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‘एक ही कमरे में रहते थे सारा-सुशांत, फिर डंप कर दिया, इसके बाद वह एक गिद्ध के साथ फँस गया’

सुशांत सिंह राजपूत मामले की जॉंच के लिए सीबीआई की टीम गुरुवार (20 अगस्त 2020) को मुंबई पहुॅंच गई। इस मामले में अब सैफ अली खान की बेटी सारा और सुशांत के बीच रिलेशनशिप की खबरें भी चर्चा में है। कंगना रनौत ने पूछा है कि केदारनाथ की शूटिंग के दौरान कमरा शेयर करने के बाद सारा ने उन्हें डंप क्यों कर दिया?

सुशांत की मौत के बाद से ही कंगना लगातार बॉलीवुड में स्टारकिड्स और आउटसाइडर के साथ बर्ताव में होने वाले भेदभाव के मसले को उठा रही हैं। इसी कड़ी में अब उन्होंने सारा अली खान को लेकर सवाल खड़े किए हैं

कंगना ने एक ट्वीट करते हुए लिखा, “सारा और सुशांत के अफेयर की चर्चा मीडिया में चारों ओर थी। आउटडोर शूट के दौरान दोनों एक कमरा भी शेयर करते थे। आखिर क्यों ये फैंसी नेपोटिज्म किड्स संवेदनशील आउटसाइडर्स को रंगीन सपने दिखाते हैं और फिर उन्हें पब्लिकली डंप कर देते हैं? जाहिर है, सुशांत इसके बाद एक गिद्ध (रिया) के साथ फँस गए।”

इसके बाद एक यूजर ने ये कहा कि किसी ने उसकी इस बात पर यकीन नहीं किया था कि सारा अली खान और सुशांत सिंह राजपूत एक साथ गहरे प्रेम में थे।

इस पर कंगना ने ऋतिक रौशन के साथ अपने रिश्ते का उदहारण दिया। उन्होंने लिखा, “मैं मानती हूँ सारा ने उसे प्यार किया होगा। वो बेवकूफ नहीं था कि किसी लड़की के प्यार को बिना परखे उसके साथ रिश्ते में आएगा। लेकिन हो सकता है वो प्रेशर में रही हो। ऋतिक के साथ मेरे रिश्ते बिलकुल सच थे। मुझे अभी भी इसके बारे में कोई संदेह नहीं है। यह बात मेरे लिए अब भी रहस्य है कि अचानक वह क्यों इतना विरोधी बन गए।”

गौरतलब है कि सारा अली खान को लेकर कंगना ने उस समय सवाल उठाए जब सुशांत के दोस्त सैम्युएल ने इंस्टाग्राम पर बताया कि सुशांत और सारा अली खान फिल्म केदारनाथ के प्रमोशन्स के दौरान प्यार में थे। दोनों एक-दूसरे को काफी रिस्पेक्ट करते थे जो आजकल रिलेशनशिप्स में काफी कम देखने को मिलती है। परिवार, फ्रेंड्स और स्टाफ सभी को लेकर दोनों के मन में बेहद रिस्पेक्ट थी। कभी-कभी मुझे लगता है कि सारा का सुशांत के साथ ब्रेकअप का फैसला जो सोनचिड़िया के बाद हुआ था, क्या मूवी माफिया के दबाव में लिया गया फैसला था?

बॉलीवुड में नेपोटिज्म पर जारी बहस के बीच हाल में सोशल मीडिया में फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी का एक वीडियो काफी शेयर हुआ था। इसमें शेट्टी यह कहते हुए नजर आ रहे थे कि सारा अली खान अब स्टार बन गई हैं, इसीलिए वो अब इस बारे में बात कर सकते हैं कि उन्होंने कैसे उनके साथ काम किया। रोहित शेट्टी ने कहा कि सारा ने उनके सामने आकर हाथ जोड़े और कहा कि सर, मुझे काम दे दो। हाथ जोड़ते हुए रोहित शेट्टी ने दिखाया कि कैसे सारा ने उनके सामने हाथ जोड़े थे और कहा कि इसने ‘लिटरली’ ऐसे कर के उनसे फिल्म में काम की माँग की थी।

फेसबुक विवाद: IT मामलों की समिति के अध्यक्ष पद से थरूर को हटाने की माँग, BJP के दो सांसदों ने स्पीकर को लिखा पत्र

फेसबुक से जुड़े विवाद को लेकर बीजेपी और कॉन्ग्रेस में राजनीतिक घमासान जारी है। कॉन्ग्रेस सांसद और आईटी स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष शशि थरूर के खिलाफ कमेटी के सदस्य और बीजेपी सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र लिखा है।

भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने स्पीकर ओम बिड़ला को लिखे अपने पत्र में माँग की है कि शशि थरूर को आईटी मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष पद से हटाया जाए।

गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, “हमलोग किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को फेवर नहीं कर रहे हैं। मैंने संसद में कहा था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरह ही विनियमित किया जाना चाहिए। क्योंकि यह बहुत सारे फेक और पक्षपातपूर्ण खबरों का प्रसार करता है। जिससे लोगों की निजता का उल्लंघन होता है।”

वहीं राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने पत्र में कहा, “कमेटी के सदस्य किसी के समन करने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन कमेटी के नियमों का शशि थरूर ने उल्लंघन किया। कमेटी सदस्यों से बिना चर्चा के नोटिस भेजा गया।” उन्होंने आगे कहा, कमेटी सदस्यों को बताए बिना मीडिया में मामले को लीक किया गया जो नियमों के खिलाफ है।

बता दें यह पूरा विवाद अमेरिकी अखबार ‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ की ओर से शुक्रवार (14 अगस्त, 2020) को प्रकाशित रिपोर्ट के बाद आरंभ हुआ। इस मामले में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मामलों की संसदीय स्थाई समिति की अध्यक्षता करने वाले कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर और समिति के सदस्य निशिकांत दुबे ने एक-दूसरे के खिलाफ विशेषाधिकार के उल्लंघन का नोटिस भेजा है।

दरअसल, सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर आरोप लगा था कि फेसबुक के वरिष्ठ भारतीय नीति अधिकारी ने कथित तौर पर सांप्रदायिक आरोपों वाली पोस्ट डालने के मामले में तेलंगाना के एक बीजेपी विधायक पर स्थाई पाबंदी को रोकने संबंधी आंतरिक पत्र में हस्तक्षेप किया था। जिसपर थरूर ने एक ट्वीट कर कहा था कि आईटी मामलों की संसदीय समिति इस बारे में फेसबुक की सफाई सुनना चाहेगी। निशिकांत दूबे सहित समिति में शामिल एनडीए के कई सदस्यों ने इसका विरोध किया था।

उधर, फेसबुक ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर कहा था कि उसके मंच पर ऐसे भाषणों और सामग्री पर अंकुश लगाया जाता है, जिनसे हिंसा फैलने की आशंका रहती है। इसके साथ ही कंपनी ने कहा कि उसकी ये नीतियाँ वैश्विक स्तर पर लागू की जाती हैं और इसमें यह नहीं देखा जाता कि यह किस राजनीतिक दल से संबंधित मामला है। फेसबुक ने इसके साथ ही यह स्वीकार किया कि वह घृणा फैलाने वाली सभी सामग्रियों पर अंकुश लगाती है, लेकिन इस दिशा में और बहुत कुछ करने की जरूरत है।

अब होगा एटमी जंग, हमारे बम इस्लाम मानने वालों को नहीं पहुँचाते नुकसान: पाकिस्तान वाला शेख राशिद

शेख राशिद पाकिस्तान की इमरान खान सरकार में रेल मंत्री हैं। वे अक्सर अपने बयानों से चर्चा में रहते हैं। बयान भी ऐसे जिसके चक्कर में वे अपने मुल्क और अपनी सरकार को ही हास्यास्पद बना देते हैं।

इसी कड़ी में भारत को गीदड़ भभकी देते हुए राशिद ने एक बयान दिया है। उन्होंने कहा ​है कि भारत से अब परंपरागत युद्ध न होकर सीधे एटमी जंग होगा। साथ ही दावा किया कि पाकिस्तान के पास ऐसे एटम बम हैं जो इस्लाम मानने वालों को नुकसान नहीं पहुॅंचाते।

शेख राशिद ने समा टीवी को दिए इंटरव्यू में भारत को एटमी हमले की धमकी देते हुए कहा कि यदि भारत ने पाकिस्‍तान पर हमला किया तो ‘परंपरागत युद्ध’ की कोई गुंजाइश नहीं होगी। यह खूनी और आख‍िरी जंग होगी। यह एटमी जंग होगी। उन्‍होंने कहा, “हमारा हथियार बहुत छोटा, कैलकुलेटेड, परफेक्ट निशाने पर लेने वाला और इस्लाम मानने वालों की जान बचाते हुए इलाकों को टारगेट करने वाला है।”

इंटरव्यू में शेख राशिद ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान अब असम तक भारतीय इलाकों को टारगेट कर सकता है। उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तान के वैज्ञानिक बहुत जबरदस्त हैं। इसलिए पाकिस्‍तान के पास परंपरागत युद्ध की गुंजाइश बहुत कम है। हिस्‍दुस्‍तान को यह बात बखूबी पता है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के रेल मंत्री ने पहली बार भारत को एटमी हमले की धमकी नहीं दी है। इससे पहले भी वह कई बार पर भारत पर तरह-तरह से हमलों की बात कह चुके हैं। कुछ समय पहले उन्होंने कहा था कि अब ऐसा युद्ध नहीं होगा कि 4-6 दिन तक टैंक, तोपें चलेंगी। अब सीधे-सीधे परमाणु युद्ध होगा।

उन्‍होंने दावा किया था कि पाकिस्तान के पास सवा सौ ग्राम और ढाई सौ ग्राम के भी परमाणु बम हैं जो किसी खास टारगेट पर मार कर सकते हैं। शेख राशिद ने धमकाते हुए कहा था, “भारत सुन ले कि पाकिस्तान के पास पाव और आधा पाव के परमाणु बम भी हैं जो किसी खास इलाके को निशाना बना सकते हैं।”

अपने हालिया इंटरव्यू में भी राशिद ने ऐसे ही हास्यास्पद बयान दिए हैं। इसके अलावा इंटरव्यू में एक जगह उन्होंने कहा कि बेंगलुरु और जामिया मिल्लिया इस्लामिया जैसी जगहों पर जो हुआ उसके बाद भारत के संप्रदाय विशेष के लोग पाकिस्तान के लिए दुआ कर रहे हैं।

उन्होंने साक्षात्कार में चीन का साथ देने की बात भी दी। उन्होंने वैश्विक राजनीति पर बात करते हुए कहा कि उनके लिए इस समय अमेरिका और इजरायल के इलेक्शन बहुत मैटर करते हैं, जिससे इस्लामी दुनिया पर बहुत बड़ा फर्क नजर आएगा।

गौरतलब है कि राशिद को एक बार मोदी का नाम लेते वक्त करंट भी लग चुका है।

सुशांत मामले की ही तरह हो पालघर में साधुओं की मॉब लिंचिंग की CBI जॉंच: साधु-संन्यासियों का आह्नान

महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की हत्या मामले में सीबीआई जाँच की माँग उठी है। जूना अखाड़ा के पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने साधुओं की हत्या मामले में ये माँग उठाई है

उनका कहना है कि पालघर में साधुओं की हत्या को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस मामले में अभी तक न्याय नहीं हो सका है जिसे लेकर लोगों में गुस्सा है।

उन्होंने कहा कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की तरह ही इस मामले की जाँच भी CBI को करनी चाहिए। गिरी ने कहा कि धार्मिक संगठन और श्रद्धालु यही चाहते हैं कि पालघर में साधुओं की हत्या के मामले की जाँच केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI) के हवाले कर देनी चाहिए।

स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने ट्वीट करके भी यह माँग की। उन्होंने लिखा कि लाखों साधु-संन्यासियों और देश की धर्म-प्राण जनता का आह्वान है कि पालघर में बर्बरतापूर्वक हुई साधुओं की हत्या की निष्पक्ष जाँच CBI द्वारा होनी चाहिए! देश न्याय चाहता है!

उल्लखेनीय है कि सुशांत सिंह राजपूत के मामले में लगातार मुंबई पुलिस के विरोध के बाद अभी हाल में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जाँच सीबीआई को सौंपी है। लोगों ने इस फैसले को सुशांत के प्रशंसकों की जीत बताया। कोर्ट का फैसला आते ही महाराष्ट्र में पालघर साधुओं की हत्या का मामला फिर सुर्खियों में आ गया।

जूना अखाड़ा के पीठाधीश्वर के साथ सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर माँग तेज हो गई। #CBIForPalghar के साथ ही लोगों ने अपने मत रखने शुरू कर दिए। वकील प्रशांत पटेल उमरांव ने लिखा, “अगर आप पालघर में साधुओं की लिंचिंग का विषय नहीं भूले तो फिर आवाज क्यों नहीं उठा रहे? आज इस विषय पर आप सभी के समर्थन की आवश्यकता है।”

राकेश पतंजलि योगपीठ ने लिखा, “लाखों साधु सन्यासियों और देश की धर्म-प्राण जनता का आह्वान है कि पालघर में बर्बरतापूर्वक हुई साधुओं की हत्या की निष्पक्ष जाँच CBI द्वारा होनी चाहिए! देश न्याय चाहता है!”

गायक कैलाश खेर ने स्वामी अवधेशानंद का ट्वीट रीट्वीट करते हुए लिखा, “आप जैसे धर्म ध्वजाधारी, समस्त अखाड़ों के शिरोमणि महामंडलेश्वर अतः सारे पीठों के शंकराचार्यों के नेतृत्व में ये सम्भव है, संतो तपस्वियों ने बचा रखी है ये धरती, इससे पहले की समस्त विनाश हो, शीर्ष नेतृत्व पालघर साधुओं के लिए सीबीआई जाँच का अनुदेश दें।”

याद दिला दें कि इसी वर्ष 16 अप्रैल को महाराष्ट्र के पालघर में जूना अखाड़ा के दो साधुओं के साथ एक ड्राइवर की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। इस घटना की एक वीडियो भी सामने आई थी। वीडियो में यह साफ दिखा था कि पुलिस की मौजूदगी के बावदजूद साधुओं पर हमला हुआ। उन्हें निर्ममता से मारा गया। जब सवाल उठने शुरू हुए तो कहा गया कि कुछ अफवाहों के कारण ऐसा हुआ और साधू अपने एक परिचित के अंतिम संस्कार में शामिल होने मुंबई से गुजरात जा रहे थे।

भारत की घरेलू नीति तय करे अमेरिका: यूपीए जमाने में NSA रहे शिवशंकर मेनन

शिवशंकर मेनन मनमोहन सिह की अगुवाई वाली यूपीए सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) होते थे। उन्होंने अमेरिकी प्रकाशन समूह Foreignaffairs.com के लिए एक लेख लिखा है। इस लेख में उन्होंने मोदी और ट्रंप के कार्यकाल में भारत-अमेरिकी संबंधों पर चर्चा की है। साथ ही कहा है कि भारत की घरेलू नीतियॉं अमेरिकी सहमति से तैयार होनी चाहिए। मेनन पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के विश्वस्त लोगों में गिने जाते थे और यूपीए सरकार के कई मंत्रियों का भरोसा उन्हें हासिल था।

शिवशंकर मेनन के इस लेख का शीर्षक है “League of Nationalists: How Trump and Modi Refashioned US-Indian Relationship” (राष्ट्रवादियों का संघ: कैसे मोदी और ट्रंप ने भारत और अमेरिका के संबंधों का नव-निर्माण किया)। लेख में मेनन ने लिखा कि मोदी और ट्रंप ज़्यादातर मुद्दों पर एक साथ इसलिए नज़र आते हैं, क्योंकि उनकी कई बातें एक जैसी हैं।   

दोनों इजरायल के न्येतन्याहू, सऊदी अरब के मोहम्मद बिन सलमान और ब्राज़ील के बोल्सोनारो को पसंद करते हैं। दोनों विदेश नीति को लेकर फ़ायदे देने और फ़ायदा मिलने की मानसिकता पर काम करते हैं। मेनन ने कहा मोदी और ट्रंप में सब कुछ इतना सही होने का एक और कारण है। दोनों बाँटने वाले एजेंडे की भरपाई करने के लिए राष्ट्रवाद को आगे कर देते हैं।

मेनन ने अपने लेख में सारा ज़ोर इस बात पर दिया है कि ट्रंप (और उनके सहयोगी) कितने बुरे काम करते हैं और कितने बुरे हैं। उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों और व्यापार संबंधी मुद्दों में आए बदलावों का विस्तार से ज़िक्र किया है। लेकिन यह नहीं बताया कि कैसे अमेरिका और उसके सहयोगी देश बुरे या गलत हैं। मेनन ने जितनी बातों-बदलावों का उल्लेख किया है, उनमें से ज़्यादातर पर चर्चा हो चुकी है।   

ये वे बदलाव थे जिन्हें रास्ते पर लाने के लिए दोनों देशों की सरकारें काफी समय से कार्यरत थीं। अपनी बात साबित करने के लिए मेनन ने भारत और मोदी सरकार की नीतियों को लेकर कई झूठी बातें कहीं। ऐसे दावे करते हुए मेनन ने राष्ट्रहित के मुद्दों को नज़रअंदाज़ किया और देश की संप्रभुता को भी कमज़ोर किया। इतना कुछ सिर्फ और सिर्फ कुछ राजनेताओं (अमेरिकी) को लुभाने के लिए किया गया है।           

शिवशंकर मेनन के लेख का अंश

इसके अलावा भी मेनन ने अपने लेख में कई झूठे दावे किए हैं। उन्होंने लिखा कि मोदी सरकार ने संप्रदाय विशेष के अप्रवासियों को नागरिकता के दायरे से बाहर रखा है। मेनन ने यह सीएए के संबंध में लिखा है। जिसमें भारत सरकार ने बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफग़ानिस्तान के धार्मिक रूप से प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को शामिल किया है। उनके लेख के मुताबिक़ यह क़ानून संप्रदाय विशेष के अधिकार और उनकी नागरिकता छीन लेता है। यहाँ तक कि उन्हें नागरिकता के लिए आवेदन करने से भी प्रतिबंधित करता है।   

यह एजेंडा भारत के भी तमाम वामपंथी सामाजिक समूहों, कॉन्ग्रेस के नेताओं, पाकिस्तान, कुछ अमेरिकी डेमोक्रेट, यूके की लेबर पार्टी और लिबरल्स ने भी चलाया था। जबकि सच यह है कि सीएए का भारत के नागरिकों से कोई संबंध नहीं है। चाहे वह किसी भी धर्म या समुदाय का व्यक्ति क्यों न हो। न ही यह क़ानून भारत की नागरिकता के लिए आवेदन प्रक्रिया पर कोई प्रभाव डालता है। वह व्यक्ति भी भले किसी धर्म का क्यों न हो। इसका मतलब यह है कि मेनन ने अपने लेख में जितने दावे किए वह पूरी तरह झूठे हैं और उनका कोई आधार नहीं है।   

इसके बाद मेनन ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर भी इसी तरह के दावे किए हैं। इस अनुच्छेद के हटने से जम्मू-कश्मीर के आम नागरिक भारत का अभिन्न अंग बन गए और संविधान के दायरे में आए। उन्हें भी भारत के आम नागरिकों की तरह अधिकार और नागरिकता मिलेगी। चाहे वह किसी धर्म, समुदाय, लिंग, जाति या समूह के क्यों न हों। यूपीए सरकार के पूर्व सुरक्षा सलाहकार की बातों से साफ़ है कि भारत राज्य (विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर) को एक खुफ़िया नियमावली के तहत गवर्न करना चाहिए। जिसे संप्रदाय विशेष के लोग तैयार करें और जम्मू-कश्मीर के स्थानीय नागरिकों को संविधान द्वारा दिए गए अधिकार न मिलें।   

शिवशंकर मेनन ने मोदी और ट्रंप को गलत क्यों कहा इस संबंध में उन्होंने आगे भी कई बातें लिखी हैं। उनके मुताबिक़ ट्रंप ने कभी मोदी की घरेलू नीति का विरोध नहीं किया, बल्कि मोदी की बाँटने वाली नीति को फ्री पास (हरी झंडी) दिया था। ऐसे कुछ ही डेमोक्रेट थे जिन्होंने मोदी की इस नीति का विरोध किया था। इसमें प्रमिला जयपाल और रो खन्ना जैसे डेमोक्रेट शामिल थे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि शिवशंकर मेनन को ऐसा क्यों लगता है कि भारत सरकार जो लोकतांत्रिक रूप से चुन कर आई है, उसे अमेरिका की इजाज़त, मूल्यांकन और स्वीकृति की ज़रूरत है। 

प्रमिला जयपाल समेत जितने भी डेमोक्रेट थे उन्होंने हमेशा से भारत की घरेलू नीतियों को लेकर भारत सरकार पर दबाव बनाया था। इसमें मुख्य रूप से अनुच्छेद 370 और सीएए क़ानून शामिल था। इस मुद्दे पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका के उस प्रतिनिधि मंडल से बैठक के लिए इनकार कर दिया था।   

मोदी सरकार ने इस मामले पर भी अपना मत एकदम स्पष्ट रखा है कि वह किसी विदेशी नेता के सामने नहीं झुकेंगे। यूके की लेबर पार्टी ने भारत के अनुच्छेद 370 हटाने पर भारत सरकार के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था। जिस पर भारत सरकार का स्पष्ट तौर पर कहना था कि वह बाहरी देशों की सहमति-असहमति के आधार पर घरेलू नीति नहीं तय करेंगे। 

शिवशंकर मेनन जनवरी 2010 से लेकर मई 2014 तक यूपीए सरकार में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके हैं। फ़िलहाल क्राइसिस ग्रुप में बतौर बोर्ड ट्रस्टी हैं और जॉर्ज सेरोस उनके साथी हैं। जॉर्ज सेरोस, तथाकथित ‘प्रगतिशील समाजसेवी’ हैं जो अपने गैर सरकारी संगठनों और एजेंसी की मदद से दूसरे देश के आंतरिक मामलों में दखल देते हैं।   

उन्होंने साफ़ तौर पर कहा था कि उनका संगठन भारत के राष्ट्रवाद के खिलाफ लड़ेगा। दावोस में हुई वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम की बैठक में जॉर्ज ने कहा था कि उन्होंने राष्ट्रवाद और राष्ट्रवादियों से लड़ने में 1 बिलियन डॉलर खर्च करेंगे। जॉर्ज का कहना था कि नरेंद्र मोदी भारत को एक राष्ट्रवादी हिंदू देश में बदलना चाहते हैं। जॉर्ज की संस्था ओपन सोसायटी फाउंडेशन के तहत कई एनजीओ भारत में काम कर रहे हैं।   

हर्ष मंदर इस संस्था के तहत आने वाले ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव एडवाइज़री बोर्ड के चेयरमैन हैं। इस संस्था ने इस्कॉन के अक्षय पात्र से लेकर भारत के अभिव्यक्ति से संबंधित क़ानून का खूब दुष्प्रचार किया है। इतना ही नहीं संस्था ने रोहिंग्या संप्रदाय विशेष के लोगों को भी बड़े पैमाने पर आर्थिक मदद की है। इस संस्था ने शिक्षा के अधिकार को लागू किए जाने का भी विरोध किया था। इस संस्था ने भारत की क्षेत्रीय अखंडता तोड़ने की भी बराबर कोशिश की।      

‘UN- लिंक्ड’ संगठन ने बंगाल की ममता सरकार को कोरोना प्रबंधन पर भेजा प्रशंसा-पत्र? जानिए हकीकत

यह पश्चिम बंगाल सरकार के लिए एक सम्मान का क्षण था कि ‘यूनाइटेड नेशन’ से जुड़े एक जापान आधारित गैर-लाभकारी संगठन ने कोरोन वायरस महामारी के बीच उनके काम का नोटिस लिया और राज्य मंत्री निर्मल माजी को प्रशंसा-पत्र भेजा। इस ‘अच्छी खबर’ को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर अखिल भारतीय तृणमूल कॉन्ग्रेस द्वारा शेयर भी किया गया।

TMC ने ‘यूनाइटेड नेशन वर्ल्ड पीस एसोसिएशन पीस ह्यूमैनिटेरियन मिशन’ द्वारा लिखा प्रशंसा-पत्र शेयर किया और लिखा, “हमें यह बताते हुए बेहद गर्व महसूस हो रहा है कि ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल के COVID-19 प्रबंधन के दूरदर्शी नेतृत्व की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना की गई है। डॉ. निर्मल माजी ने UNWPA से यह प्रतिष्ठित प्रशंसा-पत्र प्राप्त किया।”

यह खबर टाइम्स ऑफ इंडिया, डेक्कन हेराल्ड और आउटलुक सहित कई समाचार पोर्टलों और कई अन्य लोगों द्वारा कवर की गई।

वास्तव में, समाचार एजेंसी पीटीआई ने UNWPA को ‘UN से जुड़े एनजीओ’ के रूप में प्रकाशित किया है और यही दावा कई अन्य मीडिया संस्थानों द्वारा भी किया गया। यह पत्र TMC और ममता बनर्जी के समर्थकों द्वारा बड़े स्तर पर सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है।

एक भारतीय के तौर पर हम भी यह देखकर गौरव महसूस कर रहे थे कि भारत के ही किसी राज्य को कोरोना महामारी में अच्छे प्रबंधन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है। लेकिन यह देखना सवाल पैदा करता है कि यह UN-लिंक्ड NGO कोरोना के अच्छे प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय या फिर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जगह पर श्रम मंत्रालय को क्यों सम्बोधित कर रहा है? खासकर, जब ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल सरकार की मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की प्रभारी मंत्री भी हैं।

दूसरा सवाल इस पत्र में इस्तेमाल की गई अंग्रेजी पर खड़े होते हैं। इस पत्र में लिखी गई अंग्रेजी के आधे से ज्यादा वाक्यों का कोई भी अर्थ नहीं निकलता है। ऐसे में, UN से जुड़ी कोई भी संस्था एक खराब अंग्रेजी में लिखे गए पत्र का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करेगी, इस बात पर संदेह होता है। इसके साथ ही यह संस्था खुद को ‘यूनाइटेड नेशन’ से जुड़ा हुआ बताती है, जबकि जिस यूनाइटेड नेशंस की प्रशंसा का कोई व्यक्ति या देश या फिर राज्य इन्तजार कर सकता है वह ‘यूनाइटेड नेशंस’ (United Nations) है, ना कि ‘यूनाइटेड नेशन (United Nation)!’

‘यूनाइटेड नेशन’ से जुड़े इस संस्थान द्वारा बेहद खराब अंग्रेजी में लिखे गए इस पत्र में कई जगहों पर ‘Definitely’ तक की स्पेलिंग को गलत लिखा है और बंगाल को ‘साम्राज्य’ कहकर सम्बोधित किया है।

यह सब संदेहास्पद चीजें देखने के बाद ऑपइंडिया ने इस NGO की पड़ताल करने का निश्चय किया और हमें ये चीजें मिलीं –

पीटीआई की कॉपी का दावा है कि ममता बनर्जी के ‘साम्राज्य’ की प्रशंसा करने वाला यह ‘एनजीओ’ एक गैर-लाभकारी संगठन (नॉन प्रोफिटेबल आर्गेनाइजेशन) है, जो संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के नागरिक विभाग के साथ पंजीकृत है।

पत्र में हमारी नज़र में आने वाली कुछ मुख्य बातें थीं। सबसे पहले, संयुक्त राष्ट्र के प्रतीक चिह्न (लोगो) के साथ इस विशेष संगठन के चिह्न की समानता थी। संयुक्त राष्ट्र के लोगो से अलग इस संस्था के लोगो, यानी प्रतीक चिह्न पर एक पक्षी को ही अलग से जोड़कर यूएनडब्ल्यूपीए का लोगो बनाया गया लगता है।

संयुक्त राष्ट्र लोगो (बाएँ), UNWPA लोगो (दाएँ)

इस चिह्न को देखने पर यह पहली ही नजर में फर्जी मालूम होता है, लेकिन हैरानी की बात है कि एक राज्य सरकार इस बात को समझ पाने में नाकाम रही और आसानी से बेवकूफ बना दी गई। दूसरा, इसमें ‘यूनाइटेड नेशन’ का तो जिक्र है, लेकिन ‘यूनाइटेड नेशंस’ का नहीं। नाम के साथ की गई यह बहुत छोटी सी भूल अक्सर लोगों द्वारा अनदेखी कर दी जाती है, खासकर तब जब यह उनकी तारीफ़ में कुछ संदेश दे रहा हो।

इस NGO की वेबसाइट पर भी कोई लिंक, रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ ही UN से इसकी वैधता सम्बन्धी किसी भी प्रकार का कोई दस्तावेज मौजूद नहीं है। और ‘यूनाइटेड नेशन’ क्या बला है, इस बारे में शायद ही किसी को कोई जानकारी होगी।

इसके अलावा इस संस्था की वेबसाइट पर इसके सोशल मीडिया एकाउंट्स की आधे से ज्यादा लिंक काम नहीं कर रही हैं या फिर वो अकाउंट मौजूद ही नहीं हैं।

ट्विटर अकाउंट उपलब्ध नहीं है

दूसरा यह कि ‘यूनाइटेड नेशन से जुड़ी संस्था का ट्विटर अकाउंट @UnitedNationWo1 नहीं हो सकता। TMC और अन्य ने @Unwpa_wpa ट्विटर अकाउंट को टैग किया था, जिसके 13 फॉलोवर्स हैं।

13 फॉलोवर्स

इस संगठन के ट्विटर हैंडल को फिलीपींस में किसी व्यक्ति के द्वारा इस्तेमाल किया गया लगता है, क्योंकि हैंडल के कुछ ट्वीट्स निजी तौर पर फिलीपींस में एयरलाइंस और ब्रॉडबैंड सर्विस को लेकर किए गए थे। इसमें शिकायत की गई हैं कि उसका इन्टरनेट काम नहीं कर रहा है और सर्विस नम्बर पर उन्हें कोई जवाब नहीं मिल रहा है, जबकि उन्हें कुछ ‘जरूरी’ काम करना था। हो सकता है कि यह जरूरी काम TMC के किसी मंत्री को गंदी अंग्रेजी में प्रशंसा-पत्र भेजना रहा हो।

इस संगठन के फेसबुक पेज का यूआरएल लिंक भी कुछ और ही नजर आता है और इस पेज के 700 से भी कम फॉलोवर्स हैं (फेसबुक URL – unitednationsworldpeaceassociation.jp)

यही नहीं, इस फेसबुक पेज पर मौजूद लिंक एक और ही वेबसाइट पर ले जाती है, जिस पर सब कुछ जापानी में लिखा गया है।

इस UN-बेस्ड NGO का एक फेसबुक अकाउंट भी है, जिसे आप फ्रेंड रिक्वेस्ट भी भेज सकते हैं और ये बाकी फेसबुक पेजों को भी ‘लाइक’ कर सकता है।

‘भारतीय राजदूत’ एचई पिंकी दत्ता

पश्चिम बंगाल सरकार को पत्र में उल्लिखित वेबसाइट पर, एक भाग है, जिसमें वे विभिन्न देशों में अपने ‘राजदूतों’ का उल्लेख करते हैं। भारत की राजदूत एक महामहिम पिंकी दत्ता है। जब हमने पिंकी दत्ता की जानकारी जुटानी चाही तो उसके फेसबुक प्रोफाइल का नाम ‘प्रिया दत्त’ निकल आया।

प्रिया दत्त उर्फ़ पिंकी दत्त ने खुद को यहाँ फ्रीलांस पत्रकार के साथ ही कई और चीजें लिखी हैं।

प्रिया दत्त केंद्र सरकार की एक कट्टर आलोचक हैं और हाल ही में उन्होंने अयोध्या भूमिपूजन पर भी जहर उगला है। इसके अलावा प्रिया दत्त का मानना है कि भाजपा भारत की स्वतन्त्रता के खिलाफ थी। यही नहीं, जब हाल ही में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे तो प्रिया दत्त ने इसे ‘राम लीला’ बताया है।

राम मंदिर पर विचार
आजादी की लड़ाई में ‘भाजपा के योगदान’पर विचार
अमित शाह पर उगला गया ‘जहर ‘

इस साल ही मई माह में प्रिया दत्त ने एक टीएमसी इवेंट में अपनी बात रखी थी। इस पोस्टर पर लिखा है “लोकप्रिय मानवाधिकार कार्यकर्ता प्रिया दत्ता 9 मई को 11 बजे लाइव रहेंगी।” ये वही प्रिया दत्त हैं, जो इस ‘यूनाइटेड नेशन’ की राजदूत हैं, जिसने ममता बनर्जी के ‘साम्राज्य’ को कोरोना महामारी में बेहतर प्रबंधन के लिए सम्मानित किया है।

क्या ममता बनर्जी सरकार को किसी ‘UN से जुडी संस्था’ द्वारा प्रशंसा-पत्र भेजा गया?

तो क्या यूनाइटेड नेशन ने वास्तव में ममता बनर्जी सरकार को पत्र लिखकर उन्हें सम्मानित किया? जब ऑपइंडिया ने इन सम्बन्ध में UNWPA से सम्पर्क कर पूछा तो उन्होंने बताया कि मीडिया में चलाई जा रही इस इस प्रकार की बातें एकदम फर्जी हैं और ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया गया है।

UNWPA द्वारा पहले मेल में इन दावों को ठुकराया गया

दो घंटे बाद, संगठन ने फिर से जवाब दिया। इस बार यह दावा करते हुए लिखा कि हालाँकि, उन्होंने (जापान कार्यालय) पत्र नहीं लिखा था, लेकिन सम्भवतः भारत स्थित कार्यालय, जो कि एचई पिंकी दत्ता उर्फ ​​प्रिया दत्ता द्वारा चलाया जाता है, उसने जारी किया हो।

UNWPA द्वारा भेजी गई दूसरी मेंल जिसमें उन्होंने समर्थन किया है

निष्कर्ष निकलता है कि हाँ, ममता बनर्जी के ‘साम्राज्य’ को कोरोना वायरस महामारी में अच्छे काम के लिए ‘प्रमाण-पत्र’ मिला। हालाँकि, यह पत्र जापान के संगठन द्वारा नहीं, बल्कि इसके भारत के प्रतिनिधि यानी, महामहिम पिंकी दत्ता उर्फ ​​प्रिया दत्ता, जो मोदी विरोधी और ममता बनर्जी की बड़ी समर्थक हैं, द्वारा बेहद खराब भाषा में लिखा गया था। इसके अलावा, यह संगठन संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़ा नहीं है, लेकिन उसके जैसा प्रतीत जरूर होता है।

नोट : निरवा और अनुराग द्वारा मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया यह लेख आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं

68 वर्षीय ब्रिटिश मिशनरी नाबालिग के यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार: फेथ आउटरीच ओडिशा के बच्चों को कराया ईसाई धर्म कबूल

ओडिशा के झारसुगुडा ज़िले में इंग्लैंड का 68 वर्षीय मिशनरी शेल्टर होम और आवासीय विद्यालय चलाता है। उस व्यक्ति पर एक बच्चे के यौन शोषण का आरोप लगा था। जिसके संबंध में पुलिस ने बुधवार (19 अगस्त 2020) को उसे गिरफ्तार कर लिया। जिस बच्चे के साथ यह घटना हुई है वह शेल्टर होम का ही रहने वाला है।   

फेथ आउटरीच ओडिशा संस्थापक जॉन पैट्रिक ब्रिज ने जमानत के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। जिसे अदालत ने बुधवार को ठुकरा दिया और आरोपित जॉन पैट्रिक को जेल भेज दिया गया है। उस पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण संबंधी अधिनियम (POSCO Act) और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।    

स्थानीय समाचार समूहों संवाद और प्रगतिवादी ने इस मुद्दे पर विस्तार से ख़बर प्रकाशित की है। इस घटना की शिकायत एक ऐसे युवक ने की थी जो फेथ आउटरीच संस्था संचालित एक शेल्टर होम में रहता था। वह साल 2015 तक इस शेल्टर होम में रहता था और तब वह नाबालिक था। जॉन पैट्रिक ने इस संस्था का गठन लगभग 25 साल पहले किया था। प्रगतिवादी में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ जॉन पर पहले भी इस तरह के गंभीर आरोप लग चुके हैं।   

जॉन पैट्रिक और उसकी पत्नी
साभार – फेथ आउटरीच उड़ीसा

इसके पहले उस पर एक न्यूज़ीलैंड के नागरिक ने इस तरह के ही आरोप लगाए थे। और तो और यह आरोप न्यूज़ीलैंड दूतावास से लगाए गए थे। जॉन इंग्लैंड में पैदा हुआ था और साल 1977 में भारत आया। इस दौरान उसने अपनी तमिल पत्नी के साथ मिल कर सामाजिक समूह फेथ आउटरीच, उड़ीसा शुरू किया। शुरुआत में केवल 4 बच्चे ही इस अनाथालय में रहते थे लेकिन अब यह एक बड़ा संगठन बन चुका है। फिलहाल इसमें लगभग 800 से ज़्यादा बच्चे रहते हैं। इसके अलावा कुल 4 डे केयर सेंटर भी चलते हैं जिसमें लगभग 250 बच्चे रहते हैं। इसमें से अधिकांश बच्चे गरीब और वंचित घर परिवारों से आते हैं।    

जॉन के शेल्टर होम में हर उम्र के बच्चे रहते हैं और अलग-अलग क्षेत्रों के बच्चे भी मौजूद हैं। उसने अपनी पत्नी के साथ मिल कर काफी संख्या में बच्चों को ईसाई धर्म कबूल कराया है। उसके शेल्टर होम और डे केयर सेंटर में रहने वाले ज़्यादातर बच्चे गरीब अनुसूचित जाति और जनजाति परिवारों से आते हैं। उसे साल 1992 में भारत की नागरिकता मिली थी। फ़िलहाल पुलिस ने इस मामले में जाँच शुरू कर दी है। पुलिस जाँच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।    

धर्म बदल गया तेरी बेटी का… मिलना है तो पूरा परिवार इस्लाम कबूल करो: सिमरन का जबरन धर्म-परिवर्तन, परिवार को धमकी

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं की बच्चियों का अपहरण, उनसे बलात्कार, फिर धर्म परिवर्तन और पुरुषों की हत्याओं का सिलसिला जारी है। शर्मनाक ये है कि प्रशासन से लेकर वहाँ की न्याय व्यवस्था भी इस्लामिक कट्टरपंथियों के ही कृत्यों का समर्थन कर रही है।

सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने आज सुबह एक वीडियो साझा की। उनके मुताबिक यह वीडियो सिमरन नाम की लड़की के परिवार की है। इसमें देखा जा सकता है कि परिवार अपनी बच्ची सिमरन के लिए बिलख-बिलख कर रो रहा है।

सिमरन का कुछ समय पहले घोटकी-सिंध के मीरपुर इलाके से कट्टरपंथियों ने अपहरण किया था। फिर बलात्कार कर उसे इस्लाम कबूल करवा दिया गया। परिवार ने इंसाफ के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई। लेकिन कोर्ट ने उसे यह कहकर खारिज कर दिया कि एक इस्लाम मानने वाले का गैर-इस्लामी परिवार से कोई संबंध नहीं होता। अगर उन्हें उनसे मिलना है तो उन्हें भी इस्लाम कबूल करना होगा।

साभार-Voice of Pakistan Minority का ट्विटर

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आवाज उठाने वाले वॉयस ऑफ पाकिस्तान मायनॉरिटी नाम के ट्विटर हैंडल पर भी सिमरन के परिवार की यह वीडियो डाली गई है। ट्वीट में दावा किया गया है कि इसके पीछे भी हिंदू लड़कियों का धर्मांतरण करवाने वाले कुख्यात मियाँ मिट्ठू का ही हाथ है।

राहत ऑस्टिन का सिमरन मामले में कहना है कि कोर्ट ने यह फैसला लिखित में नहीं दिया। जब परिवार को यह बात बोली गई तब लड़की कठघरे में न्यायाधीश के सामने थी। लेकिन माँ और हिंदू परिजनों को उससे मिलने नहीं दिया गया। जज ने धर्म परिवर्तन की बात भी तब बोली जब उन्होंने अपनी बेटी से मिलने का अनुरोध किया।

जगजीत कौर को लाहौर की कोर्ट ने भेजा मोहम्मद हसन के पास

यह अकेला मामला नहीं है जो पाकिस्तान के प्रशासन और उनकी न्याय व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है। कुछ समय पहले पाकिस्तान के ननकाना साहिब गुरुद्वारे के ग्रंथी की बेटी जगजीत कौर के अपहरण का मामला सामने आया था। जगजीत का अपहरण मोहम्मद हसन ने किया था। इसके बाद जगजीत के परिवार ने उसपर कई आरोप लगाए।

जगजीत के परिवार का कहना था कि हसन ने उनकी बेटी का धर्म परिवर्तन करवाकर उसका नाम आयशा कर दिया। जब इस मामले ने हर जगह तूल पकड़ा तो दिखाने के लिए वहाँ इस पर कार्रवाई शुरू हुई।

जगजीत कौर के परिवार ने मोहम्मद हसन नाम के लड़के पर उनकी बेटी का जबरन अपहरण करने, शादी करने और धर्म परिवर्तन करने का आरोप लगाया था।
मोहम्मद हसन के साथ जगजीत (साभार: दैनिक भास्कर)

हसन को गिरफ्तार किया गया। जगजीत को शेल्टर होम भेजा गया। लेकिन अब हाल ही में ये खबर सामने आई कि लाहौर हाईकोर्ट ने उसे हसन के पास ही दोबारा भेज दिया है। अब वह हसन के साथ ही दोबारा रहेगी।

नाबालिग ईसाई लड़की की कस्टडी भी अपहरण करने वाले को दी गई

सिमरन और जगजीत के बाद एक और केस पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था की सच्चाई खोलता है। ये केस 14 साल की ईसाई लड़की मायरा का है। फैसलाबाद की रहने वाली मायरा से निघत शहबाज ने पिछले साल अप्रैल में अगवा कर निकाह किया।

14 साल की मायरा

परिवार के विरोध पर यह पूरा मामला कोर्ट में पहुँचा तो कोर्ट ने लड़की के साथ हुई ज्यादतियों को तो नजरअंदाज किया ही, साथ ही उसकी उम्र को भी नहीं देखा। अंत में उसकी कस्टडी उसी व्यक्ति को दे दी गई जिसने उसका अपहरण किया था। इस केस में भी बच्ची कुछ समय के लिए शेल्टर होम में रखी गई थी।

सालाना 1000 गैर-इस्लामी लड़कियों से कबूल करवाया जाता है इस्लाम

बता दें, पाक में इतनी तेजी से लड़कियों के धर्मांतरण की खबरें सिर्फ़ मीडिया में आने वाली खबरों से नहीं पता चलतीं। वहाँ की मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट भी बताती है कि सालाना पाकिस्तान में कम से कम 1000 गैर इस्लामी लड़कियों से जबरन इस्लाम कबूल करवाया जाता है। इनमें से अधिकांश सिंध में रहने वाली हिंदू समुदाय की होती हैं।

सैकड़ों अपहरण और जबरन धर्मपरिवर्तन के मामले आने के बाद भी पाकिस्तान सरकार का इन मामलों पर कोई एक्शन नहीं है। साल 2016 और 2019 में एक विधेयक लाने की बात जरूर सामने आई थी।

सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा- सुशांत की हत्या के पीछे दुबई में बैठे ‘प्रोफेशनल किलर्स’ का हाथ, CBI ने गठित की तीन टीमें

बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के पीछे दुबई में बैठे ‘मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े लोगों’ (money launderers) और ‘पेशेवर हत्यारों’ (professional killers’) का हाथ बताया है।

टाइम्स नाउ के साथ हुए एक इंटरव्यू के दौरान स्वामी ने आरोप लगाया कि दुनिया भर में परफेक्ट क्राइम जैसा कुछ भी नहीं है। सुशांत के मामले में भी ‘मूर्खतापूर्ण कदम’ उठाए गए हैं जैसे दरवाजा नहीं तोड़ा गया और भी ऐसी कई लापरवाही की गई हैं।

वहीं स्वामी द्वारा लगाए गए आरोपों पर भाजपा विधायक राम कदम ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में अब कई नए एंगल सामने आ रहे हैं। कदम ने टाइम्स नाउ को बताया, “मुझे यकीन है कि ईडी और सीबीआई उन सभी एंगल को मद्देनजर रखते हुए सही से जाँच करेंगे।”

स्वामी का यह दावा सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुशांत सिंह राजपूत के मामले में सीबीआई जाँच के निर्देश दिए जाने के बाद सामने आया है।

सुब्रमण्यम स्वामी के अलावा सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में रॉ के एक पूर्व अधिकारी एनके सूद ने भी सनसनीखेज दावा करते हुए इसमें अंडवर्ल्‍ड की भूमिका की बात कही है। सूद के मुताबिक, सुशांत की मौत का कनेक्‍शन अंडरवर्ल्‍ड से है। ये अंडरवर्ल्ड के क्रिमिनल बड़ी सफाई से अपना काम करते हैं और इसकी पूरी कोशिश करते हैं कि उनकी तरफ किसी का ध्‍यान न जाए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस बात की भी जानकारी सामने आई है कि सुशांत सिंह के मौत के मामले में सीबीआई की टीम को तीन हिस्सों में बाँटा गया है। हर टीम में तीन सदस्य होंगे।

पहली टीम को इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज जैसे- केस डायरी, क्राइम सीन के फोटोग्राफ, ऑटॉप्सी रिपोर्ट, मुंबई पुलिस की फोरेंसिक रिपोर्ट, पीएम रिपोर्ट और दर्ज किए गए गवाहों के बयान की कॉपी को जमा करने की जिम्मेदारी दी गई है।

दूसरी टीम रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार से जुड़े लोग, सुशांत के पूर्व मैनेजर, उनके घर पर काम करने वाले लोगों से पूछताछ करेगी। उस दिन मौका-ए-वारदात पर मौजूद सभी लोगों के बयान नए सिरे से दर्ज किए जाएँगे।

तीसरी टीम इस मामले में प्रोफेशनल रंजिश, दुबई माफिया कनेक्शन, बॉलीवुड के नामचीन लोगों से पूछताछ करेगी। सीन ऑफ क्राइम को रीक्रिएट करने का जिम्मा भी इसी टीम को दिया गया है।

गौरतलब है कि 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत मुंबई के अपने फ्लैट में मृत पाए गए थे। शुरूआती जाँच में मुंबई पुलिस ने आत्महत्या का दावा किया था। जिसे अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई को सौंप दिया गया है।

XXX सीरीज में फँसीं एकता कपूर: नग्नता, अश्लीलता और राष्ट्रीय प्रतीकों के अनुचित उपयोग के खिलाफ कोर्ट गए सिंगर

बालाजी टेलीफिल्म्स, एकता कपूर और ऑल्ट बालाजी एंटरटेनमेंट के खिलाफ चंडीगढ़ जिला न्यायालय में एक सिविल सूट दायर किया गया है। कोर्ट से ऑल्ट बालाजी एंटरटेनमेंट कंपनी और चैनल पर किसी भी टीवी धारावाहिक या वेब सीरीज को बनाने या उसके प्रसारण पर प्रतिबंध लगाने की माँग की गई है।

चंडीगढ़ स्थित पब्लिक जागृति मिशन ने यह सिविल सूट दायर किया है। इनके अनुसार ऑल्ट बालाजी एंटरटेनमेंट नग्नता के साथ-साथ अश्लीलता फैला रही है। इसके अलावा कंपनी राष्ट्रीय प्रतीक के चिन्हों का अनुचित उपयोग भी कर रही है। इस मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।

पब्लिक जागृति मिशन के अध्यक्ष बलजीत सिंह (जो खुद एक गायक हैं) के हवाले से याचिकाकर्ता ने कहा है, “ऑल्ट बालाजी ने एक्सएक्सएक्स सीजन -2 (XXX Season-2) नाम से एक वेब सीरीज शुरू की है। इसमें सेना के जवानों को बहुत गलत तरीके से दिखाया गया है।”

इस मामले के वकील प्रकाश दीप कौर ने बताया कि उनके मुवक्किल बलजीत सिंह ने एकता कपूर, उनके पिता जितेन्द्र कपूर और माँ शोभा कपूर के खिलाफ शिकायत दी है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि एकता कपूर को बालाजी प्रोडक्शन का नाम बदल लेना चाहिए। इसके पीछे तर्क दिया गया कि बालाजी का मतलब हनुमान जी है और इस नाम के बैनर तले अश्लीलता फैलाना समाज के खिलाफ है।

इसके पहले हिंदुस्तानी भाऊ ने आरोप लगाया था कि एकता कपूर ने अपनी एक वेब सीरीज में देश के जवान और उसकी वर्दी का मजाक बनाया है। इसके खिलाफ उन्होंने शिकायत भी दर्ज करवाई थी। तब सोशल मीडिया पर हिंदुस्तानी भाऊ का वीडियो वायरल भी हुआ था।