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बंद हो सारे मदरसे, उसमें लगते हैं आतंकियों के पैसे, तभी खत्म होगी दूसरे धर्म से नफरत: वसीम रिजवी

असम सरकार द्वारा नवंबर से राज्य में सरकारी मदरसों को बंद करने के फैसले का स्वागत करते हुए शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी ने कहा कि जब तक सब धर्म के बच्चे एक साथ बैठकर नहीं पढ़ेंगे तब तक कट्टरपंथी मानसिकता, इस्लाम के गलत प्रचार और दूसरे धर्मों से नफरत खत्म नहीं होगी। उन्होंने कहा कि मदरसे पूरी तरह से बंद होने चाहिए और उन्हें स्कूलों में कन्वर्ट कर देना चाहिए। हर धर्म का सम्मान होना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि मदरसों में जनता का नहीं, बल्कि आतंकवादियों का पैसा लगता है, इसलिए सभी मदरसों को बंद कर स्कूली शिक्षा को शुरू कर देना चाहिए। टाइम्स नॉउ चैनल पर डिबेट के दौरान उन्होंने सवाल उठाया कि मदरसों के सिलेबस दुकानों पर क्यों नहीं मिलते? एक धर्म के लोगों को ये लोग क्या पढ़ाते हैं? क्यों ऐसा करते हैं?

उनका कहना था कि इन मदरसों में उन कट्टरपंथी मुल्कों का पैसा लग रहा है जो इन आतंकी संगठनों को चलाती हैं। उन्होंने कहा, “हिंदुस्तान में लोगों को जब ये पढ़ाएँगे कि सिर्फ तुम अल्लाह के नेक बंदे हो और तुम्हारे अलावा कोई सही नहीं है। जितने धर्म अल्लाह को नहीं मानते हैं, इस्लाम को नहीं मानते हैं, वो काफिर हैं। उनसे जिहाद करो। उनको मार दो। अगर बच्चों को ये एकतरफा पढ़ाया जाएगा, तो आप बताइए, बच्चा बड़ा होकर क्या बनेगा?”

असम के शिक्षा मंत्री हिमांत विश्व शर्मा ने बृहस्पतिवार (8 अक्टूबर 2020) को यह साफ़ करते हुए कहा था कि मजहबी शिक्षा का खर्च जनता के रुपए से नहीं उठाया जा सकता है।

गौरतलब है कि इससे पहले वसीम रिजवी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 (पूजा स्थल अधिनियम 1991) को खत्म करने की माँग की थी। उन्होंने पुराने तमाम तोड़े गए मंदिरों को हिंदुओं को वापस देने और मुगल काल के पहले की स्थिति बहाल करने की माँग की थी।

पीएम को लिखे पत्र में वसीम रिजवी ने कहा था कि द प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 को कॉन्ग्रेस के शासन काल मे जानबूझकर बनाया गया था, ताकि हिंदुस्तान में मन्दिर-मस्जिद का विवाद हमेशा चलता रहे। रिजवी के मुताबिक इस एक्ट को तत्काल खत्म किए जाने की जरूरत है, जिससे देश में मन्दिर-मस्जिद विवाद सदैव के लिए समाप्त हो जाए। शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन के मुताबिक कॉन्ग्रेस ने धार्मिक आँकड़ों के आधार पर इस देश मे लंबे समय तक हुकूमत किया।

मुस्लिम युवक ने निकाह के 4 साल बाद हिन्दू युवती और उसकी माँ पर बनाया इस्लाम कबूलने का दबाव, महिला आयोग में शिकायत दर्ज

बिहार में लव जिहाद का एक बेहद ही चौकाने वाला मामला सामने आया है। जहाँ बिहार के मुंगेर निवासी मुस्लिम युवक ने शादी के चार साल बाद हिंदू लड़की पर इस्लाम धर्म कबूलने का दबाव बनाया, इतना ही नहीं युवक ने हिंदू युवती की माँ पर भी इस्लाम कबूलने की जबरदस्ती की। पीड़ित युवती ने मंगलवार (अक्टूबर 13, 2020) को इसकी शिकायत बिहार राज्य महिला आयोग से की है।

बिहार महिला आयोग में शिकायत लेकर पहुँची युवती के मुताबिक, चार साल पहले उसने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर मुस्लिम युवक से कोर्ट मैरिज की थी। उस दौरान मुस्लिम युवक और वह पटना विश्वविद्यालय में साथ में पढ़ रहे थे। लेकिन शादी के 4 साल बीतने के बाद उसका शौहर उसे इस्लाम कबूलने के लिए प्रताड़ित करने लगा। इसके अलावा उसने पीड़िता की माँ पर भी धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया है।

पटना सिटी की रहने वाली पीड़िता ने आयोग को दिए अपने आवेदन में आगे कहा, शुरुआती दिनों में कोई दिक्कत नहीं थी। हम दोनों राजी खुशी जीवन जी रहे थे। लेकिन समय गुजरने के साथ ही वह उस पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने लगा। जिसका विरोध करने पर मुस्लिम युवक ने उसको अपने साथ रखने से मना कर दिया। बता दें कि पति-पत्नी दोनों फिलहाल पटना विश्वविद्यालय में बीएड की पढ़ाई कर रहे हैं।

पीड़िता ने महिला आयोग से गुहार लगाई है कि उसका शौहर बिना धर्म परिवर्तन यानी हिंदू के रुप में ही उसे स्वीकार करे। पीड़िता की शिकायत को राज्य महिला की अध्यक्ष दिलमणि मिश्रा ने संज्ञान में लिया है।

वहीं राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष दिलमणि मिश्रा ने कहा कि पीड़िता की शिकायत मिली है। दोनों ने कोर्ट से शादी की है, इसलिए उन्हें सोचने का वक्त दिया जाना चाहिए। आयोग ने मामले की अगली सुनवाई के लिए फरवरी महीने की तारीख तय की है।

हाथरस केस में CBI ने मृतका के तीनों भाइयों और पिता को दोबारा भेजा समन: प्रारंभिक पूछताछ के दौरान मिली गड़बड़ी

हाथरस मामले की जाँच कर रही केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) की टीम ने आज पीड़िता के भाइयों को फिर से समन जारी किया है। टीम ने कल पीड़िता के एक भाई से पूछताछ की थी। जिसके बाद टीम को उसके बयान में गड़बड़ी महसूस हुई। भाई को टीम द्वारा पूछताछ के लिए किसी दूर स्थान पर ले जाया गया था। कथित तौर पर उसे मौका-ए-वारदात यानी बाजरे के खेत में भी ले जाया गया और वारदात का नाट्य रूपांतरण करने के साथ-साथ मृतका के भाई से लंबी पूछताछ की गई। सीबीआई मृतका पीड़ित लड़की के तीनों भाइयों से पूछताछ करेगी।

सीबीआई टीम ने पीड़िता के पिता को भी दोबारा तलब किया है। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार एसडीएम अंजलि गंगवार बताया, “हाथरस मामले में पुरुष सदस्यों से सीबीआई की टीम द्वारा स्थापित एक अस्थायी कार्यालय में पूछताछ की जाएगी और महिला सदस्यों से घर पर पूछताछ की जाएगी। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रक्रिया के दौरान वे परेशान न हों। सीबीआई मामले की जाँच कर रही है। उनके पास प्रक्रियाओं का अपना सेट है। परिवार को जाँच की प्रक्रिया में कोई समस्या नहीं है।”

सीबीआई की टीम ने आज हाथरस जिला अस्पताल के आपातकालीन वार्ड की भी जाँच की। साथ ही टीम ने अस्पताल प्रशासन से भी मामले में बातचीत की। बता दें पीड़िता का इलाज हाथरस जिला अस्पताल में किया जा रहा था।

डॉ. आईबी सिंह यह पूछे जाने पर कि क्या अस्पताल ने सीबीआई टीम को पीड़िता के सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराए हैं तो उन्होंने कहा कि, यह संभव नहीं था। अस्पताल में मौजूद सीसीटीवी सिस्टम में केवल सात दिनों तक का बैकअप है, इसलिए एक महीने पुरानी फुटेज देना संभव नहीं था।

गौरतलब है कि आज हाथरस के कथित गैंगरेप और मौत मामले में यूपी की योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दाखिल किया है। अपने हलफनामे में यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि पीड़िता के परिवार और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए थ्री लेयर की सुरक्षा मुहैया कराई गई है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पीड़िता के परिवार और गवाहों के संरक्षण के प्रयासों पर जवाब दाखिल करने को कहा था। कोर्ट ने सरकार को कहा था कि वो गवाहों की सुरक्षा मुहैया कराने को लेकर डिटेल रिपोर्ट फाइल करें।

इंडिया टुडे ने अपने कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर निजी विचार साझा करने से रोका, कहा- यह अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं

इन दिनों सोशल मीडिया कई तरह के विवादों में घिरता नजर आया। कई विवादों का केंद्र बिंदु बनने के बाद अब कथित तौर पर इंडिया टुडे ग्रुप (ITG) ने एक अंतरिम सोशल मीडिया एडवाइजरी जारी किया है। इंडिया टुडे ने इस एडवाइजरी में अपने पत्रकारों से किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी निजी राजनीतिक विचार साझा करने से मना किया है।

Image posted by Deepika Narayan Bharadwaj on Twitter

स्वतंत्र पत्रकार दीपिका नारायण भारद्वाज ने इंडिया टुडे के इस अंतरिम सोशल मीडिया एडवाइजरी को शेयर किया। जिसमें कहा गया है कि इंडिया टुडे ग्रुप से जुड़े किसी भी फुलटाइम, पार्ट टाइम, कंसलटेंट, रीटेनर या फिर थर्ड पार्टी पर यह एडवाइजरी लागू होता है। दिशानिर्देश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे और दो महीने के लिए प्रभावी होंगे।

एडवाइजरी का कहना है कि दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, टर्मिनेट भी किया जा सकता है। आश्चर्य की बात यह है कि दिशानिर्देश स्पष्ट रूप से इंडिया टुडे ग्रुप से जुड़े किसी भी कर्मचारी को अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट से टिप्पणी करने से मना करता है, मगर साथ ही यह भी दावा करता है कि यह अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं है।

Image posted by Deepika Narayan Bharadwaj on Twitter.

एडवाइजरी का कहना है कि सोशल मीडिया पर किसी भी तरह के विवाद से बचते हुए पत्रकारिता के उच्च मानकों को बनाए रखने और सॉलिड स्टोरी करने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। इंडिया टुडे का नाम हाल ही में टीआरपी घोटाले में सामने आया था। मुंबई पुलिस ने एक एफआईआर भी दर्ज की थी जिसमें इंडिया टुडे का नाम था।

मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने खुद यह बात स्वीकारी थी कि असल एफ़आईआर में इंडिया टुडे का ज़िक्र है। इस खुलासे के बाद मुंबई पुलिस खुद की बनाई गाँठो में उलझती हुई नज़र आ रही है क्योंकि यह बात सार्वजनिक रूप से कही गई है और दूसरी तरफ इससे तमाम सवाल खड़े होते हैं। 

पिछले दिनों एक व्यक्ति ने दावा कि उन्हें लापरवाह ड्राइविंग करते हुए ‘आजतक’ न्यूज़ चैनल की एक कार ने ठोक दिया था। जिस वजह से नाराज व्यक्ति ने उसके जान को खतरे में डालने वाले व्यक्ति पर चिल्लाना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं व्यक्ति ने अपना गुस्सा कार में बैठे लोगों पर भी निकाला।

आदमी ने कार पर चिल्लाते हुए कहा, “यह आजतक की कार है। ऐसे गाड़ी चलते है मानो इनके पीछवाड़े में किसी ने आग लगा दी हो। इनकी गाड़ी पर आजतक का स्टीकर है।” तभी गाड़ी का हॉर्न बजने पर आदमी कहता है, “चुप! बहुत सुन लिया तुम्हारी बकवास। क्या समझते हो तुम अपने आप को?”

म्यांमार सेना ने चीन समर्थित अराकान सेना के खिलाफ तेज की कार्रवाई: आतंकवादी समूह को खत्म करने के लिए भारी गोलीबारी

म्यांमार की सशस्त्र सेना ने इस सप्ताह सोमवार को अराकान सेना के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी। अराकान सेना पश्चिमी रखाइन राज्य में सबसे बड़ा आतंकवादी समूह है। द इरावाडी में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, म्यांमार की थल, वायु और नौसेना बलों की तीनों विंग ने आतंकवादी समूह के खिलाफ समन्वित कार्रवाई किया।

रिपोर्ट के अनुसार, म्यांमार के सैन्य अभियानों के प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि वायु सेना के जेट विमानों ने जमीनी सैनिकों और नौसैनिक बलों की मदद से पहाड़ में स्थित अराकान सेना की चौकियों पर तीन बार बमबारी की थी।

बता दें, म्यांमार के सैन्य और आतंकी समूह अराकान सेना के बीच यह झड़प पिछले एक महीने से अधिक समय से चल रहा है। हमलें से परेशान निवासियों को मजबूरन संघर्षग्रस्त इलाके को छोड़ कर जाना पड़ा। इलाके में बचे लोगों ने दावा किया कि मंगलवार को म्यांमार के सैन्यबलों द्वारा किया गया हवाई हमला अब तक का सबसे भयानक हमला था।

उनके मुताबिक, सेना अब तक केवल संदिग्ध अराकान सेना के ठिकानों पर बम गिराने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल करती थी। लेकिन 3 से 5 अक्टूबर के दौरान दोनों सेना के बीच क्युकतान और हेटेसवे गाँवों के बीच औंगथारजी के पास जमकर गोलीबारी हुई। एक तरफ जहाँ म्यांमार की सेना ने कहा कि उसने 4 अक्टूबर को पहाड़ी को कब्जे में लिया था। वहीं अराकान सेना ने कहा कि उन्होंने वापस से 5 अक्टूबर को पहाड़ी पर कब्जा कर लिया।

गौरतलब है कि 2009 में उत्तरार्ध में गठन के बाद से म्यांमार सेना और अराकान सेना के बीच संघर्ष चल रहा है।अलगाववादी अराकान सेना म्यांमार की सेना के साथ लंबे समय से लड़ाई में उलझी हुई है। अराकान सेना म्यांमार के रखाइन राज्य में सबसे बड़ा आतंकवादी समूह है और राजनीतिक दल यूनाइटेड लीग ऑफ़ अरकान (ULA) का सशस्त्र विंग भी है।

वहीं इस साल 23 मार्च को म्यांमार सरकार ने लोगों के अंदर डर पैदा करने और सरकार और नागरिकों के इलाकों में हमला करके देश की स्थिरता को बाधित करने के लिए अराकान सेना और उल्ला को आधिकारिकतौर ओर आतंकवादी समूह घोषित कर दिया था।

इस संगठन ने 2019 में चार पुलिस स्टेशनों पर कथित रूप से हमला किया था। जिस दौरान 20 पुलिस अधिकारी हताहत हुए। वहीं कुछ पुलिसकर्मियों की मौत भी हो गई थी।
यह भी आरोप लगाया गया है कि चीन म्यांमार की सेना के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने के लिए अराकान सेना को आधुनिक हथियार भी प्रदान कर रहा है।

गुजरात के गृहमंत्री ने NDTV पर केस दर्ज करने के दिए आदेश, तनिष्क पर फैलाया था फेक न्यूज

तनिष्क द्वारा विज्ञापन वापस लेने के बाद वामपंथी मीडिया चैनल एनडीवी ने ब्रेकिंग चलाते हुए दावा किया कि विवाद के चलते गुजरात के गाँधीधाम में तनिष्क के एक स्टोर पर हमला हुआ है।एनडीटीवी के मुताबिक, हमलावरों की भीड़ ने कथित तौर पर स्टोर मैनेजर को माफी पत्र लिखने के लिए कहा था।

अब गुजरात के गृहमंत्री ने इसका खंडन करते हुए कहा, “NDTV द्वारा गाँधीधाम (गुजरात) के तनिष्क स्टोर पर हमले की फैलाई गई खबरें पूर्णतः झूठ और फ़र्ज़ी हैं। यह बिलकुल ही गलत मंशा से गुजरात में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और हिंसा भड़काने के उद्देश्य से किया गया कार्य है। मैंने इन लोगों पर मामला दर्ज करने को कहा है और फेक न्यूज चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं।”

बता दें कि इससे पहले कच्छ के IPS ऑफिसर ने भी इस खबर को पूरी तरह से खंडन किया था। उन्होंने इस खबर को प्रोपेगेंडा के तहत चलाई जाने वाली खबर बताया। उन्होंने कहा था, “मीडिया चैनल दिखा रहे हैं कि तनिष्क शॉप पर हमला हुई है, दंगा हुआ है या चोरी हुआ है, तो ये यब गलत न्यूज है, फेक न्यूज है। ये एक प्रोपेगेंडा के हिसाब से चल रहा है। इसलिए इस तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।” उन्होंने बताया कि शोरूम के मालिक भी इस बारे में बात करना चाहते हैं।

NDTV की रिपोर्ट में कहा गया था कि गुजरात के गाँधीधाम में तनिष्क स्टोर पर हमला हुआ है। हमला होने के बाद स्टोर मैनेजर के माफी पत्र में कथित तौर पर सेक्युलर विज्ञापन प्रसारित करके हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने के लिए कच्छ जिले के लोगों से माफी माँगवाई गई।

तनिष्क के विज्ञापन में एक हिंदू महिला की गोदभराई की रस्म को दिखाया गया था। इस लड़की की शादी मुस्लिम परिवार में हुई थी। इसमें हिंदू संस्कृति को ध्यान में रखते हुए मुस्लिम परिवार सभी रस्मों रिवाजों को हिंदू धर्म के हिसाब से करता दिखाया गया था। 

विज्ञापन को लव जिहाद को बढ़ावा देने के आरोप लगने और सोशल मीडिया पर तनिष्क के बहिष्कार की अपीलों के बाद कंपनी ने विज्ञापन को वापस ले लिया। कुछ इसी तरह का विवाद होली के दौरान सर्फ एक्सेल के एक विज्ञापन को लेकर भी हुआ था।

केंद्र सरकार ने जारी किया J&K और लद्दाख को ₹520 करोड़ का विशेष पैकेज: 10 लाख से ज्यादा महिलाओं को मिलेगा फायदा

केंद्र सरकार ने दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और लद्दाख को 520 करोड़ के विशेष पैकेज की मंजूरी दी है। इसकी जानकारी केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने स्वयं दी।

उन्होंने बताया, “दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन पूरे देश भर में बहुत मशहूर योजना है। मगर, कुछ तकनीकी कारणों से जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बहुत कम महिलाएँ ऐसी थीं जिन्हें चिह्नित किया गया और जो योग्य थीं। इसलिए अब जम्मू कश्मीर और लद्दाख के लिए क्राइटेरिया बदल दिया गया है। इसमें गाँवों के दो तिहाई परिवार कवर कर लिए गए हैं और 10,58,000 महिलाएँ को 520 करोड़ रुपए के पैकेज के साथ इसका फायदा मिलेगा।”

यहाँ बता दें कि दीनदयाल अंत्योदय योजना दरअसल, देश के गरीब नागरिकों के लिए है। इसके लाभार्थियों में शहरी और गाँव दोनों के ही गरीब शामिल किए गए हैं। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत केंद्र सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से शहरों और गाँवों के गरीब लोगों की गरीबी दूर करने पर आधारित है। यह भी प्रधानमंत्री रोजगार योजना जैसी ही योजना है। जो स्किल डेवलपमेंट के साथ ही रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने की बात करती है।

इस योजना के 2 घटक हैं। एक का नाम दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और दूसरे का नाम दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन है। पहले घटक का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों के लिए कुशल और प्रभावी संस्थागत मंच तैयार करना था। ताकि उन्हें स्थायी आजीविका संवर्धन के माध्यम से घरेलू आय में बढ़ोत्तरी करने में मदद मिल सके। वहीं दूसरे घटक में शहरों के गरीबों का उत्थान है।

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और नरेंद्र सिंह तोमर ने आज यानी बुधवार (अक्टूबर 14, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसलों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस कॉन्फ्रेंस में जावड़ेकर ने यह भी बताया था कि शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के तहत केंद्र प्रायोजित नई योजना के तौर पर स्टार्स (STARS) प्रोजेक्ट को शुरू किया जाएगा।

इस प्रोजेक्ट के तहत 6 राज्य इसके दायरे में आएँगे। इनमें हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, केरल और ओडिशा का नाम शामिल है। जावड़ेकर ने बताया कि यह प्रोजेक्ट विश्व बैंक द्वारा समर्थित है। इसकी लागत 5,718 करोड़ रुपए है जिसमें विश्व बैंक ने 500 मिलियन डॉलर का सहयोग किया है।

महाराष्ट्र: अनलॉक-5 में भी उद्धव सरकार ने नहीं दी मंदिरों को खोलने की अनुमति, 15 अक्टूबर से मेट्रो सहित कई अन्य सेवाएँ शुरू

महाराष्ट्र सरकार ने बढ़ते कोरोना वायरस मामलों के बीच बुधवार (अक्टूबर 14, 2020) को अनलॉक 5 के तहत अपने नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए। एक तरफ जहाँ उद्धव ठाकरे सरकार ने मेट्रो सेवाओं को 15 अक्टूबर से शुरू करने के निर्देश दिए, वहीं दूसरी ओर मंदिरों के खोले जाने की अनुमित नहीं दी। बता दें कोविड-19 के बढ़ते प्रसार से जूझ रहीं महा विकास अगाड़ी के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार अपने स्वयं के अनलॉकिंग पैटर्न का पालन कर रही है।

महाराष्ट्र सरकार के जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि राज्य में धार्मिक स्थान, सिनेमा हॉल, स्विमिंग पूल अभी नहीं खुलेंगे। बाकी गुरुवार से मेट्रो ट्रेनों को श्रेणीबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। राज्य में बिजनेस-टू-बिजनेस एक्जिबिशन की भी अनुमति दी गई है। आवश्यक कोविड-19 सावधानियों के साथ, गवर्नमेंट और पब्लिक लाइब्रेरियों को भी खोला जा रहा है। दुकानें और बाजार सुबह 9 से रात 9 बजे तक खुले रहेंगे। अन्य राज्यों में रेस्तरां खुलने के लंबे समय बाद, महाराष्ट्र ने 5 अक्टूबर से रेस्तरां और बार को खोलने की अनुमति दी थी।

वहीं कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों पर भी पाबंदी लगी हुई है। अनलॉक के नए गाइडलाइन में भी इसके फिर से खोलने पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। हालाँकि, अध्यापक 50 फीसदी क्षमता के साथ स्कूल अटैंड कर सकेंगे।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में मंदिरों को खोलने की अनुमति को लेकर उद्धव ठाकरे सरकार के रवैये पर महाराष्ट्र राज्यपाल ने नाराजगी व्यक्त की थी। जहाँ एक तरफ भाजपा कार्यकर्ताओं ने शिरडी के साईं बाबा और प्रभादेवी के सिद्धिविनायक मंदिर के सामने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। वहीं राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सीएम उद्धव ठाकरे से पूछा है कि उन्हें कोई दिव्य प्रेम प्राप्त हुआ है या वो सेक्युलर हो गए हैं?

दरअसल, भाजपा की माँग है कि राज्य में सारे मंदिरों को खोलने की अनुमति दी जाए। राज्यपाल की आपत्ति इस बात को लेकर है कि राज्य सरकार ने जून में ही धार्मिक स्थलों को खोलने की घोषणा की थी लेकिन अब 4 महीने बाद भी मंदिर बंद ही हैं। उन्होंने ध्यान दिलाया कि सारे रेस्टॉरेंट खुले हुए हैं। राज्यपाल ने उद्धव को याद दिलाया कि वो हिंदुत्व के मजबूत पक्षधर रहे हैं और भगवान राम के लिए उन्होंने सार्वजनिक रूप से श्रद्धा व्यक्त की थी।

पालघर मामले में मुंबई पुलिस ने जारी किया अर्नब गोस्वामी को ‘कारण बताओ’ नोटिस: अच्छे बर्ताव के लिए माँगा बॉन्ड

रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी और मुंबई पुलिस के बीच खींचतान अब भी जारी है। मुंबई पुलिस ने हाल में पालघर मामले के मद्देनजर अर्नब को सीआरपीसी की धारा 108 (1) के तहत सांप्रदायिक टिप्पणी करने के आरोप ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया है।

यह नोटिस असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर सुधीर जांबावडेकर (Sudhir Jambavdekar) द्वारा जारी किया गया है। इसमें उन्होंने स्पेशल एक्जिक्यूटिव मजिस्ट्रेट के अधिकार से पूछा है कि आखिर क्यों सार्वजनिक शांति के ख़िलाफ़ अपराध करने वाले आरोपित को एक साल की अवधि तक के लिए, सुनिश्चतता के साथ या उसके बिना बॉन्ड तामील करने को नहीं कहा जाना चाहिए।

इसमें लिखा है कि यदि वह बॉन्ड का उल्लंघन करते हैं तो उन्हें 10 लाख की पेनल्टी भरनी होगी। नोटिस में अर्नब को 16 अक्टूबर से पहले पेश होने को कहा गया है।

सार्वजनिक शांति के उल्लंघन और धर्म, जाति, भाषा स्थान के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के आरोप में अर्नब पर जो केस, पिछले दिनों आईपीसी की धारा 153ए और 153बी के तहत दर्ज हुए थे, यह नोटिस उसी बाबत है। इस नोटिस में गोस्वामी के ख़िलाफ़ हुई एफआईआऱ का जिक्र है।

इनमें से एक एफआईआर में दावा किया गया है कि अर्नब ने 21 अप्रैल को पालघर केस में सांप्रदायिक दुर्भावना को उकसाने के लिए अपमानजनक टिप्पणी की और दूसरी में चैनल की कवरेज, पर सवाल उठे हैं जो 14 अप्रैल को बांद्रा स्टेशन के पास भीड़ इकट्ठ होने पर रिपब्लिक भारत ने की थी। नोटिस के मुताबिक समुदाय विशेष के लोगों के मन को चोट पहुँचाने के लिहाज से न्यूज चलाई गई थी।

गौरतलब है कि जबसे अर्नब गोस्वामी ने अपने शो में सोनिया गाँधी को एटोनियो मायनो कहा, तभी से मुंबई पुलिस उक्त मीडिया चैनल के पीछे हाथ धो कर पीछे पड़ गई थी। उस शो के कुछ ही घंटों में अर्नब के ख़िलाफ़ कई एफआईआर दर्ज हुई थीं और पुलिस ने बाद में उनसे 11 घंटे पूछताछ भी की थी। हाल में भी यदि देखें तो मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी का नाम टीआरपी स्कैम में ले लिया था जबकि शिकायतकर्ता की एफआईआर से मालूम चला कि उसमें नाम रिपब्लिक टीवी का नहीं इंडिया टुडे का है।

‘…अगर मैं मर गया तो सलमान खान, करण जौहर, साजिद होंगे इसके जिम्मेदार’ – बॉलीवुड एक्टर ने लगाया आरोप

बॉलीवुड एक्टर और फिल्ममेकर कमाल आर खान ने अपनी जान को खतरा बताया है। बता दें कि केआरके नाम से जाने जाने वाले एक्टर अक्सर अपने ट्वीट्स को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं। अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर उन्होंने बॉलीवुड के दिग्गज सितारों पर जमकर हमला बोला था। साथ ही बॉलीवुड ड्रग्स कनेक्शन जैसे सभी बड़े मुद्दों पर अपनी राय ट्विटर पर बड़ी ही बेबाकी से रखी थी।

केआरके ने अपने ट्वीट में कहा कि उनको मारने की प्लानिंग की जा रही है। उन्होंने अपनी मौत की साजिश के पीछे करण जौहर, सलमान खान, आदित्य चोपड़ा, साजिद नाडियाडवाला, अक्षय कुमार को जिम्मेदार ठहराया है।

कमाल आर खान (Kamaal R Khan) ने ट्वीट में लिखा, “मैं आप सभी को बताना चाहता हूँ कि अगर मुझे कुछ भी हुआ तो इसके जिम्मेदार करण जौहर, सलमान खान, अक्षय कुमार, आदित्य चोपडा, साजिद नाडियाडवाला होंगे। इन लोगों ने मुझे खत्म करने का प्लान बना लिया है।” केआरके ने अपने इस ट्वीट में पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कुछ न्यूज चैनलों को टैग किया है।

बता दें कि केआरके का यह ट्वीट सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया यूज़र्स उनके ट्वीट पर अलग-अलग तरह के रिएक्शन दे रहे हैं। कई यूजर केआरके का मजाक बना रहे हैं तो कोई उनकी चिंता कर रहा है।