Home Blog Page 4486

मुस्लिम उम्मीदवारों को हवलदार की ट्रेनिंग: उद्धव सरकार के बाद अब मदरसा की घोषणा, कॉन्ग्रेस MLA भी मीटिंग में

भारत में पहली बार किसी मदरसे ने ऐलान किया है कि वह मुस्लिम समुदाय के 200 लोगों को हवलदार बनाने का प्रशिक्षण देगा। यह प्रशिक्षण केवल मुस्लिम उम्मीदवारों को हवलदार चयनित होने से पहले दिया जाएगा और यह पूरी तरह मुफ्त होगा। महाराष्ट्र के मदरसे ने अपनी घोषणा में कहा है कि वह राज्य की हवलदार भर्ती की तैयारी कर रहे मुस्लिम उम्मीदवारों को प्रशिक्षण देगा। 

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़ ग्रांट रोड स्थित मदरसा जामिया अशरफ़िया कादरिया ने इस प्रशिक्षण की योजना का ऐलान किया। इसके अनुसार मुस्लिम समुदाय के लगभग 200 युवाओं को 3 महीने के प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत तैयार कराया जाएगा।

मदरसे के मौलानाओं ने इस सम्बंध में विस्तार से चर्चा करने के लिए बैठक भी बुलाई। जिसमें मदरसे के मुखिया मौलाना मोईन अशरफ कादरी (मोईन आलम), कॉन्ग्रेस विधायक अमीन पटेल, सामाजिक कार्यकर्ता एमए खालिद शामिल थे। बैठक में शामिल होने वाले हर सदस्य ने तय किया कि प्रशिक्षण की पूरी रूपरेखा क्या होगी।  

मोईन आलम ने इस मुद्दे पर कहा, “जामिया अशरफ़िया कादरिया प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के निःशुल्क रहने और खाने का प्रबन्ध करेगा। कुछ लोगों ने इस प्रक्रिया में हमारी आर्थिक मदद करने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया है।” इसके अलावा महाराष्ट्र में पहले ही अल्पसंख्यक समुदाय के विकास के लिए एक विभाग बना हुआ है।

कुछ और लोगों ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। कैसर खालिद आईजीपी (नागरिक अधिकार सुरक्षा) ने कहा, “पिछले काफी समय से कॉन्स्टेबुलरी (पुलिस विभाग) में अल्पसंख्यकों के पर्याप्त प्रतिनिधित्व की ज़रूरत महसूस हो रही थी। अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का प्रतिनिधित्व बढ़ने से विश्वास बढ़ता है और पुलिस को लेकर भ्रम दूर होते हैं। क़ानून व्यवस्था को बेहतर तरीके से चलाने के लिए हर समुदाय के हवलदार का मौजूद होना ज़रूरी है। जिससे हर समुदाय के लोगों से संवाद करके क़ानून व्यवस्था बनाए रखे।”

सामाजिक कार्यकर्ता एमए खालिद ने कहा:

“कॉन्स्टेबुलरी में मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या कम होने का एक बड़ा कारण है मराठी भाषा। मैंने साल 2018 में इसकी परीक्षा दी थी लेकिन मराठी भाषा की अच्छी समझ नहीं होने की वजह से मेरा चयन नहीं हो पाया था। जबकि मैं शारीरिक रूप से पूरी तरह सही था। परीक्षा में सारे प्रश्न मराठी भाषा में होते हैं और मुस्लिम उम्मीदवारों के वह बहुत मुश्किल होता है। सरकार की तरफ से यह प्रशिक्षण लगभग 2 महीने का है लेकिन हमारे प्रशिक्षण की अवधि 3 महीन होगी। एक महीने का समय हम मुस्लिम उम्मीदवारों की मराठी भाषा सुधारने में लगाएँगे।” 

इसके बाद कॉन्ग्रेस विधायक अमीन पटेल ने कहा, “यह बहुत अच्छी बात है कि मोईन मियां मुस्लिम उमीदवारों के लिए इतने प्रयास कर रहे हैं। लिखित परीक्षा की तैयारी के अलावा अभ्यर्थियों को सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों द्वारा शारीरिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।”

ख़बरों की मानें तो बहुत जल्द महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग उम्मीदवारों की तैयारी के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगा। मुस्लिम समुदाय से जुड़े नेताओं का कहना है कि फंड्स की कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि उन्होंने इस योजना के लिए डोनेशन (आर्थिक सहयोग) लेने की योजना बनाई है। 

इसके पहले भी उद्धव सरकार पर महाराष्ट्र में मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लग चुका है। राज्य सरकार ने हाल ही में फैसला लिया था, जिसके मुताबिक़ वहाँ अल्पसंख्यक युवाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा संख्या में पुलिस में उनकी भर्ती हो। महाराष्ट्र की उद्धव सरकार में अल्पसंख्यक विकास और स्किल डेवलपमेंट मामलों के मंत्री नवाब मलिक ने इसकी घोषणा करते हुए इससे जुड़ी जानकारी साझा की थी।

शरद पवार की एनसीपी के नेता व मंत्री नवाब मलिक ने ट्विटर पर साझा की गई सूचना में बताया था कि पुलिस में भर्ती से पहले अल्पसंख्यक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में अल्पसंख्यक पुलिस में भर्ती हों, इसीलिए उन्हें पहले ही प्रशिक्षित किया जाएगा। बताया गया कि अभी प्रशिक्षण के लिए उत्सुक अभ्यर्थियों के चयन के लिए 14 जिलों में अभियान शुरू भी कर दिया गया है।

कुछ दिनों बाद डायरेक्ट ट्रेनिंग की शुरुआत कर दी जाएगी। बाकी जिलों में भी ट्रेनिंग जल्द ही शुरू होगी। इस साल के अंत तक राज्य में 12,500 पुलिस कर्मियों की भर्ती करने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि इस भर्ती में राज्य में मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, सिख, पारसी, जैन और यहूदी अल्पसंख्यक समुदायों के अधिक से अधिक उम्मीदवारों को भर्ती के लिए तैयारी करने का अवसर दिया जाएगा।

उम्मीदवारों को सामान्य ज्ञान और शारीरिक परीक्षण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। वर्तमान में, इच्छुक उम्मीदवारों से वर्धा, गढ़चिरोली, अमरावती, नांदेड़, जालना, पुणे, यवतमाल, परभणी, सोलापुर, औरंगाबाद, बुलदाना, नासिक, बीड और अकोला जिलों में आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं। कहा गया है कि इच्छुक उम्मीदवार उस जिले में प्रशिक्षण के लिए जिला कलेक्टर या चयनित एनजीओ के पास आवेदन करें।

आपको यह कहने की अनुमति नहीं दे सकता कि मुस्लिम सिविल सेवाओं में घुसपैठ कर रहे हैं: सुदर्शन न्यूज़ के ‘UPSC Jihad’ शो पर SC

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार (सितंबर 15, 2020) को सुदर्शन न्यूज के कथित विवादित कार्यक्रम ‘नौकरशाही में मुस्लिमों की घुसपैठ’ पर सुनवाई की। इस पीठ का नेतृत्व न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने किया। इस दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि कल के बाद फिर से इस मामले पर विचार किया जाएगा। इसके साथ ही सुदर्शन टीवी पर अगली सुनवाई तक प्रसारण को स्थगित कर दिया गया।

वरिष्ठ वकील दिवान ने इस पर दलील देते हुए कहा, “मैं इसे प्रेस की स्वतंत्रता के रूप में दृढ़ता से विरोध करुँगा। कोई पूर्व प्रसारण प्रतिबंध नहीं हो सकता है। हमारे पास पहले से ही चार प्रसारण हैं, इसलिए हम विषय को जानते हैं। यदि यह एक पूर्व संयम आदेश है तो मुझे बहस करनी होगी। विदेशों से धन पर एक स्पष्ट लिंक हैं।”

जस्टिस चंद्रचूड़ ने आगे कहा, “हम इस बात को लेकर चिंतित हैं कि जब आप कहते हैं कि जामिया मिलिया के छात्र सिविल सेवाओं में घुसपैठ करने वाले समूह का हिस्सा हैं, तो फिर हम बर्दाश्त नहीं कर सकते। देश के सर्वोच्च न्यायालय के रूप में, हम आपको यह कहने की अनुमति नहीं दे सकते कि मुस्लिम सिविल सेवाओं में घुसपैठ कर रहे हैं। आप यह नहीं कह सकते कि पत्रकार को यह करने की पूर्ण स्वतंत्रता है।”

वहीं जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा, “हमें विजुअल मीडिया के स्वामित्व को देखने की जरूरत है। कंपनी का संपूर्ण शेयर होल्डिंग पैटर्न जनता के लिए साइट पर होना चाहिए। उस कंपनी के राजस्व मॉडल को यह जाँचने के लिए भी रखा जाना चाहिए कि क्या सरकार एक में अधिक विज्ञापन डाल रही है और दूसरे में कम।”

उन्होंने आगे कहा कि मीडिया खुद के द्वारा निर्धारित मानकों की बेईमानी नहीं कर सकता। डिबेट में एंकर की भूमिका देखने की जरूरत है। जब कोई बोलता है, तो उसे सुनना चाहिए। मगर जब हम टीवी डिबेट को देखते हैं, तो एंकर सबसे अधिक समय लेता है। वह वक्ता की आवाज को म्यूट करके सवाल पूछते हैं। उनका कहना था कि मीडिया की स्वतंत्रता नागरिकों की ओर से है।

जस्टिस चंद्रचूड़ आगे कहते हैं, “इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की शक्ति बहुत बड़ी है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विशेष समुदायों या समूहों को लक्षित करके केंद्र बिंदु बन सकता है। एंकरों की शिकायत यह है कि एक विशेष समूह सिविल सेवाओं में प्रवेश प्राप्त कर रहा है। यह कितनी धूर्तता है?”

उन्होंने आगे यह भी कहा, “इस तरह के धूर्त आरोप यूपीएससी परीक्षाओं पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं। बिना किसी तथ्यात्मक आधार के ऐसे आरोप लगाने की अनुमति कैसे दी जा सकती है? क्या मुक्त समाज में ऐसे कार्यक्रमों की अनुमति दी जा सकती है?”

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर दलील देते हुए कहा, “पत्रकार की स्वतंत्रता सर्वोच्च है। जस्टिस जोसेफ के बयानों के दो पहलू हैं। इस तरह से प्रेस को नियंत्रित करना किसी भी लोकतंत्र के लिए विनाशकारी होगा।”

उन्होंने आगे कहा, “इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अलावा एक समानांतर मीडिया भी है जहाँ एक लैपटॉप और एक पत्रकार लाखों लोगों को अपनी सामग्री पहुँचा सकते हैं। मैं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया के बारे में बात कर रहा हूँ। पत्रकार की स्वतंत्रता को सम्मान देकर जस्टिस जोसेफ की चिंताओं को दूर किया जाना चाहिए। बड़ी संख्या में वेब पोर्टल हैं, जिनका स्वामित्व उनके द्वारा दिखाए जाने वाले कार्यों से भिन्न है।”

जस्टिस जोसेफ का कहना था, “जब हम पत्रकारिता की स्वतंत्रता की बात करते हैं, तो यह निरपेक्ष नहीं है। वह अन्य नागरिकों की तरह ही स्वतंत्रता साझा करता है। अमेरिका की तरह भारत में पत्रकारों की कोई अलग स्वतंत्रता नहीं है। हमें ऐसे पत्रकारों की जरूरत है जो अपनी डिबेट में निष्पक्ष हों।”

गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सुदर्शन न्यूज की ‘नौकरशाही में मुस्लिमों की घुसपैठ’ वाली कथित रिपोर्ट के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। शुक्रवार 28 अगस्त 2020 को रात आठ बजे इसका प्रसारण होना था। जामिया के छात्रों ने इस पर रोक लगाने को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि यह रिपोर्ट समुदाय के खिलाफ घृणा को बढ़ावा देती है।

Pak में 1 साल में 2 हिंदू डॉक्टरों की हत्या: इस बार चाकू से रेता गया गला, इससे पहले रेप के बाद किया था मर्डर

पाकिस्तान में एक और हिंदू डॉक्टर की बेहरमी से हत्या कर दी गई। डॉक्टर का नाम लाल चंद बागरी है। बताया जा रहा है कि बागरी सिंध प्रांत के तांदो अल्यहार में स्थित अपने घर में रह कर डॉक्टरी की प्रैक्टिस कर रहे थे। लेकिन सोमवार को कुछ अज्ञात लोगों ने उनके घर में घुस कर उनका गला चाकू से रेत दिया। बाद में कुछ पड़ोसियों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी।

सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों की आवाज उठाने वाले वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी ने भी इस घटना के बाद की वीडियो अपने हैंडल से साझा की। वीडियो में डॉक्टर का शव खून से लथपथ जमीन में पड़ा देखा जा सकता है। ट्वीट में लिखा गया है, “हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले डॉक्टर लाल चंद बागरी तांदो अल्यहार में मार दिए गए। उनकी गर्दन किसी तेज धार वाले हथियार से काटी गई।”

ट्वीट में आगे इमरान सरकार में मानव अधिकार मंत्री शिरीन मजारी को टैग करके लिखा गया कि यदि वह अल्पसंख्यकों का संरक्षण नहीं कर सकतीं तो फिर उन्हें अपने पोस्ट से इस्तीफा देना चाहिए।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में मात्र एक साल में यह दूसरे हिंदू डॉक्टर की हत्या हुई है। इससे पहले कराची में एक हिंदू महिला डॉक्टर का शव उसके हॉस्टल के कमरे से मिला था। महिला डॉक्टर का नाम नमृता चंदानी था।

उनकी पोस्टमॉर्टम में यह बात सामने आई थी कि रेप के बाद हत्या की गई। जबकि प्रशासन इसे बार-बार आत्महत्या का मामला बताना चाहता था। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया था। मगर, बाद में उन दोनों को रिहा कर दिया गया।

अब हालिया मामले में भी अभी तक पुलिस को आरोपितों की जानकारी नहीं है। बताया जा रहा है हत्या को अंजाम देने के बाद सभी आरोपित मौके से फरार हो गए। पुलिस अब पूछताछ करके इनका पता लगाने की कोशिश कर रही है।

दूसरी ओर सोशल मीडिया पर भी इस मामले के सामने आने के बाद पाकिस्तान में हिंदुओं की सुरक्षा पर फिर सवाल हो रहा है। लोग इस घटना की जानकारी तो साझा कर रहे हैं। मगर, वीडियो इसलिए नहीं शेयर कर रहे क्योंकि उसमें चारों ओर खून नजर आ रहा है। ट्विटर पर पूछा जा रहा है कि क्या पाकिस्तान में हिंदू आपातकाल स्थिति का सामना कर रहे हैं। क्या कोई शिया इसकी निंदा करेगा?

दूरदर्शन एक ऐसी भावना, जो देश को एकता का आभास कराती है: 61वीं सालगिरह पर भावुक हुए लोग, शेयर की यादें

दूरदर्शन आज यानी मंगलवार (15 सितंबर 2020) को अपनी 61वीं सालगिरह मना रहा है। उन ऐतिहासिक दिनों को याद करते हुए जब उस पर रामायण, महाभारत, चित्रहार, देख भाई देख, फौजी, मालगुडी डेज़ जैसे कई शानदार कार्यक्रम आते थे। आज भी वह कार्यक्रम आम लोगों के लिए किसी ‘क्लासिक’ से कम नहीं हैं।

दूरदर्शन ने 61वीं सालगिरह पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, “Celebrating 61 Glorious Years of Doordarshan!!” वीडियो में दूरदर्शन की वही पुरानी परम्परागत ट्यून थी जिसे सुनते हुए पीढ़ियाँ बड़ी हुई हैं। इसके बाद वीडियो में दूरदर्शन का लोगो भी अपनी पुराने शैली में नज़र आता है।

इस मौके पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी ट्वीट करके बधाई दी। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “दूरदर्शन अपने जीवन का भाग है। रामायण, महाभारत से लेकर न जाने कितने अच्छे कार्यक्रम दूरदर्शन ने दिए। आज भी भारत का लोक सेवा प्रसारक दूरदर्शन, DDNews, DDKisan, DDBharati, DDNational और DDRetro इतने चैनल्स के द्वारा निरंतर हम सबसे जुड़ा है। Happy #Doordarshanday!”

इसके अलावा कर्नाटक भाजपा की उपाध्यक्ष शोभा करंदलाजे ने भी दूरदर्शन की 61वीं सालगिरह के मौके पर शुभकामनाएं दी। साथ ही दूरदर्शन की अभूतपूर्व सेवाओं के लिए आभार भी जताया। 

मशहूर अभिनेता स्वप्निल जोशी जिन्होंने दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाली उत्तर रामायण में कुश का किरदार निभाया था। उन्होंने भी दूरदर्शन के स्थापना दिवस के मौके पर ट्वीट करके बधाई दी। 

दूरदर्शन के ट्वीट करने के बाद नेटीजन्स ने भी दूरदर्शन से जुड़ी यादों का ज़िक्र किया। तमाम यूज़र्स ने ट्वीट करके अपनी भावनाएं साझा की, कैसे दूदर्शन ने उनके बचपन को एक नया आयाम दिया था। 

एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, “इस संगीत में मासूमियत और बचपन के सपनों की खुशबू है। जब दुनिया एक ओएस्टर की तरह महसूस होती थी।” 

एक ट्विटर यूज़र ने लिखा कि दूरदर्शन सिर्फ एक चैनल ही नहीं था बल्कि हर भारतीय परिवार के सदस्य जैसा था। इसके बाद यूज़र ने दूरदर्शन पर आने वाली डॉक्यूमेंट्री, रविवार को आने वाले कार्यक्रम रंगोली और स्वतन्त्रता दिवस के दिन आने वाली परेड की भी प्रशंसा की। 

वहीं एक और ट्विटर यूज़र ने लोगों की धारणा बदलने में अहम भूमिका निभाने के लिए दूदर्शन का आभार जताया। 

एक ट्विटर यूज़र ने कहा दूरदर्शन एक ऐसी भावना है जो एकता का आभास कराती है। 

15 सितंबर 1959 को दूरदर्शन एक प्रयोग की तरह शुरू किया गया था। साल 1965 के दौरान इसे सेवा में तब्दील कर दिया गया। तभी यह सिग्नल के माध्यम से राजधानी दिल्ली के आस-पास लोगों के टेलीवीज़न सेट तक पहुँचा। 1972 के दौरान इन सेवाओं का दायरा बढ़ा कर मुंबई और अमृतसर तक कर दिया गया था। फिर 1975 के दौरान इसकी सेवाएं देश के अन्य शहरों तक भी पहुँची।    

दिल्ली सरकार के बुलावे पर फेसबुक ने कहा: हम भारत सरकार के दायरे में आते हैं, तुम्हारे नहीं

दिल्ली विधानसभा की शांति और सद्भाव समिति की ओर से दिल्ली दंगों में भूमिका को लेकर फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजीत मोहन को तलब किया गया था। हालाँकि ताजा जानकारी के अनुसार, फेसबुक उपाध्यक्ष ने समिति के सामने पेश होने से मना कर दिया और जवाब दिया कि वह भारत सरकार के दायरे में आते हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार शांति और सद्भाव समिति के प्रमुख राघव चड्ढा ने मंगलवार (सितंबर 15, 2020) को कहा, “हमने दिल्ली दंगों में भूमिका को लेकर फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजीत मोहन को तलब किया था, लेकिन फेसबुक की ओर से आए जवाब में हमें पूछताछ के लिए भेजे गए समन को वापस लेने को कहा गया। इसका कारण बताया गया है कि फेसबुक जैसे मिडिएटर का रेग्युलेशन भारत सरकार के विशेष अधिकार के अंतर्गत आता है।”

राघव चड्ढा ने आगे कहा कि फेसबुक का यह पत्र समिति के विशेषाधिकार की अवहेलना है। कमिटी के सामने पेश होने से इनकार करना दिल्ली दंगों में इसकी भूमिका के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने का एक प्रयास है। ताजा समन इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप जारी किया जाएगा।

आम आदमी पार्टी नेता राघव ने फेसबुक के इस रवैये को दिल्ली की दो करोड़ जनता का अपमान बताया है। साथ ही ये भी कहा कि फेसबुक के वकीलों ने अधिकारियों को गलत सलाह दी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा में दिल्ली दंगों में फेसबुक की भूमिका को लेकर चर्चा हो रही है। अगर फेसबुक ये कहता है कि संसद की समिति के सामने हमने अपना जवाब दे दिया है तो ये गलत है। विधानसभा समिति चाहे तो इसके लिए वॉरंट जारी करवा सकती है।

बता दें कि फेसबुक पर आरोप है कि उसने घृणास्पद भाषण को लेकर उदासीनता दिखाई, जिसके चलते दिल्ली की शांति भंग हुई। इसी आरोप के मद्देनजर समिति ने हाल में को फेसबुक इंडिया के अधिकारी अजीत मोहन को नोटिस जारी किया था। यह नोटिस वाल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित लेख के सामने आने के बाद जारी किया गया था।

AAP नेता का कहना है कि फेसबुक विधानसभा समिति से भाग रहा है और कुछ छिपा रहा है। जिससे ऐसा लगता है कि दिल्ली दंगों को लेकर फेसबुक पर जो आरोप लगे हैं, वो शायद बिल्कुल सही हैं। चड्ढा ने कहा कि चेतावनी के साथ आखिरी मौका फेसबुक को दे रहे हैं कि फेसबुक इंडिया के एमडी और वाइस प्रेसिडेंट अजीत मोहन समिति के सामने पेश हों

क्या है #UPSCjihad? क्या खास समुदाय को बढ़ावा देती है UPSC: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Suresh Chavhanke, Sudarshan TV, UPSC

सुदर्शन टीवी के ‘UPSC जिहाद’ नामक शो पर पिछले दिनों काफी बवाल हुआ। चैनल के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके ने दावा किया कि इस शो के लिए बाकायदा रिसर्च की गई और तब जाकर वह इस नतीजे पर पहुँचे कि यूपीएससी में खास मजहब को कहीं न कहीं साजिशन ढकेला जा रहा है। उन्होंने अंदेशा जताया कि हो सकता है इसके लिए सरकारी योजनाओं का इस्तेमाल हो रहा हो या फिर कोई ऐसा ‘नेक्सस’ हो, जो साक्षात्कार के समय उनका समर्थन करता हो।

इस पूरे विषय पर अभी तक सुदर्शन चैनल ने 4 शो दिखाए हैं। शो में अपने दावों को साबित करने के लिए चैनल ने उड़ान योजना का हवाला दिया है, जिसमें समुदाय विशेष को छात्रवृत्ति के रूप में 25000 से 1 लाख रुपए तक की मदद दी जाती है। अब सवाल तो उठना लाजिमी है कि जैसे वर्ग विशेष को आगे बढ़ने के लिए मदद मिल रही है, क्या वैसी ही मदद अन्य समुदायों को मिल रही है? और अगर हाँ, तो इसका प्रतिशत क्या है?

पूरी वीडियो का लिंक यहाँ क्लिक करके देखें

LAC पर चीन ने जुटाए सैनिक और गोला बारूद, हमारी सेना भी तैयार: संसद में बोले राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन से तनाव पर मंगलवार (सितंबर 15, 2020) को लोकसभा में बयान देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख का दौरा कर हमारे जवानों से मुलाकात की। उन्होंने यह संदेश भी दिया था वह हमारे वीर जवानों के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा, “मैंने भी लद्दाख जाकर अपने यूनिट के साथ समय बिताया था। मैं आपको यह बताना चाहता हूँ कि उनके साहस शौर्य और पराक्रम को महसूस भी किया था। आप जानते हैं कर्नल संतोष बाबू ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था।”

उन्होंने आगे कहा कि LAC को लेकर भारत और चीन की धारणा अलग-अलग है। LAC पर शांति बहाल की जाएगी यह बात दोनों पक्षों ने माना है। भारत का मानना है कि द्विपक्षीय संबंधों को विकसित किया जा सकता है। साथ ही साथ ही सीमा मुद्दे पर चर्चा की जा सकती है।

LAC पर किसी भी हरकत का द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ेगा। समझौते में जिक्र है कि LAC पर दोनों देश कम से कम सेना रखेंगे। हम सीमा पर सेना के अदम्य साहस और शौर्य को पहचानते हैंं। उन्होंने कहा, “भारत और चीन की सीमा को ड्रैगन नहीं मानता है। हम मानते हैं कि यह निर्धारण सही तरीके का है। चीन यह भी मानता है कि सीमा अभी भी औपचारिक रूप से निर्धारित नहीं है। 1950-60 के दशक से बात कर रहा है।”

रक्षा मंत्री आगे इस साल होने वाली घटनाओं के बारे में बताता हुए कहा कि अप्रैल माह से पूर्वी लद्दाख की सीमा पर चीन से सैनिकों की संख्या में वृद्धि। मई में गलवान घाटी में चीन ने व्यवधान उत्पन्न किया जिसके कारण संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हुई। इसी बीच मई महीने के बीच ओंकाला, गोदरा और पैंगोंग लेक में कुछ हरकत करने की कोशिश की। सेना ने चीन को पूरा जवाब दिया।

चीनी सेना को भारी क्षति: राजनाथ सिंह

हमने चीन को राजनयनिक तरीके से बता दिया कि सीमा पर यथास्थिति बदलने की स्थिति का जवाब दिया जाएगा। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि LAC को माना जाएगा। 15 जून को चीन से गलवान में खूनी संघर्ष में हमारे जवानों ने बलिदान दिया और चीनी पक्ष को भी भारी नुकसान पहुँचाया। जहाँ संयम की जरूरत थी, हमने रखा और जहाँ शौर्य की जरूरत थी वहाँ शौर्य प्रदर्शित किया है। सेना की बहादुरी की प्रशंसा की जानी चाहिए।

चीन ने पैंगोंग में घुसने को कोशिश की: राजनाथ सिंह

29-30 अगस्त की रात में फिर से चीन ने पैंगोंग में घुसने की कोशिश की, लेकिन हमारे सैनिकों ने प्रयास विफल कर दिए। चीन ने द्विपक्षीय संबंधों का अनादर पूरी तरह दिखता है। LAC का सम्मान करना और इसे 1993-1996 के समझौते में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है। चीन की तरफ से ऐसा नहीं हुआ है, उनकी कार्रवाई के कारण सीमा पर झड़प हुए हैं।

अभी की स्थिति पर चीन ने LAC के अंदरूनी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सैनिक और गोला बारूद जमा कर रखे हैं। चीन की कार्रवाई के जवाब में हमारी सेना ने पूरा काउंटर तैनाती कर रखी है। सदन को आश्वस्त रहना चाहिए कि हमारी सेना इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करेगी।

कोविड-19 की चुनौतीपूर्ण दौर में सैन्य बल और ITBP की तुरंत तैनाती की गई है। सरकार ने सीमा के विकास को प्राथमिकता दी है। हमारी सरकार ने सीमा के विकास के लिए काफी बजट बढ़ाया है। सीमाई इलाके में काफी रोड और ब्रिज बने हैं। और सैन्य बलों को बेहतर सपोर्ट भी मिला है।

मौजूदा स्थिति पहले से अलग है। हम सभी परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार हैं। जब भी देश के समक्ष कोई चुनौती आई है इस सदन ने सेना के प्रति पूरी प्रतिबद्धता दिखाई है।

राजनाथ सिंह ने आगे कहा, “हम सीमाई इलाकों में मुद्दो का हल शांतिपूर्ण तरीके से किए जाने के प्रति प्रतिबद्ध है। हमने चीनी रक्षा मंत्री से रूस में मुलाकात की। हमने कहा कि इस मुद्दे का शांतिपूर्ण तरीके से हल करना चाहते हैं, लेकिन भारत की संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। 10 सितंबर को एस जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। जयशंकर ने कहा कि अगर चीन पूरी तरह से समझौते को माने तो विवादित इलाके से सेना को हटाया जा सकता है।”

गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव अपने चरम पर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में रूस की राजधानी मॉस्को में चीन के रक्षा मंत्री जनरल वेई फेंग से मुलाकात की थी। उनके कुछ दिन बाद ही मॉस्को में ही विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच बातचीत हुई थी।

भारत के लद्दाख इलाके में चीन की सेना की हालिया घुसपैठ के कर्ताधर्ता खुद राष्ट्रपति शी चिनफिंग हैं। लेकिन भारतीय सेना ने जिस आक्रामक ढंग से जवाब दिया, उससे चीनी नेतृत्व अचंभित है। 15 जून को गलवान घाटी में हुए हिंसक टकराव में जहाँ 20 भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए, वहीं जवाबी कार्रवाई में चीन के कम से कम 43 सैनिक मारे गए, यह संख्या 60 भी हो सकती है। लेकिन चीन ने कभी आधिकारिक तौर पर इसका ऐलान नहीं किया।

हाल ही में अमेरिकी समाचार पत्र ‘न्यूज़वीक’ ने खुलासा किया कि 15 जून को सीमा पर हुई भारत और चीनी सैनिकों की हिंसक झड़प में चीन के 60 से ज्यादा सैनिक मारे गए थे। साथ ही, यह बात भी सामने आई कि भारतीय क्षेत्र में इन आक्रामक गतिविधियों के पीछे खुद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आदेश थे, लेकिन उनकी सेना को मात खानी पड़ी।

इसके बाद फिर से 29-30 अगस्त की रात चीनी सेना ने घुसपैठ की कोशिश की थी, जिसे भारतीय जवानों ने नाकाम कर दिया। LAC पर जारी तनाव को सुलझाने के कई प्रयास किए जा चुके हैं। दोनों देशों के बीच कमांडर स्तर की कई बातचीत भी हुई लेकिन तनाव अब भी बरकार है।

LAC पर तनाव के बीच भारतीय सेना ने पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे फिंगर- 4 पर ऊँचाई वाली जगह को अपने कब्जे में लेकर चीन के सामने अपनी स्थिति को और मजबूत कर दिया है। भारतीय सेना पूरी मजबूती से चीन की दादागिरी को करारा जवाब दे रही है।

पूर्वी लद्दाख में LAC पर सोमवार (सितम्बर 7, 2020) की रात हुए संघर्ष को लेकर भारत की सेना ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया था कि भारत सीमा पर तनाव को कम करने और स्थिति को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन चीन स्थिति को बिगाड़ने के लिए लगातार भड़काऊ गतिविधियों में लगा हुआ है। भारतीय सेना ने कहा कि उन्होंने न तो फायरिंग की है, न LAC को पार किया है और न ही किसी अन्य आक्रामक माध्यम का इस्तेमाल किया है।

उधर भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के सीमा पर लंबे समय से चल रहे गतिरोध के समाधान के लिये पाँच सूत्रीय योजना पर सहमत होने के बावजूद पूर्वी लद्दाख के गतिरोध वाले बिंदुओं पर स्थिति में कुल मिलाकर कोई बदलाव नहीं है। बताया जा रहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीनी सैनिक अपनी-अपनी जगह पर मजबूती से कायम हैं। क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और चीनी सैनिकों की तरफ से कोई नई हलचल नहीं दिखी है।

राफेल आने से और मजबूत हुई वायुसेना ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर निगरानी के स्तर को और बढ़ा दिया है। वायुसेना ने चीन की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के लिए कांबेट एयर पेट्रोलिंग में बढ़ोतरी की है। लद्दाख के आसमान पर इस समय फाइटर, हेलीकॉप्टरों व ट्रांसपोर्ट विमानों का दबदबा है। फाइटर विमानों की गर्जना भारतीय जवानों व लद्दाख के लोगों का हौसला बढ़ा रही है। वहीं, चीन के दिल में डर पैदा कर रही है। इस समय भारतीय वायुसेना तिब्बत में चीन की हवाई गतिविधियों पर नजर रखने के साथ अपनी मारक क्षमता को भी लगातार बढ़ा रही है।

बता दें कि कोरोना संकट काल में संसद का सत्र सोमवार (सितंबर 14, 2020) से शुरु हुआ है। जिसके पहले दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने अभिभाषण में सभी सांसदों से अपील की थी कि वह देश के बहादुर जवानों के साथ खड़े हों और उनके साहसपूर्ण कार्यों की सराहना करें। प्रधानमंत्री ने सोमवार को कहा था कि सेना के पीछे पूरे देश की एकजुटता का मजबूत संदेश इस सदन की और विशेष तौर पर इस सत्र की जिम्मेदारी है।

पीएम ने कहा, “हमारी सेना के जवान बड़ी हिम्मत, जज्बे और बुलंद हौसलों के साथ दुर्गम पहाडि़यों पर डटे हुए हैं। कुछ ही समय बाद बर्फ और बारिश का मौसम शुरु हो जाएगा। इसके बावजूद हमारे जवान पूरे भरोसे के साथ सीमा पर खड़े होकर मातृभूमि की रक्षा के लिए डटे हुए हैं। इन परिस्थितयों इन परिस्थितियों में यह संदेश जाना जरूरी हो जाता है कि सेना के जवानों के पीछे पूरा देश खड़ा है।”

सपा नेता कंगना को समझा रहे थे बॉलीवुड का मतलब, धाकड़ ‘झाँसी की रानी’ ने लगाई धोबी-पछाड़

बॉलीवुड इंडस्ट्री के मशहूर निर्देशक करण जौहर के खिलाफ़ खुल कर अपनी राय रखने वाली कंगना रनौत ने एक बार फिर उन्हें लेकर अपना बयान दिया है। हालाँकि, इस बार उनके निशाने पर प्रत्यक्ष रूप से करण न होकर बल्कि एक सपा नेता थे, जिन्होंने अभिनेत्री पर कुछ सवाल उठाए। और, जवाब में कंगना ने कहा कि इंडस्ट्री सिर्फ करण जौहर की या उनके पिता की नहीं है। कंगना ने यह बात सपा नेता मनीष जगन अग्रवाल के ट्वीट पर लिखी। उन्होंने कंगना पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि वह सभी के संघर्षों को गाली देकर, तुच्छ बताकर आगे बढ़ना चाहती हैं।

उन्होंने लिखा था, “कंगना जी आप सबके संघर्षों को गाली देकर, तुच्छ बताकर, सबके ऊपर निशाना साधकर आगे बढ़ना चाहती हैं? करण जौहर हों या अन्य फ़िल्म निर्माता सभी लोगों की सामूहिक मेहनत से ये भारतीय फिल्म इंडस्ट्री खड़ी हुई है, कोई भी इंडस्ट्री आपकी तरह सबको गाली देकर 1-2 दिन में खड़ी नहीं हो जाती।”

समाजवादी नेता के इसी ट्वीट में कंगना ने लिखा, “इंडस्ट्री सिर्फ़ करण जौहर/उसके पापा ने नहीं बनाई, दादा साहेब फाल्के से लेकर हर कलाकार और मज़दूर ने बनाई है, उस फ़ौजी ने जिसने सीमाओं को बचाया, उस नेता ने जिसने संविधान की रक्षा की है, उस नागरिक ने जिसने टिकट ख़रीदा और दर्शक का किरदार निभाया, इंडस्ट्री करोड़ों भारतवासियों ने बनाई है।”

इसके बाद मनीष जगन अग्रवाल ने लिखा, “लकड़ी की काठी पर बैठकर आप तो स्वयं को ही झाँसी की रानी समझने लगीं? झाँसी की रानी बलिदान देकर महान हुई थीं, जनता पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ खड़ी हुई थीं, आपने कितने पैदल चलते मजदूरों को भोजन कराया? कितनों की मदद की? तमाशा बनाना आपका पुराना शौक है।”

यहाँ बता दें कि सपा नेता के इस ट्वीट पर अभी तक कंगना का रिप्लाई नहीं आया है। मगर, उनके समर्थक मनीष जगन को जवाब दे रहे हैं। यूजर्स का कहना है, “लड़कों से गलती हो जाती है वाले आज लकड़ी की काठी पर ज्ञान दे रहे है। थोड़ा पढ़ाई लिखाई करिए फिर ज्ञान पेलियेगा। नहीं समझे वो क्या कहावत थी ना… ना बाजे घना। आपके लिए है। और अभी कोई चुनाव हुए था ना जिसमें SP को सिर्फ 16 सीट मिली थी वो आपका रिपोर्ट कार्ड था समझे।

ऐसे ही एक अन्य यूजर सपा नेता के ट्वीट के जवाब में लिखता है, “हर हिन्दू महिला झाँसी की रानी ही है और कंगना जी ने अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई उसी के वजह से ये सब हो रहा है। तेरे जैसे चमचे नहीं समझेंगे।”

अब रही बात करण और कंगना के बीच आपसी विवाद की। तो बता दें कि कंगना ने भले ही बॉलीवुड माफिया पर सुशांत सिंह की मौत के बाद मुखर होकर बोलना शुरू किया हो। मगर, नेपोटिज्म को लेकर और उसमें करण जौहर की भूमिका को लेकर अभिनेत्री शुरूआत से ही सवाल उठाती रही हैं। बेबाक कंगना ने कई बार करण जौहर को उनके सामने भी नेपोटिज्म आदि पर घेरा है। फिर चाहे बात कॉफी विथ करण शो की हो या कपिल शर्मा शो की।

घर में घुसकर नाबालिग का रेप, वीडियो व्हाट्सएप ग्रुप में डाला: शहजाद गिरफ्तार, सरताज, सहरोज, अफरोज, असरफ, वाहिद फरार

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक मामला सामने आया है। यहाँ एक 15 साल की एक लड़की का कई दिनों तक पीछा करने के बाद कुछ लोगों ने उसके घर में घुसकर उसका रेप किया। मामला गाजियाबाद के कविनगर का है। जब यह वारदात हुई तब पीड़िता के माता पिता घर में नहीं थे। वे पीड़िता की माता के मेडिकल चेकअप के लिए अलीगढ़ गए हुए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 3 सितंबर को कक्षा 8वीं में पढ़ने वाली 15 साल की नाबालिग अपने छोटे भाई बहन के साथ सो रही थी। तभी अचानक एक शख्स कुछ अन्य लोगों के साथ उसके घर में घुस आया और उसे घसीट कर छत पर ले गया। और उसके बाद उससे रेप किया। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि आरोपित के 6 दोस्तों ने भी उसके साथ छेड़छाड़ किया।

पीड़िता के पिता एक दैनिक मजदूर हैं। उन्होंने बताया कि घटना के बाद उनकी बेटी ने उन्हें फोन किया और रोने लगी। पीड़िता के पिता ने पुलिस को बताया कि वह अपनी पत्नी का इलाज करने अलीगढ़ गए थे। तभी उनकी बेटी का फोन आया और वह ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी।

उसने बताया कि उसे ठीक नहीं लग रहा है और बहुत दर्द हो रहा है। लड़की के पिता ने बताया कि ये सुनने के बाद उन्होने अपनी पत्नी को फोन दिया। पत्नी के बार-बार पूछने के बाद बेटी ने बताया कि उसका रेप हुआ है। नाबालिग ने बताया कि एक शख्स स्कूल जाने पर अक्सर उसे परेशान करता था, उसने उसका घर में घुसकर रेप किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रात को नाबालिग घर में अपने चार बहन-भाइयों के साथ सो रही थी। इसी दौरान दीवार फाँदकर 7 युवक उसके घर में घुस गए। छात्रा के मुँह में कपड़ा ठूँसकर आरोपित उसे छत में ले गए और उसके साथ रेप किया। इस दौरान उसके भाई बहन गहरी नींद में सो रहे थे और उन्हें पता नहीं चला।

पीड़िता के पिता ने पुलिस को बताया कि आरोपित उसे बदहवास हालत में छत पर ही छोड़कर फरार हो गए और घटना के बारे में किसी को बताने पर भाई-बहनों को जान से मारने की धमकी भी दी। उन्होंने पुलिस को यह भी बताया कि आरोपितों ने वीडियो बनाया है। और उसकी वीडियो को व्हाट्सएप ग्रुप में पोस्ट किया है। देर रात जब उसे होश आया तो उसने पिता को फोन कर सारी बात बताई।

वह तत्काल अलीगढ़ से गाजियाबाद के लिए रवाना हो गए। पीड़ित के पिता ने बताया, “मेरी बेटी छत पर ही बेहोश पड़ी थी। हमने उसे हॉस्पिटल ले गया और फिर पुलिस स्टेशन गए।”

पीड़िता के परिजनों ने पुलिस की ओर से निष्क्रियता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर 6 दिनों के बाद प्राथमिकी दर्ज की। पीड़िता के पिता ने थाने में शहजाद, सरताज, सहरोज, अफरोज, शानू, असरफ और वाहिद के खिलाफ नामजद तहरीर दी है। शिकायत के मुताबिक शहजाद ने पीड़िता के साथ बलात्कार किया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “शहजाद (22) को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य फरार हैं। शहजाद ने मुंबई में एक रेस्तरां में काम करता था, लेकिन लॉकडाउन के दौरान अपनी नौकरी गँवाने के बाद गाजियाबाद लौट आया था।”

विजय नगर पुलिस स्टेशन के एसएचओ देवेंद्र बिष्ट ने कहा कि शहजाद पर आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) और पोक्सो अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं, जबकि अन्य आरोपितों पर छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया गया है।

एसएचओ ने कहा, “हमने लड़की का बयान दर्ज किया है। उसने हमें बताया कि शहजाद ने उसके साथ बलात्कार किया था, जबकि अन्य ने वीडियो बनाया और उससे बार-बार छेड़छाड़ की। लड़की ने कहा कि जब वह स्कूल जाती थी तो मुख्य आरोपित अक्सर उसे घूरता रहता था।”

जिस दरभंगा में 1930-40 में हवाई जहाज और रनवे था… वो बंद क्यों हुआ? क्यों कॉन्ग्रेसी सरकारों ने यहाँ की जनता को छला?

भारत की फिरंगियों से आजादी मिलने को एक दशक से ज्यादा का वक्त बीत चुका था। उस वक्त बिहार के ही डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रपति थे और उन्होंने 4 जुलाई, 1962 को दरभंगा के महाराज कामेश्वर सिंह को धन्यवाद देते हुए एक चिट्ठी लिखी थी।

इस दौर तक राजशाही बीत चुकी थी, फिर एक लोकतान्त्रिक देश के राष्ट्रपति अपने ही देश के किसी राजवाड़े को धन्यवाद क्यों कह रहे थे? ये चिट्ठी पटना से हैदराबाद जाने के लिए हवाई-जहाज उपलब्ध करवाने और जहाज के कर्मचारियों के अच्छे व्यवहार की प्रशंसा के लिए थी। 

“उड़ान” नाम की योजना के तहत आज जिस दरभंगा एयरपोर्ट का विकास हो रहा है, उसकी स्थापना काफी पहले हो चुकी थी। बाद में जब सभी चीज़ों को लाइसेंस परमिट राज में घुसाया जाने लगा तो ऐसी कई व्यवस्थाएँ तथाकथित समाजवाद ने नष्ट कर डाली।

नरसिम्हा राव के उदारीकरण के दौर के बाद भाजपा सरकारों ने हवाई यात्रा जैसी चीज़ों को आम आदमी के पास पहुँचाने की योजना बनाई। “उड़ान” (यूडीएएन) ऐसी ही महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है, जिसके तहत देश के 486 क्षेत्रीय हवाई अड्डों को नागरिक उड़ानों के लिए उपलब्ध करवाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।

करीब सौ साल पहले 1930 के दशक में ही दरभंगा महाराज ने अपने उपयोग के लिए विमान लिया था। फिर 1940 के दशक में एक रनवे भी तैयार हो गया। सन 1950 में उन्होंने नागरिकों के लिए उड्डयन की व्यवस्था की थी।

इस काम के लिए द्वित्तीय विश्वयुद्ध के बाद “दरभंगा एविएशन” नाम की एक कंपनी की स्थापना भी की गई। इस कंपनी के पास सेना से खरीद लिए गए चार डगलस डीसी3 हवाई जहाज थे। इनमें से दो दुर्घटनाग्रस्त हो गए, एक को किसी निजी कंपनी को बेच दिया गया और एक भारतीय सेना ने ले लिया था। इस तरह 1950 में शुरू हुई इस कंपनी ने 1962 में काम करना बंद कर दिया।

फिर कुछ साल और बीते और बिहार की दशा कुछ और बिगड़ी। कुछ तो दरभंगा और उसके आस-पास के उत्तरी बिहार के जिलों के हर साल बाढ़-पीड़ित होने की वजह से आई और कुछ लालू के जंगल-राज के दौर के अपराधीकरण से।

पलायन चलता रहा, लेकिन लोग अब भी अपनी जड़ों से जुड़े थे और छुट्टियों में घर लौटते थे। आज भी पर्व-त्योहारों के समय किसी भी महानगर से बिहार की तरफ आने वाली ट्रेनों में तिल रखने की जगह नहीं होती। ऐसे में दरभंगा के लिए भी एक अदद एयरपोर्ट की माँग लगातार बढ़ती जा रही थी। समस्या ये थी कि केंद्र की कॉन्ग्रेसी सरकारों को जन सरोकारों से कोई लेना-देना नहीं था।

बिहार में जब नीतीश कुमार की सरकार आई, तो वो भाजपा के समर्थन से बनी सरकार थी। जब केंद्र में भी भाजपा की सरकार बनी तो आम आदमी के लिए दिल्ली तक अपनी आवाज़ पहुँचाना भी सुगम हुआ।

करीब तीन दशक से ऊपर से की जा रही दरभंगा एयरपोर्ट की माँग आखिर सुन ली गई और 2018 में नए एयरपोर्ट का शिलान्यास हो गया। इसके बावजूद लोगों को, पिछले अनुभवों के कारण, कम ही भरोसा था कि सचमुच कभी एयरपोर्ट बनेगा। लेकिन करीब दो वर्षों में एयरपोर्ट का काम पूरा हो चुका है और अब नवम्बर से यहाँ से स्पाइस जेट की तीन उड़ानें दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई जाएँगी।

बाकी मेरा विश्वास है कि स्थानीय नेताओं में इस काम का श्रेय लेने की होड़ मच चुकी होगी। वैसे जनता को पता तो है ही कि काम किसने किया है, इसलिए आसन्न चुनावों में वोट का स्वाद चखने के लिए भी नेताओं को तैयार रहना चाहिए।