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नेपाल में 2 km भीतर तक घुसा चीन, उखाड़ फेंके पिलर: स्थानीय लोग और जाँच करने गई टीम को भगाया

वामपंथी शासन वाले चीन ने नेपाल की सीमा में घुस कर उसकी जमीन पर कब्जा करने का सिलसिला तेज कर दिया है। नेपाल की जमीन पर चीन द्वारा 9 इमारतें खड़ी किए जाने की बात सामने आ रही है। ताज़ा मामला हुमला जिले में स्थित नामखा-6 के लाप्चा गाँव का है। ये इलाका नेपाल के कर्णाली प्रान्त का हिस्सा है। शिकायत मिलने के बाद ‘चीफ डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर (CDO)’ चिरंजीवी गिरी के नेतृत्व में नेपाली अधिकारियों की टीम ने घटनास्थल का दौरा किया।

उनके असिस्टेंट दत्ता राज हमल ने जानकारी दी कि सीडीओ वहाँ 2 दिन का प्रवास करेंगे और चीनी पक्ष से बातचीत करने के बाद उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट सौंपेंगे। ‘नेपाल 24 Hours’ की खबर के अनुसार, सीडीओ की टीम में नेपाल पुलिस, नेपाली सेना, जाँच एजेंसी के अधिकारी और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हैं। जहाँ चीन ने कब्ज़ा किया है, वो भूमि पहाड़ी क्षेत्र में पड़ती है, जहाँ न तो सड़कें हैं और न ही वहाँ से टेलीफोन से सम्पर्क साधा जा सकता है।

इस मामले में नेपाल और चीन के बीच हुई बातचीत का ब्यौरा अभी सामने नहीं आया है। हालाँकि, नेपाली मीडिया के काठमांडू में स्थित सूत्रों का कहना है कि ये एक असामान्य घटना है क्योंकि चीन ने नेपाल की जमीन पर इतनी संख्या में इमारतें खड़ी कर ली हैं। अव्वल तो ये कि नेपाली अधिकारी महीनों तक इस बात से अनजान रहे। इस मामले में नेपाल के बॉर्डर पेट्रोलिंग बल पर भी संदेह जताया जा रहा है, जो इस पर काफी दिनों से चुप है।

विपक्ष सवाल पूछ रहा है कि इतने दिनों से नेपाल सरकार ने इस पर बयान क्यों नहीं दिया? नेपाल में स्थित चीन के दूतावास ने भी इस पर चुप्पी साधी हुई है। नेपाल में ये इमारतें क्यों बनाई गई हैं, इसका कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। सीडीओ गिरी भी जब वहाँ पहुँचे, तो उन्हें चीन के कब्जे वाली जमीन पर नहीं जाने दिया गया और न ही उन्हें तस्वीरें लेने की अनुमति दी गई। नेपाली टीम ने जल्दी-जल्दी में दूर से ही तस्वीरें ली और सिमिकोट लौट आए।

नेपाल की उस जाँच टीम में शामिल एक अधिकारी ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर ‘नेपाली 24 Hours’ को बताया कि चीन ने नेपाल की सीमा में 2 किलोमीटर भीतर तक घुसपैठ की है, पिलर संख्या-12 से भी आगे बढ़ कर भूमि कब्जाई है। वहीं पिलर संख्या-11 का तो कोई अता-पता ही नहीं है कि वो कहाँ गायब हो गया। कहा जा रहा है कि वहाँ अवैध चीनी निर्माण 2010 में ही शुरू हो गया था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वो कई वर्षों से उस तरफ जाने से डरते हैं। एक स्थानीय व्यक्ति ने नेपाली जाँच टीम को बताया कि चीन के लोग अवैध रूप से कब्जाई हुई जमीन के आसपास किसी स्थानीय व्यक्ति को फटकने तक नहीं देते। इसीलिए, स्थानीय लोग अब उधर जाने की कोशिश भी नहीं करते हैं। चीन और नेपाल के विदेश मंत्रालय की चुप्पी पर वहाँ असंतोष है। कई नेपाली अधिकारी भी संदेह के घेरे में हैं।

ज्ञात हो कि हाल ही में नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टी नेपाली कम्यूनिस्ट पार्टी ने यूनिफाइड नेपाल नेशनल फ्रंट के साथ हाथ मिलाकर ग्रेटर नेपाल के लिए एक नया अभियान शुरू किया है। इस अभियान में भारतीय शहरों जैसे देहरादून और नैनीताल को नेपाल का होने का दावा किया है। अपने अवैध दावे में भारतीय शहर उत्तराखंड, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, बिहार और सिक्किम को भी अपने ‘ग्रेटर नेपाल’ अभियान में नेपाल का हिस्सा बताया है।

जेल में मुझे ‘शिक्षित आतंकी’ कहते हैं, पुलिस देती है मानसिक प्रताड़ना: दिल्ली दंगा आरोपित MBA वाली गुलफिशा फातिमा

दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगे के एक आरोपित ने तिहाड़ जेल में बंद रहते हुए पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। सोमवार (सितम्बर 21, 2020) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से दिल्ली की एक अदालत में पेश होते हुए गुलफिशा फातिमा ने ये आरोप लगाए। गुलफिशा फातिमा दिल्ली हिन्दू-विरोधी दंगों की साजिश रचने के आरोप में जेल में बंद है। वो MBA ग्रेजुएट हैं। उसने पुलिस पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया।

कोर्ट द्वारा सभी आरोपितों को उसके समक्ष पेश होने को कहा था, जिसके बाद ये सुनवाई शुरू हुई। दिल्ली पुलिस द्वारा चार्जशीट पेश किए जाने के बाद से ये सुनवाई चल रही है। दिल्ली दंगे की आरोपित गुलफिशा फातिमा ने दावा किया कि उसे जब से जेल में लाया गया है, तभी से वो वहाँ भेदभाव का सामना कर रही है। साथ ही दावा किया कि वहाँ उसे ‘शिक्षित आतंकी’ कहा जाता है। एडिशनल सेशन जज अमिताभ रावल के समक्ष उसने ये बातें कहीं।

अब इस मामले की अग्नि सुनवाई अक्टूबर 3 को होगी। गुलफिशा फातिमा ने धमकी दी थी वो जेल में खुद को नुकसान पहुँचा देती हैं तो इसके लिए सिर्फ जेल प्रशासन ही जिम्मेदार होगा। कोर्ट ने आदेश दिया कि आरोपित के वकीलों को चार्जशीट की एक प्रति दी जाए। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हिन्दू-विरोधी दंगा ममले में 17,000 पन्नों की चार्जशीट पेश की है, जिसमें 15 सीएए विरोधी दंगाइयों को आरोपित बनाया गया है।

इसमें ‘यूनाइटेड अगेंस्ट हेट’ के एक्टिविस खालिद सैफई, कॉन्ग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहाँ, आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन, युवा राजद की नेता मीरान हैदर, और ‘पिंजरा तोड़’ की गुलफिशा फातिमा, सफूरा जरगर, नताशा नरवाल और देवांगना कलिता को आरोपित बनाया गया है। इनके अलावा उमर खालिद, शरजील इमाम, दानिश, परवेज, इलियास और फैजल खान को भी गिरफ्तार किया गया है, जिनका इस चार्जशीट में नाम नहीं है।

आरोपितों के खिलाफ आईपीसी और यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। उधर एक अन्य आरोपित शादाब अहमद ने कोर्ट में याचिका दायर कर के आरोप लगाया कि पुलिस ने उसे धोखे में रख कर हस्ताक्षर ले लिया, जिसे कोर्ट ने रिजेक्ट कर दिया। जस्टिस रावत ने आरोपित के वकील से कहा कि आपने फोन पर बात भी की थी – फिर भी उसने उस दौरान ये बातें क्यों नहीं कही?

आरोपित ने कहा कि 24-26 अगस्त के दौरान जब वो पुलिस की हिरासत में था, तब पुलिस ने उससे विभिन्न कागजातों पर ही हस्ताक्षर करा लिए। उस दौरान वो जेल में ही क्वारंटाइन था और उसे 2 मिनट ही फोन पर बात कराया गया, ऐसा उसने दावा किया है। उसने दावा किया कि उस दौरान उसे इन दस्तावेजों के बारे में कुछ पता नहीं था और बाद में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बात करते हुए उसे ये पता चला कि उनमें क्या था।

अनुराग कश्यप के खिलाफ FIR दर्ज, पायल घोष की शिकायत NCW भी भेजी जाएगी

अभिनेत्री पायल घोष ने मशहूर निर्देशक अनुराग कश्यप पर यौन शोषण मामले में एफआईआर करवा दी है। यह खबर इंडिया टीवी ने कुछ समय पहले दी है। इससे पहले खबर थी कि एक्ट्रेस अपनी शिकायत दर्ज करवाने अपने वकील के साथ ओशिवारा थाने पहुँची थीं मगर उनकी शिकायत वहाँ दर्ज नहीं हुई थी।

पायल घोष के वकील ने मीडिया से बात करते हुए बताया था कि थाने में महिला अधिकारी मौजूद न होने के कारण शिकायत नहीं हो पाई। इसके अलावा थाने का क्षेत्राधिकार भी तय नहीं था क्योंकि घटना वर्सोवा थाने के अधिकार क्षेत्र में हुई थी। उनके वकील नितिन सतपूते ने यह भी बताया था कि वह आज दोपहर (कुछ खबरों में मंगलवार तक) तक अपनी शिकायत दर्ज करवा देंगे। इसके अलावा NCW के समक्ष भी शिकायत करेंगे।

नितिन सतपुते ने कहा कि पायल घोष के साथ साल 2014 में छेड़छाड़ की गई और अनुराग कश्यप ने घर पर बुरा व्यवहार किया। ऐक्ट्रेस ने पहले शिकायत दर्ज करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें धमकी दी गई थी। उन पर दबाव डाला गया था कि अगर शिकायत दर्ज करोगी तो बहिष्कार कर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ यह मामला दिन पर दिन तूल पकड़ता जा रहा है वहीं अनुराग कश्यप ने कई ट्वीट करके इन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक ट्वीट में लिखा, “क्या बात है, इतना समय ले लिया मुझे चुप करवाने की कोशिश में,चलो कोई नहीं। मुझे चुप कराते कराते इतना झूठ बोल गए कि औरत होते हुए दूसरी औरतों को भी संग घसीट लिया। थोड़ी तो मर्यादा रखिए मैडम। बस यही कहूँगा कि जो भी आरोप हैं आपके सब बेबुनियाद हैं।”

उनकी वकील प्रियंका खिमाणी ने भी बयान जारी करते हुए कहा, “मेरे क्लाइंट अनुराग कश्यप को यौन उत्पीड़न के उन झूठे आरोपों को मानसिक आघात पहुँचा है। ये सारे आरोप झूठे हैं और बुरी भावना से लगाए गए हैं। बहुत दुखद है कि मीटू जैसे ज़रूरी सामाजिक मूवमेंट को हथियार बनाकर किसी के चरित्र पर आघात करने की कोशिश की गई है। इस तरह के झूठे आरोप, मी टू से जुड़े उन पीड़ितों के लिए आघात है जो सच में ऐसी कठिन परिस्थितियों से गुज़रे हैं।”

इसके अलावा अनुराग कश्यप की पूर्व पत्नियों ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करके अनुराग कश्यप को अपना समर्थन दिया है। वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने ट्विटर पर इस मामले पर सवाल पूछा कि शिकायत वास्तविक है, इसका निर्णय कौन लेगा, कौन नहीं? क्या यह इस पर निर्भर करता है कि किसके ख़िलाफ़ शिकायत है? क्या सही व गलत पर निर्णय लेने से पहले हर शिकायत की जाँच सही से नहीं होनी चाहिए? महिलाओं को भी कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए न कि केवल नाम बदनाम करना चाहिए।

यहाँ बता दें, रेखा शर्मा का यह ट्वीट राहुल ईस्वर के ट्वीट पर है, जिसमें उन्होंने सवाल उठाया है, “कल को यह सब आपके साथ, आपके पिता, भाई और बेटे के साथ हो सकता है। कोई पुलिस में जाने के बजाय मीडिया में आरोप लगा सकता है।”

रेखा शर्मा के इस ट्वीट पर विनोद कापड़ी का रिप्लाई आया। उन्होंने लिखा, “हाँ। किसी को भी आधिकारिक रूप से शिकायत करनी चाहिए। और आपने तो दो दिन पहले कह दिया था कि शिकायत भेजिए। पता नहीं शिकायत पहुँची की नहीं” जिस पर रेखा शर्मा ने जवाब दिया कि अभी तक नहीं।

विश्वास के संकट से जूझ रहा UN, व्यापक सुधारों की सख्त जरूरत: 75वीं वर्षगाँठ पर PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के 75 वर्ष पूरे होने के मौके पर अपने सम्बोधन में कहा कि आज UN ‘विश्वास के संकट’ से जूझ रहा है और बिना सुधारों के इसका समाधान नहीं किया जा सकता है। पीएम मोदी ने कहा कि विश्व को आज एक व्यापक सुधारों वाले बहुपक्षीय ढाँचे की ज़रूरत है, जो आज की वास्तविकता के हिसाब से हो, सभी हितधारकों को आवाज़ दे, समसामयिक चुनौतियों के समाधान की ओर प्रयास करे और जनहित में काम करे।

बता दें कि भारत ने UN की सुरक्षा परिषद में चुने हुए अस्थायी प्रतिनिधि के रूप में एक सीट प्राप्त करने में कामयाबी पाई है और जनवरी 1, 2021 को उसका कार्यकाल शुरू होगा, जो 2 वर्षों का होगा। इसीलिए, पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा UN में व्यापक सुधारों की बात करना और बहुपक्षीय ढाँचे को नया रूप रूप देने की पैरवी करना महत्वपूर्ण है। पीएम ने स्पष्ट कहा कि हम पुराने ढाँचे को लेकर आज की चुनौतियों का सामना नहीं कर सकते।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (सितम्बर 21, 2020) को संयुक्त राष्ट्र जनरल असेम्बली की एक उच्च-स्तरीय बैठक को सम्बोधित करते हुए उक्त बातें कहीं, जो UN की 75वीं वर्षगाँठ के मौके पर आयोजित की गई थी। इस अवसर पर 193 सदस्यीय जनरल असेंबली ने आगे के समय को ध्यान में रखते हुए एक राजनीतिक घोषणापत्र को स्वीकृत किया, जिसमें आतंकवाद से लड़ाई के लिए पूरे तंत्र को मजबूत करने की बात की गई है।

इसमें बहुपक्षीय ढाँचे में सुधार, समावेशी विकास और कोरोना वायरस जैसी आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर तैयारियों का खाका तैयार किया गया है। पीएम मोदी ने UN में सुधारों की बात करते हुए कहा कि आज की इंटरकनेक्टेड दुनिया में ये आवश्यक है। साथ ही आश्वासन दिया कि भारत इस दिशा में सभी देशों के साथ मिल कर काम करेगा। भारत कहता आ रहा है कि 1945 में गठित UN सुरक्षा परिषद आज की चुनौतियों का सामना करने में अक्षम है और इसमें भी सुधार की ज़रूरत है।

अमेरिका, यूके, फ़्रांस और रूस सुरक्षा परिषद में भारत के लिए स्थायी सीट की दावेदारी का समर्थन कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे कामकाज के तौर-तरीके तेज होने चाहिए और साथ ही आजकल की परस्थितियों के अनुकूल भी। उन्होंने सेक्रेटरी-जनरल में चल रहे सुधारों का समर्थन करते हुए UN के सभी 3 बड़े संगठनों में बदलाव की अपेक्षा की। उन्होंने इकोनॉमिक और सोशल काउन्सिल में भी सुधारों की बात कर के उन्हें नई ऊर्जा देने को कहा।

पीएम मोदी ने UN की 75वीं वर्षगाँठ पर दिया सम्बोधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज से 75 साल पहले जब दुनिया युद्ध की विभीषिका से जूझ रही थी कि आशा की नई किरण आई। उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार पूरी दुनिया के देशों की एक संस्था का गठन हुआ। उन्होंने बताया कि भारत UN संस्थापक चार्टर का हस्ताक्षरकर्ता है और उसने वो ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की विचारधारा में विश्वास रखता है, जिसमें पूरी दुनिया को एक परिवार माना गया है – इसी सोच के साथ भारत ने इस महान कार्य का समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि UN की वजह से आज दुनिया एक बेहतर जगह है। उन्होंने भारत की प्रबल भागीदारी वाले UN ‘पीसकीपिंग मिशन’ के लिए बलिदान देने वाले सैनिकों सहित उन सभी लोगों को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले काम करते हुए बलिदान दिया। 71 में से 50 ‘पीसकीपिंग मिशन’ में भारत ने 2 लाख सैनिकों का सहयोग दिया है। पीएम मोदी ने आधुनिक डिजिटल तकनीक का लाभ उठाने, क्लाइमेट चेंज का समाधान करने और भेदभाव मिटाने की बात की।

UN के तजा सुधारों वाले डिक्लेरेशन में किसी को भी पीछे नहीं छोड़ने, पृथ्वी को बचाने, अंतरराष्ट्रीय न्याय प्रणाली के हिसाब से न्याय दिलाने, महिलाओं और बच्चियों को केंद्र में रखने, विश्वास बढ़ाने, डिजिटल सहयोग मजबूत करने, UN को अपग्रेड करने और परस्पर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय फंडिंग को मजबूती देने युवाओं की आवाज़ सुनने और उनके साथ काम करने पर बल दिया गया।

शो नहीं देखना चाहते तो उपन्यास पढ़ें या फिर टीवी कर लें बंद: ‘UPSC जिहाद’ पर सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़

सुदर्शन न्यूज़ के कार्यक्रम ‘UPSC जिहाद’ के प्रसारण पर रोक लगाने की माँग करने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि इस कार्यक्रम में ज़कात फ़ाउंडेशन पर आरोप लगाए जाने से जिनलोगों को परेशानी हैं वे टीवी को नज़रअंदाज़ कर उपन्यास पढ़ सकते हैं या फिर टीवी बंद कर सकते हैं।

अभियोजन पक्ष के वकील की दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह बात कही। अभियोजन पक्ष कहना था कि ‘UPSC जिहाद’ कार्यक्रम में सुदर्शन न्यूज़ के एडिटर इन चीफ़ सुरेश चव्हाणके ने जो कहा है वह हेट स्पीच की श्रेणी में आता है। अभियोजन पक्ष के वकील ने यह आरोप भी लगाया था कि जो तस्वीरें उम्मीदवारों को परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रेरित कर सकती हैं, उसे कार्यक्रम में गलत रूप में पेश कर दिखाया गया है। इतना ही नहीं कार्यक्रम में उन्हें जिहादी षड्यंत्र रचने वाले की तरह दिखाया गया है।

दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि किसी ने दर्शकों पर वह कार्यक्रम देखने का दबाव नहीं बनाया है। जिन लोगों को उस कार्यक्रम से किसी भी तरह की समस्या है, वह उससे किनारा कर सकते हैं। न्यायालय को केवल एक सूरत में इस केस की सुनवाई में समय खर्च करना चाहिए, अगर वह ज़कात फ़ाउंडेशन पर लगाए गए आरोपों से संबंधित है। इसके अलावा मामले की सुनवाई का कोई और आधार नहीं होना चाहिए।

इसके पहले 3 न्यायाधीशों की पीठ जिसमें न्यायाधीश चंद्रचूड़ के अलावा इन्दू मल्होत्रा और केएम जोसफ शामिल हैं, ने कार्यक्रम के प्रसारण पर रोक लगाने का आदेश दिया था। न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने टोपी, दाढ़ी, हरे रंग और बैकग्राउंड में आन के चित्रण को लेकर आपत्ति जताई थी।     

सुदर्शन चैनल का पक्ष रखने वाले अधिवक्ता ने कहा, कार्यक्रम में ज़कात फ़ाउंडेशन को मिलने वाली फंडिंग पर सवाल उठाया गया था। जिस फंडिंग के ज़रिए परीक्षाओं की कोचिंग की आर्थिक मदद की जाती है। इसके अलावा सुरेश चव्हाणके ने कहा था, “देश हित के लिए इस मुद्दे पर सार्वजनिक चर्चा होना बहुत ज़रूरी है कि ज़कात फ़ाउंडेशन जैसी संस्थाओं को फंडिंग कैसे मिलती है?” उन्होंने यह भी कहा कि पूरे 4 कार्यक्रम की शृंखला में ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि एक समुदाय के किसी व्यक्ति को UPSC का हिस्सा नहीं बनना चाहिए।

आज इस मामले में ऑपइंडिया, इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट और अपवर्ड ने ‘इंटरवेंशन एप्लीकेशन’ (हस्तक्षेप याचिका) दायर की थी। ‘फ़िरोज़ इक़बाल खान बनाम यूनियन ऑफ इंडिया’ मामले में अनुमति-योग्य फ्री स्पीच को लेकर रिट पेटिशन दायर की गई थी।

‘हस्तक्षेप याचिका’ में कहा गया है, “सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचार के लिए जो मुद्दे आए हैं, जाहिर है कि उसके परिणामस्वरूप फ्री स्पीच की पैरवी करने वालों पर प्रकट प्रभाव पड़ेगा। साथ ही ऐसी संस्थाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा, जो जनता के लिए सार्वजनिक कंटेंट्स का प्रसारण करते हैं। इसलिए याचिकाकर्ता की ओर से ये निवेदन है कि इन्हें भी इस मामले में एक पक्ष बनाया जाए। इस प्रक्रिया में एक पक्ष बना कर भाग लेने की अनुमति दी जाए।”

D मतलब दीपिका पादुकोण ही, तलब करने की तैयारी में एनसीबी, मैनेजर को पहले ही भेज चुकी है समन

बॉलीवुड में ड्रग्स रैकेट को लेकर बड़ी जानकारी सामने आ रही है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि ड्रग चैट जिन लोगों के बीच बात हो रही थी, उसमें D का मतलब दीपिका पादुकोण ही है। बताया जा रहा है कि श्रद्धा कपूर और सारा अली खान के साथ ही दीपिका को भी एनसीबी इसी हफ्ते समन भेज सकती है।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में एनसीबी ड्रग्स ऐंगल की जाँच कर रही है। इससे पहले खबर आई थी कि दीपिका की मैनेजर करिश्मा प्रकाश को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने समन भेजा है। करिश्मा से मंगलवार (सितंबर 22, 2020) को पूछताछ हो सकती है।

इससे पहले इस मामले में रिया चक्रवर्ती, सारा अली खान, रकुलप्रीत सिंह और श्रद्धा कपूर का नाम सामने आ चुका है। खबर है कि सारा अली खान और श्रद्धा कपूर को एनडीपीएस एक्ट की धारा 67 के तहत इसी हफ्ते समन भेजा जाएगा। इनके साथ सिमोन खंबाटा और रकुलप्रीत का नाम भी आ रहा है। 

रिया चक्रवर्ती ने कथित तौर पर पूछताछ में स्वीकार किया था कि उन्होंने सारा अली खान, श्रद्धा कपूर और रकुलप्रीत सिंह और सुशांत के साथ लोनावला में पार्टी की थी। NCB ने सुशांत सिंह राजपूत के पूर्व बिजनेस मैनेजर श्रुति मोदी और टैलेंट मैनेजर जया शाह से भी पूछताछ की है।

जया शाह के कई एक्ट्रेस के साथ चैट सामने आए हैं, जिसमें वो ड्रग्स की बात कर रही हैं। दीपिका पादुकोण के मैनेजर करिश्मा प्रकाश का जया शाह के साथ एक फोटो सामने आया है। हालाँकि फिलहाल ये साफ नहीं हो पाया है कि करिश्मा प्रकाश को एनसीबी ने क्यों तलब किया है।

वहीं कुछ न्यूज चैनलों ने कई बड़े बॉलीवुड सेलेब्स के बीच ड्रग्स को लेकर हुई व्हाट्सएप चैट का भी खुलासा किया था। इसमें बॉलीवुड के कई सितारे जाँच के घेरे में आ सकते हैं। इस चैट में बॉलीवुड के 5 टॉप ऐक्टर्स के नाम सामने आए हैं। चैट के दौरान जो नाम दिख रहे हैं वह सब एक अक्षर (जैसे- N,J,S,D,K) में हैं। इस चैट में ड्रग्स के लेन-देन की बात हुई है। कथित तौर पर ये सभी A ग्रेड के कलाकार हैं। अब बताया जा रहा है कि ड्रग चैट की D यानी दीपिका पादुकोण हैं और जिस K से ‘माल’ यानी ड्रग्स मॉंग रही हैं, वह असल में करिश्मा हैं।

ड्रग्स मामले में रिया चक्रवर्ती 8 सितंबर को गिरफ्तार हुई थीं। उसके बाद से वे मुंबई की भायखला जेल में बंद हैं। 2 बार उनकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। रिया पर आरोप है कि वे सुशांत के लिए ड्रग्स का प्रबंध करती थीं। दावा है कि रिया ने करीब 25 बॉलीवुड सेलेब्स का नाम एनसीबी के सामने लिया है, जो ड्रग्स का सेवन करते हैं। सुशांत केस में ड्रग्स कनेक्शन का खुलासा रिया के व्हाट्सएप चैट सामने आने के बाद हुआ था।

‘ये लोग मुझे फँसा सकते हैं, मुझे डर लग रहा है, मुझे मार देंगे’: मौत से 5 दिन पहले सुशांत का परिवार को SOS

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत 14 जून को मुंबई के बांद्रा स्थित घर में मृत पाए गए थे। सुशांत की मौत के मामले में सीबीआई, ईडी और एनसीबी जैसी एजेंसियाँ जाँच कर रही हैं। वहीं, इस केस में बड़ा खुलासा हुआ है कि सुशांत ने मौत से पाँच दिन पहले यानी 9 जून को अपनी बहन मीतू को फोन कर अपने डर को लेकर बात की थी। एक्टर की बातों से लगा कि उनकी जान खतरे में हैं। सुशांत ने कहा था, “मुझे डर लग रहा है, मुझे मार देंगे।”

सुशांत को यह चिंता तब हुई जब रिया चक्रवर्ती 8 जून को उनका घर छोड़कर और लैपटॉप, कैमरा, हार्ड ड्राइव जैसी चीजें अपने साथ लेकर चली गईं थीं। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुशांत सिंह राजपूत ने मौत से 5 दिन पहले अपनी बहन मीतू सिंह को 9 जून को एसओएस (SOS) किया।

सुशांत ने अपनी बहन से कहा, “ये लोग मुझे फँसा सकते हैं, मुझे डर लग रहा है, मुझे मार देंगे।” रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सुशांत ने रिया चक्रवर्ती से भी संपर्क करने की कोशिश की, जो उन्हें 8 जून को छोड़कर चली गई थीं और ब्लॉक कर दिया था।

खबर के अनुसार इस मैसेज में सुशांत ने पहले यह मेंशन किया था कि उन्होंने रिया को भी कई बार कॉल करने की कोशिश की थी। लेकिन रिया ने उनका कॉल रिसीव नहीं किया। इसमें लिखा था, “मेरा उससे बात करना बहुत जरूरी है, क्योंकि मुझे डर है कि वे लोग मुझे किसी चीज में फँसा देंगे।”

सुशांत सिंह राजपूत के द्वारा अपनी बहन मीतू से कॉल के दौरान की गईं बातों से सवाल उठता है कि आखिर उनको किन लोगों से डर था और उन्हें किन चीजों में फँसाए जाने का डर था। सुशांत ने अपनी जान के खतरे को लेकर भी आशंका जताई थी।

पिछले दिनों सुशांत के फ्लैटमेट सिद्धार्थ पिठानी ने सीबीआई के सामने कबूल किया है कि सुशांत, दिशा सालियान की मौत के बारे में सुनकर डर गए थे। सिद्धार्थ पिठानी ने कहा था, “सुशांत दिशा की मौत की खबर सुनकर बेहोश हो गए थे। जब होश में आए तो उन्होंने कहा था कि वे लोग मुझे मार डालेंगे। बाद में उन्होंने अपनी सुरक्षा बढ़ाने की भी बात कही थी। इतना ही नहीं रिया को लगातार फोन भी लगाते रहे थे, क्योंकि वे उनका लैपटॉप, हार्ड ड्राइव और कैमरा ले गईं थीं और सबके पासवर्ड जानती थीं।”

गौरतलब है कि सिद्धार्थ पिठानी ने जाँच टीम को पूछताछ के दौरान बताया था कि 8 जून को रिया ने फ्लैट छोड़ने से पहले 8 हार्ड ड्राइव नष्ट करवाई थी। सिद्धार्थ ने बताया था कि हार्ड ड्राइव के लिए बाकायदा आईटी प्रोफेशनल को बुलवाया गया था। लेकिन यह साफ नहीं किया कि उसे बुलाया किसने था। पिठानी के अनुसार, इस दौरान सुशांत और रिया दोनों कमरे में मौजूद थे और सब कुछ देख रहे थे। उनके अलावा डोमेस्टिक हेल्पर दीपेश सावंत और बावर्ची नीरज भी कमरे में थे।

ऑपइंडिया का असर: ‘UN लिंक्ड’ संगठन से प्रशंसा-पत्र मिलने वाला ट्वीट TMC ने डिलीट किया

20 अगस्त को 2020 को हमने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार के बारे में एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसके तहत हमने ‘यूनाइटेड नेशन’ से जुड़े एक जापान आधारित गैर-लाभकारी संगठन से कोरोना वायरस महामारी के बीच ममता सरकार के काम को सराहने और राज्य मंत्री निर्मल माजी को प्रशंसा-पत्र भेजने की पड़ताल की थी। इस ‘अच्छी खबर’ को सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी शेयर किया गया था।  

ऑपइंडिया की स्टोरी के बाद, TMC ने पश्चिम बंगाल सरकार को मिले प्रशंसा-पत्र वाला ट्वीट चुपके से डिलीट कर दिया। हालाँकि, डॉ. निर्मल माजी के ट्विटर टाइमलाइन पर अभी भी यह पत्र उपलब्ध है।

समाचार एजेंसी पीटीआई ने UNWPA को ‘UN से जुड़े एनजीओ’ के रूप में प्रकाशित किया और यही दावा कई अन्य मीडिया संस्थानों द्वारा भी किया गया। यह पत्र TMC और ममता बनर्जी के समर्थकों द्वारा बड़े स्तर पर सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा था। हालाँकि हमने अपनी पड़ताल के समय ऐसा कोई प्रमाण नहीं पाया।

इस संस्था ने खुद को ‘यूनाइटेड नेशन’ से जुड़ा हुआ बताया था, जबकि जिस यूनाइटेड नेशंस की प्रशंसा का कोई व्यक्ति या देश या फिर राज्य इन्तजार कर सकता है, वह ‘यूनाइटेड नेशंस’ (United Nations) है, ना कि ‘यूनाइटेड नेशन (United Nation)!’

सच्चाई यह है कि ममता बनर्जी के ‘साम्राज्य’ को कोरोना वायरस महामारी में अच्छे काम के लिए ‘प्रमाण-पत्र’ मिला था। हालाँकि, यह पत्र जापान के संगठन द्वारा नहीं, बल्कि इसके भारत के प्रतिनिधि यानी, महामहिम पिंकी दत्ता उर्फ ​​प्रिया दत्ता, जो मोदी विरोधी और ममता बनर्जी की बड़ी समर्थक हैं, द्वारा बेहद खराब भाषा में लिख कर दिया गया था। इसके अलावा, यह संगठन संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़ा नहीं है, लेकिन उसके जैसा प्रतीत जरूर होता है।

जब ऑपइंडिया ने इन सम्बन्ध में UNWPA से सम्पर्क कर पूछा कि क्या यूनाइटेड नेशन ने वास्तव में ममता बनर्जी सरकार को पत्र लिखकर उन्हें सम्मानित किया, तो उन्होंने बताया कि मीडिया में चलाई जा रही इस इस प्रकार की बातें एकदम फर्जी हैं और ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया गया है। दो घंटे बाद, संगठन ने फिर से ऑपइंडिया को जवाब दिया। इस बार यह दावा करते हुए लिखा कि हालाँकि, उन्होंने (जापान कार्यालय) पत्र नहीं लिखा था, लेकिन सम्भवतः भारत स्थित कार्यालय, जो कि एचई पिंकी दत्ता उर्फ ​​प्रिया दत्ता द्वारा चलाया जाता है, ने जारी किया हो।

यह खबर टाइम्स ऑफ इंडिया, डेक्कन हेराल्ड और आउटलुक सहित कई समाचार पोर्टलों और कई अन्य लोगों द्वारा कवर की गई। पीटीआई का दावा था कि ममता बनर्जी के ‘साम्राज्य’ की प्रशंसा करने वाला यह ‘एनजीओ’ एक गैर-लाभकारी संगठन (नॉन प्रोफिटेबल आर्गेनाइजेशन) है, जो संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के नागरिक विभाग के साथ पंजीकृत है।

इस NGO की वेबसाइट पर भी कोई लिंक, रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ ही UN से इसकी वैधता सम्बन्धी किसी भी प्रकार का कोई दस्तावेज मौजूद नहीं था। इसके अलावा इस संस्था की वेबसाइट पर इसके सोशल मीडिया एकाउंट्स की आधे से ज्यादा लिंक काम नहीं कर रही थे या फिर वो अकाउंट मौजूद ही नहीं थे।

इन सब चीजों को देखकर मन में संदेह होना चाहिए था, सवाल उठना चाहिए था, लेकिन ऐसा लगता है कि ममता बनर्जी और तृणमूल कॉन्ग्रेस की सराहना करने की उत्सुकता में मीडिया ने इसे नजरअंदाज कर दिया था।

‘क्या तुम्हारे पास माल है’: सामने आई बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस के बीच हुई ड्रग चैट

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े ड्रग्स मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की जाँच में कई बड़े बॉलीवुड सेलेब्स फँसते नजर आ रहे हैं। इस मामले में हाल ही में सारा अली खान और श्रद्धा कपूर का नाम सामने आया है। वहीं सोमवार (सितंबर 21, 2020) को कुछ न्यूज चैनलों ने कई बड़े बॉलीवुड सेलेब्स के बीच ड्रग्स को लेकर हुई व्हाट्सएप चैट का खुलासा भी किया।

इन ड्रग चैट्स में जिन बॉलीवुड सेलेब्स के नाम सामने आए हैं, उनके नाम D, K, N, J, S से शुरू होते हैं। कथित तौर पर ये सभी A ग्रेड के कलाकार हैं। ये सभी ड्रग्स को लेकर आपस में व्हाट्सएप के जरिए बात कर रहे हैं। रिपब्लिक टीवी ने जिन दो टॉप एक्ट्रेसेस के बीच ड्रग्स चैट दिखाई है, उनके नाम D और K से शुरू होते हैं।

बताया जा रहा है कि इनमें से D अक्षर वाली एक्ट्रेस वर्तमान की टॉप एक्ट्रेस है, वहीं K अक्षर वाली एक्ट्रेस 90 के जमाने की टॉप एक्ट्रेस है। दोनों के बीच हुई ये बातचीत 28 अक्टूबर 2017 की बताई जा रही है।

D ने K से पूछा क्या तुम्हारे पास ‘माल’ है?

सुबह 10.03 बजे- (+91-992——-) D ने लिखा- K क्या तुम्हारे पास ‘माल’ है? 

सुबह 10.05 बजे- (+91-961——-) K ने लिखा- है, लेकिन घर पर है। मैं अभी बांद्रा में हूँ। 

सुबह 10.05 बजे- K ने लिखा- अगर तुम्हें चाहिए तो मैं अमित से बोल देती हूँ। 

सुबह 10.07 बजे- D ने लिखा- हाँ, जरूर। 

सुबह 10.08 बजे- K ने लिखा- अमित के पास है, वो ला रहा है। 

सुबह 10.12 बजे- D ने लिखा- ‘हैश’ (Hash) ला रहा है ना? 

सुबह 10.12 बजे- D ने फिर लिखा- ‘वीड’ नहीं चाहिए। 

सुबह 10.14 बजे- K ने लिखा- तुम कोको के यहाँ कितनी बजे आ रही हो? 

सुबह 10.15 बजे- D ने लिखा- 11.30 से 12 के बीच।

सुबह 10.15 बजे- D ने फिर से लिखा- शैल वहाँ कब तक रहेगी? 

K ने लिखा- मुझे लगता है उसने 11.30 तक का कहा है, क्योंकि उसे 12 बजे कहीं और पहुँचना है।

अन्य चैट में N,J और S से हुई बातें

वहीं टाइम्स नाऊ के हाथ लगी पर एक अन्य चैट में N, J और S अक्षर से शुरू होने वाली एक्ट्रेस के बीच बातचीत हुई है। 

जिसमें N ने J से कहा- तुमने मुझसे अच्छी MD (ड्रग्स) देने का वादा किया था। हम लोग पार्टी करेंगे। 

जवाब में J ने S से कहा- तुम मुझे पेडलर कैसे बना सकती हो। मैं CBD ऑयल भेज रही हूँ।

सामने आई ये चैट हंगामा मचा देने वाली है। सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले की जाँच कर रही सीबीआई की पड़ताल के इधर ड्रग्स मामले में काफी कुछ है जो सामने आ रहा है। इससे पहले जया साहा और रिया चक्रवर्ती की लीक हुई व्हाट्सएप चैट से ये राज खुला था कि दोनों ड्रग्स के मामले में न सिर्फ लिप्त है, बल्कि जया साहा ने ही रिया को कुछ बूँदे चाय या कॉफी के साथ सुशांत को पिलाने की बात भी कही थी। जिससे 30-40 मिनट में एक्टर पर इसके असर होने का इशारा भी दिया था।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में ड्रग्स एंगल की जाँच कर रही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने सोमवार (सितंबर 21, 2020) को अभिनेता की पूर्व मैनेजर श्रुति मोदी और उनकी टैलेंट मैनेजर जया साहा को पूछताछ के लिए बुलाया। इनसे पूछताछ के माध्यम से बॉलीवुड में ड्रग्स के कई पहलू सामने आ सकते हैं। जया साहा के फोन से प्राप्त आँकड़ों से पता चलता है कि बॉलीवुड सितारे उन्हें CBD तेल और ड्रग्स की आपूर्ति करने के लिए कहते थे।

सेना में महिलाओं को नया मोर्चा: नौसेना के युद्धपोत पर पहली बार तैनाती, राफेल भी उड़ाएँगी

भारतीय वायु सेना बहुत जल्द राफेल स्‍क्‍वाड्रन में महिला पायलट की तैनाती करने वाली है। फ़िलहाल महिला पायलट की अंबाला में ‘कनवर्ज़न ट्रेनिंग’ जारी है ताकि वे जल्द राफेल उड़ाने के लिए तैयार हो जाएँ। इसके अलावा भारतीय नौसेना ने भी आज (21 सितंबर 2020) दो महिला अधिकारियों को युद्धपोत पर तैनात किया गया है। इन्हें हेलीकॉप्टर स्ट्रीम में ऑब्जर्वर के तौर पर नियुक्त किया गया है। ऐसा पहली बार हुआ है।

इंडिया टुडे में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़ जो महिला पायलट पहले MiG-21 लड़ाकू विमान उड़ाती थी, उन्हें अब फुल फाइटर प्रक्षिक्षण कोर्स में शामिल किया गया है। बहुत जल्द ही वह 17 स्क्वाड्रन में सक्रिय भूमिका निभाती हुई नज़र आएँगी। ख़बरों में इस बात की पुष्टि की गई है कि महिला और पुरुष दोनों के लिए प्रशिक्षण नियमावली एक जैसी होगी। चाहे महिला हो या पुरुष, उन्हें लड़ाकू विमान बदलते समय कनवर्ज़न ट्रेनिंग के हर चरण से गुज़रना होगा। फ़िलहाल भारतीय वायु सेना में कुल लड़ाकू विमान उड़ाने वाली 10 महिला पायलट हैं। 

इन महिला पायलटों ने अभी तक कई श्रेणी के लड़ाकू विमान उड़ाए हैं, जिसमें Su-30 MKI और MiG-29 मुख्य हैं। केंद्र सरकार ने इस संबंध में साल 2016 के दौरान ही अनुमति का आदेश जारी किया था। तत्कालीन राज्य रक्षा मंत्री सुभाष भामरे ने कहा था, “रणनीतिक आवश्यकताओं को मद्देनज़र रखते हुए महिला पायलटों को भारतीय वायु सेना में विमान उड़ाने संबंधी गतिविधियों के लिए शामिल किया जा रहा है। समय-समय पर इसकी समीक्षा भी होती रहेगी।”       

वहीं दूसरी तरफ दो महिला अधिकारियों सब लेफ्टिनेंट कुमुदिनी त्यागी और सब लेफ्टिनेंट रीति सिंह को ‘ऑब्जर्वर’ का पद दिया गया। इस पद के ज़रिए महिला अधिकारियों को नौसेना में ‘वॉरशिप फ्रंटलाइन’ की अगुवाई करने का मौक़ा मिलेगा। भारतीय नौसेना के प्रवक्ता (कमांडर) विवेक अग्रवाल ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा “बहुत जल्द दोनों महिला अधिकारी अपनी ज़िम्मेदारी निभाती हुई नज़र आएँगी। यह वॉरशिप से बतौर एयरबोर्न कॉम्बटेंट काम करने वाला महिला अधिकारियों का पहला दस्ता है। पहले महिला अधिकारियों का विंग एयरक्राफ़्ट में प्रवेश प्रतिबंधित था, खासकर जो तट से उड़ान भरते और उस पर उतरते हैं।”

सब लेफ्टिनेंट रीति सिंह और लेफ्टिनेंट कुमुदिनी त्यागी भारतीय नौसेना के कुल 17 अधिकारियों के समूह का हिस्सा होंगी। इसमें 4 महिलाएँ और इंडियन कोस्ट गार्ड के कुल 3 अधिकारी (रेगुलर बैच के 13 अधिकारी और शॉर्ट सर्विस कमीशन की कुल 4 महिला अधिकारी) शामिल होंगी। इन महिला अधिकारियों को आज आज यानी 21 सितंबर को आईएनएस कोच्चि में ‘विंग्स’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।