Home Blog Page 4439

हाथरस केस में पुलिस पर सवाल उठना लाजमी: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Hathras Case

हाथरस केस में बहुत सारी बातें कही जा रही है। शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट और फिर बाद में आई पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में अंतर की वजह से केस बहुत ही ज्यादा पेचीदा हो गया है। शुरू के बयान में रेप के बारे में कुछ नहीं गया और आरोपित भी एक ही बताया गया। बाद वाले बयान में ‘गैंगरेप’ की बात आती है और आरोपितों में भी तीन और नाम जुड़ जाते हैं। आईजी ने भी अपने बयान में यही बातें कहीं।

29 सितंबर को पीड़िता के दम तोड़ने के बाद अलग-अलग तरह की रिपोर्ट्स आनी शुरू होती है। गैंगरेप ट्रेंड कराया गया। भयावहता को दर्शाने के लिए जीभ काटने, रीढ़ की हड्डी तोड़ने, आँख फोड़ने की बात कही गई। ये भी कहा गया कि आरोपित सवर्ण है, इसलिए पुलिस छेड़छाड़ का मामला बताकर रफा-दफा करने की कोशिश कर रही है।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

इलाज के लिए अमित शाह के न्यूयॉर्क जाने, उनके बीमार होने के वायरल दावों की क्या है सच्चाई, पढ़ें पूरी डिटेल

सोशल मीडिया व्हाट्सएप पर एक मैसेज वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया गया है कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की वजह से गृह मंत्री अमित शाह को इमरजेंसी बेसिस पर संयुक्त राज्य अमेरिका शिफ्ट किया गया है। इसके साथ ही मैसेज में ये भी कहा गया है कि उन्हें एयर-एम्बुलेंस के माध्यम से न्यूयॉर्क भेजा गया, क्योंकि वह कैंसर और एवियन सारकोमा जैसी कई बीमारियों से पीड़ित हैं। ट्विटर पर भी कई यूजर्स ने इसी तरह का पोस्ट किया।

कुछ यूजर्स ने तो यहाँ तक दावा कर दिया कि अमित शाह की ‘गंभीर स्थिति’ के कारण केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को गृह मंत्रालय का पोर्टफोलियो दिया जा सकता है।

हालाँकि, यह दावे पूरी तरह से निराधार और तथ्यहीन हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि अगर गृह मंत्री को इलाज के लिए यूएसए शिफ्ट किया जाता, तो सरकार द्वारा इसकी घोषणा की जाती। पार्टी के वरिष्ठ सदस्य भी उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हुए जानकारी देते, लेकिन उसके संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। केवल कुछ ट्विटर यूजर्स ने व्हाट्सएप ‘न्यूज’ का हवाला देते हुए पोस्ट किया है।

अमित शाह अपने काम में व्यस्त

सोशल मीडिया पर अमित शाह के स्वास्थ्य को लेकर किए जा रहे दावों के विपरीत उन्हें आज (सितंबर 30, 2020) अपने कर्तव्यों का पालन करते देखा गया। आज दोपहर में, अमित शाह ने अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किया कि उन्होंने गाँधीनगर लोकसभा क्षेत्र से 200 कुम्हार परिवारों को ‘कुम्हार सशक्तिकरण योजना’ के अंतर्गत विद्युत चालित चाक वितरित करने के कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने उस घटना की तस्वीरें पोस्ट की थीं जिसमें उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए शिरकत की थी।

फिर बाद में दिन में, गृह मंत्री ने स्वदेशी विकसित रेंज ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के सफल परीक्षण के लिए DRDO का भी अभिवादन किया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के काम में भी सक्रिय रूप से शामिल थे। वह पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के निवास पर आयोजित आगामी बिहार चुनावों के बारे में एक महत्वपूर्ण पार्टी बैठक में उपस्थित थे। बैठक में नव निर्वाचित बिहार चुनाव प्रभारी देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित थे।

इसलिए, सोशल मीडिया पर गृह मंत्री अमित शाह को इलाज के लिए न्यूयॉर्क शिफ्ट करने की बात पूरी तरह से गलत है। इसके इतर, उनका स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है, क्योंकि उन्होंने आज मंत्रालय और पार्टी दोनों ही कामों में हिस्सा लिया है। 

यहाँ यह भी गौर करने वाली बात है कि एवियन सारकोमा बीमारी मनुष्यों को प्रभावित नहीं करती है। यह रोग मुर्गियों को संक्रमित करता है, जो एवियन सारकोमा ल्यूकोसिस वायरस के कारण होता है। इस वायरस की वजह से मुर्गियों को कैंसर होता है, लेकिन इस वायरस से इंसानों के संक्रमित होने का कोई सबूत नहीं है।

कॉन्ग्रेस के दबाव में झुकी उद्धव सरकार: महाराष्ट्र में नया कृषि कानून लागू करने का आदेश लिया वापस

कॉन्ग्रेस की तरफ से कैबिनेट बैठक के बहिष्कार की धमकी के बाद महाराष्ट्र की उद्धव सरकार ने बुधवार (सितंबर 30, 2020) को नए कृषि कानून लागू करने का अगस्त महीने में दिया अपना आदेश वापस ले लिया है।

राज्य सरकार में सहयोगी कॉन्ग्रेस और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) की तरफ से महाराष्ट्र में कृषि कानूनों का विरोध कर इसे ‘किसान विरोधी’ कहने के बाद उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली सरकार कृषि सुधार कानूनों को लागू करने को लेकर असमंजस में थी। 

दरअसल, उद्धव सरकार अगस्त में ही कृषि विधेयकों को लागू करने का आदेश जारी कर चुकी थी। हालाँकि खबरों की मानें तो कॉन्ग्रेस के दवाब में आकर अब उद्धव ठाकरे ने उसी पुराने फैसले को वापस ले लिया है। हाल ही में संसद के दोनों सदनों में इस कानून को भारी विरोध के बीच पास कराया गया और राष्ट्रपति से भी इन्हें मंजूरी मिल गई है। इन विधेयकों को लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने इसके पारित होने से पहले इसे लागू करने का फैसला कर लिया था।

पिछले हफ्ते, महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजीत पवार ने ऐलान किया था कि राज्य सरकार कृषि सुधार कानूनों को राज्य में लागू नहीं करेगी। राज्य के राजस्व मंत्री और महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के प्रमुख बालासाहेब थोराट ने कहा था कि सभी सत्तारूढ़ विपक्षी दल इन नए कानूनों के खिलाफ हैं। राज्य में उन्हें लागू नहीं करने का निर्णय सामूहिक रूप से विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा।

10 अगस्त को जारी अधिसूचना में सभी कृषि उपज एवं पशुधन बाजार समितियों (APMC) और जिला कृषि सहकारी समितियों को राज्य में प्रस्तावित कानूनों पर तीन अध्यादेशों को ‘सख्ती से लागू करने’ का आदेश दिया गया था। ये विधेयक- कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 थे।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पार्टी शासित प्रदेशों की सरकारों से सोमवार को कहा कि वे केंद्र सरकार के ‘कृषि विरोधी कानूनों’ को निष्प्रभावी करने के लिए अपने यहाँ कानून पारित करने की संभावना पर विचार करें। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी बयान के मुताबिक, सोनिया ने कॉन्ग्रेस शासित प्रदेशों को सलाह दी थी कि वे संविधान के अनुच्छेद 254 (ए) के तहत कानून की सभी संभावनाओं का निरीक्षण करें और कृषि विरोधी कानूनों को नकारें और किसानों के साथ हो रहे अन्याय को रोकें।

वेणुगोपाल ने कहा कि यह अनुच्छेद इन ‘कृषि विरोधी एवं राज्यों के अधिकार क्षेत्र में दखल देने वाले केंद्रीय कानूनों’ को निष्प्रभावी करने के लिए राज्य विधानसभाओं को कानून पारित करने का अधिकार देता है।

वेणुगोपाल ने दावा किया, ”राज्य के इस कदम से कृषि संबंधी तीन कानूनों के अस्वीकार्य एवं किसान विरोधी प्रावधानों को दरकिनार किया जा सकेगा। इन प्रावधानों में न्यूनतम समर्थन मूल्य को खत्म करने और कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी) को बाधित करने का प्रावधान शामिल है।”

अतीक अहमद के करीबी राशिद, कम्मो और जाबिर के आलीशान बंगलों पर चला योगी सरकार का बुलडोजर, करोड़ो की संपत्ति खाक

यूपी सरकार लगातार अतीक अहमद और उसके करीबियों के अवैध संपत्तियों को ध्वस्त करने का काम कर रही हैं। इसी क्रम में प्रशासन ने अब उसके खास रहे तीन गुर्गों राशिद, कम्मो और जाबिर के अवैध आलीशान मकानों को जमींदोज कर दिया। यह सभी मकान प्रयागराज के बेली इलाके में स्थित थे।

अतीक गैंग के तीनों सदस्यों में राशिद प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता है। राशिद कैंट थाने का हिस्ट्रीशीटर भी है। वहीं इनमे से दो अतीक के शार्प शूटरों में शामिल थे। प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) द्वारा पुलिस की मदद से की जा रही इस कार्रवाई के दौरान राशिद के घर की महिलाओं ने जम कर विरोध किया। पुलिस के कहने के बावजूद वे घर से बाहर निकलने को राजी नहीं थी। जिसके बाद जबरन उन्हें घर से निकाला गया। सरकारी अमले द्वारा बेली कछार में स्टेट लैंड की करोड़ों की बेशकीमती जमीन पर कब्जा कर आलीशान इमारतें खड़ी की गई थी।

वहीं राशिद की अवैध सम्पतियों को गिराने के बाद प्रशासन ने आगे की कार्रवाई करते हुए कम्मो और जाबिर के अवैध को बंगलों को ध्वस्त कर दिया। बता दें ये आपस में भाई है। इस वक्त जाबिर जेल में बंद है वहीं कम्मो पुलिस की पकड़ से फरार चल रहा। प्रॉपर्टी डीलिंग के कारोबार से इन लोगों ने कई सरकारी जमीनों पर अवैध मकानों को खड़ा कर दिया था। यह दोनों नामी अपराधियों के सूची में शामिल हैं।

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, जाबिर पर 18 और कम्मो पर 16 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। यह कार्रवाई पीडीए के जोनल अधिकारी सत शुक्ला और आलोक पांडेय के नेतृत्व में हुई है। प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी के स्पेशल आफिसर सत शुक्ला के मुताबिक़ जो मकान गिराए गए हैं, वह सभी सरकारी ज़मीन पर बने थे। इन ज़मीनों को फ्री होल्ड नहीं कराया गया था और न ही विकास प्राधिकरण से कोई नक्शा पास कराया गया था।

अनलॉक-5.0 में खोल दिए गए सिनेमाघर, मल्टीप्लेक्स: स्कूल और कोचिंग सेंटर को लेकर भी दी गई विशेष जानकारी

देश में 1 अक्टूबर से अनलॉक-5 (Unlock 5) की शुरुआत हो रही है। कोरोना के बीच अनलॉक-5 की गाइडलाइंस बुधवार (30 सितंबर, 2020) को जारी कर दी गई। वहीं महामारी से सबसे प्रभावित राज्य महाराष्ट्र में लॉकडाउन को 31 अक्टूबर तक बढ़ा दिया गया है। गृह मंत्रालय के निर्देश के मुताबिक अनलॉक-5 में सिनेमाघर और मल्टीप्लेक्स 50 प्रतिशत सीटों के साथ खोल दिए जाएँगे।

मंत्रालय की गाइडलाइन्स के अनुसार, 15 अक्टूबर से सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स को खोलने की छूट दे दी गई है। खिलाड़ियों की ट्रेनिंग के लिए स्वीमिंग पूल भी खोले जा सकेंगे। इसके अलावा एंटरटेनमेंट पार्क को खोलने की मंजूरी भी सरकार ने दी है। वहीं सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय सिनेमा हॉल, थियेटर्स, मल्टीप्लेक्स को लेकर जल्द ही अन्य सूचनाएँ भी लागू करेगा।

स्कूल और कोचिंग संस्थानों को खोलने के लिए राज्य सरकारों को 15 अक्टूबर के बाद फैसला लेने की इजाजत होगी। लेकिन, इसके लिए परिवार की मंजूरी अनिवार्य होगी।

गृह मंत्रालय की गाइडलाइन

  • सिनेमा/थिएटर/मल्टीप्लेक्स में उनकी बैठक क्षमता से 50% तक दर्शक को आने की अनुमति होगी। इसके लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय एसओपी जारी करेगा।
  • बिजनेस टू बिजनेस (बी 2 बी) एग्जिबिशंस लगाई जा सकेंगी। इनके लिए वाणिज्य विभाग एसओपी जारी करेगा।
  • खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए उपयोग होने वाले स्विमिंग पूल को खोलने की अनुमति होगी, जिनके लिए खेल मंत्रालय एसओपी जारी करेगा।
  • अम्‍यूजमेंट पार्क और इसी तरह के स्थानों को खोलने की भी अनुमति होगी और इन सभी के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय एसओपी जारी करेगा।
  • स्कूल, कॉलेज, शिक्षा संस्थान और कोचिंग संस्थान को चरणबद्ध तरीके से खोलने के लिए राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों को फ्लेक्जिबिलिटी दी गई है और वे स्थितियों को देखते हुए 15 अक्टूबर 2020 के बाद इन्‍हें फिर से खोलने के लिए निर्णय ले सकेंगे। हालाँकि, इसके लिए सरकारें स्कूलों/संस्थान प्रबंधनों के साथ परामर्श करेंगी और दी गई शर्तों का पालन करेंगी।
  • ऑनलाइन एजुकेशन/डिस्टेंस लर्निंग जारी रहेगा और इसे लगातार प्रोत्साहित किया जाएगा
  • जो स्कूल ऑनलाइन क्‍लासेस चला रहे हैं और उनके कुछ छात्र शारीरिक रूप से स्‍कूल में उपस्थित होने के बजाय ऑनलाइन ही पढ़ना चाहते हैं तो उन्‍हें ऐसा करने की अनुमति दी जाएगी
  • छात्रों की स्‍कूलों में उपस्थिति अभिभावकों की लिखित सहमति से ही लागू होगी। इनके लिए भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी की जाने वाली SOP के आधार पर स्‍थानीय जरूरतों को ध्‍यान में रखते हुए राज्‍य/केंद्र शासित प्रदेश अपनी-अपनी SOP तैयार करेंगे।

वहीं महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र के खाने के कारोबारियों को 5 अक्टूबर से पूरे महाराष्ट्र में बार और रेस्टोरेंट खोलने की इजाजत दे दी है। 50 प्रतिशत क्षमता के साथ बार और रेस्टोरेंट शुरू किए जा सकेंगे। बता दें कि मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में मार्च महीने से ही रेस्टोरेंट और बार बंद हैं।

इसी के साथ ही मुंबई के डिब्बा वालों के लिए भी अच्छी खबर आई है। अब उन्हें लोकल में यात्रा करने की अनुमति दे दी गई है।

आंध्र प्रदेश: पठान सलार खान ने 15 सालों में 80 से भी ज्यादा मंदिरों की दानपेटियों से चुराए रुपए, गिरफ्तार

आंध्र प्रदेश पुलिस ने मंगलवार (29 सितंबर, 2020) को मंदिरों के दान पेटियों को तोड़कर पैसे चोरी करने के मामले में पठान सलार खान नाम के आरोपित को गिरफ्तार किया है। सलार खान ने पिछले तीन महीनों में राज्य के विभिन्न मंदिरों से 18,000 रुपए की चोरी की है। आरोपित ने यह कबूल किया है कि 15 साल में उसने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लगभग 80 मंदिरों की दानपेटियों से पैसे चुराए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पठान सलार खान को पुलिस ने कृष्णा जिले से गिरफ्तार किया है। तिरुवुरु सर्कल इंस्पेक्टर एम शेखर बाबू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आरोपित को 14 सितंबर को विस्सनपेटा मंडल के कोरलामांडा गाँव के बाहरी इलाके में भगवान हनुमान मंदिर के दानपेटी को तोड़ने और चोरी करने के मामले में हिरासत में लिया गया। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

पुलिस ने बताया कि आरोपित का नाम पठान सालार खान है। आरोपित कृष्णा जिले का रहनेवाला है। मामले की जाँच करने के लिए जिले के एसपी के आदेश पर चार दल बनाए गए। दल ने जाँच के दौरान 50 वर्षीय पठान सलार नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया। जिसके बाद पुलिस की जाँच पड़ताल में उसने चोरी की सारी वारदातों को कबूल किया।

सीआई एम शेखर बाबू ने बताया कि कोर्लामंडा देवस्थानम में हुंडी क्षतिग्रस्त करने के मामले में उसके पास से 2000 रुपए बरामद किया गया। जुर्म को स्वीकार करते हुए खान ने बताया कि उसने 4 जुलाई को चिल्लाकल्लु गाँव में हनुमान मंदिर की हुंडी क्षतिग्रस्त कर 6000 रुपए और 8 सितंबर को एडुरूबिदम गाँव में भगवान राम मंदिर के हुंडी से भी 10,000 रुपए चुराए थे। आरोपित को आज कोर्ट में पेश किया गया था, जिसके बाद उसे पुलिस रिमांड पर रखा गया है।

राजस्थान में दो नाबालिग लड़कियों को अगवाकर, तीन दिनों तक किया गया सामूहिक बलात्कार, केस दर्ज

राजस्थान के बारां (Baran) जिले में दो नाबालिग लड़कियों से गैंगरेप (Gang rape) का मामला सामने आया है। ज़ी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरोपितों ने पहले बारां से दो नाबालिग लड़कियों का अपहरण किया। अपहरण के बाद आरोपित दोनों लड़कियों को कोटा, जयपुर और अजमेर ले गए। कथिततौर पर तीन दिनों तक उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, लड़कियों के पिता ने खुद पुलिस को इस घटना की जानकारी दी और अपने साथ उन्हें लड़कियों के पास ले गया। जिसके बाद पूछताछ के लिए पुलिस लड़कियों और एक नाबालिग आरोपित को थाने ले आई।

लड़कियों के साथ हुई दरिंदगी को लेकर पिता ने पुलिस से न्याय की माँग की है। वहीं जब लड़कियों ने पुलिस अधिकारियों को घटना के बारे में बताने की कोशिश की तो आरोपितों ने पुलिस के सामने ही उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।

नोट: पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है, आगे की रिपोर्ट आने के बाद लेख को अपडेट किया जाएगा।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि से ईदगाह हटाने की याचिका को मथुरा सिविल कोर्ट ने किया खारिज, अब याचिकाकर्ता हाईकोर्ट में करेंगे अपील

कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह मामले में मथुरा के सिविल कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि मंदिर-ईदगाह के स्थान में कोई बदलाव नहीं होगा। याचिका में मंदिर के पास बनी ईदगाह को हटाने की माँग की गई थी।

अदालत ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ताओं ने अब इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने का फैसला किया है। मथुरा सिविल जज सीनियर डिवीजन में श्रीकृष्ण विराजमान का वाद दायर करने वाले हरिशंकर जैन, विष्णु जैन व रंजना अग्निहोत्री ने कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह मामले में याचिका दाखिल की थी। 

बता दें कि मथुरा की अदालत में दायर हुए एक सिविल मुकदमे में श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर की 13.37 एकड़ जमीन का मालिकाना हक माँगा गया था। इसके साथ ही मंदिर स्थल से शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की अपील की गई। इससे पहले 28 सितंबर को हुई संक्षिप्त सुनवाई में एडीजी छाया शर्मा ने मामले को सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया था। श्रीकृष्ण विराजमान व सात अन्य ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान को लेकर एक दावा 25 सितंबर को अदालत में प्रस्तुत किया था।

याचिका में जमीन को लेकर 1968 के समझौते को गलत बताया गया। इस याचिका के माध्यम से कृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ जमीन का स्वामित्व माँगा गया। याचिकाकर्ता रंजना अग्निहोत्री ने कहा कि अयोध्या का केस हम लोगों ने लड़ा, उसे जनता को सौंप दिया गया है। अब श्रीकृष्ण की मुख्य जन्मभूमि और जो इटेलियन ट्रैवलर ने अपने एकांउट में मेंशन किया है, उसके नक्शे के हिसाब से मुकदमे को सिविल कोर्ट में डाला गया है। 

हालाँकि, पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 इस मामले के आड़े आ रहा है, जिसमें विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मुकदमेबाजी को लेकर मालकिना हक पर मुकदमे में छूट दी गई थी, लेकिन मथुरा काशी समेत सभी विवादों पर मुकदमेबाजी से रोक दिया था। इस एक्ट में कहा गया है कि 15 अगस्त, 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था वो आज, और भविष्य में भी उसी का रहेगा।

पिछले साल 9 नवंबर को अयोध्या पर फैसला सुनाते हुए SC की पाँच जजों की बेंच ने ऐसे मामलों में काशी मथुरा समेत देश में नई मुकदमेबाजी के लिए दरवाजा बंद कर दिया था। हालाँकि इस संबंध में वकील विष्णु शंकर जैन के माध्यम से हिंदू समूह ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कानून की वैधता को चुनौती दी है। लेकिन अयोध्या मामले में SC ने कहा था कि अदालतें ऐतिहासिक गलतियाँ नहीं सुधार सकतीं।

सितम्बर के पहले सप्ताह में ही अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में माँग की गई थी कि अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन होने के बाद काशी में बाबा विश्वनाथ और मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर को मुक्त कराने की ओर प्रयास किया जाए। काशी-मथुरा को मुक्त कराने के लिए प्रस्ताव पारित करते हुए अखाड़ा परिषद ने इस कार्य में विश्व हिन्दू परिषद का भी सहयोग माँगा गया था।

CM योगी ने की हाथरस पीड़िता के परिजनों से बात, परिवार को 25 लाख की आर्थिक मदद, मकान और सरकारी नौकरी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस गैंगरेप पीड़िता के परिजनों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की। बुधवार (सितंबर 30, 2020) शाम को हुई बातचीत में सीएम योगी ने न्याय का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को ढाँढस बँधाया।

इस दौरान पीड़िता के पिता ने मुख्यमंत्री से आरोपियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की माँग की। मुख्यमंत्री ने बच्ची के पिता को दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया और प्रशासन को पीड़ित परिवार की हर संभव मदद के निर्देश दिए।

इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवार के लिए कई घोषणाएँ कीं। इसमें परिवार को कुल 25 लाख रुपए की सहायता राशि उपलब्ध की जाएगी। परिवार के एक सदस्य को कनिष्ठ सहायक के पद पर नौकरी दी जाएगी। सूडा योजना के अंतर्गत हाथरस शहर में एक घर का आवंटन किया जाएगा। इसके अलावा सीएम ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमें की सुनवाई अनुमति दे दी है और मामले की जाँच के लिए एसआईटी की 3 सदस्यी कमेटी का गठन कर दिया है।

आज सुबह ही पीएम मोदी ने भी इस मामले पर सीएम योगी से बात कर आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की बात कही थी। उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में 19 वर्षीय एक दलित लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया था। ये वारदात 14 सितंबर को चंदपा पुलिस थाना क्षेत्र के एक गाँव में हुई थी। 

चार युवकों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था और विरोध करने पर उसका गला घोंटने की कोशिश की थी, इस दौरान उसकी जीभ कट गई थी। इसके बाद से ही लड़की की स्थिति गंभीर बनी हुई थी। मंगलवार को किशोरी ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया।

गैंगरेप पीड़िता की मौत और देर रात को हुए अंतिम संस्कार को लेकर लोगों में काफी आक्रोश है। वहीं राज्य की योगी सरकार विपक्ष के निशाने पर है। देर रात हुए अंतिम संस्कार को लेकर विपक्ष का कहना है कि पुलिस ने साक्ष्य को मिटाने के लिए परिजनों की गैरमौजूदगी में अंतिम संस्कार कर दिया। वहीं पुलिस और प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।

एडीजी प्रशांत कुमार ने कहा कि मंगलवार सुबह पीड़िता की मृत्यु हो गई थी। देर रात पोस्टमार्टम के बाद जब शव पहुँचा तो परिवार वालों की सहमति से और उनकी उपस्थिति में अंतिम संस्कार कराया गया था। प्रशांत कुमार ने कहा कि कुछ महिलाओं द्वारा आरोप लगाए गए हैं, परंतु सत्य यही है कि उनकी उपस्थिति से और सहमति से ही अंतिम संस्कार कराया गया था। शांति व्यवस्था के लिए वहाँ पुलिस उपस्थित थी। एडीजी ने कहा कि पीड़िता की डेड बॉडी खराब हो रही थी, इसलिए घर के लोगों ने सहमति जातई थी कि रात को ही अंतिम संस्कार कर देना उचित होगा।

गौरतलब है कि 14 सितंबर को पीड़िता चारा इकट्ठा करने के लिए खेत में गई थी, जब 4 युवकों ने उस पर पीछे से हमला किया था। किशोरी को उसके गले में दुपट्टे से बाँधकर घसीट कर खेत में ले जाया गया, जहाँ कथित तौर पर उसके साथ बलात्कार किया गया। 

जघन्य कृत्य के कुछ दिनों बाद, सोशल मीडिया पर सामूहिक बलात्कार की क्रूरता की भयावहता का वर्णन करने वाली कई रिपोर्टें सामने आई। जिसमें दावा किया गया कि अपराधियों ने लड़की की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी, उसकी जीभ काट दी और आँखें भी फोड़ दी। हालाँकि, हाथरस पुलिस ने सितंबर 29, 2020 के एक बयान में इन आरोपों से इनकार किया था।

लड़कियों को भी चाहिए सेक्स, फिर ‘काटजू’ की जगह हर बार ‘कमला’ का ही क्यों होता है रेप?

हाथरस मामले में सवर्णों को गाली देकर यदि मन भर गया हो तो एक नजर अपने इर्द-गिर्द घुमा कर भी देखिएगा। पहचानने की कोशिश कीजिएगा कि कहीं कोई ‘काटजू’ तो आपके आस-पास नहीं है। ऐसे लोगों की पहचान होगी कि वो बलात्कार को सेक्स बताएँगे। फिर एकदम से तेज आवाज में कहेंगे कि हम रेप जैसे अपराध की निंदा करते हैं और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलवाने की पैरवी। 

ऐसे लोग ‘बलात्कारियों’ को अप्रत्यक्ष रूप से मासूम साबित करने के लिए आपके सामने देश की भौगोलिक स्थिति रख देंगे। आपको आजादी से पहले का इतिहास समझा देंगे। आप ज्यादा संस्कृति और सभ्यता से प्यार करने वाले हुए तो ‘कामसूत्र’ का बाण छोड़ देंगे और खुजराहो में बनी नक्काशी का हवाला दे देंगे।

इसके बाद अगर आपमें सोचने-समझने का विवेक बचा तो हो सकता है आप उनका विरोध करें। मगर, उस समय वह आपको ये कहकर चुप कराएँगे कि हमने पहले ही कहा था कि हम रेप जैसे अपराध की निंदा करते हैं और दोषियों के लिए कड़ी से कड़ी सजा की माँग। शायद, तब आपके पास ‘काटजू’ जैसी सोच की आलोचना करने के लिए शब्द न बचें, जो व्यक्तिगत विचार के नाम पर आपके सामने बलात्कार को सेक्स बताकर परोसी जा रही हो।

आज हाथरस कांड ने जब एक बार फिर पूरे देश को झकझोर दिया है तब अपने विवादित बयानों के कारण पहचाने जाने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू दोबारा चर्चा मे हैं। उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट लिखा है। पोस्ट में उन्होंने हाथरस की घटना की निंदा बिलकुल उसी अंदाज में की है, जैसा ऊपर जिक्र किया गया। दुखद बात यह है कि मार्कंडेय काटजू पूर्व न्यायाधीश (वो भी सुप्रीम कोर्ट में!) रह चुके हैं और फिर भी ऐसा मानते हैं कि रेप की घटनाएँ बेरोजगारी के कारण हो रही हैं! 

उनका मानना है कि एक पुरुष के लिए खाने के बाद दूसरी सबसे बड़ी जरूरत है – सेक्स। और भारत जैसे दबे समाज में रहते हुए इसकी आजादी सिर्फ शादी के बाद ही मिलती है, यह भी वो मानते हैं। ऐसे में अगर देश में बेरोजगारी होगी और युवाओं की शादी नहीं हो पाएगी तो एक उम्र के बाद उनकी इच्छाएँ प्रबल होंने लगेंगी और जरूरत बन जाएँगी। वह कहते हैं कि देश में बेरोजगारों से कोई लड़की शादी नहीं करना चाहती है। इसलिए बड़ी संख्या में युवा (लड़के/मर्द) सेक्स से वंचित हो जाते हैं। जबकि एक उम्र में जाने के बाद उनके लिए यह सामान्य जरूरत है।

आगे वो कहते हैं कि 1947 से पहले अविभाजित भारत की जनसंख्या लगभग 42 करोड़ थी। आज अकेले भारत में लगभग 135 करोड़ लोग हैं, जिसका अर्थ है कि जनसंख्या में चार गुना वृद्धि हुई है। लेकिन बढ़ी हुई नौकरियों की संख्या चार गुना से भी कम है। उनका कहना है कि जब जून 2020 में अकेल 12 करोड़ लोगों ने अपनी नौकरियाँ गवाईं तो क्या रेप में वृद्धि नहीं होगी।

‘माननीय’ पूर्व न्यायाधीश काटजू

अपनी बात को आगे बढ़ाने से पहले वो एक बार फिर स्पष्ट करते हैं कि वह रेप को जस्टिफाई नहीं कर रहे। बस उस स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित करवा रहे हैं, जिसके कारण यह सब बढ़ रहा है। वह मानते हैं कि अगर रेप को कम करना है तो सामाजिक और आर्थिक तंत्र भारत में बनाना होग, जहाँ कोई बेरोजगारी न हो या हो तो बहुत कम।

काटजू का सोशल मीडिया पर काटा जा रहा

अब सोचिए कि एक छोटे से पोस्ट को लिखते वक्त जब व्यक्ति विशेष को हर पैराग्राफ में इस बात को दोहराना पड़े कि वह रेप को जस्टिफाई नहीं कर रहा है। तो कहीं न कहीं इस बात का आभास तो होता है कि उसे खुद भी यह बात मालूम है कि वह बलात्कार पर सफाई ही दे रहा है। फिर चाहे उसे सेक्स के समान बता कर करे या उसे बेरोजगारी का दुष्परिणाम बताकर।

आगे बढ़ने से पहले बता दें कि सोशल मीडिया पर इस पोस्ट की खूब आलोचना हो रही है। लोग तरह-तरह की प्रतिक्रिया देकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की सोच पर सवाल उठा रहे हैं और जो उनको चाहने वाले हैं, वो समझा रहे हैं कि वह इसे डिलीट कर दें। मगर, हर जगह ‘माननीय’ पूर्व न्यायाधीश काटजू एक कमेंट ही कॉपी पेस्ट कर रहे हैं और कह रहे हैं कि उनका मत तो बस यह है कि जब तक बेरोजगारी है, रेप होते रहेंगे।

कमेंट कॉपी पेस्ट काटजू

काटजू के बयान के मुताबिक सेक्स की जरूरत और बेरोजगारी की समस्या रेप जैसी घटना के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए यह सवाल उठता है कि क्या यह दोनों स्थिति सिर्फ पुरुषों के लिए है? या महिलाएँ इनकी चीजों की परिधि में आती ही नहीं?

सेक्स को पुरुषों की जरूरत तक सीमित कर देने वालों को टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक खबर पढ़ने की आवश्यकता है, जो बताती है कि महिलाओ के भीतर सेक्स की इच्छा पुरुषों से अधिक होती है। और फिर रही बेरोजगारी की बात तो इस लॉकडाउन में जहाँ पुरुष कर्मचारियों ने नौकरियाँ गवाई हैं, वहीं महिला कर्मचारियों को भी जॉब से हाथ धोना पड़ा है। अब जाहिर है बेरोजगार हुई लड़कियाँ वयस्क ही हैं। तो अगर ‘काटजू’ थ्योरी को यहाँ अप्लाई किया जाए तो क्या निष्कर्ष समान मिलेंगे?

महिलाओं में भी सेक्स की होती है इच्छा

नहीं। आप कभी नहीं सुनेंगे कि किसी बेरोजगार ‘कमला (महिला-जो वयस्क भी है)’ ने अपनी सेक्स की इच्छा पूरी करने के लिए ‘काटजू (मजबूर, गरीब… खेत में शौच के लिए जाता एक मर्द)’ को धर दबोचा क्योंकि उससे उसके हार्मोन कंट्रोल नहीं हो रहे थे। मगर आज ‘काटजू’ से आप यह जरूर सुन रहे हैं कि ‘कमला (हाथरस पीड़िता जैसी अनेक महिलाएँ)’ का रेप इसलिए हुआ क्योंकि युवक बेरोजगार होते हैं और उनकी उम्र में सेक्स की जरूरत होती है। पर बेरोजगारी के कारण उनकी शादी नहीं होती, जिससे वह इस जरूरत से वंचित हो जाते हैं।

रेप और सेक्स के बीच में अंतर तक न जानने-समझने वाले लोगों के बारे में जब मालूम चलता है कि वो भारतीय न्याय व्यवस्था (वो भी सबसे ऊपरी हिस्से में बैठे) का हिस्सा रहे हैं, तो इससे ज्यादा हास्यास्पद कुछ भी नहीं लगता। कल्पना कीजिए कि बलात्कार जैसे जघन्य अपराध को अंजाम देने वाला आरोपित कटघरे में खड़ा है और उसे देख कर लोग तरस खा रहे हैं। सबके मन में बस यही चल रहा है कि काश इसके पास नौकरी होती तो यह आराम से सेक्स कर पाता, किसी लड़की की जिंदगी बर्बाद नहीं करता। 

लोगों के मन में रेप आरोपित को लेकर सोच का यह विकल्प क्यों? इसे भी ‘काटजू’ थ्योरी से समझिए। नौकरी होती तो शादी होती। शादी हो जाती तो बीवी के साथ सेक्स कर पाता। इच्छाएँ वहीं शांत हो जातीं। न मन इधर-उधर भागता, न वह किसी लड़की को पकड़ कर रेप करता और न ही हवस शांत होते ही फँसने के डर से उसे बर्बरता से मारता।

‘काटजू’ थ्योरी के साथ कई लोग आपको अपने आस-पास देखने को मिलते होंगे। उन्हें रेप के पीछे बलात्कारी मानसिकता नहीं, प्रशासन की ढिलाई नजर आती होगी। उन्हें लड़कों की गंदी नजर से आपत्ति नहीं होगी, लड़की ने क्या पहना था, इस पर उनका सवाल होगा। उनके साथ बात करने के बाद आप बलात्कारी को भी घृणा की जगह मानवीय दृष्टि से देखने लगेंगे। बिलकुल उसी तरह जैसे आतंकियों को उनके प्रोफेशन और फैमिली बैकग्राउंड से जज करने लगते हैं। उनके लिए संवेदनाएँ प्रकट करने लगते हैं।

साभार: world population review

अगर भारत में रेप की वारदातें वाकई बेरोजगारी के कारण बढ़ रही हैं तो world population review के आँकड़े में क्यों स्वीडन शामिल है? वहाँ की इम्प्लॉयमेंट रेट तो 75 प्रतिशत के भी पार है। क्यों रेप मामलों में टॉप 10 की गिनती में कहीं भी भारत नहीं है? 

इसके अलावा देश की ही अगर बात करें तो बॉलीवुड का उदाहरण ले सकते हैं। इन दिनों सुर्खियों में भी है। बॉलीवुड के न जाने कितने लोगों पर रेप का आरोप लगा है। अब उनका अपराध सही साबित करने के लिए कौन सी बेरोजगारी या पुरुषों की हवस वाला कार्ड खेला जाएगा? कार्यस्थलों पर होने वाले लड़की के शोषण पर कैसे सफाई दी जाएगी? खुद के ही रिश्तेदारों द्वारा सताई पीड़िता के लिए क्या कहा जाएगा?

रेप और सेक्स में फर्क होता है। इस बात को सब अच्छे से जानते हैं। रेप की बढ़ती घटनाओं में बेरोजगारी एक फैक्टर की तरह हो सकती है। मगर, रेप के लिए सिर्फ़ बेरोजगारी को जिम्मेदार ठहराना और उस पर भी पुरुष की इच्छा व अवस्था का हवाला देने वाली समझ आपके भीतर के इंसान को गर्त में पहुँचा देगी। ऐसा होते ही आपकी सोच कुछ-कुछ ऐसी हो जाएगी:

महिलाओं की इज्जत आपको ख़िलवाड़ लगेगी!
आप इस बात को भूल जाएँगे कि सेक्स नैचुरल है और आपसी सहमति से बनाया गया संबंध है!

रेप पीड़िता/पीड़ित के मन पर हुआ आघात है। उसके शरीर पर किया गया हमला है। इसमें पीड़ित के साथ संबंध तो बनाए जाते हैं, मगर उसके अंतर्मन को झकझोर दिया जाता है। रेप में पीड़िता की गैर रजामंदी होती है और वो असहनीय पीड़ा होती है, जो किसी अनचाहे इंसान को अपने ऊपर महसूस करने के कारण बढ़ती जाती है।

पीड़ित लड़की/लड़का वहीं खत्म होना शुरू हो जाती/जाता है, जब कोई उसे ऐसी मंशा से छूता है। तब वो इतना समझदार नहीं रह जाती/जाता कि उसे ये पता चले कि रेप करने वाला लड़का बेरोजगार है या उस पर हवस का भूत सवार है। उसके सामने सीधे वो निर्भया का चेहरा आ जाता है, जिसके विरोध करने पर योनि में लोहे की रॉड घुसा दी गई थी और आँतों को बाहर कर दिया गया था।