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मौत वाली रात 4 लोगों ने दिशा सालियान से रेप किया था: चश्मदीद के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में दावा

सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर रहीं दिशा सालियान के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट में चश्मदीद के हवाले से दावा किया गया है कि 8 जून की रात दिशा से चार लोगों ने रेप किया था। इस रात उन्होंने अपने घर पर पार्टी रखी थी। बाद में 14वीं मंजिल से गिरने से उसकी मौत हो गई थी।

मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया था। लेकिन लगातार ऐसे दावे सामने आए हैं जिससे उनकी हत्या किए जाने का शक गहराता जा रहा है। चश्मदीद ने न्यूज नेशन को बताया कि उस रात पार्टी में काफी तेज म्यूजिक था। इसके कारण दिशा सालियान की चीख-पुकार दब गई थी।

चश्मदीद के मुताबिक वह एक एक्टर भी है और मलाड वाले फ्लैट पर उस रात 9 से 9.30 बजे के बीच पहुॅंचा था। उसने बताया कि वह जॉंच एजेंसियों के सामने गवाही देने के लिए भी तैयार है। चश्मदीद के अनुसार दिशा का शव देखने के बाद उसके मंगेतर रोहन राय और उसका दोस्त बांद्रा रेलवे स्टेशन की तरफ भागे और अपने घर जाने वाली पहली ट्रेन पकड़कर चले गए। उसने कहा कि अगर पुलिस चाहे तो रेलवे स्टेशन का सीसीटीवी देख सकती है।

उल्लेखनीय है कि 8 जून की रात मौत होने के बावजूद दिशा का 17 जून तक एक्टिव था। बताया जा रहा है कि उनके फोन से कई इंटरनेट कॉल भी किए गए थे। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि मौत के बाद उनका फोन कौन इस्तेमाल कर रहा था।

इन दावों से अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की तरह ही दिशा सालियान की मौत का रहस्य दिनोंदिन गहराता जा रहा है। इससे पहले मीडिया रिपोर्टों में फोरेंसिक एक्सपर्ट के हवाले से दिशा के शरीर पर दो तरह के निशान मिलने की बात कही गई थी। साथ ही उनके मंगेतर रोहन राय का पता चलने और सीबीआई द्वारा जल्द समन भेजे जाने की बात भी कही जा रही है।

एक फोरेंसिक विशेषज्ञ ने दावा किया था कि दिशा के शव पर दो तरह के चोट के निशान थे। एक गिरने से पहले और दूसरा गिरने के बाद के। रिपब्लिक टीवी पर एक बहस के दौरान फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. दिनेश राव ने कहा, “दिशा के शव पर चोट के पैटर्न को देखकर मैं इसमें एक अहम जानकारी जोड़ना चाहता हूँ। मैंने निश्चित तौर पर दो तरह की चोट के निशान देखे थे। एक चोट ऊँचाई से गिरने की वजह से आई थी और दूसरी गिरने से पहले की है, जिसकी जाँच होनी चाहिए।”

विशेषज्ञ ने यह भी कहा कि या तो दिशा के साथ मारपीट की गई या उन्हें प्रताड़ित किया गया था। या यह भी ही सकता है कि उन्होंने हमले से बचने की कोशिश की हो जो उनकी मौत की वजह बन गई हो। डॉ. दिनेश राव प्रोफेसर और ऑक्सफोर्ड मेडिकल कॉलेज, अस्पताल और अनुसंधान केंद्र, बेंगलुरु में फोरेंसिक चिकित्सा विभाग के प्रमुख रहे हैं। वह किंग्स्टन, जमैका में निदेशक और मुख्य फोरेंसिक पैथोलोजिस्ट रहे हैं।

कुछ दिन पहले, भाजपा नेता नितेश राणे ने दिशा सालियान की मौत पर संदेह जताया था। राणे ने कहा था कि दिशा की मौत आत्महत्या नहीं थी और उनके मंगेतर रोहन राय को सामने आकर पूरा सच बताना चाहिए। रिपब्लिक टीवी के अनुसार शीर्ष जॉंच एजेंसियॉं रोहन पर नजर रख रही हैं और वे जॉंच के दायरे में हैं। राणे ने दावा किया था कि उन्होंने दिशा की मौत के 15 दिन बाद रोहन से बात की थी और उन्हें सब पता है कि 8 जून को दिशा की मौत कैसे हुई।

गौरतलब है कि 8 और 9 जून की मध्यरात्रि को मलाड की 14 वीं मंजिल से गिरने की वजह से दिशा की मौत हो गई थी और मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया था। वहीं सुशांत 14 जून को अपने बांद्रा स्थित आवास पर रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाए गए थे। वर्तमान में तीन एजेंसियाँ- सीबीआई, ईडी और एनसीबी दिवंगत अभिनेता की मौत के मामले से संबंधित विभिन्न एंगल की जाँच कर रही हैं।

चीन के ग्लोबल टाइम्स के लिए लिखने वाला पत्रकार राजीव शर्मा रक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने राजीव शर्मा नाम के स्वतंत्र पत्रकार को ‘ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट’ के तहत गिरफ्तार किया है। उसके पास से रक्षा सम्बन्धी गोपनीय दस्तावेज़ मिले थे। डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (स्पेशल सेल) संजीव कुमार यादव ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि राजीव शर्मा के से पास रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई अहम दस्तावेज़ बरामद किए गए हैं।

उन्होंने बताया 14 सितंबर को राजीव की गिरफ्तारी हुई थी और इसके बाद उसे 6 दिन की पुलिस हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। 22 सितंबर को पटियाला हाउस कोर्ट में उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है। संजीव कुमार यादव ने कहा फ़िलहाल इस मामले में राजीव शर्मा से पूछताछ चल रही है।

राजीव शर्मा दिल्ली के पीतमपुरा का रहने वाला है। वह यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया, द ट्रिब्यून, फ्री प्रेस जर्नल समेत कई समाचार समूहों में बतौर पत्रकार काम कर चुका है। पिछले 2 दशकों से वह बतौर पत्रकार रक्षा क्षेत्र और विदेशी मामलों से जुड़ी ख़बरें करता था। पत्रकार आदित्य राज कौल के अनुसार राजीव शर्मा चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स (समाचार पत्र) के लिए स्तम्भ भी लिखा करता था। चीनी समाचार पत्र के लिए स्तम्भ लिखने का सिलसिला पिछले कई सालों से जारी था। 

हाल ही में राजीव शर्मा ने ग्लोबल टाइम्स के लिए एक लेख लिखा था जिसका शीर्षक था  ‘A rapprochement road map for Beijing and New Delhi benefits both countries’ यानी बीजिंग और नई दिल्ली के लिए मेल मिलाप का रोड मैप जिससे दोनों देशों का फ़ायदा होगा। फिर उसने लिखा 5 मई की रात से गतिरोध पैदा होने के बाद से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रिश्ते खराब हुए हैं। नतीजा यह निकला कि दोनों देशों के बीच जितने भी कूटनीतिक लाभ सम्भव थे वह एक झटके में ख़त्म हो गए। राजीव शर्मा पिछले कई सालों से चीनी समाचार पत्र के लिए इस तरह के लेख लिख रहा है।

इसके अलावा राजीव शर्मा ने लिखा, “दोनों देशों के बीच फ़िलहाल जिस तरह के हालात हैं वह साल 1962 के बाद सबसे तनावपूर्ण स्थिति है। दोनों देशों के पास गँवाने को बहुत कुछ है। इसलिए मूल उद्देश्य यह होना चाहिए कि शांतिपूर्ण और बेहतर आने वाले कल की तैयारी हो न कि सीमा पर दोनों देशों की सेनाएँ आमने-सामने हों।” इसके अलावा राजीव क्विंट और डेली ओ जैसे वामपंथी समाचार समूहों के लिए भी लिखता है। उसका अपना यूट्यूब चैनल भी है जिसका नाम है ‘राजीव किष्किन्धा’। इस चैनल को लगभग 11900 लोगों ने सब्सक्राइब किया है। 

राजीव ने पिछले साल दावा किया था कि उन्हें कनाडा की एजेंसी ने इजरायल के स्पायवेयर पेगासस के जरिए उनके फोन की निगरानी किए जाने को लेकर सतर्क किया था। गिरफ्तारी के बाद उसके ट्विटर एकाउंट जिस पर 5300 फॉलोवर्स थे, उसे बंद कर दिया गया है।  

वे मजहब को कानून से उपर मानते हैं: चीन ने उइगरों को बताया आतंकी और इस्लामी कट्टर

चीन के स्टेट काउंसिल इन्फॉर्मेशन ऑफिस द्वारा प्रकाशित ह्वाइटपेपर में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने संकेत दिए हैं कि उइगर समुदाय के लोगों के साथ जिस तरह का बर्ताव किया जा रहा है, इसके लिए वे खुद ज़िम्मेदार हैं। रिपोर्ट की मानें तो चीन ने उइगर आबादी वाले शिनजियांग प्रांत में साल 2014 से 2019 के बीच लगभग 10.29 लाख लोगों को री एजुकेशन कैम्प में कैद किया।  

ह्वाइटपेपर का शीर्षक है ‘शिनजियांग में रोज़गार और मजदूर अधिकार’ (Employment and Labour Rights in Xinjiang)। चीन ने वैश्विक आलोचना का शिकार होने से बचने के लिए बेहद चालाकी से री एजुकेशन सेंटर को ‘वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर’ नाम दिया है। 

ह्वाइटपेपर में दावा किया गया है कि उइगर आतंकवादी हैं और पुनर्जन्म में विश्वास रखते हैं। वह अपनी धार्मिक कट्टरता की वजह से आधुनिक विज्ञान में बिलकुल भरोसा नहीं करते हैं। चीन की सरकार ने इस्लामी कट्टरपंथ को मद्देनज़र रखते हुए कहा है कि आतंकवादी, अलगाववादी और धार्मिक रूप से कट्टर वर्ग मानता है कि पुनर्जन्म नियत है। इनकी मजहबी शिक्षा राज्य के क़ानून से बड़ी होती है। इसके अलावा उइगर चीनी भाषा सीखने को तैयार नहीं होते हैं। साथ ही आधुनिक विज्ञान को खारिज करते हैं। इतना ही नहीं अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने पर काम नहीं करना चाहते हैं और न ही अपनी जीवनशैली को बेहतर बनाने की इच्छा रखते हैं।

चीन ने कहा है कि अपनी मानसिकता के चलते उइगर समुदाय के लोग अच्छी शिक्षा और रोज़गार से वंचित हैं। नतीजतन, उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए व्यावसायिक कौशल का प्रशिक्षण देना ज़रूरी था। प्रशिक्षण की वजह से शिनजियांग प्रांत में कुशल, जानकार और रचनात्मक मानव संसाधन तैयार हुआ है, जिससे आने वाले समय की आवश्यकताएँ पूरी हों। साल 2014 से 2019 बीच हर साल लगभग 10.29 लाख ग्रामीण और शहरी मजदूरों को प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें लगभग 451400 शिनजियांग के दक्षिणी हिस्से से आते हैं।        

रिपोर्ट के मुताबिक़ साल 2014 से 2019 के दौरान शिनजियांग प्रांत में रोज़गार पाने वाले लोगों की संख्या 11.35 मिलियन से बढ़ कर 13.3 मिलियन हो गई। यह लगभग 17.2 फ़ीसदी की बढ़ोतरी थी। इसके अलावा शहरी रोज़गार में सालाना औसत बढ़ोतरी 4,71,200 थी (दक्षिणी शिनजियांग में 1,4,800 यानी लगभग 31.4 फ़ीसदी)। चीन के शिनजियांग के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 20.59 लाख अतिरिक्त काम करने वाले लोग हैं और 10.65 लाख दक्षिणी हिस्से के ग्रामीण इलाके में हैं। 

इसके अलावा चीन ने ह्वाइटपेपर में यह भी दावा किया है कि शिनजियांग प्रांत में जिन लोगों को रोज़गार हासिल करने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था, उन्हें बड़े पैमाने पर सहायता दी जा रही है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी को रोज़गार मिले। प्रांत के लोगों को उस श्रेणी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे उन्हें स्थायी रोज़गार मिलने में परेशानी नहीं हो।

साल 2017 में शिनजियांग के इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशियोलॉजी एट शिनजियांग एकेडमी ऑफ़ सोशल साइंसेस ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। उसके मुताबिक़ उइगर आबादी बढ़ने की वजह से चीन में राजनीतिक अस्थिरता, गरीबी और कट्टरपंथ को बढ़ावा मिल रहा था। उनकी आबादी का एक बड़ा कारण यह था कि इस्लाम के अनुसार बच्चे पैदा होना अल्लाह का उपहार है। 

जिसके बाद जानकारों से विमर्श करके चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने उइगर समुदाय के लोगों को उनकी असल धार्मिक पहचान हटा कर हान समुदाय (चीनी समुदाय) में तब्दील करने की योजना बनाई। इस दौरान उइगर बच्चों को अनाथालयों में रखा जाता है। साल 2017 के बाद से चीन में उइगर समुदाय के लोगों पर कार्रवाई जारी है। उन्हें धार्मिक गतिविधियों, बाहर यात्रा करने और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने की वजह से जेल में बंद किया जाता है। जेंज़ नाम के शोधकर्ता के अनुसार अधिकारियों ने सीधा आदेश दिया है कि उनकी फर्टिलिटी दर कम की जाए। 

बंगाल और केरल से NIA ने 9 आतंकी पकड़े, हथियारों के लिए दिल्ली आने की थी प्लानिंग

राष्ट्रीय जॉंच एजेंसी (NIA) ने देश में आतंकी संगठन अल-कायदा के मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। केरल और पश्चिम बंगाल से 9 संदिग्ध आतंकी पकड़े गए हैं। ये दिल्ली सहित देश के कई जगहों पर हमले की फिराक में थे। कुछ आतंकी हथियार और गोला-बारूद के लिए दिल्ली आने की योजना बना रहे थे।

एनआईए ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और केरल के एर्णाकुलम में कई जगहों पर छापेमारी कर इन आतंकियों को पकड़ा। शुरुआती जॉंच में पता चला है कि ये सभी सोशल मीडिया के जरिए आतंकवादी संगठन से जुड़े थे। इसके जरिए ही सोशल मीडिया पर पाकिस्तान स्थित अल-कायदा आतंकवादियों द्वारा इन्हें कट्टरपंथी बनाया गया था और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित कई स्थानों पर हमले करने के लिए प्रेरित किया गया था।

यह गिरोह सक्रिय रूप से धन उगाहने में लगा था। एनआईए ने कहा है कि छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में डिजिटल उपकरण, दस्तावेज, जिहादी साहित्य, धारदार हथियार, स्वदेशी आग्नेयास्त्र, घरेलू शारीरिक कवच और होममेड एक्सप्लोसिव डिवाइस बरामद किए गए हैं।

पिछले साल एनआईए ने देशभर में फैले आइएस आतंकियों के नेटवर्क का खुलासा किया था। केंदीय गृह मंत्रालय ने बताया था कि एनआईए ने तेलंगाना, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में आईएस की उपस्थिति से संबंधित 17 मामले दर्ज किए हैं और 122 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

वहीं इस साल की शुरुआत में पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के बदुरिया से 21 साल की कॉलेज छात्रा तानिया परवीन को गिरफ्तार किया गया था। वह आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी हुई थी। लश्कर ने उसे भड़काऊ डाक्यूमेंट्स और विडियो उपलब्ध कराए थे। वह लश्कर के लिए भर्तियाँ करती थी। सरकारी सूचनाओं को पाने के लिए वो हनी-ट्रैपिंग का सहारा लेती थी।

86 साल बाद निर्मली और भपटियाही का ‘मिलन’, पर आत्मनिर्भर बिहार कब बनेगा

निर्मली और भपटियाही मेरे लिए नए नाम नहीं थे। इन इलाकों का नाम करीब-करीब हमेशा से सुन रखा था। जब सुनाई दिया कि यहाँ कोसी रेल मेगा ब्रिज बनने से कोई 86 साल पुराना सपना पूरा हो रहा है तो हमने सोचा कौन सा सपना? भारत नेपाल के पास 516 करोड़ की लगत से बने इस 1.9 किलोमीटर लम्बे पुल से सीमाओं को जोड़ने का महत्व तो हमें समझ में आता था, लेकिन आखिर ये इतना पुराना सपना कैसे होगा? ठीक है एक अलग मिथिलांचल राज्य की माँग का मुद्दा करीब सौ वर्ष पुराना है, लेकिन रेल?

थोड़ी पूछताछ करते ही बुजुर्गों ने पुराने किस्से सुनाने शुरू किए। करीब सवा सौ वर्ष पहले 1887 में ही इस इलाके में रेल आ गई थी। जैसे पटना जंक्शन 1861 का होता है वैसे ही निर्मली और भपटियाही के बीच मीटर गेज की रेल 1887 में बनी थी। फिर सन 1934 में एक भयावह भूकंप और फिर बाढ़ आई। ये भूकंप ऐसा था कि आज भी बुजुर्ग अपने जन्म की तारीख भूकंप के इतने वर्ष बाद के जरिए बताते हैं। इस भूकंप और फिर बाढ़ से ये रेल संपर्क टूटकर बह गया। तबसे लेकर आज तक इस इलाके को दोबारा रेल संपर्क देने की किसी ने नहीं सोची। 2003-04 में केन्द्रीय सरकार ने इसे मँजूरी दे दी।

फिर सरकार बदली और काम धीमा पड़ गया। हर बार की तरह मिथिलांचल वासियों ने मान लिया कि उनके साथ छल हुआ है। कुछ लोगों के पास मगध का मुख्यमंत्री, मिथिलांचल को नहीं देखता का रटा-रटाया जवाब भी था। खैर, इस काम में भाजपा सरकार के केंद्र में दुबारा आने पर फिर से तेजी आई और आख़िरकार ये पुल बनकर तैयार हो गया। इस पुल को पूरा करने में उन प्रवासी मजदूरों का भी प्रबल योगदान रहा जो कोविड-19 नाम के चीन से शुरू हुए वायरस के कारण घर लौट आने को मजबूर हो गए थे। यद्यपि राज्य सरकार विस्थापन पर विशेष ध्यान नहीं देती, मगर केंद्र सरकार के वक्तव्य में उनका भी जिक्र है।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी, कटिहार-न्यू जलपाईगुड़ी, समस्तीपुर-दरभंगा-जयनगर, समस्तीपुर-खगड़िया और भागलपुर-शिवनारायणपुर के रेल मार्ग के इलेक्ट्रिफिकेशन को भी हरी झंडी दिखा दी। इसके अलावा भी दो नए रेल प्रोजेक्ट का उद्घाटन हुआ है और बाढ़-बख्तियारपुर के बीच तीसरी रेल लाइन को भी शुरू किया गया है। जब रेल मंत्री बिहार का ना हो, तब इतना कुछ बिहार को मिले, ऐसी कल्पना नहीं की जा रही होती। जहाँ तक नए रेल पुल का सवाल है, ये सुपौल, अररिया और सहरसा के लोगों को कोलकाता, दिल्ली और मुंबई जैसी जगहों तक पहुँचने के लिए ढेरों सुविधाएँ देता है।

रेलवे से जुड़े होने पर जहाँ एक तरफ कई जगहों तक लोगों का पहुँचना आसान होता है, वहीं दूसरे कई बदलाव भी आते हैं। सबसे पहला बदलाव तो ये आता है कि रेलवे से महानगरों के जुड़े होने पर बिहार से माल बड़े शहरों तक पहुँचना आसान हो जाएगा। कृषि पर निर्भरता वाले राज्य बिहार के लिए ये फलों-सब्जियों के लिए कई नए बाजार खोल देगा। फोर-लेन सड़क के पास होने के कारण भपटियाही में विकास पहले ही रफ़्तार पकड़ चुका था। अब रेल से जुड़ने के बाद कृषि उत्पादों के लिए ये एक नई मंडी के तरह भी जगह बना सकता है। पुराने दौर में जहाँ राजधानी पटना से करीब तीन सौ किलोमीटर दूर होने के कारण ये अनजान सी जगह थी, अब सहरसा-सुपौल जैसे इलाके भी विकास के कदम से कदम मिलकर आगे बढ़ेंगे।

बाकी सवाल ये है कि दिल्ली, कोलकाता या मुंबई जाना ही क्यों पड़ता है? आखिर आत्मनिर्भर बिहार कब बनेगा जहाँ के लोग रोजगार के लिए पलायन करने के बदले रोजगार देने वाले बनें? बिहार में बदलावों की जैसी शुरुआत हो रही है, लगता नहीं कि ये सवाल ज्यादा दिन बाकी रहेगा।

नेहरू-गाँधी परिवार पर उठाया था सवाल: सदन में विपक्ष के हो-हल्ले के बाद अनुराग ठाकुर ने माँगी माफी, जाने क्या है मामला

संसद मे विपक्ष के हंगामे के बाद वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने आज (सितंबर 18, 2020) गाँधी परिवार पर टिप्पणी को लेकर सदन में माफी माँग ली। उनकी माफी के बाद सदन की कार्रवाही सुचारू रूप से चालू हुई। इससे पहले विपक्ष के शोर शराबे से तंग आकर सदन की कार्रवाही को चार बार स्थगित करना पड़ा था।

अनुराग ठाकुर ने माफी माँगते हुए कहा, “कराधान विधेयक रखे जाने के दौरान मेरे द्वारा तथ्य रखते समय किसी को ठेस पहुँचाना मेरा उद्देश्य नहीं था। अगर किसी को ठेस पहुँची है तो मुझे भी इस बात की पीड़ा हैं।”

बता दें अनुराग ठाकुर ने आज सदन की कार्रवाही के दौरान पीएम केयर फंड्स की पारदर्शिता पर बात रखते हुए कहा था, “PM Cares एक पंजीकृत चैरिटेबल ट्रस्ट है। मैं साबित करने के लिए विपक्ष को चुनौती देना चाहता हूँ। यह ट्रस्ट इस देश के 138 करोड़ लोगों के लिए है।” उन्होंने कहा, “हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक, हर कोर्ट ने पीएम केयर्स फंड को सही ठहराया। छोटे-छोटे बच्चों ने गुल्लक तोड़कर चंदा दिया।”

उन्‍होंने आगे गाँधी परिवार को घेरते हुए कहा , “नेहरूजी ने फंड बनाया आज तक उसका रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। आपने केवल एक परिवार गाँधी परिवार के लिए ट्रस्ट बनाया था। सोनिया गाँधी को अध्यक्ष बनाया था, इसकी जाँच होनी चाहिए तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।”

बता दें यह सारा विवाद कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के बयान के बाद शुरू हुआ था। उन्होंने दावा किया था चीनी कंपनी ने 500 करोड़ रुपए का फंड पीएम केयर्स फंड में दिया। उन्होंने इस मामले पर जाँच करने की माँग उठाई। इसी पर अनुराग ठाकुर ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि, इसमें नेहरू-गाँधी परिवार का नाम लिया जाना चाहिए। आपने कई चैरिटेबल संगठनों से धन हस्तांतरित करके देश को गुमराह किया है और स्वयं को फायदा पहुँचाया। हम इसका पर्दाफाश करेंगे। गाँधी परिवार ने इस राष्ट्र के साथ विश्वासघात किया है।

अलीगढ़ में दिन दहाड़े बंदूक की नोक पर 35 लाख के जेवर लूटने वाले तीनों आरोपितों को यूपी पुलिस ने किया गिरफ्तार

अलीगढ़ में दिनदहाड़े एक ज्वेलरी शॉप को लूटने वाले तीन लुटेरों को बुधवार (सितंबर 16, 2020) नोएडा के पास हुई पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। बता दें, सीसीटीवी पर लूट की यह वारदात कैद हो गई थी जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था।

उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुसार, पुलिस द्वारा की जा रही चेकिंग के दौरान आरोपितों को दिल्ली जाने वाले मार्ग सेक्टर 39 पुलिस स्टेशन द्वारा स्थापित एक चेक-पोस्ट के पास रोकने की कोशिश की गई। ऐसे में, आरोपितों ने भागने की कोशिश करते हुए पुलिस पर फायरिंग कर दी। आत्मरक्षा करते हुए पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की और मुठभेड़ के बाद तीनों को हिरासत में ले लिया। इनकी पहचान सौरभ, मोहित और रोहित के रूप में हुई। पुलिस ने कहा कि घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले इंटरनेट पर इस चोरी का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें सौरभ, मोहित और रोहित नाम के तीनों आरोपित बंदूक की नोक पर एक आभूषण की दुकान को लूट रहे थे। यह डकैती पिछले हफ्ते उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुई थी। दुकान के मालिकों ने तीनों चोरों को ग्राहक मानते हुए उन्हें दुकान के अंदर आने दिया और कोरोना वायरस से बचाव के लिए उन्हें सैनिटाइज़र भी पेश किया।

लुटेरों ने अपने हाथों को तब तो सैनेटाइज करवा लिया लेकिन उसके बाद पिस्टल निकाली और दुकान में काम करने वाले स्टाफ को निशाना बनाते हुए गहने लेकर फरार हो गए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, तीनों आरोपित उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के हैं। प्रारंभिक जाँच में पता चला है कि 11 सितंबर को अलीगढ़ में दिनदहाड़े आभूषण की दुकान में हुई डकैती के पीछे यहीं तीन शामिल थे। एनकाउंटर के बाद पुलिस ने इनके पास से चोरी किए गए 35 लाख के समान और उनकी 2 पहिया गाड़ी बरामद की है। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच पड़ताल कर रही है। साथ ही तीनों आरोपितों के आपराधिक इतिहास का पता लगाया जा रहा है।

‘आपसे उम्मीद की जाती है कि निष्पक्ष रहो’: NDTV पत्रकार श्रीनिवासन को व्यवसायी राकेश झुनझुनवाला ने सिखाया नैतिकता का पाठ

NDTV के पत्रकार श्रीनिवासन जैन को हाल में एक इंटरव्यू के दौरान व्यवसायी व निवेशक राकेश झुनझुनवाला ने मीडिया रिपोर्टिंग पर नैतिकता का पाठ पढ़ाया। साक्षात्कार के दौरान झुनझुनवाला ने एनडीटीवी पत्रकार और उनके मीडिया हाउस को मोदी से घृणा करने वाला बताया। उन्होंने पत्रकार से कहा, “आप सिर्फ़ सरकार की आलोचना करते हो।” इसके बदले पत्रकार ने व्यवसायी और मशहूर निवेशक पर मोदी का फैन होने का इल्जाम लगा दिया।

MP: कॉन्ग्रेस ने गाय को किया चुनाव के लिए इस्तेमाल, शरीर पर पंजे के निशान के साथ लिखा उम्मीदवार का नाम

सोशल मीडिया पर मध्यप्रदेश की एक गाय की फोटो तेजी से वायरल हो रही है। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रचार के लिए बेहद ही घटिया तरीका अपनाते हुए इस गाय का इस्तेमाल किया है। इस तस्वीर में कॉन्ग्रेसियों ने गाय के शरीर पर वोट माँगने के लिए अपना चुनाव चिह्न पंजा बना दिया और सांवेर से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार प्रेमचंद गुड्डू का नाम लिख दिया।

वायरल तस्वीर में गाय चुपचाप खड़ी नजर आ रही है। गाय के सींग पर तिरंगे के तीन रंग दिख रहे हैं। वहीं, गाय के शरीर पर पंजे के निशान के साथ लिखा हुआ है कि सांवेर का विकास प्रेमचंद गुड्डू। इसके अलावा राज नंदिनी….लिखकर चुनावी प्रचार का अंत किया गया है।

आप इस हरकत से अंदाजा लगा सकते है कि कॉन्ग्रेस चुनाव जीतने के लिए कुछ भी कर सकती है। बता दें इंदौर की सांवेर विधानसभा सीट पर उपचुनाव है। उसी चुनाव में लोगों को उम्मीदवार की ओर आकर्षित करने के लिए यह वाहियात कार्य किया गया है।

इस मामले पर बीजेपी ने संज्ञान लेते हुए अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता उमेश शर्मा ने एक बयान में कहा, “यह बेहद शर्मनाक है कि गुड्डू ने अपने चुनावी विज्ञापन के लिए गौ माता का इस्तेमाल किया है। इस हरकत पर कॉन्ग्रेस उमीदवार के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए।”

साथ ही भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता उमेश शर्मा ने गाय की फोटो के साथ सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस पर तंज कसते हुए लिखा- “केवल गोमाता मात्र पर आपकी कीर्ति कथा अपर्याप्त है। सांवेर के गाँवों की हर गली के श्वान (कुत्ते), बिल्ली, बैल, गधे, घोड़े की छाती पर भी छा जाओ, छप जाओ। बेहतर यह होगा कि इन जीवों को कमलनाथ के आगमन पर तिरंगा पहनाकर कॉन्ग्रेस में शामिल कर लो। कार्यकर्ता की कमी नहीं खलेगी।”

वहीं इस मामले में सांवेर पुलिस थाने के उप निरीक्षक मनोज कटारिया ने कहा, “सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर का खुद संज्ञान लेते हुए हमने सांवेर क्षेत्र में संबंधित गाय की तलाश की। लेकिन हमें वह नहीं मिली। शायद यह गाय इस क्षेत्र के बाहर की है।”

महाराष्ट्र सरकार के पास कर्मचारियों को सैलरी देने के पैसे नहीं, लेकिन पीआर के लिए खर्च कर रही ₹5.5 करोड़

कोरोनो वायरस लॉकडाउन के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था खराब होने के बावजूद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे अपनी महाविकास आघाड़ी सरकार को प्रमोट करने के लिए 5 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च करने के लिए तैयार हैं।

शिवसेना की अगुवाई वाली महाविकास आघाड़ी समिति के प्रशासन विभाग ने मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र सरकार के पीआर के प्रबंधन के आवेदन करने के लिए निजी विज्ञापन एजेंसियों को आमंत्रित करते हुए एक ई-टेंडर जारी किया है।

साभार: Devang Dave on Twitter

सीएमओ और सूचना व जनसंपर्क महानिदेशालय द्वारा जारी एक सरकारी संकल्प में कहा गया है कि एजेंसियाँ ऑडियो विजुअल कंटेंट का उपयोग करें और रचनात्मक चीजें विकसित करके, सरकार की छवि और नीतियों को बढ़ावा देने के लिए अभियानों के साथ आएँ। यह बात सोशल मीडिया के जरिए सामने आई है। इस पूरी पीआर एक्सरसाइज की कीमत 5,43,60, 240 रुपए है, जो कि 5 करोड़ 50 लाख रुपए से सिर्फ़ थोड़ी कम है।

ठाकरे सरकार ने अपने इस कदम को सही ठहराते हुए कहा कि सूचना और जनसंपर्क निदेशालय (DGIPR) के तर्क के बाद निजी एजेंसियों के लिए सोशल मीडिया के काम को आउटसोर्स करना एकमात्र विकल्प उपलब्ध था, जिसमें कहा गया था कि इसमें तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशिक्षित जनशक्ति का अभाव है जो कि कार्य को प्रभावी ढंग से करने के लिए आवश्यक है।

यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है जब महाराष्ट्र सरकार बड़े पैमाने पर वित्तीय संकट का सामना कर रही है। यहाँ तक कि सरकार अपने कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए भी संघर्ष कर रही है। इसके अलावा स्वास्थ्य देखभाल संसाधनों के लिए दूसरों राज्यों से मदद माँगने तक की नौबत आ गई है।

हाल ही में एक घटना सामने आई थी कि कैसे पिछले दो महीनों की अवधि का वेतन नहीं मिलने की वजह से राज्य परिवहन निगम के एक महाराष्ट्र सरकार के कर्मचारी ने अवसाद में आकर आत्महत्या कर ली थी। इससे पहले यह बताया गया था कि न केवल महाराष्ट्र सरकार के कर्मचारी, बल्कि केरल के डॉक्टरों और नर्सों के वेतन को भी महा-विकास आघाड़ी सरकार द्वारा देरी से दिया जा रहा था जिसके चलते डॉक्टर और नर्स वापस केरल चले गए थे।

गौरतलब है कि जहाँ एक तरफ कोरोना की महामारी ने सभी राज्यों की हालत खस्ता कर दी थी और महाराष्ट्र सरकार कोरोना से लड़ने वालों तक तो भुगतान करने में खुद को नाकाम बता रहे थे, ऐसे में सरकार ने अपने मंत्रियों के लिए 6 नए लक्जरी वाहनों की खरीद के लिए अनुमति प्रदान किया था। बता दें इन गाड़ियों की कुल कीमत 1.37 करोड़ रुपए थी।