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क्या है #UPSCjihad? क्या खास समुदाय को बढ़ावा देती है UPSC: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Suresh Chavhanke, Sudarshan TV, UPSC

सुदर्शन टीवी के ‘UPSC जिहाद’ नामक शो पर पिछले दिनों काफी बवाल हुआ। चैनल के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके ने दावा किया कि इस शो के लिए बाकायदा रिसर्च की गई और तब जाकर वह इस नतीजे पर पहुँचे कि यूपीएससी में खास मजहब को कहीं न कहीं साजिशन ढकेला जा रहा है। उन्होंने अंदेशा जताया कि हो सकता है इसके लिए सरकारी योजनाओं का इस्तेमाल हो रहा हो या फिर कोई ऐसा ‘नेक्सस’ हो, जो साक्षात्कार के समय उनका समर्थन करता हो।

इस पूरे विषय पर अभी तक सुदर्शन चैनल ने 4 शो दिखाए हैं। शो में अपने दावों को साबित करने के लिए चैनल ने उड़ान योजना का हवाला दिया है, जिसमें समुदाय विशेष को छात्रवृत्ति के रूप में 25000 से 1 लाख रुपए तक की मदद दी जाती है। अब सवाल तो उठना लाजिमी है कि जैसे वर्ग विशेष को आगे बढ़ने के लिए मदद मिल रही है, क्या वैसी ही मदद अन्य समुदायों को मिल रही है? और अगर हाँ, तो इसका प्रतिशत क्या है?

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LAC पर चीन ने जुटाए सैनिक और गोला बारूद, हमारी सेना भी तैयार: संसद में बोले राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन से तनाव पर मंगलवार (सितंबर 15, 2020) को लोकसभा में बयान देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख का दौरा कर हमारे जवानों से मुलाकात की। उन्होंने यह संदेश भी दिया था वह हमारे वीर जवानों के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा, “मैंने भी लद्दाख जाकर अपने यूनिट के साथ समय बिताया था। मैं आपको यह बताना चाहता हूँ कि उनके साहस शौर्य और पराक्रम को महसूस भी किया था। आप जानते हैं कर्नल संतोष बाबू ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था।”

उन्होंने आगे कहा कि LAC को लेकर भारत और चीन की धारणा अलग-अलग है। LAC पर शांति बहाल की जाएगी यह बात दोनों पक्षों ने माना है। भारत का मानना है कि द्विपक्षीय संबंधों को विकसित किया जा सकता है। साथ ही साथ ही सीमा मुद्दे पर चर्चा की जा सकती है।

LAC पर किसी भी हरकत का द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ेगा। समझौते में जिक्र है कि LAC पर दोनों देश कम से कम सेना रखेंगे। हम सीमा पर सेना के अदम्य साहस और शौर्य को पहचानते हैंं। उन्होंने कहा, “भारत और चीन की सीमा को ड्रैगन नहीं मानता है। हम मानते हैं कि यह निर्धारण सही तरीके का है। चीन यह भी मानता है कि सीमा अभी भी औपचारिक रूप से निर्धारित नहीं है। 1950-60 के दशक से बात कर रहा है।”

रक्षा मंत्री आगे इस साल होने वाली घटनाओं के बारे में बताता हुए कहा कि अप्रैल माह से पूर्वी लद्दाख की सीमा पर चीन से सैनिकों की संख्या में वृद्धि। मई में गलवान घाटी में चीन ने व्यवधान उत्पन्न किया जिसके कारण संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हुई। इसी बीच मई महीने के बीच ओंकाला, गोदरा और पैंगोंग लेक में कुछ हरकत करने की कोशिश की। सेना ने चीन को पूरा जवाब दिया।

चीनी सेना को भारी क्षति: राजनाथ सिंह

हमने चीन को राजनयनिक तरीके से बता दिया कि सीमा पर यथास्थिति बदलने की स्थिति का जवाब दिया जाएगा। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि LAC को माना जाएगा। 15 जून को चीन से गलवान में खूनी संघर्ष में हमारे जवानों ने बलिदान दिया और चीनी पक्ष को भी भारी नुकसान पहुँचाया। जहाँ संयम की जरूरत थी, हमने रखा और जहाँ शौर्य की जरूरत थी वहाँ शौर्य प्रदर्शित किया है। सेना की बहादुरी की प्रशंसा की जानी चाहिए।

चीन ने पैंगोंग में घुसने को कोशिश की: राजनाथ सिंह

29-30 अगस्त की रात में फिर से चीन ने पैंगोंग में घुसने की कोशिश की, लेकिन हमारे सैनिकों ने प्रयास विफल कर दिए। चीन ने द्विपक्षीय संबंधों का अनादर पूरी तरह दिखता है। LAC का सम्मान करना और इसे 1993-1996 के समझौते में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है। चीन की तरफ से ऐसा नहीं हुआ है, उनकी कार्रवाई के कारण सीमा पर झड़प हुए हैं।

अभी की स्थिति पर चीन ने LAC के अंदरूनी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सैनिक और गोला बारूद जमा कर रखे हैं। चीन की कार्रवाई के जवाब में हमारी सेना ने पूरा काउंटर तैनाती कर रखी है। सदन को आश्वस्त रहना चाहिए कि हमारी सेना इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करेगी।

कोविड-19 की चुनौतीपूर्ण दौर में सैन्य बल और ITBP की तुरंत तैनाती की गई है। सरकार ने सीमा के विकास को प्राथमिकता दी है। हमारी सरकार ने सीमा के विकास के लिए काफी बजट बढ़ाया है। सीमाई इलाके में काफी रोड और ब्रिज बने हैं। और सैन्य बलों को बेहतर सपोर्ट भी मिला है।

मौजूदा स्थिति पहले से अलग है। हम सभी परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार हैं। जब भी देश के समक्ष कोई चुनौती आई है इस सदन ने सेना के प्रति पूरी प्रतिबद्धता दिखाई है।

राजनाथ सिंह ने आगे कहा, “हम सीमाई इलाकों में मुद्दो का हल शांतिपूर्ण तरीके से किए जाने के प्रति प्रतिबद्ध है। हमने चीनी रक्षा मंत्री से रूस में मुलाकात की। हमने कहा कि इस मुद्दे का शांतिपूर्ण तरीके से हल करना चाहते हैं, लेकिन भारत की संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। 10 सितंबर को एस जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। जयशंकर ने कहा कि अगर चीन पूरी तरह से समझौते को माने तो विवादित इलाके से सेना को हटाया जा सकता है।”

गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव अपने चरम पर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में रूस की राजधानी मॉस्को में चीन के रक्षा मंत्री जनरल वेई फेंग से मुलाकात की थी। उनके कुछ दिन बाद ही मॉस्को में ही विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच बातचीत हुई थी।

भारत के लद्दाख इलाके में चीन की सेना की हालिया घुसपैठ के कर्ताधर्ता खुद राष्ट्रपति शी चिनफिंग हैं। लेकिन भारतीय सेना ने जिस आक्रामक ढंग से जवाब दिया, उससे चीनी नेतृत्व अचंभित है। 15 जून को गलवान घाटी में हुए हिंसक टकराव में जहाँ 20 भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए, वहीं जवाबी कार्रवाई में चीन के कम से कम 43 सैनिक मारे गए, यह संख्या 60 भी हो सकती है। लेकिन चीन ने कभी आधिकारिक तौर पर इसका ऐलान नहीं किया।

हाल ही में अमेरिकी समाचार पत्र ‘न्यूज़वीक’ ने खुलासा किया कि 15 जून को सीमा पर हुई भारत और चीनी सैनिकों की हिंसक झड़प में चीन के 60 से ज्यादा सैनिक मारे गए थे। साथ ही, यह बात भी सामने आई कि भारतीय क्षेत्र में इन आक्रामक गतिविधियों के पीछे खुद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आदेश थे, लेकिन उनकी सेना को मात खानी पड़ी।

इसके बाद फिर से 29-30 अगस्त की रात चीनी सेना ने घुसपैठ की कोशिश की थी, जिसे भारतीय जवानों ने नाकाम कर दिया। LAC पर जारी तनाव को सुलझाने के कई प्रयास किए जा चुके हैं। दोनों देशों के बीच कमांडर स्तर की कई बातचीत भी हुई लेकिन तनाव अब भी बरकार है।

LAC पर तनाव के बीच भारतीय सेना ने पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे फिंगर- 4 पर ऊँचाई वाली जगह को अपने कब्जे में लेकर चीन के सामने अपनी स्थिति को और मजबूत कर दिया है। भारतीय सेना पूरी मजबूती से चीन की दादागिरी को करारा जवाब दे रही है।

पूर्वी लद्दाख में LAC पर सोमवार (सितम्बर 7, 2020) की रात हुए संघर्ष को लेकर भारत की सेना ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया था कि भारत सीमा पर तनाव को कम करने और स्थिति को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन चीन स्थिति को बिगाड़ने के लिए लगातार भड़काऊ गतिविधियों में लगा हुआ है। भारतीय सेना ने कहा कि उन्होंने न तो फायरिंग की है, न LAC को पार किया है और न ही किसी अन्य आक्रामक माध्यम का इस्तेमाल किया है।

उधर भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के सीमा पर लंबे समय से चल रहे गतिरोध के समाधान के लिये पाँच सूत्रीय योजना पर सहमत होने के बावजूद पूर्वी लद्दाख के गतिरोध वाले बिंदुओं पर स्थिति में कुल मिलाकर कोई बदलाव नहीं है। बताया जा रहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीनी सैनिक अपनी-अपनी जगह पर मजबूती से कायम हैं। क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और चीनी सैनिकों की तरफ से कोई नई हलचल नहीं दिखी है।

राफेल आने से और मजबूत हुई वायुसेना ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर निगरानी के स्तर को और बढ़ा दिया है। वायुसेना ने चीन की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के लिए कांबेट एयर पेट्रोलिंग में बढ़ोतरी की है। लद्दाख के आसमान पर इस समय फाइटर, हेलीकॉप्टरों व ट्रांसपोर्ट विमानों का दबदबा है। फाइटर विमानों की गर्जना भारतीय जवानों व लद्दाख के लोगों का हौसला बढ़ा रही है। वहीं, चीन के दिल में डर पैदा कर रही है। इस समय भारतीय वायुसेना तिब्बत में चीन की हवाई गतिविधियों पर नजर रखने के साथ अपनी मारक क्षमता को भी लगातार बढ़ा रही है।

बता दें कि कोरोना संकट काल में संसद का सत्र सोमवार (सितंबर 14, 2020) से शुरु हुआ है। जिसके पहले दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने अभिभाषण में सभी सांसदों से अपील की थी कि वह देश के बहादुर जवानों के साथ खड़े हों और उनके साहसपूर्ण कार्यों की सराहना करें। प्रधानमंत्री ने सोमवार को कहा था कि सेना के पीछे पूरे देश की एकजुटता का मजबूत संदेश इस सदन की और विशेष तौर पर इस सत्र की जिम्मेदारी है।

पीएम ने कहा, “हमारी सेना के जवान बड़ी हिम्मत, जज्बे और बुलंद हौसलों के साथ दुर्गम पहाडि़यों पर डटे हुए हैं। कुछ ही समय बाद बर्फ और बारिश का मौसम शुरु हो जाएगा। इसके बावजूद हमारे जवान पूरे भरोसे के साथ सीमा पर खड़े होकर मातृभूमि की रक्षा के लिए डटे हुए हैं। इन परिस्थितयों इन परिस्थितियों में यह संदेश जाना जरूरी हो जाता है कि सेना के जवानों के पीछे पूरा देश खड़ा है।”

सपा नेता कंगना को समझा रहे थे बॉलीवुड का मतलब, धाकड़ ‘झाँसी की रानी’ ने लगाई धोबी-पछाड़

बॉलीवुड इंडस्ट्री के मशहूर निर्देशक करण जौहर के खिलाफ़ खुल कर अपनी राय रखने वाली कंगना रनौत ने एक बार फिर उन्हें लेकर अपना बयान दिया है। हालाँकि, इस बार उनके निशाने पर प्रत्यक्ष रूप से करण न होकर बल्कि एक सपा नेता थे, जिन्होंने अभिनेत्री पर कुछ सवाल उठाए। और, जवाब में कंगना ने कहा कि इंडस्ट्री सिर्फ करण जौहर की या उनके पिता की नहीं है। कंगना ने यह बात सपा नेता मनीष जगन अग्रवाल के ट्वीट पर लिखी। उन्होंने कंगना पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि वह सभी के संघर्षों को गाली देकर, तुच्छ बताकर आगे बढ़ना चाहती हैं।

उन्होंने लिखा था, “कंगना जी आप सबके संघर्षों को गाली देकर, तुच्छ बताकर, सबके ऊपर निशाना साधकर आगे बढ़ना चाहती हैं? करण जौहर हों या अन्य फ़िल्म निर्माता सभी लोगों की सामूहिक मेहनत से ये भारतीय फिल्म इंडस्ट्री खड़ी हुई है, कोई भी इंडस्ट्री आपकी तरह सबको गाली देकर 1-2 दिन में खड़ी नहीं हो जाती।”

समाजवादी नेता के इसी ट्वीट में कंगना ने लिखा, “इंडस्ट्री सिर्फ़ करण जौहर/उसके पापा ने नहीं बनाई, दादा साहेब फाल्के से लेकर हर कलाकार और मज़दूर ने बनाई है, उस फ़ौजी ने जिसने सीमाओं को बचाया, उस नेता ने जिसने संविधान की रक्षा की है, उस नागरिक ने जिसने टिकट ख़रीदा और दर्शक का किरदार निभाया, इंडस्ट्री करोड़ों भारतवासियों ने बनाई है।”

इसके बाद मनीष जगन अग्रवाल ने लिखा, “लकड़ी की काठी पर बैठकर आप तो स्वयं को ही झाँसी की रानी समझने लगीं? झाँसी की रानी बलिदान देकर महान हुई थीं, जनता पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ खड़ी हुई थीं, आपने कितने पैदल चलते मजदूरों को भोजन कराया? कितनों की मदद की? तमाशा बनाना आपका पुराना शौक है।”

यहाँ बता दें कि सपा नेता के इस ट्वीट पर अभी तक कंगना का रिप्लाई नहीं आया है। मगर, उनके समर्थक मनीष जगन को जवाब दे रहे हैं। यूजर्स का कहना है, “लड़कों से गलती हो जाती है वाले आज लकड़ी की काठी पर ज्ञान दे रहे है। थोड़ा पढ़ाई लिखाई करिए फिर ज्ञान पेलियेगा। नहीं समझे वो क्या कहावत थी ना… ना बाजे घना। आपके लिए है। और अभी कोई चुनाव हुए था ना जिसमें SP को सिर्फ 16 सीट मिली थी वो आपका रिपोर्ट कार्ड था समझे।

ऐसे ही एक अन्य यूजर सपा नेता के ट्वीट के जवाब में लिखता है, “हर हिन्दू महिला झाँसी की रानी ही है और कंगना जी ने अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई उसी के वजह से ये सब हो रहा है। तेरे जैसे चमचे नहीं समझेंगे।”

अब रही बात करण और कंगना के बीच आपसी विवाद की। तो बता दें कि कंगना ने भले ही बॉलीवुड माफिया पर सुशांत सिंह की मौत के बाद मुखर होकर बोलना शुरू किया हो। मगर, नेपोटिज्म को लेकर और उसमें करण जौहर की भूमिका को लेकर अभिनेत्री शुरूआत से ही सवाल उठाती रही हैं। बेबाक कंगना ने कई बार करण जौहर को उनके सामने भी नेपोटिज्म आदि पर घेरा है। फिर चाहे बात कॉफी विथ करण शो की हो या कपिल शर्मा शो की।

घर में घुसकर नाबालिग का रेप, वीडियो व्हाट्सएप ग्रुप में डाला: शहजाद गिरफ्तार, सरताज, सहरोज, अफरोज, असरफ, वाहिद फरार

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक मामला सामने आया है। यहाँ एक 15 साल की एक लड़की का कई दिनों तक पीछा करने के बाद कुछ लोगों ने उसके घर में घुसकर उसका रेप किया। मामला गाजियाबाद के कविनगर का है। जब यह वारदात हुई तब पीड़िता के माता पिता घर में नहीं थे। वे पीड़िता की माता के मेडिकल चेकअप के लिए अलीगढ़ गए हुए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 3 सितंबर को कक्षा 8वीं में पढ़ने वाली 15 साल की नाबालिग अपने छोटे भाई बहन के साथ सो रही थी। तभी अचानक एक शख्स कुछ अन्य लोगों के साथ उसके घर में घुस आया और उसे घसीट कर छत पर ले गया। और उसके बाद उससे रेप किया। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि आरोपित के 6 दोस्तों ने भी उसके साथ छेड़छाड़ किया।

पीड़िता के पिता एक दैनिक मजदूर हैं। उन्होंने बताया कि घटना के बाद उनकी बेटी ने उन्हें फोन किया और रोने लगी। पीड़िता के पिता ने पुलिस को बताया कि वह अपनी पत्नी का इलाज करने अलीगढ़ गए थे। तभी उनकी बेटी का फोन आया और वह ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी।

उसने बताया कि उसे ठीक नहीं लग रहा है और बहुत दर्द हो रहा है। लड़की के पिता ने बताया कि ये सुनने के बाद उन्होने अपनी पत्नी को फोन दिया। पत्नी के बार-बार पूछने के बाद बेटी ने बताया कि उसका रेप हुआ है। नाबालिग ने बताया कि एक शख्स स्कूल जाने पर अक्सर उसे परेशान करता था, उसने उसका घर में घुसकर रेप किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रात को नाबालिग घर में अपने चार बहन-भाइयों के साथ सो रही थी। इसी दौरान दीवार फाँदकर 7 युवक उसके घर में घुस गए। छात्रा के मुँह में कपड़ा ठूँसकर आरोपित उसे छत में ले गए और उसके साथ रेप किया। इस दौरान उसके भाई बहन गहरी नींद में सो रहे थे और उन्हें पता नहीं चला।

पीड़िता के पिता ने पुलिस को बताया कि आरोपित उसे बदहवास हालत में छत पर ही छोड़कर फरार हो गए और घटना के बारे में किसी को बताने पर भाई-बहनों को जान से मारने की धमकी भी दी। उन्होंने पुलिस को यह भी बताया कि आरोपितों ने वीडियो बनाया है। और उसकी वीडियो को व्हाट्सएप ग्रुप में पोस्ट किया है। देर रात जब उसे होश आया तो उसने पिता को फोन कर सारी बात बताई।

वह तत्काल अलीगढ़ से गाजियाबाद के लिए रवाना हो गए। पीड़ित के पिता ने बताया, “मेरी बेटी छत पर ही बेहोश पड़ी थी। हमने उसे हॉस्पिटल ले गया और फिर पुलिस स्टेशन गए।”

पीड़िता के परिजनों ने पुलिस की ओर से निष्क्रियता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर 6 दिनों के बाद प्राथमिकी दर्ज की। पीड़िता के पिता ने थाने में शहजाद, सरताज, सहरोज, अफरोज, शानू, असरफ और वाहिद के खिलाफ नामजद तहरीर दी है। शिकायत के मुताबिक शहजाद ने पीड़िता के साथ बलात्कार किया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “शहजाद (22) को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य फरार हैं। शहजाद ने मुंबई में एक रेस्तरां में काम करता था, लेकिन लॉकडाउन के दौरान अपनी नौकरी गँवाने के बाद गाजियाबाद लौट आया था।”

विजय नगर पुलिस स्टेशन के एसएचओ देवेंद्र बिष्ट ने कहा कि शहजाद पर आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) और पोक्सो अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं, जबकि अन्य आरोपितों पर छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया गया है।

एसएचओ ने कहा, “हमने लड़की का बयान दर्ज किया है। उसने हमें बताया कि शहजाद ने उसके साथ बलात्कार किया था, जबकि अन्य ने वीडियो बनाया और उससे बार-बार छेड़छाड़ की। लड़की ने कहा कि जब वह स्कूल जाती थी तो मुख्य आरोपित अक्सर उसे घूरता रहता था।”

जिस दरभंगा में 1930-40 में हवाई जहाज और रनवे था… वो बंद क्यों हुआ? क्यों कॉन्ग्रेसी सरकारों ने यहाँ की जनता को छला?

भारत की फिरंगियों से आजादी मिलने को एक दशक से ज्यादा का वक्त बीत चुका था। उस वक्त बिहार के ही डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रपति थे और उन्होंने 4 जुलाई, 1962 को दरभंगा के महाराज कामेश्वर सिंह को धन्यवाद देते हुए एक चिट्ठी लिखी थी।

इस दौर तक राजशाही बीत चुकी थी, फिर एक लोकतान्त्रिक देश के राष्ट्रपति अपने ही देश के किसी राजवाड़े को धन्यवाद क्यों कह रहे थे? ये चिट्ठी पटना से हैदराबाद जाने के लिए हवाई-जहाज उपलब्ध करवाने और जहाज के कर्मचारियों के अच्छे व्यवहार की प्रशंसा के लिए थी। 

“उड़ान” नाम की योजना के तहत आज जिस दरभंगा एयरपोर्ट का विकास हो रहा है, उसकी स्थापना काफी पहले हो चुकी थी। बाद में जब सभी चीज़ों को लाइसेंस परमिट राज में घुसाया जाने लगा तो ऐसी कई व्यवस्थाएँ तथाकथित समाजवाद ने नष्ट कर डाली।

नरसिम्हा राव के उदारीकरण के दौर के बाद भाजपा सरकारों ने हवाई यात्रा जैसी चीज़ों को आम आदमी के पास पहुँचाने की योजना बनाई। “उड़ान” (यूडीएएन) ऐसी ही महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है, जिसके तहत देश के 486 क्षेत्रीय हवाई अड्डों को नागरिक उड़ानों के लिए उपलब्ध करवाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।

करीब सौ साल पहले 1930 के दशक में ही दरभंगा महाराज ने अपने उपयोग के लिए विमान लिया था। फिर 1940 के दशक में एक रनवे भी तैयार हो गया। सन 1950 में उन्होंने नागरिकों के लिए उड्डयन की व्यवस्था की थी।

इस काम के लिए द्वित्तीय विश्वयुद्ध के बाद “दरभंगा एविएशन” नाम की एक कंपनी की स्थापना भी की गई। इस कंपनी के पास सेना से खरीद लिए गए चार डगलस डीसी3 हवाई जहाज थे। इनमें से दो दुर्घटनाग्रस्त हो गए, एक को किसी निजी कंपनी को बेच दिया गया और एक भारतीय सेना ने ले लिया था। इस तरह 1950 में शुरू हुई इस कंपनी ने 1962 में काम करना बंद कर दिया।

फिर कुछ साल और बीते और बिहार की दशा कुछ और बिगड़ी। कुछ तो दरभंगा और उसके आस-पास के उत्तरी बिहार के जिलों के हर साल बाढ़-पीड़ित होने की वजह से आई और कुछ लालू के जंगल-राज के दौर के अपराधीकरण से।

पलायन चलता रहा, लेकिन लोग अब भी अपनी जड़ों से जुड़े थे और छुट्टियों में घर लौटते थे। आज भी पर्व-त्योहारों के समय किसी भी महानगर से बिहार की तरफ आने वाली ट्रेनों में तिल रखने की जगह नहीं होती। ऐसे में दरभंगा के लिए भी एक अदद एयरपोर्ट की माँग लगातार बढ़ती जा रही थी। समस्या ये थी कि केंद्र की कॉन्ग्रेसी सरकारों को जन सरोकारों से कोई लेना-देना नहीं था।

बिहार में जब नीतीश कुमार की सरकार आई, तो वो भाजपा के समर्थन से बनी सरकार थी। जब केंद्र में भी भाजपा की सरकार बनी तो आम आदमी के लिए दिल्ली तक अपनी आवाज़ पहुँचाना भी सुगम हुआ।

करीब तीन दशक से ऊपर से की जा रही दरभंगा एयरपोर्ट की माँग आखिर सुन ली गई और 2018 में नए एयरपोर्ट का शिलान्यास हो गया। इसके बावजूद लोगों को, पिछले अनुभवों के कारण, कम ही भरोसा था कि सचमुच कभी एयरपोर्ट बनेगा। लेकिन करीब दो वर्षों में एयरपोर्ट का काम पूरा हो चुका है और अब नवम्बर से यहाँ से स्पाइस जेट की तीन उड़ानें दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई जाएँगी।

बाकी मेरा विश्वास है कि स्थानीय नेताओं में इस काम का श्रेय लेने की होड़ मच चुकी होगी। वैसे जनता को पता तो है ही कि काम किसने किया है, इसलिए आसन्न चुनावों में वोट का स्वाद चखने के लिए भी नेताओं को तैयार रहना चाहिए।

शिवसैनिकों की गुंडई के शिकार पूर्व नेवी अफसर मदन शर्मा BJP-RSS में शामिल, कहा- अब महाराष्ट्र में कोई गुंडागर्दी नहीं होने देंगे

मुंबई में रिटायर नेवी अफसर मदन शर्मा की शिवसैनिकों ने बेरहमी से पिटाई की थी। जिसके बाद शिवसैनिकों की गिरफ़्तारी भी हुई लेकिन उन्हें जल्द ही छोड़ दिया गया और उनपर शिवसेना द्वारा लगातार तंज किया जाता रहा। मदन शर्मा ने आज महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात कर महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग की है। साथ ही लगातार लग रहे आरोपों के कारण आज उन्होंने कहा कि मैं अब बीजेपी, आरएसएस से जुड़ गया हूँ। अब हम महाराष्ट्र में कोई गुंडागर्दी नहीं होने देंगे।

सेवानिवृत नौसेना ऑफिसर मदन शर्मा ने राज्यपाल के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा, “अभी से मैं बीजेपी-आरएसएस के साथ हूँ। जब मुझे पीटा गया, तो उन्होंने आरोप लगाया कि मैं भाजपा-आरएसएस से जुड़ा हूँ। इसलिए अब मैं घोषणा करता हूँ कि मैं आज से बीजेपी-आरएसएस के साथ हूँ।”

मदन शर्मा की पिटाई से आहत राष्ट्रीय सैनिक संस्थान भी उनके समर्थन में आ गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वयोवृद्ध संगठन राष्ट्रीय सैनिक संस्थान की मुंबई इकाई के अध्यक्ष पंजाबराव लक्ष्मण मुधाने ने कहा, “अगर उद्धव ठाकरे माफी नहीं माँगते हैं, तो 3 दिन में सभी रिटायर आर्मी अफसर आजाद मैदान में इकट्ठा होंगे और विरोध प्रदर्शन शुरू कर देंगे।”

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का कार्टून सोशल मीडिया में फॉरवर्ड करने पर मुंबई में शिवसेना कार्यकर्ताओं ने सेवानिवृत्त नेवी ऑफिसर मदन शर्मा पर हमला बोला था। शिवसेना के 6-7 ‘गुंडों’ ने पूर्व नेवी अधिकारी मदन शर्मा पर हमला किया था जिसके बाद सोशल मीडिया पर उद्धव सरकार को व्यापक प्रतिक्रिया झेलनी पड़ी।

बता दें कि कांदिवली से भाजपा विधायक ने टाइम्स नाऊ से बात करते हुए कहा था कि स्थानीय ‘शाखा प्रमुख’ ने पूर्व नेवी अधिकारी को संपर्क किया और उन्हें उनकी बिल्डिंग से नीचे आने को बोला। जैसे ही वो अपनी बिल्डिंग से नीचे उतरे, करीब 8 लोगों ने उन्हें सिर्फ़ इसलिए मारना शुरू कर दिया क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर उद्धव ठाकरे का कार्टून व्हॉट्सएप पर फॉरवर्ड किया था।

कार्टून में भगवा रंग के कपड़े में उद्धव ठाकरे को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार सफेद रंग का कपड़ा पहनाते दिखाई दे रहे थे। पिटाई के बाद मदन शर्मा ने पुलिस में शिकायत दर्ज की थी। मदन शर्मा की शिकायत के बाद समता नगर पुलिस ने शुक्रवार ( सितम्बर 11, 2020) देर शाम चार आरोपितों- शिवसेना प्रमुख प्रधान कमलेश कदम और उनके साथी संजय मंजरे, राकेश बेलवेकर और प्रताप सोंड को गिरफ्तार किया था। हालाँकि, बाद में उन्हें 12 घंटे के अंदर ही जमानत मिल गई थी।

जिसके बाद, शर्मा के परिवार ने कहा है कि वे अब खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। पूर्व नौसेना अधिकारी के बेटे सनी शर्मा ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मॉंग की थी।

वहीं आरोपित शिवसैनिकों को जमानत मिलने पर पूर्व नेवी ऑफिसर की बेटी शीला शर्मा ने कहा, “एक वरिष्ठ नागरिक पर हमला किया गया है। पुलिस को पता होना चाहिए कि आरोपियों को किन धाराओं के तहत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन्हें हत्या की कोशिश के आरोप के तहत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। इसमें किसी भी प्रकार की जमानत नहीं मिलनी चाहिए थी।”

महज एक कार्टून शेयर करने को लेकर शिवसेना कार्यकर्ताओं के हमले का शिकार बने पूर्व नौसेना अधिकारी मदन शर्मा ने भी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से इस्तीफे की माँग की थी। इसी को लेकर शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में मदन शर्मा पर निशाना साधा गया था। बता दें कि सामना के संस्थापक संपादक बाल ठाकरे और संपादक रश्मि उद्धव ठाकरे हैं। रश्मि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पत्नी हैं।

‘गाँधीवादी, अहिंसा, एकता, प्रेम की बात करने वाला’ – उमर खालिद के लिए कॉन्ग्रेस, कॉन्ग्रेसी नेता और सेकुलरों का चालू है राग

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे मामले में उमर खालिद की गिरफ्तारी के बाद तथाकथित सेकुलर इस मुद्दे पर नरेंद्र मोदी सरकार को घेरने में जुटे हुए हैं। सोशल मीडिया पर खालिद को रिहाई दिलवाने के लिए बकायादा अभियान चल रहा है। इसमें कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता से लेकर मीडिया गिरोह के पत्रकार और बुद्धिजीवी भी शामिल हैं।

कर्नाटक कॉन्ग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकॉउंट पर इस संबंध में ट्वीट करते हुए लिखा है, “मोदी सरकार उन सभी धर्मनिरपेक्ष, उदारवादी, आवाजों को कुचलने में विश्वास करती है, जो उन्हें अपने निरंकुश राज्य के कार्यान्वयन में खतरा दिखते हैं।” ट्वीट में आगे लिखा है, “दिल्ली दंगों की जाँच में कई छात्र नेताओं और बुद्धिजीवियों को जेल में डाल दिया गया है, यह इस बात का सबूत है कि मोदी सरकार अपने विपक्षी को कुचलना चाहती है।”

इसी प्रकार दिग्विजय सिंह अपने ट्वीट में हर्ष मंदर का ट्वीट शेयर करते हैं, जिसमें उमर खालिद के समर्थन की बात है। दिग्विजय सिंह लिखते हैं, “हर्ष मंदर एक बहुत ही कर्तव्यनिष्ठ एवं ईमानदार मध्य प्रदेश काडर के IAS अधिकारी रहे हैं। मैं उनसे पिछले 35-40 वर्षों से परिचित हूँ। यदि वे उमर ख़ालिद के पक्ष में हैं तो मैं उनके साथ हूँ। गॉंधीवादी कभी हिंसक प्रवृत्ति का नहीं हो सकता। मैं #StandWithUmarKhalid का समर्थन करता हूँ।”

इसी तरह एमनेस्टी इंटरनेशनल के दक्षिण एशिया निदेशक बिराज पटनायक लिखते हैं कि उमर खालिद की गिरफ्तारी एक देशद्रोह है। हर दिन जो वो जेल में बिता रहा है, वो बहुत ज्यादा है। ये एक और अध्याय जुड़ा है, दिल्ली पुलिस द्वारा उनकी खोजी पड़तालों में।

पत्रकार सागरिका घोष लिखती हैं, “मोदी सरकार जितना अधिक छात्रों, प्रोफेसरों, कवियों को गिरफ्तार कर रही है, भारत का लोकतंत्र उतना ही कमजोर होता जा रहा है और वास्तविक खतरों को पहचानने और उनसे निपटने में असमर्थ हो रहा है। जब हम एक दूसरे पर हमला करने में व्यस्त हैं, तो भारत के असली दुश्मनों को हँसना चाहिए।”

लेखक हुसैन हैदरी लिखते हैं, “उमर खालिद एक शिक्षित और युवा नेता है। उसने खुलेआम कहा कि वह नास्तिक है। उसके भाषण में भी अहिंसा, एकता, प्रेम और भारतीय ध्वज का उल्लेख है। लेकिन ये सब बहुत तुच्छ लगते हैं। काफी सिर्फ़ यही है कि उसका मुस्लिम नाम है और वह मुस्लिम परिवार में पैदा हुआ।”

गौरतलब है कि दिल्ली दंगों के मामले में रविवार की रात उमर खालिद को गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने उसे 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद को दिल्ली पुलिस ने दंगों की साज़िश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया था। वह गैरक़ानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपित है। पुलिस ने कहा है कि बहुत जल्द इस मामले में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। 

यहाँ बता दें कि लिबरल गैंग की प्रतिक्रिया खालिद गिरफ्तारी के बाद से ही सोशल मीडिया पर दिखने लगी थी। कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया था कि उसकी गिरफ्तारी सिर्फ इसलिए हुई है क्योंकि वह मुस्लिम है। लेकिन यह ध्यान रखने की बात है कि बार-बार खुद को नास्तिक कहने वाले उमर खालिद ने पिछले कुछ सालों में अपनी इस तरह की छवि खुद ही बनाई है। 

14 साल की दलित लड़की से गैंगरेप, वीडियो किया वायरल: शिबू गिरफ्तार, नाजिम फरार – UP पुलिस की 7 टीमें तलाश में

उत्तर प्रदेश के सीतापुर में एक नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार (गैंगरेप) का मामला सामने आया है। पीड़िता दलित समुदाय की है। ये घटना सितम्बर 7 की है, जब किशोरी सामान लेने बाजार गई थी। उसके साथ 5 युवकों ने न सिर्फ बलात्कार किया, बल्कि इस पूरी वारदात का वीडियो भी बना लिया। पीड़िता ने थाने पहुँच कर पाँचों आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कराया, जिसके बाद एक नामजद को गिरफ्तार कर लिया गया है।

दलित नाबालिग के साथ गैंगरेप की ये घटना सीतापुर स्थित इमलिया सुल्तानपुर की है। 14 साल की पीड़िता ने पुलिस को बताया है कि जब वो बाजार गई थी, तब रास्ते में ही 5 लोग मिले और उसे खींच कर जबरन गन्ने के एक खेत में ले गए। वहाँ आरोपितों ने उसका गैंगरेप किया और वीडियो भी शूट कर लिया। साथ ही उन्होंने धमकी दी कि अगर इस घटना के बारे में किसी और को पता चला तो वो इस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर देंगे।

सीतापुर के एसपी आरपी सिंह को जैसे ही इस घटना की सूचना मिली, वो कई थानों की पुलिस लेकर इमलिया पहुँचे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया। जहाँ एक नामजद आरोपित शिबू को गिरफ्तार कर लिया गया है, वहीं नाजिम नामक आरोपित फरार है। एससपी ने एएसपी, सीओ के अलावा खैराबाद, रामकोट, बिसवां, मानपुर, महोली और हरगांव की पुलिस को इस मामले में जाँच के लिए लगाया गया है।

क्राइम ब्रांच भी इस मामले की जाँच में लगी हुई है। बाकी सभी आरोपितों की तलाश जारी है। ‘अमर उजाला’ की खबर के अनुसार, पीड़िता की भाभी की मृत्यु हो चुकी है। उसके भाई के ससुराल वालों ने दहेज़ प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया था, जिस मामले में उसका भाई जेल में बंद है। उसके पिता भी इसी मामले में जेल में बंद हैं। ऐसे में दलित समुदाय की पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए यूपी पुलिस त्वरित कार्रवाई कर रही है।

इस मामले में कौशल नामक के एक व्यक्ति का भी नाम सामने आया है, जो पीड़िता का परिचित है। उसे भी इस मामले में नामजद किया गया है। पीड़िता कौशल से काफी पहले से संपर्क में थी और उसके साथ ही बाइक से बाजार जा रही थी। एसपी ने कहा है कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाली पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई भी की जाएगी। गैंगरेप के साथ-साथ SC/ST एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जाँच के लिए 7 टीमें गठित की गई हैं।

‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, आरोपितों ने पीड़िता का वीडियो बना कर वायरल भी कर दिया। नाबालिग पीड़िता अपने छोटे भाई के साथ अपने चाचा के यहाँ रहती है। जो कौशल उसे घटनास्थल पर छोड़ कर फरार हो गया, वो पीड़िता का रिश्तेदार ही है। पुलिस इस पर भी जाँच कर रही है कि एक सप्ताह बाद तहरीर क्यों दाखिल की गई। प्रशासन ने पीड़िता की आर्थिक मदद के लिए भी आश्वासन दिया है।

कोर्ट की लिखाई में ‘श्रुतिसम भिन्नार्थक’ मिस्टेक! रिया सुशांत के साथ रहती थी या छोड़ने को तैयार थी?

मुंबई की एक सेशन कोर्ट ने रिया चक्रवर्ती की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कुछ ऐसा लिखा, जिससे चर्चा हो रही है कि इसका अर्थ क्या होगा? या फिर क्या ये किसी प्रकार की गलती है? दरअसल, इस आदेश में लिखा हुआ है कि रिकॉर्ड्स से ऐसा पता चलता है कि दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत और आरोपित रिया चक्रवर्ती ‘Leaving In’ रिलेशनशिप में रहते थे। इसका मतलब क्या है, इस पर चर्चा हो रही है।

बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत और रिया चक्रवर्ती के ‘Live In’ रिलेशनशिप में रहने की बातें पहले से ही होती आई हैं। शादी से पहले एक घर में जब दो प्रेमी साथ रहते हैं तो इसे अक्सर ‘Live In’ का नाम दिया जाता है। हालाँकि, कोर्ट के आदेश में ये ‘Leaving In’ का अर्थ यही है या फिर ये है कि रिया अब सुशांत को छोड़ने वाली थी, ये स्पष्ट नहीं हो सका है। या फिर अंदेशा जताया गया है कि ये टाइपिंग मिस्टेक भी हो सकता है।

कोर्ट के आदेश में लिखा है कि रिया चक्रवर्ती सुशांत सिंह राजपूत को ड्रग्स देती थीं और शौविक के जरिए ज़ैद बिलतरा और अब्दुल बासित के जरिए ड्रग्स की व्यवस्था की गई थी। एनसीबी ने जो व्हाट्सप्प चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए हैं, उससे ये पता चलता है। हालाँकि, अजुन केशवानी के घर से हार्ड ड्रग्स मिलने के मामले में कोर्ट ने कहा कि इसका रिया से कनेक्शन के मामले की जाँच अभी शुरुआती स्टेज में है।

कोर्ट ने एनडीपीएस एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि आरोपित को जमानत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने आशंका जताई है कि अगर आरोपित रिया चक्रवर्ती को रिहा किया गया तो वो बाकी आरोपितों को सावधान कर देगी, जिससे उन लोगों को सबूत मिटाने में आसानी होगी। इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश जारी किया कि इस मामले में रिया चक्रवर्ती को जमानत नहीं दी जा सकती है और उनकी याचिका निरस्त की जाती है।

इधर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की मुंबई जोनल यूनिट ने सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले से जुड़े ड्रग नेक्सस से संबंधित 6 और लोगों को गिरफ्तार किया है। करमजीत सिंह, ड्वेन फर्नांडिस, संकेत पटेल, अंकुश अरनेजा, संदीप गुप्ता और आफताब फतेह अंसारी को गिरफ्तार किया गया है।  इन सभी 6 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया।

‘बेटी श्‍वेता को ड्रग्‍स… बेटा अभिषेक फाँसी से झूलते…’ – जया बच्चन के ‘बॉलीवुड को बदनाम करने’ पर कंगना रनौत की खरी-खरी

समाजवादी पार्टी नेता व अभिनेत्री जया बच्चन ने आज (सितंबर 15, 2020) संसद सत्र के दौरान भोजपुरी अभिनेता व गोरखपुर सांसद रवि किशन पर निशाना साधा। जया बच्चन ने रवि किशन का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करते हैं। उनके इस बयान के बाद ट्विटर पर लगातार उनका नाम ट्रेंड होना शुरू हो गया। इस बीच रवि किशन ने भी अपने ऊपर लगे इल्जाम का पलटवार किया और कंगना रनौत ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी।

कंगना रनौत ने जया बच्चन का यह बयान आने के बाद उनकी वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “जया जी क्‍या आप तब भी यही कहतीं अगर मेरी जगह पर आपकी बेटी श्‍वेता को युवावस्था में पीटा गया होता, ड्रग्‍स दिए गए होते और शोषण होता। क्‍या आप तब भी यही कहतीं अगर अभिषेक लगातार बुलिंग और शोषण की बात करते और एक दिन फाँसी से झूलते पाए जाते? थोड़ी हमदर्दी हमसे भी दिखाइए।”

न्यूज 18 के पत्रकार विक्रांत यादव के मुताबिक रवि किशन ने अपने ऊपर लगे इल्जाम पर जवाब देते हुए कहा, “ना तो हमें किसी ने थाली दी, ना भोजन दिया और ना ही हमने किसी थाली में छेद किया, मैं स्वयंभू हूँ, जिंदगी झंड बा फिर भी घमण्ड बा। अगर ड्रग्स की बुराई इंडस्ट्री में है तो उसे खत्म करने की जिम्मेदारी भी हमारी है।”

एएनआई न्यूज एजेंसी के अनुसार रवि किशन ने यह भी कहा, “मुझे लगा था कि जो भी मैंने कहा, जया जी उसका समर्थन करेंगी। सभी लोग इंडस्ट्री में ड्रग्स नहीं लेते लेकिन जो लोग लेते हैं, वे दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री को खत्म कर देना चाहते हैं।”

गौरतलब है कि एक तरफ जहाँ सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बॉलीवुड के ड्रग्स नेटवर्क और कंगना रनौत के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार की कार्रवाई पर अमिताभ बच्चन की चुप्पी को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं राज्यसभा में संसद सत्र के दौरान उनकी पत्नी और समाजवादी पार्टी से सांसद जया बच्चन ने उलटा गोरखपुर के भाजपा सांसद रवि किशन पर ही निशाना साध दिया।

जया बच्चन ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर फिल्म इंडस्ट्री को बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल मुट्ठी भर लोगों के कारण आप पूरे बॉलीवुड को ड्रग्स एडिक्टेड नहीं बता सकते, उनकी छवि नहीं खराब कर सकते। रवि किशन पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं, उसी थाली में छेद भी करते हैं। साथ ही सरकार पर ऐसी ‘भाषा’ पर लगाम लगाने को भी कहा।

उन्होंने ‘बॉलीवुड को बदनाम करने की साजिश’ पर सदन में जीरो आवर नोटिस भी दिया। जया बच्चन ने रवि किशन पर निशाना साधते हुए कहा कि वो इस बात से शर्मिंदा हैं कि एक दिन पहले उसी सांसद ने बॉलीवुड में ड्रग्स की बात करते हुए पूरी इंडस्ट्री को भला-बुरा कहा, जो इसी का एक हिस्सा हैं।

क्या कहा था सांसद रवि किशन ने?

अभिनेता और सांसद रवि किशन ने कल संसद में बॉलीवुड के ड्रग्स नेटवर्क का मुद्दा उठाया था। बॉलीवुड और भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में नाम कमा चुके अभिनेता ने ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा था कि ये पड़ोसी देशों की साजिश है। उन्होंने एनसीबी की कार्रवाई की तारीफ करते हुए कहा था कि कई लोगों को पकड़ा भी गया है लेकिन वो केंद्र सरकार से इस मामले में सख्त कार्रवाई की माँग करते हैं।

उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान और चीन से ड्रग्स तस्करी काफी बढ़ गई है, जिससे हमारे युवा बर्बाद हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया था कि पंजाब और नेपाल के रास्ते भारत में ड्रग्स की अवैध सप्लाई की जा रही है। उन्होंने पड़ोसी देशों की इस साजिश का अंत करने के लिए इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की जल्द से जल्द गिरफ़्तारी की माँग की थी।