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मोहम्मद आफताब के मारपीट और दबाव से तंग पूजा पटेल ने लगाई फाँसी, नमाज और इस्लाम के अनुसार रहने को किया जाता था मजबूर

मॉडल बनने के सपने सँजोने वाली पूजा को कहाँ पता था कि जिस मोहम्मद आफताब से उसने प्रेम विवाह किया वही उसकी मौत का कारण बन जाएगा। मामला उत्तर प्रदेश के भेलूपुर थाना क्षेत्र का है। जहाँ 25 वर्षीय पूजा पटेल ने शनिवार (12 सितंबर, 2020) सुबह फाँसी लगा कर अपनी जान दे दी।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुँच कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दरअसल, बनारस की रहने वाली युवती ने मुस्लिम युवक से 3 साल पहले प्रेम विवाह किया था। आसपास के रहने वाले लोग इस घटना को लव जिहाद का मामला बता रहे है। रिपोर्ट के अनुसार पूजा आज़ाद ख़यालों वाली लड़की थी। शादी के बाद जबरन उसे नमाज पढ़ने के लिए कहा जाता था। जिसका वह विरोध करती थी। इसी को लेकर शराबी पति और उसके परिजन पूजा को मारते पीटते थे। जिससे तंग आकर उसने खुदखुशी कर ली।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पूजा के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के बाद उसकी माँ ने बताया पूजा पटेल के ख्वाब काफी बड़े थे। वह मॉडल बनना चाहती थी। उसे क्या पता था जिस आफताब के लिए उसने अपने घर परिवार से लड़ झगड़ के शादी की है, उसी शादी के बाद उसे जिहाद का घिनौना रूप देखने को मिलेगा। अगर उसे इसकी जानकारी होती तो वह कभी उससे शादी नहीं करती।

पूजा की माँ किरण पटेल, भाई चेतन और आयुष ने बताया की पूजा जब कक्षा 10 में थी तब उसे मोहम्मद आफताब से प्यार हो गया था। आफताब नई सड़क पर एक कपड़े की दुकान पर काम करता था। इस बात की जानकारी लगने के बाद हमनें दोनों को दूर करने की बहुत कोशिश की। यहाँ तक कि हमनें अपना घर भी बदल लिया था और ककरमत्ता में रहने लगे थे। लेकिन फिर दो साल बाद इंटर में आफताब पूजा को अपने झाँसे में लेकर भाग गया। उसने पूजा से वादा किया कि वह उसका धर्म (हिंदू) अपना लेगा।

जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक पूजा की माँ ने बताया, शादी के बाद दोनों बनारस में एक किराए के मकान में रहते थे। आसपास के लोग पूजा को जोया सिद्दीकी के नाम से जानते थे। उन्होंने आरोप लगाया, आफताब के माँ पूजा पर नमाज पढ़ने की जबरदस्ती करती थी। और इस्लाम धर्म के अनुसार रहने के लिए बोलती थी।

पूजा दोनों धर्म का पालन करती थी, वह ईद भी मानती थी और छठ भी। पूजा और आफताब का एक बेटा भी है जिसका पूजा ने हिंदू नाम नक्ष रखा है। लेकिन उसके घर वालों को बेटे के नाम से भी काफी एतराज था।

पूजा मॉडलिंग सीखने मार्च में मुंबई गई थी। कोरोना वायरस की वजह से वह जून में वापस आ गई थी। वह वापस मुंबई जाना चाहती थी। लेकिन आफताब और उसके परिवार वाले इसके विरुद्ध थे। लेकिन पूजा ने इसकी जिद नहीं छोड़ी। बात इतनी बढ़ गई कि पूजा आफताब से तलाक लेना चाहती थी। आफताब के परिजनों को पूजा का खुलापन पसंद नहीं था।

पूजा के परिजनों का आरोप है, उनकी बेटी ने दबाव और मारपीट के चलते यह कदम उठाया है। वहीं मामले की सूचना मिलने पर पहुँचे थाना प्रभारी अजय श्रोत्रीय ने आरोपित पति को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरु कर दिया है।

कपिल सिब्बल के खिलाफ विशेष PMLA अदालत में आपराधिक शिकायत ट्रांसफर करने की याचिका को लेकर HC ने बरखा को भेजा नोटिस

‘पत्रकार’ बरखा दत्त ने कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के ख़िलाफ़ दर्ज कराए गए शिकायत को पटियाला हाउस कोर्ट से विशेष पीएमएलए कोर्ट में में ट्रांसफर करने की अपील की थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस बाबत ‘पत्रकार’ बरखा दत्त को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस न्यायमूर्ति अनूप जे भंभानी की एकल खंडपीठ द्वारा जारी किया गया है। अदालत में बरखा दत्त की तरफ से कोई भी पेश नहीं हुआ था। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होनी है।

बरखा दत्त ने पिछले साल कपिल सिब्बल, उनकी पत्नी प्रोमिला सिब्बल और उनकी टीवी नेटवर्क कंपनी एनॉलॉग मीडिया के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 और 120 के तहत शिकायत दर्ज कराई थी। पत्रकार बरखा दत्त ने तिरंगा टीवी के प्रमोटर्स कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी प्रोमिला सिब्बल पर बिना किसी पूर्व सूचना के तिरंगा टीवी पर काम करने वाले पत्रकारों को निकाल देने का आरोप लगाया था।

बरखा दत्त ने अपने पिछले चैनल के प्रमोटर और कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी प्रमिला सिब्बल से ₹74 लाख सूद समेत लेने के लिए अदालत में मुकदमा दायर किया था।  बरखा के आरोपों में इसके अतिरिक्त खुद को और चैनल के अन्य वरिष्ठ कर्मचारियों को एक साल से अधिक समय से वेतन न दिए जाने का भी आरोप था। इसके अलावा उन्होंने कहा था कि बिना कर्मचारियों को वेतन दिए सिब्बल दम्पति का लंदन में ऐश करना विजय माल्या जैसा कृत्य है। इसके लिए उन्होंने खुद को सिब्बल द्वारा मानहानि के मुकदमे से धमकाए जाने की बात भी ट्विटर पर कही थी।

चैनल पिछले साल जुलाई में बंद हो गया था। दत्त ने प्रोमिला सिब्बल पर चैनल की महिला पत्रकारों के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया था, जिसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) में शिकायत दर्ज कराई थी। बरखा दत्त ने आरोप लगाया था कि कपिल सिब्बल की पत्नी महिला कर्मचारियों को “कुतिया” या “बिच” बुलाती थीं। साथ ही इतनी घिनौनी बात को साबित करने के लिए यह भी कहा था कि इस संबंध में उनके पास हस्ताक्षर किए हुए हलफनामे भी हैं।

गौरतलब है कि बरखा दत्त ने पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल को निशाना बनाते हुए लिखा था कि वे और उनकी पत्नी द्वारा चलाए जा रहे तिरंगा टीवी में भयावह स्थिति है। उन्होंने बताया था कि चैनल द्वारा 200 से ज्यादा कर्मचारियों को बिना 6 महीने की सैलरी दिए निकाल दिया गया है। उनका कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल को लेकर कहना था कि एक व्यक्ति जो जनता के बीच में खुद को बिलकुल साफ़ दिखाता है, वो पत्रकारों के साथ घिनौना बर्ताव कर रहा है।

हालाँकि, उनके आरोपों के जवाब में सिब्बल ने दावा किया था कि बरखा दत्त को चैनल बंद होने से पहले ही बर्खास्त किया जा चुका था। इसके पीछे उन्होंने कारण अनुशासनहीनता बताया था। इसके अलावा उन्होंने दत्त को एक भी पैसा देने से साफ़ इनकार कर दिया था।

शिवसैनिकों के हमले में घायल पूर्व नौसेना अधिकारी से राजनाथ सिंह ने की बातचीत, कहा: इस तरह के हमले पूरी तरह से अस्वीकार्य

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज सेवानिवृत्त भारतीय नौसेना के अधिकारी मदन शर्मा से बात की और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। बता दें, नौसेना के पूर्व अधिकारी को महाराष्ट्र में शिवसेना के गुंडों ने सीएम उद्धव ठाकरे पर एक कार्टून साझा करने के लिए बेरहमी से पीटा था।

राजनाथ सिंह ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इसकी जानकारी दी। उन्होंने शर्मा के स्वास्थ्य के बारे में पूछताछ की और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक पर इस तरह के हमले पूरी तरह से अस्वीकार्य और अपमानजनक है।

वहीं इस बात की जानकारी टाइम्स नाउ को देते हुए मदन शर्मा ने बताया की रक्षा मंत्री ने उन्हें फोन किया और उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछताछ की। राजनाथ सिंह ने यह भी पूछा कि यह घटना कैसे हुई। इस पर उन्होंने शिवसेना के गुंडों द्वारा किए गए हमले के बारे में विस्तार से बताया।

शर्मा ने रक्षा मंत्री को यह भी बताया कि हाल ही में महाराष्ट्र सरकार जिस तरह से काम कर रही है, उससे वह खुश नहीं हैं। उन्होंने पिछले 3-4 महीनों से राज्य के मामलों की स्थिति के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की। साथ ही उन्होंने रक्षा मंत्री से इसके बारे में कुछ करने के लिए भी कहा।

मदन शर्मा ने पूछने पर यह भी बताया कि किसी भी शिवसेना नेता या मंत्री ने उनसे संपर्क नहीं किया है और न ही इस क्रूर हमले के लिए उनसे माफी माँगी है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के नेता अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं की गलती पर खेद भी जताना नहीं चाहते हैं क्योंकि क्योंकि इससे उनके अहंकार को चोट पहुँचेगी। उन्होंने चिंता जताई कि चोटों से उबरने के बाद वह और उनका परिवार फिर से हमले की चपेट में आ सकता है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का कार्टून शुक्रवार को सोशल मीडिया में फॉरवर्ड करने पर मुंबई में शिवसेना कार्यकर्ताओं ने सेवानिवृत्त नेवी ऑफिसर मदन शर्मा पर हमला बोल दिया था। इस हमले में पूर्व नेवी अधिकारी की आँख बुरी तरह जख्मी हो गई थी।

उन्होंने इस मामले में मुंबई की समता नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया था। वहीं गिरफ्तारी के 12 घंटे के भीतर ही उन सभी आरोपितों को जमानत दे दी गई थी। गिरफ्तार किए गए शिवसैनिकों में पार्टी का शाखा प्रमुख कमलेश कदम के अलावा 5 और कार्यकर्ता शामिल थे।

ड्रग्स मामले में रिया द्वारा नामित रकुल प्रीत सिंह रह चुकी हैं तेलंगाना सरकार के कैम्पेन ‘Say No to Drugs’ की ब्रांड एम्बेसडर

रिया चक्रवर्ती ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की पूछताछ में ड्रग्स लेने वाले कई बड़े नामों का खुलासा किया है। इस संबंध में एनसीबी ने बॉलीवुड के लगभग 25 बड़े नामों को समन भेजने की तैयारी कर ली है। रिया चक्रवर्ती ने जिन नामों का खुलासा किया है उनमें दो शुरूआती नाम हैं- सारा अली खान और रकुल प्रीत सिंह।

इस मामले में हैरानी की बात है कि अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह के लिए ड्रग्स का मुद्दा इतना बड़ा नहीं है जिस पर इतना ज़ोर दिया जाए। तेलंगाना पुलिस ने रकुल प्रीत को ‘say no to drugs’ (ड्रग्स को नहीं कहो) अभियान का हिस्सा बनाया था। 

पहले बात करते हैं उस साक्षात्कार की, जिसमें रकुल प्रीत सिंह का ड्रग्स को लेकर नज़रिया स्पष्ट होता है। रकुल प्रीत सिंह ने आज से लगभग 3 वर्ष पहले एक साक्षात्कार दिया था। यह साक्षात्कार 8 अगस्त 2017 को TV9 समाचार समूह पर प्रसारित हुआ था।

इस बातचीत में ड्रग्स से जुड़े सवाल पर रकुल प्रीत सिंह ने कहा, “यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे हम और आप (मीडिया) इतनी हवा दे रहे हैं। यह एक सामान्य सा मुद्दा है और इस पर सामान्य सी जाँच जारी है। हमारे पास ध्यान देने के लिए और भी अलग मुद्दे हैं और यह बात ठीक है कि इस पर जाँच हो रही है।” 

इसके बाद अपनी बात में सुधार लाते हुए अभिनेत्री ने कहा, “कोई भी व्यक्ति ड्रग्स का समर्थन नहीं करने वाला है। यह अच्छी बात है कि इसे सिस्टम से ख़त्म कर दिया जाए। अभी इस मुद्दे पर जाँच चल रही है, इसलिए हमें इस पर कम बात करनी चाहिए। हमें सिर्फ ख़बर तैयार करने के लिए इस मुद्दे पर बात नहीं करनी चाहिए। बल्कि हमें इस मुद्दे को और बेहतर तरीके से समझने की ज़रूरत है।” 

ड्रग्स के मामले में रकुल प्रीत से जुड़ी एक और घटना है, जो हैरान करने वाली है। दरअसल तेलंगाना में ड्रग्स के विरुद्ध ‘say no to drugs’ नामक एक अभियान शुरू किया गया था। तेलंगाना सरकार ने रकुल प्रीत को इस अभियान का ब्रांड एम्बेसडर चुना था।

इस अभियान के तहत ड्रग्स के विरोध में कई बड़े आयोजन कराए गए थे। साल 2017 में तेलंगाना की हैदराबाद पुलिस ने इस अभियान का एक पोस्टर बनवाया था। जिसमें रकुल प्रीत सिंह अभियान की मुखिया के तौर पर नज़र आ रही थीं। लेकिन अफ़सोस अब उन्हीं रकुल प्रीत सिंह का नाम ड्रग्स का इस्तेमाल करने में सामने आया है। 

इस मामले पर सबसे ज़्यादा उल्लेखनीय प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है इंटरनेट पर। रकुल प्रीत सिंह और सारा अली खान उन अभिनेत्रियों में से हैं जो अपने स्वास्थ्य को लेकर बहुत जागरूक रहती हैं। इतना ही नहीं वह अक्सर अपने सोशल मीडिया हैंडल पर अच्छा खाने और योग अभ्यास की तस्वीरें और वीडियो साझा करती हैं। एक ट्विटर यूज़र ने ट्वीट करते हुए लिखा, “यही रकुल प्रीत और सारा अली खान अपने इन्स्टाग्राम पर अच्छा खाने और योगा को बढ़ावा देते हैं।” 

वहीं एक और ट्विटर यूज़र ने सारा अली खान पर पर ट्वीट करते हुए लिखा, “अगर सारा अली खान ड्रग्स की कुछ डोज़ लेती हैं तो कुछ ऐसी नज़र आएँगी।”

बीते दिन रिया चक्रवर्ती ने NCB के सामने बॉलीवुड के ऐसे नामों का खुलासा किया था जो कथित तौर पर ड्रग्स लेते हैं और दूसरों को मुहैया कराते हैं। ख़बरों की मानें तो रिया चक्रवर्ती ने पूछताछ में कहा था कि लगभग 80 फीसदी बॉलीवुड कलाकार ऐसे हैं जो ड्रग्स का सेवन करते हैं। रिया ने जिन नामों का खुलासा किया है उनमें से कई बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता, प्रोड्यूसर और निर्देशक भी थी।

अपने बयान में रिया चक्रवर्ती ने सुशांत सिंह राजपूत को ड्रग्स उपलब्ध कराने की बात भी स्वीकार की थी। हैरान कर देने वाले खुलासे में रिया चक्रवर्ती ने बताया था कि सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह और डिज़ाइनर सिमोन खम्मबट्टा मादक पदार्थों का सेवन करती हैं।

पूछताछ के दौरान रिया ने सुशांत सिंह की दोस्त रोहिणी अय्यर और फिल्म निर्माता मुकेश छाबड़ा पर भी ड्रग्स लेने का आरोप लगाया था। 30 जुलाई 2019 को करण जौहर के घर एक ड्रग्स हाउस पार्टी हुई थी। एनसीबी बहुत जल्द इस मामले में भी जाँच शुरू कर सकती है। करण जौहर के घर पर हुई इस पार्टी का वीडियो इंटरनेट पर खूब वायरल हुआ था। अकाली दल के नेता मजिंदर सिंह ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए आरोप लगाया कि इसमें शामिल लगभग सारे लोग ड्रग्स के नशे में थे।

रमन बने अफजल ने नेहा को बहन बनाकर घर से भगाया: घर से ₹25000 कैश, 3 लाख के गहने, एटीएम कार्ड गायब

कानपुर में लव जिहाद का एक नया मामला सामने आया है। गोविंदनगर थाना क्षेत्र में एक मुस्लिम युवक ने एक हिंदू लड़की को बहन बनाया और फिर घर से भगा ले गया। लड़की की माँ ने बताया कि अफजल अंसारी नाम के मुस्लिम युवक ने फेसबुक पर रमन नाम से फर्जी ईडी बना कर उनकी बेटी को बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया। इतना ही नहीं अफजल ने फोन पर उनकी बेटी को इस्लाम कबूलवाने की बात भी कही है।

कानपुर में मजहबी फरेब के मामले रुकने का नाम ही नहीं ले रहे। जानकारी के मुताबिक, लव जिहाद का ये मामला कानपुर के गुजैनी इलाके का है। अफजल ने हिंदू लड़की नेहा को अपने प्यार में फँसाया और अब परिजनों को इस्लाम धर्म कबूल करवाकर निकाह करने की धमकी दे रहा है।

नेहा की माँ सन्नो देवी ने बताया कि गुरूवार शाम को नेहा अपनी सहेली के घर पर गई थी। जब वो देर रात घर नहीं आई तो घरवालों ने उसे खोजना शुरू कर दिया। सन्नो ने बताया कि देर रात एक लड़के का कॉल आया। उसने बताया कि उसका नाम रमन नहीं बल्कि अफजल अंसारी है। उसने कहा कि मेरी बेटी उसके साथ है और अब वह नेहा को इस्लाम धर्म कबूल कराकर उसे मुस्लिम बनाएगा फिर निक़ाह करेगा। अफजल की बातों ने घर वालों के होश उड़ा दिए है।

मामले की पूरी जानकारी देते हुए लड़की की माँ ने बताया, उनकी बेटी फेसबुक के जरिए अफजल से मिली थी। लड़के ने रमन नाम से अपनी आईडी बनाई थी। आरोपित ने नेहा का भरोसा जीतने के लिए पहले उसे बहन बनाया। और हर बात पर उसे बहन-बहन कह कर के संबोधित करने लगा। करीब दो साल से उनकी बेटी अफजल बने रमन से बात कर रही थी।

युवती की माँ ने यह भी बताया कि उन्होंने इस सिलसिले में अपनी बेटी से पूछताछ की थी। जिसपर उसने बताया कि वह लड़का उसकी बहुत रेस्पेक्ट करता है। रमन बने अफजल ने उसे बहन का दर्जा दिया हुआ है और राखी भी बंधवाई है। जिसका मैंने यकीन कर इस बात पर कोई एतराज नहीं किया था। नेहा ने एक बार उस लड़के से मुझसे फोन पर बात भी कराई थी।

लड़की की माँ ने आगे कहा, “अफजल ने फ़ोन पर उसे माँ कहते हुए बात की थी। उस समय मुझे क्या पता था कि भाई की आड़ में कोई दरिंदा इसके पीछे छिपा है। जिसकी नजर मेरी बेटी की जिस्म पर थी। बहन बहन कह कर उसने मेरी बेटी नेहा को अपने मोह जाल में फँसाया फिर मौका देखते ही उसे भगा ले गया।”

रिपोर्ट के अनुसार अफजल दुबई में काम करता है। और मूल रूप से वह दरभंगा बिहार का निवासी है। आरोपित का फोन आने के बाद डरे सहमे परिजनों ने जब घर की तिजोरी देखी तो पता चला 25 हजार रुपए, तीन लाख के गहने, बैंक की पासबुक, एटीएम सब गायब था। लड़की के पिता ने बताया नेहा के बैंक एकाउंट में भी करीब 1 लाख 50 हजार रुपए थे। मेरी बेटी को झाँसे में लेकर यह सब अफजल अंसारी ने ही कराया है।

नेहा के परिजनों ने पुलिस थाने में एफआईआर कर दी है। इंस्पेक्टर अनुराग मिश्र ने बताया कि लव जिहाद और धर्म परिवर्तन के बारे में तो सबूतों और जाँच पड़ताल के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। मामले कि छानबीन शुरू कर दी गई है। वहीं परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया है। वे सही सलामत अपनी बेटी की वापसी की माँग कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने रिया चक्रवर्ती के समर्थन में निकाली रैली: बंगाल की बेटी कहते हुए लगाए नारे

पश्चिम बंगाल राज्य मे अस्तित्वगत संकट से जूझ रही कॉन्ग्रेस पार्टी ने आरोपित रिया चक्रवर्ती के मामले को अपने राजनीतिक फायदे को देखते हुए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में भुनाना चाहा। कोरोनोवायरस महामारी के बीच सैकड़ों कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने शनिवार (12 सितंबर, 2020) को पश्चिम बंगाल के कोलकाता की सड़कों पर उतरकर अभिनेत्री रिया के लिए न्याय की माँग करते हुए उसे ‘बंगाल की बेटी’ कहा।

बता दें नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा ड्रग कार्टेल में उसकी भागीदारी के सबूत मिलने के बाद रिया को बाइकुला जेल में रखा गया है। कथित रूप से कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के निर्देश पर यह रैली कॉन्ग्रेस कार्यालय से निकाली गई थी। चौधरी पश्चिम बंगाल प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के वर्तमान अध्यक्ष भी हैं। हालाँकि, वह खुद रैली के दौरान मौजूद नहीं थे। यह बताया जा रहा है कि उन्होंने ही रैली निकालने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को फोन किया था।

कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने रैली के दौरान रिया चक्रवर्ती के समर्थन में नारे लगाए। उन्होंने बैनर और तख्तियाँ लेकर दावा किया कि रिया की गिरफ्तारी राजनीतिक साजिश का हिस्सा थी।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कोलकाता में पीसीसी अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के बाद रिया चक्रवर्ती को एक बंगाली ब्राह्मण महिला ’के रूप में वर्णित किया था और ड्रग के आरोपों में उनकी गिरफ्तारी को बेतुका करार दिया था।

संभवत: अधीर रंजन चौधरी ने आगामी 2021 पश्चिम बंगाल राज्य चुनावों से पहले राज्य के मतदाताओं को लुभाने की अपनी बेताब कोशिश में, कुशलतापूर्वक अपनी पार्टी को सबसे पुराने और ‘धर्म और जाति-आधारित’ कथनों में शामिल करने की कोशिश की है।

सुशांत के मामले में आरोपों से घिरी उनकी प्रेमिका रिया चक्रवर्ती को लेकर कॉन्ग्रेस एमपी ने बुधवार को ट्वीट करते हुए कहा था, “रिया के पिता सेना के एक अधिकारी रह चुके हैं और उन्होंने देश की सेवा की है। रिया एक बंगाली ब्राह्मण महिला भी हैं; सुशांत को न्याय की व्याख्या, बिहारी के लिए न्याय की व्याख्या नहीं होनी चाहिए। रिया के पिता को भी अपने बेटी के लिए न्याय माँगने का हक मिलना चाहिए। किसी भी मामले का मीडिया ट्रायल हमारी न्यायिक व्यवस्था के लिए शुभ नहीं है। सभी को न्याय मिले यही हमारे संविधान का मूल सिद्धांत है।”

उल्लेखनीय है कि इस बीच सुशांत सिंह राजपूत मामले से जुड़े ड्रग्स के आरोप में गिरफ्तार रिया चक्रवर्ती की जमानत याचिका को आज मुंबई की एक अदालत ने खारिज कर दिया। उसके भाई शौविक चक्रवर्ती और चार अन्य आरोपितों की जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई है।

रिया चक्रवर्ती 22 सितंबर तक बाइकुला जेल में न्यायिक हिरासत में रहेंगी। वहीं सोमवार को लिखित आदेश जारी होने के बाद वह जल्द से जल्द उच्च न्यायालय में अपील कर सकती हैं।

महिला CPI-M कैडर ने की आत्महत्या: सुसाइड नोट में लगाया दो माकपा कार्यकर्ताओं पर उत्पीड़न का आरोप

केरल में 41 वर्षीय महिला CPI-M कैडर ने पार्टी कार्यालय के अंदर फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृत माकपा कार्यकर्ता का नाम आशा बताया जा रहा है। पुलिस ने मौके पर से आशा द्वारा लिखा गया सुसाइड नोट बरामद किया है। इसमें आशा ने दो सीपीआई (एम) सदस्यों पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही आशा ने सुसाइड नोट में पार्टी को उसकी शिकायत पर ध्यान नहीं देने के लिए दोषी ठहराया है।

आशा के परिवार वालों का कहना है कि वो आशा कार्यकर्ता के रूप में काम करने के साथ ही माकपा की सदस्य भी थीं। उसने कुछ दिन पहले भी पार्टी की एक समिति की बैठक में हिस्सा लिया था। हालाँकि, पार्टी ने आशा के सदस्य होने की बात से इनकार किया है। फिलहाल पुलिस यह पुष्टि नहीं कर पा रही है कि वह पार्टी की सदस्य थी या फिर सिर्फ समर्थक।

गुरुवार (सितंबर 10, 2020) को वह कभी वापस न आने की बात कहकर पार्टी ऑफिस के लिए निकली थी। इससे चिंतित परिजन जब आशा की खोज में पार्टी ऑफिस पहुँचे तो वहाँ उसे फाँसी के फंदे से लटकते पाया। 

बरामद किए गए सुसाइड नोट में, आशा ने उल्लेख किया कि पार्टी के दो नेता – स्थानीय समिति के सदस्य कोट्टमन राजन और शाखा सचिव अनाथारविलाकम जॉय, उसे लंबे समय से उसे मानसिक रूप से परेशान कर रहा था, जिसके कारण वह डिप्रेशन का शिकार हो गई। सुसाइड नोट में यह भी कहा गया है कि उसने इस मामले को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सामने कई बार उठाया, मगर हर बार उसे अनसुना कर दिया गया।

आशा की मौत से खलबली मच गई। आशा के परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। बाद में, पुलिस ने उन्हें शांत करा दिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए तिरुवंतपुरम मेडिकल कॉलेज भेज दिया।

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने कहा कि सीपीआई-एम पार्टी में महिलाएँ सुक्षित नहीं है। उन्होंने डीजीपी से निष्पक्ष जाँच के लिए कहा है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब महिला ने राजन और जॉय द्वारा प्रताड़ित किए जाने का मामला उठाया गया था, तो ‘वरिष्ठ कॉमरेड’ कार्रवाई करने में विफल क्यों हैं। बता दें कि राजन और जॉय के खिलाफ अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।

पुलिस प्रथम दृष्टया मानती है कि यह आत्महत्या का मामला है। सीनियर इंस्पेक्टर रतीश कुमार ने TNM से कहा कि राजन और जॉय के खिलाफ अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, “सुसाइड नोट के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया जा सकता है। हम जाँच कर रहे हैं कि क्या आत्महत्या में उनकी कोई भूमिका थी। अगर ऐसा पाया जाता है तो उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।”

‘काफिर काफिर शिया काफिर’: कराची में सिपाह सहाबा से जुड़े कट्टरपंथी सुन्नियों ने निकाला शिया विरोधी रैली, की पत्थरबाजी

शुक्रवार को हज़ारों की तादाद में सुन्नी कट्टरपंथी समूहों ने कराची की सड़कों पर शिया विरोधी आन्दोलन किया। इस्लाम के दो वर्गों के बीच इतने बड़े पैमाने पर तनाव पैदा होने पर हिंसा की घटनाओं का ख़तरा भी बढ़ गया था। हाल ही पाकिस्तानी शिया नेता ने कथित तौर पर मुहर्रम जुलूस के सीधे प्रसारण के दौरान ऐतिहासिक इस्लामिक चेहरों पर अनैतिक टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी के चलते उस शिया नेता पर ईशनिंदा का आरोप लगा था जिसके विरोध में सुन्नी समुदाय के हज़ारों लोग सड़कों पर उतरे थे। 

विरोध प्रदर्शन मोहम्मद अली जिन्नाह की मज़ार ‘मज़ार-ए -कायद’ के पास शुरू हुआ था। इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले कट्टरपंथी सुन्नी तमाम शिया विरोधी समूहों से जुड़े हुए थे। इसमें सिपाह-ए-सहाबा और तहरीक लब्बाइक पाकिस्तान मुख्य थे। यह सभी समूह शिया समुदाय के लोगों को काफ़िर मानते हैं। ख़बरों की मानें तो सिपाह-ए-सहाबा ने पिछले कुछ समय में पाकिस्तान के भीतर सैकड़ों शिया समुदाय वालों की हत्या की है। 

सुन्नियों का नारा काफ़िर काफ़िर शिया काफ़िर 

इन विरोध प्रदर्शनों के तमाम वीडियो भी सामने आए हैं जिसमें हज़ारों की भीड़ देखी जा सकती है। ऐसे ही एक वीडियो में सुन्नी कट्टरपंथी बसों को रोकते हुए, झंडे फहराते हुए और शिया विरोधी नारे लगाते हुए देखे जा सकते हैं। लगाए गए तमाम नारों में एक नारा था ‘काफ़िर काफ़िर शिया काफ़िर।’ सैय्यद हुसैन मुजतबा रिज़वी नाम के ट्विटर यूज़र ने विरोध प्रदर्शन का वीडियो साझा करते हुए लिखा, “तो अब यह सब भी शुरू हो चुका है। सिपाह सहाबा और तहरीक लब्बाइक पाकिस्तान कराची में काफ़िर काफ़िर शिया काफ़िर के नारे लगा रहे हैं। इमाम बरगाह इमामिया पर तमाम गुंडों ने हमला भी किया है और कुछ ने तो पत्थर भी चलाए।” 

सुन्नी कट्टरपंथियों ने चलाए इमामबारगाह पर पत्थर

इसी तरह के एक और वीडियो में सिपाह सबाहा से सम्बंधित सुन्नी कट्टरपंथी इमाम बरगाह (शिया समुदाय के लोगों का एकत्रित होने का स्थान) पर पत्थर फेंकते हुए देखे जा सकते हैं। इस वीडियो में भी भीड़ शिया विरोधी नारे लगाते हुए सुनी जा सकती है और यह सब कुछ प्रदर्शन के दौरान ही हो रहा था। 

हाल ही में जमात उलेमा-ए-इस्लाम नाम के राजनैतिक संगठन के नेता करी उस्मान ने एक भाषण दिया था। अपने भाषण में उसने कहा था, “हम किसी भी तरह का अपमान और मानहानि नहीं सहेंगे। शिया जो पाकिस्तान की आबादी का सिर्फ 20 फ़ीसदी हैं, उन्हें मुहर्रम के जुलूस के दौरान निशाना बनाया गया। साल 2013 के बाद से शिया विरोधी हिंसा में सामान्य गिरावट भले आई है लेकिन वर्ग के आधार पर होने वाले हमले देश के तमाम इलाकों में अभी तक जारी हैं।” 

पाकिस्तान में ईशनिंदा 

पाकिस्तान में ईशनिंदा एक अपराध है और कुछ मामलों में इसके लिए मृत्यु दंड का भी प्रावधान है। इससे सम्बंधित क़ानून का इस्तेमाल अक्सर अल्पसंख्यकों और अन्य वंचित वर्ग के लोगों पर अत्याचार करने के लिए किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति पर ईशनिंदा के आरोप साबित नहीं होते तो इस्लामी भीड़ उसकी लिंचिंग (पीट-पीट कर हत्या) कर देती है। ईशनिंदा का क़ानून यह कहता है कोई भी इंसान अगर अपने शब्दों से (लिखित या मौखिक), चित्रण के सहारे, आरोप या कटाक्ष के ज़रिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पैगंबर मोहम्मद का अपमान करता है। उस इंसान को जुर्माना, आजीवन कारावास या कुछ मामलों में मृत्यु दंड तक सुनाया जा सकता है। 

जब सुन्नी समुदाय ने कोरोना वायरस को कहा शिया वायरस   

हाल ही में तमाम पाकिस्तानी लोगों ने शिया समुदाय के लोगों की आलोचना की थी। दरअसल शिया समुदाय के लोग ईरान स्थित अपने धार्मिक स्थल से वापस लौटे थे जिसकी वजह से पाकिस्तान के लोगों का कहना था कि सारे शिया अपने साथ कोरोना वायरस लेकर आए हैं। कुछ कट्टरपंथियों ने तो यहाँ तक कहा कि इस वायरस के लिए चीन से ज़्यादा शिया लोग ज़िम्मेदार हैं इसलिए इस वायरस का नाम ‘शिया वायरस’ होना चाहिए। कुछ लोगों ने कहा कि शिया समुदाय के लोग जानबूझ कर पाकिस्तान में कोरोना वायरस लेकर आए। और कुछ ने तो यहाँ तक कहा कि शिया समुदाय के लोग इस्लाम के असली दुश्मन हैं।                

नीरव मोदी को ‘बलि का बकरा’ बनाया गया, भारत में नहीं मिलेगा निष्पक्ष सुनवाई का मौका: मार्कंडेय काटजू ने किया बचाव

लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में बचाव पक्ष के गवाह के तौर पर शुक्रवार को पेश हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने कहा कि नीरव मोदी को भारत में निष्पक्ष ट्रायल नहीं मिल पाएगा। बैंक से करोड़ों की धोखाधड़ी कर लंदन भागे नीरव मोदी मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के दौरान पूर्व जस्टिस काटजू ने कहा कि अगर हीरा कारोबारी नीरव मोदी का भारत में प्रत्यर्पण किया जाता है तो भारत में निष्पक्ष ट्रायल नहीं मिल पाएगा।

नई दिल्ली से 130 मिनट के अपने बयान में काटजू ने आरोप लगाया कि भारत में न्यायिक व्यवस्था चौपट हो गई है। उन्होंने दावा किया कि जाँच एजेंसियाँ जैसे- सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय राजनीतिक गुरुओं के इशारों पर काम कर रही हैं।

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी पर पंजाब नैशनल बैंक को दो अरब अमेरिकी डॉलर का चूना लगाने और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। काटजू ने नीरव मोदी के बचाव में लिखित और मौखिक दावों में कहा कि भारत में न्यायपालिका का अधिकांश हिस्सा भ्रष्ट है और जाँच एजेंसियाँ सरकार की ओर झुकाव रखती हैं। लिहाजा नीरव मोदी को भारत में निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिलेगा।

कोर्ट में पाँच-दिवसीय सुनवाई नीरव मोदी के प्रत्यर्पण ट्रायल का हिस्सा है, जिसमें जजों को यह तय करने की आवश्यकता है कि क्या भारत सरकार द्वारा पेश साक्ष्य के आधार पर भारत में उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला है- सजा या अपराध के निर्णय तक नहीं पहुँचने के लिए।

काटजू ने अपने आरोपों के समर्थन में कई केस और मुद्दों को रखा, जिनमें 2019 में पूर्व जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच की तरफ से अयोध्या पर दिया गया फैसला शामिल हैं, जिन्हें बाद में राज्यसभा का सदस्य नियुक्त किया गया। इसके साथ ही, उन्होंने रिटायरमेंट के बाद जजों की नियुक्ति, मीडिया ट्रायल और न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का मुद्दा भी रखा।

रविशंकर प्रसाद की तरफ से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नीरव मोदी को “अपराधी” कहने पर सवाल उठाते हुए काटजू ने कहा, “भारत सरकार ने अपने दिमाग में बिठा लिया है कि नीरव मोदी एक अपराधी है। क्या रविशंकर प्रसाद जज हैं? किस तरह के वह कानून मंत्री हैं? कैसे हम निष्पक्ष ट्रायल की उम्मीद करेंगे? ”

काटजू के इन दावों पर भारत सरकार की ओर से मुकदमा लड़ रही ब्रिटेन की क्राउन प्रोसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने पलटवार किया।

बैरिस्टर हेलेन मैल्कम ने सवाल किया, ”क्या ऐसा संभव है। आप स्वघोषित गवाह हैं, जो कुछ भी बयान दे सकते हैं।” इस पर काटजू ने जवाब दिया, ”आप अपने विचार रखने के हकदार हैं।”  

मैल्कम ने इस विचाराधीन मामले में ब्रिटेन की अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों के संबंध में इस सप्ताह की शुरुआत में भारत में मीडिया को साक्षात्कार देने के काटजू के फैसले के बारे में भी सवाल किया, जिस पर काटजू ने कहा कि वह केवल पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे थे और ”राष्ट्रीय महत्व” के मामलों पर बोलना उनका कर्तव्य है।

बता दें कि 5 दिन की सुनवाई के अंतिम दिन जस्टिस सैमुअल गूजी ने काटजू की विस्तृत गवाही सुनने के बाद मामले की सुनवाई 3 नवंबर तक स्थगित कर दी। तीन नवंबर को वह भारतीय अधिकारियों की तरफ से पेश किए गए सबूतों की स्वीकार्यता से जुड़े तथ्यों पर सुनवाई करेंगे।

मुनव्वर फारूखी के खिलाफ दर्ज शिकायत को FIR में बदलने में 3-4 महीने लगेंगे या 1 साल: शिकायतकर्ता ने किया प्रशासन से सवाल

स्टैंड-अप कॉमेडी के नाम पर हिंदू देवी देवताओं के ख़िलाफ़ अभद्र टिप्पणी करने वाले मुनव्वर फारूकी पर पिछले महीने दिल्ली में एक शिकायत दर्ज हुई थी। यह शिकायत पेन ऑफ धर्म के एडमिन शिवम रावत ने की थी। उन्होंने शिकायत में फारूकी की कई ‘आपत्तिजनक’ वायरल वीडियोज का हवाला देकर उसके खिलाफ कार्रवाई की अपील की थी। हालाँकि, ताजा सूचना के अनुसार, इस शिकायत को लगभग एक महीने बीत जाने के बाद भी इस पर कोई सुनवाई नहीं है। यहाँ तक कि अभी इस मामले में एफआईआर भी दर्ज नहीं हुई है।

शिवम रावत बताते हैं कि वह शिकायत कराने के बाद से इस मामले पर एसएचओ से फॉलोअप ले रहे थे। पर कुछ दिन पहले उन्हें बोला गया कि ये मामला बेहद संवेदनशील है। इसलिए इसे डीसीपी देखेंगे।

शिवम के अनुसार, डीसीपी के पास इस केस को पहुँचे करीब 10 दिन हो चुके हैं। आज उनसे कहा गया है कि ऐसे मामलों में समय लगता है। ऑपइंडिया से बात करते हुए वे कहते हैं, “मैं समझ सकता हूँ इन चीजों में टाइम लगता है। पर, अब करीब 4 हफ्ते बीत चुके हैं। मेरी शिकायत वायरल वीडियोज के आधार पर हैं। जो 3-4 महीने पहले ट्विटर पर ट्रेंड भी हो चुकी हैं। इसलिए ये केस एकतरफा नहीं है या मैं कोई प्रोपगेंडा नहीं फैला रहा। मगर, बावजूद इसके एफ़आईआर होने में समय लग रहा है।”

शिवम बताते हैं कि वह जब भी इस केस के बारे में जानना चाहते हैं तो उनसे यही कहा जाता है कि पड़ताल चल रही हैं। उन्हें ये नहीं बताया जा रहा कि प्राथमिकी दर्ज होने में कितना समय लगेगा। उनका सवाल है कि आखिर इसके लिए उन्हें 3-4 महीने तक रुकना है या फिर एक साल तक?

पेन ऑफ धर्म के एडमिन कहते हैं, “मैं मानता हूँ कि FIR होना इतना आसान बात नहीं हैं। लेकिन मुझे इतना भी पता है कि आमतौर पर FIR होने में इतना समय नहीं लगता। क्योंकि इसके बाद ही किसी की शिकायत पर असली जाँच शुरू होती है। उससे पहले शिकायत सिर्फ़ एक जरिया होती है कि केस अब आगे बढ़ेगा।”

यहाँ बता दें कि ऑपइंडिया ने शिवम की शिकायत और सवालों के मद्देनजर किशनगढ़ थाने में संपर्क किया था। लेकिन उन्होंने इस केस में कोई भी जानकारी साझा करने से मना कर दिया। इसके बाद ऑपइंडिया ने क्षेत्र के डीसीपी से बात करने की भी कोशिश की। लेकिन उनसे हमारा संपर्क नहीं हो पाया। शिवम लगातार इस मामले पर एफआईआर की माँग कर रहे हैं, ताकि फारूकी को उसके किए की सजा मिल सके।

उन्होंने 21 अगस्त को अपने ट्विटर पर भी इस संबंध में ट्वीट किया था। जिसमें उन्होंने कई पत्रकारों समेत दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, गृहमंत्री अमित शाह एवं डीसीपी को टैग करके एफआईआर की गुहार लगाई थी।

16 अगस्त को हुई थी फारूकी के खिलाफ़ शिकायत दर्ज

गौरतलब है कि 16 अगस्त को दिल्ली के किशनगढ़ थाने में पेन ऑफ धर्म के एडमिन शिवम रावत ने फारूकी के खिलाफ़ शिकायत दर्ज करवाते हुए फारूकी समेत मुंबई स्थित ‘द हैबीटेट- कॉमेडी एंड म्यूजिक कैफे’ पर भी एफआईआर दर्ज करने की अपील की थी।

उनका कहना था कि कुछ समय पहले जब फारूकी की वीडियोज वायरल होना शुरू हुईं थी, तब कई एक्टिविस्टों ने इस मामले को उठाया था। चारों ओर से आलोचना और निंदा को देखते हुए उस वीडियो से विवादित पार्ट को हटा दिया गया और यूट्यूब पर वीडियो मौजूद रही।

कई शिकायतों के बाद भी जब फारूकी पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो उसकी हिम्मत और बढ़ गई। नतीजतन ये दोबारा यूट्यूब पर आया और इस बार एक नए अंदाज में उन लोगों का मजाक बनाया जो उसके ख़िलाफ़ थे। उसने इस वीडियो में उन लोगों (मुख्यत: हिंदुओं) को ‘भेड़ों की नस्ल’ बताया। साथ ही कहा कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। आगे वो आगे नेटफ्लिक्स पर भी आएगा। लोगों ने उसके ख़िलाफ़ शिकायत करके बस उसे फेमस किया है।