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अफगानिस्तान की काबुल यूनिवर्सिटी में आतंकी हमला: 25 लोगों की मौत, 40 से ज्यादा घायल

अफगानिस्तान के काबुल विश्वविद्यालय में सोमवार (नवंबर 02, 2020) को हुए आतंकी हमले में कम से कम 25 लोगों के मारे जाने की खबर है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 40 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। मौके पर पहुँचे सुरक्षाबलों की आतंकवादियों से मुठभेड़ जारी है। पूरे कैंपस को सुरक्षाबलों ने घेर लिया है। कैंपस के अंदर से अब भी गोलीबारी की आवाजें सुनाई दे रही हैं।

हमले के समय विश्वविद्यालय में मौजूद थे अफगान और ईरानी अधिकारी

रिपोर्ट के अनुसार, काबुल विश्वविद्यालय के पास गोलाबारी तब हुई जब अफगान और ईरानी अधिकारी विश्वविद्यालय में एक पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन कर रहे थे। अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्रालय के प्रवक्ता तारिक एरियन ने पुष्टि की कि बंदूकधारियों के एक समूह ने आज दोपहर में काबुल विश्वविद्यालय के परिसर में गोलीबारी की है।

विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जबीउल्ला हैदरी ने स्थानीय टीवी स्टेशन ‘अरियाना’ को बताया कि जब गोलीबारी शुरू हुई तब कक्षाएँ भी चल रही थीं। हैदरी के अनुसार गोलीबारी के चलते विश्वविद्यालय के कर्मियों एवं सुरक्षाकर्मियों ने विद्यार्थियों को परिसर से बाहर ले जाना शुरू कर दिया।

पिछले पाँच घंटों से मुठभेड़ जारी

हमले के बाद अफगान स्पेशल फोर्स और विदेशी कमांडों की टीम भी विश्वविद्यालय परिसर में पहुँच चुकी है। पिछले पाँच घंटों से हमलावरों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ जारी है। विश्वविद्यालय जाने वाले रास्तों को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया गया है।

चश्मदीद ने बताया हमले का आँखों देखा हाल

एक चश्मदीद ने बताया कि हमलावरों ने काबुल विश्वविद्यालय में एक क्लास में प्रवेश किया और छात्रों पर गोलियाँ चलाईं। जिसके कारण क्लास में मौजूद कई छात्र या तो मारे गए या घायल हो गए। पूरे विश्वविद्यालय परिसर को सुरक्षाबलों ने खाली करा लिया है। आतंकियों की धड़पकड़ के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है।

टोलो न्यूज अफगानिस्तान के आंतरिक मंत्रालय के हवाले से कहा है कि सभी तीन हमलावर को मार गिराया गया है। हमले के बाद पूरे विश्वविद्यालय कैंपस को सुरक्षाबलों ने घेर लिया है।

गौरतलब है कि पिछले साल इस यूनिवर्सिटी के गेट पर बम विस्फोट में आठ लोगों की जान चली गई थी। वर्ष 2016 में बंदूकधारियों ने काबुल स्थित अमेरिकी यूनिवर्सिटी पर हमला किया था और 13 लोगों को मार डाला था।

पिछले ही महीने इस्लामिक स्टेट ने राजधानी के शिया बहुल दश्त-ए-बार्ची के एक शिक्षण केंद्र में आत्मघाती बम हमलावर भेजा था जिसके हमले में 24 विद्यार्थियों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक घायल हुए थे।

सुदर्शन न्यूज के जनता मार्च को दिल्ली पुलिस ने कहा ‘अवैध धरना’: लोगों ने पूछा- शाहीन बाग में कहाँ थे?

हरियाणा के फरीदाबाद में निकिता तोमर की हत्या के बाद हर जगह सख्त कानून बनाए जाने की माँग उठ रही है। ऐसे में हिंदू लड़कियों पर होते अत्याचारों के मद्देनजर जागरूकता फैलाने के लिए सुदर्शन टीवी प्रमुख ने एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आयोजन किया था। 1 नवंबर को दिल्ली के इंडिया गेट पर इसी आयोजन में कई लोग इकट्ठा हुए।

हालाँकि, इस बीच सुदर्शन टीवी एडटिर इन चीफ सुरेश चव्हाणके ने दिल्ली पुलिस पर इस प्रदर्शन में बाधा डालने का आरोप लगा दिया। चैनल ने एक वीडियो शेयर करते हुए बताया कि कैसे इंडिया गेट पर एकत्रित हुए हिंदू प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस ने अवैध बल का इस्तेमाल किया। शेयर की गई वीडियोज में कुछ महिला अधिकारियों को हिंदू महिला प्रदर्शनकारी को उठा कर बस में बिठाते देखा जा सकता है।

सुदर्शन टीवी के चीफ एडिटर ने यह भी दावा किया कि उनके पत्रकार गौरव मिश्रा को भी दिल्ली पुलिस ने गैर कानूनी रूप से हिरासत में लिया, क्योंकि उन्होंने भगवा रंग का शर्ट पहना था। सुरेश चव्हाणके ने लिखा, “भगवा पहनना दिल्ली पुलिस के लिए गुनाह है?  इंडिया गेट पर जब हमारे रिपोर्टर गौरव मिश्रा कवर कर रहे थे तो पुलिस ने उन्हें भी डिटेन कर लिया। एक पुलिस वाले ने कहा, तुमने भगवा शर्ट क्यों पहना हुआ है? तुम प्रदर्शन करने आए हो?”

उल्लेखनीय है कि एक ओर जहाँ सुदर्शन न्यूज ने एक ट्वीट में यह भी आरोप लगाया कि जनता मार्च पर हमले का आदेश देने वाले दिल्ली पुलिस अधिकारी का नाम सरफराज है। वहीं दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों के मद्देनजर सफाई जारी की है। साथ ही अपने ऊपर लग रहे आरोपों को झूठा बताते हुए खारिज किया।

पुलिस का कहना है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों को सिर्फ़ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए कहा था। लेकिन चैनल सीआरपीसी 144 और डीडीएमए दिशानिर्देशों के तहत प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करके इंडिया गेट के पास मानसिंह रोड पर इकट्ठा होकर आगे बढ़ा। इसलिए कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए दिल्ली पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और अन्य लोगों को अवैध धरने से हटा दिया।

बता दें कि, सुदर्शन टीवी के एक आयोजन पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई देखकर कई लोगों में रोष भी है। लोगों का पूछना है कि आखिर जिस तरह से इंडिया गेट पर सुदर्शन टीवी के साथ खड़े प्रदर्शनकारियों को हटाया गया, वैसे ही समान बल का प्रयोग शाहीन बाग में क्यों नहीं किया गया था।

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने दिल्ली पुलिस का यह रवैया देखकर उनपर आरोप लगाया कि जब मुस्लिम प्रदर्शनकारी लंबे समय से शाहीन बाग में रोड ब्लॉक करके बैठे थे, तब दिल्ली पुलिस ने अवैध रूप से एकत्रित भीड़ को उठाने के लिए क्या किया। इसके बाद हिंदू विरोधी दंगो को रोकने में कथित विफलता पर भी सवाल उठाया और पूछा कि आखिर वो आज तक मौलाना साद को क्यों नहीं पकड़ पाए।

ज्ञात हो कि पिछले दिनों हरियाणा में निकिता तोमर की हत्या के बाद से हिंदू लड़कियों की सुरक्षा को लेकर लगातार आवाजें उठ रही हैं। निकिता पर तौसीफ नाम का युवक लगातार धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बना रहा था, लेकिन जब उसने उसकी बात नहीं मानी तो वह उसे उसके कॉलेज के बाहर गोली मार कर फरार हो गया। इस घटना के बाद कई संगठनों ने लव जिहाद जैसे मामलों पर कड़े कानून को बनाने की अपील सरकार से की थी और इसी घटना के बाद सुदर्शन न्यूज ने भी जनता मार्च निकालकर जागरूकता फैलाने का फैसला किया था।

आमिर खान की बेटी का हुआ था यौन उत्पीड़न, लम्बे समय से डिप्रेशन में: पैरेंट्स के तलाक पर इरा खान ने कही ये बात

आमिर खान की बेटी इरा ने कुछ दिनों पहले वीडियो शेयर कर बताया था कि वह डिप्रेशन में हैं। अब इरा ने फिर अपना वीडियो शेयर किया है और बताया कि उन्हें कभी समझ ही नहीं आया कि वह क्यों डिप्रेस हैं। इरा ने यह भी बताया कि उनके पेरेंट्स का तलाक भी उनके डिप्रेशन की वजह नहीं था। इस वीडियो में इरा खान अपनी जिंदगी से जुड़े कई राज खोलती नजर आ रही हैं।

इरा खान की मन की बात

वीडियो में इरा खान अपनी जिंदगी से जुड़ी बातें बताते हुए कह रही हैं, “काफी लोगों ने मुझे पूछा कि मैं डिप्रेस्ड क्यों हूँ और इस बात का जवाब मैं भी नहीं दे पाऊँगी क्योंकि मुझे खुद ही नहीं पता। पिछले कई साल से मैं इसे समझने की कोशिश कर रही हूँ लेकिन कोई सीधा और सही जवाब नहीं है। आज मैं आपको मेरी आसान और सहूलियत भरी जिंदगी के बारे में बताना चाहती हूँ। पैसों को लेकर मुझे कभी दिक्कत नहीं हुई। मेरे पास एक सपोर्ट सिस्टम है। मेरे माँ-पापा, मेरे दोस्त उन्होंने कभी मुझे किसी चीज का कोई दबाव नहीं दिया। मुझे पता था कि अगर मेरी जिंदगी में कुछ भी हुआ तो मैं अपने माँ-पापा के पास जाकर उनसे बात कर सकती हूँ।”

बताया डिप्रेशन में क्या करती थी

वीडियो में इरा खान आगे कहती हैं, “मैंने खुद का ख्याल रखना बंद कर दिया। मैं बहुत ज्यादा सोने लगी। अपनी जिंदगी ना जीने के बहाने, मैं वक्त सोने में गुजारती थी। पहले मैं काफी बिजी रहती थी फिर धीरे-धीरे मैं बेड से निकल ही नहीं पाती थी। अलग-अलग चीजों में भाग लेती थी और प्रॉमिस करती थी कि मैं आऊँगी लेकिन मैं जा ही नहीं पाती थी। फिर मैंने चीजों में भाग लेना बंद कर दिया। फिर मैंने अपने दोस्तों से बात करना बंद कर दिया क्योंकि मेरा मूड रोज-रोज खराब रहने लग गया था।”

आगे बात करते हुए वह कहती हैं, “मैं म्यूजिक भी नहीं सुन पाती थी क्योंकि उसमें भी आपको खुद के साथ रहना पड़ता है, तो मुझे टीवी देखना पड़ता था ताकि मैं खुद को उलझाए रखूँ और मुझे रोना ना आए। मेरा डिप्रेशन मेरा रोना बहुत बड़ा था क्योंकि मैं ऐसी इंसान नहीं हूँ, जिसे रोना बहुत जल्दी आ जाता है। 17 साल के बाद मेरा रोना शुरू हो गया। धीरे-धीरे रोना बढ़ता गया, कभी भी ये हो जाता था लेकिन कोई वजह नहीं थी। मुझे पता नहीं था कि मैं क्या करूँ इसलिए मैं बाथरूम भाग जाती थी। मुझे पता नहीं होता था कि मैं क्यों रोती हूँ।”

अपने पैरेंट्स के तलाक के बारे में भी की बात

वीडियो में इरा खान ने अपने पैरेंट्स के तलाक के बारे में भी बात करती नजर आईं। वह कहती हैं, “जब मैं छोटी थी तो मेरे पैरेंट्स का तलाक हो गया लेकिन उसको लेकर मुझे कोई बहुत बड़ा सदमा पहुँचा हो, ऐसा कुछ नहीं हुआ। मेरे माँ-बाप अभी भी बहुत अच्छे दोस्त हैं, कोई बिखरा हुआ परिवार नहीं है। जब मैं 6 साल की थी तब मुझे टीबी हुआ, तो टीबी भी मेरे लिए इतनी बुरी चीज नहीं थी कि मैं इतनी दुखी हूँ।”

14 साल की उम्र में हुआ था यौन शोषण

वो कहती हैं, “जब मैं 14 साल की थी तो मेरा यौन शोषण हुआ था, तो मुझे पता नहीं था कि क्या हो रहा है, लेकिन जब मुझे पता चला तो मैं इससे दूर चली गई। हाँ मुझे बुरा लगा कि मैंने अपने साथ ये क्यों होने दिया, लेकिन यह भी कोई जिंदगी भर का इतना बड़ा सदमा नहीं था कि मैं डिप्रेशन में जाऊँ। मुझे घुटन हो रही है, मैं रो रही हूँ, ये मैं अपने दोस्तों और माँ-पापा को बता सकती हूँ, पर क्या बताऊँ? वह मुझसे पूछेंगे? तो मैं क्या बताऊँगी? मेरे साथ कुछ बुरा ही नहीं हुआ है जैसा मैं महसूस कर रही हूँ। इस सोच ने मुझे उनसे बात करने से रोक दिया।” बता दें कि इरा और जुनैद आमिर खान और उनकी पहली पत्नी रीना दत्त के बच्चे हैं।

सीतामढ़ी से अयोध्या का सफर होगा आसान: CM योगी ने किया राम-जानकी मार्ग के निर्माण का ऐलान

उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज बिहार के सीतामढ़ी में जनता को संबोधित करते हुए राम जानकी मार्ग के निर्माण का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अयोध्या और सीतामढ़ी को जोड़ने वाले एक मार्ग का निर्माण किया जा रहा है, जिसका नाम राम-जानकी मार्ग होगा। इससे श्रद्धालु 5-6 घंटे में अयोध्या से सीतामढ़ी सफर कर पाएँगे।

इस जनसभा को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने सरकार कैसी होनी चाहिए इस पर भी बात की। उन्होंने याद दिलाया कि 6 साल पहले देश की जनता ने जब पीएम मोदी के हाथ में देश की भागदौड़ सौंपी थी, उससे पहले देश में जाति के नाम पर, परिवार के नाम पर, मजहब के नाम पर, क्षेत्र और भाषा के नाम पर राजनीति होती थी। लेकिन पीएम मोदी ने यह सब बदल कर गाँव, गरीब, किसान, नौजवान, महिलाओं के लिए समाज के प्रत्येक तबके के उत्थान के लिए, कार्य करते हुए सबको केवल ‘सबका साथ सबका विकास’ का नारा दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज उत्तर बिहार में नेपाल से सटे सीतामढ़ी जिले में चुनावी सभा को संबोधित किया। इस दौरान सीएम योगी ने सीता के जन्मस्थान के रूप में मशहूर सीतामढ़ी के लोगों को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण (Ayodhya Ram Mandir) की शुभकामनाएँ दी। साथ ही कि अयोध्या से सीतामढ़ी के बीच राम-जानकी मार्ग का ऐलान किया।

अपनी इन चुनावी रैलियों में जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने राजद और कॉन्ग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राजद और कॉन्ग्रेस सिर्फ विभाजन की राजनीति करते हैं। पहले इन्होंने देश बाँटा, अब जाति-मजहब के आधार पर लोगों को बाँट रहे है। 

आगे वह बोले, “राजद-कॉन्ग्रेस ने गरीबों को मकान, बिजली, गैस कनेक्शन, रोजगार, स्वास्थ्य बीमा, किसान सम्मान निधि नहीं दिया, बल्कि हड़पने का काम किया था। ये लोग फिर से आँखों में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं, लेकिन बहकावे में आने की जरूरत नहीं है।”

उल्लेखनीय है कि सीतामढ़ी जिले की 3 विधानसभा सीटों- सीतामढ़ी, बेलसंड और रुन्नीसैदपुर में दूसरे चरण में मतदान होना है, जबकि बाकी सीटों- रीगा, बथनाहा, परिहार, सुरसंड और बाजपट्टी सीटों के लिए आखिरी चरण में वोटिंग होगी। मतदान का आखिरी चरण 7 नवंबर को है। इसके बाद 10 नवंबर को हार-जीत का रिजल्ट सामने आएगा।

कुशेश्वर स्थान में विकास और नाराज पंडे | Kusheshwar Asthan and Panda community’s grievances

बिहार के दरभंगा जिले में स्थित कुशेश्वर स्थान में विकास को लेकर खूब दावे किए जा रहे हैं, मगर यहाँ के पंडों को सरकार से काफी नाराजगी है। 2010 के परिसीमन के बाद कुशेश्वर स्थान नाम से विधान सभा क्षेत्र अस्तित्व में आया। पहली बार बीजेपी टिकट पर शशिभूषण हजारी जीते। दूसरी बात जदयू के निशान पर भी वही जीते। इस बार उनकी जीत की हैट्रिक के बीच कॉन्ग्रेस के अशोक राम की चुनौती है।

इस दौरान हमने शशिभूषण हजारी से बात की। उन्होंने विकास के दावे किए। मगर जब हमने पंडों से बात की, तो वो काफी नाराज दिखे। उनका कहना है कि सरकार ने उनके लिए कुछ नहीं किया। हर जगह मंदिर खुल गए हैं, लेकिन यहाँ पर बंद हैं। उनका कहना है कि पंडा समाज भूखे मर रहे हैं, लेकिन कोई देखने वाला नहीं है। यहाँ के 500 पंडा बेरोजगार हो गए हैं।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

मथुरा के नंदबाबा मंदिर का गंगाजल से शुद्धिकरण: जबरन घुस कर पढ़ी गई नमाज, संतों ने पूछा – ‘मस्जिद में आरती होगी?’

मथुरा स्थित नंदबाबा मंदिर में मोहम्मद चाँद और फैजल सहित 4 लोगों द्वारा परिसर में घुस कर नमाज पढ़ने और इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में दर्ज हुई FIR के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं हिन्दुओं ने मंदिर में हवन कर के गंगाजल से शुद्धिकरण किया। श्रद्धालुओं ने कहा कि बिना अनुमति मंदिर में घुस नमाज पढ़ने के कारण उन्हें शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी।

भक्तों ने पंडितों के साथ बैठ कर पूरी प्रक्रिया के साथ हवन-पूजन किया। वहीं विश्व हिन्दू परिषद ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘नमाज जिहाद’ करार दिया। संस्था के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि मथुरा के परिक्रमा मार्ग पर स्थित नंदगाँव मंदिर में जिस तरह से कुछ ‘इस्लामी जिहादियों’ ने नमाज पढ़ने की कोशिश की, उससे कई सवाल खड़े हो जाते हैं। उन्होंने पूछा कि छलपूर्वक मंदिर में घुसना और वहाँ अनायास नमाज पढ़ कर उसकी तस्वीरें-वीडियो वायरल करना क्या किसी मानसिकता की ओर संकेत नहीं करता?

उन्होंने कहा कि ये जो सेक्युलरिज़्म का ढोंग रचने वाले लोग हैं, जो समानता की बात करते हैं, क्या वो जवाब देंगे कि किसी मस्जिद में जाकर हनुमान चालीसा या दुर्गा चालीसा का पाठ किया जा सकता है? उन्होंने पूछा कि जामा मस्जिद या फतेहपुरी मस्जिद में किसी ने ऐसा किया है? क्या किसी मदरसे में ऐसा करने का दुःसाहस कोई कर सकता है? उन्होंने चेताया कि किसी भी प्रकार के ‘नमाज जिहाद’ को भारत में प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से ‘लव जिहाद’ में बेटियों को छलपूर्वक फँसाया जा रहा है, उन्हें धर्मान्तरित कर के उन्हें मार दिया जाता है – इस घटनाओं को मंदिरों के माध्यम से करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पूजा करनी है तो पूजा की जगह पर करिए और नमाज पढ़ने के लिए नमाज की जगह पर जाइए। उन्होंने चेताया कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो इसके बहुत गंभीर परिणाम होंगे।

ये मामला ऐसे समय में आया है, जब मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर मामला अदालत की चौखट पर जा पहुँचा है और मस्जिद द्वारा कब्जाई गई मंदिर की जमीन को वापस लेने के लिए अदालत से लेकर संतों के अखाड़े तक मुहीम शुरू कर दी गई है। शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की याचिका पर इसी महीने सुनवाई होनी है। राम मंदिर पर ऐतिहासिक फैसला आने के बाद इस मामले में भी हिन्दुओं को न्याय की उम्मीद जगी है।

अखिल भारतीय संत समिति ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। वाराणसी के संत जितेंद्रानद सरस्वती ने पूछा कि आखिर इन लोगों को पढ़ने के लिए एकमात्र जगह मंदिर ही क्यों दिखी? संगठन महामंत्री ने समिति की तरफ से इन घटना की निंदा करते हुए कहा कि केवल मंदिरों में ही नमाज अदा होगी या फिर मस्जिदों में भी आरती करने की अनुमति दी जाएगी? वहीं सेवायतों द्वारा शुद्धिकरण यज्ञ किए जाने पर लोगों ने हर्ष व्यक्त किया।

क्यों हुआ मथुरा के नंदबाबा मंदिर का शुद्धिकरण?

ज्ञात हो कि गुरुवार (अक्टूबर 29, 2020) को नन्दगाँव के प्रसिद्ध नंदबाबा मंदिर में दोपहर को दो युवक अपने साथियों के साथ हरी टोपी लगा कर पहुँचे। एक व्यक्ति ने अपना नाम फैजल खान बताया और अपने साथ आए साथियों का परिचय मोहम्मद चाँद, नीलेश गुप्ता और आलोक रतन के रूप में दिया। उन लोगों ने बताया कि वो मंदिर के सेवायत पुजारी कान्हा गोस्वामी के दर्शन हेतु आए हैं और हिन्दू-मुस्लिम एकता में विश्वास रखने वाले लोग हैं।

वो अपने मोबाइल फोन में कई हिन्दू साधु-संतों और महंतों के साथ अपनी तस्वीरें भी दिखाने लगे, ताकि उन पर यकीन कर लिया जाए। इसके बाद वो लोग सीधे गेट संख्या 2 के पास पहुँचे। कोरोना महामारी के कारण मंदिर में लोगों की चहल-पहल उतनी नहीं है, जिसका फायदा उठा कर फैजल और चाँद वहीं पर नमाज पढ़ने लगे और बाक़ी दोनों ने तस्वीरें क्लिक कीं। वहाँ खड़े लोगों ने नमाज पढ़ने से लाख मना किया, लेकिन वो नहीं माने।

फैजल खान ने मंदिर प्रबंधन को विश्वास में लेने के लिए रामायण की चौपाई ‘रामहि केवल प्रेम पियारा, जान लेहि सो जान निहारा’ का इस्तेमाल किया था। उसने श्रीकृष्ण और उनके मित्र उद्धव के बीच प्रेम और ज्ञान को लेकर हुई चर्चा का जिक्र करते हुए कहा कि भगवान ने प्रेम को ऊपर रखा था। उसने दावा किया कि उसका ग्रुप दिल्ली से सायकल से आया है। उसने ये भी कहा कि जो श्रीराम और श्रीकृष्ण का रास्ता है, वही पैगंबर का रास्ता है। अब नमाज के बाद मथुरा के नंदबाबा मंदिर का शुद्धिकरण हुआ है।

प्राचीन हिंदू मंदिर को किया ध्वस्त, देवी-देवताओं को निकाल बाहर फेंका: 20 दिन में पाकिस्तान में ऐसी तीसरी घटना

पाकिस्तान में एक बार फिर से हिंदू मंदिर में तोड़-फोड़ की घटना सामने आई है। यह घटना पाकिस्तान के भीमपुरा कराची की है। यहाँ पर एक प्राचीन हिंदू मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया। मंदिर के हिंदू देवी-देवताओं को निकाल कर बाहर फेंक दिया गया। इसके साथ ही देवी-देवता से संबंधित सामानों को भी फेंक दिया गया। 

पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने ट्वीट के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह 20 दिनों में हिंदू मंदिरों में तोड़-फोड़ की तीसरी घटना है। इसके साथ ही उन्होंने सवाल भी उठाया कि ये लोग फ्रांस में हत्या कर रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान में वे गैर-मुस्लिम के साथ क्या कर रहे हैं?

राहत ऑस्टिन ने आगे लिखा, “उन्हें लगता है कि वे लोगों को अपने मजहब का सम्मान करने के लिए मजबूर कर सकते हैं और उन्हें सिर काटने और आतंक की आलोचना करने के लिए रोक सकते हैं। यह छठी शताब्दी नहीं है सर। दूसरों को सम्मान देने पर ही आप सम्मान पा सकते हैं।”

इससे पहले पाकिस्तान के सिंध के बदीन ज़िला स्थित कड़ियू घनौर शहर में शनिवार (अक्टूबर 10, 2020) को एक हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी। स्थानीय पुलिस ने इस मामले में मोहम्मद इस्माइल शैदी नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था।

शिकायतकर्ता अशोक कुमार ने पुलिस को इस मामले की जानकारी दी थी। कुमार ने आरोप लगाया था कि संदिग्ध मुहम्मद इस्माइल ने गाँव के मंदिर में तोड़फोड़ की। इस्माइल ने मंदिर में रखी मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया और फिर मौके से फरार हो गया। कड़ियू घनौर पुलिस ने पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 295(ए) के तहत मामला दर्ज कर अभियुक्त मोहम्मद इस्माइल शैदी को गिरफ्तार कर लिया।

इसके अलावा पाकिस्तान के सिंध प्रांत में 171 हिंदुओं को रविवार (सितंबर 20, 2020) को इस्लाम में धर्मांतरित करवाया गया। राहत ऑस्टिन ने ही ये दावा किया था। इससे पहले जून में, सिंध प्रांत के बाडिन जिले में सौ से अधिक हिंदुओं को इस्लाम में धर्मांतरित किया गया था।

एक स्थानीय मंदिर में रखी हिंदू देवताओं की सभी मूर्तियों को नष्ट कर दिया गया और परिसर को एक मस्जिद में बदल दिया गया। 17 मई को सिंध प्रांत में हिंदुओं ने दावा किया था कि तबलीगी जमात के लोगों ने उन्हें प्रताड़ित किया, उनके घरों में तोड़फोड़ की और इस्लाम कबूल नहीं करने पर एक हिंदू लड़के का अपहरण भी कर लिया।

अवैध बांग्लादेशियों के फर्जी आधारकार्ड, पैनकार्ड बनाने के गोरखधंदे का पर्दाफाश: ओवैसी के पार्टी के दो MLA का लेटर हेड बरामद

मुंबई पुलिस ने बांग्लादेश के अवैध नागरिकों के फर्जी दस्तावेज बनाने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने साकीनाका इलाके में दो बांग्लादेशी नागरिकों एवं दो एजेंटों को गिरफ्तार किया है। हैरान करने वाली बात है कि पुलिस ने एक एजेंट के पास से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के दो विधायकों के लेटर हेड मिले हैं।

आशंका जताई गई है कि विधायकों के इन लेटरहेडर का इस्तेमाल फर्जी कागजात बनाने के लिए होता था। एआईएमआईएम के जिन विधायकों के लेटर हेड मिले हैं, उनके नाम मुफ्ती मोहम्मद इस्माईल और शेख आसिफ शेख रसीद है।

बताया जा रहा है कि एजेंट के पास से 5 अन्य विधायकों के लेटर हेड भी मिले हैं लेकिन अभी इनके नाम का खुलासा नहीं किया गया है। सवाल है कि ये लेटर हेड असली हैं या नकली है, इसकी जाँच होनी अभी बाकी है। जाँच में यदि ये लेटर हेड सही साबित होते हैं तो एआईएमआईएम के इन विधायकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। फर्जी दस्तावेज का मामला सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इसे गंभीर बात बताई है। भाजपा ने विधायकों के लेटर हेड की जाँच कराए जाने की माँग की है। भाजपा ने कहा है कि इस पूरे मामले की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) से करानी चाहिए।   

पुलिस ने नाशिक मालेगाँव के एक एजेंट के पास से 155 आधार कार्ड, 34 पासपोर्ट, 28 पैनकार्ड, 8 राशन कार्ड, 187 बैंक और पोस्टल डिपार्टमेंट के पासबुक, 19 रबर स्टैम्प और स्कूल छोड़ने के 29 नकली लीविंग सर्टिफिकेट बरामद किए हैं। 

भाजपा प्रवक्ता अतुल भटखालकर ने कहा कि इस मामले की जल्द से जल्द जाँच कर दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए। एमआईएमआईएम विधायकों के लेटर हेड की जाँच होनी चाहिए। उन्‍होंने कहा है कि 24 घंटे में इन दोनों विधायकों के लेटर पैड की जाँच की जाए औए इनकी गिरफ्तारी हो। साथ ही इस केस को NIA को सौंपा जाए, यह एक बड़ा रैकेट है जो कि देश मे चल रहा है।

‘यूपी पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई- राजनीतिक प्रतिशोध’: माफिया मुख्तार अंसारी की पत्नी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर माँगी सुरक्षा

उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर मुख्तार अंसारी की बीवी ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को अपनी व अपने परिवार की सुरक्षा के लिए पत्र लिखा है। इस बात की सूचना सोमवार (नवंबर 2, 2020) को गाजीपुर से बसपा सांसद अफजल अंसारी ने दी है। उन्होंने सोमवार को अफशा अंसारी का पत्र मीडिया को जारी किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पत्र में अफशा अंसारी ने उनके परिवार की पृष्ठभूमि का हवाला दिया है। उन्होंने लिखा कि पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी, कॉन्ग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्‍तार अंसारी, ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शौकतुल्लाह उनके ही परिवार के हैं। उन्होंने आगे लिखा कि उनके परिवार के ख़िलाफ़ की जा रही कार्रवाई केवल राजनीतिक प्रतिशोध हैं।

अपने पत्र में उन्होंने आशंका जताई है कि भाजपा सरकार के इशारे पर उनके पति व विधायक मुख्तार अंसारी और उनके बेटों समेत अन्य परिजनों के साथ कोई भी अनहोनी हो सकती है। इतना ही नहीं अपने पति के लिए उन्होंने सभी मुकदमों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए करवाए जाने का अनुरोध भी किया है।

पंजाब की जेल में बंद है मुख्तार अंसारी, यूपी प्रशासन कर रही अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई

यहाँ बता दें कि मुख्तार अंसारी इन दिनों पंजाब की जेल में बंद है। पिछले दिनों यूपी पुलिस उसे कोर्ट में पेश करने के लिए पंजाब गई थी, मगर वहाँ बीमारी का हवाला देकर यूपी पुलिस के साथ नहीं आया। इस पर यूपी पुलिस के अधिकारियों ने पंजाब प्रशासन के रवैये पर आपत्ति जताई थी। साथ ही मुख्तार अंसारी को यूपी पुलिस के साथ न भेजे जाने पर कॉन्ग्रेस शासित प्रदेश पंजाब पर कई सवाल भी खड़े किए थे।

इधर, उत्तर प्रदेश सरकार ने उसकी अवैध संपत्तियों पर लगातार प्रहार का सिलसिला जारी रखा था। इसी क्रम में कल माफिया विधायक के अवैध साम्राज्य पर सबसे गहरी चोट करते हुए उसके ‘ताज महल’ गजल होटल को तोड़ा गया।

गाजीपुर के गजल होटल को रविवार (नवंबर 1, 2020) की सुबह ध्वस्त किया गया था। ये मुख़्तार अंसारी की बीवी और बेटों के नाम पर पंजीकृत था। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में नियंत्रक प्राधिकारी बोर्ड विनियमित क्षेत्र गाजीपुर ने शनिवार को गजल होटल के मालिक अब्बास अंसारी व उमर अंसारी की अपील खारिज कर दी थी। ये दोनों मऊ से 5वीं बार विधायक चुने गए मुख़्तार अंसारी के बेटे हैं। अपील ख़ारिज होने के साथ ही बुलडोजर चलना तय हो गया था।

दूसरी ओर मुख्तार अंसारी के भाई अफजल अंसारी की पत्नी के ख़िलाफ़ यूपी में इस बीच शिकायत दर्ज हुई थी। फरहत अंसारी पर भी सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे का आरोप लगा था। शिकायत में कहा गया था कि फरहत सहित अन्य लोगों पर आरोप है कि उन्होंने लखनऊ में फर्जी दस्तावेज के आधार पर सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा किया। जिसके कारण उनपर सरकारी संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दायर हुआ।

बेंगलुरु दंगों में MLA का घर जलवाने के लिए पूर्व मेयर और कॉन्ग्रेसी नेता संपत राज को नोटिस: फरार है, पुलिस पड़ी है पीछे

आतंकवाद विरोधी सेल ने ब्रुहट बेंगलुरु महानगर पालिक (बीबीएमपी) के पूर्व मेयर और कॉन्ग्रेस नेता संपत राज को नोटिस भेजा है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक उनसे सहायक संयुक्त आयुक्त बीआर वेणुगोपाल के सामने पेश होने के लिए कहा गया है।

बता दें कि डीजे होली वार्ड के पूर्व मेयर संपत राज पर 11 अगस्त को बेंगलुरु के दंगों के दौरान कवेल बिसरांड्रा में विधायक आर अखंडा श्रीनिवास मूर्ति के घर को जलाने के लिए भीड़ को उकसाने का आरोप लगाया गया है।

केंद्रीय अपराध शाखा (Central Crime Branch) ने सोमवार (अक्टूबर 12, 2020) को अगस्त, 2020 में बेंगलुरु के डीजे होली और केजी हल्ली क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर हुए दंगों के संबंध में एक प्रारंभिक आरोप पत्र दायर किया। 850 पन्नों के आरोप पत्र में 52 लोगों के नाम आरोपित के रूप में शामिल हैं। आरोप पत्र में दो कॉन्ग्रेस नगरसेवकों- पूर्व मेयर संपत राज और जाकिर हुसैन को क्रमशः आरोपित नंबर 51 और 52 बताया गया।

राज से पहली बार अगस्त में पूछताछ की गई थी। लेकिन जब पुलिस ने उन्हें फिर से पूछताछ के लिए उपस्थित होने के लिए कहा, तो उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए जाने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 

पुलिस ने पूर्व महापौर को छुट्टी देने से पहले उन्हें सूचित करने के लिए अस्पताल को एक नोटिस दिया था। हालाँकि, राज 30 अक्टूबर को ही अस्पताल से गायब हो गए। केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) की विशेष टीमें शहर और आसपास के जिलों में उनका पता लगाने की कोशिश कर रही हैं।

पुलिस को संपत राज के फरार होने की जानकारी उस समय मिली, जब हिंसा की जाँच कर रहे एसीपी वेणुगोपाल उससे मिलने के लिए अस्पताल पहुँचे। वेणुगोपाल ने संपत राज की फरारी की पुष्टि करते हुए कहा था , “हाँ वह फरार है और हम उसकी तलाश कर रहे हैं।”

पुलिस के मुताबिक, वेणुगोपाल ने 7 अक्तूबर को अस्पताल प्रशासन को नोटिस भेजकर संपत राज को डिस्चार्ज करने से पहले पुलिस को जानकारी देने का निर्देश दिया था। लेकिन अस्पताल ने बिना पुलिस को सूचित किए ही संपत राज को डिस्चार्ज कर दिया। पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन को एक और नोटिस जारी करते हुए जवाब माँगा है। 

बता दें कि 11 अगस्त को 3000 से ज्यादा लोगों की भीड़ ने कॉन्ग्रेस विधायक आर अखंड श्रीनिवास मूर्ति, उनकी बहन और डीजे हल्ली व केजी हल्ली पुलिस थानों में आग लगा दी थी। भीड़ सोशल मीडिया पर विधायक के एक रिश्तेदार की तरफ से अपलोड की गई भड़काऊ पोस्ट को लेकर नाराज थी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि एक घायल की मौत बाद में अस्पताल में हो गई थी।

अक्तूबर की शुरुआत में पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल करते हुए संपत राज को भीड़ को भड़काकर विधायक की राजनीतिक हत्या करने के प्रयास का आरोपित बनाया था। पुलिस ने इस मामले में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के नेता मुजम्मिल पाशा समेत 400 लोगों को गिरफ्तार किया था। इस मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी भी जाँच कर रही है और दो साजिशकर्ता गिरफ्तार कर चुकी है।