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महाराष्ट्र सरकार ने अर्नब को दिया मात्र 10 मिनट में हाजिर होने का नोटिस, रिपब्लिक लेगा अदालत की मदद

महाराष्ट्र सरकार ने रिपब्लिक भारत के पत्रकार अर्नब गोस्वामी को चौथा नोटिस जारी करते हुए मात्र 10 मिनट में हाजिर होने को कहा है। समाचार चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ ने कहा है कि वह अब अदालत का रुख करने जा रहे हैं। रिपब्लिक भारत ने इसकी सूचना ट्वीट के माध्यम से दी है।

अर्नब गोस्वामी ने कहा कि यह पूरी तरह से राज्य में लोकतंत्र की प्रक्रिया की विफलता का सबूत है।


रिपब्लिक टीवी ने खबर को आज (अक्टूबर 16, 2020) दोपहर 2:50 बजे प्रकाशित किया। अर्नब गोस्वामी को महाराष्ट्र विधान सभा से नोटिस मिला, जिसने कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से दोपहर 3:00 बजे पेश होने के लिए कहा था। राज्य सरकार ने अर्नब गोस्वामी को विधानसभा में उपस्थित होने के लिए केवल 10 मिनट दिए, और चेतावनी दी कि यदि वह ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

अर्नब गोस्वामी को महाराष्ट्र विधानसभा द्वारा पहला नोटिस 16 सितंबर को विशेषाधिकार के उल्लंघन के सम्बन्ध में दिया गया था। महाराष्ट्र विधायिका सचिवालय ने पहले 16 सितंबर को अर्नब गोस्वामी से उद्धव ठाकरे और शरद पवार के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों के लिए राज्य विधानमंडल के दो दिवसीय मानसून सत्र के दौरान उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पर स्पष्टीकरण माँगा था।

सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले की कवरेज के दौरान मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और अन्य मंत्रियों को जिस तरह से रिपब्लिक टीवी के प्रमुख अर्नब के हवाले से पेश किया गया, उसे लेकर शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक द्वारा विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया गया था।

विधानसभा ने आरोप लगाया कि उन्हें अर्नब की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली ,इसके बाद अर्नब गोस्वामी को एक दूसरा नोटिस दिया गया और 20 अक्टूबर तक जवाब माँगा गया। गोस्वामी को एक तीसरा नोटिस दिया गया था, जिसमें महाराष्ट्र विधानमंडल सचिवालय ने रिपब्लिक टीवी के प्रमुख अर्नब गोस्वामी को नोटिस जारी किया था ,यह स्पीकर की अनुमति के बिना सुप्रीम कोर्ट में विधानसभा की कार्यवाही की एक प्रति प्रस्तुत करने के लिए विशेषाधिकार हनन के सम्बन्ध में था। सचिवालय ने बुधवार को एक बयान में कहा कि 13 अक्टूबर को यह नोटिस दिया गया था और 15 अक्टूबर तक गोस्वामी से लिखित स्पष्टीकरण माँगा गया था।

अब TATA CLiQ के विज्ञापन ने योग-ध्यान को बताया ‘बोरिंग’: तनिष्क के ‘लव जिहाद’ के बाद क्रिश्चियन मैरिज को किया गया प्रमोट

तनिष्क (Tanishq) का नया एड ‘लव जिहाद’ (Love Jihad) के चलते विवादों में घिर गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों ने #boycottTanishqJewellery की बाढ़ ला दी। जिसके कुछ ही देर बाद विज्ञापन को हटा लिया गया। वहीं अब त्योहारी सीजन के लिए बना एक और विज्ञापन टाटा को कटघरे में खड़ा कर सकता है। दरअसल, इस एड में प्राचीन काल से चली आ रही हिन्दुओं की आध्यात्मिक प्रक्रिया योग और ध्यान को बदनाम करने की कोशिश की गई है।

बता दें विज्ञापन 14 अक्टूबर को Tata Cliq के YouTube चैनल पर अपलोड किया गया था। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि तनिष्क के लव जिहाद को बढ़ावा देने वाले एड के विवादों में आने के दो दिन बाद यह विज्ञापन YouTube पर अपलोड किया गया था।

इस विज्ञापन में योग को ‘बोरिंग’ और ऑनलाइन सेवाओं के माध्यम से ईसाई शादी को मजेदार और आदर्श के रूप में दिखाया गया है। विज्ञापन का विषय यह है कि योग एक पुरानी प्रथा है और इसे नए और ट्रेंडिंग ईसाई ऑनलाइन शादी के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए। यह विज्ञापन भी हिंदू परंपराओं को नीचा दिखाने और गैर-हिंदू प्रथाओं का पालन करने को आदर्श के रूप में फॉलो करने की वकालत करता है।

विज्ञापन के शुरुआत में कहा जाता है, “इतने सारे लोगों ने 2020 को वास्तव में ‘एपिक’ बनाया, इसे एक reliQ (अवशेष) की तरह नहीं जी रहे, यह एक नया triQ सीखने का वर्ष है, चलो हम मिनिमालिस्टिक, आइडियलिस्टिक, सिम्प्लिस्टिक बनते है, किसी को जानते हैं जिसने 2020 क्लिक (cliq) बनाया है? उन्हें एक परफेक्ट गिफ्ट दे कर सेलिब्रेट करे।” बता दें टाटा क्लिक, तनिष्क की ही तरफ टाटा का एक ब्रांड हैं।

यूट्यूब स्कीनशॉट

गौरतलब है कि इससे पहले के विवादित तनिष्क के नए विज्ञापन में एक हिंदू महिला की गोदभराई की रस्म को दिखाया गया था। इस लड़की की शादी मुस्लिम परिवार में हुई थी। इसमें हिंदू संस्कृति को ध्यान में रखते हुए मुस्लिम परिवार गोदभराई की रस्मों को हिंदू धर्म के हिसाब से करता हुआ दिखाया गया था।

विज्ञापन को लव जिहाद को बढ़ावा देने के आरोप लगने और सोशल मीडिया पर तनिष्क के बहिष्कार की अपीलों के बाद कंपनी ने विज्ञापन को वापस ले लिया था। कुछ इसी तरह का विवाद होली के दौरान सर्फ एक्सेल के एक विज्ञापन को लेकर भी हुआ था।

बता दें हिंदू धर्म को बदनाम करना और हिंदुओं को नेगेटिव चित्रित करना विज्ञापन उद्योग में एक प्रमुख विषय बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में कई विज्ञापन और शार्ट फिल्में आई हैं जो हिंदू समुदाय को लक्षित या बदनाम करती हैं।

औकात की बात मत किया कर पगली… एक क्लब वाले माँ दुर्गा पर 25 किलो सोना चढ़ा देते हैं

दुर्गा पूजा या नवरात्रि के दौरान यूँ तो पूरा देश ही 9 दिन तक त्यौहार और उत्सव के माहौल में डूबा रहता है लेकिन पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा को लेकर विशेष तैयारियाँ हमेशा से ही आकर्षण का केंद्र रही हैं। इस बार की दुर्गा पूजा की तैयारियों में एक ख़ास बात यह है कि हाल ही में तनिष्क द्वारा एक विवादित विज्ञापन के बहाने कई लोगों ने अपनी हिन्दू घृणा का भी जोर शोर से प्रदर्शन किया और ‘औकात’ की बात कर डाली।

लेकिन, औकात की बात करने वालों को शायद इस बात की जानकारी नहीं है कि औकात वाला एक ऐसा क्लब है जो चंद दिनों के नवरात्र में आस्था और संपन्नता की अद्भुत मिसाल पेश करता है। कोलकाता का एक क्लब है श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब दुर्गा पूजा, जिसने कोलकाता में दुर्गा पूजा के लिए सजाए एक पंडाल में लगभग 25 किलो सोना लगाया है। दुर्गा पूजा के लिए आयोजित यह पंडाल केदारनाथ थीम पर तैयार किया गया है। इस पंडाल में लगाई गई माँ दुर्गा की मूर्ति को 25 किलो सोने के आभूषणों से सुसज्जित किया गया है। 

यह क्लब लगभग हर साल ही दुर्गा पूजा पर विशेष आयोजन और दान करता है। साल 2017 में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस पंडाल की तस्वीर और जानकारी ट्वीटर पर साझा की थी।   

आसान शब्दों में कहा जाए तो तनिष्क विवाद की आड़ में हर इंसान जो हिन्दुओं की औकात भाँपना चाहता है उसे इस दुर्गा पूजा पंडाल के बारे में ज़रूर जानना चाहिए। हिन्दुओं की औकात पर बहस करना तो फिर भी दूर की कौड़ी है, हिन्दुओं के एक क्लब की औकात इतनी विस्तृत है कि मूर्तियाँ सोने में ढंक दी जाती हैं।

इसी तरह पिछले साल कोलकाता के संतोष मित्रा चौराहे पर 13 फीट ऊँची दुर्गा मूर्ति लगाई गई थी, जिसे लगभग 50 किलो सोने के आभूषण से सजाया गया था और इसकी कीमत लगभग 20 करोड़ रुपए बताई गई थी। क्योंकि इस मूर्ति को ऊपर से लेकर नीचे तक सोने के आभूषणों से सुसज्जित किया गया था इसलिए इसका नाम ‘कनक दुर्गा’ रखा गया था। 

श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब दुर्गा पूजा द्वारा बॉलीवुड फिल्म ‘पद्मावत’ से प्रेरणा लेते हुए चित्तौड़ महल जैसा मंडप तैयार किया गया था। इस मंडप में माँ दुर्गा की मूर्ति को रानी पद्मावती के तौर पर दर्शाया गया था। इसके पहले साल 2017 में संतोष मित्रा चैराहे पर एक दुर्गा जी की मूर्ति की स्थापना की गई थी जिसे एक ऐसी साड़ी से सजाया गया था जो 22 किलो सोने से बनी हुई थी। ठीक ऐसे ही एक बार इन पंडालों को ग्लोबल वार्मिंग की थीम दी गई थी, इसके बाद हर दुर्गा पूजा पंडाल हरी भरी नर्सरी की तरह सजाए गए थे। 

जिससे एक और बात की पुष्टि होती है कि हिन्दू धार्मिक आयोजनों की औकात तो होती है साथ ही साथ उनमें सामाजिक ज़िम्मेदारी और जागरूकता का बोध भी होता है। यह तो सिर्फ एक आयोजन की बात है, हिन्दू धर्म के अनुसार होने वाले लगभग हर आयोजन की औकात विरोध करने वाली जनता की समझ के दायरे से कहीं बाहर है। बल्कि इस प्रकार के सामाजिक विमर्शों में ऐसे शब्दों की आवश्यकता उन्हें ही पड़ती है जिनकी खुद की औकात गुमनामी की कगार पर खड़ी होती है।      

तनिष्क स्टोर में ‘जय श्री राम’ के नारों का खौफ? फैक्ट चेकर मो. जुबैर ने फिर किया हिन्दुओं को बदनाम करने का विफल प्रयास

प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘ऑल्टन्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने एक फिर भ्रामक वीडियो पोस्ट कर लोगों में हिन्दू-घृणा को स्थापित कर हिन्दुओं को भी ‘कट्टरपंथी’ साबित करने का बचकाना प्रयास किया है। मोहम्मद जुबैर ट्विटर पर तनिष्क विवाद का फायदा उठाते हुए यह साबित करने का प्रयास करते देखा गया कि लोग ‘जय श्री राम’ का नारा लगाकर तनिष्क के शोरूम पर हमला करने की प्लानिंग कर रहे हैं या फिर तनिष्क स्टोर में मौजूद लोगों को डराने का प्रयास कर रहे हैं।

मोहम्मद जुबैर ने तनिष्क इंदौर के एक शोरूम का वीडियो ट्वीटर पर शेयर किया। वीडियो शेयर करते हुए जुबैर ने लोगों को गुमराह करने की कोशिश की। जुबैर ने सोशल मीडिया यूजर्स को यह बताने की कोशिश की किस तरह हिंदू एक विज्ञापन की वजह से तनिष्क शोरूम में काम कर रहें लोगों को प्रताड़ित कर रहें और शोरूम में घुसकर नारेबाजी कर रहे हैं। जबकि मामला इसके बिलकुल विपरीत है।

ट्विटर पर शेयर पहले वीडियो में आप देख सकते है की शोरूम के अंदर कर्मचारी आपस में बात कर रहे हैं। वहीं, पीछे से ‘जय श्री राम’ के नारों की आवाज आ रही है। मोहम्मद जुबैर द्वारा शेयर किए गए वीडियो को देख कर हर किसी के मन में पहली बात यही आएगी कि ‘जय श्री राम’ का नारा लगा रहे हिंदू तनिष्क स्टोर के बाहर आक्रामक प्रदर्शन कर रहे हैं और शोरूम में मौजूद सभी लोगों पर हावी हो रहे हैं। जबकि दूसरी ओर नजारा बिलकुल विपरीत है।

दरअसल लोग प्रदर्शन तो कर रहे हैं, लेकिन जिस तरह हिन्दुओं को निशाना बनाते हुए मोहम्मद जुबैर ने अपने वीडियो के जरिए दर्शाया, वैसे नहीं। जुबैर के ही पोस्ट पर ‘बेफिटिंग फैक्ट’ नाम से एक ट्विटर यूजर ने तनिष्क शोरूम के बाहर हो रहे प्रदर्शन का वीडियो पोस्ट किया।

इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि किस तरह कुछ लोग शोरूम के बाहर जमीन पर बैठकर शांतिपूर्ण तरीके से सिर्फ जय श्री राम का नारा लगा रहे हैं। इस वीडियो से अंदाजा लगा सकते है कि प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘ऑल्टन्यूज़’ के सह-संस्थापक और कथित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर ने सिर्फ ‘जय श्री राम’ के नारे के जरिए लोगों के बीच हिन्दुओं को भी ‘आक्रामक’ साबित कर उनके खिलाफ नफरत पैदा करने का एक और विफल प्रयास किया है।

तनिष्क के विज्ञापन से शुरू हुआ विवाद


तनिष्क के विज्ञापन में एक हिंदू महिला की गोदभराई की रस्म को दिखाया गया था। इस लड़की की शादी मुस्लिम परिवार में हुई थी। इसमें हिंदू संस्कृति को ध्यान में रखते हुए मुस्लिम परिवार सभी रस्मों रिवाजों को हिंदू धर्म के हिसाब से करता दिखाया गया था।

विज्ञापन को लव जिहाद को बढ़ावा देने के आरोप लगने और सोशल मीडिया पर तनिष्क के बहिष्कार की अपीलों के बाद कंपनी ने विज्ञापन को वापस ले लिया। कुछ इसी तरह का विवाद होली के दौरान सर्फ एक्सेल के एक विज्ञापन को लेकर भी हुआ था।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले वामपंथी मीडिया चैनल एनडीवी ने ब्रेकिंग चलाते हुए दावा किया था कि तनिष्क विवाद के चलते गुजरात के गाँधीधाम में तनिष्क के एक स्टोर पर हमला हुआ है। एनडीटीवी के मुताबिक, हमलावरों की भीड़ ने कथित तौर पर स्टोर मैनेजर को माफी पत्र लिखने के लिए कहा था।

वहीं गुजरात के गृहमंत्री ने इसका खंडन करते हुए कहा था, “NDTV द्वारा गाँधीधाम (गुजरात) के तनिष्क स्टोर पर हमले की फैलाई गई खबरें पूर्णतः झूठ और फ़र्ज़ी हैं। यह बिलकुल ही गलत मंशा से गुजरात में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और हिंसा भड़काने के उद्देश्य से किया गया कार्य है। मैंने इन लोगों पर मामला दर्ज करने को कहा है और फेक न्यूज चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं।”

अब यीशु की पूजा करते हैं… हैदर जिसको कहता है उसे वोट देते हैं… मोदी ने सब बंद करवा दिया है…

बिहार के झाझा रेलवे स्टेशन से लगी सड़क जो सिमुलतला की ओर जाती है, उस पर आप करीब 25 किलोमीटर का सफर तय करेंगे तो खुरंडा पंचायत के बथनावरन गाँव में पहुँचेंगे। पहाड़ और जंगलों से घिरे इस इलाके में कई गाँव हैं। मसलन- बनगामा, गोपलामारन, लीलावरण, टीटहीचक, तिलौना, बजियाडीह, पटुआ, पचकटिया, कारीझाड़ वगैरह।

इनमें से कुछ गाँव में दर्जनभर घर हैं, तो कुछ बड़े गाँव। इस इलाके में मुस्लिमों और यादवों की अच्छी-खासी आबादी है। करीब-करीब हर गाँव में कुछ घर संथाल यानी आदिवासियों के हैं। इसके अलावा दलितों और महादलितों के भी कुछेक घर हैं।

बथनावरन में प्रवेश करते ही हमारी मुलाकात मोबिन अंसारी से हुई। मोबिन हमें देखते ही भड़क उठे। उनका कहना था, “मेरे घर का छः बच्चा बाहर कमा रहा था। सब बेरोजगार हो गया। सरकार कोई मदद नहीं किया। सब घर आ गया है। घर लौटने के लिए पैसा नहीं था तो यहाँ से मवेशी बेचकर पैसा भेजे।”

थोड़ा आगे बढ़ने पर गाँव की मस्जिद दिखी, जिसका निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़े हमने गाँव की महिलाओं और पुरुषों को बीड़ी बनाते देखा। अल्पसंख्यक वर्ग के कई परिवार बीड़ी बनाने के कार्य पर ही आश्रित हैं। गाँव के आखिरी छोर पर 14 घर संथालों के हैं। यहीं हमारी मुलाकात बिरसा कुजूर से हुई। उन्होंने बताया कि कुछ संथाल परिवार ने धर्म परिवर्तन कर लिया है।

धर्मांतरण करने वाले एक परिवार की महिला शोभा तिग्गा ने बताया कि वे लोग चार साल से यीशु की पूजा कर रहे हैं। वे कहती हैं, “देवता को पूजा कर मर गए तो कुछ सुनवाई न हुआ। कोई लोग बोला कि इसमें जाओ तो जान बचेगा। इसलिए चले गए। गाँव में क्रिश्चन लोग आता है। वे कहे कि इसमें जाइएगा तो अच्छा रहेगा।” यह पूछे जाने पर कि मिशनरी से उन लोगों को किसी तरह की मदद मिलती है, महिला ने बताया, “पहले मिलता था, लेकिन मोदी ने अब सब बंद करवा दिया।”

पहले यानी, धर्मांतरण से पहले। महिला के अनुसार धर्मांतरण से उनलोगों को खाने के सामान, कपड़े वगैरह मिले थे। अब नहीं मिलता क्योंकि मिशनरी के लोगों ने उन्हें बताया कि मोदी ने सब बंद करवा दिया है। इस महिला की मानें तो वह वोट तो गिराती हैं, लेकिन दूसरों के कहने पर। जब हमने पूछा कि किसके कहने पर वोट देती हैं, तो उन्होंने हैदर का नाम लिया। हैदर स्थानीय वार्ड सदस्य है।

हमने इसकी पुष्टि के लिए हैदर से संपर्क करने की कोशिश की तो पता चला कि वह झाझा गया हुआ है। स्थानीय मुखिया बलदेव यादव ने इस संबंध में बात करने से इनकार कर दिया।

शोभा के घर के सामने ही 35 साल के अमानत अंसारी का घर है। अमानत भी दिल्ली में काम करता था और लॉकडाउन के बाद घर लौट आया। उसने बताया कि गाँव में मिशनरी वाले आते रहते हैं। अमानत ने बताया, “यहाँ 13-14 घर संथाल है। इसमें चार घर ईसाई हो गया है। इनके घर से तीन-चार वोटर हैं। हमलोगों का 500 के करीब वोट पड़ता है। लेकिन सब जुट जाएँगे तो समझिए दो हजार के करीब वोटर होगा।”

यह केवल बथनावरन की कहानी नहीं है। पटुआ और घोरपारण में भी हमने पाया कि कुछेक संथाल परिवारों ने धर्मांतरण कर लिया है। दिलचस्प यह था कि ऐसे हरेक परिवार ने धर्मांतरण 5 साल के भीतर किया है। धर्मांतरण से पहले इन्हें ईसाई मिशनरी जिसे ये क्रिश्चन कहते हैं, से आर्थिक और अन्य मदद मिलती थी, पर धर्म बदलने के बाद से यह बंद है।

गौरतलब है कि झाझा विधानसभा सीट जमुई जिले के अंतर्गत आती है। इस सीट पर पहले चरणा में 28 अक्टूबर को वोट डाले जाने हैं। 2015 में इस सीट से बीजेपी के रवींद्र यादव जीते थे जो इस बार लोजपा के उम्मीदवार हैं। यह सीट जदयू के खाते में गई है और उसने पिछला चुनाव हारने वाले दामोदर रावत को उम्मीदवार बनाया है। राजद की तरफ से राजेंद्र प्रसाद मैदान में हैं।

पत्रकार को उठाने के बाद बिना सर्च वारंट OTV ऑफिस पहुँची ओडिशा पुलिस कहा- RTI नहीं, अश्लील Video का है मामला

ओडिशा टीवी (OTV) के पत्रकार रमेश रथ को हिरासत में लेने के बाद ओडिशा टीवी के परिसर को पुलिस द्वारा घेरे जाने की खबर आज (अक्टूबर 16, 2020) सामने आई है। यह घटना OTV पर पब्लिश हुई एक रिपोर्ट के बाद की है जो एक RTI पर आधारित थी। इस रिपोर्ट में सीएम नवीन पटनायक द्वारा किए गए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के हवाई सर्वेक्षण पर सवाल उठाया गया था।

खबरों के मुताबिक, पुलिस की एक टीम को कल रात से ही OTV के परिसर के सामने तैनात कर दिया गया है। कहा जा रहा है कि पुलिस सर्च ऑपरेशन के लिए वहाँ पहुँची थी, लेकिन जब उनसे इसे लेकर सवाल किए गए तो उन्होंने कहा कि उनके पास कोई सर्च वारंट नहीं है।

अधिकारियों ने पुलिस से वारंट के सबंध में जब जानना चाहा तो क्योंझर पुलिस थाने (Keonjhar police station) के इंस्पेक्टर ने जवाब दिया कि उन्हें जाँच के लिए बिना वारंट, सर्च करने और परिसर में घुसने की अनुमति है। पुलिस ने यह भी कहा कि वह परिसर को तभी छोड़ेंगे जब वह अपनी खोजबीन कर लेगें।

रिपब्लिक टीवी से बात करते हुए ओटीवी के न्यूज एडिटर आर मिश्रा ने कहा, “यह पहली बार नहीं जब ओटीवी को टारगेट किया गया हो। रमेश रथ ही वह पत्रकार थे जिन्होंने सीएम पटनाक के एरियल सर्वे के ऊपर आरटीआई रिस्पॉन्स की न्यूज ब्रेक की थी। इसी के बाद जब अगले दिन वह कार्यालय आने लगे तो पुलिस ने उन्हें वैन में बैठा लिया और उनका मोबाइल सीज करके उन्हें पुलिस थाने ले गए। किसी को इस बारे में नहीं बताया गया कि उन्हें क्यों पकड़ा गया। उन्होंने पत्रकार के ख़िलाफ़ एफआईआर की है। हमें हमारे एंकर से इस संबंध में पता चला, फिर हमने पुलिस आयुक्त से इसकी पुष्टि की।” उन्होंने कहा कि ओटीवी को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया जा रहा है।

अश्लील क्लिप मामला

क्योंझर पुलिस ने इस मामले में बताया कि साल 2019 में लोकसभा चुनावों के समय सामने आई एक अश्लील क्लिप के कारण पत्रकार को पकड़ा गया है न कि ओटीवी की उस रिपोर्ट के कारण जिसमें सीएम के एरियल सर्वे के मद्देनजर सवाल पूछे गए। पुलिस का कहना है कि रथ का नाम उनकी पड़ताल में सामने आया और उन पर आरोप है कि उन्होंने ही वीडियो की डिटेल्स मुहैया करवाई।

पुलिस एक महिला सांसद के अश्लील वीडियो क्लिप के मामले में OTV कार्यालय की तलाशी लेना चाहती थी, जो 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान प्रसारित किया गया था। साल 2019 के मामले पर बात करते हुए आर मिश्रा ने कहा यह मामला एक महिला बीजेडी नेता की अश्लील वीडियो से संबंधित है। इसमें दो ओटीवी पत्रकार और कुछ भाजपा नेता शामिल थे, और मीडिया हाउस ने केवल पड़ताल में साथ दिया था। अब क्योंझर पुलिस ओटीवी के परिसर के बाहर आकर रह रही है कि वह बिना वारंट के परिसर की छानबीन करेंगे।

आरटीआई क्या कहती है?

गौरतलब है कि 14 अक्टूबर को ओटीवी ने सीएम पटनायक से एक आरटीआई के जवाब पर आधारित कुछ सवाल किए थे। मीडिया हाउस ने दावा किया था कि ऑपरेशन में इस्तेमाल हुए हेलीकॉप्टर के आधिकारिक आँकड़े इस बात की पुष्टि नहीं करते कि सीएम ने हवाई सर्वे करवाया।

बता दें कि सीएम पटनायक ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 31 अगस्त को हवाई सर्वेक्षण कराया था और प्रभावित लोगों को आर्थिक मदद मुहैया कराने की बात कही थी। हालाँकि ओटीवी द्वारा एक्सेस की गई आरटीआई कहती है कि केवल ओएसएस एयर मैनेजमेंट का एक ही हेलीकॉप्टर भुवनेश्वर से उड़ा और वो भी केवल 19 मिनट के लिए। उन्होंने यह भी कहा कि उस दिन कोई वीवीआईपी मूवमेंट नहीं हुआ। इन्हीं बिंदुओं के आधार पर मीडिया चैनल ने सीएम के हवाई सर्वे पर प्रश्न उठाए थे।

OTV रिपोर्ट पर AAI का क्या कहना है?

ओटीवी के दावों को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने खारिज कर दिया है और कहा है कि सीएम द्वारा उस दिन सर्वे करवाया गया था। एएआई ने ओटीवी के दावों के विपरीत कहा कि जो समय 19 मिनट का बताया जा रहा है वो वास्तविक उड़ान का समय था, और इसमें वार्म-अप समय, स्टार्टअप समय आदि नहीं शामिल हैं। एएआई की ओर से यह भी बताया गया कि एसओपी के अनुसार वीवीआईपी फ्लाइट का मतलब राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विदेशी राज्य/ सरकार के प्रमुख से है। मुख्यमंत्री को वीवीआईपी में नहीं जोड़ा जाता, इसलिए नवीन पटनायक द्वारा किया गया सर्वे वीवीआईपी ट्रैवल में नहीं आता।

व्यंग्य: NDTV के संकेत को रिपब्लिक ने दिए ₹500, देखता रहता है पूरे दिन

हाल ही में ‘अटैक’ शब्द की नई व्याख्या ले कर आए संकेत नामक एनडीटीवी कर्मचारी ने आज एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में वो काफी प्रसन्न नजर आ रहे हैं। यूँ तो, एनडीटीवी में रह कर प्रसन्न होने का कोई औचित्य नहीं है, लेकिन फिर भी कोरोना के दौर में खुशी के दो पल तो व्यक्ति निजी विषयों में विनोद खोज कर पा ही सकता है। हालाँकि, उनकी इस तरह से हँसने की तस्वीर देख कर श्री प्रणय रॉय को काफी गुस्सा आया कि NDTV का एक कर्मचारी ऐसा प्रसन्नचित्त कैसे हैं!

वो भी दीवाली के बोनस के समय में जबकि सबको सीरियस दिखना होता है ताकि बॉस को लगे कि काम ठीक से हो रहा है। इसका संज्ञान प्रणय जी ने ले लिया है और गुप्त सूत्रों के हिसाब से जल्द ही संकेत को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया जाने वाला है। अगर मेरी निजी राय ली जाए तो ये सही भी है। कर्मचारियों को हमेशा गंभीर रहना चाहिए। बिना बात के भी गंभीर रहिए, तभी तो रवीश कुमार जैसों का सामूहिक अजेंडा चलेगा कि NDTV चैनल के प्रसारण को सैटटॉप बॉक्स के दौर में यूपी के ‘केबल वाले’ गायब कर देते हैं।

अगर कर्मचारी पब्लिक में ऐसे खुश दिखेगा तो चार लोग (जो इस चैनल को देखते हैं) पूछेंगे कि आप तो कहते हैं कि चैनल का नंबर बदल दिया जाता है, केबल वाले बंद कर देते हैं प्रसारण… और यहाँ तो संकेत मुस्कुराता हुआ फोटो लगा रहा है। प्रणय रॉय ने एडिटर्स की मीटिंग में इस मुद्दे को उठाया कि जहाँ इंडिया टुडे ने दो महीने तक कर्मचारियों को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर निजी बात रखने से मना किया है, वैसे दौर में लोग अगर हँसते दिखेंगे तो उनकी विश्वसनीयता क्या रह जाएगी!

रिपब्लिक टीवी चल रहा है बैकग्राउंड में

प्रणय रॉय ने कई ऐसी बातें भी कहीं, जो हम आगे बताएँगे, लेकिन पहले तस्वीर के अन्य पहलुओं पर भी ध्यान देना आवश्यक है। संकेत के ट्वीट वाली तस्वीर में बैकग्राउंड में ‘लाल और पीले’ रंग के थीम वाला एक चैनल टीवी पर दिख रहा है। जब हमने सॉल्टन्यूज के पंचरछाप जुबैर से इस बाबत बात की तो उन्होंने ‘सुलेशन’ से चिप्पी साटने के बाद वॉल्व पर थूक लगा कर हवा के बुलबुले चेक करते हुए हमसे कहा:

“देखिए अजीत जी, यूँ तो मैं संघियों की मदद नहीं करता, लेकिन बोहनी के टाइम में आपने अपने सायकिल बनवाई है तो मना भी नहीं कर सकता। मैंने अपने गंजे दोस्त के अर्धगोलाकार एंटेना पर इस तस्वीर का प्रिंट आउट रख कर पता किया तो सीधा नासा से कनेक्ट हुए। फिर वहाँ से डाउनलोड की हुई जानकारी में पता चला कि चूँकि रंग लाल और पीला है, तो धुँधला होने के बाद भी इसे ‘रिपब्लिक टीवी’ का ही माना जाए।”

मैंने दस रूपया पंचर के, और ढाई रुपया सर्विस के देने के बाद जुबैर को धन्यवाद कहा और आगे के शोध हेतु निकल गया। संकेत जी से भी संपर्क करने की कोशिश की मैंने लेकिन उन्होंने सीधे जवाब देने से मना कर दिया। हालाँक, उन्होंने कहा कि अगर मैं उनका शो आधे घंटे देख लूँ तो वो असली बात ‘ऑफ दी रिकॉर्ड’ बताएँगे।

राष्ट्रवाद के लिए जब मैंने अपने अखंड सिंगलत्व को बरकरार रखा हुआ है तो वामपंथी चैनल का आधा घंटा भी सह लेंगे थोड़ा… वीडियो कॉल पर उस आदमी ने मुझे अपना एक शो दिखाया दूसरे मोबाइल पर चला कर और तब मेरी विवशता पर आनंद लेने के बाद बोला:

“देखिए भारती जी, यह तो किसी से छुपा नहीं है कि कम्पनी की हालत ठीक नहीं है। कोरोना के समय में सैलरी भी कटी है, लोग भी गए हैं। ऐसे में अगर ₹500 कहीं से आ रहा है, तो क्या समस्या है। चाय-नाश्ते का तो प्रबंध हो जाएगा कम से कम… है कि नहीं।”

मुझे भी लगा कि बात तो सही है, अगर प्रैक्टिकली देखा जाए तो। ये लोग कई तरह से परेशान हैं फंडिंग को ले कर। वामपंथी चैनलों, पोर्टलों को वैसे भी दर्शकों और पाठकों ने नकार दिया है, रही-सही कसर NGO के बंद होने से पूरी हो गई। फिर कोरोना हो गया। तब ऐसे में मुझे महान क्रिकेट कमेंटेटर अरुण लाल जी की कालजयी पंक्तियों का सहसा ही स्मरण हो उठता है कि ‘रन चाहे बाय से बनें, या लेग बाय से, रन तो रन होते हैं’।

फिर मैंने अन्य तस्वीरों पर गौर किया तो पाया कि वो किसी और व्यक्ति से भी बातचीत करने में व्यस्त हैं। फिर गुप्त सूत्रों ने बताया कि वहाँ पर भी दूसरे व्यक्ति को यही समझाया जा रहा है कि वो भी रिपब्लिक को दिन भर देखा करे। कथित तौर पर वह व्यक्ति संकेत से कह रहा है, “अरे पता चल जाएगा तो नौकरी चली जाएगी यार!” लेकिन संकेत ने इसका भी उपाय सुझाया, “अरे, कमप्टीशन में क्या चल रहा है ये देखना भी जरूरी होता है। यही बोल देना अगर कोई पूछे तो।”

साभार: संकेत जी की ट्विटर फीड से

मैंने फिर संकेत से बातों-बातों में, एकदम कैजुअली, ताकि संदेह न हो, पूछा लिया, “लेकिन यार, ऐसी तस्वीरें ट्विटर पर कौन डालता है। अब देखो ऑपइंडिया में बैठा हुआ कोई आदमी मजे ले लेगा।” तब संकेत ने जो बात कही वो सीधे मेरे दिल को छू गई। सिंगल आदमी की समस्या ये है कि उसको कोई भी बात दिल को छू जाती है। खैर, निजी विषयों पर विलाप करने से अच्छा है कि मैं आपको वो बात बताऊँ।

“देखिए अजीत जी, रिपब्लिक वालों ने पैसे तो दे दिए, लेकिन उन्हें पता कैसे चलेगा कि मैं क्या देख रहा हूँ? आजकल तो ऑनलाइन का जमाना है, पैसे भी ऑनलाइन आते हैं, तो सबूत भी वैसे ही जाएगा। जान-बूझ कर मैंने इतना ही ब्लर किया है कि पता चल भी जाए, और न भी चले। मतलब, समझने वाले समझ गए, जो न समझें वो अनाड़ी हैं। जिसको देखना है, वो देख लेगा और अगले महीने का इंतजाम कर देगा। समझ रहे हैं बात?”

मैं तो सारी बात समझ ही गया था। अब मैंने प्रणय रॉय वाली मीटिंग के बारे में सूचना इकट्ठा करना शुरु किया।

क्या हुआ एडिटोरियल बोर्ड मीटिंग में

जब गुप्त सूत्र से बात की तो उसने कहा कि डेढ़ सौ रुपए लेगा। मोल-भाव के बाद बात कुल दौ सौ पर तय हुई क्योंकि मेरे पास पाँच सौ के ही नोट थे और दो हजार मैं देना नहीं चाहता था। उसने बताया कि मीटिंग में रवीश जी सबसे ज्यादा भड़के हुए थे। उन्होंने अपनी बात रखी, “एक मैं हूँ जो फेसबुक लाइव में भी सीरियस चेहरा लिए रहता हूँ। कैरेक्टर में इतना घुसा हुआ हूँ कि छः साल से मेरे लिए तो आपातकाल ही चल रहा है इस देश में।”

“ऐसे में कोई आदमी ट्विटर पर मुस्कुराती तस्वीर डाल दे तो क्या इज्जत रह जाएगी ब्रांड की? मैं तो ट्विटर पर हूँ भी नहीं, किसी ने लोक पत्र संभाग में मुझे पूछा कि ‘रवीश जी, आपके संस्थान के लोग गंभीर नहीं हैं देश की स्थिति को ले कर’। अब बताइए कि मैं क्या जवाब दूँ उस आदमी को? उसने हैशटैग भी लगाया कि ‘रवीश जी, आपसे उम्मीद है।’ यहाँ आदमी उम्मीद लगाए बैठा है और वहाँ रिपब्लिक देखी जा रही है। मेरा प्राइम टाइम तो यूट्यूब पर भी आता है, उसको क्यों नहीं देखा जाता?”

प्रणय रॉय भी खासे चिढ़े हुए दिखे क्योंकि ब्रांड के नाम पर अब नाम ही बचा है NDTV का। वो भी किसी दिन योगी जी का दिमाग फिरा तो कहा देंगे कि ‘आज से तुम्हारे चैनल का नाम R&D TV होगा।’ कुछ लोग तो ऐसा ही मिलता जुलता नाम सोशल मीडिया पर इस्तेमाल भी करते हैं, ऐसा रवीश जी ने मीटिंग में ध्यान दिलाया। प्रणय रॉय ने संकेत से कहा कि आइंदा ऐसी गलती न हो तो बेहतर है।

ऑपइंडिया की राय

जब मैंने ऑपइंडिया हिन्दी के एडिटर अजीत भारती से बात की, जो कि स्वयं मैं ही हूँ, तो उन्होंने कहा, “एक तरफ तो ये लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दुहाई देते हैं, वहीं इस तरह के गैग ऑर्डर लगाए जाते हैं कि किसको क्या देखना है, क्या नहीं। हो सकता है कि संकेत के लंच का टाइम हो और वो अपना मनपसंद चैनल देख रहा हो। क्या हमने यह जानने की कोशिश की? चाणक्य भी कार्यालय के समय में काम का तेल इस्तेमाल करते थे, और निजी कार्यों के लिए निजी। तो संकेत पर इस तरह की मीटिंग और कारण बताओ नोटिस का क्या औचित्य है?”

देखा जाए तो ये सब होना नहीं चाहिए। संकेत भी एहतियात बरत सकते थे अगर रिपब्लिक वालों को ₹500 के लिए सबूत भेजने थे तो। व्हाट्सएप्प पर वीडियो कॉल हो सकता था। कई तरीके हैं आज के दौर में। ये बात और है कि NDTV के पत्रकारों को इंटरनेट रिचार्ज कराने में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हो। वो कोई फेसबुकिया जानेमन टाइप के तो लोग हैं नहीं कि कोई ‘शोना बाबू’ एक महीने का रिचार्ज डलवा देगा राते के बारह बजे।

बेटियों को आश्वासन देता हूँ, शादी की सही उम्र पर सरकार जल्द ही निर्णय लेगी: PM मोदी

आज खाद्य एवं कृषि संगठन (Food & Agriculture Organisation) की 75वीं सालगिरह है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को सम्बोधित करते हुए कई अहम बातें भी कहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष का नोबल पुरस्कार विश्व खाद्य कार्यक्रम (World Food Programme) को मिलना बड़ी बात है।

इसके अलावा, PM मोदी ने लड़कियों की शादी की सही उम्र तय करने को लेकर जल्द किसी नतीजे पर पहुँचने की बात भी रखी। गौरतलब है कि इसके संकेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी वर्ष स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से देश के नाम अपने संबोधन में भी दिए थे। किसानों और न्यूनतम समर्थन के महत्व को लेकर भी प्रधानमंत्री मोदी ने अपने विचार रखे।   

PM मोदी ने शुक्रवार सुबह 11 बजे 75 रुपए के स्मारक सिक्के (Commemorative Coin) को लॉन्च करते हुए हाल ही में विकसित की गई 8 फसलों की 17 जैव संवर्धित किस्मों को भी राष्ट्र को समर्पित किया।

‘बेटियों की शादी की उचित उम्र पर चर्चा चल रही है’

अपने सम्बोधन में PM मोदी ने कहा, “लड़कियों के विवाह की सही उम्र तय करने के मुद्दे पर चर्चा जारी है। पूरे देश की बेटियाँ मुझसे इस सम्बंध में लिख कर पूछती हैं कि समिति ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई ठोस निर्णय क्यों नहीं लिया। मैं उन्हें आश्वस्त कहना चाहता हूँ कि जैसे ही इस मामले पर स्पष्ट रिपोर्ट आ जाएगी सरकार ठीक उस वक्त इस पर फैसला लेगी।”    

प्रधानमंत्री मोदी ने इसी वर्ष 74वें स्वाधीनता दिवस के मौके पर देश को संबोधित करते हुए महिलाओं से संबंधित कई मुद्दों की चर्चा की थी। उन्होंने कहा था कि बेटियों में कुपोषण खत्‍म हो, उनकी शादी की सही आयु क्‍या हो, इसके लिए हमने कमेटी बनाई है। उसकी रिपोर्ट आते ही बेटियों की शादी की उम्र के बारे में भी उचित फैसले लिए जाएँगे।

वर्तमान में देश में लड़कियों की शादी के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष आँकी गई है, जबकि लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित की गई है। विभिन्न महिला-केंद्रित संगठन और महिला अधिकार कार्यकर्ता माँग करते आए हैं कि लड़कियों की शादी करने के लिए न्यूनतम आयु को शादी से पहले उनकी उच्च शिक्षा पूरी करने में मदद करने के लिए बढ़ाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने भाषण में कहा कि देश भर से बेटियाँ उनसे पूछती हैं कि संबंधित समिति ने अभी तक इस विषय पर अपना निर्णय क्यों नहीं लिया है?

भाषण की प्रमुख बातें

  1. इस साल का नोबल पुरस्कार विश्व खाद्य कार्यक्रम (World Food Programme) को मिलना उल्लेखनीय बात है। भारत इस बात पर बेहद खुश है कि हमारे सहयोग और सहभागिता ने इसे असल मायनों में ऐतिहासिक बनाया।
  2. भारत के हमारे किसान साथी- हमारे अन्नदाता, हमारे कृषि वैज्ञानिक, हमारे आँगनबाड़ी-आशा कार्यकर्ता, कुपोषण के खिलाफ आंदोलन का आधार हैं। इन सभी के प्रयासों से ही भारत कोरोना के इस संकटकाल में भी कुपोषण के खिलाफ मजबूत लड़ाई लड़ रहा है।
  3. भारत में पोषण अभियान को ताकत देने वाला एक और अहम कदम आज उठाया गया है। आज गेहूँ और धान सहित अनेक फसलों के 17 नए बीजों की वैरायटी, देश के किसानों को उपलब्ध कराई जा रही हैं।
  4. पूरे विश्व में कोरोना संकट के दौरान भुखमरी-कुपोषण को लेकर अनेक तरह की चर्चा हो रही हैं। भारत पिछले 7-8 महीनों से लगभग 80 करोड़ गरीबों को मुफ्त राशन उपलब्ध करा रहा है। इस दौरान भारत ने करीब-करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए का खाद्यान्न गरीबों को मुफ्त बाँटा है।
  5. वर्ष 2023 को International Year of Millets घोषित करने के प्रस्ताव के पीछे भी कुछ इसी तरह की भावना है। इससे भारत ही नहीं विश्व भर को दो बड़े फायदे होंगे, पहला तो पौष्टिक आहार प्रोत्साहित होंगे, उनकी उपलब्धता और बढ़ेगी। और दूसरा- जो छोटे किसान होते हैं, जिनके पास कम जमीन होती है, उन्हें बहुत लाभ होगा।
  6. किसानों को लागत का डेढ़ गुणा दाम MSP के रूप में मिले, इसके लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। MSP और सरकारी खरीद, देश की फ़ूड सिक्योरिटी का अहम हिस्सा हैं। इसलिए इनका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन और ये आगे भी जारी रहें ये बहुत आवश्यक है और हम इसके लिए प्रतिबद्ध हैं।

हाथरस: खेत में पड़ी चीख रही थी पीड़िता.. माँ-भाई वहीं पर खड़े थे, चश्मदीद का खुलासा

हाथरस मामले में हर दिन सामने आ रहे नए खुलासों और देशव्यापी आक्रोश के बीच इसकी जाँच प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। अब इस घटनाक्रम में विक्रम सिंह नाम के व्यक्ति का बयान सामने आया है। विक्रम सिंह का दावा है कि वो घटना के दौरान घटनास्थल पर ही मौजूद थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, जिस खेत में पीड़िता मिली थी वह खेत इस चश्मदीद का ही है। अपने बयान में विक्रम सिंह ने कहा है कि जब वह वहाँ पहुँचे, उस समय लड़की ज़मीन पर पड़ी हुई थी और उसकी माँ और भाई वहीं पर खड़े थे। 

आज तक में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़, जिस खेत में पीड़िता गम्भीर हालात में मिली, उस खेत के मालिक विक्रम सिंह ही हैं। उन्होंने बताया कि 14 सितंबर की सुबह वह अपने खेत में चारा काट रहे थे, तभी उन्होंने एक लड़की को चीखते हुए सुना। मौके पर पहुँचते हुए उन्होंने देखा कि उनके खेत में एक लड़की गम्भीर अवस्था में पड़ी हुई थी। ठीक वहीं पर पीड़िता का बड़ा भाई और उसकी माँ भी खड़े थे। 

घटना के चश्मदीद विक्रम ने बताया कि वह पीड़िता की स्थिति देख कर घबरा गए जिसके बाद वो लव कुश और उसकी माँ को इस घटना के बार में बताने के लिए नज़दीक के खेत तक गए। इसके बाद उन्होंने दोनों से घटनास्थल पर चलने के लिए भी कहा लेकिन जब तक वह अपने खेत में वापस पहुँचे, तब तक पीड़िता का भाई घटनास्थल पर मौजूद नहीं था। विक्रम ने देखा कि पीड़िता उसके खेत में ही पड़ी थी और उसकी माँ नज़दीक ही खड़ी थी। विक्रम का कहना है कि वह कुछ समझ पाते, इसके पहले पीड़िता की माँ ने उनसे कहा, “जाओ मेरे बेटे को बुला कर लाओ।”

विक्रम पीड़िता के घर गए और उन्होंने पीड़िता के भाई से कहा, “जल्दी चलो तुम्हारी बहन की हालत गम्भीर है।” इसके जवाब पीड़िता के भाई ने कहा, “जब वहाँ पर 5-6 लोग आ जाएँगे तब मैं भी वहाँ पहुँच जाऊँगा।”

अंत में विक्रम सिंह ने इस बात की जानकारी भी दी कि इतना होने के बाद वह अपने घर गए और उन्होंने घर वालों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। वहाँ कई और लोग मौजूद थे जिसके बाद घटनास्थल पर गाँव वालों की भीड़ इकट्ठा हुई। गौरतलब है कि इस मामले पर भारी विवाद होने के बाद फ़िलहाल सीबीआई इस मामले की जाँच कर रही है।         

कॉन्ग्रेस नेता व महाराष्ट्र सरकार में मंत्री को 3 महीने का सश्रम कारावास, 8 साल पहले पुलिसकर्मी से की थी मारपीट

बृहस्पतिवार (अक्टूबर 15, 2020) को एक स्थानीय अदालत ने महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और कॉन्ग्रेस नेत्री यशोमती ठाकुर को 3 महीने के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह सजा 8 साल पुराने मामले को लेकर हुई है। दरअसल, महाराष्ट्र की मंत्री यशोमति ठाकुर को आठ साल पहले एक पुलिसकर्मी को पीटने के जुर्म में यह सजा सुनाई गई है। इसके अलावा, अदालत ने यशोमती ठाकुर पर 15,500 रुपए का आर्थिक दंड भी लगाया है। 

जिला और सत्र न्यायालय ने इस मामले में यशोमति ठाकुर के अलावा, 3 अन्य लोगों को अपराधी घोषित किया है। इसमें महिला एवं बाल विकास मंत्री का वाहन चालाक भी शामिल है जिसे 3 माह के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई। जिला और सत्र न्यायालय की न्यायाधीश उर्मिला जोशी ने इस मामले में सज़ा सुनाई है। 

अदालत ने यह भी कहा कि अगर मंत्री और कॉन्ग्रेस नेत्री यशोमती ठाकुर यह आर्थिक दंड नहीं देती हैं तो उन्हें एक और महीने जेल की सज़ा काटनी होगी। यशोमती ठाकुर और उनके वाहन चालक पर एक पुलिस वाले के साथ मारपीट करने का आरोप लगा था। इनकी गाड़ी वन-वे लेन पर चल रही थी जिसे एक पुलिसकर्मी ने रोका था। इसके बाद उन्होंने पुलिसकर्मी के साथ मारपीट की थी।  यह घटना मार्च 12, 2012 को शाम 4:15 बजे अमरावती जिले के राजापेठ पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले चूनाभट्टी क्षेत्र में हुई थी।      

इसके पहले भी यशोमती ठाकुर पुलिस वालों के सामने अपनी दबंगई का नमूना पेश कर चुकी हैं। यह दूसरी घटना जुलाई 19, 2019 की है जब वह सेंट जॉर्ज अस्पताल पहुँची थीं। दरअसल, वहाँ कॉन्ग्रेस विधायक श्रीमंत पाटिल का इलाज चल रहा है, उन्हीं से मिलने वो वहाँ पहुँची थी। इस दौरान वो वहाँ पुलिस से भिड़ गईं और उनसे काफ़ी कहासुनी हो गई। 

इस घटना का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वो काफ़ी तल्ख़ अंदाज़ में दिख रही थीं। इस वीडियो में वो पुलिस व डॉक्टर्स के साथ अपशब्द बोलती साफ़ नज़र आ रही थीं। अस्पताल की शांति को तार-तार करते हुए उन्होंने कई पुलिसकर्मियों के साथ ऊँची आवाज़ में बात तो की ही साथ वहाँ मौजूद महिला पुलिसकर्मियों को भी खरी-खोटी सुनाई।