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ईसाई पादरी ने किया रेप.. पुलिस ने दबाव के कारण FIR दर्ज करने में लगा दिए 9 दिन: पूर्व CBI निदेशक ने CM जगन को लिखा पत्र

सीबीआई के पूर्व निदेशक एम नागेश्वर राव ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी को पत्र लिख कर तिरुपति में गरीब परिवार की एक 20 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार के मामले में गिरफ्तारी में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है। एफआईआर के अनुसार, पीड़िता आरोपित ईसाई पादरी के यहाँ नौकरी करती थी। एक दिन वो झाँसे से उसे लेकर किसी सुनसान स्थान पर गया और बलात्कार किया। आरोपित एक ईसाई पादरी है।

पूर्व सीबीआई निदेशक ने अपने पत्र में लिखा कि चूँकि आरोपित ईसाई मिशनरी समूह का हिस्सा है, जो धर्मान्तरण के कार्य में लगा हुआ है और उसका अच्छा-खासा प्रभाव है। उसने पीड़िता को जान से मार डालने की धमकी भी दी थी। सीबीआई के पूर्व निदेशक नागेश्वर राव ने आरोप लगाया कि इस मामले में राजनीतिक व अन्य दबावों के कारण पुलिस उसके प्रति नरमी बरत रही है। उन्होंने कहा कि FIR दर्ज करने में ही पुलिस ने 9 दिन की देरी लगा दी, जिससे आरोपित के प्रभाव के बारे में पता चलता है।

उन्होंने इस दौरान सीएम रेड्डी को भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा अक्टूबर 9, 2020 को जारी किए गए निर्देशों के बारे में याद दिलाया, जिसमें महिलाओं के साथ होने वाले अपराध के मामले में कुछ अनिवार्य कदम के बारे में बताया गया था। सभी राज्य सरकारों को ये निर्देश जारी किए गए थे। उन्होंने आग्रह किया कि इस मामले में सही और पक्षपात रहित जाँच होनी चाहिए। साथ ही आरोपित को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

साथ ही उन्होंने सीआरपीसी की धाराओं के तहत पीड़िता को मुआवजा देने की भी माँग की। उन्होंने लापरवाही बरतने के आरोप में तिरुपति के एसपी अवुला रमेश रेड्डी के खिलाफ अनुशासत्मक कार्रवाई करने की भी माँग की। तिरुपति पुलिस ने नागेश्वर राव के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए कहा कि उनकी शिकायत को निवारण हेतु भेज दिया गया है। पूर्व सीबीआई निदेशक ने इसे ‘मैकेनिकल रिप्लाई’ बताते हुए याद दिलाया कि शिकायतकर्ता वो नहीं हैं, बल्कि पीड़िता और उसका परिवार है – जिन्होंने FIR दर्ज कराई।

हालाँकि, इस घटना के 12 दिन बाद और FIR दर्ज होने के 9 दिन बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार किया। पूर्व सीबीआई निदेशक का आरोप है कि तिरुपति के एसपी ने इस मामले को लेकर किए गए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में न सिर्फ उनके बारे में प्रोफेशनल तरीके से बात की, बल्कि पुलिस की निष्क्रियता और इस मामले में बरती गई ढिलाई को भी नकार दिया। साथ ही, तिरुपति पुलिस ने अपना ट्वीट भी डिलीट कर लिया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने आशंका जताई कि तिरुपति में एक प्रभावशाली ईसाई पादरी द्वारा एक गरीब लड़की का बलात्कार किए जाने के मामले में एसपी का ये रवैया उनके बारे में शक और संदेह पैदा करता है। उन्होंने कहा कि इतने दिन बाद FIR का दर्ज होने और आरोपित की गिरफ्तारी में देरी बताती है कि मटेरियल एविडेंस मिट गए हैं और ऐसा आरोपित को बचाने के लिए किया गया है। उन्होंने आईपीसी की धारा की बात करते हुए याद दिलाया कि ऐसी लापरवाही होने पर पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी इस मामले में धारा-201 (सबूतों को मिटाना), धारा-217 (आरोपित को बचाने के लिए क़ानूनी प्रावधानों को नजरअंदाज करना), धारा-218 (आरोपित को सज़ा से बचाने के ले रिकॉर्ड्स में गड़बड़ी करना) और धारा-221 (जानबूझ कर आरोपित की गिरफ़्तारी में चूक करना) के तहत आरोपित बनाए जाने चाहिए। उन्होंने सीएम से एसपी को तुरंत सस्पेंड करने के साथ-साथ इस मामले क क़ानूनी जाँच के लिए आग्रह किया है।

बता दें कि भारत सरकार के जिस पत्र का जिक्र सीबीआई के पूर्व निदेशक एम नागेश्वर राव ने किया है, उसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट कहा था कि अपराध होने के बाद महिला किसी भी थाने में FIR दर्ज करा सकती है और बाद में उस ‘जीरो एफआईआर’ को सम्बंधित थाने में ट्रांसफर किया जाएगा। साथ ही FIR न दर्ज करने पर पुलिस अधिकारियों के लिए भी दंड का प्रावधान है। साथ ही जाँच के लिए पुलिस को 2 महीने का समय देने की बात कही गई थी। इसमें दिए गए दिशानिर्देशों के अनुसार:

  • CrPc की धारा 173 में बलात्‍कार से जुड़े मामलों की जाँच दो महीनों में करने का प्रावधान है। गृह मंत्रालय ने इसके लिए एक ITSSO नामक ऑनलाइन पोर्टल बनाया है, जहाँ से मामलों की मॉनिटरिंग की जा सकती है।
  • सीआरपीसी के सेक्‍शन 164-A के अनुसार, बलात्‍कार या यौन शोषण के मामले की सूचना मिलने पर 24 घंटे के भीतर पीड़‍िता की सहमति से एक रजिस्‍टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर मेडिकल से जाँच करवाई जानी चाहिए।
  • इंडियन एविडेंस ऐक्‍ट की धारा 32(1) के अनुसार, मृत व्‍यक्ति का बयान जाँच में महत्वपूर्ण तथ्‍य होगा।
  • फोरेंसिंक साइंस सर्विसिज डायरेक्‍टोरेट ने यौन शोषण के मामलों में फोरेंसिंक सबूत इकट्ठा करने, स्‍टोर करने के लिए जो दिशानिर्देश जारी किए हैं, उनका पालन किया जाना चाहिए।
  • अगर पुलिस इन प्रावधानों का पालन नहीं करती तो न्‍याय संभव नहीं है। ऐसे में, अगर लापरवाही सामने आती है तो ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्‍त से सख्‍त कार्रवाई की जानी चाहिए।
नेताओं की मौजूदगी में कार्यक्रम में जाता है आरोपित पादरी

इधर आंध्र के तिरुपति में गरीब परिवार की लड़की से बलात्कार के आरोपित पादरी की गिरफ़्तारी के लिए जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हो रहा है। आरोपित पादरी का नाम मल्लेम देवसहयम बताया जा रहा है। टाउन क्लब जंक्शन पर विश्व हिन्दू परिषद् और RSS के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि स्थानीय SI हिमाबिंदु ने शिकायत दर्ज कराने आई पीड़िता के साथ ठीक व्यवहार नहीं किया और संवेदनहीन रवैया अपनाया।

सोशल मीडिया पर उपलब्ध तस्वीरों से स्पष्ट है कि आरोपित पादरी जगह-जगह कार्यक्रमों में जाकर उसे सम्बोधित करता है। उसके धर्मान्तरण में भी लिप्त होने की बात सामने आ रही है। क्रिसमस से लेकर ‘गुड फ्राइडे’ जैसे ईसाई त्योहारों के मौके पर वो उपदेश देता है। एक क्रिसमस के मौके पर उसके द्वारा 400 साड़ियाँ बाँटने की तस्वीरें सामने आ हैं। उस कार्यक्रम में विधायक और विधान पार्षद से लेकर मेयर तक उपस्थित थे।

स्थानीय लोगों ने एसपी पर लगाया राजनीतिक महत्वकाँक्षा के चलते मामले में नरमी बरतने का आरोप

वहीं, कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि तिरुपति के एसपी रमेश की कुछ राजनीतिक महत्वाकांक्षाएँ हैं। दावा किया जा रहा है कि वो अगले विधानसभा चुनाव में भी किस्मत आजमाने वाले हैं। लोगों का मानना है कि ‘वोट बैंक की राजनीति’ और अपने भविष्य को ध्यान में रखते हुए आरोपित पादरी के साथ नरमी बरती जा रही है। ऑपइंडिया ने एसपी रेड्डी से संपर्क कर उनकी प्रतिक्रिया जानने के प्रयास किया, लेकिन बात नहीं हो पाई।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स: रैंक में सुधार के साथ 102 से 94वें स्थान पर पहुँचा भारत, 14% जनसंख्या है कुपोषित

ग्लोबल हंगर इंडेक्स (Global Hunger Index) GHI-2020 की रिपोर्ट जारी हो गई है और भारत ने सूचकाँक में पिछले वर्ष की तुलना में बड़ा सुधार दिखाया है। पिछली बार, यानी वर्ष 2019 में ग्लोबल हंगर इंडेक्स में शामिल 117 देशों में से भारत की रैंकिंग 102 थी। वहीं वर्ष 2020 में भारत को 107 देशों में से 94 वाँ स्थान दिया गया है। हालाँकि, अभी भी सिर्फ 13 देश ही ऐसे हैं, जिनसे भारत आगे है। ये देश – रवांडा, नाइजीरिया, अफगानिस्तान, लीबिया, मोजाम्बिक और चाड आदि हैं।

‘कंसर्न वर्ल्डवाइड’ और ‘Welthungerhilfe’ संयुक्त रूप से मिलकर ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट हर साल जारी करते हैं। इसे वैश्विक, क्षेत्रीय और विभिन्न देशों में भूख को मापने और ट्रैक करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, भारत में भूख का स्तर अभी भी गंभीर स्थिति में है। हालाँकि पिछले एक साल में भारत ने पर्याप्त प्रगति भी की है। भारत ने अपने GHI स्कोर (ग्लोबल हंगर इंडेक्स स्कोर) में भी सुधार किया है।

2019 में भारत का GHI स्कोर 30.3 था, 2020 में भारत ने अपने स्कोर को 27.2 तक सुधार लिया है।

GHI score 2019 में

हालाँकि वर्ष 2020 में, GHI स्कोर 27.2 हो गया है।

GHI score 2020 में

गौरतलब है कि जिस पैमाने को ‘गंभीर’ माना जाएगा, वह दोनों वर्षों में एक जैसा है। दोनों पैमानों का कहना है कि 20.0 से 34.9 के बीच का स्कोर देश को ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा जाएगा।

बता दें कि भारत में काफी वर्षों के बाद इसमें सुधार देखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की करीब 14% जनसंख्या कुपोषण की शिकार है। वहीं, भारत के बच्चों में ‘स्टंटिंग रेट’ 37.4% है। ‘स्टन्ड’ बच्चे वो कहलाते हैं जिनकी लंबाई उनकी उम्र की तुलना में कम होती है और जिनमें भयानक कुपोषण दिखता है।

कैसे तय होती है रैंकिंग

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में दुनिया के तमाम देशों में खानपान की स्थिति का विस्तृत ब्योरा होता है। जैसे- लोगों को किस तरह का खाद्य पदार्थ मिल रहा है, उसकी गुणवत्ता और मात्रा कितनी है और उसमें कमियाँ क्या हैं। हर साल अक्टूबर में ये रिपोर्ट जारी की जाती है।

GHI रिपोर्ट में भूख की स्थिति के आधार पर देशों को 0 से 100 के बीच अंक दिए गए हैं। इस रिपोर्ट में 0 अंक होने का अर्थ ‘सबसे अच्छा’ और भूख की स्थिति का नहीं होना है। रिपोर्ट में 10 से कम अंक का मतलब है कि देश में भूख की बहुत कम समस्या है। इसी प्रकार से रिपोर्ट में 20 से 34.9 अंक का मतलब भूख का गंभीर संकट है। रिपोर्ट में 35 से 49.9 अंक का मतलब हालत बहुत ही चुनौतीपूर्ण है और 50 या इससे ज्यादा अंक का मतलब है कि देश में भूख की बहुत ही भयावह स्थिति है। इस रिपोर्ट में भारत को 27.2 मिले हैं जबकि 2019 में 30.3 अंक मिले थे। 

ग्लोबल हंगर इंडेक्स एक ऐसा मामला रहा है, जो भारत में हर साल मीडिया की सुर्खियाँ और राजनीतिक पार्टियों को मुद्दा बनाने में मदद करता है। कॉन्ग्रेस ने वर्ष 2019 में दावा किया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को तब बर्बाद कर दिया। जब कॉन्ग्रेस पार्टी सत्ता में थी तब भारत ग्लोबल हंगर इंडेक्स में ‘उदारवादी’ श्रेणी में था, जबकि 2014 के बाद से ही भारत को ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा गया।

हालाँकि यह दावा पूरी तरह से निराधार था। ग्लोबल हंगर इंडेक्स स्पष्ट रूप से बताता है कि जीएचआई स्कोर की तुलना एक वर्ष में अन्य देशों के साथ की जा सकती है, लेकिन उनकी तुलना अन्य वर्षों के साथ नहीं की जा सकती है। जीएचआई वेबसाइट का कहना है कि “वर्तमान और ऐतिहासिक डेटा जिस पर जीएचआई स्कोर आधारित हैं, को संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों द्वारा लगातार संशोधित और उनका सुधार किया जा रहा है, और प्रत्येक वर्ष की जीएचआई रिपोर्ट इन परिवर्तनों को दर्शाती है। रिपोर्ट के बीच स्कोर की तुलना करने से यह धारणा बन सकती है कि भूख किसी विशिष्ट देश में साल-दर-साल सकारात्मक या नकारात्मक रूप से बदल गई है, जबकि कुछ मामलों में परिवर्तन आंशिक रूप से या पूरी तरह से डेटा संशोधन का प्रतिबिंब हो सकता है। ”

गौरतलब है कि अगर देखा जाए तो 2014 में हंगर इंडेक्स का पैमाना पूरी तरह से अलग था और 2020 का पैमाना अलग है। उदाहरण के लिए 2014 में, 10.0 से 19.9 के पैमाने को ‘गंभीर’ माना जाता था और 2020 में, 20.0 से 34.9 के पैमाने को गंभीर माना जाता है। भारत को 2014 में, 17.8 का स्कोर मिला, जबकि 2020 में भारत को 27.2 का स्कोर मिला।

प्रोपेगेंडा आधारित मीडिया और राजनेताओं के लिए इसका अर्थ यह होगा कि भारत अपने स्कोर में पीछे चला गया जबकि उन्होंने सच्चाई को किनारे रख लोगों को गुमराह करने की कोशिश की। क्योंकि लगातार इसके पैमाने बदलते रहते हैं। 2014 और 2020 दोनों साल भारत ‘गंभीर स्थिति’ की श्रेणी में था।

CM योगी ने किया ‘मिशन शक्ति’ का शुभारंभ, कहा- घोषित दुराचारियों की चौराहों पर लगेगी तस्वीर, बहिष्कार के लिए व्यापक अभियान

उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों को बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार (अक्टूबर 17, 2020) को बलरामपुर में ‘मिशन शक्ति’ की शुरूआत की है। शारदीय से वासंतिक नवरात्र तक चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन दिलाना है। मुख्यमंत्री ने बलरामपुर से तो राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने लखनऊ से इसकी शुरुआत की है।

इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, ”शक्ति की आराधना के पावन अवसर ‘शारदीय नवरात्रि’ के प्रथम दिवस से प्रदेश में ‘मिशन शक्ति’ का शुभारंभ किया जा रहा है। यह अभियान महिलाओं और बच्चों के प्रति सम्मान तथा सुरक्षा की भावना के प्रसार तथा महिला स्वावलंबन की आवश्यकता को नवीन आयाम प्रदान करने में सहयोगी होगा।”

उन्होंने आगे कहा, “दुर्भाग्यपूर्ण घटना की पीड़िता को श्रद्धांजलि देने के लिए, मैंने बलरामपुर से मिशन शक्ति अभियान को शुरु करने का फैसला किया। यह अभियान बलरामपुर में बर्बरता की शिकार हुई बिटिया को सच्ची श्रद्धांजलि है। महिलाओं व बच्चों के प्रति सम्मान और सुरक्षा का भाव हमारी संस्कृति है। इसी भावना के साथ आज ‘मिशन शक्ति’ का शुभारंभ हो रहा है।”

मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि महिलाओं, बेटियों, नाबालिग बच्चों और अनुसूचित जाति के लोगों के विरुद्ध अपराध करने वालों का सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं। ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाए कि वह गले मे तख्ती लटकाकर माफी माँगते फिरें या प्रदेश छोड़कर भाग जाएँ। आरोपितों के खिलाफ होने वाली कार्रवाईयों की दैनिक रिपोर्टिंग होनी चाहिए व शासन स्तर पर इसकी समीक्षा हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि घोषित दुराचारियों की चौराहों पर फोटो लगाई जाएगी और उसके बहिष्कार के लिए भी एक व्यापक अभियान चलाया जाएगा।

नवरात्र के पहले दिन महिलाओं और बच्‍चों की सुरक्षा के लिए ‘मिशन शक्ति’ के शुभारंभ के साथ सीएम योगी ने ऐलान किया है कि अब यूपी के थानों में महिलाओं की सुनवाई के लिए अलग से इंतजाम किया जाएगा। प्रदेश के 1535 थानों में महिलाओं की शिकायतें सुनने के लिए अलग कमरे बनेंगे। साथ ही वहाँ एक महिला पुलिसकर्मी की तैनाती की जाएगी जो खासतौर पर थाने पर आने वाली महिलाओं की सुनवाई करेंगी। महिलाओं से जुड़े मामलों में तुरंत कार्रवाई की जाएगी। महिलाओं के खिलाफ अपराध में लिप्‍त लोगों को कड़ा दंड भोगना होगा।

उन्होंने वादा किया कि बिटिया के दुष्कर्मियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर शीघ्र ही कठोर सजा दिलाई जाएगी। अपराधियों के खिलाफ कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। इस मौके पर उन्होंने ऐलान किया कि अब पुलिस भर्ती में 20 प्रतिशत भर्ती बेटियों की होगी। मिशन शक्ति अभियान से 24 सरकारी विभाग तथा अन्तरराष्ट्रीय और स्थानीय सामाजिक संगठन जुड़ेंगे।

इसके पहले मुख्यमंत्री योगी ने जिले के देवीपाटन शक्तिपीठ तुलसीपुर में रात्रि विश्राम के बाद सुबह माँ पाटेश्वरी का दर्शन किया। मिशन शक्ति अभियान 25 अक्टूब तक चलेगा। इसके बाद अप्रैल तक हर महीने यह अभियान एक-एक सप्ताह के लिए चलाया जाएगा। जिसके लिए तिथिवार थीम निर्धारित की गई है।

महिलाओं व बच्चों से जुड़े मुद्दों पर किया जाएगा जागरुक

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के तहत प्रत्येक माह में एक सप्ताह तक विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। मिशन के तहत प्रदेश की 24 करोड़ जनता तक पहुँचकर उन्हें महिलाओं तथा बच्चों से संबंधित मुद्दों पर जागरूक किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। ‘मिशन शक्ति’ के तहत नियमित अंतराल पर विभिन्न चरणों में ‘थीम वार’ साप्ताहिक कार्यक्रम चलाए जाएँगे।  

उन्होंने बताया कि 17 से 25 अक्तूबर के बीच प्रस्तावित कार्ययोजना के आधार पर प्रत्येक दिन अलग-अलग विभागों को ‘लीड विभाग’ नामित किया गया है। लीड विभाग को मिशन के अंतर्गत निर्धारित दिन पर अपने विभाग से संबंधित गतिविधियों को पूरे प्रदेश में ‘ग्रैंड-इवेन्ट’ के रूप में आयोजित करना होगा।

JNU का ठग: खुद को PMO का सलाहकार बता फर्जीवाड़ा करने वाला छात्र गिरफ्तार, अरब भेज रहा था ₹2.23 करोड़ का माल

जेएनयू (JNU) के एक छात्र अनिकेत डे को धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। अनिकेत डे नामक ये छात्र न सिर्फ खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का एडवाइजर (सलाहकार) बताता था, बल्कि इसने इस तरह का फर्जीवाड़ा कर के लाखों रुपए की हेराफेरी की है। 22 वर्षीय आरोपित जेएनयू (JNU) में एमए का छात्र है। अनिकेत पहले भी धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार हो चुका है। इस बार वो एक्सपोर्ट के नाम पर जालसाजी कर रहा था।

उक्त जेएनयू (JNU) छात्र ने सऊदी अरब में फेस मास्क की खेप का निर्यात करने के लिए जाली नोटिफिकेशन जमा कराया था। साथ ही दिल्ली स्थित इंदिरा गाँधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कस्टल क्लीयरेंस के लिए इसने कम्पनी से 7 लाख रुपए ठग लिए थे। जब अधिकारियों ने अनिकेत डे से पूछा कि वो कौन है, तो उसने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में सलाहकार बताया। लेकिन, जाँच के बाद उसकी पोल खुल गई।

अधिकारियों ने तुरंत इसकी सूचना IGI एयरपोर्ट थाने को दी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से PMO की नकली आईडी और विजिटिंग कार्ड भी बरामद किया गया है। पुलिस अब इस मामले की जाँच में जुटी है कि इससे पहले ये कितनों से इसी तरह एयरपोर्ट के नाम पर रुपए ऐंठ चुका है। एक कारोबारी को उसने 2.23 करोड़ रुपए का फेस मास्क सऊदी अरब भिजवाने का झाँसा दिया था।

‘अमर उजाला’ की खबर के अनुसार, पूर्वी दिल्ली में अनुज जैन नामक कारोबारी की कपड़ों की फैक्ट्री है, जिन्होंने लॉकडाउन में काम बंद होने के बाद फेस मास्क की सप्लाई शुरू की। उसकी मुलाकात जेएनयू (JNU) छात्र अनिकेत से हुई, जिसने उन्हें फेस मास्क की सप्लाई सऊदी अरब भिजवाने का झाँसा दिया। उसने 5 लाख रुपए एडवांस में ले लिए।  डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) की अनुमति वाला लेटर भी बनवा लिया गया।

जाँच में ये पत्र फर्जी निकला। इस मामले में सितम्बर 11, 2020 को ही एफआईआर दर्ज कराई गई थी। अनुज जैन ने भी ठगी का मामला गाजीपुर थाने में दर्ज कराया था। अब अनिकेत को असम से गिरफ्तार किया गया है। उसने अनुज जैन से कार भी ले रखी थी।  नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने वाले अनिकेत ने ‘दी थ्री टेल्स’ नामक पुस्तक भी लिख रखी है। उसने कस्टम अधिकारियों को धमकाया भी था। वो साइबर एक्सपर्ट भी है।

वो सोशल मीडिया पर भी खुद को PMO का यूथ सलाहकार बता कर धौंस जताता था। सुरक्षा एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लग पाई थी। उसने लॉकडाउन में अपना वीआईपी पास भी बनवा लिया था। साथ ही उसने कारोबारी अनुज का भी पास बनवाया था। 1 महीने पहले इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसने बेंगलुरु के एक होटल में कमरा बुक कराया था, जहाँ झगड़ा होने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था।

उत्पादों के मूल निर्माता देश व अन्य जानकारी का जिक्र ना करने पर फ्लिपकार्ट, अमेजन को सरकार का नोटिस, 15 दिन में माँगा जवाब

भारत सरकार ने फ्लिपकार्ट व अमेजन जैसे ई-कॉमर्स समूहों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए उन्हें नोटिस भेजा है। केंद्र सरकार ने देश और विदेश के कई ई-कॉमर्स समूहों के प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले सामानों पर उनके मूल उत्पत्ति वाले देश की जानकारी तथा अन्य जरूरी सूचनाएँ नहीं दिए जाने को लेकर यह नोटिस जारी किया है, जिसमें अमेरिका की ऑनलाइन रिटेल कंपनी अमेज़न (Amazon) और भारत में वालमार्ट (WalMart) की सहयोगी कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) भी शामिल है। 

इनके अलावा भी सरकार ने देश की लगभग सभी ई-कॉमर्स कंपनियों को नोटिस भेजा है। नोटिस में सरकार ने पूछा है कि वह जितने भी उत्पाद अपने प्लेटफॉर्म से बेचते हैं उन पर ‘कंट्री ऑफ़ ओरिजिन’ (उत्पाद की बिक्री किस देश में हो रही है) यानी, उनके मूल उत्पत्ति वाले देश की जानकारी समेत कई अहम जानकारी का उल्लेख क्यों नहीं होता है? यह जानकारी पूरी तरह से क़ानूनी हैं और इनकी उत्पाद पर मौजूदगी अनिवार्य है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह सूचना खाद्य मंत्रालय के उपभोक्ता मामलों वाले विभाग की तरफ से जारी की गई है। साथ ही साथ यह भी आदेश दिया है कि ई कॉमर्स कंपनी 15 दिन के भीतर इस मुद्दे पर जवाब दें। केंद्र सरकार की तरफ से जारी किए गए नोटिस के अनुसार देश की कई बड़ी ई कॉमर्स कंपनी अपने प्लेटफॉर्म पर बेचे जाने वाले उत्पादों से जुड़ी वैधानिक जानकारियाँ उपलब्ध नहीं करा रही हैं। 

नोटिस में कहा गया है, “विज्ञापनों की जाँच में पाया गया कि जो जरूरी घोषणाएँ हैं, वे नहीं की जा रही हैं।” नियम के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को अनिवार्य रूप से वस्तु की ‘ऑरिजिन कंट्री’ समेत अन्य जरूरी जानकारी देनी होती है। उन्हें इसके बारे में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क पर सूचना देनी है, जिसके जरिए वे लेन-देन करते हैं।

सरकार ने अमेज़न डेवलपमेंट सेंटर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और फ्लिपकार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को जारी किए गए नोटिस में कहा कि वह ई कॉमर्स इकाइयाँ हैं, ऐसे में उन्हें अनिवार्य रूप से उत्पादों की क़ानूनी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। नोटिस में इस बात का भी स्पष्ट उल्लेख है कि क्योंकि अमेज़न और फ्लिपकार्ट ने इस तरह की क़ानूनन बाध्यकारी जानकारी मुहैया नहीं कराई, इसका सीधा मतलब है कि इन्होंने संबंधित नियमों का उल्लंघन किया है। 

मामले में सबसे अहम बात यह है कि केंद्र सरकार ने जितनी ई कॉमर्स कंपनी को सूचना जारी की है उन सभी को 15 दिन के भीतर इस मुद्दे पर अपनी तरफ से स्पष्टीकरण देना होगा।  

जंगलराज का डर ऐसा कि लालू से अपने भी काट रहे कन्नी, ‘मोदी के हनुमान’ कहीं चुस्त तो कहीं सुस्त

बिहार का इस बार का विधानसभा चुनाव कई मामलों में अलग दिख रहा है। मसलन, 90 के बाद यह पहला चुनाव है जिसकी चर्चा के केंद्र में लालू प्रसाद यादव नहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो 23 अक्टूबर को राज्य में पहली चुनावी रैली करने वाले हैं, उन पर विपक्ष सीधे हमले से बच रहा है।

राजद के नेतृत्व वाले गठबंधन के उम्मीदवार भी सार्वजनिक रूप से बेरोजगारी, पलायन और विकास की बात कर रहे हैं। वे उस कथित सांप्रदायिकता का डर भी वोटरों को नहीं दिखा रहे हैं, जिसे लालू पहले आडवाणी और बाद में मोदी का ‘डर’ दिखाकर बेचा करते थे। न ही लालू के कथित सामाजिक न्याय की कोई चर्चा हो रही है।

विपक्ष के निशाने पर नीतीश कुमार हैं और एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ रही चिराग पासवान की लोजपा के निशाने पर भी। पर चीजें इतनी भी सुलझी नहीं हुई है। एक सीट पर जो किसी उम्मीदवार की ताकत दिखती है, दूसरी सीट पर उसका लाभ नहीं दिख रहा। मसलन –

  • चकाई से सुमित सिंह बतौर निर्दलीय मैदान में हैं। चकाई ही नहीं आसपास की सीटों पर भी आप उनका नाम सुनेंगे। लोगबाग बताते हैं कि पिछला चुनाव हारने के बाद भी वे लगातार सक्रिय रहे। उनकी चुनावी संभावनाएँ बेहतर बताई जाती है। पर जमुई से रालोसपा के टिकट पर मैदान में उतरे अजय प्रकाश को पिछले चुनाव में हार के बाद भी इलाके में लगातार सक्रिय होते रहने का लाभ नहीं दिखता है। इस सीट पर यह चर्चा है कि उनको वोट देने से बीजेपी को नुकसान हो जाएगा। दिलचस्प यह है कि सुमित और अजय भाई हैं। लेकिन, चकाई के जदयू के खाते में होने की वजह से सुमित के पक्ष में यह काम करता दिख रहा है।
  • लखीसराय से मंत्री विजय कुमार सिन्हा को लेकर बीजेपी के भीतर भी नाराजगी थी। लेकिन उनकी उम्मीदवारी के ऐलान के बाद यह चर्चा आम है कि उनको वोट नहीं देने का नुकसान बीजेपी को हो सकता है।
  • झाझा की सीट पर पिछला चुनाव हार चुके दामोदर रावत को बढ़त दिखती है। चुनाव हारने से पहले रावत नीतीश सरकार में मंत्री हुआ करते थे। उस समय इलाके में कुछ काम हुए थे। उसकी चर्चा लोग करते हैं। हारने के बावजूद जदयू के सरकार में होने का लाभ भी रावत को मिला। यहाँ माई समीकरण प्रभावी है, लेकिन कई मजबूत यादव उम्मीदवारों के कारण उनका वोट बँटने से रावत को फायदा मिलने की बात कही जा रही है।
  • उम्मीदवारों का चेहरा कितना महत्वपूर्ण है यह जमुई में श्रेयसी सिंह का होना बताता है। अरसे से यहाँ की राजनीति जय प्रकाश यादव और नरेंद्र सिंह के बीच बँटी रही है। इस राजनीति से निकलने के लिए मतदाता श्रेयसी को अवसर के तौर पर देख रहे हैं। खासकर, महिलाओं और युवाओं के बीच उनका होना काफी असर डाल रहा है।
  • इसी तरह बीजेपी से लोजपा में आए रवींद्र यादव को वैसा लाभ झाझा में नहीं है, जैसा दिनारा में राजेंद्र सिंह के लिए दिखता है। यादव को दबंग छवि का नुकसान दिख रहा है। बीजेपी और संघ के कैडर भी खुलकर उनके साथ नहीं हैं। लेकिन, राजेंद्र सिंह को जमीन पर बीजेपी और संघ के कार्यकर्ताओं का खुलकर सम​र्थन मिल रहा है।

भले चिराग पासवान खुद को ‘मोदी का हनुमान’ बताए और बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व उनके दावों को खारिज कर रहा है, पर जमीन पर बीजेपी के उम्मीदवार भी मानते हैं कि लोजपा के उम्मीदवार नहीं उतारने का लाभ उन्हें है। लेकिन यह भी सच है कि हर सीट पर जदयू को लोजपा के उम्मीदवार का होना नुकसान भी नहीं पहुँचा रहा।

अब फिर से लौटकर उस सवाल पर आते हैं कि लालू चर्चा से क्यों गायब हैं? रिटायर्ड डॉक्टर और जमुई जिले में महादलितों तथा आदिवासियों के बीच काम करने वाले एसएन झा ने आपइंडिया को बताया, “इसका बड़ा कारण यह है कि लालू यादव की चर्चा होते ही बहस सिमट कर 1990 से 2005 के समय पर आ जाती है। इसमें कोई दो मत नहीं है कि उनके आने के बाद ओबीसी वर्ग का उभर हुआ था। लेकिन तब विकास का कोई काम नहीं हुआ और गुंडई बहुत बढ़ गई थी। कोई लौटकर फिर से उसी समय में नहीं जाना चाहता है। पर लालू यादव का नाम आते ही जंगलराज की चर्चा होने लगती है। इसलिए इस बार विपक्ष चुनाव नीतीश कुमार के खिलाफ केंद्रित करने की कोशिश में है। नीतीश कुमार के टाइम में काम हुआ है। लेकिन अब लोग विकल्प भी खोजने लगे हैं, क्योंकि उनका ये टर्म बहुत अच्छा नहीं रहा है।”

झाझा के 45 साल के अशोक यादव ने बताया, “नीतीश कुमार ने काम तो किया है। सड़क सब बढ़िया कर दिए हैं। बिजली भी 18-20 घंटे रहता है। पहले रोड चलने लायक नहीं था। शाम होने के बाद झाझा बाजार से कोई अपने गाँव तरफ जाने का हिम्मत नहीं कर पाता था। अब 12 बजे, 1 बजे रात तक आराम से लोग चला जाता है। कोई डर नहीं होता। नल जल वाला पानी भी आना शुरू हो गया है। बहुत काम हुआ है।”

वैसे तो कई चुनावों से यह लग रहा है कि लालू के माई (मुस्लिम+यादव) समीकरण में दरार पड़ चुकी है। तो क्या यह दरार और गहरी हुई है? लखीसराय के सुधांशु श्रीवास्तव कहते हैं, “देखिए मुस्लिम लोग तो आज भी उसी को वोट देगा जो बीजेपी के खिलाफ मजबूत है। लेकिन, यादव भी बाइ एंड लार्ज अभी राजद के साथ ही है। ये लोग भले नीतीश कुमार का प्रशंसा कर दे पर अंत में वोट लालटेन को ही देगा।”

जमुई के ​निवर्तमान विधायक और राजद के उम्मीदवार विजय प्रकाश कहते हैं, “देखिए लालू जी हमेशा हमारे नेता रहेंगे। लेकिन, अभी तेजस्वी जी सब देख रहे हैं। वे भी युवा हैं और युवा लोगों का जमाना है। नीतीश कुमार 15 साल से हैं। लेकिन कोई फैक्ट्री नहीं खुला। नौकरी नहीं है। सबको कमाने के लिए बाहर जाना पड़ता है। युवा लोग ये सब देख रहा। रोड का इतना बात हो रहा आप देहात में जाकर देखिए क्या हाल है। खाली बाहर-बाहर सब चमक रहा है।”

एक चीज तो स्पष्ट है कि नीतीश कुमार की लोकप्रियता और असर पर इस बार काफी सवाल हैं। लेकिन मोदी की स्वीकार्यता और प्रभाव अब भी बनी हुई है। इसलिए विपक्ष भी इस लड़ाई को नीतीश कुमार के आसपास ही समेट कर रखना चाहता है।

वैसे जमीन के उपर फिलहाल लहर जैसी कोई चीज नहीं दिख रही। विकास की बातें भले हो रही हैं पर निर्णायक उम्मीदवार का चेहरा और जातिगत समीकरण ही हैं। यह चर्चा जमीन पर जोर-शोर से है कि लोजपा के कुछ कैंडिडेट जीतने में सफल रहे और सुमित जैसे कुछ निर्दलीय भी जीत गए तो बीजेपी नीतीश कुमार को छोड़ देगी। मतदाताओं के बीच गहरे तक पैठ कर चुकी इस चर्चा का ही असर है कि सरकार से नाराजगी का सीधा फायदा विपक्ष को मिलता नहीं दिख रहा।

हैदराबाद: केक में नींद की दवा मिलाकर जोसेफ ने दोस्तों के साथ मिल कर किया गैंगरेप, 3 महीने पहले ही हुई थी दोस्ती

हैदराबाद में एक छात्रा को ड्रग देकर उसके साथ गैंगरेप करने की घटना सामने आई है। आरोप है कि तीन युवकों ने मिल कर उसके साथ गैंगरेप किया। ये घटना कुकटपल्ली इलाके में कुछ दिन पहले हुई, जिसका खुलासा अब हुआ है। पीड़िता हैदराबाद के जुबली हिल क्षेत्र की रहने वाली है। सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को 20 वर्षीय एम जोसेफ ने उसे अपने जन्मदिन की पार्टी में बुलाया था, जहाँ उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया।

सिकंदराबाद स्थित डिग्री कॉलेज में पढ़ने वाली पीड़िता की जोसेफ से 3 महीने पहले मुलाकात हुई थी और वो दोनों दोस्त बन गए थे। पीड़िता पहले टैंक बंड इलाके में गई थी, जहाँ उसकी मुलाकात जोसेफ के दो अन्य दोस्तों से हुई। वहाँ 22 वर्षीय बी नवीन रेड्डी और 23 वर्षीय आर रामू से उसकी मुलाकात हुई। इसके बाद वो सभी वहाँ से KPHB कॉलोनी मेट्रो स्टेशन स्थित एक होटल में गए, जहाँ जन्मदिन की पार्टी होनी थी।

जन्मदिन की पार्टी के दौरान ही तीनों आरोपितों ने पीड़िता को केक ऑफर किया, जिसमें सेडेटिव सामग्रियाँ (नींद की दवा) मिला दी गई थीं। उसके बेसुध होने के बाद तीनों ने उसके साथ गैंगरेप किया। जब वह होश में आई तो तीनों ने उसे धमकाया कि अगर उसने किसी से भी इस घटना का खुलासा किया तो इसका ‘बुरा परिणाम’ होगा। इस डर के कारण पीड़िता ने किसी को कुछ नहीं बताया।

हालाँकि, इस घटना के 2 दिनों बाद ही पीड़िता ने पेट में दर्द और अन्य तकलीफों की शिकायत की, जिसके बाद उसे अस्पताल में दाखिल कराया गया। वहीं पर पीड़िता ने अपनी माँ को बताया कि उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। इसके बाद उसके माता-पिता ने जुबली हिल्स पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई। एफआईआर दर्ज करने के बाद इस मामले को कुकटपल्ली पुलिस थाने में ट्रांसफर कर दिया गया है।

इससे पहले दिसंबर 2019 में हैदराबाद के ही शादनगर में पशु चिकित्सक प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। उनका जला हुआ शव बरामद होने के बाद पूरा देश उबल पड़ा था। इस मामले में चार लोग गिरफ्तार किए गए थे। बाद में पुलिस ने एनकाउंटर में चारों आरोपितों को मार गिराया था। प्रीति रेड्डी के साथ वारदात को अंजाम देने से पहले आरोपित इस तरह की कई और जघन्य घटनाओं में शामिल थे। चार आरोपितों में दो ने इस तरह की 9 और वारदातों में संलिप्तता कबूली थी।

पेरिस: क्लास में दिखाया पैगम्बर का कार्टून तो 18 साल के छात्र ने काट दिया शिक्षक का सर, ‘FoE’ की हो रही थी पढ़ाई

पेरिस में एक शिक्षक ने क्लास के दौरान ‘शार्ली एब्दो’ अख़बार में प्रकाशित पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाया, जिसके बाद सिर कलम कर के उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस ने हत्यारे को मार गिराया है। उसने एक किचेन नाइफ का प्रयोग करते हुए शिक्षक का सिर कलम किया। पुलिस ने जानकारी दी है कि इस घटना की जाँच एंटी-टेरर जज द्वारा की जा रही थी। पुलिस ने बताया है कि हत्यारा मॉस्को चेचन्या मूल का मुस्लिम था।

हत्यारे ‘छात्र’ की उम्र महज 18 साल थी। बताया गया है कि 47 वर्षीय इतिहास-भूगोल के प्रोफेसर स्कूल में क्लास ले रहे थे। फ्रांस में ये दोनों ही विषय साथ में ही पढ़ाए जाते हैं। इसके अलावा उन्हें ‘नैतिक और व्यवहार विषयक शिक्षा’ का भी दायित्व सौंपा गया था। क्लास में सारे विद्यार्थी लगभग 12-14 वर्ष के थे। क्लास के दौरान ही शिक्षक ने ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ (FoE) के बारे में समझाते हुए ‘शार्ली एब्दो’ में प्रकाशित पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाया।

इसके बाद कई छात्रों के परिवार इससे नाराज हो गए और उन्होंने पुलिस में औपचारिक शिकायत दायर की। ‘नाराज’ आरोपित ने उक्त शिक्षक पर हमला बोल दिया और उन्हें मार डाला। उसने हमले की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर भी अपलोड किया। स्थानीय पुलिस ने राष्ट्रीय स्तर के अधिकारियों को सूचित किया कि पेरिस सबअर्ब स्थित य्वेलिनेस कंफ्लॉस-सेंट-हॉरोनिन में एक लाश मिली है। ये इलाका पेरिस के नार्थ-वेस्ट में स्थित है।

पुलिस ने तत्काल हत्यारे का पीछा करना शुरू किया और उस पर कई गोलियाँ दागी गईं। पुलिस द्वारा कई बार चेतावनी देने के बावजूद उसने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया और उल्टा पुलिस को धमकी भी दी। उसने सुसाइड वेस्ट भी पहन रखा था, जिस कारण पुलिस को उस पूरे एरिया को सील करना पड़ा। शिक्षक का हत्यारा ‘अल्लाहु अकबर’ भी चिल्ला रहा था। शुक्रवार (अक्टूबर 16, 2020) की रात फ़्रांस के राष्ट्रपति एमैनुअल मैक्रॉन ने हत्यारे के मारे जाने की सूचना दी।

उन्होंने कहा कि इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ फ़्रांस का अभियान चल रहा है, और आतंकियों के प्रति नरमी नहीं बरती जाएगी। दरअसल, हुआ यूँ था कि एक अभिभावक ने ही उक्त शिक्षक के वीडियो को यूट्यूब पर अपलोड कर दिया था। हालाँकि, एक दूसरे अभिभावक के अनुसार, वो एक अच्छे शिक्षक थे और उन्होंने कार्टून दिखाने से पहले कह दिया था कि अगर मुस्लिम बच्चे बाहर जाना चाहते हैं तो वो जा सकते हैं।

अभिभावक ने कहा कि आज वो न सिर्फ अपनी बेटी बल्कि ऐसे कई छात्रों और शिक्षकों के लिए उदास हैं। साथ ही सवाल दागा कि क्या हम हत्या के भय के बिना पठन-पाठन का कार्य नहीं कर सकते? राष्ट्रपति मैक्रॉन ने इसे ‘गणतंत्र और इसकी मर्यादाओं पर हमला’ करार दिया और कहा कि आतंकी कभी फ़्रांस की जनता को विभाजित करने में सफल नहीं हो पाएँगे। 3 सप्ताह पहले ही ‘शार्ली एब्दो‘ के दो पत्रकारों की हत्या हो गई थी, इसीलिए पेरिस पहले से ही हाई अलर्ट पर है।

इस मामले में एक पाकिस्तानी युवक को गिरफ्तार किया गया था। इसी तरह जनवरी 2015 में ‘शार्ली एब्दो’ के दफ्तर के बाहर आतंकियों ने 12 लोगों को मौत की नींद सुला दिया था। पुलिस ने बताया कि उक्त शिक्षक को भी 10 दिनों से मौत की धमकी मिल रही थी। पुलिस ने बताया है कि हत्यारे के बारे में वहाँ की ख़ुफ़िया एजेंसियों के पास कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन उसका आपराधिक इतिहास रहा है।

कोलकाता: इमारत में आग लगने से 12 साल के बच्चे सहित 2 की मौत, तीसरी मंजिल से लगा दी थी छलाँग

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहाँ एक इमारत में आग लगने से 12 वर्षीय बच्चे सहित दो लोगों की मौत हो गई। ये घटना शुक्रवार (अक्टूबर 17, 2020) को कोलकाता के गणेश चंद्र एवेन्यू स्थित पाँच मंजिला आवासीय इमारत में हुई। फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने लोगों को घर से बाहर निकालने के लिए काफी मशक्कत की लेकिन दो लोगों की मौत हो गई।

पश्चिम बंगाल के अग्निशमन मंत्री सुजीत बोस ने जानकारी दी है कि इमारत ने सभी लोग सुरक्षित बाहर निकाले जा चुके हैं और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। अचानक से आग लगने की सूचना के बाद लोग बदहवाशी में इधर-उधर भागने लगे थे। मृतकों में 12 वर्षीय लड़के के अलावा एक बुजुर्ग महिला भी शामिल हैं। एक अधिकारी ने बताया कि लड़का काफी डर गया था और इसी कारण उसने तीसरी मंजिल से छलाँग लगा दी और उसकी मौत हो गई।

उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ कुछ देर उपचार के बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया। वहीं, महिला का शव इमारत में ही स्थित एक बाथरूम से मिला। इमारत में आग लगने से घायल हुए दो और लोगों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कोलकाता अग्निशमन विभाग का कहना है कि आग पहले इमारत की पहली मंजिल पर लगी थी, जो धीरे-धीरे फ़ैल गई और 2 लोगों की मौत हो गई। कुछ लोग सीढ़ियों की ओर भागने लगे। हालाँकि, अधिकारियों का दावा है कि समय रहते आग को फैलने से रोक लिया गया।

आग पर काबू पाने के बाद अब उसे ठंडा करने का काम चल रहा है। इमारत में लगी आग को बुझाने और वहाँ फँसे लोगों को बचाने के लिए कुछ 25 दमकल गाड़ियों के साथ-साथ एक हाइड्रोलिक सीढ़ी का प्रयोग किया गया। कोलकाता का ये इमारत काफी सघन इलाके में स्थित है, जहाँ इमारतें एक-दूसरे से काफी सटी हुई हैं। अग्निशमन मंत्री भी रात पर मौके पर मौजूद रहे। इमारत में एक ही एंट्री और एग्जिट पॉइंट था, और वो काफी संकरा भी था।

कोलकाता की इस इमारत में 50 परिवारें फँसी हुई थीं, जिन्हें अब निकाल लिया गया है। इस 8 मंजिला इमारत में आग लगने की सूचना के बाद ‘फायर एंड इमरजेंसी’ विभाग को लगाया गया था, जिस कारण समय रहते इस कर काबू पाया जा सका। शनिवार की सुबह आग बुझाए जाने के बावजूद इमारत से धुआँ निकलता रहा। सबसे पहले ग्राउंड फ्लोर में स्थित एक बिजली मीटर बॉक्स में आग लगी, जो चरों तरफ फ़ैल गई।

बिहार: माओवाद के बाद ‘जिन्नावाद’.. कॉन्ग्रेस ने जाले सीट पर उतारा जिन्ना समर्थक प्रत्याशी, उस्मानी पर राजद्रोह का भी है आरोप

बिहार विधानसभा चुनावों में माओवाद के बाद अब ‘जिन्नावाद’ की भी एंट्री हो चुकी है, जिसका पूरा क्रेडिट कॉन्ग्रेस को जाता है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव में जाले सीट से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष डॉ मशकूर अहमद उस्मानी को टिकट दिया है। उस्मानी पर 2019 में कथित तौर पर कथित देश विरोधी नारा लगाने के लिए राजद्रोह का मामला दर्ज हुआ था और उसने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय परिसर में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगाने के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया था। 

कॉन्ग्रेस पार्टी का यह कदम राजनीतिक विवाद और चर्चा का कारण बन गया है। कॉन्ग्रेस ने उस्मानी को जाले विधानसभा सीट से टिकट देने के लिए पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा के पौत्र ऋषि मिश्रा का टिकट काटा गया, जो हाल ही में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) छोड़ कर कॉन्ग्रेस में शामिल हुए थे। टिकट न मिलने की बात से क्षुब्ध होकर ऋषि मिश्रा ने उस्मानी को जिन्ना का समर्थक बताया जो अपने कार्यालय में जिन्ना की तस्वीर लगाता है। इसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें कोई परेशानी नहीं होती अगर यह टिकट उस्मानी की जगह किसी और को मिल गया होता। 

बिहार कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा की आलोचना करते हुए ऋषि मिश्रा ने कहा, “झा और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को इस बात पर स्पष्टीकरण देना चाहिए कि उन्होंने किस आधार पर उस्मानी को टिकट दिया।” इसके बाद उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस गाँधी की विचारधारा को मानने वाला राजनीतिक दल था जो अब जिन्ना को मानने वाला दल बन गया है। गाँधी के देश में जिन्ना की तस्वीर किसी भी सूरत में नहीं लग सकती है। 

इसके बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता और सांसद गिरिराज सिंह ने भी उस्मानी को टिकट देने के फैसले पर कॉन्ग्रेस को घेरा। उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी और महागठबंधन से पूछा कि उन्हें इस बात का जवाब देना चाहिए कि जाले विधानसभा सीट से उनका उम्मीदवार जिन्ना का समर्थन करता है या नहीं?

पशुपालन, दुग्ध और मछली पालन मंत्री सिंह ने कॉन्ग्रेस और महागठबंधन से सवाल किया कि क्या वह भी जिन्ना का समर्थन करते हैं। अंत में उनका सवाल था कि क्या उनका दल दिल्ली दंगों के आरोपित शरजील इमाम को अपना स्टार प्रचारक बनाएगा? 

इसके बाद मशकूर अहमद उस्मानी ने इन बातों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मेरी उम्मीदवारी ने मेरा विरोध करने वालों को नैतिक रूप से हरा दिया है।”

उस्मानी ने कहा कि तेजस्वी यादव महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं वह उनके नेतृत्व का समर्थन करते हैं। अंत में उस्मानी ने सोनिया गाँधी का आभार जताया कि पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है। 

मशकूर अहमद उस्मानी ने साल 2016 में छात्र राजनीति में कदम रखा था और साल 2017 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष बने। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगाए जाने के समर्थन में प्रदर्शन किया था। इतना ही नहीं, साल 2018 के दौरान उन्होंने इस मामले में दखल देने के लिए राष्ट्रपति को पत्र भी लिखा था। इसके अलावा, उस्मानी ने सीएए और एनआरसी का भी जम कर विरोध किया था।