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बबलू उर्फ शब्बीर ने मेरे शरीर का कपड़ा खोल दिया, बराबर गलत काम किया: 8वीं की हिंदू बच्ची ने कोर्ट में सुनाई आपबीती

बिहार के मधुबनी जिले के हरलाखी थानांतर्गत ग्राम नहरनियाँ से गायब हुई 14 वर्षीय नाबालिग अब अपने परिवार के पास पहुँच चुकी है। उसकी बरामदगी बिहार पुलिस ने अहमदाबाद से कुछ दिन पहले ही की थी और साथ ही आरोपित शब्बीर (पिछली शिकायत में नाम साबिर है) को भी गिरफ्तार किया था। परिजनों के अनुसार, प्रशासन ने लड़की को उन्हें 15 सितंबर को सौंपा। इससे पहले उसका बयान कोर्ट में दर्ज किया गया।

कोर्ट में दिए बयान में लड़की ने सारी आपबीती बताई। इसकी एक कॉपी ऑपइंडिया के पास भी है। पीड़िता ने बताया कि 20 अगस्त 2020 को शाम 6:30 बजे जब वह शौच करने के लिए गई तभी शब्बीर ने पीछे से उसका मुँह पकड़ लिया और उसे नशीला पदार्थ सुंघाकर बेहोश कर दिया। फिर उसे दिल्ली ले गए। उसके बाद गुजरात ले गया। गुजरात पहुँचकर उसे मालूम हुआ कि शब्बीर के साथ और लोग भी थे।

हालाँकि, बेहोश हालत में होने के कारण पीड़िता किसी को पहचान नहीं पाई। जब उसने उनका विरोध किया तो उसे चुप रहने की धमकी दी गई और कहा गया, “तुम्हारे घरवालों को भी निपटा देंगे।” बयान में लड़की ने अपने साथ ‘गलत काम’ होने की बात कही है। उसने कहा है, “मेरे साथ बबलू उर्फ शब्बीर ने गलत काम किया और मेरे शरीर का कपड़ा खोल दिया एवं लगातार गलत काम करता रहा। मैं विरोध करती तो जबरदस्ती मेरे साथ गलत करता।”

पीड़िता के घर लौटने के बाद ऑपइंडिया ने उससे और उसके परिजनों से बात की। पीड़िता ने बयान में लिखी बातों को दोहराते हुए बताया कि अहमदाबाद ले जाने के समय उसे धमका दिया गया था। वहीं, लड़की के भाई ने बताया कि शब्बीर (साबिर) ने उनकी बहन को अगवा कर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया और भगवान का नाम लेने से भी मना किया।

पीड़िता के भाई की मानें तो शब्बीर उनकी बहन को कहता था भगवान का नाम मत लिया करो। यह गुनाह होता है। अल्लाह का नाम लिया करो। वह बताते हैं कि शब्बीर उनकी बहन से धर्म परिवर्तन और शादी के लिए दबाव बनाता था, लेकिन उनका मानना है कि शादी वगैरह सब झूठी बातें हैं, और वह उनकी बहन को बेचने के इरादे से ही ले गया था।

बता दें, पुलिस ने इस मामले में शब्बीर के साथ उसके एक साथी को भी गिरफ्तार किया है। इसके अलावा लड़की ने बरामद होने के बाद एक मुर्तजा नाम के लड़के का नाम भी पुलिस को बताया है। उसका कहना है कि शब्बीर के कुकर्म में वह भी शामिल था।

उल्लेखनीय है कि इस पूरे किडनैपिंग मामले पर एनसीपीसीआर ने पिछले दिनों संज्ञान लिया था। उससे पहले इस मामले को क्षेत्र विधायक सुधांशु शेखर के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने दायर किया था। परिवार ने शिकायत में बताया था कि 20 अगस्त को नाबालिग अपने घर से शौच के लिए बाहर निकली थी। इसके बाद वह लापता हो गई। घरवालों ने उसके अपहरण का आरोप गाँव में ही रहने वाले दूसरे समुदाय के शब्बीर पर लगाया था। पीड़ित पक्ष का ये भी कहना था कि जब वह शब्बीर के घर पर अपनी बेटी का पता पूछने गए तो उन्हें लड़की के बारे में बताने की बजाय ये कहा गया कि तुम्हारे बेटी का धर्म परिवर्तन करवाने के लिए ले गए हैं।

इस संबंध में 23 अगस्त को लड़की के घरवालों ने शिकायत दर्ज करवाई थी और 26 अगस्त को इस मामले पर एफआईआर हुई थी। लड़की के पिता ने अपनी शिकायत में कहा था कि जब वह लोग अपनी लड़की के बारे में पूछने शब्बीर के घर गए तो उन्हें कहा गया, “तुमको जो ताकत लगाना है लगाओ। हमने तैयारी कर ली है। तुम्हारी लड़की का धर्मांतरण कर देंगे। तुम्हारी औकात नहीं है कि तुम हम सबका कुछ कर सको। मेरे घर से चले जाओ नहीं तो मारकर फेंक देंगे।

चीन के इशारों पर नेपाल की नई चाल: देहरादून, नैनीताल समेत हिमाचल, यूपी, बिहार और सिक्किम के कई शहरों को बताया अपना हिस्सा

पड़ोसी देश नेपाल ने भारत को उकसाने के लिए एक बार फिर अजीबोगरीब बयान दिया है। नेपाल के नए कारनामें की वजह से दोनों देशों में फिर से तनाव बढ़ने की संभावना है। चीन के इशारों पर काम कर रहे नेपाल ने अब एक और विवादित अभियान चला रखा है। इस अभियान के तहत वो उत्तराखंड के देहरादून, नैनीताल समेत हिमाचल, यूपी, बिहार और सिक्किम के कई शहरों को नेपाली होने का दावा कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टी नेपाली कम्यूनिस्ट पार्टी ने यूनिफाइड नेपाल नेशनल फ्रंट के साथ हाथ मिलाकर ग्रेटर नेपाल के लिए एक नया अभियान शुरू किया है। इस अभियान में भारतीय शहरों जैसे देहरादून और नैनीताल को नेपाल का होने का दावा किया है।

इतना ही नहीं नेपाल के कम्युनिस्टों ने अपने अवैध दावे में भारतीय शहर उत्तराखंड, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, बिहार और सिक्किम को भी अपने ‘ग्रेटर नेपाल’ अभियान में नेपाल का हिस्सा बताया है। बता दें 1816 में हुई सुगौली संधि से पहले के नेपाल की तस्वीर का हवाला देते हुए नेपाल के नागरिकों को भ्रमित किया जा रहा है। साथ ही इस दावे को लेकर पहले ही सोशल मीडिया अभियान शुरू किया जा चुका है।

नेपाली वामपंथियों के समूह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बकायदा ‘ग्रेटर नेपाल’ नाम से एक फेसबुक पेज भी बनाया है, जो भारतीय क्षेत्रों को नेपाल में विलय की माँग करता है।

बता दें केपी ओली के नेपाल में सत्ता में आने के बाद से ही ग्रेटर नेपाल की माँग उठने लगी थी। इससे पहले नेपाल ने 8 अप्रैल 2019 को संयुक्त राष्ट्र में भी इस मुद्दे को उठाया था।

गौरतलब है कि नेपाल द्वारा यह पहली बार भारतीय क्षेत्रों पर फर्जी दावा नहीं किया गया है। इससे पहले भी नेपाल ने भारतीय क्षेत्र लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को अपने नए राजनीतिक मानचित्र में शामिल किया था। जिसके बाद भारत में इसे लेकर काफी हंगामा हुआ था।

रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली पर भारत विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए चीन से भारी रिश्वत लेने का आरोप भी लगाया गया है। कथित तौर पर इसके लिए चीनी सरकार नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को कई मिलियन डॉलर दे रही है।

नेपाल के प्रधानमंत्री पर आरोप है कि ओली के जेनेवा बैंक अकाउंट में 41.34 करोड़ रुपए जमा हैं। बताया जा रहा है कि इसी तरीके से चीन नेपाल सरकार को भारत के खिलाफ बरगलाने का काम कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि चीन के इशारे पर कार्रवाई करते हुए नेपाल की संसद ने जून में देश के संविधान में लिम्पियाधुरा, लिपुलेख, और कालापानी सहित देश के नक्शे को अपडेट करने के लिए एक संशोधन पारित किया था।

उमर खालिद के अरेस्ट होने की क्या है वजह? अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti explains Why Umar Khalid arrested

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों की जाँच में जुटी दिल्ली पुलिस ने पिछले दिनों उमर खालिद को गिरफ्तार किया। उसकी गिरफ्तारी के साथ ही सोशल मीडिया पर लिबरल गिरोह का रोना पीटना शुरू हो गया। इससे पहले खालिद का नाम AAP के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन की गिरफ्तारी के बाद सामने आया था।

दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में हुसैन ने यह कबूला था कि 8 जनवरी 2020 को शाहीन बाग में उसकी मीटिंग उमर खालिद और खालिद सैफी से हुई, जिसमें यह तय हुआ कि दंगे कब होने हैं। अब इसी उमर खालिद के फोन से पुलिस को 40 जीबी ऐसा डेटा हाथ लगा है, जिसकी फॉरेंसिंक जाँच के बाद पता चलता है कि आखिर उमर खालिद किस करह इन दंगों में शामिल था।

इसके अलावा उमर के भाषणों पर यदि गौर किया जाए तो यह भी मालूम होगा कि उसने कैसे वर्ग विशेष को उन हर कानूनों पर बरगलाया, जिन्हें सरकार या तो समुदाय विशेष की भलाई के लिए लेकर आई या जिनसे उनका कोई लेना-देना नहीं था।

पूरी वीडियो का लिंक यहाँ क्लिक करके देखें

थालियाँ सजाते हैं यह अपने बच्चों के लिए, हम जैसों को फेंके जाते हैं सिर्फ़ टुकड़े: रणवीर शौरी का जया को जवाब और कंगना को साथ

फिल्म कलाकार और राज्यसभा सांसद जया बच्चन के संसद में दिए ‘थाली में छेद’ वाले बयान पर लगातार विवाद जारी है, कुछ कलाकारों ने जया बच्चन के इस बयान का समर्थन किया था। वहीं कंगना रनौत ने इस इस मुद्दे पर जया बच्चन को करारा जवाब दिया था। अब बॉलीवुड कलाकार रणवीर शौरी ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कंगना को समर्थन देते हुए कहा है कि उनके जैसे कलाकार अपना टिफिन खुद पैक करके काम पर जाते हैं।       

रणवीर शौरी ने कंगना रनौत का समर्थन करते हुए ट्वीट किया और जया बच्चन के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। ट्वीट में उन्होंने जया बच्चन के नाम का ज़िक्र नहीं करते हुए लिखा, “थालियाँ सजाते हैं यह अपने बच्चों के लिए। हम जैसों को फेंके जाते हैं सिर्फ़ टुकड़े। अपना टिफिन खुद पैक करके काम पे जाते हैं हम। किसी ने कुछ दिया नहीं है। जो है, वो है जो यह लोग हमसे ले नहीं सके। इनका बस चलता तो वो भी अपने ही बच्चों को दे देते।”

गौरतलब है कि जया बच्चन के बयान पर पूरा बॉलीवुड दो हिस्सों में बँट गया है। जिसमें कई लोग उनके समर्थन में आए तो वहीं कुछ लोगों ने जया बच्चन के बयान की आलोचना की थी। इसी कड़ी में कंगना रनौत ने जया बच्चन के बयान पर प्रतिक्रिया दी थी। कंगना ने एक ट्वीट के जवाब में लिखा

“कौन सी थाली दी है जया जी और उनकी इंडस्ट्री ने? एक थाली मिली थी जिसमें दो मिनट के रोल आइटम नम्बर्ज़ और एक रोमांटिक सीन मिलता था वो भी हीरो के साथ सोने के बाद। मैंने इस इंडस्ट्री को फ़ेमिनिज़्म सिखाया, थाली देश भक्ति नारी प्रधान फ़िल्मों से सजाई, यह मेरी अपनी थाली है जया जी आपकी नहीं।” कंगना रनौत ने जया बच्चन से यह भी पूछा था कि जैसा उनके साथ हुआ वैसा उनकी बेटी श्वेता के साथ होता या जैसा सुशांत के साथ हुआ वैसे उनके बेटे अभिषेक के साथ होता तो भी क्या वह ऐसे ही कहतीं?

इसके पहले एएनआई न्यूज एजेंसी से बात करते हुए रवि किशन ने कहा था, “मुझे लगा था कि जो भी मैंने कहा, जया जी उसका समर्थन करेंगी। सभी लोग इंडस्ट्री में ड्रग्स नहीं लेते लेकिन जो लोग लेते हैं, वे दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री को खत्म कर देना चाहते हैं।”

दरअसल जया बच्चन ने राज्यसभा के शून्य काल में आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया पर फिल्म इंडस्ट्री को बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल मुट्ठी भर लोगों के कारण आप पूरे बॉलीवुड को ड्रग्स एडिक्टेड नहीं बता सकते, उनकी छवि नहीं खराब कर सकते। रवि किशन पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं, उसी थाली में छेद भी करते हैं। साथ ही सरकार पर ऐसी ‘भाषा’ पर लगाम लगाने को भी कहा था। जया बच्चन ने रवि किशन पर निशाना साधते हुए कहा था कि वो इस बात से शर्मिंदा हैं कि एक दिन पहले उसी सांसद ने बॉलीवुड में ड्रग्स की बात करते हुए पूरी इंडस्ट्री को भला-बुरा कहा, जो इसी का एक हिस्सा हैं।

अभिनेता और सांसद रवि किशन ने हाल ही में संसद के भीतर बॉलीवुड के ड्रग्स नेटवर्क का मुद्दा उठाया था। बॉलीवुड और भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में नाम कमा चुके अभिनेता ने ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा था कि ये पड़ोसी देशों की साजिश है। उन्होंने एनसीबी की कार्रवाई की तारीफ करते हुए कहा था कि कई लोगों को पकड़ा भी गया है लेकिन वो केंद्र सरकार से इस मामले में सख्त कार्रवाई की माँग करते हैं।

उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान और चीन से ड्रग्स तस्करी काफी बढ़ गई है, जिससे हमारे युवा बर्बाद हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया था कि पंजाब और नेपाल के रास्ते भारत में ड्रग्स की अवैध सप्लाई की जा रही है। उन्होंने पड़ोसी देशों की इस साजिश का अंत करने के लिए इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की जल्द से जल्द गिरफ़्तारी की माँग की थी।

तमिलनाडु: बेटे का जन्मदिन मना रहे दलित भाजपा नेता की बेरहमी से हत्या, नौ गिरफ्तार

तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले के केलेमंगलम से एक भयानक घटना सामने आई है। मंगलवार (17 सितंबर, 2020) रात को कुछ अज्ञात लोगों द्वारा भाजपा युवा विंग के नेता रंगनाथन की बेहरहमी से हत्या कर दी गई।

ऑर्गनाइज़र की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को 35 वर्षीय दलित भाजपा पदाधिकारी रंगनाथन को एक अज्ञात गिरोह ने मार डाला। रंगनाथन हाल ही में AIADMK को छोड़ कर बीजेपी में शामिल हुए थे। उन्हें कुंडुमारनप्पल्ली गाँव के बीजेपी यूथ विंग अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, रंगनाथन मंगलवार को अपने परिवार के सदस्यों के साथ अपने बेटे का जन्मदिन मना रहे थे। तभी अचानक एक अज्ञात गिरोह ने जबरदस्ती उनके घर में प्रवेश किया और उनके साथ झगड़ा करने लग गए। जैसे ही रंगनाथन हमलावरों से बचने के लिए सड़क की ओर भागे, गिरोह ने उनका पीछा किया और उन पर कुल्हाड़ी और अन्य घातक हथियारों से हमला कर दिया।

हमले के दौरान भाजपा नेता गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। वहीं अज्ञात हमलावर भाजपा नेता पर हमला करने के बाद वहाँ से फरार हो गए। रंगनाथन के रिश्तेदारों ने गंभीर हालत में उन्हें इलाज के लिए केलमंगलम सरकारी अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस दौरान पुलिस ने शव को जब्त कर ऑटोप्सी के लिए शव को होसूर सरकारी अस्पताल भेज दिया। बता दें मृतक भाजपा नेता के घर में उनकी पत्नी और दो बेटे हैं। 38 वर्ष रंगनाथन कथित तौर पर एक निजी स्कूल के बस चालक के रूप में काम करते थे।

गुस्साए रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने भाजपा नेता के नृशंस हत्या के बाद हत्यारों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर कुंडुमारनप्पल्ली मुख्य सड़क पर धरना प्रदर्शन किया। साथ ही परिजनों ने अंतिम संस्कार के लिए शव लेने से इनकार भी कर दिया।

रंगनाथन के परिवार के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए व्यापारियों और दुकानदारों ने भी अपनी दुकानें बंद कर दी। इस दौरान भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष नरेंद्रन, जिला अध्यक्ष नागराज और अन्य भाजपा कैडर भी विरोध में शामिल हुए।

लोगों में आक्रोश और प्रदर्शनकारियों की बढ़ती भीड़ को शांत करने के लिए जिला संयुक्त पुलिस अधीक्षक सक्तिवेल ने मौके पर पहुँच कर परिवार को आश्वासन दिया कि वे जल्द ही दोषियों को गिरफ्तार करेंगे। जिसके बाद परिवार ने अपना आंदोलन वापस ले लिया।

गौरतलब है केलमंगलम पुलिस मामले की जाँच कर रही है। पुलिस को शक है कि पिछली दुश्मनी के चलते ही भाजपा नेता की हत्या हुई है। फिलहाल पुलिस ने मामले में 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। भाजपा नेता की हत्या ने केलमंगलम में तनाव का माहौल पैदा कर दिया हैं। वहीं मौजूदा तनाव को देखते हुए पुलिस ने मौके पर अतिरिक्त बल तैनात किया है।

प्रवासी: तापसी पन्नू का वैचारिक प्रपंच

वर्तमान समय में छद्म छदम युद्ध लड़े जाते हैं। इसी का हिस्सा है, वैचारिक लड़ाई। इसमें राष्ट्र विरोधियों द्वारा समाज में वैचरिक विष से भ्रम का जाल बुना जाता है। इसके लिए मानस को प्रभावित करने वाले सिनेमा, नवीन संचार, समाचार, साहित्य आदि को उपकरण बनाया जाता है।

आपने अभिनेत्री तापसी पन्नू की ‘प्रवासी‘ नामक चलचित्र युक्त कविता अवश्य ही देखी होगी। सामान्य मनुष्य की भॉंति हमारे श्रमिक भाई बहनों की ऐसी परिस्थिति देख, आपका हृदय भी विचलित हुआ होगा। आपने तापसी के इस प्रयास की सराहना भी की होगी। सबसे महत्वपूर्ण, आपने भी प्रशासन को जी भरकर कोसा होगा और इसे प्रसारित करने में भी सहयोग किया होगा।

किन्तु, क्या आपने इसमें छिपे प्रपंच को समझने का प्रयास किया?

सर्वप्रथम प्रवासी का अर्थ समझिए। जो अपना स्थान बदल कर रहते है, यहाँ सन्दर्भ में प्रवासी श्रमिकों (मुख्यतः देहाड़ी श्रमिक) से है जो अपने राज्य से दूसरे राज्य जीविका के लिए आते हैं। यहाँ तापसी उनके देश का निवासी होने पर ही प्रश्न कर रही हैं। ये कहाँ का मूर्खतापूर्ण तर्क है, तापसी को छोड़कर, उनके भारतीय होने में किसको भी लेश मात्र संदेह नहीं है। महामारी में किसी भी परिस्थितिवश अगर भारतीयों को स्थान परिवर्तन करना पड़े तो क्या आप उनके भारतीय होने पर ही प्रश्न करेंगे। पहले जातीय, भाषाई, प्रांतीय होता था, अब जीविका को आधार बनाकर पर समाज में फूट डाल भेद उत्पन्न करना है। हमारे श्रमिक वर्ग के भाई-बहनों को देश से कटा हुआ प्रदर्शित करना है। हिन्दू नरसंहार के बाद 30 वर्षों से विस्थापित कश्मीरी हिन्दुओं के साथ जघन्य अपराध एवं घोर अन्याय हुआ है। तब यह प्रश्न तापसी को क्यों परेशान नहीं करता कि क्या कश्मीरी हिन्दू इस देश के वासी नहीं हैं?

अगर हम नहीं हैं इंसान, तो मार दो हमे, दे दो फरमान… ऐसे शब्दों का चयन सरकार को फ़ासिस्टवादी बताना। अपने बच्चे को ट्राली बैग पर खींचते हुए पैदल चल रही है माँ का दृश्य, अत्यंत मार्मिक एवं हृदय विदारक है। किन्तु प्रश्न यह है कि मात्र इस दृश्य विशेष को ही क्यों चुना गया? पूरा सन्दर्भ क्यों नहीं बताया गया?

जब आप इस दृश्य की पूरी चलचित्र को देखेंगे तो आपको ज्ञात होगा कि वह माँ और बच्चा एक छोटे (4-5) श्रमिक समूह या परिवार का हिस्सा थे। स्थानीय लोगों ने उन्हें रोक कर समझाया भी कि ‘पास के बस स्टेशन से प्रशासन ने यात्रा की व्यवस्था की है, उसका उपयोग करें’। किन्तु वे उपेक्षा करके चले जाते हैं।

फिर भी तापसी क्यों वास्तविक्ता एवं तथ्यों से ध्यान भटका कर, भावनात्मक रूप से झूठ को प्रसारित करना चाहती हैं। दूसरी ओर वह प्रोपेगेंडावादी पत्रकारों द्वारा, कोरोना की विषम परिस्थिति में भी, श्रमिकों से ‘photo pose‘ मॉंगने एवं ‘fake photo narrative create’ करने पर चुप्पी साध लेती हैं।

हम सभी ने देखा है कि कैसे पुलिस ने महामारी की इस विषम परिस्थिति में मानवीय मूल्यों के साथ अपने कर्तव्यों का पालन किया है। जब हम सभी अपने-अपने घरों में सुरक्षित बैठे थे, तब यही पुलिस अपने परिवार से दूर होकर कार्य कर रही थी। अपने ही घर के द्वार पर अपने बच्चे परिवार से दूर रहना सरल नहीं होता, महामारी के समय सड़क किनारे बैठ कर भोजन करना सरल नहीं होता, कोरोना की शंका को जानते हुए भी भीड़ का प्रबंधन करना सरल नहीं होता।

किन्तु कुछ नागरिक महामारी में देश बंदी के नियम तोड़ने में व्यस्त थे, ऐसे नागरिकों पर आप ही बताइए पुलिस को क्या कार्यवाही नहीं करनी चाहिए? एक विशेष समुदाय के नागरिकों ने महामारी में चिकित्सकों एवं प्रशासन पर थूका, पत्थर से प्रहार किया, ऐसे नागरिकों पर आप ही बताइए तापसी, पुलिस को क्या कार्यवाही नहीं करनी चाहिए?

राजस्थान की ग़ैर बीजेपी शासित राज्य की पुलिस ने भी श्रमिकों पर निर्ममता से लाठी बरसाई थी। तापसी ने अपनी कविता में उसके दृश्य क्यों सम्मिलित नहीं किए। महामारी जैसी विषम स्थिति में तापसी क्यों तथ्यों को तोड़-मोड़कर केंद्रीय प्रशासन एवं पुलिस संस्था को नकारात्मक रूप से प्रस्तुत कर रही हैं। ग़ैर बीजेपी शासित राज्यों द्वारा इस संकट की स्थिति में भी सहयोग ना करने पर तापसी मौन क्यों हैं?

कथित तौर पर 1200 किलोमीटर साइकिल चलने वाली ज्योति की कथा एवं घटनाक्रम समझते हैं। ज्योति और उसके पिता उनके मकान मालिक का किराया न दे पाने के कारण, गॉंव वापस जाने को विवश हुए। ज्योति के परिवार की सहमति नहीं थी, किन्तु ज्योति की हठ के आगे उन्हें झुकना पड़ा। महामारी से देश बंदी में, ज्योति के पिता को 1000 रुपया केंद्र सरकार एवं 1000 रुपया बिहार सरकार से भी मिला। जब ज्योति ने साइकिल भी सीखी थी, वो भी नितीश सरकार की किसी योजना के अंतर्गत मिली थी। उनकी यात्रा में अनेकों बार स्थानीय लोगो ने एवं ट्रक चालकों से ज्योति और उसके पिता को सहायता प्राप्त हुई थी। अतंतः ज्योति के इस विषम परिस्थिति में उभरी योग्यता के बल पर उसे Cycle Fedration of India की ओर से नेशनल cycling acedamy में प्रशिक्षु चुने जाने का एक अवसर प्राप्त हुआ, स्वयं इवांका ट्रम्प ने ज्योति को सराहना करते हुए, भारत के लोगो के धीरज और प्रेम को सुन्दर बताया। तापसी द्वारा इस पूरे घटनाक्रम में सरकार पर दोषारोपण करना कहॉं तक उचित है?

अनेकों उदहारण में एक यह सुनिए। एक श्रमिक भाई ने पूरे परिवार के साथ मध्य प्रदेश से राजस्थान तक निःशुल्क यात्रा की और मोदी सरकार को धन्यवाद दिया। तापसी घटनाक्रम को नकारात्मक ही क्यों दर्शाना चाहती हैं? सरकार के प्रयासों से लाभान्वित श्रमिक भाई बहनों के पक्ष को इन्होंने क्यों नहीं दिखाया?

विचारणीय यह है कि किन कारणों से श्रमिकों को गृहनगर लौटने के लिए विवश होना पड़ा? किसने विवश किया श्रमिकों को पलायन करने के लिए? किसने फ़र्ज़ी अनाउंसमेंट करवाए? दिल्ली में किसने रात्रि में माइक पर कहा आनंद विहार बस अड्डे पर घरों तक जाने के लिए बसें खड़ी हैं? देश बंदी का राष्ट्रीय आदेश होने का बाद भी, बस अड्डे तक पहुँचाने के लिए क्यों DTC की बसें लगाई गईं? जनता को राज्य सीमा पर कोरोना के खतरे से मरने के लिए क्यों भेजा गया? मुंबई के बांद्रा में किस षड्यंत्र के अंतर्गत भीड़ को एकत्र किया गया? क्यों ग़ैर बीजेपी शासित राज्यों ने प्रारम्भ में ही कोरोना से लड़ने में केंद्र सरकार के प्रयासों से सहयोग नहीं किया?

तापसी श्रमिक पालयन के मूल कारण पर मौन क्यों हैं? महामारी नियंत्रण में केंद्र सरकार के प्रयासों को विफल क्यों करना चाहती हैं, देश में अराजकता क्यों बढ़ाना चाहती हैं? वास्तविकता को क्यों छुपाया जा रहा है, तथ्यों को तोड़ मोड़कर या आधा-अधूरा क्यों प्रस्तुत किया जा रहा है? जो भीड़ मीडिया में दिखाई जा रही थी, क्या किसी ने षड्यंत्र के अंतर्गत उन्हें भड़काया था , पलायन को विवश किया था? प्रथम दृष्टया प्रश्न अनेक हैं, जिनके उत्तर प्रपंच प्रसारित करने वाले गुटों को देने होंगे।

फरवरी में कोरोना के केंद्र चीन ने कोरोना से लड़ने के लिए चोंगकिंग में ‘Disinfectant tunnels’ लगवाए थे। ये टनल ‘Infra Red’ तकनीक से युक्त मानव पर वायरसनाशक का छिड़काव करने के लिए थे। जिसे सभी सामान्य सामूहिक स्थानों पर लगाया गया था।

दूसरे देशों ने भी इसका अनुगमन किया। भारत में भी सकारात्मक दृष्टि से प्रयोग किया गया, किन्तु बाद में मंत्रालय ने परामर्श के बाद इसे हटावा दिया। आपको समझना होगा की कोरोना महामारी अपने आप में कितनी विकट परिस्थिति है, पूरा विश्व इस प्रकार की स्थिति का प्रथम बार सामना कर रहा है। किसी को भी ठीक से नहीं पता की कैसे इससे निपटा जाए। समय की आवश्यकता के अनुरूप शनै-शनै हम सभी अपने आप को ढाल रहे हैं। ऐसे में अगर प्रसाशन ने जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, कुछ निर्णय ले लिए तो इसमें क्या आपत्ति है? क्या आप वायरस नाशक ‘Hand Sanitizer’ अपने हाथों पर प्रयोग नहीं करते। सबसे महत्वपूर्ण इस प्रकार छिड़काव से किसी को जीवन संकट का सामना नहीं करना पड़ा है। तो इसे क्यों ऐसे प्रदर्शित किया जा रहा है जैसे कितना बड़ा अपराध हो। अगर ये अपराध है तो इस तर्क से कोरोना वैक्सीन का मानव पर प्रयोग भी अपराध ही माना जाएगा।

क्यों तापसी ने मात्र, उत्तर प्रदेश में हुए छिड़काव वाली घटना को ही चित्रण के लिए ही चुना, किन्तु ग़ैर बीजेपी शासित केरल प्रशासन द्वारा लोगों पर की गई छिड़काव की घटना का जिक्र नहीं किया।

ग़ैर बीजेपी शासित मुंबई में जीवाणुनाशक के स्थान पर पानी का प्रयोग किया गया, ये मुम्बईकर के जीवन से खिलवाड़ क्यों नहीं लगता तापसी को। क्या तापसी बीजेपी एवं ग़ैर बीजेपी राज्यों में भेद करती हैं।

जीवाणुनाशक पर मूर्खता पूर्ण भ्रमित चित्रण दर्शाता है कि तापसी की वैज्ञानिक समझ का स्तर कितना निम्न है। साथ ही साथ यह तापसी की मंशा पर भी संदेह उत्पन्न करता है।

प्रश्न यह भी है कि क्यों तापसी श्रमिकों के विषय को स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से तुलना कर सरदार पटेल की प्रतिमा को अनुपयोगी सिद्ध करना चाहती हैं। क्या सरदार पटेल की प्रतिमा को मात्र इसीलिए प्रपंच में खींचा जा रहा है, क्योंकि सरदार पटेल को सम्मान देने का श्रेय बीजेपी को मिल जाएगा।

21 मार्च 2020 से 13 अप्रैल 2020 के बीच डीबीटी के जरिए 32 करोड़, PMGKAY योजना के तहत 5.29 करोड़ और PMUY योजना के तहत 1.39 करोड़ लोगों को लाभ पहुॅंचाया गया। राज्यों ने 22.08 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न मुफ्त वितरण के लिए लिया। 1 करोड़ बीजेपी कार्यकर्ताओं ने प्रत्येक कार्यकर्ता द्वारा 5 निर्धन परिवारों के भोजन की व्यवस्था करने का अभियान भी चलाया। बावजूद इसके ‘भूख किसी की मिटा न पाए’ प्रपंच नहीं तो और क्या है। इतना ही नहीं सरकार को बदनाम करने के लिए फेक न्यूज तक फैलाए गए।

ऐसे में सवाल उठता है कि तापसी तथ्यों को एक विशेष वैचारिक रूप में ही क्यों प्रस्तुत कर रही हैं?

समाज को ऐसे प्रपंच प्रसारित करने वाले नामी लोगों का बहिष्कार करना चाहिए। हम सभी को अभिनेता (Actor) एवं नायक (Hero ) के अन्तर को समझना होगा। अभिनेता अभिनय करता है। वह एक छद्म स्वरुप धारण करता है। उसका व्यवहार वास्तविकता से परे होता है। नायक निजी जीवन एवं सार्वजानिक जीवन में एक उत्तम उदारहरण प्रस्तुत करते हुए समाज के लिए कार्य करता है। चुनाव आपका है, आपको छद्म वेश धारी अभिनेता अपनी प्रेरणा स्त्रोत के रूप में चाहिए या वास्तविक समाज के नायक जो धरातल पर कार्यरत हैं।

कार्यक्रम का नाम UPSC जिहाद क्योंकि ज़कात फ़ाउंडेशन लेता है आतंकी संगठनों से फंडिंग: सुदर्शन टीवी ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

गुरूवार को सुदर्शन टीवी के एडिटर इन चीफ़ सुरेश चव्हाणके ने सर्वोच्च न्यायालय के सामने अपना पक्ष रखा। जिसमें उन्होंने कहा बिंदाल बोल कार्यक्रम के तहत प्रसारित किए जाने वाले यूपीएससी (UPSC) जिहाद इसलिए रखा गया क्योंकि इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक़ ज़कात फ़ाउंडेशन की फंडिंग तमाम आतंकवादी संगठनों के द्वारा की जाती है। 

राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से चर्चा होनी चाहिए कि ज़कात फ़ाउंडेशन की फंडिंग आतंकवादियों संगठनों द्वारा की जा रही है। उन्होंने इस बात पर भी अपना पक्ष रखा कि 4 कार्यक्रमों की शृंखला में कहीं ऐसा नहीं कहा गया है कि किसी समुदाय के व्यक्ति को यूपीएससी का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। 

सुदर्शन टीवी ने यह भी कहा ज़कात फ़ाउंडेशन को मदीना ट्रस्ट यूके से फंडिंग मिलती है। डॉक्टर ज़ाहिद अली परवेज़ इस ट्रस्ट के एक ट्रस्टी है। परवेज़ इसके अलावा इस्लामिक फ़ाउंडेशन का भी ट्रस्टी है। 

ज़कात फ़ाउंडेशन ने विदेश मंत्रालय को दी गई जानकारी में बताया कि उसे वित्तीय वर्ष 2018-2019 में यूनाइटेड किंगडम की मदीना ट्रस्ट से 13,64,694.00 रूपए मिले थे। मदीना ट्रस्ट हमेशा से भारत विरोधी गतिविधियों के लिए मशहूर रहा है। ऐसी तमाम साक्ष्य और घटनाएँ हैं जिनमें साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि यह ट्रस्ट ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा है। 

सुदर्शन न्यूज़ का यह कार्यक्रम सुर्ख़ियों में तब आया जब उसने एक कार्यक्रम का प्रोमो जारी किया जिसका प्रसारण 28 अगस्त को किया जाना था। सुरेश चव्हाणके ने बताया कि उनके चैनल द्वारा इकट्ठा की गई जानकारी के अनुसार हाल फ़िलहाल में प्रशासनिक पदों पर और पुलिस विभाग में मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा मुस्लिम उम्मीदवारों को जितने अंक मिले हैं वह भी बाकी उम्मीदवारों की तुलना में कहीं ज़्यादा हैं। इसके बाद तमाम सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसके विरोध में मामला दर्ज कराया। जिससे इस कार्यक्रम का प्रसारण रुक जाए। 

इसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस कार्यक्रम के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आदेश के पालन पर सहमति जताई थी। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने भी कार्यक्रम के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने आज ही वकील फ़िरोज़ इकबाल द्वारा कार्यक्रम का प्रसारण किए जाने के मामले में दायर की गई याचिका पर सुनवाई थी।    

‘मुगल राजपूत माताओं की संतान थे, योगी सरकार हीन भावना की शिकार’ – छत्रपति शिवाजी म्यूजियम के बाद सागरिका घोष

देश के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की स्वघोषित ‘फैनगर्ल’ सागरिका घोष ने एक बार फिर अपनी वफ़ादारी साबित की है। इस बार नेहरू के लिए नहीं बल्कि अकबर सहित अन्य मुग़ल शासकों के लिए। हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐलान किया कि आगरा स्थित मुग़ल संग्रहालय का नाम छत्रपति शिवाजी के नाम पर रखा जाएगा। इस बात से आहत होकर सागरिका घोष ने ट्विटर पर विलाप शुरू कर दिया।

सागरिका घोष ने दावा किया कि मुग़ल शासक राजपूत माताओं की संतान थे। इतना ही नहीं, मुग़ल शासन काल भारतीय इतिहास का ऐसा दौर था जब समानता को अहमियत दी जाती थी। घोष के मुताबिक़ मुग़ल संग्रहालय का नाम बदलना हिंदूवादी नेताओं की इतिहास को लेकर निराशावादी समझ का नतीजा है। उनके मुताबिक़ सरकार ने हीन भावना का शिकार होकर यह निर्णय लिया है। 

इसके कुछ ही समय बाद सागरिका घोष ने अकबर की महानता को याद करते हुए लिखा कि वह एक सच्चा धर्म निरपेक्ष शासक था। वह हर दिन गंगा जल का सेवन भी करता था।

इस मामले में हैरानी की बात यह है कि अकबर के दो आवास (महल) दिल्ली और आगरा में स्थित थे, जो यमुना नदी के तट पर मौजूद हैं, न कि गंगा के। इसके बाद सागरिका ने कहा कि अकबर प्रशासनिक सुधारों को लेकर भी सफल शासक था। 

इसके बाद सागरिका घोष ने इस बात की इच्छा जताई कि नेटफ्लिक्स को मुग़ल शासकों की महानता पर एक वेब सीरीज़ बनानी चाहिए।

इसके बाद सागरिका घोष ने एक बीबीसी डॉक्यूमेंटरी का लिंक साझा किया। इसमें उन परिवार के शासकों का ज़िक्र है, जिन्होंने भारत पर लगभग 200 साल तक राज किया। 

सागरिका घोष ने इसके बाद भी अकबर का महिमामंडन जारी रखा और अगले ट्वीट में बताया कि अकबर कितना बेहतर शासक था। 

इसके पहले सागरिका घोष ने जवाहर लाल नेहरू के लिए अपनी भक्ति दिखाई थी। घोष के मन में ऐसे राजाओं-शासकों के लिए कुछ ज़्यादा ही लगाव है, जिन्होंने भारत पर शासन किया है। 

अक्सर ऐसे प्रयास होते रहते हैं, जिनमें मुग़ल शासकों की असल छवि को सकारात्मक बताया जाता है जबकि असलियत यही है कि मुग़ल शासकों से ज़्यादा धर्म परिवर्तन और अत्याचार किसी और ने नहीं किए। अकबर जिसे हिन्दू औरतों से विवाह करने के चलते कथित तौर पर धर्म निरपेक्ष करार दिया जाता है लेकिन सच यह है कि ऐसा उसने प्रेम भावना के चलते बिलकुल नहीं किया था।

अकबर ने भले हिन्दू औरतों से विवाह किया लेकिन उनके बच्चे जो हिन्दुओं की तरह पाले गए, उनके बारे में शायद ही कोई जानता हो। तमाम मुग़ल शासकों में सबसे ज़्यादा क्रूर और निर्दयी था औरंगज़ेब। जिनके बारे में यहाँ और यहाँ पढ़ा जा सकता है।       

वो सीट जिसने RSS प्रचारक नरेंद्र मोदी को बनाया नेता, किसकी थी यह सीट… कौन है वो और अभी कहाँ?

साल 1950, तारीख 17 सितंबर। नरेंद्र मोदी इसी दिन पैदा हुए, गुजरात में। स्कूली पढ़ाई के बाद इनका मन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ जुड़ गया। जुड़ा ऐसा कि सब कुछ छोड़ देश सेवा का मन बना लिया।

धीरे-धीरे देश सेवा में रम गए। साथ ही RSS की जिम्मेदारियों को निभाते हुए एक-एक सीढ़ी आगे भी बढ़ते गए। सामाजिक कार्य करने वाले मोदी का फिर एक वक्त राजनीति से सामना हुआ। वो इसलिए क्योंकि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने आपातकाल लगा दिया।

इंदिरा की काट के लिए ऐसे में RSS ने उन्हें गुजरात में आपातकाल के विरोध में समन्वय के लिए, ‘गुजरात लोक संघर्ष समिति’ का महासचिव नियुक्त किया। जब इंदिरा गाँधी ने RSS पर प्रतिबंध लगाया, तो मोदी को गिरफ्तारी से बचने के लिए छिपना पड़ा।

1970 के दशक के अंत में नरेंद्र मोदी गुजरात में संघ के प्रचारक बन गए और बाद में दिल्ली चले गए। 80 के दशक के मध्य में वह एक बार फिर गुजरात लौट आए। यहाँ वो भाजपा में शामिल हो गए और संगठन को मजबूत करने के लिए काम किया।

गुजरात में रहते-रहते नरेंद्र मोदी का पूर्व भाजपा नेता शंकरसिंह वाघेला के साथ विवाद होता है। इस प्रकरण के बाद, उन्हें हिमाचल प्रदेश और हरियाणा में भाजपा की गतिविधियों की देखरेख के लिए दिल्ली भेजा जाता है। इस बीच शंकरसिंह वाघेला कॉन्ग्रेस का दामन थाम लेते हैं।

इस दौरान नरेंद्र मोदी 2001 तक गुजरात से दूर रहते हैं। दिल्ली में पार्टी के लिए काम रहते हैं। उधर गुजरात में केशुभाई पटेल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार हिल चुकी होती है। 2001 के भूकंप के बाद भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और खराब प्रशासन के आरोपों को केशुभाई की सरकार झेल रही होती है।

इसी समय केशुभाई पटेल ने अपने खराब स्वास्थ्य (शायद पार्टी के निर्देश पर) के कारण इस्तीफा दे दिया और नरेंद्र मोदी (जिन्होंने कभी किसी सार्वजनिक पद का अनुभव नहीं था) को मुख्यमंत्री बनाया गया। ऐसे में 6 महीने के भीतर मोदी को विधान सभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित होने की आवश्यकता थी।

राजकोट (पश्चिम) की वो सीट, जिसने बदली भारतीय राजनीति की दिशा

राजकोट (पश्चिम) की सीट, जिसे पहले राजकोट II सीट कहा जाता था। यह सीट भाग्यशाली सीट मानी जाती थी। इसे लेकर भाजपा नेताओं का मानना था कि जीत पक्की है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस पर वजुभाई वला 1985 के विधानसभा चुनावों से जीतते आ रहे थे। वजुभाई वला ने नरेंद्र मोदी को उपचुनाव लड़ने के लिए अपनी यह सीट छोड़ दी। ये वही वजुभाई वला हैं, जो वर्तमान में कर्नाटक के राज्यपाल हैं।

फरवरी 2002 में, गुजरात में तीन सीटों पर उपचुनाव होना था – राजकोट (पश्चिम), महुआ और सजयजीगंज। तीनों सीटों पर BJP काबिज थी। 24 फरवरी 2002 को जब परिणाम घोषित किए गए तो कॉन्ग्रेस महुआ और सजयजीगंज की सीट पर विजयी हो चुकी थी, जबकि मोदी ने राजकोट (पश्चिम) को 14728 वोटों से जीता था।

14728 वोट से अपने जीवन का पहला चुनाव जीतने वाले मोदी इसके बाद मुख्यमंत्री के रूप में गुजरात में तीन चुनाव जीते और अंततः भारत के प्रधानमंत्री बने। इसके बाद का राजनीतिक इतिहास तो TikTok जेनरेशन तक को भी पता है।

भगवान राम-सीता के चित्र को चप्पलों से मारने-जलाने वाले पेरियार को जनेऊधारी राहुल गाँधी की पार्टी कर रही नमन

आज पेरियार के नाम से विख्यात, ईवी रामास्वामी का जन्मदिन है और इसे मनाने के लिए सबसे पहले कॉन्ग्रेस ही मैदान में कूदी है। 17 सितम्बर को पेरियार के जन्मदिन पर कॉन्ग्रेस ने अपने ट्विटर अकाउंट पर हिन्दू-विरोधी पेरियार की ‘खूबियों’ का महिमामंडन कर उन्हें स्मरण किया है।

कॉन्ग्रेस ने अपने ट्वीट में लिखा है, “आत्मसम्मान आंदोलन के संस्थापक और द्रविड़ आंदोलन के जनक, पेरियार जाति और लिंग असमानता और भेदभाव के खिलाफ सबसे मजबूत समर्थकों में से एक थे।”

कॉन्ग्रेस ने अपने ट्वीट में पेरियार को तर्क और स्वाभिमान का प्रतीक बताया है। यह बताने की जरूरत शायद ही होगी कि पेरियार को स्मरण करते समय उसके जिन ‘तर्कों’ के प्रति कॉन्ग्रेस ने अपना सम्मान जाहिर किया है, वह ब्राह्मण और हिन्दू विरोध, हिन्दुओं का अपमान और भारत के सांस्कृतिक ढाँचे का तिरस्कार है।

हाल ही में कॉन्ग्रेस का झुकाव पेरियार के प्रति बढ़ा है। इसके पीछे कॉन्ग्रेस का मकसद दक्षिण भारत के वोट बैंक को लक्ष्य बनाना है। उत्तर भारत में हिंदी भाषी वोटर्स को लुभाने के लिए कॉन्ग्रेस खुद को हिंदुत्व से जोड़ने की हर संभव अदाकारी कर के शायद अपना आँकलन कर चुकी है और यही वजह है कि उन्हें अगले कुछ दशकों तक भी उत्तर भारत में अपना कोई भविष्य नजर नहीं आता। ऐसे में, ‘तमिलनाडु तमिलों के लिए’ जैसा नारा देने वाले पेरियार, जिसकी पहचान ही हिन्दू और हिंदुत्व का विरोध है, कॉन्ग्रेस का आदरणीय हो जाता है, तो इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

कॉन्ग्रेस आज यह तथ्य भी नकारना चाहती है कि जिन्ना की ही तरह पेरियार भी महात्मा गाँधी विरोधी बन चुके थे। द्रविड़ आंदोलनों के अगुआ रहे पेरियार ने ब्राह्मणों के प्रति विरोध जताया था।

यह वही कॉन्ग्रेस है, जो कभी जनेऊ पहनती है तो कभी सड़क पर गाय को काटने वाली कौम के साथ खड़ी नजर आती है। हिन्दू और हिन्दुओं की आस्था के प्रति पेरियार की विचारधारा भी कॉन्ग्रेस से भिन्न नहीं रही। अंतर सिर्फ इतना रहा कि पेरियार ने कॉन्ग्रेस की तरह कभी जनेऊ और धोती पहनकर ब्राह्मणों के वोट बैंक में सेंध लगाने का प्रयास नहीं किया। पेरियार ने हमेशा से ही हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित कर ब्राह्मणों के खिलाफ हमलावर रहने का संदेश देते हुए ही अपनी पहचान बनाई।

हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करने वाला पेरियार

पेरियार ने ताउम्र हिन्दू धर्म को लज्जित और अपमानित किया। कभी भगवानों का अपमान किया तो कभी हिन्दुओं के धर्म ग्रंथों को जलाने का संदेश दिया। पेरियार के प्रति हिन्दुओं के प्रति विचार उनके इस एक बयान से भी समझे जा सकते हैं –

“मैंने सब कुछ किया, मैंने गणेश आदि सभी ब्राह्मण देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ डालीं। राम आदि की तस्वीरें भी जला दीं। मेरे इन कामों के बाद भी मेरी सभाओं में मेरे भाषण सुनने के लिए यदि हजारों की गिनती में लोग इकट्ठा होते हैं तो साफ है कि ‘स्वाभिमान तथा बुद्धि का अनुभव होना जनता में, जागृति का सन्देश है।”

यही नहीं, पेरियार ने कहा था कि उन देवताओं को नष्ट कर दो जो तुम्हें शूद्र कहे, उन पुराणों और इतिहास को ध्वस्त कर दो, जो देवता को शक्ति प्रदान करते हैं।

भगवान राम-सीता की नग्न मूर्तियों पर पहनाई थी चप्पल की माला

जनवरी 2020 में एक तमिल पत्रिका तुगलक की पचासवीं सालगिरह के कार्यक्रम में मौजूद तमिल अभिनेता रजनीकांत ने कहा था, “सालेम में, 1971 में पेरियार ने एक रैली निकाली थी। रैली में भगवान श्री रामचंद्र और सीता की ऐसी मूर्तियाँ थी, जिसमें कपड़े नहीं पहनाए गए थे। मूर्तियों पर चप्पल की माला पहनाई गई थी। तब किसी समाचार संस्थान ने इसे प्रकाशित नहीं किया था।”

सालेम की इस रैली में पेरियार पर हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान के सम्बन्ध में जब केस दर्ज हुआ तो उनका जवाब था कि वो ऐसा 1930 से करते आ रहे हैं।

‘ब्राह्मणों को खत्म करो’

पेरियार ने ब्रह्मणों के खिलाफ खुली हिंसा का संदेश देते हुए कहा था, “जाति तभी समाप्त होगी, जब ब्राह्मण ख़त्म होंगे। ब्राह्मण हमारे पैरों में उलझा हुआ साँप है। यदि आपको सड़क पर साँप और ब्राह्मण दिखाई देते हैं, तो पहले ब्राह्मण को मारो।

पेरियार के ‘भगवाकरण’ पर राहुल गाँधी ने किया था महिमामंडन

इसी वर्ष, जुलाई माह में तमिलनाडु में पेरियार की एक प्रतिमा पर भगवा रंग चढ़ाने की घटना के बाद कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने हिन्दुओं को लेकर घृणा फैलाने वाले ईवी रामासामी उर्फ ​​’पेरियार’ की प्रशंसा और महिमामंडन करते देखे गए। जुलाई 18, 2020 को एक ट्वीट में राहुल गाँधी ने लिखा, “घृणा की मात्रा किसी भी विशाल प्रतीक को कभी भी प्रभावित नहीं कर सकती है।”

कॉन्ग्रेस का पेरियार प्रेम

यह ध्यान रखने वाली बात है कि दक्षिण भारत में पेरियारवादियों के समर्थन की बदौलत ही 2019 के लोकसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस पार्टी 50 सीटों को पार करने में सफल रही। इस तरह से देखा जाए तो हिन्दुओं के प्रति नफरत फैलाने वाले पेरियार का महिमामंडन कर राहुल गाँधी सिर्फ पेरियार विचारधारा के समर्थकों का एहसान ही वापस कर रहे हैं।

सोनिया गाँधी के नेतृत्व तहत कॉन्ग्रेस पार्टी का लंबा इतिहास बताता है कि एक भी कोई ऐसा हिंदू-विरोधी कार्यकर्ता या ‘बुद्धिजीवी’ नहीं है, जिसे कॉन्ग्रेस पार्टी अपना समर्थन नहीं देती है। सत्ता में UPA के दौरान, सोनिया गाँधी ने अपनी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद को उन कार्यकर्ताओं के साथ जोड़ दिया, जिन्होंने विदेशों से फंड प्राप्त किया और विवादित हिंदू-विरोधी सांप्रदायिक हिंसा विधेयक का मसौदा तैयार किया।

यह भी याद रखने की जरूरत है कि राहुल गाँधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस पार्टी ने सिर्फ और सिर्फ हिंदू समुदाय के प्रति अनादर की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया है, जिसे सोनिया गाँधी ने भलीभाँती सींचने का काम किया।

उदाहरण के लिए, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के रूप में राहुल गाँधी के कार्यकाल के दौरान, केरल में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने देश में कहीं भी गोमांस प्रतिबंध के प्रति अपने विरोध प्रदर्शन में एक बछड़े की निर्मम हत्या की थी। ऐसी परिस्थितियों में, यह बिल्कुल भी आश्चर्यजनक नहीं है कि राहुल गाँधी ने पेरियार का महिमामंडन किया।

हिन्दू विरोधी पेरियार

पेरियार ने रामायण के बारे में कई भ्रम फैलाए। श्री राम पर जातिवादी होने का आरोप लगाने से लेकर यह तक दावा किया गया कि उन्होंने महिलाओं को मार डाला। पेरियार के अनुसार, हिंदू महाकाव्य रामायण और महाभारत को द्रविड़ पहचान को मिटाने के लिए ‘चालाक आर्यों’ द्वारा लिखा गया था। अगर पेरियार की मानें तो, राम, भरत को सिंहासन ना मिलने की साजिश का हिस्सा थे, जो पेरियार के अनुसार दशरथ के योग्य उत्तराधिकारी थे।

राम के प्रति अपनी घृणा के अलावा, पेरियार ने भगवान गणेश की मूर्तियों को भी खंडित किया था। उसने श्री राम के चित्र भी जलाए थे। उसकी मृत्यु के बाद, पेरियारवादियों ने दशहरा के साथ ही ‘रावण लीला’ को वार्षिक आयोजन बनाने का प्रयास किया।