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पाकिस्तान ने SCO की बैठक में पेश किया ‘गलत नक्शा’: NSA अजीत डोभाल ने बैठक से किया वॉकआउट

भारत ने मंगलवार को शंघाई कोर्पोरेशन आर्गेनाईजेशन (SCO) के तहत हुई राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) की बैठक छोड़ दी। दरअसल, रूस की मेजबानी में हुई इस बैठक में पाकिस्तान ने गलत नक्शा पेश किया था। इसके बाद भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बैठक से वॉक आउट कर दिया। इसके बाद भारत ने बताया कि पाकिस्तान के प्रतिनिधियों की यह हरकत बैठक के नियमों के विरुद्ध है।

इस मुद्दे पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बयान जारी करते हुए कहा, “पाकिस्तान की यह हरकत मेजबान रूस के दिशा निर्देशों का उल्लंघन है। SCO की NSA स्तरीय बैठक में पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने जानबूझ कर झूठा मानचित्र पेश किया। जिसे पाकिस्तान ने हाल फ़िलहाल में प्रचारित भी किया है। जिसके चलते भारत ने मेजबान रूस से चर्चा करके बैठक से वॉक आउट कर दिया। पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर बैठक में गलत जानकारी भी साझा की है।” मंत्रालय के अनुसार इस बात की पूरी गुंजाईश थी कि पाकिस्तान इस बैठक में भ्रामक तथ्य प्रस्तुत करेगा।

ख़बरों के अनुसार रूस फेडरेशन के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) सचिव निकोलई पेट्रूशेव ने भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, “रूस इस कदम पर पाकिस्तान का समर्थन नहीं करता है। हम इस बात की उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तान के इस उकसाने वाले कदम की वजह से भारत की SCO में भागीदारी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ हमारे (पेट्रूशेव) अच्छे रिश्ते हैं, पाकिस्तान की इस हरकत से वह प्रभावित नहीं होंगे। हम आशा करते हैं कि भारत आने वाले समय में होने वाले कार्यक्रमों का भी हिस्सा बना रहेगा।” 

पाकिस्तान ने 4 अगस्त को यह नया नक्शा जारी किया था जिसमें उसने लद्दाख, जम्मू कश्मीर और गुजरात के कुछ हिस्सों को अपना हिस्सा बताया था। जबकि SCO में पाकिस्तान का कोई आधिकारिक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तक नियुक्त नहीं है। भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा प्रतिक्रिया जारी करने के ठीक कुछ समय पहले पाकिस्तान के मोइद युसूफ ने इस मुद्दे पर ट्वीट किया था। 

ट्वीट में उन्होंने लिखा था “मेरे भारतीय समक्ष ने रूस और पाकिस्तान के भाषण के बाद वॉक आउट किया, यह बेहद विचित्र था। उस मंच की मूल भावना सहयोग की है लेकिन भारत के ऐसा करने से बुरा प्रभाव पड़ा।” इसके बाद युसूफ ने ट्वीट में लिखा अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण से विवादित सीमा (जम्मू कश्मीर) पर एक तरफ़ा और गैर क़ानूनी निर्णय लेने से शांति के लिए ख़तरा पैदा हो सकता है।

कंगना रनौत ने BMC को भेजा लीगल नोटिस: ‘मणिकर्णिका फिल्म्स’ को हुए नुकसान के लिए माँगा ₹2 करोड़ का हर्जाना

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत और महाराष्ट्र सरकार के बीच चल रही तकरार अब कानूनी रूप ले चुकी है। कंगना रनौत ने अपने ऑफिस ‘मणिकर्णिका फिल्म्स’ में की गई तोड़-फोड़ के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) से 2 करोड़ रुपए का हर्जाना माँगा है। एक्ट्रेस ने इसके लिए बीएमसी को लीगल नोटिस जारी किया है।

बता दें कि 9 सितंबर को पाली हिल स्थित कंगना रनौत के ऑफिस मणिकर्णिका फिल्म्स के कई हिस्सों को बीएमसी ने अवैध बताते हुए तोड़ दिया था। याचिका में दावा किया गया है कि बीएमसी ने बंगले में स्थित उनके ऑफिस के 40 प्रतिशत हिस्से को गिरा दिया है। जिससे वहाँ लगे महँगे झूमर व डेकोरेशन से जुड़े काम का नुकसान पहुँचा है।

याचिका में माँग की गई है कि उन्हें अपनी जगह को इस्तेमाल करने लायक बनाने की अनुमति दी जाए। बीएमसी के कर्मचारियों को इस विषय पर 9 सितंबर 2020 को याचिका दायर होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन इसे नजरअंदाज कर बीएमसी कर्मचारी बंगले को गिराने में व्यस्त रहे। 

याचिका के मुताबिक बीएमसी की कार्रवाई से उनकी 40 प्रतिशत चल संपत्ति नष्ट हो गई है। बीएमसी की ओर से की गई इस अवैध कार्रवाई से करीब 2 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इसलिए बीएमसी को दो करोड़ रुपए मुआवजे के रुप में देने का निर्देश दिया जाए। हाईकोर्ट में अब इस मामले की सुनवाई 22 सितंबर 2020 को होगी। तब तक उन्हें कोर्ट से मिली अंतरिम राहत जारी रहेगी।

बता दें कि कंगना इस संबंध में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से भी मुलाकात कर चुकी हैं। इससे पहले केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी राज्यपाल से मुलाकात कर कंगना रनौत को मुआवजा दिलवाने की बात कही थी।

गौरतलब है कि 8 सितंबर को बीएमसी ने कंगना के ऑफिस पर नोटिस चिपकाया था और अवैध निर्माण को लेकर 24 घंटे में जवाब माँगा था। लेकिन अगले दिन कंगना के मुंबई पहुँचने से पहले ही उनके ऑफिस में तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी गई। इसे लेकर एक्ट्रेस के वकील ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन जब तक कोर्ट ने कार्रवाई पर रोक लगाई, तब तक बंगले को 40 फीसदी ध्वस्त कर दिया गया था। इसमें झूमर, सोफा और दुर्लभ कलाकृतियों समेत कई कीमती संपत्ति भी शामिल है।

कंगना रनौत 9 सितंबर को मुंबई पहुँची थीं। 13 सितंबर को उन्होंने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी से मुलाकात कर उन्हें अपने साथ हुए अन्याय के बारे में बताया था। 14 सितंबर की सुबह वे मुंबई से मनाली लौट गईं। अपने होमटाउन पहुँचने के बाद भी वे शिवसेना, कॉन्ग्रेस और महाराष्ट्र सरकार पर लगातार हमलावर हैं।

एक्ट्रेस ने ट्विटर पर एक मिनट का वीडियो शेयर कर कहा था कि मुंबई में आतंक बढ़ता जा रहा है। कंगना ने मनाली रवाना होने से पहले ट्वीट किया था, “दिल्ली के दिल को चीर के वहाँ इस साल खून बहा है, सोनिया सेना ने मुंबई में आजाद कश्मीर के नारे लगवाए, आज आजादी की कीमत सिर्फ आवाज है, मुझे अपनी आवाज दो, नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब आजादी की कीमत सिर्फ और सिर्फ खून होगी।”

बलात्कार की बढ़ती वारदात से पाकिस्तान में भयावह हालात: ज़्यादातर मामलों में अब्बू, दादू, चाचू, भाई, मामू आरोपित, नहीं दर्ज होते केस

पाकिस्तान में महिलाएँ कितनी सुरक्षित हैं इस मामले से जुड़ी ख़बरें अक्सर सामने आती हैं। पिछले कुछ समय में वहाँ महिलाओं के साथ होने वाले अपराध की तमाम घटनाएँ सामने आई। बीते दिन पाकिस्तान के समाचार समूह जियो न्यूज़ ने इस मुद्दे पर एक चर्चा आयोजित की। इस चर्चा में ऐसी कई बातें बताई गई जो पाकिस्तान में महिलाओं की वास्तविक स्थिति बयान करती हैं। कैपिटल टॉक नाम के इस कार्यक्रम में पाकिस्तान के 3 अलग अलग राजनीतिक दल की नेताओं ने पाकिस्तान में महिलाओं की स्थिति पर अपना नज़रिया रखा।  

हाल ही में पाकिस्तान के लाहौर (गुज्जरपुरा मोटरवे) में एक सामूहिक बलात्कार की घटना हुई थी। जिस पर लाहौर के सीसीपीओ (कैपिटल सिटी पुलिस ऑफिसर) उमर शेख ने कहा था कि वह महिला रात के वक्त घर से बाहर निकली ही क्यों थी। इस घटना पर पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी तहरीक ए इंसाफ़ की नेता ने चर्चा में कहा एक अधिकारी ऐसा बयान नहीं दे सकता है। 

अधिकारी की ज़िम्मेदारी है कि वह हर तरह के हालातों में लड़की की सुरक्षा सुनिश्चित करें। इसके बाद उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा पाकिस्तान दुनिया का छठा ऐसा मुल्क है जहाँ महिलाएँ बिलकुल सुरक्षित नहीं हैं। हैरानी की बात यह है कि ऐसा अभी से नहीं बल्कि पिछले 40 साल से हो रहा है।

इसके बाद विपक्ष की पीपुल्स पार्टी की नेता ने कहा कि हम पाकिस्तान में होने वाली हर बलात्कार की घटना के बाद कहते हैं कि यह आखिरी है। लेकिन इस तरह की घटनाएँ कभी रुकती ही नहीं हैं और अपराधियों को सज़ा देने की जगह पीड़ित को ही दोष दिया जाने लगता है। फिर चर्चा का आयोजन करा रहे पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर ने इस मुद्दे पर कुछ आँकड़े बताए।

हामिद मीर ने बताया कि जनवरी 2020 से लेकर 31 जुलाई 2020 के बीच पाकिस्तान के पंजाब में बलात्कार की 2043 और सामूहिक बलात्कार की 111 घटनाएँ सामने आई हैं। इसके अलावा पिछले साल 2019 में बलात्कार के बलात्कार के 3881 और सामूहिक बलात्कार के 190 मामले सामने आए थे। इतने सारे मामले पाकिस्तान के सबसे बड़े राज्य पंजाब में सामने आए थे। 

तीसरे विपक्षी दल मुस्लिम लीग की नेता ने कहा इस मुल्क (पाकिस्तान) के मर्दों की मानसिकता ही ऐसी है। उन्हें लगता है एक महिला चाहती है कि उसके साथ ज़्यादती हो और ऐसी सोच की वजह से मुल्क की 11 करोड़ महिलाओं का अपमान होता है। इसके बाद उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के पंजाब में साल 2018 के दौरान बलात्कार की 1324 घटनाएँ सामने आई। और ऐसे न जाने कितने मामले होंगे जो दर्ज नहीं किए जाते होंगे, जिन पर कोई बात ही नहीं हो पाती है। 

इसके अलावा भी चर्चा में कुछ ऐसी बातें हुई जो पाकिस्तान में महिलाओं के असल हालात बताती हैं। जब बच्चियों से पूछा जाता है कि उनके साथ बलात्कार किसने किया तो 82 फ़ीसदी मामलों में आरोपित घर के अहम सदस्य ही होते हैं। ज़्यादातर रेप में आरोपित अब्बू, दादाजान, ताऊ, भाई, मामा और फूफा ही होते हैं इसलिए परिवार के एक सदस्य को खोने के डर से यह मामले जल्दी रिपोर्ट ही नहीं होते। ऐसे में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मुख्य चिंता यह भी है कि जब पाकिस्तान में मुस्लिम बच्चियाँ ही सुरक्षित नहीं हैं तो हिन्दू तथा अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ क्या-क्या होता होगा।

ऐसी कुछ खबरें छनकर आती रहती हैं लेकिन वास्तविक आँकड़ा भयावह है। पाकिस्तान में बलात्कार की घटनाओं को अंजाम देने वाले अशिक्षित लोग ही नहीं हैं। बल्कि कई मामले ऐसे भी देखे गए हैं जिसमें दिग्गज अधिकारियों और न्यायाधीशों ने महिलाओं के साथ ज़्यादती की है। पाकिस्तान में वुमेन प्रोटेक्शन बिल और जैनब एलर्ट बिल जैसे अहम क़ानून पारित किए गए थे इसके बावजूद वहाँ महिलाओं के साथ होने वाले अपराध लगातार जारी हैं।  

कंगना रनौत के Y-Plus सुरक्षा कवर को वापस लेने की माँग पर मीडिया ने कॉन्ग्रेस नेता बृजेश का किया बचाव

कॉन्ग्रेस समर्थित महाराष्ट्र सरकार और अभिनेत्री कंगना रनौत के बीच वाकयुद्ध खत्म नहीं हो रहा। सोमवार (सितंबर 14, 2020) को अभिनेत्री ने अपने प्रशंसकों को बताया कि राज्य मशीनरी द्वारा परेशान किए जाने के बाद वह मुंबई छोड़ कर अपने घर मनाली के लिए रवाना हो चुकी हैं। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) द्वारा उनके घर और ऑफिस को नष्ट करने का हवाला देते हुए, उन्होंने दोहराया कि उनका मुंबई से POK की तुलना करना सही था।

कंगना रनौत ने ट्वीट करते हुए लिखा, “भारी मन से मुंबई से वापस लौट रही हूँ। जिस तरह मुझे इन दिनों परेशान किया गया, मेरे ऊपर अटैक किया गया, मुझे गलत चीजें बोली गईं, मेरा घर तोड़ने की धमकी दी गई और मेरा ऑफिस तोड़ा, सिक्योरिटी को हथियार के साथ मेरे आसपास रहने के लिए कहा गया, मुझे लगता है POK से तुलना करना सही था।”

कंगना रनौत के इस ट्वीट पर कॉन्ग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील बृजेश कलप्पा ने सवाल उठाया। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा कंगना रनौत को वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने के निर्णय को करदाताओं के पैसे की बर्बादी करार देते हुए, कॉन्ग्रेस के राजनेता ने उनके सुरक्षा कवर को वापस लेने की माँग की। 

कलप्पा ने ट्वीट लिखा था, “एक इंसान के लिए Y- कैटेगरी की सिक्युरिटी का खर्च 10 लाख रुपए प्रति महीने से ज्यादा होता है। यह पैसा टैक्स पेयर्स से आता है। अब कंगना हिमाचल प्रदेश (पीओके से दूर) में सुरक्षित हैं। क्या मोदी उन्हें दी गई सुरक्षा हटाएँगे?”

कंगना ने कलप्पा को जवाब देते हुए लिखा है, “ब्रजेश-जी सुरक्षा आप या मेरी सोच के आधार पर नहीं दी जाती। आईबी ने धमकी की जाँच की। धमकी के आधार पर मेरी सुरक्षा ग्रेड तय किया गया। भगवान की कृपा रही तो आने वाले दिनों में यह सुरक्षा पूरी तरह हट जाएगी। या फिर आईबी की रिपोर्ट खराब आती है तो वे इसे अपग्रेड कर सकते हैं।”

हालाँकि, कलप्पा द्वारा दिए गए तर्क को मीडिया ने गैर राजनीतिक अभिव्यक्ति के तौर पर पेश किया। मीडिया रिपोर्ट्स में कलप्पा के टैक्स पैयर्स के पैसे को लेकर जताई गई चिंता को सही ठहराया गया।

Screengrab of the Pinkvilla report

उदाहरण के लिए, पिंकविला ने इस तथ्य को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया कि कलप्पा एक कॉन्ग्रेस नेता और एआईसीसी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। अपने इस लेख में पब्लिकेशन ने कलप्पा को सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता के रूप में पेश किया।

Screengrab of the DNA report

इसी तरह से हिन्दुस्तान और डीएनए ने भी ‘कॉन्ग्रेस एंगल’ को नजरअंदाज करने की कोशिश की।

बृजेश कलप्पा सालों से कॉन्ग्रेस से जुड़े हुए हैं। उन्हें 2018 में कॉन्ग्रेस मीडिया संयोजक नियुक्त किया गया था और वह एआईसीसी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं। कलप्पा, सिद्धारमैया सरकार के कानूनी सलाहकार भी थे। सिद्धारमैया द्वारा उन्हें कर्नाटक सरकार में मंत्री का पद भी दिया गया था। उन्हें मदिकेरी के विधायक टिकट की उम्मीद थी, मगर पार्टी ने उनकी जगह एचएस चंद्रमौली को टिकट दे दी।

DG ने थरूर से पूछा- आप फेक न्यूज पर इतनी जल्दी भरोसा कैसे कर लेते हैं? कॉन्ग्रेस नेता ने कहा था- IDSA फैकल्टी को नहीं मिल रही सैलरी

एक न्यूज रिपोर्ट के आधार पर कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने ट्विटर पर कल (सितंबर 14, 2020) दावा किया कि ‘मनोहर पर्रिकर इंस्टिट्यूट ऑफ डिफेन्स एंड एनालिसिस’ के फैकल्टीज को अगस्त और सितम्बर महीने की न तो सैलरी मिली है और न ही उन्हें पेंशन दिया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय रक्षा मंत्रालय के प्रीमियर थिंक टैंक ने इस तरह का निर्णय लिया है, जिससे वो स्तब्ध हैं। उन्होंने दावा किया कि ‘मनोहर पर्रिकर IDSA’ में फैकल्टीज को सैलरी और पेंशन नहीं दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने इसे मोदी सरकार की वित्तीय क्षमता से भी जोड़ा।

इसके बाद शशि थरूर की इस बात का जवाब खुद ‘मनोहर पर्रिकर IDSA’ के डायरेक्टर जनरल सूजन चिनॉय ने दिया और शशि थरूर के दावों को खारिज करते हुए पूछा कि आखिर वह झूठे दावों पर यकीन कैसे कर लेते हैं।

सूजन चिनॉय ने अपने ट्वीट में खुद की तुलना ‘बुक ऑफ सैमुअल’ के पात्र डेविड से की और शशि थरूर की तुलना गोलिएथ से करते हुए कहा कि आखिर वो फेक न्यूज़ पर इतनी जल्दी भरोसा कैसे कर लेते हैं? जिसका थरूर ने कोई जवाब नहीं दिया।

चिनॉय ने अपने ट्वीट में लिखा, “रक्षा मंत्रालय ने पहले ही फंड सैंक्शन कर दिए हैं और सितंबर की सैलरी भी अब देनी बाकी नहीं है। उम्मीद है राष्ट्र के लोग एक साथ आ सकते हैं और राष्ट्रीय महत्व-रक्षा और विकास के मामलों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं!”

उल्लेखनीय है कि शशि थरूर ने जिस खबर के आधार पर मोदी सरकार को घेरने का प्रयास किया था। वह खबर रविवार (सितम्बर 13, 2020) को द हिंदू में प्रकाशित हुई थी। उस खबर में दावा किया गया था कि MP-IDSA ने अपनी फैकल्टी को यह बात कही है कि वह उन्हें सैलरी और पेंशन नहीं दे सकते।

द हिंदू की रिपोर्ट का दावा था कि यह सूचना अगस्त के अंत में एक ईमेल में महानिदेशक द्वारा फैकल्टी को दी गई थी। साथ ही इसके पीछे यह वजह बताई गई थी कि ऐसा फंड में कमी के कारण है।

मनोहर पर्रिकर इंस्टिट्यूट ऑफ डिफेन्स एंड एनालिसिस

गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही केंद्र सरकार ने पूर्व रक्षा मंत्री दिवंगत मनोहर पर्रिकर की ‘प्रतिबद्धता और विरासत’ के सम्मान में सरकारी थिंक टैंक रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान (IDSA) का नाम बदलकर मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान (Manohar Parrikar Institute for Defence Studies and Analyses) कर दिया था।

इस संबंध में बयान जारी करते हुए सरकार की ओर से कहा गया था कि मनोहर पार्रिकर ने पठानकोट और उरी जैसे हमलों की कठिन चुनौती के दौर में रक्षा मंत्रालय का नेतृत्व किया और अनुकरणीय साहस के साथ उनका जवाब दिया। आगे इस बयान में लिखा गया था, “अपने पूरे करियर के दौरान सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और समर्पण के प्रतीक दिवंगत मनोहर पर्रिकर ने जुझारूपन दिखाया और बड़ी निर्भीकता से विषम स्थितियों से टक्कर ली।”

बता दें कि मनोहर पर्रिकर 9 मार्च, 2014 से लेकर 14 मार्च, 2017 तक देश के रक्षा मंत्री रहे थे। पिछले साल 17 मार्च को कैंसर (Cancer) से उनका निधन हो गया था। उनके जाने के बाद सरकार ने इंस्टीट्यूट का नाम उनके नाम पर करते हुए कहा था कि जब पर्रिकर रक्षा मंत्री थे तब भारत में कई निर्णय लिए गए जिनसे ‘देश की सुरक्षा क्षमता बढ़ी, स्वदेशी रक्षा उत्पादन में तेजी आई और पूर्व सैनिकों की जिंदगी बेहतर बनी।

मुस्लिम उम्मीदवारों को हवलदार की ट्रेनिंग: उद्धव सरकार के बाद अब मदरसा की घोषणा, कॉन्ग्रेस MLA भी मीटिंग में

भारत में पहली बार किसी मदरसे ने ऐलान किया है कि वह मुस्लिम समुदाय के 200 लोगों को हवलदार बनाने का प्रशिक्षण देगा। यह प्रशिक्षण केवल मुस्लिम उम्मीदवारों को हवलदार चयनित होने से पहले दिया जाएगा और यह पूरी तरह मुफ्त होगा। महाराष्ट्र के मदरसे ने अपनी घोषणा में कहा है कि वह राज्य की हवलदार भर्ती की तैयारी कर रहे मुस्लिम उम्मीदवारों को प्रशिक्षण देगा। 

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़ ग्रांट रोड स्थित मदरसा जामिया अशरफ़िया कादरिया ने इस प्रशिक्षण की योजना का ऐलान किया। इसके अनुसार मुस्लिम समुदाय के लगभग 200 युवाओं को 3 महीने के प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत तैयार कराया जाएगा।

मदरसे के मौलानाओं ने इस सम्बंध में विस्तार से चर्चा करने के लिए बैठक भी बुलाई। जिसमें मदरसे के मुखिया मौलाना मोईन अशरफ कादरी (मोईन आलम), कॉन्ग्रेस विधायक अमीन पटेल, सामाजिक कार्यकर्ता एमए खालिद शामिल थे। बैठक में शामिल होने वाले हर सदस्य ने तय किया कि प्रशिक्षण की पूरी रूपरेखा क्या होगी।  

मोईन आलम ने इस मुद्दे पर कहा, “जामिया अशरफ़िया कादरिया प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के निःशुल्क रहने और खाने का प्रबन्ध करेगा। कुछ लोगों ने इस प्रक्रिया में हमारी आर्थिक मदद करने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया है।” इसके अलावा महाराष्ट्र में पहले ही अल्पसंख्यक समुदाय के विकास के लिए एक विभाग बना हुआ है।

कुछ और लोगों ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। कैसर खालिद आईजीपी (नागरिक अधिकार सुरक्षा) ने कहा, “पिछले काफी समय से कॉन्स्टेबुलरी (पुलिस विभाग) में अल्पसंख्यकों के पर्याप्त प्रतिनिधित्व की ज़रूरत महसूस हो रही थी। अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का प्रतिनिधित्व बढ़ने से विश्वास बढ़ता है और पुलिस को लेकर भ्रम दूर होते हैं। क़ानून व्यवस्था को बेहतर तरीके से चलाने के लिए हर समुदाय के हवलदार का मौजूद होना ज़रूरी है। जिससे हर समुदाय के लोगों से संवाद करके क़ानून व्यवस्था बनाए रखे।”

सामाजिक कार्यकर्ता एमए खालिद ने कहा:

“कॉन्स्टेबुलरी में मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या कम होने का एक बड़ा कारण है मराठी भाषा। मैंने साल 2018 में इसकी परीक्षा दी थी लेकिन मराठी भाषा की अच्छी समझ नहीं होने की वजह से मेरा चयन नहीं हो पाया था। जबकि मैं शारीरिक रूप से पूरी तरह सही था। परीक्षा में सारे प्रश्न मराठी भाषा में होते हैं और मुस्लिम उम्मीदवारों के वह बहुत मुश्किल होता है। सरकार की तरफ से यह प्रशिक्षण लगभग 2 महीने का है लेकिन हमारे प्रशिक्षण की अवधि 3 महीन होगी। एक महीने का समय हम मुस्लिम उम्मीदवारों की मराठी भाषा सुधारने में लगाएँगे।” 

इसके बाद कॉन्ग्रेस विधायक अमीन पटेल ने कहा, “यह बहुत अच्छी बात है कि मोईन मियां मुस्लिम उमीदवारों के लिए इतने प्रयास कर रहे हैं। लिखित परीक्षा की तैयारी के अलावा अभ्यर्थियों को सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों द्वारा शारीरिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।”

ख़बरों की मानें तो बहुत जल्द महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग उम्मीदवारों की तैयारी के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगा। मुस्लिम समुदाय से जुड़े नेताओं का कहना है कि फंड्स की कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि उन्होंने इस योजना के लिए डोनेशन (आर्थिक सहयोग) लेने की योजना बनाई है। 

इसके पहले भी उद्धव सरकार पर महाराष्ट्र में मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लग चुका है। राज्य सरकार ने हाल ही में फैसला लिया था, जिसके मुताबिक़ वहाँ अल्पसंख्यक युवाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा संख्या में पुलिस में उनकी भर्ती हो। महाराष्ट्र की उद्धव सरकार में अल्पसंख्यक विकास और स्किल डेवलपमेंट मामलों के मंत्री नवाब मलिक ने इसकी घोषणा करते हुए इससे जुड़ी जानकारी साझा की थी।

शरद पवार की एनसीपी के नेता व मंत्री नवाब मलिक ने ट्विटर पर साझा की गई सूचना में बताया था कि पुलिस में भर्ती से पहले अल्पसंख्यक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में अल्पसंख्यक पुलिस में भर्ती हों, इसीलिए उन्हें पहले ही प्रशिक्षित किया जाएगा। बताया गया कि अभी प्रशिक्षण के लिए उत्सुक अभ्यर्थियों के चयन के लिए 14 जिलों में अभियान शुरू भी कर दिया गया है।

कुछ दिनों बाद डायरेक्ट ट्रेनिंग की शुरुआत कर दी जाएगी। बाकी जिलों में भी ट्रेनिंग जल्द ही शुरू होगी। इस साल के अंत तक राज्य में 12,500 पुलिस कर्मियों की भर्ती करने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि इस भर्ती में राज्य में मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, सिख, पारसी, जैन और यहूदी अल्पसंख्यक समुदायों के अधिक से अधिक उम्मीदवारों को भर्ती के लिए तैयारी करने का अवसर दिया जाएगा।

उम्मीदवारों को सामान्य ज्ञान और शारीरिक परीक्षण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। वर्तमान में, इच्छुक उम्मीदवारों से वर्धा, गढ़चिरोली, अमरावती, नांदेड़, जालना, पुणे, यवतमाल, परभणी, सोलापुर, औरंगाबाद, बुलदाना, नासिक, बीड और अकोला जिलों में आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं। कहा गया है कि इच्छुक उम्मीदवार उस जिले में प्रशिक्षण के लिए जिला कलेक्टर या चयनित एनजीओ के पास आवेदन करें।

आपको यह कहने की अनुमति नहीं दे सकता कि मुस्लिम सिविल सेवाओं में घुसपैठ कर रहे हैं: सुदर्शन न्यूज़ के ‘UPSC Jihad’ शो पर SC

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार (सितंबर 15, 2020) को सुदर्शन न्यूज के कथित विवादित कार्यक्रम ‘नौकरशाही में मुस्लिमों की घुसपैठ’ पर सुनवाई की। इस पीठ का नेतृत्व न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने किया। इस दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि कल के बाद फिर से इस मामले पर विचार किया जाएगा। इसके साथ ही सुदर्शन टीवी पर अगली सुनवाई तक प्रसारण को स्थगित कर दिया गया।

वरिष्ठ वकील दिवान ने इस पर दलील देते हुए कहा, “मैं इसे प्रेस की स्वतंत्रता के रूप में दृढ़ता से विरोध करुँगा। कोई पूर्व प्रसारण प्रतिबंध नहीं हो सकता है। हमारे पास पहले से ही चार प्रसारण हैं, इसलिए हम विषय को जानते हैं। यदि यह एक पूर्व संयम आदेश है तो मुझे बहस करनी होगी। विदेशों से धन पर एक स्पष्ट लिंक हैं।”

जस्टिस चंद्रचूड़ ने आगे कहा, “हम इस बात को लेकर चिंतित हैं कि जब आप कहते हैं कि जामिया मिलिया के छात्र सिविल सेवाओं में घुसपैठ करने वाले समूह का हिस्सा हैं, तो फिर हम बर्दाश्त नहीं कर सकते। देश के सर्वोच्च न्यायालय के रूप में, हम आपको यह कहने की अनुमति नहीं दे सकते कि मुस्लिम सिविल सेवाओं में घुसपैठ कर रहे हैं। आप यह नहीं कह सकते कि पत्रकार को यह करने की पूर्ण स्वतंत्रता है।”

वहीं जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा, “हमें विजुअल मीडिया के स्वामित्व को देखने की जरूरत है। कंपनी का संपूर्ण शेयर होल्डिंग पैटर्न जनता के लिए साइट पर होना चाहिए। उस कंपनी के राजस्व मॉडल को यह जाँचने के लिए भी रखा जाना चाहिए कि क्या सरकार एक में अधिक विज्ञापन डाल रही है और दूसरे में कम।”

उन्होंने आगे कहा कि मीडिया खुद के द्वारा निर्धारित मानकों की बेईमानी नहीं कर सकता। डिबेट में एंकर की भूमिका देखने की जरूरत है। जब कोई बोलता है, तो उसे सुनना चाहिए। मगर जब हम टीवी डिबेट को देखते हैं, तो एंकर सबसे अधिक समय लेता है। वह वक्ता की आवाज को म्यूट करके सवाल पूछते हैं। उनका कहना था कि मीडिया की स्वतंत्रता नागरिकों की ओर से है।

जस्टिस चंद्रचूड़ आगे कहते हैं, “इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की शक्ति बहुत बड़ी है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विशेष समुदायों या समूहों को लक्षित करके केंद्र बिंदु बन सकता है। एंकरों की शिकायत यह है कि एक विशेष समूह सिविल सेवाओं में प्रवेश प्राप्त कर रहा है। यह कितनी धूर्तता है?”

उन्होंने आगे यह भी कहा, “इस तरह के धूर्त आरोप यूपीएससी परीक्षाओं पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं। बिना किसी तथ्यात्मक आधार के ऐसे आरोप लगाने की अनुमति कैसे दी जा सकती है? क्या मुक्त समाज में ऐसे कार्यक्रमों की अनुमति दी जा सकती है?”

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर दलील देते हुए कहा, “पत्रकार की स्वतंत्रता सर्वोच्च है। जस्टिस जोसेफ के बयानों के दो पहलू हैं। इस तरह से प्रेस को नियंत्रित करना किसी भी लोकतंत्र के लिए विनाशकारी होगा।”

उन्होंने आगे कहा, “इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अलावा एक समानांतर मीडिया भी है जहाँ एक लैपटॉप और एक पत्रकार लाखों लोगों को अपनी सामग्री पहुँचा सकते हैं। मैं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया के बारे में बात कर रहा हूँ। पत्रकार की स्वतंत्रता को सम्मान देकर जस्टिस जोसेफ की चिंताओं को दूर किया जाना चाहिए। बड़ी संख्या में वेब पोर्टल हैं, जिनका स्वामित्व उनके द्वारा दिखाए जाने वाले कार्यों से भिन्न है।”

जस्टिस जोसेफ का कहना था, “जब हम पत्रकारिता की स्वतंत्रता की बात करते हैं, तो यह निरपेक्ष नहीं है। वह अन्य नागरिकों की तरह ही स्वतंत्रता साझा करता है। अमेरिका की तरह भारत में पत्रकारों की कोई अलग स्वतंत्रता नहीं है। हमें ऐसे पत्रकारों की जरूरत है जो अपनी डिबेट में निष्पक्ष हों।”

गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सुदर्शन न्यूज की ‘नौकरशाही में मुस्लिमों की घुसपैठ’ वाली कथित रिपोर्ट के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। शुक्रवार 28 अगस्त 2020 को रात आठ बजे इसका प्रसारण होना था। जामिया के छात्रों ने इस पर रोक लगाने को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि यह रिपोर्ट समुदाय के खिलाफ घृणा को बढ़ावा देती है।

Pak में 1 साल में 2 हिंदू डॉक्टरों की हत्या: इस बार चाकू से रेता गया गला, इससे पहले रेप के बाद किया था मर्डर

पाकिस्तान में एक और हिंदू डॉक्टर की बेहरमी से हत्या कर दी गई। डॉक्टर का नाम लाल चंद बागरी है। बताया जा रहा है कि बागरी सिंध प्रांत के तांदो अल्यहार में स्थित अपने घर में रह कर डॉक्टरी की प्रैक्टिस कर रहे थे। लेकिन सोमवार को कुछ अज्ञात लोगों ने उनके घर में घुस कर उनका गला चाकू से रेत दिया। बाद में कुछ पड़ोसियों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी।

सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों की आवाज उठाने वाले वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी ने भी इस घटना के बाद की वीडियो अपने हैंडल से साझा की। वीडियो में डॉक्टर का शव खून से लथपथ जमीन में पड़ा देखा जा सकता है। ट्वीट में लिखा गया है, “हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले डॉक्टर लाल चंद बागरी तांदो अल्यहार में मार दिए गए। उनकी गर्दन किसी तेज धार वाले हथियार से काटी गई।”

ट्वीट में आगे इमरान सरकार में मानव अधिकार मंत्री शिरीन मजारी को टैग करके लिखा गया कि यदि वह अल्पसंख्यकों का संरक्षण नहीं कर सकतीं तो फिर उन्हें अपने पोस्ट से इस्तीफा देना चाहिए।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में मात्र एक साल में यह दूसरे हिंदू डॉक्टर की हत्या हुई है। इससे पहले कराची में एक हिंदू महिला डॉक्टर का शव उसके हॉस्टल के कमरे से मिला था। महिला डॉक्टर का नाम नमृता चंदानी था।

उनकी पोस्टमॉर्टम में यह बात सामने आई थी कि रेप के बाद हत्या की गई। जबकि प्रशासन इसे बार-बार आत्महत्या का मामला बताना चाहता था। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया था। मगर, बाद में उन दोनों को रिहा कर दिया गया।

अब हालिया मामले में भी अभी तक पुलिस को आरोपितों की जानकारी नहीं है। बताया जा रहा है हत्या को अंजाम देने के बाद सभी आरोपित मौके से फरार हो गए। पुलिस अब पूछताछ करके इनका पता लगाने की कोशिश कर रही है।

दूसरी ओर सोशल मीडिया पर भी इस मामले के सामने आने के बाद पाकिस्तान में हिंदुओं की सुरक्षा पर फिर सवाल हो रहा है। लोग इस घटना की जानकारी तो साझा कर रहे हैं। मगर, वीडियो इसलिए नहीं शेयर कर रहे क्योंकि उसमें चारों ओर खून नजर आ रहा है। ट्विटर पर पूछा जा रहा है कि क्या पाकिस्तान में हिंदू आपातकाल स्थिति का सामना कर रहे हैं। क्या कोई शिया इसकी निंदा करेगा?

दूरदर्शन एक ऐसी भावना, जो देश को एकता का आभास कराती है: 61वीं सालगिरह पर भावुक हुए लोग, शेयर की यादें

दूरदर्शन आज यानी मंगलवार (15 सितंबर 2020) को अपनी 61वीं सालगिरह मना रहा है। उन ऐतिहासिक दिनों को याद करते हुए जब उस पर रामायण, महाभारत, चित्रहार, देख भाई देख, फौजी, मालगुडी डेज़ जैसे कई शानदार कार्यक्रम आते थे। आज भी वह कार्यक्रम आम लोगों के लिए किसी ‘क्लासिक’ से कम नहीं हैं।

दूरदर्शन ने 61वीं सालगिरह पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, “Celebrating 61 Glorious Years of Doordarshan!!” वीडियो में दूरदर्शन की वही पुरानी परम्परागत ट्यून थी जिसे सुनते हुए पीढ़ियाँ बड़ी हुई हैं। इसके बाद वीडियो में दूरदर्शन का लोगो भी अपनी पुराने शैली में नज़र आता है।

इस मौके पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी ट्वीट करके बधाई दी। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “दूरदर्शन अपने जीवन का भाग है। रामायण, महाभारत से लेकर न जाने कितने अच्छे कार्यक्रम दूरदर्शन ने दिए। आज भी भारत का लोक सेवा प्रसारक दूरदर्शन, DDNews, DDKisan, DDBharati, DDNational और DDRetro इतने चैनल्स के द्वारा निरंतर हम सबसे जुड़ा है। Happy #Doordarshanday!”

इसके अलावा कर्नाटक भाजपा की उपाध्यक्ष शोभा करंदलाजे ने भी दूरदर्शन की 61वीं सालगिरह के मौके पर शुभकामनाएं दी। साथ ही दूरदर्शन की अभूतपूर्व सेवाओं के लिए आभार भी जताया। 

मशहूर अभिनेता स्वप्निल जोशी जिन्होंने दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाली उत्तर रामायण में कुश का किरदार निभाया था। उन्होंने भी दूरदर्शन के स्थापना दिवस के मौके पर ट्वीट करके बधाई दी। 

दूरदर्शन के ट्वीट करने के बाद नेटीजन्स ने भी दूरदर्शन से जुड़ी यादों का ज़िक्र किया। तमाम यूज़र्स ने ट्वीट करके अपनी भावनाएं साझा की, कैसे दूदर्शन ने उनके बचपन को एक नया आयाम दिया था। 

एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, “इस संगीत में मासूमियत और बचपन के सपनों की खुशबू है। जब दुनिया एक ओएस्टर की तरह महसूस होती थी।” 

एक ट्विटर यूज़र ने लिखा कि दूरदर्शन सिर्फ एक चैनल ही नहीं था बल्कि हर भारतीय परिवार के सदस्य जैसा था। इसके बाद यूज़र ने दूरदर्शन पर आने वाली डॉक्यूमेंट्री, रविवार को आने वाले कार्यक्रम रंगोली और स्वतन्त्रता दिवस के दिन आने वाली परेड की भी प्रशंसा की। 

वहीं एक और ट्विटर यूज़र ने लोगों की धारणा बदलने में अहम भूमिका निभाने के लिए दूदर्शन का आभार जताया। 

एक ट्विटर यूज़र ने कहा दूरदर्शन एक ऐसी भावना है जो एकता का आभास कराती है। 

15 सितंबर 1959 को दूरदर्शन एक प्रयोग की तरह शुरू किया गया था। साल 1965 के दौरान इसे सेवा में तब्दील कर दिया गया। तभी यह सिग्नल के माध्यम से राजधानी दिल्ली के आस-पास लोगों के टेलीवीज़न सेट तक पहुँचा। 1972 के दौरान इन सेवाओं का दायरा बढ़ा कर मुंबई और अमृतसर तक कर दिया गया था। फिर 1975 के दौरान इसकी सेवाएं देश के अन्य शहरों तक भी पहुँची।    

दिल्ली सरकार के बुलावे पर फेसबुक ने कहा: हम भारत सरकार के दायरे में आते हैं, तुम्हारे नहीं

दिल्ली विधानसभा की शांति और सद्भाव समिति की ओर से दिल्ली दंगों में भूमिका को लेकर फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजीत मोहन को तलब किया गया था। हालाँकि ताजा जानकारी के अनुसार, फेसबुक उपाध्यक्ष ने समिति के सामने पेश होने से मना कर दिया और जवाब दिया कि वह भारत सरकार के दायरे में आते हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार शांति और सद्भाव समिति के प्रमुख राघव चड्ढा ने मंगलवार (सितंबर 15, 2020) को कहा, “हमने दिल्ली दंगों में भूमिका को लेकर फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजीत मोहन को तलब किया था, लेकिन फेसबुक की ओर से आए जवाब में हमें पूछताछ के लिए भेजे गए समन को वापस लेने को कहा गया। इसका कारण बताया गया है कि फेसबुक जैसे मिडिएटर का रेग्युलेशन भारत सरकार के विशेष अधिकार के अंतर्गत आता है।”

राघव चड्ढा ने आगे कहा कि फेसबुक का यह पत्र समिति के विशेषाधिकार की अवहेलना है। कमिटी के सामने पेश होने से इनकार करना दिल्ली दंगों में इसकी भूमिका के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने का एक प्रयास है। ताजा समन इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप जारी किया जाएगा।

आम आदमी पार्टी नेता राघव ने फेसबुक के इस रवैये को दिल्ली की दो करोड़ जनता का अपमान बताया है। साथ ही ये भी कहा कि फेसबुक के वकीलों ने अधिकारियों को गलत सलाह दी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा में दिल्ली दंगों में फेसबुक की भूमिका को लेकर चर्चा हो रही है। अगर फेसबुक ये कहता है कि संसद की समिति के सामने हमने अपना जवाब दे दिया है तो ये गलत है। विधानसभा समिति चाहे तो इसके लिए वॉरंट जारी करवा सकती है।

बता दें कि फेसबुक पर आरोप है कि उसने घृणास्पद भाषण को लेकर उदासीनता दिखाई, जिसके चलते दिल्ली की शांति भंग हुई। इसी आरोप के मद्देनजर समिति ने हाल में को फेसबुक इंडिया के अधिकारी अजीत मोहन को नोटिस जारी किया था। यह नोटिस वाल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित लेख के सामने आने के बाद जारी किया गया था।

AAP नेता का कहना है कि फेसबुक विधानसभा समिति से भाग रहा है और कुछ छिपा रहा है। जिससे ऐसा लगता है कि दिल्ली दंगों को लेकर फेसबुक पर जो आरोप लगे हैं, वो शायद बिल्कुल सही हैं। चड्ढा ने कहा कि चेतावनी के साथ आखिरी मौका फेसबुक को दे रहे हैं कि फेसबुक इंडिया के एमडी और वाइस प्रेसिडेंट अजीत मोहन समिति के सामने पेश हों।