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नवरात्र में ‘हिंदू देवी’ की गोद में शराब और हाथ में गाँजा, फोटोग्राफर डिया जॉन ने कहा – ‘महिला आजादी दिखाना था मकसद’

हमारे मुल्क में एक पंथ, एक समुदाय, एक संस्कृति या एक ही धर्म पर प्रयोग करना एक तरह की परंपरा बन गई। त्यौहारों के मौसम में इस परंपरा का आकार दोगुना हो जाता है और संयोग देखिए मात्र एक ही धर्म से जुड़े पहलुओं के साथ ही ऐसा होता है।

नवरात्र में रचनात्मकता की आड़ लेकर हिन्दू देवी देवताओं का अपमान करने का और करोड़ों लोगों की आस्था को ठेस पहुँचाने का इससे बेहतर अवसर क्या होगा। इसी कड़ी में केरल की एक फोटोग्राफर ने एक पोर्ट्रेट तैयार किया और उसके हाथ में शराब की बोतल और गाँजा थमा दिया। मामला जब गरमाया तो क्षमा माँग कर तस्वीरें डिलीट कर दी… जैसे बात खत्म!

शुरुआत में डिया जॉन नाम की फोटोग्राफर ने लाल साड़ी में एक महिला की तस्वीर साझा की। तस्वीर में महिला गाँजा और शराब का सेवन कर रही है। तस्वीर में उसके पास शंख और त्रिशूल भी है। इसके अलावा एक कमल का फूल भी है, यानी इस पोर्ट्रेट में उस महिला को देवी के रूप में दिखाने का प्रयास किया। इतना ही नहीं, इस तस्वीर के साथ काफी अपमानजनक शब्दों का ‘कैप्शन’ लिखा हुआ था। 

इस मुद्दे पर टाइम्स नाउ से बात करते हुए केरल स्थित फोटोग्राफर ने कहा कि वह अपने सहयोगी और दोस्त (अथिरा, जैकब अनिल, ज़ोहेब ज़ई और अक्षय रजनिथ) के साथ महिला और आज़ादी के विषय पर खोजबीन कर रही थी। इसके बाद उसने कहा कि हमारे समाज में आम तौर पर ऐसी मान्यता है कि महिलाएँ आज्ञाकारी होती हैं और उन्हें आज़ादी नहीं दी जानी चाहिए। लेकिन उनके भी सपने होते हैं और उन्हें भी आज़ादी मिलनी चाहिए।

इसके बाद फोटोग्राफर डिया ने कहा, “महिलाओं को देवी का तमगा मिला हुआ है, हम इसे पलटना चाहते थे। हमने अपनी तस्वीर या पोस्ट में किसी देवी का नाम नहीं लिखा और न ही किसी धर्म के पहलू का कोई उल्लेख किया।” (सही बात है! इन मासूमों को कैसे पता होगा कि त्रिशूल और शंख किस धर्म के लिए प्रतीकात्मक हो सकते हैं!) 

तस्वीर के कैप्शन में यह लिखा था, “महिलाओं को देवी माना जाता है लेकिन उनके साथ किस तरह का व्यवहार किया जाता है? अक्सर उन्हें पवित्रता, निर्दोष और सहिष्णुता के पैमाने से होकर गुज़रना पड़ता है और उनके व्यक्तित्व को निर्वस्त्र किया जाता है। क्या यह सही समय नहीं, उनकी इंसानियत को स्वीकार करने का।” 

इस मामले के प्रकाश में आने के बाद विवाद शुरू हुआ। इतना स्पष्ट था कि उस तस्वीर में देवी को प्रतीकात्मक रूप में शराब और गाँजे का सेवन करते हुए दिखाया गया। इसके बाद कोच्चि स्थित मंदिर मुक्कूतिल भगवती मंदिर ने शनिवार (24 अक्टूबर 2020) को मराडू पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत में उन्होंने फोटोग्राफर पर धार्मिक भावनाएँ और आस्था को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाया। मुक्कूतिल भगवती मंदिर के सचिव और पेशे से अधिवक्ता मधू नारायण ने भी टाइम्स नाउ से बता करते हुए इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, “मैंने इस प्रकरण में शिकायत दर्ज कराई है।” 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ शिकायत में ऐसा कहा गया है कि तस्वीर में देवी को अपमानजनक रूप में दिखाया गया है और उनकी तुलना वेश्याओं से की गई। तस्वीर में देवी को गाँजा तैयार करते हुए और त्रिशूल और शंख के साथ शराब की बोतल लिए हुए दिखाया गया है। इसके अलावा उस पोस्ट में नवरात्र की शुभकामनाएँ भी दी गई थीं, यानी इसका मतलब साफ़ था कि उन्होंने तस्वीर में मौजूद महिला को दुर्गा के रूप में दर्शाया था।

शिकायत में इस बात का भी ज़िक्र है कि यह सिर्फ और सिर्फ रचनात्मकता की आड़ लेकर हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुँचाने का घटिया प्रयास के अलावा और कुछ नहीं था। नवरात्र के दौरान इस तरह की तस्वीरें साझा करने का मतलब स्पष्ट है कि लोगों को सांप्रदायिक आधार पर बाँटा जा सके और समाज में अशांति फैलाई जाए। 

अधिवक्ता मधू नारायण ने शिकायत के अंतिम हिस्से में लिखा, “जो पोस्ट की गई थी, उसमें से एक ठीक थी लेकिन दूसरी में देवी को शराब और गाँजे का सेवन करते हुए दिखाया गया था। हमें इस बात का इंतज़ार है कि पुलिस इस मामले में जल्द से जल्द जाँच शुरू करे, जल्द ही यह मामला साइबर सेल को भेजा जाएगा। इस मामले में कुछ दिनों के भीतर कानूनी कार्रवाई होगी।” इसके अलावा कई अन्य लोगों ने भी इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है।  

इतने विवाद के बाद डिया जॉन ने तस्वीर हटा कर पोस्ट डिलीट कर दी और अपनी इस हरकत के लिए माफ़ी भी माँगी। 

फ़िलहाल उन विवादित तस्वीरों को डिलीट किया जा चुका है लेकिन फिर भी कई सवाल बचे रह जाते हैं। रचनात्मकता की आड़ लेकर एक धर्म से जुड़ी चीज़ों पर अपनी दोयम दर्जे की मानसिकता का प्रदर्शन करना कितना सही हो सकता है। इस तरह के प्रयास नए नहीं हैं, ख़ास कर जब भी कोई हिन्दू त्यौहार या आयोजन नज़दीक होता है, इस तरह के रचनाधर्मी सक्रिय हो जाते हैं। 

इसे महिलाओं की आज़ादी और महिला सशक्तिकरण से जोड़ने वालों के लिए भी यह समझना न जाने कितना मुश्किल है कि केवल मादक पदार्थों को आगे रख देने का अर्थ महिलाओं को आज़ादी देना नहीं होता है। उसके तमाम तरीके हैं, किसी भी सूरत में शराब और गाँजे जैसी चीज़ों से कहीं बेहतर होंगे। महिलाओं के मुद्दे पर होने वाले विमर्शों की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि उन्हें स्वछंदता के नाम पर शराब और गाँजे तक सीमित कर दिया जाता है।            

‘मिया म्यूजियम’ चाहिए कॉन्ग्रेसी MLA शेरमन अली को, असम सरकार ने खारिज की माँग

असम के स्वास्थ्य, वित्त, पीडब्ल्यूडी और शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कॉन्ग्रेस विधायक शेरमन अली की माँग पर सख्त प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि गुवाहाटी में श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र में कोई मिया संग्रहालय स्थापित नहीं किया जाएगा। वरिष्ठ मंत्री ने माँग को खारिज करते हुए कहा कि असम में चार क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की कोई अलग-अलग पहचान और संस्कृति नहीं है।

बता दें कि गुवाहाटी में स्थित श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र एक सांस्कृतिक परिसर है, जिसमें असम के इतिहास और संस्कृति, पुस्तकालय, एक ओपन-एयर थियेटर, एक आर्टिस्ट विलेज, एक कला और सांस्कृतिक प्रदर्शनी और हेरिटेज पार्क आदि जैसी कई सुविधाएँ हैं।

हाल ही में कॉन्ग्रेस विधायक शेरमन अली अहमद ने माँग की थी कि असम सरकार को इस परिसर के अंदर एक मिया संग्रहालय स्थापित करना चाहिए। मिया शब्द का तात्पर्य राज्य में रहने वाले बांग्लादेशी प्रवासियों से है। वे बड़े पैमाने पर राज्य के चार क्षेत्रों में, ब्रह्मपुत्र नदी के सैंडबार्स और सहायक नदियों के पास रहते हैं।

दरअसल शेरमन अली अहमद ने कहा था,“मैंने असम के सैंडबार्स पर रहने वाले लोगों के लिए एक संग्रहालय प्रस्तावित किया है। संग्रहालय को कलाक्षेत्र में स्थापित किया जाना चाहिए। चूँकि इन क्षेत्रों की अधिकांश आबादी तथाकथित मिया समुदाय से है, इसलिए इसे मिया संग्रहालय का नाम दिया जाना चाहिए।”

बागबार के कॉन्ग्रेस विधायक ने कहा था कि असम के चार-चापोरिस (सैंडबार्स) में रहने वाले मिया लोगों की संस्कृति और विरासत को दर्शाते हुए एक संग्रहालय की स्थापना श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र के परिसर में की जानी चाहिए। उन्होंने यह माँग राज्य सरकार के संग्रहालयों के निदेशक को भी लिखा था।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस विधायक की इस माँग पर सत्तारूढ़ भाजपा और कई अन्य संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसका विरोध किया। वहीं अहमद पर हमला बोलते हुए भाजपा नेता पाबित्रा मार्गेरिटा ने कहा, “राजीव भवन और AIUDF कार्यालय में मिया संग्रहालय स्थापित किया जाना चाहिए। हम कॉन्ग्रेस और एआईयूडीएफ को चेतावनी देते हैं कि वे श्रीमंत शंकरदेव से जुड़े कार्यों और स्थानों से दूर रहें।”

वहीं राज्य सरकार द्वारा माँग को अस्वीकार करने के बाद हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को कहा, “असम सरकार स्पष्ट रूप से बताना चाहती है कि शंकरदेव कालक्षेत्र में कोई मिया संग्रहालय या कोई अन्य संग्रहालय स्थापित नहीं किया जाएगा। संग्रहालयों के प्रबंध विभाग किसी भी मिया संग्रहालय की स्थापना नहीं करेंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल सीएए के विरोध प्रदर्शन के बाद से कलाक्षेत्र एक निश्चित वर्ग के निशाने पर रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि हिंसक विरोध के दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा परिसर के गेट को किस प्रकार नष्ट कर दिया गया था। मंत्री सरमा ने कहा,“अब वही लोग कलाक्षेत्र पर नजर गड़ाए हुए हैं। अन्य संस्कृति और सभ्यता को दर्शाने वाली किसी भी चीज का संग्रहालय में कोई सवाल ही नहीं है।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले मंत्री ने शनिवार को यह कहते हुए ट्वीट किया था कि असम के चार क्षेत्रों में कोई अलग पहचान और संस्कृति नहीं है।

उन्होंने अहमद द्वारा संग्रहालय के निदेशक को लिखे गए पत्र को पोस्ट करते हुए आगे लिखा था,”जाहिर है, असमिया संस्कृति का प्रतीक श्रीमंत शंकरदेव कालक्षेत्र में हम किसी भी विकृति की अनुमति नहीं देंगे। क्षमा करें विधायक साहब!”

गुवाहाटी के पंजाबी इलाके में स्थित श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र 1985 में हस्ताक्षरित ऐतिहासिक असम समझौते का परिणाम है। यह समझौते के खंड 6 के अनुसार, असम के स्वदेशी लोगों की संस्कृति और विरासत को संरक्षित करने के लिए स्थापित किया गया था, जिसमें श्रीमंत शंकरदेव द्वारा प्रचारित स्तरीय संस्कृति भी शामिल थी।

माँ बीमार, दिहाड़ी न कटे इसलिए 15 साल की बेटी को भेजा काम पर… लेकिन मालिक मो. मुक्तजीर ने किया रेप

लुधियाना के टिब्बा रोड इलाके में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। जहाँ कोरोना वायरस से बचाने की आड़ में गोदाम मालिक मोहम्मद मुक्तजीर ने मास्क में बेहोशी की दवा डाल कर नाबालिग के साथ बलात्कार किया। पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित मोहम्मद मुक्तजीर को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता इस घटना के बाद से ही सदमे में है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, नाबालिग पीड़िता की माँ मोहम्मद मुक्तजीर नामक व्यक्ति के गोदाम में वर्कर के रूप में काम करती थी। 19 अक्टूबर को अचानक से उसकी तबियत खराब हो गई, जिसकी वजह से उसने उस दिन अपनी नाबालिग 15 वर्षीय बेटी को काम पर अपनी जगह भेज दिया ताकि उसकी दिहाड़ी न कटे। लेकिन माँ को कहाँ पता था कि उसकी बेटी मोहम्मद मुक्तजीर की हैवानियत का शिकार हो जाएगी।

परिजनों द्वारा पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, जब नाबालिग शाम को ड्यूटी खत्म होने के बाद घर वापस लौट रही थी, तब गोदाम मालिक ने लिफ्ट देने के बहाने उसे कार में बैठा लिया। जिसके बाद कोरोना का हवाला देते हुए उसे मास्क पहनने को दिया। लेकिन जैसे ही नाबालिग लड़की ने मास्क पहना, वह बेहोश हो गई। इसके बाद आरोपित उसे कार में बिठाकर सुनसान जगह ले गया, जहाँ उसके साथ दुष्कर्म किया। जिसके बाद स्वजनों ने इसकी तहरीर पुलिस में दी।

वहीं पीड़ित लड़की ने घटना का ब्यौरा देते हुए पुलिस को बताया कि मोहम्मद मुक्तजीर ने उससे कहा कि आजकल कोरोना चल रहा है, इसलिए वह मास्क पहन ले। आरोपित ने उसे मास्क पहनने के लिए दिया। जैसे ही उसने मास्क पहना, उसे बेहोशी सी छाने लगी। इसके बाद आरोपित कार को सुनसान जगह पर ले गया और उससे दुष्कर्म किया।

गौरतलब है कि मामले को संज्ञान में लेते हुए एएसआइ सुखदेव सिंह ने बताया कि घटना के बाद से ही पीड़िता सदमे में थी। इसके कारण उसके परिवार ने कोई कार्रवाई नहीं की। शनिवार वो लोग पुलिस के पास आए। जिसके बाद केस दर्ज कर लिया गया। सोमवार को पीड़िता का मेडिकल कराया जाएगा।

नवरात्रि में महिलाओं की पूजा, अन्य दिन रेप: कार्टून से हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली वकील दीपिका पर FIR

नवरात्रि के मौके पर महिलाओं के लिए आपत्तिजनक तस्वीर शेयर करके हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली अधिवक्ता दीपिका राजावत के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत पटेल उमरांव समेत कई लोगों ने इसकी जानकारी ट्विटर पर दी है।

सूचना के अनुसार, जम्मू कश्मीर पुलिस ने दीपिका ठुस्सु राजावत के ख़िलाफ़ जम्मू के गाँधी नगर पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज किया है। उनके ख़िलाफ़ धारा 505 (बी)(2), 294 और 295 के तहत मामला दर्ज हुआ है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों दीपिका राजावत ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर पोस्ट की थी। इस पोस्ट में उन्होंने महिलाओं की दो स्थिति को दिखाया था। एक में पुरुष सामान्य दिन में महिला के साथ जबरदस्ती (बलात्कारी के रूप में) कर रहा था और दूसरे में उसी महिला की देवी के रूप में पूजा कर रहा था।

इस तस्वीर को शेयर करते हुए दीपिका ने “विडम्बना” शब्द का इस्तेमाल किया था। इस तस्वीर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने दीपिका के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग उठाई थी और उनकी गिरफ्तारी के लिए ट्विटर पर हैशटेग भी ट्रेंड होने लगा था।

कुछ लोग दीपिका के ‘राजावत’ सरनेम को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि दीपिका ने मेजर से शादी करके उनके सरनेम का इस्तेमाल किया और अलग होने के बाद भी उनके उपनाम का प्रयोग कर रही हैं व अपने बयानों से राजपूतों को बदनाम भी कर रही हैं।

बता दें कि दीपिका ठुस्सु एक कश्मीरी वकील हैं और जनवरी साल 2018 में एक नाबालिग से रेप की घटना के बाद चर्चा में आई थीं। दीपिका पीड़ित पक्ष की वकील थीं, लेकिन परिवार ने बाद में उन्हें केस से हटा दिया था। पीड़िता के परिजनों ने आरोप लगाया था कि दीपिका इस मामले से सिर्फ पब्लिसिटी ले रही हैं और उनकी केस में कोई रूचि नहीं हैं, वह आदालत में भी नहीं आती हैं।

₹250 में 10-16 साल के बच्चों के sexual acts वाले वीडियो, TV कलाकार करता था इंस्टाग्राम-टेलीग्राम पर यह काम

केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई ने आज (अक्टूबर 25, 2020) मुंबई के एक टीवी कलाकार के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है। आरोपित कलाकार के ऊपर विदेशी नाबालिग बच्चों की यौन संबंधी सामग्री विदेशों में बेचने का आरोप है।

सीबीआई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे रैकेट का भंडाफोड़ करके आरोपित के ख़िलाफ़ मुकदमा दायर किया। अधिकारियों ने यह भी बताया कि वह इंस्टाग्राम पर बच्चों को धमका कर या उन्हें उकसा कर ऐसी सामग्री प्राप्त करता था।

अधिकारियों का कहना है कि कथित कलाकार ने अमेरिका, यूरोप व साउथ एशिया के 10 से 16 साल के 1000 से ज्यादा बच्चों को संपर्क किया था। वह इन बच्चों से इंस्टाग्राम पर तस्वीरें माँगता था।

हाल में एजेंसी ने आरोपित के आवास की तलाश की। उसने दावा किया कि वह टीवी सीरियल्स में जूनियर कलाकर है। सीबीआई ने पड़ताल में उसके घर से उसका मोबाइल फोन व लैपटॉप जब्त कर लिया।

इन सभी डिवाइस के फॉरेंसिक जाँच में ऑनलाइन यौन शोषण से संबंधित सामग्री मिली है, जिन्हें आरोपित ने बाद में अपने ग्राहकों को व्हाट्सएप और अन्य प्लेटफॉर्मों के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भेजने का काम किया।

अभी तक की जाँच में पता चला है कि आरोपित मूल रूप से हरिद्वार का रहने वाला है। वह बच्चों को अपनी पहचान फिल्म स्टार के रूप में बताता था व ऑनलाइन उनके साथ रिलेशन बनाने का नाटक करता था, फिर उनसे उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें व वीडियो माँगता था।

आरोपित विदेश के बच्चों को फँसाने के लिए उनके व्हॉट्सएप नंबर माँगता था और वीडियो कॉल्स पर उन्हें sexual acts करने को कहता था, जिसे बाद में वह अपने क्लाइंट्स के साथ शेयर करता था। अगर बाद में कोई पीड़ित उसकी बातें नहीं सुनता था या उससे संपर्क नहीं रखता था तो वह उन्हें धमकी देता था कि उनकी तस्वीरें उनके परिवार के साथ साझा कर देगा।

सीबीआई ने आरोपित कलाकार के ऊपर पॉक्सो एक्ट व आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अलावा पुलिस ने एक अन्य को भी इसी आरोप में गिरफ्तार किया है। वह टेलीग्राम के जरिए 250 रुपए में बच्चों की यौन संबंधित सामग्री बेचता था।

लालू यादव के 3 बकरों की बलि, मुझे मारने के लिए कराई थी तांत्रिक पूजा: सुशील मोदी

बिहार विधानसभा चुनाव अपने चरम पर जाता दिख रहा है। सभी दलों के नेता कोरोना संकट के बावजूद अपने-अपने दलों के प्रचार में जुटे हुए हैं। वहीं हर पार्टी जीत हासिल करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे आजमा रही है। इसी बीच डिप्‍टी सीएम सुशील मोदी ने लालू यादव पर अंधविश्‍वासी और तंत्र-मंत्र करने का आरोप लगाया है।

सुशील मोदी ने बताया है कि आरजेडी के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव राँची के केली बंगले में तीन बकरों की बलि देने वाले हैं। उन्होंने कहा कि लालू को जनता पर भरोसा नहीं, इसलिए वे तंत्र-मंत्र, पशुबलि और प्रेत साधना जैसे कर्म-कांड कराते रहे हैं। शनिवार को किए गए उनके इस ट्वीट से बिहार में सियासी माहौल गर्म हो गया है।

यही नहीं, लालू पर हमला बोलते हुए सुशील मोदी ने ताबड़तोड़ कई ट्वीट्स किए। उन्होंने चुनाव को मद्देनजर रखते हुए ट्वीट करते हुए लिखा, “चारा घोटाला में सजायाफ्ता लालू प्रसाद बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राँची के केली बंगले में जेल मैन्युअल की धज्जियाँ उड़ाते हुए नवमी के दिन 3 बकरों की बलि देने वाले हैं। उन्हें आभास हो चुका है कि हाशिए पर पड़े कुछ दलों से गठबंधन और बड़बोले वादे पार्टी की नैया पार नहीं लगा सकते।”

उन्होंने आगे लिखा, “लालू प्रसाद को जनता पर भरोसा नहीं, इसलिए वे तंत्र-मंत्र, पशुबलि और प्रेत साधना जैसे कर्मकांड कराते रहे। इसके बावजूद वे न जेल जाने से बचे, न सत्ता बचा पाए। वे अभी 14 साल जेल में ही काट सकते हैं।”

उन्होंने कहा, “लालू प्रसाद इतने अंधविश्वासी हैं कि उन्होंने न केवल तांत्रिक के कहने पर सफेद कुर्ता पहनना छोड़ा, बल्कि तांत्रिक शंकर चरण त्रिपाठी को पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बना दिया।”

लालू प्रसाद पर तंत्र विद्या से मारने का आरोप लगाते हुए उपमुख्यमंत्री ने लिखा, “उसी तांत्रिक ने विंध्याचल धाम (मिर्जापुर) में लालू प्रसाद से तांत्रिक पूजा कराई थी। वे तीन साल पहले मुझे मारने के लिए भी तंत्रिक अनुष्ठान करा चुके हैं।”

11 साल पुरानी घटना का जिक्र करते हुए सुशील मोदी ने कहा, “2009 में पूर्ण सूर्य ग्रहण देखने तारेगना पहुँचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब ग्रहण के समय बिस्कुट खा लिए, तब अंधविश्वासी लालू प्रसाद ने कहा था कि इससे अकाल पड़ेगा। इसके विपरीत बिहार में एनडीए शासन के दौरान कृषि पैदावार बढ़ी।”

लालू राज के खात्मे पर सुशील मोदी ने कहा, “2005 में जब जनता ने लालू-राबड़ी के कुशासन को खारिज कर दिया, तब लालू प्रसाद ने मुख्यमंत्री आवास छोड़ने में डेढ़ महीने लगा दिए थे और बाद में कहा कि वे आवास की दीवार में ऐसी तंत्रसिद्ध पुड़िया रख आए हैं कि अब कोई वहाँ नहीं टिक पाएगा।” उन्होंने कहा, “उसी आवास में रहते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 15 साल से बिहार की सेवा कर रहे हैं और राज्य विकास की मंजिलें तय कर रहा है।”

सुशील मोदी ने अपने एक अन्य ट्वीट में कहा, “26 मई, 2014 को बीजेपी के शीर्ष नेता नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने जब प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, तब लालू प्रसाद ने शपथ ग्रहण के मुहूर्त बेला को अशुभ बता दिया और कहा कि सरकार पाँच साल नहीं चलेगी।”

पीएम मोदी के काम की प्रशंसा करते हुए सुशील मोदी ने लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल भारतीय राजनीति का परिदृश्य बदला, बल्कि भ्रष्टाचार-मुक्त सरकार चलाई, जनता को जन-धन खाते दिए, नौ करोड़ गरीबों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए और सर्जिकल स्ट्राइक से पाकिस्तान को मुँहतोड़ जवाब भी दिया।”

वहीं लालू प्रसाद के अंधविश्वास के ढकोसले को लताड़ते हुए उन्होंने कहा, “तंत्र-मंत्र के अंधभक्त लालू प्रसाद जिस मोदी सरकार के बीच में गिरने के साथ देश में अस्थिरता की कुटिल कामना कर रहे थे, उसने विश्व में भारत का मान बढ़ाया और जनता के अपार समर्थन से शानदार वापसी भी की। देवी-देवता किसी की कुटिल कामना को सफल नहीं बनाते।”

कंगना जब हवाई जहाज में थीं तो 9 रिपोर्टर-कैमरामैन टूट पड़े थे कुछ बुलवाने को, इंडिगो ने लगाया सभी पर बैन

बॉलीवुड एक्‍ट्रेस कंगना रनौत और शिवसेना के बीच चले घमासान के दौरान एक बार वो हिमाचल से मुंबई लौट रही थीं। सुर्खियों में चल रहे इस विवाद को कवर कर रहे कई मीडियाकर्मी भी पल-पल की खबर देने के लिए इंडिगो (Indigo) की उनकी फ्लाइट में बैठ गए थे। जिस वजह से फ्लाइट में काफी अफरा तफरी मची। वहीं अब इंडिगो ने इस फ्लाइट में सवार 9 मीडियाकर्मियों पर 15 दिन की यात्रा का प्रतिबंध लगा दिया है।

एयरलाइन कंपनी इंडिगो की एक आंतरिक कमेटी की सिफारिश के बाद इन पत्रकारों को 15 से 30 अक्टूबर तक बैन किया गया है। इंडिगो के अनुसार इन लोगों का व्‍यवहार फ्लाइट में अच्‍छा नहीं था। यह एयरलाइंस के नियमों के विरुद्ध है। 9 सितंबर को इंडिगो की एक फ्लाइट में कई पत्रकारों के कथित उपद्रवी व्यवहार के बाद यह कमेटी इस मामले को देख रही थी।

डायरेक्‍टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने इंडिगो से 9 सितंबर की घटना का संज्ञान लेते हुए इस सिलसिले में कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। डीजीसीए ने विमानन कंपनी को कहा था कि चंडीगढ़ से मुंबई जा रही फ्लाइट में हंगामा करने वाले लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। कंगना इंडिगो की फ्लाइट संख्या 6E-264 में पहली रो में बैठी थीं। विमान में सवार मीडियाकर्मी इस दौरान उनकी बाइट लेने के लिए मानो टूट पड़े थे।

DGCA के इस आदेश के बाद इंडिगो ने रेगुलेटर को एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कहा गया कि कंपनी के क्रू ने सभी जरूरी प्रोटोकॉल फॉलो किया था। इस प्रोटोकॉल में फोटोग्राफी न करने, सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखने और ओवरऑल सेफ्टी बनाए रखने का अनाउंसमेंट शामिल था। डीजीसीए ने कहा कि अब यात्री ऐसा कोई डिवाइस इस्तेमाल नहीं कर सकते, जिससे भीड़-भाड़ हो, लोगों की सुरक्षा को खतरा हो या फ्लाइट खतरे में पड़ जाए।

Xitler: ओलम्पिक को चीन से बाहर कराने की माँग, लोगों को सता रहा 1936 के हिटलर का डर

साल 1936 में जर्मनी की नाज़ी सेना ने एडोल्फ़ हिटलर की अगुवाई में ओलम्पिक (समर) खेलों की मेजबानी की थी। इस आयोजन को लगभग 80 वर्ष बीत चुके हैं लेकिन आज भी उसे स्वप्रचार के लिए इस्तेमाल किए गए सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में से एक माना जाता है। हालाँकि उन खेलों के आयोजन का उद्देश्य यह था कि अलग-अलग देश के खिलाड़ियों के बीच खेल भावना विकसित हो।

इन सारी बातों के विपरीत हिटलर ने इसे ‘नए जर्मनी’ का प्रोपेगेंडा फैलाने का माध्यम बना लिया था। अब इस कड़ी में तमाम सामाजिक कार्यकर्ताओं का अनुमान है कि शी जिनपिंग 2022 के दौरान बीजिंग में होने वाले ओलम्पिक (विंटर) का उपयोग भी कुछ इस तरह कर सकते हैं। 

ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा #MoveTheGames

ट्विटर पर एक हैशटैग ट्रेंड कर रहा है #MoveTheGames और लोग इसके तहत आयोजकों से माँग कर रहे हैं कि 2022 में होने वाले ओलम्पिक का स्थान बदल दिया जाए, उसे चीन की जगह कहीं और आयोजित कराया जाए। 6 अक्टूबर को ब्रिटेन ने इस बात का ऐलान किया कि अगर इस बात के और सबूत सामने आते हैं कि चीन में उइगरों के मानवाधिकारों का हनन होता है तो वह 2022 के विंटर ओलम्पिक का बहिष्कार कर सकता है।

इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए विदेश सचिव डोमिनिक राब ने लिखा, “आम तौर पर कहूँ तो मेरा अनुमान कहता है कि खेल को कूटनीति और राजनीति से अलग रखना चाहिए लेकिन कभी-कभी हालात ऐसे होते हैं, जब ऐसा करना संभव नहीं होता है।”  

चीन विरोधी विचारों को मिल रहा है बढ़ावा 

हाल फ़िलहाल के कई मुद्दों पर चीन को लेकर पूरे विश्व में विरोध काफी बड़े पैमाने पर बढ़ा है। विकासशील देशों की चीज़ों पर कब्ज़ा करने के लिए उन्हें क़र्ज़ देने से लेकर, तकनीक के माध्यम से दुनिया भर के तमाम प्रशासनिक अधिकारियों की जासूसी करने तक, चीन का नाम कई नकारात्मक कार्यों में सामने आया है। इसके अलावा जिस तरह चीन के वुहान से कोरोना वायरस की शुरुआत हुई और उससे पूरी दुनिया में इतने बड़े पैमाने पर लोग प्रभावित हुए, इसके चलते भी दुनिया के तमाम देशों ने चीन और चीन की बनाई चीज़ों का बहिष्कार किया।

भारत चीन सीमा पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच विवाद होने पर भारत सरकार ने लगभग 300 से अधिक चीनी एप्लीकेशन पर प्रतिबंध लगा दिया था और चीनी समूहों के साथ समझौते रद्द कर दिए थे। इस कड़ी में अमेरिका ने भी चीन के विरुद्ध ट्रेड वॉर छेड़ दिया है। दुनिया सहित यूरोप के तमाम देशों ने चीन के दूरसंचार समूह हुआवे और ज़ेटीई (5जी प्रोजेक्ट) पर पाबंदी लगा दी। 

हिटलर और जिनपिंग के बीच समानताएँ

अगर किसी में भी इतिहास के सबसे आततायी तानाशाह से मिलती-जुलती बातें मौजूद हैं, तब ज़िम्मेदार देशों को किसी भी तरह के युद्ध को रोकने के लिए ज़रूरी कदम उठाने चाहिए। बेंजमिन फ्रेंकलिन ने किसी ज़माने में कहा था, “ग्लास, चीन और छवि बड़ी आसानी से बिगड़ जाते हैं और फिर इनमें सुधार नहीं किया जा सकता है।”

चीन ने अपनी वैश्विक शक्ति का उपयोग करके दुनिया के अनेक देशों की तकनीकी और उद्योग खरीद लिया है या उसकी नक़ल की है। खुद को वैश्विक शक्ति घोषित करने की होड़ में चीन ने हर उस आवाज़ को दबाने का प्रयास किया है, जो उसके विरोध में उठाई गई। कुछ जानकारों का यहाँ तक कहना है कि जिनपिंग माओ से आगे निकल चुके हैं और अब हिटलर के समानांतर हैं।     

मंदिर तोड़ कर मूर्ति तोड़ी… नवरात्र की पूजा नहीं होने दी: मेवात की घटना, पुलिस ने कहा – ‘सिर्फ मूर्ति चोरी हुई है’

हरियाणा के मेवात में एक बार फिर से हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का प्रयास हुआ है। खबर है कि नवरात्र के पावन अवसर पर मेवात के नगीना खंड के माँडीखेड़ा गाँव में दुर्गा माता की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी मगर मात्र दो ही दिन में मंदिर की मूर्ति को तोड़ दिया गया। दुर्गा माँ के मंदिर में अब मूर्ति की जगह सिर्फ़ शेर के पंजे बचे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले भी इस तरह की घटनाएँ होती आई हैं और मंदिर से कुछ दूरी पर बने मदरसे के मौलवी के इशारों पर यह काम किया गया। हालाँकि, पुलिस की मानें तो पूरे मामले में अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ है।

मूर्ति चोरी के बाद मंदिर के पास इकट्ठा हुई भीड़

ऑपइंडिया को प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह घटना 19 अक्टूबर की रात की है। नवरात्र के पहले दिन यानी, 17 अक्टूबर को मंदिर में मूर्ति की स्थापना हुई थी। सभी लोगों ने पूजा-पाठ के लिए मंदिर को सजाया था। लेकिन नवरात्र दिन पता चला कि मूर्ति वहाँ से गायब है।

मूर्ति चोरी के बाद गठित हुए 11 सदस्यों की पंचायत समिति

माता की मूर्ति को टूटी देख हिंदू समुदाय के लोग आक्रोशित हैं। उन्होंने मामले में एफआईआर दर्ज करवाई और जल्द से जल्द कार्रवाई करने की माँग की है। इस केस में 20 अक्टूबर को एक 11 सदस्य पंचायत समिति का गठन भी हुआ। 

इस समिति के ही एक सदस्य धर्मपाल आर्या से ऑपइंडिया का संपर्क हुआ। उन्होंने पूरे मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि माँडीखेड़ा गाँव में 19 अक्टूबर की रात्रि यह घटना हुई। कुछ अज्ञात लोग मंदिर का ताला तोड़ कर मूर्ति को खंडित कर दिया। घटना को 5 दिन बीत गए हैं मगर आरोपितों का अभी तक कुछ पता नहीं है। किसी पर कोई कार्रवाई भी नहीं हुई है।

वह बताते हैं कि गाँव में अल्पसंख्यक आबादी में हिंदू कुछ बोल नहीं पाते हैं। मगर उन्हें अपनी बैठक में पता चला है कि मंदिर से थोड़ी दूर पर एक मदरसा है। कुछ लोग उसी मदरसे को शक की निगाह से देख रहे हैं।

मंदिर और उसके भीतर की तस्वीर

उनका कहना है कि जब मंदिर की चारदीवारी करवाई गई थी या इससे पहले जब मूर्ति स्थापित हुई थी तब भी ऐसी घटनाएँ सामने आई थीं, इसलिए संभावना है कि उसी (मदरसे का रोल इस बार भी) का हाथ हो।

धर्मपाल के अनुसार, यह मंदिर बहुत पुराना है, लेकिन साल 2016 में एक ऐसी ही घटना घटी थी, तब लोगों ने आपस में बात करके समझौता कर लिया था और माफी भी माँगी गई थी। इस घटना में मुस्लिम समाज ने हिंदुओं के सामने घटना का खेद प्रकट किया था। उन्हें आश्वासन दिया था कि दोबारा ऐसी घटनाएँ नहीं होंगी। 

इसी के बाद इस मंदिर पर चारदीवारी करवाई गई और मूर्ति की इन नवरात्रियों में प्राण प्रतिष्ठा हुई, लेकिन फिर दो दिन बाद यह घटना हो गई। अब समाज के लोगों का कहना है कि वह पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है क्योंकि मामले में ढुलमुल रवैया अपनाया जा रहा है।

पेशे से पत्रकार और समिति के सदस्य धर्मपाल की मानें तो इस पूरे केस में हिंदू संगठनों में भी काफी नाराजगी है। उन्होंने कहा है कि यदि मामला नहीं सुलझता तो फिर उन्हें सड़कों पर उतरने को मजबूर होना पड़ेगा।

स्थानीय लोगों का क्या कहना है?

इसी प्रकार एक अन्य स्थानीय का कहना है कि पुलिस ने उन्हें इस मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन उनके लिए बात केवल आश्वासन की नहीं है। यदि यह घटना दूसरे पक्ष के साथ हो गई होती, तो अभी तक पूरा मेवात बंद हो जाता। 

घटना के बाद मंदिर के पास मौजूद लोगों की एक वीडियो भी सामने आई है। पत्रकार गौरव मिश्रा ने इस वीडियो को शेयर करते हुए बताया कि मेवात के माँडीखेड़ा गाँव के मंदिर में ‘शांतिदूतों’ ने नवरात्र की पूजा नहीं होने दी। जो मूर्ति स्थापित की गई थी, उसे भी ‘शांतिदूतों’ ने तोड़ दिया और मंदिर का गेट भी तोड़ दिया। उन्होंने लिखा कि पथरावी मंदिर से स्थापित देवी माँ की प्रतिमा को तोड़ डाला गया।

इस वीडियो में देख सकते हैं कि मंदिर के सामने कुछ लोग खड़े हैं। वह कहते हैं कि उनके मंदिर को दूसरी बार तोड़ा गया है। पहली बार में जब उन लोगों ने कुछ नहीं कहा तो दूसरी बार भी उनके साथ ऐसा हुआ। दूसरा व्याक्ति वीडियो में कहते सुना जा सकता है कि ये लोग जानबूझकर ऐसा काम करते हैं और फिर बच्चों का नाम लगा दिया जाता है।

घटनास्थल पर पहुँची पुलिस

वीडियो में व्यक्ति स्पष्ट रूप से कहता है कि मदरसे वाला जो मुफ्ती है, वो आस-पास के लोगों को इकट्ठा करके यह काम करवाता है। 17 अक्टूबर को मूर्ति आई थी और अब इसे तोड़ दिया गया। ये लोग हिंदू धर्म को भंग कर रहे हैं। कल को कुछ और भी करेंगे। लोगों की माँग है कि प्रशासन इस मामले पर कार्रवाई करे और उन्हें न्याय दिलाए।

एक अन्य वीडियो भी इस केस में सामने आई है, इसमें कहता सुना जा सकता है कि मंदिर में सिर्फ़ शेर के पंजे बचे हैं और उत्पाती बाकी पूरी मूर्ति को तोड़ दिए।

पुलिस कार्रवाई

ऑपइंडिया ने इस मामले में कार्रवाई संबंधी जानकारी के लिए नगीना थाने के एसएचओ रमेश चंद से बात की। उन्होंने मंदिर में तोड़फोड़ की बात को नकारा और कहा कि मंदिर से मूर्ति की चोरी हुई है। इस मामले में एफआईआर दर्ज है और पूरे मामले की तफ्तीश की जा रही है। अभी तक कोई भी व्यक्ति हिरासत में नहीं लिया गया है। मगर, जल्द से जल्द  इस मामले के निष्कर्ष में पहुँचा जाएगा। साल 2016 में मंदिर पर हुए हमले की बात को भी एसएचओ ने ऑन रिकॉर्ड होने से मना किया। उन्होंने कहा कि उनके नोटिस में बस हालिया मामला है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों हरियाणा का मेवात दलितों पर अत्याचार के कारण चर्चा में आया था और अब भी वहाँ हिंदू के साथ भेदभाव की घटनाएँ थमी नहीं है। पिछले दिनों नगीना थाने के उलेटा गाँव में ही एक दलित परिवार बहुसंख्यक आबादी की बर्बरता का शिकार हुआ था। राहुल नाम के दलित लड़के के सिर पर धारदार फरसा मार कर कहा गया था कि अगर गाँव में रहना है तो उनकी जूती के नीचे रहना होगा। इस मामले पर भी पुलिस का आज भी यही कहना है कि मामले में जाँच चल रही है।

‘यहाँ के लोगों को बताया हिंसक, फैलाई जातीय वैमनस्यता’: ‘मिर्जापुर’ के खिलाफ उतरीं मिर्जापुर की सांसद

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर की सांसद और अपना दल (सोनेलाल) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने अमेज़न प्राइम वीडियो की वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ को लेकर आपत्ति जताई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस वेब सीरीज के जरिए इस क्षेत्र को हिंसक बताते हुए इसे बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मिर्जापुर विकास के पथ पर अग्रसर है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि मिर्जापुर समरसता का केंद्र है, लेकिन जिले के नाम पर वेब सीरीज बना कर जातीय वैमनस्य फैलाया जा रहा है। बता दें कि ‘मिर्जापुर’ में यूपी की सीएम बनने से पहले माधुरी नामक किरदार एक डायलॉग बोलती है कि वो यादव की बेटी है और ब्राह्मण परिवार की बहू, इसीलिए उनके पार्टी को संभालने से इन दोनों ही जातियों में अच्छा सन्देश जाएगा। फिल्म में सारे गुंडे-बदमाशों को ब्राह्मण ही दिखाया गया है।

सांसद ने कहा कि मिर्जापुर लोकसभा क्षेत्र की सांसद होने के नाते वो माँग करती हैं कि इस वेब सीरीज की जाँच होनी चाहिए और इसके विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए। मिर्जापुर में ‘अपना दल’ के कई अन्य नेता भी वेब सीरीज में इलाके का नाम खराब किए जाने को लेकर खफा हैं। फ़िलहाल यहाँ से विंध्यवासिनी मंदिर के वरिष्ठ पुजारी रत्नाकर मिश्रा भाजपा से विधायक हैं, जिन्हें पार्टी ने बिहार चुनावों में लगा रखा है।

‘अमेज़न प्राइम वीडियोज’ ने बृहस्पतिवार (अक्टूबर 22, 2020) को अपनी बहुचर्चित वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ का दूसरा सीजन 10 एपिसोड्स के साथ लाइव किया था। इसे तय समय से 3 घंटे पहले ही लाइव किया गया। इसमें अली फजल और दिव्येंदु शर्मा मुख्य किरदारों में हैं लेकिन दूसरे सीजन को कालीन भइया यानी, पंकज त्रिपाठी के नाम पर ही बेचा गया। सीजन-2 में विजय वर्मा को 2 जुड़वाँ किरदारों के रूप में एंट्री दी है, जो ‘बिहार के गुंडे’ होते हैं।

पहले सीजन की तरह ‘मिर्जापुर’ का दूसरा सीजन भी गालियों से भरा पड़ा है, जहाँ गालियाँ न सिर्फ गुस्से में दी जाती है, बल्कि ये भी दिखाया गया है कि यूपी-बिहार के युवक आपस में बातचीत करते हुए मजाक में भी एक-दूसरे के माँ-बाप और परिवार को माँ-बहन की गालियाँ बकते हैं। अश्लीलता के प्रदर्शन में भी कोई कमी नहीं रखी गई है। हाँ, ‘वफादार’ मुस्लिम किरदारों का महिमामंडन ज़रूर जारी रखा गया है।