Home Blog Page 4468

‘क्रिकेटरों की बीवियों को लेते देखा है ड्रग्स’- शर्लिन चोपड़ा का दावा, बॉलीवुड के बाद अब IPL पार्टी में ड्रग्स का खुलासा

बॉलीवुड और ड्रग्स के बीच संबंधों को लेकर जाँच अभी तक जारी है, रोज़ इस मामले में नए खुलासे हो रहे हैं। ड्रग्स केवल बॉलीवुड तक सीमित है इस पहलू पर अभी तक कोई खुलासा नहीं हुआ था लेकिन अब इस पहलू पर खुलासा हुआ है। मॉडल और अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि ड्रग्स सिर्फ बॉलीवुड तक ही सीमित नहीं है। क्रिकेट की दुनिया में भी इसका बराबर चलन है, उन्होंने आईपीएल के दौरान कई खिलाड़ियों की पत्नियों को ड्रग्स का सेवन करते हुए देखा है। 

बिग बॉस की पूर्व कंटेस्टेंट ने घटना का ज़िक्र किया जो उनके लिए हैरान करने वाली थी। उन्होंने कहा, “मैं एक बार कोलकाता नाईट राइडर्स का मैच देखने के लिए कोलकाता गई थी। मैच ख़त्म होने के बाद एक पार्टी का आयोजन किया गया था जिसमें मुझे भी बुलाया गया था। इस पार्टी में कई दिग्गज खिलाड़ी और उनकी पत्नियाँ भी शामिल हुई थीं। मेरे लिए वह पार्टी शानदार थी, मैंने उस पार्टी में खूब मज़े किए थे और खूब डांस किया जिसकी वजह से मैं बहुत ज़्यादा थक गई थी।” 

शर्लिन ने आगे कहा, “मैं वाशरूम गई और वहाँ मैंने जो नज़ारा देखा वह मेरे लिए हैरान कर देने वाला था। वहाँ कई खिलाड़ियों और अभिनेताओं की पत्नियाँ कोकीन का सेवन (स्नोर्टिंग) कर रही थीं। अचानक मुझे देख कर वह सभी मुस्कराई और बदले में मैंने मुस्करा कर जवाब दिया। एक बार के लिए मुझे ऐसा लगा जैसे मैं किसी गलत जगह आ गई हूँ और मैं तुरंत बाहर आ गई। एक तरफ आईपीएल की पार्टी जारी थी तो वहीं दूसरी तरफ ड्रग्स की पार्टी भी हो रही थी।” 

शर्लिन का कहना था, “अगर वह जेंट्स वाशरूम में भी गई होती तो वहाँ भी कुछ ऐसा ही नज़ारा होता। हालाँकि, शर्लिन ने अपनी पूरी बात में किसी खिलाड़ी का नाम नहीं लिया पर उनका कहना था कि वह एनसीबी की मदद करना चाहती थीं। उन्हें इस बात की ख़ुशी होगी अगर एनसीबी इस मुद्दे पर उनसे पूछताछ के लिए समन भेजती है।” उन्होंने एनसीबी की कार्रवाई को बढ़ावा देते हुए कहा, “जिस तरह से एनसीबी बॉलीवुड में फैले ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा करने के लिए जाँच कर रही है वह सराहनीय है।”   

इसके पहले भी शर्लिन चोपड़ा ने बॉलीवुड में ड्रग्स के इस्तेमाल को लेकर खुलासा किया था। शर्लिन चोपड़ा ने अपने इन्स्टाग्राम पर योग करते हुए एक वीडियो साझा किया था। वीडियो के साथ (कैप्शन में) उन्होंने लिखा, “मैं चेन स्मोकर थी लेकिन साल 2017 में मैंने स्मोकिंग (धुम्रपान) छोड़ दी। ड्रग्स से मैंने हमेशा दूरी बनाई। बॉलीवुड इंडस्ट्री वाले पार्टी में बुला कर ट्रे पर ड्रग्स ऑफर करते हैं मगर लेने का नहीं।” इसके अलावा शर्लिन अपने वीडियो में कहती हैं कि लोग अक्सर उनकी फिटनेस का सीक्रेट पूछते हैं तो सीक्रेट है न्यूट्रीशन, अनुशासन और योगा। योगा से होगा, अवश्य होगा।  

शर्लिन चोपड़ा द्वारा किए गए इस दावे से कई तरह के सवाल खड़े होते हैं। पहले यह सवाल बॉलीवुड तक सीमित थे लेकिन अब यह क्रिकेट की दुनिया पर भी खड़े किए जाएँगे। सबसे पहले एनसीबी इन दावों की पुष्टि करेगी और अगर इनमें सच्चाई होगी तो क्रिकेट और ड्रग्स का रिश्ता भी सामने आएगा। अभी तक ड्रग्स का सेवन करने के मामले में सिर्फ बॉलीवुड से जुड़े लोगों का नाम सामने आ रहा था, यह पहला ऐसा खुलासा है जिसमें किसी और बड़े क्षेत्र के लोगों के बारे में इतना बड़ा दावा किया गया है। 

गौर करने लायक बात यह है कि बॉलीवुड इंडस्ट्री में सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु मामले के बाद से ड्रग्स का एंगल छाया हुआ है। इस मामले को लेकर बॉलीवुड दो हिस्सों में बँट चुका है। धीरे-धीरे काफी बड़े नाम भी अब सामने आ रहे हैं और इसकी गूँज संसद तक में सुनाई दे रही है। ड्रग्स के साथ बॉलीवुड के कुछ बड़े नामों की बात करें तो टैलेंट मैनेजमेंट कंपनी KWAN की इंप्लॉई जया साहा की चैट से दीपिका पादुकोण के अलावा श्रद्धा कपूर, सोनम कपूर, जैकलीन फर्नांडीज, दीया मिर्जा, नम्रता शिरोडकर और फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ के प्रोड्यूसर मधु मांटेना का नाम सामने आया है।

दिल्ली दंगा: UAPA के तहत JNU के पूर्व छात्रनेता उमर खालिद को 22 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया

दिल्ली की एक अदालत ने बृहस्पतिवार (सितम्बर 24, 2020) को जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को उत्तरी पूर्वी दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी हिंसा से संबंधित एक मामले में 22 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा है। पुलिस हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद उमर खालिद को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ADJ) अमिताभ रावत के सामने पेश किया गया। खालिद को आतंकवाद रोधी कानून, गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत 13 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था।

FIR में, पुलिस ने दावा किया है कि सांप्रदायिक हिंसा एक ‘पूर्व-निर्धारित साजिश’ थी जो कथित तौर पर उमर खालिद और दो अन्य लोगों द्वारा रची गई थी। उन पर देशद्रोह, हत्या, हत्या के प्रयास, धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और दंगा करने के अपराध के लिए भी मामला दर्ज किया गया है।

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि उमर खालिद ने कथित रूप से दो अलग-अलग स्थानों पर भड़काऊ भाषण दिए थे और मजहबी भीड़ से अपील की थी कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की यात्रा के दौरान सड़कों पर उतरें और सड़कों को अवरुद्ध करें, साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार करें कि कैसे भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किया जा रहा है।

एफआईआर में दावा किया गया है कि दंगों की साजिश में कई घरों में आग्नेयास्त्र, पेट्रोल बम, एसिड की बोतलें और पत्थर जमा किए गए।

पुलिस ने आरोप लगाया कि सह-अभियुक्त दानिश को कथित रूप से दंगों में भाग लेने के लिए दो अलग-अलग जगहों से लोगों को इकट्ठा करने की जिम्मेदारी दी गई थी। एफआईआर में कहा गया है कि लोगों के बीच तनाव पैदा करने के लिए 23 फरवरी को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे सड़कों को अवरुद्ध करने के लिए महिलाओं और बच्चों को मोहरा बनाया गया था।

गौरतलब है कि नागरिकता कानून समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा के बाद 24 फरवरी को पूर्वोत्तर दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुई थीं, जिसमें कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 200 लोग घायल हो गए थे।

ड्रग्स और बॉलीवुड: बड़े सितारों की चुप्पी बहुत कुछ कहती है – अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti speaks on Silent Bollywood and drugs case

बॉलीवुड इस समय तरह-तरह के दौर से गुजर रहा है। पहले सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या या हत्या का मामला। फिर ड्रग्स एंगल का खुलासा। बाद में पैट्रियार्की-नेपोटिज्म पर बवाल और अब अनुराग कश्यप पर लगे यौन शोषण के इल्जाम।

इतनी सब उठा-पटक के बीच देखने वाली बात यह है कि बॉलीवुड के बड़े सितारे इन सब पर बिलकुल चुप हैं। लेकिन, दूसरी ओर बॉलीवुड के नशेड़ियों को सही साबित करने के लिए भगवान शिव पर एक टिप्पणी आई है और इसके जरिए ड्रग्स के सेवन को सही साबित करने का प्रयास हुआ है।

यह पहली बार नहीं है, जब बॉलीवुड में नशे की लत को उचित ठहराने के लिए इस प्रकार का महिमामंडन किया गया हो। शराबी फिल्म को ले लीजिए या ऐसी फिल्मों को देखिए, जिसमें कोई भी दुखी व्यक्ति दारू को अंतिम विकल्प मानता है। बाद में इन फिल्मों का असर असल जीवन में युवाओं पर पड़ता है और धीरे-धीरे वह इनसे प्रभावित होकर नशे के आदी हो जाते हैं।

पूरी वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

‘यदि मैं छत से लटकी मिली, तो याद रखें कि मैंने आत्महत्या नहीं की है’ – पायल घोष का डर इंस्टाग्राम पर

पायल घोष ने एक बार फिर अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम एकाउंट के जरिए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इनडायरेक्ट तरीके से सुशांत सिंह राजपूत मामले को खुद से जोड़ते हुए अपनी हत्या की आशंका जताई है। साथ ही उन्होंने एक न्यूज़ पोर्टल और अनुराग के कनेक्शन को लेकर भी खुलासा किया है।

पायल घोष ने अपनी तस्वीर को पोस्ट करते हुए लिखा

“मिस्टर अनुराग कश्यप के खिलाफ मैंने एक जाने-माने पोर्टल को इस घटना से जुड़ा एक इंटरव्यू दिया था और बाद में मुझे पता चला कि उन्हें इसके लिए खुद कश्यप से परमिशन चाहिए थी। मेरे देश के लोग, यदि मैं छत से लटकी हुई पाई जाती हूँ तो याद रखें कि मैंने आत्महत्या नहीं की है। हालाँकि उनके पास डिप्रेशन और ड्रग्स वाले नैरेटिव की कहानी तैयार है।”

इस पोस्ट के साथ ही पायल घोष ने दो हैशटैग भी यूज किया – #NotGoingDown #MeToo

बता दें कि अनुराग कश्यप के खिलाफ सेक्शुअल मिसकंडक्ट का आरोप लगाने वाली पायल घोष ने उनके ख‍िलाफ रेप की श‍िकायत दर्ज करवाई है। मंगलवार को वकील के साथ पुलिस स्टेशन पहुँची ऐक्‍ट्रेस ने लिख‍ित श‍िकायत में डायरेक्‍टर के ख‍िलाफ कई अन्‍य गंभीर आरोप लगाए हैं।

अनुराग कश्यप के खिलाफ शिकायत दर्ज होने की जानकारी पायल के वकील नितिन सतपुते ने दी। नितिन सतपुते ने कहा कि पायल घोष के साथ साल 2014 में छेड़छाड़ की गई और अनुराग कश्यप ने घर पर बुरा व्यवहार किया। ऐक्ट्रेस ने पहले शिकायत दर्ज करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें धमकी दी गई थी। उन पर दबाव डाला गया था कि अगर शिकायत दर्ज करोगी तो बहिष्कार कर दिया जाएगा।

नितिन ने ट्वीट करके बताया था कि अनुराग कश्यप के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी गई है। अब पुलिस द्वारा आगे की जाँच पड़ताल की जा रही है।

अभिनेत्री के वकील नितिन सतपुते ने ट्वीट में लिखा, “कश्यप के खिलाफ दुष्कर्म, गलत इरादे से रोकने और अन्य मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (I) बलात्कार, 354 (महिला के साथ मारपीट या शील भंग करने के इरादे से आपराधिक बल का प्रयोग), 341(किसी व्यक्ति को गलत तरीके से रोकना), 342 (किसी व्यक्ति को गलत तरीके से प्रतिबंधित करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।”

कंगना मामले में BMC को बॉम्बे हाईकोर्ट की फटकार, कहा- इतनी फुर्ती दूसरी जर्जर इमारतों को तोड़ने में दिखाते तो कई हादसे टल जाते

हाल ही में बीएमसी ने कंगना के मुंबई स्थित दफ्तर पर तोड़-फोड़ की थी, आज (24 सितंबर 2020) इस मामले में सुनवाई हुई। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान बीएमसी को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने फटकार लगाते हुए कहा कि बीएमसी मुंबई में गिरती इमारतों पर सुस्त रवैया अपना रही है। ख़बरों के मुताबिक़ अदालत ने बीएमसी पर इस बात को लेकर भी सवाल खड़े किए कि वह मानसून के वक्त में टूटी इमारतों को कैसे नज़रअंदाज़ कर सकते हैं। 

अदालत ने कहा, “बीएमसी उन इमारतों के लिए कुछ नहीं कर रही है जिनकी हालत पहले ही जर्जर है। उन इमारतों के लिए बीएमसी का रवैया बेहद लापरवाही भरा है। मानसून का मौसम है ऐसे में किसी भी इमारत को नज़रअंदाज़ करना बीएमसी का आलसी रवैया दिखाता है। बीएमसी ने जितनी तेज़ी कंगना का दफ्तर तोड़ने में दिखाई, उतनी ही तेज़ी दूसरे कामों में दिखाई होती तो बहुत से हादसे रोके जा सकते थे। हाल फ़िलहाल में जितनी भी दुर्घटनाएँ हुई हैं वह बीएमसी की लापरवाही का नतीजा है।” 

दरअसल हाल ही में महाराष्ट्र के भिवंडी में एक इमारत गिरी थी और इस दुर्घटना में 35 लोगों ने अपनी जान गँवाई थी। अदालत ने इस घटना को मद्देनज़र रखते हुए बीएमसी को फटकार लगाई है। जिस वक्त दुर्घटना हुई उस दौरान बहुत से लोग सो रहे थे इसलिए बहुत से लोगों की जान चली गई। इमारत के मलबे में से लगभग 4 दर्जन लोगों लोगों को निकाला भी गया था जिसमें 10 लोग फ़िलहाल अस्पताल में भर्ती हैं। पूरे बचाव अभियान के दौरान एनडीआरएफ की टीम, डॉग स्क्वायड और स्थानीय बचाव दल मौजूद था।      

बॉम्बे उच्च न्यायालय में चल रही यह सुनवाई कल तक के लिए टाल दी गई है। कल (25 सितंबर 2020) कंगना रनौत इस पूरे मामले में अपना पक्ष रखेंगी। कंगना ने इस ख़बर के सामने आते ही रीट्वीट किया और ट्वीट में लिखा ‘सत्यमेव जयते।’

इसके पहले कंगना रनौत ने इस मुद्दे पर ट्वीट किया था। ट्वीट करते हुए कंगना ने लिखा था, “उद्धव ठाकरे, संजय राउत @mybmc जब मेरा घर ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से तोड़ रहे थे, उस वक्त उतना ध्यान इस बिल्डिंग पे दिया होता तो आज यह लगभग पचास लोग जीवित होते, इतने जवान तो पुलवामा में पाकिस्तान में नहीं मरवाए जितने मासूमों को आपकी लापरवाही मार गयी, भगवान जाने क्या होगा मुंबई का।”

गौरतलब है कि 8 सितंबर को बीएमसी ने कंगना के ऑफिस पर नोटिस चिपकाया था और अवैध निर्माण को लेकर 24 घंटे में जवाब माँगा था। लेकिन अगले दिन कंगना के मुंबई पहुँचने से पहले ही उनके ऑफिस में तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी गई। इसे लेकर एक्ट्रेस के वकील ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन जब तक कोर्ट ने कार्रवाई पर रोक लगाई, तब तक बंगले को 40 फीसदी ध्वस्त कर दिया गया था। 

इसमें झूमर, सोफा और दुर्लभ कलाकृतियों समेत कई कीमती संपत्ति भी शामिल है। कंगना रनौत 9 सितंबर को मुंबई पहुँची थीं। 13 सितंबर को उन्होंने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी से मुलाकात कर उन्हें अपने साथ हुए अन्याय के बारे में बताया था। 14 सितंबर की सुबह वे मुंबई से मनाली लौट गईं। अपने होमटाउन पहुँचने के बाद भी वे शिवसेना, कॉन्ग्रेस और महाराष्ट्र सरकार पर लगातार हमलावर हैं।

व्यंग्य: बकैत कुमार कृषि बिल पर नाराज – अजीत भारती का वीडियो | Bakait Kumar doesn’t like farm bill 2020

देश को पहले जीडीपी का सदमा देने के बाद अब नए कृषि कानून को लाकर मोदी सरकार ने किसानों पर हमला बोला है। ऐसे में देश का युवा ‘बकैत कुमार की राय’ पढ़ने की बजाय अब भी गूगल पर IPL के बारे में सर्च करने में लगा है।

बकैत कुमार आए दिन देश के युवाओं के लिए नोट्स बना रहे हैं, तब भी बदले में उन्हें केवल फेसबुक पर गाली सुनने को मिलती है।

साल 2019 में बकैत कुमार ने फेसबुक पोस्ट लिखकर, स्टूडियो से कैंपेनिंग करके, भक्तों से गाली खाकर बहुत कोशिश की थी कि किसी तरह कोई बीजेपी का साथ छोड़कर आए और उनके चैनल को टीआरपी मिले। मगर, हुआ क्या? कुछ नहीं।

अब साल 2020 में किसान के लिए कानून आ गया। इस कानून में ऊपर से सब ठीक है। मगर, बकैत कुमार जैसी रिसर्च करने पर पता चलता है कि सरकार गरीब किसान को कंफ्यूज करना चाहती है।

पूरी वीडियो इस लिंक पर क्लिक करके देखें

‘गिरती TRP से बौखलाए ABP पत्रकार’: रिपब्लिक टीवी के रिपोर्टर चुनाव विश्लेषक प्रदीप भंडारी को मारा थप्पड़

महाराष्ट्र के मुंबई से रिपोर्टिंग करते हुए रिपब्लिक टीवी के पत्रकार और चुनाव विश्लेषक प्रदीप भंडारी को एबीपी के पत्रकार मनोज वर्मा ने थप्पड़ जड़ दिया।

ऑपइंडिया से बात करते हुए भंडारी ने कहा कि ABP के रिपोर्टर मनोज वर्मा ने उनके चश्मे और फोन को भी तोड़ दिया। उन्होंने कहा, “वे गुंडे की तरह हैं।”

भंडारी ने कहा, “मुझे ड्रग्स से संबंधित प्रश्न पूछने के लिए मुक्का मारा गया था। हो सकता है कि उनकी गिरती हुई टीआरपी के कारण यह गुस्सा मुझ पर फूटा है, जो कि मात्र 14 है। ये सभी दलाल है, जोकि सवाल नहीं पूछते हैं। इतना ही नहीं मुंबई पुलिस ने भी मुझसे धीरे बोलने को कहा।”

प्रदीप भंडारी ने घटना के बारे में ट्वीटर पर भी बताते हुए कहा, “जानते है महाराष्ट्र में सच बोलने की क़ीमत क्या है? कार्टेल के नामी-गिरामी चेहरे जैसे-जैसे एक्सपोज़ हो रहे है, उनका ग़ुस्सा और बढ़ता जा रहा है। जब पुलिस से भी काम नहीं बना तो आज NDTV और ABP के गुंडे पत्रकारों को मेरे पास हाथपाई करने भेज दिया। लेकिन मैं टूटने वालों में से नहीं हूँ।”

भंडारी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के पास मुंबई में बॉलीवुड ड्रग एब्यूज स्कैण्डल को कवर कर रहे थे, उसी दौरान एबीपी न्यूज के पत्रकार ने उनसे हाथापाई की।

‘काफिरों का खून बहाना होगा, 2-4 पुलिस वालों को भी मारना होगा’ – दिल्ली दंगों के लिए होती थी मीटिंग, वहीं से खुलासा

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले में एक हैरान करने वाले ख़बर सामने आई है। दिल्ली दंगों के संबंध में कुछ ऐसे सबूत मिले हैं, जिनमें बेहद साफ़ तौर पर कहा जा रहा है – “सड़कों पर उतरेंगे।” यानी एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन की आड़ में दंगे और हिंसा भड़काई गई।

इन दंगों को अंजाम देने के लिए मीटिंग भी हुई थी और उस मीटिंग में शामिल हुए एक चश्मदीद ने कई हैरान कर देने वाली बातें कही हैं। चश्मदीद की बात इस ओर इशारा करते हैं कि दिल्ली दंगे पूरी तरह सुनियोजित थे। 

दिल्ली दंगों के मामले में एक चश्मदीद ने मजिस्ट्रेट के सामने गवाही दी है। उसने गवाही में कहा, “वो कहते थे कि हमें सड़कों पर उतरना पड़ेगा और खून बहाना पड़ेगा, प्रदर्शन से काम नहीं चलेगा। पूरे प्रदर्शन के दौरान भाईचारे, सहिष्णुता और मजहब विशेष पर होने वाले अत्याचार की बात करते हुए वो इसकी आड़ में जनजीवन ठप्प करना चाहते थे। हर योजना की तैयारी कर ली गई थी, जिसके परिणामस्वरूप भारी भीड़ इकट्ठा हुई थी। ऐसी भीड़ जो पूरी तरह तैयार थी, और उनके पास हिंसा भड़काने के लिए हथियार तक मौजूद थे।”

2-4 पुलिस वालों को भी मारना है, गजब के शांतिप्रिय लोग हैं! फोटो साभार: टाइम्स नाउ

मतलब लिबरल मीडिया ने दिल्ली दंगों को जो स्वतःस्फूर्त बताया, वो एक छलावा मात्र था। इस हिंसा की योजना बहुत पहले ही तैयार कर ली गई थी। हर एक दिन, हर एक कदम की प्लानिंग की गई थी। किसे मारना है, यह तक तय था। पुलिस वालों की हत्या तक करनी है, यह भी तय था और इसे अंजाम भी दिया गया।

दंगा में कुछ भी नहीं करना है, काफिरों का खून बहाना है (फोटो साभार: टाइम्स नाउ)

सड़क जाम करना है। सरकार को झुकाना है। प्रशासन को उसकी औकात बतानी है। – यह सब ऊपरी बातें थीं, जहाँ भीड़ होती थी, वहाँ की बातें थीं, जहाँ मीडिया या वीडियो लिए जाते थे, वहाँ की बातें थीं। असली बात तो इनकी कोर मीटिंग में होती थी – काफिरों को मारने वाली बात। दिल्ली पुलिस को यह बात भी उस गवाह ने ही बताई है।

इसके अलावा चश्मदीद ने कहा, “दंगे भड़काने की योजना बनाने के दौरान यहाँ तक बात हुई कि हथियार जमा करने होंगे। सिर्फ बैठे रहने से और इंतज़ार करने से कुछ हासिल नहीं होगा। इस क़ानून (सीएए और एनआरसी) को रोकने के लिए सड़कों पर खून भी बहाना पड़ा, तो वह भी करेंगे।”

दिल्ली दंगों की साजिश के पीछे जिनका हाथ था, वो हिंसा का आरोप भी किसी और पर मढ़ने का प्लान बना चुके थे। गवाह ने मीटिंग में हुई बात को बताया, “अब बहुत ज़रूरी हो गया है कि हम इस हिंसा का आरोप किसी और पर डाल दें। सबसे अच्छा यह होगा कि हम दिल्ली के मुख्यमंत्री पर दबाव डालें कि वह पूरी हिंसा का आरोप दिल्ली पुलिस पर लगा दें। जब तक हम चुप होकर बैठे रहेंगे, तब तक हमें कुछ नहीं मिलने वाला है, हमें अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना होगा।”    

मैं मुन्ना हूँ: उपन्यास पर मसान फिल्म के निर्माता मनीष मुंद्रा ने स्कैच के जरिए रखी अपनी कहानी

‘मैं मुन्ना हूँ’ (Main Munna Hun) मनीष श्रीवास्तव द्वारा लिखे गए दूसरे उपन्यास का नाम है, जो कि नायक के मानसिक विदलन और सृजनात्मक विकास व उपलब्धियों भरी यात्राओं की कथा है। इस कथा में नायक मुन्ना द्वारा भोगे गए यथार्थ का मनोविज्ञान है। इस उपन्यास में सबसे ज्वलंत मुद्दा जो उठाया गया है वह है ‘बाल यौन शोषण’।

उपन्यास का नायक मुन्ना इस हादसे का दंश अपनी बचपन में अनेक बार, कभी अपनो के द्वारा तो कभी गैरों के मार्फ़त, झेलता है। उपन्यास के नायक मुन्ना की कहानी शुरू होती है बचपन में, जहाँ वो यौन शोषण की त्रासदी झेलता है।

शुरू में उसका अबोध मन समझ नहीं पाता और कई बार विरोध करना चाहते हुए भी कर नहीं पाता। अंतत: उसका विरोध फूट पड़ता है। वह अपना दुःख सिर्फ किन्नू से साझा करता है जो उसका काल्पनिक साथी है।

मुन्ना का कृष्ण प्रेम व उसकी आस्था उसे अपने भैया व केशव से मिलवाती है जिससे वो अपना दुःख तकलीफ साझा करता है वे उसके मार्गदर्शक बनते हैं। इस कहानी में यौन शोषण की त्रासदी है, बचपन के किस्से हैं, प्रेम है, जवानी की शरारते हैं, गिरना है उठना है और फिर गिर के उठ कर संभल कर खड़े होने की कहानी है।

सोशल मीडिया पर इन दिनों ‘मैं मुन्ना हूँ’ की चर्चा जोरों पर है।

बाल यौन शोषण जैसे मुद्दे पर, जिस पर लोग आम तौर पर बोलना पसंद नहीं करते, बहुत लोग खुल कर सामने आ रहे हैं। आम पाठक तो इस किताब को सराह भी रहे हैं और साथ में हिम्मत के साथ स्वीकार भी कर रहे हैं कि उनके साथ भी बचपन में ये हादसा हुआ था।

मसान और आँखों देखी फिल्मों के प्रोड्यूसर मनीष मुंद्रा, जो राष्ट्रीय पुरुस्कार प्राप्त निर्माता निर्देशक हैं, ने ‘मैं मुन्ना हूँ’ उपन्यास को लेकर एक स्केच बना कर ट्विटर किया है। इस स्कैच को ट्वीट करते हुए उन्होंने स्वीकार करते हुए लिखा है, “श्रीमान जी! ये लीजिए मेरी तस्वीर जब मैं कभी मुन्ना बना था…या यूँ कह लें जब मेरा शोषण हुआ था… @Shrimaan मैं भी मुन्ना था।”

विदेशी फिदेल कास्त्रो की याद में खर्च किए 27 लाख रुपए… उसी केरल सरकार के पास वेलफेयर पेंशन के पैसे नहीं थे

केरल सरकार की अलग ही दुनिया है। इसका खुलासा RTI से हुआ है। केरल की राज्य सरकार ने क्यूबा के क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो की याद में लाखों रुपए खर्च कर दिए। हैरानी की बात यह थी कि सरकारी विभाग ने इतना भव्य आयोजन आम जनता के रुपयों से कराया।

आम जनता के पैसों की बर्बादी का खुलासा कोच्ची के रहने वाले के गोविंदन नम्पूथिरी द्वारा दायर की गई आरटीआई के जवाब में हुआ। आरटीआई में मिले जवाब के अनुसार राज्य सरकार ने क्यूबा के नेता की याद में 1,37,745 रुपए खर्च कर एक विशालकाय आयोजन तिरुअनंतपुरम स्थित विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में कराया था।

एक लाख 37 हजार कोई बड़ी रकम नहीं है। लेकिन इस आयोजन को आवश्यकता से ज्यादा बड़ा बनाने के लिए राज्य सरकार ने जो किया, उसका जनहित से कोई सरोकार नहीं था। इस आयोजन के विज्ञापन में लगभग 26.7 लाख रुपए भी खर्च किए गए थे।

ख़बरों की मानें तो यह पहला ऐसा मौक़ा था, जब केरल की राज्य सरकार ने किसी समारोह में इतने बड़े पैमाने पर खर्च किया। पूरे राज्य के लगभग 70 समाचार पत्रों में इस कार्यक्रम का विज्ञापन प्रकाशित हुआ था। विज्ञापन में फिदेल कास्त्रो की तस्वीर अगले पन्ने पर छपी हुई थी। 

फिदेल कास्त्रो की याद में यह आयोजन 29 नवंबर 2016 को कराया गया था। कारण – फिदेल कास्त्रो की मृत्यु 25 नवंबर 2016 को हुई थी। मतलब यह आयोजन एलडीएफ के केरल में सत्ता हासिल करने के ठीक कुछ महीने बाद हुआ।

गोविंदन नम्पूथिरी द्वारा दायर की गई आरटीआई को जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट ने जवाब 22 फरवरी साल 2017 को दिया था। जवाब में एक और हैरानी वाली बात यह थी कि इस आयोजन की देख-रेख खुद केरल के मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा की गई थी। आरटीआई लगाने वाले गोविंदन ने इस पर एक बड़ा सवाल यह भी उठाया था कि इस कार्यक्रम के संबंध में कोई सरकारी सूचना तक जारी क्यों नहीं की गई थी। 

उन्होंने लिखा, “केरल सरकार ने एक ऐसे नेता की सालगिरह इतने धूमधाम से क्यों मनाई, जिसने हमारे देश और केरल के लिए कुछ नहीं किया है। जबकि ऐसा कोई नियम या परंपरा भी नहीं है कि विदेशी नेताओं के लिए इतना बड़ा आयोजन किया जाएगा। इस मामले की जाँच अनिवार्य रूप से होनी चाहिए, यह पूरी तरह सत्ता का दुरुपयोग है। ऐसे किसी भी कार्यक्रम से आम जनता का क्या भला हो सकता है?” 

आरटीआई का जवाब (संख्या: 4384/C2/2017/IP&PR) सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा 9 मई 2017 को जारी किया गया था। उसमें यह बताया गया है कि 2,32,560 रुपए मीडिया को दिए गए थे, जिन्होंने इसका बिल जमा किया था। इसके अलावा उन 70 मीडिया संस्थानों की सूची भी जारी की गई थी, जिन्हें विज्ञापन दिया गया था।

रिपब्लिक टीवी ने इस मामले में की जाँच करते हुए उन मीडिया संस्थानों की सूची तैयार की थी, जिनके पास भुगतान की रसीद मौजूद थी। इन रसीदों से साफ़ हो गया था कि यह सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशालय ने जारी किया था। 

इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए राजनीतिक विश्लेषक श्रीजीथ पैनिकर ने कहा, “एक तरफ सरकार ऐसा कह रही है कि वह आर्थिक रूप से बहुत कमज़ोर है। दूसरी तरफ वह ऐसे कार्यक्रम पर खर्च कर रही है, जिसका न तो कोई मतलब है और न ही कोई वजह। इसका मतलब साफ़ है कि सरकार खुद को कितना मज़बूत दिखाती है, असल में उतनी मज़बूत है नहीं। क्या लोगों को ऐसा मान लेना चाहिए कि सच्चाई कहीं बीच में दबी हुई है?”

(साभार – रिपब्लिक टीवी)
(साभार – रिपब्लिक टीवी)

गोविंदन ने इस मुद्दे पर कहा, “साल 2016 में इस सरकार ने कहा था कि उन्हें वेलफेयर पेंशन देने में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 70 समाचार पत्र ऐसे हैं, जिनके बारे में हम जानते हैं, मुझे इस बात पर शक है कि ऐसे न जाने कितने और समाचार पत्र होंगे, जिनके बारे में हम नहीं जानते हैं। सरकार एक विदेशी नेता को याद करने के लिए एक दिन के भीतर इतने सारे रुपए कैसे खर्च कर सकती है?”