Homeराजनीतिमहिलाओं की ही तरह अकेले पुरुष अभिभावकों को भी मिलेगी चाइल्ड केयर लीव: केंद्र...

महिलाओं की ही तरह अकेले पुरुष अभिभावकों को भी मिलेगी चाइल्ड केयर लीव: केंद्र सरकार का फैसला

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि ऐसे सरकारी पुरुष कर्मी अब बच्चों की देखरेख संबंधी छुट्टी लेने के हकदार हैं जो एकल अभिभावक हैं।

केंद्र सरकार ने सरकारी पुरुष कर्मचारियों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने घोषणा की है कि जो पुरुष सरकारी कर्मचारी हैं और बच्चे का पालन अकेले कर रहे हैं, उन्हें अब चाइल्ड केयर लीव दी जाएगी। इन छुट्टियों को “Earned leave” के तौर पर लिया जाएगा। इनमें तलाकशुदा, विधुर व अविवाहित पुरुष भी आएँगे।

उन्होंने यह भी कहा कि इस निर्णय से संबंधित आदेश कुछ समय पहले ही दे दिए गए थे लेकिन ये कुछ कारणों की वजह से सार्वजनिक तौर पर लोगों के बीच नहीं पहुँच पाया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि कर्मचारी अब सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के साथ मुख्यालय से जा सकते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि चाइल्ड केयर लीव पर जाने वाले पुरुषों को पहले साल 100 % सैलरी और उसके दूसरे साल 80 % सैलरी दी जा सकेगी। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि वह कर्मचारी चाइल्ड केयर लीव पर रहते हुए अगर चाहे तो लीव ट्रैवल कन्सेशन (LTC) का भी लाभ उठा सकता है।

आगे जीतेंद्र सिंह ने एक और सुधार के बारे में बात करते हुए कहा कि अब दिव्यांग बच्चे की देखभाल के लिए कोई सरकारी कर्मचारी कभी भी चाइल्ड केयर लीव ले सकता है। पहले इसके लिए बच्चे की अधिकतम उम्र सीमा 22 वर्ष तय की गई थी।

यहाँ बता दें कि इस फैसले की घोषणा के बाद से सोशल मीडिया पर इसे बहुत सराहा जा रहा है। केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र मंत्री जीतेंद्र सिंह को शुभकामनाएँ दी हैं। साथ ही इस फैसले को लिंग समानता की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम बताया है।

वहीं, केंद्रीय मंत्री जीतेंद्र सिंह ने भी इस बात का उल्लेख किया कि नरेंद्र मोदी ने ऐसे सुधारों में व्यक्तिगत रूप से दिलचस्पी दिखाई, जिसके कारण कई निर्णय थोड़े हटकर भी लिए गए। इस सुधारवादी फैसले के पीछे सरकार का उद्देश्य यही है कि कर्मचारी अपनी क्षमताओं का अच्छा प्रदर्शन कर सके।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -