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आदिवासियों का धर्मांतरण कर ईसाई बनाते थे… ऐसे 13 NGO का FCRA लाइसेंस मोदी सरकार ने किया रद्द

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 13 ईसाई संगठनों के विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA) लाइसेंस को सस्पेंड कर दिया है। मंत्रालय ने यह निर्णय पिछड़े इलाकों में आदिवासियों को प्रलोभन देकर उनके धर्मांतरण कराए जाने की रिपोर्ट के बाद ली है।

जिन 13 ईसाई संगठनों का FCRA लाइसेंस सस्पेंड किया गया है, उनके बैंक अकाउंट भी फ्रिज कर लिए गए हैं। कुछ राज्यों के पिछड़े इलाके खासकर झारखंड से आई इंटेलिजेंस रिपोर्ट की मानें तो ये संस्था आदिवासियों को लोभ-लालच देकर उनका धर्मांतरण कर उन्हें ईसाई बना रहे थे।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जिन 13 ईसाई संगठनों का FCRA लाइसेंस सस्पेंड किया है, उन्हें पहले ‘कारण-बताओ’ नोटिस भेजा था। लेकिन तय समय-सीमा के भीतर किसी ने भी जवाब नहीं दिया। अभी तक सिर्फ एक संगठन की ओर से जवाब आया है, वो भी तय समय-सीमा के बाद। मंत्रालय के अनुसार भेजा गया जवाब संतुष्टि के लायक नहीं है।

दो दिन पहले भी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 4 ईसाई संगठनों के विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA) लाइसेंस को सस्पेंड कर दिया था। जिन चार ईसाई समूहों का FCRA सस्पेंड किया गया है, उनमें झारखंड का Ecreosoculis North Western Gossner Evangelical, मणिपुर का Evangelical Churches Association (ECA), झारखंड का Northern Evangelical Lutheran Church और मुंबई स्थित New Life Fellowship Association (NLFA) शामिल हैं।

क्या है विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA)

किसी भी संगठन के लिए विदेश से चंदा प्राप्त करने के लिए गृह मंत्रालय से FCRA की मँजूरी होना अनिवार्य है। इस लाइसेंस के नहीं होने से संस्थान या संगठन विदेश से चंदा या वित्तीय योगदान मँगाने में कानूनी रूप से सक्षम नहीं होता है।

विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA) 2010 के प्रावधानों के अनुसार प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराना गैर-कानूनी है। इस अधिनियम के सेक्शन 12(4) के अनुसार सक्षम अधिकारी किसी NGO या संगठन को धार्मिक गतिविधियों से परे लोभ-लालच-प्रलोभन देकर धर्मांतरण करने की स्थिति में उसका लाइसेंस सस्पेंड कर सकते हैं।

पाक, ईरान सहित कई इस्लामी देशों ने की शार्ली एब्दो द्वारा पैगंबर मोहम्मद के कार्टून को पुनः छापने की निंदा, बताया- ‘अक्षम्य गुनाह’

फ्रेंच व्यंग्य साप्ताहिक मैगजिन शार्ली एब्दो के पैगम्बर मुहम्मद पर पुनः प्रकाशित किए जाने वाले कार्टून के फैसले को लेकर काफी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

फ्रांस, नाइजीरिया, इंडोनेशिया, ईरान, चेचन्या, यमन और पाकिस्तान जैसे कई इस्लामी या इस्लाम बहुल देशों ने पैगंबर मुहम्मद को चित्रित करने वाले कार्टून के खिलाफ आंदोलन करने के लिए सड़कों पर निकल आए। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने मंगलवार (सितंबर 8, 2020) को इसे “अक्षम्य गुनाह” कहा।

ट्विटर पर फ्रांसीसी पत्रिका के फैसले की निंदा करते हुए, खामेनेई ने कुछ फ्रांसीसी राजनेताओं की भी आलोचना की, जिन्होंने पैगंबर के अपमान करने के गंभीर अपराध की आलोचना नहीं करने के लिए “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” के बहाने का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

अपने गुस्से को व्यक्त करते हुए खामेनेई ने कहा कि इस्लामिक राष्ट्रों – विशेष रूप से पश्चिम एशियाई देशों में -इस्लाम और संप्रदाय विशेष के खिलाफ पश्चिमी राजनेताओं और नेताओं की शत्रुता को कभी नहीं भूलना चाहिए।

इस घोषणा ने पेरिस कार्यालय में 2015 के आतंकवादी हमले को भी प्रेरित किया, जिससे दुनिया भर में व्यापक विरोध हुआ, पाकिस्तान ने भी शुक्रवार (सितंबर 4, 2020) को कट्टरपंथी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान पार्टी के नेतृत्व में हजारों समुदाय विशेष के लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया।

प्रदर्शनकारियों ने फ्रांसीसी उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान के लिए “डेथ टू फ़्रांस” का आह्वान किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान पढ़े गए एक बिलबोर्ड पर लिखा गया था, ”ईशनिंदा करने वालों की सजा कत्ल है।” प्रदर्शनकारियों ने माँग की कि फ्रांसीसी राजदूत को निष्कासित कर दिया जाए।

गौरतलब है कि 2015 में इस्लामी आतंकवादियों के हमले का शिकार होने के बाद फ्रेंच व्यंग्य साप्ताहिक शार्ली एब्दो (Charlie Hebdo) ने मंगलवार (सितम्बर 01, 2020) को कहा था कि वह पैगंबर मोहम्मद के कथित विवादास्पद कार्टूनों पर हुए हमले पर इस सप्ताह के अंत में होने जा रहे मुकदमे की शुरुआत में ही एक बार फिर पैगम्बर मुहम्मद पर कार्टून प्रकाशित करेगा।

मैगजीन के डायरेक्टर लौरेंट रिस सौरीस्यू ने लेटेस्ट एडिशन में कार्टून को फिर से छापने को लेकर लिखा था, “हम कभी झुकेंगे नहीं, हम कभी हार नहीं मानेंगे।” इसकी संपादकीय टीम ने इसे आवश्यक बताते हुए लिखा था कि अब कार्टून को पुनः प्रकाशित करने का सही समय है, क्योंकि ट्रायल शुरू हो रहा है। पत्रिका का कहना था कि उन्हें 2015 से ही पैगम्बर मोहम्मद पर और भी कैरिकॉर्ड्स को प्रिंट करने का निवेदन आता रहा है।

NCB की माँग पर रिया 14 दिन की न्यायिक हिरासत में, जमानत की माँग करने वालों का करेंगे विरोध

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने मंगलवार (सितम्बर 08, 2020) को रिया चक्रवर्ती को मादक पदार्थों से जुड़े आरोपों के सिलसिले में तीन दिनों तक पूछताछ करने के बाद ड्रग सिंडिकेट का सक्रीय सदस्य बताते हुए गिरफ्तार कर लिया गया। जिसके बाद रिया को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहाँ उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा दिया गया है।

एजेंसी द्वारा रविवार (सितंबर 06, 2020) को सुशांत के कर्मचारियों – मिरांडा, सावंत और उसके भाई, शोविक को गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्होंने एनसीबी को बताया कि वे सुशांत सिंह राजपूत और रिया के कहने पर ड्रग्स की खरीद करते थे।

रिया चर्कवर्ती की गिरफ्तारी अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत, जो कि 14 जून को अपने मुंबई उपनगर स्थित आवास पर मृत पाए गए थे की मौत के 81 दिन बाद हुई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनसीबी के डिप्टी डायरेक्टर एमए जैन ने बताया कि वो सभी के लिए न्यायिक हिरासत माँगेंगे, लेकिन बेल की माँग किए जाने पर हम इसका विरोध करेंगे।

हालाँकि, फ़ेडरल एंटी-ड्रग ट्रैफ़िकिंग एजेंसी ने रिया चक्रवर्ती की हिरासत के लिए दबाव नहीं डाला और स्थानीय अदालत से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का अनुरोध किया है। एजेंसी ने यह भी कहा कि तलाशी लेते समय उन्हें रिया चक्रवर्ती की संपत्ति में कोई ड्रग नहीं मिली।

चक्रवर्ती को एनडीपीएस अधिनियम की कुछ धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया और वीडियो लिंक के माध्यम से स्थानीय अदालत के समक्ष शाम करीब 7.30 बजे पेश किया गया। जिसके बाद अदालत ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। चक्रवर्ती अब जमानत के लिए आवेदन कर सकती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, रिया की गिरफ्तारी विभिन्न व्हाट्सएप चैट से बरामद जानकारी पर आधारित थी, जिसमें वह ‘ड्रग्स की खरीद’ पर चर्चा कर रही थी। ये चैट प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा बरामद किए गए थे और बाद में फेडरल एंटी-ड्रग ट्रैफिकिंग एजेंसी एनसीबी के साथ साझा किए गए हैं।

कॉन्ग्रेसी चाटुकार, समर्थक निभा रहे अपने ‘चीनी संबंध’, फर्जी जानकारी दे कर सेना को बना रहे निशाना

एक ओर भारतीय सेना भारत-चीन सीमा पर निरंतर ही चीनी घुसपैठ का जवाब दे रही है तो वहीं भारत में मौजूद कुछ कॉन्ग्रेसी नेता और कॉन्ग्रेस समर्थक हर हाल में भारत-विरोध के नाम पर फर्जी खबरों के सहारे चीन के साथ खड़े नजर आना चाहते हैं। कॉन्ग्रेस की और से ताजा भ्रम पैंगोंग त्सो के स्वामित्व को लेकर फैलाया जा रहा है।

हालाँकि, ये कॉन्ग्रेसी नेता शायद ही यह बात जानते होंगे कि पैंगोंग त्सो झील और इसके स्वामित्व पर भारत का मजाक बनाने के चक्कर में वो अपने ही अल्प विकसित दिमाग का परिचय दे बैठे हैं। ट्विटर पर ‘बेफिटिंग फैक्ट्स’ नाम के ट्विटर अकाउंट ने कुछ ऐसे कॉन्ग्रेसी नेताओं के ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं, जिनमें वो यह ‘साबित’ करने का प्रयास कर रहे हैं कि पैंगोंग त्सो झील भारत नहीं बल्कि चीनी के अधिकार क्षेत्र में है।

इस ट्विटर अकाउंट ने लिखा है, “यहाँ कुछ कॉन्ग्रेसी चीन के साथ समझौते का पालन कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि पैंगोंग त्सो भारत तक ही सीमित है, लेकिन वास्तव में पैंगोंग झील का लगभग 60% हिस्सा चीनी कब्जे वाले तिब्बत में है। हर भारतीय को यह जानना चाहिए कि कैसे इन ‘पिद्दियों’ ने झूठे प्रचार से चीन की मदद की है।”

इन स्क्रीनशॉट्स में जो कॉन्ग्रेसी नेता पैंगोंग झील पर भारत के स्वामित्व का मजाक बनाने हैं उनमें कुछ प्रमुख नाम अशोक स्वाइन, गौरव पांधी, और सरल पटेल शामिल हैं।

पैंगोंग त्सो

वास्तव में, कॉन्ग्रेस के ये नेता शायद यह तथ्य नहीं जानते हैं कि पैंगोंग झील का 45 किलोमीटर लंबा पश्चिमी भाग भारतीय नियंत्रण में है, जबकि शेष चीन के नियंत्रण में है। दोनों सेनाओं के बीच अधिकांश झड़पें झील के विवादित हिस्से में ही होती हैं। हालाँकि, इसके अलावा इस झील का कोई विशेष सामरिक महत्त्व नहीं है।

लेकिन यह झील चुशूल घाटी के मार्ग में आती है। भारत के इस पर स्वामित्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चुशूल केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के लेह ज़िले में समुद्र तल से 4,300 मीटर या 15,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित एक गाँव है, जो कि चुशूल घाटी में बसा हुआ है।

13,000 फुट की ऊँचाई पर स्थित चुशूल घाटी LAC, वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास अपनी लोकेशन और बनावट के कारण सामान जमा करने और तैनाती के लिए बेहद अहम है। वर्ष 1962 के युद्ध के दौरान यही वह स्थान था जहाँ से चीन ने अपना मुख्य आक्रमण शुरू किया था।

गत 29-30 अगस्त की रात पैंगोंग त्सो के ब्लैक टॉप पर भी चीन ने कब्ज़ा जमाने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय सैनिकों ने चीन के दुस्साहस को नाकाम कर दिया था और ब्लैक टॉप पर तिरंगा लहरा दिया था। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि भारतीय सेना ने चुशूल के इलाकों में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है।

हालिया झड़पों में पैंगोंग त्सो के दक्षिणी किनारे पर चीनी सैनिकों की गतिविधि का भारतीय सेना ने विरोध किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेना ने चीन को आगे बढ़ने नहीं दिया और अब भारत ने इस इलाके में तैनाती और बढ़ा दी है।

इस झड़प के बावजूद, चुशूल में ब्रिगेड कमांडर लेवल की फ्लैग मीटिंग चल रही है। 15 जून की रात को गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद चीन बॉर्डर पर हुई यह दूसरी सबसे बड़ी घटना है।

वहीं, 7 सितंबर की रात चीनी सैनिकों ने पहले भारतीय चौकी के पास आकर फायरिंग की। इसके बाद चीनी मीडिया ने इस घटना के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया है। चीनी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने चीनी सेना के वेस्टर्न थियेटर कमांड के प्रवक्ता के हवाले से दावा किया है कि भारतीय सेना ने पैंगोंग त्सो के दक्षिण किनारे के पास शेनपाओं की पहाड़ी पर एलएसी पार की।

महाराष्ट्र बनाम कंगना: राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख द्वारा अपना नाम घसीटे जाने के बाद अध्ययन सुमन ने कहा- ‘मुझे बख्श दें’

बॉलीवुड एक्टर और शेखर सुमन के बेटे अधयन सुमन ने एक के बाद कई ट्वीट करते हुए कहा है कि बॉलीवुड के भीतर चल रही उथल-पुथल में उनका नाम न घसीटा जाए। बता दें कि अध्ययन सुमन, एक्टर सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस को लेकर काफी मुखर नजर आ रहे हैं।

वह कंगना रनौत और अर्नब गोस्वामी सहित कई अन्य हस्तियों, मीडिया हस्तियों और नेटिज़न्स के साथ सुशांत सिंह राजपूत के समर्थन में सक्रिय रूप से अपनी आवाज़ उठाते रहे हैं। महाराष्ट्र के गृह मंत्री, अनिल देशमुख ने कहा कि 2016 में सुमन के जी न्यूज के शो DNA में दिए इंटरव्यू के आधार पर महा विकास अघाडी सरकार कंगना की ड्रग्स मामले की जाँच करेगी।

उन्होंने ट्विटर पर कई सारे ट्वीट्स किए हैं और गुजारिश की है कि अब उन्हें इस बात से दूर रखा जाए, वे इन सब बातों को पीछे छोड़ चुके हैं। उन्होंने ट्वीट में कहा, “साल 2016 में मैंने एक इंटरव्यू दिया था जिसकी वजह से आज फिर मुझे विवाद में घसीटने की कोशिश की जा रही है। कृपया मुझे इन सब में घसीटना बंद करें। मैंने किसी के खिलाफ कोई केस नहीं किया है। अब मैं दोबारा अपने जीवन के उन काले दिनों में वापस नहीं जाना चाहता। मैं अब आगे बढ़ गया हूँ। मुझे बख्श दें।”

अध्ययन सुमन ने कहा कि मीडिया चैनल उन्हें फँसा रहे हैं। अध्ययन ने आगे कहा, “मीडिया चैनल्स से मुझे कॉल आ रही हैं। मुझे जो भी कहना था, मैंने साल 2016 में कह दिया। इन सब वजहों से मुझे अपने काम में काफी संघर्ष करना पड़ा। मैं अपने जीवन को फिर से सुधारने की कोशिश कर रहा हूँ। अगर आप मेरा सपोर्ट नहीं कर सकते हैं तो कम से कम मुझे इसमें ना घसीटें। उस समय मेरी जो परिस्थिति थी उस हिसाब से मैंने कुछ बातें बोली थीं। मैं माफी माँगता हूँ, अब इसमें मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं है।”

गौरतलब है कि 2016 में DNA के साथ अपने एक इंटरव्यू में रितिक रौशन और कंगना रनौत के बीच के विवाद के बारे में बात करते हुए, कंगना रनौत के एक्स-ब्वॉयफ्रेंड अध्ययन सुमन ने कुछ चौंकाने वाले आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि कंगना ने उन्हें ड्रग्स का सेवन करने के लिए कहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कंगना रनौत काला जादू में शामिल थी और उन्हें भी उस तरह की कुछ पूजा में उनके साथ बैठने के लिए मजबूर किया। महाराष्ट्र के मंत्री अनिल देशमुख ने इसे कंगना के खिलाफ जाँच का आधार बताया।

ड्रग तस्कर की गिरफ्तारी पर किया हुआ रिया का 10 साल पुराना ट्वीट बन गया उनका वर्तमान: जानिए क्या थी वह ‘भविष्यवाणी’

दो दिन से अधिक समय तक पूछताछ के बाद, नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रिया चक्रवर्ती को नशीले पदार्थों की तस्करी में कथित भूमिका के लिए आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। उनकी गिरफ्तारी के तुरंत बाद, रिया का पुराना ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसे लेकर सोशल मीडिया यूजर्स हैरान हैं कि क्या उन्होंने अपने भविष्य की भविष्यवाणी की थी।

आज जब स्ट्रगलिंग एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती ड्रग्स रैकेट मामले में फँसती नजर आ रही है, तो यह रहस्यमयी है कि कैसे उनकी एक दशक से अधिक पुरानी विचित्र भविष्यवाणी सामने आ गई है। 2009 में रिया चक्रवर्ती ने एक ऐसी भारतीय लड़की की कहानी को ट्विटर पर शेयर किया था। जिसे नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए साढ़े चार साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। रिया ने इसके जरिए ये बताने की कोशिश की कि कैसे उन्हें इस कहानी ने प्रभावित किया।

बता दें कि रिया चक्रवर्ती को ड्रग कार्टेल के कथित लिंक के लिए नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा गिरफ्तार किया गया है, जो अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में कई एंगल्स में से एक है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार रिया चक्रवर्ती ने स्वीकार किया कि वह न केवल मारिजुआना, बल्कि हार्ड ड्रग्स का भी सेवन कर रही थी। एजेंसी अब न केवल ड्रग्स खपत बल्कि खरीद, सुविधा, परिवहन और नशीली दवाओं के व्यवहार से भी जुड़े मामले में रिया की भूमिका की जाँच कर रही है।

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमयी मौत के लगभग 85 दिन बाद रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया गया। रिया की गिरफ्तारी को सुशांत के फैन्स सकारात्मक कदम मान रहे हैं। दिवंगत अभिनेता के प्रशंसकों ने रिया की गिरफ्तारी का जश्न मनाने के लिए विभिन्न मीम और वन-लाइनर्स शेयर किए।

अपनी ख़ुशी व्यक्त करने के लिए, एक ट्विटर यूजर ने रिया इंद्रजीत चक्रवर्ती की गिरफ्तारी का जश्न मनाने के लिए मिठाई की तस्वीरों को शेयर किया, जबकि एक ने ‘पत्रकार’ राजदीप सरदेसाई द्वारा रिया की छवि को चमकाने के अथक प्रयासों के लिए अपनी संवेदना व्यक्त की।

अर्नब गोस्वामी मुखर रूप से सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में रिया चक्रवर्ती की कथित भूमिका के बारे में बोल रहे हैं, तो इस खुशी के मौके पर सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें भी अपनी ख़ुशी में शामिल किया।

नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की कथित गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती को आज NDPS के विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि एजेंसी के पास रिया चक्रवर्ती के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं।

कथित तौर पर एनसीबी ने एक अलग मामला दर्ज किया था जिसमें रिया भी एक आरोपित थी, उसके भाई शोविक ने पूछताछ के दौरान शुक्रवार को रिया का भी नाम लिया था, जिसके लिए उसने ड्रग्स खरीदा था।

रिया के भाई, शोविक चक्रवर्ती को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को शनिवार को मुंबई की अदालत ने शोविक चक्रवर्ती और सैमुअल मिरांडा की 4 दिन की हिरासत दी थी। दोनों को बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से संबंधित ड्रग्स जाँच के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। दोनों 9 सितंबर, 2020 तक एनसीबी रिमांड में रहेंगे।

फराह खान उतरी रिया के समर्थन में, कभी जिनके पति को किया गया था ड्रग्स के मामले में गिरफ्तार

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी ने भारतीय फिल्म उद्योग की कई सच्चाइयों को उजागर किया है। अभिनेता ऋतिक रोशन से संबंधित होने के लिए पहचाने जाने वाली ऐसी ही एक तथाकथित बॉलीवुड ’सेलिब्रिटी’ फराह खान ने अभिनेत्री रिया खान के साथ सहानुभूति जताने के लिए ट्विटर का सहारा लिया है।

ड्रग्स खरीदने और उसके इस्तेमाल के लिए रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार किए जाने के तुरंत बाद, फराह खान ने रिया को ‘कठिन समय में मजबूत रहने’ के लिए कहा है। फराह खान ने कहा कि ‘जब तक आपका विवेक साफ है, तब तक आप मजबूत रहेंगे।’

ऐसा कहते हुए, फराह खान ने रिया को नसीहत दी कि ‘ईश्वर में विश्वास रखें और हर दिन प्रार्थना करें’, क्योंकि उन्होंने कहा था कि ‘अगर ईश्वर ने आपको यहाँ पहुँचाया है तो सिर्फ यह ध्यान रखें कि वही आपको इससे बाहर भी निकालेगा।”

फराह खान ने खुद ही स्वीकारा है कि हालाँकि, वह रिया चक्रवर्ती से कभी नहीं मिली हैं, ना ही उन्हें, ना ही उनके परिवार को जानती हैं, फिर भी फराह खान ने रिया को मजबूत रहने की सलाह दी है।

रिया की गिरफ्तारी को लेकर फराह खान की भावनाएँ इतनी गहरी थीं कि उसने समाचार चैनल ‘टाइम्स नाउ’ की पत्रकार नविका कुमार के खिलाफ भी अपशब्द कहे। दरअसल, नाविका कुमार ने ही रिया की गिरफ्तारी की खबर शेयर करते हुए कहा था कि पहली बार ड्रग्स की कहानी उनके द्वारा ही सामने रखी गई थी।

फराह खान ने वरिष्ठ पत्रकार नविका कुमार को यह कहकर लताड़ लगाई, “एक दिन आप दूसरी तरफ होंगे और फिर वहाँ ऐसे लोग भी होंगे जो आपके लिए उतने ही निर्दयी होंगे जितने कि आप हैं। मेरी बात याद रखना।”

आश्चर्य की बात यह है कि अगर फराह खान कभी रिया से नहीं मिली, उन्हें जानती तक नहीं तो फिर वह रिया चक्रवर्ती के समर्थन में कूदने वाली पहली महिला क्यों थी? संभवतः वह रिया के दर्द को महसूस कर रही होंगी।

फराह खान के पति डीजे अकील 2007 में दुबई में ड्रग्स रखने के आरोप में पकड़े गए थे। हालाँकि, डीजे अकील को कुछ दिनों के बाद रिहा कर दिया गया था, जब अधिकारी उस पर किए गए परीक्षणों में ड्रग्स के सबूत खोजने में विफल रहे।

यह आश्चर्य की बात नहीं है कि फराह खान के बारे में बहुत लोग कुछ भी नहीं जानते, लेकिन लोग बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन को जानते हैं। यह कम सुनाई देने वाली ’सेलिब्रिटी’ ऋतिक रोशन की पूर्व पत्नी सुज़ैन खान की बहन और संजय खान की बेटी है। वही संजय खान, जो 1990 के दशक की शुरुआत में एक लोकप्रिय टेलीविजन श्रृंखला में टीपू सुल्तान की भूमिका के लिए जाने जाते थे।

वह उन इस्लाम समर्थकों में से एक थीं, जो अभिनेता तुषार कपूर के पीछे सिर्फ इस कारण पड़ गई थी क्योंकि उन्होंने दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों को फ़ेक फेक न्यूज़ फ़ैलाने से बचने की अपील की थी। उन्होंने भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर पर भी दंगे भड़काने का आरोप लगाया था।

फराह खान पहले भी कर चुकी हैं पाकिस्तानी आर्मी का समर्थन, बचाव में दिया था बेवकूफाना तर्क

रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी के बाद उसके समर्थन में सामने आने वाली फराह खान ने एक बार पाकिस्तान के लिए भी अपना समर्थन जताया था। धर्मनिरपेक्ष और सहिष्णु दिखने की अपनी कोशिश में, उसने पूर्व पाकिस्तानी सेना प्रवक्ता द्वारा एक फर्जी प्रोपेगेंडा ट्वीट को री-ट्वीट किया था, जिसमें कश्मीर को ‘इंडिया ऑक्युपाइड जम्मू कश्मीर’ कहा गया था।

जब उसे इस मूर्खता का आभास कराया गया तो उसने और भी मूर्खता के साथ जवाब देते हुए कहा कि उसने आसिफ गफूर के प्रोपेगेंडा ट्वीट को सिर्फ इस कारण समर्थन के योग्य माना क्योंकि उसके ट्विटर हैंडल में लिखा गया था- ‘पीस फॉर चेंज।’

PLA ने माना उनके क्षेत्र में ‘मिले’ अरुणाचल के पाँचों युवक, किरण रिजिजू ने कहा- भारत वापस लाने की हो रही है तैयारी

चीनी सेना PLA ने इसकी पुष्टि की है पिछले हफ्ते अरुणाचल प्रदेश से लापता हुए पाँच युवक उनके क्षेत्र में पाए गए हैं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक ट्वीट में जानकारी दी है कि अरुणाचल के इन पाँचों अगवा युवकों को भारत को वापस सौंपने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, “चीन के पीएलए ने भारतीय सेना द्वारा भेजे गए हॉटलाइन संदेश का जवाब दिया है। उन्होंने पुष्टि की है कि अरुणाचल प्रदेश से लापता युवकों को उनके क्षेत्र में पाया गया है। युवकों को भारत को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है।”

गौरतलब है कि एक दिन पहले ही, सोमवार को चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अरुणाचल से लापता हुए युवकों के बारे में कोई जानकारी होने से साफ़ मना किया था। पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव के बीच चीनी प्रवक्ता ने उल्टे इस मुद्दे पर भड़काऊ बयान देते हुए अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा करार दिया था।

अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने हाल ही में कहा था कि उन्हें चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) द्वारा कथित रूप से अपहरण कर लिया गया था। दरअसल, अपर सुबनसिरी जिले के नाचो क्षेत्र के पाँच ग्रामीण, जो कि 7 सदस्यीय समूह का हिस्सा थे, जंगल में शिकार के लिए गए थे।  ये युवक सेना के लिए कुली और गाइड का काम करते थे। उनके परिवारों द्वारा इनके पिछले शुक्रवार को सोशल मीडिया के माध्यम से लापता होने की सूचना दी गई थी।

समूह के दो सदस्य घर लौटे और उन्होंने बाकी के 5 युवकों के परिवारों को बताया कि सेरा-7 से चीन के सैनिक उन्हें ले गए। सेरा-7 सेना का गश्ती क्षेत्र है जो नाचो के उत्तर में 12 किमी की दूरी पर स्थित है। नाचो मैकमोहन लाइन पर अंतिम प्रशासनिक क्षेत्र है और यह जिला मुख्यालय दापोरजियो से 120 किमी की दूरी पर स्थित है।

इस पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने सोमवार को बीजिंग में एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि चीन ने कभी अरुणाचल प्रदेश को मान्‍यता नहीं दी है, जो चीन का दक्षिणी तिब्‍बत इलाका है। भारतीय सेना के पीएलए को भारतीयों को छोड़ने के लिए संदेश भेजने के सवाल पर प्रवक्‍ता ने कहा था कि उनके पास अभी इस बात की कोई जानकारी नहीं है।

प्रवक्ता ने कहा कि मुझे उस स्थिति के बारे में जानकारी नहीं है, जब लापता भारतीय नागरिकों के बारे में किसी भी अद्यतन के बारे में पूछा गया था।

चीनी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स का प्रलाप

भारतीय सेना द्वारा चीन की और से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को तोड़ने और गोलीबारी करने के आरोपों के खंडन किए जाने के कुछ ही घंटों बाद, चीनी राज्य द्वारा प्रायोजित मीडिया ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने ट्विटर पर अपनी मानसिक दशा का नमूना पेश किया है।

ट्विटर पर चीनई कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने ‘विक्टिम कार्ड’ खेला और दावा किया कि चीन सीमा गतिरोध को बढ़ावा नहीं देना चाहता। इसने आगे दावा किया कि भारत को चीन की ‘सद्भावना’ को उनकी कमजोरी समझने के भ्रम में नहीं रहना चाहिए।

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, “चीन भारत के साथ सीमा युद्ध नहीं चाहता है। लेकिन अगर भारतीय पक्ष चीन की सद्भावना की गलत व्याख्या करता है और वार्निगं शॉट्स के साथ पीएलए को रोकना चाहता है, तो इसके गलत परिणाम होंगे। फिर चीन युद्ध टालने की खातिर कभी पीछे नहीं हटेगा।” दिलचस्प बात यह है कि यह चीन ही था, जिसने सैन्य अभ्यास के बहाने अपने सैनिकों को भारतीय सीमा की ओर ले जाकर एलएसी पर वर्तमान सीमा पार करने का दुस्साहस किया।

चीनी मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ का ट्वीट एक धमकी भरे संदेश के रूप में था। इसने भारत को ‘लाइन पार’ करने के बदले चेतावनी दी है और दोहराया है कि किसी भी तरह के उकसावे के गंभीर परिणाम होंगे।

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, “हमें भारत को गंभीरता से चेतावनी देनी चाहिए: आपने रेखा पार कर ली है! आपके सीमावर्ती सैनिकों ने लाइन पार कर ली है! आपके राष्ट्रवादी विचार ने लाइन पार कर ली है! चीन के प्रति आपकी नीति ने रेखा को पार कर दी है! आप पीएलए और चीनी लोगों को अति-आत्मविश्वास से उकसा रहे हैं – यह एक चट्टान के किनारे को हाथ से रोकने जैसा है!”

चीनी मुखपत्र द्वारा इस्तेमाल किए गए ये पाँच विस्मयादि बोधक चिन्ह भारत में हास्य का विषय बने हुए हैं।

पाकिस्तान: ईसाई समुदाय के आसिफ को ‘ईशनिंदा’ के आरोप में मौत की सजा, मोबाइल से ‘अपमानजनक संदेश’ भेजने का आरोप

लाहौर की एक अदालत ने एक ईसाई व्यक्ति आसिफ परवेज को “ईशनिंदा” के आरोप में मौत की सजा सुनाई है। मोहम्मद सईद अहमद खोखर ने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें आसिफ परवेज के मोबाइल फोन से अलग-अलग तारीखों में अपमानजनक संदेश मिले थे।

वकील सैफ-उल-मलूक ने बताया कि 37 वर्षीय ईसाई समुदाय के आसिफ परवेज 2013 से उस समय से हिरासत में है जब उस पर एक पूर्व पर्यवेक्षक को “ईशनिंदा” का संदेश भेजने का आरोप लगा था।

मंगलवार (सितंबर 8, 2020) को सुनवाई के दौरान अदालत ने आसिफ परवेज की गवाही को खारिज कर दिया, जिसमें उसने आरोपों से इनकार किया था। इसके बाद उसे मौत की सजा सुनाई गई। वकील सैफ उल मलूक (Saif-ul-Malook) ने कहा, “शिकायतकर्ता होजरी कारखाने में एक पर्यवेक्षक था, जहाँ ईसाई समुदाय का आसिफ उसके अधीन काम कर रहा था।” 

वकील सैफ उल मलूक ने बताया कि सुनवाई के दौरान आसिफ परवेज ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि सईद अहमद खोखर उस पर अपने मजहब इस्लाम में परिवर्तित करने के लिए दवाब डाल रहा था। परवेज ने दावा किया कि जब उसने पर्यवेक्षक सईद अहमद खोखर के यहाँ से काम छोड़ा तो उसने उसका इसका विरोध किया और जब आसिफ ने अपना ईसाई मजहब परिवर्तन करने से इनकार कर दिया तो उसने उस पर ईशनिंदा का आरोप लगा दिया। 

हालाँकि, मामले में शिकायतकर्ता मुहम्मद सईद खोखर के वकील ने इस आरोप से इनकार किया है। उनका कहना है कि चूँकि आसिफ के पास खुद को बचाने के लिए धर्म परिवर्तन का आरोप लगा रहा है।

गौरतलब है कि आसिफ परवेज के पिता अनवर मसीह पर भी ईशनिंदा का आरोप लगा था। इतना ही नहीं, परिवार को प्रतिबंधित इस्लामी समूह सपा-ए-सहाबा द्वारा इस्लाम में परिवर्तित होने के लिए मजबूर किया गया था। हालाँकि, ईसाई समुदाय ने उन्हें गाँव से बाहर निकलने में मदद की और तब से वे छिपे रहे। आसिफ परवेज के 4 नाबालिग बच्चे हैं और वे बहुत खतरे में हैं।

PUBG ने चीन के Tencent Games से वापस लिए भारत के अधिकार, कहा- हम भारत सरकार की सुरक्षा चिंता का सम्मान करते हैं

भारत में PUBG बैन होने के कारण PUBG कॉर्पोरेशन को बहुत नुकसान हुआ है। उन्होंने इस प्रतिबंध के कारण अपने यूजर्स को गवाने के साथ-साथ राजस्व का भी नुकसान झेला है। ये हानि कंपनी के लिए इतनी बड़ी है कि उन्होंने अपनी नीतियों में संशोधन करके उपाय खोजने की इच्छा व्यक्त की है।

7 सितंबर को PUBG कॉर्पोरेशन ने अपने एक ब्लॉग में बताया कि वह कैसे ऐप से प्रतिबंध हटाने के लिए भारतीय सरकार को मनाने के प्रयास कर रही है। कंपनी ने कहा, “PUBG Corporation भारत सरकार द्वारा किए गए उपायों को पूरी तरह से समझता है और उसका सम्मान करता है, क्योंकि खिलाड़ी के डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा कंपनी के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

अपनी बड़ी घोषणा करते हुए PUBG ने बताया कि चीन की Tencent games के पास अब भारत की फ्रैंचाइजी चलाने का अधिकार नहीं होगा। PUBG कॉर्पोरेशन ने अपने बयान में कहा है कि वह भारत में PUBG गेम की पूरी जिम्मेदारी खुद लेगा और फैन्स को नए अनुभव देने पर काम करेगा। 

यानी भारत में PUBG मोबाइल के लिए सभी तरह का पब्लिशिंग राइट PUBG कॉर्पोरेशन के पास होगा जो साउथ कोरिया की कंपनी है। PUBG की तरफ़ से ये भी साफ़ कर दिया गया है कि PUBG मोबाइल गेम साउथ कोरियन पबजी कॉर्पोरेशन का हिस्सा है और इस पर कंपनी का पूरा अधिकार है।

बता दें, PUBG कॉर्पोरेशन ने भारतीय फैन्स के जुनून और उत्साह के लिए उनका आभार व्यक्त किया है। PUBG ने कहा, “PUBG Corporation सक्रियता से भारत में ‘PUBG MOBILE Nordic Map: Livik औप PUBG MOBILE Lite’ पर लगे हालिया प्रतिबंध के आसपास की स्थिति पर नजर रख रहा है। इस खेल ने देश के ख़िलाड़ियों से भारी समर्थन पाया है। इसलिए खिलाड़ी समुदाय को उनके जुनून और उत्साह के लिए धन्यावाद देना चाहते हैं।”

गौरतलब है कि भारत के हालिया फैसले के बाद गुरुवार को चीन की टेंसेंट के शेयर 2 प्रतिशत से ज्यादा नीचे आ गए। इस गिरावट की मार्केट वैल्यू को एक दिन में लगभग 14 बिलियन अमरीकी डॉलर आँका गया है। हालाँकि, गेम्स के अलावा Tencent समाचार और मनोरंजन मंच Newsdog, कैमरा ऐप YouCam और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Shein में भी निवेश करता है। मगर, इन्हें भी भारत ने बैन कर दिया है।

बता दें ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया में पब जी सबसे नामी खेल है। भारत में अब तक इसे 175 मिलियन लोग इंस्टाल कर चुके थे। ये तादाद पूरे विश्व के पब जी यूजर्स की 24% है। वर्तमान में इसके 50 मिलियन से ज्यादा सक्रिय यूजर्स भारत में थे।