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‘एक बार दिखा दे बस’: वीडियो कॉल पर अपनी बेटियों से प्राइवेट पार्ट दिखाने को बोलता था मोहम्मद मोहफिज, आज भेजा गया जेल

बिहार के बेगूसराय में अपनी बेटियों के साथ दुष्कर्म व दुष्कर्म का प्रयास करने वाले मोहम्मद मोहफिज को आज (सितंबर 18, 2020) कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। इसकी पुष्टि इलाके के थाना एसएचओ ने स्वयं की। पुलिस अधिकारी ने बताया कि मोहफिज के ख़िलाफ़ कल मामला दर्ज हुआ था और अब उसे गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है।

पुलिस ने यह भी बताया कि मोहफिज के ख़िलाफ़ उसकी ही बेटी ने खुद एफआईआर करवाई है। मामले में पीड़िताओं के लिए आवाज उठाने वाले बजरंग दल के प्रदेश सह संयोजक शुभम भारद्वाज ने भी इस गिफ्तारी के बारे में बताते हुए कहा कि पीड़िता ने भी आज कोर्ट में अपना बयान दिया है। अब उसका मेडिकल होना बाकी है। इससे पहले शुभम ने जानकारी दी थी कि लड़की की शिकायत पर ये केस धारा 376, 377 और पॉक्सो एक्ट के तहत रजिस्टर हो गया है।

उल्लेखनीय है कि इस घटना के संबंध में 17 सितंबर यानी कल खुलासा हुआ था। इसके बाद ऑपइंडिया ने इस पर विस्तृत रिपोर्ट करते हुए बताया था कि मोहम्मद मोहफिज पर अपनी एक नाबालिग बेटी से रेप और दो अन्य नाबालिग बेटियों के साथ दुष्कर्म की कोशिश का आरोप लगा है। पिछले कई सालों से दुबई में काम करने वाला मोहफिज वीडियो कॉल पर अपनी बेटियों के सामने अश्लील हरकतें करता था और घर लौटकर उनका यौन शोषण भी करता था।

ऑपइंडिया ने इस संबंध में आरोपित की बड़ी बेटी सलमा (बदला हुआ नाम) से बात की थी। सलमा ने हमें बताया था कि कुछ समय बाद वह 18 साल की होने वाली है, लेकिन पिता उसके साथ ऐसी हरकतें तब से कर रहे हैं, जब वह 12-13 साल की थी।

सलमा के मुताबिक, मोहफिज उसके साथ 2-3 बार संबंध बना चुका है और उसकी बहनों 14 वर्षीय बहन नगमा (बदला हुआ नाम) और 12 वर्षीय बहन फरहीन (बदला हुआ नाम) को न जाने कितनी बार संबंध बनाने के लिए अपने सामने नंगा कर चुका है। पीड़ित लड़की की मानें तो उनका घर में सोना भी दूभर हो गया था। उनका पिता कभी भी उनके कपड़ों में हाथ डाल देता था और शारीरिक संबंध स्थापित करने की कोशिश करता था।

पीड़िता का कहना था कि शुरुआत में उन लोगों ने अपने पिता की हरकतों की शिकायत अपनी माँ से की थी, मगर माँ को लगता था कि शायद बच्चियाँ पिता के दुलार को गलत समझ रही है। हालाँकि, जब यह सब ज्यादा होने लगा तो बेटियों ने अपनी माँ को सबूत दिखाया जिसे देख माँ भी हक्का-बक्का रह गई। माँ ने इस संबंध में अपने शौहर से बात की, लेकिन मोहफिज ने अपनी बीवी की सुनने की बजाय उससे लड़ना शुरू कर दिया। इसके बाद अधिक विरोध करने पर एक दिन मोहफिज ने अपनी बीवी को जान से मारने की कोशिश की। मगर, जब वह बच गई तो उन्हें गलत इलाज देकर मार डाला गया।

सलमा ने हमें बताया कि माँ की मृत्यु के बाद से ही मोहफिज उस पर शादी का दबाव बना रहा था और उन्हें घर में कैद कर रखा हुआ था। उनके पास कोई फोन भी नहीं था। बड़ी मुश्किल से एक दिन सारी बातें लड़कियों ने अपनी नानी को बताई। नानी से यह बात उनके मामा को पता चली और जब उन्होंने आवाज उठाई तो मोहफिज ने उनके हाथ में पिस्टल देकर उन्हें झूठे इल्जाम में फँसवा दिया।

इसके बाद 16 सितंबर को लड़कियाँ किसी तरह बजरंग दल के पास पहुँची और उन्हें इंसाफ दिलाने का बीड़ा स्वयं शुभम भारद्वाज ने उठाया। लड़कियाँ बताती है कि उन्हें बजरंग दल से बहुत मदद मिली। उन्हीं के साथ वह थाने आई और फिर उनके पिता के ख़िलाफ़ शिकायत करवाई। इसके बाद मोहफिज को गिरफ्तार किया गया।

बता दें सबूत के तौर पर आरोपित मोहफिज की कुछ अश्लील वीडियोज सामने आई हैं। इनमें से एक वीडियो में देखा जा सकता है कि वह अपनी लड़कियों से वीडियो कॉल पर प्राइवेट पार्ट्स दिखाने को कह रहा है। वीडियो में उसे ‘एक बार दिखा दे बस’ कहते सुना जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि बजरंग दल ने इस मामले की सुनवाई फास्टट्रैक कोर्ट में करने की माँग उठाई है। साथ ही सरकार, जिला प्रशासन से बच्चियों को आर्थिक मदद देने के साथ-साथ, उनकी माँ की मृत्यु और मामा के ख़िलाफ़ दर्ज केस में जाँच की माँग की है।

अमेरिका में भी चीनी ऐप्स TikTok और वीचैट पर रविवार से बैन: राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंधमारी बताई गई वजह

भारत में बैन की मार झेल रहे वीडियो शेयरिंग ऐप टिकटॉक पर अब अमेरिका भी प्रतिबंध लगाने जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के मुताबिक अमेरिका में रविवार से TikTok चीनी ऐप की डाउनलोडिंग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसी के साथ We Chat की डाउनलोडिंग पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।

AFP न्यूज एजेंसी के मुताबिक, “अधिकारियों ने बताया कि पूरे अमेरिका में रविवार से टिक टॉक और वीचैट के ऑपरेशंस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग दिया जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों ने शुक्रवार को लोकप्रिय चीनी मोबाइल एप्लिकेशन WeChat और TikTok के डाउनलोड पर प्रतिबंध लगाने का आदेश देते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है।”

अमेरिकी सरकार ने भी इन एप्स को बैन करने के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंधमारी को कारण बताया है। कोरोना वायरस, चीन की चालबाजी, टैक्नोलॉजी पर बढ़ते तनाव और अमेरिकी निवेशकों के लिए वीडियो ऐप TikTok की बिक्री के बीच यह फैसला सामने आया है।

जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने आज एक आदेश जारी करने की योजना बनाई है, जिसके तहत 20 सितंबर के बाद से अमेरिका में रहने वाले लोग चाइनीज वीडियो-शेयरिंग एप्स टिकटॉक और वीचैट को डाउनलोड नहीं कर पाएँगे। अमेरिका में टिकटॉक के करीब 100 मिलियन यानी 10 करोड़ यूजर्स हैं। बता दें कि अब से कुछ दिन पहले ही भारत ने भी टिकटॉक पर बैन लगा दिया था।

बता दें इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के साथ बढ़ते तनाव और जासूसी के आरोपों के बीच इसको बैन करने के संकेत दिए थे। उन्होंने टिकटॉक की जगह दूसरे विकल्प को तलाशने की बात कही थी।

गौरतलब है कि अब से कुछ दिन पहले ही भारत ने भी टिकटॉक पर बैन लगा दिया था। चीन के साथ सीमा पर जारी गतिरोध के बीच बड़ा फैसला लिया गया था। भारत सरकार ने जून के अंत में टिकटॉक समेत कुल 59 चीनी ऐप्स को बैन कर दिया था। चीनी ऐप्स पर बैन लगाने के फैसले पर भारत सरकार का कहना था कि सुरक्षा के मद्देनजर ये कदम उठाया गया है।

इसके बाद पिछले दिनों चीन के 47 और ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके अलावा बताया गया था कि PUBG समेत 250 ज्यादा ऐप्स की केंद्र सरकार समीक्षा करते हुए हाल ही में बैन किया है। बता दें कि सरकार ने इन चीनी एप्स पर आईटी एक्ट 2000 के तहत बैन लगाया है।

1995 के अमूल विज्ञापन पर चित्रित उर्मिला पर बौखलाए लिबरल्स: रंगीला के प्रमोशन को जोड़ा कंगना की टिप्पणी से

अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर और कंगना रनौत के बीच सोशल मीडिया पर हुए जुबानी जंग के बाद कुछ तथाकथित लिबरल गिरोह ने शुक्रवार (18 सितंबर, 2020) को ट्विटर पर भारतीय दूध ब्रांड अमूल पर 1995 के विज्ञापन को लेकर हमला किया।

25 साल पहले बनाया गया यह विज्ञापन अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर की फिल्म ‘रंगीला’ में उनके प्रदर्शन को देखते हुए दर्शाया गया था।

इस चित्रण में अभिनेत्री को प्रतिष्ठित लाल पोशाक में दिखाया गया है। इस पोशाक के जरिए दर्शकों को उनकी फिल्म ‘मासूम’ (1983) में एक बाल अभिनेत्री के रूप में की गई उनकी भूमिका को याद दिलाया गया था। साथ ही विज्ञापन के साथ कैप्शन था “नॉट मासूम एनिमोर?” रंगीला मक्खन। “

उल्लेखनीय है कि उर्मिला ने एक बाल कलाकार के रूप में 1983 में प्रशंसित फिल्म ‘मासूम’ में एक छोटी लड़की की भूमिका निभाई थी। उसके बाद, वह एक एडल्ट के रूप में नरसिम्हा नामक एक हिंदी फिल्म में दिखाई दी थी। 1995 में वे राम गोपाल वर्मा की सक्सेस फिल्म रंगीला में उभरकर सामने आई थी। इस फ़िल्म के बाद से ही उर्मिला को लोग ग्लैमरस रोल के लिए पहचानने लगे थे।

1995 का अमूल पोस्टर उर्मिला के करियर में ‘मासूम’ से रंगीला ’की ओर बढ़ते हुए कदम को दर्शा रहा था।

वहीं कंगना रनौत की-सॉफ्ट-पोर्न अभिनेत्री की टिप्पणी के आधार पर उर्मिला मातोंडकर के विज्ञापन को हाल ही होने का अनुमान लगाते उदारवादी बंदूक ले कर सोशल मीडिया पर दकियानूसी बातें दागने को तैयार हो गए।

पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने लिखा, ”माफ करना अमूल, यह बहुत ही घृणित है। आपने कब आईटी सेल ज्वाइन किया है।” इस पोस्ट में उन्होंने अनुराग कश्यप को भी टैग किया। जिस पर जवाब देते हुए अनुराग ने बताया कि यह विज्ञापन काफी पुराना है। उन्होंने यह भी बताया कि यह विज्ञापन उर्मिला की प्रशंसा करते हुए था न की बेइज्जती! जिसके बाद स्वाति तुरंत बिना माफ़ी माँगे ट्वीट को डिलीट करने के लिए उतावली नजर आई।

स्वाति चतुर्वेदी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट
अनुराग कश्यप को स्वाति का रेस्पॉन्स

वहीं अमूल पर अपने संस्थापक डॉ. वर्गीस कुरियन की छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए, पत्रकार मृणाल पांडे ने भी ट्वीट करते हुए कहा, “थोड़ी सी भी शर्म बची है तो डूब मरो अमूल! अपने जन्मदाता और भारत की महिलाओं की मदद से सहकारी दुग्धक्रांति के जनक डॉ. कुरियन के नाम की कुछ तो लाज रखी होती!” ट्विटर पर यह बताए जाने के बाद भी कि यह 1995 का अमूल विज्ञापन है उन्होंने तब भी उसे सही ठहराते हुए कहा, “पुराना हो या नया, जो घृणित है वह घृणित है!!”

मृणाल पांडे का ट्वीट

अबशार नाम के एक अन्य ट्विटर यूजर ने ट्वीट किया, “कितना गिर गए हो अमूल।” बाद के ट्वीट्स में, उन्होंने दोहराया कि चित्रण असली है, ‘फोटोशॉप्ड’ नहीं।

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

हिंदुस्तान टाइम्स के पत्रकार, दीपांजना ने भी भ्रामक दावों के साथ ट्विटर पर विज्ञापन पोस्ट किया। हालाँकि, बाद में उन्होंने विज्ञापन के पीछे की सच्चाई को जानने के बाद तुरंत पोस्ट को डिलीट कर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा, इस तरह का चित्रण वास्तव में विज्ञापन को बेहतर या अधिक हास्यप्रद नहीं बनाता है, लेकिन यह निश्चित रूप से हालिया उर्मिला मातोंडकर पर की गई टिप्पणी को लेकर नहीं बनाया गया था।

वहीं शिवसेना से हमदर्दी रखने वाले अनघा आचार्य ने भी ट्वीट किया, ”घृणित! अमूल कॉर्पोरेशन से बिल्कुल भी यह उम्मीद नहीं थी। अमूल को माफी माँगनी चाहिए।”

भारत के सबसे बड़े दूध ब्रांड की प्रतिष्ठा पर ऊँगली उठाते हुए एक लोकप्रिय ट्विटर यूजर (@TheSocialDilema) ने भी ऐसा ही विचित्र दावा किया, “शायद अमूल पीडोफिलिया को बढ़ावा दे रहा है, और यह प्रमोशन “मासूम” फिल्म का हिस्सा हो सकती है। लेकिन सच्चाई का पता लगने के बाद भी यूजर ने माफी माँगने या अपने भ्रामक दावों को हटाने की जहमत नहीं उठाई।

बॉयकॉट अमूल कैम्पेन

यह पहली बार नहीं है कि अमूल लिबरल गिरोह के हमले का शिकार बना हो। सुदर्शन न्यूज़ के मुख्य संपादक, सुरेश चव्हाणके ने पहले ‘नौकरशाही जिहाद‘ और ‘यूपीएससी जिहाद’ पर एक कार्यक्रम की घोषणा की थी। सुरेश ने अपने कार्यक्रम का एक हिस्सा साझा करते हुए कहा था, “जामिया के जिहादियों की कल्पना करें कि वे हर मंत्रालय और जिले में आपके जिला आयुक्त और सचिव बने।”

विवादास्पद वीडियो पोस्ट किए जाने के बाद विभिन्न पक्षों द्वारा इसकी आलोचना की गई। विशेष रूप से वाम-उदारवादियों और इस्लामवादियों ने जमकर सुदर्शन चैनल और उनके संस्थापक पर हमला किया। यह आरोप लगाया गया था कि सुरेश चव्हाणके मुस्लिमों के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं।

वहीं वामपंथी पोर्टलों ने उनके और उनके चैनल की आलोचना करते हुए लेख प्रकाशित करना भी शुरू कर दिया था। साथ ही इस तथ्य को लेकर ब्रांड अमूल को निशाना बनाना शुरू कर दिया कि यह चैनल पर अपने प्रोडक्ट के विज्ञापन देता है। हालाँकि लिबरल गिरोह द्वारा नफरत फैलाने के बावजूद सोशल मीडिया पर अन्य यूज़र्स ने अमूल का जमकर समर्थन किया था।

शाहीन बाग में जिस तिरंगे की खाई कसमें, उसी का इस्तेमाल पेट्रोल बम बनाने में किया: दिल्ली दंगों पर किताब में खुलासा

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों की पृष्ठभूमि सीएए के विरोध प्रदर्शनों से शुरू होती है। वही प्रदर्शन जहाँ पहले तिरंगे को हाथ में लेकर लोकतंत्र को बचाने का दावा किया जाता रहा और बाद में हिंसा भड़कते ही उन्हीं तिरंगों का इस्तेमाल पेट्रोल बम बनाने में हुआ।

इन दंगों पर प्रकाशित होने जा रही किताब, ‘दिल्ली राइट्स 2020: द अनटोल्ड स्टोरी’ में इस घटना का विस्तार से ब्यौरा दिया गया है। आज इसी किताब की लेखिका मोनिका अरोड़ा ने किताब के कुछ पन्ने अपने ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा, “शाहीन बाग में जिस तिरंगे की और संविधान की कसमें खा रहे थे। दिल्ली दंगों में उसी तिरंगे के पेट्रोल बम बनाकर घर, दुकान जला रहे थे ये दंगाई।”

ट्वीट के साथ शेयर पन्ने में बताया गया कि इस्लामी कट्टरपंथ की भारी डोज ने उन महीनों में समुदाय विशेष के दिमाग में इतना जहर घोल दिया था कि उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। यह प्रदर्शन शुरु संविधान को बचाने से हुआ लेकिन इसका अंत अनुसूचित जाति से आने वाले लोगों की हत्या के साथ हुआ। 24 फरवरी को उत्तर पूर्वी दिल्ली में ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ’ प्रदर्शन का अंत दंगाइयों ने विनोद कश्यप नाम के अनुसूचित जाति के व्यक्ति की लिंचिंग व दिनेश खटीक नाम के एक व्यक्ति को गोली मार कर किया।

इन दंगों में ऊँची इमारतों से पड़ोसियों को (इजिप्ट और सीरिया जैसे) गोलियाँ चलाकर निशाना बनाया गया और आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की बर्बर हत्या को अंजाम दिया गया। किताब में लिखा है, “वह प्रदर्शन जो महात्मा गाँधी, डॉ बीआर अम्बेडकर की तस्वीरों और तिरंगा फहराने से शुरू हुआ था उसका अंत तिरंगे से पेट्रोल बम बनाने में, दुकानों को, घरों को जलाने में हुआ।”

गौरतलब है कि मोनिका अरोड़ा ने आज इस पन्ने के साथ कुछ अन्य पृष्ठों को भी अपने ट्विटर पर शेयर किया है। इन पन्नों में उन डिटेल्स का जिक्र है जब पुलिस वजीराबाद रोड पर इकट्ठा होती भीड़ को समझाने पहुँची थी और बात सुनने की जगह पुलिस पर समुदाय विशेष की महिलाएँ आक्रामक हो गई थीं। उन्होंने उस समय अपने बुर्के में छिपा कर रखे गए पत्थर, तलवार व चाकू से पुलिस पर बेरहमी से हमला बोल दिया था।

मोनिका अरोड़ा ने अपने ट्वीट में कहाकि रोड ब्लॉक करने वाली महिलाओं के बुलाने पर डीसीपी अमित शर्मा बातचीत के लिए मौके पर पहुॅंचे थे। इन महिलाओं ने बुर्के में छिपाकर रखे गए चाकू और तलवार से उन पर हमला कर दिया। दूसरे पुलिसकर्मियों ने उन्हें बचाया और नजदीकी नर्सिंग होम में ले गए। जेहादियों ने इस नर्सिंग होम को भी जला दिया था।

ड्रग्स के खिलाफ NCB का ताबड़तोड़ एक्शन: 4 ड्रग पेडलर गिरफ्तार, ₹4 करोड़ की ड्रग्स सीज, मिला बॉलीवुड लिंक

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले से जुड़े ड्रग एंगल के सिलसिले में अपना अभियान जारी रखते हुए, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने अपनी जाँच के तहत 4 करोड़ के ड्रग्स को जब्त और 4 ड्रग पेडलर को हिरासत में लिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, NCB ने शुक्रवार को छापेमारी के दौरान बॉलीवुड में ड्रग्स सप्लाई करने वाले हिमाचल प्रदेश के एक बड़े ड्रग पेडलर राहिल विश्राम को धर दबोचा है। राहिल बॉलीवुड की एक सेलिब्रिटी के सीधे कनेक्शन में है। राहिल से NCB को 3 से 4 करोड़ रुपए की ड्रग बरामद हुई है। साथ ही साढ़े 4 लाख कैश भी जब्त हुआ है।

शुरुआती जाँच में राहिल ने बताया कि वो बॉलीवुड में ड्रग सप्लाई के बड़े नेटवर्क का हिस्सा है। राहिल ने NCB को उस शख्स के बारे में भी बताया जिसके लिए वो काम करता था। अब NCB की कोशिश इस पूरी चेन को क्रैक करने की है। साथ ही पूरी टीम ड्रग चेन के सरगना की तलाश में जुटी है।

इसी के तहत कार्रवाई करते हुए एनसीबी ने मुंबई से चार और ड्रग पैडलर्स को भी हिरासत में लिया है। ड्रग्स पेडलर्स के पास से एनसीबी ने लाखों रुपए की ड्रग्स भी बरामद की है।

एनसीबी के एक अधिकारी ने बतया, “गिरफ्तारियाँ मुंबई के वर्सोवा (Versova), पवई (Powai) और ठाणे (Thane) से की गईं हैं। आरोपितों के हाउस सर्च और पर्सनल सर्च के दौरान ड्रग्स सिज़ किए गए हैं।”

इसी कोशिश में NCB जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े और उनकी टीम ने मुंबई के पोवाई में छापा मारा और दो से तीन लोगों हिरासत में ले लिया। इस छापेमारी में तकरीबन 500 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता की बड जब्त की गई है जिसे बाजार में 6 से 8 हजार रुपए प्रति ग्राम के हिसाब से बेचा जा रहा था। इसकी पूरी कीमत 30 से 40 लाख रुपए सामने आई है।

किसानों का विकास, बाजार का विस्तार, बेहतर विकल्प: मोदी सरकार के तीन विधेयकों की क्या होंगी खासियतें

देश भर में कृषि क्षेत्र के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा हमेशा से किसानों को सही बाजार और उनकी उपज के बदले उचित दाम न मिल पाना रहा है। इसी समस्या के निदान के लिए विभिन्न राज्यों की सरकारों ने कृषि उत्पाद बाजार विनियमन अधिनियम (APMC अधिनियम) लागू किया था जिसके तहत राज्य को भूगोल और अन्य किसी प्रिंसिपल या उप बाजारों के आधार पर विभिन्न बाजारों में विभाजित किया जाता है। जब किसी विशेष क्षेत्र को बाजार क्षेत्र के रूप में घोषित कर दिया जाता है तो वह विशेष क्षेत्र बाजार समिति के अधिकार क्षेत्र में आ जाता है, इसके बाद किसी अन्य व्यक्ति या एजेंसी को स्वतंत्र रूप से थोक विपणन गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाती है।

शुरुआत में ऐसे बाजारों का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज के बदले सही मूल्य दिलवाने का था। हालाँकि, साल दर साल बीतने के बाद, इस क्षेत्र में बहुत बिचौलिए सक्रिय हो गए और भ्रष्टाचार बढ़ता रहा। साल 2014 में सत्ता संभालने के साथ ही मोदी सरकार ने किसान विकास में APMC की अक्षमता को समझा और Unified National Agriculture Market की घोषणा की।

बता दें कि NAM एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है जो कृषि वस्तुओं के लिए एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनाने के लिए मौजूदा एपीएमसी और अन्य बाजार को जोड़ने का प्रयास करता है। अब इसी सुधार की प्रक्रिया को जारी रखते हुए मोदी सरकार ने नए तीन विधेयक पेश किए हैं ताकि कृषि उत्पादन के लिए सरल व्यापार को बढ़ावा मिले और मौजूदा एपीएमसी सिस्टम से वह आजाद हों, जिससे उन्हें अपनी उपज बेचने के और ज्यादा विकल्प व अवसर मिलें।

मोदी सरकार द्वारा जारी किए गए तीन बिल

मोदी सरकार ने संसद में जिन तीन बिलों को पेश किया है उनके नाम हैं:

1.कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 
2.कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक
3.आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020

इससे पहले, इन नए बिलों की घोषणा आत्म निर्भर भारत अभियान के तहत घोषित आर्थिक पैकेज की तीसरी किश्त के हिस्से के रूप में की गई थी। संसद द्वारा पारित किए जाने वाले नए बिल, आवश्यक वस्तु अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को प्रभावित करेंगे और देश में कृषि उत्पादों के व्यापार और विपणन पर दो नए केंद्रीय कानून लाएँगे।

इन तीन प्रस्तावित कानूनों का उद्देश्य मोदी सरकार के सपने “एक भारत और एक कृषि बाजार” को साकार करना है। इन्हें लाने के पीछे यही मंशा है कि APMC में एकाधिकार को समाप्त किया जा सके। 

1. कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 

इस विधेयक के तहत सरकार की योजना है कि एक फसल उत्पाद को लेकर ऐसा तंत्र विकसित हो जहाँ किसान मनचाहे स्थान पर फसल बेच सकें। इसके जरिए किसान अपनी फसल का सौदा सिर्फ अपने ही नहीं बल्कि दूसरे राज्य के लाइसेंसी व्यापारियों के साथ भी कर सकते हैं।

मुख्य लाभ

  • कृषि क्षेत्र में उपज खरीदने-बेचने के लिए किसानों व व्‍यापारियों को “अवसर की स्‍वतंत्रता” होगी।
  • लेन-देन की लागत में कमी आएगी
  • मंडियों के अतिरिक्‍त व्यापार क्षेत्र में फार्मगेट, शीतगृहों, वेयरहाउसों, प्रसंस्‍करण यूनिटों पर व्‍यापार के लिए अतिरिक्‍त चैनलों का सृजन होगा।
  • किसानों के साथ प्रोसेसर्स, निर्यातकों, संगठित रिटेलरों का एकीकरण होगा जिससे मध्‍स्‍थता करने वालों में कमी आएही।
  • देश में प्रतिस्‍पर्धी डिजिटल व्‍यापार का माध्‍यम रहेगा, पूरी पारदर्शिता से काम हो पाएगा।
  • अंततः किसानों द्वारा लाभकारी मूल्य प्राप्त करना ही उद्देश्य ताकि उनकी आय में सुधार हो सकें।

2. कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक

बिल में, किसानों के हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था का प्रावधान है। भुगतान सुनिश्चित करने हेतु प्रावधान है कि देय भुगतान राशि के उल्लेख सहित डिलीवरी रसीद उसी दिन किसानों को दी जाएँ। मूल्य के संबंध में व्यापारियों के साथ बातचीत करने के लिए किसानों को सशक्त बनाने हेतु प्रावधान है कि केंद्र सरकार, किसी भी केंद्रीय संगठन के माध्यम से, किसानों की उपज के लिए मूल्य जानकारी और मंडी आसूचना प्रणाली विकसित करेगी।

कोई विवाद होने पर निपटाने के लिए बोर्ड गठित किया जाएगा, जो 30 दिनों के भीतर समाधान करेगा। इस विधेयक का उद्देश्‍य ढुलाई लागत, मंडियों में उत्‍पादों की बिक्री करते समय प्रत्‍यक्ष अथवा अप्रत्‍यक्ष रूप से लिए गए विपणन शुल्‍कों का भार कम करना तथा फसलोपरांत नुकसान को कम करने में मदद करना है। किसानों को उपज की बिक्री करने के लिए पूरी स्‍वतंत्रता रहेगी।

लाभ:

  • रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आर एंड डी) समर्थन।
  • उच्च और आधुनिक तकनीकी इनपुट।
  • अन्य स्थानीय एजेंसियों के साथ साझेदारी में मदद।
  • अनुबंधित किसानों को सभी प्रकार के कृषि उपकरणों की सुविधाजनक आपूर्ति।
  • क्रेडिट या नकद पर समय से और गुणवत्ता वाले कृषि आदानों की आपूर्ति।
  • शीघ्र वितरण/प्रत्येक व्यक्तिगत अनुबंधित किसान से परिपक्व उपज की खरीद।
  • अनुबंधित किसान को नियमित और समय पर भुगतान।
  • सही लॉजिस्टिक सिस्टम और वैश्विक विपणन मानकों का रखरखाव।

3.आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020

यह विधेयक 1955 में बनाए गए आवश्यक वस्तु विधेयक के प्रावधानों में बदलाव की व्याख्या करता है। सरकार ने इसके प्रावधानों में अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेलों, प्याज और आलू को आवश्यक वस्तु की सूची से हटा दिया है। इसके पीछे तर्क है कि सरकार सामान्य अवस्था में इनके संग्रह करने और वितरण करने पर अपना नियंत्रण नहीं रखेगी। इसके जरिए फूड सप्लाई चेन को आधुनिक बनाया जाएगा साथ ही कीमतों में स्थिरता बनाए रखेगा।

जब सब्जियों की कीमतें दोगुनी हो जाएँगी या खराब न होने वाली फसल की रिटेल कीमत 50% बढ़ जाएगी तो स्टॉक लिमिट लागू होगी। लेकिन युद्ध और आपदा जनित स्थितियों में केंद्र सरकार पुनः नियंत्रण अपने हाथ में ले लेगी।

सरकार का कहना है कि अभी की व्यवस्था में आवश्यक वस्तु अधिनियम के कारण कोल्ड स्टोरेज, गोदामों, प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट में निवेश कम होने की वजह से किसानों को लाभ नहीं मिल पाता है। अगर फसल जल्दी सड़ने वाली है और बंपर पैदावार हुई है तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

कानूनों का महत्त्व:

  • तीनों कानून देश में अत्यधिक नियंत्रित कृषि बाजारों को खोलेंगे।
  • इन कानूनों से देश के किसान के पास अधिक विकल्प होंगे। किसानों के लिए यह बिल विपणन लागत को कम करेगा। इससे उन्हें बेहतर दाम मिलने में मदद मिलेगी। इसके अलावा उपज को अधिक बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय किसानों को मदद होगी और उपभोक्ताओं का भी फायदा होगा।
  • अपनी किसानी और उपज को बेहतर बनाने के लिए किसानों के नई तकनीक को इस्तेमाल करने का भी मौका मिलेगा। इससे मार्केंटिंग की कीमत कम होगी और किसानों की आय में बढ़ौतरी होगी।
  • इन नए कानूनों से बड़ी बड़ी कंपनियाँ, खाद्य उत्पादन फर्म, निर्यातक आदि कृषि सेक्टर में निवेश करेंगें।
  • आवश्यक वस्तु कानून में संशोधन से माना जा रहा है कि किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को फायदा होगा और दामों में स्थिरता आएगी।
  • बाजार में प्रतिस्पर्धा का महौल बढ़ेगी और कृषि उपज भी व्यर्थ होने से बचेगा।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियाँ इन कानूनों का विरोध कर रही हैं। मगर, दिलचस्प बात यह है कि यही सारे बदलाव जिन्हें मोदी सरकार हाल में लेकर आई है उन्हें लेकर कॉन्ग्रेस ने साल 2019 के अपने चुनावी मेनिफेस्टों में वादे किए थे।

व्यंग्य: आँखों पर लटके फासीवाद के दो अखरोट जो बॉलीवुड कभी टटोल लेता है, कभी देख तक नहीं पाता

‘अरे आइए… आइए दीपिका जी, ये रहा आपका सामान!’
‘ये नहीं वो…’
‘आप तो हमेशा वो महँगा वाला पीआर पैकेज…’
‘लेती थी, पर वही कवरेज सिर्फ ‘रिपीट आफ्टर मी’ लिख कर भी मिले, तो कोई ये क्यों ले, वो न ले!’
‘मान गए!’
‘किसे?’
‘आपकी पारखी नजर और बॉलीवुड सुपर स्टार्स, दोनों को’
‘हीं हीं हीं… डिम्पल ही डिम्पल, रीयल ही रीयल…’

ऐसा वाला एक विज्ञापन बचपन में दूरदर्शन पर आता था। तब दीपिका जी महँगी वाली टिकिया लिया करती थीं, आजकल वही महँगी वाली टिकिया बॉलीवुड के कई लोग दूसरे चक्रवर्ती सम्राटों से लेने लगे हैं। पहले चक्रवर्तियों का बड़ा बोलबाला था। कपूर लोगों की आरती उतारी जाती थी, खान लोग दान दे कर खानदान से ताल्लुक़ बना लिया करते थे।

अब कपूरों की आरती नहीं उतारी जा रही, अब उन्हें ही प्लेट में रख कर भक्क से आग लगा दी जाती है और बाकी लोग ताप लेते हैं। पहले ये लोग चेहरे की मलिनता को मेकअप पोत कर, कर्पूरगौरम् बन कर छिपा लेते थे, पर्यावरण पर ट्वीट करते हुए, किसी गरीब की फोटो शेयर कर के करुणावतारम् हो जाते थे। इन्हें लगता था कि संसारसारम् यही हैं और भुजगेन्द्र हारम् तो ‘पीके’ में ट्वायलेट वाले सीन के लिए होते हैं। पहले ये लोग सोचते थे कि यही लोग सदा बसन्तम् हृदयारबिन्दे हैं क्योंकि फिल्म तो लगेगी ही, जनता देखेगी ही चाहे ये लोग वैसे कॉमेडियन्स को रीट्वीट करें, उनका बचाव करें जो हमारे ‘भबम् भवानी’ को नमामि की जगह उपहास का पात्र बनाया करते थे।

दो-चार ट्वीट ‘आरे जंगल बचाओ’ पर, या फिर कुकुरदँत्ता वाले शेरों के सम्मान में ‘बेस्ट दँतैला एवर’ लिख कर उनकी चरणपादुका अपने कपोलों पर लगवाने को उत्सुक रहते थे। बदले में शेरों के कुत्ते इनके घरों के आगे भौंकना बंद कर देते थे। ये सब प्रागैतिहासिक बार्टर सिस्टम चलता रहा। ‘पार्टी यूँ ही चालेगी’ होती रही, और पार्टियों में महाकवि मीर तक़ी मीर द्वारा वर्णित ‘मीर उन नीमबाज़ आँखों में, सारी मस्ती शराब की-सी है’ वाले कारनामे होते रहे। ‘नीमबाज़ आँखों’ का मतलब है अधखुली, उर्दू आती हैं हमको भाई! हें हें हें!

कालांतर में पता चला कि प्रागैतिहासिक बार्टर सिस्टम के साथ-साथ ‘पार्टनर स्वापिंग’ जैसे अत्याधुनिक तकनीक वाले सखा-सहेलियों के बार्टर सिस्टम भी इन पार्टियों में हुआ करते थे। ‘पार्टनर स्वापिंग’ के लिए मेरे पास तत्सम शब्द नहीं हैं क्योंकि न तो ऐसे कांड संस्कृत में हैं, न संस्कृति में। ये बात और है कि शृंगारशतकम् में कवि भर्तृहरि लिख गए हैं:

स्मितं किञ्चिद् वक्त्रे सरलतरलो दृष्टिविभवः
परिस्पन्दो वाचामभिनवविलासोक्तिसरसः ॥
गतानामारम्भः किसलयितलीलापरिकरः
स्पृशन्त्यास्तारुण्यं किमिह न हि रम्यं मृगदृशः?

वैसे तो मैं इसकी सप्रसंग व्याख्या कर के पाँच नंबर पा सकता हूँ, लेकिन राष्ट्रवादी सिंगल आदमी नंबर ले कर करेगा क्या। खैर, कवि कहते हैं कि उठती जवानी की मृगनयनी सुंदरियों के कौन से काम मनोमुग्धकर नहीं होते ? उनका मन्द-मन्द मुस्काना, स्वाभाविक चञ्चल कटाक्ष, नवीन भोग-विलास की उक्ति से रसीली बातें करना और नखरे के साथ मन्द-मन्द चलना – ये सभी हाव-भाव कामियों के मन को शीघ्र वश में कर लेते हैं। और जो कवि भर्तृहरि जी ने नहीं कहा वो यह है कि ऐसे कामियों की उपस्थिति बॉलीवुड की पार्टियों में अवश्यम्भावी है।

चक्रवर्तियों के फँसते ही बॉलीवुड के खल और कामियों की, मुंबइया भाषा में कहें तो वाट लग गई है। वाट लगते ही वो बाप-बाप करते ट्वीट कर रहे हैं कि मीडिया ट्रायल हो रहा है, और वो जहाँ तहाँ मच्छरों को मारने वाले बैटरी वाले ‘चुटपुटिया’ टेनिस रैकेट से पेट्रियार्की को स्मैश करते फिर रहे हैं। पेट्रियार्की को स्मैश करने वालों में वो सबसे ज्यादा हैं जिनका सबसे अच्छा काम किसी बड़े हीरो की बेटी या बेटा बन जाना हुआ है।

बॉलीवुड में ये सब चलता रहता है भैया। वैसे भी, आपको और हमको थोड़े पता है कि ‘बाप’ कौन हैं और कितने हैं! आइडियोलॉकल हैं, बायलोजिकल हैं, पोलिटिकल हैं… तो कहीं न कहीं तो पेट्रियार्की हो रही होगी स्मैश। ये तो ‘बिलो दी बेल्ट’ हो गया अजीत जी… ऐसा है भाई कि हम ‘अभव दी बेल्ट’ भी मारेंगे तो थुथुन चूर के ओधबाध कर देंगे, और दर्द उतना ही होगा। बिलो दी बेल्ट खा लो, और हाथ से पकड़ के नीचे बैठ जाओ। नाना पाटेकर जी ने भी कहा है कि ‘सह लेंगे थोड़ा’।

आजकल बड़ी समस्या हो गई है। कोई सीधे-सीधे एक स्त्री को हरामखोर भी कह देता है तो इन नयनाभिराम मृगनयनियों के नयनों पर ‘मेको क्या’ वाला डार्क फिल्टर चढ़ जाता है। तब किसी कश्यप ऋषि का नाम ढोने वाले एथीइस्ट को यह याद नहीं आता कि नेताओं को किस तरह की भाषा का प्रयोग करना चाहिए। लेकिन हो सकता है ‘अतियथार्थवादी’ फिल्मों के निर्देशक को पूरी दुनिया वैसी ही दिखती हो जहाँ किसी लड़की को हरामखोर कहना तो आम बात है। क्या पता अगली फिल्म में डायलॉग में डाल दें।

इनके वैचारिक पिता ने सड़कों पर चलते-फिरते नाइयों की दुकानें खुलवा रखी हैं, साथ में ‘फेस मसाज’ भी देते हैं। इस पर भी बेचारे फासीवाद नहीं देख पाते। चौबीस घंटे का नोटिस दे कर किसी के ऑफिस पर बुलडोज़र चलवा देने में भी बेचारे फासीवाद नहीं देख पाते। नेवी के अफसर को सड़कछाप गुंडों द्वारा पीटे जाने पर भी फासीवाद नहीं दिखता। लेकिन बाकी समय इन्हें फासीवाद इतना स्पष्ट दिखता है जैसे इनकी दोनों आँखों पर दो अखरोट टँगे हों और वो उसके हर गड्ढे को छू कर महसूस कर पा रहे हों, और कहते हों कि ‘आ हा हा! ऐसे अखरोट तो जीवन में कभी नहीं टटोले!’

न तो ‘बोल की लब आजाद हैं तेरे’ गाया जा रहा है, न ही ‘सब तख्त हटाए जाएँगे’ वाला पोस्टर दिख रहा है, न ही पहले से तैयार ‘रियल हीरो, रील हीरो’ वाले डिजिटल पोस्टर आ रहे हैं कि दीपिका जी, महँगी वाली टिकिया घिस के, काले कपड़ों में जेएनयू परिसर में सर उठा कर खड़ी हो जाएँ और पेट्रियार्की को वैसे ही स्मैश कर दें जैसे डेमिगॉड लोकी को हल्क ने किया था।

‘उड़ता पंजाब’ बना कर ड्रग्स की समस्या को ‘रीयल’ बताने वाले लोग, ‘उड़ता बॉलीवुड’ के वास्तविक ट्रेलर को सेंसर करना चाह रहे हैं। अपने इंडस्ट्री की सहकर्मी, अपनी ही पार्टी की पूर्व नेत्री के अंडरवेयर का रंग बताने वाले आज़म खान पर चुप रहने वाली, अपने ही पार्टी अध्यक्ष के ‘बच्चों से गलतियाँ हो जाती है’ वाले बयान पर संज्ञान न लेने वाली जया बच्चन संसद में ‘थाली में छेद’ की बात करती दिखती हैं।

जो इंडस्ट्री स्त्रियों के शोषण, उन्हें हाशिये पर रखने वाले चरित्र, उनके वक्षस्थल और कूल्हों के क्लोजअप दिखाने के लिए कुख्यात हो, वहाँ ‘थाली में छेद’ करने वाले तो असल में जया बच्चन टाइप के ही लोग हैं। कितनी बार मुखर हो कर इन्होंने या, इन जैसों ने, इसी संसद में नवोदित कलाकारों के यौन शोषण या उन्हें मेहनताना न मिलने पर बोला है?

हो सकता है बोला होगा, चोरी-चोरी, चुपके-चुपके बोला होगा। ये लोग रीढ़ की बातें करते हैं और इनके प्रतिनिधि एक खास भवन में जा कर सेटलमेंट करते हैं कि ‘मालिक, हमारी फिल्म पर्दे पर लगने दे दो’। जिनकी सुबह व्हाट्सएप्प ग्रुप में आने वाले मैसेज को बिना समझे ट्वीट करने से शुरु होती हो, और शाम ‘फासीवाद’ के अखरोट सहलाने से, उन्हें कपड़े बदलते वक्त अपने शीशमहल की लाइट ऑफ कर देनी चाहिए।

फैजल फारुख के स्कूल की छत पर हाजी रहीम इलाही ने सेट किया था घातक गुलेल: आरोपित बनाए जाने के बाद से फरार

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में भड़की हिंसा के दौरान गोली-बम से ज्यादा घातक गुलेल साबित हुई। यह कोई आम गुलेल नहीं थीं। ये गुलेल सैकड़ों की संख्या में मिली थी। हिंसा की जाँच कर रही दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की एसआईटी को 10-15 घरों के बाद किसी न किसी एक घर की ऊँची छत पर गुलेल मिली थी।

दैनिक जागरण के मुताबिक दंगे से तीन दिन पहले फैजल फारुख ने अपने राजधानी पब्लिक स्कूल की छत पर राम इलाही नाम के वेल्डर के जरिए बड़ी गुलेल लगवाई थी। उसी गुलेल से 24 फरवरी को शिव विहार तिराहे पर एसिड भरी बोतलें व पेट्रोल बम फेंककर बड़ी तबाही मचाई गई थी। राम इलाही उर्फ हाजी रहीम इलाही उर्फ राम रहीम शिव विहार का ही रहने वाला है और पेशे से वेल्डर है। उससे फैजल फारुख का पुराना संबंध बताया जा रहा है। 

दिल्ली दंगा मामले में राम इलाही को भी आरोपित बनाया गया है। दंगे में आरोपित बनाए जाने का पता चलने के बाद से ही वह फरार है। इतना ही नहीं, गिरफ्तारी के डर से उसने कड़कड़डूमा कोर्ट में अंतरिम जमानत की अर्जी लगाई थी, हालाँकि पुलिस के विरोध के बाद कोर्ट ने गुरुवार (सितंबर 17, 2020) को उसे खारिज कर दिया। अब दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच राम इलाही की खोज में जुटी हुई है।

गौरतलब है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में 25 फरवरी को हुए दंगे के दौरान शिव विहार स्थित राजधानी पब्लिक स्कूल के मालिक फैजल फारुख को दंगा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि फैजल के खिलाफ कोई ठोस सबूत न पेश कर पाने पर निचली अदालत ने उसे जमानत दे दी थी, लेकिन पुलिस ने दंगे से जुड़े दूसरे मामले में उसे गिरफ्तार कर लिया था।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले दिल्ली पुलिस ने अदालत में दायर चार्जशीट में फैजल फारुख को एक मुख्य साजिशकर्ता के रूप चिन्हित करते हुए कहा था कि जब पूर्वोत्तर दिल्ली में दंगे हो रहे थे, उस समय वो तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद के करीबी अब्दुल अलीम के संपर्क में था।

दंगे के दौरान फैजल फारुख के स्कूल की छत पर एक बड़ा गुलेल लगाया गया था। इसकी मदद से हिंदुओं और उनकी संपत्तियों और पेट्रोल बम से निशाना बनाया गया था। दंगों में इस स्कूल को कोई नुकसान नहीं पहुॅंचा था। लेकिन इसके ठीक बगल में स्थित डीआरपी पब्लिक स्कूल तबाह हो गया था। पुलिस को राजधानी स्कूल की छत की चारदीवारी पर लगाई गई गुलेल और अन्य ज्वलनशील पदार्थ बरामद हुए थे।

जाँच के दौरान यह पाया गया था कि हिंसा बड़ी साजिश के तहत हुई और राजधानी स्कूल का मालिक फैजल फारुख हिंसा के ठीक पहले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के कई नेताओं, पिंजरा तोड़ ग्रुप, निज़ामुद्दीन मरकज़, जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी और देवबंद के कई मौलवियों-आलिमों के संपर्क में था। उसके मोबाइल से इस बात के सबूत मिले हैं।

दिल्ली में बीते दिनों हिंदुओं के ख़िलाफ़ हुई हिंसा पूर्व नियोजित होने के कई सबूत सामने आए। हिंसाग्रस्त इलाकों से लगातार ऐसी तस्वीरें और विडियो सामने आए, जिसने इस बात को प्रमाणित किया कि ये हिंसा दो समुदायों के आमने-सामने आने से नहीं भड़की, बल्कि ये सब एक प्लान के तहत हुआ। मुस्लिम दंगाइयों ने हिंदुओं के घरों, उनकी गाड़ियों और उनके शैक्षणिक संस्थानों पर हमला करने के लिए पहले से ही तैयारी कर रखी थी।

रेपिस्ट अब्दुल या असलम को तांत्रिक या बाबा बताने वाले मीडिया गिरोहों के लिए जस्टिस चंद्रचूड़ का जरूरी सन्देश

सुदर्शन न्यूज़ के मुस्लिम अभ्यर्थियों के यूपीएससी में चुने जाने को लेकर दिखाए जा रहे कार्यक्रम पर सुप्रीम कोर्ट ने एतराज़ जताते हुए बचे हुए एपिसोड दिखाने पर रोक लगा दी थी। शुक्रवार (सितम्बर 18, 2020) को इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने मीडिया को सख्त संदेश दिया है कि किसी एक समुदाय को निशाना नहीं बनाया जा सकता है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “एक संदेश मीडिया में जाने देना चाहिए कि किसी विशेष समुदाय को लक्षित नहीं किया जा सकता है। हमें एक ऐसे राष्ट्र के भविष्य के बारे में देखना चाहिए, जो सामंजस्यपूर्ण और विविधतापूर्ण हो। हम राष्ट्रीय सुरक्षा को मान्यता देते हैं, लेकिन हमें व्यक्तिगत सम्मान भी करना चाहिए।”

लेकिन जस्टिस चंद्रचूड़ जिस ‘समुदाय’ को निशाना ना बनाए जाने को लेकर संदेश देना चाह रहे थे उन्होंने उसका नाम तक नहीं लिया। यानी इसका अर्थ यह लगाया जा सकता है कि मीडिया में बैठे हुए प्रोपेगेंडा प्रतिनिधि बीबीसी, शेखर गुप्ता का ‘दी प्रिंट’, दी वायर, एनडीटीवी और ऐसे ही न जाने कितने ही हिन्दूफोबिया से ग्रसित पत्रकारिता के समुदाय विशेषों को हिन्दुओं और उनकी आस्था को निशाना बनाने के बारे में सोचना चाहिए।

जिस तरह का बर्ताव मीडिया का यह गिरोह हिन्दू समुदाय से करता आया है, यह कहा जा सकता है कि जस्टिस चंद्रचूड़ ने हिन्दूफोबिक चैनलों को इशारा किया है कि उनके द्वारा हिन्दुओं की आस्था पर आक्रमण भविष्य के भारत के लिए खतरा है और न्यायपालिका उसे बचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

वास्तव में, हमने ऐसे अनगिनत उदाहरण देखे, जब किसी दूसरे समुदाय विशेष द्वारा किए गए अपराधों को भ्रामक तरीके से हिन्दुओं द्वारा किए जाने वाले अपराध साबित करने के प्रयास किए गए। हिन्दुओं की आस्था को लगातार खास तरह के चैनलों और पोर्टलों द्वारा नीचा दिखाया जाता रहा है। जस्टिस चंद्रचूड द्वारा दिए गए इस संदेश के बाद तो अब यही लगता है कि अब किसी रेपिस्ट ‘असलम’ को ‘बाबा’ लिख कर, कार्टून में भगवा पहनाने वालों की खैर नहीं।

शेखर गुप्ता के दी प्रिंट ने पिछले साल ही एक लेख प्रकाशित किया था जिसमें दावा किया गया था कि दिल्ली में मौजूद हनुमान जी की विशाल प्रतिमा से समुदाय विशेष के लोगों में दहशत का माहौल है।

इससे पहले सभी लोगों ने सिर्फ यही सुना था कि हनुमान जी का नाम सिर्फ भूत-पिशाचों में ही दहशत पैदा करता है, लेकिन दी प्रिंट के इस लेख में खुलासा किया गया था कि यह भूत-पिशाच कोई और नहीं बल्कि समुदाय विशेष के लोग थे।

यह एक ऐसा ही प्रमुख उदाहरण था जब पत्रकारिता के समुदाय विशेष द्वारा हिन्दू प्रतीकों को अपमानित करने का नैरेटिव खुलकर चलाया गया। तब शायद ही किसी हिन्दू ने शेखर गुप्ता के खिलाफ कोर्ट जाने का फैसला लिया होगा। यही हिन्दू धर्म की सहिष्णुता भी है।

इंडिया टुडे ने एक ऐसी ही खबर प्रकाशित करते हुए समुदाय विशेष के लोगों में बाल विवाह को लेकर सवाल उठाए गए थे। लेकिन शातिर तरीके से इंडिया टुडे ने अज्ञात कारणों से इस लेख में किसी समुदाय विशेष की बच्ची की तस्वीर के बजाए एक हिन्दू बच्ची की तस्वीर इस्तेमाल की थी। शायद इंडिया टुडे जानता था कि उसे किन लोगों से खतरा मोल नहीं लेना है। इंडिया टुडे यह तक कह चुका है कि श्रीराम नाम के नारों से माहौल दूषित हुआ है।

ऐसे ही कई उदाहरण हैं जब मीडिया में हिन्दू धर्म को निशाना बनाते हुए इसे अपमानित और इसके दुष्प्रचार का एजेंडा चलाया जाता है। इन्हीं में से सबसे प्रचलित एजेंडा क्राइम रिपोर्ट्स में अपनाया जाता है। जब पत्रकारिता के समुदाय विशेष द्वारा किसी ढोंगी को, जो कि अक्सर कोई अब्दुल या असलम होता है, भूत-प्रेत या फिर जिन-जिन्नात भगाने के लिए महिलाओं का शोषण या उन पर अत्याचार करते हुए पकड़ा जाता है लेकिन मीडिया का यह गिरोह इसे ‘तांत्रिक’ ‘ओझा‘ या फिर NDTV जैसे समूह ‘बाबा’ लिखकर हिन्दू धर्म को अपमानित करता है और कोई ‘आह’ तक नहीं करता।

खैर, जस्टिस चंद्रचूड़ का यह सन्देश वास्तव में व्यापक है। मीडिया यदि वास्तव में किसी एक समुदाय के खिलाफ एजेंडा चलाने से बाज आए, तो हिन्दू धर्म मीडिया के इस गिरोह का बहुत आभारी रहेगा।

NCB ने करण जौहर द्वारा होस्ट की गई पार्टी की शुरू की जाँच- दीपिका, मलाइका, वरुण समेत कई बड़े चेहरे शक के घेरे में: रिपोर्ट

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) सोशल मीडिया पर वायरल फिल्म निर्माता करण जौहर द्वारा होस्ट की गई पार्टी की एक वीडियो की जाँच कर रहा है। मीडिया आउटलेट ने कहा कि एनसीबी के सूत्रों द्वारा इसकी जानकारी दी गई है। DNA की रिपोर्ट के अनुसार, ब्यूरो द्वारा इस बात की जाँच की जाएगी कि वीडियो असली है या फिर इसे डॉक्टरेड किया गया है। यदि वीडियो वास्तविक पाया जाता है, तो जाँच आगे बढ़ने की संभावना है।

इससे पहले हमने रिपोर्ट किया था कि NCB मामले की जाँच शुरू कर सकता है और करण जौहर को इस मामले में बुलाया जा सकता है। वहीं डीएनए द्वारा यह पुष्टि की गई है कि इस मामले की जाँच शुरू हो गई है। इस वीडियो में दीपिका पादुकोण, विक्की कौशल, मलाइका अरोड़ा, वरुण धवन, अयान मुखर्जी, अर्जुन कपूर और शाहिद कपूर जैसे बड़े एक्टर दिखाई दे रहे है।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने आरोप लगाया था कि वीडियो में सभी अभिनेता ड्रग्स के प्रभाव में थे। वहीं अकाली दल के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी पार्टी में मौजूद लोगों पर ड्रग्स के सेवन का आरोप लगाया था। हालाँकि, विक्की कौशल और करण जौहर सहित अधिकांश कलाकारों ने इन दावों को बकवास बताया था।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही बॉलीवुड ड्रग्स माफियों पर खुलासा करते हुए कंगना रनौत ने अपने एक ट्वीट में रणवीर सिंह, रणबीर कपूर, अयान मुखर्जी और विकी कौशल से अनुरोध किया था कि वह ड्रग टेस्ट के लिए अपने ब्लड सैंपल दें, क्योंकि ऐसी अफवाहें है कि वह लोग कोकिन के आदी हैं। रिपोर्ट्स में यह भी बात सामने आई थी कि एनसीबी के अधिकारी ड्रग जाँच में कम से कम 25 प्रमुख बॉलीवुड सितारों को जल्द ही बुला सकते है। मशहूर हस्तियों में कुछ-बी-ग्रेड कलाकार भी शामिल हैं, जिन पर ड्रग्स लेने और खरीदने का आरोप लगाया गया है।