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उद्धव ठाकरे सरकार की कोर्ट में स्वीकृति के बाद परमबीर सिंह पर 200 करोड़ की मानहानि का मुकदमा करेगा रिपब्लिक TV

‘फेक TRP स्कैम’ मामले में अब तक की सबसे बड़ी बात सामने आई है। इस मामले में रिपब्लिक टीवी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (अक्टूबर 19, 2020) को कहा कि रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी TRP मामले में आरोपित नहीं हैं। इसके बाद रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क और अर्नब गोस्वामी की तरफ से इस मुद्दे पर प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई है। जिसमें उन्होंने मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह पर 200 करोड़ के मानहानि के मुक़दमे की बात कही है।   

विज्ञप्ति के मुताबिक़, महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस ने अदालत में यह बात स्वीकार ली कि टीआरपी मामले में दर्ज की गई एफ़आईआर में रिपब्लिक टीवी का नाम शामिल नहीं है। रिपब्लिक टीवी मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन चीफ और मैनेजिंग डायरेक्टर अर्नब गोस्वामी ने अपने क़ानूनी सलाहकार समूह फीनिक्स लीगल को निर्देश दिया है कि वह परमबीर सिंह पर 200 करोड़ रुपए की मानहानि का मुकदमा दर्ज कराएँ। इसमें से 100 करोड़ अर्नब गोस्वामी की छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए और 100 करोड़ रिपब्लिक टीवी मीडिया नेटवर्क की छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए। 

रिपब्लिक टीवी मीडिया नेटवर्क की क़ानूनी टीम मानहानि का मुकदमा करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। अपने ही कमिश्नर के दावों में विरोधाभास पैदा करते हुए मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार के वकील ने कहा कि एफ़आईआर में रिपब्लिक टीवी का नाम शामिल नहीं है। इतना ही नहीं महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस परमबीर सिंह द्वारा किए गए दावों से किनारा करते हुए नज़र आए। अदालत में महाराष्ट्र सरकार द्वारा यह बात स्वीकार किए जाने के बाद अर्नब गोस्वामी ने कहा है कि वह परमबीर सिंह पर हर ज़रूरी कार्रवाई करेंगे (ज़रूरत पड़ने पर अन्य लोगों पर भी)। घटनाक्रम के दौरान हुई हानि की भरपाई मानहानि के मुक़दमे से किया जाएगा।    

इसके अलावा रिपब्लिक स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट और असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर सुधीर जम्बावाडेकर के विरुद्ध अवमानना की याचिका दायर करेगा। इसका सबसे बड़ा आधार होगा कि उन्होंने एफ़आईआर मामले की मनमानी से शुरुआत की, जिसे बॉम्बे उच्च न्यायालय ने पहले ही रद्द कर दिया था। फिर परमबीर सिंह द्वारा रचे गए झूठ के आधार पर रिपब्लिक टीवी के विरुद्ध तैयार किया गया अभियान लगातार चला, खासकर 8 अक्टूबर 2020 को हुई प्रेस वार्ता के बाद। 

परमबीर सिंह ने मीडिया के सामने आकर रिपब्लिक टीवी के नाम को नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया जबकि उनके पास ऐसा करने के लिए पर्याप्त सबूत तक नहीं थे। इसका एक और मतलब साफ़ है कि यह कार्रवाई सिर्फ बदले की भावना से की जा रही थी। तमाम कोशिशों के बावजूद सच सामने आ चुका है और सच वही लोग सामने लेकर आए हैं जो अदालत में हमारे विपरीत मौजूद थे। महाराष्ट्र सरकार द्वारा यह बात स्वीकार करने का मतलब है कि रिपब्लिक टीवी ने किसी भी तरह की धाँधली नहीं की। 

सर्वोच्च न्यायालय ने टीआरपी मामले की सुनवाई के दौरान परमबीर सिंह द्वारा दिए जाने वाले साक्षात्कारों की शैली पर भी चिंता जताई। बॉम्बे उच्च न्यायालय का भी इस मुद्दे पर यही कहना था। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने पालघर लिंचिंग बांद्रा एफ़आईआर मामले में मुंबई पुलिस की गतिविधियों पर स्टे लगाई थी। इस देश की अदालतों ने हमेशा न्याय को अहमियत दी है और सच हमेशा सामने आया है। इसके अलावा हम इस बात के भी आभारी हैं जो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के अधिकारों की रक्षा हुई और देश के सबसे मशहूर मीडिया नेटवर्क के विरुद्ध शिकायतों पर विराम लगा। 

अंत में वही इस मुद्दे पर सच सामने लेकर आए जो इसे छिपा रहे थे, हम देश के लोगों के प्रति भी आभारी हैं जो ऐसे मुश्किल समय में हमारे साथ खड़े हुए। रिपब्लिक इस तरह के दमनकारी प्रयासों के सामने कभी नहीं झुकेगा जिनके ज़रिए मीडिया की आवाज़ दबाने की कोशिश हो रही है। रिपब्लिक सच सामने लेकर आने की लड़ाई में निडर होकर आगे बढ़ेगा और इस लड़ाई में देश के लोग हमारे साथ खड़े हैं।  

मिलिए भगवान महावीर की अहिंसा पर PHD होल्डर उस बाहुबली नेता से जिसने मुख्तार अंसारी के मर्डर के लिए दी थी ₹50 लाख की सुपारी

सुनील पांडेय बिहार की राजनीति का जाना-माना नाम और आपराधिक छवि वाले दंबग नेता हैं। सुनील पांडेय ने हाल ही में लोजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सह बाहुबली विधायक सुनील पांडेय ने इस्तीफा दे दिया है और अब वे तरारी सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे।

सुनील पांडेय के लोजपा छोड़ने के पीछे की वजह ये बताई जा रही है कि वो इस बार तरारी से लोजपा के टिकट पर मैदान में आना चाहते थे, लेकिन एनडीए में यह सीट बीजेपी के खाते में चली गई। इसके बाद से ही सुनील पांडेय के इस इलाके से निर्दलीय चुनाव लड़ने के कयास लगाए जा रहे थे। इसके बाद सुनील पांडेय ने लोजपा से इस्तीफा देकर इस कयासबाजी पर अपनी मुहर लगा दी है।

इससे पहले वो जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की टिकट पर दो बार विधायक बने हैं। सुनील पांडेय बिहार के ऐसे नेता हैं, जिनका नाम हमेशा ही सर्खियों में रहा। सुनील पांडेय का नाम कभी रणवीर सेना के सुप्रीमो ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या में आया, तो कभी बिहार के चर्चित आरा सिविल कोर्ट बम ब्लास्ट में आया, तो कभी पटना के एक होटल में खुलेआम गोली मारने की धमकी देने का वीडियो वायरल हुआ, तो कभी अपराधी को जेल से भगाने के मामले में गिरफ्तार होते हैं, तो कभी यूपी के बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी को मारने के लिए 50 लाख रुपए की सुपारी देने के आरोपों से घिर जाते हैं। सुनील पांडेय की आधी जिंदगी जेल में बीती है तो आधी फरार रहने में। ये तो था सुनील पांडेय का इंट्रो। अब कहानी जानिए…

कॉलेज में लड़के को मार दिया था चाकू

90 का दशक था। बिहार के रोहतास के नावाडीह गाँव में रहते थे कमलेशी पांडेय। भूमिहार जाति से थे। इंजीनियरिंग की हुई थी। सोन नदी से बालू निकालने के लिए मामूली ठेके लिया करते थे। हालाँकि, आसपास के इलाकों में उनकी छवि दबंग की थी। कमलेशी पांडेय के बेटे का नाम था नरेंद्र पांडेय, जिन्हें लोग सुनील पांडेय के नाम से भी जानते हैं। पिता चाहते थे कि बेटा भी पढ़-लिखकर इंजीनियर बन जाए। इसलिए बेंगलुरू भेज दिया, लेकिन कहते हैं ना किस्मत के आगे किसी की नहीं चलती। सुनील की कुछ दिनों बाद वहाँ एक लड़के से लड़ाई हो गई। इस दौरान सुनील ने उस लड़के को चाकू मार दिया। फिर क्या था पढ़ाई-लिखाई छोड़कर नावाडीह वापस आ गए।

कैसे उतरे जुर्म की दुनिया में

जब पिता की छवि दबंग की थी तो बेटा पीछे कैसे रहता। सुनील पांडेय भी अपने पिता के नक्शे-कदम पर चलते हुए काफी आगे निकल गए। उस वक्त रोहतास के आसपास के इलाकों में सिल्लू मियाँ का सिक्का चलता था। वह आरा का निवासी था और शहाबुद्दीन का करीबी था। सुनील की धीरे-धीरे सिल्लू से दोस्ती हुई और बहुत जल्दी वो उसका राइट हैंड बन गया।

कहा जाता है कि जुर्म की दुनिया की क्लास सुनील ने सिल्लू की पाठशाला में ही ली थी। लेकिन फिर बाद में ऊपर उठने की चाह में सुनील की सिल्लू से दुश्मनी हो गई। इसी बीच एक दिन सिल्लू का मर्डर हो गया। नाम सुनील का आया। लेकिन सबूत ना होने के कारण केस दर्ज नहीं हुआ। इस तरह से बालू के ठेके पर सुनील पांडेय का एकछत्र राज हो गया।

जब ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या में आया नाम

90 का दशक बिहार में रणवीर सेना का माना जाता है। भूमिहार जाति का इस सेना में दबदबा था और ब्रह्मेश्वर सिंह उसके मुखिया थे। एक वक्त वो भी आया, जब सुनील रणवीर सेना का कमांडर बन गया। लेकिन सुनील और ब्रह्मेश्वर के बीच लंबी दुश्मनी भी चली। 1993 में एक ईंट भट्टे मालिक की हत्या हो गई। इसके बाद सुनील और ब्रह्मेश्वर सिंह में खूनी जंग छिड़ गई।

ब्रह्मेश्वर गुट ने जनवरी 1997 को बोजपुर के तरारी प्रखंड के बागर गाँव में 3 लोगों को मौत के घाट उतार डाला। ये लोग भूमिहार जाति से थे। इनमें एक महिला भी थी, जो सुनील की करीबी रिश्तेदार थी। ब्रह्मेश्वर और सुनील की दुश्मनी 1 जून 2012 तक जारी रही, क्योंकि इसी दिन ब्रह्मेश्वर सिंह की हत्या हुई थी। 

जिसका आरोप सुनील पांडेय पर लगा। केस तो चला लेकिन सबूत नहीं मिला। ब्रह्मेश्वर मर्डर केस की जाँच में सीबीआई अभी तक किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुँची है। हत्या के पहले ब्रह्मेश्वर तकरीबन 9 सालों तक जेल में बंद थे। अगस्त, 2002 में 227 लोगों की हत्या के जुर्म में ब्रह्मेश्वर गिरफ्तार हुए थे। लेकिन मई 2011 में जमानत पर रिहा कर दिया गया था। जिसके बाद एक जून 2012 को उनकी हत्या कर दी गई। लेकिन इन 9 सालों में सुनील पांडेय ने अपराध के साथ-साथ राजनीति में भी अपनी पैठ जमा ली थी।

फिर उतरे राजनीति में…

साल था 2000, मार्च में बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। समता पार्टी ने सुनील पांडेय को रोहतास के पीरो से टिकट दिया। उन्होंने आरजेडी के प्रत्याशी काशीनाथ को हराया और विधायक बन गए। उस चुनाव में किसी को भी बहुमत नहीं मिला। जब समता पार्टी का बीजेपी से गठबंधन था, तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने को कहा।

बताया जाता है कि इस शपथ में सुनील पांडेय की भूमिका बहुत अहम थी। जब किसी को बहुमत नहीं मिला तो पांडेय ने राजन तिवारी, मुन्ना शुक्ला, रामा सिंह, अनंत सिंह, धूमल सिंह और मोकामा के सूरजभान जैसे निर्दलीय बाहुबलियों की फौज को नीतीश के खेमे में खड़ा कर दिया। लेकिन फिर भी सरकार नहीं बच पाई, हालाँकि, बिहार की राजनीति में सुनील का कद जरूर बढ़ गया।

लंबी है जुर्म की फेहरिस्त

बात मई 2003 की है। पटना के एक नामी न्यूरो सर्जन रमेश चंद्रा का अपहरण हो गया। फिरौती में 50 लाख रुपए माँगे गए। लेकिन पुलिस ने तेजी दिखाई और नौबतपुर इलाके से डॉक्टर को खोज निकाला। केस में नाम आया पीरो के विधायक सुनील पांडेय का। उस वक्त RJD की सरकार थी और समता पार्टी से सुनील विधायक थे। साल 2008 में सुनील पांडेय को तीन अन्य लोगों के साथ उम्रकैद की सजा हुई। लेकिन जब मामला हाई कोर्ट पहुँचा तो उन्हें बरी कर दिया गया

बात 28 जून 2006 की है, जब सुनील पांडेय पटना के सबसे आलीशान होटलों में से एक मौर्या में रुके। अगली सुबह जब वे होटल से चेक आउट कर रहे थे तो होटल के पैसे नहीं दिए। दावा किया कि होटल के मालिक ने उनके दोस्त से 47 लाख रुपए लिए हुए हैं। इसलिए वो पैसे नहीं देंगे। जब पत्रकारों ने उनसे इस बारे में पूछा तो उन्होंने एक टीवी चैनल के कैमरामैन को जान से मारने की धमकी दी। यह घटना कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। नीतीश कुमार ने पांडेय को पार्टी से निकाल दिया।

साल 2010 में जब नीतीश कुमार ने सुनील पांडेय को दोबारा टिकट दिया तो सब हैरान रह गए। वो इसलिए क्योंकि जो चुनावी हलफनामा दिया, उसमें सुनील पर 23 आपराधिक मुकदमे थे, जिसमें रंगदारी, हत्या की कोशिश, डकैती, लूट और अपहरण के मामले थे। 2014 में नीतीश कुमार ने बीजेपी से अलग होकर चुनाव लड़ा और वह हार गए। इस हार के बाद सुनील ने जदयू पार्टी छोड़ दी। पार्टी छोड़ने के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा था, “मैंने नीतीश कुमार को आगाह किया था कि एनडीए से बाहर ना जाएँ क्योंकि 2010 के विधानसभा चुनाव में जो जीत मिली थी, वो सिर्फ जदयू की नहीं थी इसमें एनडीए भी था।”

जब 1 जून 2012 को रणवीर सेना के मुखिया ब्रह्मेश्वर सिंह की हत्या हुई तो पहला शक सुनील पांडेय पर गया। पुलिस ने छापा मारकर उनके ड्राइवर को अरेस्ट कर लिया। साथ ही उनके भाई और तत्कालीन विधान परिषद के निर्दलीय सदस्य हुलास पांडेय को हिरासत में लेकर पूछताछ की। लेकिन बाद में रिहा कर दिया गया।

23 जनवरी 2015 को आरा के सिविल कोर्ट में बम ब्लास्ट हुआ। दो लोगों की मौत हो गई। कोर्ट से दो कैदी लंबू शर्मा और अखिलेश उपाध्याय फरार हो गए। जाँच हुई तो पता चला कि लंबू सिंह ने ही धमाके को अंजाम दिया था। दिल्ली पुलिस ने जून 2015 में लंबू सिंह को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि जेल से फरार होने में सुनील पांडेय ने उसकी मदद की थी। इसके बाद पांडेय को एसपी ऑफिस बुलाया गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। हालाँकि, कोर्ट ने बाद में सुनील पांडेय को बरी कर दिया

लंबू ने पूछताछ में यह भी बताया कि पांडेय ने यूपी के बाहुबली मुख्तार अंसारी को मारने के लिए 50 लाख रुपए की सुपारी दी थी।  लंबू के इकबालिया बयान के बाद सुनील पांडेय गिरफ्तार तो हुए, लेकिन तीन महीने में ही उन्हें जमानत मिल गई। जमानत पर बाहर निकलने के कुछ दिनों बाद ही नवंबर 2015 विधानसभा चुनाव हुए। राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने सुनील की पत्नी गीता को टिकट दिया। लेकिन वो भी चुनाव जीत नहीं पाईं। सुनील पांडेय फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। 

सुनील पांडेय ने भगवान महावीर की अहिंसा पर पीएचडी की है 

राजनीति और अपराध के अलावा सुनील को पढ़ाई में भी काफी दिलचस्पी थी। बिहार के रोहतास के नावाडीह गाँव में जन्मे सुनील पांडेय ने अपनी शुरुआती पढ़ाई तो रोहतास में ही की, लेकिन इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए बेंगलुरु गए थे। उसी दौरान मामूली विवाद में एक लड़के को चाकू मार दी और वापस लौट आए। इसके बाद से ये अपराध जगत में ये आगे तो बढ़े लेकिन पढ़ाई से नाता कभी नहीं तोड़ा। सुनील पांडेय का एक परिचय यह भी है कि वो पीएचडी हैं। अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाते हैं। हैरानी वाली बात तो यह है कि इन्होंने पीएचडी भगवान महावीर की अहिंसा पर की है।

‘मुझे शिक्षित होना ही होगा। मैं जेल में हूँ तो क्या हुआ’: सुनील पांडेय 

सुनील पांडेय ने पीएचडी का इंटरव्यू भी जेल में रहने के दौरान दिया था। सुनील पांडेय जब जेल से हथियारबंद पुलिसवालों के साथ पीएचडी का इंटरव्यू देने गए थे तो मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा था, ”मैं नेता हूँ, जिससे उम्मीद की जाती है कि वो समाज का नेतृत्व करे। मुझे शिक्षित होना ही होगा। मैं जेल में हूँ तो क्या हुआ, हमारे बहुत से नेताओं ने जेल में रहते हुए ही किताबें लिखी हैं।” 

सुनील पांडेय लोजपा से 4 बार विधायक रह चुके हैं। इससे पहले वह जदयू में थे। मार्च 2000 मे बिहार में विधानसभा के चुनाव थे। समता पार्टी के टिकट पर सुनील पांडेय भी चुनावी मैदान में उतर गए। रोहतास के पीरो विधानसभा से चुनाव लड़े। राजद प्रत्याशी काशीनाथ को चुनाव में मात दी और पहली बार विधायक बने।

भाई के अपराधों की भी है लंबी फेहरिस्त

सुनील पांडेय के भाई और बिहार के पूर्व एमएलसी रह चुके हुलास पांडेय को आरा और बक्सर में बाहुबली के तौर पर जाना जाता है। हुलास पांडेय मूल तौर पर बालू का कारोबार करते हैं। बालू माफिया सुभाष यादव के साथ अपने संबंधों को लेकर इलाके में चर्चा में रहते हैं।

जून महीने में NIA ने हुलास पांडेय के पटना, आरा और बक्सर के ठिकानों पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में छापा मारा था। हुलास पांडेय पर पैसों के फर्जी लेनदेन से लेकर अवैध हथियारों की तस्करी तक के आरोप हैं। हुलास पांडेय के पटना स्थित घर पर जब एनआईए ने छापेमारी की थी तो वहाँ से करीब डेढ़ किलो सोना और 45 लाख रुपए कैश बरामद हुआ था।

हुलास पांडेय पर अवैध अथियार रखने, खतरनाक हथियार से नुकसान पहुँचाने, हत्या की कोशिश, जान से मारने की धमकी, आपराधिक षड़यंत्र, शांति भंग करने, सरकारी अधिकारी को परेशान करने, वसूली और रंगदारी माँगने जैसे कई संगीन मामले अलग-अलग थानों में दर्ज हैं। हालाँकि, उन्हें किसी भी मामले में कोर्ट के द्वारा दोषी नहीं ठहराया गया है।

कितनी है संपत्ति

हुलास पांडेय के अगर संपत्ति की बात करें तो 2015 के हलफनामा के मुताबिक उनकी संपत्ति 4 करोड़ रुपए से ज्यादा है और उन पर 10 लाख रुपए का कर्ज है। हुलास पांडेय के पास दो एसयूवी स्कॉर्पियो और पजेरो है जिनकी कुल कीमत करीब 32 लाख रुपए हैं। इनके पास पटना के पॉश इलाके बोरिंग रोड में  अपना घर है जबकि आरा और बक्सर में भी कई संपत्तियाँ हैं।

क्योंकि जीत की गणित में ‘दाग अच्छे हैं’…

भले ही चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टियों के आका बाहुबल, आपराधिक छवि जैसे नेताओं को अपने साथ रखने में परहेज करते हों, लेकिन बात जब चुनाव की आती है तो यही राजनीतिक पार्टियाँ जीत के लिए इन मानकों को तोड़ने में कोई गुरेज नहीं करती।

इस बार के विधानसभा चुनाव में भी अधिकतर पार्टियों ने बाहुबली, दागियों को सिंबल देने में कोई कोताही नहीं बरती है। अगर, किसी कारणवश दागी चुनाव नहीं लड़ पा रहे हों, तो पार्टियों ने उनके परिजनों को टिकट दे दिया है, क्योंकि बात जब सत्ता तक पहुँचने की होती है, तो जीत की गणित में ‘दाग अच्छे होते हैं’।

शिक्षक का गला रेतने के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों के विरुद्ध फ्रांस का सख्त एक्शन: 231 कट्टरपंथी किए जाएँगे देश से बाहर

इस्लामी कट्टरपंथी द्वारा शिक्षक का गला काटने की घटना के बाद फ्रांस ने इस तरह की समस्याओं का सामना करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। फ्रांस 231 विदेशी कट्टरपंथी नागरिकों को बाहर निकालने की तैयारी कर रहा है। फ्रांस सरकार की तरफ से होने वाली यह कार्रवाई कट्टरपंथ और आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में एक अहम कदम माना जा रहा है। 

रायटर्स में प्रकाशित ख़बर में इस पूरी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी गई है। फ्रांस सरकार में मंत्री गेरल्ड डरमानिन (Gerald Darmanin) ने कहा, “निष्कासन की यह कार्रवाई 47 वर्षीय इतिहास शिक्षक सैमुएल पैटी की गला काटकर हत्या करने के बाद की जा रही है। जिन्होंने पढ़ाने के दौरान कक्षा में पैगंबर मोहम्मद के कार्टून दिखाए थे।”  

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्क्रों ने भी इस घटना पर रोष जताया था। उन्होंने कहा था, “यह एक इस्लामी आतंकवादी हमला है। देश के हर नागरिक को इस चरमपंथ के विरोध में एक साथ आगे आना होगा। इसे किसी भी हालत में रोकना ही होगा क्योंकि यह हमारे देश के लिए बड़ा ख़तरा साबित हो सकता है।” 

फ्रांस कट्टरपंथियों को कुछ इस तरह परिभाषित करता है, “इस तरह के लोग जो कट्टरता को बढ़ावा देने की प्रक्रिया में शामिल होते हैं। जो देश के बाहर जाकर आतंकवादी समूहों में शामिल होते हैं और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देते हैं।” फ़ाइल ऑफ़ अल्टर्सफ़ॉर द प्रिवेंशन ऑफ़ टेररिस्ट अटैक्स (एफ़एसपीआरटी) की रिपोर्ट के अनुसार 231 विदेशी नागरिकों में से 180 कारावास में कैद हैं। इसके अलावा बचे हुए 51 को अगले कुछ घंटों में गिरफ्तार किया जाना था। एफ़एसपीआरटी की रिपोर्ट के तहत कुल 850 गैर क़ानूनी अप्रवासी पंजीकृत हैं। 

इस महीने की शुरुआत में फ्रांस के राष्ट्रपति ने फ्रांस के धर्म निरपेक्ष मूल्यों को कट्टरपंथी इस्लामी ताकतों से सुरक्षित रखने की योजना का ऐलान किया था। इसके बाद उन्होंने कहा था कि इस्लाम एक ऐसा मज़हब है जो फ़िलहाल पूरी दुनिया में संकट का सामना कर रहा है। हाल ही में मैक्रों ने कहा था कि उनकी सरकार दिसंबर में एक विधेयक (बिल) लेकर आएगी जो साल 1905 के एक क़ानून को और मज़बूत करेगा। 

यह क़ानून चर्च और स्टेट को अलग करता है जिससे देश में धर्म के प्रति उदासीनता बनी रहे। उन्होंने अपने भाषण में यहाँ तक कहा कि आगामी कुछ समय में इस बात को सुनिश्चित किया जाएगा कि मज़हब, फ्रांस की शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक क्षेत्र (पब्लिक सेक्टर) से दूर रहे। मैक्रों के मुताबिक़ यह सभी निर्णय कट्टरपंथ और अलगाववाद को रोकने के लिए लिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं फ्रांस के इमामों को फ्रांसीसी भाषा भी सीखनी होगी। उन्होंने कहा कि इस्लाम को विदेशी प्रभाव से मुक्ति पानी होगी।

मैक्रों ने कहा, “इस्लाम एक ऐसा मज़हब है जिस पर पूरी दुनिया में संकट है, ऐसा सिर्फ हम अपने देश में नहीं देख रहे हैं।” इसके बाद उन्होंने युवाओं की शिक्षा पर भी ज़ोर दिया जिससे उन्हें धर्मनिरपेक्ष आदर्शों वाला बनाया जा सके। इसकी शिक्षा बच्चों को शुरूआती स्तर से या उनके स्कूल के समय से ही देनी होगी। उन्होंने इस बात के भी संकेत दिए कि फ्रांस इस्लाम को विदेशियों के प्रभाव से भी आज़ाद करेगा, इसके लिए मस्जिदों को मिलने वाली फंडिंग में सुधार किया जाएगा।

राष्ट्रपति मैक्रों ने यह बातें उस घटना के ठीक कुछ दिन बाद कही हैं जिसमें एक आदमी ने धारदार हथियार से दो लोगों पर हमला कर दिया था। घटना ठीक उस जगह पर हुई थी जहाँ कट्टरपंथी इस्लामियों ने साल 2015 में शार्ली हेब्दो के कर्मचारियों का नरसंहार किया था। फ्रांस की सरकार ने इस हरकत को भी इस्लामी आतंकवाद का नतीजा बताया था। साल 2015 में इस्लामी कट्टरपंथियों ने शार्ली हेब्दो के कार्यालय पर आतंकवादी हमला किया था जिसमें कई मशहूर कार्टूनिस्ट समेत कुल 12 लोगों की मौत हो गई थी।         

कट्टरपंथियों ने दीवार पर चिपकाया गुरुद्वारे की इमारत हटाने का पोस्टर, कहा- पाकिस्तान की पूरी जमीन मुस्लिमों की है

पाकिस्तान में कट्टरपंथियों का कहर हर अल्पसंख्यक आबादी पर बराबर बरस रहा है। खबर है कि पाकिस्तान के दावत-ए-इस्लामी और पीर शाह काकू चिश्ती मकबरे के लोगों ने शहीद भाई तारू सिंह के गुरुद्वारे के बाहर पोस्टर चिपकाए हैं और गुरुद्वारे को वहाँ से हटाने के लिए धमकी दी है। यह पोस्टर शाहमुखी भाषा में प्रिंट किए गए हैं जो पंजाबी की उपबोली है।

सिख 24 पर प्रकाशित आज की रिपोर्ट के अनुसार, सुहेल बट अटारी जिसने एक वीडियो जारी करके गुरुद्वारे से सटी जमीन लेने की अपनी साजिशों को उजागर किया था, अब उसी ने और उसके समर्थकों ने कहा कि पाकिस्तान सिर्फ मुस्लिमों का है और वह पाकिस्तान में गुरुद्वारे नहीं बनने देंगे। अपनी वीडियो में उसने पंजाब सिख संगत के अध्यक्ष गोपाल सिंह चावला और भाई फौजा सिख का जिक्र भी किया था।

इनका दावा है कि शहीद भाई तारू सिंह और सिंह सिंघानिया गुरुद्वारे की जमीन पीर शाह काकू चिश्ती और शहीद गंज मस्जिद के मकबरे से जुड़ी हैं।

उन्होंने कहा है कि सिखों को यदि शहीद भाई तारु सिंह गुरुद्वारा में श्रद्धांजलि देने आना है तो पहले शहीद भाई तारु सिंह की शहादत के बारे में सबूत पेश करने होंगे। उन्होंने यह भी कहा है कि पाकिस्तान की पूरी जमीन एक ही मजहब की है।

याद दिला दें कि पिछले दिनों पाकिस्तान के लाहौर से इसी मौलवी को लेकर खबर आई थी कि सुहैल नामक इस मौलवी ने गुरुद्वारे की जमीन पर कब्जा कर लिया था। साथ ही धमकी देते हुए कहा था कि पाकिस्तान इस्लामी देश है, यहाँ सिर्फ मुस्लिम रह सकते हैं।

इस वीडियो में उसने पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष गोपाल सिंह चावला को धमकी दी थी। गोपाल चावला ने गुरुद्वारा में पिछले साल सिखों के प्रतीक श्री निसाल साहिब को फहराया था। सोहेल ने दावा किया था कि गुरुद्वारा और उसके आसपास की 4 से 5 कनाल जमीन हजरत शाह काकू चिश्ती दरगाह और शहीदगंज मस्जिद की है।

इस मामले के उजागर होने के बाद भारत ने भी पाक अल्पसंख्यकों के लिए चिंता जाहिर की थी। भारत ने घटना का कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा था कि लाहौर के नौलखा बाजार में भाई तारू सिंह जी की शहीदी स्थल पर मस्जिद शहीद गंज के नाम दावा किए जाने की घटना पर पाकिस्तान के उच्चायोग में कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। इसे मस्जिद बनाए जाने की कोशिश की जा रही है। पाकिस्तान से यह भी कहा गया है कि वह अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की सुरक्षा, हितों के साथ ही उनके धार्मिक अधिकारों और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करे।

50 पुलिसकर्मियों के बीच बख्तरबंद गाड़ी में पंजाब से यूपी लाया जाएगा मुख्तार अंसारी: नए मामलों में होगी कोर्ट में पेशी

पंजाब की अलग-अलग जेलों में पिछले 22 महीने से कैद बहुजन समाज पार्टी के विधायक मुख्तार अंसारी को 50 पुलिसकर्मियों की टीम के साथ मंगलवार (अक्टूबर 20, 2020) को उत्तरप्रदेश वापस लाया जाएगा। इस बात की जानकारी पुलिस अधिकारी ने रविवार (अक्टूबर 18, 2929) को दी। उन्होंने बताया कि मुख्तार अंसारी को वापस लाने वाली टीम का नेतृत्व डीएसपी करेंगे।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि वह अंसारी के ख़िलाफ़ लंबित मामले में उसको 21 अक्टूबर को एमपी/एमएलए कोर्ट में पेश करना चाहते हैं। अधिकारियों की मानें तो बाहुबली नेता अंसारी, उनकी पत्नी, उनके बेटों और करीबियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पिछले 6 महीनों में उस पर कई नए केस दर्ज हुए हैं। अंसारी को पुलिस टीम के साथ बख्तरबंद गाड़ी में लेकर आया जाएगा।

बता दें कि पिछले साल के जनवरी महीने से ही गैंगस्टर अंसारी को पंजाब की जेल में कैद किया गया है। उनकी गिरफ्तारी एक बिल्डर से फिरौती माँगने के मामले में हुई थी। बाद में उसे रोपर जेल में डाल दिया गया और फिर मोहाली जेल में उसे शिफ्ट किया गया।

अधिकारियों का कहना है कि अंसारी ने अपनी जान को खतरा देखते हुए पंजाब की जेल में खुद को शिफ्ट करवाया था। उससे पहले उसका एक करीबी प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी बागपत जेल में दूसरे गैंगस्टर सुनील राठी के हाथों 9 जुलाई 2018 को मारा गया था।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि राज्य प्रशासन को बिना सूचित किए जब पंजाब पुलिस को बड़ी आसानी ने अंसारी को ले जाने की अनुमति मिली तब कई उत्तरप्रदेश के जेल अधिकारियों पर सवाल उठे थे।

गौरतलब है कि उत्तरप्रदेश में योगी सरकार लगातार अंसारी की अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई कर रही है। पिछले कुछ महीनों में राज्य प्रशासन ने करीब 68 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी सीज की है। इनकी गैंग की वार्षिक आय 45 करोड़ थी। पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई में 96 सदस्य गिरफ्तार हुए हैं व कई मुठभेड़ में मारे भी गए हैं।

यहाँ बता दें कि मुख्तार अंसारी के करीबियों पर कार्रवाई के मद्देनजर कल अभिषेक सिंह उर्फ बाबू की गिरफ्तारी हुई है। इससे पहले बाबू सिंह के गोमती नगर स्थित घर पर तलाशी में बम बनाने का सामान मिला था। उसके ख़िलाफ़ कई मुकदमे दर्ज हैं। इलाके में उसके कारण दहशत भी थी। अभिषेक के अलावा जानकीपुरम निवासी शोएब अहमद, रोहित सिंह उर्फ मोहित, मड़ियांव निवासी अनमोल रावत, इन्दौराबाग बीकेटी निवासी पवन सिंह उर्फ लकी सिंह, अस्ती रोड बीकेटी निवासी सूरज सिंह पर भी गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

‘अर्नब गोस्वामी आरोपित नहीं’: बॉम्बे HC ने ‘फेक TRP स्कैम’ में परमबीर को लगाई फटकार, ठाकरे की पुलिस ने छोड़ा कमिश्नर का साथ

टीआरपी घोटाला मामले में रिपब्लिक टीवी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (अक्टूबर 19, 2020) को कहा कि रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी TRP मामले में आरोपित नहीं हैं।

इस दौरान मुंबई पुलिस ने कोर्ट में परमबीर का सिंह का साथ देने से इनकार कर दिया। कोर्ट में मुंबई पुलिस पीछे हट गई। कोर्ट में उनके वकील ने भी माना कि रिपब्लिक आरोपित नहीं हैं। बता दें कि महाराष्ट्र राज्य और मुंबई पुलिस की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पेश हुए थे।

मुंबई पुलिस के रिपब्लिक टीवी प्रमुख अर्नब गोस्वामी को गिरफ्तार करने के इरादे के बारे में मीडिया हाउस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे के सवालों का जवाब देते हुए अदालत ने कहा कि चूँकि अर्नब मामले में आरोपित नहीं हैं, इसलिए उनकी गिरफ्तारी का सवाल ही नहीं उठता। इसलिए, मीडिया हाउस प्रमुख के लिए सुरक्षा के अंतरिम आदेश को पारित करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

रिपब्लिक टीवी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे से कोर्ट ने कहा, “जहाँ तक अंतरिम संरक्षण का सवाल है, पीठ का मानना है कि यह आवश्यक नहीं है, क्योंकि एफआईआर में रिपब्लिक का कोई उल्लेख नहीं है और तात्कालिकता के मामले में, हम आपको यहाँ तत्काल स्थानांतरित करने की स्वतंत्रता प्रदान करेंगे।”

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस को टीआरपी हेरफेर मामले के आरोप में दर्ज एफआईआर में आरोपित बनाने से पहले रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को समन भेजने का निर्देश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि वह इस तरह का समन मिलने पर जाँच में शामिल होंगे और सहयोग करेंगे।

पुलिस द्वारा मीडिया को इंटरव्यू देने पर चिंतित होते हुए न्यायमूर्ति एसएस शिंदे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “हम केवल वर्तमान मामले के बारे में नहीं कह रहे हैं। यह अन्य संवेदनशील मामलों में भी हो रहा है जहाँ जाँच लंबित है। अधिकारियों से भड़काऊ चीजें बोलने की अपेक्षा नहीं रखी जाती है।”

पीठ ने याचिका पर 5 नवंबर को दोपहर 3 बजे से अंतिम सुनवाई शुरू करने पर सहमति जताई है। कोर्ट ने मुंबई पुलिस को 4 नवंबर को सीलबंद कवर में इन्वेस्टिगेशन के दस्तावेज पेश करने का भी निर्देश दिया है।

गौरतलब है कि 8 अक्टूबर को आयोजित की गई प्रेस वार्ता में मुंबई पुलिस कमिश्नर ने रिपब्लिक टीवी और अर्नब गोस्वामी पर कई गम्भीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि चैनल ने टीआरपी से जुड़ी जानकारी में बदलाव करने के लिए आम लोगों को रुपए दिए थे और उनसे कहा गया था कि वह चैनल लगा कर अपना टीवी चालू रखें। उसी दिन रात तक यह बात भी सामने आ गई कि एफ़आईआर में कहीं भी रिपब्लिक टीवी का ज़िक्र नहीं है बल्कि उसमें इंडिया टुडे का नाम शामिल था। 

इसके बाद टीआरपी घोटाला मामले में मुंबई पुलिस द्वारा चैनल के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की माँग करते हुए रिपब्लिक टीवी ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया। रिपब्लिक टीवी द्वारा दायर याचिका में निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच सुनिश्चित करने के लिए मामले को केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को स्थानांतरित करने के निर्देश देने की माँग की गई थी।

DD के यूट्यूब चैनल पर 10 लाख से अधिक लोगों ने देखी ‘अयोध्या की रामलीला’ की Live स्ट्रीमिंग

अयोध्या पूरी तरह सज चुकी है, नवरात्र का वक्त है इसलिए रामलीला भी हो रही है। दूरदर्शन पर रामलीला का लाइव प्रसारण (स्ट्रीमिंग) हो रहा है। इस साल यह प्रसारण सीधे अयोध्या से किया जा रहा है। रामलीला का प्रसारण 17 अक्टूबर से शुरू हुआ जिसे उत्तर प्रदेश के पर्यटन और सांस्कृतिक मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है। 

दूरदर्शन के यूट्यूब चैनल पर प्रसारित किए पहले वीडियो पर 1 मिलियन (लगभग 10 लाख) बार देखा जा चुका है। प्रसार भारती के सीईओ शशि एस वामपती ने ट्वीट करके बताया कि डिजिटल माध्यम से हो रहे इस प्रसारण (स्ट्रीमिंग) पर ‘मल्टी मिलियन डिजिटल व्यूज़’ हो चुके हैं।

लाइव स्ट्रीमिंग के कार्यक्रम का लॉन्च पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक मामलों के मंत्री नीलकंठ तिवारी और भाजपा के ही सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने किया था। इसे टीवी या यूट्यूब किसी पर भी देखा जा सकता है। रामलीला का आयोजन 10 दिनों के लिए होता है और इसका अंत मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्रीराम द्वारा रावण वध के साथ होता है। रामलीला के पहले एपिसोड पर 1 मिलियन यानी लगभग 10 लाख से ज़्यादा व्यूज़ आ चुके हैं। जबकि दूसरे एपिसोड के वीडियो पर लगभग 7 लाख से अधिक व्यूज़ आ चुके हैं। 

रामलीला के हर एपिसोड की अवधि 2 घंटे 45 मिनट से ज़्यादा की है। 

अयोध्या में भव्य रामलीला

इस साल अयोध्या में सितारों से भरी रामलीला का आयोजन हो रहा है, सरयू नदी के तट पर स्थित लक्षमण किला में भव्य रामलीला। रामलीला में इस बार असरानी और बिन्दु दारा सिंह, नारद मुनि और हनुमान का किरदार निभा रहे हैं। इसके अलावा भोजपुरी सुपरस्टार और भाजपा संसद मनोज तिवारी और रवि किशन अंगद और भरत की भूमिका निभा रहे हैं। बॉलीवुड के मशहूर कलाकार रज़ा मुराद और शाहबाज़ खान भी अहम भूमिका में नज़र आने वाले हैं। 

हाल ही में रामायण की वापसी ने तोड़े थे कई रिकॉर्ड 

मार्च 2020 में जब कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत के चलते पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया था। तब दूरदर्शन ने रामायण और महाभारत के पुनः प्रसारण का फैसला लिया था। रामानंद सागर कृत रामायण का प्रसारण पहली बार दूरदर्शन पर 1987 से 1988 के बीच किया गया था। रामायण के पुनः प्रसारण पर दर्शकों की प्रतिक्रिया अप्रत्याशित थी और 16 अप्रैल को इसे लगभग 7.7 करोड़ बार देखा गया। प्रसारण के दौरान पूरे सोशल मीडिया पर रामायण से जुड़े पोस्ट और मीम्स चर्चा में बने हुए थे। सबसे उल्लेखनीय बात है कि रामायण को हर आयु वर्ग के लोगों ने पसंद किया था।

न अपना नेता, न वीडियो बदल रही कॉन्ग्रेस: 11 माह पुरानी झारखंड चुनाव वाली वीडियो से ही बिहार में भी हो रहा चुनाव प्रचार

बिहार चुनावों में भी कॉन्ग्रेस की राजनीति फर्जीवाड़े पर ही टिकी हुई है। इसका खुलासा एक बार फिर पार्टी की धूर्तता से हुआ है। दरअसल पार्टी ने झारखंड चुनावों की वीडियो को बिहार चुनावों के लिए इस्तेमाल करके लोगों को बेवकूफ बनाने की कोशिश की मगर, इसका खुलासा होते ही उनका मजाक बनने लगा।

11 माह पहले झारखंड चुनावों में ‘आ रही है कॉन्ग्रेस’ कैप्शन के साथ अपने यूट्यूब पर वीडिया अपलोड करने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी ने बिहार चुनावों में उसी वीडियो का प्रयोग ‘बोले बिहार बदले सरकार, जन जन को मिलेगा अधिकार’ लिख कर शेयर किया है।

जानकारी के लिए बता दें कि कॉन्ग्रेस ने एक दिन पहले अपने ट्विटर हैंडल पर बिहार चुनाव के मद्देनजर एक वीडियो शेयर की। इस वीडियो पर उन्होंने लिखा, “बिहार को लूट राज से मुक्ति दिलाकर नए बिहार का सपना साकार करेंगे। हर वर्ग की जिंदगी में भर कर खुशियाँ, हम बिहार के नए रूप को आकार देंगे।”

इसी वीडियो को रीट्वीट करते हुए ट्विटर यूजर अंकुर सिंह लिखते हैं, “कॉन्ग्रेस की स्थिति की बिहार में कल्पना कीजिए जो झारखंड की वीडियो इस्तेमाल करके बताना चाहते हैं कि लोग उनका बिहार  में समर्थन कर रहे हैं।” इस ट्वीट के साथ उन्होंने पुरानी वीडियोज और अब की वीडियोज के स्क्रीनशॉट भी तिथि सहित शेयर किए।

ऐसे ही एक ‘बेफिटिंग फैक्ट्स’ नाम का अकॉउंट इस पर लिखता है, “कॉन्ग्रेस का आईटी सेल कॉन्ग्रेस पार्टी को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहा है, बिलकुल वैसे ही जैसे गाँधी परिवार ने भारत को लूटा। ये लोग झारखंड की पुरानी वीडियो का इस्तेमाल बिहार चुनाव में कर रहे हैं।”

कॉन्ग्रेस द्वारा शेयर की गई वीडियो में कई चलचित्र पुराने हैं। इसमें एक लड़का नजर आ रहा है उसके चेहरे का इस्तेमाल 10 महीने पहले कॉन्ग्रेस ने “भारत बचाओ रैली” के लिए किया था और अब उसी युवा चेहरे का इस्तेमाल अपने चुनाव प्रचार के गाने में किया है।

पार्टी की ऐसी स्थिति देख कर सोशल मीडिया पर कई लोग उनका मजाक उड़ा रहे हैं। लोगों का कहना है कि इनके पास पैसे नहीं बचे दोबारा शूट और लाइसेंस वाली फोटो के लिए, सब इटली और इस्तांबुल में जा रहे हैं। एक यूजर कहता है कि ये कौन सी बड़ी बात है, पार्टी तो साल 2008 से एक ही नेता रिपीट कर रही है।

मजहबी कारणों से नहीं मिलाया महिला अधिकारी से हाथ, मुस्लिम शरणार्थी डॉक्टर को जर्मनी ने किया नागरिकता देने से इंकार

जर्मनी में एक मुस्लिम शरणार्थी ने महिला अधिकारी से हाथ मिलाने पर असहमति जताई। शरणार्थी डॉक्टर के अनुसार, उसने ऐसा मजहबी कारणों से किया। इस मामले पर जर्मनी की अदालत ने उसे नागरिकता प्रदान करने से मना कर दिया। लेबनान का रहने वाला 40 वर्षीय चिकित्सक साल 2002 में जर्मनी आया था। उसने धार्मिक आधार पर महिला अधिकारी से हाथ मिलाने के लिए मना कर दिया। 

इस पर जर्मनी की सरकार का कहना है कि धर्म और लिंग के लिहाज़ से किसी भी तरह का भेदभाव अमान्य है। यह संविधान द्वारा दिए गए समानता के अधिकारों की अनदेखी है। ऐसा करने वाले किसी भी नागरिक को नागरिकता नहीं दी जा सकती है, जिसका देश के संविधान में भरोसा नहीं हो।

लेबनान का मुस्लिम चिकित्सक पिछले दो दशकों से जर्मनी में बतौर शरणार्थी रह रहा था। साल 2012 में भी उसने नागरिकता के लिए आवेदन किया था, तब उसने जर्मनी के संविधान की मान्यता वाले दस्तावेज़ और आतंकवाद के विरोध वाले शपथ पत्र पर हस्ताक्षर भी किया था। इसके बाद जब उसने यह सारे दस्तावेज़ महिला अधिकारी को सौंपे थे तब उसने महिला अधिकारी से हाथ मिलाने के लिए स्पष्ट रूप से मना कर दिया। हालाँकि उसका यह भी कहना था कि उसने अपनी पत्नी से वादा किया है कि वह किसी दूसरी महिला से हाथ नहीं मिलाएगा इस वजह से उसने ऐसा किया। 

इन तथ्यों के आधार पर साल 2015 में जर्मनी के स्थानीय प्रशासन ने उसे वहाँ की नागरिकता देने से मना कर दिया था। इस आदेश के बाद लेबनान के मुस्लिम चिकित्सक ने लेबनान की शरणार्थी अदालत में याचिका दायर की, उस याचिका पर अब आदेश सुनाया गया है। बाडेन वुर्टेमबर्ग की अदालत ने इस मुद्दे पर कहा कि चिकित्सक को जर्मनी की नागरिकता न दिया जाने वाला आदेश सही है। अदालत के अनुसार कोई भी व्यक्ति धर्म या लिंग के आधार पर हाथ मिलाने (हैंड शेक) से मना नहीं कर सकता है। 

इसके अलावा अदालत के न्यायाधीश ने भी इस मामले पर अपनी नज़रिया रखा। उन्होंने कहा, “हाथ मिलाने (हैंड शेक) के वैधानिक मायने हैं, यह अनुबंध के निष्कर्ष का सूचक है और तो और यह जर्मनी की सरकार – मुस्लिम चिकित्सक के बीच हुआ है। इसके अलावा, हाथ मिलाना हमारे समाज, संस्कृति और कानूनी जीवन का अभिन्न अंग है, यह साथ रहने की भावना को भी आकार देता है। कोई भी व्यक्ति अगर धर्म या लिंग के आधार पर हाथ मिलाने से मना करता है तो जर्मनी के संविधान द्वारा दिए गए बराबरी के अधिकारी की अवहेलना करता है। ऐसा करने वाले किसी भी व्यक्ति को नागरिकता नहीं दी जा सकती है।”

लेबनान मूल के इस शरणार्थी चिकित्सक ने जर्मनी से चिकित्सा की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उसने एक क्लीनिक में बतौर चिकित्सक काम करना शुरू कर दिया था। फ़िलहाल उसे जर्मनी की नागरिकता देने से साफ़ मना कर दिया गया है और जल्द ही उसे जर्मनी से भेजा भी जा सकता है।  

पश्चिम बंगाल: TMC नेता के घर पार्टी कर रहे कुख्यात अपराधी अब्दुल हुसैन ने पुलिस के डर से अपार्टमेंट से कूद कर दी जान

एक कुख्यात अपराधी ने शनिवार (अक्टूबर 17, 2020) की रात पुलिस की छापेमारी के दौरान तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) नेता के घर से कूदकर जान दे दी। यह घटना पश्चिम बंगाल के उत्तरी कोलकाता के चितपोर में एक आवास परिसर की है।

एबीपी आनंद की रिपोर्ट के अनुसार, मृतक अपराधी की पहचान अब्दुल हुसैन उर्फ सेंटिया के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि मृतक अपराधी के खिलाफ हुगली के भद्रेश्वर पुलिस स्टेशन में हत्या और जबरन वसूली के कई मामले दर्ज थे। पुलिस के मुताबिक, हुसैन अपने साथियों के साथ अपार्टमेंट में शराब पी रहा था, जिसमें एक पुलिस अधिकारी, ड्राइवर और अपार्टमेंट मालिक का रसोइया शामिल था। उन्होंने उक्त अपार्टमेंट में दो कॉल गर्ल को भी बुलाया था। एबीपी आनंद ने बताया कि फ्लैट मोहम्मद यासीन नाम के एक टीएमसी नेता का था।

कथित तौर पर पार्टी के दौरान हुसैन और उसके सहयोगियों के बीच किसी बात पर बहस हो गई और देखते ही देखते विवाद ने बड़ा रूप ले लिया। विवाद को शांत कराने के लिए सुरक्षा गार्ड को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। लगभग आधी रात को अपार्टमेंट में से एक कॉल गर्ल खून से लथपथ हालत में बाहर आई और मदद के लिए चिल्लाने लगी। उसकी आवाज सुनकर पड़ोसी उसके बचाव में आए और पुलिस में फोन किया।

इस बीच कुख्यात अपराधी ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। जब पुलिस ने दरवाजा खटखटाया, तो अपराधी ने अपार्टमेंट से भागने की कोशिश की, जो कि चौथी मंजिल पर था। एक पुलिस अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया, “जब पुलिस ने दरवाजा खटखटाया, तो हुसैन ने पर्दे का उपयोग करके बालकनी से फिसलने की कोशिश की। लेकिन जल्द ही उसने पकड़ खो दी और नायलॉन की रस्सी से लटकने की कोशिश की। लेकिन उसकी पकड़ फिर से ढीली हो गई और वह लॉन में गिर गया।” इसके बाद हुसैन को आरजी कर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ पहुँचने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया।

फोरेंसिक विशेषज्ञ तन्मय मुखर्जी ने एबीपी आनंद को घटना के बारे में बताते हुए कहा, “फ्लैट के भीतर लड़ाई के निशान हैं। हमने पूरे अपार्टमेंट में खून के धब्बे पाए हैं। आरोपित ने अपार्टमेंट के पर्दे का उपयोग करके भागने की कोशिश की थी लेकिन वह असफल रहा। उसने पिछले दरवाजे से भी भागने की कोशिश की थी, मगर इसमें भी वह सफल न हो सका।

पुलिस ने क्राइम सीन से सिगरेट, शराब और टूटी बोतलों का एक बड़ा भंडार बरामद किया है। उसी समय, क्राइम सीन की जाँच करने के लिए फोरेंसिक टीम को बुलाया गया। पुलिस ने पुलिस अधिकारी, कुक और टीएमसी नेता के ड्राइवर को हिरासत में लिया है। इसके अलावा दोनों कॉल गर्ल से भी पूछताछ की जा रही है।