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हाथरस की मृतका के पिता का प्रियंका गाँधी ने शेयर किया विवादित वीडियो, पीछे से आ रही आवाज- CBI जाँच

उत्तर प्रदेश के हाथरस में सामूहिक दुष्कर्म का राजनीतिकरण करने का फैसला कुछ प्रमुख राजनीतिक दल कर चुके हैं। इसमें सबसे आगे कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी और उनकी बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा सबसे आगे नजर आ रहे हैं।

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा, जो कि अपने भाई राहुल गाँधी के साथ आज पीड़िता के परिवार से मुलाकात करने के लिए दिल्ली से रवाना हुए हैं, ट्विटर पर लगातार योगी सरकार पर आरोप लगा रही हैं।

प्रियंका गाँधी ने मृतका के पिता का एक ऐसा विवादित वीडियो शेयर किया है जिसमें उन्हें सीखा रहे कैमरामैन को आसानी से सुना जा सकता है। इस कारण प्रियंका गाँधी द्वारा ट्वीट किया गया यह वीडियो सोशल मीडिया पर विवाद का विषय बन चुका है।

प्रियंका गाँधी ने मृतका के पिता का एक वीडियो ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा है – “हाथरस की बेटी के पिता का बयान सुनिए। उन्हें जबरदस्ती ले जाया गया। सीएम से वीसी के नाम पर बस दबाव डाला गया। वो जाँच की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। अभी पूरे परिवार को नजरबंद रखा है। बात करने पर मना है। क्या धमकाकर उन्हें चुप कराना चाहती है सरकार? अन्याय पर अन्याय हो रहा है।”

लेकिन इसी एक मिनट के वीडियो में देखा और सुना जा सकता है कि युवती के पिता को कैमरामैन कुछ शब्द सिखा रहा है। ‘बेफिटिंग फैक्ट्स’ नाम के ट्विटर अकाउंट ने प्रियंका गाँधी को ये वीडियो शेयर करने पर फटकार लगाते हुए लिखा है, “डिस्गस्टिंग! प्रियंका गाँधी, आपको वीडियो अपलोड करने से पहले वीडियो की जाँच करनी चाहिए थी। 00:36 पर हम कैमरामैन को ‘सीबीआई जाँच होनी चाहिए’ बोलते हुए सुन सकते हैं।”

‘बेफिटिंग फैक्ट्स’ ने लिखा है – “00:36 पर कैमरामैन पीड़ित के पिता को लगातार गाइड करते हुए उन्हें ये कहने को कह रहा है – ‘सीबीआई जाँच होनी चाहिए, दबाव बना के किया, घर में कैद कर दिया।”

प्रियंका गाँधी और राहुल गाँधी एक बड़ा काफीला लेकर पीड़ित परिवार से मिलने निकले हैं जिस कारण हाइवे पर लंबा जाम लग गया है। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की संख्या अधिक होने से यूपी पुलिस इस काफिले को दिल्ली वापस नहीं कर पाई। हाथरस के जिलाधिकारी का कहना है कि जिले की सीमाएँ सील हैं और धारा 144 लागू कर दी गई है।

उल्लेखनीय है कि गत 14 सितंबर को उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के चंदपा थाना क्षेत्र स्थित एक गाँव में 19 साल की एक दलित लड़की के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। घटना के बाद पुलिस ने इस मामले में 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

पटना में सुबह टहलने निकले भाजपा नेता ‘राजू बाबा’ की गोली मार कर हत्या, CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस

बिहार की राजधानी पटना के बेउर क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ता की गोली मार कर हत्या कर दी गई। गुरूवार (1 अक्टूबर 2020) की सुबह भाजपा मंडल उपाध्यक्ष राजेश कुमार झा उर्फ़ राजू बाबा की हत्या हुई। वह सुबह बेउर थाना क्षेत्र के अंतर्गत तेज प्रताप नगर में अपने घर के नज़दीक टहलने के लिए निकले थे, तभी दो पहिया वाहन सवार नकाबपोश अपराधी उनके नज़दीक आए और उनकी कनपटी पर गोली मार दी। 

घटना को अंजाम देने के बाद दोनों अपराधी तुरंत मौके से फरार हो गए। घटना गुरूवार की सुबह लगभग 6 बजे की है। फ़िलहाल बेउर थाने की पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कुछ ही दिन पहले राजेश कुमार झा भाजपा में शामिल हुए थे। इस घटनाक्रम पर बेउर थाना के थानाध्यक्ष फूल देव चौधरी ने भी जानकारी दी

उन्होंने बताया कि राजेश कुमार झा का कई दिनों से घरेलू विवाद चल रहा था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ उनके एक रिश्तेदार पर हत्या में शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि दो नकाबपोश बाइक पर सवार होकर आए थे और उन्होंने ही राजेश कुमार झा को गोली मारी। पुलिस ने इस मामले में पूछताछ के लिए अभी तक कुल 3 लोगों को हिरासत में लिया है। शव को फ़िलहाल पोस्टमार्टम के लिए पीएमएचसी भेज दिया गया है। पुलिस फ़िलहाल इस मामले की जाँच कर रही है।   

हाल ही में तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले के केलेमंगलम से एक भयानक घटना सामने आई थी। मंगलवार (17 सितंबर, 2020) रात को कुछ अज्ञात लोगों द्वारा भाजपा युवा विंग के नेता रंगनाथन की बेहरहमी से हत्या कर दी गई थी। ऑर्गनाइज़र की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को 35 वर्षीय दलित भाजपा पदाधिकारी रंगनाथन को एक अज्ञात गिरोह ने मार डाला था। रंगनाथन हाल ही में AIADMK को छोड़ कर बीजेपी में शामिल हुए थे। उन्हें कुंडुमारनप्पल्ली गाँव के बीजेपी यूथ विंग अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।

अजेंडा-परस्त ‘ब्लस्टर ब्लफ कॉर्पोरेशन’ उर्फ़ BBC को मिला ‘बिफिटिंग रिप्लाई’

1942 में आज़ाद हिन्द रेडियो के एक प्रसारण से नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा ‘ब्लस्टर ब्लफ कॉर्पोरेशन’ का तमगा BBC को मिला, अर्थात धमकियाँ देकर ठगी करने वालों का समूह। तब परिस्थितियाँ कुछ और थी अब कुछ और हैं।

पिछले कुछ समय में औपनिवेशिक सरकार द्वारा त्यागी गई विष्ठा यानी, बीबीसी ने भारत विरोधी, पाक-परस्त और जिहादी प्रोपेगेंडा फैलाने की अनेकों जगजाहिर कीर्तिमान हासिल किए हैं। झूटी रिपोर्टिंग और औपनिवेशिक अहंकार से ग्रसित बीबीसी व सोरोस के नमक में पलने वाले बीबीसीकर्मी झूठे और भ्रामक तथ्यों के आधार पर भारत-विरोधी एजेंडा चलाने का ऐसा कोई भी अवसर नहीं छोड़ते।

दिलचस्प बात यह है कि इनकी गिरोह मंडली मतारोपण के बारीक और सुनियोजित षड्यंत्र के लिए दुनियाभर से ऐसे ही दिशाहीन अजेंडेबाज़ पत्रकार रिक्रूट करती है और ‘बीबीसी- हिंदी’ जैसे भारत स्थित साजिश खाने गाहे – बगाहे कभी हिन्दूघृणा से लिप्त कार्टून तो कभी भारतीयता का पाखंड कर अपने औपनिवेशिक ठाठ-बाठ से जनमानस को भ्रमित करने का पुरजोर प्रयत्न करते हैं व शहरी समाज के प्रगतिशील पाठकों में अक्सर मनचाहा जहर भरने में सफल भी होते हैं।

ऐसा ही कुछ, दो दिन पूर्व देखने को मिला,जब प्रसिद्द न्यूज़ एंकर व पॉलिटिकल एनालिस्ट शहजाद पूनावाला को बीबीसी के अमुक पत्रकार का मैसेज प्राप्त हुआ जब बीबीसीकर्मी पत्रकार की मंशा विवादों में आए कथित तौर पर मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले गिरोह ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ के पक्ष में जबरन बात करवाकर उस संस्था पर लगे तमाम प्रकार के आरोपों से इतर मासूम दिखाने की थी।

इसी क्रम में बीबीसीकर्मी ने शहजाद पूनावाला को लिखा – “हैल्लो मिस्टर पूनावाला मैं बीबीसी से हूँ। हम आपके साथ स्काइप के माध्यम से एक इंटरव्यू करने को लालायित हैं, जिसमें आपको इस विषय में चर्चा करनी है कि किस तरह से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार भारत में विरोध के स्वरों को कुचलने का प्रयास कर रही है। यह सब एमनेस्टी इंटरनेशनल के भारत प्रकोष्ठ का शटर गिरने के संदर्भ में है, जो भारत सरकार पर अपने ‘विच-हंट’ होने का आरोप भी लगा रहे हैं। क्या आप प्लीज़ पंद्रह मिनट स्काइप पर दे सकते हैं ? अभी से शाम चार बजे तक कभी भी?”

इसके जवाब में शहजाद पूनावाला ने दो टूक जवाब देते हुए लिखा – “प्रिय शालू (पत्रकार का नाम) जी। मुझे लगता है कि बीबीसी की कवरेज सदा ही फ़र्ज़ी, अत्यधिक झुकी हुई, हताशापूर्ण व भारत विरोधी हितों को प्रचारित करने के लिए होती है, जैसा कि हाल में जम्मू कश्मीर, धारा 370 जैसे कई विषयों पर देखने को मिलती रहती है। इस सब से यह साफ़-साफ़ प्रतीत होता है कि बीबीसी का समस्त प्रयास भारत-विरोधी ताकतों का पक्ष लेने पर केंद्रित है। जब आप इसे सुधार लेंगे तब मैं कोई टिप्पणी करने के लिए उपलब्ध रहूँगा अन्यथा आपकी ऐसी किसी बकवास को वैधता देने में मेरी कोई इच्छा नहीं ऐसी बकवास जो मेरे राष्ट्र हितों के विरुद्ध जाकर पाकिस्तान का बिगुल बजाती हों।”

इस संवाद के स्क्रीनशॉट्स शहजाद पूनावाला द्वारा उनके ट्विटर हैंडल पर साझा किए गए थे।

बीबीसी ही नहीं बल्कि भारत-विरोधी अजेंडा में मीडिया का एक बड़ा गिरोह बड़े स्तर पर सक्रीय रहा है। ये बात और है कि पिछले कुछ वर्षों में आम जनता भी इनके इन प्रपंचों को समझने और खुद ही उनका खंडन करने में भी कामयाब रही है। यही एक वजह भी है कि वामपंथ की बौखलाहट नए स्तर पर पहुँच रही है और इसका असर हम सोशल मीडिया पर इनके आकाओं के मानसिक और भावनात्मक मेल्टडाउन के रूप में अक्सर रोज ही देखते हैं।

बीबीसी के लिए यही बेहतर है कि वह जितना संभव हो सके, अपने मानसिक स्तर की ही बातों पर समय और अपने संसाधनों का उपयोग करे।

बॉलीवुड ड्रग्स जाँच की सुई A, D, S पर अटकी: अर्जुन रामपाल, डीनो मोरया और शाहरुख खान आए NCB की रडार पर

बॉलीवुड में ड्रग कार्टेल को लेकर रोज़ नए खुलासे हो रहे हैं। हालिया ड्रग्स मामले में A, D और S नाम के कलाकारों की ओर संकेत किया गया था। इन नामों को लेकर मीडिया रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि यह तीनों नाम बॉलीवुड कलाकार अर्जुन रामपाल, डीनो मोरया, और शाहरुख खान हैं। एनसीबी अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी में इस बात का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में इस बात का दावा भी किया गया है कि अर्जुन रामपाल शाहरुख खान को ड्रग्स उपलब्ध कराते थे। 

दैनिक भास्कर द्वारा प्रकाशित ख़बर में इस बात का खुलासा किया गया है। एनसीबी के एक अधिकारी ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर इन नामों का खुलासा किया है। ड्रग्स मामले में चल रही जाँच में अभी तक दीपिका पादुकोण और सारा अली खान जैसे बॉलीवुड कलाकारों का नाम सामने आया था। ऐसा पहली बार हुआ है जब शाहरुख खान जैसे बॉलीवुड सुपरस्टार का नाम ड्रग्स मामले में सामने आया है। 

एनसीबी फिलहाल इस पहलू पर जाँच कर रही है कि डीनो किस व्यक्ति को ड्रग्स उपलब्ध कराते थे। एनसीबी अधिकारी के बयान का हवाला देते हुए दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उन्हें यह जानकारी ड्रग पेडलर ने दी। जानकारी के अनुसार अर्जुन रामपाल शाहरुख खान के घर ड्रग्स लेकर जाते थे। फ़िलहाल एनसीबी इन दावों को लेकर पुख्ता सबूत इकट्ठा कर रही है।  

दैनिक भास्कर की ख़बर में दावा किया गया है कि उनके पास दो इंटेलिजेंस इनपुट हैं। इसमें यह इनपुट ड्रग्स के इस्तेमाल को लेकर और शाहरुख खान के शामिल होने को लेकर है। फ़िलहाल एनसीबी इस तैयारी में है कि आगामी कार्रवाई किस तरह अंजाम दी जाएगी। रिपोर्ट में इस तरह का एक और दावा R नाम के कलाकार को लेकर हुआ था। ख़बर में  R नाम का कलाकार रणबीर कपूर को बताया गया है। फ़िलहाल शाहरुख़ खान इंडियन प्रीमियर लीग के लिए दुबई में मौजूद हैं, उनकी टीम कोलकाता नाइट राइडर्स आईपीएल खेल रही है। 

इस हफ्ते की शुरुआत में एनसीबी ने दीपिका पादुकोण, साला अली खान और रकुल प्रीत सिंह और दीपिका की मैनेजर करिश्मा प्रकाश का मोबाइल जब्त कर लिया था। जाँच के दौरान एनसीबी ने इस बात का खुलासा किया था कि जया साहा के मोबाइल फोन से मिली जानकारी के मुताबिक़ दीपिका पादुकोण माल की माँग कर रही थीं। ख़बरों के मुताबिक़ दीपिका पादुकोण ने कहा था कि माल का मतलब एक तरह की सिगरेट है और हैश का मतलब दूसरे ब्रांड की सिगरेट।

जब बलात्कार से ज्यादा जरूरी हिन्दू प्रतीकों पर कार्टून बना कर नीचा दिखाना हो जाता है: अपना इतिहास स्वयं लिखो

बलात्कार का अभियुक्त था, भारत में होता तो शायद उसके साथ इससे भी बुरा होता। जब वो चीख-चीख कर कहने लगा कि उसने कोई बलात्कार किया ही नहीं तो उसकी सुनता कौन? हरेक अपराधी ऐसा ही कहता है। ऊपर से ये तो अपराधियों में भी सबसे घृणित – बलात्कारी था।

रोनाल्ड कॉटन को जिस मामले में गिरफ्तार किया गया था वो एक छात्रा के बलात्कार का मामला था। कोई अपराधी 1984 में एक रात लड़की के कमरे में घुस आया था और उसने छुरे की नोक पर बलात्कार किया।

अपराधी के कब्जे से जैसे-तैसे भागकर निकली जेनिफर ने जब घटना की रिपोर्ट दर्ज करवाई तो पुलिस ने आम संदिग्धों की धर-पकड़ की और उसी में रोनाल्ड कॉटन भी पकड़ा गया था। संदिग्धों की पहचान परेड में जेनिफर ने कहा कि कॉटन ही वो आदमी है जो उस रात उसके कमरे में घुस आया था।

जेल जाते ही सबसे पहले तो आय के स्रोत बंद हो जाते हैं, और कहने को चाहे लोग कुछ भी कहें, कानूनी प्रक्रिया और अदालतें गरीबों के लिए तो बिलकुल भी नहीं बनीं। ऊपर से रोनाल्ड कॉटन पर मामला भी बलात्कार का था और पीड़िता ने उसे साफ़ पहचान लिया था।

इस जघन्य कृत्य के लिए रोनाल्ड कॉटन को उम्रकैद के साथ पचास वर्षों की कैद की सजा मिली। रोनाल्ड कॉटन अपने बेकसूर होने की बात पर अड़ा हुआ था। उसने 1987 में अपना मामला फिर से सुनवाई के लिए खुलवा लिया। इस बार मुक़दमे के दौरान उस पर एक किसी दूसरे मामले का आरोप भी साबित कर दिया गया। पहले पचास साल की सजा थी ही, अब 54 वर्षों की सजा और हो गई। शायद ‘नमाज माफ़ करवाने गए और रोज़े गले पड़ गए’ ऐसी ही स्थिति के लिए कहा गया होगा।

वहीं, दूसरी तरफ बलात्कार पीड़िता जेनिफर के लिए भी न्यायिक प्रक्रिया के अनुभव कोई अच्छे नहीं थे। पहले ही बलात्कार की वजह से मानसिक रूप से पीड़ित लड़की के लिए मेडिकल जाँच भी एक डराने वाला अनुभव था। भारत में भी बलात्कार की जाँच के लिए वैसे ही टेस्ट होते हैं। अदालत की सुनवाई तो और भी तोड़ देने वाली प्रक्रिया थी।

पूरे वक्त रोनाल्ड कॉटन कहता रहा कि जेनिफर गलत पहचान रही है, उसने बलात्कार नहीं किया। इस दौर में डीएनए टेस्ट को सबूतों के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाता था। रोनाल्ड को जेल में 11 वर्ष बीत चुके थे जब डीएनए टेस्ट को मान्यता मिली। जब इस बार उसने पीड़िता के कपड़ों की डीएनए जाँच करवाई तो पता चला कि जेनिफ़र से सचमुच पहचानने में गलती हुई थी। रोनाल्ड कॉटन अपराधी नहीं था।

इस दौर तक रोनाल्ड कॉटन की बलात्कार पीड़िता जेनिफ़र से ठीक ठाक जान-पहचान हो चुकी थी। उन दोनों ने बाद में मिलकर, ‘पिकिंग कॉटन’ नाम की किताब लिखी जो एक तरफ तो बलात्कार पीड़िता को न्याय व्यवस्था से होने वाली दिक्कतों के बारे में बताती है, और दूसरी तरफ एक बेक़सूर की न्यायिक व्यवस्था से शिकायतों के बारे में।

‘पिक्किंग कॉटन’, न्याय की हत्या पर कोई इकलौती किताब भी नहीं है। ऐसी ही एक दूसरी किताब ‘एक्चुअल इनोसेंस: फाइव डेज टू एग्जीक्यूशन एंड अदर डिसपैचेज फ्रॉम द रोंगली कनविक्टेड’ भी है।

इस किताब ने एक पूरा आन्दोलन शुरू कर दिया था। इसमें ऐसे लोगों की कहानियाँ हैं, जिन्हें जबरन सजा सुना दी गई और बाद में सही तरीके से जाँच में पता चला कि अपराधी तो कोई और थे! ‘द इनोसेंस प्रोजेक्ट’ नाम की एक संस्था भी है जिसने गलत सजा पाए कई लोगों को छुड़ाया है।

भारत में ही अगर कभी ‘आरुषी हत्याकांड’ या ‘निठारी आदमखोर काण्ड’ जैसे मामलों पर लिखा जाता तो शायद ऐसे ही मामले निकलते। भारत के लॉ कमीशन ने, 2018 में ‘Wrongful Prosecution (Miscarriage of Justice): Legal Remedies’ नाम की एक रिपोर्ट भी ऐसे ही मामलों पर लिखी थी।

तथाकथित भगवा आतंकवाद के नाम पर मीडिया ट्रायल चलाकर बरसों जेल में बंद रखे गए लोगों की कहानियाँ निकाली जाएँ तो ऐसे ही मामले निकलेंगे। हाल ही में ‘कठुआ कांड’ के मामले में मीडिया लिंचिंग के शिकार युवक की कहानी भी ऐसी ही होगी।

कठुवा कांड में तो जिस नौजवान की कई बुद्धि-पिशाच और पक्षकार मिलकर, मीडिया लिंचिंग कर रहे थे, अदालत में पता चला कि वो सच कह रहा था। जिस वक्त वारदात हुई थी वो तो किसी दूसरे राज्य में कहीं परीक्षाएँ दे रहा था। फिर सवाल ये है कि नैरेटिव गढ़ने की जल्दी में भला पक्षकार और बुद्धिपिशाच भला सच्चाई को क्यों देखते? हिन्दुओं को नीचा दिखाने वाले, बलात्कार को धर्म से जोड़ने वाले कार्टून बनाना उनके लिए ज्यादा जरूरी था। जितनी नीचता हिन्दुओं के प्रति की जा सकती, आखिर उतना ही तो वो प्रसिद्ध होते ना?

बाकी एक तथ्य ये भी है कि जब तक शेर खुद शिकार की कहानियाँ ना लिखने लगें, तब तक शिकार की कहानियों में शिकारी खुद अपना महिमामंडन तो करेगा ही। अपने पक्ष की कहानियाँ खुद लिखना सीखिए, लेकिन उससे भी जरुरी है कि वो जिस मुद्दे पर उकसाएँ, उस पर चुप रहना सीखिए।

आजमगढ़ में 8 साल की बच्ची को नहलाने के बहाने घर लेकर जाकर दानिश ने किया रेप, हालत नाजुक

उत्तर प्रदेश में एक और बलात्कार की घटना सामने आई है। इस घटना में 8 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना अंजाम दी गई है। आरोपित दानिश नाम के युवक ने बच्ची के साथ दरिंदगी को अंजाम दिया है, यह वारदात उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की है। फ़िलहाल पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। 

घटना आजमगढ़ के जीयनपुर क्षेत्र की है जिसमें 20 साल के दानिश ने 8 साल की बच्ची को अपनी दरिंदगी का शिकार बनाया है। पीड़िता की माँ ने आरोपित दानिश के विरुद्ध मामला दर्ज करा दिया है, शिकायत के दौरान माँ ने बताया कि दानिश उसे नहलाने के बहाने अपने घर लेकर गया था। वहाँ उसने बच्ची के साथ बलात्कार की घटना को अंजाम दिया। बच्ची की माँ ने यह भी बताया कि जब वह दानिश के घर से आई तब उसके शरीर से खून बह रहा था और वह काफी पीड़ा में थी

इस घटना पर बात करते हुए आजमगढ़ के पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार सिंह ने भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “बच्ची की माँ द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है। घटना के संबंध में दानिश नाम के आरोपित की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। बच्ची का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है।” फ़िलहाल उस बच्ची की हालत नाज़ुक बताई जा रही है, जिसके चलते उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 

इसी तरह की एक घटना उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हुई है। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक 14 साल की नाबालिग बच्ची के साथ उसके पड़ोसी रिजवान द्वारा बलात्कार की घटना सामने आई है। इस घटना के सामने आते ही रिजवान फरार हो गया था लेकिन बृहस्पतिवार (अक्टूबर 01, 2020) सुबह ही बागपत पुलिस अधिकारी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोप है कि नाबालिग के पड़ोसी रिजवान ने उसे नशीला पदार्थ सुँघाकर उसके साथ बलात्कार किया। इसी दौरान पीड़िता के परिजनों ने उसे पकड़ लिया था, लेकिन रिजवान के घरवालों ने उसे भगा दिया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता ने बताया कि जब वह बीती रात अपने परिवार के साथ घर के आँगन में सो रही थी, तभी घर की दीवार से कूदकर रिजवान उर्फ पकौड़ी उनके घर में आ घुसा और बच्ची को रुमाल सुँघाकर उसे घर से उठा ले गया। वह शोर न करे इसके लिए रिजवान ने बच्ची के मुँह में कपड़ा ठूँस दिया था। इसके बाद, रिजवान ने घर से थोड़ी दूर खड़े एक ट्रक के पास उसके साथ बलात्कार किया। बच्ची ने बताया कि रिजवान ने उसे धमकाने के लिए उसके चेहरे पर तेज़ाब डालने की भी धमकी दी थी।

इसके अलावा अनुसूचित जाति की एक युवती के साथ यूपी के बलरामपुर (Balrampur) जिले में दो युवकों – शाहिद पुत्र हबीबुल्ला निवासी गैंसड़ी और साहिल पुत्र हमीदुल्ला निवासी गैंसड़ी द्वारा सामूहिक बलात्कार की घटना सामने आई थी। आरोप है कि दोस्ती के बहाने घर ले जाकर दोनों आरोपितों ने लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और गंभीर हालत में एक रिक्शे पर बैठाकर घर भेज दिया था। 22 वर्षीय पीड़िता युवती की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। थी चार डॉक्टरों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम के बाद बुधवार (सितम्बर 30, 2020) रात को ही पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया गया था।

बुलंदशहर: 14 वर्षीय बच्ची को घर से उठाकर रिजवान उर्फ़ पकौड़ी ने किया रेप, मुँह में कपड़ा ठूँसा..चेहरे पर तेजाब डालने की धमकी, गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक 14 साल की नाबालिग बच्ची के साथ उसके पड़ोसी रिजवान द्वारा बलात्कार की घटना सामने आई है। इस घटना के सामने आते ही रिजवान फरार हो गया था लेकिन बृहस्पतिवार (अक्टूबर 01, 2020) सुबह ही बागपत पुलिस अधिकारी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

आरोप है कि नाबालिग के पड़ोसी रिजवान ने उसे नशीला पदार्थ सुँघाकर उसके साथ बलात्कार किया। इसी दौरान पीड़िता के परिजनों ने उसे पकड़ लिया था, लेकिन रिजवान के घरवालों ने उसे भगा दिया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह ने बुधवार रात बताया कि, लड़की के पिता ने शिकायत दर्ज कराई कि उनकी 14 वर्षीय बेटी का उनके पड़ोसी 20 वर्षीय रिजवान ने मंगलवार (सितम्बर 29, 2020) रात बलात्कार किया। पीड़िता का मेडिकल करवाया जा रहा है। बृहस्पतिवार सुबह ही पुलिस सूचना दी कि आरोपित रिजवान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता ने बताया कि जब वह बीती रात अपने परिवार के साथ घर के आँगन में सो रही थी, तभी घर की दीवार से कूदकर रिजवान उर्फ पकौड़ी उनके घर में आ घुसा और बच्ची को रुमाल सुँघाकर उसे घर से उठा ले गया।

वह शोर न करे इसके लिए रिजवान ने बच्ची के मुँह में कपड़ा ठूँस दिया था। इसके बाद, रिजवान ने घर से थोड़ी दूर खड़े एक ट्रक के पास उसके साथ बलात्कार किया। बच्ची ने बताया कि रिजवान ने उसे धमकाने के लिए उसके चेहरे पर तेज़ाब डालने की भी धमकी दी थी।

बच्ची के घर से गायब होने का पता चलते ही परिवार के लोगों ने गाँव वालों के साथ मिलकर उसकी तलाश की। खोजबीन में उनकी बच्ची उन्हें कैंटर के पास मिली थी उस समय रिजवान उसके साथ दुष्कर्म कर रहा था।

बताया जा रहा है कि परिजनों ने रिजवान को पकड़कर इसकी सूचना पुलिस को दी, लेकिन पुलिस के आने से पहले ही आरोपित रिजवान के घरवालों ने उसे छुड़ा लिया और भगा दिया। पुलिस ने बताया कि रिजवान को गिरफ्तार कर लिया गया है और पीड़िता का इलाज चल रहा है।

गौरतलब है कि सामूहिक दुष्कर्म की अलग-अलग घटनाओं में बलरामपुर और आजमगढ़ के साथ ही अजमेर में भी मजहब विशेष के आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

अजमेर में टीपू सुल्तान ने अपने 2 दोस्तों के साथ दलित युवती के मुँह में कपड़ा ठूँसकर किया सामूहिक दुष्कर्म, 8 घंटे तक दी गई यातना

राजस्थान के अजमेर में एक दलित युवती के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना सामने आई है। आरोपित टीपू सुल्तान पर अपने दो साथियों के साथ इस घटना को अंजाम देने का आरोप है। घटना के दौरान टीपू सुल्तान के साथ उसके साथी भी मौजूद थे, पीड़िता ने आरोपितों के विरुद्ध मामला दर्ज करा दिया है। पुलिस फ़िलहाल इस मामले की जाँच कर रही है। 

युवती मंगलवार (29 सितंबर 2020) को अजमेर स्थित रामगंज अपनी माँ के घर जा रही थी। रास्ते में उस क्षेत्र का ही रहने वाला टीपू सुल्तान उसे बहला फुसला कर खेतों में ले गया और उसके साथ बलात्कार किया। इस दौरान उसके दो साथी भी मौजूद थे और उन्होंने भी युवती के साथ सामूहिक बलात्कार किया। टीपू के साथियाें ने युवती के मुँह में कपड़ा ठूँस दिया था।

टीपू सुल्तान के युवती को लगभग 8 घंटों तक बंधक बना कर रखा और उसे यातनाएँ भी दीं। इसके बाद रात के लगभग 1 बजे आरोपित टीपू सुल्तान ने युवती को उसकी माँ के घर छोड़ा और वहाँ धमकी भी दी कि घटना के बारे में किसी को भी सूचित करने का अंजाम बुरा होगा। इसके बाद पीड़िता ने अपनी पूरी आपबीती अपने घर वालों से बताई।  

फिर बुधवार (30 सितंबर 2020) को युवती ने अपनी माँ और भाई के साथ रामगंज थाने में पूरे घटनाक्रम की जानकारी और मामला दर्ज कराया। पुलिस ने बलात्कार की धाराओं और अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में जाँच शुरू कर दी है। घटना की वजह से ग्रामीणों में आक्रोश है, इस घटना पर स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुलिस जल्द से जल्द कार्रवाई नहीं करती है तो क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा। घटनाक्रम की जाँच रामगंज थाने के थानाध्यक्ष मुकेश सोनी के अंतर्गत की जा रही है।     

बुधवार को ही राजस्थान के बारां (Baran) जिले में भी दो नाबालिग लड़कियों से गैंगरेप (Gang rape) का मामला सामने आया था। ज़ी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरोपितों ने पहले बारां से दो नाबालिग लड़कियों का अपहरण किया फिर अपहरण के बाद आरोपित दोनों लड़कियों को कोटा, जयपुर और अजमेर ले गए। कथिततौर पर तीन दिनों तक उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था।

बलरामपुर: दलित लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार, लड़की की मौत, शाहिद और साहिल गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के हाथरस में युवती के कथित सामूहिक बलात्कार और हत्या पर व्यापक आक्रोश के बीच, अनुसूचित जाति की ही एक और युवती के साथ राज्य के बलरामपुर (Balrampur) जिले में दो युवकों – शाहिद पुत्र हबीबुल्ला निवासी गैंसड़ी और साहिल पुत्र हमीदुल्ला निवासी गैंसड़ी द्वारा सामूहिक बलात्कार की घटना सामने आई है।

आरोप है कि दोस्ती के बहाने घर ले जाकर दोनों आरोपितों ने लड़की सामूहिक दुष्कर्म किया और गंभीर हालत में एक रिक्शे पर बैठाकर घर भेज दिया। 22 वर्षीय पीड़िता युवती की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। चार डॉक्टरों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम के बाद बुधवार (सितम्बर 30, 2020) रात को ही पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, बलरामपुर के पुलिस अधीक्षक देव रंजन वर्मा ने कहा कि घटना जिले के गैंसड़ी बाजार इलाके की है, जहाँ एक निजी फर्म में काम करने वाली एक 22 वर्षीय दलित युवती मंगलवार (सितम्बर 29, 2020) की शाम घर न लौटने से उसके उसके माता-पिता उसकी तलाश करने लगे।

वहीं, जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक़, छात्रा की माँ का कहना है कि उनकी बेटी विमला विक्रम महाविद्यालय पचपेड़वा में बीकॉम में प्रवेश लेने के लिए सुबह दस बजे निकली थी। पुलिस ने कहा कि युवती के माता-पिता ने कहा कि उनकी बेटी ने जब अपने मोबाइल फोन पर कॉल का जवाब नहीं दिया, तो उनके परिवार के सदस्यों में दहशत फैल गई।

देर शाम जब लड़की रिक्शा से घर लौटी तो उसके हाथ में ग्लूकोज ड्रिप लगी हुई थी और उसकी हालत ठीक नहीं थी। पुलिस अधीक्षक रंजन वर्मा के अनुसार, परिवार के सदस्यों ने कहा कि लड़की की हालत ठीक नहीं थी, इसलिए वे उसे पास के अस्पताल ले गए और बाद में बलरामपुर जिला अस्पताल ले गए जहाँ उसने दम तोड़ दिया।

स्थानीय डॉक्टर ने किया खुलासा

रिपोर्ट के अनुसार, बाजार स्थित निजी क्लीनिक के चिकित्सक डॉ जियाउर्रहमान ने बताया कि दुकानदार शाहिद का भतीजा साहिल घटना के दिन, मंगलवार (सितम्बर 29, 2020) की शाम करीब पाँच बजे उन्हें अपने घर इलाज करने के लिए बुलाकर ले गया था। वहाँ पहुँचने पर उन्होंने देखा कि युवती पेट दर्द के इलाज के लिए दवा माँग रही थी और वह सोफे पर लेटी हुई थी।

डॉ जियाउर्रहमान ने कहा कि घर में किसी महिला सदस्य के न होने पर दवा देने से मना कर वो बाहर निकल आए और आस-पास वालों को बुलाकर युवती के घर वालों को सूचना देने की बात कहकर वह वापस अपने क्लीनिक चले गए। उन्होंने कहा कि युवती को वहाँ कौन लेकर आया था उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है।

पुलिस ने फ्रैक्चर की बातों से इंकार किया

जब अस्पताल से पुलिस को इस मामले की सूचना दी गई, तो माता-पिता ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। हालाँकि, परिवार के सदस्यों का कहना है कि लड़की के हाथ और पैर फ्रैक्चर हो रखे थे, जबकि पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ऐसी किसी चोट की पुष्टि नहीं हुई।

मृतका युवती की माँ का कहना है कि घर लौटते वक्त उनकी बेटी के साथ बाजार स्थित मकान में ले जाकर दरिंदगी की गई। मृतका के भाई ने तहरीर में कहा है कि उसकी बहन मंगलवार सुबह दस बजे घर से निकली थी और जब रिक्शा से देर शाम घर पहुँची तो वह कुछ बोल पाने में भी असमर्थ थी। उसके कमर के नीचे का हिस्सा काम नहीं कर रहा था।

डॉ जियाउर्रहमान के बयान के आधार पर ही पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में ले लिया। अधिकारियों ने बताया कि पीड़िता के भाई की शिकायत के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई और दोनों आरोपितों – शाहिद व साहिल को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376-D में आरोप दर्ज किया गया है और आगे की जाँच जारी है। एसपी ने कहा कि मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजा जाएगा और आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

#RebuildBabri: सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुस्लिमों को बरगलाने की कोशिश, पोस्टर के जरिए बाबरी ढाँचे के पुनर्निर्माण का आह्वान

सीबीआई की विशेष अदालत ने बुधवार को बाबरी विध्वंस मामले में सभी 32 आरोपितों को बरी कर दिया। वहीं इस फैसले से बौखलाए मुस्लिमों ने सोशल मीडिया पर लोगों से बाबरी ढाँचे के पुनर्निर्माण का आह्वान किया है।

अदालत के फैसले को ‘न्यायिक कारसेवा’ कहकर खारिज करते हुए कुछ इस्लामवादियों ने मुस्लिमों को बरगलाना शुरू कर दिया है। उन्होंने अपने समुदाय के लोगों से पहले से निर्माण की जा रही राम मंदिर स्थल पर बाबरी ढाँचे के पुनर्निर्माण करने के लिए लोगों को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भड़काया।

अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर कुछ कट्टरपंथियों द्वारा उत्तेजक पोस्टरों के जरिए मुस्लिमों को बाबरी ढाँचे के पुनर्निर्माण के लिए उकसाया गया है, ताकि 2019 में हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले (हिंदुओं को राम मंदिर बनाने के लिए दी गई जमीन) के विरोध में आपसी फुट डाल कर साम्प्रदायिक हिंसा को बढ़ावा दिया जाए।

फ्रेटरनिटी मूवमेंट-वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया का छात्र युवा विंग- हैशटैग #RebuildBabri के साथ सोशल मीडिया पर एक अभियान चला रहा है। इस संगठन द्वारा अपने सोशल मीडिया पेजों पर एक पोस्टर साझा किया गया है, जिसमें मुस्लिमों को भड़काऊ संदेश दिया गया है कि भारत में उनके साथ विश्वासघात हुआ और धोखा दिया गया गया है। पोस्टर में मुस्लिमों को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हिंदुओं को दी गई भूमि को पुनः प्राप्त करने और उस पर बाबरी ढाँचे के पुनर्निर्माण करने का भी आह्वान किया गया है।

गौरतलब है कि दिल्ली में हिंसक दंगों के बाद जिहाद को लेकर जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के विरोध का चेहरा बनी फरजाना ने पिछले साल खुले तौर पर अपने एक फेसबुक पोस्ट में जिहाद के लिए लोगों को उकसाया था।

उसने तब कहा था कि लोगों को इस्लामी जिहाद के बारे में सीखना चाहिए और इसके लिए बद्र, यूएचडी और कर्बला के संदर्भ महत्वपूर्ण हैं क्योंकि शुरुआत में इन लड़ाइयों की वजह से मुस्लिमों ने काफ़िरों के खिलाफ निर्णायक जीत हासिल की थी। इसके अलावा, फ़रज़ाना ने उन नरसंहारियों को भी महिमामंडन किया था, जिन्होंने हिंदुओं को मोपला नरसंहार में मार दिया था।

फेसबुक पर, ‘वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया’ ने हाल के बाबरी विध्वंस के सभी 32 आरोपितों को बरी करने के ‘न्यायिक कारसेवा’ का रूप घोषित कर दिया। जाहिरतौर पर पोस्ट में भारतीय न्यायपालिका पर विवादास्पद ढाँचे के अनदेखी का आरोप लगाया।

इसके अलावा दोहा से एक अल जज़ीरा पत्रकार भी बाबरी ढाँचे की बहाली के अभियान में शामिल हो गया। उसने बाबरी विध्वंस मामले में सभी 32 अभियुक्तों को बरी करने के बारे में एक रिपोर्ट को साझा किया। फिर पत्रकार नौफ़ल पलेरी ने भी भारत में मुस्लिमों को बरगलाने का काम किया।

उल्लेखनीय है कि आज अयोध्या के बाबरी ध्वंस मामले में सीबीआई के स्पेशल जज एसके यादव ने 2000 पन्नों का जजमेंट (फैसला) दिया। इस मामले में सभी आरोपितों को बरी कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि अयोध्या में बाबरी ध्वंस साजिशन नहीं हुआ, ये पूर्व-नियोजित नहीं था। इसे संगठन ने रोकने की भी कोशिश की, लेकिन घटना अचानक घट गई। इसके साथ ही सभी आरोपितों को बरी कर दिया गया है।

इस दौरान लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और महंत नृत्य गोपाल दास उम्र और अस्वस्थता के कारण अदालत में उपस्थित नहीं थे। उमा भारती कोरोना की वजह से नहीं आ सकीं। सतीश प्रधान भी नहीं थे। हालाँकि, ये सभी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से फैसला सुनाने के समय उपस्थित थे। इस दौरान मीडिया तक को भी कोर्ट परिसर में जाने की अनुमति नहीं थी। सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी गई है। आसपास की दुकानें भी बंद थीं।