Home Blog Page 4440

राम के काज में कभी कोई अपराध नहीं होता: अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने किया CBI कोर्ट के फैसले का स्‍वागत

बाबरी विध्वंस के आरोपितों को सीबीआई कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के बबाद संगम नगरी प्रयागराज के साधु संतों में खुशी की लहर है। साधु संतों की सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने भी कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि आज का दिन सभी सनातनधर्मियों के लिए खुशी का दिन है।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी ने कोर्ट द्वारा बरी किए गए सभी को बधाई देते हुए कहा कि भगवान राम के कार्य में कोई अपराध नहीं होता है। यह बात आज कोर्ट के फैसले से साबित हो गया, जब कोर्ट ने कहा कि यह घटना कोई सुनियोजित घटना नहीं थी। यह काम भगवान राम का था, उन्होंने अपना काम सभी से लिया।

महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि न्याय की अदालत में सत्य की हमेशा जीत होती है। आज सभी संत महात्मा कोर्ट के इस फैसले से बेहद खुश हैं। जो लोग न्यायालय में विश्वास नहीं करते हैं, वे लोग राष्ट्रद्रोही हैं। सीबीआई कोर्ट लखनऊ ने बेहद सुखद फैसला सुनाया है। महंत नरेंद्र गिरि ने आम जनमानस से अपील की है कि वो कोर्ट के आदेश को माने।

गौरतलब है कि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस के आपराधिक मामले में 28 साल बाद आज सीबीआई की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। अदालत ने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी व कल्याण सिंह समेत सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया है। 

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ‘सत्यमेव जयते’ के अनुरूप सत्य की जीत हुई है। इसके साथ ही उन्होंने तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार पर तीखा वार भी किया। 

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित हो पूज्य संतों, भाजपा नेताओं, विहिप पदाधिकारियों, समाजसेवियों को झूठे मुकदमों में फँसाकर बदनाम किया गया। इस षड्यंत्र के लिए इन्हें जनता से माफी माँगनी चाहिए।”

ढाँचा विध्वंस पर 28 साल बाद आए फैसले पर भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि स्पेशल कोर्ट का फैसला अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम सब के लिए यह बहुत खुशी का दिन है। जब यह समाचार सुना तो इसका स्वागत किया। बहुत समय बाद अच्छा समाचार मिला, जय श्रीराम। वहीं यूपी के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह के कोर्ट के फैसले पर हर्ष जताया। पूर्व मुख्यमंत्री इन दिनों कौशाम्बी में यशोदा अस्पताल में कोरोना संक्रमित होने के बाद से भर्ती हैं।

इस फैसले के बाद केस में आरोपित रहे आचार्य धर्मेंद्र ने कहा, “सत्य की जीत हुई है। इस पर मैं प्रणाम करूँगा। हम सब मिलकर जितने भी पुराने दाग हैं, उनको धोएँगे। यह तो पहली झाँकी है, काशी-मथुरा बाकी है। जहाँ-जहाँ भी दाग है, उनको धोकर साफ करेंगे।”

इस मामले में कुल 49 अभियुक्त थे लेकिन उनमें से 17 की पहले ही मौत हो चुकी है। आरोपितों पर आपराधिक साजिश रचने से लेकर आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज हुए थे। ये मामला 28 वर्षों तक चला, जिनमें 351 गवाहों को पेश किया गया था।

जोरदार धमाके से दहला पेरिस: रक्षा मंत्रालय ने कहा- राफेल विमान गुजरने से पैदा हुआ सुपरसॉनिक बूम बनी वजह

फ्रांस की राजधानी पेरिस में बुधवार (30 सितंबर, 2020) को एक तेज धमाके सी आवाज ने पूरे शहर को दहला दिया।

अधिकांश मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पेरिस में एक बड़े धमाके जैसी तेज आवाज सुनी गई है।

प्रारंभिक रिपोर्टों से पता चलता है कि यह एक जेट प्लेन के साउंड बैरियर टूटने की वजह से हुआ धमाका था।

पेरिस में तेज धमाके सी आवाज आने के बाद लोगों के होश उड़ गए। धमाके की दहशत इतनी थी कि जो जहाँ था, वहीं ठहर गया। लोगों को समझने में देर लगी कि आखिर हुआ क्या?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जोरदार धमाके जैसी आवाज राफेल विमान के गुजरने से पैदा हुए सुपरसॉनिक बूम के चलते हुई। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्‍ता ने भी इसी बात की पुष्टि की है कि यह आवाज सोनिक बूम के चलते ही पैदा हुई थी।

गौरतलब है कि किसी सुपरसॉनिक फाइटर विमान के सॉनिक बूम की आवाज तब सुनी जाती है जब वह सुनने वाले शख्‍स से 65 से 80 किलोमीटर दूर से गुजरा हो। यह आवाज इतनी तेज होती है कि खिड़कियों के शीशे तक चटख जाते हैं।

हाथरस गैंगरेप: पीड़िता का अंतिम संस्कार, आरोपित गिरफ्तार, SIT के साथ जानिए अब तक क्या हुआ इस पूरे मामले में

हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार बुधवार (30 सितंबर, 2020) तड़के सुबह पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में उसके पिता द्वारा कर दिया गया। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उनकी इच्छा के खिलाफ शव का दाह संस्कार किया। परिजन पीड़िता का दाह संस्कार सुबह करना चाहते थे। हालाँकि, पुलिस का कहना है कि पीड़िता की मृत्यु के 24 घंटे बीत जाने की वजह से शव का सड़ना शुरू हो गया था, जिस वजह से बिना देर किए अंतिम संस्कार करना पड़ा।

उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पीड़िता के परिवार को 10 लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की गई है। वहीं इस मामले पर संज्ञान लेते हुए पीएम मोदी ने भी यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से मामले में जानकारी ली। सीएम ने टेलीफोन पर बातचीत में बताया कि इस घटना की जाँच के लिए एक विशेष टीम बनाई गई है। टीम अगले सात दिनों में रिपोर्ट सौंपेगी।

गौरतलब है कि घटना के कुछ दिन बीत जाने के बाद अलीगढ़ से इलाज के लिए लाई गई 19 वर्षीय पीड़िता ने एक दिन बाद 29 सितंबर, 2020 को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया था। जिसके कुछ घंटों बाद 19 वर्षीय हाथरस सामूहिक बलात्कार पीड़िता के खिलाफ की गई क्रूरता की रिपोर्ट सोशल मीडिया पर आनी शुरू हो गई। कुछ लोगों ने पीड़िता को लेकर दावा किया कि आरोपितों ने क्रूर बलात्कार के दौरान उसकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी, उसकी ऑंखें फोड़ दी और उसकी जीभ को भी काट डाला। हालाँकि, पुलिस ने मामले की जानकारी देते हुए कि मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि अपराधियों द्वारा गला घोटते वक्त उसको चोटें आई थीं। पुलिस ने कहा कि शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार के कोई संकेत नहीं हैं।

घटना की पूरी जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया, “घटना 14 सितंबर की है, पीड़िता के भाई ने थाने में तहरीर दी थी कि उसकी माँ और पीड़िता खेत में चारा काटने गई थी तो किसी ने उसे मारने के लिए गला दबा कर उस पर हमला किया। जिसके बाद 14 तारीख को ही आईपीसी धारा 307 और एस सी एस ती एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया। अधिकारियों ने आगे बताया कि मामले में पीड़िता के भाई सतेंद्र ने एक ही अभियुक्त (संदीप) की जानकारी दी थी।”

पुलिस ने आगे बताया, लड़की गंभीर रूप से घायल थी इसलिए उसे अलीगढ़ के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका इलाज शुरू हुआ। इस बीच, पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी और 19 सितंबर को संदीप को गिरफ्तार कर लिया गया था। जब पीड़िता को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तब वह अपना बयान देने की हालत में नहीं थी। जिसके बाद 22 सितंबर को एक महिला अधिकारी को पीड़िता का बयान दर्ज कराने के लिए भेजा गया।

फास्ट ट्रैक कोर्ट

हाथरस के पुलिस अधिकारी ने पुष्टि की कि पीड़िता ने अपने बयान में तीन अन्य आरोपितों के नाम लेते हुए बताया कि उनके द्वारा उसका बलात्कार किया गया था। जिसके आधार पर आईपीसी की धारा 376 D (सामूहिक बलात्कार का आरोप) को भी एफआईआर में शामिल किया गया।

पीड़िता द्वारा दर्ज कराए गए बयान के आधार पर पुलिस ने 23 सितंबर को दूसरे आरोपित लवकुश को गिरफ्तार किया। तीसरे आरोपित रवि को 25 सितंबर को और चौथा आरोपित रामू 26 सितंबर को गिरफ्तार किया गया। सभी चार आरोपितों को जेल भेज दिया गया है। अधिकारी ने कहा कि इस मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक अदालत द्वारा की जाएगी।

सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक खबरों को पुलिस ने किया खारिज

पुलिस ने बताया, पीड़िता को 28 सितंबर सफदरजंग अस्पताल दिल्ली में भर्ती कराया गया था। गंभीर चोटों के कारण 29 सितंबर को उसकी मृत्यु हो गई। जिसके बाद आईपीसी की धारा 302 (हत्या की सजा) भी लागू कर दी गई है। साथ ही एससी / एसटी अधिनियम के तहत, पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया है।

वहीं पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरों को खारिज करते हुए कहा कि अपराधियों द्वारा लड़की की जीभ नहीं काटी गई थी। जब उसका गला घोंटा गया तो उसकी जीभ उसके दांतों के बीच आ गई, जिसकी वजह से उसमें चोट लग गई।

इस मामले पर एक अन्य बाईट देते हुए आईजी पीयूष मोर्डिया ने मीडिया से कहा कि पीड़िता के मेडिकल परीक्षण के दौरान बलात्कार के कोई संकेत नहीं थे। उन्होंने आगे कहा कि डॉक्टरों द्वारा दिए गए सुझाव के अनुसार, आगे के मेडिकल परीक्षण के लिए आगरा में फोरेंसिक विज्ञान लैब में पीड़िता के रिपोर्ट्स को भेजा गया है। जल्द ही मामले की पुष्टि की जाएगी।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब 14 सितंबर को पीड़िता चारा इकट्ठा करने के लिए खेत में गई थी, जब युवकों के एक समूह ने उस पर पीछे से हमला किया था। किशोरी को उसके गले में दुपट्टे से बाँधकर घसीट कर खेत में ले जाया गया, जहाँ कथित तौर पर उसके साथ बलात्कार किया गया। शायद घसीटने की वजह से ही उसकी रीढ़ की हड्डी में चोट आई थी। दुष्कर्म का विरोध करने पर आरोपितों ने पीड़िता की गला दबा कर हत्या करने की कोशिश की। पुलिस ने कहा कि इसी दौरान पीड़िता की जीभ दाँत के बीच में आ गई और कट गई।

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के चन्दपा पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) को मामले में ‘तुरंत कार्रवाई करने में उनकी विफलता’ के कारण जिला पुलिस लाइनों में ट्रांसफर कर दिया गया है। हाथरस एएसपी प्रकाश कुमार ने पुष्टि की है कि शव का पोस्टमॉर्टम करने के बाद उसे गाँव लाया जाएगा।

पीड़िता के शव को पोस्टमॉर्टम के बाद गाँव लाया गया जहाँ बाद में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

नोट: ताजा जानकारी के अनुसार रिपोर्ट को आगे अपडेट किया जाएगा।

मस्जिद शहीद हुई कॉन्ग्रेस की मौजूदगी में, इसकी जड़ कॉन्ग्रेस पार्टी: बाबरी मस्जिद पर कोर्ट के फैसले से ओवैसी नाखुश

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। बुधवार (सितंबर 30, 2020) को लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत कुल 32 आरोपितों को बरी कर दिया गया। कोर्ट का फैसला आने के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नाराजगी जताई है। औवैसी ने एक शायरी ट्वीट करके अपनी बात कही है।

असदुद्दीन ओवैसी ने ट्विटर पर लिखा, ”वही कातिल वही मुनसिफ अदालत उसकी वो शाहिद, बहुत से फैसलों में अब तरफदारी भी होती है।”

इसके साथ ही सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने प्रेस कॉन्फ्रेस करते हुए कहा, ”सीबीआई कोर्ट का आज का फैसला भारत की अदालत की तारीख का काला दिन है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने जो 9 नवंबर को जो फैसला दिया था, आज का फैसला उसके खिलाफ है। क्या जादू से मस्जिद को गायब कर दिया था, क्या जादू से मूर्तियाँ रखी गईं थीं, क्या जादू से ताले खोले गए। आप अंदाजा लगाइए आडवाणी की रथयात्रा जहाँ भी गई वहाँ हिंसा हुई, लूटपाट हुई, मासूम लोगों के कत्ल हुए और लोगों के घर जला दिए गए। ये बताना चाहिए कि जब इतने महीने से तैयारी हो रही थी, तो फिर सब अचानक कैसे हो गया।” 

उन्होंने आगे कहा, ”क्या यह सच नहीं है कि उमा भारती ने कहा था कि एक धक्का और दो, बाबरी मस्जिद तोड़ दो। क्या जब बाबरी मस्जिद शहीद हुई तब उमा भारती, आडवाणी मिठाई नहीं खा रहे थे। वो लोग खुशियाँ मना रहे थे। 1959 से अब तक इस पूरे मामलों में समुदाय के लोगों को इंसाफ नहीं मिला।”

ओवैसी ने आरोप लगाया कि सीबीआई की चार्जशीट में कहा गया है कि कल्याण सिंह ने कहा था कि रोक बनाने पर है, गिराने पर नहीं। 5 दिसंबर की रात को विनय कटियार के घर पर बैठक हुई थी, जिसमें लालकृष्ण आडवाणी भी शामिल थे।

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “तब मुझे शर्म महसूस हुई थी कि मैं मस्जिद बचा नहीं सका हूँ और अब ऐसा फैसला दे रहे हैं। बीजेपी सरकार की ओर से लालकृष्ण आडवाणी को सम्मान दिया गया, तभी साफ हो गया था क्या फैसला आएगा।” ओवैसी ने आरोप लगाया कि एक आरोपी अदालत के बाहर खड़ा होकर विध्वंस की बात स्वीकार रहा है और उसे अदालत ने बरी कर दिया।

ओवैसी ने सीबीआई कोर्ट के फैसले को नाइंसाफी करार देते हुए कहा, “मैं बतौर भारतीय मुस्लिम आज अपमान, शर्म और असहाय महसूस कर रहा हूँ। बिल्कुल वैसा ही जैसा 6 दिसंबर 1992 में युवावस्था में किया था।” उन्होंने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) से इस फैसले को चैंलेज करने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि यह न्याय का मामला है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के लिए जिम्मेदार लोगों को दोषी ठहराया जाना चाहिए और आज बीजेपी इस मसले की वजह से ही सत्ता में है। ओवैसी ने कहा, “इस मसले में इंसाफ नहीं हुआ है। सारी दुनिया जानती है कि भाजपा, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद, शिवसेना और कॉन्ग्रेस की मौजूदगी में ये हुआ और इनकी जड़ कॉन्ग्रेस पार्टी है। इन्हीं की हुकूमत में राजीव गाँधी ने ताले खुलवाए। मूर्ति रखी गई, शिलान्यास हुआ और इन्हीं की हुकूमत में मस्जिद शहीद हुई।”

बता दें कि बाबरी विध्वंस केस में सभी 32 आरोपितों को लखनऊ की सीबीआई की विशेष अदालत ने बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि विध्वंस की घटना पूर्व नियोजित नहीं थी और यह अचानक हुई थी। कोर्ट ने सीबीआई के कई साक्ष्यों को भी नहीं माना और 28 साल से चले आ रहे इस विवाद पर अपना फैसला सुना दिया। बरी होने के बाद आरोपितों और उनके समर्थकों में खुशी की लहर छा गई। कोर्ट रूम में ही जय श्री राम के नारे गूँज उठे।

ड्रग केस के लपेटे में आ सकते हैं S, R, A नाम वाले तीन बड़े अभिनेता, दीपिका पादुकोण के साथ कर चुके हैं काम

सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में ड्रग्स एंगल में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। बीते दिनों ही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने बॉलीवुड की तीन बड़ी अभिनेत्रियों दीपिका पादुकोण, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर से पूछताछ की। अब NCB की रडार पर तीन अभिनेता हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक धर्मा प्रोडक्शंस के पूर्व एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर क्षितिज रवि प्रसाद ने बॉलीवुड के तीन बड़े अभिनेताओं के नाम लिए हैं। इन अभिनेताओं के नाम S, R और A से शुरू होते हैं। तीनों कलाकारों ने दीपिका पादुकोण के साथ काम किया है।

सूत्रों के मुताबिक, A नाम से शुरू होने वाला अभिनेता ड्रग्स लेता भी था और संपर्क वाले लोगों को ड्रग्स देता भी था। A नाम के सुपरस्टार का नाम क्रिकेटर से भी जुड़ा है। ड्रग्स केस में एनसीबी अब इन तीनों के खिलाफ पर्याप्त सबूत जुटाने में लगी है। उसके बाद उन्हें जल्द ही पूछताछ के लिए समन भेज जा सकता है।  

बता दें कि ड्रग्स केस में 26 सितंबर को एनसीबी ने अभिनेत्री दीपिका पादुकोण, श्रद्धा कपूर और सारा अली खान के बयान दर्ज किए थे। इस दौरान चारों ने सवालों के एक जैसे ही जवाब दिए। चारों अभिनेत्रियों ने पूछताछ के दौरान दावा किया कि ‘हैश ड्रग नहीं है’।

इसी दिन एनसीबी ने धर्मा प्रोडक्शन के कार्यकारी निर्माता क्षितिज रवि प्रसाद को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। एजेंसी इस मामले में अब तक कम से कम 18 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। एनसीबी के सूत्रों ने बताया कि क्षितिज ने तीन महीने की अवधि में कम से कम एक दर्जन बार ‘गांजा’ खरीदा और हर पेडलर को 50 ग्राम के लिए 3500 रुपए दिए।

जाँच एजेंसी एनसीबी ने 9 सितंबर को अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया था। रिया चक्रवर्ती की जमानत का विरोध करते हुए एनसीबी ने कहा कि अभिनेत्री और उनके भाई शौविक चक्रवर्ती ‘नामचीन हस्तियों और ड्रग्स आपूर्तिकर्ताओं से जुड़े मादक पदार्थों के सक्रिय समूह के सदस्य हैं।’

एनसीबी ने दावा किया था कि उनके पास रिया के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत हैं, जिनसे साबित होता है कि अभिनेत्री ड्रग तस्करी में शामिल थीं और ड्रग की डिलीवरी करती थीं। इसके अलावा वह ड्रग के लिए पेमेंट भी क्रेडिट कार्ड, कैश और पेमेंट गेटवे के जरिए करती थीं। रिया चक्रवर्ती और सुशांत के साथ जुड़े अन्य लोगों को 6 अक्टूबर तक एनसीबी की हिरासत में भेज दिया है और वर्तमान में वे भायखला जेल में बंद हैं।

पिछले दिनों रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने बॉलीवुड की पार्टियों में शामिल रही एक इनसाइडर का इंटरव्यू लिया था। इनसाइडर ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए थे। इनसाइडर ने दावा किया था, “बॉलीवुड में ड्रग्स नहीं है, ड्रग्स में बॉलीवुड है। ये कड़वा सच है कि आज के बॉलीवुड स्टार्स सोने से पहले, उठने से पहले, जैसे हमलोग लंच-डिनर करते हैं, वैसे वे ड्रग्स का इस्तेमाल करते हैं। अभी तो सिर्फ A लिस्टेड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का नाम सामने आया है। अभी तो और भी कई अभिनेता और अभिनेत्रियों के नाम सामने आने बाकी हैं।”

बाबरी मस्जिद फैसले के 24 घंटे के भीतर गोरखनाथ मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी, UP पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

एक तरफ जहाँ बाबरी विध्वंस मामले के सभी आरोपितों को कोर्ट ने बरी कर दिया, वहीं दूसरी तरफ गोरखपुर एसएसपी को एक शख्स ने फोन करके गोरखपुर स्थित गुरु गोरखनाथ मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी है। जिसके बाद अधिकारियों ने आनन-फानन में मंदिर की सुरक्षा बढ़ाते हुए अलर्ट जारी कर दिया। साथ ही मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने धमकी देने वाले व्यक्ति को बांसगाँव इलाके से गिरफ्तार कर लिया है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को बाबरी विध्वंस मामले के आए फैसले के कुछ घंटों बाद बांसगाँव के एक युवक ने जिले के एसएसपी को फोन कर मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी। पुलिस ने मंदिर की चौकसी बढ़ाते हुए फोन करने वाले युवक को कुछ ही घंटों के अंदर गिरफ्तार कर लिया। बता दें गिरफ्तार शख्स एक बार पहले भी इसी प्रकार की धमकी दे चुका है। उस दौरान भी पुलिस ने उसपर शान्ति भंग करने का आरोप लगाते हुए उसे हिरासत में लिया था और मुकदमा भी दर्ज हुआ था। बताया जा रहा है कि उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आरोपित शिवेंद्र सिंह ने 24 घंटे के अंदर मंदिर उड़ाने की धमकी पुलिस को दी थी। साथ में यह भी कहा की बचा सकते हो तो बचा लो। जिसको सुनकर पुलिस सकते में आ गई। जिस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। वहीं मंदिर की सुरक्षा को भी बढ़ा दिया गया।

गौरतलब है पिछली बार दिए गए धमकी को पुलिस ने हल्के में ले लिया था। और मानसिकतौर पर पीड़ित मानकर कोई सख्ती नहीं बरती थी। लेकिन दूसरी बार उसी तरह से की गई गैर जिम्मेदाराना हरकत पर पुलिस इस बार आरोपित से सख्ती बरतने के मूड में है। एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने कहा है कि कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि आज अयोध्या के बाबरी ध्वंस मामले में सीबीआई के स्पेशल जज एसके यादव ने 2000 पन्नों का जजमेंट (फैसला) दिया। इस मामले में सभी आरोपितों को बरी कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि अयोध्या में बाबरी ध्वंस साजिशन नहीं हुआ, ये पूर्व-नियोजित नहीं था। इसे संगठन ने रोकने की भी कोशिश की, लेकिन घटना अचानक घट गई। इसके साथ ही सभी आरोपितों को बरी कर दिया गया है।

इस दौरान लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और महंत नृत्य गोपाल दास उम्र और अस्वस्थता के कारण अदालत में उपस्थित नहीं थे। उमा भारती कोरोना की वजह से नहीं आ सकीं। सतीश प्रधान भी नहीं थे। हालाँकि, ये सभी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से फैसला सुनाने के समय उपस्थित थे। इस दौरान मीडिया तक को भी कोर्ट परिसर में जाने की अनुमति नहीं थी। सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी गई है। आसपास की दुकानें भी बंद थीं।

‘हम हाईकोर्ट जाएँगे’: जफरयाब जिलानी, साक्षी महाराज ने कहा- ‘आपलोग बाबर-बाबरी करते पागल हो जाओगे’

अयोध्या बाबरी विध्वंस मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने सभी 32 आरोपितों को रिहा कर दिया है, जिनमें 8 भाजपा नेता भी शामिल थे। कोर्ट ने माना कि ये साजिशन नहीं हुआ, पूर्व-नियोजित नहीं था – अचानक हुआ। इस मामले में मुस्लिम पक्ष की तरफ से पैरवी करने वाले अधिवक्ता जफरयाब जिलानी ने कहा है कि वो इसके खिलाफ हाईकोर्ट जाएँगे। उन्होंने कहा कि सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

जफरयाब जिलानी ने कहा कि उनलोगों ने मुस्लिम पक्ष की तरफ से अदालत में एप्लीकेशन डाली थी। साथ ही अयोध्या में कुछ गवाहों की तरफ से भी एप्लीकेशन डाली गई थी। जफरयाब जिलानी का दावा है कि ये ऐसे लोग थे, जिनके मकानों को उस समय जला डाला गया था। हालाँकि, इन एप्लिकेशनों को अदालत द्वारा रिजेक्ट कर दिया गया था। जफरयाब जिलानी ने कहा, “हम अपने-आप को इस मामले में विक्टिम समझते हैं।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय इस मामले में विक्टिम है, इसीलिए वो हाईकोर्ट जाएँगे। ‘न्यूज़ 18’ की खबर के अनुसार, जब अधिकवक्ता जफरयाब जिलानी से पूछा गया कि हाईकोर्ट में पेटिशन कौन फ़ाइल करेगा, तो उन्होंने कहा कि ये सारे पहलू बाद में तय किए जाएँगे। हालाँकि, जब उनसे पूछा गया कि इस मामले में सभी आरोपित बरी कैसे हो गए, तो उन्होंने इसके जवाब में कुछ भी नहीं कहा।

उधर भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि ये स्थिति ‘खोदा पहाड़, निकली मरी हुई चुहिया’ वाली हो गई लेकिन यहाँ तो चुहिया तक नहीं निकली। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने भी झूठी एफआईआर करा के भाजपा और विहिप के नेताओं को फँसाया। जब उनसे पूछा गया कि बाबरी मस्जिद किस साजिश के तहत गिराया गया तो उन्होंने कहा, “कहाँ ढाँचा गिरा था? आपलोग बाबरी-बाबरी करते पागल हो जाओगे। वहाँ बाबरी मस्जिद नहीं, प्रभु श्रीराम का मंदिर था।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले में भी बाबरी पक्ष के मालिकाना हक़ के लिए जफरयाब जिलानी ही अधिवक्ता थे। राम मंदिर पर ऐतिहासिक फैसले के बाद उन्होंने शरीयत क़ानून का जिक्र करते हुए कहा था कि मस्जिद किसी को नहीं दिया जा सकता है। जिलानी ने तब कहा था कि मस्जिद की कोई क़ीमत नहीं होती और मस्जिद की मिलकियत अल्लाहताला के पास होती है। उन्होंने कहा था कि इसे न तो बेचा जा सकता है और न ही अदला-बदली की जा सकती है, इसके लिए 5 करोड़ या 500 करोड़ रुपए ही क्यों न मिले।

कोसी का ऊँट किस करवट बैठैगा इस बार? जहाँ से बनती-बिगड़ती है बिहार की सरकार… बाढ़ का मुद्दा किसके साथ?

बिहार को अगर #राजनीति_की_प्रयोगशाला कहते हैं, तो बिहार की राजनीति की दशा को कोसी के घटवार तय करते हैं। आजादी के बाद से ही बिहार का कोसी प्रमंडल तय करता रहा है कि सत्ता की बागडोर किसके हाथ में जाएगी। शुरुआती कॉन्ग्रेसी दौर में ये कोई बड़ा सवाल नहीं होता था, लेकिन 1990 आते-आते हवा बदली और जनता पार्टी ने भी बिहार की राजनीति में अपनी जगह बना ली थी।

तब से अब तक का दौर देखें तो ये भी कहा जा सकता है कि सहरसा सीट से जो दल जीता, बिहार में सरकार भी उसी दल ने बनाई। कोसी प्रमंडल को जिलों के हिसाब से देखें तो यहाँ सहरसा, सुपौल और मधेपुरा- 3 जिले होंगे। इनमें सहरसा में 4 (सहरसा, सिमरी बख्तियारपुर, महिषी और सोनवर्षा) सीटें, सुपौल में 5 (सुपौल, त्रिवेणीगंज, छातापुर, निर्मली, पिपरा) तथा मधेपुरा में 4 (मधेपुरा, सिंघेश्वर, आलमनगर, बिहारीगंज) विधानसभा सीटें होती हैं।

इस तरह कोसी प्रमंडल से कुल 13 विधायक विधानसभा पहुँचते हैं। राजनैतिक रूप से ये इलाका कितना सक्रिय है, इसका अनुमान लगाना हो तो सहरसा जिले की केवल सहरसा विधानसभा सीट से 2015 में 16 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया, 2 की उम्मीदवारी रद्द हुई और लड़ने वाले 14 में से 12 की जमानत जब्त हो गई थी। गठबंधनों के लिहाज से राजग गठबंधन में भाजपा इस इलाके में कमजोर दिखती है तो महागठबंधन में कॉन्ग्रेस कमजोर पड़ जाती है।

बिहार में क्षेत्रीय दलों (जद-यू, राजद) और राष्ट्रीय दलों (भाजपा, कॉन्ग्रेस) का आपसी समीकरण पिछले 30 वर्षों में कैसा बना है, ये भी इससे नजर आ जाता है। एनडीए से 2010 तक भाजपा को सिर्फ 1 सीट मिलती थी, इस इलाके की बाकी सीटों पर जद-यू लड़ती थी। महागठबंधन की तरफ से सिमरी बख्तियारपुर से एक कॉन्ग्रेस के और बाकी सभी पर राजद के उम्मीदवार होते। अगर 2015 के चुनावी आँकड़ों को देखेंगे तो एक दो चीज़ें और भी देखने लायक होंगी।

राजनैतिक रूप से ये इलाका इतना सक्रिय है कि 13 सीटों पर लड़ने के लिए यहाँ कुल 176 उम्मीदवार तैयार थे। इनमें से महिलाओं की भगीदारी देखेंगे तो वो 8% से भी थोड़ी कम है। जनता कैसे सोचती है, इस विषय में समझना हो तो चुनाव लड़ने वालों और जमानत जब्त करवाने वालों की गिनती देखिए। नामांकन रद्द होने के कारण, कुछ उम्मीदवार लड़ नहीं पाईं , लेकिन जो चुनावी दंगल में उतरीं, उनमें से केवल 2 के बीच ही मुकाबला रहा।

शेष सभी जमानतें जब्त करवा बैठे! उपचुनाव (2019) में सिमरी बख्तियारपुर पर राजद का कब्ज़ा हुआ और छातापुर की सीट भाजपा के हिस्से में आ गई है। महत्व के हिसाब से देखें तो मधेपुरा सीट का नाम इसलिए जाना-पहचाना होता है क्योंकि मधेपुरा की सीट से लालू यादव और शरद यादव जैसे नेता उतरते रहे हैं। “रोटी के साथ राम” का नारा देने वाले और अयोध्या राम मंदिर का शिलान्यास करने वाले भाजपा के दलित नेता कामेश्वर चौपाल 2014 में सुपौल की लोकसभा सीट से लड़े थे।

एक दौर में पूरे देश की राजनीति में हलचल लाने के लिए जिस मंडल कमीशन को याद किया जाता है, उसके मंडल सहरसा के सबसे बड़े जमींदारों में से एक हैं। पिछले चुनावों में सबसे ज्यादा मतों से हारने वाले विधायक, सहरसा के सिटिंग भाजपा विधायक ही थे।

सहरसा और कोसी में जीत का मतलब पटना में सरकार क्यों होता है, ये देखना हो तो हमें थोड़ा सा पीछे चलना होगा। जब 1990 में यहाँ से सभी सीटें जनता दल ने जीती थीं, तो सरकार भी जनता दल की बनी थी। अगले चुनावों (1995) में एक सीट (सिमरी बख्तियारपुर) कॉन्ग्रेस ने जीत ली थी और बाकी सीटों पर फिर से जनता दल का कब्ज़ा रहा।

उसके बाद जब 2000 में राजद ने इस इलाके पर परचम फहराया तो फिर से राजद की (कॉन्ग्रेस समर्थन से) सरकार बन गई। इसके बाद से (2005 के और 2010 के चुनाव में) कोसी पर राजग गठबंधन (भाजपा और जद-यू) काबिज होने लगी। इस दौर में सरकार भी नीतीश कुमार ने बनाई।

पिछले (2015) चुनावों को देखेंगे तो इसमें एक छातापुर (सुपौल जिला) की सीट तो भाजपा जीत पाई मगर बाकी पर महागठबंधन का कब्ज़ा हो गया। इस बार भाजपा और जद(यू) साथ नहीं थे बल्कि नीतीश ने लालू से हाथ मिला लिया था। सरकार भी उन्हीं की बनी, मगर बाद में संभवतः नीतीश बाबू ने “अंतरात्मा की आवाज” सुन ली और वो फिर से भाजपा के साथ आ मिले।

कोसी क्षेत्र के चुनावों में मुकाबला सीधा दो दलों का ही होता है, इस वजह से भी राजनैतिक दलों के लिए यहाँ उम्मीदवार से लेकर रणनीति तय करने तक पर विशेष ध्यान रहता है। इस बार की चुनावी हलचल शुरू होते ही इस इलाके को 500 करोड़ से ऊपर का रेल पुल दिया गया है। भाजपा और जद-यू ने इसके साथ ही अपनी मंशा इस इलाके के लिए साफ़ कर दी है। लॉकडाउन की वजह से बाहर गए मजदूरों का एक बड़ा वर्ग इस बार घर पर ही होगा।

ध्यान रहे कि पलायन के मौसम में इस क्षेत्र से इतने मजदूर पंजाब-दिल्ली की ओर जाते हैं कि दिल्ली इत्यादि से, इस इलाके को जोड़ने वाले सहरसा जंक्शन का रेवेन्यु पटना से भी ज्यादा हो जाता है। पलायन की पीड़ा के अलावा जिस बाढ़ की वजह से हर वर्ष पलायन होता है, वो भी जनता का अघोषित मुद्दा होगा।

बाढ़ राहत के नाम पर लूट के अभियोग नेताओं-अधिकारियों पर लगातार लगते रहे हैं। अभी बिहार के कई जिले बाढ़ पीड़ित ही हैं, इसलिए भी बाढ़ से निपटने के लिए सरकारों ने क्या किया, इसका जवाब देना सत्ता पक्ष के लिए मुश्किल होगा। एंटी इनकमबेंसी फैक्टर के अलावा राजद के नेता इस बात को भी भुनाएँगे कि “सुशासन बाबू” ने उनके साथ धोखा किया है।

मतदान के वक्त तो राजद समर्थन के नाम पर वोट माँगे गए, मगर सरकार से राजद को हटाकर वो फिर भाजपा के साथ हो गए। ऐसे में सत्ता पक्ष के लिए इस बार कोसी प्रमंडल के चुनावों की डगर कठिन ही होगी। बाकी हलचल जब शुरू हो ही गई है तो देखते हैं, थोड़े ही दिन में निष्पक्ष और सापेक्ष दोनों ही पत्रकारों को समझ में आने तो लगेगा कि चुनावी ऊँट किस करवट बैठने वाला है।

मैं मुन्ना हूँ: कहानी उस बच्चे की जो कभी अंधेरी कोठरी में दाखिल होकर अपनी आँखें मूँद उजाले की कल्पना में लीन हो गया था

पुस्तक: मैं मुन्ना हूँ/Main Munna Hun
लेखक: श्री मनीष श्रीवास्तव

लेखक परिचय

‘मैं मुन्ना हूँ’ लेखक का दूसरा उपन्यास है, प्रथम उपन्यास का नाम ‘रूही – एक पहेली’ है। इनकी रचनाएँ ऑपइंडिया, मंडली, स्वराज्य, इण्डिक टुडे जैसे मंचों पर प्रकाशित होती रही हैं।ये मुख्य रूप से भावनात्मक कहानियाँ, यात्रा वृत्तांत और मार्मिक संस्मरण लिखते हैं। मनीष जी की रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं को स्पर्श करती हुई पाठक के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती हैं।

पुस्तक परिचय

‘मैं मुन्ना हूँ’ बाल यौन शोषण जैसे गंभीर विषय पर लिखा गया उपन्यास है। लेखक विषय की गंभीरता के साथ न्याय करते हुए बीच-बीच में हल्के-फुल्के किस्सों के साथ ही प्रेम का एक शीतल झरना भी प्रस्फुटित करते हैं। वृंदावन वन की कुंज गलियों से होते हुए पशुपति नाथ जी की अविस्मरणीय यात्रा के साथ ही आगरा शहर का ताना-बाना आकर्षित करता है।

पुस्तक समीक्षा

उपन्यास के नायक मुन्ना की कहानी आरंभ होती है उसके श्रापित बचपन से जहाँ वह शारीरिक, मानसिक झंझावतों से जूझता किशोरवय के अल्हड़पन को पार कर प्रेम की अनकही गुत्थियों को सुलझाता जीवन यात्रा में आगे बढ़ता रहा।

नीरा दीदी, रमेश चाचा, वृंदा चाची, बिंदी, जया, ज़ुल्फी, बक्शी अंकल के हाथों की कठपुतली सा मुन्ना, बचपन को किसी अंधरे से कोने में दबा के आया है। किन्नू का सहारा मिलते ही वो मुरझाया सा फूल कुछ खिल सा गया। भैया के संग ने उसे जीवन की नई राहों पर पहुँचा दिया।

दोस्तों का चहेता, यारों का यार है हमारा मुन्ना। जुगाड़ु इतना कि पूछिए मत। आप चाहेंगे कि काश ये मेरी क्लास में होता तो हम भी मस्ती कर लेते। अम्मा की आंँखों का तारा, पिताजी का प्यारा भी बना परन्तु बहुत वक्त लगा दिया। ठाकुर और शेखू ने यारियांँ निभाने में कहीं कोई कसर नहीं छोड़ी है। दोस्त हो तो ऐसे!

मोरपंखी, मानसी, नैना और इन सबका एक मुन्ना….. प्रेम की कई अवस्थाएंँ परत दर परत खुलती जाती हैं और पाठक अचंभित सा, मुग्ध हो बस पढ़ता चला जाता है। केशव का आना एक बार फिर जीवन में बदलाव सा ला देता है और उसी कड़ी में अमोहा मांँ मुन्ना का हाथ थामे उसे वहांँ ले जाती हैं जहांँ वो अपने भीतर का सारा डर, सारी कड़वाहट, सारा संताप निकाल फेंकने को बेकल हो उठता है।

मुन्ना कहानी है, आपकी, मेरी और हम सभी में छुपे उस बच्चे की जो कभी ना कभी, किसी ना किसी रूप में अनजाने में ही सही, एक अंधेरी कोठरी में दाखिल हो गया और कस के आँखें मूँद उजाले की कल्पना में लीन हो गया।

उस पीड़ित बच्चे ने इधर उधर हाथ-पांँव मार खुद को उस डर से निकालने की अनवरत कोशिश जारी रखी। बालपन पर पड़े गहरे निशान भविष्य में किसी ना किसी रूप में सामने आकर व्यथित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। कैसे मुन्ना एक विजेता बन सबके सामने आया? कैसे उसने अपनी यात्रा के हर पड़ाव पर कुछ नवेला सा किया?

जानने के लिए पढ़िए और ज़रूर पढ़िए – मैं मुन्ना हूँ

नोट: यह पुस्तक समीक्षा गरिमा द्वारा लिखी गई है

राजनीति से ग्रसित हो कॉन्ग्रेस ने करवाया था झूठा मुकदमा: बाबरी पर फैसले के बाद CM योगी का तीखा वार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज (सितंबर 30, 2020) बाबरी ध्वंस मामले पर फैसला आने के बाद जहाँ निर्णय का स्वागत किया वहीं तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार पर तीखा वार भी किया। उन्होंने सीबीआई की विशेष अदालत के निर्णय को सुनने के बाद कहा कि सत्यमेव जयते के अनुरूप सत्य की जीत हुई है।

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित हो पूज्य संतों, भाजपा नेताओं, विहिप पदाधिकारियों, समाजसेवियों को झूठे मुकदमों में फँसाकर बदनाम किया गया। इस षड्यंत्र के लिए इन्हें जनता से माफी माँगनी चाहिए।”

उनके अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिखा, “लखनऊ की विशेष अदालत द्वारा बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में श्री लालकृष्ण आडवाणी, श्री कल्याण सिंह, डा मुरली मनोहर जोशी, उमाजी समेत 32 लोगों के किसी भी षड्यंत्र में शामिल न होने के निर्णय का मैं स्वागत करता हूँ। इस निर्णय से यह साबित हुआ है कि देर से ही सही मगर न्याय की जीत हुई है।”

इसी तरह शिवराज सिंह चौहान ने भी इस निर्णय को सत्य की जीत बताया। उन्होंने कहा, “तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार ने पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर जो हमारे संत, महात्मा, वरिष्ठ नेताओं पर झूठे आरोप लगाए थे, वो निर्मूल सिद्ध हुए हैं। विशेष अदालत के फैसले से दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। हम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं!”

गौरतलब है कि इस पूरे मामले में 28 साल पहले मुकदमा दर्ज हुआ था। दिसंबर 6, 1992 को बाबरी मस्जिद ध्वंस मामले में फ़ैजाबाद पुलिस स्टेशन में दो अलग-अलग केस दर्ज किए थे। शाम के 5:15 बजे SHO प्रियंवदा नाथ शुक्ला ने एक एफआईआर दर्ज कराई थी।

इसमें डकैती, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालना, किसी धर्म के अपमान के उद्देश्य से धार्मिक स्थल को नुकसान पहुँचाना और दो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने का मामला दर्ज किया गया था। इसके 10 मिनट बाद सब-इंस्पेक्टर गंगा कुमार तिवारी ने दूसरी एफआईआर दर्ज की थी।

इस मामले में कुल 49 अभियुक्त थे लेकिन उनमें से 17 की पहले ही मौत हो चुकी है। आरोपितों पर आपराधिक साजिश रचने से लेकर आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज हुए थे। ये मामला 28 वर्षों तक चला, जिनमें 351 गवाहों को पेश किया गया था।