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जहाँगीर पीछे देखो, पैंट पहनो, आगे इधर आओ: ‘छोटू’ बोलकर भारतीय सुरक्षाबल ने करवाया आतंकी से सरेंडर

कश्मीर घाटी को आतंक मुक्त बनाने के लिए भारतीय सेना दो तरह के रास्ते अपना रही है। एक एनकाउंटर और दूसरा सरेंडर। ऐसे में भी कई कट्टरपंथी और वामपंथी इंडियन आर्मी की आलोचना करते नहीं थक रहे। आज इन्हीं लोगों के सवालों का जवाब देती एक वीडियो कश्मीर से सामने आई है। इस वीडियो में सुरक्षा बल एक आतंकी को सरेंडर करवा रहे हैं। इस वीडियो को देखकर साफ पता चल रहा है कि भारतीय सेना का उद्देश्य आतंकियों को सही रास्ते पर लेकर आने का है न कि उन्हें एनकाउंटर में ढेर करने का।

प्रसार भारती द्वारा शेयर की गई वीडियो इस बात का सबूत है। जानकारी के अनुसार, यह वीडियो मध्य कश्मीर के बडगाम में हुए मुठभेड़ का है। जहाँ सुरक्षा बलों ने वीडियो में नजर आ रहे आतंकी को हथियार समेत जिंदा पकड़ा, उससे सरेंडर करवाया और मानवता के साथ सूझबूझ की मिसाल भी पेश की।

वीडियो में एक सुरक्षाकर्मी की आवाज सुनाई पड़ रही है जो आतंकी का सरेंडर कराने के लिए पहले उसे आश्वस्त कर रहे हैं कि उसके ऊपर कोई गोली नहीं चलाएगा। वीडियो में सुरक्षाकर्मी आतंकी से यह कहते हुए सुने जा रहे हैं- “इधर आ, इधर आ। इधर-इधर। कोई गोली नहीं चलाएगा। कोई फायर नहीं करेगा। आजा इधर आ जा छोटू। ऑल पार्टी क्वाइट (सभी लोग चुप रहें), जहाँगीर पीछे देखो। पैंट पहनो, अपना पैंट पहनो, और आगे आओ, इधर ही आगे आओ, बस आते रहो। जर्सी छोड़ दो, जर्सी छोड़ दो। ऊपर करो हाथ।”

थोड़ी देर में सुरक्षाबल को अपने प्रयास में सफल होते दिखते हैं और वीडियो में आतंकी हाथ ऊपर उठाकर सुरक्षा बलों के पास आते दिखता है। सुरक्षाकर्मी पूछते हैं, “कोई और तो नहीं है? वेपन है? वहीं है, कोई बात नहीं है। कुछ नहीं होगा बेटा, एकदम आराम से.. आ जाओ…शाबाश-शाबाश।”

आगे सुरक्षाकर्मी दूसरे साथियों से कहते हैं, “अरे उसका वेपन उठाओ। (आतंकी सुरक्षा बलों के पास सरेंडर कर देता है) आराम से बेटा। तुम चिंता मत करो। पानी दो। ऐ पानी लाओ। सारे दूर रहो। सारे दूर हो जाओ प्लीज…वेपन है? (आतंकी उस ओर इशारा करता है जहाँ उसके हथियार हैं… कुछ सुरक्षाकर्मी जाकर वहाँ से आतंकी के 2 एके-47 राइफलों को लेकर आते हैं)।

गौरतलब है कि कश्मीर के चंडूरा इलाके में सुरक्षाबल को सूचना मिली थी कि एक मकान में 2 आतंकी छिपे हैं। इन आतंकियों में पुलिस से आतंकी बनने वाला एसपीओ अल्ताफ हुसैन भी शामिल था। पुलिस ने अपने साथ सेना की 55 आरआर और सीआरपीएफ की टीम को साथ लेकर ऑपरेशन शुरू किया तो आतंकियों के साथ मुठभेड़ शुरू हो गई।

मौके का फायदा उठाकर अल्ताफ हुसैन भागने में कामयाब हो गया, लेकिन उसके साथी आतंकी को पकड़ लिया गया। उसकी पहचान जहाँगीर अहमद निवासी चंडूरा के रूप में हुई है। उसके पास से एक एके 47 राइफल बरामद की गई है। पुलिस का कहना है कि उनका एनकाउंटर से ज्यादा फोकस सरेंडर पर है।

7वीं कक्षा की लड़की को मो. उवैश ने बाबू बन प्रेमजाल में फँसाया, बहन माही हयात के साथ मिलकर बनाया इस्लाम कबूलने का दबाव

कानपुर में लव जिहाद और धर्म परिवर्तन की साजिश का एक बेहद ही चौका देने वाला मामला सामने आया है। इस बार लव जिहाद के इस घिनौने खेल का शिकार सातवीं कक्षा की एक नाबालिग लड़की हुई है। जहाँ मोहम्मद उवैश ने बाबू बन कर पहले लड़की को अपने प्रेमजाल में फँसाया फिर अपनी बहन के साथ मिल कर उसपर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया। पुलिस ने मामले में आरोपित मोहम्मद उवैश और उसकी बहन माही हयात को गिरफ्तार कर लिया है।

नौबस्ता थाना क्षेत्र में रहने वाली 13 वर्षीय नाबालिग छात्रा से निर्माणाधीन अपार्टमेंट में मजदूरी करने वाले मो. उवैश ने बाबू नाम बताकर छात्रा से दोस्ती की। उवैश अजीतगंज का निवासी है। फोन पर दोनों की बात होने लगी। छात्रा के परिजनों का आरोप है कि गुरुवार को वह बड़ी बेटी के साथ बाजार गई थी। तभी आरोपित बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया।

पीड़िता की माँ ने लव जिहाद का आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी है। माँ ने आरोपित मोहम्मद उवैश पर नाबालिग को नमाज पढ़ने के तौर-तरीके सिखाने का भी आरोप लगाया हैं। दर्ज शिकायत में माँ ने बताया, आरोपित काम के दौरान अक्सर पानी माँगने के बहाने उसके घर आता था। इस दौरान उसने अपनी धार्मिक पहचान छुपाते हुए अपना नाम बाबू बताया था। मोहम्‍मद उवैश और उसकी बहन माही हयात ने उनकी बेटी से दोस्ती कर ली और दोनों फोन और बेटी से अक्सर बातचीत करते थे।

फ़ोन से बातचीत करते हुए मोहम्‍मद उवैश ने उनकी बेटी से नजदीकियाँ बढ़ा ली और इन सब में उसका साथ उसकी बहन ने दिया। दोनों ने मिलकर 13 साल की नाबालिग का ब्रेनवाश करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं दोनों आरोपितों ने हिंदू लड़की को अपने ही परिजनों के खिलाफ बरगलाना शुरू कर दिया था। एक तरफ जहाँ वे उसे इस्लाम कबूलने का दबाव बना रहे थे, वहीं नमाज और आयत पढ़ने के तरीके भी सिखाते थे। बता दें पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद दोनों भाई बहनों की असली पहचान सामने आई।

नौबस्ता थाना प्रभारी कुंज बिहारी मिश्र ने बताया कि छात्रा से पूछताछ में सामने आया है कि आरोपित की बहन ही उससे फोन पर बात कराती थी। वहीं बहन के कहने पर ही बाबू उसे ले गया था। छात्रा ने बताया कि बाबू के घरवाले उससे कहते थे कि जब भी पुलिस से आमना सामना हो अपने घरवालों के खिलाफ बोलना। हम तुम्हारा धर्म परिवर्तन कराकर तुम्हे अपना लेंगे।

थाना प्रभारी ने बताया कि छात्रा की माँ की तहरीर पर आरोपित के खिलाफ गलत नाम बताकर दोस्ती करने, बहला फुसला कर ले जाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं आरोपित की बहन को बहला फुसलाकर ले जाने में मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

घाटी में घुसपैठ के लिए पाकिस्तान सरकार और सेना ने रचा था षड्यंत्र: पूर्व पाक मेजर जनरल ने ‘रेडर्स इन कश्मीर’ में किया खुलासा

“26 अक्टूबर (1947) को, पाकिस्तानी सेना ने बारामुला पर कब्जा कर लिया था, जहाँ 14,000 में से केवल 3,000 ही बच गए थे। सेना अब श्रीनगर से केवल 35 मील की दूरी पर थी जब महाराजा (हरि सिंह) ने अधिग्रहण के कागजात दिल्ली भेजकर मदद माँगी।” यह उस किताब ‘रेडर्स इन कश्मीर’ (Raiders in Kashmir) का अंश है जिसमें पाकिस्तानी सरकार को उसके ही अपने पूर्व मेजर जनरल ने अकबर खान ने बेनकाब किया है।

हाल ही में प्रकाशित ‘रेडर्स इन कश्मीर’ (Raiders in Kashmir) किताब का विमोचन जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान द्वारा आयोजित किए गए ऑपरेशन गुलमर्ग के दशकों बाद किया गया था। किताब के लेखक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अकबर खान ने एक बात स्वीकार की है कि घाटी में पैदा हुए विवाद में सीमा पार मुल्क पाकिस्तान की अहम भूमिका थी। किताब में कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की सरकार और सेना के नकारात्मक और भयावह रवैये का विस्तार से उल्लेख था, आखिर कैसे लाहौर और पिंडी में पूरा षड्यंत्र रचा गया था।

लाहौर में रची गई पूरी साज़िश  

अकबर खान अपनी किताब में लिखते हैं, “26 अक्टूबर (1947) को पाकिस्तानी सेना ने बारामूला पर कब्ज़ा कर लिया था, जहाँ 14 हज़ार लोगों में से सिर्फ़ 3 हज़ार लोग बचे थे। पाकिस्तान सेना श्रीनगर से सिर्फ 35 मील की दूरी पर मौजूद थी जब महाराजा (हरि सिंह) ने मदद के लिए अधिग्रहण के दस्तावेज़ दिल्ली भेजे थे।” 

लेखक ने किताब में लिखा कि मुस्लिम लीग (सत्ताधारी दल) के तत्कालीन नेता मियाँ इफ्तिकारुद्दीन ने साल 1947 के सितंबर महीने की शुरुआत में उनसे एक हैरान करने वाली बात कही। उन्होंने जम्मू कश्मीर पर कब्ज़ा करने की योजना के बारे में विस्तृत जानकारी माँगी।         

घाटी में थी सशस्त्र आन्दोलन की तैयारी 

इसके बाद अकबर खान ने लिखा, “आखिरकार मैंने एक योजना तैयार की थी जिसका शीर्षक था, ‘कश्मीर में सशस्त्र आन्दोलन’ (Armed revolt in kashmir)। धीरे-धीरे हमें एक बात समझ आई कि हमारी (पाकिस्तान) तरफ से किया जाने वाला सार्वजनिक हस्तक्षेप आलोचना का शिकार होगा। इस बात को ध्यान में रखते हुए हमने कश्मीरियों में अलगाव की भावना पैदा करके उन्हें मज़बूत करने का प्रयास किया। इसके अलावा हमें इस बात का भी ध्यान रखना था कि जिस वक्त यह सब चल रहा हो उस वक्त भारत की तरफ से कोई सैन्य मदद नहीं आने पाए।” 

पाकिस्तानी सरकार और सेना की रही भूमिका 

इसके बाद अकबर खान ने घाटी में बने भयावह हालातों में पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व की भूमिका के भी पुख्ता सबूत दिए। घाटी के हालातों के लिए पाकिस्तानी शीर्ष नेतृत्व को ज़िम्मेदार ठहराते हुए अकबर खान लिखते हैं, “मुझे लाहौर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान के साथ बैठक में  शामिल होने के लिए बुलाया गया था। वहाँ पहुँचने पर पहले मुझे प्रांतीय सरकारी सचिवालय (Provincial Government Secretariat) के सरदार शौकत हयात खान (पंजाब सरकार में तत्कालीन मंत्री) के दफ्तर में होने वाली शुरूआती बैठक का हिस्सा बनना था।” 

वहाँ मैंने कुछ लोगों के हाथ में प्रस्तावित योजना देखी, जिसके मुताबिक़, “22 अक्टूबर को पाकिस्तानी सेना द्वारा सीमा पार करने पर योजना की शुरुआत हो गई। इसके बाद 24 अक्टूबर को मुज़फ्फराबाद और डोमल पर हमला किया गया जहाँ से डोगरा टुकड़ी को वापस जाना था। अगले दिन यह टुकड़ी श्रीनगर सड़क की तरफ आगे बढ़ी और उरी स्थित डोगरा पर कब्ज़ा कर लिया। 27 अक्टूबर को भारतीय सेना वहाँ पहुँची।”  

पाकिस्तान के कई बड़े नेता हुए थे शामिल 

नतीजा यह निकला कि 27 अक्टूबर की शाम पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने भारतीय सेना के हस्तक्षेप करने के बाद लाहौर में बैठक बुलाई। यह बैठक पूर्णतः अनाधिकारिक थी, इस बैठक में कई अहम लोगों को बुलावा भेजा गया था। जिसमें इस्कंदर मिर्ज़ा (तत्कालीन रक्षा सचिव, बाद में गवर्नर जनरल), चौधरी मोहम्मद अली (तत्कालीन सेक्रेटरी जनरल, बाद में प्रधानमंत्री), अब्दुल कयूम खान (तत्कालीन मुख्यमंत्री फ्रंटियर प्रोविंस) और नवाब ममदोत (तत्कालीन मुख्यमंत्री पंजाब) इसके अलावा अकबर खान और ब्रिगेडियर स्लियर खान को बुलाया गया था। 

लश्कर भी हुए षड्यंत्र में शामिल

अपनी किताब के अंतिम हिस्से में अकबर खान लिखते हैं, “मैंने प्रस्ताव दिया कि जम्मू कश्मीर को ख़त्म करने के लिए हमें रास्तों को पूरी तरह बंद करना होगा, जिससे भारत की तरफ से जम्मू कश्मीर को मिलने वाले हर तरह की मदद रोकी जा सके। मैंने ऐसा नहीं कहा था कि इस काम के लिए सेना का इस्तेमाल किया जाए और खुद सरकार इसमें शामिल हो। मेरा सिर्फ इतना कहना था कि इस काम के लिए सिर्फ स्थानीय और आदिवासी लोग आगे आएँ। इसमें लश्कर का भी उपयोग किया जा सकता है।” यानी अकबर खान के अनुसार पाकिस्तान सेना ने स्थानीय लोगों के साथ मिल कर घाटी के कई इलाकों में घुसपैठ और आक्रमण किया। 

CBI को हाथरस मामले में एक आरोपित के घर से मिला खून जैसा रंगा कपड़ा: परिवार ने बताया उसे रेड पेंट

सीबीआई टीम ने उत्तर प्रदेश के हाथरस केस की जाँच तेज कर दी है। टीम ने कथित तौर पर लवकुश सिकरवार नाम के एक आरोपित के घर से खून के रंग के धब्बे वाले कपड़े बरामद किए है। सिकरवार हाथरस मामले के चार आरोपितों में से एक है। आरोपित के घर की तलाशी के दौरान टीम को कथित कपड़े हाथ लगे है। सीबीआई टीम को यह संदेह है कि कपड़ों पर लगे रंग खून के धब्बे हैं। हालाँकि, सिकरवार के परिवार ने सीबीआई के दावों का खंडन किया है।

खबरों के मुताबिक, आरोपित के परिवार ने दावा किया है कि कपड़े पर रंग खून का नहीं बल्कि पेंट का था। उन्होंने बताया कि जो कपड़े सीबीआई की टीम लेकर गई है, वह लवकुश के बड़े भाई रवि के हैं। रवि एक फैक्ट्री में पेंटर का काम करता है और कपड़ों पर जो लाल रंग लगा हुआ है वो पेंट के दाग है।

आरोपित के छोटे भाई ललित सिकरवार ने कहा कि सीबीआई ने करीब दो घंटे तक उनके घर की तलाशी ली और छानबीन के दौरान लाल रंग से सना कपड़ा साथ ले गई। ललित ने कथित तौर पर एक वीडियो संदेश में दावा किया कि कपड़े उसके बड़े भाई के है। वो फैक्टरी में पेंटिंग का काम करते हैं। कपड़ों पर लाल रंग का कलर लगा था, उन्होंने उसे खून समझा और ले गए। वह खून नहीं थे।

गौरतलब है कि CBI की टीम ने पीड़िता के भाइयों को फिर से समन जारी किया था। टीम ने पहले पीड़िता के एक भाई से पूछताछ की थी। जिसके बाद टीम को उसके बयान में गड़बड़ी महसूस हुई। भाई को टीम द्वारा पूछताछ के लिए किसी दूर स्थान पर ले जाया गया था। कथित तौर पर उसे मौका-ए-वारदात यानी बाजरे के खेत में भी ले जाया गया और वारदात का नाट्य रूपांतरण करने के साथ-साथ मृतका के भाई से लंबी पूछताछ की गई थी।

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने हाथरस मामले में दायर दलीलों पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। पीड़ित के परिवार ने कोर्ट से सीआरपीएफ सुरक्षा और उत्तर प्रदेश के बाहर मामले को स्थानांतरित करने की माँग की है।

रिपब्लिक टीवी के प्रदीप भंडारी को मुंबई पुलिस ने फिर जारी किया समन: गिरफ्तारी की दी जा रही धमकी

मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार की रिपब्लिक टीवी से खींचतान अब दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है। अभी कल की ही बात है जब मुंबई पुलिस द्वारा जारी समन मामले में चैनल के कंसल्टिंग एडिटर प्रदीप भंडारी को अग्रिम जमानत मिली थी। मगर, आज सूचना आई है कि मुंबई पुलिस ने एक बार फिर प्रदीप भंडारी को समन जारी कर दिया है। उन्हें 22 अक्टूबर को 4 बजे तक कोर्ट में पेश होने को कहा गया है।

बिहार में आगामी चुनावों की कवरेज करने पहुँचे प्रदीप भंडारी ने ट्विटर पर इस समन के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह बिहार, चुनावों का आँकलन करने आए हुए थे, लेकिन अब वह मुंबई के लिए रवाना हो रहे हैं।

उन्होंने लिखा, “दोस्तों! मुंबई पुलिस मुझे थाने बुलाने के लिए उत्सुक है। मैं कल खार पुलिस थाने पहुँच जाऊँगा। उन्होंने मुझे 22 तारीख के लिए एक और समन जारी किया है। तथ्यों के सहारे मैं बिहार से मुंबई जा रहा हूँ, यहाँ मैं बिहार चुनाव का आँकलन कर रहा था। हम सच की लड़ाई जरूर जीतेंगें।”

इस समन में भंडारी से मुंबई पुलिस ने 22 अक्टूबर को 4 बजे कोर्ट में पेश होने को कहा है। इसमें यह भी लिखा है कि भंडारी बिना कोर्ट को बताए कहीं नहीं जा सकते।

पुलिस ने उन्हें याद दिलाया कि एक नोटिस 10 अक्टूबर को उन्हें और उनके वकील को भेजा गया था। यह नोटिस खार पुलिस थाने में दर्ज हुए मामले की सुनवाई के संबंध में था। इस नोटिस की ओरिजनल प्रति भी 13 अक्टूबर को भेजी गई थी, लेकिन तब भी उन्होंने अपने गायब होने की लिखित और मौखिक जानकारी नहीं दी।

इस नोटिस को मुंबई पुलिस की सख्त चेतावनी की तरह लेने को कहा गया। साथ ही उल्लेखित किया गया कि अगर भंडारी आगे भी अनुपस्थित हुए या नाफरमानी की तो उनके ख़िलाफ वारंट जारी होगा। नोटिस में यह भी बताया गया है कि प्रदीप भंडारी को व्हॉट्सएप के जरिए भी सूचना दी गई थी और स्पीड पोस्ट के जरिए कोर्ट की कार्रवाई में उपस्थित होने को भी कहा गया था, मगर वह फिर भी बिन बताए गायब हो गए।

2 घंटे विरोध के बाद मिली थी अग्रिम जमानत

गौरतलब है कि कल यानी 15 अक्टूबर को सुशांत सिंह मामले में रिपोर्टिंग करने वाले रिपब्लिक टीवी पत्रकार प्रदीप भंडारी की अग्रिम जमानत याचिका कोर्ट द्वारा स्वीकार की गई थी। इससे पहले उनके ख़िलाफ़ गैर जमानती धाराओं में मुंबई पुलिस ने समन जारी किया था

प्रदीप भंडारी ने ट्वीट पर अग्रिम जमानत की सूचना देते हुए बताया था कि कोर्ट में इसका करीब 2 घंटे तक विरोध हुआ और आखिरकार अर्नब गोस्वामी की लीगल टीम के उल्लेखनीय प्रयासों से अग्रिम बेल स्वीकार कर ली गई।

पत्रकार ने लिखा, “माननीय न्यायालय द्वारा मेरी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली गई है। इसका कोर्ट में करीब 2 घंटे तक विरोध किया गया, लेकिन अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक की शानदार लीगल टीम ने हमें बड़ी जीत दिलाई। सत्य और न्याय के लिए लड़ने का मेरा संकल्प दृढ़ हो गया है। आप सब का आभार।”

बता दें कि हाल ही में भंडारी के खिलाफ़ पुलिस थाने में आईपीसी की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत आदेश देने की अवज्ञा), 353 (लोक सेवक को अपने कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और बॉम्बे पुलिस कानून की धारा 37 (1), 135 के तहत मामला दर्ज हुआ था। इसी के बाद उन्हें पूछताछ के लिए थाने में हाजिर होने को कहा गया था और प्रदीप भंडारी ने केस दर्ज होने के बाद मुंबई पुलिस कमिश्नर को निशाने पर लिया था।  

प्रदीप भंडारी ने पुलिस कमिश्नर को उनके राजनीतिक आकाओं के इशारे पर काम करने और पुलिस की वर्दी का सम्मान नहीं करने के लिए फटकार लगाई थी और उनका इस्तीफा माँगा था। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास में है, इसके लिए उनके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत आरोप दायर करने की योजना बना रही है।

भारतीय सेना प्रमुख जनरल नरवणे करेंगे नेपाल यात्रा, नेपाली कॉन्ग्रेस ने चीनी कब्जे पर PM ओली पर साधा निशाना: चुप्पी को बताया- देशद्रोह

नेपाल की जमीन पर चीन के कब्जे का मामला एक बार फिर तूल पकड़ रहा है। नेपाली कॉन्ग्रेस (NC) ने चीन द्वारा नेपाली क्षेत्र में किए गए अतिक्रमण की पुष्टि करते हुए इस मामले में चीन का महिमामंडन करने वाली केंद्र सरकार की चुप्पी को शर्मनाक और निंदनीय बताया है। इसके अलावा मुख्य विपक्षी दल ने नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) की चुप्पी को देशद्रोह बताया। कथित तौर पर चीन ने हुमला जिले में नमखा ग्रामीण नगर पालिका के लिमी में कब्जा किया हुआ है।

एनसी ने सरकार पर आरोप लगाया कि जब सीडीओ के नेतृत्व वाली निरीक्षण टीम सीमा क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही थी, तब भी सरकार ने इस मुद्दे को कवर अप करने के लिए जल्दबाजी दिखाई और इसे इनकार कर दिया था। पार्टी ने सरकार की कार्रवाइयों को ‘राष्ट्र-विरोधी’ भी कहा। उन्होंने माँग की कि सरकार को एक डिप्लोमैटिक नोट के जरिए चीन से विरोध जताना चाहिए। साथ ही बातचीत और कूटनीति के माध्यम से इसका हल निकालें।

नेपाली सांसद जीवन बहादुर शाही ने कहा, “विशेषज्ञों की एक टीम को हुमला जिले में नेपाल-चीन सीमा का दौरा करना चाहिए ताकि चीन ने जो किया है उसका वैज्ञानिक आकलन किया जा सके। हमारे निष्कर्षों में स्पष्ट रूप से दिखाया गया है कि चीन ने सीमा स्तंभ को बदलने के बाद हमारे क्षेत्र में करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर प्रवेश किया है।” इससे पहले मीडिया में भी ऐसी ही खबरें सामने आईं थीं।

इस बीच, भारतीय सेना प्रमुख जनरल नरवणे नवंबर के महीने में नेपाल का दौरा करेंगे। इस यात्रा को चीन-नेपाल सीमा पर चीनी अतिक्रमण को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नेपाल के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “नेपाल सरकार ने 3 फरवरी 2020 को ही जनरल नरवणे की यात्रा को मंजूरी दे दी थी। लेकन उसी दौरान कोरोना की वजह से दोनों देशों में लॉकडाउन लागू हो गया था जिसके चलते जनरल नरवणे का दौरा स्थगित कर दिया गया था। एक निवेश समारोह में जनरल नरवणे को नेपाली सेना के सामान्य मानद रैंक प्रदान करना है। यह समारोह 70 साल पुरानी परंपरा है, इस सम्मान की शुरुआत 1950 में की गई थी।”

रणनीतिक मामलों और विदेश नीति के विशेषज्ञ गेजा शर्मा वागले ने कहा, “यह दौरा भारत की ओर से लंबे समय से क्षेत्रीय विवाद के कारण टूटे हुए संबंध सुधारने के लिए एक प्रयास है। मुझे लगता है कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच बहुत जरूरी बातचीत को पुनर्जीवित करने की दिशा में सकारात्मक योगदान देगी। दोनों देशों के बीच हाल ही हुए गतिरोध के बीच यह यात्रा काफी महत्वपूर्ण है।”

नेपाल द्वारा हाल ही में भारतीय क्षेत्र पर दावा करने वाले एक नए नक्शे को जारी करने के बाद दोनों देशों में तनाव बढ़ गया था। इसके अलावा प्रधानमंत्री के.पी. ओली ने श्री राम और अयोध्या को लेकर भी विवादास्पद टिप्पणी की थी।

तेलंगाना में रेप की कोशिश के बाद जिंदा जलाई गई 13 वर्षीय घरेलू सहायिका की मौत: आरोपित अल्लम मरैया गिरफ्तार

तेलंगाना में बीते महीने रेप की कोशिश में नाकाम रहने के बाद जिंदा जलाई गई 13 साल किशोरी की गुरुवार रात हैदराबाद में एक निजी अस्पताल इलाज के दौरान मौत हो गई। पीड़िता ने मरने से पहले पुलिस को दिए बयान में आरोपितों की पहचान भी की थी। पुलिस ने 26 साल के आरोपित अल्लम मरैया (Allam Maraiah) को गिरफ्तार कर लिया है।

यह घटना 18 सितंबर को तेलंगाना के खम्मम जिले की है। मामले की जाँच कर रहे खम्मम पुलिस आयुक्त तौफसर इकबाल ने कहा, “नाबालिग ने हैदराबाद में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत अब हमने हत्या का मामला दर्ज किया है।” इससे पहले आरोपित पर POSCO, घटना को दबाने की कोशिश और गलत जानकारी देने के लिए आईपीसी की धारा 201 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

पीड़िता ने अपने बयान में बताया था कि 18 सितंबर को उसके साथ यह घटना घटित हुई थी। जब वह हत्यारोपी युवक के घर में उसके बीमार पिता की देखभाल का काम कर रही थी। मजिस्ट्रेट को दिए बयान के मुताबिक, किशोरी जब युवक के घर उसके पिता की देखभाल के लिए आई तो उसने दुष्कर्म का प्रयास किया। किशोरी ने इसका विरोध किया तो गुस्से में आकर अल्लम मरैया (Allam Maraiah) ने उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी।

किशोरी को 70 फीसदी जली हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ वह जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी। पुलिस ने बताया आरोपित के परिवार द्वारा गुपचुप तरीके से खम्मन के एक निजी अस्पताल में लड़की का इलाज कराया जा रहा था। मामले में 2 हफ्ते बाद यानी 4 अक्टूबर को पीड़ित परिवार द्वारा एफआईआर दर्ज कराया गया, जब लड़की की हालत गंभीर हो गई थी।

पुलिस को पहले आरोपित ने घटना को एक हादसा बताया था। पुलिस ने गहराई से जाँच की तो यह जानकारी तेजी से फैली। पुलिस ने कहा, “हमें 4 अक्टूबर को पीड़िता की वास्तविक स्थिति के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद हमने मामले में शिकायत दर्ज की और आरोपित को हिरासत में ले लिया।”

खम्मम के पुलिस आयुक्त तौफसर इकबाल ने कहा, “हत्या और रेप के प्रयास के अलावा साक्ष्य छिपाने और नष्ट करने का केस भी आरोपित के खिलाफ दर्ज किया गया है। युवक शादीशुदा है और घटना के वक्त उसकी गर्भवती पत्नी अपने मायके गई हुई थी।” इकबाल ने कहा कि जिले के चिकित्सा अधिकारियों को यह पता करने को कहा है कि क्यों अस्पताल के डॉक्टरों या परिवार ने इस घटना की जानकारी शुरुआत में पुलिस को नहीं दी।

मथुरा कोर्ट ने स्वीकार की श्रीकृष्ण जन्मभूमि से सटी ईदगाह मस्जिद को हटाने की याचिका: अगली सुनवाई 18 नवंबर को

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि को कानूनी प्रक्रिया के साथ पाने के बाद अब मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मामला बेहद गरम है। ऐसे में आज (अक्टूबर 16, 2020) मथुरा के जिला कोर्ट में जज ने श्रीकृष्ण विराजमान की याचिका स्वीकार कर ली है।

इस मामले में अब अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। कोर्ट ने दूसरे पक्ष को भी उनका मत रखने के लिए नोटिस जारी किया है। बता दें कि इस याचिका में श्रीकृष्ण जन्मस्थान के समीप बने ईदगाह को हटाने की माँग कुछ लोगों के समूह द्वारा की गई है।

इस संबंध में जिला जज मथुरा साधनी रानी ठाकुर की कोर्ट में 12 अक्टूबर को दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के 13 एकड़ के कटरा केशव देव मंदिर के परिसर पर 17वीं शताब्दी में शाही ईदगाह बनाया गया था।

उनका कहना है कि इस समय जहाँ मस्जिद है कभी वहाँ कंस का कारागार था और वहीं पर कृष्ण का मंदिर था। मुगलों ने इसे तुड़वा कर वहाँ शाही ईदगाह मस्जिद बनवा दी।

गौरतलब है कि इससे [पहले मामले को लेकर मथुरा की सिविल जज कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, लेकिन वहाँ से याचिका खारिज कर दी गई थी, जिसके बाद हिंदू पक्ष ने जिला जज की कोर्ट में अपील दाखिल की

याचिका के जरिए 13.37 एकड़ जमीन पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मालिकाना हक माँगा है, जिसमें ईदगाह भी शामिल है। इसमें जमीन के मालिकाना हक को लेकर 1968 में हुए समझौते को गलत बताया गया हैं।

बता दें कि याचिका स्वीकृति के बाद श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान, ईदगाह ट्रस्ट, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, शाही मस्जिद ईदगाह को नोटिस भेजा जाएगा।

गौरतलब है कि पुजारियों के एक निकाय ने शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने वाली याचिका दायर करने कि निंदा भी की है। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के अध्यक्ष महेश पाठक ने कहा कि कुछ बाहरी लोग मथुरा में मंदिर-मस्जिद के मुद्दे को उठाकर शांति भंग करने की कोशिश कर रहे है। उनका तो यह भी कहना है कि 20 वीं शताब्दी में दोनों पक्षों के बीच समझौता होने के बाद श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर मथुरा में कोई मंदिर-मस्जिद विवाद नहीं है।

तुर्की में हिंदी धारावाहिक के प्रसारण के दौरान धुँधली की गई राधा कृष्ण की मूर्ति: सोशल मीडिया पर भड़के लोग

हिन्दी धारावाहिक ‘साथ निभाना साथिया’ के तुर्की भाषा में ‘मासूम’ नाम से प्रसारित शो ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ऐसे कई हिन्दी भाषी कार्यक्रम हैं जिनका तुर्की भाषा में अनुवाद किया जाता है। इसके अलावा पिछले कई सालों से वहाँ उनका सफल प्रसारण भी किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान वह धार्मिक हिन्दू चिन्हों और मूर्तियों को धुँधला करके हिन्दी धारावाहिकों का इस्लामीकरण करने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। इस बदलाव के बाद एक बात साफ़ हो जाती है कि तुर्की ब्रॉडकास्टर को भारतीय परम्पराओं और संस्कृति की बिलकुल समझ नहीं है।

एक हिन्दी कार्यक्रम के छोटे से हिस्से में राधा और कृष्ण नज़र आते हैं। तुर्की भाषा में प्रसारित होने वाले इस कार्यक्रम के दौरान राधा और कृष्ण वाले हिस्से को धुँधला कर दिया गया है। इस मामले के प्रकाश में आने के बाद कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस बात पर आपत्ति जताई। दृश्य में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि अभिनेत्री के पीछे मंदिर में राधा और कृष्ण की मूर्ति रखी हुई है, उसे पूरी तरह धुँधला किया गया है। यह ऐसा सम्भावित तौर पर इसलिए किया गया है जिससे इस्लामी कट्टरपंथियों की भावनाएँ आहत न हों। एक और वजह यह भी हो सकती है इसे इस्लाम के मुताबिक़ हराम माना जाता है।

(साभार – Kanal 7 Dizileri)

तुर्की ब्रॉडकास्टर लगातार हिन्दी धारावाहिकों का इस्लामीकरण करने पर तुले हुए हैं। अब उन्होंने हिन्दू प्रतीक चिन्हों को धुँधला करके हिन्दी धारावाहिक के इस्लामीकरण का प्रयास किया है। इन हिन्दी धारावाहिकों को इस्लाम के अनुरूप दिखाने के लिए कार्यक्रम के दौरान जितने भी गैर इस्लामी प्रतीक चिन्ह दिखाए जाते हैं उन्हें धुँधला कर दिया जाता है। इसके पीछे दलील यह दी जाती है कि उन्हें दिखाने का मतलब इस्लाम के सिद्धांतों का उल्लंघन करना। 

यह दृश्य (scene) हिन्दी धारावाहिक ‘साथ निभाना साथिया’ का है जिसे तुर्की भाषा में अनुवाद के बाद ‘मासूम’ नाम दिया गया। इस कार्यक्रम का प्रसारण कनाल 7 (kanal 7) नाम के चैनल पर हुआ था। 

इस तस्वीर में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे राधा और कृष्ण की मूर्ति वाले हिस्से को धुँधला किया गया है।

तुर्की चैनल में धुँधली की गई राधा कृष्ण की मूर्ति
(साभार – Kanal 7 Dizileri)

इस्लामी कट्टरपंथियों को खुश करने की होड़ में तुर्की ब्रॉडकास्टर हिन्दू भावनाओं का संज्ञान लेना भूल ही गया। इस हरकत के ज़रिए इन्होंने गैर इस्लामी संस्कृति के प्रति प्रबल असहिष्णु भावना का प्रदर्शन किया है।         

राजस्थान सरकार मदरसों पर करेगी 15-25 लाख खर्च, कुंभ मेले का नेता कर रहे विरोध.. कॉन्ग्रेस है तो मुमकिन है

कॉन्ग्रेस नेता उदित राज एक ओर जहाँ पब्लिक फंड का इस्तेमाल कुंभ में किए जाने पर योगी सरकार की आलोचना कर रहे हैं, वहीं समाचार चैनल ‘टाइम्स नाउ’ ने खुलासा किया है कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस सरकार राजस्थान में जनता के पैसों को मदरसों के विकास में लगाने वाली है।

रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान सरकार ने प्रदेश भर के मदरसों को 14 अक्टूबर से 29 अक्टूबर के बीच एप्लीकेशन फाइल करने को कहा है। यह एप्लीकेशन मदरसों के ढाँचेगत विकास हेतु राशि प्राप्त करने के लिए होगी।

टाइम्स नाउ की मानें तो राजस्थान सरकार करीब 90% मदरसों के ढाँचेगत विकास का खर्चा वहन करेगी जबकि 10% खर्चे की जिम्मेदारी मदरसा बोर्ड की होगी। हर मदरसे के लिए सरकार ने 15-25 लाख रुपए निर्धारित किए गए हैं।

राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार का यह फैसला उनके ‘सेक्युलरिज्म’ के आडम्बर का प्रत्यक्ष उदाहरण है कि वो मदरसों के आधुनिकीकरण के नाम पर मजहबी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए जनता के पैसे का इस्तेमाल कर रहे हैं और उन्हीं के नेता कुम्भ मेले पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की आलोचना कर रहे हैं।

बता दें कि मदरसों के आधुनिकीकरण का जिक्र राजस्थान सरकार ने साल 2019 के अपने बजट में किया था। अशोक गहलोत सरकार के बजट 2019 की मद संख्या 116 में “मुख्यमंत्री मदरसा उन्नयन योजना” का उल्लेख किया गया था और सरकार द्वारा लगभग 7 करोड़ रुपए इसके लिए आवंटित किए गए थे।

इससे पहले महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस समर्थित महाविकास आघाड़ी सरकार ने भी अपने राज्य में मदरसे के शिक्षकों के वेतन के लिए धन आवंटित किया था।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने कुंभ को लेकर हाल में यूपी सरकार पर निशाना साधने का प्रयास किया था। हालाँकि इसके बाद उन्हें खूब आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। पूर्व सासंद ने कहा था कि राज्य को धार्मिक शिक्षा और परंपराओं के लिए फंड नहीं देना चाहिए क्योंकि राज्य का कोई धर्म नहीं है।

उदित राज ने लिखा था, “सरकार द्वारा कोई भी धार्मिक शिक्षा या अनुष्ठान नहीं किए जाने चाहिए। सरकार का खुद का कोई धर्म नहीं होता है। यूपी सरकार इलाहाबाद में कुंभ मेले के आयोजन में 4200 करोड़ रुपए खर्च करती है, वह भी गलत है।”

हालाँकि, कई आलोचनाओं के बाद उन्होंने यह ट्वीट हटा दिया और स्पष्टीकरण देते हुए लिखा, “मैं ट्वीट को बहाल कर रहा हूँ व संवाद के लिए तैयार हूँ। जब भी राजनैतिक मामला होता है तो कॉन्ग्रेस को टैग करता हूँ, इसमें नही किया था क्योंकि व्यक्तिगत विचार है। बिना वजह पार्टी को घसीटा जा रहा है।डॉ अम्बेडकर मानते थे कि राजनीति&धर्म का मिश्रण नही होना चाहिए।”

इस मामले पर भाजपा नेता अनुराग ठाकुर ने कॉन्ग्रेस नेता उदित राज को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि कॉन्ग्रेस नेता नहीं समझते कि जब करोड़ों लोग एक समारोह में एकत्रित होते हैं, तब यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वहाँ का ढाँचागत विकास हो और बेहतरीन सुविधाएँ मुहैया करवाई जाए, ताकि इससे रोजगार उत्पन्न हो और स्थानीयों की आय में भी वृद्धि हो। ऐसे इवेंट बुनियादी ढाँचे को विकसित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था की मदद करने के अवसर प्रदान करते हैं।