Home Blog Page 4508

‘बेशर्म, तू इस्लाम की बात करती है?’: सपा प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी ने कंगना रनौत को कहा- ‘बदतमीज महिला’

महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी कंगना रनौत से खासे खफा हैं और इसी क्रम में उन्होंने शिवसेना के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत का अनुसरण करते हुए कंगना रनौत पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर डाली। कंगना को अबू आजमी ने बेशर्म करार दिया। अबू आजमी ने दावा किया कि कंगना रनौत ने कहा था कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में इस्लामी वर्चस्व ख़त्म कर दिया। इसके बाद उन्होंने पूछा, ‘ बेशर्म! इस्लाम के बारे में बात करती है तू?’

अबू आजमी ने महाराष्ट्र विधानसभा की कार्यवाही के दौरान ये बातें कही। उन्होंने मीडिया में बयान देते हुए भी कंगना पर अलग-अलग टिप्पणी की है। इससे पहले उन्होंने कहा कि अगर कंगना रनौत को मुंबई पुलिस पर भरोसा नहीं है तो वो अपने राज्य हिमाचल प्रदेश में रहे और वहीं काम करे। उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस कभी नाकामयाब नहीं रही है। उन्होंने कहा कि वो पहले से ही ड्रग्स को लेकर आवाज़ उठाते रहे हैं लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

सपा नेता ने ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ की अभिनेत्री को ‘बदतमीज महिला’ बताते हुए कहा कि वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भाषा बोल रही हैं। उन्होंने ये भी कहा कि शिवसेना जो भी कर रही है, वो ठीक कर रही है। अबू आजमी वैसे तो शिवसेना के खिलाफ बोलते रहे हैं लेकिन इस बार उन्होंने कंगना रनौत के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी का पक्ष ले रहे हैं। अबू आजमी की टिप्पणियों के बाद लोगों ने उनका विरोध किया।

कुछ ही महीनों पहले सपा प्रदेश अध्यक्ष ने एक महिला पुलिसकर्मी के साथ बदतमीजी की थी। बाद में उलटा महाराष्ट्र सरकार ने अधिकारी का ही ट्रांसफर कर दिया था। आजमी ने शर्मा के सस्पेंड करने की माँग करते हुए कहा था, “ये औरत कहती है कि आप पुलिस पे इल्जाम लगाते हो, मैं बात नहीं करूँगी। तेरे बाप के बाप के बाप को बात करनी पड़ेगी।” शर्मा के तबादले को लेकर बीजेपी के पूर्व सांसद किरीट सौमैया ने उद्धव सरकार को घेरा था।

कानपुर: आर्यन मल्होत्रा बनकर नाबालिग का शोषण कर रहा था फतेह खान, हिन्दू साबित करने के लिए कलावा पहना, मंदिर गया

उत्तर प्रदेश के कानपुर में लव जिहाद का एक और मामला सामने आया है, जहाँ एक 14 साल की हिंदू लड़की को कथित तौर पर समुदाय विशेष के एक युवक ने हिंदू होने का झूठ बोलकर धोखा दिया। इस मामले में रिपोर्ट कानपुर के गोपाल नगर में दर्ज की गई थी।

पीड़ित परिवार ने बजरंग दल के राज्य सचिव रामजी तिवारी की मदद से सोमवार (सितंबर 7, 2020) को पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई और आरोपित फतेह खान उर्फ आर्यन मल्होत्रा के खिलाफ कार्रवाई की माँग की।

मूल रूप से बंगलुरू के रहने वाले फतेह खान ने आर्यन मल्होत्रा बनकर नाबालिग लड़की को अपने जाल में फँसाया। अब वह कानपुर के गोपाल नगर में पीड़िता के घर में किराए पर रह रहा था। फतेह खान उर्फ़ आर्यन मल्होत्रा कथित तौर पर पिछले तीन वर्षों से हिंदू होने का नाटक कर रहा था।

बजरंग दल के राज्य सचिव रामजी तिवारी ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि फतेह खान, उर्फ आर्यन मल्होत्रा ने हिंदू परिवार के साथ नजदीकी बढ़ाने के लिए खुद को हिंदू बताया। उसने खुद को हिंदू साबित करने के लिए वह सब किया, जो वह कर सकता था। उदाहरण के तौर पर उसने अपने हाथ पर कलावा (हिंदू पवित्र धागा) बाँधा, तिलक लगाया और अक्सर मंदिर जाया करता था।

परिवार की शिकायत के अनुसार, आरोपित फतेह खान नाबालिग लड़की का यौन शोषण भी कर रहा है। परिवार ने आरोप लगाया है कि खान लड़की को अपने मजहब में परिवर्तित करने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है। जब पीड़ित के परिवार के सदस्यों को इस बारे में पता चला तो उन्होंने मदद के लिए स्थानीय बजरंग दल के नेता रामजी तिवारी से संपर्क किया। रामजी तिवारी ने पीड़ित परिवार और अन्य कार्यकर्ताओं के साथ सोमवार (सितम्बर 07, 2020) को पुलिस से संपर्क किया और आरोपित फतेह खान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत की कॉपी

हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने आरोपित को पुलिस के हवाले किया, जहाँ उसने कबूल किया कि वह आर्यन मल्होत्रा बनकर पीड़िता के घर में रह रहा था। पुलिस ने उसके पास से दो पहचान पत्र बरामद किया है, जिसमें से एक उसका वास्तविक पहचान पत्र है, और दूसरा हिंदू नाम से बनाया गया फर्जी पहचान पत्र। साउथ कानपुर के एसपी दीपक भुकर ने शिकायत मिलने की पुष्टि की और कहा कि ‘लव जिहाद’ मामलों की जाँच के लिए गठित एसआईटी मामले की जाँच करेगी।

गौरतलब है कि  इस तरह के लव जिहाद के कई मामले सामने आए हैं, जहाँ हिंदू लड़कियों को, जो अक्सर एक कमजोर आयु वर्ग की हैं, को समुदाय विशेष के युवकों द्वारा हिंदू बनकर रिश्तों में फँसाया गया है। वे इन्हें सिर्फ और सिर्फ बलात्कार, या ब्लैकमेल करने के लिए फँसाते हैं। इस तरह के मामले की बढ़ती संख्या ने कानपुर को सुर्खियों में ला दिया है। उत्तर प्रदेश पुलिस में लव जिहाद के आरोपों और जबरन धर्म परिवर्तन की जाँच करने के लिए हाल ही में विशेष जाँच दल (SIT) गठित किया गया है।

अब कंगना रनौत के खिलाफ मुंबई पुलिस करेगी ड्रग मामले की जाँच: महाराष्ट्र के गृह मंत्री ने दिया आदेश

कंगना रनौत के ख़िलाफ़ महाराष्ट्र सरकार ने नया दाँव खेला है। महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा है कि मुंबई पुलिस एक्ट्रेस के खिलाफ ड्रग्स मामले में जाँच करेगी। उन्होंने मंगलवार (सितंबर 8, 2020) को कहा कि कंगना रनौत के ड्रग लिंक की बात सामने आई है और इसकी जाँच होनी चाहिए।

देशमुख ने कहा कि कुछ समय पहले कंगना रनौत की दोस्ती शेखर सुमन के बेटे अध्ययन सुमन के साथ थी और अध्ययन ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि कंगना ड्रग लेती थी और उन पर भी ड्रग लेने के लिए दबाव बनाती थी। अनिल देशमुख ने कहा, “इस बात की पड़ताल हमारी मुंबई पुलिस करेगी। इस बात का निवेदन मैंने विधानसभा में किया है।”

वहीं, शिवसेना के विधायक प्रताप सरनाईक ने कहा कि अभिनेत्री की छवि काफी साफ-सुथरी है लेकिन आरोप गंभीर है इसकी जाँच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके। मामला कितना पुराना है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। इस मामले की जाँच होनी चाहिए।

गौरतलब है कि पिछले दिनों कंगना रनौत ने अपनी सुरक्षा मामले में मुंबई पुलिस पर सवाल खड़े किए थे। इसके अलावा उन्होंने ये भी सवाल उठाया था कि मुंबई में पीओके जैसा क्यों लग रहा है। जिसके बाद शिवसेना के कई नेता उनसे नाराज दिखे। संजय राउत ने तो उन्हें मुंबई न आने की धमकी भी दे डाली। वहीं शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक ने भी उनके लिए कहा था कि कंगना मुंबई आएँगी तो पार्टी की महिला कार्यकर्ता उनका मुँह तोड़ देंगी।

बता दें कि कंगना रनौत ने इससे पहले शिवसेना नेताओं की धमकियों का करारा जवाब देते हुए कहा था कि वह 9 सितंबर को मुंबई आएँगी, जिसमें हिम्मत है रोक लो। इसके बाद कंगना के पूरे मामले को देखते हुए गृह मंत्रालय ने उन्हें वाई कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान की थी। वहीं बीएमसी ने उनके ऑफिस पर रेड मारी थी और सारे काम रुकवाकर गेट पर नोटिस चस्पा कर दिया गया था।

याद दिला दें, महाराष्ट्र के गृहमंत्री ने आज जिन कंगना पर ड्रग मामले की जाँच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने ही पिछले दिनों बॉलीवुड में 99 प्रतिशत लोगों पर निशाना साधते हुए बॉलीवुड माफिया से लेकर ड्रग एंगल का खुलासा किया था। इसके अलावा सुशांत मामले में अभिनेता को लेकर जो बातें की जा रही थीं उन पर से भी कंगना ने ही पर्दा उठाया था।

India Today के राहुल कंवल ने की अर्नब की तुलना नाजी जोसेफ गोएबल्स से, रिपब्लिक टीवी ने दी ‘चिल’ रहने की सलाह

समाचार चैनल India today और ‘रिपब्लिक टीवी’ ने दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में अपने-अपने पक्ष चुने हैं। जहाँ रिपब्लिक टीवी पर अर्नब गोस्वामी सुशांत सिंह की मौत को लेकर जाँच और न्याय की माँग कर रहे सुशांत के परिवार के साथ खड़ा है, वहीं India Today चैनल अभिनेता की मौत के मामले में आरोपित रिया चक्रवर्ती के बचाव में आ गया है और उसके खिलाफ विभिन्न समाचार एजेंसियों द्वारा की गई टिप्पणियों के खिलाफ आवाज उठा रहा है। इस एक मामले ने दोनों चैनलों के बीच प्रतिद्वंद्विता को एक तरह की जंग में बदल दिया है।

8 सितंबर को, India Today के पत्रकार राहुल कंवल ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा कि जो ‘बनाना रिपब्लिक’ चैनल रिया चक्रवर्ती का साक्षात्कार करने के लिए इंडिया टुडे पर सवाल उठा रहा था, वही मुंबई शहर में इस उम्मीद में रिया चक्रवर्ती का पीछा शहर भर में कर रहा है कि वह उनसे बात करेगी। राहुल कंवल ने कहा कि ‘इंडिया टुडे को एक इंटरव्यू मिला, जो आप चाहते थे।’ उन्होंने अर्नब गोस्वामी की तुलना हिटलर के प्रचार मंत्री जोसेफ गोएबल्स से भी की।

रिपब्लिक टीवी ने बिना समय व्यर्थ किए हुए इंडिया टुडे, आज तक और अरुण पुरी को ट्विटर पर टैग किया और जवाब में उन्होंने शीर्ष पाँच समाचार चैनलों के साप्ताहिक टीआरपी डेटा साझा किए। रिपब्लिक ने लिखा, “क्या आप हमारी शुभकामनाओं के साथ अपने न्यूज़डेस्क को यह (साप्ताहिक टीआरपी रिपोर्ट) दे सकते हैं और बता सकते हैं कि उन्हें आराम करने की जरूरत है?”

ज्ञात हो कि रिपब्लिक भारत और रिपब्लिक टीवी, दोनों ही क्रमशः शीर्ष पाँच हिंदी और अंग्रेजी समाचार चैनलों में टीआरपी चार्ट में सबसे ऊपर बने हुए हैं।

सुशांत सिंह राजपूत मामले में दोनों चैनलों के बीच जारी है विवाद

इंडिया टुडे के राहुल कंवल, और रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी शो और सोशल मीडिया पर वाकयुद्ध का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। जब राजदीप सरदेसाई ने एक हफ्ते पहले ही रिया चक्रवर्ती का इंटरव्यू लिया, तो अर्नब गोस्वामी ने अपने ‘पूर्व-बॉस’ पर कड़ा प्रहार किया था।

इस विवादित साक्षात्कार के बाद अपने शो के दौरान, सुशांत की बहन के हवाले से अर्नब ने कहा कि ‘इंडिया टुडे’ ने भारत के 130 करोड़ लोगों को धोखा दिया है क्योंकि उन्होंने रिया चक्रवर्ती को एक मंच प्रदान किया है, जो मामले में मुख्य आरोपित है।

उन्होंने कहा, “क्या देश भूल सकता है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में रिया चक्रवर्ती मुख्य आरोपित हैं? क्या देश यह भूल सकता है कि सुशांत मामले में रिया संदिग्ध है?” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह चैनल इस घटना के अपने पक्ष को समझाने के लिए उसे मंच प्रदान कर के एक संदिग्ध व्यक्ति को एक ‘महान व्यक्ति’ के रूप में पेश करने का प्रयास कर रहा है? चर्चा के दौरान सुशांत सिंह राजपूत को ‘औसत दर्जे का अभिनेता’ कहने के लिए राजदीप सरदेसाई की आलोचना भी हुई है।

रिया चक्रवर्ती गिरफ्तार, NCB के सामने लिए 25 बॉलीवुड सितारों के नाम: बड़े ड्रग्स नेटवर्क का होगा खुलासा!

NCB ने रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार कर लिया है। रिया पहले कहती आ रही थीं कि वो सुशांत के लिए ड्रग्स खरीदती थीं लेकिन खुद इस्तेमाल नहीं करती थीं पर अब उन्होंने कबूल कर लिया है कि वो ड्रग्स का सेवन करती थीं। रिया ने मान लिया है कि उन्होंने ड्रग्स लिया था और इसके लिए सुशांत सिंह राजपूत ने मजबूर किया था, ऐसा मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है। अब वो गिरफ्तार की जा चुकी हैं, जिसके बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा।

सुशांत सिंह राजपूत मामले में ड्रग्स एंगल सामने आने के बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) रिया चक्रवर्ती और उनके करीबियों से लगातार पूछताछ कर रहा है, जिसमें कई अहम खुलासे हुए हैं। रिया चक्रवर्ती ने खुद के ड्रग्स लेने की बात मानी है और साथ ही 25 ऐसे बॉलीवुड के लोगों के नाम लिए हैं, जो इस ड्रग्स नेटवर्क में शामिल हैं। लगातार 3 दिनों तक चली NCB द्वारा रिया की पूछताछ के बाद अब उन 25 सितारों पर एजेंसी की नजर है।

NCB सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि जल्द ही उन 25 बॉलीवुड सितारों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक के मोबाइल फोन और लैपटॉप की फॉरेंसिक जाँच की गई। दोनों 2017 से ही ड्रग्स के इस खेल में जुड़े हुए हैं। फोन कॉल्स, चैट्स और मैसेजों से पता चला है कि दोनों कई ड्रग्स सप्लायरों से संपर्क में हैं। रिया पहले भी कबूल कर चुकी हैं कि वो सुशांत के लिए ड्रग्स खरीदती थीं।

इससे पहले नार्कोटिक्स ब्यूरो ने मामले के इस पहलू पर जाँच करते हुए रिया के घर से कई अहम सबूत भी इकट्ठा कर लिए थे। नार्कोटिक्स ब्यूरो की एक और टीम ने सैमुएल मिरांडा के घर भी छापेमारी की थी। आज (4 सितंबर 2020) को सुबह के लगभग 6:30 बजे NCB की टीम छापा मारने के लिए रिया चक्रवर्ती के घर पहुँची थी। छापा मारने वाले नार्कोटिक्स ब्यूरो के इस समूह में कुल 8 सदस्य थे। अब रिया को कस्टडी में लिया जा सकता है।

पंचर बनाने वाले, सिलाई करने वाले कैसे महँगे कपड़े पहनकर हिंदू लड़कियों को बनाते हैं लव जिहाद का शिकार? जानिए बजरंग दल से

देशभर में लव जिहाद के तमाम किस्से होने के बावजूद वामपंथियों का ऐसा मानना रहा है कि इसकी संकल्पना दक्षिणपंथियों ने तैयार की है, वास्तविकता में इसका समाज से कोई लेना देना नहीं है। अब हालाँकि उनकी यह सोच कितनी गलत है इसे पुराने उदाहरणों से न समझकर एकदम ताजा केसों पर बात करते हैं।

पिछले दिनों हमने देखा कि उत्तर प्रदेश के पश्चिमी इलाके खासकर कानपुर में लव जिहाद के तमाम मामले उजागर हुए। चाहे फिर वह जूही कालोनी की शालिनी यादव का हो या लखीमपुर खेरी की वह 18 वर्षीय दलित जिसके शव को काट कर किसी दिलशाद ने तालाब में फेंक दिया था। इसके बाद पंकी मामला जहाँ मोहसिन और आमिर को मुस्कान केस में गिरफ्तार किया था और फिर गोविंद नगर का केस जहाँ ‘काला जादू करके’ लड़की का ब्रेनवॉश किया और उसका धर्मपरिवर्तन कराया गया। ये सभी मामले कानपुर से आने के बाद इन मामले में एसआईटी की टीम अब वहाँ लव जिहाद मामले की जाँच में जुटी है।

हालाँकि, देखने वाली बात ये है कि ऐसे केस जब भी सामने आते हैं तो एक बहुत ही तय पैटर्न देखने को मिलता है। जैसे, इन मामलों में प्रायः, संप्रदाय विशेष का युवक का परिवार आर्थिक रूप से मजबूत नहीं होता, वो या तो बेरोजगार होता है या फिर छोटे-मोटे काम करके अपना पेट पालता है। लेकिन, सोचने वाली बात ये है कि जब उन लोगों को हिंदू लड़कियों को फँसाना होता है तो अचानक खुद को मेंटेन रखने के लिए इन पर पैसे आ जाते हैं। वह महँगे कपड़े पहनते हैं, महँगे तोहफे खरीदते हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात जब वह पकड़े जाते हैं तो कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए उन्हें अव्वल दर्जे की कानूनी मदद भी मिलती है।

इन सबको देखते हुए सवाल तो उठता है कि आखिर हिंदू लड़कियों से प्रेम के दौरान खुद को सजाने के लिए उनके पास पैसा कहाँ से आता है? शालिनी यादव के केस में उसके भाई ने पूछा था कि फैजल बेरोजगार है, और उसके पिता फर्नीचर डीलर हैं, तो उसके पास आखिर शालिनी को पहले कानपुर से दिल्ली और दिल्ली से प्रयागराज ले जाने के पैसे कहाँ से आए? किसने उसे फंड दिया? आखिर कैसे उसका केस वरिष्ठ वकील न केवल दिल्ली हाईकोर्ट में लड़ रहे हैं, बल्कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी लड़ रहे हैं?

रिपोर्ट बताती है कि पंकी केस में भी यही हुआ था। मोहसिन खान और आमिर गरीब परिवार से थे, फिर भी उन्हें छुड़ाने के लिए पैसा पानी की तरह बहाया गया। लड़की के पिता का कहना था कि इंसाफ की गुहार लिए जब वह कोर्ट गए तो 100 से ज्यादा युवक आरोपितों के समर्थन में खड़े थे।

ऑपइंडिया की बजरंग दल की राष्ट्रीय महिला परिषद मुखिया निधि अवस्थी से बातचीत

लव जिहाद के इसी पैटर्न को गहराई से समझने के लिए ऑपइंडिया ने बजरंग दल की राष्ट्रीय महिला परिषद मुखिया निधि अवस्थी से बात की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के पश्चिम में इस तरह के अपराध जो सामने आए हैं वो किसी एक का काम नहीं हो सकते। ये संगठित अपराध है। इसमें इन्हें आर्थिक व अन्य जरूरी सामान इस्लामिक संस्थान मुहैया करवाते हैं। वे कहती हैं कि इस्लामी कट्टरपंथी जो ऐसी संस्थाओं को संचालित करते हैं उनका उद्देश्य ही कई हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करवाना होता है। इसलिए, वह इसके लिए इसी समुदाय के ऐसे नौजवानों को नियुक्त करते है, जो दिखने में अच्छे हो और बातचीत भी सही से करना जानते हैं। इसके अलावा जो थोड़े गरीब घर के होते हैं, उन्हें हिंदू लड़कियों के फँसाने और ब्रेनवॉश की तकनीक सिखाई जाती है।

लव जिहाद के ख़िलाफ़ आवाज उठाते बजरंग दल कार्यकर्ता

निधि अवस्थी के अनुसार, हिंदू लड़कियों की जाति से तय होता है समुदाय विशेष के लड़कों को कितना पैसा मिलेगा। अगर लड़की ब्राह्मण या ठाकुर है तो उन्हें 5 लाख मिलते हैं। लड़की यादव या गुप्ता होती है तो उसका रेट 3 लाख होता है। लड़की एससी/एसटी हो तो उसे 2-2.5 लाख रुपए मिलते हैं। बजरंग दल की राष्ट्रीय महिला परिषद की मानें तो कानपुर में लव जिहाद का शिकार होने वाली अधिकांश लड़कियाँ कानपुर की हैं।

उनका कहना है कि इन मंसूबों को कामयाब बनाने में सोशल मीडिया की मुख्य भूमिका होती है। चूँकि वहाँ किसी की आर्थिक स्थिति पहचान पाना बेहद मुश्किल होता है तो ये लड़के वहाँ तस्वीरें डालते हैं और हिंदू लड़कियाँ आकर्षित होकर उनसे मिलने चली जाती हैं। इन लड़कों को प्रशिक्षित किया जाता है कि कैसे लड़की को प्रभावित करना है। ये लड़की से बात करते हुए उसकी कमजोरी जानते हैं फिर उसी के हिसाब से उसे जाल में फँसाते हैं।

गौरतलब है कि कानपुर में एक के बाद एक करके लव जिहाद के 9 केस सामने आने के कारण अब इस मामले पर एसआईटी जाँच कर रही है। उन्होंने कानपुर में पीएफआई और सिमी जैसे कट्टरपंथी संगठनों को भी प्रतिबंध कर दिया है। कुछ रिपोर्ट्स में आशंका जाहिर की गई है कि हो सकता है इन केसों के पीछे पाकिस्तान का हाथ हो। एसआईटी टीम का नेतृत्व करने वाले एसपी दीपर भूकर ने टीम को निर्देश दिया है कि वह ऐसे संगठनों के बारे में व आरोपितों के मोबाइल नंबरों के बारे में जानकारी एकत्र करें। वहीं बजरंग दल भी बड़ी सक्रियता से इस विषय पर काम कर रहा है। बलरंग दल के राज्य सचिव रामजी तिवारी का भी दावा है कि राष्ट्र विरोधी ताकतें ऐसे संगठनों की मददगार हैं।

बजरंग दल के राज्य सचिव रामजी तिवारी कानपुर में लव जिहाद पर प्रदर्शन करते हुए

उनका कहना है कि लव जिहाद देश भर में व्यापक स्तर पर हो रहा है। ये राष्ट्र को सिविल वॉर की ओर धकेलने का एक प्रयास है। यह कट्टरपंथी हिंदुओं के प्रति नफरत फैलाना चाहते हैं। ये लगातार कोशिशें करते हैं कि भारत की सभ्यता को कलंकित करें। बजरंग दल के राज्य सचिव इसे संगठित साजिश करार देते हैं। वह कहते हैं कि इस्लामिक संगठन ऐसे लोगों को फंड व साज सज्जा का सामान देता है और बदले में ये लोग उनके कट्टरपंथी एजेंडा चलाने में उनकी मदद करते हैं।

गौरतलब है कि लव जिहाद मामले में कई बार सामूहिक रूप से किए गए अध्य्यन में पाया गया कि समुदाय विशेष के युवक सोशल मीडिया पर फेक आईडी बनाकर हिंदू लड़कियों को फँसाते हैं। वह पहले हिंदुओं की तरह वेशभूषा धारण करते हैं फिर उनसे रिश्ता बनाकर शारीरिक संबंध स्थापित करते हैं। कई बार इस अपराध की वीडियो बना ली जाती है। बाद में रिकॉर्डिंग दिखा कर या तो उनका धर्म परिवर्तन हो जाता है या फिर निकाह।

ऐसे अधिकतर रिश्ते शरीया कानून के हिसाब से ही चलते हैं जहाँ लड़की का धर्म परिवर्तन अनिवार्य बताया जाता है। ये लड़कियाँ अधिकांश 15-20 साल की होती हैं। जब निकाह के बाद इन लड़कियों के परिवार इन्हें छोड़ देते हैं तब इन्हें ऐसे बंधन में बाँध कर रखा जाता है जहाँ औरत को कोई अधिकार नहीं होते। जब वह आवाज उठाती हैं तो उन्हें कई बार प्रताड़ित किया जाता है और कई बार जान से मार दिया जाता है।

साथ ही, ऐसे कई मामलों में यह भी देखा गया है कि लड़कियों का सामूहिक शारीरिक शोषण से ले कर, अपने दोस्तों, भाई, पिता आदि से बलात्कार तक करवाते हैं। जब ऐसे मामले सामने आते हैं तो पता चलता है कि लक्ष्य प्रेम का नहीं, बल्कि हिन्दू लड़कियों और उनके परिवारों को समाज में नीचा दिखाना और परिवारों को तबाह करना होता है।

पश्चिम बंगाल में ताशीनारा बीबी के परिजनों ने की हॉस्पिटल स्टाफ सौम्यदीप की पिटाई, सेन ने कहा- अब मैं यहाँ काम नहीं कर पाऊँगा

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में बडगे बुडगे क्षेत्र में जगन्नाथ गुप्ता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज अस्पताल में 45 वर्षीय मरीज ताशीराना बीबी के परिजनों ने हॉस्पिटल के एक कर्मचारी की बेरहमी से पिटाई की।

अधिकारियों के अनुसार, ताशीनारा बीबी को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों ने मरीज के परिवार को बताया कि उसे ICU में भर्ती किया जाना है। मगर इसके साथ ही उन्होंने खेद जताते हुए यह भी कहा कि फिलहाल कोई बेड खाली नहीं है, सभी बेड भरे हुए हैं। इसी बीच, मरीज के परिजन बिना अनुमति के आईसीयू वार्ड में घुस गए और तस्वीरें क्लिक करने लगे। बाद में, वो फिर से अस्पताल आए और फ्रंटलाइन वर्कर सौम्यदीप सेन की पिटाई करनी शुरू कर दी, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। 

उसी समय, परिवार के एक अन्य सदस्य ने घातक हथियार के साथ अस्पताल में एक सुरक्षाकर्मी को डराया। खबर 24 X 7 से बात करते हुए, एक सुरक्षा गार्ड ने कहा, “वे मरीज के साथ आपातकालीन वार्ड में आए थे। मरीज के साथ दो लोग थे। हमने आपातकालीन वार्ड में एक व्यक्ति को अनुमति दी और दूसरे व्यक्ति को इंतजार करने के लिए कहा।”

उन्होंने आगे कहा, “डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि एक आईसीयू बिस्तर की आवश्यकता होगी, लेकिन फिलहाल कोई भी बेड उपलब्ध नहीं था। तभी परिवार के कई अन्य सदस्य आए और जबरदस्ती आईसीयू में घुस गए। उनमें से एक ने मुझे एक हथियार दिखाया और पूछा, ‘क्या आप यह चाहते हैं?’ इस बीच, उन्होंने हमारे स्टाफ सदस्य की पिटाई शुरू कर दी।” उन्होंने आगे कहा कि वे प्रदर्शन करेंगे, सहकर्मी फ्रंटलाइन वर्कर के लिए न्याय की माँग करेंगे। उन्हेंने पूछा, “हमारे स्टाफ के सदस्य पर हमला क्यों किया गया?” 

बीजेपी बंगाल द्वारा साझा किए गए वीडियो में, पीड़ित के हाथ में क्रेप बैंडेज लगा हुआ देखा जा सकता है। सौम्यदीप सेन ने कहा, “मैं कोरोना वायरस टेस्टके लिए ICMR फॉर्म भर रहा था। तभी एक परिवार का सदस्य मेरे पास आया और मरीज के स्वास्थ्य के बारे में पूछा। कोंकण दा (अस्पताल के एक अन्य कर्मचारी) ने मुझे बताया कि मरीज को आईसीयू बिस्तर की जरूरत थी। मैंने परिवार के सदस्य से विनम्रता से कहा कि मरीज के लिए कोई बिस्तर उपलब्ध नहीं है। परिवार के अन्य सदस्यों ने मुझे आईसीयू में उनके साथ जाने के लिए कहा, लेकिन मैंने अपने काम करना जारी रखा।”

रिपोर्टर द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या वह ठीक होने के बाद काम करना जारी रखेंगे, सेन ने रोते हुए कहा, “मैं अब यहाँ काम नहीं कर पाऊँगा। मैं अब 8 साल से बुडगे क्षेत्र में रह रहा हूँ। मैं आखिरी बार दुर्गा पूजा के दौरान घर गया था। मुझे लीवर की समस्या है। मैं पिछले 3 दिनों से saline पर हूँ। ”

पीड़ित ने रिपोर्टर से कहा, “मैं दर्द में हूँ, लेकिन फिर भी मैं लोगों के लिए COVID वार्ड में अपनी ड्यूटी कर रहा हूँ। मैंने उन्हें सौहार्दपूर्ण और इमानदारी भरे शब्दों में कहा कि ICU में कोई बिस्तर नहीं है। उन्होंने मेरी बात नहीं मानी और (इसके बजाय मेरी पिटाई की) और मैं चाहता हूँ कि किसी और हॉस्पिटल वर्कर की पिटाई न हो, जैसा कि मेरे साथ हुआ। मैं अत्यंत कष्ट में हूँ।”

भाजपा की राज्य इकाई ने इस घटना की निंदा की और पुलिस कार्रवाई में कमी की शिकायत की। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को संबोधित एक ट्वीट में, पार्टी ने कहा, “ताशीनारा बीबी के परिजनों ने बंगाल के एक मेडिकल कॉलेज में हथियार के साथ COVID फ्रंट-लाइनर्स पर शारीरिक हमला किया और धमकी दी। अस्पताल का कर्मचारी अभी भी सदमे में है। उम्मीद के मुताबिक 24 घंटे के बाद भी कोई पुलिस कार्रवाई नहीं हुई।”

गौरतलब है कि कोलकाता स्थित नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सोमवार (10 जून) को एक बुजुर्ग मरीज मोहम्मद शाहिद की मौत के बाद उसके परिजनों ने डॉक्टर परिबाह मुखोपाध्याय पर घातक हमला किया। डॉक्टर्स के मुताबिक, करीब 200 की भीड़ ने मोहम्मद शाहिद की मौत के बाद अस्पताल में जमकर उत्पात मचाया। इस घटना के बाद राज्य के विभिन्न अस्पतालों के डॉक्टर न्याय की माँग करते हुए हड़ताल पर चले गए थे।

हिन्दू युवक से विवाह के कारण MP में अब्बू का शव कब्रिस्तान में दफनाने से इनकार, पुलिस के आने पर हुआ अंतिम संस्कार

मध्य प्रदेश के श्योपुर में एक हिंदू लड़के से शादी करने पर समुदाय विशेष की महिला को अपने समुदाय की प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। रवीना शर्मा (विवाह के बाद बदला हुआ नाम) नाम की इस महिला के अब्बू की जब मौत हुई, तो उसके समुदाय द्वारा कब्रिस्तान में दफनाने से उन्हें रोक दिया गया। यहाँ तक कि बाद में पुलिस विभाग में आईजी स्तर के हस्तक्षेप के बाद ही महिला के पिता के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो पाई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार (सितम्बर 06, 2020) को सलपुरा कब्रिस्तान के पास पुराने घरों में रहने वाली रवीना के अब्बू इदा खान की मौत हो गई। लेकिन समुदाय विशेष के कुछ लोगों ने शव को कब्रिस्तान में दफनाने का विरोध किया। रवीना ने अपने समुदाय के लोगों से बहुत प्रार्थना की लेकिन उनकी बातों का लोगों पर कोई प्रभाव नहीं हुआ।

रवीना का अपराध यह था कि उसने कुछ ही समय पहले एक हिन्दू युवक से लव मैरिज की थी। और इसी कारण उसके पहले मजहब के लोगों ने उसे सबक सिखाने का यह अमानवीय तरीका अपनाया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जब रवीना के अब्बू इदा खान का शव कब्रिस्तान में दफनाने से रोका गया तो उसने स्थानीय पुलिस से मदद माँगी लेकिन पुलिस से भी उसे कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद चंबल आईजी से फोन पर मदद माँगी गई और स्थानीय पुलिस मदद के लिए मौके पर पहुँची। मौके पर पुलिस के पहुँचने के बाद ही रवीना के अब्बू इदा खान का अंतिम संस्कार हो पाया।

पुलिस ने कहा – मजहब नहीं बल्कि कब्रिस्तान की जमीन को लेकर है विवाद

बताया जा रहा है कि इस कब्रिस्तान की जमीन पर वक्फ कमेटी और इदा खान के बीच एक केस चल रहा है। इसी विवाद के चलते कब्रिस्तान की भूमि पर एक घर के निर्माण को लेकर इदा खान की बेटी रवीना शर्मा की रिपोर्ट पर एक FIR भी दर्ज की गई थी। पुलिस का कहना है कि पिछले दिनों ही जमीन पर मकान बनाने को लेकर 30 लोगों ने इदा खान पर हमला भी किया था।

हालाँकि, रवीना ने आरोप लगाया है कि उसके समुदाय के लोग इस कारण भी उससे नाराज हैं क्योंकि उसने अपने मजहब के बजाए एक हिन्दू युवक से विवाह किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, श्योपुर पुलिस का कहना है कि शव को दफनाने से रोका जरूर गया था, लेकिन किसी अन्य धर्म में बेटी की शादी को लेकर विवाद जैसी कोई बात नहीं थी।

480000 स्वयंसेवक, 85701 स्थानों पर सेवा, 11055000 परिवारों को राशन: कोरोना के खिलाफ जंग में जन-जन के संग RSS

कोरोना संकट की इस घड़ी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शुरू से समाजसेवा में लगा है। अब घरों में शाखा लगाकर बच्चों को भारतीय संस्कृति से अवगत करवाने के साथ-साथ कोरोना वायरस से खुद का व दूसरों का बचाव करने के लिए उपाय बताए जा रहे हैं। जिला प्रशासन के सहयोग से आरएसएस जरूरतमंदों तक भोजन पहुँचाने में भी जुटा है। आरएसएस के सर संघचालक मोहन भागवत के निर्देशों का पालन करते हुए आसपास के पाँच जरूरतमंद परिवारों की मदद करने का अभियान भी जारी है।

हालाँकि, अब लॉकडाउन धीरे-धीरे खुल रहा है, मगर अभी भी दिहाड़ी पर दिन भर मजदूरी करके शाम को दिन भर की कमाई से पेट भरने वालों के पास अभी भी काम की समस्या है। आरएसएस ऐसे लोगों को लगातार भोजन उपलब्ध करा रहा है। आरएसएस के स्वयंसेवक इन लोगों के लिए खाना बनाने से लेकर उनकी पैकिंग और उनके वितरण तक में सोशल डिस्टेंसिंग का खास ख्याल रख रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 4,80,000 स्वयंसेवकों ने अरुणाचल प्रदेश से लेकर कश्मीर और कन्याकुमारी तक 85,701 स्थानों पर सेवा भारती के माध्यम से 1,10,55,000 परिवारों को राशन के किट पहुँचाए हैं। इसके अलावा जरूरतमंदों के बीच 71146000 भोजन के पैकेट्स बाँटे गए हैं। करीब 63,00000 मास्क का वितरण किया गया है।

इन स्वयंसेवकों ने विभिन्न राज्यों में रहने वाले अन्य राज्यों के 13,00000 लोगों की भी सहायता की है। इतना ही नहीं,40,000 यूनिट्स रक्तदान किया है। प्रवासी मजदूरों की सहायता हेतु 1,341 केंद्रों के माध्यम से 23,65,000 प्रवासी मजदूरों को भोजन और 1,00000 मजदूरों को दवाई एवं अन्य मेडिकल सहायता प्रदान की गई है।

इन सबके साथ ही स्वयंसेवकों ने घुमंतू जनजाति, किन्नर, देह व्यापार करने वाले, धार्मिक स्थानों पर श्रद्धालुओं पर निर्भर बंदर, पशु-पक्षी, गोवंश आदि की भी सहायता की है। भीड़ नियंत्रण, स्थानांतर करने वाले श्रमिकों के नाम दर्ज करना, ऐसे असंख्य कार्य प्रशासन के आह्वान पर जगह-जगह स्वयंसेवकों ने किए हैं।  

पुणे में आरएसएस के 1016 स्वयंसेवक, कार्यकर्ताओं ने 27 अप्रैल से अब तक एक लाख लोगों की स्क्रीनिंग की। यह स्क्रीनिंग पुणे के सबसे ज्यादा प्रभावित यानी 168 हॉटस्पॉट जोन में की गई। संघ की ओर से दावा किया गया है कि यह देश में संभवत: पहली बार है, जब संघ स्वयंसेवक प्रशासन के साथ इस तरह से घर-घर जाकर स्क्रीनिंग का काम कर रहे हैं। इसके अलावा पढ़ने के लिए बड़े नगरों में आए और अपने स्थान पर फँसे छात्रों की सहायता की है। खास कर उत्तर पूर्वांचल के छात्रों के लिए विशेष ‘हेल्प लाइन’ बना कर उनकी सहायता भी की और उनके परिवारजन से उनकी बातचीत भी करवाई। मंदिर आदि धार्मिक स्थानों पर भिक्षावृत्ति करने वाले भी इस सहायता यज्ञ के प्रसाद से वंचित नहीं रहे।

आरएसएस का मानना है कि लॉकडाउन वाले स्थानों पर कमजोर तबके के लोगों को राशन आदि की दिक्कत हो सकती है। ऐसे में मानवता का तकाजा है कि ऐसे जरूरतमंदों तक दैनिक जरूरत की वस्तुएँ पहुँचाई जाएँ, जिससे लॉकडाउन की स्थिति में भी भोजन सामग्री के अभाव में कोई  भूखा न रहने पाए।

कोरोना वायरस के इस अभूतपूर्व संकट के समय शासकीय और अर्ध-शासकीय कर्मचारियों के साथ-साथ समाज का बहुत बड़ा वर्ग अपने प्राण संकट में डाल कर पूरे देश में, पहले दिन से आज तक सतत सक्रिय रहा है। बाढ़, भूकंप जैसी अन्य नैसर्गिक आपदाओं के समय राहत कार्य करना और इस संक्रमणशील बीमारी के समय, स्वयं संक्रमित होने की आशंका को देखते हुए भी सक्रिय होना, इनमें अंतर है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ी संगठन ‘सेवा भारती’ लगातार जरूरतमंदों तक मदद पहुँचा रही है। इसके लिए भारतीय कप्तान विराट कोहली ने भी सेवा भारती के कदमों की सराहना की थी।

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने 0.42 मिनट की एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा था, “हैलो दोस्तों, आपका दिन शुभ हो। आपको हैलो के लिए ये मेरा छोटा सा संदेश है। मुझे आशा हैै कि आप लोग स्वस्थ होंगे। मैं दिल्ली सेवा भारती को बधाई देना चाहता हूँ, जिसने पूरे साल अद्भुत काम किया।”

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सेवा कार्यों की सबसे अहम विशेषता यह है कि इसमें किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होता। स्वयं सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने 26 अप्रैल के अपने भाषण में यह स्पष्ट रूप से कहा था, “सेवा-कार्य बिना किसी भेदभाव के सबके लिए करना है। जिन्हें सहायता की आवश्यकता है वे सभी अपने हैं, उनमें कोई अंतर नहीं करना। अपने लोगों की सेवा उपकार नहीं है, वरन हमारा कर्तव्य है।”

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का यह सेवा भाव आज हम सभी लोगों के लिए एक सीख है। प्राचीन भारत के मनीषियों ने हमें निःस्वार्थ सेवा के नैतिक गुण सिखाए थे, लेकिन बाद के सालों में हम यह गुण भूल गए। आज संघ के लोग अपने सेवा कार्यों से हमें यही गुण फिर से सिखा रहे हैं। स्वयंसेवक हमें सिखा रहे हैं कि हमने समाज से लिया तो बहुत कुछ है, लेकिन क्या हम समाज को कुछ दे भी पा रहे हैं या नहीं। ऐसे में जरूरी है कि हम सभी अपने अंदर के स्वयंसेवक को जगाएँ और इस आपदा की घड़ी में माँ भारती की सेवा में जुट जाएँ।

कंगना रनौत को गाली देने वाले 3 नेताओं का CM उद्धव ने किया प्रमोशन: संजय राउत बने शिवसेना के मुख्य प्रवक्ता

लगातार विवादों में रहने वाले शिवसेना नेता और पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर संजय राउत के परफॉरमेंस से खुश होकर उन्हें उद्धव ठाकरे ने पार्टी का मुख्य प्रवक्ता के पद से नवाजा है। संजय राउत ने हाल ही में कंगना रनौत के लिए आपत्तिजनक शब्द का प्रयोग किया था और बाद में कहा था कि वो उन्हें ‘नॉटी’ कहना चाह रहे थे। संजय राउत को अब शिवसेना में प्रमोशन मिला है। वो पार्टी के मुख्य प्रवक्ता बन गए हैं।

मंगलवार (सितम्बर 8, 2020) को शिवसेना सुप्रीमो और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने ‘सामना’ के जरिए इसकी घोषणा की। शिवसेना के सांसद अरविंद सावंत, प्रियंका चतुर्वेदी और धीरशिल माने, महाराष्ट्र के मंत्री अनिल परब, उदय सामंत और गुलाबराव पाटिल, विधायक नीलम गोरे, प्रताप सरनाईक और सुनील प्रभु सहित 10 नेताओं को प्रवक्ता के रूप में नियुक्त किया गया। मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर को भी प्रवक्ता बनाया गया।

ज्ञात हो कि मुंबई की मेयर और शिवसेना नेता किशोर पेडनेकर ने भी कंगना रनौत पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘कंस मामा का वरदान’ बताया था। मेयर ने ‘टीवी 9 मराठी’ के एक ट्वीट की रिप्लाई में मराठी भाषा में ये टिप्पणी की थी। उस खबर में बताया गया था कि कंगना ने मुंबई को अपनी कर्मभूमि बताते हुए कहा था कि वो इस शहर को माँ यशोदा के रूप में देखती हैं, जिसने उन्हें अपनाया और उन्हें अपनी कर्मभूमि के लिए प्यार को साबित करने की कोई ज़रूरत नहीं।

प्रवक्ता बनाए गए प्रताप सरनाईक भी कंगना के खिलाफ धमकी भरी टिप्पणी कर चुके हैं। विधायक ने कहा था कि अगर अभिनेत्री मुंबई में घुसती हैं तो उनकी टाँगें तोड़ दी जाएँगी। धमकी देने के मामले में NCW ने महाराष्ट्र के डीजीपी को पत्र लिखा था। रेखा शर्मा ने कहा था कि कंगना को शिवसेना विधायक की धमकी काफी आपत्तिजनक है। जिन तीन नेताओं का प्रमोशन हुआ, वो सभी कंगना रनौत के खिलाफ टिप्पणी कर चुके हैं।

बाद में संजय राउत ने अपनी सफाई दी और कहा कि महाराष्ट्र में इसका दूसरा मतलब होता है। यहाँ पर इसका मतलब नॉटी और बेईमान होता है। संजय राउत ने कहा, “अगर कोई राजनीति करना चाहता है या फिर माहौल बनाना चाहता है तो किसी भी शब्द का कोई भी अर्थ निकाला जा सकता है। हमारे महाराष्ट्र में जब भी बात करते हैं तो हरामखोर का मतलब नॉटी और बेईमान कहा जाता है। कंगना रनौत नॉटी गर्ल है। मैंने देखा और पढ़ा है कि वह मजाक करती हैं। मैंने अपनी भाषा में कंगना को बेईमान कहा।”