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रिया का ड्रग्स कनेक्शन छोटा नहीं, दुबई और आतंकी समूहों से जुड़े हैं तार: NCB प्रमुख राकेश अस्थाना

बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को जाँच में रिया चक्रवर्ती के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग्स कनेक्शन के सबूत मिले हैं। आउटलुक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) प्रमुख राकेश अस्थाना ने कई अहम खुलासे किए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में बड़े ड्रग्स रैकेट का पता चला है, जिसके तार दुबई और आतंकी समूहों से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जुड़े हुए हैं।

एनसीबी प्रमुख राकेश अस्थाना ने मैगजीन को दिए इंटरव्यू में कहा, “रिया का मामला कोई छोटा नहीं है। इसके जरिए एक व्यवस्थित रूप से चल रहे रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसके तार दुबई और आतंकी संगठनों से जुड़े हुए हैं। रेव पार्टियों के लिए अवैध ड्रग्स खरीदी जाती हैं। उससे होने वाली कमाई का इस्तेमाल आतंक फैलाने के लिए किया जाता है। क्यूरेटेड मरिजुआना से बनाई गई एक किलोग्राम ‘बड’ की कीमत आठ लाख रुपए है। रिया जैसे लोग युवाओं के लिए रोल मॉडल होते हैं, ऐसे में उन्हें माफ नहीं किया जा सकता है। हमें लोगों को ड्रग्स का इस्तेमाल रोकने के लिए एक उदाहरण पेश करना होगा।”

उन्होंने कहा कि ड्रग्स बनाने वाले देश में ड्रग्स की तस्करी और इस्तेमाल को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। राकेश अस्थाना ने इंटरव्यू में कहा कि रिया चक्रवर्ती का ड्रग्स सिंडिकेट छोटा नहीं है। उन्होंने बताया कि इस मामले से एक व्यवस्थित ड्रग्स रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसका दुबई और आतंकी समूहों की तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संबंध हैं। ड्रग्स रेव पार्टी के लिए लाया जाता था और इस पैसे का इस्तेमाल नार्को-टेरर के लिए किया जाता है।

राकेश अस्थाना ने इंटरव्यू के दौरान बताया कि दुनिया की 95 फीसदी हेरोइन अफगानिस्तान और म्यांमार के खेतों से निकलती है। भारत की बड़ी जनसंख्या के कारण इसका बाजार भी काफी बड़ा है। ऐसे में ड्रग का अवैध कारोबार करने वाले जमीन और समुद्री दोनों रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं। 

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हमारे कुछ पड़ोसी देश, ड्रग माफियाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं करते हैं। इसके अलावा म्यांमार में विद्रोही राज्य शान और काचीन में हेरोइन और याबा गोलियों का निर्माण बड़े पैमाने पर होता है, जिनकी सीमाएँ चीन से मिलती हैं।

इसके अलावा अवैध ड्रग्स बनाने के लिए रसायनों की तस्करी चीन और भारत से की जाती है, जो बाद में फिर से ड्रग्स के रूप में भारत पहुँच जाते हैं। इसी तरह कनाडा और अमेरिका से भेजी गई कोकीन ब्राजील और दुबई होते हुए भारत के पश्चिमी तट पर पहुँच जाती है।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच शुरू होने के बाद ड्रग्स का मामला सामने आया था। कथित तौर पर रिया ने पूछताछ में एनसीबी को 25 बॉलीवुड सेलेब्स के नाम बताए हैं, जो ड्रग्स का इस्तेमाल करते हैं या तस्करी करते हैं। एनसीबी की इसकी जाँच कर रही है। इसी हफ्ते अभिनेत्री श्रद्धा कपूर और सारा अली खान को समन भेजने की बात भी कही जा रही है।

ठुड्डी के बगल में 1.5 इंच छेद, आँख-नाक से खून; हाथ मुड़े: आखिर दिशा सालियान के साथ क्या हुआ था?

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत को लेकर हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं। हाल ही में दिशा सालियान के मृत शरीर को ले जाने के लिए बुलाई गई एंबुलेंस के ड्राइवर पंकज सैदन ने रिपब्लिक भारत के साथ बात की। इस दौरान उन्होंने 8-9 जून की घटनाओं का खुलासा किया। पंकज ने बताया कि उन्होंने दिशा सालियान की लाश को किस अवस्था मे देखा था। 

‘निजी कार में ले जाया गया शव’

पंकज सैदन ने कहा, “मुझे कल्याण नगर से लगभग 1.45 बजे फोन आया कि किसी ने आत्महत्या कर ली है। जल्दी से एम्बुलेंस लेकर आओ। 10 मिनट के भीतर मैं वहाँ पहुँच गया। कॉल मुंबई पुलिस का था। लेकिन जब मैं वहाँ पहुँचा, तो उन्होंने मुझसे कहा कि शव को निजी कार में ले जाया जा चुका है। इसके बाद मैं दूसरे बॉडी को लेने के लिए चला गया।”

पंकज ने आगे कहा, “जब मैं मौके पर पहुँचा था, वहाँ बहुत सारे लोग थे, पुलिस की गाड़ियाँ थी। उन्होंने मुझे बताया कि उनके पड़ोसी या दोस्त पहले ही उसका शव ले गए थे। दूसरे शरीर को लेने के बाद जब मैं लगभग 30 मिनट में शताब्दी अस्पताल पहुँचा, उसी वाहन में वे लोग वहाँ पहुँचे थे। वे उसे नीचे ट्राली पर ले गए, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया।”

दिशा के मृत शरीर की स्थिति बताते हुए पंकज सैदन ने कहा, “पूरे शरीर पर घाव थे। उनकी ठुड्डी के बगल में 1.5 इंच का छेद था। उनकी आँख, नाक, दाँत से खून बह रहा था। उनका हाथ भी मुड़ गया था।”

एंबुलेंस ड्राइवर ने आगे कहा, “दिशा सालियान ने पूरे कपड़े पहना था। उन्होंने लाल रंग की टॉप और ग्रे रंग का लेगिंग्स पहना था। जब उन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाया गया, तब उनके कपड़े उतार कर चेंज किया गया।” 

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के कारण किसी भी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं थी। मुंबई पुलिस ने कहा कि उसके दो दोस्त उसका शव लेकर आए थे। उन्होंने यह भी कहा कि दो निजी अस्पतालों ने उसे एडमिट करने से इनकार कर दिया था। वे पहले एवरशाइन गए, फिर तुंगा, फिर वे आखिरकार शताब्दी आए।

गौरतलब है कि 8 और 9 जून की मध्यरात्रि को मलाड की 14 वीं मंजिल से गिरने की वजह से दिशा की मौत हो गई थी और मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया था। लेकिन लगातार ऐसे दावे सामने आए हैं जिससे उनकी हत्या किए जाने का शक गहराता जा रहा है।

पिछले दिनों मीडिया रिपोर्ट में चश्मदीद के हवाले से दावा किया गया था कि 8 जून की रात दिशा से चार लोगों ने रेप किया था। इस रात उन्होंने अपने घर पर पार्टी रखी थी। बाद में 14वीं मंजिल से गिरने से उसकी मौत हो गई थी। चश्मदीद ने बताया था कि उस रात पार्टी में काफी तेज म्यूजिक था। इसके कारण दिशा सालियान की चीख-पुकार दब गई थी।

सिर्फ 194 दिन में बिहार के हर गाँव में फास्ट इंटरनेट, जुड़ेगा ऑप्टिकल फाइबर से, बनेगा देश का पहला ऐसा राज्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (सितंबर 21, 2020) को बिहार में 14258 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की सौगात दी। उन्‍होंने राज्य के 45945 गाँवों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ने वाली सेवाओं का उद्घाटन कर राज्‍य में ग्रामीण डिजिटल क्रांति का भी आरंभ किया।

भारत सरकार के दूरसंचार विभाग की इस परियोजना के तहत लगभग 1000 करोड़ रुपए की लागत से बिहार के सभी गाँवों में मार्च 2021 तक ऑप्टिकल फाइबर बिछा कर तेज गति इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। इस कार्य का क्रियान्वयन भारत की संस्था कॉमन सर्विस सेंटर के द्वारा किया जाएगा। 

अब तक बिहार के सभी 8386 ग्राम पंचायत भारत नेट परियोजना के द्वारा ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा जा चुका है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए अपने सम्बोधन में कहा था कि अगले 1000 दिनों में देश के सभी छः लाख गाँवों को ऑप्टिकल फाइबर इंटरनेट से जोड़ा जाएगा।

उस संबोधन की शुरुआत आज उन्होंने बिहार से की है और राज्य में इस कार्य को पूरा करने के लिए 31 मार्च, 2021 तक लक्ष्य भी रखा है। 

प्रधानमंत्री ने इस परियोजना को बिहार के डिजिटल भविष्य का शुभारंभ बताया। उन्होंने कहा कि इंटरनेट की अच्छी उपलब्धता से गाँव और शहर की दूरियाँ मिटेंगी और लोगों को कई सुविधाओं के लिए शहर नहीं आना पड़ेगा। उन्होंने बिहार के लोगों को इस बात की भी बधाई दी कि इस परियोजना के पूरा होने पर सभी गाँवों को ऑप्टिकल फाइबर इंटरनेट से जोड़ने वाला बिहार देश का पहला राज्य बन जाएगा।

गाँवों में इंटरनेट पहुँचने से सरकारी खर्च पर पाँच चिन्हित सरकारी संस्थाओं जैसे कि विद्यालय, आँगनवाड़ी केंद्र, आशा, जीविका दीदी आदि को एक वर्ष तक मुफ्त इंटरनेट भी उपलब्ध करवाया जाएगा। जो घर अपने यहाँ निजी इंटरनेट की लाइन लेना चाहेंगे, वो भी कम मासिक शुल्क पर इंटरनेट की सुविधा अपने घरों में लगवा सकेंगे।  

पीएम मोदी द्वारा परियोजना के शुभारंभ के दौरान अधिकारियों के साथ केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद

इसके साथ ही कॉमन सर्विस सेण्टर के द्वारा गाँवों में टेली-मेडिसिन के द्वारा जनता को बड़े अस्पतालों के अच्छे डॉक्टरों की सलाह भी मिल सकेगी। छात्र तेज गति इंटरनेट उपलब्ध होने से डिजिटल शिक्षा की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। किसानों को देश के किसी भी भाग में अपनी उपज बेचने और इंटरनेट के द्वारा अपनी फसल के बारे में विशेषज्ञों की राय भी मिल पाएगी। 

इस कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में बिहार का विकास तेज हुआ है। हर क्षेत्र में जितने विकास की परियोजनाएँ बिहार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में मिली हैं, उतनी पहले कभी नहीं मिली है। 

लगभग 1000 करोड़ रुपए की लागत वाली ऑप्टिक्ल फाइबर की इस परियोजना को बहुत की कम समय में अपनी मंजूरी देने के लिए उन्होंने प्रधानमन्त्री को सभी बिहारवासियों की तरफ से धन्यवाद दिया।

जिसे आज ताजमहल कहते हैं, वो शिव मंदिर ‘तेजो महालय’ है: शंकराचार्य ने CM योगी से की ‘दूषित प्रचार’ रोकने की अपील

ओडिशा के पुरी में स्थित गोवर्धन मठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने ताजमहल को लेकर बड़ा दावा किया है। शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश के आगरा में यमुना नदी के किनारे स्थित मुगलिया इमारत के बारे में कहा कि ये प्राचीन काल में भगवान शिव का मंदिर था और इसका नाम ‘तेजो महालय’ था। उन्होंने कहा, “जिसे आजकल ताजमहल कहते हैं, उसका पुराना नाम तेजो महालय है। वहाँ शिवजी प्रतिष्ठित थे।

शंकराचार्य ने कहा कि जयपुर राजपरिवार के पास ताजमहल का पूरा इतिहास सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि विदेशी यात्रियों ने भी अपनी यात्रा को लेकर जो संस्मरण लिखे हैं, उनसे ताजमहल का वास्तविक नाम ‘तेजो महालय’ ही सिद्ध होता है। उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना ‘सुपरिचित’ बताते हुए कहा कि उन्हें इस तथ्य पर ध्यान देना चाहिए और इतिहास के नाम पर जो दूषित प्रचार किया गया है, उस पर पानी फेरने के अविलम्ब प्रयास करें।

शंकराचार्य का ये बयान गोवर्धन मठ के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक वीडियो के जरिए जारी किया गया है और योगी आदित्यनाथ को टैग भी किया गया है। शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती के बयान के बाद सोशल मीडिया में ताजमहल को लेकर चर्चा फिर से शुरू हो गई। लोगों का मानना है कि ताजमहल को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया है और भारत के सैकड़ों हिन्दू मंदिर कलाकारी और भव्यता में इससे खासे बढ़ कर हैं।

इससे पहले श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने आगरा को अग्रवन बताते हुए कहा था कि प्राचीन काल में जो स्थल हिन्दू नाम से जाने जाते थे, उनका नाम उन्हें वापस दिया जाना चाहिए। राजस्थान सरकार द्वारा लाल पत्थर के खनन पर रोक लगाए जाने के फैसले को लेकर उन्होंने कहा कि जल्द ही बातचीत के माध्यम से इसे सुलझाया जाएगा।

हाल ही में यूपी सीएम ने घोषणा की थी कि आगरा में निर्माणधीन म्यूज़ियम छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम स्थापित किया जाएगा। ताजमहल के पूर्व में बन रहे इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 150 करोड़ रुपए है। इससे पहले इसका नाम ‘मुग़ल म्यूजियम’ रखा गया था, जिसे सीएम योगी ने बदल दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे नायक हैं, मुग़ल किसी भी स्थिति में हमारे नायक नहीं हो सकते हैं।

बिहार को ₹14000+ करोड़ की सौगात: 9 राजमार्ग, PM पैकेज के तहत गंगा नदी पर बनाए जाएँगे 17 पुल

बिहार को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कई बड़े ऐलान किए। प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से ‘हर गाँव में ऑप्टिकल फाइबर’ योजना, कई पुल और 9 राजमार्गों का शिलान्यास किया। इसके अलावा उन्होंने संबोधन के दौरान कई अहम बातें भी कही।

PM मोदी ने कहा कि कनेक्टिविटी एक ऐसा विषय है, जिसे टुकड़ों में सोचने की बजाय एक साथ सोचना होगा। टुकड़ों में सोचने की प्रवृत्ति से देश का नुकसान होता है। हमारा देश अपने गाँवों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़ा कदम उठा रहा है और इसकी शुरुआत बिहार से हो रही है। 

प्रधानमंत्री मोदी ने परियोजनाओं के संबंध में घोषणा करते हुए कहा कि जिन 9 राजमार्ग प्रोजेक्ट का शिलान्यास हुआ है, उसके ज़रिए 350 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण होगा। इस पूरी योजना में लगभग 14258 करोड़ रुपए का खर्च आएगा और इन रास्तों के निर्माण में बिहार के विकास में तेज़ी आएगी।

इन राजमार्गों के निर्माण से आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोतरी होगी। आस-पास के राज्यों (उत्तर प्रदेश और झारखंड) से आवागमन की सुविधा बेहतर हो जाएगी। उनका कहना था कि कुछ साल पहले तक इस बात की कल्पना करना तक मुश्किल था कि गाँवों में इंटरनेट का उपयोग करने वालों की संख्या ज़्यादा हो जाएगी। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के 45945 गाँवों को ऑप्टिकल फाइबर इंटरनेट सेवाओं से जोड़ने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि गाँव के किसान, युवा और महिलाएँ इंटरनेट का इस्तेमाल करेंगे क्योंकि इंटरनेट का उपयोग बढ़ने के साथ यह भी ज़रूरी है कि अच्छी इंटरनेट स्पीड भी मिले।

पीएम मोदी ने बताया कि यह सरकार के प्रयासों का नतीजा है कि देश की लगभग 1.5 लाख पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर सेवा पहले ही पहुँच चुकी है। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले लोग इसके इस्तेमाल पर सवाल उठाते थे लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। 

प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक़ पिछले 6 साल के दौरान देश भर में लगभग 3 लाख से ज़्यादा कॉमन सर्विस सेंटर भी ऑनलाइन किए गए हैं। Telemedicine के माध्यम से दूर-दराज के गाँवों में मौजूद वंचित वर्ग को भी सस्ता और प्रभावी इलाज उपलब्ध कराना संभव होगा और इससे सबसे ज्यादा लाभ किसानों का होगा।

उन्होंने कहा कि जिस रफ़्तार से देश के इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम हो रहा है, वह सराहनीय है। उनके अनुसार, बिहार में कनेक्टिविटी में बाधा का कारण बस एक ही है ‘नदियाँ’। इस कारण को मद्देनज़र रखते हुए राज्य में पुलों के निर्माण पर सबसे ज़्यादा ध्यान दिया गया है।

पीएम पैकेज के तहत गंगा नदी पर 17 पुल बनाए जाएँगे और आगामी 4-5 सालों में इन्फ्रास्ट्रक्चर पर 110 लाख करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी है। इसमें लगभग 19 लाख करोड़ रुपए राजमार्ग प्रोजेक्ट पर खर्च किए जाएँगे। 

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि सुधार बिल पर भी अपना नज़रिया रखा। उन्होंने इस बिल का विरोध करने वालों को भरोसा दिलाया कि मंडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य कभी ख़त्म नहीं किए जाएँगे। यह क़ानून देश के किसानों को नए अधिकार देगा, यह सुधार 21वीं सदी के लिए बहुत ज़रूरी है।

पीएम मोदी ने बताया कि हमारे देश में उपज बिक्री की व्यवस्था किसानों के हित में नहीं थी, उससे जुड़े क़ानून किसानों के अधिकारों को सीमित करते थे। किसानों की मजबूरी का फायदा उठाया जाता था, इसे हर हालात में रोकना ही था। 

इस बिल के माध्यम से एक किसान को आज़ादी मिलेगी कि वह अपनी फसल कहीं भी, किसी को भी और अपनी तय शर्तों के आधार पर बेच सकता है। अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बड़े गिरोह और व्यवसायी न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने देश के हर किसान को विश्वास दिलाया कि एमएसपी की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी। ठीक ऐसे ही सीज़न के दौरान सरकार खरीद का अभियान भी पहले की तरह ही चलता रहेगा।

‘गलत साबित हुई तो माफी माँग छोड़ दूँगी ट्विटर’: कंगना ने ट्रोल करने वालों को कहा पप्पू की चंपू सेना

कृषि विधेयक पर कंगना रनौत ने 20 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्वीट शेयर करते हुए एक पोस्ट किया। अपने पोस्ट में उन्होंने उन लोगों पर निशाना साधा जो कृषि बिल के फायदे जानने के बावजूद इस पर सवाल उठा रहे थे। अपनी इस प्रतिक्रिया में उन्होंने उन लोगों का जिक्र भी किया जिन्होंने सीएए के समय भी ऐसे ही बवाल मचाया था।

हालाँकि, उनकी इस हालिया टिप्पणी को सोशल मीडिया पर गलत तरह से पेश करके दावा किया जाने लगा कि उन्होंने ‘किसानों’ को ‘आतंकी’ कहा है। अब इन्हीं आरोपों का जवाब देते हुए कंगना ने अपने विरोधियों पर करारा पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि अगर उन पर लगे आरोप साबित हो गए तो वह ट्विटर छोड़ देंगीं।

कंगना ने अपना ट्वीट शेयर करते हुए लिखा, “जैसे श्री कृष्ण की नारायणी सेना थी, वैसे ही पप्पू की भी अपनी एक चंपू सेना है जो सिर्फ़ अफ़वाहों के दम पे लड़ना जानती है। यह है मेरा ओरिजिनल ट्वीट है। अगर कोई यह सिद्ध कर दे कि मैंने किसानों को आतंकी कहा है, तो मैं माफ़ी माँगकर हमेशा के लिए ट्विटर छोड़ दूँगी।”

बता दें, कंगना रनौत के जिस ट्वीट को गलत तरीके से पेश किया गया उसमें उन्होंने कहा था, “अगर कोई सो रहा हो उसे जगाया जा सकता है। जिसे ग़लतफ़हमी हो उसे समझाया जा सकता है। मगर जो सोने की एक्टिंग करे, ना समझने की एक्टिंग करे उसे आपके समझाने से क्या फ़र्क़ पड़ेगा? ये वही आतंकी हैं, CAA से एक भी इंसान की सिटीजनशिप नहीं गई मगर इन्होंने ख़ून की नदियाँ बहा दीं।”

अपने ट्वीट में उन्होंने बताया कि सीएए में एक भी भारतीय नागरिक ने नागरिकता नहीं खोई, मगर प्रोपगेंडाबाजों ने झूठी जानकारी फैलाकर हिंसा भड़का दी। अब इसी ट्वीट को तोड़-मरोड़ कर टाइम्स ऑफ इंडिया ने हेडलाइन बनाई और लिखा कि कंगना ने किसानों को ‘आतंकी’ कहा है, जबकि पूरा ट्वीट पढ़ने पर साफ पता चलता है कि अभिनेत्री का कथन उन लोगों के संदर्भ है, जिन्होंने दंगों के लिए लोगों को उकसाया।

‘कंगना रनौत ने किसानों को आतंकी कहा’: कितना सही है TOI का ये दावा

टाइम्स की खबर के बाद कई नेटिजन्स ने भी कंगना पर आरोप लगाया कि उन्होंने किसानों को आतंकी कहा। हैरानी की बात है कि भारत के नामी इंस्टीट्यूट में पढ़ने वालों ने भी इसे गलत समझा और तो और बुद्धिजीवियों ने इसे जम कर शेयर किया। किसी ने उन्हें बिन दिमाग की लड़की बताया और किसी ने उनका नाम ‘दंगाई’ रनौत कर दिया। पत्रकार विनोद कापड़ी ने भी इसे शर्मनाक करार दिया और पूछा कि लाखो किसान आतंकी हैं? क्या राज्यसभा में विरोध करने वाले सांसद आतंकी हैं? या मोदी मंत्रिमंडल में इस्तीफा देने वाली हरसिमरत बादल आतंकी हैं?

बता दें कि विपक्षी सांसदों के जोरदार हंगामे के बीच राज्‍यसभा ने रविवार (सितंबर 20, 2020) को कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सरलीकरण) विधेयक-2020, कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को ध्वनिमत से पास कर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि सुधार संबंधी विधेयकों को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया है। 

कॉलेज-किताबें सब झूठे, असल में जिहादियों की ‘वंडर वुमन’ बनना चाहती थी कोलकाता की तानिया परवीन

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना के मलयपुर गाँव में नूरनेहर खातून और अलामिन मोंडल के यहाँ जन्मी 22 वर्षीय तानिया परवीन का बचपन काफी मुश्किलों भरा था। News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, कठिनाइयों के बावजूद, उसकी माँ ने सुनिश्चित किया था कि वह उसे अच्छी शिक्षा दिलवाएगी। परवीन ने अपने छोटे भाई के साथ एक प्राइवेट स्कूल, लंदन मिशनरी सोसायटी में पढ़ाई की, जहाँ उसने परीक्षा में 90% अंक हासिल किए। 2019 में उसने कोलकाता के मौलाना आज़ाद कॉलेज से अरबी में स्नातक की उपाधि प्राप्त की।

हालाँकि, रिपोर्ट के अनुसार, 2017 की सांप्रदायिक हिंसा की घटना ने उसके दिमाग में हिंसक जिहाद का बीज बो दिया। 2 जुलाई 2017 को एक किशोर लड़के ने फेसबुक पर काबा और पैगंबर मुहम्मद की एक तस्वीर पोस्ट की। इससे अफरातफरी मच गई और एक मजहबी भीड़ उग्र हो गई। उग्र भीड़ ने हिंदू घरों पर हमला कर दिया। हिंदुओं के दर्जनों घरों और दुकानों को तोड़ दिया गया। एक व्यक्ति मारा गया और लगभग दो दर्जन घायल हो गए।

NIA के अनुसार 2018 में सवालों का ‘जवाब’ खोजने के लिए तानिया परवीन ने बांग्लादेशी इस्लामिक उपदेशक और जमात-ए-इसलामी पार्टी के उप प्रमुख दिलवर हुसैन सईदी का रुख किया। सईदी के मजहबी प्रचार से परवीन को उसके चचेरे भाई हबीबुल्लाह ने परिचित कराया था, जो एक स्थानीय मस्जिद चलाता था। बता दें कि सईदी को बांग्लादेश के स्वतंत्र संप्रभु राष्ट्र के विचार का समर्थन करने वाले पूर्वी पाकिस्तान के लोगों पर किए गए युद्ध अपराधों के संबंध में अभियुक्त और दोषी ठहराया गया है।

जमात-ए-इस्लामी के शीर्ष नेता हुसैन सईदी ने 1971 के युद्ध के दौरान हिंदुओं और बांग्लादेशी समर्थकों के नरसंहार की अगुवाई की थी। 2013 में इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने उस पर सामूहिक हत्या, यातना, जबरदस्ती हिंदुओं को इस्लाम में शामिल करने और महिलाओं के साथ क्रूर बलात्कार सहित कुल 20 मामलों का आरोप लगाया। सईदी के खिलाफ 20 आरोपों में से दो के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी। ये दो अपराध थे- इब्राहिम कुट्टी और बिसबाली की हत्या और 1971 में फीरोजाबाद में हिंदू घरों में आग लगाना।

सईदी के संदेशों से प्रेरित होकर, तानिया परवीन विभिन्न इस्लामिक-झुकाव वाले व्हाट्सएप समूहों में शामिल हो गईं, जिनका नाम वॉयस ऑफ इस्लाम, इस्लामिक उम्मा और ह्यूमन ब्रदरहुड था। News18 की रिपोर्ट के अनुसार, इन सभी व्हाट्सएप समूहों ने एक ही संदेश के बारे में बात की कि भारत उन देशों का हिस्सा है जो समुदाय विशेष के खिलाफ नरसंहार करने जा रहे हैं और इसका मुकाबला करने का एकमात्र तरीका सशस्त्र जिहाद है।

रिपोर्ट के अनुसार, परवीन के व्हाट्सएप चैट के विश्लेषण से पता चला था कि उसे जिहाद में रोमांच मिला। वह भारतीय जिहाद का ‘वंडर वुमन’ बनना चाहती थी। बाद में वह कश्मीर के अल्ताफ अहमद राथर के साथ रिलेशनशिप में आई। राथर के व्हाट्सएप ग्रुप ने उसे पाकिस्तान में काम कर रहे लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी बिलाल दुर्रानी के साथ संपर्क करवाया। इसके बाद उसने परवीन को एक व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल होने के लिए एक वर्चुअल पाकिस्तानी नंबर दिया, क्योंकि भारतीय नंबर सर्विलांस के डर से बैन हैं।

2019 के अंत में परवीन ‘अबू जुंदाल’ नामक फर्जी नाम से लश्कर से जुड़े पाँच व्हाट्सएप ग्रुपों का संचालन करने लगी थी। जाँचकर्ताओं का दावा है कि वह पाकिस्तान में कई लश्कर कमांडरों के साथ नियमित संपर्क में थी। इन नए संपर्कों में से एक के माध्यम से वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के एक अधिकारी के संपर्क में आई।

तानिया परवीन लश्कर के पाकिस्तान स्थित कई कमांडरों के संपर्क में थी। जल्द ही, वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी, आईएसआई के अधिकारी ‘राणा’ के संपर्क में आ गई। ‘राणा’ ने स्थानीय जिहादियों की भर्ती के लिए उसे पैसे की पेशकश की। हालाँकि, परवीन को यहाँ बहुत कम सफलता मिली। उसने अपने दो महिला मित्रों को अपने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा। पहली दोस्त घुम्मन टाइगर्स ने जुड़ने के तुरंत बाद ही ग्रुप को छोड़ दिया, जबकि उसके कॉलेज के परिचितों ने भी जिहादी गतिविधियों में कम रुचि दिखाई। जिहादी व्हाट्सएप ग्रुप में केवल उसकी एक दोस्त सक्रिय थी।

इधर, ‘राणा’ इस बात से नाखुश था कि परवीन अधिक लोगों की भर्ती नहीं कर पा रही थी। इसलिए उसने उसे प्रिया शर्मा के नाम से फर्जी फेसबुक आईडी दिया, ताकि वो इसके जरिए भारतीय वायु सेना और भारतीय सेना के जवानों के साथ दोस्ती कर सके। एक जूनियर अधिकारी ने उससे संपर्क भी किया, लेकिन जब अधिकारी ने उससे वीडियो चैट के लिए कहा तो वह घबरा गई।

राणा ने उसे वीडियो चैट पर बात करने के लिए कहा, लेकिन तानिया परवीन ने उसे बताया कि कैसे इस्लाम ने उसे घूँघट हटाने से मना किया। इस बात पर दोनों के बीच काफी बहस हुई और फिर परवीन ने ‘राणा’ से सभी संपर्क तोड़ दिए। चार्जशीट के अनुसार, मार्च, 2019 में, जब एनआईए ने ऑनलाइन जिहादी गतिविधि से जुड़े एक दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया परवीन कम से कम छ: फर्जी नामों- ‘मुस्तफा’, ‘हमाज ताहिर’, ‘मुताहिजाब’, ‘अबरार फहद’, ‘इबनू अधम’ और ‘अबू थूराब’ से अकाउंट चला रही थी। 

गौरतलब है कि गुरुवार (सितंबर 10, 2020) को NIA ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक विशेष एनआईए अदालत में गुरुवार को आरोप-पत्र दायर किया था। आरोप पत्र में कहा गया था कि वह सोशल मीडिया पर 70 जिहादी समूहों की सदस्य बन गई थी, जिसने आतंकवादी विचारधारा को ‘इस्लामिक जिहाद’ की आड़ में प्रचारित किया था। परवीन पर सख्त गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

दिल्ली में एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा था, “जाँच के दौरान यह पता चला कि परवीन को लश्कर के पाकिस्तान स्थित कैडर द्वारा साइबर स्पेस में कट्टरपंथी बना दिया गया था। वह धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर लगभग 70 जिहादी समूहों का हिस्सा बन गई, जिसने मजहबी युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और भर्ती करने के मकसद से इस्लामिक जिहाद की आड़ में आतंकवादी विचारधारा का प्रचार किया।” अधिकारी ने कहा था कि परवीन विभिन्न ‘फिलिस्तीनी और सीरियाई जिहादी’ सोशल मीडिया समूहों में भी सक्रिय थी।

जानकारी के मुताबिक तानिया मूल रूप से बांग्लादेशी नागरिक है। 10 साल पहले बांग्लादेश से घुसपैठ कर वह भारत आई थी। वह लश्कर के लिए युवाओं की भर्तियाँ करती थी। सरकारी सूचनाओं को पाने के लिए वो हनी-ट्रैपिंग का सहारा लेती थी।

तानिया के पास से कई पाकिस्तानी सिम कार्ड्स मिले थे। उसके पास से जब्त की गई डायरी और दस्तावेजों से पता चला था कि उसने काफ़ी संवेदनशील सूचनाएँ जुटा ली थी। वह मुंबई के 26/11 हमलों के मास्टरमाइंड और आतंकी सरगना हाफ़िज़ सईद से भी 2 बार बातचीत कर चुकी है। वो पिछले 2 साल से लश्कर के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही थी और उस क्षेत्र में कई बार भड़काऊ भाषण भी दे चुकी है।

उसका उद्देश्य युवाओं, ख़ासकर छात्र-छात्राओं को कट्टरपंथी बना कर उन्हें आतंकी संगठनों से जोड़ना था। तानिया ने मुर्शिदाबाद में कई आतंकी शिविर भी बना रखे थे, जहाँ वो अपने लोगों को भड़काऊ भाषण देने के लिए प्रशिक्षण देती थी। वहाँ वो लोगों को ‘जिहाद’ सिखाती थी और आतंकी गतिविधियों के संचालन के गुर भी सिखाती थी। अत्याधुनिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग लेने के लिए वह पाकिस्तान जाने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही पकड़ी गई।

सपा-बसपा ने 10 साल में दी जितनी नौकरी, उससे ज्यादा योगी सरकार ने 3 साल में दिए

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग में सबसे ज़्यादा नौकरियाँ दी हैं। योगी सरकार ने अपने शासनकाल में लगभग 3.6 लाख रोज़गार दिए हैं। 18 सितंबर को हुई एक बैठक में योगी आदित्यनाथ ने इस संबंध में एक अहम घोषणा की। उन्होंने राज्य के सभी विभागों को आदेश दिया कि जितने भी पद खाली पड़े हैं उन पर 3 महीने के भीतर प्रक्रिया शुरू की जाए और आगामी 6 महीने के भीतर प्रक्रिया पूरी की जाए। 

मार्च 2017 यानी जब से योगी सरकार सत्ता में आई है, तब से प्रदेश के पुलिस विभाग में सबसे ज़्यादा भर्तियाँ हुई हैं। इन भर्तियों की संख्या 1,37,253 है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी किए गए आँकड़ों के अनुसार बेसिक शिक्षा विभाग में 54,706, सेकेंड्री शिक्षा विभाग में 14,000 और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में लगभग 28,622 भर्तियाँ हुई हैं। 

इसके अलावा लोक सेवा आयोग में 26,103, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (SSC) में 16,708, स्वास्थ्य शिक्षा विभाग के तहत 1112, नगर विकास विभाग के तहत 700, वित्त विभाग के तहत 614, व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास विभाग के तहत 365, ऊर्जा विभाग के तहत 6446 पदों पर भर्तियाँ हुई हैं। यानी योगी सरकार में सभी भर्तियों की कुल संख्या 3,00,526 है। 

सरकार द्वारा जारी किए गए अन्य आँकड़ों की मानें तो कई विभागों में भर्ती प्रक्रिया जारी भी है। बेसिक शिक्षा विभाग में 69,000 पदों पर, पुलिस विभाग में 16,629 पदों पर और ऊर्जा विभाग में 853 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। यानी कुल मिला कर 86,482 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। 

18 सितंबर को हुई बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया था कि आगामी 6 महीनों में सभी खाली पद भरे जाएँ। इसके अलावा संबंधित विभागों को 3 महीने के भीतर चयन प्रक्रिया शुरू करने का भी आदेश दिया गया है। साथ ही मुख्यमंत्री ने उन विभागों को 1 हफ्ते के भीतर जानकारी देने के लिए कहा है, जिन विभागों में पद खाली हैं। 

हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के अनुसार योगी सरकार ने जितनी नौकरियाँ दी है, वह पिछली सपा-बसपा सरकारों में हुई भर्तियों से कहीं अधिक है। साल 2012 से लेकर 2017 के बीच अपने कार्यकाल में समाजवादी पार्टी सिर्फ 2.05 लाख रोज़गार ही दे पाई थी। वहीं बहुजन समाज पार्टी ने 2007 से 2012 के बीच सिर्फ 91 हज़ार नौकरियाँ दी थी।

सुदर्शन ‘UPSC जिहाद’ मामला: ऑपइंडिया, इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट और UpWord ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की ‘हस्तक्षेप याचिका’

‘सुदर्शन न्यूज़’ के शो ‘यूपीएससी जिहाद’ के प्रसारण का मसला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। चैनल ने इसके प्रसारण पर लगी रोक हटाने की माँग की है। अब इस मामले में ऑपइंडिया, इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट और अपवर्ड ने ‘इंटरवेंशन एप्लीकेशन’ (हस्तक्षेप याचिका) दायर की है। ‘फ़िरोज़ इक़बाल खान बनाम यूनियन ऑफ इंडिया’ मामले में अनुमति-योग्य फ्री स्पीच को लेकर रिट पेटिशन दायर की गई है।

‘हस्तक्षेप याचिका’ में कहा गया है, “सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचार के लिए जो मुद्दे आए हैं, जाहिर है कि उसके परिणामस्वरूप फ्री स्पीच की पैरवी करने वालों पर प्रकट प्रभाव पड़ेगा। साथ ही ऐसी संस्थाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा, जो जनता के लिए सार्वजनिक कंटेंट्स का प्रसारण करते हैं। इसलिए याचिकाकर्ता की ओर से ये निवेदन है कि इन्हें भी इस मामले में एक पक्ष बनाया जाए। इस प्रक्रिया में एक पक्ष बना कर भाग लेने की अनुमति दी जाए।”

रिट याचिका में अब तक दिए गए आदेशों की बात करते हुए बड़े ही विस्तृत रूप से कई मुद्दों को रखा गया है। अब तक उठाए गए मुद्दों, आए फैसलों और राहत प्रदान करने वाले निर्णयों को ध्यान में रखते हुए इसमें बातें रखी गई हैं। साथ ही इसमें न्यायपालिका के क्षेत्राधिकार की बात करते हुए सवाल उठाए गए हैं कि क्या प्रशासन की जाँच के दौरान ही कंटेंट्स को प्रसारण के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है या नहीं।

साथ ही एक और महत्वपूर्ण मुद्दा ये उठाया गया है कि आगे स्थानीय प्रशासन या फिर सम्बद्ध अथॉरिटी को इस कंटेंट में कुछ गलत नहीं मिलता है और वो प्रसारण की अनुमति दे देते हैं, तो क्या कोर्ट स्वयं ही प्रशासन का किरदार निभाते हुए इसे प्रतिबंधित कर सकता है? साथ ही इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि कंटेंट्स को देखने-सुनने का अधिकार जनता को है, क्या इस पर विचार किए बिना ही निर्णय लिया जा सकता है?

साथ ही न्यायिक रूप से ऐसे कंटेंट्स को लेकर भी बात की गई है, जिन्हें ‘हेट स्पीच’ के दायरे में रखा जाए। साथ ही पूछा गया है कि हाल की वस्तुस्थिति को विस्तृत रूप से देखे बिना ‘हेट स्पीच’ के अंदर आने वाली सामग्रियों को लेकर क़ानून बनाया जा सकता है या नहीं। हाल के दिनों में मीडिया के एक बड़े वर्ग द्वारा ‘फ्री स्पीच’ के माध्यम से काफी बार बहुत कुछ किया गया है। साथ ही ऑपइंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट भी पेश करने की अनुमति माँगी है।

इस रिपोर्ट का टाइटल है- ‘A Study on Contemporary Standards in Religious Reporting by Mass Media’, जिसमें 100 ऐसी घटनाओं का जिक्र है, जब मुख्यधारा के मीडिया संस्थानों ने विभिन्न घटनाओं को लेकर गलत रिपोर्टिंग की जो उनके पहुँच को देखते हुए पाठकों के मन में संशय पैदा करता है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे हिन्दुओं के खिलाफ नैरेटिव बनाया जाता है।

साथ ही कैसे मीडिया के एक बड़े वर्ग द्वारा एक मजहब विशेष के दोषियों को बचाने के लिए उनके अपराध को कम कर के दिखाया जाता है या फिर ह्वाइटवॉश कर दिया जाता है। इसलिए, नैतिकता का मापदंड सिर्फ एक किसी घटना को लेकर लागू नहीं की जा सकती, सेलेक्टिव रूप से कार्रवाई नहीं हो सकती। इस रिपोर्ट में हिन्दूफोबिया की कई घटनाओं को उद्धृत किया गया है।

फैक्ट्स के साथ छेड़छाड़ करना, विवरणों को सेलेक्टिव रूप से साझा करना, चित्रों के जरिए नैरेटिव बनाना, फेक न्यूज़ और ओपिनियन बनाना- इन सबके जरिए ये बताने की कोशिश की गई है कि कैसे मुख्यधारा की मीडिया ने ही एक ट्रेंड सेट किया है, जो अब तक चला आ रहा है। इससे कोर्ट को इस मामले में निर्णय लेने में आसानी होगी। दिल्ली दंगे, मुस्लिमों से जबरन ‘जय श्री राम’ कहलवाना और ‘सैफ्रॉन टेरर’ से जुड़े ऐसे लेखों को उद्धृत किया गया है।

रविवार (सितंबर 20, 2020) को ही सुप्रीम कोर्ट में दिए एक हलफनामे में सुदर्शन न्यूज ने कहा था कि चैनल अपने “बिंदास बोल” शो के “यूपीएससी जिहाद” कार्यक्रम के शेष एपिसोड प्रसारित करते हुए कानूनों का कड़ाई से पालन करेगा। चैनल की तरफ से यह भी कहा गया था कि वह सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा निर्धारित प्रोग्राम कोड का पालन करेगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चैनल की तरफ से हलफनामा प्रस्तुत किया गया था।

प्रेगनेंसी टेस्ट की तरह कोरोना जाँच: भारत का ₹500 वाला ‘फेलूदा’ 30 मिनट में बताएगा संक्रमण है या नहीं

दिल्ली की टाटा CSIR लैब ने भारत की सबसे सस्ती कोरोना टेस्ट किट विकसित की है। इसका नाम ‘फेलूदा’ रखा गया है। इससे मात्र 30 मिनट के भीतर संक्रमण का पता चल सकेगा। 

CSIR और टाटा ग्रुप ने यह किट डॉ. देबोज्योति चक्रवर्ती और सौविक मैत्री के नेतृत्व में तैयार की है। इस टेस्ट की कीमत मात्र 500 रुपए बताई गई है। इतने कम दाम वाले इस टेस्ट किट के कर्मिशयल इस्तेमाल की अनुमति ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने दे दी है।

कंपनी ने कहा कि यह जाँच सटीक परिणाम देने में पारंपरिक RT-PCR टेस्ट के बराबर है। इसके अलावा यह सस्ता और कम समय में परिणाम देता है। इस प्रणाली का प्रयोग भविष्य में अन्य महामारियों के परीक्षण में भी किया जा सकेगा।

कंपनी ने बताया कि TATA CRISPR (Clustered Regularly Interspaced Short Palindromic Repeats ) टेस्ट CAS9 प्रोटीन का इस्तेमाल करने वाला विश्व का पहला ऐसा टेस्ट है, जो सफलतापूर्वक कोरोना महामारी फैलाने वाले वायरस की पहचान कर लेता है। 

बता दें, इस किट के बारे में जानकारी CSIR के डीजी एस मांडे ने रविवार को दी। उन्होंने बताया कि दिल्ली स्थित CSIR लैब में CRISPR-Cas इम्युनिटी पर शोध किया जा रहा है। मांडे ने बताया कि रिसर्चर्स की टीम इस खास क्षेत्र में पहले से शोध कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि CSIR लैब ने ‘फेलूदा’ नाम से पेपर आधारित टेस्टिंग किट विकसित किया है। उन्हें इसके लिए डीजीसीए से औपचारिक स्वीकृति भी मिल चुकी है। मांडे ने बताया कि यह RT-PCR से काफी अलग है और सस्ता भी है।

उनके अलावा स्वास्थ्य मंत्रालय के दावे में इस किट के लिए कहा गया है कि टाटा समूह ने CSIR-IGIB और ICMR के साथ मिलकर ‘मेड इन इंडिया’ उत्पाद विकसित किया है, जो सुरक्षित, विश्वसनीय, सस्ती और सुलभ है।

टाटा मेडिकल एंड डायग्नॉस्टिक लिमिटिड के सीईओ गिरीश कृष्णमूर्ति, ने इस संबंध में कहा, “COVID-19 के लिए Tata CRISPR टेस्ट के लिए स्वीकृति वैश्विक महामारी से लड़ने में देश के प्रयासों को बढ़ावा देगी। Tata CRISPR टेस्ट का व्यावसायीकरण देश में जबरदस्त R&D प्रतिभा को दर्शाता है, जो वैश्विक स्वास्थ्य सेवा और वैज्ञानिक अनुसंधान जगत में भारत के योगदान को बदलने में सहयोग कर सकता है।”

टेस्ट का नाम फेलूदा कहाँ से पड़ा है?

‘फेलूदा’ नाम मशहूर लेखक और फिल्‍म डायरेक्‍टर सत्‍यजीत रे के काल्‍पनिक बंगाली जासूसी उपन्‍यास के एक कैरेक्‍टर फेलू ‘दा’ से प्रेरित है। मगर, तकनीकी रूप से बात करें तो फेलूदा FNCAS9 Editor Linked Uniform Detection Assay का शॉर्टफॉर्म है। यह स्वदेशी सीआरआईएसपीआर जीन-एडिटिंग टेक्नोलॉजी पर आधारित है। यह कोरोनावायरस SARS-CoV2 के जेनेटिक मटेरियल को पहचानता है और उसे ही टारगेट करता है।

कोरोना के पारंपरिक टेस्ट RT-PCR और फेलूदा में अंतर

वैसे तो फेलूदा आरटी-पीसीआर जितना ही सटीक है। मगर आरटी-पीसीआर टेस्ट को ही कोविड-19 के डायग्नोसिस में गोल्ड स्टैंडर्ड समझा जा रहा है। इनमें अंतर यह है कि फेलूदा के नतीजे जल्दी आते हैं। इसमें इस्तेमाल होने वाला डिवाइस सस्ता भी है। CSIR की मानें तो फेलूदा टेस्ट नोवल कोरोनावायरस की पहचान करने में 96% सेंसिटिव और 98% स्पेसिफिक रहा है।

फेलूदा टेस्ट प्रेग्नेंसी स्ट्रिप टेस्ट की तरह है यानी यदि संक्रमण होगा तो स्ट्रिप का कलर बदल जाएगा। इसका इस्तेमाल पैथ लैब में भी किया जा सकता है। डॉ. देबोज्योति चक्रवर्ती के मुताबिक Cas9 प्रोटीन को बारकोड किया गया है ताकि वह मरीज के जेनेटिक मटेरियल में कोरोनावायरस सीक्वेंस का पता लगा सकें।

इसके बाद Cas9-SARS-CoV2 कॉम्प्लेक्स को पेपर स्ट्रिप पर रखा जाता है, जहाँ दो लाइन (एक कंट्रोल, एक टेस्ट) बताती है कि मरीज को कोरोना है या नहीं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इसे करवाने में मात्र 500 रुपए का खर्चा आता है। वहीं पारंपरिक परीक्षण में व्यक्ति को 1,500 से 2,000 खर्च करने पड़ते हैं।