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राहुल ‘पलटू’ गॉंधी: घोषणा पत्र में जो किया वादा, कृषि बिल में उसका ही कर रहे विरोध

गुरुवार (सितंबर 17, 2020) को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने संसद में देश में कृषि क्षेत्रों में सुधार से संबंधित तीन बिल पेश किए जाने को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ तीखा हमला किया। फिलहाल छुट्टियों पर चल रहे कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने ट्विटर पर कहा कि मोदी सरकार के इन ‘काले कानूनों’ को किसानों और खेतिहर मजदूरों आर्थिक रूप से शोषित करने के लिए पेश किया जा रहा है।

राहुल गाँधी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “मोदी जी ने किसानों की आय दुगनी करने का वादा किया था। लेकिन मोदी सरकार के ‘काले’ क़ानून किसान-खेतिहर मज़दूर का आर्थिक शोषण करने के लिए बनाए जा रहे हैं। ये ‘ज़मींदारी’ का नया रूप है और मोदी जी के कुछ ‘मित्र’ नए भारत के ‘जमींदार’ होंगे। कृषि मंडी हटी, देश की खाद्य सुरक्षा मिटी।”

दिलचस्प बात यह है कि इस हफ्ते की शुरुआत में, राहुल गाँधी ने मोदी सरकार के खिलाफ इसी तरह का हमला करते हुए दावा किया था कि केंद्र सरकार के तीन बिल किसान और खेतिहर मजदूरों पर एक ‘घातक प्रहार’ है।

फार्म सेक्टर और APMC सुधार कॉन्ग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र का हिस्सा थे

हालाँकि, संसद में पेश किए गए तीन कृषि सुधारों के मुद्दे पर मोदी सरकार के खिलाफ कॉन्ग्रेस पार्टी के विरोध ने फिर से उनके पाखंड को उजागर कर दिया है। जारी संसद सत्र में मोदी सरकार ने तीन बिल पेश किए हैं – किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल, मूल्य आश्वासन तथा कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता बिल और आवश्यक वस्तु (संशोधन) बिल। ये तीनों बिल कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार लाने के लिए लाया गया है।

बता दें कि जो कॉन्ग्रेस पार्टी इन दिनों बिल का विरोध कर रही है, वह खुद भी कभी इसी तरह के सुधार की प्रस्तावक थी, जो वर्तमान में मोदी सरकार द्वारा पेश किए जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि 2019 में राहुल गाँधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में इन सुधारों की घोषणा की थी।

2019 के लोकसभा चुनावों में, कॉन्ग्रेस पार्टी ने एक चुनावी घोषणा पत्र जारी किया था, जिसमें यह स्पष्ट रूप से कहा गया था कि कॉन्ग्रेस पार्टी यदि कभी सत्ता में आती है तो वह कृषि उपज मंडी समितियों के अधिनियम में संशोधन करेगी, जिससे कि कृषि उपज के निर्यात और अंतर्राज्यीय व्यापार पर लगे सभी प्रतिबन्ध समाप्त हो जाएँगे।

Image Source: Congress Manifesto 2019/ DAAM – AGRICULTURE, FARMERS, AND FARM LABOUR

मोदी सरकार ने जिन तीन बिल को आगे बढ़ाया है उसमें से पहले दो बिल- किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल एवं मूल्य आश्वासन तथा कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता बिल में APMC एक्ट में सुधार की बात कही गई है। फिलहाल मौजूदा व्यवस्था के तहत APMC एक्ट के जरिए किसानों को अपनी फसल मंडी में बेचने के लिए बाध्य होना पड़ता है लेकिन सरकार ने जो सुधार किया है उसके तहत किसान कहीं भी अपनी फसल बेच सकेंगे। APMC में इस तरह के सुधार से किसानों को कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा किए गए वादे के अनुसार खेत की उपज को बेचना आसान हो गया है।

PRS इंडिया के अनुसार पहला विधेयक विभिन्न राज्य कृषि उपज बाजार कानूनों के तहत अधिसूचित बाजारों के बाहर किसानों की उपज के अवरोध मुक्त व्यापार के लिए प्रदान करना चाहता है। वहीं दूसरा बिल APMC बाजारों के भौतिक परिसर से परे किसानों की उपज के अंत:-राज्य और अंतर-राज्य व्यापार की अनुमति देता है।

इसी तरह, अपने चुनावी घोषणापत्र में, कॉन्ग्रेस पार्टी ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 को बदलने का भी वादा किया था। कॉन्ग्रेस ने अपने घोषणापत्र में कहा था कि आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 को बदलकर आज की जरूरतों और संदर्भों के हिसाब से नए कानून बनाए जाएँगे, जो विशेष आर्थिक परिस्थितियों में ही लागू किए जा सकेंगे।

Image Source: Congress Manifesto 2019/ DAAM – AGRICULTURE, FARMERS, AND FARM LABOUR

हालाँकि, कॉन्ग्रेस पार्टी को लगता है कि मोदी सरकार एक ऐसा कानून ला रही है जो आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की जगह लेगा। मोदी सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में संशोधन के लिए आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक को शामिल किया है। नया विधेयक केंद्र सरकार को कुछ वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण, व्यापार और वाणिज्य को नियंत्रित करने का अधिकार देता है।

हालाँकि यह समझ से परे है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी क्यों उन्हीं सुधारों का विरोध कर रहे हैं, जिनका वादा बहुत पहले उनकी ही पार्टी ने किया था।

‘बार डांसर’ शब्द से बौखलाए कॉन्ग्रेस के पूर्व मंत्री, पत्रकार अंजना ओम कश्यप को बताया ‘बेशर्म’

कॉन्ग्रेस नेता और हरियाणा के पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव सोशल मीडिया में पत्रकार अंजना ओम कश्यप के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए देखे गए हैं। कॉन्ग्रेस नेता ने जिस अकाउंट के पोस्ट को देखते हुए एक महिला पत्रकार के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया असल में वह अंजना के नाम पर बना एक पैरोडी अकाउंट है।

पैरोडी अकाउंट पर कॉन्ग्रेस नेता की प्रतिक्रिया

अंजना ओम कश्यप की फोटो और नाम वाले इस पैरोडी अकाउंट से ट्वीट किया गया कि आज “नेशनल बार डांसर डे” है। इस ट्वीट में कॉन्ग्रेस नेता ‘बार डांसर’ शब्द को देख न जाने क्यों बौखला गए।

बार डांसर शब्द से परेशान अजय सिंह यादव ने यह भी नहीं देखा कि पैरोडी अकाउंट ने खुद अपने बॉयो में इस बात का उल्लेख किया है कि यह अंजना ओम कश्यप का पैरोडी अकाउंट है। इस ट्विटर हैंडल के केवल 60 फॉलोवर्स ही हैं। पर कॉन्ग्रेस नेता ने गुस्से में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आजतक की पत्रकार अंजना ओम कश्यप ने बेशर्मी की सारी हदें पार कर दी हैं।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कॉन्ग्रेस नेता ‘बार डांसर’ शब्द से क्यों इतना परेशान हो गए। साथ ही उन्होंने ऐसा क्यों सोचा कि बार डांसर शब्द का इस्तेमाल करना बेशर्मी होता है।

नेशनल बार डांसर दिवस को ट्रेंड करने के लिए कहने वाले पैरोडी अकाउंट के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मंत्री ने कहा, “बेशर्मी की सारी हदें पार करने वाली अंजना ओम मोदी गोदी मीडिया की सरगना है।”

बता दें, गोदी मीडिया एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल कॉन्ग्रेस समर्थक मीडिया और विपक्षी नेताओं द्वारा उन पत्रकारों और मीडिया घरानों के खिलाफ किया जाता है जो उनकी मर्जी के हिसाब से नहीं चलते हैं।

सिर्फ यही नहीं कॉन्ग्रेस नेता को अपने पिछले ट्वीट में रिपब्लिक टीवी के अर्नब गोस्वामी के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए भी देखा गया था। इसी पोस्ट में उन्होंने एनडीटीवी का महिमामंडन करते हुए चैनल के एक अभियान की छवि साझा की थी।

अर्नब गोस्वामी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग और एनडीटीवी का महिमामंडन करते हुए कॉन्ग्रेस नेता का ट्वीट

यह खबर लिखी जाने तक अजय सिंह यादव ने पैरोडी अकाउंट के ट्वीट के जवाब में पत्रकार अंजना ओम कश्यप के खिलाफ किए गए अपमानजनक ट्वीट को डिलीट नहीं किया था। कई ट्विटर यूजर ने उनको इस बारे में बताया भी, लेकिन फिर भी ये ट्वीट उनके आधिकारिक एकाउंट पर बना हुआ था।

कृषि बिल के विरोधी बिचौलियों के साथी: बिहार का 86 साल पुराना सपना पूरा कर बोले PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (सितंबर 18, 2020) बिहार का 86 साल पुराना सपना पूरा करते हुए राष्ट्र को कोसी रेल महासेतु समर्पित किया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 12 रेल परियोजनाओं का शुभारंभ किया।

इस दौरान उन्होंने कृषि बिल के फायदे बताते हुए कहा कि जो इसका विरोध कर रहे हैं वे किसानों को धोखा दे रहे हैं। ऐसे लोग बिचौलियों के साथ खड़े हैं और बिल को किसान विरोधी बताकर दुष्प्रचार कर रहे हैं।

इससे पहले पीएम मोदी ने कहा, “आज बिहार में रेल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में नया इतिहास रचा गया है। अब वो दिन ज्यादा दूर नहीं जब बिहार के लोगों को 300 किमी की ये यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। 300 किमी की ये यात्रा सिर्फ 22 किमी में सिमट जाएगी।”

उन्होंने कहा, “बिहार में गंगाजी, कोसी, सोन नदियों के विस्तार के कारण, बिहार के अनेक हिस्से एक-दूसरे से कटे रहे हैं। नदियों के फैलाव वजह से होने वाला लंबा सफर बिहार के लोगों की एक समस्या रहा है। बिहार की इस बड़ी समस्या के समाधान के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं।”

4 वर्ष पहले शुरू किए गए महासेतु कार्यों का जिक्र करते हुए पीएम बोले, “4 वर्ष पहले उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले दो महासेतु, एक पटना में और दूसरा मुंगेर में शुरु किए गए थे। इन दोनों रेल पुलों के चालू हो जाने से उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच, लोगों का आना-जाना और आसान हुआ है।”

86 साल पहले एक भूकंप के कारण मिथिला और कोसी क्षेत्र अलग हो गए थे। ऐसे में आज महासेतु के जरिए इनके जुड़ने पर प्रधानमंत्री ने कहा, “करीब साढ़े 8 दशक पहले भूकंप की एक भीषण आपदा ने मिथिला और कोसी क्षेत्र को अलग-थलग कर दिया था। आज ये संयोग ही है कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के बीच इन दोनों को आपस में जोड़ा जा रहा है।”

उन्होंने कहा, आज कोसी महासेतु होते हुए सुपौल-आसनपुर कुपहा के बीच ट्रेन सेवा शुरू होने से सुपौल, अररिया और सहरसा जिले के लोगों को बहुत लाभ होगा। यही नहीं, इससे नॉर्थ ईस्ट के साथियों के लिए एक वैकल्पिक रेलमार्ग भी उपलब्ध हो जाएगा।

पीएम मोदी ने बताया, आज भारतीय रेल के ब्रॉडगेज रेल नेटवर्क को मानवरहित फाटकों से मुक्त कर, पहले से कहीं अधिक सुरक्षित बनाया जा चुका है। आज आत्मनिर्भरता और आधुनिकता की प्रतीक, वंदे भारत जैसी भारत में बनी ट्रेनें रेल नेटवर्क का हिस्सा होती जा रही हैं। बीते 6 साल से भारतीय रेल को नए भारत की आकांक्षाओं और आत्मनिर्भर भारत की अपेक्षाओं के अनुरूप ढालने का प्रयास किया जा रहा है। आज भारतीय रेल, पहले से कहीं अधिक स्वच्छ है।

रेलवे के आधुनिकीकरण पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसका लाभ बिहार और पूर्वी भारत को मिल रहा है। Make In India को बढ़ावा देने के लिए मधेपुरा में इलेक्ट्रिक लोको फैक्ट्री और मढ़ौरा में डीजल लोको फ़ैक्ट्री स्थापित की गई हैं। इन परियोजनाओं से बिहार में लगभग 44 हजार करोड़ रुपए का निवेश हुआ है।

प्रदेश में सरकार की प्राथमिकताओं का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि बिहार में जिस तरह की परिस्थितियाँ रहीं हैं, उसमें रेलवे लोगों के आने-जाने का बहुत बड़ा साधन रही है। ऐसे में बिहार में रेलवे की स्थिति को सुधारना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक रहा है। 2014 के पहले के 5 सालों में बिहार में सिर्फ सवा तीन सौ किलोमीटर नई रेल लाइन शुरू हुई थी। 2014 के बाद के 5 सालों में बिहार में लगभग 700 किलोमीटर रेल लाइन कमीशन हो चुकी हैं।

परियोजनाओं का शुभारंभ करते हुए उन्होंने कोरोना के समय में रेलवे के काम की प्रशंसा की और लाखों कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देश के लाखों श्रमिकों को श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के माध्यम से सुरक्षित घर पहुँचाने के लिए रेलवे ने दिन-रात एक कर दिया था।

बिहार में नीतीश सरकार की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि उनकी सरकार से पहले प्रदेश में एक दो मेडिकल कॉलेज हुआ करते थे। पर, आज बिहार में 15 से ज्यादा मेडिकल कॉलेज हैं, जिसमें से अनेक बीते कुछ वर्षों में ही बनाए गए हैं। कुछ दिन पहले ही बिहार में एक नए AIIMS की भी स्वीकृति दे दी गई है।

किसानों को भी दी बधाई

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए पीएम ने कहा, “मैं देश के किसानों को इन विधेयकों के लिए बधाई देता हूँ। किसान और ग्राहक के बीच जो बिचौलिए होते हैं, जो किसानों की कमाई का बड़ा हिस्सा खुद ले लेते हैं, उनसे बचाने के लिए ये विधेयक लाए जाने बहुत आवश्यक थे। ये विधेयक किसानों के लिए रक्षा कवच बनकर आए हैं। लेकिन कुछ लोग जो दशकों तक सत्ता में रहे हैं, देश पर राज किया है, वो लोग किसानों को इस विषय पर भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं, किसानों से झूठ बोल रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “चुनाव के समय किसानों को लुभाने के लिए ये बड़ी-बड़ी बातें करते थे, लिखित में करते थे, अपने घोषणा पत्र में डालते थे और चुनाव के बाद भूल जाते थे। आज जब वही चीजें भाजपा-एनडीए सरकार कर रही है, तो ये भाँति-भाँति के भ्रम फैला रहे हैं।”

उन्होंने आगे बताया, “अब ये दुष्प्रचार किया जा रहा है कि सरकार के द्वारा किसानों को MSP का लाभ नहीं दिया जाएगा। ये भी मनगढ़ंत बातें कही जा रही हैं कि किसानों से धान-गेहूँ इत्यादि की खरीद सरकार द्वारा नहीं की जाएगी। ये सरासर झूठ है, गलत है, किसानों को धोखा है। हमारी सरकार किसानों को MSP के माध्यम से उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। पहले भी थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे। सरकारी खरीद भी पहले की तरह जारी रहेगी।”

पीएम ने कहा, “कोई भी व्यक्ति अपना उत्पाद, दुनिया में कहीं भी बेच सकता है, जहाँ चाहे वहाँ बेच सकता है। लेकिन केवल किसान भाई-बहनों को इस अधिकार से वंचित रखा गया था। अब नए प्रावधान लागू होने के कारण, किसान अपनी फसल को देश के किसी भी बाजार में, अपनी मनचाही कीमत पर बेच सकेगा।”

‘केवल हिंदुओं के घर पर बुलडोजर चलाया गया’: बहावलपुर के बाद उमरकोट में घर जमींदोज किए गए

पाकिस्तानी में इस्लामी कट्टरपंथ के बढ़ते वर्चस्व के साथ ही धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदुओं की स्थिति दिन प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है। हिंदू लड़कियों का अपहरण करने और उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने की कई रिपोर्टें हैं।

इसके अलावा, हिंदू मंदिरों पर हमले किए जाने और हिंदू घरों को इमरान सरकार के मौन समर्थन के साथ बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किए जाने के कई मामले सामने आए हैं। हाल ही में इस तरह की एक और खबर सामने आई है, जिसमें आरोप लगाया जा रहा है कि पाकिस्तानी सरकार अब सिंध के उमरकोट जिले में मुख्य रूप से हिंदुओं के घरों पर बुलडोजर चला रही है।

पाकिस्तानी लेखक और पत्रकार राहत ऑस्टिन ने ट्विटर पर घटना के दो वीडियो जारी किए हैं। राहत ने कई घरों पर बुलडोज़र चलने का वीडियो पोस्ट किया और कहा कि हाल ही में आई बाढ़ से पाकिस्तान की दूसरे धर्मों की आबादी बुरी तरह प्रभावित हुई है, लेकिन अब  उमरकोट के चोर में हिंदुओं के घरों पर बुलडोज़र चलाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “हाल ही में आई बाढ़ ने पाकिस्तान में दूसरे धर्म वालों के लिए और अधिक बुरी स्थिति उत्पन्न कर दी है। वे न केवल सरकार और गैर सरकारी संगठनों द्वारा भोजन और राहत से वंचित हैं, बल्कि इस वीडियो में सिंध-पाकिस्तान के उमरकोट के चोर में हिंदुओं के घरों पर बुलडोजर चलाए गए हैं। कोरोना लॉकडाउन के दौरान लोगों को इस्लाम में परिवर्तित करने के लिए इसी तरह के हथकंडों का इस्तेमाल किया गया था।”

उन्होंने बाद में एक और वीडियो पोस्ट किया, जिसमें एक व्यक्ति को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “केवल हिंदुओं के घरों पर बुलडोजर चलाया गया है।”

राहत ने यह भी कहा है कि हिंदुओं के घरों को गिराने जैसे हथकंडों का इस्तेमाल उन्हें इस्लाम में परिवर्तित करने के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा, “वे पहले से ही हाल की बाढ़ से प्रभावित हैं, दूसरे धर्म वालों को न केवल राशन और राहत देने से मना कर दिया गया, बल्कि उनके जीवन को और अधिक दुखी करने के लिए उनके घरों को ध्वस्त कर दिया गया। ऐसी चालों का उपयोग धर्मांतरणों के लिए किया जाता है।”

गौरतलब है कि इससे पहले मई में पाकिस्तान में सरकार के इशारे पर हिंदुओं की बस्ती उजाड़ दी गई थी। बहावलपुर में इमरान सरकार के मंत्री के नेतृत्व में हिंदुओं के घर जमीदोंज कर दिए गए थे। पाकिस्तान के गृह मंत्री तारिक बशीर चीमा की निगरानी में चिलचिलाती गर्मी में अल्‍पसंख्‍यक हिंदुओं के घरों को बुलडोजर से गिरवा दिया गया था।

चिलचिलाती धूप में अल्‍पसंख्‍यक हिंदुओं के परिवारों के महिला पुरुष, बच्‍चे और बुजुर्ग चिल्लाते और दया की याचना करते रहे, लेकिन इमरान सरकार के मंत्रियों का उनके प्रति दिल नहीं पसीजा और इन सभी परिवारों के सामने ही उनका घर चंद मिनटों में गिराकर मलबे में तब्दील कर दिया गया था। इन सभी का आशियाना मलबे के नीचे दब गया और ये परिवार आँसू बहाते देखते रह गए।

ये मंजर बेहद दर्दनाक था जब बुलडोजर लोगों के घरों को बेरहमी से तोड़ रहे थे और महिलाएँ, पुरुष और बच्चे रहम की भीख माँग रहे थे। हिंदुओं के घरों पर बुलडोजर चलने की दर्दनाक तस्वीरें देख हर कोई दहल गया। भारत ने मंगलवार (जून 9, 2020) को पाकिस्तान के समक्ष इस सम्बन्ध में कड़ा विरोध दर्ज कराया था। 

इसके साथ ही पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का धार्मिक उत्पीड़न जारी है। इस साल जनवरी में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू लड़की भारती बाई कुमारी का दिनदहाड़े उसकी ही शादी के मंडप से अगवा कर लिया गया।

लड़की के पिता किशोर दास ने बताया था कि जिस समय उनकी बेटी को किडनैप किया गया था, उस वक्त उसकी शादी की रस्में निभाई जा रहीं थी। लेकिन, तभी वहाँ शाहरूख गुल नाम का युवक अपने कुछ साथियों और पुलिसवालों के साथ आया और दिन दहाड़े उनकी बिटिया को अगवा कर ले गया। बाद में भारती के इस्लाम धर्म में परिवर्तन और शाहरुख गुल से शादी के दस्तावेज के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी।

उनके लिए धर्म अफीम है, मजहब नहीं: बेगूसराय में निपटा ‘लफंगा’ अब अपनों के गेम से चित

राजनीति बड़ी कुत्ती चीज़ है!

ऐसा हम नहीं कहते, ऐसा कई राजनेता भी व्यक्तिगत बातचीत में स्वीकार लेंगे। राजनीति को बुरा इसलिए माना जाता है, क्योंकि इसमें आप अपने घोषित शत्रुओं और प्रतिद्वंदियों से ही प्रतिस्पर्धा नहीं करते। आपके मित्रों से भी आपको आगे रहना पड़ता है।

प्रबंधन (मैनेजमेंट) में कभी-कभी सिखाया जाता है कि आप अपने मातहतों से ही सम्बन्ध नहीं बनाते, आपके वरिष्ठों से आपके सम्बन्ध कैसे हैं, इस पर भी काफी कुछ निर्भर करता है। जैसे मैनेजमेंट सिर्फ ऊपर से नीचे की तरफ नहीं, नीचे से ऊपर की तरफ भी चलता है, राजनीति में स्थिति उससे भी बुरी हो जाती है।

राजनीति में आपको अपने सामानांतर वाले संबंधों का भी ध्यान रखना पड़ता है। अफ़सोस के साथ कहा जा सकता है कि ऐसे विषयों पर भी हिन्दी साहित्य में रचनाएँ नहीं बनीं। हिन्दी लिखने वाले तथाकथित बुद्धिपिशाचों की इतनी हिम्मत ही नहीं थी कि ऐसे विषय पर लिखते। जो कहीं आप थोड़े पढ़े-लिखे हैं तो अंग्रेजी में इस विषय पर ‘टीम ऑफ़ राइवल्स’ (https://amzn.to/35MouGz) लिखी गई है। ये अब्राहम लिंकन के मंत्रिमंडल में शामिल प्रतिस्पर्धियों पर किताब है। एक-दूसरे से शत्रुता जैसी प्रतिस्पर्धा रखने वालों के साथ मिलकर अब्राहम लिंकन ने मंत्रिमंडल (कैबिनेट) कैसे चलाया, उस विषय पर ये मोटी सी (करीब नौ सौ पन्नों की) किताब देखी जा सकती है।

वापस भारत पर आएँ तो यहाँ की राजनीति में भी ऐसा होता रहता है। पिछले लोकसभा चुनावों के दौर में जो एक नाम बड़ा उछला था वो एक वामपंथी पोस्टर बॉय का था। बिहार की भूमिहार जाति से सम्बन्ध रखने वाले इस तथाकथित नेता के लिए बॉलीवुड से कई हस्तियाँ भी प्रचार को बेगूसराय में उतर आईं थी। उसके स्वजातीय ‘आत्मनिर्भर’ सम्बन्धियों (जैसे स्वरा भास्कर) जैसों के प्रचार का भी उसे कोई फायदा नहीं हुआ। वैसे तो उसके चुनाव प्रचार पर नजर रखने वाले उसकी विचारधारा की ओर झुकाव रखने वाले कई लोग (जैसे राहुल पंडिता) भी वहॉं गए, मगर जब नतीजे आए तो पता चला कि ये स्त्रियों के सामने अश्लील हरकतें करने वाला कोई पंचायत चुनाव जीतने लायक भी नहीं है।

जाहिर है ऐसे में आयातित विचारधारा को नए चेहरों की जरूरत पड़ गई। पुराना नाम नहीं चला तो कोई नया नाम निकालो! ऐसे में ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ ने उसी कुकृत्य से कुख्यात हुए एक दूसरे चेहरे को सामने रखना शुरू कर दिया। जिन्हें वो दौर याद होगा उन्हें पता होगा कि ये वो पहली मुहिम थी, जिसमें वामपंथी टुकड़ाखोरों ने भारत के तिरंगे झंडे का इस्तेमाल किया था। इससे पहले, सत्तर वर्षों में, किसी मुहिम में उन्होंने तिरंगा नहीं उठाया। जो ज्यादा करीब से जानते हैं वो ये भी बता देंगे कि मुहिम में तिरंगा लहराने वाला आयातित विचारधारा का टुकड़ाखोर नहीं था। जो भी हो, पुराने नाम के दोबारा सामने आने से कई बातें हुई।

एक तो ये स्पष्ट पता चल गया कि आयातित विचारधारा के लिए सिर्फ ‘धर्म अफीम है’। उनके लिए मजहब अफीम नहीं, क्योंकि जिन नारों के लिए ये नया उछाला जा रहा नाम कुख्यात है, उसमें ‘टुकड़े होंगे’ के साथ ‘इंशाअल्लाह’ कहा जा रहा था। वैसे उस पर यथा पिता, तथा पुत्र का जुमला भी फिट बैठता है, क्योंकि उसका बाप पहले ही ‘सिमी’ नाम से जाने वाले प्रतिबंधित इस्लामी अलगाववादी-आतंकवादी संगठन का हिस्सा रहा है। ऐसे में बेटे ने आतंकवाद और अलगाववाद की राह चुनकर बाप का नाम रोशन ही किया है। अब सवाल है कि इसमें राजनीति, ‘टीम ऑफ़ राइवल्स’, और सामानांतर प्रतिद्वंदियों का मुद्दा क्या है?

सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों को पता होगा कि महिला छात्रावास के सामने अश्लील हरकतें करने वाला बेगूसराय का बकैत काफी दिनों से चुप था। हाल के दौर में उसके ट्वीट काफी कम रहे हैं। अब जब उसके प्रतिद्वंदी के रूप में एक चेहरा उसी की विचारधारा के लोगों ने खड़ा कर दिया है तो बेचारे को फिर से सक्रिय होना पड़ गया। वरना बिहार चुनावों में उसे जिस तरह से हाशिए पर धकेल दिया गया है, उससे इस लफंगे के एक राजनेता के रूप में करियर, दाँव पर लगा दिखता है। उम्मीद है कि अपने प्रयासों से बेचारा बिहार चुनावों में फिर से इक्का-दुक्का जगहों पर रैलियों में मंच पर दिख पाएगा।

बाकी आयातित विचारधारा की राजनीति कैसे एक व्यक्ति को उठाती है, फिर विरोधियों के बीच उसे छोड़कर किसी और का दामन थाम लेती है, वो भी देखिए। राजनीति की प्रयोगशाला कहलाने वाले बिहार के चुनावों में आपका स्वागत है!

असम: 9 साल की पोती के साथ 58 वर्षीय समीर अली ने किया रेप, गिरफ्तार

असम पुलिस ने राज्य के बोंगाईगाँव जिले के जोगीगोपा शहर में 9 साल की एक बच्ची के साथ बलात्कार करने के आरोप में समीर अली नाम के 58 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।

घटना बुधवार (सितंबर 16, 2020) की है। जानकारी के मुताबिक, समीर अली ने पहले बहला-फुसलाकर नाबालिग लड़की को अपने घर में बुलाया और फिर उसके साथ बलात्कार किया। इस जघन्य अपराध को अंजाम देने के बाद से वह पुलिस से भागता फिर रहा था। आखिरकार जोगीगोपा पुलिस ने उसे भरलकुंडी गाँव से गिरफ्तार कर लिया है

आरोपी पीड़िता का रिश्तेदार है

मामले के संबंध में FIR (No. 306/20) दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि आरोपित, पीड़िता का दादा है। घटना से इलाके में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है।

यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की घटना प्रकाश में आई है। इससे पहले असम के डिब्रूगढ़ जिले में रिकी अहमद नाम के युवक द्वारा 15 साल की नाबालिग लड़की के साथ कई बार बलात्कार करने का मामला सामने आया था। पुलिस ने इस मामले में आरोपित रिकी अहमद उर्फ बिक्की को नालीपुल के कावेरी पैटी क्षेत्र से मंगलवार (9 सितंबर, 2020) को गिरफ्तार किया था। परिजनों ने बताया था पीड़िता के साथ 20 बार से ज्यादा दुष्कर्म किया गया था। इसके साथ ही बताया गया था कि आरोपित रिकी अहमद, पीड़िता का मामा था। 

डिब्रूगढ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद्मनाव बरुआ के अनुसार आरोपित के खिलाफ डिब्रूगढ़ पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 448/376 डी (ए) / 506, यौन अपराध अधिनियम से बच्चों की सुरक्षा की धारा 4 के तहत (1513/20) मामला दर्ज किया था।

पुलिस अधिकारी ने बताया था, “इस अपराध में आरोपित ने अपनी भूमिका से इनकार कर दिया है। लेकिन हमारे पास आरोपित के खिलाफ कई सबूत मौजूद हैं। जिसको मद्देनजर रखते हुए रिकी अहमद को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।”

अतिरिक्त एसपी ने कहा था, “एक सप्ताह के भीतर, हम चार्जशीट पेश करेंगे और फास्ट-ट्रैक कोर्ट में इस मामले की सुनवाई की दरख्वास्त करेंगे।” गौरतलब है कि कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन के दौरान असम में आपराधिक मामलों में काफी बढ़त हुई है।

अमिताभ गुप्ता पुणे के नए पुलिस कमिश्नर, डीएलएफ स्कैम वाले वाधवान को लॉकडाउन में दिया था VIP ट्रीटमेंट

मुंबई के पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह पहले से ही विवादों में हैं। अब महाराष्ट्र की शिवसेना के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार ने आईपीएस अधिकारी अमिताभ गुप्ता को पुणे का पुलिस कमिश्नर बनाकर एक और विवाद को न्योता दे दिया है।

वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ गुप्ता पर 8 अप्रैल, 2020 को देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान घोटाले के आरोपित कपिल वाधवान, धीरज वाधवान सहित पूरे परिवार को यात्रा परमिट प्रदान करके एक सुरक्षित मार्ग प्रदान करने का आरोप लगाया गया था। इससे पहले वह महाराष्ट्र गृह विभाग के प्रमुख सचिव थे।

लॉकडाउन के नियम तोड़ने पर दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) के प्रमोटरों कपिल वाधवान, धीरज वाधवान सहित पूरे परिवार पर केस दर्ज होने के साथ ही उन्हें हिरासत में भी ले लिया गया था।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पुणे के निवर्तमान पुलिस आयुक्त के. वेंकटेशम का तबादला अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (विशेष अभियान) के रूप में मुंबई में किया गया है। वहीं अभिनव देशमुख को पुणे (ग्रामीण) के लिए एसपी के रूप में नियुक्त किया गया है।

अमिताभ गुप्ता द्वारा वाधवान परिवार को मँजूरी देने वाला पत्र भी सामने आया था। जिसमें महाराष्ट्र सरकार के गृह विभाग के विशेष सचिव और एडिशनल डीजीपी अमिताभ गुप्ता ने अपने आधिकारिक पत्र पर वाधवा परिवार के सदस्यों को अपना ‘फैमिली फ्रेंड’ बताया था।

वाधवान ने महाराष्ट्र के प्रधान सचिव (विशेष), गृह विभाग अमिताभ गुप्ता से ‘फैमिली इमरजेंसी’ का हवाला देते हुए खंडाला से महाबलेश्वर तक की यात्रा करने के लिए विशेष पास लिया था। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने डीएचएफएल के प्रवर्तकों कपिल और धीरज वाधवान को उनके परिवार के 22 अन्य सदस्यों, दोस्तों के साथ पाँच कारों में जाने के लिए मँजूरी दी थी।

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अमिताभ गुप्ता ने वाधवान परिवार के लिए जारी पास में लिखा था, ‘‘निम्नलिखित (व्यक्तियों) को मैं अच्छी तरह से जानता हूँ, क्योंकि वे मेरे पारिवारिक मित्र हैं और परिवार में इमरजेंसी के कारण वह पुणे के खंडाला से सतारा के महाबलेश्वर तक की यात्रा कर रहे हैं। इन्हें गंतव्य तक पहुँचने में सहयोग किया जाए।’’ इस पत्र में वाधवान परिवार के 5 वाहनों की डिटेल भी दी गई थी।

बता दें कि वाधवान परिवार 9 अप्रैल की सुबह महाबलेश्वर पहुँचे थे। उन्होंने यह यात्रा ‘फैमिली इमरजेंसी’ की आड़ में की थी। स्थानीय लोगों को जब इसके बारे में पता चला तो उन्होंने प्रशासन को इसकी सूचना दी। जिसके बाद तहसीलदार ने फॉर्म हाउस में रहने के दौरान ही उनके खिलाफ कार्रवाई की। इसके साथ ही महाराष्ट्र सरकार द्वारा भारी शर्मिंदगी झेलने के बाद गृह विभाग के विशेष सचिव और एडिशनल डीजीपी अमिताभ गुप्ता को तत्काल प्रभाव से अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया गया था।

गौरतलब है कि डीएचएफएल के सीएमडी कपिल वाधवान और धीरज वाधवान के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जाँच चल रही है। कपिल वाधवान को ईडी ने गिरफ्तार भी किया था। फिलहाल वह जमानत पर हैं। डीएचएफएल ने शेल कंपनियों को लोन-एडवांस देने और दूसरे गलत तरीकों से सार्वजनिक पैसों का अपने लिए इस्तेमाल किया।

आरोप यह भी है कि डीएचएफएल के प्रमोटरों ने संदिग्ध कंपनियों के जरिए पैसा जमा किया और इसे विदेशी संपत्ति हासिल करने के लिए भारत के बाहर भेज दिया। वहीं YES बैंक फर्जीवाड़े मामले में राणा कपूर के खिलाफ जाँच चल रही है, इसमें भी मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच के दायरे में अब वाधवान बंधु भी ईडी और सीबीआई के रडार पर हैं।

अपने खर्चों और पार्टी के लिए सुशांत के पैसे यूज करती थी रिया, पता चला तो नाराज हो गए थे दिवंगत अभिनेता: रिपोर्ट्स

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत केस की छानबीन अभी जारी है। हाल ही में सीबीआई ने पावना स्थित सुशांत सिंह राजपूत के फॉर्म हाउस के मैनेजर से पूछताछ की थी। मैनेजर ने गुरुवार (सितंबर 17, 2020) को रिपब्लिक टीवी को दिए इंटरव्यू में कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि रिया चक्रवर्ती अपने खर्चे पूरे करने और पार्टियों के लिए सुशांत के पैसे इस्तेमाल करती थी।

फॉर्म हाउस मैनेजर ने इंटरव्यू के दौरान बताया, “सुशांत के सीए रजत मेवाती ने मुझे बताया कि सुशांत सो रहे होते थे और रिया चक्रवर्ती पार्टी कर रही होती थी। मैंने शोविक को जब भी देखा, नशे में ही देखा या स्मोक करते हुए। श्रुति मोदी ने साल 2019 में जुलाई के महीने से आना शुरू किया था, रिया चक्रवर्ती के आने के बाद से उनकी आईलैंड की ट्रिप्स में बढ़ोतरी हुई थी। रिया ही सुशांत के सभी खर्चों को हैंडल करती थीं। जब सुशांत को अपने अकाउंट से रिया द्वारा किए गए खर्चों के बारे में जानकारी मिली तो वो काफी नाराज हुए थे।”

उन्होंने आगे कहा, “रिया अक्सर सुशांत के साथ यहाँ आती थी। पिछले साल रिया के जन्मदिन से एक दिन पहले 8 जुलाई को मैंने रिया के परिवार को देखा था। शोविक चक्रवर्ती के साथ एक लड़की भी थी।”

इसके साथ ही खबर है कि सुशांत की मौत के मामले में गठित मेडिकल बोर्ड अगले सप्ताह सीबीआई को अपनी राय देगा। इस बात की जानकारी एम्स के फॉरेंसिक विभाग के प्रमुख और सुशांत मामले में गथित मेडिकल बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुधीर गुप्ता ने दी।

डॉ. सुधीर गुप्ता ने कहा, “मेडिकल बोर्ड की राय अगले हफ्ते सीबीआई को दी जाएगी। मुझे उम्मीद है कि बिना किसी संदेह के यह निर्णायक होगा। चूँकि मामला अभी अदालत के अधीन है, इसलिए इससे संबंधित रिपोर्ट साझा नहीं की जा सकती है।”

बता दें कि ड्रग्‍स मामले में रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार करने के बाद एनसीबी की टीम पिछले दिनों सुशांत के फॉर्म हाउस पर जाँच करने पहुँची थी। फार्महाउस के मैनेजर रईस ने आज तक को बताया था कि सुशांत के फॉर्म हाउस में पार्टी होती थी, जहाँ कई बॉलीवुड सितारे आते थे। मैनेजर ने सारा अली खान का नाम भी लिया। सारा के बाद ही रिया चक्रवर्ती ज आईं। मैनेजर ने यह भी बताया था क‍ि उन्होंने कभी सुशांत को ड्रग्स लेते नहीं देखा, लेक‍िन उनकी पार्ट‍ियों में स्मोकिंग पेपर मँगाए जाते थे। 

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत के निधन को 3 महीने से ज्यादा का समय गुज़र चुका है लेकिन अब तक उनकी मौत का असली कारण पता नहीं चला है। सीबीआई इस केस की छानबीन में लगी है।

9 सिंतबर को ड्रग्स के मामले में रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया गया था। कथित तौर पर पूछताछ में रिया ने बॉलीवुड से जुड़े 25 लोगों का नाम लिया था, जो ड्रग्स लेते हैं।

उरी अटैक की बरसी से पहले मिला 52 किलो विस्फोटक, 50 डेटोनेटर; आतंकियों ने पानी टंकी में छिपा रखा था

उरी में सेना ब्रिगेड हेडक्वार्टर्स पर हमले (18 सितंबर 2016) की बरसी से पहले सेना ने कश्मीर में बड़े हमले की आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया है सेना ने जम्मू-कश्मीर के गडीकल के करेवा इलाके से गुरुवार (सितंबर 17, 2020) को 52 किलोग्राम विस्फोटक बरामद किया।

खुफिया जानकारी के आधार पर 42 राष्ट्रीय राइफल्स ने गुरुवार सुबह 8 बजे करेवा इलाके में एक संयुक्त जाँच अभियान शुरू किया। सर्च के दौरान टीम ने एक पानी टंकी से विस्फोटक से भरे 416 पैकेट बरामद किए। हर पैकेट का वजन 125 ग्राम था, यानी कुल 52 किलोग्राम विस्फोटक था।

सेना की ओर से जारी बयान में यह भी बताया गया कि सर्च ऑपरेशन में ऐसा ही एक और टैंक मिला। उस टैंक में करीब 50 डेटोनेटर्स थे। सेना के अधिकारियों ने बताया कि ये विस्फोटक जिस जगह से बरामद किए गए हैं, वह स्थान साल 2019 में हुए पुलवामा आंतकी हमले की जगह से सिर्फ 9 किलोमीटर दूर है। 

सेना के एक अधिकारी ने कहा, “हमने पुलवामा जैसा एक और हमला टाल दिया है।’ अधिकारियों ने बताया कि तलाश अभियान के दौरान सुबह करीब आठ बजे पानी की एक टंकी से विस्फोटक बरामद किए गए।” उन्होंने कहा कि इन विस्फोटकों को ‘सुपर-90’ या ‘एस-90’ के नाम से जाना जाता है।

कब हुआ था पुलवामा हमला?

बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ के काफिले पर बड़ा हमला हुआ था। पुलवामा के अवंतिपोरा में हुए इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। इस हमले में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने आईईडी से भरी एक कार का इस्तेमाल किया था, जिसे सीआरपीएफ जवानों के काफिले से लड़ा दिया गया था।

इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान बेस्ड आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। इस हमले को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने करवाया था। इस हमले के बाद भारत ने बालाकोट एयरस्ट्राइक करते हुए कई आतंकियों को मार गिराया था।

एनआईए ने पुलवामा हमले में आत्मघाती हमलावर के कई साथियों को गिरफ्तार किया था। खबरों की मानें तो एनआईए ने चार्जशीट में बताया है कि हमले में इस्तेमाल किया गया आरडीएक्स (RDX) पाकिस्तान से ही घाटी में लाया गया था। एनआईए ने चार्जशीट में आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर और उसके भाई अब्दुल रऊफ असगर को आरोपी बनाया है।

इसके अलावा चार्जशीट में मारे गए आतंकवादी मोहम्मद उमर फारूक, आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार और पाकिस्तान से सक्रिय अन्य आतंकवादी कमांडर के नाम भी शामिल हैं। ये सभी नाम अब तक गिरफ्तार किए गए 6 आरोपितों के अलावा शामिल किए गए हैं।

उरी हमला भी जैश के आतंकियों ने ही अंजाम दिया था। इस हमले में 19 सैनिक बलिदान हो गए थे। घंटो चली मुठभेड़ के बाद सेना ने हमला करने वाले आतंकियों को मार गिराया गया था। इस हमले के बाद ही पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की गई थी।

अतीक अहमद की पत्नी के नाम कोल्ड स्टोरेज पर चले 6 बुलडोजर: योगी सरकार ने 200 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति को किया जमींदोज

कॉन्ग्रेस कार्यकाल से लेकर मुलायम, मायावती और अखिलेश यादव के शासन में ऐशोआराम से रहने वाले अतीक अहमद पर योगी सरकार लगातार शिकंजा कसती नजर आ रही है। करोड़ो की संपत्ति को कुर्क करने के बाद यूपी प्रशासन ने अब करोड़ों रुपए की लागत वाले अतीक के कोल्ड स्टोरेज को भी छह-छह जेसीबी मशीनें लगाकर जमींदोज कर दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार यह कोल्ड स्टोरेज अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन के नाम पर झूंसी के कटका में स्थित था। जिसे अब ध्वस्त कर दिया गया है। डीएम भानुचन्द्र गोस्वामी द्वारा 7 सितम्बर को इस प्रापर्टी को कुर्क करने का आदेश जारी किया गया था।

दरअसल, 25 सितंबर तक डीएम ने प्रशासन को कुर्की की कार्रवाई पूरी रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था। लेकिन हजारों किसानों के कई कुंटल आलू रखे होने की वजह से इस काम मे बाधा उत्पन हो गई थी। वहीं प्रशासन ने इसका उपाय निकलते हुए आलुओं को दूसरे कोल्ड स्टोरेज में शिफ्ट करके कुर्की की कार्रवाई का काम पूरा किया।

बता दें प्रयागराज विकास प्राधिकरण की तरफ से बिना स्वीकृत मानचित्र के बने इस कोल्ड स्टोरेज को जमींदोज करने का आदेश जारी किया गया था। इसी आदेश को पूरा करते हुए जिलाधिकारी की अनुमति मिलने के बाद गुरुवार दोपहर बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पीडीए के जोनल अधिकारी सत शुक्ला और आलोक पाण्डेय के नेतृत्व में की गई। इस मौके पर फूलपुर एसडीएम विवेक चतुर्वेदी और सीओ फूलपुर कई थानों की फोर्स के साथ मौजूद रहे।

इस अवैध कोल्ड स्टोरेज बारे में जानकर आप भी भौचक्के रह जाएंगे। करोड़ों की लागत से बना यह स्टोरेज लगभग दस हज़ार स्क्वायर मीटर की जगह पर बनाया गया था। कुल तीन भूखंडों को मिला कर इसका निर्माण किया गया था। भूमाफियों पर लगातार योगी सरकार नकेल कसती नजर आ रही है। अब तक अतीक की कुल 200 करोड़ की संपत्ति को या तो जब्त या ध्वस्त किया जा चुका है। इतना ही नहीं उसके करीबियों के भी अवैध संपत्तियों को बख्शा नहीं जा रहा है।

गौरतलब है कि प्रशासन द्वारा आज ही बाहुबली अतीक अहमद गैंग आईएस-227 के सदस्य और बिजनेस पार्टनर हिस्ट्रीशीटर मोहम्मद अब्बास खान की सिविल लाइंस में सरदार पटेल मार्ग पर स्थित मैक टावर के खिलाफ की गई है। प्रयागराज विकास प्राधिकारण ने मैक टावर पर नोटिस चस्पा कर सभी दुकानों समेत पूरे टावर को ही सील कर दिया है।