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‘चोरी, बलात्कार व अन्य कुकर्म यही बहरूपिए करते हैं’: भगवा पहन कर घूम रहे 3 मुस्लिम युवकों ने सख्ती होने पर उगली सच्चाई, वीडियो वायरल

साधुओं का भेष बना कर लोगों की आस्था से खिलवाड़ करते कई धोखेबाज आपको राह चलते मिल जाएँगे। इनमें से कई को न तो धर्म आदि का ज्ञान होता है और कुछ ऐसे भी होते हैं जिनका संबंध दूर-दूर तक हिंदू धर्म से ही नहीं होता। ऐसे लोग सिर्फ़ भगवा चोला पहन कर दान दक्षिणा को कमाई का स्रोत मानते हैं और निकल पड़ते हैं घर-घर लोगों को बेवकूफ बनाने।

इसी सच्चाई की पोल खोलते सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रही है। यह वीडियो कब की है, इसकी पुष्टि ऑपइंडिया नहीं करता। लेकिन इसमें देख सकते हैं कि कैसे तीन समुदाय विशेष के युवक भगवा पहनकर जगह-जगह टहल रहे हैं और जब एक युवक इन्हें शक की बिनाह पर पकड़कर पूछताछ करता है तो कैसे अपने नामों का खुलासा करते हुए उलटा उसी से सवाल करते हैं कि आखिर उनकी गलती क्या है उन्होंने कोई चोरी थोड़े की है?

वीडियो में कई बार अपशब्दों का प्रयोग किया गया है। इसे देख-सुन कर साफ पता चल रहा है कि वीडियो बनाने वाला युवक समाज में घट रही ऐसी घटनाओं से चिंतित है और इसलिए उसने पहले भगवा कपड़ों में टहलते इन लोगों को पकड़ा, फिर एक जगह बिठाकर इनसे पूछताछ की। युवक ने जब इनसे इनका नाम पूछा तो एक ने अपना नाम दीवान बताया और दूसरे ने खुद की पहचान अली हुसैन बताई।

युवक पूछता है कि आखिर हिंदुओं का चोला पहन कर वह क्यों घूम रहे हैं। इस पर दीवान कहता है, “तो क्या हुआ भैया कोई चोरी थोड़ी कर रहे हैं।” इन धोखेबाजों के हाव-भाव को देखखर अंदाजा लगाया जा सकता है कि जैसे इनके लिए व इनके साथियों के लिए ऐसे घूमना आम है।

पकड़े जाने के बाद जहाँ अली हुसैन सिर्फ़ पूछे जाने पर जवाब देता दिखता है वहीं दीवान लगातार सफाई देता नजर आ रहा है। दीवान कहता है कि वह लोग बस ‘माँगते है (माँगने का काम करते हैं)’। इस पर वीडियो बनाने वाला उनकी धोखेबाजी देखकर अपशब्दों का प्रयोग करता है और पूछता है, “यदि ‘माँगते’ भी हो तो हिंदुओं का भेष बनाकर माँगोगे।” युवक दोबारा पूछता है, “दीवान कौन सा नाम होता है अपना आधार कार्ड दिखाओ।”

दीवान यहाँ पहचान पत्र दिखाने से भी मना कर देता है और ये कहकर विश्वास में लेने की कोशिश करता है कि वह झूठ क्यों बोलेगा। इसके बाद युवक अली हुसैन से पहचान पत्र के लिए पूछता है। वह भी कोई पहचान पत्र दिखाने से मना कर देता है।

दोनों बताते हैं कि वह टिकरिया गाँव जिला गोंडा के निवासी हैं। इस पर युवक पुलिस बुलाने की बात करता है। साथ ही उन लोगों को कहता है कि वह लोग तब तक अपना सही एड्रेस दें और किसी पहचानने वाले को बुलाएँ वरना कोतवाली चलें।

युवक उन्हें गाड़ी में बैठकर कोतवाली चलने को कहता है और तीसरे से भी उसका नाम पूछता है। तीसरा भगवा पहनने वाला व्यक्ति अपना नाम सुड्डू बताता है। जब युवक उससे पूछता है कि हिंदू हो या मुस्लिम? इस पर भी वह सीधा-सीधा जवाब देने की जगह कहता है, “तुमको क्या लगता है, हम लोगों से क्या गलती हुई।” युवक कहता है कि बस वह ये बताए कि वो हिंदू है या मुस्लिम? सुड्डू एक शब्द में जवाब देता है कि मुस्लिम।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बजरंग दल सदस्य शुभम भारद्वाज समेत कई लोगों ने ऐसे बहरुपियों को लेकर समाज को सचेत किया है। उनका कहना है, “देशभर में चोरी, बलात्कार व अन्य कुकर्म यही बहरूपिए करते हैं और सेक्युलर मीडिया व बड़ी बिंदी गैंग बदनाम हिन्दू संतों को करती है, सब सचेत रहें।”

चूड़ियाँ टूटने के विवाद पर रिजवान, दानिश, कामरान समेत 15-20 लोगों ने बीच बाजार चलाई गोलियाँ: अमित गुप्ता की मौत, 2 घायल

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जनपद में 27 अक्टूबर को एक मामूली से विवाद पर समुदाय विशेष के युवकों ने बीच बाजार गोलियाँ चला कर एक व्यक्ति को मौत के घाट उतार दिया और पत्थरबाजी करके कइयों को घायल भी किया। मृतक की पहचान अमित गुप्ता के रूप में हुई है।

पुलिस ने इस केस में रिजवान, दानिश, मोहसिन, चीनिया, कामरान समेत 15-20 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है। इन्हें पकड़ने के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। अभी तक 1 दर्जन से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, पूरा मामला फिरोजाबाद में थाना दक्षिण क्षेत्र के मिश्रित आबादी वाले मोहल्ले बड़ी छपैटी का है। यहाँ मंगलवार (27 अक्टूबर) की शाम में एक रिजवान नामक चूड़ी कटाई श्रमिक और ई रिक्शा चालक के बीच चूड़ियाँ टूटने पर विवाद तब बढ़ा जब संजय गुप्ता के चूड़ी गोदाम पर मंगलवार शाम चूड़ी के तोड़े उठाकर चालक राजकुमार ई-रिक्शा में रख रहा था।

इसी दौरान वहाँ से गुजर रहे रिजवान की बाइक ई-रिक्शा से टकरा गई। इससे कुछ चूड़ियाँ टूट गए। इस पर ई-रिक्शा चालक और कटाई श्रमिक के बीच मारपीट हो गई। आसपास के लोगों ने बीच-बचाव करके किसी तरह मामला शांत करवाया।

इसके बाद रात के करीब 8 बजे रिजवान अपने दो दर्जन से ज्यादा साथियों को लेकर दोबारा उसी जगह आ धमका और सबने मिल कर फायरिंग करनी शुरू कर दी।

इस उपद्रवी भीड़ ने कथिततौर पर पत्थर व पेट्रोल बमों को भी फेंका, जिसके कारण पहले संजय गुप्ता घायल हो गए और बाद में अपने पिता को भीड़ से बचाते हुए संजय के बेटे लविश के हाथ में भी गोली लगी।

वहीं चूड़ी गोदाम में काम करने वाला अमित गुप्ता जब हल्ला सुन कर दुकान से बाहर निकला तो समुदाय विशेष की भीड़ ने एक गोली उसके सीने में भी दागी, जिसके कारण अस्पताल जाते-जाते उसकी मौत हो गई।

मृतक के परिवार से मिलती पुलिस (साभार: अमर उजाला)

मामले की जानकारी होने पर पुलिस के कई आला अधिकारी समेत कई भाजपा नेता ट्रामा सेंटर पहुँचे। वहीं एसपी सिटी मुकेश चंद्र मिश्रा कई थानों के फोर्स के साथ छपैटी पहुँचे और फरार आरोपितों की धड़पकड़ भी शुरू की। इस बीच मृतक के परिजनों को आईजी द्वारा आश्वासन दिया गया है और घटना स्थल के निरीक्षण के बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई के आदेश भी दिए गए।

पुलिस कार्रवाई

यहाँ बता दें कि इस हमले में आरोपितों को पकड़ने के लिए 6 टीमें गठित की गई है। सीसीटीवी कैमरों से उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। मामला दो पक्षों होने के कारण एहतियातन फोर्स तैनात है। अभी तक 1 दर्जन लोग गिरफ्तार हुए है। इस बात की जाँच भी हो रही है कि पेट्रोल बम फेंके गए या नहीं।

पुलिस लगातार आश्वासन दे रही है कि कोई नहीं बख्शा जाएगा। मगर, सोशल मीडिया पर कुछ लोग इस मुद्दे को शेयर कर सवाल रहे हैं। उनका पूछना है कि आखिर इस घटना पर किसी ने उफ्फ तक क्यों नहीं किया। जो अमित गुप्ता समुदाय विशेष की गोली का शिकार हुआ वह अपने बुजुर्ग माता-पिता का अकेला सहारा था। लोगों का कहना है कि इस इलाके में कुछ दिन पहले भी एक व्यापारी पर इसी तरह जानलेवा हमला हुआ था।

घटना के बाद बंद रहे बाजार, व्यापार मंडल ने उठाई जाँच की माँग

उल्लेखनीय है कि इस घटना के बाद बुधवार (अक्टूबर 28, 2020) को जनपद के अधिकांश बाजारों को बंद रखा गया। वहीं व्यापार मंडर के पदाधिकारियों के साथ माथुर वैश्य मंडलीय परिषद के पदाधिकरियो ने भी सड़क पर उतरकर लोगों से बाजार बंद का आह्वान किया। उन्होंने जिस क्षेत्र में घटना हुई उस क्षेत्र के थानाध्यक्ष की निलंबन की माँग की।

स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार व्यापार मंडल के जिला मुख्यमंत्री सुनील गुप्ता ने घटना को दुखद बताते हुए इसकी निंदा की। साथ ही सवाल किया कि आखिर इस प्रकार के अवैध असलहे वहाँ कैसे जमा हो गए।

उन्होंने घटना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्षेत्र में आपराधिक प्रवृत्ति के लोग पनप रहे हैं। निश्चित रूप से योजनाबद्ध तरीके से घटना को अंजाम दिया गया है। उनकी माँग है कि हर घर की तलाशी ले जिसके घर में असलहा मिले उसे गिरफ्तार किया जाए।

द हिंदू ने चीनी प्रोपेगेंडा छापने के एक महीने बाद ही पैंगोंग त्सो में PLA घुसपैठ को लेकर छापी फेक न्यूज़: PIB ने किया खंडन

प्रो-चाइना समाचार पत्र द हिंदू ने एक बार फिर फर्जी खबर को छापते हुए उसका प्रोपेगेंडा फैलाया है। फर्जी खबर में द हिंदू ने दावा किया कि पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे पर चीनी सेना ने फिंगर 2 और फिंगर 3 क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया है।

अखबार ने शुक्रवार को भाजपा के पूर्व सांसद थुपस्टोन चवांग का हवाला देते हुए एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें कहा गया था कि चीनी सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र के पैंगोंग त्सो के तट पर नए जगहों पर घुसपैठ कर ली है।

रिपोर्ट के अनुसार, चवांग ने कहा था कि उन्हें लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ आगे के इलाकों में रहने वाले स्थानीय लोगों से यह जानकारी मिली। उन्होंने यह भी दावा किया था कि जीरो डिग्री तापमान जैसी भयानक परिस्थितियों में भारतीय सैनिक टेंट में रह रहे थे।

रिपोर्ट में राजनेता के हवाले से लिखा गया, “सीमा की स्थिति गंभीर है। चीनी सैनिकों ने न केवल हमारे क्षेत्रों में घुसपैठ किया है, बल्कि उन्होंने पंगोंग त्सो के फिंगर 2 और 3 क्षेत्रों के प्रमुख जगहों पर कब्जा भी कर लिया है, यहाँ तक ​​कि हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र भी उन्होंने पूरी तरह से खाली नहीं किया है। यह जानकारी स्थानीय लोगों से मिली है।”

वहीं द हिंदू द्वारा चेवांग के हवाले से किए गए दावों को सेना के अधिकारियों ने खारिज कर दिया। इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने कहा कि यह फर्जी दावा और फर्जी खबर है। उन्होंने पुष्टि की कि क्षेत्र में कोई नागरिक नहीं हैं, इसलिए रिपोर्ट में नागरिक का नाम लेते हुए किया गया दावा सही नहीं हैं।

पीआईबी फैक्ट चेक के एक ट्वीट में भी रिपोर्ट में किए गए दावे का खंडन किया गया है। पीआईबी के आधिकारिक फैक्टचेकिंग आर्म ने बताया कि यह एक फर्जी खबर है और भारतीय सेना ने इस बयान का खंडन किया है।

ट्विटर पर सैटेलाइट इमेजरी एक्सपर्ट हैंडल @detresfa ने भी पुष्टि की कि भारत अभी भी झील के उत्तरी किनारे पर उच्च क्षेत्रों में अपनी स्थिति बनाए हुए है। ओपन सोर्स इंटेलिजेंस हैंडल ने सेटेलाइट के जरिए क्षेत्र की नई फ़ोटो भी पोस्ट की, जो दर्शाता है कि भारतीय सैनिकों ने अपनी कोई पोजीशन नहीं बदली है और क्षेत्र में कोई चीनी घुसपैठ नहीं की गई है।

रक्षा विशेषज्ञ नितिन ए. गोखले ने भी पिछले सप्ताह एक रिपोर्ट के माध्यम से पुष्टि की थी, कि पिछले कई हफ्तों से पैंगॉन्ग त्सो के तट पर स्थिति अपरिवर्तित है। रिपोर्ट में कहा गया, “लगभग छह महीने के सैन्य हमले के बाद, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) भारतीय सेना को उकसाने या पीछे हटने के लिए किसी भी प्रकार से मजबूर नहीं कर पा रही है।”

गौरतलब है कि भारतीय सैनिकों ने 29-30 अगस्त को रिगलाइन फिंगर 4 के सबसे ऊपरी हिस्से पर कब्जा कर लिया था। बता दें, इस क्षेत्र में निचली जमीन पर चीनी शिविरों से दिखाई न देने वाले मार्ग का उपयोग करते हुए हमारी सेना को एक रणनीतिक लाभ मिलता है। तभी से भारतीय सैनिक उन उच्च क्षेत्रों पर कब्जा बनाए हुए है और चीन उन्हें पर्वतीय युद्ध में विस्थापित करने में असमर्थ रहा है।

उल्लेखनीय है कि 1 अक्टूबर को द हिंदू ने अपने पहले पेज पर चीन के सभी विज्ञापन को प्रदर्शित किया था। वहीं पेज 3 पर बाकी का पेड कंटेंट छापा गया था।

NDTV, इंडिया टुडे में पुलवामा आतंकी हमले में पाकिस्तानी हाथ स्वीकारने वाले मंत्री से सफाई लेने की होड़: राजदीप ने किया इंटरव्यू

पाकिस्तान के विज्ञान और तकनीकी मंत्री फवाद चौधरी ने इस बात को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि 2019 के दौरान पुलवामा आतंकवादी हमलों में पाकिस्तान की अहम भूमिका थी। इसके कुछ ही घंटों बाद भारत के तथाकथित सेक्युलर मीडिया समूह इंडिया टुडे और एनडीटीवी उन्हें सफाई पेश करने का मंच प्रदान करने लगे। 

गुरूवार (29 अक्टूबर 2020) को कॉन्ग्रेसी दौर के प्रिय मीडिया समूह एनडीटीवी फवाद चौधरी को मंच दिया कि वह पुलवामा की घटना पर अपनी राय पेश करें। जिस घटना में कुल 40 भारतीय जवान शहीद हुए थे। एनडीटीवी ने पहले भी तमाम कार्यक्रम प्रसारित किए हैं जो सीधे तौर पर पाकिस्तान का महिमामंडन करते हैं, इसी कड़ी में एनडीटीवी ने ट्विटर पर पाकिस्तानी मंत्री फवाद चौधरी का बयान साझा किया।

एनडीटीवी ने अपने ट्वीट में लिखा, “पाकिस्तानी मंत्री जो पुलवामा के मुद्दे पर बयानबाज़ी कर रहे थे उन्होंने एनडीटीवी से कहा है, पाकिस्तान किसी भी तरह के आतंकवाद को बढ़ावा नहीं देता है। मेरी बात की गलत व्याख्या प्रस्तुत की गई।” 

साभार – NDTV

इंडिया टुडे दो कदम आगे, पाकिस्तानी मंत्री का साक्षात्कार 

सबसे ज़्यादा हैरानी की बात सामने आई इंडिया टुडे के मामले में। इंडिया टुडे समूह जो पहले से ही फ़र्ज़ी टीआरपी मामले में छेड़छाड़ का आरोपित है, उसने दो कदम आगे बढ़ कर पाकिस्तानी मंत्री का साक्षात्कार प्रसारित कर दिया। स्वघोषित निष्पक्ष पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने फवाद चौधरी को पूरा मौक़ा दिया कि उन्होंने पाकिस्तान की संसद (नेशनल असेंबली) में बयान दिया उसे लेकर अपनी सफाई पेश करें। इतना ही नहीं पाकिस्तानी मंत्री फवाद चौधरी को ‘साहब’ संबोधित करते हुए राजदीप सरदेसाई ने उन्हें मौक़ा दिया कि वह अपने ही बयान के विपरीत बात कहें। 

स्वघोषित लिबरल पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने न तो फवाद चौधरी से मूल प्रश्न पूछे और न ही पुलवामा की घटना को लेकर बयान पर प्रक्रियात्मक रवैया अपनाया। इसके विपरीत राजदीप ने फवाद चौधरी को अपने अपराधों पर पर्दा डालने का सुनहरा मौक़ा दे दिया।  इसके बाद पाकिस्तानी मंत्री फवाद चौधरी ने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा कि उनका पक्ष जानने के लिए उनका पूरा भाषण सुना जाना चाहिए।  

अपनी ही बात से यू टर्न लेते हुए फवाद चौधरी ने दावा किया कि जब वह पुलवामा के बारे में बात कर रहे थे तब उनका तात्पर्य 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना द्वारा बालाकोट में की गई एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तानी सेना की प्रतिक्रिया से था। न कि पुलवामा में हुए आतंकवादी हमलों से जिसमें 40 भारतीय जवानों ने अपनी जान गँवाई। कुल मिला कर पूरे साक्षात्कार में राजदीप सरदेसाई ने फवाद चौधरी को अपने ही दावों से पलटने का मौका दिया और उलटा फवाद चौधरी ने ही भारत सरकार पर आरोप लगा दिए कि भारत खुद मुसीबतों को निमंत्रण देने वाला देश है। 

एक और हैरानी की बात यह थी कि साक्षात्कार के दौरान राजदीप ने किसी भी दावे को लेकर सवाल नहीं खड़ा किया (काउंटर) और न ही पुलवामा की घटना पर खेद जताने की बात को प्राथमिकता दी। 

  1. मुझे लगा ही था कि भारतीय मीडिया इस तरह की व्यवहार करती है (अपने बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किए जाने के संदर्भ में) 
  2. हम इस बात में भरोसा नहीं करते हैं जैसा कि भारत करता है ‘घुस कर मारना’ या जैसा भारतीय सुरक्षाबल सोचते हैं, ‘आतंकवाद करवाओ तो वो घुस कर मारना है।’ इसके बाद फवाद चौधरी ने कहा कि हमने अपने लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल भारत पर हमला करने के लिए किया। 
  3. अगर भारत में कोई ऐसा मानता है कि राजनीतिक फायदे के लिए बयान तोड़ मरोड़ कर पेश किए जा सकते हैं तो मैं इसके लिए कुछ नहीं कर सकता हूँ। 

राजदीप सरदेसाई ने पाकिस्तानी मंत्री फवाद चौधरी को यह कहने का अवसर दिया कि पाकिस्तान ने बेहद सक्रियता से पुलवामा आतंकवादी हमलों को अंजाम दिया। यानी पाकिस्तानी सेना ने बड़े गर्व से यह लड़ाई लड़ी और भारतीय सेना आतंकवाद को बढ़ावा देती है न कि पाकिस्तान की सेना। 

और तो और जब फवाद चौधरी ने इस तरह के तमाम बेबुनियाद आरोप लगाए तब राजदीप सरदेसाई पूरी तरह शांत थे। इन आरोपों के बाद राजदीप सरदेसाई ने कहा कि वह कैसे इमरान खान के इस बयान के उलट दावा कर सकते हैं जिसमें इमरान खान ने कहा था कि पुलवामा हमलों में पाकिस्तान की कोई भूमिका नहीं थी। इस साक्षात्कार में यह भी बेहद साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि फवाद चौधरी के शब्द लड़खड़ा रहे हैं। 

इस मौके पर कोई भी अनुभवी पत्रकार दावों की असलियत सामने लेकर आने में सक्षम होता। लेकिन, राजदीप सरदेसाई ने इसके विपरीत पाकिस्तानी मंत्री को मन मुताबिक़ बातें और दावे करने का मौक़ा दिया और उलटा भारत को दोषी ठहराने का आधार प्रदान किया। इसके बाद तमाम सेना अधिकारियों ने भी राजदीप सरदेसाई के इस साक्षात्कार पर कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराई।  

पूर्व सेना अधिकारी मेजर जनरल हर्षा कक्कर ने तो यहाँ तक कहा कि यह साक्षात्कार बयान को लेकर स्वीकार्यता के संबंध में नहीं था बल्कि बयान के बचाव में किया गया था। 

पाकिस्तानी मंत्री ने मानी थी पुलावामा हमले में पाकिस्तान की भूमिका की बात 

बुधवार (28 अक्टूबर 2020) को पाकिस्तान के विज्ञान और तकनीकी मंत्री फवाद चौधरी ने पाकिस्तान की संसद नेशनल असेंबली में इस बात को स्वीकार किया था कि 2019 के दौरान हुए पुलवामा आतंकवादी हमले में पाकिस्तान की भूमिका थी। इमरान तालिबान खान सरकार पर विपक्ष की आलोचना का जवाब देते हुए, (भारत को जवाब नहीं दे पाने के मुद्दे पर) पाकिस्तानी मंत्री ने कहा था कि पाकिस्तान ने भारत को मुँह तोड़ जवाब दिया है। 

उन्होंने अपने बयान में कहा, “हमने हिन्दुस्तान को घुस कर मारा। पुलवामा हमारी कामयाबी है, इमरान खान की सरकार में यह आम लोगों की कामयाबी का नमूना है। आप और हम इस कामयाबी के हिस्सेदार हैं।” 

इसके बाद पाकिस्तानी मंत्री ने कहा, “हमें इस बात पर गर्व है कि हमारे बेटों (आतंकवादियों) ने भारत की सीमा में दाखिल होकर पुलवामा में उन पर हमला किया। यहाँ तक कि भारतीय मीडिया इस हमले पर रिपोर्टिंग करने में शर्म महसूस करती है। पाकिस्तान के मंत्री ने यह बयान पुलावामा आतंकवादी हमले की घटना के संबंध में दिया था जिसमें सीआरपीएफ़ के जवानों पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने हमला किया था। इस हमले में 40 भारतीय जवानों ने अपनी जान गँवाई थी।          

तेज प्रताप ने यहाँ क्या किया, जो मेरे लिए चैलेंज बनेगा: जद(यु) प्रत्याशी राज कुमार राय

बिहार में चुनावी मिजाज को समझते-समझते हम लगातार कई प्रत्याशियों के मन को टटोलने की भी लगातार कोशिश कर रहे हैं। इसी क्रम में हमने हसनपुर विधानसभा क्षेत्र में जद(यु) प्रत्याशी राज कुमार राय से विस्तार से बातचीत की।

राज कुमार राय इससे पहले इसी क्षेत्र से दो बार विधायक चुने जा चुके हैं। मगर, इस बार उनकी जीत को लेकर सवाल इसलिए भी है क्योंकि राजद की ओर से स्वयं लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने यहाँ से चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

राज कुमार राय से बात करते हुए पता चलता है कि वह अपनी जीत को लेकर पूर्ण रूप से आश्वस्त हैं। वह पूछते हैं कि आखिर तेजप्रताप ने किया ही क्या है, जो वह उनके लिए चैलेंज बनेगा। वह बताते हैं कि उन्हें पूरा विश्वास है कि क्षेत्र की जनता उन्हें ही चुनेगी क्योंकि ये उनकी न सिर्फ कर्मभूमि है बल्कि जन्मभूमि भी है।

पूरा इंटरव्यू इस लिंक पर क्लिक करके देखें।

16 साल के युवक ने ‘अल्लाह-हू-अकबर’ चिल्लाते हुए पुलिसकर्मियों पर किया हमला, रूस की पुलिस ने किया ढेर

पैगंबर मोहम्मद के कार्टून को लेकर फ्रांस से उठा विवाद अब पूरे विश्व तक फैलता दिखाई दे रहा है। अब रूस से एक खौफनाक घटना सामने आई है। यहाँ 16 साल के लड़के ने ‘अल्लाह-हू-अकबर’ चिल्लाते हुए पुलिस वाले पर चाकू से हमला कर दिया। इस घटना के बाद अन्य पुलिसकर्मियों ने आरोपित पर गोली चलाई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

स्थानीय मीडिया के अनुसार 16 साल के युवक ने 3 बार पुलिसकर्मी पर चाकू से वार किए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। हमलावर का नाम विटले अंतीपोव था।

रूसी समाचार एजेंसी Interfax के मुताबिक नाबालिग हमलावर चाकू और पेट्रोल बम से लैस था। पुलिसवालों को मारने की नियत से उसने पीछे से उन पर तीन बार ‘अल्लाह-हू-अकबर’ बोलते हुए उन पर वार किया। इस दौरान लड़के ने पुलिसवालों को ‘काफिर’ भी कहा था। घटना रूस के तातारस्तान (Tatarstan) के कुकमोर (Kukmor) क्षेत्र का है।

रूस के इस इलाके में सबसे अधिक मुस्लिम जनसंख्या रहती है। फ्रांस के खिलाफ यहाँ भी लोगों ने काफी उग्र प्रदर्शन किया था। वहीं घटना पर संज्ञान लेते हुए रूस की जाँच एजेंसी ने इस घटना को आतंकवादी हमला करार दिया है। साथ ही मामले में जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी की जा रही है।

जाँचकर्ताओं ने कहा कि 16 साल के युवक ने जिला पुलिस भवन में आग लगाने की कोशिश की थी। वहीं गिरफ्तार होने के दौरान उसने पुलिस अधिकारी को चाकू मार दिया। हमला करते वक़्त युवक ने- “मैं आप सभी को मारने जा रहा हूँ” चिल्लाया था। घायल पुलिसवाले को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

कहाँ से शुरू हुआ विवाद

बता दें फ्रांस में कुछ दिनों पहले एक शिक्षक का गला काट दिया गया था। शिक्षक की ‘गलती’ सिर्फ इतनी कि उन्होंने पैगंबर मोहम्मद का कार्टून क्लास के बच्चों को दिखाया था।
घटना से गुस्साए लोगों ने इसका जमकर विरोध किया, धीरे-धीरे पूरे विश्व में इसकी चर्चा होने लगती है। लोगों में बढ़ती नाराजगी को देखते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों इस्लामी कट्टरपंथियों के आगे नहीं झुकने का कठोर संदेश देते हैं।

राष्ट्रपति मैक्रों का यह संदेश इस्लामी कट्टरपंथी लोगों को चुभ जाता है जगह-जगह विरोध होने लगते हैं। फिर यह हिंसा का रूप धर लेती है। कहीं ‘अल्लाह हू अकबर’ चिल्लाते हुए लोगों का गला काटा जाता है तो कहीं ‘अल्लाह हू अकबर’ चिल्लाती भीड़ जमा होती है। और फिर कोई पैदल चल रहे राहगीरों पर कार चढ़ा देता है। इस विरोध में कई बेगुनाह लोग अब शिकार हो रहे है।

विरोध कर रहे लोगों ने जर्मनी में पैदल चल रहे राहगीरों को रौंदा

आज की घटना से पहले 29 अक्टूबर, 2020 यानी कल जर्मनी के केंपेन शहर में कार से पैदल चल रहे लोगों को कुचला जाता है, उसके ठीक पहले बर्लिन में इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ जमा होती है जो ‘अल्लाह-हू-अकबर’ चिल्ला रही होती है और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का विरोध कर रही होती है। केंपेन में कार से पैदल यात्रियों के रौंदे जाने की घटना में एक की मौत हो गई है जबकि 3 बुरी तरह घायल हैं। स्थानीय पुलिस अभी जाँच कर रही है कि क्या यह भी किसी आतंकी का कारनामा है या सिर्फ एक दुर्घटना।

नीस में अल्लाह-हू-अकबर बोल काटा गला

फ्रांस के नीस शहर में आतंकी घटना में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर बोलते हुए कई लोगों पर धारदार हथियार से हमला किया। इस घटना में 3 लोगों की जान गई और कई घायल हैं। मरने वालों में एक महिला भी शामिल है, जिनका गला काट दिया गया है।

सऊदी अरब में भी कट्टरपंथियों ने सुरक्षाकर्मी पर किया हमला

एक और कट्टरपंथी प्रयास सऊदी अरब के जेद्दाह शहर में हुआ था। जहाँ सऊदी अरब के फ्रांसीसी दूतावास में तैनात सुरक्षाकर्मी पर धारदार हथियार से हमला किया गया। जानकारी के अनुसार घटना घटित होने के कुछ ही समय बाद आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया था। यह घटना भी फ्रांस के नीस शहर स्थित एक चर्च में तीन लोगों की गला काट कर हत्या करने के कुछ घंटों बाद हुई थी।

कुरान में गलती से जिस शख्स का पैर लग गया, पहले उसे मारा और फिर आग में झोंक दिया

बांग्लादेश में रंगपुर डिवीजन के लाल्मोनिर्हत जिले के पटग्राम उपजिला के बुरिमारी केंद्रीय परिषद के परिसर में गुरुवार (अक्टूबर 30, 2020) को कट्टरपंथी भीड़ द्वारा एक व्यक्ति को मौत के घाट उतार दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मृतक की पहचान 50 वर्षीय शाहिदुननबी ज्वेल के रूप में की गई है। बताया जा रहा है कि रंगपुर के निवासी और रंगपुर छावनी पब्लिक स्कूल के पूर्व कर्मचारी ज्वेल की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। मृतक अपने दोस्त सुल्तान जुबेर अब्बास के साथ नमाज अदा करने के लिए बरमीरी जाम-ए मस्जिद गया था।

दावा किया गया है कि जमात-उल-मुजाहिदीन के आतंकी मस्जिद के अंदर छिपे हुए थे। दोनों मस्जिद के अंदर बुकशेल्फ़ की जाँच करना चाहते थे। हालाँकि घटना को लेकर, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उन्होंने कुरान का अपमान किया, जिसके चलते दोनों को बंद करके रखा गया था। वहीं एक्टिविस्ट तस्लीमा नसरीन ने फेसबुक पर कहा कि यह जानलेवा अपराध पीड़ित द्वारा गलती से कुरान पर पैर रखने के बाद शुरू हुआ।

घटना को देखते ही ज्वेल और उसके दोस्त अब्बास को यूनियन परिषद कॉउन्सिल भवन में साथी सदस्य हाफिजुल इस्लाम ने बंद करके रखा। जिसके तुरंत बाद उस जगह पर कई लोग इकट्ठा हुए और उन सभी ने ज्वेल को उसकी कस्टडी से बाहर निकला।

पुलिस अधीक्षक (एसपी) आदिदा सुल्ताना ने बताया, “प्रार्थना हॉल में बुकशेल्फ में किताबें खोजने से पहले उनमें से एक आदमी खादिम, जुबेद अली के साथ मस्जिद के अंदर गया था। उसने दावा किया था कि कुरान और हदीस की जो किताबें वहाँ रखी थीं, उनके पीछे हथियार छिपे हुए थे।”

अली ने कहा, “आदमी ने बुकशेल्फ में खोजना शुरू कर दिया। इसी दौरान मस्जिद के बाहर से पाँच या छह लोग आए और उन्होंने उस व्यक्ति को सीढ़ियों तक घसीटा, फिर मारना शुरू कर दिया। घटना के वक्त दूसरा व्यक्ति हॉल के बाहर इंतजार कर रहा था। जिसको देखते ही हाफिजुल इस्लाम का एक सदस्य वहाँ पहुँचा और उसे अपने साथ ले गया। मुझे नहीं पता कि उसके बाद उनके साथ क्या हुआ था।”

अपने बचाव में हाफ़िज़ुल इस्लाम ने कहा, “हमने उन्हें अपने पास सुरक्षित रखने की कोशिश की। लेकिन भीड़ ने इमारत को गिरा दिया और उनमें से एक को अपने साथ जबरन ले गए।” वहीं माहौल को नियंत्रण से बाहर जाते देख पेटग्राम अपज़िला काउंसिल के अध्यक्ष रूहुल अमीन बाबुल और बरिमारी यूपी के चैयरमैन एसएम नियाज़ निशात को स्थिति को शांत करने के लिए बुलाया गया।

इस घटना के बाद पुलिस ने अब्बास को सुरक्षित कर लिया। लेकिन उसके साथी को अनयंत्रित भीड़ ने पहले मौत के घाट उतारा और उसके शरीर को बरिमारी बाजार की मुख्य सड़क पर आग के हवाले कर दिया। इसके अलावा भीड़ ने निकटवर्ती नेशनल बैंक कार्यालय में भी तोड़फोड़ की और बरिमारी संघ परिषद की इमारत को भी आग लगा दिया। किसी अप्रिय घटना को होने देने से रोकने के लिए अतिरिक्त फोर्स और रैपिड एक्शन बटालियन की तैनाती की गई है।

बिहार के गाँवों में ईसाई धर्मांतरण? क्या बोल कर करवाते हैं कन्वर्ट?| Christian conversion in Bihar

बिहार की चुनावी यात्रा के बीच ऑपइंडिया के संज्ञान में धर्मांतरण के कई ऐसे मामले सामने आए जहाँ लोगों को भ्रमित कर उनसे ईसाई धर्म कबूल करवा लिया गया। जब इस संबंध में पड़ताल करने ऑपइंडिया के डिप्टी एडिटर अजीत झा कई सुदूर ग्रामों में पहुँचे तो उन्होंने इन दावों को सच पाया।

ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान उन्हें स्थानीयों व पादरी से बातचीत करते हुए पता चला कि किस प्रकार लोगों की बीमारियों का फायदा उठा कर उनका धर्मांतरण करवाया जा रहा और किस तरह रामायण को गलत तरह से कोट करके ग्रामीणों को बरगलाया जा रहा है।

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मुस्लिम लोग उसे वोट देते हैं जो भाजपा को हरा सकते हैं? | Do Muslims vote against BJP?

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोटर्स का चुनावी मूड समझने के लिए ऑपइंडिया लगातार आप तक हर समुदाय के लोगों का पक्ष पहुँचाने में प्रयासरत है। इस यात्रा में हम इस बार पहुँचे हैं पूर्वी चंपारण के ढाका मुस्लिम बहुल क्षेत्र में। इन चुनावों में यदि मुस्लिम आबादी के चुनावी झुकाव को समझना है तो इससे बेहतर क्षेत्र शायद ही कोई हो।

हमने यहाँ के अल्पसंख्यक मतदाताओं से बात करते हुए कई सवालों के जवाब जाने। हमें बताया गया कि आखिर इन लोगों के मुद्दे क्या हैं और यह कैसे वोट करते हैं। स्थानीयों ने तसल्लीबख्श हर सवाल का जवाब दिया। उन्होंने बताया कि वैसे तो सब लोग उसे ही वोट देंगे जिसे दिल चाहता है, लेकिन उनकी माँग यही है कि उनके विकास की दिशा में काम हो, जो लोग अच्छा काम करे, उन्हें ही वोट मिले।

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लालू परिवार चोर है, उसको वोट नहीं देंगे: ग्राउंड रिपोर्ट | Bihar Elections: Won’t vote for thieves

बिहार में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजद का दावा है कि इस बार प्रदेश को तेजस्वी यादव के रूप में युवा मुख्यमंत्री मिलने वाला है। हालाँकि, यह बात और है कि हसनपुर विधानसभा क्षेत्र में स्थित फुलहारा गाँव के ग्रामीण इन दावों को खोखला साबित करते हैं।

यहाँ के लोगों का कहना है कि गरीबों की कोई सरकार नहीं होती है। उनके गाँव में कोई विकास नहीं हुआ, लेकिन तब भी वह चोरों को वोट नहीं देंगे। इनके हिसाब से लालू परिवार चोर है।

एक खास बात और इस गाँव में देखने को मिलती है कि यहाँ की महिलाएँ तेजप्रताप यादव के पारिवारिक जीवन में उत्पन्न कलह को बेहद गंभीरता से लेती हैं। उनका मानना है कि जो घर अपनी बहू को नहीं संभाल पाया, वह पूरी प्रदेश की महिलाओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेगा।

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