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ट्विटर ने उस वैज्ञानिक का किया अकाउंट सस्पेंड, जिसने COVID-19 वायरस के वुहान लैब में बनाने का किया ‘खुलासा’

चीन की वायरोलॉजिस्ट (विषाणु-वैज्ञानिक) डॉ ली-मेंग यान ने एक पेपर प्रकाशित किया। इस पेपर के अनुसार उन्होंने दावा किया कि कोरोनो वायरस को चीनी वैज्ञानिकों ने एक लैब (वुहान लैब) में बनाया था।

इस खुलासे और पेपर पब्लिश होने के बाद डॉ यान को प्रतिष्ठित हॉन्ग कॉन्ग विश्वविद्यालय में अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी। जान बचाने के लिए उन्हें देश छोड़ कर भी भागना पड़ा।

रविवार (13 सितंबर, 2020) को डॉ यान ने अपने ट्विटर हैंडल से तीन अन्य चीनी वैज्ञानिकों के साथ सह-लेखक के रूप तैयार किया गया पेपर ट्वीट किया था। तभी तो लोग कमेंट में पूछना शुरू कर दिए थे कि इनके अकाउंट को सस्पेंड होने में कितना समय लगेगा!

और अंततः यह हो ही गया।

ट्विटर ने डॉ ली-मेंग यान के अकाउंट को सस्पेंड कर ही दिया। हालाँकि ट्विटर अकाउंट के सस्पेंड होने से पहले डॉ यान के लगभग 60,000 फॉलोवर हो गए थे।

डॉ यान के ट्विटर अकाउंट का कैशे पेज आप यहाँ देख सकते हैं।

विवाद क्यों?

विश्व भर में कोविड-19 पर शोध कर रहे अन्य वैज्ञानिक अभी तक डॉ ली-मेंग यान और उनके तीन सहकर्मियों द्वारा पब्लिश किए पेपर को ऑथेंटिक नहीं मान रहे हैं। इन वैज्ञानिकों का कहना है कि इनके शोध पेपर का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

दोहरा रवैया फिर उजागर: फेसबुक ने ‘ऊँ जय जगदीश हरे’ भजन को ‘Abusive’ बता अपलोड करने से रोका

फेसबुक का हिन्दुओं के प्रति दोहरा रवैया किसी से छुपा नहीं है। अभी हाल ही में गोपी कृष्ण नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने बताया कि उन्होंने फेसबुक पर एक भजन डालने की कोशिश की, मगर फेसबुक ने उन्हें ये कहते हुए पोस्ट करने से मना कर दिया कि उनके द्वारा डाले जा रहे पोस्ट को कई लोगों ने अपमानजनक (अब्यूसिव) बताया है। इसलिए वह इसे फेसबुक पर अपलोड नहीं कर सकते हैं। बता दें कि गोपी कृष्ण ने अपने ट्वीट में लिखा कि वो ‘ऊँ जय जगदीश हरे’ भजन को अपलोड करना चाहते थे।

वैसे ये फेसबुक के लिए कोई नहीं बात नहीं है। इससे पहले भी फेसबुक अपना दोहरा रवैया प्रदर्शित कर चुका है। ये फेसबुक का इतिहास रहा है। फेसबुक पर कई लोगों को ‘सूअर’ लिखने से लेकर ‘जय श्री राम’ को अभिवादन स्वरूप लिखने तक के लिए ब्लॉक किया गया है। एक यूजर का कहना है कि आप अगर संस्कृत में कोई मंत्र लिखते हैं, और कोई उसे ‘हेट स्पीच’ कह कर रिपोर्ट कर दे, तो फेसबुक त्वरित कार्रवाई करते हुए आपका अकाउंट सस्पेंड कर देगा।

सुदर्शन नाम के एक यूजर ने ‘पुरबा’ और ‘पछुआ’ हवाओं के बारे में कुछ लिखा, जिसका और कोई संदर्भ नहीं, लेकिन उसके पोस्ट को हटा दिया गया था। सबसे मजेदार बात तो यह है कि अंकुर त्रिपाठी ने कहीं ‘जय श्री राम’ और ‘श्री अंजनेयम’ लिखा तो उसे कम्यूनिटी स्टैंडर्ड के खिलाफ बता हटा दिया गया था। गुलशन पाहूजा की बात करें तो उन्होंने अनुच्छेद 370 हटने पर कश्मीर की स्थिति पर कुछ लिखा था और उनका अकाउंट तीन दिन के लिए सस्पेंड कर दिया गया था।

ये तो बस चंद उदाहरण हैं जहाँ फेसबुक की कम्युनिटी स्टैण्डर्ड की बातें फर्जी साबित हो जाती हैं कि वो रिपोर्ट हुए पोस्ट को जाँचते हैं, उसके बाद कार्रवाई करते हैं। अगर ये इन्हें जाँचते हैं, तो समझ में यही बात आती है कि इनकी टीम में नकारे लोग बैठे हुए हैं। अगर ये लोग नकारे और निकम्मे नहीं हैं, जिन्हें अपना काम ठीक से नहीं आता, तो फिर ये लोग धूर्त और पूर्वग्रहों से ग्रस्त कर्मचारी हैं। ऐसा बार-बार सुनने में आया है कि फेसबुक पर आप हिन्दू देवताओं को अपमान की बात, उनके धार्मिक प्रतीकों को अश्लील तरीके से दिखाने की बात करें, तस्वीरें लगाएँ, आपको कुछ नहीं होगा। वो पोस्ट वहीं रहेगा। लेकिन जैसे ही आप ऐसा कुछ डालते हैं जो समुदाय विशेष के बारे में है तो वहीं कम्युनिटी स्टैण्डर्ड आ जाता है।

बता दें कि फेसबुक हमारा डेटा लेता है, हमारी पसंद-नापसंद, हमारी तस्वीरों को, हमारे लेखों को, लिखने के तरीके को, हमारे कहीं आने-जाने को, हर बात को अपने डेटा सेंटर में रखता है। ये डेटा वो किसी पोलिटिकल पार्टी को बेचता है, किसी फूड चेन को, कपड़े की कम्पनी को, कॉस्मेटिक्स बनाने वाले को, बैंकों को, किसी को भी बेचता है।

यही कम्पनियाँ अपनी करतूतों से किसी देश में सत्ता परिवर्तन कराने की फिराक में रहती हैं, और कहीं ‘ऑर्गेनिक ट्रेंड’ के नाम पर अपने मालिक की विचारधारा को न्यूज ट्रेंड वाले सेक्शन में सबसे ऊपर दिखाती है। वहाँ वैसी खबरों को जगह दी जाती थी जो किसी विचारधारा, पार्टी या व्यक्ति के खिलाफ हों।

IPL 2020: सौरव गांगुली ने साझा की शारजाह क्रिकेट स्टेडियम दौरे की तस्वीर, पाकिस्तानी खिलाड़ियों को किया ब्लर

इंडियन प्रीमियर लीग 2020 शुरू होने वाला है इसी कड़ी में बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली यूएई स्थित शारजाह क्रिकेट स्टेडियम पहुँचे। कुल 3 अलग जगहों पर आईपीएल के मुकाबले होंगे जिसमें से एक शारजाह स्टेडियम भी है। सौरव गांगुली ने स्टेडियम पहुँच कर तैयारियों का जायज़ा लिया। उन्होंने इस दौरान एक तस्वीर भी ली और उसे अपने इन्स्टाग्राम पर साझा भी किया। तस्वीर के साथ लिखा, “मशहूर शारजाह स्टेडियम आईपीएल 2020 के आयोजन के लिए पूरी तरह तैयार है।” उन्होंने इस पूरी पोस्ट में कुल 3 तस्वीरें साझा की। 

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Famous Sharjah stadium all set to host IPL 2020

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सौरव गांगुली ने एक ऐसी तस्वीर साझा की जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के क्रिकेटर्स को धुंधला कर दिया। जिसके बाद उनकी इस तस्वीर पर नेटीजन्स ने जम कर प्रतिक्रिया दी। बीसीसीआई अध्यक्ष ने बैकग्राउंड में मौजूद जो तस्वीर ब्लर (धुंधली) की उसमें पाकिस्तानी क्रिकेटर जावेद मियांदाद, राशिद लतीफ़, मिस्बाह-उल-हक़, अज़हर महमूद, दानिश कनेरिया समेत अन्य खिलाड़ी मौजूद थे। 

जिस तस्वीर में सौरव गांगुली ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों को ब्लर किया

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट बोर्ड के बीच रिश्ते बहुत अच्छे नहीं रहे। इसकी एक सबसे बड़ी वजह थी सीमा पर पाकिस्तान की तरफ होने वाली गतिविधियाँ। भारत ने इस मामले पर पहले ही अपना मत साफ़ किया है। भारत का कहना है कि दोनों देशों की क्रिकेट टीम के बीच तब तक द्विपक्षीय शृंखला नहीं खेली जा सकती है जब तक दोनों देशों के बीच सीमा पर हालात सामान्य नहीं होते हैं। 

भारत ने पिछले 14 सालों के दौरान पाकिस्तान में एक भी टेस्ट शृंखला नहीं खेली है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान ने भी पिछले 8 सालों में भारत का कोई दौरा नहीं किया है। हालाँकि, दोनों टीम के बीच विश्व कप और चैम्पियंस ट्राफ़ी जैसे आईसीसी के मुकाबले हुए हैं। आईपीएल की बात करें तो सिर्फ साल 2008 में पाकिस्तान के खिलाड़ी इस टूर्नामेंट का हिस्सा बने थे। पाकिस्तान के कुल 11 खिलाड़ी साल 2008 के आईपीएल में शामिल होने वाली अलग-अलग टीम का हिस्सा बने थे। 

ख़बरों के मुताबिक़ आईपीएल के 13वें संस्करण का सीधा प्रसारण (लाइव स्ट्रीमिंग) कुल 120 देशों में किया जाएगा। पाकिस्तान उन 120 देशों की सूची में शामिल नहीं किया गया है। सऊदी अरब की कुल 3 अलग जगहों पर आईपीएल के मुकाबले खेले जाएँगे जिसमें सौरव गांगुली ने शारजाह का दौरा कर लिया है। इसके बाद वह दो अलग जगहों, आबू धाबी और दुबई का दौरा भी करेंगे जहाँ अन्य मुकाबले होने हैं।  

बीसीसीआई अध्यक्ष 9 सितंबर को दुबई पहुँचे थे इसके बाद उन्होंने 6 दिन की अनिवार्य क्वारनटाइन अवधि पूरी की थी। शारजाह स्टेडियम में आईपीएल के कुल 12 मुकाबले खेले जाएँगे, 22 सितंबर को चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच टूर्नामेंट का पहला मुकाबला होगा। इसके पहले यहाँ भारत और पाकिस्तान के बीच कई अहम मुकाबले खेले जा चुके हैं।      

Fact Check: क्या पूरे देश में 25 सितंबर से फिर लागू होगा लॉकडाउन? जानिए क्या है इस वायरल खबर की सच्चाई

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच लॉकडाउन को फिर से लागू करने की अटकलें लगाई जा रही है। सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से वायरल हो रही है कि सरकार जल्द ही एक बार फिर से लॉकडाउन लगाने जा रही है।

46 दिन का होगा लॉकडाउन 

वायरल हो रही खबर में कहा गया है कि आपदा विभाग के एक लेटरपैड पर सरकारी आदेश लिखा हुआ है कि ये लॉकडाउन 46 दिन का होगा। साथ ही कहा गया है कि एनडीएमए, योजना आयोग के साथ मिलकर पीएमओ और गृह मंत्रालय से गुजारिश करती है कि 25 सितंबर की रात से लॉकडाउन को लगा दिया जाए। हालाँकि इस दौरान सभी आवश्यक सेवाएँ पहले की तरह चलती रहेंगी।

Whatsapp forward during the rounds about the imminent lockdown

इसी तरह से इन दिनों सोशल मीडिया पर नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) के नाम से एक सर्कुलर वायरल हो रहा है। इसमें बताया गया है कि एक बार फिर से 25 सितंबर से लॉकडाउन लगेगा।

Copy of alleged order being circulated on social media websites

वायरल हो रहे लेटर में लिखा है, “देश में कोरोना वायरस के मामलों को फैलने से रोकने और मृत्युदर को कम करने के लिए, योजना आयोग के साथ एनडीएमए भारत सरकार से आग्रह करता है और पीएमओ व गृह मंत्रालय को निर्देश देता है कि 25 सितंबर की आधी रात से 46 दिनों का देशव्यापी लॉकडाउन लागू किया जाए। देश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति शृंखला को बनाए रखने के लिए एनडीएमए मंत्रालय को सूचना जारी कर रहा है।”

क्या कहता है पीआईबी का फैक्ट

हालाँकि, सरकार की तरफ से प्रेस इंफोर्मेशन ब्यूरो (PIB) द्वारा किए गए फैक्ट चेक में इस खबर को फर्जी बताया गया है। पीआईबी फैक्ट चेक के मुताबिक केंद्र सरकार ने इस संबंध में न तो कोई आदेश जारी किया है, न ही इस संबंध में कोई विचार विमर्श के लिए नोटिस जारी किया है। पीआईबी ने अपने ट्वीट में लिखा, “यह लेटर फेक है। NDMA ने फिर से लॉकडाउन लागू करने के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया है।”

गौरतलब है कि भारत में मार्च के अंत में देशव्यापी लॉकडाउन लगाया गया था। सरकार ने कोरोना वायरस के मामलों की रोकथाम के लिए लॉकडाउन लागू किया था। इसके बाद जून से कई फेज में लॉकडाउन को फिर से खोला गया। हालाँकि, स्कूल-कॉलेज अभी भी बंद हैं, जबकि मार्च महीने से बंद मेट्रो को एक हफ्ते पहले चलाने की हरी झंडी दी गई।

भारत में कोरोना वायरस के मरीजों का आँकड़ा 49 लाख के पार हो गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के ताजा आँकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटों में देश भर में 83,809 नए केस सामने आए हैं, वहीं 1,054 मरीजों ने जान गँवाई है। इस तरह कुल मरीजों का आँकड़ा 49,30,237 पार हो गया है। अभी 9,90,061 मरीजों का देश के विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। 38,59,400 मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि मृतकों का आँकड़ा 80,776 पहुँच गया है।

सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले में आरोपित रिया चक्रवर्ती के खिलाफ ‘निर्णायक कार्रवाई’ करेगी ED: रिपोर्ट्स

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सूत्रों ने रिपब्लिक टीवी को बताया है कि एजेंसी सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में आरोपितों के खिलाफ ‘निर्णायक कार्रवाई’ करेगी। बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद उनके पिता ने आरोप लगाया कि अभिनेता के अकाउंट से 15 करोड़ रुपए निकाले गए हैं। सुशांत के पिता की शिकायत के बाद ईडी मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जाँच कर रही है। मीडिया सूत्रों का कहना है कि ईडी मामले पर शुक्रवार (सितंबर 18, 2020) को कार्रवाई कर सकती है।

रिया चक्रवर्ती को ड्रग कनेक्शन को लेकर NCB ने गिरफ्तार किया है। रिया की गिरफ्तारी के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। बता दें कि रिया चक्रवर्ती भी उन लोगों में शामिल हैं, जिनके खिलाफ ED द्वारा PMLA मामला दायर किया गया है, रिया के भाई शोविक चटर्जी 4 सितंबर से ही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के रिमांड में है। 

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो द्वारा भी जाँच की जा रही है। NCB के अलावा, दोनों अन्य एजेंसियों ने आरोपित को एक से अधिक बार पूछताछ के लिए बुलाया है और सूत्रों ने कहा कि ED ‘निर्णायक चरण’ में है। गौरतलब है कि मुंबई सेशन कोर्ट ने पिछले दिनों रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शोविक चक्रवर्ती और अन्य लोगों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिन्हें एनसीबी ने गिरफ्तार किया था। 

वहीं जाँच करते-करते एनसीबी की टीम एक टापू पर बने सुशांत के फार्महाउस तक जा पहुँची है। यहाँ एनसीबी की टीम ने एक व्‍यक्ति का बयान भी दर्ज किया है। व्‍यक्ति ने बताया है कि इसी फार्महाउस में रिया चक्रवर्ती सुशांत के साथ कई बार आईं। सुशांत यहाँ दोस्‍तों के साथ पार्टी भी करते थे।

ड्रग्‍स मामले में रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार करने के बाद अब एनसीबी की टीम ने पवना डैम पर बने आपती गवंडे नामक टापू पर जाकर सुशांत के फार्महाउस पर जाँच करने पहुँची। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वहाँ एक बोटमैन ने एनसीबी की टीम को बताया कि रिया और सारा को उसने कई बार यहाँ सुशांत के साथ देखा है। उसके अनुसार सुशांत के साथ यहाँ श्रद्धा कपूर को भी देखा गया।

फार्महाउस के मैनेजर रईस ने आज तक को बताया कि सुशांत के फार्महाउस में पार्टीज होती थी जहाँ कई बॉलीवुड सितारे आते थे। मैनेजर ने सारा अली खान का नाम भी लिया। सारा के बाद ही रिया चक्रवर्ती फार्महाउस आईं। मैनेजर ने यह भी बताया क‍ि उन्होंने कभी सुशांत को ड्रग्स लेते नहीं देखा लेक‍िन उनकी पार्ट‍ियों में स्मोकिंग पेपर मँगाए जाते थे। आगे मैनेजर ने बताया कि अप्रैल में रिया का आना जाना शुरू हुआ था। 31 अप्रैल को फार्महाउस में बर्थडे पार्टी सेलिब्रेट किया गया था जिसमें रिया के माता पिता भी आए थे।

पाकिस्तान ने SCO की बैठक में पेश किया ‘गलत नक्शा’: NSA अजीत डोभाल ने बैठक से किया वॉकआउट

भारत ने मंगलवार को शंघाई कोर्पोरेशन आर्गेनाईजेशन (SCO) के तहत हुई राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) की बैठक छोड़ दी। दरअसल, रूस की मेजबानी में हुई इस बैठक में पाकिस्तान ने गलत नक्शा पेश किया था। इसके बाद भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बैठक से वॉक आउट कर दिया। इसके बाद भारत ने बताया कि पाकिस्तान के प्रतिनिधियों की यह हरकत बैठक के नियमों के विरुद्ध है।

इस मुद्दे पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बयान जारी करते हुए कहा, “पाकिस्तान की यह हरकत मेजबान रूस के दिशा निर्देशों का उल्लंघन है। SCO की NSA स्तरीय बैठक में पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने जानबूझ कर झूठा मानचित्र पेश किया। जिसे पाकिस्तान ने हाल फ़िलहाल में प्रचारित भी किया है। जिसके चलते भारत ने मेजबान रूस से चर्चा करके बैठक से वॉक आउट कर दिया। पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर बैठक में गलत जानकारी भी साझा की है।” मंत्रालय के अनुसार इस बात की पूरी गुंजाईश थी कि पाकिस्तान इस बैठक में भ्रामक तथ्य प्रस्तुत करेगा।

ख़बरों के अनुसार रूस फेडरेशन के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) सचिव निकोलई पेट्रूशेव ने भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, “रूस इस कदम पर पाकिस्तान का समर्थन नहीं करता है। हम इस बात की उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तान के इस उकसाने वाले कदम की वजह से भारत की SCO में भागीदारी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ हमारे (पेट्रूशेव) अच्छे रिश्ते हैं, पाकिस्तान की इस हरकत से वह प्रभावित नहीं होंगे। हम आशा करते हैं कि भारत आने वाले समय में होने वाले कार्यक्रमों का भी हिस्सा बना रहेगा।” 

पाकिस्तान ने 4 अगस्त को यह नया नक्शा जारी किया था जिसमें उसने लद्दाख, जम्मू कश्मीर और गुजरात के कुछ हिस्सों को अपना हिस्सा बताया था। जबकि SCO में पाकिस्तान का कोई आधिकारिक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तक नियुक्त नहीं है। भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा प्रतिक्रिया जारी करने के ठीक कुछ समय पहले पाकिस्तान के मोइद युसूफ ने इस मुद्दे पर ट्वीट किया था। 

ट्वीट में उन्होंने लिखा था “मेरे भारतीय समक्ष ने रूस और पाकिस्तान के भाषण के बाद वॉक आउट किया, यह बेहद विचित्र था। उस मंच की मूल भावना सहयोग की है लेकिन भारत के ऐसा करने से बुरा प्रभाव पड़ा।” इसके बाद युसूफ ने ट्वीट में लिखा अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण से विवादित सीमा (जम्मू कश्मीर) पर एक तरफ़ा और गैर क़ानूनी निर्णय लेने से शांति के लिए ख़तरा पैदा हो सकता है।

कंगना रनौत ने BMC को भेजा लीगल नोटिस: ‘मणिकर्णिका फिल्म्स’ को हुए नुकसान के लिए माँगा ₹2 करोड़ का हर्जाना

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत और महाराष्ट्र सरकार के बीच चल रही तकरार अब कानूनी रूप ले चुकी है। कंगना रनौत ने अपने ऑफिस ‘मणिकर्णिका फिल्म्स’ में की गई तोड़-फोड़ के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) से 2 करोड़ रुपए का हर्जाना माँगा है। एक्ट्रेस ने इसके लिए बीएमसी को लीगल नोटिस जारी किया है।

बता दें कि 9 सितंबर को पाली हिल स्थित कंगना रनौत के ऑफिस मणिकर्णिका फिल्म्स के कई हिस्सों को बीएमसी ने अवैध बताते हुए तोड़ दिया था। याचिका में दावा किया गया है कि बीएमसी ने बंगले में स्थित उनके ऑफिस के 40 प्रतिशत हिस्से को गिरा दिया है। जिससे वहाँ लगे महँगे झूमर व डेकोरेशन से जुड़े काम का नुकसान पहुँचा है।

याचिका में माँग की गई है कि उन्हें अपनी जगह को इस्तेमाल करने लायक बनाने की अनुमति दी जाए। बीएमसी के कर्मचारियों को इस विषय पर 9 सितंबर 2020 को याचिका दायर होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन इसे नजरअंदाज कर बीएमसी कर्मचारी बंगले को गिराने में व्यस्त रहे। 

याचिका के मुताबिक बीएमसी की कार्रवाई से उनकी 40 प्रतिशत चल संपत्ति नष्ट हो गई है। बीएमसी की ओर से की गई इस अवैध कार्रवाई से करीब 2 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इसलिए बीएमसी को दो करोड़ रुपए मुआवजे के रुप में देने का निर्देश दिया जाए। हाईकोर्ट में अब इस मामले की सुनवाई 22 सितंबर 2020 को होगी। तब तक उन्हें कोर्ट से मिली अंतरिम राहत जारी रहेगी।

बता दें कि कंगना इस संबंध में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से भी मुलाकात कर चुकी हैं। इससे पहले केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी राज्यपाल से मुलाकात कर कंगना रनौत को मुआवजा दिलवाने की बात कही थी।

गौरतलब है कि 8 सितंबर को बीएमसी ने कंगना के ऑफिस पर नोटिस चिपकाया था और अवैध निर्माण को लेकर 24 घंटे में जवाब माँगा था। लेकिन अगले दिन कंगना के मुंबई पहुँचने से पहले ही उनके ऑफिस में तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी गई। इसे लेकर एक्ट्रेस के वकील ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन जब तक कोर्ट ने कार्रवाई पर रोक लगाई, तब तक बंगले को 40 फीसदी ध्वस्त कर दिया गया था। इसमें झूमर, सोफा और दुर्लभ कलाकृतियों समेत कई कीमती संपत्ति भी शामिल है।

कंगना रनौत 9 सितंबर को मुंबई पहुँची थीं। 13 सितंबर को उन्होंने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी से मुलाकात कर उन्हें अपने साथ हुए अन्याय के बारे में बताया था। 14 सितंबर की सुबह वे मुंबई से मनाली लौट गईं। अपने होमटाउन पहुँचने के बाद भी वे शिवसेना, कॉन्ग्रेस और महाराष्ट्र सरकार पर लगातार हमलावर हैं।

एक्ट्रेस ने ट्विटर पर एक मिनट का वीडियो शेयर कर कहा था कि मुंबई में आतंक बढ़ता जा रहा है। कंगना ने मनाली रवाना होने से पहले ट्वीट किया था, “दिल्ली के दिल को चीर के वहाँ इस साल खून बहा है, सोनिया सेना ने मुंबई में आजाद कश्मीर के नारे लगवाए, आज आजादी की कीमत सिर्फ आवाज है, मुझे अपनी आवाज दो, नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब आजादी की कीमत सिर्फ और सिर्फ खून होगी।”

बलात्कार की बढ़ती वारदात से पाकिस्तान में भयावह हालात: ज़्यादातर मामलों में अब्बू, दादू, चाचू, भाई, मामू आरोपित, नहीं दर्ज होते केस

पाकिस्तान में महिलाएँ कितनी सुरक्षित हैं इस मामले से जुड़ी ख़बरें अक्सर सामने आती हैं। पिछले कुछ समय में वहाँ महिलाओं के साथ होने वाले अपराध की तमाम घटनाएँ सामने आई। बीते दिन पाकिस्तान के समाचार समूह जियो न्यूज़ ने इस मुद्दे पर एक चर्चा आयोजित की। इस चर्चा में ऐसी कई बातें बताई गई जो पाकिस्तान में महिलाओं की वास्तविक स्थिति बयान करती हैं। कैपिटल टॉक नाम के इस कार्यक्रम में पाकिस्तान के 3 अलग अलग राजनीतिक दल की नेताओं ने पाकिस्तान में महिलाओं की स्थिति पर अपना नज़रिया रखा।  

हाल ही में पाकिस्तान के लाहौर (गुज्जरपुरा मोटरवे) में एक सामूहिक बलात्कार की घटना हुई थी। जिस पर लाहौर के सीसीपीओ (कैपिटल सिटी पुलिस ऑफिसर) उमर शेख ने कहा था कि वह महिला रात के वक्त घर से बाहर निकली ही क्यों थी। इस घटना पर पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी तहरीक ए इंसाफ़ की नेता ने चर्चा में कहा एक अधिकारी ऐसा बयान नहीं दे सकता है। 

अधिकारी की ज़िम्मेदारी है कि वह हर तरह के हालातों में लड़की की सुरक्षा सुनिश्चित करें। इसके बाद उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा पाकिस्तान दुनिया का छठा ऐसा मुल्क है जहाँ महिलाएँ बिलकुल सुरक्षित नहीं हैं। हैरानी की बात यह है कि ऐसा अभी से नहीं बल्कि पिछले 40 साल से हो रहा है।

इसके बाद विपक्ष की पीपुल्स पार्टी की नेता ने कहा कि हम पाकिस्तान में होने वाली हर बलात्कार की घटना के बाद कहते हैं कि यह आखिरी है। लेकिन इस तरह की घटनाएँ कभी रुकती ही नहीं हैं और अपराधियों को सज़ा देने की जगह पीड़ित को ही दोष दिया जाने लगता है। फिर चर्चा का आयोजन करा रहे पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर ने इस मुद्दे पर कुछ आँकड़े बताए।

हामिद मीर ने बताया कि जनवरी 2020 से लेकर 31 जुलाई 2020 के बीच पाकिस्तान के पंजाब में बलात्कार की 2043 और सामूहिक बलात्कार की 111 घटनाएँ सामने आई हैं। इसके अलावा पिछले साल 2019 में बलात्कार के बलात्कार के 3881 और सामूहिक बलात्कार के 190 मामले सामने आए थे। इतने सारे मामले पाकिस्तान के सबसे बड़े राज्य पंजाब में सामने आए थे। 

तीसरे विपक्षी दल मुस्लिम लीग की नेता ने कहा इस मुल्क (पाकिस्तान) के मर्दों की मानसिकता ही ऐसी है। उन्हें लगता है एक महिला चाहती है कि उसके साथ ज़्यादती हो और ऐसी सोच की वजह से मुल्क की 11 करोड़ महिलाओं का अपमान होता है। इसके बाद उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के पंजाब में साल 2018 के दौरान बलात्कार की 1324 घटनाएँ सामने आई। और ऐसे न जाने कितने मामले होंगे जो दर्ज नहीं किए जाते होंगे, जिन पर कोई बात ही नहीं हो पाती है। 

इसके अलावा भी चर्चा में कुछ ऐसी बातें हुई जो पाकिस्तान में महिलाओं के असल हालात बताती हैं। जब बच्चियों से पूछा जाता है कि उनके साथ बलात्कार किसने किया तो 82 फ़ीसदी मामलों में आरोपित घर के अहम सदस्य ही होते हैं। ज़्यादातर रेप में आरोपित अब्बू, दादाजान, ताऊ, भाई, मामा और फूफा ही होते हैं इसलिए परिवार के एक सदस्य को खोने के डर से यह मामले जल्दी रिपोर्ट ही नहीं होते। ऐसे में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मुख्य चिंता यह भी है कि जब पाकिस्तान में मुस्लिम बच्चियाँ ही सुरक्षित नहीं हैं तो हिन्दू तथा अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ क्या-क्या होता होगा।

ऐसी कुछ खबरें छनकर आती रहती हैं लेकिन वास्तविक आँकड़ा भयावह है। पाकिस्तान में बलात्कार की घटनाओं को अंजाम देने वाले अशिक्षित लोग ही नहीं हैं। बल्कि कई मामले ऐसे भी देखे गए हैं जिसमें दिग्गज अधिकारियों और न्यायाधीशों ने महिलाओं के साथ ज़्यादती की है। पाकिस्तान में वुमेन प्रोटेक्शन बिल और जैनब एलर्ट बिल जैसे अहम क़ानून पारित किए गए थे इसके बावजूद वहाँ महिलाओं के साथ होने वाले अपराध लगातार जारी हैं।  

कंगना रनौत के Y-Plus सुरक्षा कवर को वापस लेने की माँग पर मीडिया ने कॉन्ग्रेस नेता बृजेश का किया बचाव

कॉन्ग्रेस समर्थित महाराष्ट्र सरकार और अभिनेत्री कंगना रनौत के बीच वाकयुद्ध खत्म नहीं हो रहा। सोमवार (सितंबर 14, 2020) को अभिनेत्री ने अपने प्रशंसकों को बताया कि राज्य मशीनरी द्वारा परेशान किए जाने के बाद वह मुंबई छोड़ कर अपने घर मनाली के लिए रवाना हो चुकी हैं। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) द्वारा उनके घर और ऑफिस को नष्ट करने का हवाला देते हुए, उन्होंने दोहराया कि उनका मुंबई से POK की तुलना करना सही था।

कंगना रनौत ने ट्वीट करते हुए लिखा, “भारी मन से मुंबई से वापस लौट रही हूँ। जिस तरह मुझे इन दिनों परेशान किया गया, मेरे ऊपर अटैक किया गया, मुझे गलत चीजें बोली गईं, मेरा घर तोड़ने की धमकी दी गई और मेरा ऑफिस तोड़ा, सिक्योरिटी को हथियार के साथ मेरे आसपास रहने के लिए कहा गया, मुझे लगता है POK से तुलना करना सही था।”

कंगना रनौत के इस ट्वीट पर कॉन्ग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील बृजेश कलप्पा ने सवाल उठाया। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा कंगना रनौत को वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने के निर्णय को करदाताओं के पैसे की बर्बादी करार देते हुए, कॉन्ग्रेस के राजनेता ने उनके सुरक्षा कवर को वापस लेने की माँग की। 

कलप्पा ने ट्वीट लिखा था, “एक इंसान के लिए Y- कैटेगरी की सिक्युरिटी का खर्च 10 लाख रुपए प्रति महीने से ज्यादा होता है। यह पैसा टैक्स पेयर्स से आता है। अब कंगना हिमाचल प्रदेश (पीओके से दूर) में सुरक्षित हैं। क्या मोदी उन्हें दी गई सुरक्षा हटाएँगे?”

कंगना ने कलप्पा को जवाब देते हुए लिखा है, “ब्रजेश-जी सुरक्षा आप या मेरी सोच के आधार पर नहीं दी जाती। आईबी ने धमकी की जाँच की। धमकी के आधार पर मेरी सुरक्षा ग्रेड तय किया गया। भगवान की कृपा रही तो आने वाले दिनों में यह सुरक्षा पूरी तरह हट जाएगी। या फिर आईबी की रिपोर्ट खराब आती है तो वे इसे अपग्रेड कर सकते हैं।”

हालाँकि, कलप्पा द्वारा दिए गए तर्क को मीडिया ने गैर राजनीतिक अभिव्यक्ति के तौर पर पेश किया। मीडिया रिपोर्ट्स में कलप्पा के टैक्स पैयर्स के पैसे को लेकर जताई गई चिंता को सही ठहराया गया।

Screengrab of the Pinkvilla report

उदाहरण के लिए, पिंकविला ने इस तथ्य को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया कि कलप्पा एक कॉन्ग्रेस नेता और एआईसीसी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। अपने इस लेख में पब्लिकेशन ने कलप्पा को सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता के रूप में पेश किया।

Screengrab of the DNA report

इसी तरह से हिन्दुस्तान और डीएनए ने भी ‘कॉन्ग्रेस एंगल’ को नजरअंदाज करने की कोशिश की।

बृजेश कलप्पा सालों से कॉन्ग्रेस से जुड़े हुए हैं। उन्हें 2018 में कॉन्ग्रेस मीडिया संयोजक नियुक्त किया गया था और वह एआईसीसी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं। कलप्पा, सिद्धारमैया सरकार के कानूनी सलाहकार भी थे। सिद्धारमैया द्वारा उन्हें कर्नाटक सरकार में मंत्री का पद भी दिया गया था। उन्हें मदिकेरी के विधायक टिकट की उम्मीद थी, मगर पार्टी ने उनकी जगह एचएस चंद्रमौली को टिकट दे दी।

DG ने थरूर से पूछा- आप फेक न्यूज पर इतनी जल्दी भरोसा कैसे कर लेते हैं? कॉन्ग्रेस नेता ने कहा था- IDSA फैकल्टी को नहीं मिल रही सैलरी

एक न्यूज रिपोर्ट के आधार पर कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने ट्विटर पर कल (सितंबर 14, 2020) दावा किया कि ‘मनोहर पर्रिकर इंस्टिट्यूट ऑफ डिफेन्स एंड एनालिसिस’ के फैकल्टीज को अगस्त और सितम्बर महीने की न तो सैलरी मिली है और न ही उन्हें पेंशन दिया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय रक्षा मंत्रालय के प्रीमियर थिंक टैंक ने इस तरह का निर्णय लिया है, जिससे वो स्तब्ध हैं। उन्होंने दावा किया कि ‘मनोहर पर्रिकर IDSA’ में फैकल्टीज को सैलरी और पेंशन नहीं दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने इसे मोदी सरकार की वित्तीय क्षमता से भी जोड़ा।

इसके बाद शशि थरूर की इस बात का जवाब खुद ‘मनोहर पर्रिकर IDSA’ के डायरेक्टर जनरल सूजन चिनॉय ने दिया और शशि थरूर के दावों को खारिज करते हुए पूछा कि आखिर वह झूठे दावों पर यकीन कैसे कर लेते हैं।

सूजन चिनॉय ने अपने ट्वीट में खुद की तुलना ‘बुक ऑफ सैमुअल’ के पात्र डेविड से की और शशि थरूर की तुलना गोलिएथ से करते हुए कहा कि आखिर वो फेक न्यूज़ पर इतनी जल्दी भरोसा कैसे कर लेते हैं? जिसका थरूर ने कोई जवाब नहीं दिया।

चिनॉय ने अपने ट्वीट में लिखा, “रक्षा मंत्रालय ने पहले ही फंड सैंक्शन कर दिए हैं और सितंबर की सैलरी भी अब देनी बाकी नहीं है। उम्मीद है राष्ट्र के लोग एक साथ आ सकते हैं और राष्ट्रीय महत्व-रक्षा और विकास के मामलों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं!”

उल्लेखनीय है कि शशि थरूर ने जिस खबर के आधार पर मोदी सरकार को घेरने का प्रयास किया था। वह खबर रविवार (सितम्बर 13, 2020) को द हिंदू में प्रकाशित हुई थी। उस खबर में दावा किया गया था कि MP-IDSA ने अपनी फैकल्टी को यह बात कही है कि वह उन्हें सैलरी और पेंशन नहीं दे सकते।

द हिंदू की रिपोर्ट का दावा था कि यह सूचना अगस्त के अंत में एक ईमेल में महानिदेशक द्वारा फैकल्टी को दी गई थी। साथ ही इसके पीछे यह वजह बताई गई थी कि ऐसा फंड में कमी के कारण है।

मनोहर पर्रिकर इंस्टिट्यूट ऑफ डिफेन्स एंड एनालिसिस

गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही केंद्र सरकार ने पूर्व रक्षा मंत्री दिवंगत मनोहर पर्रिकर की ‘प्रतिबद्धता और विरासत’ के सम्मान में सरकारी थिंक टैंक रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान (IDSA) का नाम बदलकर मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान (Manohar Parrikar Institute for Defence Studies and Analyses) कर दिया था।

इस संबंध में बयान जारी करते हुए सरकार की ओर से कहा गया था कि मनोहर पार्रिकर ने पठानकोट और उरी जैसे हमलों की कठिन चुनौती के दौर में रक्षा मंत्रालय का नेतृत्व किया और अनुकरणीय साहस के साथ उनका जवाब दिया। आगे इस बयान में लिखा गया था, “अपने पूरे करियर के दौरान सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और समर्पण के प्रतीक दिवंगत मनोहर पर्रिकर ने जुझारूपन दिखाया और बड़ी निर्भीकता से विषम स्थितियों से टक्कर ली।”

बता दें कि मनोहर पर्रिकर 9 मार्च, 2014 से लेकर 14 मार्च, 2017 तक देश के रक्षा मंत्री रहे थे। पिछले साल 17 मार्च को कैंसर (Cancer) से उनका निधन हो गया था। उनके जाने के बाद सरकार ने इंस्टीट्यूट का नाम उनके नाम पर करते हुए कहा था कि जब पर्रिकर रक्षा मंत्री थे तब भारत में कई निर्णय लिए गए जिनसे ‘देश की सुरक्षा क्षमता बढ़ी, स्वदेशी रक्षा उत्पादन में तेजी आई और पूर्व सैनिकों की जिंदगी बेहतर बनी।