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‘दलित लड़कियों का रेप करना सवर्ण का अधिकार’: पाकिस्तान में छपा मीडिया गिरोह ThePrint के पत्रकार का लेख

भारत के मीडिया गिरोह विशेष को अब भारत में प्रोपेगेंडा फैलाने से मन भर गया है। तभी तो अब उनके लेख पाकिस्तानी मीडिया पोर्टलों में प्रकाशित हो रहे हैं और इसके द्वारा देश को भी बदनाम किया जा रहा है। पाकिस्तानी अख़बार ‘Dawn’ की वेबसाइट पर लिखे एक लेख में शेखर गुप्ता की ‘दि प्रिंट’ के शिवम विज ने ये नैरेटिव बनाने की कोशिश की है कि भारत के दलितों को उनकी जाति की वजह से यौन हिंसा का सामना करना पड़ता है।

इस लेख में शेखर गुप्ता के ‘दि प्रिंट’ में कार्यरत शिवम विज ने लिखा है कि कैसे हाथरस मामले को ‘एक दलित लड़की का बलात्कार’ बताने पर जो लोग ये कह रहे हैं कि इसमें जाति घुसाने की क्या ज़रूरत है या फिर जो ये पूछ रहे हैं कि क्या नॉन-दलितों का बलात्कार और उनकी हत्याएँ नहीं होती – वो सही नहीं हैं। उन्होंने नैरेटिव बनाया है कि इस मामले से जाति का बहुत कुछ लेना-देना है और दलितों के साथ यौन हिंसा के हर मामले में जाति का लेना-देना है।

इस लेख में आरोपितों को बार-बार ‘ठाकुर’ कह कर सम्बोधित किया गया है और निर्भया गैंगरेप की तुलना कर के बताया गया है कि कैसे ये मामला अलग है क्योंकि ‘आरोपित ठाकुर लोग’ और पीड़ित परिवार के पड़ोसी ही थे। लिखा गया है कि निर्भया मामले में कुछ शराब पिए हुए लोग थे, जो ‘Fun’ की खोज में थे। इस लेख में पीड़िता के भाई के हवाले से न्यूज़लॉन्ड्री में छपे बयान का जिक्र किया गया है।

पाकिस्तानी मीडिया पोर्टल में ‘दा प्रिंट’ के शिवम विज का लेख

इसमें दावा किया गया है कि जिस भी गाँव में अलग-अलग जाति के लोग हैं, वहाँ ‘उच्च जाति के लोग’ दलितों को परेशान करते हैं और ‘ठाकुर लोग’ ये तक बर्दाश्त नहीं कर पाते कि उनके खेतों में किसी दलित की भैंस चरने आ जाए। साथ ही पूछा गया है कि अगर आरोपित मुस्लिम होते तो उसके बाद आजकल क्या होता है, ये सबको पता है। बड़ी चालाकी से इस लेख में बलरामपुर वाली घटना का जिक्र ही नहीं है। इसमें लिखा है कि सवर्ण ये सोचते हैं कि उनका अधिकार है कि वो दलित लड़कियों का बलात्कार करें।

‘Dawn’ के इस लेख में भारत को बदनाम करने की कोशिश करते हुए शेखर गुप्ता के ‘दि प्रिंट’ के शिवम विज ने एक प्रोफेसर के हवाले से लिखा है कि क्या किसी ने कभी किसी दलित को ब्राह्मण लड़की का बलात्कार करते हुए सुना है? दावा किया गया है कि संदीप शराब पी कर अक्सर महिलाओं के साथ छेड़खानी किया करता था लेकिन उसके खिलाफ इसीलिए किसी ने शिकायत दायर नहीं की थी, क्योंकि वो ‘ठाकुर’ है।

इससे पहले ‘द वायर’ की पत्रकार रोहिणी सिंह ने अपने ट्वीट में दावा करते हुए कहा था कि बलात्कार सिर्फ सेक्स से संबंधित नहीं है, यह महिलाओं को उनका स्थान बताने के लिए भी किया जाता है। रोहिणी के अनुसार, ‘ऊँची जाति वाले लोग नीची जाति की महिलाओं के साथ’ दुष्कर्म इसलिए करते हैं, जिससे वह निम्न समुदाय के लोगों को संदेश दे सकें। रोहिणी ने कहा था कि वह इस बात को नहीं समझ सकती, जबकि रोहिणी खुद एक ‘ऊँची जाति’ से आती हैं। वो भी बलरामपुर पर चुप हैं।

‘हमें बंदूक-पिस्तौल खरीदना है, 50% सब्सिडी दे सरकार’ – 20 लाख बहुजनों के लिए चंद्रशेखर की ‘नौटंकी’

उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई घटना को लेकर देश के लोगों में आक्रोश है। अनेक विपक्षी नेता भी सरकार को इस मुद्दे पर घेरने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली के जंतर मंतर तक लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है। दिल्ली के जंतर मंतर पर भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर भी प्रदर्शन कर रहे हैं। शनिवार (3 अक्टूबर 2020) को उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर एक विवादित बयान दिया। चंद्रशेखर ने जीने के अधिकार (राईट टू लाइफ) की दलील देते हुए कहा दलित समुदाय के लोगों को बंदूक मिलनी चाहिए। 

चंद्रशेखर ने ट्वीट करते हुए कहा कि संविधान में सभी को जीने का अधिकार मिला है। इस अधिकार में खुद की सुरक्षा का अधिकार भी शामिल है, इस बात को मद्देनज़र रखते हुए सरकार दलित समुदाय के लोगों को 50 फ़ीसदी सब्सिडी पर बंदूकें दे। ट्वीट करते हुए चंद्रशेखर ने लिखा, 

“संविधान में हर नागरिक को जीने का अधिकार दिया है, जिसमें आत्म रक्षा का अधिकार शामिल है। हमारी माँग है कि देश में 20 लाख बहुजनों को हथियारों के लाइसेंस तत्काल दिया जाए। हमें बंदूक़ और पिस्तौल ख़रीदने के लिए 50% सब्सिडी सरकार दे। हम अपनी रक्षा खुद कर लेंगे।” 

इस मामले में सबसे ज़्यादा हैरानी की बात यह है कि बंदूक की माँग एक ऐसे नेता ने की है, जो खुद भीमराव अंबेडकर की विचारधारा को मानने वालों में से एक है। जो अंबेडकर हमेशा संविधान के आधार पर चलने की बात करते थे, उनकी विचारधारा को मानने वालों लोगों को अब बंदूक की ज़रूरत पड़ रही है।      

बहस यहीं पर नहीं रुकी, इसके बाद एक दलित कार्यकर्ता ने इस बात के समर्थन में कई नियमों का हवाला तक दे दिया। दलित कार्यकर्ता सूरज येंगडे ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1995 को आधार बनाते हुए अपनी बात कही। उनके मुताबिक़ यह नियम एक व्यक्ति को सुरक्षा के लिए हथियार का लाइसेंस प्रदान करने का अधिकार देता है। 

हालाँकि कॉन्ग्रेस प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर कहा, “मेरा मानना है कि हमें गाँधीवादी दर्शन से ही आगे बढ़ना चाहिए। अहिंसा इस लड़ाई का इकलौता सार्थक विकल्प है, इसके ज़रिए ही अन्याय के विरुद्ध लड़ाई लड़ी जा सकती है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भाजपा सांसद राकेश सिन्हा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुन कर आई लोकतांत्रिक सरकार आम नागरिकों की संरक्षा और सुरक्षा के लिए पूरी तत्परता और प्रभावी रूप से प्रतिबद्ध है। इस प्रकार के बयान और माँगों का उद्देश्य केवल नौटंकी है, इसका कोई अर्थ नहीं है।”  

हिंदुओं के रेप में जाति का समीकरण परोसता मीडिया, TRP के लिए 13 साल पहले ही दिख गया था मीडिया का गिद्ध रूप

हाथरस मामले के बीच ये याद करने की ज़रूरत है कि बारह वर्ष पहले, साल का करीब-करीब यही वक्त था (अक्टूबर 2008), जब उमा खुराना ने एक स्टिंग ऑपरेशन को लेकर अपना मानहानि का मुकदमा वापस लिया। उनका कहना था कि टीवी न्यूज़ चैनल के साथ, अदालत के बाहर ही संतोषजनक तरीके से मामला सुलझा लिया गया है।

उमा खुराना ने नवम्बर 2007 में चैनल के रिपोर्टर और सीईओ पर झूठी खबर चला कर उनकी इज्जत उछालने का मुकदमा करवाया था। क्या मामला सिर्फ मानहानि का था? चाहे कितनी भी तमीज से कह लिया जाए, ये सिर्फ मानहानि का मामला नहीं कहा जा सकता।

उमा खुराना को भीड़ ने पकड़कर खूब पीटा था, उनके कपड़े फाड़ दिए गए। सरेआम दिल्ली में जब ये घटना हुई थी तो जनता की सहानुभूति भी मीडिया लिंचिंग की शिकार हुई इस महिला के साथ नहीं थी। उस वक्त उमा खुराना केन्द्रीय दिल्ली के सर्वोदय कन्या विद्यालय में गणित की शिक्षिका थीं।

दिल्ली में एक समाचार चैनल “जनमत चैनल” को नाम बदलकर “लाइव इंडिया” के नाम से दोबारा लॉन्च किया गया था। मार्कंड अधिकारी के ब्रोडकास्ट इनिशिएटिव्स लिमिटेड के इस चैनल पर पहले चर्चाओं और विचारों वाले कार्यक्रम आते थे, लेकिन अब इस चैनल का ध्यान 24X7 न्यूज़ पर था। अगस्त 2007 में “लाइव इंडिया” के कार्यक्रमों में बदलाव आना शुरू भी हो चुका था।

ऐसे कामों के लिए नई भर्तियाँ भी हो रही थीं और रजत शर्मा के न्यूज़ चैनल “इंडिया टीवी” से निकलकर सुधीर चौधरी ने मार्च 2007 में “लाइव इंडिया” में सीईओ के तौर पर काम करना शुरू कर दिया था। “लाइव इंडिया” ने अपना टैग लाइन बदलकर “खबर हमारी फैसला आपका” रख लिया था। उसके टैग लाइन की ही तरह लोगों ने फैसला भी लिया।

अगस्त 2007 में ही आईबीएन7 से लाइव इंडिया में आए पत्रकार प्रकाश सिंह ने एक दिन एक स्टिंग ऑपरेशन दिखा दिया। इसमें उमा खुराना पर शिक्षिका होने की आड़ में वेश्यावृति करवाने के आरोप थे। स्टिंग को बिना किसी जाँच के सुधीर चौधरी ने अपने चैनल पर चलवा दिया। इसका नतीजा ये हुआ कि गुस्साई हुई भीड़ ने उमा खुराना के कपड़े फाड़ डाले और उनके साथ जमकर मार पीट की।

सच्चाई सुधीर चौधरी, प्रकाश सिंह, और लाइव इंडिया चैनल की दिखाई खबर में कितनी थी, इसकी जाँच जब तक होती, उससे पहले ही काफी कुछ हो चुका था। मीडिया लिंचिंग में सरे बाजार कपड़े फाड़े जाने और पिटाई के अलावा भी उमा खुराना को काफी कुछ भुगतना पड़ा था। दिल्ली के शिक्षा विभाग ने उन्हें नौकरी से भी निकाल दिया था।

जब मामले की जाँच शुरू हुई तो पता चला कि प्रकाश सिंह का बनाया हुआ स्टिंग का वीडियो फर्जी था। जिस लड़की को दिखाया गया था, उसे पत्रकार बनना था, और यही लालच देकर प्रकाश सिंह ने कैमरे पर उससे उमा खुराना पर झूठा, वैश्यावृति करवाने का आरोप लगवाया था।

प्रकाश सिंह को गिरफ्तार किया गया और उस पर मुकदमा भी दाखिल हुआ था। सुधीर चौधरी ने कहा कि उनके साथ धोखा हुआ है। सारी गलती उनके फर्जी पत्रकार प्रकाश सिंह की थी और उनसे पूरी जाँच ना कर पाने भर की मानवीय भूल हुई है। मीडिया लिंचिंग करवाने वाले सुधीर चौधरी अब एक दूसरे बड़े चैनल में अक्सर नजर आ जाते हैं। उमा खुराना का क्या हुआ मालूम नहीं।

प्रकाश सिंह जैसे पत्रकार और फर्जी स्टिंग चलाने की आदत सुधरी हो, ऐसा कहा नहीं जा सकता। ब्रेकिंग न्यूज़ की टीआरपी लेने के चक्कर में ऐसी घटनाएँ होती रहती हैं और किसी ना किसी बेगुनाह को मीडिया लिंचिंग का शिकार होना पड़ता है।

हाथरस मामले में भी ऐसा ही हुआ लगता है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ये आम बात है कि प्रेम प्रसंगों में जब युगल पकड़े जाते हैं या उनके भाग जाने पर भी मुकदमा होता है तो युवक पर अपहरण और बलात्कार के अभियोग लगाए जाते हैं। गैर जमानती धाराओं से छूटकर आने में युवक को जितना समय लगता है, उतने में अक्सर लड़की की शादी कहीं और हो चुकी होती है।

बलात्कार के मामलों में “कन्विक्शन रेट” के 30% से भी कम होने की एक वजह ये भी है कि इनमें से कई मामले फर्जी होते हैं। जुलाई 2014 में वीमेन कमीशन ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें बताया गया था कि अप्रैल 2013-जुलाई 2014 के बीच दर्ज हुए बलात्कार के 53.2% मामले झूठे थे।

ऐसे मामलों में मीडिया लिंचिंग भी कोई नई बात नहीं है। अख़बारों में ऐसी ख़बरों के शीर्षक अक्सर “नाबालिग से दरिंदगी” जैसे होते हैं। इसके अलावा लम्बे समय तक फिल्मों के जरिए ठाकुरों को आततायी, ब्राह्मणों को धूर्त या गाँव के लाला को उधार के बदले शोषण करने वाला दर्शाने का भी समाज पर असर पड़ा होगा। इस वजह से जब बलात्कार जैसे मामलों को जातिय कोण के साथ “परोसा” जाता है तो समाज पर उसका असर और त्वरित प्रतिक्रिया स्वाभाविक ही है।

गौरतलब ये भी है कि जातियों का कोण समाचारों में तभी नजर आता है, जब मामला हिन्दुओं का हो। दूसरे समुदायों के बलात्कारियों की खबर अगर चलती भी है तो मजहब या जाति जैसे मामले नजर नहीं आते।

जो भी हो, हाथरस मामले को सीबीआई को सौंपे जाने की अनुशंसा हो गई है। इस एक मामले की आड़ में यूपी के ही सर काट लेने या बुलंदशहर जैसे दूसरे मामले दब भी गए हैं। पंद्रह दिनों तक दिल्ली में इलाज करवा रही लड़की को दिल्ली के ही नेता, मौत के बाद हाथरस में देखने क्यों पहुँचे, ये सवाल पूछना चाहिए या नहीं, ये हमें मालूम नहीं।

जुबेर ने बिहार की 19 साल की लड़की का दिल्ली में कई बार किया रेप: पहली बार ही बना लिया था वीडियो, देता था धमकी

राजधानी दिल्ली में एक युवती के साथ बलात्कार का मामला सामने आया है। दिल्ली के द्वारका सेक्टर 7 में एक युवती को नशीला पदार्थ देकर उसके साथ बलात्कार किया गया। वारदात के आरोपित जुबेर ने युवती को जान से मारने की धमकी भी दी और उसके घर पर छोड़ कर चला गया। बलात्कार के दौरान जुबेर ने पीड़िता का अश्लील वीडियो बनाया था और इसके ज़रिए ही पीड़िता को धमकी देता था। इसके बाद युवती ने पुलिस से पूरी घटना की शिकायत की जिसके आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज करके आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।   

लाइव हिन्दुस्तान में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार पुलिस अधिकारी ने इस पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 19 वर्षीय पीड़िता बिहार के पूर्णिया की रहने वाली है, दिल्ली के पालम क्षेत्र में किराए के घर में रहती है। द्वारका के एयरफ़ोर्स सोसाइटी में बेबी केयर टेकर का काम करती है। पुलिस द्वारका साउथ थाना में दर्ज कराई गई शिकायत में कहा था कि लगभग 1 साल 3 महीने पहले उसकी जुबेर से पहचान हुई थी। इसके बाद दोनों संपर्क में आए और जुबेर ने उसे नौकरी दिलाने की बात कही। इस संबंध में दोनों की 31 जनवरी को मुलाक़ात हुई, इस दौरान जुबेर ने उसे किसी अन्य व्यक्ति से मिलाने की बात भी कही। 

जुबेर पीड़िता को द्वारका सेक्टर 9 क्षेत्र में स्थित बीडी पैलेस नाम के होटल में लेकर गया। इसके बाद युवती को नशीला पदार्थ पिला कर उसके साथ बलात्कार किया। इस घटना के दौरान जुबेर ने युवती की कई अश्लील तस्वीरें ली और वीडियो भी बना लिए। बलात्कार की वारदात को अंजाम देने के बाद जुबेर ने पीड़िता को उसके घर छोड़ा और मौके से फरार हो गया। पीड़िता ने अपनी शिकायत में यहाँ तक बताया कि उसने जुबेर से संपर्क ख़त्म करने का हर संभव प्रयास किया लेकिन उसने पीछा नहीं छोड़ा। इतना कुछ होने के बाद आरोपित जुबेर ने पीड़िता का अपहरण करके दूसरी बार उसके साथ बलात्कार किया था। 

जुबेर के पास पीड़िता के कई वीडियो और तस्वीरें थीं, जिसे वायरल करने की धमकी देकर आरोपित ने पीड़िता के साथ कई बार दुष्कर्म किया। कोई विकल्प नहीं नज़र आने की सूरत में पीड़िता ने सबसे पहले इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी अपने परिवार वालों को दी। इसके बाद उसने पुलिस के पास जाकर इस घटना के संबंध में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जुबेर के विरुद्ध धारा 376/506 के तहत मामला दर्ज करके 2 अक्टूबर को उसे गिरफ्तार कर लिया।   

पत्थर, डंडे और छोटे बमों से TMC के गुंडों का हमला… कृषि कानून का समर्थन करना भी पश्चिम बंगाल में गुनाह!

हाल ही में पारित किए गए कृषि क़ानून को लेकर देश भर में अलग अलग प्रतिक्रिया देखने को मिली। लगभग सभी राज्यों के किसानों ने इस क़ानून को लेकर अपना नज़रिया जाहिर किया। इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कृषि विधेयक के समर्थन में रैली निकाली। इस दौरान उन पर तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने धावा बोल दिया। उनके द्वारा किए गए हमले में भाजपा के कई कार्यकर्ता बुरी तरह घायल भी हो गए, घटना के कई वीडियो ट्विटर पर साझा किए गए हैं। 

पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले स्थित नोडाखली गाँव में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कृषि क़ानून के समर्थन में शनिवार (3 अक्टूबर 2020) को रैली निकाली थी। अचानक ही तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला कर दिया। घटना के वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि उनके हाथ में पत्थर और डंडे थे यानी वह इस घटना को अंजाम देने के लिए पूरी तैयारी के साथ आए थे। अभी तक हमले की इस घटना के मामले में कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ भाजपा पूरे प्रदेश में कृषि आंदोलन के समर्थन में रैलियाँ निकाल रही है। जिससे किसानों को इस क़ानून से होने वाले फ़ायदों के बारे में सही जानकारी दी जा सके। इस अभियान की अगुवाई भाजपा पश्चिम बंगाल अध्यक्ष दिलीप घोष कर रहे हैं। जिस समय भाजपा कार्यकर्ताओं 24 परगना जिले में हमला हुआ, उस ठीक उस वक्त दिलीप घोष पूर्वी मिदनापुर के हल्दिया में रैली निकाल रहे थे। 

भाजपा कार्यकर्ता सत्यपिर्ताला की तरफ मार्च करते हुए आगे बढ़े तभी उन पर यह हमला हुआ। भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन पर पत्थर और ईटों से हमला किया गया। कई जगहों पर छोटे बम धमाके तक किए गए, इस पूरे घटनाक्रम में कई कार्यकर्ता बुरी तरह घायल भी हो चुके हैं। हालाँकि कुछ ही समय बाद मौके पर पुलिस आई और हालात पर काबू किया गया। पुलिस इस घटनाक्रम में अभी तक कुल 7 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।  

‘स्वरा भास्कर ‘आधी ब्राह्मण, आधी कायस्थ’… दलितों का खून चूसने वाली’ – बहुजन ग्रुप ने खुलेआम लिखी यह बात

‘भीम आर्मी’ के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ ‘रावण’ के एक समर्थक समूह ने बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर पर जम कर निशाना साधा है। समूह ने उस तस्वीर पर प्रतिक्रिया देते हुए ये बातें लिखी, जिसमें स्वरा भास्कर हाथ में बाबासाहब आंबेडकर की तस्वीर लिए ‘रावण’ के साथ एक मंच पर दिख रही हैं। ‘रेवोलुशनरी मीम्स फॉर बहुजन टीन्स’ (RMBT) नामक फेसबुक पेज ने लिखा कि जेएनयू में सोशियोलॉजी की छात्र रहीं स्वरा दलित-बहुजन स्पेस के लायक नहीं हैं, वो पैरासाइट हैं।

उक्त समूह के फेसबुक पेज पर 32,000 लाइक्स हैं और वो इस बात से आक्रोशित हैं कि हाथरस मामले में स्वरा भास्कर भी चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ ‘रावण’ के साथ ‘लाइलाइट लूट रही’ हैं। साथ ही अभिनेत्री की माँ, जो सेंशर बोर्ड की सदस्य रह चुकी हैं – उन पर भी कई आरोप लगाए। उनके माता-पिता और उनके राज्यों को भी नहीं बक्शा। बता दें कि हाथरस मामले में दलितों का मुद्दा बना कर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

इसके लिए उसने कारण गिनाया कि स्वरा भास्कर ने कभी पिअर बोर्दियू, अंटोनिओ ग्रामस्की, जेन इलियट, पेग्गी मैलन्तोष या मालकम एक्स को नहीं पढ़ा होगा कि वो दलित-बहुजन स्पेस में कूदने के लिए पहला मौका तलाशें। साथ ही समूह ने सलाह दी कि ‘आधी ब्राह्मण, आधी कायस्थ’ स्वरा भास्कर को सबसे पहले अपने समुदायों में सुधार अभियान चलाना चाहिए। लिखा कि उनके पेरेंट्स जिन राज्यों से आते हैं, वो वहाँ सुधार अभियान चलाएँ – दलित-बहुजन विरोध प्रदर्शन में लाइमलाइट ढूँढ़ने से पहले।

साथ ही ‘रावण’ समर्थक RMBT ने आरोप लगाया कि स्वरा भास्कर के भाई ने एक जोशी के साथ शादी की है और अभिनेत्री खुद एक शर्मा के साथ रिलेशनशिप में हैं। साथ ही पूछा कि आखिर कैसे ये ‘ब्राह्मण सवर्ण’ समूह के लोग अपने ही ‘ब्राह्मण सवर्ण’ समूह के ही लोगों के साथ प्यार में पड़ते हैं। RMBT ने लिखा कि ये लोग बहुजन आंदोलन को हाईजैक करने से पहले अपने समुदायों के ‘पक्षपाती’ रवैये पर कब बोलेंगे?

RMBT ने आरोप लगाया कि स्वरा भास्कर के माता-पिता आंध्र प्रदेश और बिहार से आते हैं और इन्हीं दोनों राज्यों में ‘ऑनर किलिंग’ सबसे ज्यादा होती है। उसने लिखा कि स्वरा भास्कर के ‘एक्टिविज्म’ के लिए यही दोनों राज्य सबसे ज्यादा उपयुक्त हैं क्योंकि वहाँ ‘छोटी-छोटी बातों पर सवर्ण समाज के लोग बहुजन युवाओं की जान ले लेते हैं’। स्वरा भास्कर की माँ और जेएनयू में प्रोफेसर इरा भास्कर पर भी ‘रावण’ समर्थक समूह ने बहुजन छात्रों के साथ भेदभाव करने व उन्हें फेल कर देने का आरोप लगाया।

उसने पूछा कि क्या स्वरा भास्कर ने कभी भी इन मुद्दों पर अपनी माँ को घेरा या अपनी प्रोफेसर माँ से सारे सम्बन्ध तोड़े? साथ ही RMBT ने आरोप लगाया कि उक्त तस्वीर में स्वरा भास्कर को चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ ‘रावण’ के साथ मंच पर कोई जगह मुहैया नहीं कराई गई थी, वो बिन-बुलाई ही वहाँ कूद गईं। बता दें कि अभिनेत्री के पिता उदय भास्कर पूर्व नौसेना अधिकारी हैं, जो 3 बड़े थिंक टैंकों के अध्यक्ष रह चुके हैं।

हाल ही में ‘रसभरी’ वेब सीरिज की अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने नसीरुद्दीन शाह से सहमति व्यक्त करते हुए कहा था, “मैं बिल्कुल नसीर सर से सहमत हूँ। वास्तव में मैं यह कई दिनों से कह रही हूँ। आप इसे मेरे सोशल मीडिया पर देख सकते हैं, यह देखने के लिए कि यह कैसे सोशल मीडिया और कई मीडिया घरानों ने अपनी कॉन्सपिरेसी थ्योरी को शुरू किया है और जनता को झूठ का शिकार बना रहे हैं।”

सुशांत ने आत्महत्या की थी, AIIMS के डॉक्टरों के हवाले से चल रही यह खबर ‘प्लांटेड’, अर्नब गोस्वामी करेंगे खुलासा

पत्रकार अर्नब गोस्वामी ने सुशांत सिंह राजपूत मामले में मीडिया में एम्स के डॉक्टरों के हवाले से चल रही खबर का खंडन करते हुए बड़ा खुलासा करने की बात कही है। चैनल ने कहा है कि क्या एम्स के डॉक्टरों के हवाले से ‘अनाधिकारिक लीक’ ही वो ‘सच’ है, जिसे मीडिया जम कर प्रचारित कर रही है। चैनल ने कहा है कि ऐसा नहीं है, बल्कि ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ सुशांत सिंह राजपूत के बारे में ‘धमाकेदार खुलासा’ करने वाला है, जिससे इस मामले में चल रही ‘आत्महत्या थ्योरी’ वाला नैरेटिव पलट जाएगा।

रविवार (अक्टूबर 4, 2020) को ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक और लोकप्रिय पत्रकार अर्नब गोस्वामी ने बताया कि वो सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को सुबह 10 बजे सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में ‘फाइनल खुलासा’ करेंगे, जो एम्स के डॉक्टरों के लीक हुए अनाधिकारिक बयान पर जश्न मना रहे लोगों के लिए ‘वेक अप कॉल’ की तरह होगा। साथ ही उन्होंने मीडिया में चल रही इन ख़बरों को नकार दिया।

चैनल ने कहा है कि इस मामले में कई मीडिया संस्थानों को ‘सेलेक्टिवली’ बातें बताई गईं, उसके आधार पर उन्होंने ये फैलाना शुरू कर दिया कि सुशांत सिंह राजपूत की हत्या नहीं की गई, उन्होंने आत्महत्या की है। सितम्बर 28 को एम्स के डॉक्टरों की टीम ने मुंबई पुलिस की पोस्टमॉर्टम व ऑटोस्पी रिपोर्ट का विश्लेषण करने के बाद फोटोग्राफिक सबूतों का अध्ययन करने के बाद अपनी रिपोर्ट सीबीआई को सबमिट कर दी है।

अब सीबीआई इस मामले में जाँच कर रही है कि ये मामला हत्या का है या आत्महत्या का, लेकिन इससे पहले ही मीडिया में कई तरह की खबरें चलनी शुरू हो गई हैं और लोग उसे आधार बना कर अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं। इधर ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के चैनलों का मानना है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत से 1 दिन पहले कई गवाहों ने उनके घर पर उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती को देखा था।

एनडीटीवी सहित कई मीडिया चैनलों और खबरिया पोर्टलों ने एम्स के जाँच पैनल की अगुवाई कर रहे डॉक्टर सुधीर गुप्ता के हवाले से खबर प्रकाशित की थी कि सुशांत मामले की गुत्थी सुलझ गई है और उनकी रिपोर्ट में आया है कि ये हत्या नहीं, आत्महत्या था। अर्नब गोस्वामी ने इन ख़बरों को ‘प्लांटेड स्टोरीज’ करार दिया है। उन्होंने पूछा कि ये चीजें ऑन रिकॉर्ड क्यों नहीं बोली जा रही? उनके चैनलों ने इस खुलासे को लेकर काउंटडाउन भी चला रखा है।

अर्नब गोस्वामी ने कहा कि उन्हें सैकड़ों लोगों के फोन कॉल्स आ रहे हैं और वो पूछ रहे हैं कि ‘रिपब्लिक वर्ल्ड’ और ‘रिपब्लिक भारत’ ने जो न्याय की लड़ाई 3 महीने से सुशांत के लिए चलाई है, तो क्या ये व्यर्थ होगा? उन्होंने कहा कि लोग एम्स के डॉक्टर सुधीर गुप्ता के बयान वाली खबरों के आधार पर लोग ऐसा पूछ रहे हैं। अर्नब गोस्वामी ने कहा कि वो इस खबर से विचलित हो गए थे।

इससे पहले मीडिया की ख़बरों में कहा गया था कि इंसान की मृत्यु का समय भी एक अहम सबूत माना जाता है, लेकिन सुशांत सिंह का मामले में इसका कोई उल्लेख ही नहीं है। 7 पन्नों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि सुशांत सिंह के शरीर पर बाहरी चोट के कोई निशान नहीं थे। इसके अलावा सुशांत के गले के पिछले हिस्से में भी कोई निशान नहीं मिले थे। बताया गया था कि सुशांत सिंह के शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं थे।

‘इंदिरा को गोली मारा, राजीव को बम से उड़ाया… PM मोदी के लिए कोई बम क्यों नहीं बना रहा’ – पूर्व विधायक की धमकी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक बार फिर से विपक्षी नेताओं द्वारा जहरीली बयानबाजी शुरू हो गई है। ताज़ा घटना मध्य प्रदेश के सिवनी की है, जहाँ ‘गोंडवाना गणतंत्र पार्टी’ के पूर्व विधायक रामगुलाम उइके ने पीएम नरेंद्र मोदी को बम से उड़ाने की धमकी दी है। धनौरा जनपद के कुड़ारी गाँव में आदिवासी समुदाय की जनसभा को सम्बोधित करते हुए रामगुलाम उइके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ये टिप्पणी की।

आदिवासी नेता ने कहा कि इस देश में पूर्व प्रधाममंत्री इंदिरा गाँधी को गोली मार दिया गया और राजीव गाँधी को बम से उड़ा दिया गया। इसके बाद उन्होंने आपत्तिजनक सवाल पूछा कि पीएम मोदी के लिए कोई बम क्यों नहीं बना रहा, उन्हें कोई बम से उड़ाने की धमकी क्यों नहीं दे रहा? रामगुलाम उइके घंसौर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। उनका बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जहाँ लोगों ने उनकी निंदा की।

उन्होंने कोरोना वायरस संक्रमण से उपचार में गड़बड़ी का आरोप लगते हुए सवाल उठाया लेकिन वो यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि ये सब से सब ‘हत्यारे’ हमारे देश में ही मौजूद हैं, जो आज सत्ता के गलियारे तक पहुँच गए हैं। बताया जा रहा है कि उनका ये बयान 3 दिन पुराना है, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। अभी तक भाजपा के नेताओं की तरफ से इसकी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

रामगुलाम उइके में मध्य प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में विधायक चुने गए थे, जब उन्हें ‘गोंडवाना गणतंत्र पार्टी’ के टिकट पर 55,389 मत प्राप्त हुए थे। उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी की उर्मिला देवी को हराया था। हालाँकि, ये पहली बार नहीं है जब किसी विपक्षी नेता या विरोधी गैंग ने प्रधाममंत्री की मौत की दुआ की हो। इससे पहले भी सोशल मीडिया पर इस तरह की भद्दी बयानबाजी कई बार हो चुकी है।

अभिनेताओं ऋषि कपूर और इरफान खान की मौत की खबरों के बीच भी कट्टरपंथी मुस्लिमों के साथ-साथ सोशल मीडिया के वाम-उदारवादियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अपनी घृणा का निशाना बनाया था। बॉलीवुड अभिनेता इरफान खान की मौत की खबर के बाद कुछ लोगों को यह भी लिखते हुए देखा गया था कि इरफान खान की जगह अक्षय कुमार को होना चाहिए था और ऋषि कपूर की जगह उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौत की खबरों का इंतजार है।।

लड़ाई अन्याय से या हिन्दू राष्ट्र से? विरोध करने वाले बुद्धिजीवी ढपलीबाज गैंग… पहले तय कर लो, करना क्या है

यदि कोई आपसे सवाल करे कि बलात्कार और न्याय के बीच दूरी कितनी है? इस प्रश्न का उत्तर क्या होना चाहिए या यूँ कहे, “क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि इन दो शब्दों के बीच कितना फ़ासला है।” इसका एक ही जवाब है ‘हिन्दू राष्ट्र’ या ‘हिंदुत्व’! पहली बार में बेशक विचित्र लग सकता है पर यह सत्य है क्योंकि ‘न्याय’ की गुहार लगाने वालों की लड़ाई अन्याय के विरुद्ध शुरू होकर हिन्दू राष्ट्र और हिंदुत्व तक सीमित रह जाती है। विरोध करने वाली ‘संभ्रांत जनता’ अत्याचार को ख़त्म करते-करते हिन्दू राष्ट्र के खात्मे की ओर निकल लेती है। 

बड़े बुजुर्ग कह गए हैं संसार में हर रोग का उपचार उपलब्ध है लेकिन वैचारिक विकलांगता और दिग्भ्रमित हठधर्मिता का नहीं है। उत्तर प्रदेश के हाथरस की घटना को लेकर पूरे देश में आक्रोश है, सोशल मीडिया से लेकर सड़कों और चौराहों पर प्रदर्शनों की तस्वीर इस बात की तस्दीक करती हैं। विरोध होना भी चाहिए, अपराध हुआ तो विरोध भी होगा और न्याय भी। लेकिन सवाल जनता के उस हिस्से को लेकर है, जिनका एजेंडा ही कुछ और है। जो इंसाफ़ दिलाने के लिए सड़कों पर उतरते तो हैं लेकिन सदियों पुरानी वैचारिक कुंठा के फलीभूत अलग रास्ते पर निकल जाते हैं। सोशल मीडिया पर पिछले कई दिनों से कुछ तस्वीरें साझा की जा रही हैं। 

कुल मिला कर इस मिजाज़ की दो तस्वीरें हैं और दोनों का मजमून हुबहू है। तस्वीर में एक पोस्टरनुमा चीज़ नज़र आ रही है, जिस पर लिखा है “HINDURASHTRA IS A RAPIST” मायने हिन्दू राष्ट्र बलात्कारी है। एक दो व्यक्ति नहीं बल्कि पूरा का पूरा राष्ट्र, हर नागरिक! मतलब बलात्कार सिर्फ एक ही धर्म में होते हैं अन्य मज़हब के लोग देवतुल्य हैं जन्नत से उतरे हुए, अन्य मज़हबों में बलात्कार होते ही नहीं। शायद होते होंगे लेकिन उस समय ऐसे क्रांतिकारी पोस्टर सामने नहीं आते हैं, जिसमें लिखा हो कि फलां (मज़हब) राष्ट्र इज़ ए रेपिस्ट या ढिमकां (रिलीजन) राष्ट्र इज़ ए रेपिस्ट (जनता स्वयं समझदार है)।

हिन्दू राष्ट्र को रेपिस्ट बताने वाले ढपलीबाज (साभार – सोशल मीडिया)

बात स्वयं में कितनी हास्यास्पद है कि इंसाफ़ की गुहार में हिन्दू शब्द इस कदर घुला हुआ है कि उसका धब्बा इन क्रांतिकारियों के कपड़ों से उतरता ही नहीं। इस पड़ाव पर लड़ाई/विरोध में न्याय शब्द का कद बौना हो जाता है और दोषी बन जाता है हिन्दू राष्ट्र। यहाँ अपराधी और अपराध शब्द मायने नहीं रखता बल्कि सारा दोष हिन्दू राष्ट्र का हो जाता है (वही हिन्दू राष्ट्र जिसमें रह कर तथाकथित क्रांतिकारी लोग प्रदर्शन कर रहे हैं)। ऐसे ही प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारियों का मूल स्वरूप सामने आता है। 

सोशल मीडिया पर जारी विरोध प्रदर्शन में एक और ऐसी ही तस्वीर सामने आई जिसमें लिखा था “I am a dalit not a hindu” अर्थात मैं एक दलित हूँ, हिन्दू नहीं। बेशक आप क्या हैं या कौन हैं, यह तय करने का अधिकार संविधान ने आपको दिया है। कुछ भी बन जाइए पर क्या यही समय है अपनी पहचान के प्रचार का? जो इच्छा है बने रहिए लेकिन जब समय मिले तो जनता को इस बात का जवाब भी ज़रूर दीजिए कि “मैं हिन्दू नहीं हूँ” इस अतिक्रांतिमय वक्तव्य से न्याय मिलने में कितनी मदद मिलेगी? सिद्ध क्या होगा यह बता कर?

गुड! लोकतंत्र है (साभार – सोशल मीडिया)

हिन्दू शब्द से स्वघोषित बुद्धिजीवी जमात का ‘लगाव’ नया बिलकुल नहीं है। हाल फ़िलहाल के कुछ साल उठा लीजिए, मुद्दा क़ानून व्यवस्था का हो या सामाजिक अव्यवस्था का, क्रांतिकारी महोदयों के अनुसार सारे फसाद की जड़ हिन्दू राष्ट्र और हिंदुत्व ही है।

सीएए और एनआरसी का विरोध में देश के अलग अलग क्षेत्रों में हुआ, इन प्रदर्शनों की तस्वीरें भी बकायदे चर्चा में रहीं। ऐसी ही एक तस्वीर थी, जिसमें एक युवती के गालों पर (जी हाँ सही पढ़ा आपने गालों पर) विशुद्ध हिन्दी में लिखा था ‘फ़क हिन्दू राष्ट्र’। लोकतंत्र है और लोकतंत्र में ढपली पीट कर आलोचनात्मक कीर्तन करने का अधिकार सभी के पास है। फिर भी ठंडे दिमाग से सोचिए मुद्दा देश पर लागू किए गए एक क़ानून से जुड़ा हुआ है और स्वघोषित क्रांतिकारी हिन्दू राष्ट्र ‘फ़क’ करने निकले हैं। 

क्या किसी और मज़हब को भी इस तरह फ़क किया जा सकता है? (साभार – सोशल मीडिया)

ऐसी ही एक और तस्वीर है। हालाँकि यह पुरानी है लेकिन इसके मूल में भी वही संदेश है। यहाँ लिखा है महिलाएँ हिन्दू राष्ट्र को डिस्ट्रॉय करेंगी (कारण भी बताते चलिए)। क्या इस धर्म को नष्ट करना आसान है? सदियों से इस श्रेणी के प्रयास हो रहे हैं, 1-2 हथौड़ा आप भी चला कर देख लीजिए और हो जाए तो अवश्य सूचित करिए।

लेकिन कैसे? (साभार – सोशल मीडिया)

एक तस्वीर में इस वैचारिक निर्लज्जता की सीमा ही पार कर दी गई थी। हिटलर की नाज़ी सेना के चिन्ह को स्वास्तिक के रूप में दिखा कर हिंदुत्व के लिए अपशब्द लिखे गए थे। 

ढपलीबाज स्वास्तिक और नाज़ी के चिन्ह की खिचड़ी बनाते हुए (साभार – सोशल मीडिया)

बाकी देश के दो तथाकथित उदारवादी और बुद्दिजीवियों के गढ़ जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में लगाए गए नारे सदाबहार हैं ही। उन नारों में खपाई गई ऊर्जा और झोंके गए मंतव्य से साफ़ हो जाता है कि व्यक्ति के जीवन में केवल शिक्षा महत्वपूर्ण नहीं होती। बहुत कुछ अहम होता है जिसकी इन लोगों के पास भीषण कमी है।

इस ग्रह का कोई भी अन्य मज़हब (सॉरी धर्म) उठा लीजिए और उसके बारे में चंद व्यंग्यात्मक टिप्पणी करके देखिए। पलक झपकते ही नज़ारे बदल जाएँगे, संदेह हो तो लिखिए एक बार ‘फ़क फला मज़हब’। फिर इस मुल्क में रहने वाले बुद्धिजीवी कहते हैं कि हिन्दू शब्द के इर्द गिर्द गढ़ी गई सारी परिभाषाएँ असहिष्णु हैं।

यह बात ऊपर कई बार लिखी जा चुकी है एक बार फिर से पढ़ लीजिए, क्या बलात्कार हिन्दू राष्ट्र में ही होते हैं? क्या पूरा हिन्दू राष्ट्र बलात्कारी है, हर नागरिक? क्या दूसरे समुदायों में बलात्कार नहीं होते हैं? होते हैं तो क्या उनके लिए भी आपका विरोध इतना ही स्पष्ट और खरा होगा? ऐसे विरोध की सूरत वाली लड़ाइयों का नतीजा क्या होगा यह तो नहीं पता लेकिन यह भटकी हुई ज़रूर हैं। तय इन्हें ही करना है कि न्याय के लिए लड़ना है या हिन्दू राष्ट्र से?   

‘बेटी, आप ड्यूटी की चिंता मत करो’: मूर्च्छित हुई महिला पुलिसकर्मी, PM मोदी ने अपनी मेडिकल टीम ने करवाया इलाज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (अक्टूबर 3, 2020) को जब ‘अटल टनल’ के उद्घाटन के बाद हिमाचल प्रदेश स्थित मनाली के सोलांग वैली में जनता को सम्बोधित कर रहे थे, तब एक महिला पुलिसकर्मी अचानक से मूर्च्छित हो गईं। जैसे ही पीएम मोदी ने ये देखा, उन्होंने अधिकारियों को मंच से ही निर्देश दिया कि उक्त महिला पुलिसकर्मी को जल्द वहाँ से ले जाया जाए और बिठा दिया जाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उक्त महिला पुलिसकर्मी के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हो गए और कई बार कहा, “उन्हें बिठा दीजिए“, जिसके बाद अधिकारियों ने उनके निर्देश का पालन किया। इसके बाद पीएम मोदी ने कहा कि उनकी जो मेडिकल टीम है, उसे काम पर लगाया जाए। इसके बाद पीएम मोदी की मेडिकल टीम ने महिला पुलिसकर्मी को अटेंड किया और उनका इलाज किया। जब पीएम अपन सम्बोधन ख़त्म कर रहे थे, तब ये घटना हुई।

जब पीएम मोदी ने देखा कि उक्त महिला पुलिसकर्मी को फिर से ड्यूटी पर लगाया जा रहा है, तो उन्होंने हस्तक्षेप करते हुए कहा, “उस बेटी को ले जाइए भाई, वो ड्यूटी बाद में करेगी। कोई अधिकारी जरा उन्हें लेकर साथ में जाए।” इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने महिला पुलिसकर्मी से कहा, “आप जाकर बैठो वहाँ। आप ड्यूटी की कोई चिंता मत कीजिए।” तत्पश्चात अधिकारियों ने महिला पुलिसकर्मी को ले जाकर बिठाया।

पीएम मोदी की जनसभा के दौरान मूर्च्छित हुई महिला पुलिसकर्मी

सोलांग वैली में पीएम मोदी इस बात से खुश दिखे कि वहाँ की जनसभा में सोशल डिस्टेन्सिंग का अच्छी तरह से पालन किया जा रहा था और लोग एक-दूसरे से दूरी पर बैठे हुए थे। उन्होंने इस दौरान बताया कि अगर ‘अटल टनल’ का काम 2013-14 वाली गति से चलता रहता तो इसके बनने में 2040 तक का समय लग जाता। उन्होंने वहाँ की पहाड़ी जनता से संवाद किया और विकास कार्यों की समीक्षा भी की। साथ ही ‘अटल टनल‘ की खासियतों को देखा।