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‘गरीब का बेटा’ जिसने 100 करोड़ रुपए में की बेटी की शादी, इनकम टैक्स को 4 लाख बोल कर ले लिया क्लीन चिट

बिहार में अमीर और गरीब के बीच की खाई इतनी ज्यादा बढ़ा दी गई है कि जहाँ एक तरफ अमीर नेताओं के निजी कार्यक्रमों में पैसा पानी की तरह बहाया जाता है, वहीं अधिकतर लोगों के पास साफ़ पीने का पानी तक नहीं होता। जंगलराज में ये खाई और ज्यादा गहरी और बड़ी थी। आज हम बात करेंगे लालू की बेटियों मीसा भारती और रोहिणी आचार्य की शादी की। लालू यादव के घर के कार्यक्रम तब पूरे देश की मीडिया में सुर्ख़ियों में छाए रहे थे।

लालू प्रसाद यादव और बिहार में जंगलराज, ये दोनों ही पर्यायवाची हैं। सोनिया गाँधी ने रिमोट कण्ट्रोल से मनमोहन सिंह की सरकार चलाई थी, महाराष्ट्र में बाल ठाकरे की रिमोट पर मनोहर जोशी थिरके थे और तमिलनाडु में जयललिता ने पनीरसेल्वम को बिठाया था। लेकिन, जिस तरह से बिहार में कभी किचेन से बाहर भी न निकलने वाली राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया गया, उसने बड़ी-बड़ी रिमोट कण्ट्रोल सरकारों को चित कर दिया।

बिहार का जंगलराज और लालू यादव की बेटी की शादी

मई 2002 में पत्रकार संतोष झा ने लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य की शादी के लिए बनाए गए मंच को किसी शादी फंक्शन के लिए बना सबसे कीमती मंच करार दिया था। उनका आकलन था कि न सिर्फ बिहार, बल्कि पूरे देश में शायद ही इतना महँगा स्टेज तैयार किया गया हो, वो भी शादी के लिए। मई 23, 2002 को हुई इस शादी के दौरान जयमाला का मंच तैयार करने के लिए 1 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।

इतना ही नहीं, अतिथियों के लिए खाने-पीने की मेनू में 150 आइटम्स थे, जिनमें से वो चुन सकते थे। बिहार का शायद ही कोई बड़ा नेता रहा होगा, जिसे इस शादी में न बुलाया गया हो। इस शादी में 100 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे, और वो भी बिहार सरकार के। ये उस राज्य की कहानी है, जिसके पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने तक के लिए रुपए नहीं थे। अब आप सोच लीजिए कि 18 साल पहले हुआ ये समारोह कितना खर्चीला रहा होगा!

तब उस समारोह में उपस्थित रहे समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता अमर सिंह ने एक मुहावरा कहा था, जो इस पूरे घटनाक्रम पर सबसे सटीक बैठता है – “जब सैंया भए कोतवाल, तो डर काहे का?” वहीं जब किसी ने लालू यादव से इतने बड़े खर्चीले समारोह को लेकर पूछा तो राजद सुप्रीमो ने कहा कि उन्होंने तो कुछ खर्च किया ही नहीं है, ये सारी व्यवस्थाएँ उनके समर्थकों और ‘शुभचिंतकों’ द्वारा की गई हैं।

ये वो शादी थी, जिसमें राजद के नेता-कार्यकर्ता तो छोड़िए, बिहार सरकार का हर महकमा लगा हुआ था, सारे अधिकारी लगे हुए थे। उस समय पूरे बिहार के कामकाज को ठप्प कर के उन अधिकारियों का एक ही उद्देश्य था – लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य की शादी। पूछने पर किसी अधिकारी ने कहा था, ‘लालू यादव और मुख्यमंत्री की बेटी, यानी बिहार की बेटी‘। यानी, लालू यादव के परिवार का विकास और चापलूसी, मतलब बिहार का भला।

राजद समर्थकों का ऐसा हुजूम था कि विपक्षी पार्टी तक के नेता इस पर बोलने से हिचकते थे। लालू यादव के राजद कार्यकर्ताओं में ऐसा क्रेज था कि उनके लिए जान लेना-देना तो जैसे इन गुंडे-बदमाशों के लिए बाएँ हाथ का खेल था। करोड़ों रुपए बहाए जा रहे थे और उसे जनता का दान बताया जा रहा था, शुभचिंतकों द्वारा की गई व्यवस्था कहा जा रहा था। ये सब कुछ इतनी बेशर्मी से हो रहा था, जैसे उन्हें किसी क़ानून, किसी जाँच का डर न हो।

लालू यादव के साले सुभाष यादव और साधु यादव सहित उनके कई नेता, हथियारों के साथ घूम रहे थे। गुंडे-बदमाश, माफिया और अपराधी ये सुनिश्चित करने में लगे हुए थे कि शादी में आने वाला हर व्यक्ति ‘शुभचिंतक’ ही हो, कोई आवाज़ उठाने की हिम्मत नहीं कर पाए। एक विपक्षी नेता ने कहा था कि बिहार में वोट डालने वाली जनता भले ही निरक्षर और गरीब हो, लेकिन वो चाहती है कि उनके नेता शक्तिशाली, साहसी और क़ानून से ऊपर हों – एक राजा की तरह।

बिहार की विडम्बना देखिए कि एक नेता खुद को गरीब का बेटा भी कहता था और फिर वो 950 करोड़ रुपए के चारा घोटाले में भी फँसा हुआ था। ऐसा व्यक्ति, जो खुद को गरीब परिवार का बता कर वोट लेता था और उसका लाइफस्टाइल ऐसा था कि बड़े-बड़े उद्योगपति भी उसके सामने फीके पड़ जाएँ। फिर वो कहता था कि उसे फँसाया जा रहा है। जब-जब उसे जमानत मिलती थी, वो क़ानून में अपना भरोसा जताता था।

यही अंतर था घोटालेबाज लालू यादव और ‘जननायक’ कर्पूरी ठाकुर में

‘ट्रिब्यून इंडिया’ में तब राजनीति में चलाए जा रहे इस कॉर्पोरेट कल्चर को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री रहे ‘जननायक’ कर्पूरी ठाकुर की बेटी की शादी को याद किया था, जो बिहार के पहले नॉन-कॉन्ग्रेस मुख्यमंत्री थे। उन्होंने अपनी बेटी की शादी के लिए कार्ड तक नहीं छपवाया था, लालू यादव ने 10,000 कार्ड्स छपवाए थे। और आपको पता है कि किन लोगों को इन कार्ड्स को बाँटने की जिम्मेदारी दी गई थी?

लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य अपनी माँ राबड़ी देवी और भाई तेजस्वी यादव के साथ

पब्लिक रिलेशन्स विभाग के अधिकारियों, इंस्पेक्टरों, पुलिस अधिकारियों और कलक्टरों को लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य की शादी के लिए आमंत्रण-पत्र वितरित करने की जिम्मेदारी दी गई थी। जबकि कर्पूरी ठाकुर ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि अगर वो उनकी बेटी की शादी की तैयारियाँ करते हुए या समारोह के आसपास भी पाए गए तो उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने अपने कैबिनेट तक के साथियों को इसकी सूचना नहीं दी थी।

जब मंत्रियों ने कर्पूरी ठाकुर से पूछा कि उन्हें कोई मदद चाहिए, तो उन्होंने जवाब दिया कि ये कर्पूरी ठाकुर की बेटी की शादी है, बिहार के मुख्यमंत्री की नहीं। 70 के दशक में उन्होंने मात्र 10-11 हजार रुपए खर्च किए थे। वहीं लालू यादव की बेटी की शादी में तो खर्च का कोई हिसाब-किताब ही नहीं था। जब कर्पूरी ठाकुर के जिले का डीएम उनके यहाँ पहुँचा तो उसे वापस जाकर अपनी आधिकारिक ड्यूटी निभाने को कहा गया।

वहीं जब लालू प्रसाद यादव अपने होने वाले समधी के घर तिलक फलदान कार्यक्रम के लिए पहुँचे, तो हिच्छन बीघा नाम के उस गाँव में 4 जिलों की पुलिस को तैनात कर के उसे किले में तब्दील कर दिया गया था। आईजी और डीआईजी के अलावा कई सारे डीएम, एसपी, डीएसपी सहित कई अधिकारियों की 50 से अधिक कारें उनकी अगवानी के लिए खड़ी थीं। उस गाँव में सड़क, बिजली, फोन और हाईस्कूल की भी सुविधा तक नहीं थी, लेकिन रातोंरात सब बना दिया गया।

लालू यादव की बेटी की शादी के दौरान कारोबारियों में मचा था आतंक

इस समारोह के लिए बिहार सरकार के खजाने से 10 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। ये रुपए सरकारी खर्च से किस मद में खर्च किए गए, ऑडिट में क्या दिखाया जाएगा और ये रुपए रखे किसलिए गए थे, इन सबका हिसाब-किताब कहीं नहीं था। पत्रकारों का यही कहना था कि काश लालू की सैकड़ों बेटियाँ होतीं, तो शायद ऐसे ही कई गाँवों की तस्वीर बदल जाती। अव्वल तो यह कि बिहार गरीब राज्य है और उस वक़्त स्थिति और खराब थी।

इस शादी के लिए कारोबारियों और व्यापारियों तक से वसूली की गई। जिस कारोबारी से जो भी सामान लिया गया, उन्हें डरा-धमका कर। लालू यादव और राबड़ी देवी आय से अधिक संपत्ति के मामले में इनकम टैक्स विभाग की कार्रवाई का सामना कर रहे थे। जब मीसा भारती की शादी हुई थी, उसके बाद ही लालू और उनके पहले समधी को आईटी नोटिस मिला था, लेकिन मजाल था कि इनके खिलाफ कोई कार्रवाई हो जाए?

हाँ, तमिलनाडु में जयललिता के बेटे और माधवराव सिंधिया की बेटी की शादी उस जमाने में पूरे भारत में भव्य मानी गई थी लेकिन जहाँ जयललिता एक बहुत बड़ी फिल्म स्टार रह चुकी थीं, सिंधिया परिवार के पास अब भी खानदानी धन-दौलत की कोई सीमा नहीं है। लालू यादव का किस्सा उलट था। उनकी संपत्ति बिहार की लूटी हुई संपत्ति थी। रोहिणी की शादी में 20 मंत्री, 40 विधायक और कई डीएम-एसपी लगे हुए थे।

मुख्यमंत्री आवास की तरफ जाने वाली सभी सड़कों को ब्लॉक कर के ट्रैफिक मेंटेन किया जा रहा था और इसमें जिला-प्रखंड स्तर के अधिकारी लगाए गए थे। बिजली, भोजन और गाड़ियों से लेकर हर चीज के लिए अलग-अलग मंत्री की जिम्मेदारी थी। अब वो भी आपस में प्रतियोगिता कर रहे थे, ताकि उनका काम सबसे बेहतर हो और मुख्यमंत्री की कृपा उन पर बरसे। विपक्षी नेता भी बयान दे रहे थे तो नाम न छपने की शर्त पर।

अपने पति के साथ लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य

पटना के 1, अणे मार्ग में जब राव समरेश सिंह बारात लेकर आए तो वो एक ‘राजसी रथ’ पर सवार थे, जो एक पुराना बिहार मिलिट्री पुलिस बग्गी था। 20 एकड़ के क्षेत्र में फैले लालू-राबड़ी के आवासों में जब बारात आई, तब 25,000 अतिथि जमा हुए थे। जबकि बाकी पटना में आतंक का माहौल था। आलम ऐसा था कि एक बड़ी कम्पनी ने पटना में अपनी दुकानों को बंद कर के कर्मचारियों को कोलकाता शिफ्ट कर दिया था।

मारुती के शोरूम वाले का तो कहना था कि उन्होंने पहले ही कई कारें दे दी थीं लेकिन इसके बावजूद उनके शोरूम से 10 लक्जरी गाड़ियाँ ले जाया गया। गाड़ियों की दुकानों में से जबरन गाड़ियाँ खिंचवा ली गईं। वहीं बिहार पुलिस लालू के डर से हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई थी और कह रही थी गाड़ियाँ वापस हो जाएँगी तो सब ठीक हो जाएगा। कुछ गाड़ियाँ वापस की तो गईं, लेकिन उन्हें खरीदने वालों ने वो गाड़ियाँ लेने से इनकार कर दिया।

‘इंडिया टुडे’ मैग्जीन में तभी छपी एक रिपोर्ट में दिए गए आँकड़ों के अनुसार, अलग-अलग शोरूम्स से न सिर्फ 50 गाड़ियाँ जबरन उठा ली गईं बल्कि 6 पंडालों को सजाने के लिए कई फर्नीचर दुकानों से 100 से भी अधिक सोफे उठा लिए गए। बिजली विभाग को 25 लाख का घाटा हुआ। बैंकॉक सहित बड़े अंतरराष्ट्रीय शहरों से फूल लाए गए। लालू खुद कहते थे कि वो आयकर विभाग के डर के बीच नहीं जी सकते।

जिस राय इंद्रजीत सिंह के बेटे से लालू की बेटी की शादी हुई, वो इनकम टैक्स विभाग में कार्यरत थे। वो 1970 बैच के आईआरएस अधिकारी थे। उनसे उनके बेटे का हाथ माँगने के लिए खुद लालू मुंबई गया था। लालू के दामाद आईटी कम्पनी में कार्यरत थे। राय इंद्रजीत सिंह की जब मृत्यु हुई थी, उसके बाद भी लालू यादव उनके घर गया था और ये वो अंतिम बार था, जब वो उनके गाँव गया। लालू फ़िलहाल जेल में सजा काट रहा है।

मीसा भारती की शादी में खर्च हुए थे मात्र 4 लाख रुपए?

इसी तरह मीसा भारती की शादी में भी 1999 में जम कर खर्च किया गया था। कई लोगों ने तब तंज कसा था कि खुद को सेक्युलर बताने वाले लालू यादव ने अपनी बेटी की शादी के लिए अपनी जाति का ही लड़का ढूँढ़ा। मीसा भारती के पति शैलेन्द्र कुमार भी आईटी इंजीनियर ही थे। मेडिकल की पढ़ाई करने वाली मीसा भारती के बारे में कहा जाता है कि जब राबड़ी देवी पहली बार मुख्यमंत्री बनी थीं, तब वो ही सरकार चलाने में उनकी सहायता करती थीं।

कहा जाता था कि मीसा भारती एकदम धूर्त टेम्पर्ड हैं और वो अधिकारियों की एक नहीं सुनती थीं। कई बार उनका अधिकारियों से झगड़ा भी हो जाता था। उनकी शादी में भी बड़े-बड़े नेताओं से लेकर फ़िल्मी हस्तियों तक का जमघट लगा था। सजावट के लिए फुल वगैरह कोलकाता से आए थे। कुल 10,000 अतिथि समारोह में मौजूद थे। क़ानून का मजाक देखिए कि इस शादी के खर्च के लिए लालू-राबड़ी को आईटी विभाग का नोटिस मिला लेकिन उन्होंने साबित कर दिया कि इसमें मात्र 4 लाख रुपए खर्च हुए हैं, और उन्हें क्लीन चिट मिल गई।

Tanishq नहीं… इस धनतेरस #VocalForLocal, स्थानीय सुनार को मिले दीपावली मनाने का मौका

भारत में कई दूसरी चीज़ों के अलावा दवा-दारू के विज्ञापनों पर भी प्रतिबन्ध है। इसका नतीजा क्या होता है? दोनों ही चीज़ें बनाने वाली कंपनियाँ दूसरे तिकड़म लगाती हैं। जहाँ दवाओं वाले डॉक्टर से साठ-गाँठ, उपहार जैसी चीज़ों के सहारे चल जाते हैं, वहीं दारू वाली कंपनियाँ दूसरी धूर्तता करती हैं। सीधे-सीधे शराब का विज्ञापन देने के बदले वो पानी-सोडा और म्यूजिक सीडी बेचने लगती हैं!

हमारी रूचि विज्ञापनों में रहती है तो हम एक “मेन विल बी मेन” वाला प्रचार देखते हैं। इस मजेदार प्रचार में होता क्या है कि पुरुष बेचारा हमेशा वैसी मूर्खताएँ करता दिखता है, जैसा आम तौर पर पुरुष करते रहते हैं। प्रचार ख़त्म होने पर पता चलता है कि मुर्खता क्या थी, और साथ ही कहा जाता है “मेन विल बी मेन”! इस सीरीज जैसे विज्ञापन में सारे प्रचार ऐसे ही होते हैं।

अब जैसे इसके एक प्रचार में दिखाते हैं कि कोई लिफ्ट है, जिसमें एक सुन्दर सी युवती घुस रही होती है। दो पुरुष उस लिफ्ट में पहले से दोनों किनारों की ओर खड़े अपने अपने मोबाइल में लगे होते हैं। अपने दफ्तर का फ्लोर आते ही जैसे ही वो लड़की उतरती है, वैसे ही दोनों साँस छोड़ते हैं और तब पता चलता है कि दोनों के दोनों इतनी देर से अपनी तोंद अन्दर किए साँस रोके खड़े थे! नेपथ्य से आवाज आती है – मेन विल बी मेन!

खैर आज जो इसी श्रृंखला का प्रचार याद आया, उसमें एक व्यक्ति हीरे की अंगूठी खरीद रहा होता है। सेल्समेन उसे एक बढ़िया अंगूठी दिखा कर पूछता है, किस मौके पर देनी है सर? वो बताता है कि पत्नी के जन्मदिन पर, और ये सुनते ही सेल्समेन कहता है, फिर तो बढ़िया पीस चुना है सर, पाँच कैरट का हीरा! वो बिलकुल बेचने वालों की मुस्कान के साथ पूछता है कब है जन्मदिन? जवाब मिलता है, कल था! सुनते ही सेल्समेन की शक्ल उतर जाती है। वो दूसरी अंगूठी उठाता है, कहता है, दस कैरट है, और ऐसे सर हिलाता है जैसे कह रहा हो, इतना तो लगेगा ही! नेपथ्य से आवाज आती है – मेन विल बी मेन!

तो मामला ये है कि तनिष्क जैसी दुकानों से जेवर कौन खरीदता है? ये या तो वो पुरुष होंगे जिन्हें उपहार में देना है, डबल इनकम नो किड (डीआईएनके) या एकल परिवार वाले भी हो सकते हैं। जो संयुक्त परिवारों में रहे स्त्री-पुरुष हैं, उन्हें अपने इलाके के स्थानीय सुनार की पैरोकारी करते आप कभी भी देख सकते हैं। वो #VocalForLocal वाले अलग-अलग जगहों के स्थानीय डिजाईन पर जोर देती स्त्रियाँ होंगी। हमने अपनी बहनों से आभूषणों का पूछा तो फ़ौरन बंगलौर के मल्लपुरम गोल्ड एंड डायमंड और कोलकाता के पीसी ज्वेलर का नाम पता चल गया।

अब सवाल है कि ऐसे में बायकॉट का तनिष्क पर क्या असर होगा? तो जिन भक्तों की औकात सोना खरीदने की नहीं थी, जिनके शोर मचाने से कुछ नहीं होता, उनके #BoycottTanishq ट्रेंड करवा देने भर से 1256 से गिरकर शेयर की कीमत 1224 पर पहुँच गई, जिसका मतलब मोटे तौर पर 2.58 प्रतिशत की गिरावट हुई है। जो कहने आ रहे होंगे कि मार्केट कई चीज़ों पर निर्भर करता है, उन्हें बताते चलें कि निफ्टी में कोई गिरावट दर्ज नहीं की गई है। हाँ लेकिन इतने पर अगर कंपनी सोच रही है कि मामला निपट चुका तो वो ग़लतफ़हमी में है। अभी #VocalForLocal बाकी है।

बायकॉट की आवाज लगाने वालों को भी सोचना होगा कि क्या उनकी आवाज सुनी भी जा रही है? जैसे एक बार के विरोध से कइयों की नौकरियाँ जा चुकी हैं, वैसा कुछ हमारे विरोध से होता भी है या चार दिन में मामला ठंडा पड़ जाने दिया जाता है? क्या विरोध दर्ज करवाने से ज़ोमेटो ने अपनी हरकतें सुधारीं या आप फिर से ज़ोमेटो से खाना मँगवाने लगे हैं?

सर्फ एक्सेल के विरोध का क्या हुआ? लगातार अलग-अलग मंचों से इस सांस्कृतिक उपनिवेशवाद का विरोध हुआ भी है या हम किसी और शबाना बनी शालिनी की मौत का इन्तजार करते रहने वाले हैं? अपने विरोध को किले की घेराबंदी जैसा स्थाई रूप देने पर भी हमें विचार करना ही होगा।

बाकी के लिए इस बार अपने स्थानीय सुनार को भी मौका दीजिए! इस धनतेरस में उसे भी तो दीपावली मनाने का मौका मिलना चाहिए ना? हॉलमार्क जैसे मानकों से लैस कई सुनार आपके आस-पास होंगे। इनके बदले, कम से कम इस बार तो उनके पास जाइए!

केंद्र के बाद योगी सरकार का बड़ा फैसला, राज्य कर्मचारियों को त्योहार पर देगी एडवांस: महिला सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति अभियान

केंद्रीय कर्मचारियों की ही तरह उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को त्योहारों पर सौगात मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आगामी त्योहारों को देखते हुए भारत सरकार ने अपने कर्मचारियों को अग्रिम धनराशि देने का निर्णय लिया है। वित्त विभाग केंद्र की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी इसी प्रकार की योजना तैयार करे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार (अक्टूबर 13, 2020) को लोकभवन में टीम 11 के साथ अनलॉक की समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के वित्त विभाग को कर्मचारियों के लिए केंद्र जैसी योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि केंद्र सरकार ने सोमवार को अपने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को त्योहारों के मौके पर 10,000 रुपए का ब्याज मुक्त अग्रिम धनराशि देने का फैसला किया था। उपभोक्ता खर्च बढ़ाकर अर्थव्यवस्था में माँग बढ़ाने की योजना के तहत केंद्र सरकार ने यह कदम उठाया था।

महिलाओं के लिए मिशन शक्ति अभियान

इसके साथ ही योगी सरकार ने यूपी में महिला अपराध पर लगाम लगाने के लिए कमर कस ली है। नवरात्र से ऐसा ही एक मिशन शुरू होने जा रहा है। इस अभियान की पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। पहला चरण मिशन शक्ति होगा, जबकि दूसरा चरण ऑपरेशन शक्ति नाम का होगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मिशन शक्ति अभियान की शुरुआत शारदीय नवरात्र से लेकर वासंतिक नवरात्र तक किया जाए। अभियान के पहले चरण में महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण के सम्बन्ध में व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। वहीं दूसरे चरण में अभियान को ऑपरेशन के रूप में संचालित किया जाएगा।

महिला सुरक्षा के हों कार्यक्रम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा व सम्मान के लिए शारदीय नवरात्रि से शुरू हो रहे मिशन शक्ति अभियान में समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी हो। व्यापारिक संस्थाओं और एमएसएमई इकाइयों में भी महिला सुरक्षा के संबंध में कार्यक्रम हों। स्टिकर आदि भी लगवाए जाएँ। 

हेल्प लाइन नंबर भी जारी किया जाए। सीएम योगी ने कहा कि 16 अक्टूबर को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा 31 हजार से अधिक सहायक अध्यापकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएँगे। 17 अक्टूबर से मिशन शक्ति का शुभारंभ होगा। प्रत्येक जिले में दोनों तिथियों पर कार्यक्रम होंगे। इनमें जिले के प्रभारी मंत्री सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाए।

वहीं मुख्यमंत्री ने कोविड-19 की रिकवरी दर की जनपदवार निगरानी के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि लखनऊ में कोविड-19 की रिकवरी दर को और बेहतर किया जाए। इसके लिए एक प्रभावी रणनीति तैयार कर जनपद में टेस्टिंग कार्य में वृद्धि के साथ-साथ एसजीपीजीआई, केजीएमयू तथा आरएमएलआईएमएस में उपचार व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जाए। 

उन्होंने अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य को अयोध्या, वाराणसी तथा सीतापुर में भी रिकवरी दर में वृद्धि सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अनलॉक की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए आने वाले समय में कई अन्य गतिविधियाँ भी शुरू हो जाएँगी। इसलिए लोगों को संक्रमण से बचाव और सुरक्षा के संबंध में निरन्तर जागरूक किया जाए।

हाथरस केस: मृतका के भाई के बयान में असमानता पाए जाने पर CBI ने लिया हिरासत में, पूछताछ के लिए अज्ञात स्थल पर ले गई टीम

हाथरस मामले में सीबीआई ने अपनी जाँच शुरू कर दी है। मंगलवार (अक्टूबर 13, 2020) को सीबीआई की टीम ने बुलगढ़ी गाँव के अलग-अलग इलाकों में जाकर छानबीन की। सीबीआई क्राइम सीन पर पहुँची थी, जहाँ पर कथित तौर पर लड़की का गला घोंटा गया था। वहाँ पर वीडियोग्राफी की गई और पीड़िता के परिवार के सदस्यों से क्राइम सीन पर ही सवाल-जवाब हुए। 

सीबीआई अधिकारियों ने मृतका के भाई की मदद से आगे की जाँच के लिए क्राइम सीन को रीक्रिएट किया। अब, यह पता चला है कि पीड़ित के भाई को हिरासत में लिया गया है और आगे पूछताछ के लिए उसके परिवार से दूर एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट में बताया गया कि पीड़िता के भाई के बयानों में कुछ असमानता पाए जाने के बाद सीबीआई ने कथित तौर पर यह निर्णय लिया है।

टाइम्स नाउ ने बताया है कि एक सीबीआई सोर्स ने समाचार चैनल को जानकारी दी है कि जाँच अधिकारियों द्वारा पीड़िता के भाई को गाँव के बाहर एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है, जहाँ उससे आगे की पूछताछ की जाएगी।

सीबीआई सूत्र के अनुसार, पीड़िता के भाई को सुबह करीब 11.30 बजे क्राइम सीन पर ले जाया गया और लगभग ढाई घंटे तक वहाँ रखा गया। उसे 14 सितंबर को घटी घटना के सीन को रीक्रिएट करने के लिए कहा, जब संदीप ने उसकी बहन पर कथित तौर पर हमला किया था। ऐसा बताया जा रहा है कि पीड़िता के भाई के आज के बयान और शुरुआत में यूपी पुलिस एवं एसआईटी को दिए बयान में काफी ज्यादा अंतर पाया गया है।

उसके बयानों में असमानता के कारण ही सीबीआई ने पीड़िता के भाई से पूछताछ करने का फैसला किया है। इससे पहले बताया गया CBI की टीम ‘नष्ट किए गए सबूतों’ को वापस लेने के लिए एक फोरेंसिक विशेषज्ञ टीम के साथ भी वहाँ गई थी। कथित तौर पर, सीबीआई के अधिकारी पीड़ित के सभी परिवार के सदस्यों का बयान भी दर्ज करेंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, सीबीआई टीम ने हाथरस मामले के संबंध में पुलिस से महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया था। जाँच एजेंसी आगे की जाँच के लिए पुलिस केस डायरी का भी अध्ययन करेगी। मामले की जाँच पूरी होने तक उनके हाथरस में ही रहने की संभावना है।

गौरतलब है कि इससे पहले जाँच के दौरान पीड़िता के भाई की कॉल डिटेल (CDR) से खुलासा हुआ था कि उसकी मुख्य आरोपित संदीप से फोन पर बात होती थी। टाइम्स नॉउ द्वारा एक्सेस किए गए कॉल रिकॉर्ड के अनुसार, अक्टूबर 2019 से मार्च 2020 के बीच लड़की के भाई के नाम से रजिस्टर्ड फोन नंबर से 100 से अधिक फोन कॉल किए गए थे।

19 वर्षीय पीड़िता का भाई कथित तौर पर आरोपित के संपर्क में था। मीडिया चैनल ने बताया था कि यह बातचीत पीड़िता के परिवार के एक सदस्य और मुख्य आरोपित संदीप के बीच हुई है। कुछ कॉल रिकॉर्डों में बताया कि यह बातचीत 15 मिनट तक चली थी।

भारत ने बनाए 44 स्ट्रैटजिक पुल तो भड़का चीन, कहा- हम लद्दाख, अरुणाचल को मान्यता नहीं देते

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा LAC के पास 44 महत्वपूर्ण पुलों के उद्घाटन के एक दिन बाद ही चीन की बौखलाहट सामने आ गई है। चीन ने बयान जारी करते हुए कहा है कि भारत ने लद्दाख को गैरकानूनी रूप से संघशासित प्रदेश घोषित किया है। साथ ही चीन द्वारा लद्दाख में इन 44 स्ट्रैटजिक रूप से महत्वपूर्ण पुलों को लेकर विरोध भी दर्ज कराया गया है।

चीन की खिसियाहट का प्रमुख कारण यह है कि भारत ने ऐसे पुल तैयार कर लिए हैं, जिससे सीमा पर चीन को धूल चटाने के लिए पुख्ता इंतजाम और आसानी से किए जा सकेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में बनाए गए 44 पुलों को सोमवार को राष्ट्र को समर्पित किया था। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान (Zhao Lijian) ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि दोनों ही पक्षों को ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए जिससे सीमा पर स्थितियाँ गंभीर हों।

गौरतलब है कि चीन की तरफ से यह बयान दोनों देशों के बीच सातवें चरण की सैन्य वार्ता के ठीक एक दिन बाद जारी किया गया है। चीन के सरकारी अखबार में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक झाओ ने कहा, “चीन गैरकानूनी रूप से बनाए गए संघशासित प्रदेश लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देता। हम विवादित क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रचर बनाने का भी विरोध करते हैं।”

बता दें कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार (अक्टूबर 12, 2020) को सीमा सड़क संगठन या बीआरओ (BRO) द्वारा निर्मित 44 पुलों का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया था। रिपोर्ट के अनुसार, ये 44 पुल बीआरओ द्वारा बनाए जा रहे 102 पुलों में से हैं। ये पुल भारत के सबसे भारी युद्धक टैंकों की आवाजाही को आसान करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी ने बताया कि जिन 44 पुलों का उद्घाटन किया गया है उनमें से 30 पुल लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक वास्तविक नियंत्रण रेखा के रास्ते में हैं। ये क्लास 70 के पुल हैं; ऐसे पुलों के लिए ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है जिसके बाद वह 70 टन वाहनों के वजन को आसानी से सहन कर सकते हैं।

गौरतलब है कि भारत का सबसे भारी युद्धक अर्जुन टैंक लगभग 60 टन का है। वहीं चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के वास्तविक नियंत्रण रेखा से पीछे न हटने के अड़ियल रुख को देखते हुए भारत ने लगभग 45 टन वाले T-90 भीष्म टैंक को पूर्वी लद्दाख सेक्टर के कई स्थानों में स्थानांतरित कर दिया था।

सेना के अनुसार, ये पुल कनेक्टिविटी में सुधार करेंगे और सैनिकों व सहायक तत्वों के तेजी से विकास की क्षमता देंगे जिससे कि एलएसी पर किसी भी स्थिति का माकूल जवाब देने के लिए सशस्त्र बलों की क्षमता में काफी बढ़ोतरी होगी।

राजस्थान कॉन्ग्रेस में फिर उठे अशोक गहलोत के खिलाफ बगावती सुर! MLA ने कहा- दलितों की सुनवाई नहीं होती

करौली में पुजारी की हत्या को लेकर बीजेपी की आलोचनाओं का सामना कर रही राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ अब उनके ही एक विधायक ने मोर्चा खोल दिया है। कॉन्ग्रेसी विधायक बाबूलाल बैरवा का अपनी ही सरकार पर जमकर गुस्सा फूटा है। कॉन्ग्रेस के एक दलित विधायक ने आरोप लगाया है कि सरकार में न तो दलित विधायकों की बात सुनी जाती है और न ही कर्मचारियों की कोई सुनवाई होती है। उन्होंने कहा कि सरकार में जो ब्राह्मण मंत्री बैठे हुए हैं वह दलितों के काम नहीं करते हैं।

कठूमर विधानसभा क्षेत्र से आने वाले कॉन्ग्रेस के विधायक बाबूलाल बैरवा ने अशोक गहलोत सरकार पर ये बड़ा आरोप लगाया है। बैरवा ने कहा, “जब भी मैं दलितों के काम के लिए कोई कागज देता हूँ वह काम नहीं होता है। अभी स्वास्थ्य विभाग में ही 4 ट्रांसफर दिए थे, जिसमें से एक ब्राह्मण थे और 3 दलित थे। ब्राह्मण का टाइटल देखकर उसका ट्रांसफर कर दिया गया, जबकि तीनों दलितों का ट्रांसफर नहीं हुआ।”

कठूमर विधायक ने ये भी कहा कि राहुल गाँधी कहते हैं कि बीजेपी दलितों और अल्पसंख्यकों को इंसान नहीं समझती है मगर यहाँ भी कॉन्ग्रेस सरकार में यही हाल है तो क्या कहेंगे। विधायक बाबूलाल बैरवा ने कहा कि सरकार बचाने के लिए हमने सचिन पायलट का साथ छोड़कर अशोक गहलोत का साथ दिया था, जबकि सचिन पायलट का मेरे ऊपर बड़ा एहसान था। पायलट ने ही टिकट दिया था और पायलट ने ही वोट दिलवाए थे। बैरवा ने कहा, “मैं गुर्जरों के वोट से जीता हूँ, अशोक गहलोत के सैनी और माली वोट मुझे मिले ही नहीं थे।” बैरवा ने कहा कि कॉन्ग्रेस को दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक वर्ग ने ही वोट दिया था बाकी सब मोदी की तरफ चले गए थे।

कॉन्ग्रेस विधायक ने इस संबंध में राहुल गाँधी को पत्र लिखा है। एक बातचीत में चिकित्सा मंत्री डॉ.रघु शर्मा व उर्जा मंत्री डॉ.बीडी कल्ला पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि ये दोनों दलित विधायकों व दलित कर्मचारियों के काम नहीं करते हैं । उन्होंने कहा, “मैं 46 साल से राजनीति में हूँ, इंदिरा गाँधी के साथ जेल गया। लेकिन सरकार में हमें प्राथमिकता नहीं मिलती और दूसरी बार विधायक बने रघु शर्मा को कैबिनेट मंत्री बना दिया गया।”

कॉन्ग्रेस विधायक का अपनी सरकार पर सवाल उठाना राजस्थान में पार्टी की अंतर्कलह को एक बार उजागर कर रही है। हाल ही में सचिन पायलट के मीडिया मैनेजर के खिलाफ केस किया गया था, जिसके बाद फिर से अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच तनातनी के तौर पर देखा गया था। अब जबकि पार्टी के ही दलित विधायक ने अशोक गहलोत सरकार पर सवाल उठाते हुए सचिन पायलट की तारीफ की है तो ऐसे में इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि मामला दूर तक जाएगा।

बता दें कि कुछ वक्त पहले ही सचिन पायलट ने अपने समर्थक विधायकों के साथ बागी हो गए थे जिससे गहलोत सरकार पर संकट आ गया था। हालाँकि, बाद में पायलट को मना लिया गया, लेकिन अब फिर से सब कुछ सही नजर नहीं आ रहा है।

हिन्दू समुदाय के लोगों द्वारा पूर्व मंत्री रसीद मसूद के रस्म तेरहवीं कार्यक्रम पर भड़के देवबंद उलेमा, कहा- यह ‘हराम’ है

हिंदू समाज द्वारा मनाई गई पूर्व केंद्रीय मंत्री काजी रशीद मसूद की रस्म तेरहवीं में पूर्व विधायक इमरान मसूद व शाजाद मसूद सहित परिवार के अन्य सदस्यों के शामिल होने पर उलमा ने कड़ा एतराज जताया है। उलमा का कहना है कि ऐसी रस्में मुस्लिमों के लिए ‘हराम’ है। 

बता दें कि इस समारोह का आयोजन बिलासपुर में मास्टर रतन लाल द्वारा किया गया था। रतन लाल, रशीद मसूद को अपना भाई मानते थे और उनका मसूद परिवार से अच्छे संबंध थे। नौ बार सांसद रहे काजी रशीद मसूद का हाल ही में कोरोना से निधन हो गया था। 

बिलासपुर गाँव में हिदू समाज ने उनकी रस्म पगड़ी का आयोजन किया। हिंदू रीति रिवाज के अनुसार मंत्रोच्चार के बीच उनके पुत्र शाजान मसूद को पगड़ी पहनाई गई। इस दौरान काजी रशीद मसूद के भतीजे और पूर्व विधायक इमरान मसूद व कई कॉन्ग्रेस नेता भी मौजूद रहे। इस कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

मदरसा जामिया शेख-उल-हिंद के मौलाना मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि इस्लाम में किसी दूसरे धर्म की परंपराओं को अपनाए जाने की सख्त मनाही है। असद कासमी ने कहा कि किसी दूसरे मजहब की रस्म तेरहवीं में मंत्रोच्चारण के बीच पगड़ी पहनाए जाना इस्लाम मजहब के खिलाफ है। इसके साथ ही उन्होंने मसूद के बेटे को हिंदू समारोह में भाग लेने के लिए अल्लाह से तौबा करने के लिए कहा। 

उन्होंने कहा कि हिंदू समाज के रस्म तेरहवीं के कार्यक्रम में मंत्रोच्चारण के बीच काजी रशीद मसूद के बेटे को पगड़ी पहनाया जाना इस्लाम के खिलाफ है। इसके लिए उन्हें अल्लाह से तौबा कर सच्चे दिल से माफी माँगनी चाहिए। मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि घर के किसी बड़े को चुनना या पगड़ी बाँधना बुरी बात नहीं है, लेकिन यह इस्लामिक रीति-रिवाजों से होना चाहिए।

उलेमा की टिप्पणी पर पूर्व केंद्रीय मंत्री काजी रशीद के भतीजे इमरान मसूद ने कहा कि हम कलमे के मानने वाले हैं। उन्हें किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। क्योंकि वो और हमारा अल्लाह ही बेहतर जानने वाले हैं। समारोह का हिस्सा रहे शाज़ान मसूद ने कहा कि ‘पगड़ी’ की रस्म पीढ़ियों से उनके परिवार का हिस्सा रही है।

बंगाल में चुनावों से पहले बेलघाट क्लब में बम धमाका, भाजपा ने लगाया TMC पर अराजकता फैलाने की साजिश का आरोप

पश्चिम बंगाल के गाँधी भवन के बेलघाट (Beleghata) क्लब की तीन मंजिला इमारत में एक बड़ा धमाका हुआ। यह धमाका मंगलवार (अक्टूबर 13, 2020) सुबह करीब 6:30 से 6:45 के बीच हुआ। इसमें इमरात की छत, सीवर पाइपलाइन पूरी तरह ध्वस्त हो गए। हालाँकि, राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी की जान नहीं गई है।

एबीपी आनंद के मुताबिक, छत पर विस्फोटक के निशान पाए गए। इसके अलावा यह भी बताया गया कि घटनास्थल पर विस्फोटकों से जुड़ी सुतली व धागे बड़ी मात्रा में सड़क पर और इमारत के बगल में पड़े मिले हैं।

घटना के बारे में जानकारी देते हुए क्लब मेंबर ने कहा, “इमारत में विस्फोटक होने का कोई सवाल ही नहीं है। जब लोग चाय के स्टॉल पर बैठे थे, तो दो लोग मास्क पहन कर वहाँ से भागे। हमें नहीं पता था कि वहाँ क्या हुआ। हम पुलिस कार्यवाई का इंतजार कर रहे हैं।”

बिल्डिंग में पहले से विस्फोटकों की बात को नकारते हुए क्लब सदस्य ने कहा कि वहाँ नीचे वाले फ्लोर पर बच्चों के लिए कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर है और इस तरह क्लब के भीतर विस्फोटक होने की कोई संभावना नहीं है।

घटना की बाबत भाजपा ने तृणमूल कॉन्ग्रेस पर राजनैतिक हिंसा को बढ़ावा देने के लिए साजिश करने का आरोप लगाया है। भाजपा के राष्ट्रीय मुख्य सचिव कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट किया, “विधानसभा चुनाव से पहले TMC पश्चिम बंगाल में बड़ी अराजकता फैलाने की कोशिश में है। आज उसका सबूत भी मिल गया जब तृणमूल के बेलघाट मेन रोड स्थित एक क्लब में भयंकर धमाका हो गया। क्लब की छत उड़कर कई मीटर दूर जा गिरी। आशंका है कि यहाँ बड़ी मात्रा में विस्फोटक छुपाकर रखा गया था।”

बता दें कि इस घटना के बाद सूचना पाते ही स्थानीय पुलिस व बालाघाट के डिप्टी कमिश्नर मौके पर पहुँचे। उन्होंने इस मामले में अपनी जाँच शुरू की। अब फिलहाल इस बात का पता लगाया जा रहा है कि परिसर में विस्फोटक आखिर आया कैसे? इसके लिए सीसीटीवी फुटेज की भी जाँच की जा रही है और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। साथ ही पड़ताल में सहायता के लिए डॉग स्कॉयड को भी बुलाया गया है।

जानवरों के हलाल पर बैन लगाने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने ‘शरारतपूर्ण’ बताकर किया खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने माँस के लिए जानवरों को हलाल (Halal) करने पर पाबंदी लगाए जाने की माँग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता अखंड भारत मोर्चा के वकील से कहा है कि यह याचिका शरारत भरी लगती है। कोर्ट इस पर सुनवाई नहीं करता कि कौन शाकाहारी हो, कौन माँसाहारी। न ही हम तय करेंगे कि कौन हलाल मीट खाएगा, कौन झटका।

याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस संजय कृष्ण कौल ने साफ टिप्पणी करते हुए कहा, “कोर्ट इस पर सुनवाई कतई नहीं करता कि कौन शाकाहारी हो, कौन माँसाहारी। जिसे हलाल मीट खानी है वो खाए, जिसे झटका मीट खानी है वह झटका मीट खाए।”

बता दें कि अखंड भारत मोर्चा की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चिकन, बकरे और अन्य पशुओं को खाने के लिए हलाल तरीके से काटने पर रोक लगाने की माँग की थी। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA) की कई धाराओं का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने कहा कि ‘हलाल’ पद्धति जानवरों के लिए दर्दनाक है।

याचिकाकर्ता ने पीसीए अधिनियम की धारा 3 का हवाला देते हुए कहा कि इसके तहत प्रत्येक व्यक्ति को पशुओं की भलाई सुनिश्चित करने के लिए उचित उपाय करना चाहिए। याचिका में आगे कहा गया है कि धारा 11 (1) (एल) के तहत, आवारा कुत्तों सहित किसी भी जानवर को मारना या किसी अन्य अनावश्यक क्रूरतापूर्ण तरीके से इस्तेमाल करना दंडनीय अपराध है। धारा 28 के तहत, किसी भी धर्म में किसी धार्मिक संस्कार के लिए जानवर की हत्या को छूट दी गई है।

वकील ने जल्लीकट्टू मामले में आवश्यकता के सिद्धांत को दोहराते हुए कहा कि भोजन के लिए जानवर की हत्या की अनुमति है। फिर भी, जानवर को मारने का तरीका जितना संभव हो उतना मानवीय होना चाहिए। हलाल में जानवर/पक्षी को काटने से लेकर, पैकेजिंग तक में सिर्फ और सिर्फ विशेष समुदाय ही शामिल हो सकते हैं। मतलब, इस पूरी प्रक्रिया में, पूरी इंडस्ट्री में एक भी नौकरी दूसरे धर्म वालों के लिए नहीं है।

यह ‘झटका’ की तुलना में अधिक दर्दनाक है। झटका में जानवर की गर्दन पर एक झटके में वार कर रीढ़ की नस और दिमाग का सम्पर्क काट दिया जाता है, जिससे जानवर को मरते समय दर्द न्यूनतम होता है। इसके उलट हलाल में जानवर की गले की नस में चीरा लगाकर छोड़ दिया जाता है, और जानवर खून बहने से तड़प-तड़प कर मरता है।

हलाल की प्रथा अपने आप में भेदभावपूर्ण है। इस्लामी कानून के अनुसार, केवल एक मजहब का व्यक्ति ही हलाल कर सकता है, इसका मतलब है कि हलाल माँस के काम में ‘काफ़िरों’ (‘बुतपरस्त’, जैसे- हिन्दू) को रोज़गार नहीं मिलेगा। यानी कि यह काम सिर्फ खास मजहब वाला ही कर सकता है। इस तरह से इस व्यवस्था ने खटिक समुदाय के हिंदू एवं सिख कसाइयों की नौकरी छीन ली। 

यह पूरा कॉन्सेप्ट ही हर नागरिक को रोजगार के समान अवसर देने की अवधारणा के खिलाफ है। बता दें कि McDonald’s और Licious जैसी कंपनियाँ सिर्फ हलाल माँस बेचती है। कई कंपनियाँ झटका मीट का ऑर्डर देने पर भी हलाल माँस बेचती है। पिछले दिनों गुरुग्राम के रहने वाले कुमार नाम के व्यक्ति ने बिगबास्केट (BigBasket) ऑनलाइन स्टोर से चिकन मँगाया। उन्होंने चिकन ऑर्डर करते समय स्पष्ट किया था कि उन्हें झटका चिकन चाहिए।

लेकिन उन्हें जो चिकन भेजा गया उस पर झटका और हलाल दोनों लिखा हुआ था। चिकन के पैकेट के अगले हिस्से पर लिखा था कि यह हलाल है और उत्पाद से जुड़ी जानकारी वाले स्टीकर पर लिखा था कि यह झटका है। 

ऑनलाइन ग्रॉसरी स्टोर बिग बास्केट (Big Basket) ने पिछले दिनों ग्राहकों से कहा था कि उनके यहाँ ‘सिर्फ हलाल मीट’ ही बेचा जाता है। बिग बास्केट के इस खुलासे के बाद विवाद खड़ा हो गया था। जिसके बाद अब बिग बास्केट ने ग्राहकों के लिए अपने प्लेटफॉर्म पर ‘झटका मीट’ उपलब्ध कराया

हिंदू-मुस्लिम एकता पर बने ‘5 Best विज्ञापन’… लेकिन सबमें सिर्फ हिंदू ही नेगेटिव और कट्टर क्यों?

अपने विज्ञापन में लव जिहाद को प्रमोट करने के कारण तनिष्क को सोशल मीडिया पर काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। हालाँकि, तनिष्क ने भले ही व्यापक स्तर पर लोगों का विरोध देखने के बाद हिंदू समुदाय से माफी माँग ली हो मगर यह पहली बार नहीं है जब किसी एड एजेंसी ने हकीकत से अलग चीजों को दिखाने का प्रयास किया है

तनिष्क से पहले भी कई उत्पादों पर हिंदू समुदाय की भावनाओं को आहत करने का इल्जाम लगा है। ऐसे उत्पादों के विज्ञापनों में न केवल हिंदुओं को कट्टरपंथी दिखाया गया बल्कि उन्हें असहिष्णु भी दर्शाया गया। वहीं दूसरे समुदाय को बेहद सौम्य व्यवहार वाला दिखाया गया।

आज हम आपके सामने ऐसे ही विज्ञापनों के 5 उदाहरण पेश करने जा रहे हैं, जिसमें सेकुलरिज्म दिखाने की कोशिश में हिंदुओं का अपमान हुआ।

यू्ट्यूब पर हिंदू-मुस्लिम पर 5 सबसे बेहतरीन एड के संकलन (5 Best Creative Indian Ads About Hindu Muslim) में कम से कम दो हिंदू विरोधी विज्ञापन हैं और तीसरे में गंगा जमुनी तहजीब को दर्शाने के लिए हिंदू लड़की का इस्तेमाल हुआ है।

इसी तरह एक विज्ञापन में हिंदू व्यक्ति को ऐसे दर्शाया गया है, जैसे उनके परिवार में ही दूसरे समुदाय के घर खाना पीने से मना किया जाता हो।

पहले प्रचार में हम देख सकते हैं कि एक हिंदू व्यक्ति गणपति बप्पा की मूर्ति खरीदने आता है और जब उसे पता चलता है कि उसे बनाने वाला विशेष समुदाय का है तो वह असहज दिखने लगता है। आगे विज्ञापन में दिखाया जाता है कि इसके बाद मुस्लिम व्यक्ति सब समझ जाता है और अपनी बातों से उसका दिल जीत लेता है। फिर, हिंदू युवक को गलती का एहसास होता है और वह मूर्ति खरीदने का फैसला करता है।

दूसरे विज्ञापन में हिंदू दंपत्ति को पहले मुस्लिम महिला के घर जाने से मना करते हुए दिखाया जाता है, लेकिन जैसे ही उसके घर से चाय की खुशबू आती है, वह दोनों किसी बहाने वहाँ चले जाते हैं और रेड लेबल चाय के स्वाद में डूब कर एक और कप चाय माँग लेते हैं।

तीसरा एड सर्फ एक्सेल का है। एक बच्ची इसमें सभी हिंदू बच्चों से अपने ऊपर रंग फेंकने को कहती है फिर जब सबके पास रंग खत्म हो जाते हैं तो वह एक मुस्लिम लड़के को अपने साइकल के पीछे बिठाती है और मस्जिद तक छोड़कर आती है और बाकी बच्चे भी यह देखने के बाद रंग फेंकने से गुरेज करने लगते हैं।

फिर एक और वीडियो! राहुल नाम के एक बच्चे को इसमें उसकी माँ पंडित को खाना खिलाने भेजती है, लेकिन वह पहुँच मस्जिद जाता है और फिर मौलवी को खाना खिलाकर जब घर लौटता है तो माँ पूछती है कि पंडितजी ने क्या कहा। जिस पर बच्चा जवाब देता है- बिस्मिल्लाह रहमान ए रहीम। इसे सुन माँ हैरानी से पूछती है कि राहुल, तुम कहाँ गए थे। पूरा वीडियो देखकर बस यही लगता है कि जैसे सेकुलरिज्म का दारोमदार हिंदुओं के कंधे पर ही है।

इसी प्रकार एक शॉर्ट फिल्म में बाइक चोरी होती है। हिंदू युवक एक मुस्लिम व्यक्ति को उसकी बाइक पर गणपति बप्पा की फोटो देखकर पकड़ लेते है। वीडियो के शुरू से ही इस्लामी टोपी पहने लड़के को सिर्फ़ डरा हुआ दर्शाया जाता है। हालाँकि, बाद में वो बताता है कि उसने अपनी बाइक पर गणेश जी की फोटो इसलिए लगाई है क्योंकि उसे एक हिंदू आदमी ने दिल दिया था और वह गणेश जी का भक्त था। इसलिए उसने अपनी गाड़ी पर इसे लगाया।

कुल 5 विज्ञापनों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि हिंदुओं को लेकर एड एजेंसी किस तरह की तस्वीर समाज में परोस रही है। गंगा जमुनी तहजीब दिखाने के लिए हिंदुओं को नकारात्मक दर्शाया जाता है और दूसरा समुदाय अचानक से बहुत शांत, सरल, सहिष्णु हो जाता है जबकि हकीकत इससे कोसों दूर है। अजेंडा चलाने के लिए न केवल तनिष्क बल्कि तमाम कंपनियाँ सेकुलरिज्म का सारा भार सिर्फ़ हिंदुओं के ऊपर मढ़ रही हैं।