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धर्मराज, उनका दीवान और वो दीवार… त्रावणकोर में खोदी गई थी हिन्दुओं और ईसाइयों के नरसंहारक टीपू सुल्तान की ‘कब्र’

जैसे उत्तर भारत में मंदिरों के ध्वंस और हिन्दुओं पर अत्याचार करने के लिए मुग़ल कुख्यात रहे हैं, ठीक उसी तरह से दक्षिण भारत में टीपू सुल्तान ने किया था। मैसूर के सुल्तान हैदर अली का बेटा टीपू सुल्तान आज कट्टरपंथियों के एक बड़े वर्ग द्वारा ‘नायक’ के रूप में पूजा जाता है। लेकिन, दक्षिण भारत में कुछ ऐसे हिन्दू योद्धा भी थे, जिन्होंने उसे धूल चटाई। त्रावणकोर के धर्मराज राम वर्मा और राजा केशवदास पिल्लई उनमें से एक थे, जिन्होंने टीपू सुल्तान को नेदुमकोट्टा के दीवार के युद्ध (Battle Of Nedumkotta) में नाकों चने चबवाए।

धर्मराज की दूरदर्शिता और उस दीवार ने त्रावणकोर को बचा लिया

ये वो समय था, जब केरल को बाहरी खतरों का भान हो चला था और उसने एक दीवार बनवाई थी, ताकि उत्तर से आने वाले दुश्मनों से रक्षा की जा सके। ये चीन की दीवार की तरह बड़ा और विशाल तो नहीं था, लेकिन फिर भी इससे काम चल जाता था। इसी दीवार को वहाँ ‘नेदुमकोट्टा’ या फिर ‘Travancore Lines’ कहा जाता था। यहीं से मैसूर के टीपू सुल्तान ने केरल पर हमला किया। जब युद्ध का परिणाम उसके पक्ष में नहीं आया तो इसने इसे ‘घिनौनी दीवार’ बता दिया।

ये मैसूर के आक्रमण के दशकों पहले की बात है, जब त्रावणकोर के साम्राज्य को कालीकट से आक्रमण का भय रहता था और इसीलिए सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। सन 1759 में धर्मराज राम वर्मा को असली खतरे का आभास हुआ और उन्हें लगा कि अगर मैसूर मालाबार (उत्तरी केरल) पर आक्रमण कर के उस पर कब्ज़ा कर लेता है तो फिर त्रावणकोर के लिए समस्या खड़ी हो जाएगी। उस समय ओडेयर राजवंश (Wadiyar Dynasty) के नेतृत्व वाले मैसूर के सैन्य अभियानों का नेतृत्व हैदर अली ही किया करता था।

मैसूर की शक्ति दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही थी। उसकी फ़ौज की खासियत ये थी कि वो अलग-अलग लोकेशन पर एक रणनीतिक मोर्चेबंदी के जरिए तैनात रहते थे और काफी चपल हुआ करते थे, जिनके आवागमन के बारे में विरोधियों को पता ही नहीं चल पाता था। धर्मराज राम वर्मा ने इस खतरे को भाँपा और उनका आकलन ये था कि एक दीवार बना कर मैसूर की सेना को रोका जा सकता है और राज्य की सुरक्षा हो सकती है।

उन्होंने अपने पड़ोसी राज्य कोचीन में इस दीवार को बनवाने का कार्य प्रारंभ करवाया। यूरोपियन इसे ही ‘त्रावणकोर लाइन्स’ कहा करते थे। राजा ने इसे बनवाने के समय सप्लाई और संसाधनों के मार्गों और स्रोतों का पूरा ध्यान रखा था, ताकि सेना और जनता कभी संकट में न पड़े। लगभग 48 किलोमीटर की ये दीवार 1764 में बन कर तैयार हुई, जो पश्चिमी समुद्री सीमाओं (अभी का कोच्चि) से घाटों तक फैली हुई थी।

ऐसा नहीं था कि त्रावणकोर ने कुछ बहुत नया सोच लिया और उस पर अमल किया। केरल में आज भी पहाड़ों और समुद्र के बीच एक अलग तरह का गैप है, जो प्राचीन काल से ही राज्य की रणनीतिक पोजीशन का हिस्सा रहा है। धर्मराज राम वर्मा ने इतिहास से ही सीख लेकर अपनी दूरदर्शिता का प्रदर्शन किया। यहाँ दुश्मन फ़ौज के पास पैंतरेबाजी के लिए जगह ही नहीं होती थी और वो दबा दिए जाते थे।

हिन्दू राजवंश को धोखा देकर सुल्तान बन बैठा था टीपू सुल्तान का अब्बू

मैसूर में इधर सत्ता के स्थानांतरण का खेल चल रहा था। हैदर अली ने ओडेयर राजवंश को धोखा दे दिया। एक हिन्दू राजवंश को एक इस्लामी आक्रांता को अपना सेनापति बनाना भारी पड़ा। जिस ओडेयर राजवंश ने उसे पाला, उसे ही धोखा देकर वो सुल्तान बन बैठा। उसके बाद उसके बेटे टीपू सुल्तान ने राज किया। लेकिन, समय का खेल देखिए कि आज टीपू सुल्तान का नामोंनिशान मिट गया है लेकिन ओडेयर राजवंश जिन्दा है।

टीपू सुल्तान की मौत के बाद ओडेयर राजवंश को फिर से स्थापित किया गया। ये अपनेआप को भगवान श्रीकृष्ण का वंशज मानते हैं और द्वारका से आए थे। अभी 28 वर्षीय यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा ओडेयर इस राजवंश के मुखिया हैं और मैसूर के मानद महाराजा भी हैं। अमेरिका के MIT से अंग्रेजी साहित्य और अर्थशास्त्र में स्नातक कृष्णदत्त इस राजघराने के ‘कस्टडियन’ भी हैं। विजयनगर साम्राज्य के बाद इसी राजवंश ने श्रीरंगपट्टम की सुरक्षा की थी।

तो, हैदर अली ने धोखा देकर मैसूर की राजगद्दी हड़प ली और सुल्तान बन बैठा। मालाबार में तो वो पहले ही आक्रमण कर चुका था, इसीलिए उसे क्षेत्र का अच्छा अनुभव था। अबकी उसका लालच उसे फिर से केरल लेकर गया। उसका मंसूबा था कि वो पूरे केरल पर कब्ज़ा कर के मसालों के व्यापार और अंतरराष्ट्रीय करोबार पर नियंत्रण करे ही, साथ में केरल व उसके मंदिरों की सम्पत्तियों को भी हड़प ले।

वो लगातार आक्रमण करने लगा। 17 सालों के सैन्य अभियान के बाद, 1761-78 तक संघर्ष करने के बाद उसे मालाबार नसीब हुआ। इस दौरान प्रिंस फ़तेह अली टीपू भी उस क्षेत्र में अपने अब्बू के लिए सैन्य अभियान का नेतृत्व करता था। आखिरकार 1766 में कालीकट पर भी मैसूर का कब्ज़ा हो गया और इस तरह से एक और हिन्दू साम्राज्य का पतन हुआ। 117वें ज़मोरिन राजा ने अपने राज्य की ये हालत देख कर आत्महत्या कर ली।

कालीकट की वो दुर्दशा की गई कि वहाँ से लोग भागने लगे। मैसूर की सेना ने जैसे ही वहाँ कब्ज़ा जमाया, लोगों को एक ही उम्मीद नजर आई और वो था त्रावणकोर। शरणार्थियों की संख्या बढ़ गई। इस्लामी आक्रांता द्वारा कब्जाए प्रदेश से लाखों की संख्या में शरणार्थी त्रावणकोर पहुँचने लगे। हजारों लोग मार डाले गए। अब वो समय आ गया था, जब दीवार की परीक्षा होनी थी। उत्तरी सीमा से बड़ा खतरा केरल के भीतर जा पहुँचा था।

आगे बढ़ने से पहले इस दीवार की बात कर लेते हैं। इसे डच कमांडर ‘Eustachius De Lannoy’ ने बनाया था। उसे धर्मराज राम वर्मा के पूर्वजों ने 1741 में कोलचेल के युद्ध में हरा दिया था। लान्नोय इस दौरान त्रावणकोर में ही रहा और कमांडर की पदवी तक पहुँचा। वो एक अच्छा रणनीतिज्ञ था, जिसका फायदा त्रावणकोर को 40 फ़ीट ऊँची और 30 फ़ीट मोटी इस दीवार के रूप में मिला।

ये चीन नहीं, भारत की दीवार थी: त्रावणकोर में कैसे हारा टीपू सुल्तान

इस दीवार को क्ले, मिट्टी के घोल, लैटेराइट मृदा, पत्थर और ग्रेनाइट से बनाया गया था। आधुनिक बंदूकों और माइंस के खिलाफ बचाव के लिए ये कारगर था। साथ ही सुरक्षा बढ़ाने के लिए वहाँ खाई भी बनाई गई थी। खाई के पास कँटीले पेड़ लगाए थे और झाड़ियाँ बना दी गई थी। दीवार के पास अंडरग्राउंड टनल भी था। साथ में सेना के लिए जगह भी बनाई गई थी। अपनी सहूलियत और दुश्मन की परेशानी – इस उद्देश्य के लिए सारे काम किए गए थे।

1777 में दीवार बनाने वाले लान्नोय की मृत्यु हो गई और अब हैदर अली को लगा कि त्रावणकोर कमजोर हो गया है। उसने संधि के लिए धर्मराज राम वर्मा को प्रस्ताव भेजा और उन्हें झुकने को कहा। राजा इसके लिए तैयार नहीं हुए। डच और अंग्रेज, ये दोनों से ही उनके रिश्ते अच्छे थे और अंग्रेज तो टीपू सुल्तान के नंबर एक दुश्मन थे। हैदर अली वहाँ पहुँचता, उससे पहले ही मालाबार में विद्रोह हो गया और कर्नाटक में ही कई समस्याएँ खड़ी हो गईं।

उधर हैदर अली कर्नाटक के लिए निकला और वहाँ एक-एक कर कई क्षेत्र जीत लिए। अंग्रेजों को ये रास नहीं आया और इस तरह से दूसरा एंग्लो-मैसुर युद्ध शुरू हुआ। 1782 में पीठ में कार्बन्कले नामक बीमारी से हैदर अली की मृत्यु हो गई और उसका बेटा टीपू सुल्तान गद्दी पर बैठा। 2 साल बाद उसके और अंग्रेजों के बीच संधि तो हो गई लेकिन टीपू सुल्तान की नजर त्रावणकोर पर थी। त्रावणकोर भी जानता था कि खतरा अभी टला नहीं है।

वो समय 4 साल बाद आया, जब टीपू सुल्तान फिर से त्रावणकोर के लिए निकल गया। मालाबार के सारे अमीर लोग अपने धन के साथ त्रावणकोर भाग गए थे। वहाँ हुए विद्रोह को त्रावणकोर का समर्थन था, सो अलग। उसके अब्बू को किस तरह से त्रावणकोर जीतने से पहले ही भागना पड़ा था, ये बात उसके जेहन में बैठी हुई थी। इस्लामी आक्रांता टीपू सुल्तान अपमान की आग में जल रहा था। उसे बदला भी लेना था। उसकी नजर कारोबार और संपत्ति पर कब्जे पर भी थी।

उसने फिर से राजा को कूटनीति और धमकियों के जरिए झुकाने की कोशिश की, लेकिन राजा जब उसके अब्बू के सामने नहीं झुके तो बेटे के सामने ख़ाक झुकते। टीपू सुल्तान दीवार को अवैध बताता रहा, राजा नकारते रहे। अंततः झल्लाए टीपू सुल्तान ने आक्रमण कर दिया। वो 40,000 की फ़ौज के साथ बढ़ चला। त्रावणकोर की सेना कमजोर थी, उनकी संख्या ज्यादा नहीं थी। ये कोई कृष्णदेव राय का विजयनगर तो था नहीं, जिससे बाबर से लेकर हैदराबाद तक खौफ खाएँ।

त्रावणकोर के केशवदास: गरीबी में जन्मे, गरीबी में मरे, पर टीपू सुल्तान को सबक सिखाया

लेकिन, यहाँ एंट्री होती है एक ऐसे व्यक्ति की, जिसने दिखा दिया कि अगर नेतृत्व ठीक हो तो सीमित संसाधन के साथ भी कमाल किया जा सकता है। त्रावणकोर के दीवान राजा केशवदास (रमन केशव पिल्लई) का जन्म 1745 में एक गरीब परिवार में हुआ था और वो बचपन से ही कुशल रणनीतिकार थे। डच कमांडर लान्नोय के अंतर्गत उनकी प्रतिभा और निखरी। जब इसमें अनुभव का मिश्रण हुआ तो वो एक कुशल प्रशासक बन कर उभरे।

हजारों हिन्दुओं और ईसाईयों के शरणदाता राजा धर्मराज राम वर्मा की प्रतिष्ठा दाँव पर थी और उस महानायक के विश्वास को वो बनाए रखें, इसके लिए केशवदास ने भरसक प्रयास किया और सफल भी हुए। अंग्रेजों ने मदद के नाम पर एक छोटी सी टुकड़ी मद्रास से भेज दी थी। अब जो करना था, खुद करना था। उधर से टीपू सुल्तान खुद नेतृत्व कर रहा था, इसीलिए परीक्षा और भी बड़ी होने वाली थी।

खैर, मैसूर की सेना आगे बढ़ चली। उन्हें कोई रोक नहीं पाया और उन्होंने दीवार के एक बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया। लेकिन, ये तो दिन की बात थी। अभी रात बाकी थी। जैसे ही रात हुई, न जाने कहाँ से त्रावणकोर के 20 योद्धा निकले और टीपू सुल्तान की सेना पर आग के गोले गिरने लगे, फायरिंग होने लगी। मैसूर की फ़ौज को अँधेरे में कुछ सूझता ही नहीं था। ऐसा लगता था, जैसे एक बड़ी विशाल सेना ने उन्हें घेर लिया है।

मैसूर की सेना में ऐसी अफरातफरी मची कि सब इधर-उधर भागने लगे। खुद टीपू सुल्तान के पाँव में जख्म हो आया और वो चलने की हालत में भी नहीं रहा। उसके सैनिक किसी तरह उसे लेकर भागे। रास्ते में उसकी तलवार, अंगूठी, पालकी, गहने और न जाने क्या-क्या छीन लिया गया। त्रावणकोर ने एक बड़े राज्य के योद्धा की ये हालत कर दी थी। टीपू सुल्तान लगातार अपमान मिलने के कारण अंदर से धधक उठा।

2 महीने बीते और वो फिर आ धमका। इस बार फ़ौज और बड़ी थी। बंदूकें और हथियार भी बड़े-बड़े थे। उसने दीवार के एक हिस्से को निशाना बनाना शुरू किया। केशवदास ने फिर से अंग्रेजों से मदद के लिए कहा। अंग्रेजों ने फिर धोखा दिया। मैसूर की सेना फिर बढ़ चली। दीवार का एक हिस्सा ध्वस्त हो गया। त्रावणकोर की सेना अबकी उसे रोक नहीं पाई और उसने पूरे दीवार के दुर्ग पर कब्ज़ा कर लिया।

भागती हुई त्रावणकोर की सेना पर फिर टीपू सुल्तान का कहर बरपा। लूटपाट और हत्याओं का दौर फिर से शुरू हो गया। पेरियार नदी तक खदेड़ते-खदेड़ते मैसूर की फ़ौज बढ़त में दिख रही थी। लेकिन, युद्ध अभी बाकी था। केशवदास ने ऐसा दिमाग लगाया कि टीपू का दिमाग हिल गया। बारिश का मौसम आने वाला था। ऐसे में पानी से बढ़िया हथियार क्या हो सकता था? केशवदास ने पेरियार नदी को ही युद्ध में उतार दिया।

नदी का एक बाँध कुछ इस तरह से खोल दिया गया कि विशाल पानी की धारा न सिर्फ टीपू सुल्तान की फ़ौज को ले डूबी, बल्कि उसके बारूद को भी बहा ले गई। टीपू इससे उबर पाता कि बारिश का मौसम शुरू हो गया। बेहाल फ़ौज में बीमारी फैली। एक-एक कर सब या तो कुछ करने की हालत में ही नहीं रहे, या फिर मारे गए। तभी मद्रास में एक नया गवर्नर आ गया। अंग्रेजों ने मैसूर पर ही हमला बोल दिया।

मराठे भी उसके खिलाफ हो गए थे। उसने त्रावणकोर की दीवार तो तोड़ दी थी, लेकिन अब वो कहीं का नहीं रहा था। टीपू सुल्तान इतना कमजोर हो गया था कि वो अब त्रावणकोर के लिए खतरा भी नहीं रहा। 1799 में अंग्रेजों से युद्ध के दौरान वो मारा भी गया। जिस तरह उसके अब्बू ने ओडेयर राजाओं को धोखा दिया था, टीपू के भी करीबियों ने उसे धोखा दिया। हालाँकि, इधर नए राजा ने केशवदास को भी निकाल दिया था। उसी काल में केशवदास की भी जहर के कारण मृत्यु हो गई।

लेकिन, त्रावणकोर का ये इतिहास अमर हो गया। राजा धर्मराज राम वर्मा और केशवदास पिल्लई ने जिस तरह से टीपू सुल्तान और उसके अब्बू का सामना किया, हिन्दुओं और ईसाईयों की सुरक्षा की, मसाला के कारोबार और मंदिरों की संपत्ति को बचाया, अपने लोगों की सुरक्षा के लिए दूरदर्शिता के साथ प्रबंध किए, उसने इतिहास रच दिया। अफ़सोस ये कि आज टीपू को नायक मानने वाले धर्मराज राम वर्मा और केशवदास पिल्लई को भुला बैठे हैं। धर्मराज, उनके दीवान, वो दीवार और टीपू सुल्तान के खिलाफ ये सफलता इतिहास में कहीं गुम है।

BJP नेता किरीट सोमैया ने अन्वय नाइक और उद्धव परिवार के बीच हुए भूमि लेनदेन मामले में माँगा स्पष्टीकरण, जारी किए दस्तावेज

भाजपा नेता किरीट सोमैया ने गुरुवार (19 नवम्बर, 2020) को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के परिवार का स्वर्गीय अन्वय नाइक के परिवार के साथ हुए भूमि के लेन-देन में कथित अनियमितताओं को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से स्पष्टीकरण माँगते हुए कई अन्य दस्तावेज सबूत के तौर पर जारी किए है। वहीं एक हफ्ते पहले भी सोमैया ने भूमि लेनदेन को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर कई आरोप लगाए थे।

बता दें रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी को मुंबई के इंटीरियर डिजाइनर अन्वय और उनकी माँ को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में 4 नवंबर बुधवार को पुलिस ने बिना किसी सूचना के गिरफ्तार कर लिया था। यह मामला 2 साल पुराना था, जो कोर्ट द्वारा पहले ही बंद कर दिया गया था।

भाजपा के पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने गुरुवार को उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे से दोनों परिवारों के बीच जमीन के सौदे में अनियमितता को लेकर कई सवाल किए।

पिछले हफ्ते दस्तावेजों को जारी करते हुए, सोमैया ने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र सरकार की वेबसाइट में मौजूद मुरुद रायगढ़ के भूमि रिकॉर्ड के अनुसार उद्धव ठाकरे की पत्नी का स्वर्गीय अन्वय नाइक के परिवार के साथ भूमि का लेनदेन हुआ था। भूमि सौदों पर आगे स्पष्टीकरण माँगते हुए, किरीट सोमैया ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को उनकी अचल संपत्ति के भूमि सौदे के विभिन्न लेनदेन के बारे में जनता को बताने के लिए कहा।

अन्वय नाइक परिवार और रवींद्र वायकर परिवार के साथ भूमि सौदों से संबंधित दस्तावेज जारी करते हुए उन्होंने कहा, “हमनें श्रीमती रश्मि उद्धव ठाकरे और अन्वय नाइक के परिवार के साथ किए गए लेनदेन का विवरण और भूमि रिकॉर्ड 7/12 जारी किया हैं। हमने श्री उद्धव ठाकरे से अनुरोध किया कि वे इस बारे में कुछ जानकारी दें।”

किरीट सोमैया ने कहा, शिवसेना नेता आरोपों का जवाब देने के बजाय उनके साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि विभिन्न नेताओं ने दिवंगत अन्वय नाइक और ठाकरे के बीच भूमि सौदे को उजागर करने के लिए उन्हें धमकी दी थी।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे के चुनावी हलफनामों का हवाला देते हुए, भाजपा नेता ने पूछा कि क्यों रश्मि उद्धव ठाकरे के पास वैजनाथ, तालुका कर्जत, जिला रायगढ़ में एक ही सर्वेक्षण नंबर से दो संपत्तियाँ हैं।

डील के दस्तावेज

भाजपा के पूर्व सांसद ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से भूमि सौदे में अनियमितता के संबंध में पूछा, “हम सीएम उद्धव ठाकरे से अनुरोध करना चाहते हैं कि एक ही सीरियल नंबर से लैंडहोल्डिंग के बारे में हमें बताए। जोकि सर्वे नंबर पॉइंट 2A और पॉइंट 2B में उल्लेख है। क्या एक ही सर्वेक्षण संख्या के साथ दो अलग-अलग भूमि उपलब्ध / खरीदे गए? श्रीमती ठाकरे के पास कुछ अन्य जमीनें हैं, जिनका विवरण महाराष्ट्र के लोगों को हलफनामे के पॉइंट नंबर B में उपलब्ध नहीं कराया गया है।”

शिवसेना प्रमुख के बेटे आदित्य ठाकरे के व्यापारिक व्यवहार के बारे में दस्तावेज जारी करते हुए, भाजपा नेता किरीट सोमैया ने शिवसेना नेता से तीखे सवाल किए और उनसे पूछा कि वे रियल एस्टेट कारोबार में अपने निवेश के बारे में स्पष्ट करें।

चुनावी हलफनामे के अनुसार, आदित्य ठाकरे एम/एस हिबिस्कस फूड एलएलपी के नामित भागीदार और मालिक थे और उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि उद्धव ठाकरे भी हिबिस्कस फूड एलएलपी में नामित भागीदार थीं।

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के 17 नवंबर 2020 तक के प्राप्त रिकॉर्ड के अनुसार, “आदित्य ठाकरे 2015 में हिबिस्कस फ़ूड एलएलपी में एक नामित पार्टनर बने और यह भी कहा कि उन्होंने 31 दिसंबर 2020 को इस कंपनी से इस्तीफा दे दिया था। वहीं 26 अप्रैल 2016 को एलियोरा सोलर एलएलपी में नामित भागीदार बन गए और उन्होंने इस कंपनी से भी 31 मार्च 2020 को इस्तीफा दे दिया था।”

भाजपा नेता ने कहा कि वह मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे से इस व्यवसाय और इन वेंचर में आदित्य उद्धव ठाकरे की भूमिका के बारे जानना चाहते हैं। बता दें शिवसेना के खिलाफ आरोप यह है कि 28 नवंबर 2019 को उन्हें मंत्री बनाए जाने के बावजूद, वह 31 मार्च 2020 तक हिबिस्कस फूड एलएलपी और एलियोरा सोलर एलएलपी का कारोबार एक साथ चला रहे थे।

उल्लेखनीय है कि कानून के अनुसार, सांसद और विधायक फायदा पहुँचाने वाला कोई भी काम नहीं कर सकते है। साथ ही किसी भी तरह से कंपनसेशन वाली भूमिका में वो लिप्त नहीं हो सकते है। इसलिए, अगर आदित्य ठाकरे वास्तव में 31 मार्च तक दोनों कंपनियों के नामित भागीदार बने रहे, तो इसका मतलब है कि वह महाराष्ट्र सरकार में विधायक और मंत्री रहते हुए लाभ के पद धारण कर रहे थे।

मुंबई पुलिस नहीं बता रही रिपब्लिक TV के AVP घनश्याम सिंह की लोकेशन: सुरक्षा के लिए चिंतित परिवार और मीडिया चैनल

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट घनश्याम सिंह की बेल याचिका की सुनवाई को 24 नवंबर 2020 तक के लिए स्थगित किए जाने के बाद उनके ठिकाने की जानकारी भी किसी से साझा नहीं की जा रही है।

रिपब्लिक मीडिया चैनल ने अपने बयान में घनश्याम सिंह के लिए चिंता जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें यह तक नहीं पता कि आखिर उनके असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट घनश्याम सिंह को कहाँ रखा गया है।

समाचार चैनल के अनुसार, “रिपब्लिक मीडिया के असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट घनश्याम सिंह न्यायिक हिरासत में है। उनकी लोकेशन का खुलासा न रिपब्लिक टीवी से किया गया है और न ही उनके परिवार से। हमें उनकी, उनके स्वास्थ्य की, उनकी सुरक्षा की बहुत ज्यादा चिंता है।”

बयान में चैनल ने कहा है कि महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस को घनश्याम सिंह के ठिकाने के बारे में फौरन खुलासा करना चाहिए क्योंकि उनके परिवार को और रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क को यह जानने का अधिकार है।

चैनल ने अपने दर्शकों को याद दिलाया है कि किस तरह घनश्याम को हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें कई बार काला मास्क पहना कर ले जाते देखा गया। रिपब्लिक टीवी का कहना है कि वह इस तरह मानवाधिकारों के दमन और बुनियादी कानून अधिकारों को नकारे जाने के मामले को कोर्ट में न्याय मिलने तक उठाते रहेंगे।

यहाँ स्पष्ट कर दें कि आज घनश्याम सिंह की बेल याचिका पर सुनवाई से पहले उन्हें तलोजा जेल में रखा गया था, लेकिन जब उनकी याचिका पर सुनवाई को 24 नवंबर तक के लिए स्थगित किया गया, उसके बाद रिपब्लिक टीवी ने यह बयान जारी किया। सूत्रों के अनुसार, सिंह की बेल याचिका पर जवाब देने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 5 और दिनों का समय माँगा है।

घनश्याम सिंह की गिरफ्तारी फेक टीआरपी स्कैम केस में हुई है जिसमें मीडिया चैनल के नाम का उल्लेख तक नहीं है। इसी संबंध में कल मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग की ओर से समन जारी किया गया था। इस समन में उन्हें घनश्याम सिंह की गिरफ्तारी के मामले में 27 नवंबर से पहले आयोग के समक्ष पेश होने का आदेश दिया गया है। आयोग ने यह कार्रवाई वकील आदित्य आर मिश्रा की शिकायत पर की है।

पाकिस्तानी मंत्री को शो में स्पेस देने के सवाल पर सरदेसाई ने खोया आपा, अब फारूक अब्दुल्ला का जानना चाहते हैं पक्ष: देखें वीडियो

इंडिया टुडे के प्राइम टाइम एंकर राजदीप सरदेसाई की एक बार फिर अपने ही शो में फजीहत हो गई। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने उन्हें पाकिस्तान के मंत्री फवाद चौधरी को स्पेस देने की बात पर जम कर लताड़ा। सरदेसाई इसके बाद बीच-बीच में चिल्लाते रहे कि उन्हें संबित पात्रा से अपने राष्ट्रवाद का प्रमाण नहीं चाहिए मगर भाजपा प्रवक्ता ने उनकी एक न सुनी।

इस बातचीत में सरदेसाई ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला के साथ निष्पक्ष बर्ताव होना चाहिए। इसे सुन संबित पात्रा ने उनसे पूछा कि आखिर क्यों उनका प्राइम टाइम पाकिस्तान के मंत्री फवाद चौधरी जैसे लोगों को अपना पक्ष रखने के लिए प्लेटफॉर्म देता है।

वह बोले, “आपने मुझे अभी बताया कि हमें फारूक अब्दुल्ला के साथ निष्पक्ष होना चाहिए। क्यों आखिर आपके चैनल पर ये 9 बजे का शो पाकिस्तान के फवाद चौधरी को मौका देता है कि वह आएँ और अपना पक्ष रखें। आप फारूक अब्दुल्ला को मौका देकर क्यों यह साबित करना चाहते हैं कि वो राष्ट्रवादी हैं।”

बस दर्शकों के सामने अपनी फजीहत होता देख राजदीप सरदेसाई को गुस्सा आ गया और वह बीच बीच में बोलने लगे। उन्होंने पूछा कि आखिर वह फारूक अब्दुल्ला को बोलने का मौका क्यों न दें। पात्रा ने इस बीच कहा कि जो पत्रकारिता के तरीके सरदेसाई और उनके जैसे लोग इस्तेमाल करते हैं उसके बारे में पूरा देश जानता है। इस पर सरदेसाई और आग बबूला हो गए।

राजदीप सरदेसाई ने फिर चिल्लाकर कहा, “मुझे आपसे राष्ट्रवाद का प्रमाण नहीं चाहिए डॉ पात्रा। मैं भरतीय राष्ट्रवादी हूँ। मैं आपकी तरह राजनीतिक रूप से कट्टर नहीं हूँ।”

उल्लेखनीय है कि यह पहली बार नहीं है कि सरदेसाई को उनकी पत्रकारिता व समझ के कारण ऐसी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा हो। इससे पूर्व जब प्रधानमंत्री पहली बार लोकसभा चुनावों लड़ रहे थे तो सरदेसाई कई एनआरआई के साथ एक फ्लाइट में थे और उन्हीं में से एक ने उन्हें थप्पड़ भी जड़ा था।

पिछले 6 सालों में कई ऐसे मौके आए हैं जब सरदेसाई की ऐसी फजीहत हुई। अक्टूबर में उन्होंने फवाद चौधरी को अपने चैनल पर स्पेस दिया था सिर्फ़ इसलिए ताकि वह पुलवामा पर अपने बयान पर स्पष्टीकरण दे सकें। इस हरकत के लिए उनकी बहुत आलोचना हुई थी। एक इंटरव्यू के दौरान राजदीप ने यह भी स्वीकारा था कि उन्हें संसद हमले के समय खुशी हुई थी क्योंकि उन्हें अच्छी सामग्री मिल रही थी।

ऐसे ही एक इंटरव्यू में मुकेश अंबानी ने राजदीप को लेकर कह दिया था कि वह उन्हें गंभीरता से नहीं लेते। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें इस बात पर डाँटा था कि उनके इंटरव्यू के बीच में वह उन्हें न टोके। इसी तरह सौरभ गाँगुली ने भी राजदीप को उनकी हरकतों पर टोका था।

उद्धव ठाकरे को धृतराष्ट्र और उनके बेटे को पेंगुइन कहने पर फेसबुक यूजर के खिलाफ कार्रवाई: 10 लाख की मानहानि का दावा

महाराष्ट्र सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर उद्धव ठाकरे और उनके बेटे की आलोचना करने वाले लोगों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। ताजा घटना में, एक फेसबुक यूजर द्वारा महाराष्ट्र के सीएम की तुलना धृतराष्ट्र से और अदित्य ठाकरे को पेंगुइन कहने पर 10 लाख रुपए के मानहानि का मुकदमा ठोका गया है।

बता दें महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करने वाले अपने फेसबुक पोस्ट की वजह से मुंबई के कमाठीपुरा के रहने वाले बालकृष्ण दीकोंडा (Balakrishna Deekonda) मुसीबत में पड़ गए हैं। मुख्यमंत्री और राज्य सरकार ने उन्हें सीएम और उनकी सरकार की प्रतिष्ठा को खराब करने का आरोप लगाते हुए एक वैधानिक नोटिस भेजा है। यह नोटिस शिवसेना के एक कार्यकर्ता श्री शिव आर.साधु द्वारा भेजा गया है, जो मुंबई के एंटॉप हिल इलाके में मोतीलाल नेहरू नगर में गत प्रधान हैं।

मुंबई स्थित अधिवक्ता प्रकाश यू सुतार के माध्यम से भेजे गए नोटिस में दीकोंडा के कई पोस्ट को कोट करते हुए कहा गया कि इनमें सीएम और सरकार के लिए बदनाम करने वाले और अपमानजनक बयान हैं। नोटिस में दीकोंडा के आपत्तिजनक पोस्ट की कॉपी को भी लगाया गया है। सोशल मीडिया यूजर ने अपने 25 अगस्त को किए एक पोस्ट में कहा था, “कोई बात नहीं पेंगुइन सरकार मात्र कुछ और दिनों के लिए ही है।” मुंबई मिरर पर प्रकाशित एक सर्वेक्षण रिपोर्ट साझा करते हुए कहा कि 64% उत्तरदाता उद्धव ठाकरे से खुश नहीं हैं, और 70% लॉकडाउन को खत्म करना चाहते है।

Balakrishna Deekonda के फेसबुक पोस्ट

18 अप्रैल को किए अपने एक अन्य पोस्ट में बालकृष्ण ने द प्रिंट का एक ओपिनियन आर्टिकल साझा किया था, जिसका शीर्षक था, “उद्धव ठाकरे कोविड महामारी से निपटने में विफल रहे हैं। मुंबई को बचाने के लिए सेना लाओ।” लेख का लिंक साझा करते हुए उन्होंने लिखा था, “200.. धृतराष्ट्र?”

नोटिस में कहा गया है कि दीकोंडा ने जानबूझकर कर जनता की नज़र में मुख्यमंत्री और राज्य सरकार को बदनाम और अपमानित किया है और इसके लिए उन्हें एक स्थानीय समाचार पत्र, एक राष्ट्रीय समाचार पत्र और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर माफी माँगनी चाहिए जहाँ उन्होंने कमेंट किया है।

गौरतलब है कि नोटिस में यह भी कहा गया है कि माफी के साथ महाराष्ट्र के सीएम ने दीकोंडा से 10 लाख रुपए का हर्जाना भी माँगा है, जिसे टाटा मेमोरियल अस्पताल में जमा करना है। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो उसके खिलाफ नागरिक और आपराधिक कार्यवाही शुरू की जाएगी।

वहीं नोटिस में इस बात को दोहराया गया है कि महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे और राज्य सरकार की प्रतिष्ठा को खराब करने की वजह से उन्हें सार्वजनिक माफी माँगनी चाहिए और नुकसान का भुगतान करना चाहिए, अन्यथा उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे।

वहीं कानूनी नोटिस के बाद सोशल मीडिया यूजर को वडाला टीटी पुलिस स्टेशन ने भी एक नोटिस जारी किया, जिसमें उन्हें पुलिस के सामने पेश होने के लिए कहा गया। इस नोटिस में उन्हें नोटिस मिलते ही पुलिस स्टेशन को फोन करने और 3 दिन के अंदर पेश होने के लिए कहा गया है।

उल्लेखनीय है कि सिर्फ बालकृष्ण दीकोंडा ही नहीं कई अन्य व्यक्ति भी सरकार की आलोचना करने वाली अपनी टिप्पणियों के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा की जा रही कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। इनमें समीत ठक्कर शामिल हैं, जिन्हें एक ही टिप्पणी के लिए तीन बार गिरफ्तार किया गया था। वहीं सुनैना होले नाम की एक यूजर को उनके ट्वीट के लिए दो बार गिरफ्तार किया गया था। विभोर आनंद नाम के एक वकील को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था, इस लिस्ट में और भी कई लोग शामिल है।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष मई में महाराष्ट्र राज्य सरकार ने निषेधात्मक आदेश जारी किए थे। जिसके चलते सरकार की आलोचना करना अपराध श्रेणी में गिना जाने लगा। साथ ही शिवसेना ने सरकार की आलोचना करने वाले सोशल मीडिया पोस्ट को ट्रैक करने और उनपर कानूनी कार्रवाई करने के लिए एक टीम भी बनाई थी।

POK में फिर एक एयर स्ट्राइक? मीडिया में खूब फैला झूठ: अब दनादन ट्वीट हो रहे डिलीट

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकियों के ख़िलाफ भारतीय सेना की बड़ी कार्रवाई की बात अभी कुछ देर पहले ही सामने आई कि हर मीडिया चैनल ने इसे तुरंत ब्रेकिंग बनाकर अपने चैनल पर चला दिया।

सबसे तेज होने की होड़े में हर मीडिया चैनल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि दर्शकों को दिखाई जा रही उनकी ब्रेकिंग न्यूज किसी प्रमाणिक स्रोत पर आधारित नहीं होती बल्कि भेड़ चाल का ही नतीजा होती है।

आज लगभग हर चैनल और न्यूज वेबसाइट पर इतनी बड़ी खबर की प्रमाणिकता जाँचे बिना बताया गया कि भारतीय सेना ने पीओके में आतंकियों के लॉन्च पैड पर एयर स्ट्राइक करते हुए उसे तबाह कर दिया है।

ब्रेकिंग न्यूज के नाम पर चैनलों की हड़बड़ी का प्रमाण

खबरों में ये भी कहा गया कि इससे पहले खूफिया एजेंसी लगातार जानकारी दे रही थी कि पीओके में आतंकियों का जमावड़ा बढ़ रहा है और कम से कम 350 आतंकी सरहद पार से भारत में घुसपैठ करने की कोशिश में लगे हुए हैं। चैनलों ने कहा कि आतंकियों को सबक सिखाने के लिए भारतीय सुरक्षाबल ने यह कार्रवाई की है।

हालाँकि, खबर को फैलते कुछ टाइम ही हुआ था कि सेना के कई सूत्रों ने किसी भी प्रकार की फायरिंग को नकार दिया और रक्षा मंत्रालय की ओर से भी इसका खंडन किया गया। सेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि आज एलओसी पर कोई फायरिंग नहीं हुई है।

इस बयान के आते ही आज तक जैसे सबसे तेज मीडिया चैनल ने फौरन अपने ट्वीट डिलीट करने शुरू कर दिए। अंजना ओम कश्यप ने भी इसे सबसे बड़ी कार्रवाई कहकर झूठ फैलाया और पोल खुलते ही अपना ट्वीट डिलीट कर दिया।

ट्विटर पर अभी भी कई लोग इस झूठ को फैलाने में लगे हुए हैं और कई लोग सच्चाई जानने के बाद अंजना ओम कश्यप की तरह इसे डिलीट कर रहे हैं।

यहाँ बता दें कि इस एयर स्ट्राइक की खबर मीडिया में पीटीआई के हवाले से चलाई गई जबकि सेना का कहना है कि उनकी ओर से कोई फायरिंग नहीं हुई है। सेना के बयान की पुष्टि एएनआई और डीडी न्यूज की ओर से की जा चुकी है।

अब पश्चिम बंगाल में बीजेपी ऑफिस को किया आग के हवाले: TMC पर लगे राजनीतिक हत्याओं सहित कई गंभीर आरोप

पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ता की हत्या के बाद बीजेपी कार्यालय में बुधवार की रात आग लगने से सियासत गरमा गई है। कथिततौर बीजेपी का आरोप है कि उत्तरी 24 परगना जिले में स्थित भाजपा कार्यालय को तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा आग लगाया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीती रात मोहनपुर ग्राम पंचायत के बबनपुर इलाके में भाजपा कार्यालय को जला दिया गया। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इस घटना के पीछे टीएमसी का हाथ है और वह बीजेपी से डरते हुए ऐसे सस्ते हथकंडे अपना रही है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार बीजेपी कार्यकर्ताओं का कहना हैं कि टीएमसी उन्हें डरना चाहती है, लेकिन वे एकजुट हैं और एकजुट रहेंगे। टीएमसी सस्ते ट्रिक का इस्तेमाल कर रही है।

पश्चिम बंगाल में 2021 चुनावों से पहले राजनीतिक हिंसा की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ता अक्सर निशाना बनते रहे हैं और उनके साथ मारपीट, अपहरण व हत्या की कई खबरें सामने आती हैं। माना जा रहा है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में जनता के बीच भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता और कार्यकर्ताओं के प्रयासों को देखते हुए भाजपा कार्यालय पर हमला हुआ है।

इस घटना को लेकर बीजेपी बंगाल के आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से ट्वीट किया गया, “उपद्रवियों ने नोआपारा ग्रामीण मंडल में भाजपा पार्टी कार्यालय में आग लगा दी। सत्ता को बने रहने की एक बेताब कोशिश में टीएमसी भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हिंसा-हत्या, पार्टी कार्यालयों को जलाना जैसे अन्य आतंकी हिंसा को अंजाम दे रही है। जल्द ही टीएमसी को उखाड़ फेंका जाएगा।”

पश्चिम बंगाल में नहीं थम रही BJP नेताओं की हत्या का सिलसिला

गौरतलब है कि तुफानगंज इलाके में कल ही एक भाजपा कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। मृतक बीजेपी नेता के परिवार वालों ने टीएमसी के गुंडों पर हत्या का आरोप लगाया था। परिवार ने पुलिस को दी शिकायत में पाँच टीएमसी कार्यकर्ताओं का नाम लिया था।

परिवार वालों का आरोप है कि पाँचों टीएमसी कार्यकर्ताओं ने बेरहमी से बीजेपी नेता की पिटाई की, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आई। जब इलाज के लिए उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बीजेपी ने टीएमसी पर राजनीतिक हत्याओं का आरोप लगाया और यह दावा किया कि बंगाल के लोग कभी इसका समर्थन नहीं करेंगे।

गौरतलब है कि इससे पहले 1 नवम्बर को पश्चिम बंगाल के नदिया में 34 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता बिजॉय शील की लाश एक पेड़ से लटकते हुए पाई गई थी। पश्चिम बंगाल भाजपा ने अपने ट्विटर हैंडल पर तस्वीरें शेयर करते हुए इस घटना को लेकर दुःख जताते हुए आरोप लगाया था कि अब बीजेपी को रोकने के लिए आतंक का सहारा लिया जा रहा है।

वहीं पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के मथुरापुर में गुरुवार (30 जुलाई, 2020) को भाजपा बूथ सचिव गौतम पात्र का शव पेड़ से लटका मिला था। बीते 24 घंटे के भीतर बंगाल में दो भाजपा कार्यकर्ताओं के शव पेड़ से लटके मिले थे। इससे पहले पूर्वी मिदनापुर जिले के कछुरी गाँव में बीजेपी कार्यकर्ता पूर्णचंद्र दास का शव पेड़ से लटका मिला था।

13 जुलाई को पश्चिम बंगाल के सुदर्शनपुर में हेमताबाद के भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय का मृत शरीर एक फंदे से झूलता हुआ पाया गया था। विधायक का मृत शरीर बंद चाय की एक दुकान के सामने झूलता हुआ मिला था। परिजनों ने इसे हत्या करार दिया था।

पश्चिम बंगाल के कलना में पाथर घाटा गाँव में राबिन पॉल नाम के एक भाजपा कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई थी। घटना के दौरान, उन्हें पहले टीएमसी समर्थकों द्वारा बेरहमी से पीटा गया और फिर गाँव में दूसरी जगह ले जाया गया जहाँह पॉल को टीएमसी के उप प्रमुख ने कथित रूप से बेरहमी से पीटा था।

गणेश रॉय नामक एक भाजपा कार्यकर्ता का शव 13 सितंबर को राज्य के हुगली जिले के गोघाट में एक पेड़ पर लटका मिला था। रॉय एक सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता के रूप में इस क्षेत्र में प्रसिद्ध थे। उनके बेटे ने आरोप लगाया है कि रॉय की हत्या तृणमूल कॉन्ग्रेस के पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा की गई थी। उसने दावा किया कि उन्होंने उसका शव पेड़ पर हत्या के बाद लटकाया गया था।

वहीं उत्तर 24-परगना के टीटागढ़ में 5 अक्टूबर को भाजपा के पूर्व पार्षद मनीष शुक्ला को गोली मार दी गई थी। हेलमेट पहने हमलावरों ने मनीष शुक्ला को कई गोलियाँ मारी थी। कुछ दिनों बाद, पश्चिम बंगाल पुलिस ने भाजपा नेता मनीष शुक्ला के हत्यारों को शरण देने के लिए एक ‘टीएमसी कार्यकर्ता’ को गिरफ्तार किया था और बाइक, कार्बाइन और पिस्तौल बरामद की थी।

चैट बंद करते ही गायब हो जाएँगे मैसेज, स्क्रीनशॉट की भी होगी खबर: फेसबुक ने मैसेंजर-इंस्टा पर रोल आउट किए ये 3 नए फीचर

फेसबुक ने बुधवार (नवंबर 18, 2020) को मैसेंजर और फोटो शेयरिंग प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के लिए तीन नए फीचर्स को रोल आउट किया है। पहला फीचर वॉच टुगेडर (Watch Together) है। दूसरा TinyTan है। और तीसरा व सबसे खास वैनिश मोड (Vanish mode) है।

इनमें वॉच टुगेडर ऐसा मोड है जिसका एक्पीरियंस हो सकता है मैसेंजर पर अब तक कई लोग पहले ही कर चुके हैं क्योंकि इसे सितंबर में लाने की घोषणा कर दी गई थी। जबकि टिनीटैन और वैनिश मोड बिलकुल नए हैं।

क्या है इनकी खासियतें?

Watch Together: इस फीचर की मदद से यूजर्स अपने दोस्तों के साथ वीडियो चैट करते हुए एक साथ आईजीटीवी, रील्स, टीवी शो, मूवी और ट्रेंडिंग वीडियो रियल टाइम पर साथ में देख सकते हैं। इसके लिए आपको मैसेंजर और इंस्टाग्राम का बिलकुल नया वर्जन अपने फोन में अपडेट करना होगा। इसका इस्तेमाल एक साथ 8 लोग वीडियो कॉल पर रहते हुए कर सकते हैं।

TinyTAN:इस दूसरे फीचर में यूजर्स मैसेंजर और इंस्टाग्राम पर टिनीटैन थीम एक्टिवेट करने में सक्षम हो जाएँगे और अपनी भावनाओं का इजहार लव इमोजीज के जरिए कर पाएँगे। इस थीम को एक्टिवेट करने के बाद आपको बीटीएस प्रेरित टिनीटैन कैरेक्टर्स नजर आएँगे जिनका इस्तेमाल आप अपने इस थीम को एक्सपीरियंस करने के लिए कर सकते हैं।।

तस्वीर साभार: रोलिंग स्टोन

Vanish Mode: यह मोड फेसबुक दोनो प्लेटफॉर्म के लिए जल्द लेकर आ रहा है। मैसेंजर पर यह कुछ जगहों पर अपडेट किया जा चुका था लेकिन जल्द ही इस तकनीक का उपयोग हर कोई कर पाएगा। इस मोड में आपके चैट थ्रेड को छोड़ते ही सिर्फ़ टेक्सट ही नहीं बल्कि स्टिकर्स, फोटोज, वॉयस मैसेज वगैरह भी खुद से गायब हो जाएँगे।

यह मोड यूजर्स के लिए पूर्ण रूप से वैकल्पिक होगा। यह यूजर की इच्छा है कि वह इसका इस्तेमाल करेगा या नहीं। फेसबुक का दावा है कि यदि कोई आपकी चैट का स्क्रीनशॉट भी लेगा तो भी आपको इस बारे में सूचित किया जाएगा और इसके बाद अगर असुरक्षित महसूस करते हैं तो आप किसी को ब्लॉक कर या फिर उसकी रिपोर्ट कर सकते हैं।

अभी यह मोड यूएस में उपलब्ध हैं। बाकी देशों में इसे जल्द से जल्द लाने का प्रयास किया जा रहा है। इस वैनिश मोड के आने के बाद यूजर्स इसका इस्तेमाल अपनी एप को अपडेट करके कर पाएँगे। इसमें वैनिश मोड में चैट करने के लिए सिर्फ स्वाइप अप करना होगा और बाद में रेगुलर चैट पर भी स्वाइप अप करके लौटने की सुविधा होगी।

फेसबुक ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि मैसेंजर में वैनिश मोड जारी करते हुए हम काफ़ी उत्साहित हैं। इसके तहत आप ऐसे मैसेज भेज पाएँगे जो ख़ुद से ग़ायब हो जाएँगे। जैसे ही आप मैसेज देख लेंगे और चैट से हटेंगे मैसेज ख़ुद ग़ायब हो जाएँगे।

फेसबुक ने इस तीन फीचर्स को रोलआउट करने के अलावा यह भी कहा है कि वह दो नए शो लेकर आ रहे हैं। इनके नाम- Post Malone’s Celebrity World Pong League और Here for It With Avani Gregg होंगे। इन्हें मैसेंजर और इंस्टाग्राम पर वॉच टुगेडर फीचर के जरिए लेकर आया जाएगा।

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी का इस्तीफा: तेजस्वी यादव पर करेंगे 50 करोड़ की मानहानि का केस

भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच बिहार के शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी ने आज (नवंबर 19, 2020) अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके बाद इस विभाग का अतिरिक्त प्रभार प्रदेश मंत्री अशोक चौधरी को दिया गया है। अशोक चौधरी के पास शिक्षा विभाग के अलावा भवन निर्माण और समाज कल्याण विभाग की भी जिम्मेदारी है यानी राज्यपाल के अगले आदेश तक अब वह तीन विभागों को संभालेंगे।

कुछ देर पहले ही अशोक चौधरी ने अपने ट्वीट पर कुछ तस्वीरें पोस्ट करके जानकारी दी है कि उन्होंने आज ही सुबह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भवन निर्माण विभाग, समाज कल्याण विभाग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का कार्यभार ग्रहण किया।

उल्लेखनीय है कि डॉ मेवालाल चौधरी ने आज ही 1 बजे शिक्षामंत्री का पदभार संभालते हुए शपथ ली थी लेकिन कुछ ही देर बाद ही यह खबर आई कि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

उन्होंने तेजस्वी यादव पर पलटवार करते हुए कहा, “जो हमारे खिलाफ बोल रहे हैं और यह कह रहे है कि मेरी पत्नी की मौत के लिए मैं जिम्मेवार हूँ, उनके खिलाफ आज ही 50 करोड़ की मानहानि का केस करूँगा और आज ही उनके पास लीगल नोटिस जाएगा।”

उन्होंने कहा कि कोई भी केस तब साबित होता है जब आपके खिलाफ़ कोई चार्जशीट हुई हो या कोर्ट ने कुछ फैसला किया हो। न उनके खिलाफ अभी कोई चार्जशीट हुई है न ही उनके ऊपर कोई आरोप दर्ज़ हुआ है। अपने ऊपर लगे इल्जामों को डॉ मेवालाल ने ख़ारिज करते हुए कहा कि वो तेजस्वी यादव पर 50 करोड़ का मानहानि का केस करेंगे।

जानकारी के लिए बता दें कि डॉ मेवालाल चौधरी पर आरोप है कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के कुलपति रहते समय उन्होंने प्रोफेसरों की भर्ती में भ्रष्टाचार किया था। इस मामले में उन पर एफआईआर भी हुई थी। इसके बाद जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से उन्हें निलंबित कर दिया गया था।

डॉ मेवालाल चौधरी पर भवन निर्माण मामले में भी आरोप लगे हुए हैं। नियुक्ति घोटाले में फरवरी 2017 में IPC 409, 420, 467, 468, 471 और 120B के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया था। इसलिए जब उनके शिक्षामंत्री बनने की बात खबरों में आई तो विपक्ष ने उनके साथ नीतिश सरकार पर भी निशाना साधना शुरू कर दिया।

मोस्‍ट वॉन्‍टेड आतंकी हाफिज सईद को पाकिस्तान की एंटी टेरर कोर्ट ने सुनाई 10 साल की सजा: मुंबई हमलों का था मास्‍टरमाइंड

अवैध फंडिंग के सिलसिले में जमात उत दावा के मुखिया और मोस्‍ट वॉन्‍टेड आतंकी हाफिज सईद को 10 साल की सजा सुनाई गई है। पाकिस्तान की एंटी टेरर कोर्ट ने सईद को टेरर फंडिंग से जुड़े दो मामलों में सजा सुनााई है। हाफिज के साथ साथ याहया मुजाहिद, अब्दुल रहमान मक्की और याजिद इकबाल को भी 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई है।

संयुक्त राष्ट्र ने सईद को आतंकवादी घोषित किया था और अमेरिका ने उसपर एक करोड़ डॉलर के इनाम की घोषणा की थी। उसे आतंकी कृत्यों के लिए वित्तीय मदद उपलबध कराने के मामले में पिछले साल 17 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था।

पाकिस्तान में इस साल हाफिज सईद को चौथी बार सजा सुनाई गई है। हाफिज सईद इस समय लाहौर में एक और टेरर फंडिंग मामले में 5 साल की सजा काट रहा है। पाकिस्तान की आतंकवाद रोधी अदालत ने आतंकी कृत्यों के लिए वित्तीय मदद उपलब्ध कराने के दो मामलों में उसे इस साल फरवरी में 11 साल कैद की सजा सुनाई थी। वह लाहौर की उच्च सुरक्षा वाली कोट लखपत जेल में बंद है।

अदालत के एक अधिकारी ने पीटीआई से कहा, ‘‘लाहौर स्थित आतंकवाद रोधी अदालत ने बृहस्पतिवार को जमात उद दावा के सरगना सईद सहित इसके चार नेताओं को दो और मामलों में सजा सुनाई।’’

सईद और उसके दो साथियों-जफर इकबाल तथा याहया मुजाहिद को 10-10 साल कैद की सजा सुनाई गई है, जबकि उसके साले अब्दुल रहमान मक्की को छह महीने कैद की सजा सुनाई गई है।

अधिकारी ने कहा, ”एटीसी कोर्ट नंबर-1 के जज अरशद हुसैन भुट्टा ने काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट द्वारा दायर मामले संख्या 16/19 और 25/19 की सुनवाई की, जिसमें नसीरुद्दीन नैय्यर और मोहम्मद इमरान की गवाही के बयानों की जाँच के बाद फैसला सुनाया गया है।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सईद पर आतंक वित्तपोषण, मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध रूप से जमीन हड़पने समेत 29 मामले चल रहे हैं।

गौरतलब है कि मुंबई में 26 नवंबर 2008 को 10 आतंकियों ने दिलदहलाने वाले एक हमले को अंजाम दिया था, जिसमें 160 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और 300 से ज्यादा घायल हुए। आतंकियों ने रेलवे स्टेशन, ताज और ट्राइडेंड होटल समेत कई इलाकों को निशाना बनाया था। इस हमले ने भारत के साथ-साथ विदेशी देशों के खून भी खौला दिए थे। क्योंकि हमले में दर्जनों विदेशी नागरिक भी मारे गए थे।

बता दें इस खौफनाक हमले के पीछे का मास्टरमाइंड भी खूंखार आतंकी हाफिज सईद ही था। जाँच पड़ताल के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को इस बात का पता चला था। जिस पर सख्त रवैया दिखाते हुए भारत ने पाकिस्तान को हाफिज और मुंबई हमले के बीच के कनेक्शन को लेकर कई सबूत भी सौंपे थे। लेकिन पाकिस्तान हर बार कार्रवाई करने से भागता रहा था। वहीं इस हमले के बाद अमेरिका ने हाफिज को ब्लैक लिस्ट कर दिया था।