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नेटफ्लिक्स: काबुलीवाला में हिंदू बच्ची से पढ़वाया नमाज, ‘सेक्युलरिज्म’ के नाम पर रवींद्रनाथ टैगोर की मूल कहानी से छेड़छाड़

इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री ने इन दिनों दर्शकों को रिझाने के लिए अपने मनोरंजन का काम छोड़ लोगों के बीच प्रोपेगैंडा फैलाने पर ज्यादा ध्यान देने लग गई है। आए दिन अलग-अलग सीरीज के जरिए हिंदू धर्म का अपमान और हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का काम किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर तुलनात्मक रूप से इस्लाम धर्म का महिमामंडन किया जा रहा है।

इसी तरह के हिंदू धर्म के प्रति अपमान को लक्षित कर एक चर्चित साइट नेटफ्लिक्स में अनुराग बसु द्वारा रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी काबुलीवाला पर आधारित एक वेब सीरीज में दिखाया गया है। हालाँकि, यह सीरीज नेटफ्लिक्स का ओरिजनल कंटेंट नहीं लग रहा है। इसे पहले Epic On पर उपलब्ध कराया गया था। लेकिन लोगों की नजर इसपर नेटफ्लिक्स पर आने के बाद पड़ी।

सीरीज की कहानी के एक दृश्य में (मिनी) नाम की एक लड़की नमाज अदा करते हुए दिखाई देती है क्योंकि उसका दोस्त काबुलीवाला कुछ दिनों के लिए उससे मिलने नहीं आया था। सीन में छोटी बच्ची को काबुलीवाले के अल्लाह से प्रार्थना करते हुए दिखाया गया है। ताकि उसका दोस्त जल्द ही उससे मिलने आए।

इसमें यह बात ध्यान देने वाली है कि टैगोर की मूल कहानी (जिसके आधार पर यह शो बनाया गया है) में नमाज अदा करने वाली हिंदू लड़की के बारे में कुछ भी उल्लेख नहीं किया गया है। शो के निर्माताओं ने इसे अपने प्रोपेगेंडा के अनुसार डाला है। इस दृश्य में राजनीतिक एजेंडे के अलावा, मूल कहानी के बिलकुल अलग इस तरह के कथानक को दिखाने के लिए कोई अन्य औचित्य नजर नहीं आ रहा है।

गौरतलब है कि प्रोपेगेंडा हमेशा मनोरंजन उद्योग का एक अभिन्न अंग रहा है। आधुनिक प्रोपेगैंडा के जनक एडवर्ड बर्नेज़ ने एक बार टिप्पणी की थी, “अमेरिकन मोशन पिक्चर आज दुनिया में प्रोपेगेंडा का सबसे बड़ा अचेतन वाहक है।” हालाँकि, यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता है कि भारतीय मनोरंजन उद्योग भी प्रोपेगैंडा का एक अचेतन वाहक है।

जिस तरह रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी में नमाज़ अदा करने वाली हिंदू बच्ची को चित्रित कर दिया गया वैसे ही नेटफ्लिक्स पर जल्द ही रिलीज़ होने वाली फिल्मों में से एक में फर्जी ब्राह्मण विरोधी कोटेशन का आविष्कार किया गया है। और इसका श्रेय इन्फोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति को दिया गया है।

वहीं नेटफ्लिक्स पर Ghoul और Leela जैसे शो भी उपलब्ध है, जिसमें हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं पर खुले तौर पर निशाना साधा गया है। सांप्रदायिक सौहार्द की खातिर, हिंदू समुदाय की भावनाओं को अक्सर रौंदने की अनुमति दे दी जाती है। लेकिन पारस्परिक सहिष्णुता को दिखाते हुए अन्य धर्मो के खिलाफ शायद ही कोई शो कभी नेटफ्लिक्स आदि पर आते हैं। हिंदू समुदाय को उपदेश जारी करना और एक पक्षीय सहिष्णुता का प्रचार प्रसार करना मनोरंजन उद्योग की एक खास विशेषता बन चुकी है।

कंगना ने किया योगी सरकार के सबसे बड़ी फिल्म सिटी बनाने के ऐलान का समर्थन, कहा- फिल्म इंडस्ट्री में कई और बड़े सुधारों की ज़रूरत

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार (18 सितंबर 2020) को प्रदेश में देश की सबसे बड़ी फिल्म सिटी बनाने का ऐलान किया था। इस ऐलान पर बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्वीट करते हुए मुख्यमंत्री के इस निर्णय पर ख़ुशी जाहिर की। इसके अलावा कंगना ने ट्वीट करते हुए लिखा कि हमें इस तरह के कई बदलावों की आवश्यकता है। 

कंगना ने अपने ट्वीट में लिखा, “मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से किए गए इस ऐलान की प्रशंसा करती हूँ। हमें फिल्म इंडस्ट्री में कई बड़े सुधारों की ज़रूरत है और उसके पहले हमें एक बड़ी फिल्म इंडस्ट्री की ज़रूरत है, जिसे भारतीय फिल्म उद्योग कहा जाए। फ़िलहाल हम कई आधार पर हिस्सों में बँटे हुए हैं नतीजतन इसका लाभ हॉलीवुड को मिलता है। इंडस्ट्री एक है पर फिल्म सिटी कई हो सकती है।” 

इसके बाद कंगना ने अपने ट्वीट में लिखा, “लोगों के बीच ऐसी धारणा बन चुकी है कि हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री भारत की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री है जबकि ऐसा नहीं है। तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री अब देश की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री बन चुकी है। तेलुगू फिल्म पूरे देश में कई अन्य भाषाओं में रिलीज़ होती हैं। हैदराबाद के रामोजीराव फिल्म सिटी में बहुत सी फिल्मों की शूटिंग होती है। क्षेत्रीय भाषा सिनेमा की ऐसी बहुत सी फिल्म होती हैं जिन्हें पूरे भारत में रिलीज़ नहीं किया जाता है। वहीं हॉलीवुड की डब की गई फिल्मों को मुख्यधारा में रिलीज़ किया जाता है। यह हमारे लिए बहुत अच्छे संकेत नहीं हैं। इसका बड़ा कारण है भारतीय सिनेमा और थियेटर में हिन्दी फिल्मों का एकाधिकार। इसके अलावा मीडिया में भी हॉलीवुड फिल्मों को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया जाता है।”    

कंगना ने बॉलीवुड क्षेत्र में बुनियादी स्तर पर सुधार लेकर आने के लिए कई सुझाव भी दिए। कंगना ने अपने ट्वीट में लिखा, “हमें अपनी बॉलीवुड इंडस्ट्री को कई प्रकार के आतंकवादियों से बचाना है, जिसमें भाई भतीजावाद, ड्रग माफ़िया का आतंक, सेक्सिज़म का आतंक, धार्मिक और क्षेत्रीय आतंक, विदेशी फिल्मों का आतंक, पायरेसी का आतंक, मजदूरों के शोषण का आतंक, हुनर के शोषण का आतंक प्रमुख हैं।”

दरअसल, बीते दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में देश की सबसे बड़ी फिल्म सिटी बनाने की घोषणा की थी। उन्होंने ऐलान करते हुए कहा था कि देश को एक अच्छी फिल्म सिटी की आवश्यकता है और उत्तर प्रदेश यह जिम्मा उठाने को तैयार है। फिल्म सीट के लिए ज़मीन नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे में चिन्हित की जाएगी। अंत में उन्होंने कहा हम जल्द ही इस दिशा में कार्रवाई शुरू करेंगे।   

पत्रकार राजीव शर्मा के बारे में दिल्‍ली पुलिस ने किया खुलासा, कहा- 2016 से 2018 तक कई संवेदनशील जानकारी चीन को सौंपी

दिल्‍ली पुलिस ने गिरफ्तार राजीव शर्मा के बारे में एक और खुलासा किया है। दिल्‍ली पुलिस के स्‍पेशल सेल के डीसीपी संजीव कुमार यादव ने बताया कि यह शख्‍स बार-बार जगह बदल कर मुलाकात कर रहा था। उन्‍होंने खास कर 2016 से 2018 के बारे में बताया कि देश के बाहर अलग-अलग जगहों पर यह चीन के खुफिया अधिकारियों से मुलाकात कर खुफिया दस्‍तावेज और अहम जानकारी दी।

स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव कुमार यादव ने बताया, “पत्रकार राजीव शर्मा 2016 से 2018 तक चीनी खुफिया अधिकारियों को संवेदनशील रक्षा और रणनीतिक जानकारी देने में शामिल था। वह विभिन्न देशों में कई स्थानों पर उनसे मिलता था।”

दिल्ली पुलिस उपायुक्त ने बताया कि पत्रकार राजीव शर्मा ने गुप्त / संवेदनशील जानकारी की सूचना में अपनी भागीदारी का खुलासा किया है। उसने चीन के कुनमिंग शहर के माइकल और जॉर्ज नाम के चीनी खुफिया एजेंट से विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से संपर्क करता था। चीन यात्रा के दौरान उनका सारा खर्च माइकल ने ही वहन किया था। इस दौरान बातचीत में माइकल और जॉर्ज ने राजीव शर्मा से भारत-चीन संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी देने के लिए कहा था। 

जानकारी के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने बताया कि चीनियों को गोपनीय सूचना देने के आरोप में गिरफ्तार राजीव शर्मा को बीते एक साल में 40-45 लाख रुपए मिले थे। शर्मा को प्रत्येक सूचना के बदले 1000 डॉलर मिलते थे।

चीनी खुफिया अधिकारियों ने पत्रकार को ज्‍यादा से ज्‍यादा खुफिया जानकारी मुहैया कराने को कहा था। इसके बदले उसे पैसे के साथ लग्‍जरी होलीडे पैकेज का भी ऑफर दिया गया था। इन खुफिया जानकारी में आर्मी से जुड़ी जानकारी, डिफेंस सिस्‍टम से जुड़ी, भारत की विदेश नीति के साथ दलाई लामा के बारे में भी जानकारी माँगी गई थी। काम के बदले पेमेंट करने के लिए चीनियों ने नेपाल के कुछ लोगों के साथ मिल कर शेल कंपनी बना रखी थी। इसी से पैसा भारत में ट्रांसफर होता था।

गौरतलब है कि स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक चीनी महिला और उसके नेपाली सहयोगी को भी गिरफ्तार किया था। राजीव शर्मा पर सुरक्षा संबंधी दस्तावेजों को चीन की खुफिया एजेंसी के साथ साझा करने का आरोप है।

शर्मा को रक्षा सम्बन्धी गोपनीय दस्तावेज़ों के साथ ‘ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट’ के तहत गिरफ्तार किया गया था। वहीं चीनी महिला और उसके नेपाली सहयोगी को शर्मा को शेल कंपनियों के जरिए पैसा देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

राजीव शर्मा दिल्ली के पीतमपुरा का रहने वाला है। वह यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया, द ट्रिब्यून, फ्री प्रेस जर्नल समेत कई समाचार समूहों में बतौर पत्रकार काम कर चुका है। पिछले 2 दशकों से वह बतौर पत्रकार रक्षा क्षेत्र और विदेशी मामलों से जुड़ी ख़बरें करता था। पत्रकार आदित्य राज कौल के अनुसार राजीव शर्मा चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स (समाचार पत्र) के लिए स्तम्भ भी लिखा करता था। चीनी समाचार पत्र के लिए स्तम्भ लिखने का सिलसिला पिछले कई सालों से जारी था।

SSR केस: 7 अक्टूबर को सलमान खान, करण जौहर समेत 8 टॉप सेलेब्रिटीज़ को मुज्जफरपुर कोर्ट में होना होगा पेश, भेजा गया नोटिस

दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के निधन के तीन महीने बीत चुके हैं। इन तीन महीनों में आए दिन चौकाने वाले खुलासे हो रहे है। इस बीच मुजफ्फरपुर जिला न्यायालय ने सलमान खान और करण जौहर सहित आठ हस्तियों को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट के मुताबिक, 7 अक्टूबर, 2020 को इन सभी को कोर्ट में उपस्थित होना है।

दरअसल, मुजफ्फरपुर के वकील सुधीर ओझा के परिवाद पर कोर्ट ने सलमान खान, करण जौहर, आदित्य चोपड़ा, संजय लीला भंसाली, एकता कपूर, साजिद नाडियावाला, भूषण कुमार और दिनेश विजयन को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा है। इन सभी को इस संबंध में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से नोटिस भेजा जा चुका है। इन सभी को खुद या वकील के माध्यम से कोर्ट में हाजिर होना होगा।

वकील ओझा ने इन सभी टॉप सेलेब्रिटीज़ पर सुशांत को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। जिसको लेकर उन्होंने मुजफ्फरपुर सीजेएम कोर्ट में 17 जून को परिवाद दाखिल किया था। उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत की मौत के लिए इन सभी को जिम्मेदार ठहराते हुए आईपीसी की धारा 306, 504 और 506 के तहत शिकायत दर्ज करवाई थी।

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून को मुंबई स्थित अपने फ्लैट में आत्महत्या कर ली थी। इस मामले की जाँच पहले मुंबई पुलिस कर रही थी, लेकिन अब देश की तीन बड़ी एजेंसियाँ मामले की जाँच कर रही हैं। जिसमें NCB, ED और CBI शामिल है।

गौरतलब है कि सुशांत मामले में ड्रग्स एंगल सामने आने के बाद बॉलीवुड की बड़ी-बड़ी हस्तियों के गले में तलवार लटक चुका है। हाल ही में करण जौहर द्वारा होस्ट की गई पार्टी का वीडियो वायरल होने के बाद कई दिग्गज अभिनेता एनसीबी के शिकंजे में घिरते नजर आ रहे है। एनसीबी अब वीडियो की जाँच में जुट गई है। ब्यूरो द्वारा इस बात की जाँच की जाएगी कि वीडियो असली है या फिर इसे डॉक्टरेड किया गया है। यदि वीडियो वास्तविक पाया जाता है, तो जाँच आगे बढ़ने की संभावना है।

दिल्ली दंगों के पीछे बड़ी साज़िश की तरफ इशारा करती है चार्जशीट-59: सफूरा ज़रगर से उमर खालिद तक 15 आरोपितों के नाम शामिल

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा 15 आरोपितों के विरुद्ध दायर की गई चार्जशीट स्वीकार कर ली है। पुलिस ने इस चार्जशीट में आरोप लगाया है कि फरवरी के दौरान राजधानी में हुए दंगे पूर्व नियोजित षड्यंत्र का नतीजा थे। इसके पहले दिल्ली पुलिस ने दिल्ली उच्च न्यायालय में दिल्ली दंगों से जुड़ी चार्जशीट दायर की थी। चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने गैर क़ानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता की अनेक धाराओं के तरह मामला दर्ज किया है। 

यह मामला एफ़आईआर संख्या 59 से निकल कर सामने आया जिसे दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 6 मार्च 2020 को दर्ज किया था। ख़बरों के मुताबिक़ अतिरिक्त सेशन जज अमिताभ रावत ने दिल्ली पुलिस को आदेश दिया है कि वह बुधवार तक दायर की गई चार्जशीट की कॉपी आरोपितों को उपलब्ध कराए। इस मामले पर अगली सुनवाई 21 सितंबर से होगी। दिल्ली पुलिस ने राजधानी में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के मामले में 15 लोगों को मुख्य आरोपित बनाया है। इसमें आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता ताहिर हुसैन, पूर्व कॉन्ग्रेस नेता इशरत जहाँ, स्वघोषित कार्यकर्ता खालिद सैफी, जेसीसी की सदस्य सफूरा ज़रगर और मीरान हैदर शामिल हैं।

घोर वामपंथी कार्यकर्ता और पिंजरा तोड़ समूह की सदस्य देवांगना कलिता, नताशा नरवाल समेत जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तनहा को भी आरोपित बनाया गया है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में मोहम्मद परवेज़ अहमद, मोहम्मद इलियास, शादाब अहमद, तस्लीम अहमद, सलीम मलिक, मोहम्मद तस्लीम खान और अतहर खान को शामिल किया है। 

दिल्ली पुलिस ने दंगों के मामले में कुल 750 एफ़आईआर दर्ज की है। इनमें भड़काऊ भाषण, धार्मिक उन्माद फैलाना, लूट, सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाना और हत्या जैसे गम्भीर आरोप शामिल हैं। पुलिस ने अपने बयान में कहा था, “हमें 24 फरवरी की व्हाट्सएप चैट मिली हैं जिस वक्त राजधानी में दंगे हो रहे थे। इसी दौरान दंगों का षड्यंत्र रचने वाले मुख्य आरोपित पूरे क्षेत्र में दंगा भड़का रहे थे।” 

एफ़आईआर 59 के आधार पर दिल्ली पुलिस द्वारा दायर की गई चार्जशीट को दिल्ली दंगों की जाँच में सबसे अहम दस्तावेज़ माना जा रहा है। इस एफ़आईआर में दिल्ली पुलिस ने कहा है कि दिल्ली दंगे पूरी तरह सुनियोजित थे। इसके अलावा सीएए के विरोध प्रदर्शन के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए साज़िश रची गई थी। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अभी तक कुल 20 आरोपितों को गिरफ्तार किया है जिसमें जवाहर नेहरु विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र भी शामिल हैं। 

कट्टरपंथी इस्लामी और वामपंथी कार्यकर्ता उमर खालिद को हाल ही में इन दंगों के संबंध में गिरफ्तार किया गया है। इसके पहले दिल्ली पुलिस ने जेसीसी की सदस्य सफूरा ज़रगर को गिरफ्तार किया था जिसे बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय ने जमानत पर रिहा कर दिया था। सफूरा ज़रगर पर आरोप है कि उसने चाँदबाग़ के नज़दीक मौजूद मुस्लिम भीड़ को भड़काया, जिसने बाद दिल्ली पुलिस पर हमला किया और उसमें हवलदार रतन लाल की हत्या कर दी गई थी।              

चार्जशीट में बेहद साफ़ तौर पर लिखा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के वक्त दंगों की साज़िश उमर खालिद और उसके साथियों ने रची थी। साज़िश के तहत उत्तर दिल्ली के कई इलाकों में पेट्रोल बम, आग लगाने का सामान, पत्थर समेत कई सामान इकट्ठा किए गए थे। चार्जशीट के अनुसार 23 फरवरी को योजना के मुताबिक़ तमाम महिलाओं और बच्चों ने दंगा भड़काने के लिए जाफराबाद मेट्रो स्टेशन बंद किया। 

जिसके बाद वहाँ दंगे के हालात बने और मुस्लिम भीड़ ने इसका फ़ायदा उठा कर कई अन्य इलाकों में हिंसा भड़काई। चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि 8 जनवरी को आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता ताहिर हुसैन ने उमर खालिद और खालिद सैफी से शाहीन भाग में मुलाक़ात की थी। इस मुलाक़ात में उमर खालिद ने आश्वासन दिया था कि वह पीएफ़आई के संपर्कों का फायदा उठा कर दंगा कराने वाले सामान उपलब्ध कराएगा।   

उद्धव और आदित्य ठाकरे पर चुनावी हलफनामे में झूठ बोलने का आरोप: EC ने CBDT को शिकायत की जाँच के दिए आदेश

महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे, उनके बेटे आदित्य ठाकरे और एनसीपी प्रमुख शरद पवार की बेटी और मौजूदा सांसद सुप्रिया सुले के लिए नई मुसीबत खड़ी हो सकती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि चुनाव आयोग ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) से ठाकरे और सुप्रिया सुले के खिलाफ प्राप्त उन शिकायतों की जाँच करने को कहा है, जिनमें उन पर लोकसभा / विधानसभा चुनावों के लिए अपने हलफनामे में गलत जानकारी साझा करने का आरोप लगाया गया।

उद्धव और आदित्य ठाकरे द्वारा प्रस्तुत किए गए चुनाव शपथ पत्र में गंभीर विसंगतियाँ

टाइम्स नाउ के मुताबिक इसकी शिकायत एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा दायर की गई हैं। बताया जा रहा है कि ठाकरे पिता-पुत्र द्वारा दायर हलफनामों में कुछ गंभीर विसंगतियाँ सामने आई हैं। कार्यकर्ता ने अपनी शिकायत में उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे के डेटा में विरोधाभास का हवाला दिया। एक जो बड़ी विसंगति सामने आई है, वह है आदित्य के चुनावी हलफनामे में बैंक खाते का गायब होना, जिसका उल्लेख उद्धव के हलफनामे में किया गया था।

उद्धव के हलफनामे में पत्नी रश्मि ठाकरे और बेटे आदित्य ठाकरे का बैंक ऑफ महाराष्ट्र में ज्वाइंट अकाउंट की जानकारी दी गई है। इसमें 9,52,568 लाख रुपए जमा होने की बात कही गई है। हालाँकि, विधानसभा चुनाव के दौरान सौंपे गए आदित्य के शपथ पत्र में इस अकाउंट का उल्लेख नहीं था। कार्यकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों ठाकरे के पास HUF (Hindu Undivided Family) कैटेगरी के तहत शेयर रखने की तारीखें भी अलग-अलग थी।

रिपोर्टों के अनुसार, CBDT जाँच के अग्रिम चरण में है और यह अगले 10 दिनों में अपनी रिपोर्ट चुनाव आयोग को सौंप सकता है।

फिलहाल सीबीडीटी की रिपोर्ट इंतजार है, अगर सभी आरोप सही पाए जाते हैं, तो सीबीडीटी द्वारा आर पी एक्ट की धारा 125 ए के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। इस सेक्शन के तहत अधिकतम छः महीने की जेल या जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। यह सजा उन उम्मीदवारों को दी जाती है, जो या तो चुनावी हलफनामे में पूरी जानकारी नहीं देते हैं या फिर झूठी जानकारी देते हैं।

70-80% प्रॉफिट के बावजूद अरुणाचल प्रदेश के लोगों ने चीनी उत्पादों का किया पूर्ण बहिष्कार: रिपार्ट

अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में रहने वाले लोगों ने देश और भारतीय सेना के साथ एकजुटता में खड़े होकर चीनी उत्पादों का पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया है। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, LAC पर गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुए झड़पों के बाद से जिले के स्थानीय लोगों ने सभी चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने का फैसला किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, चीन के साथ सीमा साझा कर रहे जिले में चीन से लगभग 10 लाख रुपए का समान हर महीने इम्पोर्ट होता था और विक्रेता उससे 50 प्रतिशत के मार्जिन पर कमाते थे। वहीं चीन के बहिष्कार के फैसले से विक्रेताओं के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी अधिक धन खर्च करना पड़ रहा है क्योंकि चीनी उत्पाद सस्ते दामों पर उपलब्ध होते थे। ज्यादा पैसे खर्च होने के बावजूद लोग इससे हतोत्साहित नहीं हैं।

बता दें जिन उत्पादों को चीन से आयात किया जाता था उनमें शराब, कॉस्मेटिक आइटम, सिगरेट और खिलौने शामिल थे।

न्यू मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष न्यालुक डोनी कहते हैं, “चीनी उत्पादों का बहिष्कार किए लगभग दो महीने हो गए हैं। ग्राहकों और ओल्ड मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से दो महीने से चीनी उत्पादों का बहिष्कार किया हुआ है। इससे पहले, चीनी उत्पाद आसानी से उपलब्ध थे और हमें उसमें लगभग 70-80 प्रतिशत मार्जिन मिलता हैं। जब हम भारतीय उत्पाद बेचते हैं तो हमारा लाभ 10-15 प्रतिशत होता है। लेकिन हमें भारतीय उत्पादों को ही बेचने का फैसला करना होगा।” चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने के बाद इसे विक्रेता और ग्राहकों दोनों द्वारा सख्ती से पालन किया जा रहा है, भले ही इसके लिए उन्हें अधिक पैसा क्यों न खर्च करना पड़े।

गौरतलब है कि कुछ महीनों से दोनों देशों के बीच संबंध काफी खराब हुए हैं। चीन के खिलाफ व्यापक राष्ट्रीय प्रतिक्रिया में नागरिक अपने अपने तरीके से योगदान दे रहे हैं। इस साल जून में एलएसी के साथ गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सेना के बीच हिंसक झड़प हुई थीं। इस खूनी झड़प में दोनों पक्षों को हताहत होना पड़ा था। फिलहाल अभी भी एलएसी पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

कहाँ गायब हुए अकाउंट्स? सोनू सूद की दरियादिली का उठाया फायदा या फिर था प्रोपेगेंडा का हिस्सा

लॉकडाउन में गरीब मजदूरों को उनके गृह राज्य पहुँचाने का जो काम बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद ने किया उसकी जितनी सराहना की जाए वो सब कम है। उन्होंने हर मुमकिन प्रयास करते हुए जरूरतमंदों की गुहार सुनी और लॉकडाउन के कठिन समय में उनको हर सुविधा मुहैया करवाई।

सोशल मीडिया पर अपनी इसी दरियादिली के कारण पिछले दिनों वह पूरी तरह छाए रहे और आज भी उन्हें लेकर चर्चा हर जगह हैं। आज सोनू सूद अपने सेवाभाव के कारण लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं और कइयों के आदर्श भी। लोगों का कहना है कि वह उनके एहसान कभी नहीं भूलेंगे।

हालाँकि, उनकी दरियादिली के तमामों किस्सों के बीच सोशल मीडिया पर एक नई चर्चा ने तूल पकड़ लिया है और अचानक उन पर कुछ सवाल उठने लगे हैं। सवाल उन ट्विटर अकॉउंट्स को लेकर किए गए हैं जिनसे पहले सोनू सूद से मदद की गुहार लगाई और अभिनेता ने मदद पहुँचाकर उनको रिप्लाई भी दिया। मगर, ये अकाउंट कथित तौर अचानक सोशल मीडिया से गायब हो गए है। हालाँकि जब ऑपइंडिया ने इन्हें क्रॉस चेक किया तो इनमें से कुछ ट्वीट सोनू सूद के हैंडल पर मौजूद हैं और कुछ वाकई गायब हैं।

इन्हीं गायब अकाउंट्स का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कुछ लोगों ने ट्विटर पर सोनू सूद की दरियादिली को प्रोपेगेंडा करार दे दिया है। NationFirst#SAFFRON नामक ट्विटर हैंडल से सोनू सूद के कई ट्वीट के स्क्रीनशॉट शेयर हुए। साथ ही ट्वीट में लिखा, “Propaganda चल रहा था सोशल मीडिया पर। सभी मदद माँगने वाले ट्वीट गायब हो गए है और यहाँ तक कि उनके ट्विटर अकाउंट भी गायब हैं।”

इस ट्वीट के साथ यूजर ने जो स्क्रीनशॉट लगाए हैं, उसमें देखा जा सकता है कि सोनू सूद ने कहा, “इंजीनियर तो तू जरूर बनेगा मेरे दोस्त। तैयारी कर।” जो ट्वीट शेयर किया जा रहा है उसमें गायब वह ट्वीट गायब है जबकि जब ऑपइंडिया ने देखा तो यश जैन का ट्वीट नजर आ रहा था।

ऑपइंडिया द्वारा सर्च किया गया ट्वीट और सोनू सूद पर आरोप लगाकर शेयर किया जा रहा ट्वीट

अगले ट्वीट में सोनू सूद ने लिखा है, “पिता जी का श्राद्ध कल पूरी विधि पूर्वक होगी भाई।” ये ट्वीट खबर लिखने वक्त तक भी गायब था।

शेयर ट्वीट का स्क्रीनशॉट
ऑपइंडिया द्वारा क्रॉस चेक किया गया ट्वीट

एक ट्वीट में उन्होंने लिखा, “मेरी सुबह की शुरुआत आपकी नई टाँग से होगी। चल भाई नई टाँग लगवाते हैं आपकी”

शेयर किया जा रहा ट्वीट
ऑपइंडिया द्वारा चेक किया गया ट्वीट

अन्य ट्वीट में लिखा है, “मुबारक हो घर तो आपका कमाल का बन गया है। चलो अब कह सकते हैं कि जलपैगुड़ी में भी हमारा घर है। “

शेयर किया जा रहा ट्वीट
खबर लिखते समय ऑपइंडिया क्रॉस चेक किया गया ट्वीट

इसके बाद कुछ और भी ट्वीट हैं। जैसे एक ट्वीट जिसमें अभिनेता को मजाकिया अंदाज में कहा था, “क्या भाई मैं युम्हेँ टेलीविजन, एक एसी और पॉपकॉर्न भी भेज दूँ।” इसके बाद एक ट्वीट जिसमें उन्होंने एक लड़के को कहा, “मुझे मेरे इंजीनयरिंग के दिन याद दिला दिए। देश का नाम ऊँचा कर अब।”

फिर, वह ट्वीट जिसे रीट्वीट करते हुए उन्होंने मंदिर से पहले किसी गरीब का घर बनाने की बात, और मदद करने की बात कही है, भी गायब है।

गौरतलब है कि इस ट्वीट के थ्रेड में कई यूजर्स हैं जिन्होंने यह देखने के बाद सोनू सूद की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। किसी का कहना है कि उन्होंने मई में सोनू सूद को चैरिटी देने के लिए मैसेज किया था पर अभी तक कोई रिप्लाई नहीं आया।

किसी का कहना है कि आखिर यदि मान लिया जाए कि लोगों ने मदद माँगने के लिए ही अकाउंट बनाए तो भी यह अजीब है कि सारे अकाउंट एक साथ कैसे बंद हो गए। क्या गाँव के सीधे सादे लोग ट्विटर पर सिर्फ मदद माँगने आए और मदद मिलने पर उसे बंद कर दिया? लोगों का कहना है कि यह सब सिर्फ़ फिल्मों में होता है कि एक ट्वीट पर मदद मिल जाए।

एक यूजर लिखता है कि वह इस बात पर बहुत पहले से लोगों का ध्यान आकर्षित करवा रहा था, लेकिन छोटा अकाउंट होने के कारण उस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। इस ट्विटर अकाउंट ने भी सोनू सूद की मंशाा पर सवाल उठाए हैं और कहा कि उनसे अच्छा काम मनीष मुंद्रा ने किया।

ऑपइंडिया ने इस मामले में अभिनेता सोनू सूद से संपर्क करने का कई बार प्रयास किया। लेकिन हमारी बात नहीं हो पाई।

विसर्जन के दौरान मोहम्मद निराला, दानिश और सरफराज ने किया बाँस से हमला: भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति हुई खंडित, कई घायल

भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति का विसर्जन कराने ले जा रहे हिंदू युवकों पर मुस्लिम भीड़ ने लाठी-डंडे और बाँस से हमला कर दिया। मूर्ति पर बाँस से हमला कर क्षतिग्रस्त कर दिया गया। घटना बिहार के मोतिहारी के महिषी थाना के तरनिया गाँव की है। 

इस बाबत हमने बजरंग दल के चटिया अनुमण्डल अध्यक्ष गोलू खेलानी से बात की। उन्होंने बताया कि ये घटना शुक्रवार (सितंबर 18, 2020) को घटित हुई। गोलू खेलानी ने बताया कि शुक्रवार की शाम लगभग 4 बजे कुछ हिंदू युवक भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति का विसर्जन करने के लिए जा रहे थे। रास्ते में थोड़ी दूर मुस्लिम बस्ती पड़ती है। जैसे ही गाड़ी मुस्लिम बस्ती के पास पहुँची, उन लोगों ने मूर्ति ले जाने से मना किया।

गोलू खेलानी के अनुसार, “समुदाय विशेष के लोगों ने चेतावनी दी कि अगर मूर्ति को इस रास्ते से ले जाया जाएगा तो वो लोग उसे तोड़ देंगे, मगर हिंदुओं ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। वो आगे बढ़ने लगे। ये देख मुस्लिम भीड़ आक्रामक हो गई और उन पर हमला कर दिया। पहले उन्होंने गाड़ी पर बाँस से हमला किया। फिर दलित ड्राइवर सुखारी राम पर हमला किया। उनसे गाड़ी की चाबी छीन ली। इसके बाद मूर्ति पर बाँस से हमला कर क्षत-विक्षत कर दिया। इस हमले में कई लोग घायल भी हो गए।”

मूर्ति का विसर्जन करने जा रहे हिंदू युवकों पर हमला करने वाले आरोपितों के नाम मोहम्मद निराला, दानिश और सरफराज है। गोलू खेलानी ने बताया कि जब उन्होंने पुलिस से इसकी शिकायत की, तो पहले तो पुलिस ने केस ही नहीं दर्ज किया और फिर बाद में पुलिस ने हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के खिलाफ FIR दर्ज कर दिया, जबकि हिंदुओं की कोई गलती नहीं थी। विसर्जन करने जा रहे युवकों की संख्या भी 10-15 ही थी। इस घटना के बाद गाँव में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

गौरतलब है कि इससे पहले बिहार के शेखपुरा जिले में सरस्वती मूर्ति विसर्जन के दौरान शनिवार (फरवरी 1, 2020) को 2 सम्प्रदायों के बीच भड़की हिंसा में जेडीयू के एक स्थानीय नेता की मौत हो गई थी। पुलिस ने इस संबंध में 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक शनिवार देर शाम सरस्वती प्रतिमा ले जा रहे जुलूस पर मुस्लिम युवकों ने हमला कर दिया गया था। इसी हमले में जदयू के प्रखंड अध्यक्ष अमित कुमार विश्वास के सिर पर गहरी चोट आई थी। और रविवार को उनकी मौत हो गई थी।

इस मामले में आरोपितों की पहचान इस्माइल खान, सैफुल खान, इश्तियाक खान, शहंशाह खान, अशरफ खान, आसिफ खान, अकबर खान, इरफान आलम के रूप में हुई थी। इनमें से असलम, शहंशाह, आसिफ और अकबर को गिरफ्तार कर लिया गया था।

जम्मू-कश्मीर: बिजली-पानी बिल हाफ, कारोबारियों के लिए ₹1350 करोड़ का पैकेज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत शनिवार (19 सितंबर, 2020) को जम्मू-कश्मीर के कारोबारियों के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 1,350 करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की। घाटी में रोजगार को बढ़ाने के लिए सरकार का यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा, “मुझे आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे राज्य के कारोबारियों के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है। यह कारोबारियों को सुविधा देने के लिए हमारे द्वारा किए गए आत्मनिर्भर भारत और अन्य उपायों के लाभों के अतिरिक्त है।”

उन्होंने कहा, “हमने वर्तमान वित्त वर्ष में बिना किसी शर्त के व्यवसायिक समुदाय से जुड़े हर कर्जदार को 5 प्रतिशत ब्याज छूट देने का फैसला किया है। यह सुविधा 6 महीने के लिए होगी। इससे कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी और राज्य में रोजगार सृजित करने में मदद मिलेगी।”

इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा ने कहा, “एक साल के लिए बिजली और पानी के बिल में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। साथ ही सभी उधार लेने वालों के मामले में मार्च 2021 तक स्टाम्प ड्यूटी में छूट दी गई है। अच्छे मूल्य निर्धारण और पुनर्भगतान विकल्पों के साथ पर्यटन क्षेत्र में लोगों को वित्तीय सहायता देने के लिए जम्मू-कश्मीर बैंक द्वारा स्वास्थ्य-पर्यटन स्कीम की स्थापना की जाएगी।”

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने बताया, “क्रेडिट कार्ड स्कीम के तहत, हथकरघा एवं हस्तशिल्प उद्योग में काम करने वाले लोगों के लिए अधिकतम सीमा को 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 2 लाख रुपए करने का फैसला लिया गया है। इन्हें 7 प्रतिशत ब्याज छूट भी दी जाएगी। एक अक्टूबर से जम्मू एंड कश्मीर बैंक युवा और महिला उद्यमियों के लिए विशेष डेस्क भी शुरू करेगा।”

एलजी ने आगे कहा, ”ये आत्मनिर्भर भारत अभियान के अलावा है। इसके साथ कई बड़े प्रशासनिक कदम भी हमने लिए हैं। इनसे आवाम को आने वाले दिनों में बड़ा लाभ मिलने वाला है।” एलजी मनोज सिन्हा ने बताया, ”जम्मू-कश्मीर में 5 फीसदी इंटरेस्ट सबवेंशन सभी छोटे-बड़े उधार लेने वाले व्यापारियों के लिए बिना किसी भेदभाव के हम कर रहे हैं। इसमें 950 करोड़ रुपये जम्मू-कश्मीर का प्रशासन सीधे मदद कर रहा है।”