Home Blog Page 4480

तिहाड़ से निकल नहीं पाएगा शहाबुद्दीन, 14 दिन का माँगा था पैरोल; 4 साल पहले जेल से निकलते ही दिखाया था काफिला

बिहार के सीवान से सांसद रहा बाहुबली मोहम्मद शहाबुद्दीन तिहाड़ जेल से बाहर नहीं निकल पाएगा। अपने पिता की मौत का हवाला दे उसने पैरोल माँगी थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसे स्वीकृति नहीं दी गई है।

शनिवार (19 सितंबर 2020) रात राजद के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के पिता का निधन हो गया। उसके बाद उसने पैरोल की अर्जी दाखिल की थी। शहाबुद्दीन के पिता शेख मोहम्मद बसीबुल्लाह की तबीयत पिछले कुछ समय से काफी ज़्यादा खराब थी। उन्होंने 90 साल की उम्र में अंतिम साँस ली। यह जानकारी मिलने के बाद राजद के तमाम नेता और कार्यकर्ता पूर्व सांसद के गाँव प्रतापपुर पहुँचे। 

पूर्व सांसद के वकीलों ने शनिवार देर रात से ही उन्हें रिहा कराने के प्रयास शुरू कर दिए थे ताकि वे अपने पिता के जनाज़े को कंधा दे सकें। आवेदन के तहत शहाबुद्दीन ने जेल प्रशासन से 2 हफ्ते की पैरोल पर बाहर जाने की अनुमति माँगी थी। 

साल 2017 के फरवरी महीने में सर्वोच्च न्यायालय ने शहाबुद्दीन को दिल्ली की तिहाड़ जेल शिफ्ट करने का आदेश दिया था। दरअसल अदालत में कई याचिकाएँ दायर की गई थीं जिसमें शहाबुद्दीन को तिहाड़ जेल शिफ्ट करने की माँग की गई थी। इन याचिकाओं पर सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था।

इसके पहले शहाबुद्दीन की बिहार के भागलपुर जेल से हुई रिहाई ने सुर्खियाँ बटोरी थीं। साल 2016 के सितंबर महीने में उसे भागलपुर जेल से रिहा किया गया था। शहाबुद्दीन की रिहाई की ख़बर सामने आते ही तमाम समर्थक और कार्यकर्ता जेल के बाहर जमा हो गए थे।  

शहाबुद्दीन के जेल से निकलते ही सैकड़ों गाड़ियों का काफ़िला उसके साथ चल पड़ा था। ख़बरों की मानें तो उस काफ़िले में लगभग 1300 गाड़ियाँ मौजूद थीं और यह सभी गाड़ियाँ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बिना टोल दिए आगे बढ़ गई थीं। इस घटना के बाद काफी विवाद हुआ था।      

उल्लेखनीय है कि 16 अगस्त 2004 को सीवान के प्रतापपुर में व्यवसायी चंद्रकेश्वर प्रसाद के दो बेटों गिरीश, सतीश और राजीव का अपहरण किया गया था। इनमें से दो भाइयों को तेज़ाब से नहला कर जान से मार दिया गया था और तीसरा भाई राजीव उनके चंगुल से भागने में कामयाब हुआ था। इसके बाद मृतकों की माँ और भाई राजीव ने बयान दिया था जिसके आधार पर मुफस्सिल थाने में शहाबुद्दीन के विरुद्ध मामला दर्ज कराया गया था। इस घटना में शहाबुद्दीन को मुख्य आरोपित बनाया गया था। इस मामले में विशेष अदालत ने शहाबुद्दीन को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी। हाई कोर्ट से भी इस मामले में शहाबुद्दीन को राहत नहीं मिल पाई थी।

LAC पर चीन के साथ तनातनी के बीच 3 हफ्तों में 6 नई चोटियों पर भारतीय सैनिकों ने जमाया डेरा

चीन के साथ तनाव के बीच भारतीय सेना ने लद्दाख के पूर्वी क्षेत्र की 6 चोटियों पर बीते 3 हफ्तों में पहुँच बना ली है। ये चोटियाँ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) वाले क्षेत्र में आती हैं। सूत्रों के मुताबिक इन चोटियों पर चीन की सेना की नजर थी, लेकिन उससे पहले ही भारतीय सेना ने इन पर नियंत्रण कर लिया है।

शीर्ष सरकारी सूत्रों ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि भारतीय सेना के जवानों ने 29 अगस्त और सितम्बर के दूसरे सप्ताह के बीच छ: नई चोटियों को अपने नियंत्रण में ले लिया है। इनमें मागर हिल, गुरुंग हिल, रेसेहेन ला, रेजांग ला और मोकपारी के साथ ही फिंगर 4 के पास स्थित ऊँचाई वाली चोटी शामिल है। फिंगर 4 वही जगह है, जहाँ चीन ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली थी।

अधिकारी ने बताया कि ऊँचाई पर स्थिति इन चोटियों का रणनीतिक महत्व है। यही वजह है कि चीन की भी नजर इन पर थी और वह इन पर अपना कब्जा जमाना चाहता था, लेकिन भारतीय सेना ने चीन से पहले ही इन चोटियों पर नियंत्रण हासिल कर इस क्षेत्र में बढ़त हासिल कर ली है। ये जगहें खाली पड़ी थीं और चीन की इन पर नजर थी।

भारत और चीन के बीच मई से शुरू हुए सीमा गतिरोध के बाद भारतीय सैनिकों को चीन की सेना (पीएलए) ने फिंगर 4 से फिंगर 8 तक जाने से रोक रखा था, लेकिन अब भारत ने फिंगर 4 के नजदीकी इलाक़ों में कब्जा जमा लिया है। 

जानकारी के मुताबिक चीनी सेना की ऊँचाई वाले क्षेत्रों पर कब्जे की कोशिश को नाकाम करते हुए पैंगोग झील के उत्तरी तट से दक्षिणी किनारे तक कम से कम तीन मौकों पर गोलियाँ चलाई गईं। सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि ब्लैक टॉप और हेलमेट टॉप चोटियाँ वास्तविक नियंत्रण रेखा के चीनी हिस्से की तरफ हैं, जबकि भारतीय सेना द्वारा कब्जा की गई चोटियाँ एलएसी के भारतीय हिस्से में हैं। 

बता दें कि भारतीय सेना द्वारा ऊँचाई पर स्थिति मजबूत कर लेने के बाद चीन ने हथियार बंद ब्रिगेड की 3000 अतिरिक्त टुकड़ियों को तैनात किया है। इनमें रेजांग ला और रेचेन ला चोटी के पास चीन की पैदल सेना और बख्तरबंद सैनिक शामिल हैं। वहीं चीनी सेना की ‘मोल्दो गैरीसन’ भी पिछले कुछ सप्ताह में पूरी तरह सक्रिय हो गई है।

एलएसी पर चीन की आक्रामक गतिविधि के बाद से भारतीय बल आपस में कोऑर्डिनेशन के साथ काम कर रहे हैं। भारतीय पक्ष की चौकसी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस समय एलएसी पर होने वाले सभी ऑपरेशन एनएसए अजित डोवाल, सीडीएस बिपिन रावत और सेनाध्यक्ष जनरल मुकुंद नरवणे की अगुवाई में किए जा रहे हैं। 

भारत और चीन के बीच बीते दिनों पैंगोंग त्सो झील, नॉर्थ सब सेक्टर और लद्दाख के चुशुल क्षेत्र में संघर्ष हुए हैं। वहीं जून में गलवान घाटी में हुए संघर्ष के दौरान 20 भारतीय सैनिकों के बलिदान के बाद भारत ने हथियारों के उपयोग न करने के नियम में भी बदलाव किया है। इससे पहले एलएसी पर दोनों पक्ष किसी भी स्थिति में गोली न चलाने के नियम का लंबे समय से पालन कर रहे थे लेकिन गलवान में हुए संघर्ष के दौरान चीनी सेना की करतूत के बाद भारतीय पक्ष ने इस नियम में बदलाव किया है।

कृषि बिल पर राज्यसभा ने ध्वनिमत से लगाई मुहर, PM मोदी ने कहा- करोड़ों किसान सशक्त होंगे

विपक्षी सांसदों के जोरदार हंगामे के बीच राज्‍यसभा ने कृषि विधेयकों को पारित कर दिया है। रविवार (सितंबर 20, 2020) को कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सरलीकरण) विधेयक-2020, कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को उच्च सदन ने ध्वनिमत से पास कर दिया। इसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

बता दें कि यह विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है। विधेयक पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि सुधार संबंधी विधेयकों को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया। उन्होंने कहा, “भारत के कृषि इतिहास में आज एक बड़ा दिन है। संसद में अहम विधेयकों के पारित होने पर मैं अपने परिश्रमी अन्नदाताओं को बधाई देता हूँ। यह न केवल कृषि क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन लाएगा, बल्कि इससे करोड़ों किसान सशक्त होंगे।”

प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा, “मैं पहले भी कहा चुका हूँ और एक बार फिर कहता हूँ: MSP की व्यवस्था जारी रहेगी। सरकारी खरीद जारी रहेगी। हम यहाँ अपने किसानों की सेवा के लिए हैं। हम अन्नदाताओं की सहायता के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे और उनकी आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करेंगे।”

इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा कि कृषि क्षेत्र को आधुनिकतम तकनीक की तत्काल जरूरत है, क्योंकि इससे मेहनतकश किसानों को मदद मिलेगी। अब इन बिलों के पास होने से हमारे किसानों की पहुँच भविष्य की टेक्नोलॉजी तक आसान होगी। इससे न केवल उपज बढ़ेगी, बल्कि बेहतर परिणाम सामने आएँगे। यह एक स्वागत योग्य कदम है।

इन बिलों को राज्यसभा में पेश करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि ये दोनों बिल ऐतिहासिक हैं और किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले हैं। इस बिल के माध्यम से किसान अपनी फसल किसी भी जगह पर मनचाही कीमत पर बेचने के लिए आजाद होगा। इन विधेयकों से किसानों को महँगी फसलें उगाने का अवसर मिलेगा।” वहीं सदन में चर्चा के दौरान कॉन्ग्रेस ने विधेयक को किसानों के डेथ वारंट पर हस्ताक्षर करने जैसा बताया।

बता दें कि ध्‍वनिमत से पारित होने से पहले इन विधेयकों पर सदन में खूब हंगामा हुआ। नारेबाजी करते हुए सांसद वेल तक पहुँच गए। कोविड-19 के खतरे को भुलाते हुए धक्‍का-मुक्‍की भी हुई। विपक्ष ने इसे ‘काला दिन’ बताया है। तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि यह ‘लोकतंत्र की हत्‍या’ है। डेरेक ओ ब्रायन ने उप सभापति के सामने रूल बुक फाड़ने की कोशिश की। इस दौरान डेरेक ओ ब्रायन उप सभापति हरिवंश के बिल्कुल ही करीब पहुँच गए। वहाँ खड़े मार्शल ने बड़ी ही मुश्किल से उन्हें हटाया।

जब उप सभापति हरिवंश ने विधेयकों पर ध्‍वन‍िमत से वोटिंग के लिए कहा तो विपक्षी सांसद हंगामा करने लगे। वे इन विधेयकों को प्रवर समिति (सिलेक्‍ट कमिटी) में भेजे जाने के प्रस्‍ताव पर मत विभाजन की माँग कर रहे थे।

तृणमूल कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी सदस्य आसन के बिल्कुल पास पहुँच गए। हंगामा इतना ज्‍यादा हुआ कि मार्शल को हस्‍तक्षेप करना पड़ा। विपक्षी सदस्‍यों ने विधेयक के टुकड़े हवा में उछाल दिए। यहाँ तक कि उप सभापति के सामने लगा माइक भी तोड़ दिया गया। कुछ देर के लिए सदन की कार्यवाही को रोकना पड़ा। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी हंगामा जारी रहा।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने विधेयकों के राज्यसभा में पास होने के मौके पर कहा, “70 साल से जिस तरीके से किसानों के साथ अन्याय हो रहा था, शोषण हो रहा था, उनको आजादी दिलाने का काम सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किया है।” नड्डा ने आगे कहा, “विपक्षी पार्टियाँ किसान विरोधी हैं और इस प्रक्रिया का हिस्सा बनने के बजाय वह किसानों की इस आजादी को रोकने का प्रयास कर रही हैं। भाजपा उनके कदम की आलचोना करती है।”

ऑर्डर झटका चिकन का, BigBasket ने हलाल सर्टिफाइड पैकेट में भेजा ‘झटका’

गुरुग्राम के रहने वाले कुमार नाम के व्यक्ति ने बिगबास्केट (BigBasket) ऑनलाइन स्टोर से चिकन मँगाया। उन्होंने चिकन ऑर्डर करते समय स्पष्ट किया था कि उन्हें झटका चिकन चाहिए। लेकिन उन्हें जो चिकन भेजा गया उस पर झटका और हलाल दोनों लिखा हुआ था। चिकन के पैकेट के अगले हिस्से पर लिखा था कि यह हलाल है और उत्पाद से जुड़ी जानकारी वाले स्टीकर पर लिखा था कि यह झटका है। 

Ruchhan नाम के यूज़र ने इस घटना का वीडियो ट्विटर पर साझा किया है। उन्होंने लिखा है, “मेरे दोस्त ने बिगबास्केट से झटका चिकन मँगाया था, लेकिन उन्होंने दोनों श्रेणी के चिकन भेज दिए। 2 in 1”

आसानी से देखा जा सकता है कि उत्पाद के लेबल पर लिखा है कि यह झटका चिकन है, जबकि बॉक्स के लेबल पर लिखा है कि यह हलाल है। हम सभी इतना जानते हैं कि झटका और हलाल खाए जाने वाले जीवों को काटने के दो अलग तरीके हैं। इसके बाद कुमार ने बिगबास्केट के उपभोक्ता सहायता केंद्र (कस्टमर केयर) से संपर्क करने का प्रयास किया। उन्होंने इस घटना पर सफाई देते हुए कहा कि वह झटका चिकन ही था। गलती बस यहीं हुई होगी कि उसे गलत पैकेट में रख दिया गया होगा, जिसके लेबल पर हलाल चिकन लिखा हुआ था।

इसके बाद कुमार ने ऑपइंडिया से बात करते हुए इस घटना पर अपनी बात कही। उनका कहना था, “मैं इस बात की सराहना करता हूँ कि उन्होंने मेरी समस्या पर इतनी जल्दी गौर किया। लेकिन ऐसी दिक्कत का हल निकाला ही जाना चाहिए। भरोसे के लिए कोई न कोई आधार होना ही चाहिए। मैं बिगबास्केट के दावों पर भरोसा करना चाहता हूँ, हो सकता है उनसे गलती हुई हो और वह किसी के साथ धोखा नहीं करना चाहते थे। अब बहुत ज़रूरी हो गया है कि झटका चिकन की जाँच करने की एजेंसी बनाई जाए।” 

बिगबास्केट इसके पहले भी केवल हलाल चिकन मीट बेचने को लेकर विवादों में रह चुका है। इस बात पर बिग बास्केट को बड़े पैमाने पर आलोचना का सामना करना पड़ा था। उसके बाद बिगबास्केट ने झटका मीट बेचना भी शुरू किया था। उल्लेखनीय बात है कि हाल फ़िलहाल में ऐसे तमाम उत्पाद सामने आए हैं, जिन पर हलाल का लेबल लगा होता है। इसका मतलब यह है कि खाने की चीज़ें सिर्फ इस्लामी तौर-तरीकों से तैयार ही नहीं की जाती हैं, बल्कि वहाँ ज़्यादातर मुस्लिम कर्मचारी ही काम करते हैं। 

मिसाल के तौर पर हलाल मीट तैयार करने के दौरान स्पष्ट कर दिया जाता है कि इस पूरी प्रक्रिया में सिर्फ मुस्लिम व्यक्ति ही शामिल हो सकता है, अब वह चाहे पैकेजिंग हो या जानवरों को काटना। अगर इसमें कोई गैर मुस्लिम व्यक्ति शामिल होता है तो इस्लाम के मुताबिक़ वह हराम साबित हो जाता है। 

हलाल मीट का सेवन खासकर ऐसे लोग नहीं करते हैं, जिनके धर्म में इस पर पाबंदी होती है। मिसाल के तौर पर सिख समुदाय में भी हलाल मीट का सेवन नहीं किया जाता है, क्योंकि उनके धर्म में इसे सही नहीं माना गया है। वे सिर्फ और सिर्फ झटका मीट का सेवन करते हैं। आधिकारिक खालसा कोड ऑफ़ कंडक्ट ने हलाल मीट को पूरी तरह प्रतिबंधित कर रखा है।        

कॉन्ग्रेस नेता ने SDM का दबाया गला, जान से मारने की कोशिश: खुद अधिकारी ने बताई पूरी बात, NSA में मामला दर्ज

मध्य प्रदेश में शनिवार (सितंबर 19, 2020) को एक कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया। कॉन्ग्रेस नेता पर मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में नाकाबंदी के दौरान एक उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) पर हमला और चेहरे पर कालिख पोतने का आरोप है।  

खबरों के मुताबिक, छिंदवाड़ा जिले में हाल ही में आई बाढ़ से हुए नुकसान के मुआवजे की माँग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान एक अधिकारी के चेहरे पर कालिख लगाने के बाद 20 से अधिक कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ NSA के तहत मामला दर्ज किया गया।

छिंदवाड़ा एसडीएम सीपी पटेल द्वारा दर्ज शिकायत के आधार पर कॉन्ग्रेस नेता बंटी पटेल और 20 अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक चौधरी गंभीर सिंह का नाम भी FIR में लिया गया है। बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस नेता बंटी पटेल पहले से ही दंगे समेत कई अन्य कारणों से आठ से अधिक आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं।

पुलिस के मुताबिक, बंटी पटेल ने एसडीएम पर हमला किया और उनका चेहरा काला कर दिया। पुलिस ने कहा कि किसानों का नेता होने का दावा करने वाले बंटी पटेल शुक्रवार (सितंबर 18, 2020) को अन्य लोगों के साथ चौरई में एसडीएम कार्यालय का घेराव करने आए थे। वह बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए मुआवजे की माँग कर रहे थे।

छिंदवाड़ा के पुलिस अधीक्षक विवेक अग्रवाल ने बताया, “एसडीएम सीपी पटेल ज्ञापन स्वीकार करने आए थे, लेकिन बंटी ने एसडीएम पर हमला किया और उनके समर्थकों ने अधिकारी को घेर लिया और एसडीएम का चेहरा भी काला कर दिया।”

कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर पथराव करना शुरू कर दिया। उन लोगों ने बंटी पटेल की गिरफ्तारी को रोकने का प्रयास किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग का सहारा लेना पड़ा।

एसडीएम सीपी पटेल ने कहा, ”बंटी पटेल ने मेरा गला दबाकर मुझे मारने की कोशिश की। मैं उन्हें आश्वस्त कर रहा था कि जल्द ही हम सर्वेक्षण पूरा करेंगे और मुआवजा जारी करेंगे, लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं मानी। वह मुझ पर हमला करने की योजना बनाकर आए थे।”

कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा अधिकारियों पर हमले के बाद, ऐसे असामाजिक तत्वों से अधिकारियों की सुरक्षा की माँग को लेकर डिप्टी कलेक्टर, एसडीएम और राजस्व अधिकारियों समेत 400 अधिकारी शनिवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए।

छिंदवाड़ा SDM अतुल सिंह ने कहा, “यह राज्य प्रशासनिक सेवाओं (SAS) अधिकारियों की सुरक्षा का मामला है, विशेष रूप से जो कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में काम कर रहे हैं। राज्य सरकार को विरोध प्रदर्शन के दौरान हमें उचित सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए और बीकन लाइट (beacon light) का उपयोग करने की अनुमति भी प्रदान करनी चाहिए ताकि लोग हमारे साथ सम्मान से पेश आएँ।”

श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में भूख से नहीं हुई मौतें: रेल मंत्री पीयूष गोयल ने संसद के पटल पर रखे तथ्य

श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में 97 लोगों की मौत हुई। ये ट्रेनें लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों को उनके घर तक पहुॅंचाने के लिए चलाई गईं थी। मृतकों में करीब 60 पहले से ही बीमार थे। नरेंद्र मोदी सरकार ने यह जानकारी संसद में दी है।

राज्यसभा में तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद डेरेक ओब्रायन द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में [pdf] में शुक्रवार को रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इन विशेष गाड़ियों में मरने वालों की संख्या का आँकड़ा उपलब्ध कराया।

रेलमंत्री ने कहा, “राज्य पुलिस द्वारा उपलब्ध कराए गए आँकड़े के आधार पर वर्तमान कोविड-19 संकट के दौरान श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में यात्रा करते हुए 9 सितंबर, 2020 तक 97 लोगों की मौत की सूचना है।” गोयल ने बताया कि इन 97 मामलों में से राज्य पुलिस ने 87 मामलों में शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

रेल मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि अब तक संबंधित राज्य पुलिस बलों से प्राप्त कुल 51 पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला है कि उनकी मौत का कारण हृदय गति रुकने, दिल की बीमारी, ब्रेन हेमरेज, पूर्व से ही क्रोनिक बीमारी या अन्य लिवर या फेफड़े की बीमारी का कारण बताया गया है।

प्रवासियों की प्राकृतिक मौत पर रेल मंत्री की प्रतिक्रिया काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों से वामपंथी मीडिया इस मुद्दे प्रोपेगेंडा कर रही थी। जिसमें बताया जा रहा था कि ये मौतें भूख से हुई हैं।

जब से मोदी सरकार ने प्रवासी मजदूरों को घर वापस भेजने के लिए विशेष श्रमिक ट्रेनों की शुरुआत की, वामपंथी-उदारवादी मीडिया समूहों ने श्रमिक ट्रेनों में कुछ प्रवासी श्रमिकों की मृत्यु पर सरकार को घेरने के लिए भ्रामक रिपोर्ट के जरिए प्रचार करना शुरू कर दिया था। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स ने दावा किया था कि यात्रा के दौरान इन प्रवासी मजदूरों की मौत भूख से हुई थी।

वामपंथी गिरोह द्वारा किए जा रहे भ्रामक रिपोर्ट्स को सरकार ने समय-समय पर खारिज कर दिया था, लेकिन कुछ मीडिया ने लगातार ऐसी खबरों का प्रचार-प्रसार जारी रखा कि प्रवासी मजदूर भूख के कारण मर गए, क्योंकि सरकार उन्हें खाना देना भूल गई।

इसकी शुरुआत हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट से हुई। 30 मई को एक रिपोर्ट प्रकाशित कर दावा किया गया था कि 9-27 मई के बीच 80 प्रवासियों की मौत हो गई थी। वामपंथी मीडिया समूहों ने इस तथ्य को ऐसे पेश किया जैसे मौतें भूख से हुई हों।

अक्सर फर्जी खबरों का प्रचार-प्रसार करने वाले लेफ्ट विंग स्क्रॉल ने हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के आधार पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, लेकिन रिपोर्ट को अपने आधार पर तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। बता दें इस पोर्टल को कई बार फेक न्यूज़ फैलाते हुए पकड़ा भी गया है। स्क्रॉल ने दावा किया, “हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा समीक्षा की गई रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के आँकड़ों के मुताबिक, लॉकडाउन के बीच अपने गाँव के लिए विशेष ट्रेनों की यात्रा करते हुए 9 मई से 27 मई के बीच लगभग 80 प्रवासी श्रमिकों की भूख और गर्मी से मृत्यु हो गई।”

साभार: स्क्रॉल

मोदी सरकार पर हमला करने के लिए प्रवासी मजदूरों की मौत के मुद्दे का फायदा उठाने के लिए न केवल स्क्रॉल, वामपंथी प्रचार वेबसाइट द वायर ने भी इस फर्जी खबर को फैलाने में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। द वायर ने यह दावा करके गलत सूचना देने का प्रयास किया था कि कई प्रवासी मजदूरों ने संक्रमण के दौरान भूख और डिहाइड्रेशन के कारण अंतिम साँस ली थी।

साभार: द वायर

एक अन्य तथाकथित स्व-घोषित फैक्ट चेक वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ (जिसके सह-संस्थापक पर बच्ची के ऑनलाइन उत्पीड़न का आरोप है) ने भी इसी तरह के फेक न्यूज़ को बढ़ावा दिया था। उन्होंने दावा किया कि रेलवे ने न तो भोजन दिया और न ही पानी दिया। इसी वजह से भूख के कारण श्रमिक ट्रेनों में प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई।

इसी तरह कारवां इंडिया की पत्रकार विद्या कृष्णन भी श्रमिक एक्सप्रेस के बारे में झूठ फैला रही थी। स्व-घोषित पत्रकार विद्या कृष्णन ने दावा किया था कि 40 श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेनें अपना रास्ता भटक गई और सरकार यात्रियों को खाना देना भूल गई, जिसके कारण कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई।

हालाँकि, पीआईबी फैक्ट चेकिंग वेबसाइट ने फर्जी खबर फैलाने वालों को लेकर उस वक्त ट्विटर पर कहा था कि मृत्यु का कारण शव परीक्षण और उचित कानूनी प्रक्रिया के बिना निर्धारित नहीं किया जा सकता है।

गौरतलब है कि केंद्र द्वारा सुप्रीम कोर्ट को सूचित करने के बावजूद कि श्रमिक ट्रेनों में मौत भूख या भोजन की कमी के कारण नहीं हुई थी, इन मीडिया आउटलेटों ने इस तरह की गलत सूचना को फैलाना जारी रखा था।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा था कि एक जाँच में पाया गया कि भोजन, पानी या दवा की कमी से कोई मौत नहीं हुई। जिन लोगों की मृत्यु हुई है उन्हें पहले से कुछ बीमारियाँ थी।

ऑपइंडिया ने भी मृत प्रवासियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की समीक्षा की थी। 30 ऐसी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला था कि प्रवासियों की मौत भूख से नहीं हुई है। अन्य मृतक व्यक्तियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स से यह भी पता चला कि उनकी मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई थी और पहले से मौजूद बीमारी की वजह से, न कि भूख के कारण।

उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार ने लॉकडाउन अवधि के दौरान प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्यों तक पहुँचाने के लिए 1 मई को श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू किया था। रेल मंत्रालय ने संसद में बताया, मंत्रालय ने कुल 4,621 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें 1 मई से 31 अगस्त के बीच चलाई थी। इनसे 6,319,000 यात्रियों को उनके गृह राज्य में पहुँचाया गया था।

‘सिख धर्म गुरुओं के साथ आतंकियों की तस्वीरें लगाते हैं खालिस्तानी समर्थक, पाकिस्तानी प्रोजेक्ट है यह’

पिछले कुछ समय से खालिस्तान मुद्दे पर बहस दोबारा ज़ोर पकड़ चुकी है। सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसी वीडियो और तस्वीरें सामने आती हैं, जिसमें खालिस्तानी समर्थक नज़र आ जाते हैं। खालिस्तान का पाकिस्तान से संबंध भी छुपा नहीं रह गया है।

इसका सबसे पुख्ता सबूत है “Khalistan: A Project of Pakistan” (खालिस्तान: पाकिस्तान का एक प्रोजेक्ट) नाम की रिपोर्ट। मैकडोनाल्ड लौरियर इंस्टिट्यूट (MLI) द्वारा प्रकाशित इस रिपोर्ट में पाकिस्तान और खालिस्तानी समर्थकों के बीच संबंधों पर विस्तार से चर्चा की गई है। 

इस रिपोर्ट पर चर्चा करने के लिए 18 सितंबर 2020 को एक वेबिनार आयोजित कराया गया था। इसका शीर्षक था – “Khalistani Terrorism & Canada” यानी कनाडा में बढ़ते खालिस्तानी आतंकवाद पर चर्चा।

इसका आयोजन नई दिल्ली की थिंक टैंक लॉ एंड सोसाइटी अलायन्स ने कराया था। वेबिनार में शामिल होने वाले मुख्य 4 लोगों ने सिसिलेवार तरीके से इस मुद्दे पर अपना विचार रखा। इसमें शामिल होने वाले 4 लोग टेरी मिलेव्सकी, रमी रेंजर, सुखी चहल और मेजर गौरव आर्य थे।  

सबसे पहले MIL की रिपोर्ट के लेखक टेरी मिलेव्सकी ने कहा:

“मैंने 15 अगस्त को ऐसे कई इवेंट देखे, जिसमें खालिस्तान का समर्थन किया जा रहा था। इस बात में कोई संदेह नहीं है ऐसे आयोजनों के पीछे कोई और नहीं बल्कि मिशन पाकिस्तान का हाथ है। कुछ ही सिख ऐसे हैं, जो पाकिस्तान का साथ दे रहे हैं बाकी असली सिखों के साथ पाकिस्तान में अत्याचार किया जा रहा है। उनका धर्म परिवर्तन कराया जाता है, उनके गुरुद्वारों पर हमले होते हैं, उनके बेटियों के साथ बलात्कार किया जाता है। यही मूल कारण है कि पाकिस्तान में सिखों की आबादी घट रही है।” 

इसके बाद उन्होंने कहा कि वो हाल ही में खालिस्तानियों द्वारा तैयार किया गया एक नक्शा देखे। इसमें भारत के कई हिस्सों को शामिल किया गया था, यहाँ तक की दिल्ली के एक बड़े हिस्से पर भी दावा किया गया था।

सच यही है कि भारत कनाडा के खालिस्तानी समर्थकों पर कार्रवाई नहीं कर सकता है। इसका पहला कारण है कि वह कनाडा के नागरिक हैं। दूसरा भारत के पास केवल इस बात के सबूत हैं कि वह आतंकवाद का समर्थन करते हैं न कि आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हैं। भारत के लिए यह स्थिति वॉर ऑफ़ इनफॉर्मेशन जैसी है।     

इसके बाद लार्ड रमी रेंजर ने भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह की बात का उल्लेख करके अपनी बात शुरू की। उन्होंने कहा, “गुरु गोबिंद सिंह ने कहा था कि विविधता को स्वीकार किया जाना चाहिए। इसका सम्मान होना चाहिए और ज़रूरत पड़ने पर इसकी रक्षा भी करनी चाहिए।”

खालसा पंथ को किसी एक क्षेत्र के लिए नहीं बनाया गया था बल्कि भारत की धार्मिक विविधता को बरकरार रखने के लिए इसका गठन हुआ था। सिखों के धर्म गुरु पूरे भारत देश को अपनी माता की तरह मानते थे। गुरु गोबिंद सिंह खुद पटना में पैदा हुए थे और महाराष्ट्र में आगामी कुछ साल बिताए। 

उन्होंने बताया कि पंज प्यारे भी भारत के अलग-अलग इलाकों से आते हैं। असल मायनों में खालिस्तानी समर्थक उस देश को ही नुकसान पहुँचा रहे हैं, जिन्होंने उनको शरण दी।

खालिस्तानी समर्थकों को अगर अलग क्षेत्र चाहिए तो उन्हें सबसे पहले पाकिस्तान स्थित गुरु ननकाना साहिब के जन्मस्थल से शुरुआत करनी चाहिए। उसके बाद महाराजा रणजीत सिंह का लाहौर स्थित साम्राज्य अलग शामिल करना चाहिए। पाकिस्तान के 350 गुरुद्वारे आज़ाद कराए जाएँ। भारत तो ऐसा देश है, जिसने हाल ही में गुरु गोबिंद सिंह का 350वाँ जन्मदिन मनाया और गुरुनानक का 550वाँ जन्मदिन मनाया।   

इसके बाद खालसा टुडे के संस्थापक सुखी चहल ने भी कई अहम बातें कहीं। उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह के कथन का ज़िक्र करते हुए अपनी बात शुरू की – “देह शिवा वर मोहे एहे।” उन्होंने कहा कि खालिस्तानी समर्थक आतंकवादियों की तस्वीरें सिखों के धर्म गुरुओं के साथ लगाते हैं।

सिखों को यह समझना चाहिए कि पंजाब का सबसे ज़्यादा नुकसान पाकिस्तान ने किया है, और खालिस्तानी सिख उनका ही समर्थन कर रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तान में एक ग्रंथी की बेटी का अपहरण किया गया था। इसके बाद उसे जबरन इस्लाम कबूल कराया गया और निकाह भी हुआ। 

उनका कहना था कि हैरानी की बात यह थी कि किसी भी खालिस्तानी समर्थक ने इस घटना का विरोध नहीं किया। खालिस्तानियों को अगर अपना क्षेत्र चाहिए तो उन्हें इसकी शुरुआत पाकिस्तान से करनी चाहिए। इसके बाद उन्हें चीन और अफग़ानिस्तान के इलाकों को भी शामिल करना चाहिए।

अभी सबसे बड़ी माँग यही है कि विदेशों में रहने वाले मॉडरेट सिख खालिस्तानी समर्थकों का विरोध करें। जब किसी दूसरे देश में रहने वाला सिख भारत आता है तो सबसे इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरता है। जिन्होंने सिख पर इतना अत्याचार किया, उसके नाम पर हवाई अड्डे! नाम तो गुरुतेग बहादुर के नाम पर होना चाहिए, जो दिल्ली में शहीद हुए थे।    

अंत में पूर्व मेजर गौरव आर्या ने भी इस मुद्दे पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा अगर मैं आज हिन्दू हूँ तो सिखों की वजह से हूँ। हमारे अस्तित्व में एक अहम भूमिका सिख धर्म गुरुओं की है। उन्होंने हमारी सुरक्षा के लिए अपना जीवन क़ुर्बान कर दिया। हम विदेशों में भारतीय सीईओ को देख कर खुश होते हैं लेकिन पाकिस्तान के लोगों के साथ ऐसा कुछ नहीं है। वह ऐसे किसी शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति को देख कर कहते हैं कि उसमें इतनी योग्यता ही नहीं है कि वह उस मुकाम तक पहुँचे। 

उनके मुताबिक़ अमेरिका सिर्फ और सिर्फ इसलिए सुरक्षित है क्योंकि अमेरिका की सेना देश के बाहर लड़ाई लड़ती है उसे देश के भीतर नहीं लड़ना पड़ता है। हम रामायण के सिद्धांतों पर चल महाभारत की लड़ाई नहीं लड़ सकते हैं। भारत सरकार को कुछ मुद्दों पर अपना मत स्पष्ट करके कठोर बनना पड़ेगा। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह सब कठिन हो सकता है लेकिन भारत के पास क्षमता है और भारत यह सब कुछ नियंत्रित कर सकता है।   

तुम सा स्त्रीवादी नहीं देखा: अनुराग कश्यप को तापसी पन्नू का साथ, कभी कहा था- आरोपित को सेलिब्रिटी मत बनाओ

यौन शोषण के आरोपित अनुराग कश्यप का अभिनेत्री तापसी पन्नू ने समर्थन किया है। बकौल तापसी उन्होंने अनुराग जैसा स्त्रीवादी (फेमिनिस्ट) नहीं देखा है। ये वहीं तापसी हैं जिन्होंने कभी कहा था कि ‘मीटू’ के आरोपी को सेलिब्रिटी नहीं बनाना चाहिए। अनुराग पर जबरदस्ती करने और यौन शोषण का आरोप साउथ की एक्ट्रेस पायल घोष ने लगाया है।

तापसी ने अपने इंस्टाग्राम पर अनुराग के साथ अपनी एक तस्वीर शेयर की है। इसमें वे अनुराग के कंधे पर हाथ रख कर टहलती नजर आ रही हैं। साथ ही, अनुराग को इशारों इशारों में बेगुनाह बताते हुए फेमिनिस्ट बताया है। उन्होंने लिखा है, “मेरे दोस्त, आप सबसे बड़े फेमिनिस्ट हैं, जिन्हें मैं जानती हूँ। जल्द ही किसी नए आर्ट सेट पर आपसे मिलती हूँ, जो दिखाएगा कि आपके द्वारा बनाई गई दुनिया में महिलाएँ कितनी शक्तिशाली और महत्वपूर्ण हैं।”

तापसी पन्नू ने अपने ट्विटर अकाउंट पर भी यही बातें लिखीं है।

उल्लेखनीय है कि ये वही तापसी पन्नू हैं, जिन्होंने साल 2018 में एक ट्वीट करते हुए यौन शोषण मामले में आरोपित मलयालम एक्टर दिलीप के खिलाफ लंबा-चौड़ा ज्ञान दिया था। एक ट्विटर यूजर द्वारा एक्टर दिलीप और एक्ट्रेस काव्या को बेटी होने की बधाई देने पर तापसी पन्नू ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि जब तक हम अभियुक्त का गुणगान करना बंद नहीं करेंगे, Metoo आंदोलन किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सकता है। इससे भी ज्यादा शर्मिंदगी की बात तब होती है कि जब खुद महिलाएँ इस आंदोलन के साथ खड़ी न होकर इसके खिलाफ हो जाती हैं। 

इसके साथ ही उन्होंने अपने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि उन्हें अपनी बेटी से वादा करना चाहिए कि वह किसी और पुरुष को वैसा नहीं करने देंगे, जैसा कि उन्होंने अन्य महिला के साथ किया। बता दें कि फरवरी 2017 में दिलीप पर एक लोकप्रिय मलयालम एक्ट्रेस के यौन शोषण और उनके खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगा था।

गौरतलब है कि तापसी पन्नू, अनुराग कश्यप के साथ फिल्म ‘मनमर्जियाँ’ और ‘साँड की आँख’ जैसी फिल्में कर चुकी हैं। इससे पहले अनुराग ने खुद पायल के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया था। उन्होंने ट्वीट कर सफाई देते हुए कहा, “इतना समय ले लिया मुझे चुप करवाने की कोशिश में। चलो कोई नहीं। मुझे चुप कराते कराते इतना झूठ बोल गए की औरत होते हुए दूसरी औरतों को भी संग घसीट लिया। थोड़ी तो मर्यादा रखिए मैडम। बस यही कहूँगा कि जो भी आरोप हैं आपके, सब बेबुनियाद हैं। बाकी मुझपे आरोप लगाते-लगाते, मेरे कलाकारों और बच्चन परिवार को संग में घसीटना तो मतलब नहले पे चौका भी नहीं मार पाए।”

‘पटेल की पंजाबी शादी’ फेम एक्ट्रेस पायल घोष ने अनुराग कश्यप पर यौन शोषण का आरोप लगाते हुए ट्वीट किया, “अनुराग कश्यप ने मेरे साथ जबरदस्ती की और बहुत बुरा बर्ताव किया है। नरेंद्र मोदी जी कृप्या इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। देश को पता चले कि इस क्रिएटिव आदमी के पीछे एक राक्षस है। मुझे पता है यह मुझे नुकसान पहुँचा सकता है और मेरी सुरक्षा खतरे में है। प्लीज मेरी मदद कीजिए।”

पायल के ट्वीट पर फैन्स के साथ कई सेलेब्स तेजी से रिएक्ट कर रहे हैं। सभी ट्विटर पर अरेस्ट अनुराग कश्यप ट्रेंड करा रहे हैं। वहीं कंगना रनौत ने भी इस पर अपना रिएक्शन दिया है। कंगना ने भी पायल को सपोर्ट करते हुए ट्वीट किया, “हर आवाज की अहमियत है। अनुराग कश्यप को गिरफ्तार करो।” 

व्हिस्की पिलाते हुए… 7 बार न्यूड सीन: अनुराग कश्यप ने कुबरा सैत को सेक्रेड गेम्स में ऐसे किया यूज

अनुराग कश्यप का बड़ा नाम है फिल्म इंडस्ट्री में। उससे भी बड़ा लिबरल समुदाय में। कल 19 सितंबर को जब पायल घोष ने इन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया तो नाम और भी बड़ा हो गया। पक्के ‘फेमिनिस्ट’ की भाँति 4 ट्वीट करके इन्होंने खुद को पाक-साफ भी बता दिया।

लेकिन अनुराग कश्यप का नाम यौन उत्पीड़न, जबरन सीन ठूँसने या MeToo जैसे मामले में पहली बार आया हो, ऐसा नहीं है। पक्के ‘फेमिनिस्ट’ अनुराग पर 2018 में भी यौन उत्पीड़न तो नहीं लेकिन बार-बार एक ही तरह का सीन (न्यूड सीन करवाने) करवाने का आरोप लग चुका है।

कुबरा सैत ने सेक्रेड गेम्स में एक ट्रांसजेंडर कैरेक्टर का रोल निभाया था। इसी रोल के लिए निर्देशक अनुराग कश्यप ने कुबरा को बार-बार न्यूड सीन करवाया था। सीन को समझाने के लिए अनुराग खुद कुबरा के लिए व्हिस्की का ग्लास भरते और पूरे इमोशन से डायलॉग बोलते थे। 2018 में टाइम्स नाउ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने इसका खुलासा किया था।

उन्होंने सेक्रेड गेम्स में अपने अनुभव के आधार पर बताया था, “उसने (अनुराग ने) मुझसे 7 बार सीन करवाया। हर बार सीन के बाद, वह मेरे पास आता है और कहता है सॉरी, मैं आपको बार-बार ऐसा करने के लिए कह रहा हूँ, सॉरी। बस एक बार और… एक और बार… एक और…“

पक्के ‘फेमिनिस्ट’ अनुराग कश्यप पर तब भी बॉलिवुड चुप रहा था, अब भी चुप है। अब तो उन्होंने चार ट्वीट लिख कर सफाई भी दे दी है।

थोड़ा और पीछे 2014 तक जाएँगे तो अनुराग कश्यप यौन शोषण के आरोपित ‘तहलका’ के संपादक का बचाव करने लगे थे। अनुराग ने फेसबुक पर तरुण तेजपाल के समर्थन में लिखा था “मैंने सीसीटीवी फुटेज देखी है और उसमें ऐसा कुछ भी नहीं है, जैसा वह लड़की (पीड़िता) तरुण तेजपाल के बारे में कह रही है।”

10 साल से इस्लाम को पढ़-समझ… मर्जी से कबूल किया यह मजहब: ड्रग्स मामले में जेल में बंद अभिनेत्री संजना

कन्नड़ अभिनेत्री संजना गलरानी संदलवुड ड्रग्स मामले में जेल में बंद हैं। उनके धर्म को लेकर एक बड़ा खुलासा किया गया है। कई समाचार समूहों में प्रकाशित ख़बरों के मुताबिक़ उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था। इसके पहले उनका पूरा नाम अर्चना मनोहर गलरानी था लेकिन कुछ साल पहले उन्होंने इस्लाम धर्म अपनाया और अपना नाम बदल कर माहिरा रख लिया था।  

ख़बरों के मुताबिक़ अभिनेत्री संजना ने लगभग 2 साल पहले इस्लाम धर्म कबूल किया था। ऐसा करने के ठीक बाद उन्होंने अपना नाम भी बदल लिया था। इस मामले में धर्म परिवर्तन से जुड़े कई दस्तावेज़ भी सामने आए हैं।

इन दस्तावेज़ों में पंजीयन प्रमाण पत्र, हलफ़नामा और बेंगलुरु की एक मस्जिद द्वारा जारी किया गया प्रमाण पत्र भी शामिल है। इन सभी सबूतों के आधार पर स्पष्ट होता है कि लगभग 2 साल पहले 9 अक्टूबर को संजना ने नाम बदल कर माहिरा रख लिया है। 

हालाँकि इस दस्तावेज़ में संजना ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष भी रखा है। दारूल उलूम शाह वलीउल्लाह द्वारा जारी किए गए दस्तावेज़ में उन्होंने लिखा है, “मैं पिछले 10 साल से इस्लाम धर्म को पढ़ रही हूँ और समझने का प्रयास कर रही हूँ। मैंने यह मज़हब अपनी मर्ज़ी से कबूल किया है। मैं पिछले काफी समय से इससे प्रभावित थी, इसलिए मैंने यह फैसला लिया।”

इसके अलावा भी कन्नड़ अभिनेत्री ने इन दस्तावेज़ों में अपनी तरफ से इस्लाम को लेकर कई बातें लिखी हैं।   

(साभार – asianetnews)

इसके बाद भाजपा नेता शोभा करंदलजे ने भी इस संबंध में ट्वीट किया था। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि संजना का असल नाम माहिरा है। ड्रग्स मामले में गिरफ्तार की गई अभिनेत्री संजना गलरानी ने साल 2018 में ही इस्लाम धर्म कबूल कर लिया था। पूरे देश में लव जिहाद के मामले सामने आ रहे हैं, ऐसे में शंका जताई जा सकती है कि ड्रग्स माफ़िया के तार भी इससे जुड़े हो सकते हैं। 

वहीं दूसरी तरफ संजना गलरानी की परेशानियाँ कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। संजना पिछले काफी समय से इस कोशिश में लगी थीं कि उन्हें जमानत मिल जाए लेकिन फ़िलहाल उनकी हिरासत 30 सितंबर तक बढ़ा दी गई है।

कुछ दिन पहले सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने ड्रग्स मामले में संजना के बेंगलुरु स्थित घर पर छापा मारा था। अधिकारियों ने संजना के लैपटॉप, मोबाइल और अन्य दस्तावेज़ों को भी जब्त कर लिया था। 8 सितंबर को इस मामले में दूसरी अभिनेत्री रागिनी द्विवेदी समेत 6 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया था। इन सभी लोगों पर NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी।