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UP के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक बार फिर जान से मारने की धमकी, आगरा से नाबालिग गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक बार फिर जान से मारने की धमकी मिली है। धमकी भरा संदेश रविवार (नवंबर 22, 2020) शाम पुलिस के डायल 112 के व्हाट्सएप नंबर पर भेजा गया था। मामले से पुलिस कमिश्नर को अवगत कराया गया। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना सुशांत गोल्फ सिटी में चौकी प्रभारी अहमामऊ की तहरीर पर देर रात मुकदमा दर्ज किया गया। 

साइबर सेल द्वारा फोन नंबर की जाँच में लोकेशन आगरा की मिली। इसके बाद सुशांत गोल्फ सिटी थाना प्रभारी सचिन सिंह के साथ टीम ने ग्राम अकोला थाना मांगरोल आगरा से आरोपित नाबालिग को दबोच लिया। 

पुलिस का कहना है कि नाबालिग को बाल न्यायालय में पेश किया जा रहा है। पुलिस ने नाबालिग के पास से एक मोबाइल फोन बरामद किया है, जिससे उसने धमकी भरा मैसेज भेजा था। छानबीन में सामने आया है कि नाबालिग ने मोबाइल फोन से मैसेज डिलीट कर दिया था। पुलिस अब फॉरेंसिक टीम की मदद से डिलीट किए गए संदेश को रिकवर करने का प्रयास कर रही है। पुलिस का कहना है कि नाबालिग से अन्य बिंदुओं पर पूछताछ की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि संदेश भेजने के पीछे नाबालिग के अलावा कोई अन्य तो नहीं था।

बता दें कि इसके पहले सात जुलाई को डायल 112 के वाट्सएप नंबर पर मुख्यमंत्री को जान से मारने की धमकी भरा मैसेज मिला। मैसेज मिलते ही पुलिस महकमा अलर्ट हो गया। छानबीन में पता चला कि धमकी भरा मैसेज कानपुर देहात से भेजा गया है। मामले में 12वीं के छात्र को पकड़ा गया। छात्र को जुवेनाइल कोर्ट के समक्ष पेश किया गया। 

वहीं 21 मई, 2020 की शाम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। यह धमकी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश- 112 के व्हाटसएप नम्बर पर दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि उन पर बम से हमला किया जाएगा। इसके बाद गोमती नगर थाने में इस सम्बन्ध में धारा 505 (1) बी, 506 और 507 के तहत FIR दर्ज कराई गई थी। मामले में पुलिस ने कामरान नाम के शख्स को गिरफ्तार किया। उसने पुलिस की पूछताछ में अपना जुर्म कबूल किया था। आरोपित कामरान ने कहा था कि उसने एक करोड़ रुपए मिलने के वायदे के बदले में सीएम योगी को बम से उड़ाने की धमकी दी थी।

इसके अलावा कोरोना वायरस के मद्देनजर नमाज और अजान पर निर्देशों से गुस्साए तनवीर खान नाम के एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोली मारने की बात कही थी। तनवीर खान ने अपने फेसबुक एकाउंट से पोस्ट किया था, “दिलदार नगर और पूरे कामसरोवर (कामसर) में अजान नहीं हो रही है। योगी को गोली मार दो…।” पोस्ट वायरल होते ही तनवीर खान ने अपना एकाउंट डिएक्टिवेट कर लिया था।

उत्तराखंड में अंतरधार्मिक विवाह पर ₹50000: CM रावत ने दिए जाँच के आदेश, जल्द ही बंद हो सकती है योजना

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार (नवंबर 21, 2020) को राज्य के मुख्य सचिव को टेहरी गढ़वाल प्रशासन द्वारा अंतरजातीय/अंतरधार्मिक विवाह के बाद सहायता राशि देने वाली सूचना को लेकर जाँच करने का आदेश दिया है। जिले के सामाजिक कल्याण विभाग द्वारा अंतरधार्मिक विवाह करने वाले जोड़े को 50,000 रुपए की मदद देने की घोषणा की थी, जिसके बाद ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा देने के आरोप लगे थे।

मुख्यमंत्री रावत ने मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वो इस बात की जाँच कराएँ कि किन परिस्थितियों में इस प्रेस रिलीज को जारी किया गया। सीएम के मीडिया संयोजक दर्शन सिंह रावत ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री ने इस घटना को काफी गंभीरता से लिया है और चीफ सेक्रेटरी को जाँच का आदेश दिया है। सीएम का कहना है कि जब सरकार पूरी तरह जबरन धर्मान्तरण के बाद शादी के खिलाफ है, तो किन परिस्थितियों में ये प्रेस रिलीज जारी हुआ?

उन्होंने बताया अंतरजातीय/अंतरधार्मिक विवाह पर सहायता राशि देने की ये योजना उत्तराखंड के गठन से काफी पहले से ही मौजूद थी और उत्तर प्रदेश के क़ानून का हिस्सा थी, जिसे राज्य ने हूबहू ग्रहण कर लिया और अब तक ये ऐसा ही चला आ रहा है। दर्शन रावत ने कहा कि सरकार जल्द ही इस योजना को बंद करने पर विचार कर रही है, क्योंकि वो नहीं चाहती कि जबरन धर्मान्तरण के बाद होने वाली शादी से राज्य की शांति और सद्भाव को ठेस पहुँचे।

इस प्रेस रिलीज के सामने आने के बाद उत्तराखंड सरकार के आर्थिक सलाहकार आलोक भट्ट ने बताया था कि ये 1976 का उत्तराखंड का क़ानून है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत पहले 10,000 रुपए की सहायता राशि मिलती थी, जिसे कॉन्ग्रेस की सरकार ने 2014 में बढ़ाकर 50,000 रुपए कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा से किसी ने भी अंतरधार्मिक विवाह को बढ़ावा देने की बात नहीं की है।

साथ ही बताया कि भाजपा सरकार में कोई अपने बुरे सपने में भी ऐसा नहीं सोच सकता है कि वो धर्मांतरण के बाद शादी को बढ़ावा दे। वहीं राज्य की विपक्षी पार्टी कॉन्ग्रेस का कहना है कि अगर उसने इस सहायता राशि को बढ़ाया तो फिर भाजपा सरकार ने इसे बंद क्यों नहीं किया? कॉन्ग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि भाजपा के राज्य में चार-चार मुख्यमंत्री हुए, किसी ने भी इस योजना को बंद नहीं किया।

उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों को इसीलिए उठाया जा रहा है क्योंकि उसने राज्य के विकास के लिए अभी तक कुछ नहीं किया है। उन्होंने दावा किया कि दो अलग-अलग जाति या धर्म के लोगों को आपस में शादी करने का अधिकार भारतीय संविधान से मिलता है और भाजपा की सरकार ऐसा करने से लोगों को नहीं रोक सकती, भले ही वो इस योजना को बंद ही क्यों न कर दे। अब इस मामले की जाँच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ज्ञात हो कि इस योजना पर इस पर ‘सुदर्शन न्यूज़ टीवी’ के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके ने पूछा था कि ‘लव जिहाद’ करने वाले को सजा की जगह 50,000 का सरकारी इनाम दिया जा रहा है? उन्होंने पूछा कि देवभूमि उत्तराखंड में ये उल्टी गंगा क्यों बह रही है? उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से पूछा था कि जब सारे राज्य ‘लव जिहाद’ के विरुद्ध कानून बना रहे तो उत्तराखंड में इसे बढ़ावा क्यों? उन्होंने आशंका जताई थी कि कोई ‘UPSC जिहाद’ वाला अधिकारी ही ऐसा करा रहा है।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने पेश किया ‘चार्टर ऑफ रिपब्लिकन वैल्यूज’, मुस्लिम काउंसिल को 15 दिन का अल्टीमेटम

इस्लामी कट्टरपंथ से निपटने के लिए अपनी नई योजना को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मुस्लिम देशों के निशाने पर आ गए हैं। मैक्रों ने देश के मुस्लिम नेताओं से ‘चार्टर ऑफ रिपब्लिकन वैल्यूज’ पर सहमति देने के लिए कहा है। इसी को लेकर विवाद है।

चार्टर के मुताबिक, इस्लाम एक मजहब है और इससे किसी भी तरह के राजनीतिक आंदोलन को जोड़ा नहीं जा सकता है। चार्टर के तहत, फ्रांस के मुस्लिम संगठनों में किसी भी तरह के विदेशी हस्तक्षेप को प्रतिबंधित किया जाएगा। इसको लेकर फ्रेंच काउंसिल ऑफ द मुस्लिम फेथ (CFCM) को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है।

इसके अलावा इमामों को फ्रेंच भाषा आने की अनिवार्यता होगी और एकेडेमिक डिग्रियाँ भी जरूरी होंगी। मैक्रों को उम्मीद है कि नेशनल काउंसिल ऑफ इमाम के बनने के साथ ही चार सालों के भीतर तुर्की, मोरक्को और अल्जीरिया के करीब 300 इमामों को हटाया जा सकेगा। इसके अलावा, सरकारी अधिकारियों से धार्मिक आधार पर किसी तरह की बहस करने वालों के खिलाफ भी सख्त सजा का प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा भी कई तरह के नियमों की बात चार्टर में की गई है, जिनमें घर पर शिक्षा न देने की बात भी शामिल है। मैक्रों के इस चार्टर की मुस्लिम देशों में आलोचना हो रही है। 

फ्रांस सरकार के इन सारे कदमों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। पाकिस्तानी की मानवाधिकार मंत्री ने इन कदमों की आलोचना करते हुए कहा कि मैक्रों मुस्लिमों के साथ वही कर रहे हैं जो यहूदियों के साथ नाजियों ने किया। हालाँकि, पाकिस्तान की मंत्री ने ट्वीट में ये गलत जानकारी दी थी कि सिर्फ मुस्लिम बच्चों के लिए आइडेंटिफिकेशन नंबर जारी किया जाएगा। फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने जब इसे फेक न्यूज करार दिया तो उन्होंने ट्वीट ही डिलीट कर दिया

गौरतलब है कि फ्रांस में शिक्षक सैमुअल पैटी की हत्या के बाद से ही सरकार इस्लामी कट्टरवाद के खिलाफ एक्शन में है। राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने भी कहा था कि आज इस्लाम के नाम पर हिंसा और हत्याओं को बढ़ावा दिया जा रहा है और ऐसे लोग हैं, जो इस्लाम के नाम पर हिंसक अभियान चलाते हुए हत्याओं और नरसंहार को जायज ठहरा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि आतंकवाद इस्लाम की भी समस्या है, क्योंकि इसके 80% पीड़ित मुस्लिम ही हैं और वो इसके पहले पीड़ित हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया था कि इस्लामी कट्टरवाद के खिलाफ जंग जारी रहेगी।

हाल ही में फ्रांस के ‘Savigny-le-Temple (Seine-et-Marne)’ क्षेत्र में अभिव्यक्ति की आज़ादी से जुड़े एक कोर्स की पढ़ाई के दौरान एक छात्र भड़क गया और उसने शिक्षक को धमकी दे डाली कि वो उसका वही हाल कर देगा, जो सैमुअल पैटी का हुआ था। सैमुअल की एक छात्र ने सिर्फ इसीलिए हत्या कर दी थी, क्योंकि उन्होंने कक्षा में पैगम्बर मुहम्मद का कार्टून दिखाया था, जो फ्रेंच पत्रिका ‘शार्ली हेब्दो’ में प्रकाशित हुआ था।

‘हिन्दुस्तान की शपथ नहीं लूँगा’: बिहार की विधानसभा में पहुँचते ही ओवैसी के MLA दिखाने लगे रंग

बिहार की 17वीं विधानसभा का सत्र आज से शुरू हो गया और इसके साथ ही नवनिर्वाचित विधायकों को सदन के सदस्यता की शपथ दिलाई गई। इसी दौरान सदन के भीतर हंगामा होने लगा, जब एआईएमआईएम के विधायक अख्तरुल इमान ने हिन्दुस्तान शब्द पर आपत्ति जता दी

जैसे ही सदस्यता की शपथ के लिए एआईएमआईएम के विधायक का नाम पुकारा गया, उन्होंने शपथ पत्र में लिखा ‘हिन्दुस्तान’ शब्द बोलने से मना कर दिया और इसके स्थान पर भारत शब्द का इस्तेमाल किया। 

दरअसल अख्तरुल इमान ने उर्दू भाषा में शपथ लेने की इच्छा जाहिर की थी लेकिन उर्दू भाषा की शपथ में भारत की जगह हिन्दुस्तान शब्द का इस्तेमाल हुआ था। इसके बाद अख्तरुल इमान ने ‘हिन्दुस्तान’ शब्द पर आपत्ति जताई और प्रोटेम स्पीकर से भारत शब्द का इस्तेमाल करने की बात कही।

इस मुद्दे पर विधायक अख्तरुल इमान का कहना था कि भारत के संविधान की शपथ हिन्दी भाषा में ली जाती है। इसके अलावा मैथिली में भी हिन्दुस्तान के स्थान पर भारत का उपयोग किया जाता है। लेकिन उर्दू भाषा के शपथ पत्र में भारत की जगह हिन्दुस्तान शब्द का इस्तेमाल किया गया है।

अंत में अख्तरुल इमान ने कहा कि वह भारत के संविधान की शपथ लेना चाहते हैं न कि हिन्दुस्तान के संविधान की। इस बात के बाद सदन के भीतर काफी हंगामा भी हुआ और प्रोटेम स्पीकर जीतन राम मांझी भी इस बात पर हैरान रह गए।   

विधायकों को शपथ दिलाने वाले प्रोटेम स्पीकर जीतन राम मांझी ने इस मुद्दे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है। यह हमेशा से विधानसभा की परम्परा रही है कि हिन्दुस्तान शब्द का उपयोग होता है लेकिन इस प्रकार की दलीलों से भी एआईएमआईएम के विधायक पर कोई असर नहीं पड़ा, वह अपनी अतार्किक बात पर भी अड़े रहे।

इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े विमर्श में गौर करने लायक तथ्य है कि एआईएमआईएम का प्रदर्शन बिहार विधानसभा चुनावों में उल्लेखनीय है। लेकिन संख्या के अलावा यहाँ मूल प्रश्न है कि इस बेहतर प्रदर्शन का आधार क्या था? इस प्रश्न का उत्तर सिर्फ एक शब्द का है – ध्रुवीकरण।

बिहार में राजनीतिक वजूद बनाए रखने का इससे बेहतर विकल्प और क्या हो सकता है एमआईएमआईएम जैसे राजनीतिक दलों के पास। और ध्रुवीकरण की प्रक्रिया में सफल होने के बाद इनके विधायक देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बन कर ‘हिन्दुस्तान’ शब्द पर आपत्ति जताते हैं

जितना प्रासंगिक शब्द भारत है, उतना ही प्रासंगिक शब्द हिन्दुस्तान भी है लेकिन एआईएमआईएम जैसे एजेंडापरस्त राजनीतिक दल ऐसा क्यों करते हैं, यह समझना बहुत मुश्किल नहीं है। इस तरह के विवाद इस बात का सबूत हैं कि एआईएमआईएम के लिए राजनीतिक लाभ विचारधारा से कहीं बढ़ कर है। सवाल यह भी होना चाहिए कि एआईएमआईएम की कोई विचारधारा भी है? अगर है तो उसका उद्देश्य ध्रुवीकरण से इतर और क्या ही होगा।

संसद के दोनों सदनों से लेकर विधानसभा तक अनेक भाषाओं में शपथ ली जाती है और लगभग सभी भाषाओं की शपथ को राजनेता जस का तस स्वीकार करते हैं। इससे हट कर देश के कुछ राजनीतिक नुमाइंदे ‘कंट्रोवर्सी प्रिय’ होते हैं और यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है जब एआईएमआईएम की तरफ से लोकतांत्रिक इमारत में विवाद को ज़मीन दी गई हो। 2019 में सांसदों के शपथग्रहण के दौरान खुद असदुद्दीन ओवैसी ने शपथग्रहण के दौरान ‘अल्लाह हु अकबर’ बोल कर कर विवाद खड़ा किया था।

इसके पहले उत्तर प्रदेश में 2017 विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद भी शपथग्रहण की भाषा को लेकर बहस छिड़ी थी। यह पहला ऐसा मौक़ा था, जब भारतीय जनता पार्टी के कुल 13 विधायकों ने एक साथ संस्कृत भाषा में शपथ ली थी। इस बात पर आपत्ति जताते हुए समाजवादी पार्टी के तथाकथित धर्मनिरपेक्ष नेताओं का कहना था कि वह उर्दू भाषा में शपथ लेंगे। उनके मुताबिक़ संस्कृत में शपथ ली जा सकती थी तो उर्दू में क्यों नहीं यानी इनका द्वेष उर्दू की गैरमौजूदगी से नहीं बल्कि संस्कृत की मौजूदगी से था। जिसके बाद प्रोटेम स्पीकर ने उन्हें हिन्दी में शपथ दिलाई थी।

9 साल में ₹150 करोड़ की कमाई, 13 साल में गूगल में ₹20 करोड़ की जॉब: ‘वुल्फ गुप्ता’ का क्यों हुआ मर्डर?

बच्चों को कोडिंग सिखाने वाली वेबसाइट WhiteHatJr के सीईओ करण बजाज ने शनिवार (नवंबर 21, 2020) को एक आलोचक के खिलाफ 17 करोड़ रुपए का मानहानि का मुकदमा दायर किया था। इस कम्पनी का स्वामित्व BYJU’s के पास है। सॉफ्टवेयर प्रदीप पूनिया, जिनके खिलाफ ये मुकदमा दायर हुआ, ट्विटर पर उनका अकाउंट WhiteHatSnr नाम से है। सोमवार को ‘Wolf Gupta’ के इस मामले में कोर्ट में सुनवाई हुई।

पूनिया पर ‘ट्रेड मार्किट एक्ट 1999’, ‘कॉपीराइट एक्ट 1957’ और ‘सिविल प्रक्रिया संहिता 1908’ के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। रजिस्टर्ड और अनरजिस्टर्ड ट्रेडमार्क के उल्लंघन के मामले में ये केस दर्ज कराया गया है। कम्पनी ने आरोप लगाया है कि उसके खिलाफ इंजीनियर ने आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की। साथ ही कम्पनी के कर्मचारियों की निजता के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है।

असल में ये पूरा मामला WhiteHatJr के एक एड के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसमें वो एक काल्पनिक बच्चे ‘Wolf Gupta’ के बारे में बताते हैं। उनके प्रचार में बताया जाता है कि 12 साल का ‘Wolf Gupta’ कोडिंग सीख कर करोड़ों कमा रहा है। किसी एड में उसे गूगल में जॉब करता हुआ बताया जाता है। यहाँ हम चार अलग-अलग एड का उदाहरण देकर आपको समझाते हैं कि असल में वो क्या करता है:

  • मात्र 9 साल के ‘Wolf Gupta’ ने कम्प्यूटर सीख कर गूगल वीडिओज़ बना कर 150 करोड़ रुपए की कमाई शुरू कर दी, जबकि उसकी उम्र के बाकी बच्चे यूट्यूब वीडियो ही सर्फ़ करने में लगे हुए हैं।
  • 13 साल के ‘Wolf Gupta’ ने स्कूल के बाद AI कोड सीख कर गूगल में 1.2 मिलियन डॉलर (8.88 करोड़ रुपए) का जॉब प्राप्त कर लिया।
  • जब उसकी उम्र के अन्य बच्चों को पता तक नहीं था कि स्कूल के बाद करना क्या है, ‘Wolf Gupta’ ने AI कोड सीख कर गूगल में 1.2 करोड़ रुपए की नौकरी पा ली।
  • 13 साल के ‘Wolf Gupta’ को गूगल से 20 करोड़ रुपए का जॉब मिला, जबकि उसकी उम्र के अन्य बच्चों को पता तक नहीं कि स्कूल के बाद करना क्या है।
‘Wolf Gupta’ को लेकर WhiteHatJr की प्रचार सामग्री

ऊपर लिखी सारी बातें WhitHatJr की प्रचार सामग्रियों का हिस्सा होती हैं, जिन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुँचाया जाता है और फिर बच्चों को कोडिंग सीखने के लिए रजिस्टर करने को कहा जाता है। पूनिया के कई आरोपों के बाद WhiteHatJr ने ‘Wolf Gupta’ वाला एड हटा दिया था, जिसके बाद पूनिया ने आरोप लगाया कि कम्पनी ने ‘Wolf Gupta’ की हत्या कर दी है। साथ ही उन पर कम्पनी का स्लैक अकाउंट हैक कर के गोपनीय वार्तालाप को सार्वजनिक करने का आरोप लगाया।

प्रदीप पूनिया ने ट्विटर थ्रेड के जरिए WhiteHatJr के स्लैक अकाउंट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए आरोप लगाया कि उसकी एक कर्मचारी पूजा ने जब रात को अवसाद में होने को लेकर ट्वीट किया तो पूरी टीम ने मिल कर रिपोर्ट कर उसके अकाउंट को सस्पेंड करवा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया BYJU’s के हाथों बिका हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि चैट में उनके वीडियो को हटाने की भी बात की गई, जिससे पता चलता है कि आरोप पुष्ट थे।

साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि एक लड़की जब कम्पनी में काम के लिए इंटरव्यू देने आई तो उसकी तस्वीर क्लिक कर चैट में उसके बारे में गलत बातें की जा रही थीं। वहीं एक अन्य लड़की को ‘चाइनीज’ बताया गया, ऐसा उनका आरोप है। वहीं जब एक व्यक्ति ने कम्पनी के एक एड में पाया कि एक 10 साल के बच्चे ने फेस डिटेक्टिंग एप बनाया और उसका CEO बन गया, तो फिर उसने उस एप को देखने की इच्छा प्रकट की।

आरोप है कि कम्पनी के लोगों ने आपस में बात किया कि एप बना लिया जाए और करण बजाज ने कहा कि वो इसे लेकर कम्पनी भी बना लेंगे। हाल ही में Tekie नामक एक प्रतिद्वंद्वी कम्पनी ने आरोप लगाया था कि WhitHatJr ने गलत तरीकों से उसके मॉडल को कॉपी किया। कम्पनी ने बताया कि उसके एक क्लास के दौरान कैमरा ऑफ था और उधर से किसी 30 साल के आदमी की आवाज़ आ रही थी, जो उसके पढ़ाने के स्टाइल को कॉपी करने के लिए किया गया था।

दिल्ली हाईकोर्ट में अब इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी 6, 2021 को होगी। कोर्ट में कम्पनी की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि करण बजाज एक शिक्षक हैं, योग भी पढ़ाते हैं और उनके खिलाफ आरोप लगाने वाले प्रदीप पूनिया के बारे में कुछ नहीं पता कि वो कौन हैं और क्या उसके बच्चे WhiteHatJr के छात्र थे या नहीं? आरोप लगाया कि वो लगातार कम्पनी के कंटेंट्स को ट्रोल कर रहे हैं।

साथ ही आरोप लगाया कि वो ट्विटर के साथ-साथ टेलीग्राम पर भी ‘WhiteHat Poonia’ नाम से अकाउंट बना कर नक़ल कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूनिया ने अपने 13 साल के कजन के माध्यम से WhiteHatJr की क्लासेज लेकर वीडियो रिकॉर्ड कर फैलाया। उन्होंने कहा कि पूनिया आरोप लगाते हैं कि हम गृहणियों के माध्यम से कोडिंग सिखाते हैं, जबकि हमारे पास PhD स्कॉलर शिक्षक हैं।

साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि वो अपने यूट्यूब चैनल ‘WhiteHatSr’ के माध्यम से WhiteHatJr के सारे क्लासेज ऑनलाइन मुफ्त में कराने का दावा भी करते हैं। साथ ही कम्पनी ने खुद पर पोर्नोग्राफिक कंटेंट्स को बढ़ावा देने के आरोपों पर भी आपत्ति जताई। वहीं पूनिया की तरफ से पेश वकील स्वाति सुकुमार ने पूछा की ये ‘Wolf Gupta’ कौन है? साथ ही जवाब दिया ये एक काल्पनिक पात्र है, जिसके नाम पर लिंक्डइन अकाउंट तक बनाया गया है। लेकिन कम्पनी ने अपने इस झूठ के बारे में कहीं भी डिस्क्लेमर नहीं लगाया।

उन्होंने कहा कि ये न बताना कि ‘Wolf Gupta’ एक काल्पनिक पात्र है, जनता के साथ धोखा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि ये एक काल्पनिक पात्र है और इसके प्रचार से बच्चों की मानसिक अवस्था पर ज़रूर प्रभाव पड़ेगा। लेकिन, साथ ही पूछा कि स्वस्थ विमर्श की बजाए इस तरह से आरोप लगाने का कारण क्या है? अधिवक्ता सुकुमार ने कहा कि स्वस्थ आलोचना का एक भाग ‘Parody’ भी हो सकता है।

साथ ही उन्होंने सबूतों के साथ दिखाया कि WhiteHatJr उन कमेंट्स को हटा देता है, जिसमें उसकी आलोचना की जाती है। इसके बाद उन्होंने एक 12 साल की बच्ची का उदाहरण दिया, जिन्होंने ‘एडवर्टाइजमेंट रोस्ट’ के जरिए प्रचार समाग्रियों का मजाक बनाया था। उन्होंने कहा कि जिस तरह से गूगल और टेस्ला के साथ कम्पनी अपना जुड़ाव दिखती है, भारत के ‘एडवर्टाइजमेंट कैम्पेन’ के पास उससे जुड़ी 15 शिकायतें प्राप्त हुई हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि दोनों पक्षों को सुनना जरूरी है, क्योंकि पूनिया ने ऐसा कर के किसी प्रकार का वित्तीय लाभ नहीं कमाया था। कम्पनी की तरफ से पेश वकील राजशेखर राव ने कहा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी है, लेकिन वो कम्पनी को पोंजी स्कीम बताते हैं, जो ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि पूनिया ने भले ऐसा कर के रुपए नहीं कमाए हों, लेकिन वो WhiteHatJr के कंटेंट्स का इस्तेमाल तो कर ही रहे हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अंत में आदेश दिया कि प्रदीप पूनिया अपने यूट्यूब चैनल से वो कंटेंट्स हटाएँ, जिनमें कम्पनी के प्राइवेट वार्तालाप को हैक कर उसकी सामग्रियाँ दिखाई गई हैं। साथ ही उन्हें ‘WhiteHatSr’ नाम से यूट्यब चैनल न चलाने को भी कहा। इसके बाद उन्होंने उन ट्वीट्स की भी लिस्ट दी, जो पूनिया को हटाने हैं। साथ ही उन्हें WhiteHatJr के शिक्षकों की योग्यता या नंबर पर टिप्पणी करने से मना किया।

गाड़ी को धक्का लगाते भगवान शंकर और महाकाली… हिंदूफोबिया का एक अवतार अनुराग बासु की ‘लूडो’ भी

हिंदूफोबिया को लेकर चर्चित ओटीटी प्लेटाफॉर्म नेटफ्लिक्स इस समय वेब सीरिज ‘ए सूटेबल बॉय (A Suitable Boy)’ को लेकर विवादों के केंद्र में है। इस वेब सीरीज पर मंदिर प्रांगण में अश्लील दृश्य फिल्माने और लव जिहाद को बढ़ावा देने का आरोप है। इसी प्लेटफॉर्म पर आई अनुराग बासु की फिल्म ‘लूडो’ में भी इस बात का पूरा ख्याल रखा गया है कि कैसे हिंदुओं को नीचा दिखाना है और उनकी भावनाओं को आहत करना है। इससे पहले रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी काबुलीवाला पर आधारित वेब सीरीज में भी ऐसा कर चुके हैं।

ढाई घंटे की बेसिरपैर की फिल्म ‘लूडो’ का एक ही मकसद है। सीधे-सीधे हिन्दू धर्म का उपहास। सांकेतिक रूप से पूरी फिल्म में हिन्दू संस्कृति को चोट पहुँचाने की कोशिश की गई है।

आए दिन लगभग सभी बॉलीवुड फिल्मों में आपको ऐसा सीन देखने को मिल जाएँगे, जिसे देखकर आपको अंदाजा हो जाएगा कि ये गलती से नहीं हुआ है, अनजाने में नहीं हुआ है। इसे जबरदस्ती डाला गया है। किसी भी वेब सीरीज या फिल्म को बनाने से पहले के पीछे कई महीनों की मेहनत होती है, हरेक सीन पहले से तैयार होता है, हर एक डायलॉग लिखी होती है। ऐसा नहीं है कि कोई भी सीन ऑन द स्पॉट तैयार किया जाता है। यानी कि फिल्म में ऐसे सीन जान-बूझकर डाले जाते हैं, ताकि लोग उस पर ऊँगली उठाएँ और फिल्म या वेब सीरीज को सुर्खियाँ मिल जाए।

‘पीके’ की शैली में बनाया मजाक

ऐसा ही कुछ किया है अनुराग बसु ने। इस फिल्म में हिन्दू त्रिदेवों का बेशर्मी से मजाक बनाया गया है और उसको बिलकुल उस ढंग से ही फिल्माया गया है, जिस ढंग से आमिर खान की ‘पीके’ फिल्म में दिखाया गया था। स्वांग रचने वाले तीन लोग ब्रह्मा, विष्णु, महेश का भौंडा सा रूप धरे सड़क पर नाच-कूद कर रहे हैं, जिन्हें देख कर फिल्म का हीरो आदित्य रॉय कपूर वितृष्णा के भाव से मुँह बना रहा है। एक सीन में तो भगवान शंकर और महाकाली गाड़ी को धक्का भी दे रहे हैं।

जान-बूझकर इस तरह से कुछ हिन्दी फिल्मों में हिन्दुओं के देवी-देवताओं को फूहड़ स्वांग रचा कर पेश किया जा रहा है और उनको तरह-तरह की घटिया हरकतें करते दिखाया जा रहा है जो भारत में हिन्दू धर्म-संस्कृति के विरुद्ध चली आ रही पुरानी फिल्मी साजिश को आगे बढ़ाने की नीच कोशिश है।

एक सीन में हीरो-हीरोइन पर बेड सीन फिल्माया जाता है। इसमें दिखाया गया है कि लड़की के पास उसकी माँ का फोन आता है। माँ पूछती है कि वह कहाँ पर है तो वह कहती है कि वह मंदिर में है। फिल्म में इस डायलॉग को लेकर काफी आलोचना हो रही है। फिल्म में रामलीला और गाय को लेकर भी मजाक बनाया जाता है।

महाभारत के प्रसंग पर बोला झूठ

महाभारत के कौरवों के विषय में कहने की आवश्यकता नहीं, यह सर्वविदित है कि वे नायक नहीं खलनायक थे। इसके विपरीत हिन्दुओं की इस धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को झूठ बोल कर झूठा दिखाने की कोशिश की गई। ऊबड़-खाबड़ और बेसिर-पैर की इस फिल्म के एक सीन में अनुराग बसु और राहुल बग्गा लूडो खेल रहे होते हैं। यही दोनों फिल्म के सूत्रधार हैं। लूडो खेलने के दौरान अनुराग बसु, राहुल को जीवन की फिलॉसफी समझाते हैं। 

वह पाप और पुण्य को समझाते हुए कहते हैं कि इतने लोग कोरोना में मर गए, वो सब के सब पापी थे क्या? वह पाप और पुण्य का समझाने के लिए महाभारत के अंतिम सार का उदाहरण देते हैं। महाभारत का युद्ध खत्म होने के बाद पांडव जब स्वर्ग पहुँचे तो दुर्योधन पहले से ही स्वर्ग में बैठा था। जबकि दुर्योधन दुनिया की नजरों में पापी था। इस तरह उन्होंने कौरवों को नायक और पांडवों को खलनायक सिद्ध किया। अपने इस अ-धार्मिक झूठ के पाँव लगाने के लिए वह एक झूठा प्रसंग भी स्वयं ही गढ़ कर सुना देते हैं।

अर्नब गोस्वामी का मजाक

फिल्म के एक सीन में रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी का मजाक उड़ाया गया है। फिल्म में एक जगह पर अर्नब गोस्वामी और उनकी टीम की जमकर बैंड बजाई गई है, जो कि लोगों को रास नहीं आ रहा। आपको याद होगा कि तकरीबन एक महीना पहले कपिल शर्मा के शो में भी अर्नब का मजाक उड़ाया गया था, लेकिन वह मजाक चैनल को काफी भारी पड़ गया। आज तक कपिल शर्मा शो की टीआरपी लगातार गिरती जा रही है।

अब बड़ा सवाल यह है कि अनुराग बसु जैसे बड़े डायरेक्टर को फिल्म में इस तरह के कंटेंट को डालने की क्या जरूरत पड़ गई? वो इस तरह का कंटेंट क्योंं दिखा रहे हैं? क्या इसके अलावा उनके पास ऐसे कंटेंट नहीं हैं, जिससे इन्हें सुर्खियाँ मिले। हिंदुओं की ही भावनाओं को क्यों ठेस पहुँचाया जाता है?

हालाँकि अच्छी बात यह है कि बॉलीवुड के इस निम्न स्तर की मानसिकता के विरुद्ध धीरे-धीरे ही सही जनता में जागरूकता बढ़ी है। उदाहरण के तौर पर पिछले वर्ष सेक्यूलरिज़्म के नाम पर हिंदुओं को अपमानित करने वाली फिल्में जैसे ‘कलंक’, ‘व्हाइ चीट इंडिया’ जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुँह गिरी, तो वेब सीरीज ‘सेक्रेड गेम्स’ का प्रदर्शन पहले सीज़न के मुक़ाबले काफी फीका रहा।

पुराने हैदराबाद में रोहिंग्या मुसलमानों को घुसाया, उनको दिया गया हर वोट भारत के खिलाफ: ओवैसी पर तेजस्वी सूर्या

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा का ध्यान अब दक्षिण के राज्यों पर है। तेलंगाना में होने वाले नगर निगम चुनावों के लिए वहाँ जोर-शोर से प्रचार चल रहा है। भाजपा के सांसद तेजस्वी सूर्या ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और उनके भाई अकबरुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधा है।

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह हास्यास्पद है कि अकबरुद्दीन और असदुद्दीन ओवैसी विकास की बात कर रहे हैं। उन्होंने पुराने हैदराबाद में विकास की अनुमति नहीं दी। उन्होंने केवल रोहिंग्या मुसलमानों के प्रवेश को अनुमति दी। ओवैसी को दिया गया हर वोट भारत के ख़िलाफ़ और भारत से जुड़े हर फैसले के ख़िलाफ़ है।”

भाजपा नेता ने कहा, ” वे (असदुद्दीन ओवैसी) केवल इस्लाम, अलगाववाद और कट्टरपंथ की भाषा बोलते हैं, जिसे मोहम्मद अली जिन्ना भी बोला करते थे।”

तेजस्वी सूर्या ने हैदराबाद में प्रचार करते हुए कहा, “ये सिर्फ एक निगम चुनाव नहीं है, अगर आप यहाँ ओवैसी को वोट देते हैं तो वे महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार, यूपी जैसे राज्यों में मजबूत होते हैं।” उन्होंने केसीआर पर निशाना साधते हुए कहा कि वो हैदराबाद को इस्तांबुल बनाना चाहते हैं।

उन्होंने केसीआर के लिए कहा कि तुर्की के राष्ट्रपति लगातार भारत के खिलाफ बोलते हैं और केसीआर हैदराबाद को ही तुर्की की राजधानी इस्तांबुल जैसा बनाना चाहते हैं। यही कारण है कि वे AIMIM के साथ गठबंधन में हैं। वे पाकिस्तान जैसा हैदराबाद चाहते हैं।

ओवैसी ने भी साधा भाजपा पर निशाना

तेजस्वी सूर्या के इस बयान से पहले ओवैसी ने भी कल मीडिया से बात करते हुए भाजपा पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था “अगर आप किसी भी बीजेपी नेता को नींद से जगाएँगे और कुछ नाम लेने को कहेंगे तो वो कहेंगे- ओवैसी। इसके बाद आतंकवाद और पाकिस्तान का नाम लेंगे। बीजेपी को इसपर बात करनी चाहिए कि उन्होंने 2019 के बाद से तेलंगाना, खासकर हैदराबाद को क्या आर्थिक सहायता दी है।”

उन्होंने हैदराबाद बाढ़ का मुद्दा उठाते हुए कहा था, “”हैदराबाद में बाढ़ आई थी। मोदी सरकार ने उस वक्त हैदराबाद को क्या आर्थिक मदद दी? वो अब इस चुनाव को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि उस वक्त उन्होंने कोई मदद नहीं दी थी। यहाँ ऐसा नहीं चलेगा, जनता जानती है।”

कोरोना से बचने के लिए ढपली बजाकर सुनाई कविता, याद दिलाया PM मोदी का संदेश; Video वायरल

कोरोना महामारी से बचने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का पिछले दिनों कई लोगों ने अपनी तरह से प्रचार-प्रसार किया। किसी ने इस पर अपने विचार लिखे तो किसी ने दो चार बातें और जोड़कर उस पर अपनी राय दी। कविता के जरिए भी कई लोगों ने पीएम मोदी की बात को जन-जन का पहुँचाने का काम किया। 

इसी क्रम में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुई है। एक व्यक्ति इसमें कोरोना पर लिखी कविता को लयबद्ध प्रस्तुत कर रहा है और ढपली बजाकर मनोरंजन भी कर रहा है। इस वीडियो को उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी ने अपने अकाउंट से शेयर किया है।

अभी तक इस वीडियो को केवल शलभमणि त्रिपाठी के अकाउंट से ही 6 हजार के करीब लाइक और 1.3 हजार रीट्वीट मिल चुके हैं। कई यूजर्स ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। संभाव नाम का यूजर लिखता है कि यह साबित करता है कि कम पढ़े-लिखे लोग सच्चाई के ज्यादा करीब होते हैं।

एक अन्य यूजर वीडियो में नजर आ रहे व्यक्ति की तारीफ में लिखता है, “अति उत्तम। गायकी भी और ढपली का इस्तेमाल भी! हमारे देश/प्रदेश की इन दबी हुई प्रतिभाओं का सदुपयोग होना चाहिए और इनका जीवन भी सुधरना चाहिए! इनकी अद्भुत गायकी और मोदी जी की बातों को फैलाने के लिए इनका इस्तेमाल चुनाव रैलियों में भी होना चाहिए और पारितोषिक भी मिलना चाहिए।”

दिलीप लांबा लिखते हैं, “जागरूक अभियान चलाने के लिए इससे अच्छा रास्ते में उदाहरण देखने को नहीं मिला। कोटि-कोटि साधुवाद इस गीत बजाने वाले को, गीत गाने वाले को। जय हिंद। जय श्री राम।”

वीडियो में व्यक्ति को गाते सुना जा सकता है:

तापे तपाई मुँह पर पट्टी, मोदी का है कहना…
गरम गरम पानी से नहाना दूर दूर तुम रहना
इसका नाम है कोरोना, इसका नाम है कोरोना
नाम है कोरोना इसका नाम है कोरोना।

भूखे को खिलाना हाँ…प्यासे को पिलाना हाँ..-2
भूखे को खिलाना भैया..प्यासे को पिलाना …

मात-पिताओं की सेवा कर, कोरोना से मत तू डर-2
मात पिता की सेवा करियो कोरोना से न तू डरियो
मोदी का है कहना, समझाना, समझाना भैया
भारत को है…भारत को बचाना।

तापे तपाई मुँह पर पट्टी..मोदी का है कहना…
गरम गरम पानी से नहाना, दूर दूर तुम रहना।
इसका नाम है कोरोना, इसका नाम है कोरोना 
नाम है कोरोना…इसका नाम है कोरोना।

रुखी-सूखी खा लेना, ठंडा पानी पी लेना
रुखी सूखी खाना भैया..ठंडा पानी पी लेना
घर में ही रहना भैया,घर में ही रहना
घर में ही रहना,घर में ही रहना।

तापे तपाई मुँह पर पट्टी..मोदी का है कहना…
गरम गरम पानी से नहाना दूर दूर तुम रहना
इसका नाम है कोरोना, इसका नाम है कोरोना। 

बोल भारत माता की जय!

‘चीन से नहीं, तिब्बत से सीमा साझा करता है अरुणाचल प्रदेश; इस ऐतिहासिक तथ्य को कोई नहीं बदल सकता’

चीन के साथ हालिया तनाव के बीच अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बड़ी बात कही है। उन्होंने द हिंदू को दिए साक्षात्कार में कहा है कि अरुणाचल प्रदेश अपनी सीमा सिर्फ तिब्बत के साथ साझा करता है, चीन के साथ नहीं।

इस साक्षात्कार में उन्होंने फ्रंटियर हाइवे को लेकर मुख्य रूप से बात की है। उन्होंने कहा कि इस हाइवे के होने से युद्ध की स्थिति में सैनिकों को आवाजाही में दिक्कत नहीं आएगी। उन्होंने बताया है कि इस हाइवे का काम पहले धीमा था। लेकिन सशस्त्र बलों, बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन और अन्य स्टेकहोल्डर एजेंसियों के एक साथ आने के कारण 1,100 किमी LAC के साथ हाईवे बनाने के कार्य को गति मिली है। 

गौरतलब है कि पेमा खांडू हमेशा से ही LAC को इंडो-तिब्बत बॉर्डर कहते आए हैं। यह पूछे जाने पर कि वह LAC को इंडो-तिब्बत बॉर्डर क्यों कहते हैं, उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश ने अपनी सीमा सिर्फ तिब्बत के साथ साझा करता है। यह ऐतिहासिक तथ्य है और इसे कोई बदल नहीं सकता। पूरी दुनिया जानती है कि चीन ने तिब्बत पर कब्जा किया है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई 1962 के संघर्षों को देखता है और निराधार दावे करता है तो उनके लिए अपनी मातृभूमि को बचाना अनिवार्य है। उनकी मानें तो सीमा के कई खंड वास्तव में दुर्गम हैं। यही कारण है कि वह 1,100 किमी एलएसी के साथ फ्रंटियर हाईवे को बढ़ावा देने में जुटे हैं, जिससे सैनिकों की आवाजाही तेज हो।

उन्होंने बताया कि यह हाईवे पहले कई एजेंसियों के कारण सही दिशा में नहीं था। लेकिन अब इसमें बदलाव किया गया है ताकि सेना, इंडो-तिब्बत पुलिस, बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन और स्टेट एजेंसियों के पास इसकी क्वालिटी पर सोचने का समय हो। उन्होंने कहा कि पूर्वी हिमालय की नाजुक पारिस्थितियों के मद्देनजर कहना है कि इस बिंदु पर कॉर्डिनेशन बहुत ज्यादा जरूरी है।

मुख्यमंत्री के अनुसार भूस्खलन जैसे प्राकृतिक कारणों से यह प्रोजेक्ट काफी लागत वाला है। कई विदेशी फंडिंग एजेंसियाँ हैं जो कम ब्याज पर लोन देती हैं। इनसे भारत के कई राज्यों को फायदा हो रहा है। लेकिन चीन यह दावा करके कि अरुणाचल प्रदेश पर उसका अधिकार है लगातार फंड ब्लॉक करवा रहा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक चीन के हस्तक्षेप के कारण एशियन डेवलपमेंट बैंक और अन्य बैंक उन्हें लोन देने से मना कर चुके हैं। हालाँकि केंद्र सरकार उन्हें मदद मुहैया करवा रही है।

इंटरव्यू में सीएम खांडू ने सुदूर क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी पर भी बात की और बताया कि टूरिज्म उनके प्रदेश की ताकत है। इसको बढ़ावा देने के लिए अच्छी सड़कें चाहिए। इंवेस्ट इंडिया के तहत एक स्पेशल डेस्क अरुणाचल प्रदेश के लिए बनाने का उन्हें भरोसा दिलाया गया है।

साक्षात्कार में उन्होंने अनुसूचित जातियों और पर्यावरण पर भी बात की। उन्होंने बताया कि सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी की ओर से प्रदेश को कहा गया था कि यहाँ 50,000 मेगावाट हाइड्रोपावर प्रोड्यूस करने की क्षमता है जो औद्योगिक सपने को पूरा करने की जरूरत है, लेकिन उन्हें प्रकृति की चिंता है। उन्होंने कई ऐसे प्रोजेक्ट्स को खत्म किया है जिन्हें सालों पहले साइन किया गया था, मगर वह सही नहीं थे या उनमें प्रोग्रेस नहीं हो रही थी। वह उन कार्यों पर अपना फोकस कर रहे हैं जो राज्य के लिए ठीक हैं।

‘युद्ध छेड़ सकते हैं नए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन, अच्छे दिन चले गए’: चीन सरकार के सलाहकार ने दी चेतावनी

जहाँ वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहले से ही चीन की नाक में दम कर के रखे हुए हैं, वहीं अब वहाँ के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बायडेन से भी उसे डर लगने लगा है। कम्युनिस्ट सरकार के एक सलाहकार का कहना है कि चीन को इस ग़लतफ़हमी को दूर कर लेना चाहिए कि जो बायडेन प्रशासन के अंतर्गत उसके अमेरिका के साथ रिश्ते अपने-आप सुधरने लगेंगे। उसने चेताया कि उनके अंतर्गत अमेरिका अब चीन के खिलाफ और ज्यादा सख्त रवैया अपना सकता है।

‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP)’ की खबर के अनुसार, शेनझेन स्थित थिंक टैंक ‘एडवांस इंस्टिट्यूट ऑफ ग्लोबल एंड कंटेम्पररी चाइना स्टडीज’ के डीन झेंग योंगनियाँ ने कहा कि चीन की सरकार को अमेरिका के साथ रिश्ते बेहतर करने के हर मौके का भरपूर इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि चीन को इस सोच से बचना चाहिए कि अमेरिका के साथ उसके रिश्ते वैसे ही हो जाएँगे, जैसे डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने से पहले थे।

गुआंगझोउ में ‘अंडरस्टैंडिंग चाइना कॉन्फ्रेंस’ के इतर एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा, “वो अच्छे और पुराने दिन अब चले गए हैं। अमेरिका में जो शीत युद्ध की स्थिति है, वो कई वर्षों में अभी सबसे ज्यादा सक्रिय स्थिति में है। ये सब कुछ एक रात में नहीं ख़त्म होगा।”

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने यूएस-चीन रिश्तों को लेकर लम्बी रणनीति बनाने के लिए झेंग योंगनियाँ को विचार-विमर्श हेतु बुलाया था। SCMP के अनुसार, 40 साल पहले एक-दूसरे के देश में दूतावास स्थापित होने के बाद दोनों के रिश्ते सबसे बुरी स्थिति में हैं।

व्यापार, मानवाधिकार और कोरोना वायरस सहित कई मुद्दों पर दोनों देशों में नहीं बन रही है। Pew के सर्वे में पाया गया था कि 70% अमेरिकी चीन को पसंद नहीं करते हैं। चीनी सरकार के सलाहकार का कहना है कि व्हाइट हाउस में घुसते ही जो बायडेन जनता की इन भावनाओं का फायदा उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के समाज के टुकड़े हो गए हैं और जो बायडेन अब कुछ नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा:

“वो सचमुच एक काफी कमजोर राष्ट्रपति होंगे। वो तो घरेलू मुद्दों तक को भी नहीं सुलझा सकते हैं। इसी कारण वो कुछ कूटनीतिक स्तर पर करना चाहेंगे और वो होगा चीन के खिलाफ कुछ कार्रवाई करना। अगर हम कहते हैं कि ट्रम्प लोकतंत्र और आज़ादी को बढ़ावा देने में रुचि नहीं रखते हैं, बायडेन हैं। ट्रम्प युद्ध की इच्छा नहीं रखते हैं। लेकिन, नया डेमोक्रेट अमेरिकी राष्ट्रपति युद्ध शुरू कर सकता है। अंतर सिर्फ इतना है कि ट्रम्प एक कारोबारी हैं, जो ऐसे निर्णय लेते हैं जिसकी उम्मीद किसी को न हो। बायडेन क्या करेंगे, इसका अनुमान लगाया जा सकता है। वो इलीट कूटनीतिज्ञ हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि जहाँ ट्रम्प चीन के प्रति बिना सोच-विचार किए ही सख्त हैं, बायडेन तर्कपूर्ण ढंग से सख्त रहेंगे। उन्होंने अमेरिका-चीन के बिगड़ते रिश्तों के लिए वहाँ के घरेलू मुद्दों को जिम्मेदार ठहराया। झेंग ने कहा कि अमेरिका ने जिस ‘नियो-लिबरल’ आर्थिक विकास मॉडल को अपनाया और बढ़ावा दिया, उसके कारण वहाँ संपत्ति का अंतर बढ़ता चला जा रहा है और उसने समाज को विभाजित कर दिया है।

उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के आंतरिक मामले चीन के साथ रिश्तों को खराब करने के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने हुवाई का उदाहरण दिया, जो चिप्स के लिए पहले अमेरिका पर निर्भर था लेकिन अब उसे नुकसान हो रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि चीन की कई कम्पनियाँ अमेरिका से ही कंपोनेंट्स लेकर वैश्विक बाजार में उससे तैयार उपकरण बेचती हैं। उन्होंने कहा कि चीन कई क्षेत्रीय व्यापारिक समझौतों के जरिए आगे रहने की कोशिश कर रहा है।

बता दें कि जो बायडेन ने तुर्की को लेकर भी कहा था कि वो एक ‘असली समस्या’ है और इसे लेकर वो उसे सख्त हिदायत जारी करते। जो बायडेन ने कहा था कि वो तुर्की को सबक सिखाते, भले ही इसके लिए उन्हें ‘सिचुएशन रूम’ में हजारों घंटे ही क्यों न व्यतीत करना पड़े या फिर सीरिया या ईराक में स्थिति सुधारने के लिए क्यों न कुछ भी करना पड़े। चुनाव प्रचार के समय ही उन्होंने साफ़ कर दिया था कि वो तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआँ (Erdogan) से बात कर उन्हें चेता देते कि उन्होंने जो कुछ भी किया है, इसके लिए उन्हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।