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‘लव जिहाद’ पर सख्त कानून से क्यों बढ़ जाता है अशोक गहलोत जैसे नेताओं का राजनीतिक रक्तचाप?

देश में लव जिहाद के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कई राज्य सरकारों ने इस तरह के मामलों से निपटने के लिए सख्त क़ानून बनाने का ऐलान किया है। इनमें बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारें शामिल हैं। दूसरी तरफ अशोक गहलोत जैसे कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री भी हैं जो इसे समस्या मानने से इनकार कर रहे हैं।

राजस्थान के मुख्यमंत्री ने लव जिहाद के मुद्दे पर बयान देते हुए कहा है कि भाजपा ने यह शब्द साम्प्रदायिकता फैलाने के लिए गढ़ा है। विवाह निजी स्वतंत्रता का विषय है। उस पर अंकुश लगाने के लिए क़ानून बनाना असंवैधानिक है।   

सही बात है। विवाह देश के हर नागरिक का नितांत निजी मसला है। इसमें कोई सरकार क़ानून बनाकर दखल कैसे दे सकती है? लेकिन पहचान छुपा कर, प्रेम का ढोंग करना और भावनात्मक आधार पर दोनों पक्षों की सहमति होने के बाद अपना मज़हब थोपने का प्रयास करना, इसे न्यायसंगत कहा जा सकता है क्या? ऐसे मुद्दों की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि मूल समस्या एड्रेस होने से पहले अशोक गहलोत सरीखे नेता पूरा मुद्दा दिग्भ्रमित करने की कोशिश में लग जाते हैं हैं। दलील खुद में कितनी स्पष्ट है कि यहाँ क़ानून दो अलग धर्मों के विवाह को रोकने एक लिए नहीं, बल्कि अपनी असलियत छुपाकर प्रेम के पाखंड के ज़रिए विवाह करने वालों के लिए बनाया जा रहा है। 

न जाने किस सभ्य और लोकतांत्रिक समाज में इस तरह की प्रक्रियाओं को उचित माना जाता होगा। बयान राजस्थान के मुख्यमंत्री का है इसलिए कालांतर के कुछ मामले उठा कर देखे जाएँ तो वहाँ के हालात भी इस मुद्दे पर अत्यंत दयनीय हैं। राजस्थान के कई बड़े शहरों में लव जिहाद के मामले सामने आए हैं। लेकिन माननीय गहलोत सरकार के अनुसार यह शब्द एक राजनीतिक दल का सृजित शब्द है, जिसका एकमात्र उद्देश्य सांप्रदायिकता फैलाना है। जबकि राजस्थान में पिछले कुछ ही समय में लव जिहाद की तमाम भयावह घटनाएँ सामने आई हैं, जिन पर न तो कोई सुनवाई होती है और न ही कार्रवाई। फिर भी सूबे के मुख्यमंत्री इस शब्द की प्रासंगिकता को खारिज करते हैं।

इसी साल के अगस्त महीने में ही राजस्थान के जोधपुर में लव जिहाद की एक घटना हुई थी। इस घटना में शाहरुख नाम के युवक ने अपना नाम छुपा कर एक महिला से मित्रता की। उसने प्रेम का झाँसा देकर महिला के साथ संबंध बनाए और तीन साल तक उसका यौन शोषण करता रहा। जब महिला को यह बात पता चली कि उसका असल नाम शाहरुख है, तब उसने युवक से दूरी बनाना शुरू किया और इस बात पर युवक ने महिला की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने की धमकी दे डाली। 

एक और मामला सामने आया था राजस्थान के उदयपुर शहर से। जून 2020 के दौरान हुई इस घटना में हनीफ़ नाम का युवक वीर सिंह बन कर विवाहित महिला से मित्रता की। इसके बाद बहला-फुसलाकर उसे बाड़मेर ले गया और वहाँ उस महिला को बंधक बना कर उसका जबरन धर्मांतरण कराया। इसके अलावा आरोपित हनीफ़ ने विवाहित महिला की तीन साल की बेटी को जान से मारने की धमकी देकर दो महीने तक लगातार उसके साथ दुष्कर्म किया।

इस साल के जून महीने में ही लव जिहाद की एक और घटना राजस्थान के राजसमंद में हुई थी। इस घटना का प्रारूप भी कुछ अलग नहीं था। रियाज़ नाम के युवक ने पिंटू बन कर एक नाबालिग लड़की से बातचीत शुरू की। फिर रियाज़ ने लड़की को बहला-फुसलाकर अपने प्रेम जाल में फँसाया और उसके साथ बलात्कार किया। रियाज़ ने लड़की को धमकी तक दी कि इसके बारे में उसने कुछ भी कहा तो उसके वीडियो क्लिप्स वायरल कर देगा।

2019 के जून महीने में भी ऐसी ही एक घटना सामने आई थी। राजस्थान के सीकर का रहने वाला इमरान भाटी कबीर शर्मा बना, ब्राह्मण युवती से विवाह रचाया और दहेज में 11 लाख नगद और 5 लाख जेवर लेकर युवती के साथ फ़रार हो गया। जबकि इमरान नाम का यह युवक पहले से शादीशुदा था, इसके 3 बच्चे भी थे। उसने विवाह करने के लिए नकली रिश्तेदार तक बुलाए थे। हालाँकि घटना के कुछ ही समय बाद आरोपित इमरान को गिरफ्तार कर लिया गया था। 

यह ऐसे मामले थे जिनका ज़िक्र किया जा रहा है, इसके अलावा न जाने कितने मामले हैं जिनका उल्लेख नहीं किया जा रहा है और न जाने कितने ऐसे मामले होंगे जो दर्ज तक नहीं किए जाते हैं। बड़े विवादों के साथ समस्या का दायरा भी बड़ा होता है। फिर किसी मुख्यमंत्री के लिए यह किसी का निजी मसला कैसे हो सकता?

ऐसा भी नहीं है कि लव जिहाद कोई नए स्वभाव का षड्यंत्र है। यह पिछले काफी समय से हो रहा है। फिर भी सरकारें इस मुद्दे पर तुष्टिकरण की राजनीति के तहत मौन थीं। अब कुछ राज्य सरकारें इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाना चाहती हैं तो उसका विरोध भी इसी सियासी लाभ के लिए किया जा रहा।   

लिबरलों का लाडला बनने के एक कदम और करीब कुणाल कामरा, गालीबाज ‘कॉमेडियन’ पर केस चलाने की मंजूरी

गालीबाज ‘कॉमेडियन’ कुणाल कामरा द्वारा हाल में किए गए विवादित ट्वीट को लेकर अटॉर्नी जनरल ने अवमानना का मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने यह अनमुति इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील अनुज सिंह की शिकायत के आधार पर दी है। 

अनुमति देते हुए एजी वेणुगोपाल ने कहा कि कुणाल कामरा के ट्वीट में जान-बूझकर मुख्य न्यायाधीश (CJI) के अपमान का प्रयास किया गया। यह उस न्यायपालिका के अपमान के समान है, जिसका सीजेआई नेतृत्व करते हैं। कामरा के ट्वीट को अश्लील और बेहूदा बताते हुए अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट की अवमानना कानून 1975, की धारा 15 के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति दी है।

बता दें कि कुणाल कामरा ने अपने हालिया ट्वीट में एयरपोर्ट पर दो ऊँगलियाँ दिखाते हुए लिखा था, “इन दो ऊँगलियों में से एक सीजेआई अरविंद बोबडे है।” आगे उसने यह साफ बताते हुए कि बीच वाली ऊँगली सीजेआई के लिए है। उसने कहा, “ठीक है चलो मैं आपको कन्फ्यूज नहीं करता, वो बीच वाली ऊँगली है।” 18 नवंबर को इसी ट्वीट के सामने आने बाद वकील अनुज सिंह ने अटॉर्नी जनरल के पास शिकायत भेजी थी।

यहाँ याद दिला दें कि सोशल मीडिया पर आई कुणाल कामरा की टिप्पणियों पर एक बार पहले भी अटॉर्नी जनरल कामरा के खिलाफ़ अवमानना का केस चलाने की बात अनुमति दे चुके हैं।

कामरा के ख़िलाफ़ अपना फैसला सुनाते हुए एजी केके वेणुगोपाल ने कहा था,

“लोग समझते हैं कि कोर्ट और न्यायाधीशों के बारे में कुछ भी कह सकते हैं। वह इसे अभिव्यक्ति की आजादी समझते हैं। लेकिन संविधान में यह अभिव्यक्ति की आजादी भी अवमानना कानून के अंतर्गत आती है। मुझे लगता है कि ये समय है कि लोग इस बात को समझें कि अनावश्यक और बेशर्मी से सुप्रीम कोर्ट पर हमला करना उन्हें न्यायालय की अवमानना कानून, 1972 के तहत दंड दिला सकता है।”

कुणाल कामरा के ख़िलाफ़ केस चलाने के लिए अपनी मँजूरी देते हुए उन्होंने लिखा था कि उन्होंने कामरा के ट्वीट देखे हैं, जो बहुत आपत्तिजनक हैं। उन्होंने कुछ ट्विट्स का जिक्र करते हुए लिखा कि ये न केवल खराब हैं, बल्कि व्यंग्य की सीमा लाँघ रहे हैं और कोर्ट की अवमानना कर रहे हैं।

इसके बाद पिछले सप्‍ताह कुणाल कामरा ने सुप्रीम कोर्ट की आलोचना करने वाले अपने ट्वीट्स के लिए अवमानना के आरोपों का सामना करते हुए माफी माँगने से मना कर दिया था।

कामरा ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को संबोधित करते हुए अपना एक पत्र ट्वीट किया था, जिसमें उसने लिखा था,: “मैं अपने ट्वीट वापस लेने या उनके लिए माफी माँगने का इरादा नहीं रखता। मेरा मानना है कि वे खुद के लिए बोलते हैं।”

हिंदू कुरीति पर ज्ञान, मुस्लिमों का बहुविवाह ‘रिश्ते की खूबसूरती’: जानें, दैनिक भास्कर पाठकों को कैसे बनाता है बीमार

मीडिया का एक वर्ग लंबे समय से पाठकों और दर्शकों को शब्दों का खेल कर किस तरह से बरगला रहा है, वह छिपा नहीं है। दो समुदायों से संबंधित खबर को कवर करते हुए अधिकतर संस्थानों का यह दोहरा रवैया देखने को मिल जाता है। 

हालिया मामला खुद को देश का सबसे विश्वसनीय और नंबर 1 अखबार बताने वाले दैनिक भास्कर से जुड़ा है। दैनिक भास्कर में दो अलग-अलग दिनों पर प्रकाशित दो खबरों से आप समझ सकते हैं कि कैसे हिंदू धर्म की कुरीति पर बात करते हुए ज्ञानी हो जाने वाला अखबार, दूसरे मजहब की बात आते ही किसी कुरीति को भी ऐसे परोसते हैं, जैसे मामला हँसी-ठिठोली का हो।

19 नवंबर को दैनिक भास्कर में राजस्थान के कुछ हिस्सों में चलने वाली ‘कोना प्रथा’ की कुरीति पर छपती है। अखबार ने जायज सवाल उठाया है कि आखिर पति की मौत के 6 महीने बाद भी एक विधवा को क्यों कोने में सिमटकर रहना पड़ रहा है? क्यों प्रथा के नाम पर उसे उजाला होने से पहले घर के हर काम करवाए जाते हैं और बाद में उसे अंधेरे में ढकेल दिया जाता है।

दैनिक भास्कर की यह कवरेज सराहनीय है। उनका सवाल कि एक विधवा को कोने में डाले रखना प्रथा है या सजा, बिलकुल जायज है। उनका आरोप कि स्त्री के ऊपर इतना अत्याचार पुरूष प्रधान समाज के कारण हो रहा है, बिलकुल सटीक है।

साभार: दैनिक भास्कर

कोना प्रथा की कुरीति पर वार करने के अगले ही दिन 20 नवंबर को इसी अखबार में एक और खबर प्रकाशित होती है। इस खबर के अनुसार पाकिस्तान में 22 साल के शौहर के लिए 3 बीवियाँ मिलकर चौथी बेगम खोज रही हैं। गड़बड़ हेडलाइन में नहीं है। अखबार इस खबर को ‘रिश्ते की खूबसूरती’ मानता है। इस खबर को लिखने की शुरुआत से ही अखबार का दोहरा मापदंड झलकने लगता है और पता चलता है कि कैसे वे अपने पाठकों की सोच को बीमार करते हैं।

साभार: दैनिक भास्कर

इस खबर की शुरुआत में ही इस बात को लिख दिया गया है कि मुस्लिम समुदाय में एक से अधिक बार शादी को जायज माना जाता है। पुरुष एक साथ कई बीवियों को रख सकते हैं। यानी पाठक इस खबर को पढ़े तो वह युवक के चौथे निकाह को गलत नहीं समझे, बल्कि उसे अधिकार समझे और हो सकता है कि कभी हँसी-मजाक में दोस्तों के बीच इस युवक की किस्मत की तुलना अपनी किस्मत से कर दे या हो सकता है अपनी बीवियों से भी यही अपेक्षा रखना शुरू कर दे कि उसके लिए वह भी नई बीवी खोजें।

एक विशुद्ध पाठक आपकी खबर को कैसे ग्रहण करेगा, इसका दारोमदार आपके शब्दों पर ही होता है। जिस तरह कोना प्रथा एक कुरीति है, वैसे ही बहुविवाह भी। यह दूसरी बात है कि शरिया कानून इसे जायज मानता है। इसकी आड़ लेकर अख़बार हिंदुओं की कुरीति पर कवरेज करते हुए सवाल करता है कि आखिर क्यों पुरुष प्रधान समाज में महिला को अंधकार में धकेल दिया गया। यह बताता है कि अपनी औरतों पर अत्याचार करने वाले इन पुरुषों पर कोई पाबंदी नहीं होती ये जहाँ चाहे आ जा सकते हैं, जिससे चाहे शादी कर सकते हैं। लेकिन वही अख़बार मजहब का हवाला देकर 22 साल के शौहर की 3 शादियों को जायज ठहरा देता है।

पूरी खबर में एक बार भी इसका जिक्र नहीं किया गया है कि मुस्लिमों में बहुविवाह की रीत महिलाओं के लिए अभिशाप है, जो न केवल उनसे अधिकार छीन रही है बल्कि उनके सोचने समझने की क्षमता को भी शून्य कर रही है।  विचार करिए, तीन महिलाएँ अपने एक पति का ख्याल रखने के लिए यह बोल रही हैं कि वह तीनों बच्चों के कारण अपने पति का ध्यान नहीं रख पाती, इसलिए चौथी बेगम आएगी तो उनका ख्याल रखेगी।

क्या औचित्य होता है ऐसी खबरों का? समुदाय विशेष में बहुविवाह को प्रोत्साहन देना या मजहब विशेष के प्रति लोगों को आकर्षित करना? ऊपर से उसे ‘रिश्ते की खूबसूरती’ बताकर प्रचारित करना।

दैनिक भास्कर जैसे अखबारों को समझना चाहिए कि एक मुद्दे पर खबरों को अलग-अलग तरीके से पेश करना आपके पाठक की सोच को निर्मित नहीं करता, बल्कि आपके प्रति उसके उस विश्वास को मारता है कि आप उसे खबर के नाम जागरुक बनाएँगे, उसकी सोच को पहले से बेहतर और समझदार बनाएँगे। आपके ये हथकंडे उसे कुंद मानसिकता में जकड़ते जाते हैं, वह चाहते न चाहते हुए खुद को गर्त में पाता है और फिर आपके दिए तर्कों से वह कुरीतियों को भी जस्टिफाई करना सीख जाता है। 

अंत में हम ही हैरान होते हैं कि आखिर हिंदुओं के ख़िलाफ़ प्रोपेगेंडा फैलाने वाले इतनी बड़ी संख्या में हिंदू ही क्यों हैं? वास्तविकता में ऐसे लोग दैनिक भास्कर जैसे मीडिया संस्थानों के स्थायी पाठक हैं जो खुद में रिफॉर्म के लिए अखबार पर पूर्ण रूप से आश्रित हैं और अखबार उन्हें अपनी दोहरी मानसिकता में बीमार बनाता रहता है।

‘बौनी आतंकी’ ने कैदी को चाकू मारा, ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाते हुए मकान मालिक को भी गोद दिया था

ऑस्ट्रेलिया की जेल में बंद बांग्लादेशी आतंकी मोमेना शोमा ने साथी कैदी पर चाकू से हमला किया। इस घटना के बाद उस पर आतंकवाद का एक और आरोप लगाया गया है। शोमा आतंकवाद के मामले में 42 साल जेल की सजा काट रही है और मेलबर्न के महिला कारागार में बंद है। उसकी लंबाई 150 सेमी ही है, जिसके कारण उसे ‘बौनी आतंकी’ भी कहते हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, रावेनहॉल के डेम फेलिस फ्रॉस्ट सेंटर में 30 अक्टूबर को जेल के अंदर 27 वर्षीय दो कैदियों के बीच झगड़ा हो गया। इसी दौरान शोमा ने चाकू से हमला किया। पीड़िता कैदी हाथ पर चोट लगने के बाद अस्पताल ले जाया गया। इस हमले के बाद आतंकवाद निरोधी पुलिस ने मोमेना शोमा पर हमले का आरोप लगाया। उसे नए आतंकी आरोपों के चलते मेलबर्न मजिस्ट्रेट कोर्ट के सामने वीडियो लिंक के जरिए पेश किया गया।

अदालत ने उसे 25 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई तक हिरासत में भेज दिया। कोरोना वायरस महामारी के चलते मामले की अगली सुनवाई में एक साल से भी अधिक समय लग सकता है।

बता दें फरवरी 2018 में अपने मकान मालिक को चाकू घोंपने के बाद मोमेना को जून 2019 में आतंकी आरोपों में दोषी ठहराया गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मोमेना आतंकी हमले को अंजाम देने के उद्देश्य से ऑस्ट्रेलिया आई थी। ऑस्ट्रेलिया पहुँचने के आठ दिन बाद ही उसने अपने मकान मालिक पर हमला किया था।

मोमेना ने ‘अल्लाहु अकबर’ बोलते हुए अपने मकान मालिक पर चाकू से कई बार तब वार किया था, जब वह अपनी 5 साल की बच्ची के साथ सो रहा था। वह इस हमले में बच गया था। हमले के बाद पीड़ित और उसकी बेटी दोनों ही पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर से पीड़ित थे।

पूछताछ के दौरान, टेररिस्ट मोमेना शोमा ने पुलिस से कहा था कि वह आईएसआईएस के नाम पर आतंकी हमले करने के उद्देश्य से ऑस्ट्रेलिया आई थी। उसने पुलिस को यह भी बताया था कि उसने पहले एक अलग परिवार के साथ रहने के दौरान एक गद्दे पर छुरा घोंपकर हमले का अभ्यास किया था, और उसने रोजर को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि वह कमजोर था।

गौरतलब है कि जाँच के बाद शोमा दोषी करार दिया था। साथ ही कोर्ट ने कहा था कि वह हिंसक जिहाद के कारण आतंक को आगे बढ़ाने के लिए आईएसआईएस से प्रेरित आतंकी हमले में लिप्त है। उसने ला ट्रोब विश्वविद्यालय में अध्ययन करने के लिए छात्रवृत्ति पर ऑस्ट्रेलिया की यात्रा की थी। लेकिन उसकी यात्रा का असली उद्देश्य आतंकवादी हमलों को अंजाम देना था।

अदालत ने उसे उसे दोषी ठहराते हुए आदेश दिया कि 2013 में सीरिया और इराक में ISIS के वृद्धि के दौरान ही मोमेना शोमा कट्टरपंथी बन गई थी। हमले के दिन भी उसने आईएसआईएस मीडिया सेंटर से एक वीडियो डाउनलोड किया था। अदालत ने उसे आतंकी आरोपों में दोषी ठहराते हुए 42 साल की सजा सुनाई थी।

‘द कश्मीर वाला’ के संपादक फहद शाह के लिए ‘प्राइज फॉर करेज’ चाहता है RSF, यौन शोषण का है आरोपित

द कश्मीर वाला (The Kashmir Walla) के संपादक फहद शाह को रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (Reporters Without Borders) ने ‘प्राइज फॉर करेज’ के लिए नामित किया है। पत्रकारों का ऐसा समूह जिसकी फंडिंग अमेरिकी सरकार करती है, उसने कश्मीरी पत्रकार को तमाम ‘अत्याचारों’ के बावजूद अपनी पत्रकारिता जारी रखने के लिए नामित करने का निर्णय लिया है।    

शाह को नामित करते हुए कहा गया है, “खोजी पत्रकारिता वेबसाइट द कश्मीर वाला के संपादक फहद शाह पर दबाव बनाने और धमकाने के मकसद से पुलिस उनकी रिपोर्ट्स को लेकर समन भेजती रहती है। सूत्रों के बारे में जानकारी देने का दबाव भी बनाती है, जिनकी किसी भी स्थिति में जानकारी देने से उन्होंने मना कर दिया। इसके अलावा उनका शारीरिक उत्पीड़न भी किया जाता है।” 

साथ ही कहा गया है, “उनके द्वारा चलाए जा रहे वेबसाइट ने प्रेस की स्वतंत्रता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। इतना ही नहीं जब से जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिया गया है, तब से यहाँ के लोग बाहरी दुनिया से कटे हैं। ऐसे में फहद ऐसे रचनात्मक तरीकों का उपयोग करते हैं ताकि 80 लाख कश्मीरों नागरिकों को बाहरी दुनिया की घटनाओं और ख़बरों से अवगत कराया जा सके।”

जिस पत्रकार का इतना महिमांडन किया गया है उस पर कई महिलाओं के यौन शोषण का आरोप है। द आउटलुक और द हिन्दू की कंट्रीब्यूटर रमा द्विवेदी ने साल 2018 में आरोप लगाते हुए कहा था कि उनके पूर्व पाटर्नर फहद शाह ने बीते साल एक पार्टी के दौरान उन्हें और उनकी दोस्त का शोषण करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था, “उसने पार्टी के दौरान कई बार मुझे गलत तरीके से छुआ। जब मैंने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि हमारे बीच जो भी था वह गुजरे कल की बात है तो शाह ने ढिठाई से कहा- तुम ऐसा नहीं कह सकती कि यह सब तुम्हें पसंद नहीं है।”  

रमा द्विवेदी द्वारा लगाए गए आरोप

ररमा द्विवेदी ने यह भी बताया था कि रोके जाने पर भी शाह नहीं सॅंभला। उसने उनकी दोस्त आकांक्षा नारायण के साथ खुद को वॉशरूम में बंद कर लिया था। अगले दिन शाह यह कहकर चलते बना कि वह नशे में था। मशहूर फोटो जर्नलिस्ट शाहिद तांत्रे के अलावा फहद के तमाम दोस्त जो इस दौरान वहाँ मौजूद थे ने भी उसे रोकने की कोशिश नहीं की। उलटे सभी ने हालात सामान्य करने का प्रयास किया, जैसे वहाँ कुछ हुआ ही नहीं। 

रमा द्विवेदी ने बताया था, “अगले दिन वह मेरे घर आया और उसने पूरे घटनाक्रम को नज़रंदाज़ करने का प्रयास करते हुए कहा, चलो जो हो गया भूल जाओ।” इसके बाद फहद ने रमा और उनकी दोस्त से निवेदन किया कि वह इस मामले में किसी भी तरह की शिकायत नहीं दर्ज कराएँ। अगर ऐसा हुआ तो वह सभी के लिए बेहद शर्म की बात होगी। 

यानी ऐसी हरकतें करने वाला व्यक्ति बिना किसी परेशानी के आज़ाद घूमने लगा और रमा द्विवेदी का जीवन नरक बन गया। रमा द्विवेदी ने यह भी बताया था कि इसके बाद उन्हें ही भ्रष्ट, चरित्रहीन, राजनीतिक रूप से बिकी हुई दिल्ली की लड़की घोषित कर दिया गया था, जिसने जान-बूझकर फहद शाह को एक ‘लिबरल कश्मीरी पत्रकार’ होने के नाते नीचा दिखाने का प्रयास किया था। 

रमा द्विवेदी के आरोपों को तमाम समाचार समूहों ने प्रकाशित किया था, जिसमें टाइम्स ऑफ़ इंडिया, एशिया टाइम्स और स्क्रॉल तक शामिल थे। फिर भी कश्मीरी पत्रकार पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार कुल 3 महिलाओं ने फहद पर यौन शोषण का आरोप लगाया था, लेकिन उसने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था।

नगरोटा में ढेर हुए आतंकी 26/11 की बरसी पर करने आए थे बड़ा ‘धमाका’: PM मोदी ने समीक्षा बैठक के बाद जताया सेना का आभार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (नवंबर 20, 2020) गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव और शीर्ष खुफिया अफसरों के साथ नगरोटा एनकाउंटर पर एक समीक्षा बैठक की। इस बैठक की जानकारी समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से दी। एजेंसी ने बताया कि नगरोटा में मारे गए आतंकी 26/11 की बरसी पर एक बार फिर से कुछ बड़ा करने की योजना बना रहे थे।

पीएम मोदी ने इस समीक्षा बैठक के बाद सेना को उनकी सतर्कता के लिए उनका आभार व्यक्त किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा,

“पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 4 आतंकवादियों का ढेर होना और उनके पास भारी मात्रा में हथियारों और विस्फोटकों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि तबाही मचाने और विनाश करने की उनकी कोशिशों को विफल कर दिया गया है।”

आगे पीएम लिखते हैं, “हमारे सुरक्षाबलों ने एक बार फिर अपनी बहादुरी और प्रतिबद्धता दिखाई है। उनकी सतर्कता का आभार जो उन्होंने जम्मू कश्मीर में डेमोक्रेटिक एक्सरसाइज को लक्षित करने वाली नापाक साजिश को नाकाम कर दिया है।”

गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबल को बड़े हमले की जानकारी कल नगरोटा में आतंकियों को ढेर करने के साथ मिली थी। जैश- ए- मोहम्मद के चार आतंकियों को बन टोल प्लाजा पर चेकिंग के दौरान सुरक्षाबलों ने एन-44 पर ढेर किया था। चारों आतंकी एक चावल के ट्रक में छिपकर आ रहे थे और चेकिंग के लिए रोके जाने पर इन्होंने फायरिंग शुरू कर दी थी।

जवाबी कार्रवाई के दौरान जवानों ने ट्रक को विस्फोट से ही उड़ा दिया, जिसके बाद आतंकी पास में जंगल की तरफ भागने लगे। 3 घंटे तक चले ऑपरेशन में सभी आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया। इस मुठभेड़ में एक जवान भी घायल हुआ था।

पुलिस ने इनके पास से 11 एके-24 राइफल, 3 पिस्टल, 29 ग्रेनेड आदि उपकरण भारी मात्रा में बरामद किए थे। पाकिस्तानी दवाइयों से पता चला था ये सभी पाकिस्तान के हैं। इसके अलावा भारी मात्रा में हथियार और दवाइयों से यह जानकारी भी हुई कि यह लोग घुसपैठ करके आए थे और आत्मघाती हमलावर हैं।

यौन शोषण मामले में गिरफ्तार प्यारे मियाँ के अवैध बंगले पर चला बुलडोजर: कई आपत्तिजनक सामान बरामद, देखें वीडियो

उत्तर प्रदेश के योगी सरकार के तर्ज पर अब मध्यप्रदेश सरकार भी गुंडों के अवैध निर्माण को ध्वस्त करा रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार (20 नवंबर, 2020) को एमपी पुलिस और प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रदेश की राजधानी भोपाल के हाईप्रोफाइल नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण मामले में मुख्य आरोपित प्यारे मियाँ के अय्याशी के अड्डे को ध्वस्त कर दिया है।

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, जोनल ऑफिसर नागेंद्र एस भदौरिया ने बताया, “प्यारे मियाँ की दूसरी मंजिल पर बने अवैध बालकनी और पीछे के एरिया को आज ध्वस्त कर दिया गया है।”

रिपोर्ट्स के अनुसार प्यारे मियाँ के 29 लालाराम नगर स्थित अवैध आलीशान बंगले पर प्रशासन ने सुबह ही पहुँच कर ध्वस्तीकरण का काम चालू कर दिया। प्यारे मियाँ ने ग्राउंड फ्लोर पर कई अवैध बनाए कमरों को दुकानों में तब्दील कर दिया था। जिसे प्रशासन द्वारा बुल्डोजर से ढहा दिया गया।

दूसरे मंजिल पर अमले ने बालकनी और कमरों को भी ध्वस्त किया। यह कमरे बार और अय्याशी के लिए बनाया गया था। पुलिस ने वहाँ से विदेशी शराब की बोतलें, धारदार तलवार समेत कई आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद किए। इसके अलावा अपने काले कारनामों को चोरी-छिपे अंजाम देने और इमरजेंसी के दौरान भागने के लिए प्यारे मियाँ ने एक गोपनीय रास्ता भी बना रखा था।

बता दें प्यारे मियाँ इन दिनों जेल की हवा खा रहा है। वहीं उसके द्वारा अवैध कारनामों से बनाई गई अवैध संपत्तियों पर मध्यप्रदेश प्रशासन की कड़ी नजर है। इसी के चलते इंदौर में प्यारे मियाँ की संपत्तियों को जमींदोज करने का सिलसिला शुरू हो चुका है। इससे पहले भी सरकार ने भोपाल स्थित उसके मैरिज हॉल को ध्वस्त कर दिया गया। आज फिर प्रशासन ने बुलडोजर चला कर उसकी अवैध संपत्ति को जमींदोज कर दिया।

गौरतलब है कि जुलाई में देर रात गश्त करती पुलिस पार्टी को 5 लड़कियाँ सड़क पर दिखीं। कारण पूछा गया तो जवाब देने के हालत में एक भी लड़की नहीं थी। सब शराब के नशे में थीं। नाबालिग लड़कियों का शराब के नशे में होना पुलिस को खटका। पुलिस ने सभी 5 लड़कियों को चाइल्ड लाइन को सौंप दिया। फिर इनकी काउंसलिंग की गई। जब पूछताछ हुई तो इन्होंने यौन शोषण का खुलासा किया।

प्यारे मियाँ ने अपनी सहायक स्वीटी विश्वकर्मा की मदद से इन लड़कियों को अपने यहाँ नाचने के लिए बुलाया था। विष्णु हाइट्स स्थित फ्लैट में पार्टी के दौरान प्यारे मियाँ द्वारा एक नाबालिग का यौन शोषण करने की बात भी सामने आई थी। इन पाँचों लड़कियों ने भी प्यारे मियाँ पर लैंगिक शोषण का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें समय-समय पर उस फ्लैट में ले जाया जाता था। उन्हें इसके लिए धनराशि भी दी जाती थी। इसी के चलते प्यारे मियाँ को गिरफ्तार कर प्रशासन लगातार उसके काले कारनामों पर कार्रवाई कर रही है।

जीसस के नाम पर चेतावनी देता हूँ कोरोना वैक्सीन मत लगवाना, ये शैतान का निशान है: भगवा पहन पादरी का प्रोपेगेंडा

कोरोना महामारी के बीच देश के कोने-कोने में कई अफवाहों ने जोर पकड़ा। ऐसे में कई धार्मिक/मजहबी समूह निकल कर सामने आए, जिन्होंने अपने अनुयायियों को न सिर्फ महामारी से बचाने का दावा किया, बल्कि इसकी आड़ में अपना एजेंडा भी जमकर चलाया। 

ताजा मामला तमिलनाडु से सामने आया है, जहाँ एक ईसाई प्रचारक भगवा पहनकर न केवल दर्शकों से झूठ बोल रहा है, बल्कि एंटी वैक्सीनेशन कैंप को भी प्रमोट कर रहा है। प्रदेश में ईसाई धर्म का प्रचार करने वाले चैनल एंजेल टीवी (ANGEL TV) के संचालक व पादरी सुंदर सेलवराज (Sundar Selvaraj) ने अपनी हालिया वीडियो में दावा किया है कि सरकार द्वारा लाई गई वैक्सीन में चिप होगी।

भगवा पहनकर खुद को ‘साधु’ बताने वाले इस ईसाई धर्म प्रचारक का यह दावा है कि कोरोना वैक्सीन में चिप होगी जो शैतान का निशान है और इसकी चेतावनी बाइबिल में भी दी गई है।

एंजेल टीवी ने ईसाई प्रचारक के प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देने के लिए बकायदा एक वीडियो बनाया है। इसमें देख सकते हैं कि एक सुमित्रा नाम की हिंदू महिला ईसाई धर्म अपना चुकी है और अपने बेटे के साथ ईसाई प्रचारक सुंदर सेलवराज की यह वीडियो देख रही है, जिसमें वह वैक्सीन के ख़िलाफ़ लोगों को गलत सूचना दे रहा है।

इसमें वह कहता है, “जीसस के नाम पर मैं तुम्हें चेतावनी देता हूँ कोरोना वैक्सीन को कभी मत लगवाना, वह शैतान का निशान (Mark of a beast) है।”

वीडियो के आगे हिस्से में हम देख सकते हैं कि सुंदर को सुनने के बाद महिला उससे इतना प्रभावित होती है कि जब सरकार वैक्सीन देने के लिए कैंप लगाती है तो उसे ईसाई प्रचारक के शब्द सुनाई पड़ने लगते हैं। फिर अचानक उसे प्रभु की आवाज सुनाई देती है कि वह जा जाकर लोगों को वैक्सीन के ख़िलाफ़ सचेत करे और उसे लगवाने से रोके।

सुंदर सेलवराज को सुनने के बाद महिला वैक्सीन को नकार देती है और लोगों को भी बताती है कि जो इसे लेगा वह नरक में जाएगा। वह बताती है कि भगवा चादर ओढ़े एक बुजुर्ग आदमी ने उसे यह बात बताई है। उसी ने उन्हें इसे न लगवाने को कहा है।

यह वीडियो तमिलनाडु के ईसाइयों के बीच घूम रहा है। हम सोच सकते हैं कि इसका असर कम पढ़े-लिखे लोगों पर क्या होगा। इससे पहले मार्च माह में हमने मौलाना साद की ऑडियो सुनी थी। उसने भी इसी प्रकार अल्लाह के नाम पर समुदाय विशेष के लोगों को बरगला कर खतरे में डाला था और बाद में पोल पट्टी खुलने पर खुद अंडरग्राउंड हो गया था। 

वही सब अब दोबारा तमिलनाडु में दोहराया जा रहा है। तमिलनाडु में यह ईसाई प्रचारक और इसका चैनल खुलेआम सरकार के ख़िलाफ़ और वैक्सीन के ख़िलाफ़ लोगों में भय भर रहे हैं, लेकिन तब भी इन पर कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है।

यहाँ बता दें कि यह ईसाई धर्म प्रचारक सुंदर सेलवराज अपने दावों के कारण कई बार चर्चा में आया है। इसने एक बार कहा था कि उसे स्वर्ग ले जाया गया था जहाँ प्रभु ने खुद उसके चैनल का वीडियो टेप देखा और उनसे ऐसे प्रोग्राम बनाने को कहा जो हॉलीवुड की क्वालिटी से मेल खाते हों या उससे भी बेहतर हों। इतना ही नहीं सुंदर सेलवराज यह दावा भी कर चुका है कि हिंदू ग्रंथों और ऋगवेद में जीसस के आने की भविष्यवाणी की जा चुकी है।

हाल ही में ऑपइंडिया ने बिहार के मधुबनी जिले के सुदूर देहात के इलाकों में लोगों को बरगला कर धर्मांतरण किए जाने को लेकर खबर की थी। इसमें खुद को पादरी बताने वाले बच्चन शर्मा ने भी रामायण को लेकर इसी तरह के दावे किए थे।

NDTV ने भूटान के भीतर चीन द्वारा एक गाँव की स्थापना को लेकर चलाई फर्जी खबर: वहाँ के राजदूत ने रिपोर्ट किया खारिज

NDTV ने भूटान में चीन के अतिक्रमण को लेकर एक रिपोर्ट की थी, जिसे शुक्रवार (20 नवंबर, 2020) को भारत में भूटान के राजदूत ने स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए उसे फर्जी खबर करार दिया है। दरअसल, NDTV ने कल यह दावा किया था कि चीन ने भूटान के क्षेत्र के भीतर एक गाँव की स्थापना की है। राजदूत ने भूटान में किसी भी चीनी गाँव की उपस्थिति को नकार दिया है।

एनडीटीवी ने गुरुवार को रिपोर्ट किया था कि चीन ने भूटान के इलाके में दो किमी अंदर एक गाँव की स्थापना की है, जो डोकलाम साइट के बहुत करीब है, जहाँ 2017 में चीनी और भारतीय सेना के बीच तनावपूर्ण झड़प हुआ था।

एनडीटीवी के एंकर विष्णु सोम ने गुरुवार को चीनी राज्य मीडिया के एक वरिष्ठ पत्रकार द्वारा पोस्ट की गई तस्वीरों को साझा करते हुए ट्विटर पर दावा किया कि यह ‘चीन द्वारा भूटान क्षेत्र की भूमि को हथियाने के स्पष्ट सबूत’ थे।

इसके अलावा सोम ने कई नक्शों की एक सीरीज भी साझा की और दावा किया कि चीन ने भूटानी क्षेत्रों में गहरी घुसपैठ की है, जो रणनीतिक रूप से पूर्वी क्षेत्र में भारतीय सीमाओं के करीब है।

सोम ने कहा कि चीनी गाँव पंगड़ा भूटानी क्षेत्र के भीतर दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यह इस बात का एक इंडिकेटर है कि भारत ने हमेशा चीन द्वारा ‘सलामी स्लाइसिंग’ की आशंका जताई है। बता दें ‘सलामी स्लाइसिंग’ बीजिंग के भारतीय और भूटानी क्षेत्र में कटौती के प्रयासों को संदर्भित करता है।

गौरतलब है कि एनडीटीवी ही नहीं बल्कि इंडिया टीवी, मनीकंट्रोल, डीएनए, लॉजिकल इंडियन और विभिन्न अन्य मीडिया नेटवर्क ने भी भूटानी क्षेत्र में चीन की घुसपैठ के बारे में रिपोर्ट की थी।

हालाँकि, भूटानी क्षेत्रों पर चीन के कब्जे वाली मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए भारत में भूटान के राजदूत ने स्पष्ट किया कि भूटान के अंदर चीन द्वारा कोई गाँव स्थापित नहीं किया गया है।

उल्लेखनीय है कि, चीनी पत्रकार शेन शिवेई ने सबसे पहले भूटानी भूमि के अंदर कथित चीनी गाँव की तस्वीरें डाली थीं और गाँव को लेकर उल्लेख किया था। लेकिन विवाद खड़ा खोने के बाद उन्होंने चुपचाप अपने फर्जी दावे वाले पोस्ट को हटा दिया। हालाँकि, चीनी पत्रकार द्वारा किए गए दावे पर NDTV ने भूटान सरकार के स्पष्टीकरण के बावजूद गलत सूचना वाली रिपोर्टिंग को जारी रखा।

CGTN न्यूज़ प्रोड्यूसर शेन श्वेई ने गाँव को दिखाने के लिए एक मानचित्र साझा करते हुए कहा, “हमारे पास नवस्थापित पंगड़ा गाँव में स्थाई निवास हैं। यह यदोंग काउंटी से 35 किमी दक्षिण में घाटी के साथ है।”

बता दें हो सकता है कि चीन जानबूझकर अपनी चालबाजियों को जारी रखते हुए भूटान को लेकर फर्जी दावे करके गंदे राजनीतिक खेल खेल सकता है। और इसी कड़ी में NDTV और अन्य भारतीय मीडिया नेटवर्क चीनी प्रोपेगेंडा का शिकार हो गए और भूटान के अंदर चीनी उपस्थिति पर असत्यापित समाचार रिपोर्ट की रिपोर्टिंग में जुट गए और लोगों को भ्रमित करने लगें।

भारतीय दर्शकों को लुभाने के लिए नेटफ्लिक्स फ्री, 5-6 दिसंबर को बिना भुगतान देख सकेंगे हर प्रोग्राम

स्ट्रीमिंग जायंट नेटफ्लिक्स ने शुक्रवार (20 नवंबर 2020) एक बड़ी घोषणा की। इसके मुताबिक़ ओटीटी कंटेंट प्लेटफॉर्म (OTT content platform) दिसंबर महीने की 5 और 6 तारीख़ (सप्ताहांत) को पूरी तरफ मुफ्त रहेगा। भारत के दर्शक इस दौरान ब्लॉकबस्टर फिल्म, वेब सीरीज़, डॉक्यूमेंट्री, शार्ट फ़िल्म बिना भुगतान किए देख सकते हैं। यह सुविधा 5 दिसंबर की रात 12 बजे से शुरू हो जाएगी और 6 दिसंबर की रात 12 बजे तक जारी रहेगी।  

पिछले महीने नेटफ्लिक्स ने इस संबंध में ऐलान किया था कि वह भारत के दर्शकों के लिए सप्ताह के अंत (वीकेंड) में मुफ़्त स्ट्रीमिंग की सुविधा देने की योजना बना रहा है। इस मुद्दे पर हुई बैठक (अर्निंग कॉल) के दौरान नेटफ्लिक्स के सीओओ और चीफ़ प्रोडक्ट ऑफिसर ग्रेग पीटर्स ने विस्तार से जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था, “हमें ऐसा लगता है अगर हम किसी देश के लोगों को हफ्ते के अंत में मुफ्त स्ट्रीमिंग की सेवा देते हैं तभी उन्हें पता चल पाएगा कि हमारे पास मनोरंजन के दृष्टिकोण से कितना शानदार कंटेंट उपलब्ध है। लोगों के लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि हमारे पास क्या है और हम किस तरह काम करते हैं और ऐसा करने का यही तरीका है।” 

इसके बाद ओटीटी कंटेंट प्लेटफॉर्म ने जारी किए गए आधिकारिक बयान में यह भी कहा था कि हम नेटफ्लिक्स पर भारतीय दर्शकों के लिए दुनिया की सबसे अनोखी और शानदार कहानियाँ लेकर आना चाहते हैं। यही वजह है कि हम ‘स्ट्रीम फेस्ट’ का आयोजन कर रहे हैं, जिसमें पूरा वीकेंड आम दर्शकों के लिए पूरी तरह मुफ्त होगा। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए netflix.com/StreamFest पर जाकर अपना नाम, ईमेल आईडी/फोन नंबर और पासवर्ड बनाना होगा। इस दौरान भुगतान के लिए किसी भी तरह की क्रेडिट या डेबिट कार्ड (भुगतान संबंधी जानकारी) की जानकारी साझा करने की आवश्यकता नहीं होगी। 

नेटफ्लिक्स इंडिया की वाइस प्रेसिडेंट मोनिका शेरगिल ने भी इस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा, “कोई भी व्यक्ति जो स्ट्रीम फेस्ट में शामिल होने के लिए अपना पंजीयन (sign up) करवाता है वह स्थायी और स्टैण्डर्ड होगा। कोई दूसरा व्यक्ति उस जानकारी का इस्तेमाल कर इस सुविधा लाभ नहीं ले सकता है। एक लॉग-इन नेम से सिर्फ एक ही व्यक्ति ‘फ्री स्ट्रीमिंग’ सुविधा का लाभ ले सकता है।” पिछले महीने ही नेटफ्लिक्स ने यह बात कही थी कि भारत में अपने विस्तार को लेकर उसे बहुत बड़े पैमाने पर काम करने की ज़रूरत है।