव को न्यूट्रलाइज करने के लिए अमेरिका को इजरायल में एक मित्र दिखने लगा। अमेरिका ने 70 के दशक में इजरायल पर एक अचानक होने वाले अरब के हमले से रक्षा की, जिसके बाद दोनों के रिश्ते और प्रगाढ़ हो गए। लोकतंत्र और जिहादी आतंक के खिलाफ लड़ाई, दोनों मामलों में इजरायल और अमेरिका ने एक-दूसरे को अपना करीबी पाया।

अमेरिका आज की तारीख में इजरायल को प्रतिवर्ष 3 बिलियन डॉलर की सहायता करता है। अब तक वो उसे कुल 118 बिलियन डॉलर की सहायता दे चुका है। हालाँकि, बराक ओबामा के काल में ज़रूर ईरान को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों में टकराव होता रहा। 2015 में एक भाषण में भी इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने ओबामा की ईरान नीति को लेकर आलोचना की थी। डोनाल्ड ट्रम्प ने जेरुसलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता दी, जिससे ये सम्बन्ध और सुधरे।

अब कुछ देशों की बात करते हैं, जिन पर इजरायल-फिलिस्तीन के रिश्ते का प्रभाव पड़ता है। 1978 में इजरायल-इजिप्ट में अमेरिकी मदद से शांति समझौता हुआ, लेकिन इजिप्ट ने क्षेत्र में आतंकियों की मदद की। सीरिया, इजरायल के दुश्मन ईरान का मित्र है और उसे बुरी नजर से देखता है। लेबनान तो इजरायल विरोधी जिहादी समूह हिज्बुल्ला का घर ही है। इजरायल के पूर्व में स्थित जॉर्डन फिलिस्तीनी शरणार्थियों से भरा हुआ है।

इधर हाल ही में इस रविवार (नवंबर 22, 2020) की देर शाम प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और शाहजादे मोहम्मद बिल सुल्तान करीब 3 घंटे तक सऊदी अरब के नियोम शहर में खुफिया तौर पर मिले। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो भी इस दौरान वहाँ मौजूद थे। संकेत हैं कि इस ख़ुफ़िया मुलाकात में दोनों देशों के बीच राजनयिक सम्बन्ध कायम करने के साथ साथ ईरान और तुर्की के बारे में भी बातचीत हुई।

याद रखने की बात है कि पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया के कई इस्लामी देश इजराइल के साथ राजनयिक संबंध कायम कर चुके हैं। इनमें सूडान, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन शामिल है। अमीरात और इजरायल के बीच पहली उड़ान सऊदी अरब से ऊपर उड़ कर गई। इससे पहले ऐसी सोच भी मुमकिन नहीं थी। पिछले महीने ही पहला समुद्री व्यापारिक जहाज़ इजरायल से संयुक्त अरब अमीरात पहुँचा। पश्चिम एशिया का यह नया गठजोड़ दरअसल एक तरफ तुर्की के खिलाफ है तो दूसरी तरफ ईरान के भी खिलाफ है।

दिवंगत वाजिद खान की पत्नी ने अंतर-धार्मिक विवाह की अपनी पीड़ा पर लिखा पोस्ट, कहा- धर्मांतरण विरोधी कानून का राष्ट्रीयकरण होना चाहिए

बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार वाजिद खान के कोरोना वायरस से निधन के कुछ महीनों बाद उनकी पत्नी कमलरूख खान ने अंतरधार्मिक विवाह के बारे में अपनी बातें साझा करने के लिए सोशल मीडिया पर कदम रखा। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक लंबी पोस्ट में कैप्शन दिया, “जिओ और जीने दो एक ही धर्म होना चाहिए जिसका हम सभी पालन करते हैं।” कमलरुख ने खुलासा किया कि कैसे इस्लाम में परिवर्तित होने के उनके प्रतिरोध ने उनके और उनके दिवंगत पति के बीच की खाई को बढ़ा दिया।

धर्मांतरण विरोधी बिल को लेकर हो रही बहस के बीच उन्होंने अपनी कहानी साझा करते हुए कहा, “मैं पारसी हूँ और वह मुस्लिम था। हम वही थे जिसे आप “कॉलेज स्वीटहार्ट्स” कहेंगे। आखिरकार जब हमारी शादी हुई, तो हमने स्पेशल मैरिजेज एक्ट के तहत प्यार के लिए शादी की।” कमलरुख ने बताया कि कैसे महिलाओं को धर्म के नाम पर पूर्वाग्रह, पीड़ा और भेदभाव का सामना करना पड़ता है।

अपने विवाहित जीवन के बारे में विवरण साझा करते हुए, कमलरुख बताती हैं कि पारसी परिवार में जन्म लेने की वजह से उनकी परवरिश और संस्कृति वाजिद खान के परिवार की मूल्य प्रणाली के विपरीत थी। उन्होंने लिखा “मेरी सरल पारसी परवरिश अपने मूल्य प्रणाली में बहुत लोकतांत्रिक थी। विचार की स्वतंत्रता को प्रोत्साहित किया गया और स्वस्थ बहसें आदर्श थीं। सभी स्तरों पर शिक्षा को प्रोत्साहित किया गया। हालाँकि, विवाह के बाद की स्वतंत्रता, शिक्षा और लोकतांत्रिक मूल्य प्रणाली मेरे पति के परिवार के लिए सबसे बड़ी समस्या थी।”

‘इस्लाम में परिवर्तित होने के प्रतिरोध ने मेरे और मेरे पति के बीच की खाई को काफी बढ़ा दिया’

कमलरुख ने लिखा, “एक शिक्षित, विचारशील, स्वतंत्र राय वाली महिला स्वीकार्य नहीं थी और धर्मांतरण के दबाव का विरोध करना अपवित्र था।” कमलरुख ने लिखा कि हालाँकि वह सभी धर्मों को बहुत महत्व देती हैं, लेकिन धार्मिक रूपांतरण पर उन्हें विश्वास नहीं था। कमलरुख ने खुलासा किया कि कैसे इस्लाम में उनके प्रतिरोध ने उनके और उनके पति के बीच की खाई को काफी बढ़ा दिया, जिसकी वजह से यह पति और पत्नी के रूप में उनके रिश्ते को नष्ट करने के लिए पर्याप्त विषाक्त हो चुका था और इसका असर बच्चों पर भी पड़ा।

वाजिद खान के परिवार से बहिष्कृत होने के पीछे का कारण बताते हुए कमलरुख ने लिखा, “मेरी गरिमा और आत्म-सम्मान ने मुझे उनके और उनके परिवार के लिए इस्लाम में परिवर्तित होने के लिए झुकने की अनुमति नहीं दी।”

उन्होंने बताया कि कैसे इस विषाक्त मजहब के खिलाफ उनकी लड़ाई संगीतकार के साथ तलाक के साथ खत्म हुई। उसने शेयर किया, “मैं तबाह हो गई थी, विश्वासघात महसूस किया और भावनात्मक रूप से टूट चुकी थी, लेकिन फिर भी मैंने खुद को और अपने बच्चों को सँभाला।”

‘काश, हम धार्मिक पूर्वाग्रहों से रहित परिवार के रूप में अधिक समय बिताते’

कमलरुख ने आगे कहा कि उनके पति के निधन के बाद भी उनका संघर्ष और उनपर आघात जारी है। उन्होंने लिखा, “आज उनकी असामयिक मृत्यु के बाद भी उनके परिवार का उत्पीड़न जारी है। मैं अपने बच्चों के अधिकारों और विरासत के लिए लड़ रही हूँ, जो उनके द्वारा हड़प लिए गए हैं। यह सब मेरा इस्लाम में परिवर्तित न होने के कारण उनकी नफरत का नतीजा है। नफरत की ऐसी गहरी जड़ें किसी प्रियजन की मृत्यु के बाद भी खत्म नहीं होती।”

धार्मिक रुपांतरण के खिलाफ बने कानून का समर्थन करते हुए वाजिद खान की पत्नी ने कहा, “मेरे बच्चे और मैं उन्हें बहुत याद करते हैं और हम चाहते हैं कि वह बिना धार्मिक पूर्वाग्रहों के एक परिवार के रूप में हमारे लिए अधिक समय दें।”

बता दें कि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ के खिलाफ बने विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 पर हस्ताक्षर कर इसे मंजूरी दे दी है। इसके बाद ये प्रदेश में औपचारिक रूप से लागू हो गया है। राज्यपाल ने शनिवार (नवंबर 28, 2020) को इसकी मंजूरी दी। राज्यपाल की अनुमति मिलते ही ये अपराध गैर-जमानती हो गया है और इसे 6 महीनों के भीतर विधानमंडल के दोनों सदनों में पास कराना होगा।

‘धर्मांतरण विरोधी कानून का राष्ट्रीयकरण किया जाना चाहिए’

कमलरुख ने कहा कि यूपी सरकार द्वारा शुरू किए गए धर्मांतरण विरोधी कानून का राष्ट्रीयकरण किया जाना चाहिए ताकि अंतरजातीय विवाह में धर्म की विषाक्तता से जूझ रही मेरे जैसी महिलाओं के लिए संघर्ष को कम किया जा सके। उन्होंने लंबी पोस्ट लिखकर बताया, “धर्म मतभेदों के जश्न का एक कारण होना चाहिए न कि परिवारों के अलग होने का। सभी धर्म परमात्मा का मार्ग हैं। जिओ और जीने दो एक ही धर्म होना चाहिए जिसका हम सभी पालन करते हैं।”

प्रदर्शनकारी किसानों से बातचीत के लिए गृहमंत्री अमित शाह ने संभाला मोर्चा, कहा- पहले हाईवे खाली कर तय मैदान में जाएँ

केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे और पंजाब-हरियाणा से दिल्ली की ओर मार्च कर रहे किसानों से गृह मंत्री अमित शाह ने अपील की है। गृह मंत्री ने कहा, “मैं प्रदर्शनकारी किसानों से अपील करता हूँ कि भारत सरकार बातचीत करने के लिए तैयार है। कृषि मंत्री ने उन्हें 3 दिसंबर को चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। सरकार किसानों की हर समस्या और माँग पर विचार करने के लिए तैयार है।”

अमित शाह ने ANI से बातचीत में कहा, “कृपया शांतिपूर्ण तरीके से अपने आंदोलन को जारी रखें। हम आपसे जरूर बात करेंगे। सरकार आपसे हमेशा बात करने के लिए तैयार है। एक बार जब आप अपना आंदोलन उस मैदान पर स्थानांतरित कर देंगे, तो भारत सरकार आपसे अगले दिन बात करने के लिए तैयार है। यदि किसान संघ 3 दिसंबर से पहले चर्चा करना चाहते हैं, तो मैं आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि जैसे ही आप अपना विरोध प्रदर्शन मैदान पर स्थानांतरित कर देंगे, हमारी सरकार अगले दिन आपकी चिंताओं को दूर करने के लिए वार्ता करेगी।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं सभी से अपील करना चाहता हूँ कि दिल्ली पुलिस आपकी मदद करने के लिए तैयार है और आप बुराड़ी के मैदान में अपना विरोध-प्रदर्शन जारी रख सकते हैं। दिल्ली पुलिस एक बड़े मैदान में आप सभी को स्थानांतरित करने के लिए तैयार है। आपको शौचालय की सुविधा प्रदान की जाएगी, पीने का पानी, एम्बुलेंस आपको प्रदान किया जाएगा। किसानों से अनुरोध है कि वो राष्ट्रीय राजमार्गों पर न बैठें। कई स्थानों पर, किसान इस ठंड में अपने ट्रैक्टरों और ट्रोलियों के साथ रह रहे हैं।”

गृह मंत्री ने कहा कि अगर किसान चाहते हैं कि भारत सरकार जल्द बात करे, 3 दिसंबर से पहले बात करे, तो मेरा आपको आश्वासन है कि जैसी ही आप निर्धारित स्थान पर स्थानांतरित हो जाते हैं, उसके दूसरे ही दिन भारत सरकार आपकी समस्याओं और माँगों पर बातचीत के लिए तैयार है।

बता दें कि किसान सरकार से कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग कर रहे हैं। वे सड़क पर उतरे हैं। पंजाब की सीमा से लेकर दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर उनका आंदोलन जारी है। किसानों की माँग है कि उन्हें जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की इजाजत दी जाए। लेकिन सरकार उन्हें दिल्ली के बुराड़ी स्थित निरंकारी ग्राउंड पर प्रदर्शन करने की इजाजत दी है। किसान इस पर राजी नहीं हैं। वे सिंधु बॉर्डर पर डटे हैं। इस प्रदर्शन में खालिस्तान समर्थक, पीएफआई और कॉन्ग्रेस के लिंक सामने आए हैं।

खालिस्तानियों के बाद कट्टरपंथी PFI भी उतरा ‘किसान विरोध’ के समर्थन में, अलापा संविधान बचाने का पुराना राग

खालिस्तानी समर्थक ताकतों द्वारा ‘किसान विरोध प्रदर्शन’ पर कब्जा करने की कोशिशों के बीच अब कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने मोदी सरकार द्वारा तीन कृषि कानूनों को पारित करने का विरोध करते हुए किसान विरोध में अपना समर्थन दिया है।

शनिवार (नवंबर 28, 2020) को कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने देश के विभिन्न हिस्सों में दंगों और हिंसा के लिए उकसाने के आरोपित किसानों के विरोध को अपना समर्थन व्यक्त किया और प्रदर्शनकारियों को संविधान के संरक्षण के लिए संघर्ष करने के लिए कहा।

पीएफआई ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें लोगों से मोदी सरकार द्वारा ‘फासीवादी कानूनों’ के खिलाफ एकजुट होने के लिए कहा गया।

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ओएमए सलाम ने भी घोषणा किया कि उनका इस्लामी संगठन ‘दिल्ली चलो’ मार्च का समर्थन करेगा। वह किसानों की माँगों के साथ खड़े हैं। उन्होंने दावा किया कि नए कृषि कानून किसानों के जीवन को बदतर बना देंगे।

हरियाणा-पंजाब सीमा पर किसानों के विरोध प्रदर्शन को पीएफआई का समर्थन उस समय मिला, जब खालिस्तान समर्थक समूहों द्वारा किसान विरोध प्रदर्शनों पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी तरह, हरियाणा-पंजाब सीमा पर ‘किसान विरोध’ के दौरान खालिस्तान समर्थक और भारत विरोधी नारे भी लगाए गए। हाल ही में एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें एक तथाकथित किसान द्वारा स्पष्ट तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है कि जैसे इंदिरा गाँधी को ठोका वैसे ही नरेंद्र मोदी को भी ठोक देंगे।

सिर्फ खालिस्तान समूह ही नहीं, यहाँ तक कि इस्लामी संगठनों और वामपंथी तत्वों ने भी इन प्रदर्शनकारियों को मोदी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रखने के लिए किसान विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने का प्रयास किया है। तथाकथित प्रदर्शनकारियों को उकसाने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टियों के लिंक भी सामने आए हैं।

पीएफआई का हिंसा फैलाने का इतिहास है

पीएफआई का हिंसा करने का काफी पुराना इतिहास है। उनके सदस्य हिंसा के कई मामलों में जाँच के घेरे में आ गए हैं। नागरिकता संशोधन अधिनियम के मद्देनजर हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों और देश भर में हिंसा की जाँच के दौरान, पीएफआई की भूमिका संदिग्ध रही है और पीएफआई के कई सदस्यों को दंगों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया है।

पीएफआई और SIMI जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन विभिन्न राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की फंडिंग के लिए कुख्यात हैं। पिछले साल दिसंबर में, CAA के विरोध प्रदर्शनों के दौरान गृह मंत्रालय के साथ शेयर की गई एक खुफिया रिपोर्ट ने कुछ ‘राजनीतिक दलों’ की तरफ इशारा किया था और SIMI और पीएफआई जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों- पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफआई) और उसके राजनीतिक मोर्चे, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (एसडीपीआई) के सदस्य मुस्लिम विरोधी भीड़ को सीएए के विरोध प्रदर्शनों के दौरान राज्य भर में हिंसा में शामिल करने के लिए उकसाने में शामिल था। यूपी पुलिस ने राज्य में व्यापक हिंसा के बाद पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की वकालत की थी

सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही नहीं, पीएफआई ने हाल ही में बेंगलुरु दंगों में भी भूमिका निभाई थी। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पूर्वी बेंगलुरु की सड़कों पर हिंसा को भड़काने के लिए ‘भीड़ को उकसाने’ के लिए एसडीपीआई नेता मुजामिल पाशा को नामित किया था। मुस्लिम भीड़ ने दो पुलिस स्टेशन पर हमला किया था और कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवासमूर्ति के आवास पर भी हमला किया था।

एनआईए ने कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से संबंधित कई भड़काऊ दस्तावेज और सामग्री भी बरामद किया था।

अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश ने कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों- पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) से जुड़े चार लोगों को राज्य में जाति-आधारित अशांति पैदा करने की योजना के लिए गिरफ्तार किया था। केरल के पत्रकार ‘सिद्दीकी कप्पन, जो कि इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) का एक पदाधिकारी है, को यूपी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। फर्जी पत्रकार हाथरस की घटना के बाद जाति संघर्ष पैदा करने के लिए हाथरस जा रहा था।

ओवैसी के गढ़ में रोड शो कर CM योगी आदित्‍यनाथ ने दी चुनौती, गूँजा- आया आया शेर आया… देखें वीडियो

बिहार विधानसभा में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय जनता पार्टी की निगाह अब तेलंगाना तथा पश्चिम बंगाल पर भी है। इसके लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मोर्चे पर हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ शनिवार को तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में निकाय चुनाव (ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपिल कॉर्पोरेशन) में मलकजगिरी इलाके में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों के पक्ष में सभा के साथ एक रोड शो किया। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तेलंगाना के रोड शो में शनिवार (नवंबर 28, 2020) को भारी भीड़ उमड़ी। सीएम योगी आदित्यनाथ हैदराबाद में एक दिसंबर को होने वाले निकाय चुनाव (ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपिल कॉर्पोरेशन) भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों के पक्ष में रोड शो तथा जनसभा करने के लिए हैदराबाद में हैं। 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज शाम को हैदराबाद के मलकजगिरी क्षेत्र में एक रोड शो किया। इस दौरान ‘जय श्री राम’ के नारे लगे और साथ ही सुपरहिट फिल्म बाहुबली का गाना ‘जियो रे बाहुबली’ भी रोड शो में बजता दिखा। सीएम योगी के रोड शो के में- ‘आया आया शेर आया…. राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की’, योगी-योगी, जय श्री राम, भारत माता की जय और वंदे मातरम के भी गगनभेदी नारे लगाए गए।

रोड शो के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा, “पीएम नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में गृह मंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करते हुए हैदराबाद और तेलंगाना के लोगों को जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने की पूरी आजादी दी।”

CM योगी ने कहा, “बिहार में, AIMIM के एक नव-निर्वाचित विधायक ने शपथ ग्रहण के दौरान ‘हिंदुस्तान’ शब्द का उच्चारण करने से इनकार कर दिया। वे हिंदुस्तान में रहेंगे, लेकिन जब हिंदुस्तान के नाम पर शपथ लेने की बात आती है, तो वे संकोच करते हैं। यह AIMIM का असली चेहरा दिखाता है।”

ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव के लिए मतदान एक दिसंबर को होगा। सीएम योगी ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम के 150 वार्डों के लिए होने वाले चुनावों में प्रचार किया। सीएम योगी आदित्यनाथ के हैदराबाद में चुनाव प्रचार को एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी को सीधी चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है।

ओवैसी ने यहाँ पर चुनाव में 51 प्रत्याशी उतारे हैं। हैदराबाद नगर निगम चुनाव में भी असदुद्दीन ओवैसी ने पुराने हैदराबाद के इलाके की सीटों पर अपनी पार्टी के प्रत्याशी उतारे हैं, जिनमें से पाँच टिकट हिंदुओं को दिए गए हैं। ओवैसी के 10 फीसदी प्रत्याशी हिंदू समुदाय के हैं। ओवैसी की पार्टी के हिंदू समुदाय के प्रत्याशी उन सीटों पर हैं, जहाँ पर हिंदू-मुस्लिम आबादी करीब-करीब बराबर यानी 50-50 फीसदी है और यहाँ विधानसभा सीट पर भी ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के विधायकों का कब्जा है।

गौरतलब है कि सीएम योगी के रोड शो से पहले ओवैसी ने कहा था कि अगर बीजेपी सर्जिकल स्ट्राइक करेगी तो एक दिसंबर को वोटर्स डेमोक्रेटिक स्ट्राइक करेंगे। ओवैसी ने किसानों के मुद्दे पर भी केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया था दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों के ऊपर ठंड में पानी डाला गया, यह सरकार हर मोर्चे पर फेल है।

भोपाल स्टेशन के सालों पुराने ‘ईरानी डेरे’ पर चला शिवराज सरकार का बुलडोजर, हाल ही में हुआ था पुलिस पर पथराव

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रेलवे स्टेशन के पास सालों पुराने अतिक्रमण पर बड़ी कार्रवाई की गई है। नगर निगम, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने संयुक्त अभियान के तहत भोपाल रेलवे स्टेशन 6 नंबर प्लैटफॉर्म के नज़दीक स्थित ईरानी बस्ती/डेरे का अतिक्रमण हटाया। इस कार्रवाई के दौरान 12 हज़ार वर्गफीट की जगह पर किए गए अवैध निर्माण को जेसीबी मशीन से हटाया गया। इस घटना की जानकारी मिलते ही तमाम दुकानदार अपनी दुकानों पर पहुँचे और वहाँ से अपना सामान हटाया। 

दरअसल, इसके पहले भोपाल रेलवे स्टेशन के आस-पास स्थित ईरानी कॉलोनी का अतिक्रमण हटाने की माँग उठी थी। अमूमन हर बार किसी न किसी कारणवश कार्रवाई पूरी नहीं हो पाती थी, काफ़ी समय बाद प्रशासन ने पूरी तैयारी के साथ इस कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

हाल ही में भोपाल के ही करोंद क्षेत्र स्थित अमन कॉलोनी, ईरानी डेरे के पास पुलिस पर हमला हो गया था। धोखाधड़ी के एक मामले में सागर पुलिस 3 आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए पहुँची थी। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस की टीम पर पथराव किया गया था जिसकी वजह से पुलिस एक ही आरोपित को गिरफ्तार कर पाई थी। 

साल 2017 के एक आदेश में अदालत ने इस ज़मीन को सरकारी बताया था लेकिन अदालत के आदेश के बावजूद ईरानी यहाँ से कब्ज़ा नहीं हटा रहे थे। उनका कहना था कि वह पिछले 50-60 सालों से यहाँ रह रहे हैं और यह ज़मीन प्राइवेट है इसलिए सरकार इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ रेलवे स्टेशन के नज़दीक जिस ज़मीन से अतिक्रमण हटाया जा रहा है वह लालजी भाई ठाकुर के नाम पर बताई जा रही है। फ़िलहाल उनकी मृत्यु हो चुकी है। जिसके बाद यहाँ दुकान चलाने वाले डेरे के लोगों और लालजी भाई के उत्तराधिकारियों के बीच मामला अदालत में विचाराधीन है। इस जगह पर अतिक्रमण करने वालों का आरोप है कि प्रशासन ने यहाँ किस आधार पर कार्रवाई की, यह ज़मीन निजी है। अभी तक करीब 40 दुकानों का अतिक्रमण हटाया जा चुका है और इस कार्रवाई के दौरान रैपिड एक्शन फ़ोर्स के लगभग 200 जवान तैनात किए गए थे। 

प्रशासन का कहना है कि अभी रहवासी क्षेत्र का अतिक्रमण भी तोड़ा जाएगा और पुलिस ने विरोध करने वालों को चेतावनी भी दी थी। इस क्षेत्र में दाखिल होने वाले तीनों रास्तों को बंद कर दिया गया था और पूरे क्षेत्र की बिजली भी काट दी गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 80 फीट चौड़ी हमीदिया समानांतर सड़क के किनारे अवैध कब्जे वाली करीब 12 हज़ार वर्गफीट सरकारी ज़मीन पर हुसैनी जनकल्याण समिति का अवैध कब्जा है। 

अतिक्रमण की इस कार्रवाई पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज़ हो गई है। मध्य प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने इस कार्रवाई को बदले की कार्रवाई बताया है। इसके अलावा उनका कहना था कि लोगों का रोज़गार छिनेगा तो वह आपराधिक गतिविधियों की तरफ बढ़ेंगे। सरकार रोजगार दे तो पा नहीं रही है, जो मेहनत करके अपना घर चला रहे हैं उनका श्रम सरकार को स्वीकार नहीं है। 

इस पर पलटवार करते हुए मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कॉन्ग्रेस की सरकार के पूर्व मंत्री को झुग्गी माफिया बताया। इसके अलावा उन्होंने कहा कि क़ानून व्यवस्था के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा, कॉन्ग्रेस की सरकार में गुंडों को भरपूर संरक्षण मिलता था लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सरकारी ज़मीन पर किसी भी तरह का अवैध कब्ज़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।