मध्य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों के लिए 3 नवंबर को होने जा रहे उपचुनाव में नेताओं के बीच जुबानी जंग और तेज होती जा रही है और बयानों का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। वहीं शनिवार (अक्टूबर 31, 2020) को अशोकनगर जिले के शडोरा में एक सार्वजनिक रैली को संबोधित करते हुए, भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बयान को लेकर उन्हें जमकर लताड़ा।
कॉन्ग्रेस नेता की आलोचना करते हुए बीजेपी नेता सिंधिया कहते हैं, “कमलानाथ अशोकनगर आते हैं और मुझे कुत्ता कहकर नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं।” ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जोर देकर कहा, “कमलनाथ, ध्यान से सुनो। हाँ, मैं कुत्ता हूँ क्योंकि जनता ही मेरा मालिक है, जिसकी मैं ईमानदारी से सेवा करता हूँ।”
#WATCH: Kamal Nath ji calls me a dog, yes I am a dog because I am a servant of the people… because a dog protects its owner and if someone brings corrupt and ill-intended policies then this dog will attack that person: BJP leader Jyotiraditya Scindia #MadhyaPradeshpic.twitter.com/UyY4xQHdZl
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, “कमलनाथ जी ने मुझे कुत्ता कहा। हाँ, मैं कुत्ता हूँ क्योंकि मेरा मालिक मेरी जनता है और मैं उसकी सेवा करता हूँ। कमलनाथ जी मैं कुत्ता हूँ क्योंकि कुत्ता अपने मालिक और अपने दाता की रक्षा करता है। हाँ, कमलनाथ जी मैं कुत्ता हूँ क्योंकि अगर कोई भी व्यक्ति मेरे मालिक को ऊँगली दिखाए और मालिक के साथ भ्रष्टाचार और विनाशकारी नीति दिखाए तो कुत्ता काटेगा उसे। मुझे गर्व है कि मैं अपने जनता का कुत्ता हूँ।”
रैली के अलावा सिंधिया ने ट्विटर पर भी लिखा, “अशोक नगर मेरे दिल में बसता है, और यहाँ की जनता मेरा परिवार है। यहाँ की माटी से मेरा खून का संबंध है और मैं अपने जीवन के आखिरी सांस तक आप लोगों की सेवा करता रहूँगा।” उन्होंने अशोक नगर के शाडोरा के भाजपा प्रत्याशी श्री जजपाल जज्जी जी को वोट देने की अपील भी की।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में 28 सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं, जिनमें से 22 सीटें कॉन्ग्रेस के बागी विधायकों की थीं, जिन्होंने भाजपा को हराया था। भाजपा को विधानसभा में बहुमत हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए सिर्फ 9 सीटों की आवश्यकता है। वहीं 28 में से 16 सीटें ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में आती हैं, जो ज्योतिरादित्य सिंधिया का गढ़ माना जाता है।
बता दें सिंधिया ने कॉन्ग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था और इस साल मार्च में भाजपा में शामिल हुए थे। सिंधिया ने कॉन्ग्रेस से अलग होने पर कहा था कि कॉन्ग्रेस अब वह पार्टी नहीं रही जो वह हुआ करती थी।
मुंगेर में दुर्गा पूजा के बाद माता के प्रतिमा के विसर्जन के दौरान पुलिस बर्बरता की ख़बरें सामने आईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि 2 लोग मरे हैं और कई गायब हैं। इस दौरान किसी भी मेनस्ट्रीम मीडिया संस्थान ने जिले के ‘बड़ी दुर्गा पूजा समिति’ के पक्ष को सामने नहीं रखा, जिसके पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने इस वारदात का दंश झेला। उनके आरोप गंभीर हैं और पुलिस के रवैये पर कई सवाल भी उठाता है, जिसके जवाब अब तक नहीं मिले हैं।
यहाँ हम आपको कुछ ऐसी तस्वीरों और वीडियोज से भी रूबरू कराएँगे, जिन्हें देख कर आपको भी लगेगा कि वो मुंगेर के दुर्गा पूजा समिति के कार्यकर्ताओं और भक्तों द्वारा झेले गए अत्याचार की गवाही दे रहे हैं। माँ दुर्गा सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ किस तरह श्रद्धालुओं से विहीन, निर्जन सड़क पर अकेली पड़ी थीं – ये दृश्य किसी भी हिन्दू के कलेजे पर वार करेगा। लेकिन, ये एक ऐसी सच्चाई से जिससे आप सबको रूबरू होना चाहिए।
मुंगेर में पुलिसकर्मी के हाथ में पिस्टल: समिति का दावा
सबसे पहले हमने बात की उस शख्स से, जो मुंगेर की ‘बड़ी दुर्गा पूजा समिति’ के सोशल मीडिया एकाउंट्स को देखते हैं। यहाँ कुछ कारणों से हम उनका नाम गुप्त रख रहे हैं, क्योंकि उन्हें अब भी अपनी सुरक्षा का भय है और अपने साथियों के साथ हुए व्यवहार को वो भूले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि समिति ने प्रशासन से गुहार लगाई थी कि उन्हें गुरुवार (अक्टूबर 29, 2020) को माता की प्रतिमा के विसर्जन की अनुमति दी जाए।
उनका कहना है कि उन्होंने जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय और PMO तक को भी सोशल मीडिया पर टैग कर के गुहार लगाई कि वो अक्टूबर 26 को विसर्जन नहीं करना चाहते हैं और नियमानुसार ही उन्हें विसर्जन की तारीख तय करने का अधिकार दिया जाए। इसके पीछे का तर्क देते हुए वो कहते हैं कि समिति को अंदेशा था कि दुर्गा पूजा का विसर्जन 26 को होगा तो सारी प्रक्रिया पूरी करते-करते इसके अगले दिन के 12-1 बज जाएँगे।
वीरान पड़ी सड़क, अकेली पड़ी माँ की प्रतिमा
इसके अगले ही दिन बुधवार को चुनाव था। बिहार विधानसभा चुनाव में प्रथम चरण का मतदान इसी दिन होना था। ऐसे में समिति का आरोप है कि प्रशासन सारे नियम-कायदों को ताक पर रखते हुए हड़बड़ी में विसर्जन कराना चाहता था। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि उन्होंने जिला प्रशासन से बात कर के कहा कि या तो वो चुनाव बाद में करा लें, या फिर उन्हें तय तिथि व समय पर माता की प्रतिमा का विसर्जन करने दिया जाए।
विसर्जन से पहले हुए बैठक में भी समिति के सदस्यों ने विचार-विमर्श करते हुए कहा था कि प्रशासन लोगों के आस्था के खिलाफ कार्य नहीं करें, क्योंकि नियम तथा आस्था को तोड़ कर समिति किसी भी प्रकार का कार्य नहीं करेगी। उन्होंने निर्णय लिया था कि सरकार के दिशा-निर्देशों को देखते हुए मंदिर परिसर की सजावट की जाएगी तथा बिजली के बल्ब झालर बाजार क्षेत्र में लगाए जाएँगे। समिति नियमानुसार प्रशासन के साथ सहयोग के लिए भी तैयार थी।
बता दें कि बिहार में माँ की प्रतिमा को विदाई के समय ‘खोइछा’ दिया जाता है। इसे ‘खोइछा पूजन’ कहा जाता है। प्रतिमा को सिन्दूर लगा कर महिलाएँ कुछ वस्तुएँ ‘खोइछा’ के रूप में देती हैं और अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान मानती हैं। आरोप है कि प्रशासन ने ये भी नहीं होने दिया। आखिर मुंगेर की दुर्गा पूजा समिति 29 को ही विसर्जन कराने के लिए क्यों गुहार लगा रही थी? इसके जवाब में समिति के सोशल मीडिया हैंडलर कहते हैं,
“हमारी प्रतिमा इस तरह से हड़बड़ी में नहीं जाती है। अगर अक्टूबर 29 को विसर्जन की अनुमति दी जाती तो हमारा दुर्गा पूजा भी हो जाता और मतदान भी संपन्न हो गया होता। नीतीश कुमार, PMO और चुनाव आयोग के पास हमने सोशल मीडिया के जरिए गुहार लगाई। जिला प्रशासन के पास हमने ज्ञापन दिया। हम पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। प्रतिवर्ष विजयादशमी के दिन हमारी प्रतिमा उठती है और उसके अगले दिन विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की जाती है। हम लोग परंपरागत रूप से जैसे कराते आ रहे थे, हमने वैसे ही प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति माँगी। इस बार हमें विजयादशमी से 1 दिन पहले ही मूर्ति उठाने के लिए दबाव बनाया गया।”
माँ दुर्गा के साथ ही अन्य प्रतिमाएँ भी पड़ी हुई थीं
मुंगेर की ‘बड़ी दुर्गा पूजा समिति’ के पदाधिकारियों का कहना है कि कोतवाली थाना सहित अन्य थानों के पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक बाबू लोग ‘अपना रूतबा दिखाने लगे’ और दबाव बनाने लगे। समिति के सोशल मीडिया हैंडलर ने आरोप लगाया कि तब मुंगेर की एसपी रहीं लिपि सिंह कहने लगीं कि उनकी बताई तारीख को 12 बजे के भीतर ही विसर्जन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। उन्होंने कहा कि समिति के सदस्यों की लिपि सिंह से व्यक्तिगत रूप से बात हुई थी और उनका रवैया काफी सख्त था।
समिति का कहना है कि उनकी तरफ से हर प्रशासनिक दफ्तर में चिट्ठी पहुँचाई गई कि उनके साथ गलत हो रहा है, उन्हें समय दिया जाए – लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। आखिर तनाव का माहौल कैसे बना और संघर्ष कैसे शुरू हुआ? इसके जवाब में उन्होंने बताया कि मुंगेर के अम्बे चौक पर माता की प्रतिमा को रोका जाता है क्योंकि वहाँ माँ का मायका माना जाता है और वहाँ थोड़ी देर पूजा-अर्चना होती है।
समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि उन्होंने कई बड़े मीडिया संस्थानों को फोटोज और वीडियोज भेजे, जो उनके हिसाब से पुलिस की क्रूरता को बयान करते हैं – लेकिन, कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। हमने जिनसे बात की, उनमें दुर्गा पूजा कार्यक्रम का कैमरा भी हैंडल किया था, अतएव वो पूरी घटना के साक्षी भी हैं। वो बताते हैं कि इसके बाद मुंगेर गोला पर प्रतिमा आती है, जहाँ पर ‘मिलन’ होता है। दुर्भाग्य से वहाँ पर 4 बाँस टूट गए। दुर्गा पूजा समिति ने हमें बताया,
“अगर आप प्रतिमा के साथ जोर-जबरदस्ती कीजिएगा, अगर उन्हें समय से पहले विसर्जित करने के लिए दबाव बनाइएगा – तो हमारी प्रतिमा ऐसे नहीं जाती है। हमारे कहार ही उस प्रतिमा को उठाते हैं, जिनकी संख्या 32 होती है। हमारे कहारों पर लाठीचार्ज किया गया। श्रद्धालुओं को तितर-बितर कर दिया गया। किसी तरह हमने कहारों को वापस बुलाया। हमने उनसे गुजारिश की। माता का चेहरा एकदम उदास सा हो गया था, ऐसा भान हो रहा था। इसके बाद बाटा चौक पर हमारे साथ ऐसा दुर्व्यवहार हुआ कि पूरा मुंगेर देख कर रो पड़ा। फायरिंग प्रशासन ने ही की है। पुलिसकर्मी इंसास राइफल और पिस्टल लहराते नज़र आए।”
प्रशासन ने आखिर इतनी बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में क्यों लिया? इसके जवाब में समिति के पदाधिकारी कहते हैं कि उनके कम से कम 150 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था और उनके साथ क्रूरता की गई। उनका कहना है कि इनमें से कई अभी भी अलग-अलग थानों में पुलिस कस्टडी में हैं। एक और आरोप ये लगा है कि उनमें से जिन्हें छोड़ा भी गया है, उनके मोबाइल फोन्स पुलिस ने अपने पास रख लिए।
समिति के लोगों का कहना है कि दोषी पुलिसकर्मियों ने खुद को बचाने के लिए ही ऐसा किया है। ताकि फायरिंग या लाठीचार्ज के दौरान की उनकी तस्वीरें वीडियोज बाहर न आ जाएँ। उनका एक और बड़ा आरोप ये है कि उनमें से कई लड़कों को एसपी लिपि सिंह के सामने लाकर और उन्हें जम कर पीटा गया। उनका कहना है कि उनलोगों के हाथ और सर पर लिपि सिंह के सामने ही बेरहमी से वार किया गया।
बता दें कि जदयू के राज्यसभा सांसद और पूर्व आईएएस अधिकारी लिपि सिंह के पति सुहर्ष भगत भी आईएएस अधिकारी हैं और वो फ़िलहाल बाँका के डीएम हैं। ये चर्चा आम है कि चुनाव के दौरान ट्रांसफर के क्रम में लिपि सिंह का स्थानांतरण क्यों नहीं किया गया? उनके जदयू कनेक्शंस के बावजूद उन्हें चुनावी ड्यूटी पर लगाने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अनंत सिंह पर कार्रवाई के कुछ महीने बाद वो एएसपी से एसपी बनी थीं। फ़िलहाल चुनाव आयोग ने उन्हें मुंगेर से हटा दिया है।
बिहार चुनावी यात्रा के दौरान ऑपइंडिया के हाथ बिहार के मधुबनी के बाबूबरही प्रखंड के बलराजपुर गाँव का एक वीडियो लगा। इसमें बच्चन शर्मा नाम का शख्स खुद को रिपोर्टर बताता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक यह शख्स आस-पास के गाँव में घूमता था और लोगों को ईसा मसीह की प्रार्थना करने के लिए प्रेरित करता था। वहाँ के लोगों ने ऑपइंडिया से भी पादरी के वहाँ आने की पुष्टि की।
ऑपइंडिया ने भी पादरी से बातचीत की। यह पूछने पर कि वो क्या काम करते हैं, उनका कहना था कि वो सोशल सर्विस करते हैं। धर्म परविर्तन को लेकर सवाल किए जाने पर बच्चन शर्मा का कहना था कि वो इसके बारे में नहीं जानते कि यह क्या होता है। उनका कहना था कि वो किसी धर्म को नहीं मानते, लेकिन ईसा मसीह को मानते हैं।
इस्लाम अपने क्रूरतम रूप में दिख रहा है। यूरोप को भी झेलना पड़ रहा है। हमने उसके क्रूर रूप को भारत में कई बार देखा है। चाहे साबरमती एक्सप्रेस में 59 हिंदुओं जलाने की बात हो या फिर हाल ही में दिल्ली दंगों के दौरान हिंदुओं को घेरकर मारने के लिए रची गई साजिश।
फ्रांस के नीस शहर में एक महीने के अंदर दो आतंकी हमले हुए। 3 लोगों की गर्दन काट दी गई थी। फिर फ्रांस के चर्च में बम रखने की बात सामने आई। शार्ली एब्दो के कार्टून के साथ ही सैमुअल पैटी नाम के शिक्षक के गला रेतने वाली खबर से भी हम सभी अवगत हैं।
इसी तरह रुस में 16 साल का एक लड़का अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए चाकू मारने जा रहा था कि पुलिस ने उसे मार गिराया। बांग्लादेश में एक शख्स का पैर कुरान से टकरा गया। 4-5 लोग उसे मस्जिद ले गए, फिर घसीट कर बाहर लाया, मारा-पीटा और फिर आग के हवाले कर दिया।
ऑपइंडिया ने नल-जल योजना से ले कर भूजल स्तर को सही करने के लिए किए गए प्रयासों पर वरिष्ठ भाजपा नेता और निवर्तमान PHED मंत्री, एवं बेनीपट्टी विधायक प्रत्याशी विनोद नारायण झा से बातचीत की। इस दौरान हमने उनसे हर-घर-जल नल योजना की मौजूदा स्थिति के बारे में जानने की कोशिश की। हमने ये भी जानना चाहा कि लक्ष्य कब तक पूरा होने की उम्मीद है।
हमने उनसे तेजस्वी यादव को लेकर भी सवाल किए कि उन्होंने रोजगार की बात की है। ऐसा लगता है कि युवाओं के बीच तेजस्वी की लोकप्रियता बढ़ रही है, तो क्या ये पार्टी के लिए चिंता का विषय है? इस पर विनोद नारायण झा का कहना था कि वो चाँदी का चम्मच लेकर पैदा हुए, उन्हे कभी संघर्ष नहीं करना पड़ा।
फ्रांस में हुए आतंकी हमले पर विवादित शायर मुनव्वर राणा ने विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने हमलावर का बचाव करते हुए कहा कि अगर उसकी जगह मैं होता तो मैं भी वही करता। किसी को इतना मजबूर न करो कि वह कत्ल करने के लिए तैयार हो जाए।
मुनव्वर राणा ने जी न्यूज से बात करते हुए कहा, “अगर अभी कोई शख्स मेरे बाप का कार्टून कोई ऐसा बना दे कोई गंदा, मेरी माँ का कोई ऐसा गंदा कार्टून बना दे, तो हम तो उसको मार देंगे। अगर कोई हमारे हिंदुस्तान में हमारे देवी-देवता का, माँ सीता का या भगवान राम का ऐसा कोई कार्टून बना दे जो गंदा हो, आपत्तिजनक हो, तो हम उसको मार देंगे।”
याद दिला दें कि इस वैचारिक आतंकवादी को साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया जा चुका है। pic.twitter.com/3g9c07OAsM
उन्होंने आगे कहा, “हिंदुस्तान में हजारों सालों से ऑनर किलिंग को जायज मान लिया जाता है, कोई सजा नहीं होती है। तो फिर आप उसको नाजायज कैसे कह सकते हैं।”
मुनव्वर ने प्रधानमंत्री मोदी के आतंकवाद फैलाने वाले बयान पर भी निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ये राफेल की दरकार है, जो उन्हें ऐसा बयान देना पड़ा। मुनव्वर के मुताबिक, “मजहब वालों को चिढ़ाने के लिए ऐसा कार्टून बनाया गया। दुनिया में हजारों साल से ऑनर किलिंग होती है, अखलाक मामले में क्या हुआ, लेकिन तब किसी को तकलीफ नहीं हुई। किसी को इतना मजबूर न करो कि वह कत्ल करने पर मजबूर हो जाए।”
अपने इस विवादित बयान के बाद आज तक के साथ खास बातचीत में मुनव्वर राणा ने कहा कि मजहब एक खतरनाक खेल है और इससे इंसानों को दूर रहना चाहिए। शिक्षक का काम पढ़ाना है वो मोहम्मद साहब का कार्टून बनाकर क्यों दिखाएगा। उसे तो सिर्फ मोहम्मद साहब से दिक्कत है।
उन्होंने आगे कहा, “मैंने फ्रांस हिंसा को जायज नहीं ठहराया। मेरी बात को आप समझ नहीं पाती हैं या फिर मेरी बात के दूसरे मतलब निकालती हैं। मैं यह कह रहा हूँ कि यहाँ से मकबूल फिदा हुसैन को देश छोड़कर इसलिए भागना पड़ा क्योंकि उन्होंने हिंदू मजहब से छेड़छाड़ की थी। नतीजे के तौर पर अपनी जान बचाकर देश छोड़ नहीं भागते तो उन्हें अपनी जान गँवानी पड़ती। वो यहाँ से चले गए और 90 साल के बूढ़े आदमी ने गैर मुल्क में दम तोड़ा।”
उन्होंने कहा कि मजहब एक खतरनाक खेल है और इससे आदमी को दूर रहना चाहिए। दुनिया में कार्टून इसलिए बनाए जाने लगे कि दुनिया में हर शख्स एक दूसरे को गालियाँ नहीं दे सकता था। कार्टून बनाने का मतलब है कि अल्लाह की बनाई हुई शक्ल को आप बिगाड़ कर पेश करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अध्यापक मोहम्मद साहब का कार्टून बनाकर क्यों दिखाएगा। उसे दिखाना है तो वो खुदा का कार्टून दिखाए, हजरत ईसा का कार्टून दिखाए, हजरत मरियम का कार्टून दिखाए लेकिन वो नहीं दिखाएँगे। इसलिए कि वो खुद भी खुदा को भी मानता है। उसको सिर्फ मोहम्मद साहब से दिक्कत है।
कत्ल करने के मामले में मुनव्वर राणा ने कहा कि यह बुरा हुआ। मजहब के नाम पर पूरी दुनिया में ये रोजाना हो रहा है। आतंकवाद तो आतंकवाद होता है। धर्म बड़ा है या इंसान बड़ा है, इस सवाल पर राना ने कहा कि इंसान नहीं है तो धर्म नहीं है। इंसान के बगैर धर्म का तसव्वुर नहीं हो सकता।
गौरतलब है कि पिछले दिनों मुनव्वर राणा की बेटी उरूसा राणा ने कॉन्ग्रेस का दामन थाम लिया। उन्हें पार्टी ने लखनऊ से कॉन्ग्रेस महिला समिति की नई उपाध्यक्ष बनाया है। मुनव्वर राणा की एक और बेटी फौजिया राणा भी कुछ दिनों पहले बिहार कॉन्ग्रेस में शामिल हुई थीं।
मुनव्वर राणा ने राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नवम्बर 2019 में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा था, “भारत के पूर्व CJI रंजन गोगोई जितने कम दाम में बिके, उतने में हिंदुस्तान की एक ₹#डी भी नहीं बिकती है।“
उन्होंने एक विवादित ट्वीट करते हुए लिखा था कि भारत में 35 करोड़ इंसान और 100 करोड़ जानवर रहते हैं। मुनव्वर राणा ने यह ट्वीट भाजपा नेता संबित पात्रा को सम्बोधित करते हुए भारत में रहने वाले लोगों को लेकर लिखा था। शायर मुनव्वर ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से लिखा था, “डियर संबित, कॉन्ग्रेस की जवानी में तो आप गब्हे पे रहे होंगे (गब्हे का मतलब आप उड़ीसा में नहीं, यूपी में पूछना)। लेकिन कोरोना पर सरकार की नाकामी ने मेरी इस बात को सही साबित किया कि भारत में 35 करोड़ इंसान और 100 करोड़ जानवर रहते हैं, जो सिर्फ वोट देने के काम आते हैं।”
बता दें कि पिछले दिनों फ्रांस में एक टीचर ने क्लास के अंदर पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाया था। जिसके बाद एक स्टूडेंट ने उस टीचर की हत्या कर दी। हालाँकि बाद में उस स्टूडेंट को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था। इस वारदात के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने इसे इस्लामी आंतकवाद करार दिया और कहा कि इस्लाम हमारा भविष्य हथियाना चाहता है, जो कभी नहीं होगा। साथ ही उन्होंने पैगम्बर मोहम्मद के कार्टून जारी रखने की बात कही थी।
सोशल मीडिया पर पाकिस्तान में हो रही जूम बैठक का एक वीडियो वायरल हो रहा जिसमें लाइव ज़ूम मीटिंग में भगवान राम और भारत के राष्ट्र गान को बैकग्राउंड में बजते हुए सुना जा सकता हैं। ऐसी स्थिति में मीटिंग में शामिल लोग सन्न रह गए और एक दूसरे का ऑडियो बंद करने की सलाह देने लगे। यह घटना पाकिस्तानी सेना अधिकारियों के लिए बहुत बड़ी शर्मिंदगी है। बता दें कि इस वीडियो को लेकर कहा जा रहा है कि, इस ज़ूम मीटिंग को सोशल मीडिया पर हिंदू समर्थकों द्वारा हैक किया गया था।
हैकर्स द्वारा बाधित की गई मीटिंग इस्लामिक रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित की गई थी। इस वेबिनार में आगामी अमेरिकी चुनाव के संबंध में देश के भविष्य पर चर्चा करने के लिए कई पाकिस्तानी अधिकारियों ने भाग लिया था।
जैसे ही मीटिंग की शुरुआत हुई और होस्ट ने बैठक में शामिल सभी लोगों को म्यूट करने को कहा वैसे ही ट्रेड महासभा नाम के हिंदू समर्थक ग्रुप ने तुरंत ही भगवान राम, हनुमान और देश भक्ति गीत चलाना शुरू कर दिया।
आपको बता दें कि कुछ देर तक तो लोगों को समझ ही नहीं आया कि आखिर में पाकिस्तान में हो रही इस बैठक में श्रीराम के भजन और भारत का राष्ट्रगान जन गण मन कहाँ से बजने लगा, वो भी तब जब मीटिंग भारत विरोधी विषय पर हो रही हो और जब तक उन्हें कुछ समझ आता तब तक इस मीटिंग में कई भजन और भारत के देशभक्ति के गीत चल चुके थे।
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद भारतीय यूजर्स पाकिस्तान के जमकर मजे ले रहे हैं। वे फेसबुक पर नदीम आबिद के जूम मीटिंग के लाइव के नीचे कमेंट करके पाकिस्तान पर हँसी उड़ा रहे हैं। वहीं, ट्विटर पर भी यह वीडियो काफी वायरल हो रहा है।
मीटिंग हैक होने के बाद वेबिनार के होस्ट ने टेक्निकल समस्याओं का हवाला देना शुरू कर दिया। साथ ही होस्ट ने सभी लोगों से कहा कि हम कुछ देर बाद वापस से इसे शुरू करेंगे।
यह पहली बार नहीं है जब भारतीय हैकर्स ने पाकिस्तानी जूम मीटिंग को हैक किया है और इससे उन्हें भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है।
गौरतलब है कि इस हफ्ते के मंगलवार को पाकिस्तानी राजनयिकों के एक समूह ने कुछ स्वघोषित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पाकिस्तान समर्थक लोगों के साथ मिलकर ‘जूम’ पर ऑनलाइन मीटिंग का एक कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें तथाकथित ‘भारतीय कब्जे में कश्मीर के 72 साल’ पर चर्चा की गई थी।
दिलचस्प बात यह है कि, अमेरिका के इस्लाम समर्थक सीजे वेर्लेमैन भी कश्मीर में कथित भारतीय अत्याचारों पर चर्चा के लिए बैठक का हिस्सा थे। इस मीटिंग में कश्मीर को लेकर काफी कुछ गलत कहा गया। ढाई घंटे से ज्यादा लंबे इस वीडियो में 47 मिनट के करीब हैकरों ने जूम मीटिंग पर धावा बोला। इस समय डॉ वलीद मलिक मीटिंग को संबोधित करते हुए कश्मीर पर जहर उगल रहे थे। तभी हैकरों ने उनके झूठे भारत विरोधी बयानों को दबाने के लिए बैठक में धावा बोल दिया।
सबसे पहले लगभग 16:55 मिनट पर भारत समर्थकों ने भगवान हनुमान का गीत बजाया। जिसके बाद इस आयोजन में मौजूद आयोजकों और अन्य मेहमानों को इस बात की भनक लग गई थी कि मीटिंग में हिंदुत्ववादी कंटेंट को प्रसारित किया जा रहा है।
इसके बावजूद इन लोगों ने मीटिंग में झूठ बोलना जारी रखा। फिर भारत समर्थक हैकरों ने जय ”श्री राम”, ”राजतिलक की करो तैयारी, आ रहे हैं भगवाधारी, ”श्रीराम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में” जैसे गाने बजा दिए। जोकि पाकिस्तानी जूम मीट के दौरान लगभग दो मिनट तक बजता रहा, जिससे पाकिस्तानियों को चुप रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।
बिहार विधानसभा चुनाव में आए दिन नेताओं के मंच टूट रहे हैं। अभी हाल में ही जिन्ना की तस्वीर के मामले में चर्चा में आए जाले विधानसभा के कॉन्ग्रेस उम्मीदवार मशकूर अहमद उस्मानी का मंच भाषण के बीच में ही टूट गया था और आज (अक्टूबर 31, 2020) मुजफ्फरपुर के मीनापुर विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार करने पहुँचे जन अधिकार पार्टी (JAP) के अध्यक्ष का मंच धराशायी हो गया। उस वक्त पप्पू यादव मंच से भाषण दे रहे थे। इस घटना में उन्हें चोट आई है। उनके दाएँ हाथ में फ्रैक्चर में हो गया है।
इसका वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जिस वक्त मंच टूटा उस वक्त पप्पू यादव मीनापुर में मंच से एक चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। आम लोगों के साथ ही चुनावी सभा में पार्टी कार्यकर्ताओं की काफी भीड़ थी। क्षमता से अधिक कार्यकर्ता मंच पर चढ़ आए थे। जिस वक्त पप्पू यादव सभा को संबोधित कर रहे थे, उसी बीच मंच टूट गया और वो सीधे जमीन पर जा गिरे।
अचानक मंच टूटने की वजह से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। जल्दी से पप्पू यादव को उठाया गया। कार्यालय प्रभारी अजय जायसवाल के अनुसार इलाज के लिए पास के ही एक अस्पताल में ले जाया गया। दाहिना हाथ पर प्लास्टर किया गया। घटना के बाद जाप अध्यक्ष ने कहा, “जनता के प्यार और आशीर्वाद से मुझे ज्यादा चोट नहीं आई। लोगों की दुआएँ मेरे साथ है। मैं स्वस्थ होकर जल्द ही जनता के बीच पुन: लौटूँगा।”
पप्पू यादव की पार्टी का चंद्रशेखर आज़ाद की आज़ाद समाज पार्टी, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) और कुछ अन्य छोटे दलों के साथ गठबंधन है।
बता दें कि इससे पहले 15 अक्टूबर को सारण जिले में जनता दल यूनाइटेड के नेता चंद्रिका राय की चुनावी रैली में भी भीड़भाड़ के कारण मंच गिर गया था। गनीमत रही कि वहाँ कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ। राय के नामांकन पत्र दाखिल करने के तुरंत बाद सोनपुर विधानसभा क्षेत्र में यह घटना हुई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता राजीव प्रताप रूडी भी मंच पर मौजूद थे।
इसी तरह 29 अक्टूबर को कॉन्ग्रेस प्रत्याशी मशकूर अहमद उस्मानी का मंच भी टूटा था, जब वह दरभंगा में एक रैली को संबोधित कर रहे थे। इसी दिन बाद में चंपारण में एक और कॉन्ग्रेस रैली में एक मंच टूट गया था। उस वक्त पार्टी के नेता इमरान प्रतापगढ़ी और अखिलेश सिंह स्टेज पर थे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिहार विधानसभा चुनावी रैलियों के मंच पर कट्टरपंथियों और धर्म के नाम पर महिलाओं और बच्चों का शोषण करने वालों के विरोध में हुंकार भरा है। CM योगी ने मंच से खुलकर कहा- “देश कठमुल्लों के फतवों से नहीं बल्कि संविधान से चलेगा।”
बिहार राज्य के वैशाली में विपक्षियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए योगी ने कहा, ‘‘कॉन्ग्रेस के लोग चाहते ही नहीं थे नारी गरिमा की रक्षा हो और इसीलिए ये हमेशा किसी कठमुल्ले के कहने पर तीन तलाक की प्रथा को समर्थन करते थे। फतवा जारी होता था, कॉन्ग्रेस और राजद के लोग नाक रगड़कर उनके पास जाते थे और कहते थे ये जो फतवा जारी हुआ है इसी के अनुसार देश चलेगा।”
भीड़ से भी योगी ने पूछा, “आप बताइए ये देश फतवों से चलेगा या संविधान से?” उन्होंने आगे कहा, “देश संविधान से संचालित होता है। लेकिन तीन तलाक की कुप्रथा को समाप्त करने का काम किसने किया मोदी जी ने।”
बिहार चुनाव के मद्देनजर सिवान, वैशाली और मधुबनी के विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार करने पहुँचे योगी आदित्यनाथ ने विरोधियों को लताड़ते हुए कहा, “कॉन्ग्रेस और राजद फिर से जंगलराज स्थापित करना चाहते हैं।” बिहार की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार अपने युवाओं की ऊर्जा और नौजवानों की प्रतिभा के लिए जाना जाता है।
कट्टरपंथियों के खिलाफ सीधा हमला करते हुए CM योगी ने यह साफ कर दिया कि उत्तर प्रदेश हो या फिर बिहार भाजपा अपने मूल एजेंडे पर अभी भी कायम है फिर चाहे वो कश्मीर में 370 का मामला हो या फिर यूपी और बिहार में कट्टरपंथी ताकतों और उनके मंसूबों को खत्म करना हो। साथ ही उन्होंने अब देश की धरती से नक्सलवाद को भी उखाड़ फेंकने की बात कही है।
वहीं राममंदिर को लेकर योगी ने कहा कि हम हमेशा कहते थे- “रामलला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे” राम मंदिर की राह में बाधा यही कॉन्ग्रेस, राजद, और भाकपा माले थे लेकिन हमने वादा किया था कि भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर भी बनवाएँगे। 5 अगस्त को ये भी काम हो गया, बिहार में एनडीए की सरकार बनाएँगे तो हम भगवान राम के दर्शन भी करवाएँगे।”
गौरतलब है कि न्यायालय द्वारा जारी किया गया आदेश कि केवल विवाह के लिए धर्म परिवर्तन स्वीकार्य नहीं होगा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने भी इस आदेश पर टिप्पणी करते हुए कहा कि, सरकार भी ‘लव जिहाद’ के मामलों पर रोक लगाने के लिए क़ानून लेकर आएगी। उन्होंने कहा, “ऐसे लोगों के लिए चेतावनी है, जो अपनी पहचान छिपा कर हमारी बहनों के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास करते हैं।”
लव जिहादी कठमुल्लों को CM श्री @myogiadityanath जी का कड़ा संदेश सुधरे नही तो राम नाम सत्य की तैयारी कर लो। अपराधी,बलात्कारियों और भ्रष्टाचारी के बाद अब लव जिहादीयों की बारी। जरूर सुने ? pic.twitter.com/jBYlKAV2BR
जौनपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए योगी ने कहा, “हम लव जिहाद के मामलों को रोकने के लिए एक प्रभावशाली क़ानून बनाएँगे। छद्म वेश में, चोरी-छिपे नाम बदल कर जो लोग बहन-बेटियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करते हैं, उनके लिए पहले से मेरी चेतावनी है। अगर वह सुधरे नहीं तो ‘राम नाम सत्य है’ की यात्रा अब निकलने वाली है।”
“हम लोग मिशन शक्ति के कार्यक्रम को इसलिए आगे बढ़ा रहे हैं। मिशन शक्ति के कार्यक्रम का मतलब है कि हम हर बेटी को, हर बहन को सुरक्षा की गारंटी देंगे। इन सारी बातों के बावजूद अगर किसी ने दुस्साहस किया तो उनके लिए ऑपरेशन शक्ति अब तैयार है। इसका उद्देश्य यही है कि हम हर हाल में लड़कियों की सुरक्षा करेंगे और उनके सम्मान की सुरक्षा करेंगे। इसके अलावा न्यायालय के आदेश का भी पालन होगा और बहन-बेटियों का सम्मान सुनिश्चित होगा।”
गुजरात के सूरत शहर में एक तरफा प्यार के जुनून के कारण हत्या का मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, फैक्ट्री मालिक रामू संतराम गोस्वामी को आलम और उसके दो सहयोगी अली और सतला नाम के आरोपितों ने रविवार 25 अक्टूबर को निर्दयतापूर्वक मार डाला। आरोपितों ने मृतक की पत्नी और तीन साल के मासूम बेटे की आँखों के सामने ही इस वारदात को अंजाम दिया।
सूरत पुलिस ने सोमवार सुबह तीनों को गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक जाँच के अनुसार, पुलिस को पता चला कि आलम फैक्ट्री मालिक की पत्नी से एकतरफा प्यार करता था। जिस वजह से उसके पति गोस्वामी की आलम और उसके दो सहयोगियों ने गुस्से में आकर हत्या कर दी।
रिपोर्ट के अनुसार, गोस्वामी अमरोली इलाके में अपनी पत्नी और 3 साल के बेटे के साथ रहता था। कतारगाम में वह कपड़े पॉलिश करने का कारखाना चलाता था। एक दिन अचानक उसकी पत्नी के फ़ोन पर किसी अनजान व्यक्ति ने फ़ोन कर पूजा से बात करने की बात कही। जिसपर रामू की पत्नी ने रॉन्ग नंबर बोलते हुए उसका फ़ोन काट दिया। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई।
आरोपित आलम लगातार रामू की पत्नी को काल करने और उससे बात करने की इच्छा जाहिर करने लगा। जिससे परेशान हो कर पत्नी ने इसकी शिकायत अपने पति से कर दी। वहीं जब रामू ने आ रहे नंबर की जाँच पड़ताल की तो पता चला रॉन्ग नंबर वाला शख्स उसी के परिचितों में से एक था। जिसका नाम आलम है।
जिसके बाद आलम की इन हरकतों से नाराज होकर रामू खुद उसके घर इसकी शिकायत लेकर पहुँचा। उसने आलम को समझाइश दी और यह भी कहा कि अगर वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो इसकी शिकायत वह थाने में कर देगा। रामू के समझाने के बाद आलम ने दो तीन दिनों तक उसकी पत्नी को फ़ोन नहीं किया। जिससे रामू को लगा कि मामला खत्म हो गया, लेकिन उसे क्या पता था आलम के दिमाग में कुछ और ही चलने लगा था।
कुछ दिन रुकने के बाद रविवार की रात करीब 11 बजे आलम अपने दो साथी अली और सतला के साथ रामू के घर पर धावा बोल दिया। तीनों जबरन उसके घर में घुसे और अंदर से घर को बंद कर लिया। इसके बाद पत्नी और मासूम बेटे की आँखों के सामने ही रामू के पेट व सीने में कई बार चाकू घोंप कर वहाँ से भाग गए।
पत्नी ने फौरन इसकी शिकायत पुलिस को दी और रामू को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन इलाज से पहले ही डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं मामले पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीनों हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया।