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पुजारी हत्याकांड: राजस्थान HC में याचिका दायर, केंद्रीय जाँच एजेंसी के हस्तक्षेप के साथ परिवार के लिए माँगी सुरक्षा

राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए एक पत्र में याचिकाकर्ता ने केंद्रीय एजेंसी द्वारा बाबूलाल वैष्णव नाम के 50 वर्षीय मंदिर के पुजारी की हत्या में पारदर्शी, स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच की माँग की है। बता दें कि राजस्थान के करौली जिले के सपोटरा इलाके में जमीन विवाद 50 वर्षीय पुजारी बाबूलाल वैष्णव में को 6 लोगों ने पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया था। आरोपित मंदिर की भूमि पर कब्जा करना चाहते थे।

याचिकाकर्ता ने माँग की है कि जाँच राजस्थान पुलिस से लेकर केंद्रीय जाँच एजेंसी को सौंप दिया जाए। मामले की तत्काल सुनवाई की माँग करते हुए, पत्र में लिखा गया है, “यह विनम्रतापूर्वक प्रार्थना की जाती है कि (न्यायालय) इस पत्र पर उचित कार्यवाही शुरू करे, जिसमें निहित शक्तियों को शामिल किया जाए और उपयुक्त पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए सूची बनाई जाए।”

इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने पीड़ित परिवार की सुरक्षा की माँग की है, जो लगातार खतरे में रह रहे हैं। पत्र में कहा गया, “यह विनम्रतापूर्वक प्रार्थना की जाती है कि (न्यायालय) पीड़ितों को तत्काल सुरक्षा प्रदान करें, क्योंकि उनका जीवन खतरे में है।” पत्र में आरोपितों और अन्य लोगों के खिलाफ निरोधक आदेश भी माँगा गया था, जो पीड़ित के परिवार को नुकसान या हानि पहुँचा सकते हैं।

गौरतलब है कि राजस्थान में करौली जिले के बूकना गाँव में जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद में 50 वर्षीय पुजारी बाबूलाल वैष्णव को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया। बताया जाता है कि बुधवार शाम को कैलाश, शंकर, नमो, किशन, रामलखन जमीन पर कब्जा कर छप्पर तानने लग गए। बुजुर्ग पुजारी ने उन्हे रोकने का प्रयास किया तो आरोपितों ने बाजरे की कड़बी और पेट्रोल की बोतल डालकर आग लगा दी। इससे पुजारी बुरी तरह झुलस गए।

बाबूलाल वैष्णव को गंभीर हालत में जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया था और शुक्रवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। इस बीच, राज्य के साधुओं ने मंदिर के पुजारी की हत्या के विरोध में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। बाबूलाल गाँव के राधागोविंद मंदिर के प्रधान पुजारी थे।

पाकिस्तान: मंदिर में मूर्तियाँ तोड़ने वाला मोहम्मद इस्माइल शैदी गिरफ्तार, पुलिस ने कहा- आरोपित की मानसिक स्थिति की जाँच करेंगे

पाकिस्तान के सिंध के बदीन ज़िला स्थित कड़ियू घनौर शहर में शनिवार (अक्टूबर 10, 2020) को एक हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़ की घटना सामने आई है। स्थानीय पुलिस ने इस मामले में मोहम्मद इस्माइल शैदी नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया की शिकायतकर्ता अशोक कुमार ने इस मामले की जानकारी दी है। कुमार ने आरोप लगाया कि संदिग्ध मुहम्मद इस्माइल ने गाँव के मंदिर में तोड़फोड़ की। इस्माइल ने मंदिर में रखी मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया और फिर मौके से फरार हो गया। कड़ियू घनौर पुलिस ने पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 295(ए) के तहत मामला दर्ज कर अभियुक्त मोहम्मद इस्माइल शैदी को गिरफ्तार कर लिया है।

बदीन के एक पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि एफआईआर दर्ज होने के कुछ ही घंटों के भीतर इस्माइल को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा, “अभी यह पुष्टि होनी बाकी है कि आरोपित (इस्माइल) मानसिक रूप से स्थिर है है या नहीं। साथ ही पुलिस इस बात का भी पता लगाएगी कि क्या उसने जानबूझकर मूर्तियों को नुकसान पहुँचाया है।” वहीं इस मामले में बदीन के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शबीर सेठार ने 24 घंटे के भीतर जाँच रिपोर्ट माँगी है।

वहीं पाकिस्तान के हिंदू समुदाय ने इस हमले पर गुस्सा और नाराजगी व्यक्त की है। ‘वॉइस ऑफ पाकिस्तान’ नाम से एक ट्विटर एकाउंट ने हिंदू मंदिर पर हुए हमले पर आपत्ति जताते हुए ट्वीट करते हुए कहा, “कल बदीन में एक और हिंदू मंदिर श्री रामदेव कादियोघंवर मंदिर धार्मिक को एक कट्टरपंथी द्वारा अपमानित किया गया। धार्मिक अल्पसंख्यकों की भी भावनाएँ हैं। अब दोषारोपण के खिलाफ ईश निंदा के मामले क्यों नहीं उठाए गए?”

गौरतलब है कि पाकिस्तान में हिंदू सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है। यह मामला पाकिस्तान राज्य में अल्पसंख्यकों की विकट परिस्थितियों का एक और उदाहरण है। हिंदू पाकिस्तान में सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय का गठन करते हैं, लेकिन हिंदू मंदिरों के खिलाफ बर्बरता की बार-बार रिपोर्ट दी गई है।

‘मगहिया डॉन’ अनंत सिंह: सोने का मुकुट पहन किया था विरोधी के घर हमला, ₹3 लाख से 68 करोड़… सिर्फ 15 साल में

बिहार में जब भी चुनाव की बात होती है, वहाँ के बाहुबलियों का जिक्र जरूर होता है। बिहार के बाहुबलियों के जिक्र के बिना वहाँ की राजनीतिक चर्चा अधूरी सी रहती है। बिहार में कई ऐसे बाहुबली हुए हैं, जो लोगों के बीच भय का दूसरा नाम बन गए थे। इसी श्रृंखला में आज हम बात करेंगे मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह (Anant Singh) की, जिन्‍होंने राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के टिकट पर मोकामा से विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन किया है।

मोकामा सीट पर अनंत सिंह की पत्‍नी नीलम देवी ने भी नामांकन किया है। चुनावी हलफनामे में अनंत सिंह ने अपने ऊपर चल रहे मुकदमों और संपत्ति के बारे में जानकारी दी है। अनंत सिंह पर ज्यादा केस होने की वजह से उन्हें नामांकन रद्द होने का खतरा है। इसलिए अनंत सिंह ने अपनी पत्नी नीलम देवी को भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन करवाया है। अगर अनंत सिंह का नामांकन खारिज नहीं होता है तो उनकी पत्नी नीलम देवी अपना नाम वापस ले लेंगी। यानी चित भी मेरी और पट भी मेरी।

अनंत सिंह को उनके समर्थक ‘छोटे सरकार’ और मगहिया डॉन कहते हैं। जिस अनंत सिंह को कल तक तेजस्वी यादव असामजिक तत्‍व कह कर नकार रहे थे, आज वही अनंत सिंह राष्‍ट्रीय जनता दल का ‘दुलारा’ बन गया है। 

राजनीति में लालू यादव के धुर विरोधी रहे अनंत सिंह अब उनके बेटे तेजस्वी को सीएम बनाने के लिए वोट माँगेंगे। नीतीश कुमार से बगावत के बाद ‘छोटे सरकार’ का लालू प्रेम उमड़ने लगा था। उसी का नतीजा था कि 2019 के लोकसभा चुनाव में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को मोकामा से टिकट मिल गया। हालाँकि वह जदयू के ललन सिंह से चुनाव हार गई थीं। अनंत सिंह की पत्नी के लिए तेजस्वी यादव भी वोट माँगने मुंगेर गए थे। लेकिन 2015 के विधानसभा चुनाव में लालू यादव मंच से अनंत सिंह के खिलाफ आग उगलते थे।

बाहुबली अनंत सिंह यहाँ से चार बार से विधायक हैं। 2015 में निर्दलीय लड़े थे। इस बार राजद ने उन्हें टिकट दिया है। पिछली बार भी नॉमिनेशन के वक्त वो जेल में थे और इस बार भी। जेल से कुछ समय के लिए कड़ी सुरक्षा में बाहर निकले और नामांकन दाखिल किया। उन्होंने जो एफिडेविट दाखिल किया है उसके मुताबिक उनकी संपत्ति और क्रिमिनल केस लगातार बढ़ रहे हैं।

5 साल में ढाई गुना बढ़ी संपत्ति, 38 मामलों में नामजद

अनंत सिंह ने सिर्फ अपनी प्रॉप्रटी में ही इजाफा नहीं किया है, बल्कि उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमों में भी पिछले 5 साल में दोगुने से ज्यादा का उछाल आया है। साल 2015 में अनंत सिंह के ऊपर 16 क्रिमिनल केस थे जबकि इस बार वह कुल 38 मामलों में नामजद हैं। अनंत सिंह जब से विधायक बने हैं, तब से संपत्ति के मामले में तो उन्होंने वाकई दिन दुगनी, रात चौगुनी तरक्की की है।

चुनावी हलफनामे को देखने से पता चलता है कि बाहुबल के साथ अनंत सिंह का धन बल भी बढ़ता गया है। अनंत सिंह अब धनबली भी हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में चुनावी हलफनामे के अनुसार अनंत सिंह के पास 28 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति थी। लेकिन 2020 के विधानसभा चुनाव में यह ढाई गुनी बढ़ गई है। अब उनकी संपत्ति 68.55 करोड़ रुपए तक पहुँच गई है।

कैश में हुआ भारी इजाफा

अनंत सिंह के पास कैश में भी भारी इजाफा हुआ है। 2015 के हलफनामे के अनुसार उनके पास 40,800 रुपए नगद था। जबकि उनकी पत्नी नीलम देवी के पास 3,91,440 रुपए थे। वहीं, 2020 में अनंत सिंह के पास 50 गुना से अधिक कैश बढ़ गया है। उनके शपथ पत्र के अनुसार अनंत सिंह के पास 22,13,488 रुपए हैं। वहीं, पत्नी नीलम देवी के पास इस बार 11,83, 414 रुपए कैश हैं। हालाँकि इतनी बड़ी संख्या में कैश उनके पास आया कहाँ से, इसकी कोई जानकारी नहीं है। 

15 साल में 2 हजार गुना बढ़ गई संपत्ति

पिछले 15 सालों में अनंत सिंह की संपत्ति में भारी इजाफा हुआ है। पहली बार जब वह 2005 में विधानसभा चुनाव लड़े थे, तब उनके पास संपत्ति महज 3.40 लाख रुपए की थी। 2010 में यह बढ़ कर 38.84 लाख रुपए की हो गई। 2015 में यह 28 करोड़ के करीब पहुँची और 2020 में 68 करोड़ पार कर गया है। इससे आप सहज अंदाजा लगा सकते हैं कि अनंत सिंह की संपत्ति किस रफ्तार के साथ बढ़ी है।

पत्नी के पास 2 लग्जरी कार

अनंत सिंह ऐसे तो लग्जरी गाड़ियों के शौकीन हैं। वह बिहार में मर्सिडीज की सवारी करते भी नजर आते हैं। लेकिन उनके पास खुद की सिर्फ एक 2003 मॉडल की स्कॉर्पियो है, जिसका बाजार मूल्य अभी 6 लाख रुपए है। जबकि उनकी पत्नी नीलम देवी के पास 25 लाख रुपए से अधिक की इनोवा क्रिस्टा है और एक 32.52 लाख की फॉर्च्यूनर है। एक 2018 और एक 2019 मॉडल की गाड़ी है। यानी दोनों गाड़ियों को उन्होंने हाल ही में खरीदा है।

पत्नी भरती है 1.20 करोड़ से ज्यादा रिटर्न

बाहुबली विधायक अनंत सिंह से ज्यादा उनकी पत्नी नीलम देवी के पास संपत्ति है। नीलम देवी की कमाई में 2017-18 के बाद जबरदस्त इजाफा हुआ है। 2017-18 तक नीलम देवी 57,83,029 रुपए रिटर्न फाइल करती थीं। इस दौरान अनंत सिंह महज 7,62,991 रुपए रिटर्न के रूप में फाइल करते थे। लेकिन 2019-2020 में अनंत सिंह ने 8,86,143 रुपए रिटर्न फाइल किए हैं। जबकि उनकी पत्नी नीलम देवी इस दौरान 1,20,30,261 रुपए रिटर्न फाइल की है। 2017-18 से तुलना करें, तो दोगुनी रिटर्न फाइल की है। यानी 2018-20 के बीच में अनंत सिंह की संपत्ति में भारी वृद्धि हुई है। ये आँकड़े तो इसी ओर इशारा कर रहे हैं।

मुकदमों का जाल भी बढ़ा है

धनबल के साथ ही अनंत सिंह का बाहुबल भी बढ़ा है। 2015 के विधानसभा चुनाव में उनके ऊपर 25 से ज्यादा केस दर्ज थे। वहीं, 2020 में अनंत सिंह ने अपने चुनावी हलफनामे में 38 केस का जिक्र किया है। इससे साफ जाहिर होता है कि उनका बाहुबल भी बढ़ा है। 2019 में उनके घर से एके-47 और बम भी मिला था। हथियार बरामदगी के बाद अनंत सिंह के खिलाफ आर्म्स एक्ट, गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।

मामले में अनंत सिंह ने दिल्ली के कोर्ट में जाकर सरेंडर किया था। उसी मामले में वह बेऊर जेल में बंद हैं। केस की जाँच अभी जारी है। हालाँकि अनंत सिंह पहली बार जेल नहीं गए हैं। अनंत सिंह अपनी जिंदगी में पहली बार 9 साल की उम्र में ही जेल जा चुके हैं। फिर कुछ दिनों में वापस भी छूट कर आ गए थे, लेकिन उसके बाद अपराध की दुनिया में उनका जलवा लगातार कायम है। अनंत सिंह के आतंक का अंदाजा का इसी बात से लगाया जा सकता है कि मोस्ट वॉन्टेड की लिस्ट में शामिल होने के बावजूद पुलिस के पास उसकी कोई फोटो उपलब्ध नहीं थी। पुलिस उस क्षेत्र में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाती थी।

कभी रहे नीतीश के करीबी, लालू के कारण छोड़ना पड़ा था जदयू

कभी मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी रहे अनंत सिंह फिलहाल पटना के बेउर जेल में हैं। 2005 से 2014-15 तक अनंत सिंह मोकामा के जदयू विधायक रहे। उन दिनों लोकसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव करीब आ चुके थे। दोनों नेताओं ने महागठबंधन के बैनर तले कॉन्ग्रेस के साथ 2015 का विधानसभा चुनाव लड़ा। 

इसी बीच 2015 में बाढ़ में एक युवक पुटुस यादव का अपहरण कर उसकी हत्‍या कर दी गई। इस हत्याकांड में अनंत सिंह का नाम आया। इससे लालू प्रसाद यादव काफी नाराज हाे गए, जिसका खामियाजा अनंत सिंह को भुगतना पड़ा। अतंत: सिंह को न केवल राजद छोड़ना पड़ा, बल्कि जेल भी जाना पड़ा। आज अनंत सिंह उसी लालू यादव के बेटे के लिए वोट माँग रहे हैं।

2015 में मोकामा से निर्दलीय जीत गए चुनाव, जदयू को हराया

इसके बावजूद अनंत सिंह ने निर्दलीय चुनाव जीता। उन्‍होंने चुनाव में जदयू के प्रत्‍याशी को भारी अंतर से हरा दिया। बिहार में महागठबंधन की सरकार टूटने के बाद भी अनंत सिंह की जदयू से दूरी बरकरार रही तो वे राजद के भी निशाने पर रहे। समय-समय पर तेजस्‍वी यादव उन्‍हें असामाजिक तत्‍व कह खारिज करते रहे। लेकिन इस बार समीकरण बदले दिख रहे हैं।

जदयू के राजीव लोचन से मुकाबला

मोकामा में अनंत सिंह का मुकाबला जदयू के उम्मीदवार राजीव लोचन सिंह से होगा। 2015 के विधानसभा चुनाव में मोकामा से 20 लोगों ने नामांकन दाखिल किया था। 15 लोग मैदान में थे, जिनमें से 13 की जमानत जब्त हो गई थी। अनंत सिंह का मुकाबला जदयू के नीरज कुमार से था, जिन्हें अनंत ने 18348 वोट से हराया था। अनंत सिंह को 54005 वोट मिले थे।

2005 फरवरी में हुए विधान सभा चुनाव में अनंत सिंह जदयू के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते थे। उसी साल 8 महीने बाद विधानसभा का चुनाव दूसरी बार हुआ और उसमें भी अनंत सिंह जदयू के ही उम्मीदवार थे। उस वक्त मोकामा से वो जीते भी। यह सिलसिला 2010 के चुनाव में भी जारी रहा। लेकिन बिखराव 2014 में आया। तब लोकसभा चुनाव से पहले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की दोस्ती हो चुकी थी।

महिला से दुष्कर्म और हत्या के केस में बाहुबली विधायक का नाम

अनंत सिंह के खौफ और रसूख के किस्से पूरे बिहार में सुनने को मिलते रहते हैं। साल 2007 में एक महिला से दुष्कर्म और हत्या के केस में बाहुबली विधायक का नाम आया था। जब इसके बारे में एक निजी समाचार चैनल के पत्रकार उनका पक्ष जानने पहुँचे तो सत्ता के नशे में चूर विधायक और उनके गुंडों ने पत्रकार की जमकर पिटाई की। मामले ने तूल पकड़ा और विधायक की गिरफ्तारी भी हुई थी।

अनंत सिंह के आवास पर छापेमारी, आठ लोगों की गई थी जान

इससे पहले अनंत सिंह के घर पर मोकामा में साल 2004 में जब बिहार पुलिस की एसटीएफ ने छापेमारी की तब दोनों तरफ से घंटों गोलीबारी हुई। दरअसल, अनंत सिंह ने महलनुमा बने अपने आवास में कई समर्थकों को शरण दे रखी थी, जिससे पुलिस की छापेमारी में वह आसानी से बच जाए। इसके अलावा खुद को सुरक्षित रखने के लिए उसने एक विशेष कमरे का निर्माण भी कराया था। इस घटना के बाद अनंत सिंह सुर्खियों में आए। इस गोलीबारी में एक पुलिसकर्मी समेत अनंत सिंह के आठ समर्थक मारे गए। कहा जाता है कि इस घटना में विधायक को भी गोली लगी थी लेकिन वह फरार हो गया।

अपराध की दुनिया का बादशाह बनने के बाद अनंत सिंह ने सियासी गलियारों में भी अपनी पैठ बनानी शुरू की। इसी दौरान अनंत सिंह की मुलाकात नीतीश कुमार से हुई और 2005 में वह मोकामा से जदयू के टिकट पर चुनाव जीत गए। इसके बाद साल 2010 में भी वह जदयू के टिकट पर मोकामा से विधायक चुने गए। साल 2015 के चुनाव में लालू की पार्टी आरजेडी से गठबंधन के कारण जदयू ने सियासी नुकसान को देखते हुए अनंत सिंह का टिकट काट दिया। हालाँकि अनंत सिंह निर्दलीय चुनाव में उतरे और जीत हासिल की।

अनंत सिंह और नीतीश की दोस्ती

अनंत सिंह और नीतीश कुमार की दोस्ती की नींव साल 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान पड़ी थी। उस समय नीतीश कुमार बाढ़ संसदीय क्षेत्र से सांसद और अटल सरकार में रेलमंत्री थे। नीतीश के खिलाफ आरजेडी-लोजपा ने बाहुबली सूरजभान को मैदान में उतारा था। उस चुनाव में अनंत सिंह ने नीतीश की खूब मदद की।

इसके अलावा एक जनसभा के दौरान अनंत सिंह ने नीतीश को चाँदी के सिक्कों से तौला था। इसके बाद से ही अनंत सिंह नीतीश कुमार के करीबी बन गए और पूरे प्रदेश में उनकी तूती बोलने लगी। लेकिन साल 2015 में आरजेडी से जदयू की नजदीकियों के कारण अनंत सिंह किनारे कर दिए गए। वहीं से उनके बुरे दिन की शुरूआत हुई।

पटना के पॉश इलाके में है जमीन

अनंत सिंह के पास पटना के पॉश इलाके में भी करोड़ों की जमीन है। पटना से सबसे वीआईपी इलाका पाटलिपुत्र में उनकी जमीन है। इसके अलावा शहर के बीचोंबीच और पटना के फिनांस हब बंदर बागीचा में भी उनके पास प्लॉट है। साथ ही बिरला मंदिर रोड पर भी उनकी संपत्ति है। इसके अलावे बोरिंग कनाल रोड में भी उनकी जमीन है। साथ ही गौतम बुद्ध नगर यूपी में भी अनंत सिंह का प्लॉट है। इन सभी की कीमत 5 करोड़ रुपए के करीब आँकी गई है।

अनंत सिंह के शौक भी अनंत

2013 में अनंत सिंह फिर चर्चा में आए, जब वह अपनी शानदार मर्सडीज छोड़कर बग्घी पर सवार होकर विधानसभा पहुँचे। पटना की सड़क पर खुद बग्घी चलाकर निकला और देखने वाले देखते रह गए। खास बात यह हैकि इस बग्घी में लाइट और म्यूजिक सिस्टम भी लगा हुआ था। अनंत सिंह जानवार पालने के भी शौकीन हैं। उनके पास करीब 2 लाख रुपए के हाथी, घोड़े, गाय और भैंस हैं।

साभार: सोशल मीडिया

अपनी अजीबोगरीब शौक को लेकर भी वह चर्चा में रहते हैं। हाथी, घोड़ा और गाय पालने के शौकीन अनंत सिंह को हथियारों का भी शौक है। कहते हैं कि अगर उन्हें कोई घोड़ा पसंद आ जाए, तो उसे खरीदे बिना चैन नहीं लेते। इसको ऐसे भी समझिए कि एक बार अनंत सिंह को लालू प्रसाद का एक घोड़ा पसंद आ गया। वो उसे खरीदना तो चाहते थे, लेकिन उन्हें ये भी पता था कि लालू उन्हें ये घोड़ा नहीं बेचेंगे। तो उन्होंने किसी दूसरे से वो घोड़ा खरीदवाया और बाद में उस घोड़े पर बैठकर मेला घूमने गए। एक बार उन्हें एक शख्स की मर्सिडीज पसंद आ गई थी, तो इन्होंने उसे कुछ दिनों के लिए रख लिया था।

साभार: सोशल मीडिया

जब सोने का मुकुट पहन राजा की तरह किडनैपर्स पर हमला किया था

नब्बे का दशक बिहार के माथे पर लगा वो कलंक है, जिससे दशकों तक यह राज्य जूझता रहेगा। समय-दर-समय और शहर-दर-शहर अपराध होते रहे और सरकार चादर तानकर सोती रही। कानून की किताब में शायद ही कोई ऐसी धारा बची हो, जिसके तहत अनंत सिंह के नाम पर केस दर्ज न हो। अनंत सिंह पर ढाई दर्जन से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं।

इनमें कत्ल, अपहरण, फिरौती, डकैती और बलात्कार जैसे तमाम संगीन मामले शामिल हैं। अकेले बिहार बाढ़ थाने में ही कुल 23 संगीन मामले दर्ज हैं। ये बात दीगर है कि अनंत सिंह अपने रसूख से इनमें से कई मामलें में बरी हो चुके हैं।

इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि 1990 के दशक में इसके पास के ही गाँव के बदमाश ने बाढ़ बाजार से एक व्यापारी को किडनैप कर लिया था। पुलिस कुछ कर नहीं पाई और मामला अनंत सिंह के पास गया। अनंत ने अपने गुर्गों के साथ किडनैपिंग करने वालों के घर पर धावा बोल दिया। दोनों ओर से जबरदस्त गोलीबारी हुई, जिसमें कई लोग मारे गए।

हालाँकि बाद में इस घटना ने जातिवादी रंग ले लिया और मामले में राजनीति शुरू हो गई और कई बड़े नेता भी इस लड़ाई में कूद गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि जब वो किडनैपर्स पर धावा बोलने आया तो वह (अनंत सिंह) घोड़े पर सवार होकर सबसे आगे चल रहा था और इतना ही नहीं अनंत सिंह ने अपने सिर पर सोने का मुकुट पहना हुआ था। यह उसका जताने का तरीका था कि वह एरिया उसका है और वही वहाँ का राजा भी है।

महज 9 साल की उम्र में पहली बार जेल जाने वाले अनंत सिंह का सियासी सफर जैसे जैसे आगे बढ़ता जा रहा है वैसे-वैसे उनकी अपराध की ‘अनंत’ कथा में नए-नए अध्याय भी जुड़ते जा रहे हैं, लेकिन अनंत सिंह की ‘अनंत’ अपराध कथा पर मौन हैं उनके सरपस्त नेता।

हाथरस ‘भाभी’ पर चला सरकारी डंडा, जहाँ करती है नौकरी… वहाँ से मिला नोटिस, एक हफ्ते में देना होगा जवाब

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जिस महिला ने खुद को हाथरस मृतका की भाभी बताया था, उसके विरुद्ध मामला दर्ज किया जा चुका है। इसके अलावा नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर नोटिस भी भेज चुका है, जहाँ वह कार्यरत हैं। मेडिकल कॉलेज के डीन ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि उन्होंने महिला (भाभी) को नोटिस जारी कर दिया है। 

मेडिकल कॉलेज के डीन पीके कसर ने बताया कि फॉरेंसिक विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉक्टर राजकुमारी बंसल ने 4 अक्टूबर से 6 अक्टूबर तक का अवकाश लिया था। इस दौरान वह बिना कॉलेज प्रशासन को सूचित किए हाथरस मामले में मृतका के परिजनों से मिलने गई थीं। इसके बाद डीन ने बताया कि वह इस तरह के मामलों में होने वाले प्रदर्शन का हिस्सा नहीं बन सकती हैं क्योंकि वह सरकारी कर्मचारी हैं। 

उनका कहना था, “हमें इस बात की जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स के ज़रिए मिली कि राजकुमार बंसल हाथरस घटनाक्रम के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। फ़िलहाल उन्हें हमारी तरफ से नोटिस जारी किया जा चुका है और उनसे एक हफ्ते के भीतर जवाब भी माँगा गया है। राजकुमारी बंसल के जवाब के आधार पर हम इस मामले पर आगे की कार्रवाई करेंगे।”     

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राजकुमारी बंसल ने दावा किया था कि वह मेडिकल रिपोर्ट की जाँच करने के लिए हाथरस गई थी क्योंकि वह फॉरेंसिक एक्सपर्ट हैं। इसके अलावा उनका ऐसा भी कहना था कि वह मानवता के नाते मृतका के परिवार वालों से मिलने गई थी। 

राजकुमारी बंसल ने अपने बयान में कहा था कि हाथरस घटना की जानकारी मिलने के बाद उन्हें दो दिन तक नींद नहीं आई थी। वह परिजनों को सहानुभूति देने और संवेदना व्यक्त करने के लिए हाथरस गई थी और उनके निवेदन पर रुकने का फैसला किया। उनके रुकने के दौरान भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर भी परिजनों से मिलने आए थे। तभी कई मीडिया वालों ने इस मुद्दे पर उसके वीडियो रिकॉर्ड किए थे, जो फ़िलहाल सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं। 

इसके बाद राजकुमारी बंसल ने अपने बयान में कहा, “बहुत से लोग मुझे माओवादी बुला रहे हैं, मेरे ऊपर झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। जितने भी लोग मेरी छवि को बदनाम करने के लिए मेरे वीडियो वायरल कर रहे हैं, मुझ पर झूठे आरोप लगा रहे हैं… मैं उन सभी के विरुद्ध मामला दर्ज कराऊँगी।”

आपको बता दें कि 19 साल की लड़की का गला दबाया गया था और 29 सितंबर को गम्भीर चोटों और गहरे घावों की वजह से उसकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद से ही हाथरस मामला मीडिया और राजनेताओं के लिए प्रोपेगेंडा का माध्यम बन गया है। ख़बरों के अनुसार नक्सलवादियों से जुड़ी महिला ने खुद को लड़की की भाभी बताया था। वह महिला (भाभी) लड़की के परिजनों के घर रह रही थी और उस पर यह भी आरोप है कि वह उन्हें सिखा रही थी कि मीडिया के सामने क्या और कैसे बोलना है।     

‘वर्दी में झूठ बोला परमबीर सिंह ने, राष्ट्रवादी से पंगा लिया’: रिपब्लिक TV के प्रदीप भंडारी ने माँगा मुंबई पुलिस कमिश्नर का इस्तीफा

अर्नब गोस्वामी के बाद अब रिपब्लिक टीवी के कंसल्टिंग एडिटर और पत्रकार प्रदीप भंडारी ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को निशाने पर लिया है। प्रदीप भंडारी ने पुलिस कमिश्नर को उनके राजनीतिक आकाओं के इशारे पर काम करने और पुलिस की वर्दी का सम्मान नहीं करने के लिए फटकार लगाई और उनका इस्तीफा माँगा है। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास में, उनके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत आरोप दायर करने की योजना बना रही है।

बता दें कि 8 अक्टूवर को आयोजित की गई प्रेस वार्ता में मुंबई पुलिस कमीश्नर ने रिपब्लिक टीवी और अर्नब गोस्वामी पर कई गम्भीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि चैनल ने टीआरपी से जुड़ी जानकारी में बदलाव करने के लिए आम लोगों को रुपए दिए थे और उनसे कहा गया था कि वह चैनल लगा कर अपना टीवी चालू रखें। हालाँकि, देर रात तक यह बात भी सामने आ गई कि एफ़आईआर में कहीं भी रिपब्लिक टीवी का ज़िक्र नहीं था, बल्कि उसमें समाचार चैनल ‘इंडिया टुडे’ का नाम शामिल था। 

रिपब्लिक टीवी पर मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह द्वारा लगाए गए ‘फर्जी टीआरपी बटोरने’ का आरोप को अर्नब गोस्वामी ने सिरे से खारिज करते हुए उन्हें बेनकाब कर दिया था। साथ ही रिपब्लिक टीवी ने बताया कि उन्होंने ‘हंसा रिसर्च ग्रुप प्राइवेट लिमिटेड’ के डिप्टी जनरल मैनेजर नितिन दियोकर द्वारा फाइल की गई एफआईर एक्सेस की। इससे उन्हें पता चला कि एफआईआर में रिपब्लिक टीवी का नाम नहीं है, बल्कि इंडिया टुडे का नाम है। मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने खुद यह बात स्वीकारी थी कि असल एफ़आईआर में इंडिया टुडे का ज़िक्र है।

इंडिया टुडे के खिलाफ निष्क्रियता पर प्रदीप भंडारी ने उठाए सवाल

प्रदीप भंडारी का ट्विटर पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें प्रदीप भंडारी कह रहे हैं, “परमबीर सिंह, आपको इस्तीफा देने की आवश्यकता है। इंडिया टुडे का नाम 6 बार एफआईआर में आ चुका है, लेकिन फिर भी आपने एक भी बार कार्रवाई नहीं की। घबराहट किस बात की है? डर किस बात का है? दिक्कत क्या है? क्या आपकी आपसी साँठ-गाँठ है इंडिया टुडे के साथ? एंकर कहाँ छिप रहे हैं, जो पत्रकारिता का मुखौटा पहनते हैं और दरवाजे के पीछे टीआरपी घोटाले को अंजाम देते हैं? ये मैं सवाल पूछना चाहता हूँ।”

भंडारी ने आगे कहा, “प्रमुख गवाह ने माना है कि इस घोटाले के पीछे इंडिया टुडे था। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? घबराहट किस बात की है परमबीर सिंह? क्या आप अपनी वर्दी का सम्मान नहीं करते हैं?”

प्रदीप भंडारी ने यह भी बताया कि कैसे BARC ने अपनी जाँच में पाया कि इंडिया टुडे टीआरपी धाँधली में शामिल था और उस पर 5 लाख का जुर्माना लगाया गया था। रिपब्लिक टीवी के रिपोर्टर भंडारी ने जोर देते हुए कहा, “कार्रवाई करें परमबीर सिंह। अपनी वर्दी के लिए कुछ सम्मान दिखाएँ।”

प्रदीप भंडारी ने मुंबई पुलिस की गिरफ्तारी की योजना के मद्देनजर सूचित किया कि वह कल अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करेंगे। उन्होंने कहा, “मैं मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह से इस्तीफा माँगता रहूँगा जिन्होंने वर्दी में झूठ बोला। फर्जी सेक्शन्स मुझे लड़ने से रोक नहीं सकता।”

‘आप एक राष्ट्रवादी चैनल से हार जाएँगे’

प्रदीप भंडारी ने बताया कि BARC द्वारा गठित जस्टिस मुद्गल कमिटी ने भी इंडिया टुडे को TRP में हेरफेर का दोषी पाया था। वो कहते हैं, “परमबीर सिंह, आपने रिपब्लिक टीवी नेटवर्क और अर्नब गोस्वामी के खिलाफ साजिश रचना चाहते हैं। लेकिन, हम आपकी इस साजिश को चकनाचूर करने वाले हैं, क्योंकि हमारे तथ्य है, सच है। इसीलिए रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क सुप्रीम कोर्ट के पास जा रहा है और अर्नब गोस्वामी आप पर कानूनी तौर पर मुकदमा भी करेंगे।”

भंडारी आगे कहते हैं, “आप एक चीज समझ लीजिए परमबीर सिंह, आपने किसी छोटे-मोटे चैनल के साथ नहीं बल्कि एक राष्ट्रवादी चैनल और एक राष्ट्रवादी रिपोर्टर के साथ पंगा लिया है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब भी कोई राष्ट्रवादी समाचार चैनल को झूठा फँसाना चाहता है, तो उसकी हार अवश्य होती है।”

अर्नब गोस्वामी ने इंडिया टुडे-मुंबई पुलिस की साँठगाँठ पर लगाई फटकार

इससे पहले, रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी ने बताया कि टीआरपी घोटाले में दायर एफआईआर में इंडिया टुडे का 6 बार स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है। हालाँकि, मुंबई पुलिस कमिश्नर ने उसे क्लीन चिट देते हुए कहा कि आरोप रिपब्लिक टीवी के खिलाफ थे। परम बीर सिंह द्वारा  एफआईआर को जानबूझ कर सार्वजनिक पटल पर न रखने को लेकर अर्नब गोस्वामी ने उनको निशाने पर लिया।

मुंबई पुलिस कमिश्नर के दोहरे रवैये पर निशाना साधते हुए, गोस्वामी ने पूछा, “आपने इतनी तेजी से कैसे जाँच की? आप अरुण पुरी और इंडिया टुडे समूह के अन्य मालिकों को क्यों नहीं समन भेज रहे हैं? आप मामले को घुमाकर मेरे बारे में बनाना चाहते थे। आपके पास रिपब्लिक टीवी और इंडिया टुडे के लिए दो अलग-अलग नियम कैसे हो सकते हैं?”

गौरतलब है कि रिपब्लिक टीवी को मंशा पूर्वक बदनाम करने के प्रयास में मुंबई पुलिस ने शुक्रवार को इसके कंसल्टिंग एडिटर और पत्रकार प्रदीप भंडारी को समन भेजा था। प्रदीप भंडारी के विरुद्ध मुंबई स्थित खार पुलिस थाने में धारा 188, 353 और बॉम्बे पुलिस एक्ट की धारा 37 (1) और 135 के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके बाद पत्रकार प्रदीप भंडारी ने ट्विटर पर लिखा था कि रिपब्लिक टीवी की लड़ाई जारी रहेगी, भले पुलिस बदला लेने की कितनी भी कोशिश क्यों न कर ले। 

राम जानकी मंदिर के पुजारी को मारी गोली: UP पुलिस ने किया 2 को गिरफ्तार, 2 अन्य की है तलाश

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में शनिवार (10 अक्टूबर 2020) देर रात लगभग 2 बजे एक पुजारी को गोली मार दी गई। अभी तक की जाँच और मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राम जानकी मंदिर के पुजारी बाबा सम्राट दास को ज़मीनी विवाद के चलते गोली मारी गई है। गोली लगने की वजह से उनकी हालत गम्भीर हो गई थी, नतीजतन उन्हें लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफ़र कर दिया गया।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज करके दो आरोपितों को गिरफ्तार भी कर लिया है। इसके अलावा पुलिस अन्य दो आरोपितों की खोजबीन कर रही है।

घटना इटियाथोक कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तिर्रे मनोरमा गाँव की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मनोरमा नदी के उद्गम स्थल को लेकर राम जानकी मंदिर के पुजारी सीताराम दास का भू माफ़ियाओं से विवाद चल रहा था। काफ़ी लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद के बाद शनिवार देर रात हमलावर पुजारी बाबा सम्राट दास पर गोलीबारी करके फरार हो गए। पुजारी बाबा सम्राट दास बीते 2 वर्षों से राम जानकी मंदिर में रह कर पूजा पाठ कर रहे हैं।  

मनोरमा नदी के उद्गम स्थल विवाद के सम्बंध में पिछले साल बाबा सीताराम दास पर जानलेवा हमला हुआ था। इस हमले में उन्होंने बेहद मुश्किल से अपनी जान बचाई थी। इसके बाद भू भाफ़ियाओं ने सम्राट दास पर गोली चला दी। पहले उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहाँ उनकी हालत गम्भीर होने के बाद उन्हें लखनऊ स्थित ट्रॉमा सेंटर में रेफ़र किया गया। फ़िलहाल पुजारी ने इस मामले में 4 लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज कराया, पुलिस ने इस मामले की जाँच शुरू कर दी है।   

इस मुद्दे पर एसपी शैलेश पाण्डेय ने बात करते हुए जानकारी दी। उन्होंने बताया, “राम जानकी मंदिर में दो पुजारी रहते हैं (सीताराम दास और सम्राट दास)। हमें रात के लगभग 2 बजे सूचना मिली कि इनमें से एक पुजारी सम्राट दास को हमलावरों ने गोली मार दी है। गोली उनके बाएँ कंधे पर लगी थी, इसके बाद पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँच कर पुजारी सम्राट दास को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। कुछ समय बाद उन्हें लखनऊ स्थित ट्रॉमा सेंटर रेफ़र कर दिया गया, फ़िलहाल पुजारी सम्राट दास के हालात सामान्य बने हुए हैं।”   

इसके अलावा एसपी ने यह भी बताया कि पुजारी सीताराम दास ने कुल 4 हमलावरों के विरुद्ध हत्या के प्रयास का आरोप लगाया है। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और दो लोगों से पूछताछ जारी है। उन्होंने बताया कि यह ज़मीनी विवाद का मामला है, इस सम्बंध में पहले भी मुक़दमे दर्ज हो चुके हैं। फ़िलहाल इस मामले की जाँच चल रही और जो भी दोषी हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

TMC कार्यकर्ता पर BJP बूथ अध्यक्ष की पत्नी के रेप की कोशिश का आरोप, पहले स्थानीय लोगों ने कूटा फिर दोनों पार्टी नेताओं के बीच झड़प

पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्दवान जिले के कलना में शुक्रवार (अक्टूबर 09, 2020) को BJP बूथ अध्यक्ष ने तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के एक कार्यकर्ता बापन घोष पर उनकी पत्नी के साथ बलात्कार करने की कोशिश का आरोप लगाया है। एबीपी आनंदा की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना ने अब दोनों दलों- TMC और BJP के बीच राजनीतिक गतिरोध पैदा कर दिया है।

एक तरफ जहाँ BJP ने टीएमसी नेता पर एक महिला के बलात्कार की कोशिश का आरोप लगाया, वहीं टीएमसी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए BJP समर्थकों द्वारा आरोपित बापन घोष को बेरहमी से पीटने का दोषी ठहराया है।

एबीपी आनंदा की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित टीएमसी कार्यकर्ता बापन घोष उस समय पीड़िता के घर गया था, जब उनके पति घर पर नहीं थे। इसी बात का फायदा उठाते हुए वह उसका यौन उत्पीड़न करने लगा। पीड़िता के चीखने-चिल्लाने पर स्थानीय लोगों ने उनका बचाव किया, साथ ही लोगों ने आरोपित TMC कार्यकर्ता बापन की लगे हाथ पिटाई भी की। भाजपा ने दावा किया है कि बापन घोष ने भी जवाबी कार्रवाई में हिंसा का सहारा लिया।

भाजपा ने आगे आरोप लगाया है कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने टीएमसी बूथ उपाध्यक्ष के इशारे पर पीड़ित के घर और आसपास के अन्य घरों में तोड़फोड़ भी की थी। आरोपित का अभी अस्पताल में इलाज चल रहा है। दोनों पक्षों द्वारा कलना पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई है।

बीजेपी के एक स्थानीय नेता ने एबीपी आनंदा से बात करते हुए बताया, “शुक्रवार की रात लगभग 9- 9:30 बजे टीएमसी कार्यकर्ता हमारे बूथ अध्यक्ष के घर गया। फिर उसने उनकी पत्नी को बुलाया, जानी पहचानी आवाज सुनकर वह घर से बाहर निकाल। तभी टीएमसी कार्यकर्ता ने उनका यौन उत्पीड़न शुरू कर दिया। इसके बाद आरोपित को स्थानीय लोगों ने पकड़ लिया। यह संभव है कि स्थानीय लोगों ने उसे उसकी हरकतों पर पीटा होगा (जिसने उसे जघन्य अपराध करते हुए रंगे हाथों पकड़ा हो)।”

उन्होंने आगे कहा, “लगभग उसी समय टीएमसी उपाध्यक्ष ने कई वाहनों में टीएमसी कार्यकर्ताओं को लेकर आने के लिए कहा। उन लोगों ने तब न केवल भाजपा बूथ अध्यक्ष के घर बल्कि आसपास के तीन अन्य घरों में भी तोड़फोड़ की और सड़कों पर हाथापाई की।”

(साभार : ABP Ananda)

टीएमसी कार्यकर्ता के खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए, टीएमसी बूथ उपाध्यक्ष ने कहा, “वास्तव में, हमारा कार्यकर्ता बापन घोष कलाना के एक अस्पताल में अपनी जिंदगी के लिए लड़ रहा है।”

पश्चिम बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा

गौरतलब है कि ममता बनर्जी और टीएमसी के सत्ता में आने के बाद से ही पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा बढ़ रही है। बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हिंसा और उनकी हत्या पश्चिम बंगाल में आम हो चुकी हैं। हालही में बैरकपुर इलाके के टीटागढ़ थाने के पास पुरानी बाजार में एक भाजपा पार्षद मनीष शुक्ला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के अपराध में पश्चिम बंगाल अपराध जाँच विभाग ने मोहम्मद खुर्रम, गुलाब शेख और टीएमसी के कार्यकर्ता सुबोध जाधव नामक तीन लोगों को गिरफ्तार किया था।

इससे पहले राबिन पॉल नाम के एक भाजपा कार्यकर्ता को कलना के पथार घाटा गाँव में मौत के घाट उतार दिया गया था। भाजपा कार्यकर्ता को पहले लगभग 50 टीएमसी समर्थकों ने बेरहमी से पीटा और फिर उसे दूसरी जगह ले जा कर टीएमसी के उप प्रमुख द्वारा भी पीटा गया था।

BJP में शामिल हुईं तीन तलाक के लिए आवाज उठाने वाली सायरा बानो, कहा- पार्टी का महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण से प्रभावित

तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कानूनी जंग लड़ने वाली सायरा बानो ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले की रहने वाली सायरा बानो ने प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत की मौजदूगी में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की।

सायरा बानो देश की पहली मुस्लिम महिला हैं, जिन्होंने तीन तलाक के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उत्तराखंड की रहने वाली सायरा बानो ने ही पहली बार तीन तलाक (Triple Talaq), बहुविवाह (Polygamy) और निकाह हलाला पर प्रतिबंध लगाने की माँग करते हुए फरवरी 23, 2016 में सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। इस कानूनी लड़ाई में उन्हें जीत हासिल हुई।

बीजेपी में शामिल होने पर सायरा बानो ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी की नीतियों से प्रेरित होकर वो पार्टी में शामिल हुईं हैं। वो महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करती रहेंगी। बीजेपी में शामिल होने पर प्रतिक्रिया देते हुए सायरा बानो ने पीटीआई से कहा, “बीजेपी का मुस्लिम महिलाओं के प्रति प्रगतिशील दृष्टिकोण और जिस प्रतिबद्धता के साथ समावेशी विकास के दरम्यान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ट्रिपल तलाक मुद्दे पर काम किया, उसने मुझे पार्टी में शामिल होने के लिए आकर्षित किया।”

उत्‍तराखंड के ऊधम स‍िंह नगर की रहने वाली सायरा बानो (38) कहती हैं कि वह अल्‍पसंख्‍यक समुदाय के बीच बीजेपी के बारे में मौजूद ग़लतफ़हमियाँ दूर करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ने और उच्च शिक्षा तक पहुँच से वंचित करने जैसे अन्याय से छुटकारा पाने के लिए भाजपा में शामिल हुई।

बानो ने यह भी कहा कि वह भाजपा के बारे में गलत धारणाओं को तोड़ने की कोशिश करेंगी कि यह अल्पसंख्यक विरोधी है। उन्होंने कहा, “मैं अल्पसंख्यकों के प्रति पार्टी के निष्पक्ष इरादों में विश्वास करती हूँ। पार्टी के अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने की गलत धारणा को तोड़ दिया जाना चाहिए।”

जब सायरा से पूछा गया कि क्‍या वह चुनाव लड़ेंगी तो उनका कहना था कि वह चुनाव लड़ने के मकसद से बीजेपी में नहीं आई हैं लेकिन अगर बीजेपी उन्‍हें टिकट देगी तो वह इनकार नहीं करेंगी। सायरा ने कहा, “मेरी पार्टी मुझसे जो कहेगी वह मैं करूँगी।”

इस मौके पर भगत ने कहा, “ऐसी सशक्‍त महिला जो सदियों पुरानी कुप्रथा को बदलने की क्षमता रखती है वह पार्टी को ऊँचाइयों तक ले जाएगी। सायरा को सफल भविष्‍य की शुभकामनाएँ, उम्‍मीद है कि जिस निष्‍ठा से उन्‍होंने अपने हक की लड़ाई लड़ी उसी लगन से वह पार्टी के लिए भी काम करेंगी।”

इससे पहले सायरा कई बार बीजेपी में शामिल होने की इच्छा जाहिर कर चुकी थीं। इस पर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आईं। एक तरफ जहाँ बीजेपी ने उनके इस बयान का स्वागत किया था, तो वहीं दूसरी ओर कॉन्ग्रेस ने इसे मुस्लिम महिला वोटर्स को लुभाने के लिए बीजेपी का राजनीतिक कदम करार दिया था।

बता दें कि सायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर ट्रिपल तलाक और निकाह हलाला के चलन की संवैधानिकता को चुनौती दी थी। साथ ही, उनकी याचिका में मुस्लिमों में प्रचलित बहुविवाह प्रथा को भी गलत बताते हुए उसे खत्म करनी की माँग की गई थी।

सायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके ट्रिपल तलाक के साथ ही निकाह हलाला के चलन की संवैधानिकता को चुनौती दी थी। याचिका में उन्होंने मुस्लिमों में प्रचलित बहुविवाह प्रथा को भी गलत करार देते हुए इसे खत्म करने की माँग उठाई थी। सायरा का तर्क था कि तीन तलाक संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

मिजोरम ने त्रिपुरा की सीमा से लगे गाँव को बताया ‘विवादित’, मंदिर निर्माण व ब्रू आदिवासियों के ‘सामुदायिक कार्य’ पर रोक की माँग

मिजोरम सरकार ने त्रिपुरा-मिजोरम अंतरराज्यीय सीमा के पास फूलदुंगसी गाँव में एक मंदिर के निर्माण को लेकर त्रिपुरा सरकार से आपत्ति जताई है। इस सीमा को लेकर पहले भी कई विवाद खड़े हो चुके हैं। दो महीने पहले ही इस गाँव के 130 निवासियों की पहचान मिज़ोरम की मतदाता सूची में की गई थी, बावजूद इसके कि गाँव को पारंपरिक रूप से त्रिपुरा का हिस्सा माना जाता है।

मिजोरम ने अब एक मंदिर के निर्माण के साथ-साथ त्रिपुरा के ब्रू आदिवासियों द्वारा किए जा रहे ‘सामुदायिक कार्य’ पर भी आपत्ति जताई है। मिजोरम के गृह सचिव लालबिआकसाँगी ने त्रिपुरा के अपने समकक्ष को लिखे अपने एक पत्र में दावा किया है कि ‘विवादित’ अंतरराज्यीय सीमा पर कोई भी काम कानून व्यवस्था में समस्या पैदा कर सकता है। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में हो रहे सभी कार्यों को तत्काल बंद करने की भी माँग की।

इंडियन एक्सप्रेस को मिले एक पत्र के अनुसार, “….त्रिपुरा के SONGRONGMA (ब्रू आर्गेनाईजेशन) द्वारा ममित जिले के थीडावार तलाँग में फुलडुंगसेई के पास विवादित अंतरराज्यीय सीमावर्ती गाँव में एक मंदिर के निर्माण के प्रयासों के संबंध में मिजोरम सरकार द्वारा रिपोर्ट मिली हैं। यह भी बताया गया है कि सामुदायिक कार्य 19 और 20 अक्टूबर, 2020 को आयोजित किया जाना है। चूँकि विवादित अंतरराज्यीय सीमा के भीतर कोई भी गतिविधि कानून व्यवस्था की समस्याओं का कारण बन सकती हैं, इसलिए प्रस्तावित निर्माण को तत्काल रोकने के लिए संबंधित जिला प्रशासन को हस्तक्षेप करने और आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया जाता है।”

त्रिपुरा के कंचनपुर के उप-मंडल मजिस्ट्रेट चांदनी चंद्रन ने 17 अगस्त को उत्तर त्रिपुरा के डीएम को पत्र में लिखा था, “…पारंपरिक फुलदुंगसी वीसी को त्रिपुरा के हिस्से के रूप में स्वीकार किया गया है। इसलिए, वीसी और इसके निवासियों को मिजोरम में मतदाता सूची में शामिल करना समस्या पैदा कर सकता है। मिजोरम और त्रिपुरा के बीच सटीक सीमा का सीमांकन करने की तत्काल आवश्यकता है, जिसमें त्रिपुरा में ही पूरा फुलदुंगसी वीसी शामिल हो।”

बता दें कि त्रिपुरा के गृह सचिव बीके साहू ने पत्र मिलने की पुष्टि की है और कहा है कि राज्य प्रशासन द्वारा इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी।

व्यंग्य: नक्सली भाभीजी घर पर नहीं हैं तो गई कहाँ? पप्पू-पिंकी के लिए चमत्कार करने आई थी या…

खड़कसिंह के खड़कने से खड़कती थीं खिड़कियाँ, लेकिन यहाँ तो कोई खड़कसिंह की ही कुण्डी खड़का गया था। मामला संगीन था, और एसपी खड़कसिंह का ख़याल था कि चूक दारोगा हप्पू सिंह से ही हुई होगी। वैसे भी हप्पू सिंह की रिश्वत लिए बिना काम ना करने और रिश्वत लेकर काम करने की शिकायतें उनके पास पहले से आती रही थीं।

इस बार मामला किसी बड़ी चूक का था। राज्य मुख्यालय से कमिश्नर साहब को और कमिश्नर साहब के पास से उनके पास फोन आ चुका था। खड़कसिंह ने स्थानीय ठेकेदार के सूमो से बैटरी निकलवा कर पुलिस जीप में लगवा ली थी। खुद गश्त पर निकलना था सो पेट्रोल आज बेचा नहीं गया।

दारोगा हप्पू सिंह अपने इलाके के बाहर ही मिल गए। खड़कसिंह कड़के, “जब पप्पू-पिंकी जैसे नामी ठगों के इलाके की तरफ बढ़ने की इनपुट दिल्ली से आ गई थी, तो तुमने ढिलाई क्यों बरती?” सलामी ठोकते ही दरोगा हप्पू सिंह अगर-मगर करते शुरू हो गए। इतने में गली के पहले ही मकान से जोरदार आवाज आई। ऐसा लगा किसी ने किसी को जोरदार कंटाप धर दिया है। “आई एम लोविंग इट” की आवाज आई! “कोई दुर्घटना तो हो ही गई है”, खड़कसिंह बोले। हप्पू सिंह की तोंद उनसे पहले कमरे में घुसी।

भड़भूती और मौनमोहन किसी मासूम पर जुटे पड़े थे। पुलिस को देखकर उन्होंने हाथ समेटे। पिटते हुए व्यक्ति ने फिर जनता की तरह आवाज लगाई! “आई एम लोविंग इट!” खड़कसिंह ने हप्पू सिंह को देखा, “तुम्हारा क्षेत्र है, क्या ऐसे ही चलती है व्यवस्था?” हप्पू गड़बड़ाए, “हजूर बिलकुल नया मामला है। भाभी जी के होते इस चिरखुट के साथ ऐसी मारपीट नहीं होती थी।

खड़कसिंह को उनका झूठ पहचानते देर ना लगी। “आखिर ये भाभीजी का मामला क्या है?” वो बोले। खिड़कियों से ली गई आपत्तिजनक तस्वीरें निकालते दारोगा हप्पू सिंह बोले, “मुझे तो मामला जात का भी लगता है सर! किसी बड़े पत्रकार ने भी ‘कौन जात हो?’ पूछना शुरू किया है!

खड़कसिंह खड़खड़ाए, “तो क्या अब हम पर भी जातिवाद का आरोप लगेगा?” सामाजिक न्याय के दौर में ही उनकी बिरादरी को सत्ता की स्थिति से बर्खास्त किया जा चुका था। जमींदारी तो उनकी नेहरू युग में ही चली गई थी, मगर कॉमरेडों ने अब तक उन्हें गालियाँ देना बंद नहीं किया था।

पीटने वाले का नाम अनोखेलाल था। पूरा इलाका उसकी अजीब हरकतों को जानता था। कोई अजीब बात नहीं थी कि मौनमोहन, उर्फ़ काम के मामलों पर चुप्पी साध जाने वाले मनमोहन के खिलाफ गवाही देने कोई नहीं आया।

अनोखेलाल को पीट रहा दूसरा व्यक्ति भड़भूती तो शक्ल से ही शरीफ दिख रहा था। खड़कसिंह कड़के, “मामला क्या है? आखिर पीट क्यों रहे थे इसे?” “हुजूर”, भड़भूती बोले, “ये अश्लील आदमी भाभी जी को ढूँढ रहा था। गली में दो ही लोगों की पत्नियाँ भाभी कहलाने योग्य युवा है। एक मेरी और दूसरी इस मौनमोहन की! चुनांचे हमने इसे धो दिया।” मामला पेंचीदा हो गया था। अगर भाभी जी सचमुच घर पर थी, तो आखिर ये अनोखेलाल उसे ढूँढ क्यों रहा था? आसानी से घर के बाहर आकर मिल आता!

पप्पू-पिंकी गले लगा के गए!” इतने में अनोखेलाल ने रोना शुरू किया। “अरे हम तो मोहल्ले वाले हैं” आगे अनोखेलाल बोला, मगर इतने में ही मौनमोहन ने उसे लात जड़ दी। “मतलब भाभीजी घर में नहीं हैं?” दारोगा हप्पू सिंह बोले। उनका इरादा वैसे भी भड़भूती के घर की तलाशी लेने का था। उसकी प्रिय भौजाई की पसंद की मगज़ीन “मेरी चंट सहेली” वैसे भी उसे दरवाजे पर पड़ी दिख गई थी। समस्या ये थी कि इलाके भर में करते के लिए मशहूर वाली भाभी जी के घर ऐसे ही घुस जाने की उसकी हिम्मत नहीं थी। उसने खड़कसिंह के साथ मौजूद पुलिस दस्ते को देखा और अपना सीना छप्पन इंच किया। देश में ये करना भी आजकल साम्प्रदायिकता की निशानी थी।

कल तक हर केमरे के सामने आने वाली नई भाभी जी आखिर लापता कहाँ हुई, ये एक बड़ा सवाल था। संसद से लेकर विधानसभा तक इस मुद्दे पर हिल चुकी थी। “साहेब मेरी नौकरी…” आखिर दारोगा हप्पू सिंह बोला। “मामला निपटा सको तो बच भी सकती है”, खड़कसिंह खड़के। और अंत में दारोगा हप्पू सिंह ने भड़भूती के मकान के सामने जाकर आवाज लगा दी!

“भाभीजी घर पर हैं?”

थोड़ी देर सन्नाटा रहा। अंत में दरवाजा खुला और एक रेशमी परिधान में लिपटी गोरी ऊँगली ने इशारा किया। कान लगा कर हप्पू सिंह बात सुन आए। खड़कसिंह से वो बोले, “साहेब, भौजाई टेम्प्रोरी थी। आपका हुक्म हो तो एमपी से वापस मँगा लें?” खड़कसिंह सोच में पड़ गए। भाभीजी का घर से अचानक गायब होना एक बड़ी समस्या थी। अगर भड़भूती जी वाली और मौनमोहन जी वाली दोनों घर में थी तो जो नई थी, और पप्पू-पिंकी का प्रचार कर गई थी, वो कौन थी? मामला लापता नई वाली भाभीजी का था। इतने में शोर सुनकर अंगूरी भाभी चली आईं।

अरे ये क्या तुमने तो भड़भूती जी का चमत्कार ही कर डाला!’ वो बोली। दारोगा हप्पू सिंह समझाने लगे, “चमत्कार नहीं भाभी बला..”कि इतने में खड़कसिंह ने उन्हें चकोटी काट ली। “हें हे हें”, खड़कसिंह ने मुस्कुराते, हाथ जोड़ते कहा, “भाभी जी वो नई वाली भाभी?” “एमपी ही तो गई है, एमपी हुई थोड़ी है जो पूरा महकमा हिलाए हुए हो?” अंगूरी भाभी ने पुछा। इतने में भड़भूती जी की वाइफ भी खिड़की से झाँक कर चिल्ला पड़ीं, “पिंकी गले लगा के गई तो थी”। अफ़सोस करते खड़कसिंह बोले, “चलो वापस एमपी वाली ना सही, लेकिन भाभीजी घर पर हैं”।