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असहमति = मॉब अटैक = भीड़ का हमला: Tanishq पर चलाई फर्जी ब्रेकिंग खबर के बचाव में NDTV ने बदल डाली डिक्शनरी मीनिंग

Tanishq के विज्ञापन को लेकर जारी विवाद को फेक न्यूज़ फैलाने का एक और मौका समझते हुए हिन्दू घृणा से सने प्रोपेगेंडा समाचार चैनल NDTV ने दावा किया कि कुछ लोगों ने गुजरात गाँधीधाम में तनिष्क के एक शोरूम पर हमला किया है। अब फर्जीवाड़े के बचाव में NDTV के कर्मचारी वाहियात तर्क देकर इसे सही साबित करने का प्रयास करते हुए भी देखे जा रहे हैं।

NDTV के मुताबिक, हमलावरों की भीड़ ने कथित तौर पर स्टोर मैनेजर को माफी पत्र लिखने के लिए कहा था। लेकिन वास्तव में, यह पूरी तरह से एक फेक न्यूज़ थी और पुलिस ने ऐसी किसी भी घटना से साफ़ इंकार किया।

अब NDTV अपने द्वारा चलाई गई इस फेक न्यूज़ पर सफाई देता नजर आ रहा है और इसके लिए उसने ‘हमला’ और ‘मतभेद’ जैसे शब्दों की परिभाषा तक बदल डाली है। जैसे ही NDTV के झूठ से पर्दा उठा, NDTV ने अपनी वेबसाइट पर मौजूद अपनी रिपोर्ट बदल दी कि तनिष्क स्टोर को ‘निशाना बनाया गया’ था, लेकिन ‘हमला’ नहीं किया गया।

कहानी यहीं पर समाप्त नहीं होती। अपने इस फर्जीवाड़े के खंडन होने के बाद भी, एनडीटीवी और उसके पत्रकारों ने अपने दावे पर अपना बचाव जारी रखा है कि तनिष्क स्टोर पर ‘भीड़ द्वारा हमला’ किया गया था, भले ही इस दावे के बाद उन्होंने कई बार अपनी रिपोर्ट बदल दी है।

NDTV के एक एंकर, संकेत उपाध्याय ने NDTV की फेक रिपोर्ट्स का बचाव करते हुए कहा कि गुजरात पुलिस ने वास्तव में स्वीकार किया है कि तनिष्क स्टोर को ‘धमकी’ दी गई थी। उन्होंने कहा कि कथित धमकियों के परिणामस्वरूप, प्रबंधक को एक माफीनामा लिखना पड़ा।

फेक न्यूज़ फैलाने के अपने हुनर और इसके बचाव के कुत्सित प्रयास में इसे तनिष्क स्टोर पर ‘भीड़ द्वारा हमला’ साबित करने के लिए साकेत उपाध्याय ने ’हमला’ शब्द का अर्थ ही बदल दिया। NDTV के एंकर संकेत उपाध्याय ने एक ट्वीट के जरिए समझाने का प्रयास किया है कि ‘हमला’ करने का अर्थ ‘कटु आलोचना’ या ‘किसी से सहमत ना होना’ होता है।

संकेत उपाध्याय ने दावा किया कि NDTV ने ‘भीड़ द्वारा हमला’ शब्द का इस्तेमाल किया था, क्योंकि डिक्शनरी के अनुसार, शब्द ‘अटैक’ का अर्थ है- “दृढ़ता से यह कहना कि आप किसी के साथ सहमत नहीं हैं।”

वास्तव में NDTV कुछ और नहीं बल्कि ‘असहमति’ को ‘भीड़ द्वारा किया गया हमला’ साबित करना चाहता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी को NDTV द्वारा फर्जी समाचार दिलाया जाना नापसंद हो और वे NDTV से इसके लिए माफ़ी माँगने को कहे, तो NDTV के एंकर की समझ के अनुसार, NDTV चैनल इस बात को ‘भीड़ द्वारा किया गया हमला’ के रूप में पेश करने के लिए स्वतंत्र हैं।

NDTV ने तनिष्क स्टोर पर ‘मॉब अटैक’ की चलाई थी फेक न्यूज़

NDTV की रिपोर्ट में कहा गया था कि गुजरात के गाँधीधाम में तनिष्क स्टोर पर हमला हुआ है। हमला होने के बाद स्टोर मैनेजर के माफी पत्र में कथित तौर पर सेक्युलर विज्ञापन प्रसारित करके हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने के लिए कच्छ जिले के लोगों से माफी माँगवाई गई।

गौरतलब है कि गुजरात के गृहमंत्री ने भी NDTV का खंडन करते हुए कहा, “NDTV द्वारा गाँधीधाम (गुजरात) के तनिष्क स्टोर पर हमले की फैलाई गई खबरें पूर्णतः झूठ और फ़र्ज़ी हैं। यह बिलकुल ही गलत मंशा से गुजरात में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और हिंसा भड़काने के उद्देश्य से किया गया कार्य है। मैंने इन लोगों पर मामला दर्ज करने को कहा है और फेक न्यूज चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं।”

Tanishq का विवादित वीडियो

तनिष्क के विज्ञापन में एक हिंदू महिला की गोदभराई की रस्म को दिखाया गया था। इस लड़की की शादी मुस्लिम परिवार में हुई थी। इसमें हिंदू संस्कृति को ध्यान में रखते हुए मुस्लिम परिवार सभी रस्मों रिवाजों को हिंदू धर्म के हिसाब से करता दिखाया गया था। 

विज्ञापन को लव जिहाद को बढ़ावा देने के आरोप लगने और सोशल मीडिया पर तनिष्क के बहिष्कार की अपीलों के बाद कंपनी ने विज्ञापन को वापस ले लिया। कुछ इसी तरह का विवाद होली के दौरान सर्फ एक्सेल के एक विज्ञापन को लेकर भी हुआ था।

हिमालया ड्रग कंपनी के मालिक दे रहे भारत विरोधी बयान? क्यों हो रहा ये वीडियो इतना वायरल? – फैक्ट चेक

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सऐप पर एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है। मैसेज में यह प्रसारित किया जा रहा है कि हिमालया ड्रग कंपनी के मालिक मुहम्मद मनल ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर भारत विरोधी मैसेज पोस्ट किया है। वायरल वीडियो में एक आदमी को मुस्लिम युवाओं को भारत के परिप्रेक्ष्य को अपने पक्ष में बदलने के लिए उकसाते हुए सुना जा सकता है।

मुहम्मद मनल ने 1930 में हिमालया ड्रग कंपनी की स्थापना की थी। इसका मुख्यालय कर्नाटक के बेंगलुरु में स्थित है। कंपनी मुख्य रूप से स्वास्थ्य देखभाल उत्पादों का उत्पादन करती है, जिसमें आयुर्वेदिक सामग्री पर आधारित कई उत्पाद शामिल हैं। इसके उत्पाद न केवल भारत में बल्कि संयुक्त राज्य अमेरिका, मिडिल ईस्ट और दुनिया के अन्य हिस्सों में भी लोकप्रिय हैं। कंपनी वर्तमान में 106 से अधिक देशों में अपने प्रॉडक्ट बेचती है। बता दें कि 1955 में इंट्रोड्यूस किया गया हिमालया प्रोडक्ट लिव-52 (जो लिवर की बीमारियों के लिए है) कंपनी के प्रसिद्ध दवाइयों में से एक है।

वायरल मैसेज की मानें तो वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति हिमालया ड्रग कंपनी का मालिक और संस्थापक मुहम्मद मनल है। उस तरह से देखा जाए तो वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति कम से कम सौ साल का होना चाहिए क्योंकि कंपनी की स्थापना 1930 में हुई थी। लेकिन तथ्य यह है कि कंपनी के मालिक मनल का 1986 में निधन हो गया है, इसलिए वीडियो में मौजूद व्यक्ति वो नहीं हो सकते।

गौरतलब है कि हिमालया ने 14 अक्टूबर को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर एक मैसेज पोस्ट करते हुए आगाह किया था कि कंपनी के बारे में नकली और मनगढ़ंत कई फर्जी सोशल मीडिया पोस्ट और मैसेज व्हाट्सएप फॉरवर्ड किए जा रहे हैं। कंपनी ने चेतावनी भी दी थी कि जिसने भी किसी भी प्रकार का फर्जी पोस्ट या मैसेज फॉरवर्ड किया है, उसे तुरंत हटा दे वरना उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह पहली बार नहीं है जब हिमालया ड्रग कंपनी इस तरह के मुद्दे का सामना कर रही है। मार्च 2020 में भी सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर इसी तरह के संदेश प्रसारित किए जा रहे थे। कई ऐसे मैसेज वायरल हुए थे, जिनमें यह बताया जा रहा था कि कंपनी आतंकवादियों को फंडिंग करती है। साथ ही पोस्ट में हिमालया ड्रग कंपनी के प्रेसिडेंट और सीईओ फिलीप हेयडन की फ़ोटो को भी निशाना बनाया गया था। पोस्ट में यह उल्लेख किया गया था कि तस्वीर में दिख रहा व्यक्ति कंपनी का संस्थापक एम मनल है।

उस समय भी कंपनी ने एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया था कि सोशल मीडिया पर हिमालया के खिलाफ सभी पोस्ट फर्जी हैं। कंपनी ने आगे कहा था कि हिमालया ड्रग कंपनी स्वतंत्रता से पहले की “मेड इन इंडिया” वेलनेस ब्रांड है, जो “हीलिंग” धर्म का अनुसरण करती है।

कंपनी की वेबसाइट पर अगर सर्च किया जाए तो यह पता चलेगा कि वीडियो में मौजूद व्यक्ति एम मनल नहीं है। वास्तव में इस कंपनी के संस्थापक का 1986 में, लगभग 35 साल पहले निधन हो गया था। इसलिए हम इस बात का पता लगा रहे हैं कि आखिर वीडियो में मौजूद व्यक्ति कौन है।

गूगल की रिवर्स इमेज से की गई छोटी सी सर्च से यह पता लगा कि वीडियो में मौजूद शख्स सऊदी अरब में रहने वाला एक व्यक्ति है, जिसका नाम नाकी अहमद नादवी है। फेसबुक पेज पर उसकी वेबसाइट का लिंक था, लेकिन वेबसाइट पर उसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी। यह केवल डिफ़ॉल्ट पेज था, जिसे इस साल मई में बनाया गया था।

उसका फेसबुक पेज 22 अगस्त 2020 को बनाया गया था। वह अक्सर इस्लाम को सर्वोच्च बताते हुए कंटेंट पोस्ट करता है और चाहता है कि इस्लामिया उम्माह इस दुनिया पर राज करे।

‘हिमालया ड्रग कंपनी के संस्थापक’ द्वारा एक बयान के रूप में प्रसारित किया जा रहा वायरल वीडियो अगस्त 2020 में राम मंदिर भूमि पूजन के बाद उसके फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट किया गया था।

https://m.facebook.com/105822587910985/videos/228728968466676/?locale2=en_GB

इसके अलावा हमें एक ही नाम और तस्वीरों के साथ दो ट्विटर अकाउंट भी मिले। एक को 2014 में बनाया गया था, जबकि दूसरा 2020 में बनाया गया था।

उसके पुराने ट्विटर अकाउंट के अनुसार, लोकेशन में दिल्ली भारत का उल्लेख था। वहीं नए एकाउंट में लोकेशन रियाद, सऊदी अरब में बताया गया। वह वर्तमान में सऊदी अरब माइनिंग कंपनी – माडेन में एक प्रशासक के रूप में काम कर रहा है।

उसका एक Youtube चैनल भी है, जो दिसंबर 2019 में बनाया गया था। अपने पहले कुछ वीडियो में इस शख्स ने NRC, CAA और अन्य मुद्दों के बारे में गलत बयान दिए थे, जो उस अवधि के दौरान चर्चा में थे। लगभग दो महीने पहले उसने सीएए विरोध में हुए दंगों के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए शरजील इमाम, डॉ. कफील और अन्य के पक्ष में एक वीडियो भी पोस्ट किया था।

प्यार में फाँस कर रेप के बाद निकाह… फिर छोड़ कर सऊदी अरब, अंजना से आएशा बनीं लेकिन मिली मौत

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित विधानसभा के सामने एक महिला (पहले नाम अंजना तिवारी, बाद में आएशा रज़ा) ने आत्मदाह का प्रयास किया था। इस घटना में उसका शरीर 90 फ़ीसदी तक झुलस गया था, अब उस महिला की मृत्यु हो गई है। इस मामले में कॉन्ग्रेस के अनुसूचित प्रकोष्ठ के चेयरमैन आलोक कुमार के विरुद्ध आत्मदाह करने के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया गया।

ज़ी न्यूज़ में प्रकाशित ख़बर के अनुसार पूरा घटनाक्रम लव जिहाद का बताया गया। 8 अक्टूबर को यह घटना सबसे पहले सामने आई, जब महाराजगंज की निवासी महिला ने डीआईजी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उसने कहा था कि महाराजगंज के कॉन्ग्रेस नेता आलोक कुमार ने आत्मदाह के लिए उकसाया था।

इसके अलावा उसने अपनी शिकायत में लिखा था कि साल 2012 में उसकी (अंजना तिवारी की) शादी एक युवक से हुई थी। युवक नशे का आदी था, इसलिए साल 2015 में दोनों का रिश्ता टूट गया था। इसके बाद महिला ने अपनी बहन के साथ एक दुकान पर काम करना शुरू कर दिया, तभी उसकी आसिफ रज़ा नाम के युवक से बात शुरू हुई।  

35 वर्षीय महिला (पहले नाम अंजना तिवारी, बाद में आएशा रज़ा) ने आसिफ नाम के युवक से निकाह किया था। लेकिन इस निकाह के पहले की कहानी रोचक है। स्थानीय मीडिया और जी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार निकाह से पहले आसिफ ने अंजना के साथ काफी समय तक दुष्कर्म (निकाह के नाम पर) किया था। इतना ही नहीं, निकाह के बाद आसिफ सऊदी अरब चला गया और फिर आसिफ के परिजन आएशा (निकाह के बाद अंजना का नाम) को प्रताड़ित करने लगे थे।

अन्य स्थानीय मीडिया पोर्टलों पर प्रकाशित खबर के अनुसार आसिफ ने मूल रूप से झारखंड की रहने वाली अंजना तिवारी को बहला फुसला कर अपने प्रेम जाल में फँसाया। फिर शादी का झाँसा देकर उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। महिला ने इस तरह के तमाम अत्याचार झेलने के बाद पुलिस से शिकायत की, फिर आसिफ ने मौलवी बुला कर निकाह रचा लिया।

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर

दोनों का निकाह तो हो गया लेकिन इसके बाद आसिफ के परिवार वालों ने महिला (आएशा) को स्वीकार करने से मना कर दिया और फिर वह महाराजगंज में ही किराए का घर लेकर महिला के साथ रहने लगा। इसके कुछ समय बाद आसिफ दुबई चला गया और वहाँ से महिला पर धर्म परिवर्तन का दबाव (निकाह हुआ था, नाम भी बदल गया था, शायद यह दबाव धार्मिक रहन-सहन को लेकर हुआ होगा) बनाने लगा। 

आसिफ ने लगातार धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया और महिला के नकारने पर पहले बात करना बंद किया और अंत में आर्थिक मदद भी बंद कर दिया। इसके बाद वह अपने ससुराल पहुँची लेकिन वहाँ भी आसिफ के परिजनों ने उसके साथ मारपीट की और प्रताड़ित किया। इतना ही नहीं, आसिफ के परिजनों ने भी महिला पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। उन्होंने भी महिला को अंजना तिवारी से आएशा रज़ा/आएशा बेगम बनने की बात कही। इन तमाम बातों से क्षुब्ध होकर उसने यह कदम उठाया।       

उत्तर प्रदेश में विधानसभा के सामने ही अंजना तिवारी ने खुद के शरीर में आग लगा कर आत्मदाह का प्रयास किया था। महिला ने जैसे ही खुद को आग लगाई, पुलिस ने पहुँच कर उसे बचाया और अस्पताल ले जाया गया। हालाँकि चिकित्सकों ने पहले ही महिला की स्थिति को गम्भीर बता दिया था। बुधवार (14 अक्टूबर 2020) से महिला की स्थिति बिगड़नी शुरू हो गई थी। अब उसकी मृत्यु की सूचना महाराजगंज और गोरखपुर पुलिस को भी दी जा चुकी है।

लड़की की जगह बिस्तर पर देखने वाले… मुस्लिम परिवार में हिन्दू बहू को खुश नहीं देख सकते: आरफा को लोगों ने याद दिलाई कु#न

तनिष्क ज्वैलरी के विवादित वीडियो ‘तनिष्क एकत्वम’ के चर्चा में आने, उस पर हुए विवाद के होने और उसके नाम पर NDTV द्वारा चलाई जा रही ‘साम्प्रदायिक फेक न्यूज़’ की भरपाई में अब पूरी लिबरल जमात जुट गई है। इस भरपाई के लिए मोर्चा संभालने वालों में एक नाम प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘दी वायर’ की कथित जर्नलिस्ट आरफ़ा खानम शेरवानी का भी है। लेकिन इस भरपाई के लिए आरफा खानम शेरवानी ने एकबार फिर हिन्दू-घृणा का मार्ग चुनना पसंद किया।

तनिष्क के वीडियो पर जारी विवाद के बीच आरफा खानम शेरवानी ने एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में आरफा खानम ने लिखा- “लड़की को माँ की कोख में मार देने वाले, दहेज के नाम पर ज़िंदा जला देने वाले, लड़की की ‘सही’ जगह रसोई व बिस्तर के परे न देख पाने वाले कैसे बर्दाश्त करेंगे, एक मुस्लिम घर में हिंदू बहू को प्यार-सम्मान मिले और उसकी पहचान भी सुरक्षित रह पाए। ये लड़कियों के, उनकी आज़ादी के दुश्मन हैं।”

आरफा खानम की कोशिश इस ट्वीट में हिन्दुओं के प्रति अपनी भड़ास निकालने की थी यह बात छुपी हुई नहीं है लेकिन उनके इस ट्वीट पर कुछ लोगों ने उन्हें याद दिलाया कि आरफा का यह ट्वीट तो खुद उन्हीं के मजहब यानी, इस्लाम पर हमला है।

PureWoke नाम के एक ट्विटर यूजर ने आरफा खानम के ट्वीट के जवाब में इस्लाम की पवित्र पुस्तक ‘कुरान’ की ही एक पंक्ति का स्क्रीनशॉट ट्वीट किया जिसमें इस्लाम के अनुयायियों को महिलाओं और उनकी सेक्सुएल्टी पर अधिकार के निर्देश दिए गए हैं –

इस्लाम की पाक किताब से ली गई इन पंक्तियों का हिंदी अर्थ कुछ इस तरह से है –

इसके अलावा, दुर्भाग्य से हिन्दुओं को निशाना बनाने के बजाय आरफा खानम का यह ट्वीट उनके ही खिलाफ जाता नजर आया और लोगों ने उन्हें याद दिलाया कि उनका यहाँ ट्वीट पूरी तरह से किसी धर्म के खिलाफ है। आरफा खानम शेरवानी लगातार इस पर सफाई देती नजर आ रही हैं कि उनका ऐसा विचार नहीं था।

इसी की सफाई में आरफा खानम ने लिखा, “पितृसत्ता को जब चोट लगती है तो वो धार्मिक बँटवारे का सहारा लेती है। ऊपर वाली ट्वीट किसी भी तरह हिंदू धर्म पर टिप्पणी नहीं है। बल्कि उस सोच पर है जो एक महिला को उसकी मर्ज़ी का जीवन जीने, जीवनसाथी चुनने के अधिकार से वंचित करती है, और महिला के शरीर व सेक्सुएलिटी पर क़ब्ज़ा चाहती है।”

हिन्दुओं को निशाना बनाकर लिखी गई इन बातों पर आरफा खानम लोगों को जवाब देती नजर आ रही हैं –

तनिष्क मामला: NDTV की फर्जी खबर और हलाला वाले घरों में ‘प्यार’ बँटवाती जहरवाली वामपंथन

प्राचीन लातीनी भाषा में एक कहावत है ‘दिल की सुर्ख दीवारों पे, नाम है तेरा-तेरा’। ये कहावत अर्वाचीन वामपंथने और वामपंथी छाती की बायीं तरफ टैटू बनवा के फील के साथ गुदवाए रहते हैं। वैसे इस कहावत या बात का आगे के लेख से वैसे ही कोई लेना-देना नहीं है जैसे कि वामपंथनों का स्त्री विमर्श से, और वामपंथियों का दलित विमर्श से। ऐसे ही सेस्की लग रहा था, तो बोल दिया।

तनिष्क वाला मामला शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा। पहले इन्होंने फर्जी की नौटंकी गढ़ी कि हिन्दू लड़कियों का तो बड़ा सम्मान हो रहा है मुस्लिम परिवार में, संस्कृत नाम भी रखा विज्ञापन का। उस संस्कृत शब्द का भी उस विज्ञापन से उतना ही मतलब था जितना पहले कहे गए कहावत का। इंटरनेट का दौर है, लोगों ने तहजीब की बत्ती बना कर टाटा समूह के तनिष्क को ससम्मान लौटा दी कि ‘रख लो, जहाँ उजाला नहीं होता’।

ऐसी तहजीब की बत्तियाँ ही बननी चाहिए। ऐसे समय में जबकि मुंबई में पावर कट हो रहा था, इन बत्तियों से थोड़ी रोशनी भी हो जाती। तो, जब तनिष्क के रचनात्मक कलाकारों को पता चला कि जो गेम इन्होंने खेला है, बूमरैंग कर के वहाँ धँस गया जहाँ न तो सबके सामने निकाल सकते, न छुपा सकते हैं। तब उन्होंने देर-सबेर एक ‘अपॉलजी’, यानी क्षमायाचना का बयान जारी कर दिया।

अब इस क्षमायाचना में यह समस्या है कि ये याचना कम और आरोप ज्यादा लग रहा है। ऊपर की लाइनों में तो क्षमाप्रार्थी टाइप की बातें हैं, लेकिन अंतिम पंक्ति में कह दिया कि अपने कर्मचारियों, सहयोगियों और स्टोर के स्टाफ के ‘वेल बीइंग’ को देखते हुए यह विज्ञापन हटा लिया गया है। अंग्रेजी तो इतनी मुझे आती है कि पूरा पन्ना पढ़ कर अर्थ समझ सकता हूँ, लेकिन अंतिम वाला हिस्सा समझ में नहीं आया।

वो इसलिए समझ में नहीं आया क्योंकि किसी व्यक्ति ने तो तनिष्क के किसी कर्मचारी, स्टोर स्टाफ आदि को न तो धमकी दी, न ही वैसा कोई इशारा किया। फिर तनिष्क ने ऐसा क्यों लिखा? लोगों ने तो बस ब्रांड का बहिष्कार किया था, इसमें ‘वेल बीइंग’ वाली बात कहाँ से आ गई?

थोड़ा रुकने पर यह समझ में आया कि ये लोग ऐसे नहीं मानते। अपनी गलती मानते हुए भी आरोप आप ही पर कि आगे ये लोग दंगा कर देंगे, हिंसा कर देंगे, इसलिए हमने हटाया वरना विज्ञापन में तो ऐसा कुछ है नहीं, जो नहीं समझे उन्हीं की गलती है। यह रणनीति ये गिरोह पहले भी अपना चुका है। होता कुछ है, ये लोग करते कुछ हैं, और आरोप किसी और बात का लगाया जाता है, इस आशा में कि ऐसा कुछ हो जाए।

शाम तक एक खबर आई कि गुजरात के गाँधीधाम के तनिष्क स्टोर पर एक भीड़ ने हमला कर दिया, जबरन मालिक से माफी लिखवाई और उसे स्टोर पर चिपकाने को कहा। NDTV ने इसमें अगली पंक्ति में खड़े हो कर, पूरे दृश्य को अपनी कोर्निया पर घटित होते देख कर, विस्तार से लिख दिया, चैनल पर चला दिया।

वामपंथी-वामपंथनें आहें भरने लगे कि हाय! हाय! तोड़ डाला, फोड़ा डाला… मेरी एक टाँग नकली है, मैं हॉकी का बहुत बड़ा खिलाड़ी था… इनकी स्क्रिप्ट तैयार ही थी, और जिस ‘हिंसा’ की तरफ तनिष्क की क्षमायाचना में इशारा था, NDTV ने उसको घटित होता दिखा दिया। भले ही, ये पूरी घटना उनके स्टूडियो में घटी हो।

फिर थोड़ी देर में, लोगों ने स्टोर के मैनेजर को फोन किया तो उसका वही रिएक्शन था जैसा कि गालिब का होता है जब हर टुटपुँजिया शेर उसी के नाम के साथ शेयर कर दिया जाता है: ये कब हुआ? मैनेजर ने कहा कि उसके स्टोर पर हमला भी हो गया, NDTV ने दिखा भी दिया, वीडियो भी बन गया है, लेकिन उसके पास वीडियो है नहीं। बेचारा मैनेजर कन्फ्यूज कि किसी ने उसको बताया क्यों नहीं!

बताते कैसे? जो हुआ ही नहीं, वो बताते कैसे! अब NDTV और गिरोह इस बात पर आया कि हमला नहीं हुआ, हमले की धमकी दी गई थी। फिर उसके एक एंकर हैं, जिन्होंने हो न हो, रवीशानंद इंटर कॉलेज से कॉमर्स की डिग्री ली होगी और फिर अखंड रवीशानंद महाविद्यालय से पत्रकारिता पढ़ी होगी, उन्होंने बताया कि ‘अटैक’ का मतलब होता है ‘कटु आलोचना’। लगता है NDTV वाले अपने शब्दकोश भी छापने लगे हैं, या फिर संजय राउत जी से इनकी ठीक-ठाक जान-पहचान है।

हो सकता है कि कल तक ये लोग यह भी न कहने लगें कि ‘बॉयकॉट तनिष्क’ का हैशटैग तनिष्क के कर्मचारियों को गरीब बना देगा। कई माओवंशी विचारकों ने सर्वसम्मत हो कर यह माना है कि गरीबी भी एक तरह की हिंसा ही है, (भले ही बंदूक से मारना हिंसा नहीं है), तो NDTV ने जो चलाया वो तकनीकी तैर पर बिलकुल सही है।

ऐसे में बनारसी लोग अपना एक विशेष संबोधन का प्रयोग करते हैं जो कि अंग्रेजी के बी, एस, डी और के को लगातार, बिना स्वर वर्णों के लिखने पर प्राप्त होता है। जैसे कि श्री अमिताभ बच्चन ने ‘पिंक’ में कहा था कि ‘मीलॉर्ड ‘नो’ शब्द अपने आप में एक पूरा वाक्य है, वैसे ही बनारस का उपरिलिखित शब्द, अपने आप में एक वाक्य ही नहीं, अनुच्छेद भी है अगर कहने वाले ने सही तरीके से अपनी भावनाएँ अपने टोन में प्रवाहित की हो। बिहार में ऐसे लोगों को पतितखंती कहा जाता है जो कि ‘पतित’ होने की उच्चतम अवस्था मानी गई है। इसको सड़क पर बोली जाने वाली भाषा में ‘थूक कर चाटना’, और चार दोस्तों के बीच ‘टट्टी खाना’ कह कर बताया जाता है।

वामपंथी-वामपंथनों का रोचक नृत्य

इसी संदर्भ में, फोटोशॉप से ऊपर वाले की मेहनत को नकारने वालों ने हिन्दुओं द्वारा इस विज्ञापन पर बहिष्कार पर लिखा कि जो लोग बच्चियों को गर्भ में मार देने वाले, दहेज के नाम पर जिंदा जला देने वाले, लड़की को रसोई और बिस्तर तक सीमित रखने वाले आखिर एक हिन्दू बहू को मुस्लिम परिवार में मिल रहे प्यार-सम्मान को कैसे बर्दाश्त करेंगे! साथ ही में, यह ज्ञान भी दिया कि ऐसे लोग लड़कियों की आजादी के दुश्मन हैं।

यूँ तो मैं NCRB के आँकड़े ऐसे खींच के मारता कि फोटोशॉप की आगे से जरूरत ही नहीं पड़ती टेढ़ा बनने के लिए, लेकिन तू-तू-मैं-मैं में एक मजहब की आजादियों पर एक निगाह डाल ही लेते हैं: बुर्के में रहने की आजादी से ज्यादा आजादी क्या होगी? हिजाब जैसी आजादी से बड़ी आजादी कहाँ से मिल पाएगी? हलाला करवाने की आजादी कितनी आधुनिकता लिए हुए है! चार बीवी वाली आजादी की भी बात कर लें? लड़कियों के खतना की आजादी कितनी शानदार बात है? पत्थरों से पीट-पीट कर हत्या करवाना को आजादियों में सबसे ऊपर रखने की बात चल रही है लॉ बोर्ड में। तीन तलाक की आजादी तो मैं भूल ही गया! और हाँ, एक प्रतिशत लड़कियों को ही कॉलेज पहुँचने देने की आजादी आदि तो कमाल की आजादी में आती ही है! मौलवी जी द्वारा मदरसों में छोटी बच्चियों के साथ जो आजादी दी जाती है… आजादी ही आजादी… इतनी आज़ादियाँ तो पंद्रह अगस्त को भी नहीं मिली थी!

जहाँ तक जहरवाली वामपंथनों द्वारा बताए जा रहे प्यार और सम्मान की बात है तो कुछ उदाहरण देना चाहूँगा। इस लिंक पर सिर्फ अगस्त से नवंबर 2019 के बीच हुई वो घटनाएँ हैं जो ऑपइंडिया ने रिपोर्ट की। ये संख्या कम नहीं है, न ही इतनी ही वारदातें हुई हैं। हर घटना में एक मुस्लिम है जो ‘प्यार’ करता है हिन्दू लड़की से, उसे कभी बाप के साथ सोने कहता है, कभी बाहर अकेले में बुला कर दोस्तों के साथ रेप करता है, कभी भाई से रेप करवाता है, कभी मन भर गया तो नदी किनारे ले जा कर रेप करने के बाद काट कर फेंक देता है। टिपिकल प्यार और सम्मान जो हर हिन्दू लड़की को एक मुस्लिम परिवार में मिलता है।

ये लोग पिछवाड़ा धो कर कढ़ी बनाने की तकनीक खूब इस्तेमाल करते हैं। तथ्यों की गरीबी इतनी ज्यादा है कि जितना है उसी से काम चला लो, दिखाना ही तो है। वही इन्होंने यहाँ भी करने की सोची। स्कोडा-लहसुन तहजीब का सत्य क्या है, हम सब जानते हैं। वामपंथन जानम जहरवाली लोग चाहे जो क्लेम कर लें, लेकिन वीभत्स चित्र यही है कि हिन्दू लड़की उस घर में जाती तो प्रेम के कारण है, भले ही धोखे में किया हो, लेकिन उसका अंत नदी में बहते सूटकेस में, या फिर ऐसे घरों में आजीवन बलात्कार का शिकार होने में ही होता है। ‘आजीवन’ से तात्पर्य उसके उकता जाने, या यह निर्णय लेने तक का ही है कि अब बहुत हो गया।

जैसा कि मैंने कल के एक लेख में लिखा कि इनकी नीति हिन्दू संस्कृति को सामूहिक तौर पर, और हिन्दू परिवारों को इकाई-दर-इकाई तबाह करने की है। एक-एक कॉलोनी से एक-एक महीने में दर्जन भर ‘लव जिहाद’ की घटनाएँ सामने आ रही हैं। पहले पता नहीं चलता था, अब हर जिले में यही सब चल रहा है। ईमेल और इनबॉक्स ऐसी खबरों से भरे रहते हैं कि ‘आपको यह भी छापना चाहिए।’ कितना छापें? समय खत्म हो जाएगा लेकिन इनकी नीचता और हिन्दूघृणा खत्म नहीं होगी।

तनिष्क की जहाँ तक बात है, तो हिन्दुओं को कल औकात की बात बताई गई थी। औकात तो भैया ये है कि हिन्दू स्त्रियों के पास का स्वर्णाभूषण भंडार दुनिया के कई देशों के भंडार से ज्यादा है। औकात तो ऐसा है कि हमसे लूट कर ले गए तो पचास साल तक यूरोप की इकॉनमी चलती रही। औकात तो ये है कि जिन भी ढाँचे को मुगलिया कह कर नाचते हो, वो भी हमारे ही पैसों से बना है। औकात तो ये है कि एक मंदिर का एक वॉल्ट खोल दें, तो कई पंचवर्षीय योजनाएँ निकल जाएँगी। औकात का ये है कि हर हिन्दू आश्रम, हर मध्यम और बड़ा मंदिर हर दिन करोड़ों को बिना जाति-मजहब पूछे मुफ्त भोजन कराता है। औकात तो ये है कि एक बार अगर सारे हिन्दुओं के टायर पंचर हो गए तो तुम्हारी पुश्ते खप जाएँगी पैसा गिनने में, जो हम देंगे। इसलिए औकात की बात मत किया करो पगली!

अरे टाटा वाले सिर्फ गहने थोड़े ही बेचते हैं! नमक से ले कर घड़ी, चश्मा सब बेचते हैं। जिसकी जो खरीदने की औकात है वो बंद कर देगा तो क्या होगा सोच लो। इसलिए औकात पर नहीं जाने का। भीख माँग कर बीड़ी पीने वाले, और चंदा माँग कर बीयर गटकने वाले खलिहर वामपंथी-वामपंथने औकात की बात करते हैं तो हँसने के चक्कर में नाक से पानी निकल जाता है हमारा।

एक और बात देखिए कि सुदर्शन टीवी वाले सुरेश चव्हाणके ने कल ही ट्वीट किया था कि ये वामपंथी-जिहादी समूह अपना मतलब साधने के लिए तनिष्क के स्टोर पर हमला करेगा और दोष हिन्दुओं पर मढ़ेगा। चूँकि कानून व्यवस्था अब इनके टाइप की रही नहीं तो अटैक तो नहीं हो पाया, लेकिन हाँ सुनियोजित षड्यंत्र के तहत अटैक की खबरें अवश्य चलाई गईं।

अब इनकी पूरी रणनीति का हर चरण लोगों को पहले से पता रहता है क्योंकि यही खेल ये लोग दशकों से खेलते रहे। तुम्हीं साबरमती एक्सप्रेस में आग लगा कर 59 हिन्दुओं को भी जलाओ और फिर फर्जी खबरें छापो कि गर्भवती महिला के पेट से बच्चा निकाल कर मार दिया! याद है कि भूल गए ऐसी खबरें? मस्जिद के छत पर पत्थर भी यही लोग रखें, फैसल फारूख के छत से आग, एसिड और बंदूकें चलें, ताहिर हुसैन के छत क लॉन्चपैड भी बनाया जाए, शरजील-खालिद-सफूरा जैसे लोग राष्ट्ररोधी बयान भी दें, और उल्टे यह भी कहा जाए कि ये तो भाई मुस्लिम पोगरोम हो रिया है!

नहीं चलेगा ये सब। बहुत लम्बा चल गया तुम लोगों का। हम उसी को बंद करने आए हैं। ताला नहीं मारेंगे, सीमेंट से पूरा घर ही जाम कर देंगे।

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IAS की पत्नी, माँ, भतीजी से रेप… लगातार 2 साल तक, करवाना पड़ा था अबॉर्शन: वो RJD नेता कौन, जिसे बचाया गया?

नेताओं के बाद अगर सरकार में किसी की सबसे ज्यादा चलती है तो वो हैं ब्यूरोक्रेट्स। कई बार तो उनकी भूमिका नेताओं से भी बढ़ कर होती है क्योंकि योजनाओं के क्रियान्वयन का जिम्मा उनके पास ही होता है। लेकिन, बिहार में जंगलराज का जो दौर था, उसमें IAS अधिकारी तक सुरक्षित नहीं थे। ऐसे ही एक अधिकारी की पत्नी थीं चम्पा विश्वास। चम्पा विश्वास के साथ रेप एक ऐसी घटना थी, जिसने पूरे बिहार ही नहीं, बल्कि देश को हिला कर रख दिया था।

बिहार में नेताओं पर यौन शोषण के आरोप नए नहीं हैं। हाल ही में सामने आए मुजफ्फरपुर बालिका गृह काण्ड के दौरान भी बड़े नेताओं का नाम सामने आया। राजद ने दो बलात्कारी विधायकों की पत्नियों को टिकट दे रखा है। अभी जब ये सब खुलेआम हो रहा है तो उस दौर की आप सिर्फ कल्पना ही कर सकते हैं, जब लालू यादव के क़रीबी पूरे बिहार में कुछ भी कर सकते थे, कुछ भी। इन्हीं काली घटनाओं में से एक की हम आज चर्चा करने जा रहे हैं।

चम्पा विश्वास के साथ रेप की घटना: बिहार के दामन पर लगा काला दाग

बिहार में जंगलराज के दौर में हत्याएँ और अपहरण इतने आम थे कि ऐसी घटनाओं को लोगों ने खबर मानना भी छोड़ दिया था। सत्ताधारी पार्टी के नेता ही गुंडे थे और उनके द्वारा यौन शोषण और हत्या की वारदातों के बाद भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती थी। लेकिन, IAS अधिकारी बीबी विश्वास ने जब लालू यादव के करीबी मृत्युंजय यादव पर 2 साल में न सिर्फ उनकी पत्नी का बल्कि उनके कई सम्बन्धियों का भी रेप करने का आरोप लगाया, तो कोहराम मच गया।

अगर इस मामले की पुलिस में शिकायत होती तो या तो फाइलें धूल फाँकती, या फिर उलटा पीड़ितों के खिलाफ ही कार्रवाई हो जाती। लेकिन, मामला लाइमलाइट में तब आया जब पीड़िता ने बिहार के तत्कालीन राज्यपाल सुन्दर सिंह भंडारी को पत्र लिख कर न्याय की गुहार लगाई। 2 साल तक किसी का जबरदस्ती यौन शोषण, यहाँ तक कि उसके नाते-रिश्तेदारी में कई अन्य महिलाओं का रेप – ये एक साधारण घटना नहीं थी।

1982 बैच के IAS अधिकारी बीबी विश्वास तब बिहार के लेबर विभाग में सोशल सिक्योरिटी के डायरेक्टर थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि मृत्युंजय (तब 27 साल के) ने अपने दोस्तों के साथ मिल कर न सिर्फ उनकी पत्नी का, बल्कि उनकी माँ, दो मेड्स और भतीजी तक के साथ रेप किया। उसने इसके लिए धमकी, लालच, जोर-जबरदस्ती और हिंसा – सभी का सहारा लिया। तब चम्पा विश्वास 30 साल की थीं।

चम्पा विश्वास को 1 बार एबॉर्शन भी कराना पड़ा। अंत में उन्होंने अपना ‘Sterlization’ ही करवा लिया था। कई बार बलात्कार किए जाने के कारण बार-बार गर्भवती होने से बचने के लिए उन्हें ये क़दम उठाने पड़े थे। तब उन्होंने ये भी अंदेशा जताया था कि उनकी भतीजी कल्याणी और दो मेड सर्वेन्ट्स, जो गायब हो गई थीं, उनकी हत्या भी की गई हो सकती है। राज्यपाल ने मामले का संज्ञान लेते हुए गृह मंत्रालय को इस मामले को देखने की सिफारिश की थी।

साथ ही उन्होंने बिहार के तत्कालीन डीजीपी नियाज अहमद को भी इसकी जाँच करने के आदेश दिए। राजद के विधायक रहे मृत्युंजय यादव ने तब लालू यादव पर किताब भी लिखी थी। अगस्त 8, 1998 को भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के कहा था कि यहाँ तक कि प्रभावशाली और सम्मानित परिवारों की महिलाएँ भी अब सुरक्षित नहीं हैं और असहाय हैं क्योंकि राजद के गुंडों को लगता है कि वो कुछ भी कर के बच कर निकल जाएँगे।

बीबी विस्वास इतने बड़े अधिकारी होने के बावजूद अपने परिवार को इससे नहीं बचा पाए, ये राजद के गुंडों के प्रभाव के बारे में बताता है। बाद में वो अपने पूरे परिवार के साथ दिल्ली शिफ्ट हो गए थे। चम्पा ने अपने पति के जीवन को खतरा बताते हुए कहा था कि उन्हें काफी बाद में इस मामले के बारे में पता चला। मृत्युंजय की माँ हेमलता यादव भी विधायक रह चुकी थीं और वो ‘बिहार सोशल वेलफेयर एडवाइजरी बोर्ड’ की अध्यक्ष थीं।

तब उन्होंने इन आरोपों को गलत बताते हुए कहा था कि ये उनके और उनकी माँ के खिलाफ साजिश है। साथ ही उन्होंने बीबी विश्वास पर अपनी ड्यूटी ठीक से न निभाने और दफ्तर से गायब रहने तक के आरोप भी लगाए। मोहम्मद नमतुल्लाह तब विधानसभा में राजद के चीफ व्हिप थे। उन्होंने कहा था कि वो हेमलता के परिवार को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और वो ‘लड़का’ ऐसा नहीं कर सकता।

ये उसी का एक वर्जन था, जब अपने बेटे अखिलेश यादव की सरकार रहते मुलायम सिंह यादव ने बलात्कारियों को लेकर ‘लड़के हैं, गलती हो जाती है‘ वाला बयान दिया था। ये सब तब हो रहा था, जब मृत्युंजय का इतिहास भी ठीक नहीं था। इस घटना से 3 साल पहले भी एक राजनेता की बेटी का यौन शोषण करने के आरोप में उसे गिरफ्तार किया गया था। हेमलता उस वक़्त 8 सालों से लालू यादव की करीबी थीं।

क्या-क्या लगे थे आरोप?

बीबी विश्वास का परिवार पटना के बेली रोड में स्थित सरकारी क्वार्टर में रहता था। चम्पा ने अपनी शिकायत में कहा था कि उनके बगल के क्वार्टर में रहने वाले अधिकारी और उनकी पत्नी उन्हें बुला कर अपने फ्लैट में लेकर गए, जहाँ मृत्युंजय और हेमलता पहले से ही बैठे हुए थे। वहाँ उन लोगों ने चम्पा को मृत्युंजय के साथ अकेले कमरे में बंद कर दिया, जहाँ उसने उनका रेप किया। आरोप है कि इसके बाद हेमलता ने उन्हें धमकाया कि इस घटना के बारे में किसी को भी पता चला तो उनके परिवार के सदस्यों की हत्या कर दी जाएगी और उनके आपत्तिजनक फोटोग्राफ्स सार्वजनिक कर दिए जाएँगे।

एक दिन अचानक से मृत्युंजय फिर अपनी माँ और कुछ लोगों के साथ कैमरा लेकर आ धमका, जहाँ उसने चम्पा के साथ शादी की जिद की। उसकी माँ ने कहा कि मृत्युंजय स्मार्ट है और बड़े परिवार से है, इसीलिए चम्पा को उससे शादी कर लेनी चाहिए। उन लोगों ने चम्पा के पति को बूढ़ा बताते हुए कहा कि हेमलता को मंत्री पद मिलने के बाद उन्हें भी कहीं का अध्यक्ष बना दिया जाएगा। वहाँ उनके साथ फिर बलात्कार किया गया।

शिकायत में बताया गया था कि दिसंबर 1995 में एक बार फिर मृत्युंजय पहुँचा, जहाँ उसने चम्पा विश्वास की माँ को किचेन में देखा। इसके बाद उसने उनका जबरन आलिंगन किया और किस किया। घबराई माँ ने चम्पा से परिवार सहित वो फ़्लैट खाली करने को कहा। इसी तरह उसने चम्पा विश्वास की भतीजी कल्याणी के साथ भी रेप किया। साथ ही वो घर की मेड से कह कर बीबी विश्वास को ड्रग्स दे दिया करता था, ताकि वो बेहोश हो जाएँ।

‘नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन’ को भेजे गए पत्र में चम्पा ने आरोप लगाया था कि बिहार के एक बहुत बड़े नेता (जंगलराज के मसीहा) ने भी उनके साथ बलात्कार किया। उनका आरोप था कि पुलिस ने भी उनके बयान को हूबहू कोर्ट में पेश नहीं किया और उसमें बदलाव कर दिया। दिल्ली में शिफ्ट होने के बाद परिवार के भीतर ऐसा डर बैठा हुआ था कि उन्होंने 20 बार अपना घर बदला। मृत्युंजय के दोस्तों ने भी चम्पा के साथ बलात्कार किया था।

हालाँकि, 2010 में बिहार के पटना हाईकोर्ट ने हेमलता यादव और मृत्युंजय को चम्पा विश्वास रेप कांड से जुड़े मामले में बरी करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया। आरोपित का कहना था कि राजद और भाजपा की लड़ाई में उसे बकरा बनाया गया। उसका कहना था कि सुशील मोदी ने इसे मुद्दा बना दिया, जिससे उसकी ज़िंदगी बर्बाद हो गई, वरना वो दिल्ली के हिन्दू कॉलेज में पढ़ता था और सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा था। उसने कहा था कि उसके अधिकतर दोस्त अब सिविल सर्विसेज में हैं।

लेकिन, मृत्युंजय यादव ने सितम्बर 2005 में एक ऐसा बयान दिया था, जिसकी चर्चा आवश्यक है। उसने कहा था कि राजद के बड़े नेताओं को बचाने के लिए उसे फँसाया गया। उसने ये भी आरोप लगाया था कि जिस जज ने उसे और उसकी माँ को सजा सुनाई, उसे प्रमोट किया गया। अपनी जान को ख़तरा बताते हुए उसने पूरी जाँच प्रक्रिया को ही भ्रष्ट बता दिया था। उसने आरोप लगाया था कि राजनैतिक लाभ के लिए उसका इस्तेमाल हुआ।

अजीत भारती का वामपंथन रोस्ट | Ajeet Bharti roasts pro-Tanishq leftists

क्या तनिष्क के विज्ञापन का विरोध करने वाले वाकई मूर्ख हैं? नहीं, वो मूर्ख नहीं है, वो सहिष्णु हैं, जो देर से जगे हैं। अभी तक सिर्फ सहिष्णुता दिखाते रहे हैं, क्योंकि पिछले दौर में कुछ भी बोलने को सांप्रदायिक माना जाता था। लंबे समय से यह नौटंकी चलती रही कि एक खास मजहब अपनी उन्माद का उन्मुक्त प्रदर्शन करता रहे और अगर हमने कुछ बोल दिया तो हम सांप्रदायिक हो जाते थे। 

अब वह दौर धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। हिंदू जाग रहे हैं। तनिष्क के विज्ञापन से ‘पाताललोक’ वेबसीरीज तक एक मजहब का महिमामंडन किया गया और दूसरे को व्याभिचारी बताया गया। किस मुस्लिम घर में आपने सुना कि हिंदू लड़की का निकाह बिना इस्लाम मजहब स्वीकारे हुआ है? 

ऐसे परिवारों का प्रतिशत कितना है? वामपंथनों से पूछेंगे तो कह देंगे कि यह विज्ञापन उम्मीदों से भरा हुआ था। तुम्हारी उम्मीद की हर स्कीम में हिंदू की ही बेटी मुस्लिम लड़कों के साथ क्यों दिखती है, कभी मुस्लिम लड़की भी दिखाओ, जिस पर हिंदू लड़का गुलाल मल रहा हो।

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हिन्दुओं के धैर्य की परीक्षा मत लो | Ajeet Bharti speaks on Hindu tolerance amid Tanishq row

पाकिस्तान को लेकर एक छद्म युद्धनीति की बात कई बार सुनाई देती है। इस्लामी पाकिस्तान के बूते में वो दम नहीं है कि वो कभी भी पारंपरिक युद्ध में भारत को हराए। इसलिए उन्होंने नायाब तरीका निकाला कि इनके सैनिकों, नागरिकों, संस्थाओं को एक-एक कर हर एक-दो महीनों में आतंकी हमलों से, स्लीपर सेल को क्रियान्वित करके अपने निशाने पर रखा जाए। 

ये नीति काफी हद तक सफल भी रही, क्योंकि हमारे नेताओं को ऐसा लगता रहा कि पाकिस्तान पर बयान देने से भारतीय मुस्लिम वोट बैंक नाराज हो जाएगा। गजवा-ए-हिंद का सपना पाले कितने ही मुल्ले-मौलवी मस्जिदों में कितने दशकों से मुस्लिम समुदाय के भीतर जहर घोल रहे हैं, ये किसी से छुपा हुआ नहीं है। अब जिहाद में अलग-अलग वेराइटी आ गई। कल तक का ‘लव-जिहाद’ अब एक कदम ऊपर चढ़कर रेप-जिहाद का रूप ले चुका है।

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बसपा नेता पूर्व MLC हाजी मोहम्मद इकबाल के घर ED की छापेमारी: दरवाजा तोड़ कर अंदर घुसी टीम

पूर्व बसपा एमएलसी हाजी मोहम्मद इकबाल उर्फ बालला के मकान पर लखनऊ से सहारनपुर पहुँची प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने आज छापा मारा है। मीडिया को इस पूरी कार्यवाही से दूर ही रखा गया है। घर के बाहर भारी पुलिस पुलिस बल तैनात की गई, ताकि कोई अव्‍यवस्‍था न फैले। सुबह से ही ईडी के अधिकारी आवास के अंदर जाँच पड़ताल कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईडी सुबह करीब 11 बजे हाजी इकबाल के मिर्जापुर पोल स्थित घर पहुँची थी। जब ईडी ने बसपा नेता के दरवाजे पर दस्तक दी तो न ही अंदर से किसी ने कोई आवाज दी न ही दरवाजा खोला। जिसके बाद मजबूरन अधिकारियों को दरवाजा तोड़ कर घर के अंदर घुसना पड़ा। वहीं जब उन्होंने उनसे घर की अलमारियों की तलाशी करने के लिए चाबी माँगी तो वह भी उन्हें नहीं सौंपी गई। जिसके बाद मिस्त्री को ताला खुलवाने के लिए बुलवाया गया। जाँच के वक्त स्थानीय पुलिस भी ईडी की टीम के साथ में रही।

बता दें एनजीटी ने हाल ही में हाजी इकबाल के भाई व बसपा एमएलसी महमूद अली और अमित जैन के खिलाफ 50-50 करोड़ का जुर्माना लगाया था। इन पर अवैध खनन करके पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने के आरोप है। एनजीटी कोर्ट ने 6 अक्टूबर तक जुर्माने की राशि की वसूली की आरसी जारी की थी। बताया जा रहा है कि टीम उनके बयान दर्ज कर लखनऊ के लिए रवाना हो जाएगी।

गौरतलब है कि बसपा शासनकाल में हुए बहुचर्चित एनआरएचएम और खनन घोटाले के अलावा चीनी मिलों की बिक्री में हुए घोटाले में भी हाजी इकबाल का नाम आया था। मामले की जाँच ईडी व सीबीआई कर रही है। कुछ दिन पहले सीबीआई ने भी बसपा नेता के घर छापा मारा था। इससे पहले ईडी ने हाजी इकबाल के बेटे के बयान भी दर्ज किए थे। वहीं अब अन्य लोगों के बयान दर्ज कर आगे की कार्रवाई जारी है। फिलहाल मामले में कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि हाजी इकबाल बसपा से पूर्व एमएलसी रह चुका है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसके खनन माफिया होने के भी आरोप हैं। पुलिस द्वारा इसके खिलाफ कई बार कार्रवाई भी की जा चुकी है। वहीं पूर्व में भी इसके आवास पर छापेमारी हो चुकी है। इकबाल व इनके भाई समेत कइयों पर पहले भी मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

बंद हो सारे मदरसे, उसमें लगते हैं आतंकियों के पैसे, तभी खत्म होगी दूसरे धर्म से नफरत: वसीम रिजवी

असम सरकार द्वारा नवंबर से राज्य में सरकारी मदरसों को बंद करने के फैसले का स्वागत करते हुए शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी ने कहा कि जब तक सब धर्म के बच्चे एक साथ बैठकर नहीं पढ़ेंगे तब तक कट्टरपंथी मानसिकता, इस्लाम के गलत प्रचार और दूसरे धर्मों से नफरत खत्म नहीं होगी। उन्होंने कहा कि मदरसे पूरी तरह से बंद होने चाहिए और उन्हें स्कूलों में कन्वर्ट कर देना चाहिए। हर धर्म का सम्मान होना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि मदरसों में जनता का नहीं, बल्कि आतंकवादियों का पैसा लगता है, इसलिए सभी मदरसों को बंद कर स्कूली शिक्षा को शुरू कर देना चाहिए। टाइम्स नॉउ चैनल पर डिबेट के दौरान उन्होंने सवाल उठाया कि मदरसों के सिलेबस दुकानों पर क्यों नहीं मिलते? एक धर्म के लोगों को ये लोग क्या पढ़ाते हैं? क्यों ऐसा करते हैं?

उनका कहना था कि इन मदरसों में उन कट्टरपंथी मुल्कों का पैसा लग रहा है जो इन आतंकी संगठनों को चलाती हैं। उन्होंने कहा, “हिंदुस्तान में लोगों को जब ये पढ़ाएँगे कि सिर्फ तुम अल्लाह के नेक बंदे हो और तुम्हारे अलावा कोई सही नहीं है। जितने धर्म अल्लाह को नहीं मानते हैं, इस्लाम को नहीं मानते हैं, वो काफिर हैं। उनसे जिहाद करो। उनको मार दो। अगर बच्चों को ये एकतरफा पढ़ाया जाएगा, तो आप बताइए, बच्चा बड़ा होकर क्या बनेगा?”

असम के शिक्षा मंत्री हिमांत विश्व शर्मा ने बृहस्पतिवार (8 अक्टूबर 2020) को यह साफ़ करते हुए कहा था कि मजहबी शिक्षा का खर्च जनता के रुपए से नहीं उठाया जा सकता है।

गौरतलब है कि इससे पहले वसीम रिजवी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 (पूजा स्थल अधिनियम 1991) को खत्म करने की माँग की थी। उन्होंने पुराने तमाम तोड़े गए मंदिरों को हिंदुओं को वापस देने और मुगल काल के पहले की स्थिति बहाल करने की माँग की थी।

पीएम को लिखे पत्र में वसीम रिजवी ने कहा था कि द प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 को कॉन्ग्रेस के शासन काल मे जानबूझकर बनाया गया था, ताकि हिंदुस्तान में मन्दिर-मस्जिद का विवाद हमेशा चलता रहे। रिजवी के मुताबिक इस एक्ट को तत्काल खत्म किए जाने की जरूरत है, जिससे देश में मन्दिर-मस्जिद विवाद सदैव के लिए समाप्त हो जाए। शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन के मुताबिक कॉन्ग्रेस ने धार्मिक आँकड़ों के आधार पर इस देश मे लंबे समय तक हुकूमत किया।