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‘पुलवामा आतंकवादी हमला इमरान खान सरकार की उपलब्धि’: मंत्री फवाद चौधरी ने खुलकर स्वीकारा पाकिस्तानी कारस्तानी को

पाकिस्तान जैसे आतंक को प्रश्रय देने वाले देश ने बुधवार को एक चौकाने वाला खुलासा किया है। पूरे देश को सदमे में डाल देने वाले पुलवामा हमले में पाकिस्तान का हाथ था। पाकिस्तान सरकार के मंत्री फवाद चौधरी ने स्वीकार किया है कि पुलवामा हमले में पाकिस्तान का ही हाथ था।

बता दें कि 14 फरवरी, 2019 कश्मीर के पुलवामा में बड़ा आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में भारत के करीब 40 जवानों की जान चली गई थी। कई जवान घायल भी हुए थे। इस हमले के बाद भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज की थी और एयर स्ट्राइक कर इस दुस्साहस का जवाब दिया था।

पाकिस्तान के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चौधरी ने पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में बर्बर 2019 पुलवामा आतंकी हमले में पाकिस्तान की भूमिका स्वीकार करते हुए कहा कि पुलवामा हमला पाकिस्तान के लिए बड़ी उपलब्धि थी और इमरान खान सरकार के नेतृत्व में ये बड़ी कामयाबी थी।

भारत को जवाब देने में अपनी विफलता पर इमरान ‘तालिबान‘ के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ विपक्ष की आलोचना का जवाब देते हुए, फवाद चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान ने उनके क्षेत्र में प्रवेश करके और पुलवामा में हमला करके भारत को करारा जवाब दिया।

फवाद चौधरी ने नेशनल असेम्बली में कहा, “पाकिस्तान ने भारत को घुसकर मारा है। पुलवामा में जो हमारी कामयाबी है, वह इमरान खान के नेतृत्व में पूरे देश की कामयाबी है। उसके हिस्सेदार आप भी हैं।”

फवाद चौधरी ने कहा, “हमें गर्व है कि हमारे बहादुर बेटों (आतंकवादियों) ने उनके क्षेत्र में प्रवेश किया और पुलवामा में उन पर हमला किया। पुलवामा की घटना के बारे में रिपोर्ट करने में भी भारतीय मीडिया को शर्म आती है।” पाकिस्तान मंत्री को 14 फरवरी, 2019 को पुलवामा, जम्मू और कश्मीर में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए घातक आतंकवादी हमले में पाकिस्तान की सीधी भागीदारी को लेकर बहुत गर्व है।

गौरतलब है कि पाकिस्तानी मंत्री सीआरपीएफ सैनिकों के काफिले पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद द्वारा आत्मघाती हमले का जिक्र कर रहे थे। भारत ने हमेशा भारत की धरती पर हुए इस हमले के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराया था। लेकिन पाकिस्तान अब तक अपनी भागीदारी से इनकार कर रही थी। इसके बजाय भारत में घरेलू आतंकवादियों को हमले के लिए दोषी ठहरा रही थी। लेकिन पाकिस्तान के एक निवर्तमान मंत्री द्वारा चौंकाने वाले खुलासे ने अब इस्लामिक आतंकवादी समूहों के लिए पाकिस्तान के प्रत्यक्ष समर्थन को उजागर कर दिया है।

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद ने शुरूआत में पुलवामा में हमला करने की बात स्वीकार की थी। आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार नाम के एक कश्मीरी आतंकवादी ने पुलवामा में 40 सीआरपीएफ जवानों की हत्या का नेतृत्व किया था, जिसने 14 फरवरी, 2019 को सीआरपीएफ की बस में 100 किलो विस्फोटक से भरी अपनी कार को रौंदकर हत्या कर दी।

फवाद चौधरी के खुलासे से यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान ने सक्रिय रूप से इन आतंकवादियों को भारत में प्रवेश करने और ऐसे घातक आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए सक्रिय रूप से समर्थन किया।

पाकिस्तानी सांसद ने खोली थी अपने विदेश मंत्री के ‘डर से काँपने’ वाली बात

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान सरकार के खिलाफ विपक्षी सदस्यों के जुबानी जंग और अभिनंदन वर्धमान की रिहाई को लेकर अयाज सादिक के खुलासे के बाद यह सनसनीखेज खुलासा हुआ।

पीएमएल-एन के नेता अयाज सादिक ने पाकिस्तान की संसद नेशनल असेंबली में कहा, “विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एक अहम बैठक में कहा था कि अगर हम विंग कमांडर अभिनंदन को नहीं छोड़ते हैं तो भारत 9 बजे तक हम पर हमला कर देगा।” पाकिस्तानी सांसद के इस बयान का वीडियो फ़िलहाल पूरे सोशल मीडिया पर चर्चा में बना हुआ है, जिसमें देखा जा सकता है कि वह पाकिस्तानी सरकार और सेना के भय की वास्तविकता बता रहे हैं।

इसके बाद पाकिस्तानी सांसद अयाज सादिक ने कहा कि इस घटना के ठीक बाद विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने पीएमएल-एन, पीपीपी और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के अलावा अन्य नेताओं और अधिकारियों के साथ एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक के बारे में बात करते हुए अयाज सादिक ने कहा, “मुझे बहुत अच्छे से याद है कि बैठक के दौरान सेना प्रमुख बाजवा कमरे में दाखिल हुए थे। उस दौरान बेहद घबराए हुए थे, वह पसीना-पसीना थे और उनके पैर तक काँप रहे थे।”

अघोरी बाबाओं और ब्रह्म कुमारियों को खौफ पैदा करने वाला संगठन बताने पर HBO इंडिया ने माँगी माफ़ी: ट्वीट डिलीट

होम बॉक्स ऑफिस (HBO) इंडिया ने गुरुवार (29 अक्टूबर,2020) को अपने एक ट्वीट में ख़ौफ़ पैदा करने वाले भारतीय परंपराओं में अघोरी बाबाओं और ब्रह्म कुमारियों को गलत तरीके से संदर्भित करने के लिए माफी माँगी है। लोगों के विरोध को झेलने के बाद एचबीओ ने उस पोस्ट को डिलीट भी कर दिया है।

डिलीट किए गए पोस्ट में एचबीओ इंडिया ने ट्वीट किया था, “अघोरी बाबाओं से लेकर ब्रह्म कुमारियों तक, कौन सी ऐसी भारतीय परंपराएँ है जो आपको भीतर तक हिला सकती हैं, खौफ पैदा कर सकती हैं?”

HBO India का डिलीट किया अपना पोस्ट

बता दे एचबीओ इंडिया का पोस्ट चैनल पर 2019 की फिल्म डॉक्टर स्लीप के आगामी प्रीमियर के प्रचार के लिए थी।

एचबीओ इंडिया द्वारा किए गए इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर भारी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। वहीं जिस ‘डॉक्टर स्लीप’ फ़िल्म के लिए यह पोस्ट किया गया था उसका भारत या हिंदू धर्म से कोई लेना-देना भी नहीं है। कई यूज़र्स ने यह भी उल्लेख किया कि पोस्ट हिंदू धर्म को बदनाम करने का एक प्रयास है।

वहीं इस पोस्ट पर नाराजगी व्यक्त करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक ट्वीट करते हुए चैनल से पूछा कि क्या फ्रांस में सरेआम गला काटने वाली घटना के बाद भी आपको संदेह है, “कौन सा पंथ आपको भीतर तक हिला सकता हैं या खौफ पैदा कर सकता हैं?” उन्होंने आगे कहा कि, क्या चैनल को खौफ है ‘जिहादियों’ का नाम सरेआम लेने से।

वहीं कई लोगों ने यह भी कहा कैसे कुछ धर्मों में, ‘ईश निन्दा’ की वजह से लोगों का सर कलम कर दिया जाता है।

गौरतलब है कि इंडस्ट्री के अंदरूनी सूत्रों के साथ हाल ही में एक बातचीत में पता चला था कि ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म कैसे हिंदोफोबिक सोशल मीडिया पोस्ट और कंटेंट के जरिए हिंदुओ को बदनाम करने और नफरत फैलाने का काम करते है। अल्ट बालाजी, नेटफ्लिक्स, अमेज़ॅन प्राइम, एमएक्स प्लेयर और अन्य प्लेटफार्म के जरिए स्ट्रीम किए गए पाताल लोक, आश्रम, आदि वेब सीरीज को अपने हिंदूफोबिक कंटेंट के लिए काफी विरोध का सामना करना पड़ा था।

पिछले महीने नेटफ्लिक्स ने ‘रवींद्रनाथ टैगोर की क्लासिक’ ‘काबुलीवाला‘ को’ धर्मनिरपेक्षता’ के प्रयास में एक हिंदू लड़की को नमाज़ अदा करते हुए दिखाया गया था। वहीं सफदर रहमान की सीरीज ‘छीपा’ में हिंदू देवता भगवान हनुमान का मजाक उड़ाने के लिए नेटीज़न्स ने नेटफ्लिक्स को जमकर लताड़ा था।

विस्फोटक पदार्थ की वजह से माबूत खान के घर में बम धमाका: कॉन्ग्रेस नगर अध्यक्ष आसिम खान की मृत्यु

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के अंतर्गत सरधना क्षेत्र में बृहस्पतिवार (29 अक्टूबर 2020) की सुबह एक विस्फोटक पदार्थ फट गया। तेज़ आवाज़ के साथ हुए इस धमाके की वजह से पूरा मकान गिर गया। इस घटना में कॉन्ग्रेस के नगर अध्यक्ष आसिम खान की मृत्यु हो गई जबकि मकान के मलबे में परिवार के अन्य लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना के सामने आने के बाद मेरठ की सरधना पुलिस और अग्निशमन दल घटनास्थल पहुँचा। फ़िलहाल वहाँ पर राहत कार्य जारी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बृहस्पतिवार की सुबह 9:30 बजे यह घटना हुई। मेरठ स्थित सरधना के मोहल्ला जादगान में माबूत खान का मकान है और जिस वक्त यह घटना हुई उस दौरान परिवार के सभी लोग मौजूद थे। इस धमाके के बाद पूरा मकान गिर गया और वहाँ आग भी लग गई। धमाका इतना तेज़ था कि नज़दीक के कई मकानों की दीवारों में दरार आ गई। इस बम धमाके में परिवार के एक सदस्य की मौत हुई जबकि कुछ लोग मकान के मलबे में दबे हुए हैं। पुलिस फ़िलहाल उन्हें बाहर निकालने की पूरी कोशिश कर रही है। 

बम धमाका काफी तेज़ था इसलिए बेहद कम समय में वहाँ पर काफी भीड़ भी इकट्ठा हो गई। मौजूद लोगों ने इस घटना की जानकारी पुलिस को दी जिसके बाद सरधना पुलिस, सीओ आरपी शाही और अग्निशमन दल के कई वाहन घटनास्थल पर पहुँचे। धमाका बड़ा होने की वजह से मौके पर काफी मलबा इकट्ठा हो गया था। इसके अलावा आस -पास के कई थानों का पुलिसबल भी बुला लिया गया था। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल पर पहुँच कर जाँच शुरू कर दी है। 

अभी तक सामने आई जानकारी के मुताबिक़ यह बम धमाका मकान के भीतर मौजूद विस्फोटक पदार्थ फटने की वजह से हुआ था। इस घटना पर आस पड़ोस में रहने वाले लोगों ने अभी तक कुछ नहीं कहा है, पुलिस ने इस पहलू को लेकर जाँच कर रही है कि धमाके के समय मकान के भीतर कितने लोग मौजूद थे। इस घटना में कॉन्ग्रेस के नगर अध्यक्ष आसिम खान की मृत्यु हो गई है और 2 अन्य लोगों के दबे होने की बात सामने आ रही है। घटनास्थल पर एसएसपी अजय कुमार साहनी भी पहुँचे, उन्होंने इलाके का मुआयना करते हुए पूरे मामले की जानकारी ली।       

एक ही दिन में ‘अल्लाह-हू-अकबर’ बोल कर फ्रांस में दूसरा आतंकी हमला, सऊदी अरब में भी दूतावास में तैनात गार्ड को मारा चाकू

कट्टरपंथ और आतंकवाद के विरुद्ध जारी विमर्श के बीच इस तरह की कई घटनाएँ सामने आई हैं जो ऐसे प्रयासों को निरर्थक साबित करती हैं। फ्रांस के एविगनन (Avignon) शहर में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए धारदार हथियार से पुलिसकर्मियों के एक समूह पर हमला कर दिया। इसके बाद पुलिस वालों ने उस व्यक्ति पर जवाबी कार्रवाई में गोली चलाई जिसमें उस व्यक्ति की मौत हो गई। 

स्थानीय समयानुसार यह घटना लगभग 11:15 बजे हुई थी यानी फ्रांस के ही नीस शहर के चर्च में 1 महिला समेत 3 लोगों की गला काट कर हत्या करने के कुछ ही घंटों बाद। अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार हमलावर ने हमले के दौरान ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का नारा भी लगाया था। इसके अलावा पुलिस ने भी इस घटनाक्रम के अन्य पहलुओं की जाँच शुरू कर दी है।      

ठीक इसी तरह का एक और कट्टरपंथी प्रयास सऊदी अरब के जेद्दाह शहर में हुआ। सऊदी अरब के फ्रांसीसी दूतावास में तैनात सुरक्षाकर्मी पर धारदार हथियार से हमला किया गया। आधिकारिक सऊदी प्रेस एजेंसी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार घटना घटित होने के कुछ ही समय बाद आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया था। यह घटना भी फ़्रांस के नीस शहर स्थित एक चर्च में तीन लोगों की गला काट कर हत्या करने के कुछ घंटों बाद हुई। इस मामले में भी पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। कुल मिला कर एक ही दिन में लगभग एक तरह की 3 आतंकवादी घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। 

आज ही फ्रांस के नीस शहर में स्थित कैथेड्रल चर्च में एक आतंकवादी घटना हुई थी। इस आतंकवादी घटना में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर बोलते हुए कई लोगों पर धारदार हथियार से हमला किया। इस घटना में अभी तक 3 लोगों की जान जा चुकी है और कई घायल बताए जा रहे हैं। मरने वालों में एक महिला भी शामिल है, जिनका गला काट दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह घटना 29 अक्टूबर 2020 की सुबह 9 बजे नीस शाहर के नोट्रे डेम (Notre Dame) चर्च के पास हुई थी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने मामले पर कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने हमलावर को गिरफ्त में ले लिया है।

माँ की गोद में बेटे का सर, फटे सर से निकला दिमाग भूमि पर: हिन्दुओं की गति यही है प्यारे!

हमारी सामूहिक स्मृति से इस माँ का चेहरा भी धुँधला हो जाएगा। पालघर के उस निरीह साधु की हाथ जोड़ कर दया की याचना करती तस्वीर भी अब कभी-कभी ही दिखती है। आदर्श नगर में राहुल को मार दिया गया, वहीं कुछ दिन बाद सुशील को मार दिया गया। ये मुंगेर की माँ है जिसने अपने 18 साल के पुत्र को खो दिया जो दुर्गा माता के विसर्जन के लिए घर से निकला था।

अगर इस अनुराग की पहचान, या अंग्रेजी में जिसे आइडेंटिटी कहते हैं, दलित या मुस्लिम जैसे विशेषणों से सज्जित होती तो कुछ पत्रकारों को इस देश में असहिष्णुता का चरम ढूँढने में तीन सेकेंड से ज्यादा नहीं लगते। तब जो साहित्य रचा जाता वो मानवता की हत्या से ले कर लोकतंत्र की सामूहिक हत्या और संविधान की हत्या तक ऐसे-ऐसे अलंकरणों से सुशोभित होता कि आप देश छोड़ कर बाहर जाने के लिए शायद हवाई टिकट का दाम पता करने लगते।

लेकिन अनुराग को वो लग्जरी नहीं है कि कोई रवीश कुमार रुआँसा मुँह ले कर यह लिखे: “एक माँ है, जिसने लाल साड़ी पहनी है। उसी लाल साड़ी पर अनुराग का रक्त रिस रहा है। इसी माँ के गर्भ में नौ महीने तक अनुराग रहा होगा, और आज गर्भ से गोदी, और फिर जमीन पर खड़ा हो कर दौड़ने वाला अनुराग वापस माँ की गोदी में सर रखे सो रहा है। माँ को शायद उम्मीद है कि उसका बेटा आँखें खोल देगा, वो उसी तरह बोल उठेगा जैसे कल शाम घर से यह बोल कर निकला था कि ‘आते हैं दुर्गा जी को गंगा जी में विसर्जन करवा के’।

“लेकिन अनुराग बोलेगा भी तो कैसे? उसे इस सरकार की दरिंदगी ने लील लिया। इस तानाशाही सरकार की उद्दंड और गुंडा पुलिस ने घेर कर मार डाला। जैसे अल्पवयस्क अभिमन्यु को महारथियों ने घेर कर मार डाला था। अनुराग और अभिमन्यु में ज्यादा अंतर भी तो नहीं है, न ही उन कौरवों और इस क्रूर हत्यारन पुलिस में। डंडों से पीटने से मन नहीं भरा तो साहब का आदेश आया होगा कि गोली चलाओ, हम देख लेंगे।

“अजी क्या देख लीजिएगा हुजूर? क्या देख लेंगे आप? क्या सर से बाहर गिरे इस दिमाग को आप देख पाएँगे? क्या आप उस माँ से नजरें मिला पाएँगे जिसकी गोदी में उसका बच्चा है और उसके फटे सर से दिमाग निकल कर जमीन पर पड़ा है। अब ये माँ क्या वापस घर जा पाएगी? क्या इसे घर, घर जैसा लगेगा? क्या उसकी आँखें अनुराग को खोजती नहीं रहेंगी? इस हत्या के साथ ही हम मर गए हैं, हमारा तंत्र मर गया है। मेरी समझ से मानवता की पुलिस के हाथों हत्या कर दी गई है। यही बिहार है, जहाँ कहते हैं कि बहार है, यहाँ भाजपा गठबंधन की सरकार है।”

भले ही ऊपर के ये शब्द मैंने कटाक्ष में लिखे हैं लेकिन क्या ये अक्षरशः सत्य नहीं हैं? ऐसी क्या जल्दी थी कि विसर्जन उसी दिन होना था? चुनाव अगले दिन था, तो प्रतिमा का विसर्जन बाद में भी किया जा सकता था। स्थानीय लोगों ने भी यही विचार किया था कि बड़ी दुर्गा जी को बाद में विसर्जित करेंगे। फिर किसने आदेश दिया कि उसी दिन, हर परम्परा को ताक पर रख कर, प्रतिमा को जबरन बहा दिया जाए?

क्या आपने गोलियों के चलने की आवाज सुनी है वीडियो में? पुलिस दौड़ रही है, अर्धसैनिक बल के जवान दौड़ रहे हैं, और अचानक से गोलियाँ चलने लगती हैं। एक चश्मदीद, जिसकी टाँग में गोली लगी थी, वो पुलिसकर्मियों से दस कदम दूर बैठ कर ये कह रहा है कि पुलिस ने गोली चलाई। स्थानीय लोगों ने दो SHO के नाम लिए जो इस घटना में शामिल बताए जाते हैं।

स्थानीय लोगों ने सीधे तौर पर फायरिंग के लिए पुलिस को जिम्मेदार बताया। एसपी लिपि सिंह ये कहती दिखीं कि ‘बदमाशों‘ ने गोलियाँ चलवाईं। स्थानीय लोगों से बात करने पर ऐसे आरोप भी लगे कि पुलिस ने दर्जनों लड़कों को पकड़ा और उनसे जबरन बॉन्ड साइन करवाया कि वो अराजकता फैला रहे थे। जिसने साइन किया उसे जाने दिया, बाकी अभी भी बंद हैं। मरने वालों की संख्या भी आधिकारिक तौर पर एक, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार दो से चार तक बताई जा रही है।

जो दुर्गा पूजा समिति के लोग हैं उन्होंने सीधे तैर पर पुलिस को जिम्मेदार बताया कि वो लोग रायफल लहरा रहे थे। अभी भी करीब 150 लोग बंद हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने लिपि सिंह के सामने उन्हें बुरी तरह पीटा है। इस पर ऑपइंडिया की कई रिपोर्ट्स हैं जो आप जा कर पढ़ सकते हैं।

ताजा खबरों की मानें तो दो पुलिस स्टेशनों को उग्र भीड़ ने आग के हवाले कर दिया, तोड़-फोड़ की। साथ ही लिपि सिंह के भी कार्यालय पर हमले की बातें कही जा रही हैं। इस समय यह समझना आवश्यक है कि चुनावों की तारीख के सार्वजनिक होने के साथ ही जिले का पूरा प्रशासन चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आ जाता है। ऐसे में यह मानना थोड़ा कठिन है कि पुलिस को लाठीचार्ज या कथित तौर पर गोली चलाने का आदेश चुनाव आयोग से प्राप्त हुआ होगा।

SP लिपि सिंह और जिलाधिकारी राजेश मीणा को आज चुनाव आयोग ने हटवा दिया है। नए अधिकारी आज ही प्रभार लेंगे। साथ ही, सात दिनों के अंदर जाँच की रिपोर्ट सौंपने का निर्देश भी दिया गया है।

इन सारी बातों के बीच जो बात समझ में नहीं आ रही वो यह है कि आखिर किसकी शह पर ये सब हुआ? अगर पुलिस ने गोली चलाई तो उसके पीछे किसके आदेश थे? क्या यह एक संवेदनशील इलाके में दंगे की स्थिति उत्पन्न करने के बाद चुनावों को प्रभावित करने की साजिश थी? क्या इसमें राजनैतिक पार्टियों के लोग शामिल थे? किसी भी बड़े भाजपा या जद(यू) नेता ने पुलिस के अधिकारियों को निलंबित करने या उन पर हत्या का मामला दर्ज करने की बात क्यों नहीं उठाई?

अनुराग की मृत्यु न तो पहली है, न आखिरी। लेकिन हाँ, यह भार जो हिन्दुओं के ऊपर बढ़ता ही जा रहा है, उसमें अगर किसी पार्टी ने तिनका न रखा हो, तो उसने तिनका उठा कर हल्का करने की भी कोशिश नहीं की। जो तत्परता किसी पहलू खान, तबरेज या अखलाक के मरने के बाद शीर्ष नेतृत्व के बयान में दिखती है, वही किसी अनुराग, राहुल, रवीन्द्र, सुशील, भारत, नारंग, प्रशांत या कमलेश तिवारी तक में नहीं दिखती। प्रश्न यह है कि ऐसा क्यों है?

‘सबका साथ’ में वो लोग क्या सिर्फ राम मंदिर के शिलान्यास को ही स्वर्णिम क्षण मान कर सो जाएँ? या फिर राजनैतिक रूप से पूर्णतः अप्रासंगिक मान लिए गए हिन्दुओं पर कहीं गोली चलेगी, कहीं उसकी बेटी को खींच ले जाएगा, कहीं व्यवस्थित लव जिहाद चलेगा, कहीं दुर्गा विसर्जन नहीं होने दोगे, कहीं उसकी काँवर यात्रा पर पत्थरबाजी होगी?

क्या हमारा जन्म साबरमती के डिब्बों में पहले जीवित जलने और उसके बाद उसी इलाके के दंगों में मरने, और फिर उस दंगों का अपराध भी हमारे धर्म के ऊपर ही लेने के लिए हुआ है? हमारे सहिष्णुता की परिणति हमारे छोटे भाई के सर में गोली मार कर, सड़क पर गिरे उसके रक्तिम मस्तिष्क के रूप में क्यों होती है? हमें क्यों मुस्लिम बहुल इलाकों से अपने मकानों पर ‘यह मकान बिकाऊ है’ लिख कर भागना पड़ रहा है? दिल्ली की मोहनपुरी में रह रहा हिन्दू हनुमान चालीसा न तो ज़ोर से गा सकता है, न स्पीकर पर बजा सकता है, लेकिन उसे पाँच बार मियाँ की अजान सुननी पड़ेगी क्योंकि ये देश सेकुलर है।

साभार इंडिया वेक अप ट्विटर हैंडल @IndiaWakesUp_

सड़क पर गिरा वो मग़ज़ उस क्रूरता की कहानी है जो एक दिन यहाँ हिन्दू होने के कारण हमें चुकाना पड़ता है। मुंगेर हत्याकांड पर वामपंथी मीडिया में चुप्पी तो समझ में आती है, आपको यह न पता हो कि किसने मारा, वो भी समझ सकता हूँ, लेकिन एक माँ की गोदी में एक बच्चे की लाश तो है ना? वो भी नहीं दिख रहा? किसने मारा, क्यों मारा, कब और कहाँ मारा ये न भी पता हो, फिर भी एक बच्चा तो है जिसका आधा चेहरा गायब है। वो काफी नहीं है क्या?

या फिर, हिन्दुओं के उबलने का इंतजार हो रहा है? एक तरफ एक मजहब कमर कस कर, किसी भी तरह, चाहे दंगों की शक्ल में हो, चाहे हमारी बच्चियों को प्रेम की बात कर के रेप करने की शक्ल में, आपकी जमीनों पर कब्जा कर के आपको अपने ही इलाके और घर छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा हो, और दूसरी तरफ एक राजनैतिक उपेक्षा, हिन्दुओं को विचित्र स्थिति में खड़ा कर देती है।

और वह स्थिति है कि वो वोट दे तो किसे दे? उसे जो उसके हितों की बात तो करता है लेकिन कुछ सांकेतिक बातों को छोड़ कर उसके ऊपर हो रहे अन्याय पर नहीं बोलता, लेकिन किसी तबरेज या अखलाक पर उसे असीम पीड़ा का अनुभव होता है? या फिर उसे जिसने ऐतिहासिक तौर पर उसे तीसरे दर्जे का मान कर कभी उसके लिए कुछ किया ही नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति, इतिहास, परम्पराओं को लगातार झुठलाया और उसमें हीन भावना भरी।

इसमें संदेह नहीं कि पिछले कुछ समय में एक जागृति आई है लेकिन वह जागृति राजनैतिक से कहीं ज्यादा सामाजिक है। यह जागृति भी इसी मामूली जनता के हाथों में आई तकनीकों के कारण है, न कि तथाकथित हिन्दूवादी नेता अचानक से हिन्दू हृदय सम्राट बन गए और वो कह रहे हैं, कर रहे हैं जो खुल कर कहा और किया जाना चाहिए। जी नहीं, अपवाद को छोड़ दीजिए, तो आज भी उनके हर कदम में परोक्ष तुष्टिकरण की सड़ाँध दिख ही जाती है।

यह भी जानता हूँ कि सत्ता पाना और सत्ता में बने रहना एक सतत प्रक्रिया है। लेकिन, सहानुभूति के एक बयान से तुम्हारी सत्ता छिन नहीं जाएगी। तुम उस माँ को राजनैतिक वचनों से, सवा लाख करोड़ की परियोजनाओं से ढाढ़स नहीं बँधा सकते, बल्कि तुम्हारा एक ट्वीट, तुम्हारे तरफ से रैली में बोला गया एक वाक्य उस माँ को यह दिलासा दिलाएगा कि सबसे बड़े नेता ने कहा है, तो उसे न्याय मिलेगा। बस इतनी सी अपेक्षा तो रख ही सकता है वो हिन्दू जो सड़क, पानी, बिजली, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आरक्षण की मार झेलते हुए भी तुम्हें हर बार भावनात्मक कारणों से वोट देता है।

बिहार में कुछ खास बदलाव नहीं हुए हैं, फिर भी सरकार किसकी आएगी यह एक आसान सा आकलन है। यह आकलन भी आसान है कि ऐसा क्यों है। भले ही भभुआ का कोई हिन्दू जीवन भर अयोध्या के राम मंदिर तो छोड़िए, अयोध्या जिले तक न जा पाए, लेकिन वो वोट उसी पार्टी को हर बार देता है जिसके नेताओं ने उस मंदिर का वहाँ बनना संभव किया।

हिन्दू ‘बीरबल की खिचड़ी’ के उस ब्राह्मण की तरह है जो तुम्हारे शाही किले में जलते दीपक की लौ से भी ऊष्मा पाता है। हिन्दू को बस इससे मतलब है कि उसके आराध्य का मंदिर बन रहा है। लेकिन सवाल यह है, हे सत्ताधीश! कि क्या तुम्हें हिन्दुओं से कुछ मतलब है?

गिरा रहे थे सरकार लेकिन खुद ही गिर पड़े कॉन्ग्रेसी उम्मीदवार उस्मानी, सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर लिए मजे: वीडियो वायरल

बिहार विधानसभा चुनाव के बीच सभी प्रमुख राजनीतिक दल मतदाताओं को लुभाने में लगे हुए हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस उम्मीदवार अहमद उस्मानी का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। जहाँ जनसंपर्क के दौरान कॉन्ग्रेस नेता का मंच टूट गया और वह गिरते हुए नजर आए। सोशल मीडिया यूजर अहमद उस्मानी के परफेक्ट गिरने की टाइमिंग को लेकर जमकर मजे ले रहे हैं।

बता दें जिन्ना की तस्वीर के मामले में चर्चा में कॉन्ग्रेस नेता मशकूर अहमद उस्मानी का नाम सामने आया था। वर्त्तमान में वह बिहार दरभंगा के जाले विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। गिरते समय वह जिले की एक भीड़ को संबोधित कर रहे थे।

बीजेपी नेता तजिंदर बग्गा ने वीडियो का एक छोटा सा हिस्सा साझा किया है। वीडियो में कॉन्ग्रेस नेता एक भीड़ को संबोधित कर रहे हैं। विडंबना यह है कि मंच टूटने से पहले कॉन्ग्रेस उम्मीदवार उस्मानी अपने भाषण में कहते दिख रहे हैं, “जनता को सरकार चुनने का मौका मिलता है और लोकतंत्र में लोग जानते हैं किसको कब उठाना है और कब गिरा देना है।”

जैसे ही मशकूर गिरा देना कहते हैं वैसे ही वो मंच समेत खुद ही गिर जाते हैं। ये वीडियो जाले विधानसभा में जनसंपर्क के दौरान का बताया जा रहा है। लोग यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल कर रहे हैं।

ट्विटर पर वीडियो वायरल होने के बाद लोग भाषण और गिरने की परफेक्ट टाइमिंग को लेकर कॉन्ग्रेस नेता की खूब खिल्ली उड़ा रहे है। नेटीज़न्स उस्मानी की वीडियो को लेकर तरह-तरह के मिम्स शेयर कर रहे हैं।

एक सोशल मीडिया यूज़र का कहना है कि इसके पीछे मोदी का हाथ है। दरअसल, यह ताना उसने कॉन्ग्रेस की हरकतों को देखते हुए मारा क्योंकि कॉन्ग्रेस हर चीज के पीछे भाजपा को जिम्मेदार ठहराती है।

वहीं कुछ लोगों ने तरह-तरह के मिम्स शेयर किए।

गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान 28 अक्टूबर को संपन्न हुआ था। दूसरे और तीसरे चरण के मतदान 3 और 7 नवंबर को होगा। वहीं चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को घोषित किए जाएँगे।

आपके बस की न हो तो आप हमें दे दो, हम मारेंगे: मृतक सुशील की पत्नी ने उठाई आवाज, घायल भाई की स्थिति गंभीर

दिल्ली में एक बार फिर इस्लामी आतंक की वीभत्स तस्वीरें देखने को मिली हैं। पिछले दिनों जहाँ राहुल राजपूत को मौत के घाट उतारा गया था, मंगलवार को वहीं से थोड़ी दूर दलित युवक सुशील की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी गई।

तेज म्यूजिक दिल्ली हत्या
चाकू से घोंपकर सुशील की हुई हत्या

पूरी घटना झुग्गी सराय पीपल थला की है। इस घटना में सुशील की मौत हुई है और उनके सबसे बड़े भाई सुनील बुरी तरह घायल होकर अस्पताल में भर्ती हैं, उनकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है। दूसरे भाई अनिल को भी चाकू मारा गया था व सुशिल की पत्नी वंदना की भी पति को बचाते हुए ऊँगली और कंधे पर चोट लगी है। मंगलवार को घटित घटना के बाद अब सुशील के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ने के लिए थारू जनजाति के लोग आदर्श नगर मेट्रो के गेट नंबर-4 पर जमे हुए हैं।

सड़कों पर न्याय माँगता सुशील का परिवार (आँख में पट्टी के साथ सुशील के बड़े भाई अनिल और घूँघट में पत्नी वंदना)

ऑपइंडिया भी इस पूरे मामले की तह तक पहुँचने के लिए प्रदर्शनस्थल पर पहुँचा। वहाँ हमारी बात सुशील के भाई अनिल, उनकी पत्नी व कई स्थानीय लोगों से हुई।

भजन के ऊपर शुरू हुआ विवाद

अनिल ने हमें बताया कि मंगलवार (अक्टूबर 27, 2020) को उनके समाज की एक बच्ची छोटे से स्पीकर में भजन चला रही थी, जिसे सुन दूसरे पक्ष के लोगों ने उसे वहाँ से भगाने का प्रयास किया। जब लड़की के पड़ोसी मामला सुलझाने गए तो वह सभी दूसरे पक्ष की नजरों में चढ़ गए और सब ने मिल कर झगड़ा करने का प्लॉन बनाया।

ऐसे में जब अनिल, सुनील इस बात को संभाल कर अपने घर लौटे तो सुशील की पत्नी शौच के लिए बाहर निकली, तभी दूसरे पक्ष ने उनके साथ बदसलूकी की।

इस पर सुशील के घरवाले उन लोगों के पास गए और समझाया कि यह सब नहीं करना चाहिए। बस इतनी बात चल ही रही थी कि अचानक वहाँ 7-8 लोग आ गए और चाकूओं से ताबड़तोड़ वार करना शुरू कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने हमें बताया कि ये चाकू बिलकुल वैसे ही थे जिनसे बकरे काटे जाते हैं। 

घायल सुनील

अनिल कहते हैं कि उनकी एक भी बात नहीं सुनी गई। दूसरे पक्ष के सभी लोगों ने ताबड़तोड़ हमला किया। मुख्य आरोपित चाँद के पिता ने इस बीच कहा- मारो सालों को। अनिल बताते हैं कि उन पर व उनके भाई पर हमला करने के लिए दो लोगों ने उन्हें पकड़ा हुआ था, इसके बाद उन पर चाकू चलाए जा रहे थे। अनिल आरोपितों का नाम बताते हुए कहते हैं उन लोगों में चाँद, हसीन, अब्दुल सत्तार, अफाक, शहनवाज, शाजिद को मिला कर कुल 7-8 आदमी थे।

मुख्य आरोपित चाँद और उसके परिजन (कुछ की तस्वीरें अभी मौजूद नहीं हैं।)

अनिल के मुताबिक वह लोग इस संबंध में केस दर्ज करवा चुके हैं लेकिन अभी तक पुलिस उनके घर पर नहीं आई है। कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बस कहा जा रहा है कि आरोपित के माँ, पिता समेत चार लोगों को पकड़ा गया है।

सुशील के बड़े भाई के अनुसार, यह गिरफ्तारी वाली बात सिर्फ़ पुलिस की ओर से हो रही हैं, उन्हें नहीं पता है कि कौन लोग पकड़े गए हैं। बस उन्हें यह मालूम है कि मुख्य आरोपित फिलहाल फरार हैं।

घायल अनिल

अनिल ऑपइंडिया से बात करते हुए माँग करते हैं कि आरोपितों को फाँसी दी जाए। जिस तरह से उनका भाई गया है वैसे ही आरोपितों को सजा हो। कुछ अन्य लोग सुशील की पत्नी के लिए आर्थिक सहायता की भी माँग कर रहे हैं। वहीं अनिल का भी कहना है कि पुलिस की ओर से भी सुशील की पत्नी को आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया गया है।

सुशील की पत्नी ने कहा- फाँसी दो या आरोपितों को हमें दे दो

बता दें कि मृतक की शादी मात्र तीन साल पहले हुई थी। उनके घर पर उनकी व उनकी पत्नी की तस्वीरें बताती हैं कि दोनों का नया जीवन खुशहाल था। दोनों की एक सवा साल की बेटी भी है। लेकिन मंगलवार को हुए एक विवाद ने सब कुछ बदल कर रख दिया। कुछ कट्टरपंथियों के कारण अब सुशील दोबारा अपने परिवार के पास नहीं लौटेंगे।

सुशील के घर से ली गई तस्वीरें

अपने पति के लिए न्याय की गुहार लगा रही सुशील की पत्नी अपनी मासूम बेटी के साथ सड़क पर बैठ कर प्रदर्शन कर रही है। ऑपइंडिया से उस दिन विवाद का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि वह उस दिन घर से थोड़ी दूर पर बने शौचालय में शौच के लिए जा रही थी। उनके सिर पर पल्लू डला हुआ था। तभी चाँद, उसका भाई, उसका पिता और उसके दोस्त सब लोग वहाँ खड़े हुए थे। उन्हें नहीं पता था कि सब लोग क्यों खडे़ हुए हैं।

वह आगे बढ़ीं तो यह लोग उनकी ओर दौड़े, उनसे छेड़छाड़ करने लगे, उन्हें उठाने की कोशिश की गई। जब वह चिल्लाईं तो उनके दोनों जेठ (अनिल, सुनील) उन्हें बचाने आए। सबने पूछा कि आखिर क्यों हमारे घर की महिला को छेड़ रहे हो। इतने पर ही चाँद ने चाकू निकाल लिया। उसके दोस्त भी चाकू लेकर वहाँ कूद गए। सीधे उनके जेठों पर वार कर दिया गया। इतने पर सुशील की पत्नी भागकर घर पहुँची और अपने पति को सारी बात बताई।

स्थानीयों ने दिखाई वो जगह जहाँ सुशील ने तोड़ा दम।

सुशील उस समय पैर के दर्द में कराह रहे थे, मगर सारी बात सुन कर वह भी बीच-बचाव करने गए, तो चाँद, उसके भाई, अब्बू, चाचा और दोस्त ने उन पर हमला किया। वंदना पाँव पकड़-पकड़ कर अपनी पति की जान की भीख माँगती रहीं, लेकिन चाँद के सिर पर खून सवार था। उसे और उसके घरवालों को कुछ नहीं दिखा। उन सबने ताबड़तोड़ वार किया जिससे सुशील ने वहीं दम तोड़ दिया।

सुशील की पत्नी रो-रो कर अपने पति के लिए इंसाफ माँग रही हैं। उनकी उंगली भी इस घटना में कट गई है। वह कहती हैं कि मुख्य आरोपित चाँद हैं और वही फरार चल रहा है। उसे पकड़ा जाए, उसे फाँसी हो। पीड़ित महिला प्रशासन से कहती है- “आपके बस की न हो तो आप हमें दे दो, हम मारेंगे उसे, उसने हमारे पति को तड़पा तड़पा कर मारा है।”

सोशल मीडिया पर उठ रही इंसाफ की माँग

भाजपा नेता तजिंदर पाल बग्गा ने इस मुद्दे पर ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, “आदर्श नगर जहाँ राहुल की हत्या हुई थी उसी स्थान से 100 मीटर दूरी पर कल 3 हिन्दू भाइयो को इस्लामिक जिहादियों द्वारा चाकू से गोदा गया जिनमें से सुशील की मौके पर मौत हो गई और गम्भीर रूप से घायल है। दो आरोपित और साथी अभी भी फरार है।”

भाजपा दिल्ली के ट्विटर अकॉउंट से भी इस मसले पर ट्वीट किया गया है। प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने प्रदर्शनस्थल पर पहुँचकर मृतक के परिजनों से मुलाकात की है। भाजपा का कहना है कि मुख्यमंत्री तो हमेशा की तरह परिवार वालों से नहीं मिलेंगे क्योंकि आरोपित उनका वोट बैंक है।

आकांक्षा और शोएब दोनों को 720 नंबर, बड़ी उम्र वाला शोएब टॉपर… CM योगी आकांक्षा को टॉपर बनाने के लिए ‘एक्शन’ में

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (28 अक्टूबर 2020) को मुख्य सचिव को एक आदेश दिया। आदेश में उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को कहें कि आकांक्षा सिंह को भी शोएब आफ़ताब के साथ-साथ राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में ‘ऑल इंडिया जॉइंट टॉपर’ घोषत किया जाए। बुधवार को ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आकांक्षा सिंह को साल 2020 की नीट परीक्षा में उत्कृष्ट अंक (पूरे अंक) हासिल करने के लिए सम्मानित भी किया। 

आकांक्षा सिंह को इस परीक्षा में ऑल इंडिया दूसरा पायदान हासिल हुआ था। इस मामले पर विवाद तब शुरू हुआ था, जब एनटीए ने उड़ीसा के शोएब आफ़ताब को पहला स्थान दिया था। जबकि ठीक उतने ही अंक पाने वाली आकांक्षा सिंह को दूसरा स्थान दिया गया था। शोएब आफ़ताब और आकांक्षा सिंह दोनों को ही 720 अंकों की परीक्षा में 720 अंक मिले थे। लेकिन उम्र को आधार बनाते हुए एनटीए ने शोएब आफ़ताब को पहला स्थान दिया था और आकांक्षा सिंह को दूसरा स्थान। 

एनटीए की टाई ब्रेकिंग पालिसी (tie breaking policy) के अनुसार इस तरह के मामलों में जिन प्रतिभागियों की उम्र ज़्यादा होगी, उन्हें कम उम्र के प्रतिभागियों की तुलना में ज़्यादा प्राथमिकता मिलेगी। क्योंकि 18 साल के शोएब आफ़ताब की उम्र परिणाम जारी होने के बाद आकांक्षा सिंह की तुलना में ज़्यादा थी, इसलिए उसे रैंकिंग के मामले में प्राथमिकता मिली और उसे पहले स्थान पर रखा गया। 

योगी आदित्यनाथ ने आकांक्षा सिंह को सम्मानित किया और साथ ही साथ ऐलान भी किया कि उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार आकांक्षा सिंह की आगे की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएगी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि आकांक्षा सिंह उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का विषय हैं। आकांक्षा ने साबित किया है कि लड़कियाँ किसी भी मामले में लड़कों से कम नहीं हैं।

इसके बाद उन्होंने कहा, “आकांक्षा ने इच्छा जताई है कि वह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में प्रवेश लेना चाहती हैं। उत्तर प्रदेश सरकार उनकी पूरी पढ़ाई का खर्च उठाएगी।” 

इसके अलावा योगी आदित्यनाथ ने मुख्य सचिव को दिए गए आदेश में कहा कि वह आकांक्षा सिंह के परिवार से पूरे खर्च की जानकारी लें, जिससे उन्हें भविष्य में किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। इसके अलावा उन्होंने आकांक्षा और उसके भाई को उपहार स्वरूप एक टेबलेट भी दिया। 

आकांक्षा सिंह वायुसेना के सार्जेंट और प्राइमरी विद्यालय शिक्षिका की बेटी हैं। वह कक्षा 8 तक आईएएस अधिकारी बनना चाहती थीं लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि एम्स के माध्यम से लोगों की मदद कर सकती हैं, तब उन्होंने इसकी तैयारी करने का निर्णय लिया। योगी आदित्यनाथ आकांक्षा सिंह के गाँव की सड़क का नाम भी उसके नाम पर रखने का फैसला किया है।      

पीपराकोठी कृषि केन्द्र: एक प्रयास पूरे इलाके की तस्वीर बदल देता है | Video On Piprakothi Krishi Kendra

बिहार के मोतिहारी से 15 किलोमीटर दूर पीपराकोठी क्षेत्र में बने कृषि केंद्र ने पूरे इलाके की कायाकल्प को पलट कर रख दिया है। इस केंद्र का पूरा नाम कृषि विज्ञान केंद्र एवं पशु प्रजनन उत्कृष्ठता केंद्र है।

स्थानीय लोगों से बातचीत करके पता चलता है कि उनके भीतर इस योजना के कारण कितना अधिक संतोष है और उन्हें इसकी वजह से कैसे रोजगार मिल रहा है। यह केंद्र यह भी बताता है कि इलाके में लोगों का झुकाव भाजपा की ओर आज भी आखिर क्यों बना हुआ है।

पूरी ग्राउंड रिपोर्ट इस लिंक पर क्लिक करके देखें

अल्लाह हू अकबर चिल्लाते हुए आतंकी हमला: फ्रांस में एक महिला समेत 3 लोगों का काट दिया गला

फ्रांस के नीस शहर में स्थित कैथेड्रल चर्च में एक आतंकवादी घटना हुई है। इस आतंकी घटना में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर बोलते हुए कई लोगों पर धारदार हथियार से हमला किया। इस घटना में अभी तक 3 लोगों की जान जा चुकी है और कई घायल बताए जा रहे हैं। मरने वालों में एक महिला भी शामिल है, जिनका गला काट दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह घटना 29 अक्टूबर 2020 की सुबह 9 बजे नीस शाहर के नोट्रे डेम (Notre Dame) चर्च के पास हुई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने मामले पर कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने हमलावर को गिरफ्त में ले लिया है।

इस घटना पर ट्वीट करते हुए शहर के मेयर क्रिश्चन एसट्रोसी (Christian Estrosi) ने कहा, “मैं पुलिस के साथ घटनास्थल पर पहुँच गया हूँ। पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जाँच भी शुरू कर दी है। अभी तक जितनी जानकारी सामने आई है उसके आधार पर इसे आतंकवादी हमला कहा जा सकता है।” इसके अलावा मेयर ने अपने ट्वीट में घटनास्थल की तमाम तस्वीरें भी साझा की।

इसके बाद फ्रांस के मंत्री गेराल्ड डरमनिन (Gerald Dermanin) ने भी इस घटना पर ट्वीट किया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि लोग घटनास्थल पर इकट्ठा होने से बचें क्योंकि पुलिस वहाँ जाँच कर रही है। हमले के ठीक बाद एक बैठक भी बुलाई गई थी, जिसमें आम लोगों से निवेदन किया गया कि वह जारी किए गए दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन करें। इस मुद्दे पर शहर के मेयर और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक के बाद आगे की कार्यप्रणाली तय होगी। 

गौरतलब है कि 16 अक्टूबर को पेरिस में इतिहास के शिक्षक सैमुअल पैटी की कट्टरपंथी हमले में हत्या कर दी गई थी। उन्होंने अपनी कक्षा में छात्रों को पैगंबर का विवादित कैरिकेचर दिखाया था। इसके बाद ही एक 18 साल के मुस्लिम युवक ने उन पर हमला बोल दिया और उनका सिर कलम कर दिया। इस घटना की निंदा करते हुए फ्रांस समेत पूरी दुनिया में शिक्षक के समर्थन में आवाजें उठने लगीं।

फ्रांस ने इस्लाम के सामने घुटने न टेकने का ऐलान किया। फ्रांस के ऑसिटैन क्षेत्र (Occitanie region) के दो टाउन हॉल मोंटपेलियर (Montpellier) और टूलूज़ (Toulouse) के बाहर शिक्षक सैम्युएल पैटी को याद करते हुए और अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थन करने के लिए पैगम्बर मोहम्मद के उन कार्टूनों का 4 घंटे तक प्रदर्शन किया गया, जिनको लेकर शार्ली एब्दो के कर्मचारियों का 2015 में नरसंहार किया गया था। सबसे पहले इन कार्टूनों का प्रकाशन शार्ली हेब्दो पत्रिका में ही किया गया था

नोट: घायलों की संख्या ज्यादा है, मृतकों की संख्या बढ़ने पर इस स्टोरी पर अपडेट किया जाएगा।