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कोरोना काल में बेरोज़गार हुए 40 लाख कर्मचारियों के लिए खुशख़बरी: तीन महीने तक आधा वेतन देगी ESIC

गुरूवार (20 अगस्त 2020) को कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने कर्मचारियों के संबंध में एक अहम ऐलान किया है। कहा गया है कि इस साल 24 मार्च से 31 दिसंबर के दौरान नौकरी गँवाने वाले कर्मचारियों को ESIC आगामी 3 महीने तक 50 फ़ीसदी औसत वेतन देने के लिए, इससे संबंधित नियमों में बदलाव किया जाएगा। इस निर्णय की ख़बर सबसे ज़्यादा राहत ऐसे कर्मचारियों को देती है जिनकी नौकरी कोरोना महामारी के दौरान छूटी है।    

ख़बरों की मानें तो ESIC बोर्ड के इस अहम फैसले से औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले लगभग 40 लाख कर्मचारियों को फ़ायदा होगा। ESIC ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि समूह ने अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना के अंतर्गत अहर्ता शर्तों और बेरोज़गारी से संबंधित लाभ में बढ़ोत्तरी के दिशा निर्देशों में छूट देने का फैसला लिया है। ESIC द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक़ समूह ने इस योजना को एक और साल यानी 30 जून 2021 तक बढ़ाने का फैसला लिया है।    

संगठन ESIC Scheme के तहत कवर कर्मचारियों को बेरोज़गारी से जुड़े लाभ देने के लिए अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना को लागू करती है। इस मुद्दे पर संगठन का यह भी कहना है कि कोविड 19 महामारी की वजह से नौकरी गँवाने वाले कर्मचारियों के लिए पहले से तयशुदा नियमों में ढील दी गई है।

इसके अलावा राहत से संबंधित राशि में भी बढ़ोत्तरी की गई है। नई शर्तों के मुताबिक़ बढ़ी हुई राशि का भुगतान 24 मार्च 2020 से 31 दिसंबर 2020 के बीच किया जाएगा। वहीं 31 दिसंबर 2020 के बाद 1 जनवरी से लेकर 2021 से लेकर 30 जून 2021 तक वास्तविक पात्रता शर्तों के साथ इस योजना का क्रियान्वन किया जाएगा।    

ESIC के अनुसार नियमों में छूट की समीक्षा 31 दिसंबर के बाद आवश्यकता और उत्पादन के आधार पर की जाएगी। समूह का यह भी कहना है कि राहत राशि प्राप्त करने के लिए अहर्ता शर्तों में ढील दी गई है। इसके अलावा राहत राशि को बढ़ा कर मूल वेतन का 50 फ़ीसदी करने का निर्णय लिया गया है।

इसके पहले तक राहत राशि 25 फ़ीसदी ही थी। यह राशि आगामी 3 महीनों के भीतर दी जाएगी। अब तक तक नौकरी छूटने के 90 दिन बाद राहत राशि का भुगतान किया जा सकता था। अब इस अवधि को घटा कर 30 दिन कर दिया गया है। इसके भुगतान को लेकर ESIC ने यह भी कहा है कि इन्शोर्ड कर्मचारी संगठन के शाखा दफ़्तर में भुगतान आकर सकते हैं।      

प्रशांत भूषण के 10 कांड जब सुप्रीम कोर्ट ने लगाई लताड़ | Ajeet Bharti on Prashant Bhushan getting humiliated by SC

प्रशांत भूषण ने पिछले 11 सालों में कई बार सुप्रीम कोर्ट के जजों को भ्रष्टाचारी कहा, उन्हें केस से हटने को कहा, यहाँ तक कहा कि उन्हें जनहित याचिका समझना नहीं आता। प्रशांत भूषण को न्यायपालिका और CJI के खिलाफ अपने दो ट्वीट्स के लिए अदालत की अवमानना का दोषी पाया गया। यही नहीं, उन पर वर्ष 2009 का भी एक अवमानना का केस लंबित है।

28 जून को चीफ जस्टिस एसए बोबडे की एक तस्वीर सामने आई थी। इसमें वे एक बाइक पर बैठे नज़र आ रहे थे। बाइक के बेहद शौकीन जस्टिस बोबडे अपने गृह नगर नागपुर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान, वहाँ पर खड़ी एक महँगी बाइक पर कुछ देर के लिए बैठे थे।

इस पर प्रशांत भूषण ने टिप्पणी की थी कि चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट को आम लोगों के लिए बंद कर दिया है और खुद बीजेपी नेता की 50 लाख रुपए की बाइक चला रहे हैं। इससे भी सबसे खतरनाक उनका दूसरा ट्वीट था, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत में पिछले 6 सालों में जितने भी चीफ जस्टिस आए, खासकर पिछले 4 चीफ जस्टिस ने लोकतंत्र की बर्बादी में अहम् भूमिका निभाई है।

न तो ये पहला मौका था, न ही आखिरी है जब स्वघोषित एक्टिविस्ट वकील प्रशांत भूषण ने जजों पर दवाब बनाने, उन्हें नीचा दिखाने, उन्हें किसी केस से हटने आदि की बातें की हों।

प्रशांत भूषण द्वारा किए गए कांडों पर ऑपइंडिया सम्पादक अजीत भारती का विश्लेष्ण आप इस यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं

मोहर्रम का चाँद दिखते ही मौलाना ने कहा- इजाजत ना मिली तब भी निकालेंगे ताजिया, अरेस्ट करने के लिए पुलिस स्वतंत्र

शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने बृहस्पतिवार (अगस्त 20, 2020) को धार्मिक आयोजनों के लिए पहले से ही सख्त कोविड प्रोटोकॉल के बाद सभी मुहर्रम आयोजनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए पुलिस कमिश्नर पर निशाना साधा है। लखनऊ में शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने मोहर्रम के बीच ताजियों को घर से ले जाने देने की इजाजत ना देने पर पुलिस से नाराजगी जाहिर की है और इसके साथ ही, लखनऊ पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडे को ज्ञापन सौंपकर ताजिया ले जाने की इजाजत माँगी है।

बताया जा रहा है कि मौलाना कि इस धमकी के बाद वहीं, देर रात प्रशासन ने इमामबड़ा गुफरानमाब में मजलिस के लिए सशर्त अनुमति दे दी है। कमिश्नर सुजीत पांडेय ने बताया कि इमामबड़ा गुफरानमाब में मजलिस की अनुमति दे दी गई है, लेकिन यहाँ ज्यादा लोग इकट्ठे नहीं होंगे और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शर्त के मुताबिक, अकीदतमंदों को मास्क लगाना होगा व सैनिटाइजर या साबुन से हाथ भी साफ करने होंगे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मौलवी कल्बे जवाद, जो पुराने शहर में इमामबाड़ा गुफरानमाब के प्रबंधक मुतवल्ली हैं, ने विशेष रूप से मुहर्रम के लिए जारी किए गए दिशानिर्देशों को असंवैधानिक और अवैध बताया था। जवाद ने प्रशासन को यह भी चेतावनी दी थी कि वह कोविड -19 प्रोटोकॉल के बावजूद भी इमामबाड़ा में मजलिस (मजहबी उपदेश) आयोजित करेगा और अगर वे इस ‘असंवैधानिक आदेश’ के उलंघन का अपराधी मानते हुए उसे गिरफ्तार करते हैं, तो वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस उन्हें ऐसा करने की इजाजत नहीं देती है तो वो अपनी गिरफ्तारी देंगे।

मौलवी ने पुलिस आयुक्त के लिए एक लिखित बयान पेश किया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि यह आदेश केवल भ्रामक ही नहीं है बल्कि ऐसा भी है, जो समुदाय में तनाव पैदा कर रहा है। कल्बे जवाद ने कहा कि पुलिस का यह आदेश डब्ल्यूएचओ, केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कोविड -19 के लिए जारी किए गए दिशानिर्देशों के भी खिलाफ है।

कल्बे जवाद ने कहा, “यदि प्रशासन अपने असंवैधानिक आदेश का पालन करता है, तो मुझे गिरफ्तार करने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन मैं अपने समुदाय से अनुरोध करूँगा कि मेरी गिरफ्तारी का विरोध न करें और कोविड -19 प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करें।”

गौरतलब है कि लखनऊ शिया और सुन्नी मरकजी चाँद कमेटी ने ऐलान किया है कि 20 अगस्त को मोहर्रम का चाँद दिख गया है, इसलिए बृहस्पतिवार यानी, 21 अगस्त को मोहर्रम की पहली तारीख होगी।

बेगूसराय: नाबालिग हिंदू लड़की को बंदी बना कर रखने वाला इज़मुल खान गिरफ़्तार, नींद की गोलियाँ देने की पुष्टि

26 जुलाई 2020 को बिहार के बेगूसराय जिले से एक नाबालिग लड़की का अपहरण किया गया था। फिलहाल लड़की को अपराधियों की गिरफ़्त से आज़ाद करा लिया गया है। इस मामले के मुख्य आरोपित इज़मुल खान उर्फ़ नज़मुल/आर्यन भी गिरफ़्तार किया जा चुका है। स्वराज्य की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने इस घटना का वीडियो साझा किया है।    

स्वाति गोयल ने कुछ ऐसे फेसबुक पोस्ट के बारे में भी जानकारी दी है जो इज़मुल/नज़मुल ने अपने फेसबुक एकाउंट से साझा किए थे। फेसबुक पर उसने अपना नाम कैप्टन अमेरिका रखा हुआ है। कुछ स्थानीय लोग जो इस एकाउंट की गतिविधियों पर नज़र रख रहे थे। उन्होंने बताया कि अपहरण के बाद आरोपित इज़मुल ने नाबालिग लड़की का चित्र साझा किया था।    

नजमुल का डिलीटेड फेसबुक पोस्ट

जिसमें लड़की के सिर पर सिंदूर लगा हुआ था और गले में माँ दुर्गा का लॉकेट था। अपहरण के बाद यह इज़मुल का पहला फेसबुक पोस्ट था। इतनी जानकारी मिलने के बाद स्थानीय लोगों ने वह फेसबुक पोस्ट दिनेश कुमार पंडित (लड़की के पिता) को दिखाई। जिस पर उन्होंने चिंता जाहिर की वह बस अपनी बेटी को ज़िंदा देखना चाहते हैं।  

इसके बाद 20 अगस्त को जब स्वराज्य के पत्रकार ने दोबारा इज़मुल की फेसबुक प्रोफाइल खंगाली तब तक पोस्ट हटा दी गई थी। इसकी जगह पर एक और पोस्ट नज़र आया जिसमें कुछ ऐसी बातें लिखी हुई थीं, “आपके पास मुझसे लड़ने का अधिकार है लेकिन मुझे छोड़ कर जाने का अधिकार नहीं है।” इस फेसबुक पोस्ट पर कुल 3 टिप्पणी की गई थी। धरमबीर नाम के व्यक्ति ने लिखा था “घर आ जाओ तुम्हारी वजह से तुम्हारी माँ और भाई जेल में हैं। लड़की एक बार सुरक्षित घर चली जाए उसके बाद विवाद सुलझा लेंगे।” इसके अलावा आसिफ़ इक़बाल नाम के व्यक्ति ने लिखा “तुम्हारा परिवार तुम्हारी वजह से बहुत ज़्यादा परेशान है और जेल भी जा चुका है। घर आ जाओ और आत्मसमर्पण कर दो।” 

इज़मुल उर्फ़ नज़मुल की फेसबुक टाइमलाइन पर और खंगालने पर अप्रैल महीने की दो पोस्ट नज़र आई। “सुन छोरी… पैसों का नहीं, **** होने का घमंड है।” दूसरी पोस्ट में लिखा था “न तो मेरी सरकार है और न ही सरकार में मेरा कोई संपर्क। मेरे पास कोई बड़ा नाम तक नहीं है। मुझे सिर्फ एक बात का गर्व है – मैं मु###न हूँ और मेरा धर्म इस्लाम है।” इसके बाद दिनेश ने कहा, उनके लिए यह पोस्ट राहत देने वाली थी क्योंकि उन्हें यह पता चला कि उनकी बेटी कम से कम ज़िंदा तो है।    

बिहार पुलिस द्वारा लड़की की खोज होने के 2 दिन बाद (20 अगस्त 2020)। कैसे 19 अगस्त की शाम 7:30 बजे के आस-पास दिनेश कुमार पंडित के पास बेगूसराय के बछवारा पुलिस थाने से फोन आया। उन्हें जानकारी दी गई कि उनकी बेटी को पटना से बरामद किया गया है। उनके मुताबिक़ जिस युवक ने उनकी बेटी को बंधक बना कर रखा था (इज़मुल) उसकी उम्र 20 साल थी। इसके बाद दिनेश कुमार ने पुलिस के प्रति भी गुस्सा जताया कि फेसबुक पोस्ट सामने आने के बावजूद पुलिस को कोई लीड नहीं मिल रही थी।    

ऑपइंडिया भी इस मामले पर बहुत करीब से निगरानी रख रहा था। कैसे डीएसपी ने इस बात पर ज़ोर दिया था कि यह मामला अफ़ेयर का है और नाबालिक लड़की के पिता दिनेश से सबूत लेकर आने के लिए कहा था। दिनेश ने बेहद निराश होकर इस मुद्दे पर कहा था कि अपहरण करने वाला फेसबुक पर पोस्ट कर रहा था। इसके बावजूद पुलिस के हाथ कोई अहम सुराग नहीं लग रहा था। इसका मतलब साफ़ था कि पुलिस इस मामले पर कुछ नहीं कर रही थी।    

इसके अलावा दिनेश ने कहा कि अपहरण के बाद वह अपनी बेटी से 19 अगस्त को पहली बार मिले। जहाँ उन्होंने अपनी बेटी से फेसबुक पर साझा की गई उसकी तस्वीर के बारे में पूछा। जिस पर लड़की ने बताया कि इज़मुल ने उस तरह तस्वीर खिंचवाने के लिए दबाव बनाया। दिनेश ने इस पर अनुमान लगाया कि तस्वीर के ज़रिए वह ऐसा दिखाना चाहता था कि उसका लक्ष्य धर्म परिवर्तन कराना नहीं था। वह सिर्फ लड़की की इज्ज़त खराब करना चाहता था जिससे उसका भविष्य बिगड़ जाए।        

सारी कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद जब दिनेश अपनी बेटी के साथ लौट रहे थे। तब वह अपनी माँ से लिपट कर लगातार रो रही थी। उसने बताया कि कई बार भागने की कोशिश की, वह मौके से भागने के लिए चीखती भी थी लेकिन कभी मौक़ा ही नहीं मिला। लड़की ने यह भी बताया कि उसे स्लीपिंग पिल भी दी जाती थी। फिलहाल लड़की की मेडिकल रिपोर्ट आना बाकी है जिससे इस बात की पुष्टि होगी कि उसके साथ शारीरिक उत्पीडन हुआ था या नहीं। आरोपित इज़मुल पर पॉस्को एक्ट समेत कई धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।    

26 जुलाई को बेगूसराय, बछवारा पुलिस थाने के तहत आने वाले भीकन चक गाँव में रहने वाली नाबालिक हिंदू लड़की का बंदूक के बल पर अपहरण किया गया। अपहरण उस वक्त किया गया जब वह अपने पिता के साथ बाज़ार से लौट रही थी। लड़की के पिता दिनेश ने इस मामले में कुल 7 लोगों पर आरोप लगाया जिसमें इज़मुल और एक महिला भी शामिल थी। जैसे ही वह बेगूसराय स्थित मंसूरचक ब्लॉक के बहरमपुर, पंचायत भवन पहुँचे तभी आरोपित बोलेरो से आए और लड़की का अपहरण करके चले गए।      

‘अगर मैं तुम्हारे काम नहीं आ सकता तो मेरा होना व्यर्थ है, जो होना ही है उसे हो जाने दो’: महेश भट्ट-रिया की 8 जून की व्हाट्सऐप चैट वायरल

8 जून को दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का घर छोड़ने के बाद, सुशांत की प्रेमिका रिया चक्रवर्ती ने फिल्म निर्माता और निर्देशक महेश भट्ट को यह कहते हुए मैसेज किया था, जिसमें लिखा था, “आयशा मूव्स ऑन सर, भारी दिल लेकिन मन में शांति के साथ। आप मेरे एंजेल हैं। आप तब भी थे और अब भी हैं।”

रिया चक्रवर्ती के मैसेज के जवाब में महेश भट्ट ने लिखा है, “अब पीछे मुड़कर मत देखना। वह करो जिसे तुम्हें हर हाल में करना था। अपने पिता को मेरा प्यार देना, वह काफी खुश होंगे।” बातचीत में रिया आगे लिखती हैं, “वह आपकी भवनाओं को समझते हैं। प्यार और हमेशा इतना स्पेशल होने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। कोई शब्द नहीं, बस आपके लिए दिल से प्यार। मैं आपकी हालत समझ सकती हूँ।”

ज्ञात हो कि रिया चक्रवर्ती ने साल 2018 में आई फिल्म जलेबी में काम किया था। उस फिल्म में उनके किरदार का नाम आयशा था। इस बुरी तरह से फ्लॉप हुई फिल्म के प्रोड्यूसर महेश भट्ट ही थे। अभिनेता सुशांत सिंह की मौत के बाद महेश भट्ट ने अपने सबसे पहले बयान में कहा था कि सुशांत परवीन बॉबी बन गए थे। महेश भट्ट पर सुशांत और रिया के सम्बन्धों में दखलंदाजी को लेकर भी कई आरोप लगते आए हैं। कहा जा रहा है कि महेश भट्ट ने ही रिया को यह रिश्ता तोड़ने की सलाह दी थी।

रिया-महेश भट्ट के बीच व्हाट्सऐप चैट से पता चला है कि रिया ने इसके बाद महेश भट्ट को धन्यवाद देते हुए जवाब दिया- “आप मेरी जिंदगी में भगवान की तरह हैं। कुछ हिम्मत मिली है, और आपने फोन पर मेरे पिताजी के बारे में जो कुछ कहा था, उसने मुझे उनके लिए मजबूत होने के लिए प्रेरित किया। हमेशा इतने प्यारे और स्पेशल होने के लिए मेरे पिता ने आपको शुक्रिया कहा है।”

इंडिया टुडे द्वारा शेयर किए गए इस व्हाट्सऐप चैट की बातचीत में महेश भट्ट ने रिया चक्रवर्ती को जवाब दिया है कि अगर मैं तुम्हारे किसी काम नहीं आ सकता तो मेरा होना व्यर्थ है। इसके साथ ही, रिया ने चैट में इन्द्रधनुष और छाता लेकर नाच रही लड़की की इमोजी भी इस्तेमाल की हैं।

रिया चक्रवर्ती इस बातचीत के अंत में लिखती हैं, “किस्मत का शुक्रिया कि मैं आपसे मिली। आप सही थे हमारे रास्ते आज के दिन के लिए एक हुए। आपके कहे हर एक शब्द मेरे अंदर गूँजते हैं। मैं आपके निस्वार्थ प्यार का गहरा प्रभाव महसूस कर सकती हूँ।” 

रिया चक्रवर्ती ने 8 जून को जिस दिन बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का घर छोड़ा था, उसी दिन महेश भट्ट के साथ हुई उनकी व्हॉट्सएप चैट सामने आई हैं। रिया चक्रवर्ती और महेश भट्ट के बीच 8 जून को हुई इस बातचीत के वायरल होते ही कयास लगाए जा रहे हैं कि रिया चक्रवर्ती ने खुद ही सुशांत सिंह राजपूत से रिश्ता तोड़ा था।

लीक हुई व्हाट्सऐप चैट से पता चलता है कि रिया चक्रवर्ती ने खुद ही सुशांत सिंह राजपूत का घर छोड़ा था और वह इस रिश्ते से खुश भी नहीं थी। माना जा रहा है कि सुशांत और रिया के बीच लड़ाई हुई थी, हालाँकि ये लड़ाई किस बारे में हुई थी, इसका पता अभी तक नहीं लग पाया है।

इसके अलावा, यह बात भी सामने आई है कि महेश भट्ट का भी इसमें बड़ा हाथ रहा था क्योंकि उन्हीं के कहने पर रिया ने ये कदम उठाया। सीबीआई की टीम ने रिया चक्रवर्ती के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं सहित आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले की जाँच कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार सीबीआई अब इस बात की जाँच करने का प्रयास कर रही है कि मुख्य रूप से सुशांत और रिया के बीच 8 जून को क्या बात हुई थी।

राम मंदिर के जवाब में 1993 जैसे हमलों की फिराक में आतंकी, हिंदू नेताओं की हत्या कर दंगे की साजिश: रिपोर्ट

अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू होने के साथ ही भारत में मौजूद पाकिस्तान समर्थित आतंकी बौखलाए हुए हैं। इसका बदला लेने के लिए उन्होंने हमलों और दंगों की साजिश रची है। ये खुलासा टाइम्स नाऊ ने किया है।

न्यूज चैनल का दावा है कि उनके हाथ इंटेलीजेंस की खुफिया रिपोर्ट लगी है। इससे पता चलता है कि इस्लामिक आतंकी इस बार भी साल 1993 जैसा साम्प्रदायिक माहौल बनाने की फिराक में हैं। केंद्र ने इसी कारण 2 राज्यों को रेड अलर्ट पर भी रखा है।

इसके अलावा रिपोर्ट यह भी बताती है कि यह आतंकी मंदिर को मुद्दा बनाकर आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद समेत दक्षिणपंथी समूहों के नेताओं के साथ भाजपा नेताओं को मारने और दंगे भड़काने की साजिश रच रहे हैं। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में कई राज्यों को अलर्ट कर दिया है।

टाइम्स नाऊ के पत्रकार निकुंज ने बताया है कि इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि पाकिस्तान के आतंकी और पाकिस्तान द्वारा समर्थित आतंकियों को इस कार्य के लिए निर्देश मिल चुका है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर की निंदा से बचने के लिए पाकिस्तान ने इस बार सीमा पार से आतंकियों को नहीं भेजा है। वह भारत में मौजूद अपने लोगों के सहारे ही आतंकी मंसूबों को पूरा करने की फिराक में है।

गौरतलब है कि राम मंदिर का भूमिपूजन 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। भूमि पूजन की तारीख के ऐलान के बाद से ही खुफिया एजेंसियों के पास हमले को लेकर अलर्ट है। एजेंसियों ने अयोध्या में 5 अगस्त से 15 अगस्त के बीच बड़ी आतंकी साजिश का अंदेशा जताया था। इसके बाद यूपी के सभी जिलों के बस स्टैंड्स, रेलवे स्टेशन पर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए थे। स्वयं भूमि पूजन से पहले यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुरक्षा को लेकर बैठक की थी और हर जिले में सतर्कता के साथ सभी असामाजिक तत्वों पर कड़ी निगरानी रखने को कहा था।

दिलबर नेगी के हत्यारों को उत्तराखंड की जनता जमानत जब्त कर भगाएगी: केजरीवाल पर कपिल मिश्रा का निशाना

दिल्ली के मुख्यमंत्री अ​रविंद केजरीवाल ने घोषणा की है कि पहली बार उनकी आम आदमी पार्टी (AAP) उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों में शिरकत करेगी। इसके कुछ घंटो बाद बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने ट्विटर के जरिए उन पर निशाना साधा। मिश्रा ने कहा कि दिलबर नेगी के हत्यारों को उत्तराखंड की जनता मुॅंहतोड़ जवाब देगी। नेगी को इस साल फरवरी में दिल्ली में हुए दंगों में जिंदा झोंक दिया गया था।

मिश्रा ने ट्वीट में कर कहा, “दिलबर नेगी के हत्यारों को उत्तराखंड की जनता जमानत जब्त करवा कर भगाएगी।”

बता दें, दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के दौरान संप्रदाय विशेष की हिंसक भीड़ ने दिलबर नेगी के अंगों को काट दिया था और उसे मिठाई की दुकान के अंदर जिंदा जला दिया था। दिलबर नेगी उत्तराखंड के मूल निवासी थे।

गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल ने बताया था कि उत्तराखंड में सर्वे कराने के बाद उन्होंने वहाँ चुनाव लड़ने का फैसला किया है। घोषणा के बाद बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने इसका जवाब दिया है। केजरीवाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि दिल्ली में रहने वाले कई उत्तराखंड मूल निवासी उनके पास आए और उनसे विधानसभा चुनाव लड़ने का अनुरोध किया।

मतलब दिल्ली के सीएम यह कहना चाहते है कि उत्तराखंड के मूल निवासी दिल्ली में पिछले 5 सालों में उनकी पार्टी द्वारा किए गए कार्यों से इतने प्रभावित हो गए कि वे चाहते है कि अब आप पार्टी उत्तराखंड के लिए भी ऐसा ही करें।

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों में आप पार्टी का कनेक्शन

आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता ताहिर हुसैन ने इस साल फरवरी में पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए दंगों की साजिश रचने का आरोप कबूल कर लिया है। दिल्ली पुलिस ने दंगों के शामिल मुख्य साजिशकर्ताओं, गैर सरकारी संगठनों और राजनीतिक समूहों जैसे पिंजरा तोड़ और पीएफआई के साथ ताहिर का नाम भी जाँच के दौरान लिया था।

पार्षद ताहिर हुसैन के दंगों में पूरी तरह संलिप्तता सामने आने के बाद आप ने निलंबित कर दिया था। दिल्ली दंगों के दौरान हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए ताहिर के घर का इस्तेमाल हुआ था। इसी घर में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का आरोप है।

दिल्ली दंगों पर ऑपइंडिया की विस्तृत रिपोर्ट अब किंडल पर भी उपलब्ध है। इसमें दंगों से जुड़े हर मामले को विस्तार से बताया गया है कि किस तरह संप्रदाय विशेष के लोगों द्वारा हिंदुओं को निशाना बनाया गया।

फेसबुक-भाजपा में याराना बताने वालों की खुद की US में लॉबी: कॉन्ग्रेस सांसद मनीष तिवारी के पत्र से खुले राज

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कुछ दिनों पहले एक लेख लिखकर भाजपा व फेसबुक के बीच संबंधों को लेकर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद कॉन्ग्रेस ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया। अब भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक हैरान करने वाला खुलासा करते हुए बताया है कि अमेरिका में प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए कॉन्ग्रेस ने बकायदा लॉबी बना रखी है।

अपनी बात को प्रमाणित करने के लिए उन्होंने एक पत्र भी पोस्ट किया है। यह पत्र कॉन्ग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने फेसबुक को लिखा था और कहा था कि किसी भी जानकारी के लिए वह उनकी लॉबी को संपर्क करें।

मनीष तिवारी ने यह पत्र फेसबुक को 18 अगस्त को लिखा। इस पत्र में उन्होंने WSJ के लेख का हवाला देते हुए फेसबुक की अधिकारी (जिन पर रिपोर्ट में एकतरफा होने के आरोप लगे) पर प्रतिक्रिया माँगी। साथ ही ये भी जिक्र किया कि भारतीय एक्जीक्यूटिव के इशारे वैश्विक हेट स्पीच पर नीतियों की अनदेखी भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर सीधा हमला है।

फेसबुक से इस लेख पर प्रतिक्रिया माँगने के अलावा मनीष तिवारी ने यह भी लिखा कि अगर आगे उन्हें कोई अन्य विचार या कोई तत्काल सहायता, या स्पष्टीकरण की आवश्यकता है तो वे उनके वरिष्ठ नीति सलाहकार डॉ. भारत गोपालस्वामी से संपर्क कर सकते हैं जो वाशिंगटन डीसी में ही रहते हैं।

अमित मालवीय के अनुसार मनीष तिवारी के पत्र में इस बात का उल्लेख कि भारत गोपालस्वामी कॉन्ग्रेस नेता के वरिष्ठ नीति सलाहकार हैं- कई सवाल खड़े करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत गोस्वामी एक ऐसे संगठन के निदेशक हैं जो फेसबुक के कंटेंट को मैनेज करता है वो भी मुख्यत: राजनीति और चुनाव से संबंधित।

अमित मालवीय के अनुसार, गोपालस्वामी अटलांटिक काउंसिल में 2013 से 2019 तक निदेशक पद पर थे। इसी बीच साल 2018 में फेसबुक की साझेदारी इस कंपनी से हुई ताकि वह उनकी सुविधाओं का इस्तेमाल करते हुए चुनाव के समय में और अन्य संवेदनशील मौकों पर अपना दुरुपयोग होने से बच सकें

इस संबंध में फेसबुक ने एक बयान भी जारी किया था। बयान में बताया गया था कि टलांटिक काउंसिल की डिजिटल फॉरेंसिक रिसर्च लैब फेसबुक के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि दुनिया भर के उभरते खतरों और विघटनकारी अभियानों पर रियल टाइम की जानकारी और अपडेट प्रदान किया जा सके।

फेसबुक ने कहा था, “हमारी सेवाओं पर संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए यह हमारे लिए आँख-कान की तरह काम करेगा। इससे फेसबुक दुनिया भर में होने वाले चुनावों के दौरान अपनी सकारात्मक भूमिका सुनिश्चित करेगा।”

फेसबुक ने उस समय यह भी जानकारी दी थी कि चुनाव के दौरान और बेहद संवेदनशील क्षणों में अटलांटिक सर्विस ही उन्हें एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देगा। ऐसे में अटलांटिक काउंसिल और फेसबुक के बीच समझौता यह भी स्पष्ट करता है कि अटलांटिक काउंसिल ही तय करेगा कि कि कौन गलत सूचना फैला रहा है और कौन नहीं, और उनके इनपुट के आधार पर, फेसबुक कार्रवाई करेगा।

उल्लेखनीय है कि अटलांटिक काउंसिल को द्विदलीय और मध्यमार्गी संगठन के रूप में जाना जाता है, यह वास्तव में राजनीतिक और वैचारिक प्रचार के साथ काम करने में माहिर है। उस पर अमेरिकी साम्राज्यवादी ताकतों के हाथों में खेलने का आरोप है, जिसमें दुनिया भर के देशों में राजनीतिक परिणामों में हेरफेर करने और प्रभावित करने की क्षमता है। 

अब इन्हीं सब आधारों पर अमित मालवीय याद दिलाते हैं कि जब पिछले साल फेसबुक द्वारा बड़ी संख्या में पेज डिलीट किए गए थे, तो डिलीट प्रो-राइट विंग पेजों की संख्या डिलीट समर्थक कॉन्ग्रेस पेजों की तुलना में बहुत अधिक थी। वह बताता है कि इस प्रक्रिया का नेतृत्व अटलांटिक काउंसिल ने किया था।

अमित मालवीय सभी तथ्यों को सामने रखते हुए कहा कि ये संबंध और सेवाएँ फेसबुक मैनेजमेंट तक पहुँचकर भारत में राजनीतिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया गया। आईटी सेल प्रमुख ने कॉन्ग्रेस नेताओं के ऐसे रसूखदार लोगों के साथ संबंध पर सवाल उठाए और कहा ये सब नैतिकता और हितों के टकराव को बढ़ाता है।

मालवीय ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि फेसबुक पर दबाव बनाने के लिए लॉबिस्टों की सेवा का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा, “लॉबिस्ट एक ऐसे पेड लोग होते हैं जिनका काम सरकार के निर्णय प्रभावित करना होता है। लेकिन यहाँ हैरान करने वाली बात ये है कि ऐसे लोगों का इस्तेमाल फेसबुक जैसी निजी कंपनियों के निर्णय को प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल किया गया।”

एक सबसे महत्वपूर्ण बात जिसे अमित मालवीय ने उठाया, वो ये कि एक संसद में बैठा व्यक्ति कैसे इन विदेशी सेवाओं का इस्तेमाल कर सकता है।

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि मनीष तिवारी खुद भी अटलांटिक काउंसिल से जुड़े थे। वह 2017 में संगठन में शामिल हुए थे। उस वर्ष, उन्होंने सितंबर 2017 में वाशिंगटन डीसी में संगठन में एक कार्यक्रम में राहुल गाँधी की मेजबानी की थी।

इन सबसे यह मालूम चलता है कि जब कॉन्ग्रेस फेसबुक पर भाजपा के साथ जुड़े होने के आरोप लगा रही है, वो भी एक ऐसी रिपोर्ट पर जिसके सूत्र भी किसी को नहीं मालूम, वह पार्टी खुद उस संगठन से जुडी हुई है जिसके संबंध फेसबुक से हैं ताकि उसके नैरेटिव को नियंत्रित किया जा सके।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ 18 अगस्त को लिखे अपने पत्र में मनीष तिवारी ने यह आरोप लगाए हैं कि WSJ के आर्टिकल पर फेसबुक ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं फेसबुक ने 17 अगस्त को यह साफ कर दिया है कि जैसा लेख में लिखा गया है, वैसा वास्तविकता में नहीं है। वो केवल अपने प्लेटफॉर्म पर हेट स्पीच वाले कंटेंट को ही प्रतिबंधित करते हैं।

बांग्लादेश बॉर्डर से गुजरात ATS ने अब्दुल रजा गाजी को पकड़ा, अहमदाबाद ब्लास्ट में था वांछित

गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने अहमदाबाद के कालूपुर रेलवे स्टेशन पर 2006 में हुए विस्फोट के एक आरोपित को पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश की सीमा से लगे एक गाँव से गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि अब्दुल रजा गाज़ी 14 साल से फरार था।

गुजरात ATS के एसपी इम्तियाज़ शेख ने बताया कि एक टीम ने पश्चिम बंगाल की पुलिस के मदद से आरोपित अब्दुल गाजी को बांग्लादेश बॉर्डर के पास बशीरहाट से गिरफ्तार किया है। वह लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का सक्रिय सदस्य है। उसने हमले में शामिल मुख्य आरोपितों को अपने पास शरण भी दी थी।

एटीएस के अनुसार, गाजी ने लश्कर-ए-तैयबा के सदस्यों जुल्फिकार कागजी और अबु जुंदाल को शरण दी थी, जिन पर 2006 में कालूपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर बम लगाने का आरोप था। इसके अलावा उसने विस्फोट के बाद दोनों की बांग्लादेश सीमा पार करने में भी मदद की। इसके बाद दोनों बांग्लादेश से पाकिस्तान भाग गए।

बता दें इस मामले के पाँच अन्य आरोपी- महमद आमिर शकील अहमद शेख, सैय्यद आकिब, महमद इलियास अब्दुल मेमन, महमद असलम कश्मीरी और अबू जुंदाल को पिछले दिनों गिरफ्तार किया गया था।

महाराष्ट्र एटीएस की टीम ने 2006 के बम विस्फोटों के बाद, 8 मई, 2006 को औरंगाबाद के पास चंदवाड़-मनमाड राजमार्ग पर संदिग्ध कारों का पीछा कर तीन आतंकी को गिरफ्तार किया था। वहीं पुलिस ने खुलनाबाद येओला और मालेगाँव क्षेत्र से 6 एके 47 राइफल, 3200 जिंदा कारतूस, 43 किलोग्राम आरडीएक्स और 50 हैंड ग्रेनेड जब्त किए थे।

गोपालगंज: जुल्फिकार ने करवाई थी शिक्षा विभाग के क्लर्क अजय की हत्या, वसीर अंसारी और शाहबाज़ को दिए थे ₹3 लाख की सुपारी

बिहार पुलिस ने गुरुवार (20 अगस्त, 2020) को गोपालगंज में हुई शिक्षा विभाग के क्लर्क अजय राय की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर लिया है। 3 जुलाई को अजय राय की गोपालगंज में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

पुलिस ने इस मामले का खुलासा करते हुए बताया कि अजय राय को शिक्षकों के पदों पर फर्जी नियुक्तियों में शामिल लोगों का पर्दाफाश करने का काम सौंपा गया था। इसकी वजह से घोटालेबाजों ने उनकी सरेआम हत्या करवा दी। पुलिस ने बताया इस मामले में उत्तर प्रदेश के दो शार्प शूटरों सहित तीन संदिग्ध अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस ने कहा कि 3 जुलाई को गोपालगंज के थावे थाना क्षेत्र के लक्षेश्वर गाँव में दो मोटरसाइकिल सवार हथियारबंद अपराधियों ने अजय को गोली मार दी। जब वह ऑफिस के लिए जा रहे थे। पुलिस ने मौके से दो खाली कारतूस बरामद किए थे।

गिरफ्तार तीनों आरोपितों की पहचान जुल्फिकार-अली-भुट्टो (गोपालगंज निवासी), मोहम्मद वसीर अंसारी और मोहम्मद शाहबाज़ आलम (दोनों यूपी के देवरिया जिले के रहने वाले) के रूप में हुई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने जानकारी दी कि ‘एजुकेशन माफिया’ की तरफ से अजय को मारने के लिए सुपारी किलरों को 03 लाख रूपए की सुपारी दी गई थी। जिले में शिक्षक नियोजन में फर्जीवाडा को लेकर जाँच शुरू हुई थी। अजय राय ने इस जाँच में अहम भूमिका निभाई थी। पुलिस के मुताबिक उन सबने रास्ते से हटाने और फर्जी नियोजन की जाँच को प्रभावित करने की नियत से अजय राय की हत्या करवाई थी।

गोपालगंज के एसपी मनोज तिवारी ने बताया कि तीनों आरोपितों को मीरगंज थाने की सीमा के तहत खैरटिया गाँव से गिरफ्तार किया गया। पुलिस की पूछताछ में सभी ने अपना गुनाह कबूल किया है। वसीर और शाहबाज़ ने खुलासा किया कि कॉन्ट्रैक्ट किलिंग के लिए जुल्फिकार ने उन्हें 3 लाख रुपए दिए थे।

पुलिस ने बताया कि बर्खास्त सरकारी शिक्षक जुल्फिकार एक निजी स्कूल चलाता है। उसकी पत्नी भी एक स्कूल में शिक्षक है। जुल्फिकार अली भुट्टो की साल 2005 में नियोजित शिक्षक के रूप में इसका चयन हुआ था। लेकिन शराब बेचने के मामले में विजयीपुर थाना पुलिस ने इसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद शिक्षा विभाग ने इसे बर्खास्त कर दिया। इससे पहले जुल्फिकार अली एक उमेश भगत नाम के व्यक्ति की हत्या करने के मामले में भी जेल जा चुका है।

तिवारी ने यह भी बताया कि जुल्फिकार अपने भतीजे के साथ नकली टीईटी प्रमाण पत्र बेचने में भी शामिल था। पुलिस ने बताया कि अजय की हत्या के पीछे शामिल अन्य शिक्षा माफिया को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है।

गौरतलब है कि वीआईबी जाली दस्तावेजों का उपयोग करके किए गए स्कूल शिक्षकों की बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी नियुक्तियों की जाँच कर रहा है। ब्यूरो ने राज्य भर में 903 शिक्षकों को मिलाकर 337 एफआईआर दर्ज किए हैं। जिनमें से 639 शिक्षकों की सेवाएँ शिक्षा विभाग द्वारा समाप्त कर दी गई हैं।