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फिर जलील हुई ‘पत्रकार’ रोहिणी सिंह: UP पुलिस द्वारा महिला प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न के दावे को खुद पीड़िता ने नकारा

‘पत्रकार’ रोहिणी सिंह ने शुक्रवार (सितंबर 18, 2020) को ट्वीट करते हुए उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कर्मियों के हाथों महिला प्रदर्शनकारियों के यौन उत्पीड़न का दावा किया।

एक महिला प्रदर्शनकारी की एक तस्वीर शेयर करते हुए रोहिणी सिंह ने ट्वीट किया, “अगर आप एक माँ हैं तो इस तस्वीर को देखकर आपको गुस्सा आना चाहिए। एक पिता हैं तो चिंतित होना चाहिए। एक भाई हैं तो खून खौलना चाहिए। बेटियाँ घर से निकले तो बलात्कार, छेड़खानी जैसी घटनाएँ तो अब उत्तर प्रदेश में आम बात थी। पर अब पुलिस द्वारा उनके साथ ऐसा बर्ताव? ये ‘रामराज्य’ है?”

हालाँकि, रोहिणी सिंह ने जिस महिला प्रदर्शनकारी का फोटो शेयर करते हुए उत्पीड़न का दावा किया था, उसने खुद ही इसका खंडन करते हुए कहा कि यह सब गलतफहमी की वजह से हुआ।

Screengrab of the tweet by Rohini Singh

महिला प्रदर्शनकारी जानबूझकर उत्पीड़न के दावों का खंडन करती है

पॉपुलर सोशल मीडिया यूजर अंकुर सिंह द्वारा शेयर किए गए वीडियो में महिला प्रदर्शनकारी कहती है, मेरा नाम कांची सिंह है। आज लखनऊ विश्वविद्यालय के गेट नंबर एक पर हम सभी लोगों के साथ मिलकर प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान जैसे बाकी सभी लोगों को उठाकर पुलिस की गाड़ी में बैठा दिया, उसी तरह से मुझे भी बैठा दिया।

गलत पहचान का हवाला देते हुए, कांची सिंह ने स्पष्ट किया, “मेरे पहनावे के कारण पुलिस को थोड़ा सा भ्रम हो गया। उन्होंने मुझे लड़का समझ लिया और उठाकर गाड़ी में बैठा दिया।” रोहिणी सिंह द्वारा कथित रूप से पुलिस कर्मियों के हाथों यौन उत्पीड़न के दावों का खंडन करते हुए, उन्होंने जोर देकर कहा, “उन्होंने मेरे साथ कुछ भी नहीं किया। कुछ भी जानबूझकर नहीं किया गया था। उनकी ऐसी कोई मंशा नहीं थी। जो भी हुआ है, भ्रमवश हुआ है।”

UP पुलिस ने यौन उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया

पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ ने एक बयान में स्पष्ट किया, “हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि कानून व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को हटाना अत्यंत आवश्यक था। चूँकि भीड़ बहुत बड़ी थी, इसलिए उनके पहनावे व वेशभूषा के आधार पर महिला एवं पुरुष बीच भेद करना मुश्किल था। अत: भूलवश, पुलिस कर्मी द्वारा महिला प्रदर्शनकारी को धरना स्थल से पुरुष प्रदर्शनकारी समझकर हटाया गया। यहाँ तक कि खुद महिला प्रदर्शनकारी ने भी बताया कि कि ऐसा वेशभूषा के चलते भ्रमवश हुआ। पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ महिलाओं का सदैव सम्मान करती है और इस घटना पर खेद व्यक्त करती है।”

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है कि पत्रकार ने भ्रामक समाचारों के साथ भाजपा की राज्य सरकारों को निशाना बनाने की कोशिश की है। इससे पहले मई में, रोहिणी सिंह ने, ‘द वायर’ के लिए एक लेख लिखा था, जिसका शीर्षक “Behind Ahmedabad’s Ventilator Controversy” था। इसमें आरोप लगाया गया था कि नरेंद्र मोदी सरकार राजकोट स्थित एक फर्म से 5000 वेंटिलेटर खरीद रही है, जिस पर पहले ही अहमदाबाद के सबसे बड़े COVID-19 अस्पताल में घटिया साँस लेने वाली मशीनों की आपूर्ति का आरोप है।

रिपोर्ट का लब्बोलुआब ये था कि खराब वेंटिलेटर बनाने वाली कंपनी के प्रमोटर भाजपा नेताओं के करीबी हैं। हालाँकि, भारतीय प्रेस सूचना ब्यूरो ने द वायर की रोहिणी सिंह द्वारा लगाए गए झूठ और का संज्ञान लिया। रिपोर्ट के संज्ञान में आने के बाद पीआईबी ने फैक्ट चेक किया है। पीआईबी ने पत्रकार रोहिणी सिंह के इस दावे को खारिज कर दिया था कि अहमदाबाद सिविल अस्पताल में खराब पाए गए वेंटिलेटर घटिया और खरीदे गए थे।

पीआईबी ने बताया था कि गुजरात सरकार के अनुसार, जिन वेंटिलेटर्स को खराब बताया गया, वो खरीदे नहीं गए थे। असल में ये दान में दिए गए थे, जो आवश्यक चिकित्सा मानकों पर खरे उतरते थे।

‘प्रशासन ने हमें हमारे हाल पर छोड़ दिया है’: कोरोना संक्रमण का नया हॉटस्पॉट बना जोधपुर

देश भर में कोरोना महामारी का प्रकोप किसी से छिपा नहीं है। हर रोज संक्रमितों की संख्या आने के साथ एक नया रिकॉर्ड कायम हो रहा है। हर प्रदेश की कोशिश है कि इस महामारी से अपने राज्य को जल्द से जल्द मुक्त कराया जाए, मगर राजस्थान के आँकड़े और प्रशासन का रवैया कुछ और ही दर्शा रहा है। जयपुर और टोंक के बाद अब राजस्थान का एक और शहर संक्रमण का हॉटस्पॉट बनकर उभर रहा है। यह शहर है, जोधपुर।

जोधपुर में कोरोना संक्रमण के मामले न केवल रोज दोगुनी गति से बढ़ रहे हैं, बल्कि इसके कारण रोज बड़ी संख्या में लोगों की मौत भी हो रही है। शुक्रवार को जोधपुर में 100 नए मामले सामने आए। यह आँकड़ा प्रदेश में जयपुर के बाद सभी जिलों से सबसे ज्यादा है। 

प्रशासन की तरफ से दिखाई जा रही लापरवाहियों के कारण अब वहाँ की जनता ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाना शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि जोधपुर में हर दिन कोरोना से होने वाली मौत के आँकड़े बढ़ रहे हैं और प्रशासन की ओर से तब भी कोई प्रतिक्रिया नहीं है। मानो कुछ हो ही न रहा हो। लोग सोशल मीडिया पर लिखते हैं, “प्रशासन ने हमें हमारे हालात पर छोड़ दिया है। हम अब भगवान भरोसे हैं। आगे से वोट देने से पहले ध्यान जरूर दें।”

गौरतलब है कि जोधपुर की हालात एक ओर जहाँ दिन पर दिन दयनीय हो रही है, वहीं इस बीच दैनिक भास्कर की स्थानीय रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रशासन केवल प्रदेश में कोरोना से होने वाली मौतें ही नहीं छिपा रहा, बल्कि कोरोना से संक्रमित लोगों का आँकड़ा भी छिपा रहा है।

खबर में दावा किया गया है कि विभाग द्वारा जारी की गई स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक जोधपुर में कोरोना के 19,535 मामले आए हैं, जबकि स्टेट में केवल 16,098 ही दर्ज हैं। सितंबर के मात्र 17 दिनों की बात की जाए तो 6,640 पॉजिटिव केस मिले हैं, जबकि 109 ने इस महामारी से दम तोड़ा है।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट

हैरानी की बात यह है कि पूरे अगस्त भर में शहर से उतने मामले सामने नहीं सामने आए थे, जितने सितंबर के पहले पखवाड़े में देखने को मिले हैं। 31 अगस्त तक शहर में कोरोना संक्रमितों का आँकड़ा 6,045 था, जो सितंबर के अभी तक के आँकड़ों से भी कम है। 1-17 अगस्त तक के बीच में केवल 26 मौतें हुईं थी और सितंबर आते-आते ये दर 4 गुना बढ़ गई और जान गॅंवाने वालों का आँकड़ा सितंबर में 109 तक पहुँच गया।

पूरे देश में कोरोना की बढ़ती रफ्तार देखते हुए परेशानी की बात यह नहीं है कि राजस्थान के इस शहर पर क्यों महामारी का प्रसार बढ़ रहा है, बल्कि असली चिंता इस बात की है कि इतने गंभीर हालात होने के बाद प्रशासन की नींद नहीं टूट रही। एक दिन में जिले से 600-800 मरीज मिलने के बावजूद भी सड़कों पर भीड़भाड़ को और छोटे- मोटे आयोजनों को होने से नहीं रोका जा रहा। गुरुवार को इन्हीं लापरवाहियों के कारण एक 8 माह का नवजात भी संक्रमित पाया गया था।

पूरे प्रदेश की यदि बात करें तो भास्कर की रिपोर्ट बताती है कि राज्य में एक ही विभाग दो-दो तरह की रिपोर्ट जारी कर रहा है। स्थानीय स्तर पर जारी हेल्थ विभाग की रिपोर्ट के आँकड़े कहते हैं कि प्रदेश में कोरोना से कुल 1820 मौतें हो चुकी हैं। वहीं राज्य स्तर पर जयपुर से हेल्थ विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक अब तक कुल 1293 लोगों ने ही कोरोना से दम तोड़ा है।

यह रिपोर्ट सवाल उठाती है कि आखिर 527 मौतों का सच क्यों छिपाया जा रहा है? जबकि कोरोना छिपाने की नहीं, बताने की बीमारी है। यही नहीं, मरीजों की संख्या के आँकड़ों में भी स्थानीय रिपोर्ट और स्टेट रिपोर्ट में बड़ा अंतर है। स्थानीय प्रशासन की रिपोर्टों के हिसाब से प्रदेश में अब तक 1,30,715 लोग संक्रमित हो चुके हैं, लेकिन स्टेट रिपोर्ट में यह संख्या 1,09,473 ही है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों जब दैनिक भास्कर ने कोटा में संक्रमित आँकड़ों को लेकर स्थानीय व स्टेट रिपोर्ट में अंतर को लेकर सवाल उठाया तो कोटा, जयपुर, अजमेर और भरतपुर में स्थानीय स्तर पर रिपोर्ट जारी करने पर ही बैन लगा दिया गया था।

धर्मांतरण की आड़ में महिला उत्पीड़न और लव जिहाद पर योगी सरकार का शिकंजा: सख्त अध्यादेश लाने की तैयारी

धर्मांतरण की आड़ में महिला उत्पीड़न और लव जिहाद के मामलों योगी सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। योगी सरकार लव जिहाद के बढ़ते मामलों पर रोक लगाने के लिए अध्यादेश ला सकती है।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया, “अन्य राज्यों के धर्मांतरण के खिलाफ बने कानूनों और अधिनियमों की स्टडी की जा रही है। इसके बाद धर्मांतरण को लेकर उत्तर प्रदेश का अपना कानून बनाया जाएगा।”

धर्म परिवर्तन पर अंकुश लगाने की कार्रवाई का श्रेय राज्य भर में विशेष रूप से कानपुर से आए लव जिहाद के हालिया मामलों को दिया जा सकता है, जहाँ लड़कियों को शादी के बहाने इस्लाम धर्म में परिवर्तित किया जा रहा है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भी अपने लखनऊ प्रवास के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। अपने दो दिन की लखनऊ यात्रा के दौरान उन्होंने लव जिहाद के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई थी।

गौरतलब है कि वर्तमान में 8 राज्यों में धर्मांतरण के खिलाफ कानून मौजूद हैं। इनमें अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और उत्तराखंड शामिल हैं। सबसे पहले 1967 में ओडिशा द्वारा कानून बनाया गया था। इसके बाद 1968 में मध्य प्रदेश में धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाया गया। कानून विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश धर्मांतरण विरोधी कानून वाले राज्यों की सूची में नौवें स्थान पर हो सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ऐंटी-कन्वर्जन लॉज़ किसी भी व्यक्ति को सीधे या जबरन या धोखाधड़ी या खरीद और प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण करने से रोकते हैं। यूपी का कानून अन्य राज्यों द्वारा लागू किए गए कानूनों के समान होगा, जो धर्मांतरण के प्रकिया को सख्त और जटिल बनाएगा।

कानपुर पुलिस ने इस हफ्ते की शुरुआत में शादी के बहाने की गई जबरन धर्मांतरण की बढ़ती संख्या की जाँच के लिए आठ सदस्यीय विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया था। पिछले एक महीने में एक ही जिले से ‘लव जिहाद’ के 11 मामले प्रकाश में आए थे।

एक तरफ जहाँ पूरे राज्य में लव जिहाद के मामले सामने आए हैं, वहीं उत्तर प्रदेश का कानपुर संगठित लव जिहाद मामलों का केंद्र बन गया है। शादी के बहाने शहर में रिपोर्ट की गई कई महिलाओं के जबरन धर्म परिवर्तन के कई मामले सामने आए हैं। जिससे शहर में हिंदू महिलाओं को फँसाने के लिए इसके पीछे किसी गिरोह की सोची समझी चाल पर संदेह उत्पन्न हो गया है।

बहुप्रचारित शालिनी यादव मामले के बाद ‘लव जिहाद’ के कानपुर से कई मामले आए है। जिसमें महज पिछले 2 महीने में कानपुर इलाके में घर से 5 लड़कियाँ मुस्लिम युवकों के साथ भागी है। कानपुर के जूही कॉलनी में चल रहे लव जिहाद का संगठित नेक्सस या ट्रेनिंग इन्हीं भागी लड़कियों के आधार पर आप समझ सकते हैं।

घर से भागी शालिनी यादव – आरोपित मोहम्मद फैसल – रहने वाला जूही कॉलनी का, कल्याणपुर के आवास विकास निवासी दो सगी बहनें भागीं – आरोपित शाहरुख (पिता का नाम कमाल) और शाहरुख (पिता का नाम खलील) – रहने वाला दोनों जूही कॉलनी का, पनकी रतनपुर कॉलनी निवासी युवती व उसकी छोटी बहन – आरोपित मो. मोसीन, छोटी बहन सतर्क हुई तो मामला खुल गया – रहने वाला जूही कॉलनी का।

मरने से पहले दिशा सालियान को टॉर्चर किया गया था? दो तरह के निशान मिलने का दावा, मंगेतर का भी पता चला

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत और उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत का रहस्य दिनोंदिन गहराता ही जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों में फोरेंसिक एक्सपर्ट के हवाले से दिशा के शरीर पर दो तरह के निशान मिलने की बात कही गई है। साथ ही उनके मंगेतर रोहन राय का पता चलने और सीबीआई द्वारा जल्द समन भेजे जाने की बात भी कही जा रही है।

सुशांत की मौत से करीब एक हफ्ते पहले 8 जून को एक बिल्डिंग की 14वीं मंजिल से गिरने से दिशा की मौत हो गई थी। मुंबई पुलिस ने इसे सुसाइड बताया था। लेकिन अब एक फोरेंसिक विशेषज्ञ ने दावा किया है कि दिशा के शव पर दो तरह के चोट के निशान थे। एक गिरने से पहले और दूसरा गिरने के बाद के।

रिपब्लिक टीवी पर एक बहस के दौरान फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. दिनेश राव ने कहा, “दिशा के शव पर चोट के पैटर्न को देखकर मैं इसमें एक अहम जानकारी जोड़ना चाहता हूँ। मैंने निश्चित तौर पर दो तरह की चोट के निशान देखे थे। एक चोट ऊँचाई से गिरने की वजह से आई थी और दूसरी गिरने से पहले की है, जिसकी जाँच होनी चाहिए।”

विशेषज्ञ ने यह भी कहा कि या तो दिशा के साथ मारपीट की गई या उन्हें प्रताड़ित किया गया था। या यह भी ही सकता है कि उन्होंने हमले से बचने की कोशिश की हो जो उनकी मौत की वजह बन गई हो।

डॉ. दिनेश राव प्रोफेसर और ऑक्सफोर्ड मेडिकल कॉलेज, अस्पताल और अनुसंधान केंद्र, बेंगलुरु में फोरेंसिक चिकित्सा विभाग के प्रमुख रहे हैं। वह किंग्स्टन, जमैका में निदेशक और मुख्य फोरेंसिक पैथोलोजिस्ट रहे हैं।

गौरतलब है कि 8 और 9 जून की मध्यरात्रि को मलाड की 14 वीं मंजिल से गिरने की वजह से दिशा की मौत हो गई थी और मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया था। वहीं सुशांत 14 जून को अपने बांद्रा स्थित आवास पर रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाए गए थे। वर्तमान में तीन एजेंसियाँ- सीबीआई, ईडी और एनसीबी दिवंगत अभिनेता की मौत के मामले से संबंधित विभिन्न एंगल की जाँच कर रही हैं।

गौरतलब है कुछ दिन पहले, भाजपा नेता नितेश राणे ने दिशा सालियान की मौत पर संदेह जताया था। राणे ने कहा था कि दिशा की मौत आत्महत्या नहीं थी और उनके मंगेतर रोहन राय को सामने आकर पूरा सच बताना चाहिए। रिपब्लिक टीवी के अनुसार शीर्ष जॉंच एजेंसियॉं रोहन पर नजर रख रही हैं और वे जॉंच के दायरे में हैं। राणे ने दावा किया था कि उन्होंने दिशा की मौत के 15 दिन बाद रोहन से बात की थी और उन्हें सब पता है कि 8 जून को दिशा की मौत कैसे हुई।

कर्नाटक: हिंदू महिला को अश्लील मेसेज भेजने वाले मोहम्मद मुनासिर को युवती के परिजनों ने पीटा, सभी गिरफ्तार

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक महिला सड़क के किनारे स्कूटी खड़ी करके किसी का इंतजार करती नजर आती है। जल्द ही एक युवक उसके पास आता है। तभी अचानक से महिला की जान-पहचान वाले कुछ वहाँ पर आते हैं और उसकी पिटाई करते लगते हैं। महिला भी अपनी चप्पल निकाल कर उसकी पिटाई करती नजर आती है।

जानकारी के मुताबिक यह घटना कथित तौर पर गुरुवार (17 सितंबर, 2020) को कर्नाटक के कोडागु जिले के मदिकेरी में हुई थी, जहाँ एक हिंदू महिला ने सोशल मीडिया पर उसे अश्लील संदेश भेजने के लिए एक मुस्लिम युवक की कथित तौर पर पिटाई की थी।

एक स्थानीय समाचार पत्र, कन्नड़ प्रभा के अनुसार, पुलिस ने मोहम्मद मुनासिर को उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया है। मुनासिर पर हिंदू महिला ने उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसके अलावा, एक जवाबी शिकायत के आधार पर, युवक के साथ मारपीट करने के लिए महिला और उसके 4 रिश्तेदारों को भी गिरफ्तार किया गया है।

दरअसल, मोहम्मद मुनासिर नाम का एक मुस्लिम युवक कर्नाटक के मदिकेरी में एक हिंदू महिला का उत्पीड़न कर रहा था, उसे अश्लील संदेश भेज रहा था। लगातार हो रही बदतमीजी से तंग आकर महिला ने युवक को सबक सिखाने की सोची।

महिला ने उससे प्यारी-प्यारी बातें करके गुरुवार को आरटीओ कार्यालय के पास मिलने की बात कही, जिसके लिए वह तुरंत राजी हो गया। जब युवक उससे मिलने गया, तो महिला वहाँ पर पहले से अपने रिश्तेदारों के साथ इंतजार कर रही थी। मोहम्मद मुनासिर के आते ही उसे पीटना शुरू कर दिया। वीडियो में गुस्साई महिला चप्पलों से युवक की पिटाई करती नजर आ रही है।

पीड़िता द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद मडिकेरी पुलिस ने मोहम्मद मुनासिर को गिरफ्तार किया। इस बीच, आरोपियों द्वारा एक काउंटर-शिकायत भी दर्ज की गई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि महिला के परिवार वालों ने उसकी पिटाई की थी। उसकी शिकायत के आधार पर, मदिकेरी पुलिस ने मामले में महिला और चार अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया।

राहुल ‘पलटू’ गॉंधी: घोषणा पत्र में जो किया वादा, कृषि बिल में उसका ही कर रहे विरोध

गुरुवार (सितंबर 17, 2020) को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने संसद में देश में कृषि क्षेत्रों में सुधार से संबंधित तीन बिल पेश किए जाने को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ तीखा हमला किया। फिलहाल छुट्टियों पर चल रहे कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने ट्विटर पर कहा कि मोदी सरकार के इन ‘काले कानूनों’ को किसानों और खेतिहर मजदूरों आर्थिक रूप से शोषित करने के लिए पेश किया जा रहा है।

राहुल गाँधी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “मोदी जी ने किसानों की आय दुगनी करने का वादा किया था। लेकिन मोदी सरकार के ‘काले’ क़ानून किसान-खेतिहर मज़दूर का आर्थिक शोषण करने के लिए बनाए जा रहे हैं। ये ‘ज़मींदारी’ का नया रूप है और मोदी जी के कुछ ‘मित्र’ नए भारत के ‘जमींदार’ होंगे। कृषि मंडी हटी, देश की खाद्य सुरक्षा मिटी।”

दिलचस्प बात यह है कि इस हफ्ते की शुरुआत में, राहुल गाँधी ने मोदी सरकार के खिलाफ इसी तरह का हमला करते हुए दावा किया था कि केंद्र सरकार के तीन बिल किसान और खेतिहर मजदूरों पर एक ‘घातक प्रहार’ है।

फार्म सेक्टर और APMC सुधार कॉन्ग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र का हिस्सा थे

हालाँकि, संसद में पेश किए गए तीन कृषि सुधारों के मुद्दे पर मोदी सरकार के खिलाफ कॉन्ग्रेस पार्टी के विरोध ने फिर से उनके पाखंड को उजागर कर दिया है। जारी संसद सत्र में मोदी सरकार ने तीन बिल पेश किए हैं – किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल, मूल्य आश्वासन तथा कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता बिल और आवश्यक वस्तु (संशोधन) बिल। ये तीनों बिल कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार लाने के लिए लाया गया है।

बता दें कि जो कॉन्ग्रेस पार्टी इन दिनों बिल का विरोध कर रही है, वह खुद भी कभी इसी तरह के सुधार की प्रस्तावक थी, जो वर्तमान में मोदी सरकार द्वारा पेश किए जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि 2019 में राहुल गाँधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में इन सुधारों की घोषणा की थी।

2019 के लोकसभा चुनावों में, कॉन्ग्रेस पार्टी ने एक चुनावी घोषणा पत्र जारी किया था, जिसमें यह स्पष्ट रूप से कहा गया था कि कॉन्ग्रेस पार्टी यदि कभी सत्ता में आती है तो वह कृषि उपज मंडी समितियों के अधिनियम में संशोधन करेगी, जिससे कि कृषि उपज के निर्यात और अंतर्राज्यीय व्यापार पर लगे सभी प्रतिबन्ध समाप्त हो जाएँगे।

Image Source: Congress Manifesto 2019/ DAAM – AGRICULTURE, FARMERS, AND FARM LABOUR

मोदी सरकार ने जिन तीन बिल को आगे बढ़ाया है उसमें से पहले दो बिल- किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल एवं मूल्य आश्वासन तथा कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता बिल में APMC एक्ट में सुधार की बात कही गई है। फिलहाल मौजूदा व्यवस्था के तहत APMC एक्ट के जरिए किसानों को अपनी फसल मंडी में बेचने के लिए बाध्य होना पड़ता है लेकिन सरकार ने जो सुधार किया है उसके तहत किसान कहीं भी अपनी फसल बेच सकेंगे। APMC में इस तरह के सुधार से किसानों को कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा किए गए वादे के अनुसार खेत की उपज को बेचना आसान हो गया है।

PRS इंडिया के अनुसार पहला विधेयक विभिन्न राज्य कृषि उपज बाजार कानूनों के तहत अधिसूचित बाजारों के बाहर किसानों की उपज के अवरोध मुक्त व्यापार के लिए प्रदान करना चाहता है। वहीं दूसरा बिल APMC बाजारों के भौतिक परिसर से परे किसानों की उपज के अंत:-राज्य और अंतर-राज्य व्यापार की अनुमति देता है।

इसी तरह, अपने चुनावी घोषणापत्र में, कॉन्ग्रेस पार्टी ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 को बदलने का भी वादा किया था। कॉन्ग्रेस ने अपने घोषणापत्र में कहा था कि आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 को बदलकर आज की जरूरतों और संदर्भों के हिसाब से नए कानून बनाए जाएँगे, जो विशेष आर्थिक परिस्थितियों में ही लागू किए जा सकेंगे।

Image Source: Congress Manifesto 2019/ DAAM – AGRICULTURE, FARMERS, AND FARM LABOUR

हालाँकि, कॉन्ग्रेस पार्टी को लगता है कि मोदी सरकार एक ऐसा कानून ला रही है जो आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की जगह लेगा। मोदी सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में संशोधन के लिए आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक को शामिल किया है। नया विधेयक केंद्र सरकार को कुछ वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण, व्यापार और वाणिज्य को नियंत्रित करने का अधिकार देता है।

हालाँकि यह समझ से परे है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी क्यों उन्हीं सुधारों का विरोध कर रहे हैं, जिनका वादा बहुत पहले उनकी ही पार्टी ने किया था।

‘बार डांसर’ शब्द से बौखलाए कॉन्ग्रेस के पूर्व मंत्री, पत्रकार अंजना ओम कश्यप को बताया ‘बेशर्म’

कॉन्ग्रेस नेता और हरियाणा के पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव सोशल मीडिया में पत्रकार अंजना ओम कश्यप के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए देखे गए हैं। कॉन्ग्रेस नेता ने जिस अकाउंट के पोस्ट को देखते हुए एक महिला पत्रकार के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया असल में वह अंजना के नाम पर बना एक पैरोडी अकाउंट है।

पैरोडी अकाउंट पर कॉन्ग्रेस नेता की प्रतिक्रिया

अंजना ओम कश्यप की फोटो और नाम वाले इस पैरोडी अकाउंट से ट्वीट किया गया कि आज “नेशनल बार डांसर डे” है। इस ट्वीट में कॉन्ग्रेस नेता ‘बार डांसर’ शब्द को देख न जाने क्यों बौखला गए।

बार डांसर शब्द से परेशान अजय सिंह यादव ने यह भी नहीं देखा कि पैरोडी अकाउंट ने खुद अपने बॉयो में इस बात का उल्लेख किया है कि यह अंजना ओम कश्यप का पैरोडी अकाउंट है। इस ट्विटर हैंडल के केवल 60 फॉलोवर्स ही हैं। पर कॉन्ग्रेस नेता ने गुस्से में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आजतक की पत्रकार अंजना ओम कश्यप ने बेशर्मी की सारी हदें पार कर दी हैं।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कॉन्ग्रेस नेता ‘बार डांसर’ शब्द से क्यों इतना परेशान हो गए। साथ ही उन्होंने ऐसा क्यों सोचा कि बार डांसर शब्द का इस्तेमाल करना बेशर्मी होता है।

नेशनल बार डांसर दिवस को ट्रेंड करने के लिए कहने वाले पैरोडी अकाउंट के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मंत्री ने कहा, “बेशर्मी की सारी हदें पार करने वाली अंजना ओम मोदी गोदी मीडिया की सरगना है।”

बता दें, गोदी मीडिया एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल कॉन्ग्रेस समर्थक मीडिया और विपक्षी नेताओं द्वारा उन पत्रकारों और मीडिया घरानों के खिलाफ किया जाता है जो उनकी मर्जी के हिसाब से नहीं चलते हैं।

सिर्फ यही नहीं कॉन्ग्रेस नेता को अपने पिछले ट्वीट में रिपब्लिक टीवी के अर्नब गोस्वामी के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए भी देखा गया था। इसी पोस्ट में उन्होंने एनडीटीवी का महिमामंडन करते हुए चैनल के एक अभियान की छवि साझा की थी।

अर्नब गोस्वामी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग और एनडीटीवी का महिमामंडन करते हुए कॉन्ग्रेस नेता का ट्वीट

यह खबर लिखी जाने तक अजय सिंह यादव ने पैरोडी अकाउंट के ट्वीट के जवाब में पत्रकार अंजना ओम कश्यप के खिलाफ किए गए अपमानजनक ट्वीट को डिलीट नहीं किया था। कई ट्विटर यूजर ने उनको इस बारे में बताया भी, लेकिन फिर भी ये ट्वीट उनके आधिकारिक एकाउंट पर बना हुआ था।

कृषि बिल के विरोधी बिचौलियों के साथी: बिहार का 86 साल पुराना सपना पूरा कर बोले PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (सितंबर 18, 2020) बिहार का 86 साल पुराना सपना पूरा करते हुए राष्ट्र को कोसी रेल महासेतु समर्पित किया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 12 रेल परियोजनाओं का शुभारंभ किया।

इस दौरान उन्होंने कृषि बिल के फायदे बताते हुए कहा कि जो इसका विरोध कर रहे हैं वे किसानों को धोखा दे रहे हैं। ऐसे लोग बिचौलियों के साथ खड़े हैं और बिल को किसान विरोधी बताकर दुष्प्रचार कर रहे हैं।

इससे पहले पीएम मोदी ने कहा, “आज बिहार में रेल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में नया इतिहास रचा गया है। अब वो दिन ज्यादा दूर नहीं जब बिहार के लोगों को 300 किमी की ये यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। 300 किमी की ये यात्रा सिर्फ 22 किमी में सिमट जाएगी।”

उन्होंने कहा, “बिहार में गंगाजी, कोसी, सोन नदियों के विस्तार के कारण, बिहार के अनेक हिस्से एक-दूसरे से कटे रहे हैं। नदियों के फैलाव वजह से होने वाला लंबा सफर बिहार के लोगों की एक समस्या रहा है। बिहार की इस बड़ी समस्या के समाधान के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं।”

4 वर्ष पहले शुरू किए गए महासेतु कार्यों का जिक्र करते हुए पीएम बोले, “4 वर्ष पहले उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले दो महासेतु, एक पटना में और दूसरा मुंगेर में शुरु किए गए थे। इन दोनों रेल पुलों के चालू हो जाने से उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच, लोगों का आना-जाना और आसान हुआ है।”

86 साल पहले एक भूकंप के कारण मिथिला और कोसी क्षेत्र अलग हो गए थे। ऐसे में आज महासेतु के जरिए इनके जुड़ने पर प्रधानमंत्री ने कहा, “करीब साढ़े 8 दशक पहले भूकंप की एक भीषण आपदा ने मिथिला और कोसी क्षेत्र को अलग-थलग कर दिया था। आज ये संयोग ही है कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के बीच इन दोनों को आपस में जोड़ा जा रहा है।”

उन्होंने कहा, आज कोसी महासेतु होते हुए सुपौल-आसनपुर कुपहा के बीच ट्रेन सेवा शुरू होने से सुपौल, अररिया और सहरसा जिले के लोगों को बहुत लाभ होगा। यही नहीं, इससे नॉर्थ ईस्ट के साथियों के लिए एक वैकल्पिक रेलमार्ग भी उपलब्ध हो जाएगा।

पीएम मोदी ने बताया, आज भारतीय रेल के ब्रॉडगेज रेल नेटवर्क को मानवरहित फाटकों से मुक्त कर, पहले से कहीं अधिक सुरक्षित बनाया जा चुका है। आज आत्मनिर्भरता और आधुनिकता की प्रतीक, वंदे भारत जैसी भारत में बनी ट्रेनें रेल नेटवर्क का हिस्सा होती जा रही हैं। बीते 6 साल से भारतीय रेल को नए भारत की आकांक्षाओं और आत्मनिर्भर भारत की अपेक्षाओं के अनुरूप ढालने का प्रयास किया जा रहा है। आज भारतीय रेल, पहले से कहीं अधिक स्वच्छ है।

रेलवे के आधुनिकीकरण पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसका लाभ बिहार और पूर्वी भारत को मिल रहा है। Make In India को बढ़ावा देने के लिए मधेपुरा में इलेक्ट्रिक लोको फैक्ट्री और मढ़ौरा में डीजल लोको फ़ैक्ट्री स्थापित की गई हैं। इन परियोजनाओं से बिहार में लगभग 44 हजार करोड़ रुपए का निवेश हुआ है।

प्रदेश में सरकार की प्राथमिकताओं का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि बिहार में जिस तरह की परिस्थितियाँ रहीं हैं, उसमें रेलवे लोगों के आने-जाने का बहुत बड़ा साधन रही है। ऐसे में बिहार में रेलवे की स्थिति को सुधारना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक रहा है। 2014 के पहले के 5 सालों में बिहार में सिर्फ सवा तीन सौ किलोमीटर नई रेल लाइन शुरू हुई थी। 2014 के बाद के 5 सालों में बिहार में लगभग 700 किलोमीटर रेल लाइन कमीशन हो चुकी हैं।

परियोजनाओं का शुभारंभ करते हुए उन्होंने कोरोना के समय में रेलवे के काम की प्रशंसा की और लाखों कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देश के लाखों श्रमिकों को श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के माध्यम से सुरक्षित घर पहुँचाने के लिए रेलवे ने दिन-रात एक कर दिया था।

बिहार में नीतीश सरकार की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि उनकी सरकार से पहले प्रदेश में एक दो मेडिकल कॉलेज हुआ करते थे। पर, आज बिहार में 15 से ज्यादा मेडिकल कॉलेज हैं, जिसमें से अनेक बीते कुछ वर्षों में ही बनाए गए हैं। कुछ दिन पहले ही बिहार में एक नए AIIMS की भी स्वीकृति दे दी गई है।

किसानों को भी दी बधाई

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए पीएम ने कहा, “मैं देश के किसानों को इन विधेयकों के लिए बधाई देता हूँ। किसान और ग्राहक के बीच जो बिचौलिए होते हैं, जो किसानों की कमाई का बड़ा हिस्सा खुद ले लेते हैं, उनसे बचाने के लिए ये विधेयक लाए जाने बहुत आवश्यक थे। ये विधेयक किसानों के लिए रक्षा कवच बनकर आए हैं। लेकिन कुछ लोग जो दशकों तक सत्ता में रहे हैं, देश पर राज किया है, वो लोग किसानों को इस विषय पर भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं, किसानों से झूठ बोल रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “चुनाव के समय किसानों को लुभाने के लिए ये बड़ी-बड़ी बातें करते थे, लिखित में करते थे, अपने घोषणा पत्र में डालते थे और चुनाव के बाद भूल जाते थे। आज जब वही चीजें भाजपा-एनडीए सरकार कर रही है, तो ये भाँति-भाँति के भ्रम फैला रहे हैं।”

उन्होंने आगे बताया, “अब ये दुष्प्रचार किया जा रहा है कि सरकार के द्वारा किसानों को MSP का लाभ नहीं दिया जाएगा। ये भी मनगढ़ंत बातें कही जा रही हैं कि किसानों से धान-गेहूँ इत्यादि की खरीद सरकार द्वारा नहीं की जाएगी। ये सरासर झूठ है, गलत है, किसानों को धोखा है। हमारी सरकार किसानों को MSP के माध्यम से उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। पहले भी थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे। सरकारी खरीद भी पहले की तरह जारी रहेगी।”

पीएम ने कहा, “कोई भी व्यक्ति अपना उत्पाद, दुनिया में कहीं भी बेच सकता है, जहाँ चाहे वहाँ बेच सकता है। लेकिन केवल किसान भाई-बहनों को इस अधिकार से वंचित रखा गया था। अब नए प्रावधान लागू होने के कारण, किसान अपनी फसल को देश के किसी भी बाजार में, अपनी मनचाही कीमत पर बेच सकेगा।”

‘केवल हिंदुओं के घर पर बुलडोजर चलाया गया’: बहावलपुर के बाद उमरकोट में घर जमींदोज किए गए

पाकिस्तानी में इस्लामी कट्टरपंथ के बढ़ते वर्चस्व के साथ ही धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदुओं की स्थिति दिन प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है। हिंदू लड़कियों का अपहरण करने और उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने की कई रिपोर्टें हैं।

इसके अलावा, हिंदू मंदिरों पर हमले किए जाने और हिंदू घरों को इमरान सरकार के मौन समर्थन के साथ बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किए जाने के कई मामले सामने आए हैं। हाल ही में इस तरह की एक और खबर सामने आई है, जिसमें आरोप लगाया जा रहा है कि पाकिस्तानी सरकार अब सिंध के उमरकोट जिले में मुख्य रूप से हिंदुओं के घरों पर बुलडोजर चला रही है।

पाकिस्तानी लेखक और पत्रकार राहत ऑस्टिन ने ट्विटर पर घटना के दो वीडियो जारी किए हैं। राहत ने कई घरों पर बुलडोज़र चलने का वीडियो पोस्ट किया और कहा कि हाल ही में आई बाढ़ से पाकिस्तान की दूसरे धर्मों की आबादी बुरी तरह प्रभावित हुई है, लेकिन अब  उमरकोट के चोर में हिंदुओं के घरों पर बुलडोज़र चलाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “हाल ही में आई बाढ़ ने पाकिस्तान में दूसरे धर्म वालों के लिए और अधिक बुरी स्थिति उत्पन्न कर दी है। वे न केवल सरकार और गैर सरकारी संगठनों द्वारा भोजन और राहत से वंचित हैं, बल्कि इस वीडियो में सिंध-पाकिस्तान के उमरकोट के चोर में हिंदुओं के घरों पर बुलडोजर चलाए गए हैं। कोरोना लॉकडाउन के दौरान लोगों को इस्लाम में परिवर्तित करने के लिए इसी तरह के हथकंडों का इस्तेमाल किया गया था।”

उन्होंने बाद में एक और वीडियो पोस्ट किया, जिसमें एक व्यक्ति को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “केवल हिंदुओं के घरों पर बुलडोजर चलाया गया है।”

राहत ने यह भी कहा है कि हिंदुओं के घरों को गिराने जैसे हथकंडों का इस्तेमाल उन्हें इस्लाम में परिवर्तित करने के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा, “वे पहले से ही हाल की बाढ़ से प्रभावित हैं, दूसरे धर्म वालों को न केवल राशन और राहत देने से मना कर दिया गया, बल्कि उनके जीवन को और अधिक दुखी करने के लिए उनके घरों को ध्वस्त कर दिया गया। ऐसी चालों का उपयोग धर्मांतरणों के लिए किया जाता है।”

गौरतलब है कि इससे पहले मई में पाकिस्तान में सरकार के इशारे पर हिंदुओं की बस्ती उजाड़ दी गई थी। बहावलपुर में इमरान सरकार के मंत्री के नेतृत्व में हिंदुओं के घर जमीदोंज कर दिए गए थे। पाकिस्तान के गृह मंत्री तारिक बशीर चीमा की निगरानी में चिलचिलाती गर्मी में अल्‍पसंख्‍यक हिंदुओं के घरों को बुलडोजर से गिरवा दिया गया था।

चिलचिलाती धूप में अल्‍पसंख्‍यक हिंदुओं के परिवारों के महिला पुरुष, बच्‍चे और बुजुर्ग चिल्लाते और दया की याचना करते रहे, लेकिन इमरान सरकार के मंत्रियों का उनके प्रति दिल नहीं पसीजा और इन सभी परिवारों के सामने ही उनका घर चंद मिनटों में गिराकर मलबे में तब्दील कर दिया गया था। इन सभी का आशियाना मलबे के नीचे दब गया और ये परिवार आँसू बहाते देखते रह गए।

ये मंजर बेहद दर्दनाक था जब बुलडोजर लोगों के घरों को बेरहमी से तोड़ रहे थे और महिलाएँ, पुरुष और बच्चे रहम की भीख माँग रहे थे। हिंदुओं के घरों पर बुलडोजर चलने की दर्दनाक तस्वीरें देख हर कोई दहल गया। भारत ने मंगलवार (जून 9, 2020) को पाकिस्तान के समक्ष इस सम्बन्ध में कड़ा विरोध दर्ज कराया था। 

इसके साथ ही पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का धार्मिक उत्पीड़न जारी है। इस साल जनवरी में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू लड़की भारती बाई कुमारी का दिनदहाड़े उसकी ही शादी के मंडप से अगवा कर लिया गया।

लड़की के पिता किशोर दास ने बताया था कि जिस समय उनकी बेटी को किडनैप किया गया था, उस वक्त उसकी शादी की रस्में निभाई जा रहीं थी। लेकिन, तभी वहाँ शाहरूख गुल नाम का युवक अपने कुछ साथियों और पुलिसवालों के साथ आया और दिन दहाड़े उनकी बिटिया को अगवा कर ले गया। बाद में भारती के इस्लाम धर्म में परिवर्तन और शाहरुख गुल से शादी के दस्तावेज के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी।

उनके लिए धर्म अफीम है, मजहब नहीं: बेगूसराय में निपटा ‘लफंगा’ अब अपनों के गेम से चित

राजनीति बड़ी कुत्ती चीज़ है!

ऐसा हम नहीं कहते, ऐसा कई राजनेता भी व्यक्तिगत बातचीत में स्वीकार लेंगे। राजनीति को बुरा इसलिए माना जाता है, क्योंकि इसमें आप अपने घोषित शत्रुओं और प्रतिद्वंदियों से ही प्रतिस्पर्धा नहीं करते। आपके मित्रों से भी आपको आगे रहना पड़ता है।

प्रबंधन (मैनेजमेंट) में कभी-कभी सिखाया जाता है कि आप अपने मातहतों से ही सम्बन्ध नहीं बनाते, आपके वरिष्ठों से आपके सम्बन्ध कैसे हैं, इस पर भी काफी कुछ निर्भर करता है। जैसे मैनेजमेंट सिर्फ ऊपर से नीचे की तरफ नहीं, नीचे से ऊपर की तरफ भी चलता है, राजनीति में स्थिति उससे भी बुरी हो जाती है।

राजनीति में आपको अपने सामानांतर वाले संबंधों का भी ध्यान रखना पड़ता है। अफ़सोस के साथ कहा जा सकता है कि ऐसे विषयों पर भी हिन्दी साहित्य में रचनाएँ नहीं बनीं। हिन्दी लिखने वाले तथाकथित बुद्धिपिशाचों की इतनी हिम्मत ही नहीं थी कि ऐसे विषय पर लिखते। जो कहीं आप थोड़े पढ़े-लिखे हैं तो अंग्रेजी में इस विषय पर ‘टीम ऑफ़ राइवल्स’ (https://amzn.to/35MouGz) लिखी गई है। ये अब्राहम लिंकन के मंत्रिमंडल में शामिल प्रतिस्पर्धियों पर किताब है। एक-दूसरे से शत्रुता जैसी प्रतिस्पर्धा रखने वालों के साथ मिलकर अब्राहम लिंकन ने मंत्रिमंडल (कैबिनेट) कैसे चलाया, उस विषय पर ये मोटी सी (करीब नौ सौ पन्नों की) किताब देखी जा सकती है।

वापस भारत पर आएँ तो यहाँ की राजनीति में भी ऐसा होता रहता है। पिछले लोकसभा चुनावों के दौर में जो एक नाम बड़ा उछला था वो एक वामपंथी पोस्टर बॉय का था। बिहार की भूमिहार जाति से सम्बन्ध रखने वाले इस तथाकथित नेता के लिए बॉलीवुड से कई हस्तियाँ भी प्रचार को बेगूसराय में उतर आईं थी। उसके स्वजातीय ‘आत्मनिर्भर’ सम्बन्धियों (जैसे स्वरा भास्कर) जैसों के प्रचार का भी उसे कोई फायदा नहीं हुआ। वैसे तो उसके चुनाव प्रचार पर नजर रखने वाले उसकी विचारधारा की ओर झुकाव रखने वाले कई लोग (जैसे राहुल पंडिता) भी वहॉं गए, मगर जब नतीजे आए तो पता चला कि ये स्त्रियों के सामने अश्लील हरकतें करने वाला कोई पंचायत चुनाव जीतने लायक भी नहीं है।

जाहिर है ऐसे में आयातित विचारधारा को नए चेहरों की जरूरत पड़ गई। पुराना नाम नहीं चला तो कोई नया नाम निकालो! ऐसे में ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ ने उसी कुकृत्य से कुख्यात हुए एक दूसरे चेहरे को सामने रखना शुरू कर दिया। जिन्हें वो दौर याद होगा उन्हें पता होगा कि ये वो पहली मुहिम थी, जिसमें वामपंथी टुकड़ाखोरों ने भारत के तिरंगे झंडे का इस्तेमाल किया था। इससे पहले, सत्तर वर्षों में, किसी मुहिम में उन्होंने तिरंगा नहीं उठाया। जो ज्यादा करीब से जानते हैं वो ये भी बता देंगे कि मुहिम में तिरंगा लहराने वाला आयातित विचारधारा का टुकड़ाखोर नहीं था। जो भी हो, पुराने नाम के दोबारा सामने आने से कई बातें हुई।

एक तो ये स्पष्ट पता चल गया कि आयातित विचारधारा के लिए सिर्फ ‘धर्म अफीम है’। उनके लिए मजहब अफीम नहीं, क्योंकि जिन नारों के लिए ये नया उछाला जा रहा नाम कुख्यात है, उसमें ‘टुकड़े होंगे’ के साथ ‘इंशाअल्लाह’ कहा जा रहा था। वैसे उस पर यथा पिता, तथा पुत्र का जुमला भी फिट बैठता है, क्योंकि उसका बाप पहले ही ‘सिमी’ नाम से जाने वाले प्रतिबंधित इस्लामी अलगाववादी-आतंकवादी संगठन का हिस्सा रहा है। ऐसे में बेटे ने आतंकवाद और अलगाववाद की राह चुनकर बाप का नाम रोशन ही किया है। अब सवाल है कि इसमें राजनीति, ‘टीम ऑफ़ राइवल्स’, और सामानांतर प्रतिद्वंदियों का मुद्दा क्या है?

सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों को पता होगा कि महिला छात्रावास के सामने अश्लील हरकतें करने वाला बेगूसराय का बकैत काफी दिनों से चुप था। हाल के दौर में उसके ट्वीट काफी कम रहे हैं। अब जब उसके प्रतिद्वंदी के रूप में एक चेहरा उसी की विचारधारा के लोगों ने खड़ा कर दिया है तो बेचारे को फिर से सक्रिय होना पड़ गया। वरना बिहार चुनावों में उसे जिस तरह से हाशिए पर धकेल दिया गया है, उससे इस लफंगे के एक राजनेता के रूप में करियर, दाँव पर लगा दिखता है। उम्मीद है कि अपने प्रयासों से बेचारा बिहार चुनावों में फिर से इक्का-दुक्का जगहों पर रैलियों में मंच पर दिख पाएगा।

बाकी आयातित विचारधारा की राजनीति कैसे एक व्यक्ति को उठाती है, फिर विरोधियों के बीच उसे छोड़कर किसी और का दामन थाम लेती है, वो भी देखिए। राजनीति की प्रयोगशाला कहलाने वाले बिहार के चुनावों में आपका स्वागत है!