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‘विवाद से विश्वास’: मोदी सरकार की योजना से सुलझा टैक्स का झमेला, खजाने में आए ₹72,480 करोड़

केंद्र की मोदी सरकार ने प्रत्यक्ष कर विवाद समाधान योजना ‘विवाद से विश्वास’ के जरिए अब तक 72, 480 करोड़ रुपए जुटाए हैं। इस योजना के अंतर्गत 17 नवंबर 2020 तक 31,734 करोड़ की विवादित टैक्स डिमांड से संबंधित 45,855 घोषणाएँ हुई हैं।

बुधवार (नवंबर 18, 2020) को हुई मीटिंग में वित्त विभाग ने जानकारी दी कि इस योजना के तहत अब तक कुल 1,00,195 करोड़ रुपए की विवादित रकम से जुड़े मामलों को सुलझाया गया है, जिनकी 72,480 करोड़ रुपए की समझौता टैक्स राशि 17 नवंबर तक जमा कराई जा चुकी थी।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस संबंध में बताया,

“मोदी सरकार की विवाद से विश्वास योजना विवादित कर, विवादित ब्याज, विवादित पेनाल्टी या फीस का निपटान करती है। यह बहुत बड़ी सफलता है, क्योंकि इसके जरिए अभी तक विवादित माँग के ख़िलाफ़ 72,480 करोड़ रुपए का टैक्स सीपीएसयू और करदाताओं द्वारा भुगतान किया जा चुका है।”

बता दें कि इस योजना के तहत करदाताओं को विवादित कर, विवादित ब्याज और विवादित जुर्माने या शुल्क का निपटान करने के लिए 100 प्रतिशत विवादित कर और 25 प्रतिशत विवादित जुर्माना, ब्याज या शुल्क अदा करना पड़ता है। 

प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास कानून को 17 मार्च 2020 को लागू किया गया था। इसका उद्देश्य अपीलीय मंचों से बकाया प्रत्यक्ष कर विवादों का निपटान करना है। सरकार ने हाल ही में टैक्स से जुड़े विवाद सुलझाने के लिए शुरू की गई ‘विवाद से विश्वास’ स्कीम की आखिरी तारीख  को तीसरी बार बढ़ाकर 31 मार्च, 2021 कर दिया था। हालाँकि इसके बारे में घोषणा दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2020 है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले आयकर विभाग की एक उच्च स्तरीय मीटिंग में करदाताओं को स्कीम के बारे में सूचित करने के लिए ई-कैंपेन लॉन्च करने का निर्णय लिया गया था। इस योजना में उन्हें बताया जाना था कि करदाताओं को विवादित कर, विवादित ब्याज और विवादित जुर्माने या शुल्क का निपटान करने के लिए 100 फीसदी विवादित कर और 25 फीसदी विवादित जुर्माने, ब्याज या शुल्क अदा करना पड़ता है।

लव जिहाद पर एक्शन में योगी सरकार, UP में सख्त कानून बनाने का प्रस्ताव गृह विभाग ने भेजा

उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के मामलों से निपटने के लिए जल्द ही सख्त कानून आ सकता है। वैसे भी इस तरह के मामलों को लेकर प्रदेश की योगी सरकार का रूख हमेश से कड़ा रहा है। अब सख्त कानून बनाने के लिए उप्र के गृह विभाग ने न्याय व विधि विभाग को प्रस्ताव भेजा है। विधि विभाग प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है।

इससे पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर सहमति जताई थी, जिसमें कहा गया था कि महज शादी करने के लिए किया गया धर्म परिवर्तन अवैध होगा। न्यायालय के आदेश पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा था कि सरकार भी ‘लव जिहाद’ के मामलों पर रोक लगाने के लिए क़ानून लेकर आएगी और और फिर ऐसी हरकत करने वालों का ‘राम नाम सत्य’ ही होगा। साथ ही योगी ने ऐसे लोगों को चेतावनी भी दी जो पहचान छिपाकर महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास करते हैं।

यूपी में लव जिहाद के नए कानून को लेकर जो बातें अब तक सामने आई है, उसके अनुसार 7 साल तक की सजा का प्रावधान होगा। यदि दो अलग-अलग धर्म के लोग शादी करते हैं तो इस बात की जाँच की जाएगी कि यह धोखे से तो नहीं हुआ है।

उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश सरकार भी जल्द ही लव जिहाद पर कानून बनाने जा रही है। सरकार आगामी विधानसभा सत्र में धर्मांतरण और लव जिहाद के बढ़ते मामलों को रोकने के मकसद से मध्यप्रदेश धर्म स्वातंत्र्य कानून 2020 लाने की तैयारी में है। इस नए अधिनियम में जोर जबरदस्ती से धर्मांतरण कराने पर पाँच साल तक की सजा का प्रावधान होगा। वहीं लव जिहाद में किसी भी प्रकार से सहायता करने वालों को भी मुख्य आरोपित की ही तरह सज़ा दी जाएगी और शादी के लिए धर्मांतरण कराने वालों को भी सजा देने का प्रावधान इस कानून में रहेगा।

लव जिहाद के नए कानून के तहत अगर कोई स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन कर शादी करना चाहता हो, तो इसके लिए उसे एक महीने पहले कोर्ट में अर्जी लगानी पड़ेगी। वहीं, बिना आवेदन के अगर धर्मांतरण किया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा जोर-जबरदस्ती, बलपूर्वक या धोखे से शादी करने पर धोखे से पहचान छिपाकर की गई शादी को इस कानून के बाद अवैध माना जाएगा।

लंदन की मस्जिद में ‘इस्लामोफोबिया’ के नाम पर चाकू मारने वाला भी निकला मुस्लिम: कुरान पढ़ने के लिए जाना चाहता है जेल

हफिंगटन पोस्ट में फरवरी में प्रकाशित ख़बर में देखा जा सकता है कि मीडिया और मस्जिद के मुखियाओं ने एक घटना को ‘इस्लामोफोबिया’ के नाम पर जघन्य अपराध बताने का प्रयास किया था। जबकि इस घटना की पूरी सच्चाई हैरान करने वाली थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ परिवर्तित व्यक्ति (मुस्लिम) जिसने लंदन स्थित मस्जिद में भीड़ के सामने इस्लामी ‘प्रेयर लीडर’ (इमाम) के गले में चाक़ू मारा था। वह खुद भी मुस्लिम ही निकला, यहाँ तक कि उसने खुद को जेल भेजे जाने का निवेदन किया है जिससे वह पूरी कुरान शुरू से लेकर अंत तक पढ़ सके। 

30 वर्षीय डेनियल होर्टन (Daniel Horton) ने यह बात स्वीकार की थी कि उसने 70 वर्षीय इमाम राफ़त मगलड (Raafat Maglad) पर चाकू से हमला किया था। यह घटना रीजेंट पार्क स्थित लंदन सेन्ट्रल मस्जिद में अंजाम दी गई थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि हमले की इस घटना के बाद राफ़त मगलड अपने दाहिने हाथ से खाना तक नहीं खा पाते हैं। इसके अलावा उस स्थान पर सार्वजनिक धार्मिक समारोहों में शामिल होने से भी डरते हैं कि उन पर किसी तरह का हमला न हो जाए। घटना के ठीक कुछ समय पहले की फुटेज में देखा जा सकता है कि लाल रंग की हुड में एक व्यक्ति घुटनों के सहारे झुक कर अजीब तरह से प्रार्थना कर रहा है।

20 फरवरी को अंजाम दी गई इस घटना के बाद पुलिस को मस्जिद की मैट पर खून के निशान और चाक़ू (जो होर्टन के पास हमले के वक्त थी) मिला था। इसके अलावा अदालत में सुनवाई के दौरान होर्टन के वकील ने इस मामले में कई दलीलें पेश की। वकील सैम ब्लोम कूपर ने अदालत में होर्टन का पक्ष रखते हुए कहा, “अब तक मेरी होर्टन से जितनी बार भी बात हुई है उसके आधार पर मैं कह सकता हूँ कि वह इस बात को लेकर स्पष्ट है कि उसे जेल की सज़ा सुनाई जाए। होर्टन चाहता है कि उसने जो अपराध किया है उसे उस बात की पूरी सज़ा मिले।” 

इसके बाद वकील ने कहा कि होर्टन कुरान को पूरे दिल से पढ़ना चाहता है। वह कुरान को समझने के लिए उसे शुरू से लेकर अंत तक पढ़ना चाहता है। इस दलील और होर्टन की मनोवैज्ञानिक स्थिति को मद्देनज़र रखते हुए अदालत ने इस मामले की सुनवाई 10 दिसंबर तक टाल दी है। इस प्रकरण में न्यायालय अगली सुनवाई तक दंड का आदेश सुना सकता है। मुस्लिम वेलफेयर चैरिटी ‘अल खोएइ’ (Al khoei) के निदेशक शौकत वर्राइच (Shaukat Warraich) ने इस मुद्दे पर चिंता जाहिर की थी। 

उन्होंने कहा था कि ऐसी घटनाओं की वजह से मस्जिदों में आने वाले आम नागरिकों में भय का माहौल पैदा हुआ है। लोग अपने परिवार के साथ ऐसी जगहों पर आते हैं लेकिन इस तरह की घटनाओं के बाद वह घर में ही बने रहना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि मार्च के दौरान न्यूज़ीलैंड स्थित क्राइस्टचर्च में हुई गोलीबारी जिसमें 51 लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। इस घटना की वजह से भी मुस्लिम समुदाय के लोगों में भय व्याप्त है और उनके लिए समझना मुश्किल है कि क्या किया जाए।      

राहुल गाँधी पर ऊँगली उठाकर बुरे फँसे झारखण्ड के वरिष्ठ नेता फुरकान अंसारी: कॉन्ग्रेस ने जारी किया शो कॉज नोटिस

बिहार चुनाव में महागठबंधन की हार के बाद कॉन्ग्रेस की आलोचना हो रही है। पार्टी नेतृत्व को लेकर कॉन्ग्रेस के भीतर चल रही आंतरिक दरार के बीच, झारखंड कॉन्ग्रेस ने गुरुवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता फुरकान अंसारी को राहुल गाँधी और पार्टी के राज्य प्रभारी आरपीएन सिंह की आलोचना करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूर्व सांसद और झारखंड के एक प्रमुख मुस्लिम नेता अंसारी ने राहुल गाँधी से विधानसभा चुनाव के दौरान बिहार में चुनाव प्रचार के तरीके के बारे में सवाल किया था। पूर्व सांसद ने कहा था कि राहुल गाँधी के इर्द-गिर्द सभी एमबीए डिग्री धारी हैं। एमबीए योग्यता वाले मैनेजमेंट अच्छा कर सकते हैं, न कि राजनीतिक सलाह दे सकते है। उन्होंने कहा राहुल गाँधी को राजनीतिक सलाहकार रखने की जरूरत है।

बिहार के कहलगाँव में राहुल गाँधी द्वारा एक चुनावी रैली का उल्लेख करते हुए, अंसारी ने कहा था कि पूर्व पार्टी प्रमुख लोगों को प्रभावित करने में विफल रहे क्योंकि वे समझ नहीं पाए कि उन्हें क्या बोलना था।

“इसका परिणाम यह है कि वे उसे सही सलाह देने में सक्षम नहीं हैं और न ही चुनावी रैलियों के भाषणों के लिए महत्वपूर्ण बात रखने का सुझाव देते हैं। कॉन्ग्रेस को मजबूत करने के लिए, राहुल गाँधी के लिए राजनीतिक सलाहकार रखना जरूरी है।

अंसारी ने यह भी कहा कि वह कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी को पत्र लिखेंगे और पार्टी संगठन में बड़े बदलाव की माँग करेंगे।

उन्होंने आगे कहा, “मैं 1980 से कॉन्ग्रेस में रहा हूँ जब इन्दिरा गाँधी भारत की प्रधानमंत्री थी। मुझे यह साबित करने के लिए कोई प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है कि मैं कॉन्ग्रेसी हूँ। लेकिन आज पार्टी की इस हालत को देखकर मुझे दुख होता है।”

झारखंड में स्थानीय नेतृत्व और पार्टी प्रभारी आरपीएन सिंह पर हमला करते हुए फुरकान अंसारी ने कहा, “अगर यह मेरे ऊपर होता तो मैं आरपीएन सिंह को ब्लॉक अध्यक्ष भी नहीं नियुक्त करता।” बता दें अंसारी के बेटे इरफान जामताड़ा से मौजूदा विधायक हैं।

अंसारी के इस विरोध और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को लेकर दिए गए बयान की वजह से कॉन्ग्रेस नेताओं ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की थी। वहीं कई नेताओं के अनुरोधों पर कार्रवाई करते हुए कॉन्ग्रेस पार्टी के झारखंड कार्यकारी अध्यक्ष कमलेश महतो ने राज्य इकाई के प्रमुख रामेश्वर उरांव की ओर से अंसारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिस पर अंसारी को सात दिनों के भीतर अपनी टिप्पणी देने को कहा गया है।

गौरतलब है कि फुरकान अंसारी द्वारा दिया गया बयान ऐसे समय में आया जब बिहार कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा ने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से नुकसान की जिम्मेदारी लेने की पेशकश की थी। झा ने कहा कि वह अभी संपन्न विधानसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद को त्याग देंगे।

अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी (एआईसीसी) बिहार शक्तिसिंह गोहिल के साथ गुजरात प्रभारी राजीव सातव ने भी पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अपने पद से हटने की पेशकश की है।

उल्लेखनीय है कि अंसारी के अलावा कॉन्ग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने बिहार चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर निराशा व्यक्त की थी और पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे।

कपिल सिब्बल, पी चिदंबरम सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने बिहार विधान सभा चुनावों में पार्टी के दृष्टिकोण की आलोचना की थी। राज्य में हो रहे विधानसभा चुनावों में हार के बाद से कॉन्ग्रेस के अधिक वफादार अब बागियों को बदल रहे हैं।

मशीन से होगी सीवर की सफाई, नहीं जाएगी सफाईकर्मियों की जान: मोदी सरकार ने लॉन्च किया ‘सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज’

केंद्र सरकार ने सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई करने वालों के लिए ऐतिहासिक ऐलान किया है। इस ऐलान के मुताबिक़ मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट (Manual Scavenging Act) में संशोधन किया जाएगा जिससे सीवर्स और सेप्टिक टैंक की मशीनों के माध्यम से (mechanised) सफाई संभव हो

इस ऐलान के साथ एक और अहम बात यह है कि मैनहोल (manhole) शब्द को मशीन होल (machine hole) से स्थानांतरित किया जाएगा। इस पहल को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए 24×7 हेल्पलाइन भी शुरू की जाएगी। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ केंद्र की मोदी सरकार का लक्ष्य है कि अगस्त 2021 तक इंसानों द्वारा की जाने वाली सीवर की सफाई (मैनुअल स्कैवेंजिंग) ख़त्म कर दी जाए। गुरुवार (19 नवंबर 2020) को इस पहल की घोषणा करते हुए एक ‘चैलेंज’ के बारे में जानकारी भी दी। यह चैलेंज मूलतः देश के सभी राज्यों के लिए है, जिसके तहत अप्रैल 2021 तक 243 शहरों को सीवर सफाई प्रक्रिया पूर्णतः मशीन संचालित करनी होगी।

अगर किसी इंसान को बड़ी समस्या पैदा होने की सूरत में सीवर के भीतर दाखिल होना पड़ता है तो उसे सही गियर (उपकरण) और ऑक्सीजन सिलेंडर अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा। इस चैलेंज का नाम है ‘सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज’। 

इस चैलेंज के अंतर्गत तमाम श्रेणियों में कुल 52 करोड़ रुपए के पुरस्कार भी दिए जाएँगे। आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (Ministry of housing & urban affairs) सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने इस संबंध में कई अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस चैलेंज में हिस्सा लेने वाले शहरों का ज़मीनी विश्लेषण स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा मई 2021 में कराया जाएगा। इसका परिणाम 15 अगस्त 2021 तक सार्वजनिक किया जाएगा।” 

आधिकारिक आँकड़ों की मानें तो मैनुअल स्कैवेंजिंग की वजह से पिछले 5 सालों में कुल 376 मौतें हुई हैं जिसमें सिर्फ 2019 के दौरान 110 मौतें हुई हैं। इसके बाद मंत्रालय के सचिव ने यह भी कहा कि हमने निर्देश जारी किया है कि अब से मैनहोल शब्द का इस्तेमाल बंद कर दिया जाए और इसके स्थान पर मशीन होल शब्द का इस्तेमाल किया जाए। इसके अलावा दिशा निर्देशों का पालन नहीं करने वालों और निर्धारित आदेशों की अनदेखी करने वालों की शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्पलाइन भी बनाई जा रही है। 

उल्लेखनीय है कि मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट 2013 के अनुसार किसी भी व्यक्ति से सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई करवाना दंडनीय कृत्य है। इसके लिए जुर्माना और कारावास तक का प्रावधान है। इस क़ानून में किए जा रहे संशोधन के अनुसार सीवर की सफाई करने वालों की पहचान की गई जाएगी और उनको बेहतर सुविधाएँ दी जाएँगी। अभी तक मशीन से की जाने वाली सफाई को वैकल्पिक प्रक्रिया के रूप में देखा जाता था लेकिन अब से मशीन द्वारा की जाने वाली सफाई को आगामी कुछ समय के भीतर अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। 

इस मशीन से होने वाली सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के मामले में हैदराबाद नगरपालिका समेत देश के कई शहरों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। सामाजिक न्याय मंत्रालय द्वारा किए गए विश्लेषण के मुताबिक़ मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट और प्रिवेंशन ऑफ़ एट्रोसिटिज़ एक्ट 1989 की मौजूदगी के बावजूद ऐसे मामलों में कार्रवाई लगभग नहीं के बराबर होती है। इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लगाए गए जुर्माने का भुगतान भी नहीं किया जाता है।                  

फ्रांस सहित भारत के खिलाफ जहर उगलने वाला मौलाना खादिम हुसैन रिज़वी हमेशा के लिए खामोश: लाहौर में हुआ निधन

इस्लामिक मज़हबी उपदेशक तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के प्रमुख अल्लामा खादिम हुसैन रिज़वी का गुरुवार रात लाहौर में निधन हो गया। बता दें हाल ही में उसने फ्रांस को परमाणु हमले की धमकी दी थी।

रिपोर्ट के अनुसार, 54 वर्षीय पाकिस्तान के विवादित मज़हबी नेता कई दिनों से बुखार से पीड़ित था, जिसके बाद पूर्वी शहर लाहौर के अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। पार्टी के प्रवक्ता हमजा के अनुसार, टीएलपी प्रमुख को सांस लेने में कठिनाई महसूस हो रही थी और सोमवार से बुखार भी था।

पाकिस्तान में ईशनिंदा के नाम पर अपराध करने वालों के पक्ष में खड़े होकर कई बार विवादों को जन्म दे चुका है। टीएलपी ने रिजवी के नेतृत्व में विभिन्न विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। जिसमें 2018 में टीएलपी ने पाकिस्तान में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक ईसाई महिला, आशिया बीबी को ईशनिंदा के आरोपों से बरी करने के बाद हुआ हिंसक विरोध प्रदर्शन भी शामिल है। उसने भारत को भी कई मौकों पर धमकी दी थी।

बता दें रिज़वी पाकिस्तान में बेहद ही लोकप्रिय नेता थे, खासकर पाकिस्तान के सबसे अधिक आबादी वाले प्रांत पंजाब में। खादिम रिज़वी 19 वीं शताब्दी के इस्लामिक धर्मशास्त्री इमाम अहमद रज़ा खान बरेलवी, बरेलवी संप्रदाय के संस्थापक थे। फ्रेंच व्यंग्य पत्रिका चार्ली हेब्दो द्वारा पैगंबर मोहम्मद के कार्टून के प्रकाशन को लेकर रिजवी में फ्रांस में काफी हिंसक विरोध प्रदर्शन किया था।

इतना ही नहीं इस्लामिक धर्मगुरु ने फ्रांसीसी उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से इस्लामाबाद से फ्रांसीसी राजदूत को वापस भेजने की माँग की थी। साथ ही फ्रांस के खिलाफ परमाणु हमले करने की धमकी भी दी थी।

एक यूजर ने सोशल मीडिया पर लिखा पंजाबी मुल्ला खादिम रिज़वी, पाकिस्तानी पंजाबी सेना के सशस्त्र बलों को फ्रांस पर ‘परमाणु बम’ छोड़ने के लिए कहता है। फ्रांस को फ्रांस और यूरोपीय संघ में रहने वाले पाकिस्तानी लोगों पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए।

सिर्फ फ्रांस ही नहीं 2018 में पैगंबर मोहम्मद के अपमान को लेकर नीदरलैंड को भी परमाणु बम से उड़ाने की धमकी दी थी। नीदरलैंड को चेतावनी देते हुए रिज़वी ने कहा था कि अगर उसने पैगंबर मोहम्मद को चित्रित करने वाले कार्टून की एक प्रतियोगिता की अनुमति दी तो वह ‘परमाणु बम’ “इस धरती के चेहरे से हॉलैंड को मिटा देगा। तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान के संस्थापक ने कहा था, “अगर वे मुझे परमाणु बम देते हैं तो मैं हॉलैंड को धरती से हटा दूँगा।”

रिज़वी, जिनका जन्म 22 जून, 1966 को पंजाब के अटॉक जिले में हुआ था, ने अपनी इस्लामिक शिक्षा हिफ़्ज़ और झेलम मदरसे से प्राप्त की। इसके बाद उसने आगे की धार्मिक शिक्षा लाहौर में जामिया निज़ामिया रिज़विया संस्थान दरस-ए-निज़ामी से प्राप्त किया।

उसने पाकिस्तान के सख्त ईश निंदा कानूनों का विरोध करने वालों के खिलाफ विरोध के लिए 1 अगस्त 2015 को कट्टर इस्लामिक संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान की स्थापना की।

जी-20 शिखर सम्‍मेलन से पहले सऊदी अरब ने वापस लिया विवादित नोट: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को बताया था अलग देश

21 नवंबर को जी-20 देशों का शिखर सम्‍मेलन शुरू हो रहा है। कोरोना काल में शुरू हो रहे इस शिखर सम्‍मेलन में पहली बार दुनिया के 20 देश एक वर्चुअल मंच पर शिरकत करने जा रहे हैं। वहीं हाल ही में रियाद के नोट पर भारत का गलत नक्शा छापने के चलते उठे विवाद की वजह से सऊदी अरब ने सम्मेलन से पहले गलत मैप वाले नोट को वापस ले लिया है। बता दें सऊदी अरब ने 20 रियाल बैंक में अविभाजित जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग दिखाया गया था।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय राजदूत औसाफ सईद ने 28 अक्टूबर को सऊदी अरब के सामने रियाद में गलत मैप को लेकर आपत्ति जताई थी। साथ ही नोट में बदलाव करने के लिए भी कहा था। जिसके बाद न केवल नोट को वापस लिया गया, बल्कि उसकी छपाई बंद करवा दी गई।

गौरतलब है कि पूरा विवाद नोट के सार्वजनिक होने के बाद शुरू हुआ। इसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके), गिलगित-बाल्टिस्तान समेत पूरे जम्मू-कश्मीर को अलग देश के रूप में दिखाया गया था, जोकि भारत के लिए बर्दाश्त से बाहर था। इस विवादित बैंक नोट में एक तरफ किंग सलमान और जी-20 सऊदी समिट का लोगो था, तो दूसरी तरफ जी-20 देशों का वैश्विक मैप था।

विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने गुरुवार को कहा था, “हमने सऊदी अधिकारियों के साथ भारतीय सीमाओं के गलत चित्रण का मामला उठाया था। रियाद के साथ ही नई दिल्ली में भी सऊदी के अधिकारियों से बात हुई। हमें सऊदी अधिकारियों द्वारा सूचित किया गया है कि उन्होंने इस मामले में हमारी चिंताओं को नोट किया है।”

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते विवाद को शांत करने के लिए सऊदी अरब ने मामले को संभालते हुए दोनों देशों के बीच के रिश्ते में खटास नहीं आने दी। साथ ही जो मुद्रा स्मारिका के तौर पर जारी की गई थी, संचलन के लिए नहीं थी, उसे वापस ले लिया गया।

उल्लेखनीय है कि सऊदी अरब पहली बार इस सम्‍मेलन की मेजबानी कर रहा है। 15वें जी-20 शिखर सम्‍मेलन के जरिए सऊदी अरब की निगाह विश्‍व की दूसरी उभरती आर्थिक शक्तियों के साथ अपने संबंधों को सुधारने पर होगी।

CBI ने दर्ज की शिया वक्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन पर वसीम रिज़वी पर FIR: संपत्ति की खरीद-बिक्री में धोखाधड़ी का आरोप

सीबीआई ने उत्तर प्रदेश शिया वक्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिज़वी के विरुद्ध दो एफ़आईआर दर्ज की है। दोनों एफ़आईआर वक्फ़ बोर्ड की संपत्ति को प्रयागराज और कानपुर में ग़ैरकानूनी रूप से बेचने, खरीदने और स्थानांतरित करने के संबंध में दर्ज की गई हैं। इन संपत्तियों की बिक्री, खरीद और स्थानांतरण को लेकर धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। फ़िलहाल सीबीआई ने इस मामले में जाँच भी शुरू कर दी है। 

दरअसल, साल 2016 के अगस्त महीने के दौरान प्रयागराज में वक्फ़ बोर्ड की संपत्ति की बिक्री को लेकर एफ़आईआर दर्ज की गई थी। यह मामला इमामबाड़ा गुलाम हैदर में ग़ैरकानूनी दुकानों के निर्माण और अतिक्रमण को लेकर था। इसके अलावा साल 2017 के मार्च महीने के दौरान लखनऊ में कानपुर स्थित वक्फ़ बोर्ड की संपत्ति के स्थानांतरण को लेकर एफ़आईआर दर्ज की गई थी। 

यह मामला कानपुर स्थित स्वरूप नगर की ज़मीन पर कब्ज़ा करने को लेकर था। सीबीआई ने प्रयागराज और लखनऊ में दर्ज मामलों में आधार बनाते हुए उत्तर प्रदेश शिया वक्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन के विरुद्ध एफ़आईआर दर्ज की है। इसमें स्पष्ट तौर पर आरोप लगाया गया है कि वसीम रिज़वी ने चेयरमैन रहते हुए वक्फ़ बोर्ड की संपत्तियों की खरीद और बिक्री में धोखाधड़ी की है। 

लखनऊ में दर्ज किए गए मामले में वक्फ़ बोर्ड के दो अधिकारियों समेत 5 अन्य को नामजद किया गया है। शिया वक्फ़ बोर्ड की संपत्तियों में अनियमितता की बात सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इन मामलों में जाँच के आदेश जारी किए थे। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित सीबीआई की भ्रष्टाचार रोधी शाखा ने भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420 और 506 के तहत एफ़आईआर दर्ज की है। वसीम रिज़वी के अलावा वक्फ़ बोर्ड प्रशासनिक अधिकारी गुलाम सैयदन रिज़वी, वक्फ़ बोर्ड के इंस्पेक्टर वाकर रज़ा, नरेश कृष्ण सोमानी और विजय कृष्ण सोमानी को भी नामजद किया गया है। 

इसके पहले वसीम रिज़वी समेत दो अन्य पर उत्तर प्रदेश के ही बिजनौर स्थित जोगीपुरा श्राइन के केयरटेकर को धमकाने और उससे जबरन वसूली करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। एडिशनल न्यायिक मजिस्ट्रेट की तरफ से आदेश जारी होने के बाद इस संबंध में एफ़आईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में शिकायतकर्ता सैयद कैसर बाकरी का कहना था कि 2018 में शिया वक्फ़ बोर्ड का चेयरमैन रहते हुए वसीम रिज़वी ने उन्हें श्राइन का एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया था। 

नियुक्ति के बाद वसीम रिज़वी और उनके सहयोगी रुपए की माँग करने लगे। बाकरी ने आरोप लगाया कि श्राइन में हर साल लाखों करोड़ों रुपए का आर्थिक सहयोग दिया जाता है लेकिन इसमें से एक बड़ी धनराशि वसीम रिज़वी के खाते में जाती थी। बाकरी का यहाँ तक कहना था कि साल 2019 के जून महीने में वसीम रिज़वी ने धमकी दी कि उन्हें 10 लाख रुपए नहीं मिले तो उन्हें उठवा लिया जाएगा।    

‘जय श्री राम बोलना है तो गुजरात चले जाओ, पश्चिम बंगाल में यह सब नहीं चलेगा’: TMC नेता का वीडियो वायरल

बीजेपी बंगाल ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में तृणमूल कॉन्ग्रेस के एक नेता (जैसा कि बीजेपी बंगाल द्वारा दावा किया गया है) को लोगों को धमकाते हुए सुना जा सकता है। कथिततौर पर टीएमसी नेता लोगों से कहते है कि अगर वह बंगाल में रहना चाहते है तो वे ‘जय श्री राम’ के नारे नहीं लगा सकते हैं।

वीडियो में देखा जा सकता है कि टीएमसी नेता स्पष्ट रूप से लोगों को किसी तरह की सभा में संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कहा कि टीएमसी शासित राज्य में ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही यह भी कहा कि अगर जिसको भी ‘जय श्री राम’ का जाप करना है तो वह गुजरात जा सकता है।

वीडियो में बंगाली में एक उग्र भाषण में नेता ने कहा कि राज्य में जय श्री राम बोलने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा, “इन सब चीजों को यहाँ अनुमति नहीं दी जाएगी। जो लोग इसका जाप करना चाहते हैं वे मोदी के राज्य गुजरात में जाकर ये कर सकते हैं।” हालाँकि, यह वीडियो कब का है इस बारे में कुछ नहीं गया है।

गौरतलब है कि जय श्री राम के लिए तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी की नफरत कोई आज की बात नहीं है। पिछले साल खुद सीएम ममता बनर्जी ने ‘जय श्री राम’ के नारे को लेकर खुले तौर पर अपनी नापसंदगी व्यक्त की थी। पिछले साल 2019 मई में ममता बनर्जी ने उस समय अपना संयम खो दिया था, जब कुछ लोग सड़क पर जय श्री राम के नारे लगा रहे थे। नारा सुनकर वह अपनी गाड़ी से नीचे उतरी और लोगों से भिड़ गई।

घटना के बाद सीएम ने आरोप लगाया था कि नारे लगा रहे लोग अपराधी थे, और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद पश्चिम बंगाल सीएम के सामने सिर्फ नारा लगाने के लिए लगभग एक दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

उल्लेखनीय है कि टीएमसी प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक विचारधाराओं के प्रति असहिष्णु होने के लिए कुख्यात है। वहीं बीते दिन (19 नवंबर, 2020) पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में मोहनपुर ग्राम पंचायत के बबनपुर क्षेत्र में स्थित भाजपा के एक कार्यालय को कथित रूप से टीएमसी कार्यकर्ताओं ने आग लगा दी। भाजपा कार्यकर्ताओं ने कार्यालय को जलाने के लिए टीएमसी को जिम्मेदार ठहराया और इसे उनके ‘सस्ते हथकंडे करार दिया।

तुफानगंज इलाके में कल ही एक भाजपा कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। मृतक बीजेपी नेता के परिवार वालों ने टीएमसी के गुंडों पर हत्या का आरोप लगाया था। परिवार ने पुलिस को दी शिकायत में पाँच टीएमसी कार्यकर्ताओं का नाम लिया था। परिवार वालों का आरोप है कि पाँचों टीएमसी कार्यकर्ताओं ने बेरहमी से बीजेपी नेता की पिटाई की, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आई। जब इलाज के लिए उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

बता दें पश्चिम बंगाल में 2021 चुनावों से पहले राजनीतिक हिंसा की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ता अक्सर निशाना बनते रहे हैं और उनके साथ मारपीट, अपहरण व हत्या की कई खबरें आए दिन सामने आ रही हैं।

यूट्यूबर राशिद ने सुशांत की मौत पर फ़ेक दावे कर कमाए 15 लाख: अक्षय कुमार ने किया 500 करोड़ का मुकदमा, जानिए क्या है मामला

बिहार मूल के यूट्यूबर राशिद सिद्दीकी ने पिछले 4 महीनों में सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के मामले में फ़ेक न्यूज़ का फैलाकर कथित तौर पर 15 लाख रुपए कमाए हैं। वहीं बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने अपने बारे में झूठे दावों के कारण उस पर 500 करोड़ रुपए का मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 25 वर्षीय राशिद सिद्दीकी सिविल इंजिनियर है और उसका अपना यूट्यूब चैनल है जिस पर लगभग 3 लाख 70 हज़ार सब्सक्राइबर्स हैं। 

राशिद के यूट्यूब चैनल पर इस तरह के तमाम कंटेंट मौजूद हैं जो संदेह के दायरे में आते हैं। जिसमें उसने एक दावा यह भी किया है कि अक्षय कुमार ने सुशांत सिंह राजपूत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती की कनाडा भागने में मदद की। राशिद अक्सर अन्य यूट्यूब क्रिएटर्स से भी संवाद करता है लेकिन सबसे ज़्यादा हैरानी की बात है कि उसने सुशांत सिंह की मृत्यु को लेकर अप्रत्याशित और विचित्र दावे किए हैं। 

मिड डे में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ सुशांत सिंह की मौत ने देश के तमाम यूट्यूब चैनल वालों को फर्ज़ी थ्योरी बना कर इस मुद्दे के सहारे रुपए कमाने का मौक़ा दिया है। अक्षय कुमार के लिए उसने दावा किया था कि महेंद्र सिंह धोनी की बायोपिक में सुशांत सिंह की अहम भूमिका होने के चलते अक्षय कुमार नाराज़ थे। इसके बाद फ़ेक न्यूज़ फैलाते हुए राशिद ने यह भी दावा किया कि सुशांत सिंह की मृत्यु के मामले में अक्षय कुमार मुंबई पुलिस और आदित्य ठाकरे के साथ खुफ़िया बैठक करते थे। अंत में अक्षय कुमार ने रिया चक्रवर्ती की कनाडा भागने में मदद भी की। 

अक्षय कुमार के अलावा शिवसेना लीगल सेल के अधिवक्ता धर्मेन्द्र मिश्रा ने भी राशिद सिद्दीकी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया है। मानहानि, सार्वजनिक रूप से षड्यंत्र और इरादतन अपमान करने की धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया गया है। इसके बाद न्यायालय ने उसे अग्रिम जमानत दी थी और मामले की सुनवाई के दौरान सहयोग करने का आदेश दिया था। पुलिस के मुताबिक़ सुशांत सिंह राजपूत पर उसके द्वारा काफी बड़े पैमाने पर पोस्ट सामग्री देखी गई थी और सिर्फ सितंबर महीने के भीतर ही उसने 6.5 लाख रुपए कमाए थे।

इसके पहले दिल्ली के अधिवक्ता विभोर आनंद को सुशांत सिंह राजपूत मामले में वीडियो बनाने और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के लिए अपशब्द कहने पर गिरफ्तार किया गया था। बाद में उसने अपने ट्वीट के लिए रिपब्लिक भारत और अर्णब गोस्वामी पर आरोप लगाया था। जबकि पहले उसने दावा किया था कि सारी जानकारी उच्च स्तरीय सूत्रों के हवाले से मिली है लेकिन मामले की सुनवाई के दौरान उसने सारा आरोप रिपब्लिक टीवी और अर्णब गोस्वामी पर लगा दिया। 

सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु 

34 वर्षीय अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2019 को अपने आवास पर मृत पाए गए थे। शुरू में इस घटना को आत्महत्या बताया गया था जबकि बाद में हत्या का पहलू भी सामने आया था। सुशांत सिंह की मृत्यु के बाद बॉलीवुड में फैले ड्रग्स नेटवर्क और ड्रग्स के इस्तेमाल से जुड़ी तमाम बातें सामने आई। फ़िलहाल अभी सीबीआई सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु और ड्रग्स दोनों मामलों पर जाँच कर रही है।